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अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच पर आज दिनांक 31/8 /2022 को ****गणेश चतुर्थी के उपलक्ष में रचनाकारों के भावपूर्ण जी व रचनाएं पढ़ें***************** डॉ अलका पांडे मुंबई


श्री गणेशाय नम:🕉🙏

      *जय माता दी* 

*गणेश चतुर्थी विशेष 2022* 
*शुभ मुहूर्त और पूजन विधि..* 

हर साल पूरे देश में गणेश उत्सव बड़े उत्साह के साथ मनाया जाता है 10 दिनों तक विशेष रूप से बप्पा की पूजा की जाती है..

इस साल गणेश चतुर्थी उत्सव 31 अगस्त से शुरू होगा आइए जानते हैं प्रिय बप्पा की स्थापना का शुभ मुहूर्त..
हिन्दू पंचांग के अनुसार प्रत्येक माह में दो चतुर्थी तिथियां आती हैं, लेकिन भाद्रपद माह में शुक्ल पक्ष की चतुर्थी विशेष मानी जाती है इसी तिथि को भगवान गणेश का जन्म हुआ था इसलिए वह सभी चतुर्थियों में सबसे प्रमुख हैं
भाद्रपद मास की चतुर्थी तिथि को शुभ अवसर पर घर में गणपति की स्थापना की जाती है 
घर में भगवान गणेश को स्थापित करके भगवान गणेश की पूजा करने से घर में सुख, समृद्धि, शांति और बाधाओं का निवारण होता है.

 *तिथि,शुभ समय और योग:-* 
हिन्दू पंचांग के अनुसार भाद्रपद शुक्ल पक्ष की चतुर्थी तिथि 30 अगस्त 2022 को दोपहर 03:34 बजे से प्रारंभ होगी फिर यह चतुर्थी तिथि 31 अगस्त को दोपहर 3.23 बजे समाप्त होगी.
पद्म पुराण के अनुसार भगवान गणेश का जन्म स्वाति नक्षत्र में दोपहर के समय हुआ था इसलिए इस समय गणेश जी की स्थापना और पूजा अधिक शुभ और लाभकारी होगी.

 *गणेश चतुर्थी का शुभ योग:-* 
इस वर्ष गणेशोत्सव शुभ योग के साथ मनाया जाएगा बुधवार 31 अगस्त से गणेशोत्सव की शुरुआत हो रही है शास्त्रों में बुधवार का दिन भगवान गणेश को समर्पित है.
बुधवार के दिन भगवान गणेश की पूजा करने से सभी प्रकार के सुख मिलते हैं और जीवन में आने वाली बाधाएं तुरंत दूर हो जाती हैं.
इसके अलावा, गणेश चतुर्थी भी रवि योग के योग के साथ मेल खाता है.
रवियोग में किया गया उपासना हमेशा फायदेमंद होता है इस दिन रवि योग 31 अगस्त को सुबह 06.23 बजे से 01 सितंबर को दोपहर 12.12 बजे तक रहेगा.
वहीं ग्रहों के योग की बात करें तो गणेश चतुर्थी के दिन चारों प्रमुख ग्रह अपनी-अपनी राशि में होंगे. गुरु अपनी मीन राशि में, शनि मकर राशि में, बुध अपनी राशि कन्या राशि में और सूर्य देव स्वरा सिंह राशि में मौजूद रहेंगे इस कारण गणेश को शुभ युति में रखने से जीवन में धन, समृद्धि और खुशियां आती हैं.

*गणेश उत्सव 31 अगस्त 2022 से शुरु हो रहा है* 

*गणेश पूजा मुहूर्त* - सुबह 11 बजकर 24 मिनट से दोपबर 01 बजकर 54 मिनट पर.

*गणेश विसर्जन तिथि*- 9 सितंबर 2022 को  अनंत चतुदर्शी के दिन

 *गणेश चतुर्थी के दिन बन रहे हैं ये शुभ योग* 
*रवि योग*- सुबह 06 बजकर 23 मिनट से 01 सितंबर को सुबह 12 बजकर 12 मिनट तक

*विजय मुहूर्त*-     रात 02 बजकर 44 मिनट से रात 03 बजकर 34 मिनट तक

*निशिता मुहूर्त-*    सितम्बर 01 को सुबह 12 बजकर 16 मिनट से सितम्बर 01 को सुबह 01 बजकर 02 मिनट तक.
*गणेश चतुर्थी 2022 गणपति बप्पा की स्थापना का मंत्र* 
गणपति बप्पा की मूर्ति स्थापित करते समय इस मंत्र का करें जाप.
*अस्य प्राण प्रतिषठन्तु अस्य प्राणा: क्षरंतु च. श्री गणपते त्वम सुप्रतिष्ठ वरदे भवेताम..*
*गणेशपूजने कर्म यत् न्यूनमधिकम कृतम*  
*तेन सर्वेण सर्वात्मा प्रसन्न अस्तु गणपति सदा मम...*

*गणेश चतुर्थी के दिन बप्पा को अर्पित करें ये चीजें* 
दुर्वा घास- भगवान गणेश को दूब घास अर्पित करना काफी शुभ माना जाता है. इस दिन दूब घास को गंगाजल से साफ करके इसकी माला बना लीजिए और भगवान गणेश को अर्पित करें. 
मोदक- गणेश जी को मोदक बहुत प्रिय हैं ऐसे में आप जितने दिन भी गणेश जी को अपने घर में रख रहे हैं प्रत्येक दिन उन्हें मोदक का भोग जरूर लगाएं.
केले- भगवान गणेश को केले भी काफी पसंद हैं ऐसे में भगवान गणेश को लगने वाले भोग में केले को जरूर शामिल करें. 
सिंदूर- गणेश जी को सिंदूर अर्पित किया जाता है. सिंदूर को मंगल का प्रतीक माना जाता है. ऐसे में इस दौरान रोजाना भगवान गणेश को सिंदूर का तिलक जरूर लगाएं.
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 *कैसी होनी चाहिए गणपति की मूर्ति?* 
मंडल जैसे सार्वजनिक स्थान पर गणेश जी की स्थापना के लिए मिट्टी से गणेश जी की मूर्ति बनानी चाहिए.
मिट्टी के अलावा आप घर और अपने व्यापारिक प्रतिष्ठानों में सोने, चांदी, क्रिस्टल और अन्य सामग्री से बनी गणपति की मूर्तियों को रख सकते हैं.
जब भी भगवान गणेश की मूर्ति स्थापित करें तो ध्यान रहे कि मूर्ति  खंडित नहीं होना चाहिए.
गणेश जी की मूर्ति के हाथ अंकुश, लड्डू, सोंड, हाथ वरदान देने वाली मुद्रा में हों इसके अलावा उसके शरीर पर धागा और वाहन पर चूहा होना चाहिए.

 *गणेश प्रतिमा स्थापना की विधि* 
गणेश चतुर्थी के दिन सबसे पहले सूर्योदय से पहले उठकर स्नान कर स्वच्छ वस्त्र धारण करना चाहिए.
इसके बाद पूजा का संकल्प लें, गणेश जी का स्मरण करें और मन में अपने कुल देवता का नाम लें इसके बाद पूजा स्थल पर पूर्व दिशा की ओर मुख करके आसन पर बैठना चाहिए.
फिर एक छोटी सी परत पर लाल या सफेद कपड़ा बिछाकर उस पर चंदन, कुमकुम, अक्षत से स्वास्तिक का चिन्ह बना लें..

थाली में स्वस्तिक चिन्ह पर गणेश जी की मूर्ति स्थापित कर पूजा प्रारंभ करें.
पूजा करने से पहले इस मंत्र का जाप करें

गजानन भूतों और अन्य लोगों द्वारा परोसा जाता है और कपिथा और जंबू जैसे सुंदर फल खाते हैं मैं दुखों के नाश करने वाले उमा के पुत्र भगवान विघ्न के चरण कमलों को प्रणाम करता हूं.

 *भगवान गणेश की पूजा करने की विधि* 
सबसे पहले भगवान गणेश का आह्वान करते हुए ॐ गणपतये नमः मंत्र का जाप करते हुए चौकी पर रखी गणेश प्रतिमा पर जल छिड़कें
भगवान गणेश की पूजा में इस्तेमाल होने वाली सभी सामग्री उन्हें एक-एक करके अर्पित करनी चाहिए भगवान गणेश की पूजा में उपयोग की जाने वाली विशेष वस्तुओं में हल्दी, चावल, चंदन, गुलाल, सिंदूर, मूली, दूर्वा, जनेऊ, मिठाई, मोदक, फल, माला और फूल हैं.
इसके बाद भगवान गणेश के साथ भगवान शिव और देवी पार्वती की पूजा करनी चाहिए पूजा में धूप और दीप जलाते समय सभी को आरती करनी चाहिए।

आरती के बाद 21 कलछी चढ़ाएं, जिसमें से 5 कलछी गणपति की मूर्ति के पास रखें और बाकी ब्राह्मणों और आम लोगों को प्रसाद के रूप में बांटें.
अंत में ब्राह्मणों को भोजन कराएं और उन्हें दक्षिणा का आशीर्वाद दें.

 *पूजा के बाद इस मंत्र का जाप करें।* 
हे विघ्नों के स्वामी, वर देने वाले, देवताओं को प्रिय, दीर्घ-पेट, जगत् के हितैषी
हे नाग मुखी भगवान गणेश, गौरी के पुत्र, वेदों के यज्ञ से सुशोभित, मैं आपको नमन करता हूं

 *गणपतिजी की आरती* 
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
एक दंत दयावंत, चार भुजा धारी ।
माथे सिंदूर सोहे, मूसे की सवारी ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
पान चढ़े फल चढ़े और चढ़े मेवा ।
लड्डूओं का भोग लगे, संत करे सेवा

जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
अंधन को आंख देत, कोढ़िन को काया ।
बांझन को पुत्र देत निर्धन को माया ।

जय गणेश जय गणेश,जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा ॥
‘सूर’ श्याम शरण आए,सफल कीजे सेवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥

जय गणेश जय गणेश,जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती, पिता महादेवा ॥
दीनन की लाज रखो,शंभु सुतकारी ।
कामना को पूर्ण करो, जाऊं बलिहारी ॥
जय गणेश जय गणेश, जय गणेश देवा ।
माता जाकी पार्वती,पिता महादेवा 
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*पुण्य लाभ के लिए इस पोस्ट को कृपया औरो  को भी अवश्य भेजिए* 
    
[31/08, 8:48 am] Alka: श्री गणेश चतुर्थी एवं श्रीगणेश महोत्सव  31 अगस्त से 9 सितंबर 2022 विशेष


सभी सनातन धर्मावलंबी प्रति वर्ष गणपति की स्थापना तो करते है लेकिन हममे से बहुत ही कम लोग जानते है कि आखिर हम गणपति क्यों बिठाते हैं ? आइये जानते है।

हमारे धर्म ग्रंथों के अनुसार, महर्षि वेद व्यास ने महाभारत की रचना की है।
लेकिन लिखना उनके वश का नहीं था।
अतः उन्होंने श्री गणेश जी की आराधना की और गणपति जी से महाभारत लिखने की प्रार्थना की।

गणपती जी ने सहमति दी और दिन-रात लेखन कार्य प्रारम्भ हुआ और इस कारण गणेश जी को थकान तो होनी ही थी, लेकिन उन्हें पानी पीना भी वर्जित था। अतः गणपती जी के शरीर का तापमान बढ़े नहीं, इसलिए वेदव्यास ने उनके शरीर पर मिट्टी का लेप किया और भाद्रपद शुक्ल चतुर्थी को गणेश जी की पूजा की। मिट्टी का लेप सूखने पर गणेश जी के शरीर में अकड़न आ गई, इसी कारण गणेश जी का एक नाम पर्थिव गणेश भी पड़ा। महाभारत का लेखन कार्य 10 दिनों तक चला। अनंत चतुर्दशी को लेखन कार्य संपन्न हुआ।

वेदव्यास ने देखा कि, गणपती का शारीरिक तापमान फिर भी बहुत बढ़ा हुआ है और उनके शरीर पर लेप की गई मिट्टी सूखकर झड़ रही है, तो वेदव्यास ने उन्हें पानी में डाल दिया। इन दस दिनों में वेदव्यास ने गणेश जी को खाने के लिए विभिन्न पदार्थ दिए। तभी से गणपती बैठाने की प्रथा चल पड़ी। इन दस दिनों में इसीलिए गणेश जी को पसंद विभिन्न भोजन अर्पित किए जाते हैं।

गणेश चतुर्थी को कुछ स्थानों पर डंडा चौथ के नाम से भी जाना जाता है। मान्यता है कि गुरु शिष्य परंपरा के तहत इसी दिन से विद्याध्ययन का शुभारंभ होता था। इस दिन बच्चे डण्डे बजाकर खेलते भी हैं। गणेश जी को ऋद्धि-सिद्धि व बुद्धि का दाता भी माना जाता है। इसी कारण कुछ क्षेत्रों में इसे डण्डा चौथ भी कहते हैं।

‬पार्थिव श्रीगणेश पूजन का महत्त्व
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अलग अलग कामनाओ की पूर्ति के लिए अलग अलग द्रव्यों से बने हुए गणपति की स्थापना की जाती हैं।

(1) श्री गणेश : मिट्टी के पार्थिव श्री गणेश बनाकर पूजन करने से सर्व कार्य सिद्धि होती हे!                         

(2) हेरम्ब : गुड़ के गणेश जी बनाकर पूजन करने से लक्ष्मी प्राप्ति होती हे। 
                                         
(3) वाक्पति: भोजपत्र पर केसर से पर श्री गणेश प्रतिमा चित्र बनाकर।  पूजन करने से विद्या प्राप्ति होती हे।

 (4) उच्चिष्ठ गणेश: लाख के श्री गणेश बनाकर पूजन करने से स्त्री।  सुख और स्त्री को पतिसुख प्राप्त होता हे घर में ग्रह क्लेश निवारण होता हे। 

(5) कलहप्रिय: नमक की डली या। नमक  के श्री गणेश बनाकर पूजन करने से शत्रुओ में क्षोभ उतपन्न होता हे वह आपस ने ही झगड़ने लगते हे। 

(6) गोबरगणेश:गोबर के श्री गणेश बनाकर पूजन करने से पशुधन में व्रद्धि होती हे और पशुओ की बीमारिया नष्ट होती है (गोबर केवल गौ माता का ही हो)।
                           
(7) श्वेतार्क श्री गणेश: सफेद आक मन्दार की जड़ के श्री गणेश जी बनाकर पूजन करने से भूमि लाभ भवन लाभ होता हे। 
                       
(8) शत्रुंजय: कडूए नीम की की लकड़ी से गणेश जी बनाकर पूजन करने से शत्रुनाश होता हे और युद्ध में विजय होती हे।
                           
(9) हरिद्रा गणेश:हल्दी की जड़ से या आटे में हल्दी मिलाकर श्री गणेश प्रतिमा बनाकर पूजन करने से विवाह में आने वाली हर बाधा नष्ठ होती हे और स्तम्भन होता हे।

(10) सन्तान गणेश: मक्खन के श्री गणेश जी बनाकर पूजन से सन्तान प्राप्ति के योग निर्मित होते हैं।

(11) धान्यगणेश: सप्तधान्य को पीसकर उनके श्रीगणेश जी बनाकर आराधना करने से धान्य व्रद्धि होती हे अन्नपूर्णा माँ प्रसन्न होती हैं।    

(12) महागणेश :लाल चन्दन की लकड़ी से दशभुजा वाले श्री गणेश जी प्रतिमा निर्माण कर के पूजन से राज राजेश्वरी श्री आद्याकालीका की शरणागति प्राप्त होती हैं।

पूजन मुहूर्त
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गणपति स्वयं ही मुहूर्त है। सभी प्रकार के विघ्नहर्ता है इसलिए गणेशोत्सव गणपति स्थापन के दिन दिनभर कभी भी स्थापन कर सकते है। सकाम भाव से पूजा के लिए नियम की आवश्यकता पड़ती है इसमें प्रथम नियम मुहूर्त अनुसार कार्य करना है।

मुहूर्त अनुसार गणेश चतुर्थी के दिन गणपति की पूजा दोपहर के समय करना अधिक शुभ माना जाता है, क्योंकि मान्यता है कि भाद्रपद महीने के शुक्लपक्ष की चतुर्थी को मध्याह्न के समय गणेश जी का जन्म हुआ था। मध्याह्न यानी दिन का दूसरा प्रहर जो कि सूर्योदय के लगभग 3 घंटे बाद शुरू होता है और लगभग दोपहर 12 से 12:30 तक रहता है। गणेश चतुर्थी पर मध्याह्न काल में अभिजित मुहूर्त के संयोग पर गणेश भगवान की मूर्ति की स्थापना करना अत्यंतशुभ माना जाता है। 

गणेश चतुर्थी पूजन 

मध्याह्न गणेश पूजा : दोपहर 11:01 से 01:33 तक। 

चतुर्थी तिथि आरंभ :(30 अगस्त 2022) दिन 03:33 से।

चतुर्थी तिथि समाप्त : 31 अगस्त दिन 03:21 पर।

चंद्रदर्शन से बचने का समय : एक दिन पूर्व 30 अगस्त रात्रि 08:55 से।

वर्जित चन्द्रदर्शन का समय : 31 अगस्त रात्रि 09:23 से 09:05 तक।

पूजा की सामग्री
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गणेश जी की पूजा करने के लिए चौकी या पाटा, जल कलश, लाल कपड़ा, पंचामृत, रोली, मोली, लाल चन्दन, जनेऊ गंगाजल, सिन्दूर चांदी का वर्क लाल फूल या माला इत्र मोदक या लडडू धानी सुपारी लौंग, इलायची नारियल फल दूर्वा, दूब पंचमेवा घी का दीपक धूप, अगरबत्ती और कपूर की आवस्यकता होती है।

सामान्य पूजा विधि
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सकाम पूजा के लिये स्थापना से पहले संकल्प भी अत्यंत जरूरी है। यहाँ हम संक्षिप्त विधि बता रहे है गणेश पूजन की विस्तृत विधि हमारी अगली पोस्ट ने देख सकते है।

संकल्प विधि
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हाथ में पान के पत्ते पर पुष्प, चावल और सिक्का रखकर सभी भगवान को याद करें। अपना नाम, पिता का नाम, पता और गोत्र आदि बोलकर गणपति भगवान को घर पर पधारने का निवेदन करें और उनका सेवाभाव से स्वागत सत्कार करने का संकल्प लें।

भगवान गणेश की पूजा करने लिए सबसे पहले सुबह नहा धोकर शुद्ध लाल रंग के कपड़े पहने। क्योकि गणेश जी को लाल रंग प्रिय है। पूजा करते समय आपका मुंह पूर्व दिशा में या उत्तर दिशा में होना चाहिए। सबसे पहले गणेश जी को पंचामृत से स्नान कराएं। उसके बाद गंगा जल से स्नान कराएं। गणेश जी को चौकी पर लाल कपड़े पर बिठाएं। ऋद्धि-सिद्धि के रूप में दो सुपारी रखें। गणेश जी को सिन्दूर लगाकर चांदी का वर्क लगाएं। लाल चन्दन का टीका लगाएं। अक्षत (चावल) लगाएं। मौली और जनेऊ अर्पित करें। लाल रंग के पुष्प या माला आदि अर्पित करें। इत्र अर्पित करें। दूर्वा अर्पित करें। नारियल चढ़ाएं। पंचमेवा चढ़ाएं। फल अर्पित करें। मोदक और लडडू आदि का भोग लगाएं। लौंग इलायची अर्पित करें। दीपक, अगरबत्ती, धूप आदि जलाएं इससे गणेश जी प्रसन्न होते हैं। गणेश जी की प्रतिमा के सामने प्रतिदिन गणपति अथर्वशीर्ष व संकट नाशन गणेश आदि स्तोत्रों का पाठ करे।

यह मंत्र उच्चारित करें
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ऊँ वक्रतुण्ड़ महाकाय सूर्य कोटि समप्रभः।
निर्विघ्नं कुरू मे देव, सर्व कार्येषु सर्वदा।।

कपूर जलाकर आरती करें
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जय गणेश जय गणेश जय गणेश देवा। माता जाकी पार्वती पिता महादेवा।। जय गणेश जय गणेश…
एक दन्त दयावंत चार भुजाधारी। माथे सिन्दूर सोहे मूष की सवारी।। जय गणेश जय गणेश…
अंधन को आँख देत कोढ़िन को काया। बाँझन को पुत्र देत निर्धन को माया।। जय गणेश जय गणेश…
हार चढ़े फूल चढ़े और चढ़े मेवा। लडूवन का भोग लगे संत करे सेवा।। जय गणेश जय गणेश…
दीनन की लाज राखी शम्भु सुतवारी। कामना को पूरा करो जग बलिहारी।। जय गणेश जय गणेश…

चतुर्थी,चंद्रदर्शन और कलंक पौराणिक मान्यता
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30 तारीख को रात्रि मे चतुर्थी तिथि रहे गी एवं 31तारीख को उदय कालीन चतुर्थी होने के कारण भूलकर भी चंद्र दर्शन न करें वर्ना आपके उपर बड़ा कलंक लग सकता है। इसके पीछे एक पौराणिक कथा का दृष्टांत है।

एक दिन गणपति चूहे की सवारी करते हुए गिर पड़े तो चंद्र ने उन्हें देख लिया और हंसने लगे। चंद्रमा को हंसी उड़ाते देख गणपति को बहुत गुस्सा आया और उन्होंने चंद्र को श्राप दिया कि अब से तुम्हें कोई देखना पसंद नहीं करेगा। जो तुम्हे देखेगा वह कलंकित हो जाएगा। इस श्राप से चंद्र बहुुत दुखी हो गए। तब सभी देवताओं ने गणपति की साथ मिलकर पूजा अर्चना कर उनका आवाह्न किया तो गणपति ने प्रसन्न होकर उनसे वरदान मांगने को कहा। तब देवताओं ने विनती की कि आप गणेश को श्राप मुक्त कर दो। तब गणपति ने कहा कि मैं अपना श्राप तो वापस नहीं ले सकता लेकिन इसमें कुछ बदलाव जरूर कर सकता हूं। भगवान गणेश ने कहा कि चंद्र का ये श्राप सिर्फ एक ही दिन मान्य रहेगा। इसलिए चतुर्थी के दिन यदि अनजाने में चंद्र के दर्शन हो भी जाएं तो इससे बचने के लिए छोटा सा कंकर या पत्थर का टुकड़ा लेकर किसी की छत पर फेंके। ऐसा करने से चंद्र दर्शन से लगने वाले कलंक से बचाव हो सकता है। इसलिए इस चतुर्थी को पत्थर चौथ भी कहते है।

भाद्रपद (भादव ) मास के शुक्लपक्ष की चतुर्थी के चन्द्रमा के दर्शन हो जाने से कलंक लगता है। अर्थात् अपकीर्ति होती है। भगवान् श्रीकृष्ण को सत्राजित् ने स्यमन्तक मणि की चोरी लगायी थी।

स्वयं रुक्मिणीपति ने इसे “मिथ्याभिशाप”-भागवत-१०/५६/३१, कहकर मिथ्या कलंक का ही संकेत दिया है। और देवर्षि नारद भी कहते हैं कि –

आपने भाद्रपद के शुक्लपक्ष की चतुर्थी तिथि के चन्द्रमा का दर्शन किया था जिसके फलस्वरूप आपको व्यर्थ ही कलंक लगा –

त्वया भाद्रपदे शुक्लचतुर्थ्यां चन्द्रदर्शनम् । 
कृतं येनेह भगवन् वृथा शापमवाप्तवान् ।।
–भागवतकी श्रीधरी पर वंशीधरी टीका,स्कन्दपुराण का श्लोक ।

तात्पर्य यह कि भादंव मास की शुक्लचतुर्थी के चन्द्रदर्शन से लगे कलंक का सत्यता से सम्बन्ध हो ही –ऐसा कोई नियम नहीं । किन्तु इसका दर्शन त्याज्य है । तभी तो पूज्यपाद गोस्वामी जी लिखते हैं —

“तजउ चउथि के चंद नाई”-मानस. सुन्दरकाण्ड,३८/६,

स्कन्दमहापुराण में भगवान श्रीकृष्ण ने स्वयं कहा है कि भादव के शुक्लपक्ष के चन्द्र का दर्शन मैंने गोखुर के जल में किया जिसका परिणाम मुझे मणि की चोरी का कलंक लगा। 

मया भाद्रपदे शुक्लचतुर्थ्याम् चन्द्रदर्शनम्।
गोष्पदाम्बुनि वै राजन् कृतं दिवमपश्यता ।।
यदि भादव के शुक्ल पक्ष की चतुर्थी का चंद्रमा दिख जाय तो कलंक से कैसे छूटें ?

1  )यदि उसके पहले द्वितीया का चंद्र्मा आपने देख लिया है तो चतुर्थी का चन्द्र आपका बाल भी बांका नहीं कर सकता।

2) या भागवत की स्यमन्तक मणि की कथा सुन लीजिए ।

3)अथवा निम्नलिखित मन्त्र का 21 बार जप करलें –

सिंहः प्रसेनमवधीत् सिंहो जाम्बवता हतः।
सुकुमारक मा रोदीस्तव ह्येष स्यमन्तकः ।।

4)यदि आप इन उपायों में कोई भी नहीं कर सकते हैं तो एक सरल उपाय बता रहा हूँ उसे सब लोग कर सकते हैं । एक लड्डू किसी भी पड़ोसी के घर पर फेंक दे ।

चंद्र दर्शन से बचने का समय - 09:11 से 20:55 (10 सितंबर 2021)

राशि के अनुसार करें गणेश जी का पूजन

गणेशचतुर्थी के दिन सभी लोग को अपने सामर्थ्य एवं श्रद्धा से गणेश जी की पूजा अर्चना करते है। फिर भी राशि स्वामी के अनुसार यदि विशेष पूजन किया जाए तो विशेष लाभ भी प्राप्त होगा।

 यदि आपकी राशि मेष एवं बृश्चिक हो तो आप अपने राशि स्वामी का ध्यान करते हुए लड्डु का विशेष भोग लगावें आपके सामथ्र्य का विकास हो सकता है।

 आपकी राशि बृष एवं तुला है तो आप भगवान गणेश को लड्डुओं का भोग विशेष रूप से लगावें आपको ऐश्वर्य की प्राप्ति हो सकती है।

मिथुन एवं कन्या राशि वालो को गणेश जी को पान अवश्य अर्पित करना चाहिए इससे आपको विद्या एवं बुद्धि की प्राप्ति होगी।

धनु एवं सिंह राशि वालों को फल का भोग अवश्य लगाना चाहिए ताकि आपको जीवन में सुख, सुविधा एवं आनन्द की प्राप्ति हो सके।

यदि आपकी राशि मकर एवं कुंभ है तो आप सुखे मेवे का भोग लगाये। जिससे आप अपने कर्म के क्षेत्र में तरक्की कर सकें।

 सिंह राशि वालों को केले का विशेष भोग लगाना चाहिए जिससे जीवन में तीव्र गति से आगे बढ़ सकें।

यदि आपकी राशि कर्क है तो आप 
खील एवं धान के लावा और बताशे का भोग लगाए जिससे आपका जीवन सुख-शांति से भरपूर हो

गणेश महोत्सव की तिथियां
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1)गणेश चतुर्थी व्रत- 31 अगस्त बुधवार।

2) ऋषि पंचमी 1 सितम्बर - गुरुवार।

3)मोरछठ-चम्पा सूर्य, बलदेव षष्ठी, 2 सितम्बर - शुक्रवार।

4)3 सितम्बर - शनिवार, मुक्तभरण संतान सप्तमी, श्री महालक्ष्मी व्रत आरम्भ।

5)4 सितम्बर - रविवार, ऋषिदधीचि जन्म, राधाष्टमी, स्वामी हरिदास जयन्ती। 

6) 5 सितम्बर - सोमवार, महालक्ष्मी व्रत पूर्ण, चंद्रनवमी (अदुख) नवमी।

7) 6 सितम्बर - मंगलवार, पद्मा, जलझूलनी एकादशी (स्मार्त), तेजा दशमी, रामदेव जयंती।

8)7 सितम्बर - बुधवार, पद्मा, जलझूलनी एकादशी (वैष्णव, निम्बार्क), श्रीवामान अवतार। 

9) 8 सितम्बर - गुरुवार, प्रदोष व्रत।

10) 9 सितम्बर शुक्रवार - अनन्त चतुर्दशी, सृत्यनारायण व्रत, गणपति विसर्जन।

गणपति की वैदिक मंत्रों से स्थापना एवं पूजन विधि अगले लेख में देखें।


अलका पाण्डेय मुम्बई


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[31/08, 8:23 am] ब्रज किशोरी त्रिपाठी: गउरा के जन्मे हैं लालन,
बधाई हो बधाई हो।
छाई खुशी कैलाश पर,
बधाई हो बधाई हो।
ब्रम्हा वेद पढ़ते आए,
बधाई हो बधाई हो।
ब्रम्हाणी गीत गाती है।
बधाई हो बधाई हो।
नारद वीणा बजाते आए
बधाई हो बधाई हो ।
नाचे कैलाश पर अप्सरा,
बधाई हो बधाई हो।
देवता स्तुति करते हैं,
बधाई हो बधाई हो।
गउरा के जन्मे हैं लालन 
बधाई हो बधाई हो।

स्वरचित
बृज किशोरी त्रिपाठी
[31/08, 9:06 am] Manju Gupta Mumbai: गणेश चतुर्थी पर्व पर प्रभु गणेश की कृपा साधारण से असाधारण पर बरसे।

गणेश वंदना

दया मिले हमें , सदा गणेश की, रमेश की ,दिवेश की, 
प्रजेश की , दशेश की।
मिले दुआ कृपा , अखंड ईश की,सुरेश की , दिनेश की, उमेश की , महेश की।।
 करूँ उपासना , अशेष देव की , नदीश की , गिरीश की , हिमेश की , निशेश की।
सदा उतारती , नवैद्य आरती , उमा शिवा , सुहासिनी , विभूति की , उषेश की।

डॉ मंजु गुप्ता
वाशी , नवी मुंबई
[31/08, 9:11 am] रामेश्वर गुप्ता के के: ।समय की गति।
समय की गति,
कोई नहीं जानता है।
इन्तजार करने वाले को,
यह बड़ी लगती है।।
समय.................1
खुशी के वक्त, 
छोटी हो जाती है।
बस इधर से आई,
कहां चली जाती है।।
समय.................2
इंतजार की रात,
बड़ी हो जाती है।
करवट बदलते बस,
मुश्किल से बीतती है।।
समय..................3
खुशियों की सुबह,
बहुत कम आती है।
पूर्णिमा की चांदनी,
माह में एक दिन होती है।।
समय...................4
स्वरचित,
रामेश्वर प्रसाद गुप्ता।
[31/08, 10:50 am] रामेश्वर गुप्ता के के: ।गणपति जी। 
गणपतिजी हमारे बप्पा,
उनकी जग में है कीर्ति। 
गणेश चतुर्थी आ गई, 
घर में उनकी मंगल मूर्ति।। 
गणपति जी.............. 1 
विध्न हरण दुख के हर्ता, 
पूजा उनकी सब कोई करता। 
सब को सुख वह देने वाले, 
प्रेम की मूर्ति रक्षा के दाता।। 
गणपति..................... 2
गणेश जी शान्ति देने वाले, 
लम्बोदर वह बुद्धि के दाता। 
प्रेम और भक्ति को देने वाले, 
ममता मूर्ति सुख के है दाता।। 
गणपति.......................3
लड्डू का भोग उन्हें लगता, 
सिद्ध विनायक दुख: के हर्ता। 
जो कोई उनको प्रेम से ध्यावै, 
सुख शांति रहे, सब सुख पावै।। 
गणपति........................4
स्वरचित, 
रामेश्वर प्रसाद गुप्ता ।
[31/08, 10:55 am] विजेन्द्र मोहन बोकारो: मंच को नमन
*माँ शारदे को नमन*
विधा:-- *कविता*
शीर्षक:-- *गणपति बप्पा मोरया!!*

विध्न हरण मंगल करण, गणपति जी महाराज। 
वापस लौट कर आना सबके हो तुम प्यारे देवता।।

तुम्हारे आने से दस दिन चलता है मेला।
गीत, संगीत और संस्कृति का हर ओर है रेला।।

बनते हैं रंग-बिरंगे पंडाल हर जगह।
जहां खुशी खुशी भक्तों आकर करते है पूजा अर्चना।।

सभी लोग तैयारियों में जुट जाते हैं।
सारे भेद-भाव भूलकर एक जूट हो जाते हैं।।

रोज़ उनके पूजा- अर्चना, आरती के समय एकत्रित होते हैं।
लड्डू नारियल और मोदक का भोग लगाते हैं।।

 घर में कोई कार्य शुभारम से पहले प्रथम पूज्य गणपति बाप्पा से करते हैं।
सारे दुख निवारण हो जाते सुख का होता है आरंभ।।

जब उनके विदाई का समय आता है।
सबका मन भर जाता है।।

फिर भी नाचते गाते उन्हें करते विदा, करते हैं आराधना।
अगले बर्ष फिर आना रिद्धि सिद्धि संग गजानन जी महाराज।।

*सबके दिल से एक स्वर ही गूंजता है।*
 *आना, "गणपति बप्पा मोरया मंगल मूर्ति मोरया"।।*

स्वरचित रचना
विजयेन्द्र मोहन।
[31/08, 12:06 pm] आशा 🌺नायडू बोरीबली: (भक्ति गीत)
      ***************
       🌹गणेश स्तुति🌹
      **************** 

हे, गणनाथाय नमोस्तुते।

गजाननाय ,लंबोदराय , हे गणनाथाय नमोस्तुते ।।       

एकदंताय, महाकालाय,। हे गणनाथय नमोस्तुते।। 

विघ्नविनाशाय, जगतसिध्दाय हे गणनाथाय नमोस्तुते।। 

उमासुताय शोकविनाशकाय ,
हे, गणनाथाय नमोस्तुते।।
 
 गणाध्यक्षाय, सूपकर्णाय,
 हे ,गणनाथाय नमोस्तुते। 

गणनायकाय , संकटमोचनाय,
हे, गणनाथाय नमोस्तुते।।

अष्टविनायकाय, विशालकाय,
हे, गणनाथाय नमोस्तुते।।

सुखदाताय, गजनाथाय,
हे, गणनाथाय नमोस्तुते।।

हे गणनाथाय नमोस्तुते, नमोस्तुते, नमोस्तुते।।
********************स्वरचित रचना.
डॉ . आशालता नायडू .
मुंबई . महाराष्ट्र .
********************
[31/08, 12:15 pm] कुंवर वीर सिंह मार्तंड कोलकाता: गणेश पूजा के पावन पर्व पर ---

जय गणेश ...
..............................................
जय गणेश जय मूषक वाहन
तेरा आज करूं आवाहन।
जय गणेश ……

जय गण नायक, जय जग वंदन,
शंकर सुत, गिरिजा के नंदन।
सिद्धि प्रदाता, आप विनायक,
संकट के क्षण, सदा सहायक।
एक दंत, गज वदन, गजानन
जय गणेश, ………

जय मोदक प्रिय, जय लंबोदर,
बुद्धि प्रदाता, देव कृपा कर।
आशुलिपिक तुम,लेखक नामी,
लिखा महाभारत, भरि हामी।
तुझसे शुरू हुई रामायण।
जय गणेश ……….

सबसे प्रथम तुम्हारी पूजा,
उसके बाद देवता दूजा।
जब भी काम शुरू हैं करते 
श्री गणेश उसे हम कहते। 
इति श्री तो है काम समापन
जय गणेश ………

जो लड़के बुद्धू होते हैं 
गोबर गणेश उन्हें कहते हैं।
अगर हमें है आगे बढ़ना
कभी न भूलो गणपति कहना।
सभी रसों के आप रसायन।
जय गणेश …………

डॉ. कुँवर वीर सिंह मार्तण्ड, कोलकाता
[31/08, 12:39 pm] वैष्णवी Khatri वेदिका: गणपत स्तवन
गणपति प्यारे शंकर के नयनों के तारे।
मेरे घर आ जा यह हृदय तुम्हें पुकारे।
हे विघ्न विनाशक देवा करूँ तेरी सेवा।
बाजे सुर-ताल हम सब हैं तुझे पुकारे।

आकर्षक काया तेरी सुख व शांति लाए।
किरणों जैसी आभा तेरी उजाला लाए।
सबसे पहले पूजा तेरी करते हम सब।
तेरा आशीर्वाद मन-माँगी मुरादें लाए।

मन्दिर में धूप व दीपों की ज्योति जलाएँ।
अपने हृदय के मंदिर में झांकी सजाएँ।
रक्षाकवच वरदान पाकर हम न अघाते।
भोले भंडारी के सुत को मन में बिठाएँ।

वैष्णो खत्री वेदिका
जबलपुर
[31/08, 2:55 pm] 💃💃sunitaअग्रवाल: गणेशजी का भक्ती गीत


है गजानन, है गणनायक प्रथम मनावाजी__२

है लंबोदर देवा, सबसे पहले करे तेरी सेवा जी,
धूप दीप की ज्योत जलाए, मन मंदिर में बिठाए जी, 
रिद्धि सिद्धि लेकर आओ जी, संग लाभ शुभ को लाना जी ,
थारा चरणा में धोक लगावाजी, है गजानन, है जननायक थारा कू प्रथम मनावाजी__२
अन्न धन से भर दीजो भंडारों जी, 
मन के क्लेश विकार मिटा दिजो जी, 
हे सूंड सुंडालो दे दो भक्ती का वरदान जी ,
थारा दिल से ध्यान लगावा जी,
है गजानन, है गणनायक थारे प्रथम मनावा जी
पग में घुंघरू बांधकर, कीर्तन में नाच नचावा जी, 
है विध्न विनाशक, है गजानना
भक्ता की नैया पार लगाजो जी, 
नहान धोकर करा रे आरती
थारा गुण गाए बनवारी रे 
है गजानन, है जननायक थारे कू प्रथम मनावा जी ___२
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹

सुनीता अग्रवाल इंदौर मध्यप्रदेश स्वरचित धन्यवाद 🙏🙏
१०सितम्बर२०२१
[31/08, 3:58 pm] ओम 👅प्रकाश पाण्डेय -: जय जय गणपति बप्पा --- ओमप्रकाश पाण्डेय

जय जय हे गणपति बप्पा
तुम हो विघ्नेश्वर महाराज
गिरजा पुत्र जय गजानन
शिवशंकर के प्रिय पुत्र
कृपा सब पर बनाये रक्खो
जय जय गणपति बप्पा....... 1
लड्डू तुमको सबसे प्रिय
मोदक भी तुमको है प्रिय
महाबली बुद्धिमान तुम हो
महादयालु तुम हो प्रभु
जय जय गणपति बप्पा...... 2
मूषक तुम्हारा है वाहन
माँ पिता की प्रदिक्षणा करके
तुम बने देवाधिदेव
दुष्टों के तुम हो संहारक
जय जय गणपति बप्पा....... 3
विद्या के देवता तुम हो
बुद्धि के हो तुम देवाधिदेव
महा शक्तिशाली हो गणपति
हम सब पर कृपा करो महाराज
जय जय गणपति बप्पा........ 4
एक दन्त दयावान हो
चारभुजा धारी महाराज
सिन्दूर सोहे आपके उपर
आर्शीवाद दो कृपा करो प्रभु
जय जय गणपति बप्पा......... 5
( यह मेरी मौलिक रचना है -- ओमप्रकाश पाण्डेय)
[31/08, 5:09 pm] रवि शंकर कोलते क: शुक्रवार दिनांक ३१/८/२२
विधा****भक्ति गीत
विषय***बाप्पा मोरया रे
#****श्री गणेश वंदना****#
               ^^^^^^^^

उतारूं तेरी आरती ।
       मैं करूं सुमरन ।।
विघ्न हरो बाप्पा मेरे ।             
         दीजिए दर्शन ।।             
पाप ताप हरलो सब । 
         हे दुख भंजन ।।                
श्री चरणों में तेरे           
        कोटि कोटि वंदन ।।धृ।।

मोदकदुर्वांकुर है तुमको प्रिय बड़े । 
श्रद्धासुमन लिए हम है यहां खड़े ।। 
                  आलोकित है मेरा
                    भक्ति सेअंतर्मन।।१                                     

तू ही गणपति गणाध्यक्ष भूपति ।
तू सकलदेव ओंकार भुवनपति।।       
                   सहस्त्र तेरे नाम है ।
                   करूं क्या वर्णन ।।२

है पूजामें तेरा ही पहला मान ।  
सब देवता करें तेराही गुणगान ।।
                     विपदा करो दूर ।
                  हे शिवगौरी नंदन।।‌३

प्रा रविशंकर कोलते
      नागपुर
         महाराष्ट्र
[31/08, 5:38 pm] Nirja 🌺🌺Takur: अग्निशिखा मंच
तिथि-३1-८-2022   
विषय -भक्ति गीत

   गणपति वंदना

गणपति हो तुम शंकर के प्यारे
मॉं गौरा के राज दुलारे
शुभ लाभ के पिता हो तुम
ऋध्दि-सिध्दि के हो पति प्यारे

चतुर्थी तिथि है भाती तुमको
हमारी याद सताती तुमको
आते हो तब पास हमारे
आशीष देते हो जी भर के हमको 

मोदक लड्डू तुमको भायें
मूषक राज सवारी करायें
संकट सबके हर लेते हो
भक्त जन तुम्हरे गुण गायें

गई मां स्नान को,द्वार पर तुम्हें बिठायें। 
शिव रोका ,चाहे वो जो अंदर को जायें
काटा सिर फिर क्रोध के कारण
गज शिशु का फिर शीश लगायें

प्रथम पूज्य कौन हो,हुआ इस पर विवाद
किसे पूजें पहले और किसकी पूजा होये बाद
शिव ने कहा ब्रह्मांड के लगाओ चक्कर
पहले आये मेरे पास, सबकी पूजा उसके बाद

माता पिता ही ब्रह्मांड हैं मेरे
मातापिता के लगाये फेरे
पहले पहुंचे गौरा शंकर के पास
आशीष पाये,पहली पूजा होय तुम्हारे

नीरजा ठाकुर नीर
पलावा डोंबिवली
महाराष्ट्र
[31/08, 5:44 pm] Chandrika Vyash Kavi: विघ्न विनाशक मंगल दायक
 ***********************

   विघ्न विनाशक मंगल दायक
   गणपति पधारे हैं हमारे घर द्वार
     एक दो तीन चार गणपति 
      बाप्पा की जय जयकार 
    तुम ही हमारे जीवन आधार !

        दिवस चतुर्थी का जन्म है
          खडे़ विनायक द्वार
        दीप, धूप, मोदक चढे़
           दूर्वा पुष्प का हार !

      स्वागत को खडे़ भक्तजन
           सिंदूर लगाये भाल
        तुम्हारे आने से सजते हैं 
           जगह जगह पंडाल !

      विघ्न विनाशक मंगल दायक
         जय जय हो गणराज !

       ढोल नंगाडे़ और शंख से
           गूंजता है आकाश
      साक्षात तुमसे मिलने का
            होता है आभास !

      विघ्न विनाशक मंगल दायक
          जय जय हो गणराज !

      संकट मोचन पार्वती नंदन
        सर्वोपरि होवे तेरा वंदन
      विघ्न विनाशक मंगल दायक
        जय हो मंगल गणनायक !

         रिद्धि सिद्धि के हो दाता
       कार्तिकेय के तुम हो भ्राता
          उमा गौरी के नंद दुलारे 
            महादेव को हो प्यारे !

       विघ्न विनाशक मंगल दायक
           जय जय हो गणराज !

      आरती करुं मैं रोज तुम्हारी
           करुं तेरी मनुहारी 
      संकट मोचन तुम कहलाये 
          सब तुमको ही ध्यावे !

       विघ्न विनाशक मंगल दायक 
          जय जय हो गणनायक !
    
    गणपति बाप्पा कोरोना भगाओ
    अज्ञानी जन में पर्यावरण की 
             ज्योत जगाओ 
          सृष्टि का उद्धार करो
              हे गणु महाराज !

        हे लंबोदर पितांबर धारी
          जय हो एक दंत धारी
     विघ्न विनाशक मंगल दायक 
         जय हो गजमुख धारी !

              चंद्रिका व्यास
            खारघर नवी मुंबई
            दिनांक - 31/ 8/2022
[31/08, 6:26 pm] डा. अंजूल कंसल इन्दौर: अग्निशिखा मंच 
विषय- भक्ति गीत ( गणपति वंदना)

मंदिर मंदिर शंख हो गुंजायमान 
पल में काम पूरा कर देते हमार
घंटे की ध्वनि- नाद हर्षित करे
गजानन आपका आवाहन कर रहे 
आपकी कृपादृष्टि हम पर विराजी 
करें स्तुती,इक बार आ जाओ गणपति।

आराध्य गजानन तुम हो सुखकारी 
शुभ लाभ के दाता हो मंगलकारी 
रिद्धि सिद्धि की करते पूजा तुम्हरे संग 
दूर्वा तुम पर चढ़ाएं तुम कल्याणक धारी
फूल पत्ती गेंदा गुलाब से तुम्हें सजाती
इक बार आ जाओ घर द्वार गणपति।

सुंदर मंडप में तुम्हें किया विराजित
मस्तक पर सिंदूर शोभा है सुशोभित 
तुम्हारे विशाल कर्ण सब सुनते हैं  
भोले के सुत हो, गौरी के नंदन 
दुख दारिद्र से दिलाते हो मुक्ति 
तुम दयानिधि अति उपकारी 
इक बार आ जाओ घर द्वार गणपति।

डॉक्टर अंजुल कंसल"कनुप्रिया"
31-8-22
[31/08, 7:35 pm] सुरेन्द्र हरडे: *जय गणेश*
जय गणेश जय गणेश देवा
शिव के प्यारे, गौरी नंदन
आज पावन पर्व का दिन आया
करें मिलकर हम सब करे वंदन।।१।।

प्रथम आराध्य भगवान पुजे जाते
सर्वगुणसंपन्न और सर्व धर्म 
करे भक्ति भाव से पूजन 
वेदों उपनिषदों में सर्वश्रेष्ठ।।२।।

ज्ञान देती आंखें सूक्ष्मता का
बडा मस्तक नेतृत्व क्षमता का
सूंड देती संदेश सक्रियता का
बडा पेट व्यर्थ को पचाने का।।३।।

शिव शंकर पिता तुम्हारे
देवों के देव महादेव 
माता तुम्हारे पार्वती
कार्तिकेय बंधु तुम्हारे।।४।।

वाहन मुषक तुम्हारे
भक्तो की करते रखवाली
पीताम्बर धारण करने वाले
एक दंत कहलाते विध्नहर्ता तुम 
सभी भक्तों के सुखकर्ता।।५।।

सुरेंद्र हरड़े
नागपुर महाराष्ट्र
दिनांक ३१/०८/२०२२
[31/08, 7:43 pm] पुष्पा गुप्ता / मुजफ्फरपुर: अग्नि शिखा मंच 
विषय : गणपति जी
------------------------------
गणपति पधारे हैं आज
पूरन करना सबके काज
रखना सबपर कृपा बनाए
सदा हो मंगल सबपे सहाय
 महादेव के पुत्र प्रिय हो
गौरी माँ के तुम लाडले हो
रिद्धि सिद्धि को साथ हो लाते
हम सब दर्शन के भूखे प्यासे 
 कृपा करो हे गणपति देवा
सदा ही करते तेरी सेवा
देना दर्शन और फल मेवा 
मूषक पर तुम विराजमान हो 
एक दंत दाता तुम दानी
आए शरण मे हम अज्ञानी 
दूब फूल हम तुम्हें चढाएँ 
मोदक से तब भोग लगाएँ 
विध्न विनाशक मंगल कारक
 तुम्हीं हो हम सबके पालक 
नमन करें शत बार तुम्हें हम
 बारंबार ध्यावे तुझको हम ।
=========//=//=======
स्वरचित एवं मौलिक रचना 
डा पुष्पा गुप्ता 
मुजफ्फरपुर
 बिहार 🌹🙏
[31/08, 7:46 pm] शोभा रानी तिवारी इंदौर: गणेश वंदना 
************
तुम गणराज हो गौरी नंदन तुम कहलाते हो ,
शुभ कार्य से पहले तुम ही तो पूजे जाते हो।

 एकदंत हो वक्रतुंड हो तुम ही तो लंबोदर हो,
 विघ्नहर्ता मंगल कर्ता सबकी बिगड़ी बनाते हो।
 तुम ही गणों के नायक और तुम ही विनायक हो
रिद्धि सिद्धि के दाता हो तुम सुख समृद्धि लाते हो
 अपने भक्तों की जीवन नैया भव से पार लगाते हो शुभ कार्य से पहले, तुम ही तो पूजे जाते हो।

 गणपति जी सबसे प्यारे गौरा के राज दुलारे हैं, प्रथम प्रणाम गणेश जी को वे जग के रखवाले हैं, मूषक की सवारी करते, मोदक लड्डू खाते हैं,
 जो भक्त दिल से उन्हें पुकारे दौड़े चले आते हैं,
 तुम बुद्धि के दाता हो ,जीवन के गुर सिखाते हो, शुभ कार्य से पहले तुम ही तो पूजे जाते हो।

 सुबह शाम पूजा करेंगे श्रीफल पुष्प चढ़ाएंगे,
 मंगल ध्वनियों के संग हम गणेश वंदना गाएंगे,
 घी का दीपक जलाकर श्रद्धा से शीश झुकाएंगे,
 आपकी कृपा होगी तो आशीर्वाद भी पा जाएंगे, हम याचक हैं तुम दाता,खाली झोली भर देते हो, 
 शुभ कार्य से पहले तुम ही तो पूजे जाते हो 
 तुम गणराज हो गौरीनंदन तुम कहलाते हो,
 शुभकार्य से पहले तुम ही तो पूजे जाते हो।

 शोभा रानी तिवारी 619 अपार्टमेंट खातीवाला टैंक इंदौर मध्य प्रदेश मोबाइल8989409210
[31/08, 9:09 pm] निहारिका 🍇झा: 🌹नमन मंच 
अग्निशिखा
दिनाँक;-31/8/2022
विषय;-श्री गणेश वंदना
 आज के कार्य पर एक प्रयास निवेदित।।
🙏"ॐ श्री गणेशाय नमः""🙏
प्रणम्य हे गजानने !
प्रणम्य हे उमासुते!
प्रणम्य एकदन्त हे!
प्रणम्य भालचंद्र हे
हमें शरण में लीजिए
कृपा का हाथ दीजिए
विनीत द्वार पे खड़े 
आस पूरी कीजिये
विशाल चक्षु खोलिए 
असीम ज्ञान दीजिये!!
कृपा की दृष्टि आज प्रभु
जग पे आप डालिये
शुभ्रता व बुद्धि का
वरदान हमको दीजिए।
प्रणम्य हे गजानने!!
🙏🙏🌹🌹
 श्रीमती निहारिका झा
 खैरागढ़ 
राजनांदगांव (छ.ग.)
[31/08, 11:33 pm] Anita झा /रायपुर: काव्य गोष्ठी मंच 
*विषय -गजानन आ जाओ इक बार *
हे ग़ज़ाननाए हे ग़ज़ाननाए 
आ जाओं इक़ बार 
करूँ चरण वंदन बारम्बार 
हे ग़ज़ाननाए हे ग़ज़ाननाए 

हे सिद्धिविनायक हे कृपानिधान ,
दुःख बाधाओं से करो निदान ।
करूँ मैं विनती बारम्बार 
कर जोड़ स्तुति गुणगान करूँ 

हे जगनायक ,कृपा निधान  
 करो निदान ,हे करो निदान 
जग उजियारा करने आये हो ,
सबके द्वारे हो आए हो !

करते जगत कल्याण हो ,
पार्वती के तुम राज दुलारे हों ,
बुद्धि परीक्षा पिता की जीत हो !
सिद्धि बुद्धि के तुम रखवाले हों 

सुख शांति वैभव के दाता हों !
कर्म प्रभाव तिहु लोक उजागर हो !
शुभ -लाभ से मनमोहक छवि हो !
हे ग़ज़ाननाए हे ग़ज़ाननाए 

करो निदान ! हे करो निदान 
एक ही पुकार एक ही पूजा !
अक्षत दूर्वा पुष्प मोदक भोगलगाऊँ 
मन मुस्कानो में छा जाते हो !

सात ,पाँच ,ढाई ,देड़ दिन दस दिन की पुकार बन संकट हरने आए हो 
शोभा है न्यारी रूप है निराला ,
दया निधान हे कृपा निधान 

मंगल मिलन हो तीज त्योहार हों !
प्रथम पूज्य गणपति गौरी कहलाते 
विदाई अपनी रंग गुलाल नित्य गीत संग !
फिर आने की प्यास जगा जाते हों

हे ग़ज़ाननाए आ जाओं इक़ बार करूँ चरण वंदन बारम्बार 
हे ग़ज़ाननाए हे ग़ज़ाननाए 
हे गणपति हे सिद्धिविनायक ,
करो निदान ,हे करो निदान 

हे ग़ज़ाननाए हे ग़ज़ाननाए
आ जाओं इक़ बार 
करूँ चरण वंदन बारम्बार 
हे ग़ज़ाननाए हे ग़ज़ाननाए 
स्वरचित मौलिक 
अनिता शरद झा रायपुर

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