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अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच पर आज दिनांक 29 /6/2022 को प्रदत्त विषय *******आरती ,भजन ,कीर्तन में तालियां क्यों बजाई जाती******** हैं पर रचनाकारों के विचार पढ़ें************ डॉ अलका पांडे मुंबई



*आरती, भजन अथवा कीर्तन *करते समय तालियां*
 *क्यों बजाई जाती है...???*
              
हम अक्सर ही यह देखते है कि जब भी आरती, भजन अथवा कीर्तन होता है तो, उसमें सभी लोग तालियां जरुर बजाते हैं!

लेकिन, हममें से अधिकाँश लोगों को यह नहीं मालूम होता है कि.... आखिर यह तालियां बजाई क्यों जाती है?

इसीलिए हम से अधिकाँश लोग बिना कुछ जाने-समझे ही तालियां बजाया करते हैं क्योंकि, हम अपने बचपन से ही अपने बाप-दादाओं को ऐसा करते देखते रहे हैं!

हमारी आध्यात्मिक मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि जिस प्रकार व्यक्ति अपने बगल में कोई वस्तु छिपा ले और, यदि दोनों हाथ ऊपर करे तो वह वस्तु नीचे गिर जायेगी।

ठीक उसी प्रकार जब हम दोनों हाथ ऊपर उठकर ताली बजाते है। तो, जन्मो से संचित पाप जो हमने स्वयं अपने बगल में दबा रखे है, नीचे गिर जाते हैं अर्थात नष्ट होने लगते है!

कहा तो यहाँ तक जाता है कि जब हम संकीर्तन ,कीर्तन के समय हाथ ऊपर उठा कर ताली बजाने में काफी शक्ति होती है। और, संकीर्तन से हमारे हाथो की रेखाएं तक बदल जाती है!

परन्तु यदि हम आध्यात्मिकता की बात को थोड़ी देर के छोड़ भी दें तो

एक्यूप्रेशर सिद्धांत के अनुसार मनुष्य को हाथों में पूरे शरीर के अंग व प्रत्यंग के दबाव बिंदु होते हैं, जिनको दबाने पर सम्बंधित अंग तक खून व ऑक्सीजन का प्रवाह पहुंचने लगता है... और, धीरे-धीरे वह रोग ठीक होने लगता है।

और, यह जानकार आप सभी को बेहद ख़ुशी मिश्रित आश्चर्य होगा कि इन सभी दबाव बिंदुओं को दबाने का सबसे सरल तरीका होता है ताली!

असल में ताली दो तीन प्रकार से बजायी जाती है:-

*1* ताली में बाएं हाथ की हथेली पर दाएं हाथ की चारों अंगुलियों को एक साथ तेज दबाव के साथ इस प्रकार मारा जाता है कि ....दबाव पूरा हो और आवाज अच्छी आए!

इस प्रकार की ताली से बाएं हथेली के फेफड़े, लीवर, पित्ताशय, गुर्दे, छोटी आंत व बड़ी आंत तथा दाएं हाथ की अंगुली के साइनस के दबाव बिंदु दबते हैं... और, इससे इन अंगों तक खून का प्रवाह तीव्र होने लगता है!

इस प्रकार की ताली को तब तक बजाना चाहिए जब तक कि, हथेली लाल न हो जाए!

इस प्रकार की ताली कब्ज, एसिडिटी, मूत्र, संक्रमण, खून की कमी व श्वांस लेने में तकलीफ जैसे रोगों में लाभ पहुंचाती है

*2* **थप्पी ताली_ ताली में दोनों हाथों के अंगूठा-अंगूठे से कनिष्का-कनिष्का से तर्जनी-तर्जनी से यानी कि सभी अंगुलियां अपने समानांतर दूसरे हाथ की अंगुलियों पर पड़ती हो, हथेली-हथेली पर पड़ती हो.!

इस प्रकार की ताली की आवाज बहुत तेज व दूर तक जाती है!

एवं, इस प्रकार की ताली कान, आंख, कंधे, मस्तिष्क, मेरूदंड के सभी बिंदुओं पर दबाव डालती है!

इस ताली का सर्वाधिक लाभ फोल्डर एंड सोल्जर, डिप्रेशन, अनिद्रा, स्लिप डिस्क, स्पोगोलाइसिस, आंखों की कमजोरी में पहुंचता है!

एक्यूप्रेशर चिकित्सकों की राय में इस ताली को भी तब तक बजाया जाए जब तक कि हथेली लाल न हो जाए!

इस ताली से अन्य अंगों के दबाव बिंदु सक्रिय हो उठते हैं तथा, यह ताली सम्पूर्ण शरीर को सक्रिय करने में मदद करती है!

यदि इस ताली को तेज व लम्बा बजाया जाता है तो शरीर में पसीना आने लगता है ...जिससे कि, शरीर के विषैले तत्व पसीने से बाहर आकर त्वचा को स्वस्थ रखते हैं।

और तो और ताली बजाने से न सिर्फ रोगों से रक्षा होती है, बल्कि कई रोगों का इलाज भी हो जाता है!

जिस तरह कोई ताला खोलने के लिए चाबी की आवश्यकता होती है ठीक उसी तरह कई रोगों को दूर करने में यह ताली ना सिर्फ चाभी का ही काम नहीं करती है बल्कि, कई रोगों का ताला खोलने वाली होने से इसे ""मास्टर चाभी"" भी कहा जा सकता है।

क्योंकि हाथों से नियमित रूप से ताली बजाकर कई रोग दूर किए जा सकते हैं एवं, स्वास्थ्य की समस्याओं को सुलझाया जा सकता है!

श्रीरामकृष्ण देव कहा करते थे, 'ताली बजाकर प्रातः काल और सायं काल हरिनाम भजा करो। ऐसा करने से सब पाप दूर हो जाएंगे। जैसे पेड़ के नीचे खड़े होकर ताली बजाने से पेड़ पर की सब चिड़ियां उड़ जाती हैं, वैसे ही ताली बजाकर हरिनाम लेने से देहरूपी वृक्ष से सब अविद्यारूपी चिड़ियां उड़ जाती हैं।

प्राचीन काल से मंदिरों में पूजा, आरती, भजन-कीर्तन आदि में समवेतु रूप से ताली बजाने की परंपरा रही है, जो हमारे शरीर को स्वस्थ रखने का एक अत्यंत उत्कृष्ट साधन है। चिकित्सकों का कहना है कि हमारे हाथों में एक्यूप्रेशर प्वाइंट्स अधिक होते हैं। ताली बजाने के दौरान हथेलियों के एक्यूप्रेशर केंद्रों पर अच्छा दबाव पड़ता है। जिससे शरीर की अनेक बीमारियों में लाभ पहुंचता है और शरीर निरोगी बनता है, अतः ताली बजाना एक उत्कृष्ट व्यायाम है। इससे शरीर की निष्क्रियता खत्म होकर क्रियाशीलता बढ़ती है। रक्त संचार की रुकावट दूर होकर अंग ठीक तरह से कार्य करने लगते हैं। रक्त का शुद्धिकरण बढ़ जाता है और हृदय रोग, रक्त नलिकाओं में रक्त का थक्का बनना रुकता है। फेफड़ों की बीमारियां दूर होती हैं। रक्त के श्वेत रक्तकण सक्षम तथा सशक्त बनने के कारण शरीर में चुस्ती, फुर्ती तथा ताजगी का एहसास होता है। रक्त में लाल रक्तकणों की कमी दूर होकर वृद्धि होती है और स्वास्थ्य सुधरता है। अतः पूजा-कीर्तन में तालबद्ध तरीके से अपनी पूरी शक्ति से ताली बजाएं और रोगों को दूर भगाएं। इससे तन्मय होने और ध्यान लगाने में भी सुविधा होगी।

इस तरह ताली दुनिया का सर्वोत्तम एवं सरल सहज योग है और, यदि प्रतिदिन यदि नियमित रूप स क्योंकि हाथों से नियमित रूप से ताली बजाकर कई रोग दूर किए जा सकते हैं एवं, स्वास्थ्य की समस्याओं को सुलझाया जा सकता है!

इस तरह ताली दुनिया का सर्वोत्तम एवं सरल सहज योग है।

अलका पाण्डेय मुम्बई

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[29/06, 7:38 am] Nirja 🌺🌺Takur: अग्नि शिखा मंच
तिथि -२९-६-२०२२
विषय- लेख -पूजा करते समय ताली क्यों बजाते हैं

        जब आरती और भजन के समय हम प्रभु भक्ति में मगन हो कर ताली बजाते हैं तब हम जैसे प्रभु में ही लीन हो जाते हैं। प्रभु में लीन होना ही सबसे बड़ी पूजा है, यही तो भक्ति है। ऐसी मान्यता है कि ताली बजाने से हमने अपने हाथों में जो पाप जमा किये हैं वह नीचे गिर जाते हैं और हाथों की रेखाओं में सुखद परिवर्तन होने लगता है। 
       वैसे ताली बजाना एक अच्छा व्यायाम है। इससे हाथ और कंधों का व्यायाम होता है। 
        हमारे हाथों से शरीर के हर अंग जुड़े रहते हैं। जब हम ताली बजाते हैं तो एक्यूप्रेशर से हाथों के बिंदुओं पर दबाव पड़ता है। इससे शरीर में जहाॅं भी नसें बंद रहती हैं वह खुल जाती हैं। 
इसीलिए ताली को एक प्रकार का योग भी माना गया है। 

नीरजा ठाकुर नीर 
पलावा मुंबई महाराष्ट्र
[29/06, 8:15 am] वैष्णवी Khatri वेदिका: बुधवार /29//6/ 2022
भजन करते समय तालियां क्यों बजाई जाती हैं।

ताली सर्वोत्तम एवं सरल व्यायाम है। प्रतिदिन अगर नियमित रूप से दो मिनट भी तालियाँ बजाई जाएँ तो हठयोग या आसनों की जरूरत नहीं होगी और इससे
कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं को सुलझाया जा सकता है। आध्यात्मिक मान्यता है कि जब हम दोनों हाथ ऊपर उठकर ताली बजाते हैं तो जन्मों से सहेजे हुए पाप नष्ट हो जाते हैं।

जब हम संकीर्तन के समय हाथ ऊपर उठाकर ताली बजाने से ऐसी शक्ति उत्‍पन्‍न होती है जो हमारे आस-पास के वातावरण को शुद्ध कर देती है। यही शक्ति हमारे हाथों की रेखाओं तक को बदल सकती है।
रामचरितमानस में तुलसीदासजी ने भी ने इसका बड़े ही सुंदर तरीके से जिक्र किया है। उन्होंने लिखा है-

रामकथा सुंदर कर तारी।
संशय विहग उड़ानवनहारी ।।

मनुष्य के हाथों में पूरे शरीर के अंग व प्रत्यंग के दबाव बिंदु होते हैं, जिनको दबाने पर संबंधित अंग तक खून व ऑक्सीजन का प्रवाह पहुंचने लगता है और धीरे-धीरे वह रोग ठीक होने लगता है। इन सभी दबाव बिंदुओं को दबाने का सबसे प्रभावी व सरल तरीका होता है ताली बजाना।
बाएँ हाथ की हथेली पर दाएँ हाथ की चारों अंगुलियों को एक साथ तेज दबाव दाल कर ताली बजाने से
फेफड़े, लीवर, पित्ताशय, गुर्दे, छोटी आंत व बड़ी आंत तथा दाएं हाथ की अंगुली के साइनस के दबाव बिंदु दबते हैं। इससे इन अंगों तक खून का प्रवाह तीव्र होने लगता है।

ताली को हथेली लाल होने तक बजाना चाहिए।
इस प्रकार की ताली बजाने से कब्ज, एसिडिटी, मूत्र, संक्रमण, खून की कमी व श्वांस लेने में तकलीफ जैसे रोगों में लाभ पहुंचता है।

यदि एक हाथ की उंगलियां समानांतर दूसरे हाथ की अंगुलियों पर पड़ती हैं तो कान, आंख, कंधे, मस्तिष्क, मेरूदंड के सभी बिंदुओं पर दबाव डालती है। इससे डिप्रेशन, अनिद्रा, स्लिप डिस्क, स्पोगोलाइसिस और आंखों की कमजोरी जैसी समस्याओं में काफी लाभ पहुंचता है।

सिर्फ हथेली को हथेली पर ताली मारने से उत्तेजना बढ़ती है। इसे देर तक बजाने से शरीर में पसीना आने लगता है, जिससे शरीर के विषैले तत्व पसीने से बाहर आकर त्वचा को स्वस्थ रखते हैं। इस ताली को बजाने से न सिर्फ रोगों से रक्षा होती है, बल्कि कई रोगों का इलाज भी हो जाता है।

वैष्णोखत्रीवेदिका
जबलपुरमध्यप्रदेश
[29/06, 8:23 am] रामेश्वर गुप्ता के के: ।अग्निशिखा मंच। 
दिनांक 29-06-2022 
विषय : भजन करते समय ताली क्यो बजाते है?। 
एक्यूप्रेशर सिद्धांत के अनुसार मनुष्य को हाथों में पूरे शरीर के अंग व प्रत्यंग के दबाव बिंदु होते हैं, जिनको दबाने पर सम्बंधित अंग तक खून व ऑक्सीजन का प्रवाह पहुंचने लगता है और, धीरे-धीरे वह रोग ठीक होने लगता है और, यह जानकार आप सभी को बेहद ख़ुशी मिश्रित आश्चर्य होगा कि इन सभी दबाव बिंदुओं को दबाने का सबसे सरल तरीका होता है ताली
श्रीरामकृष्ण देव कहा करते थे, ‘ताली बजाकर प्रातः काल और सायं काल हरिनाम भजा करो। ऐसा करने से सब पाप दूर हो जाएंगे। जैसे पेड़ के नीचे खड़े होकर ताली बजाने से पेड़ पर की सब चिड़ियां उड़ जाती हैं, वैसे ही ताली बजाकर हरिनाम लेने से देहरूपी वृक्ष से सब अविद्यारूपी चिड़ियां उड़ जाती हैं।
प्राचीन काल से मंदिरों में पूजा, आरती, भजन-कीर्तन आदि में समवेतु रूप से ताली बजाने की परंपरा रही है, जो हमारे शरीर को स्वस्थ रखने का एक अत्यंत उत्कृष्ट साधन है। चिकित्सकों का कहना है कि हमारे हाथों में एक्यूप्रेशर प्वाइंट्स अधिक होते हैं। ताली बजाने के दौरान हथेलियों के एक्यूप्रेशर केंद्रों पर अच्छा दबाव पड़ता है। जिससे शरीर की अनेक बीमारियों में लाभ पहुंचता है और शरीर निरोगी बनता है, अतः ताली बजाना एक उत्कृष्ट व्यायाम है।
इस तरह ताली दुनिया का सर्वोत्तम एवं सरल सहज योग है और, यदि प्रतिदिन यदि नियमित रूप स क्योंकि हाथों से नियमित रूप से ताली बजाकर कई रोग दूर किए जा सकते हैं एवं, स्वास्थ्य की समस्याओं को सुलझाया जा सकता है इस तरह ताली दुनिया का सर्वोत्तम एवं सरल सहज योग है।
मंत्र हर पूजा-अर्चना के बाद भगवान से जरूर मांगें क्षमा, तभी पूरी होगी पूजा। 
द्वारा :
रामेश्वर प्रसाद गुप्ता ।
[29/06, 8:45 am] कुंवर वीर सिंह मार्तंड कोलकाता: *भजन करते समय तालियां क्यों बजाई जाती हैं*

हम अक्सर ही यह देखते है कि जब भी आरती, भजन अथवा कीर्तन होता है तो, उसमें सभी लोग तालियां जरुर बजाते हैं लेकिन, हममें से अधिकाँश लोगों को यह नहीं मालूम होता है कि आखिर यह तालियां बजाई क्यों जाती है ? 

हमारी आध्यात्मिक मान्यता के अनुसार कहा जाता है कि जिस प्रकार व्यक्ति अपने बगल में कोई वस्तु छिपा ले और, यदि दोनों हाथ ऊपर करे तो वह वस्तु नीचे गिर जायेगी। ठीक उसी प्रकार जब हम दोनों हाथ ऊपर उठकर ताली बजाते है। तो, जन्मों से संचित पाप जो हमने स्वयं अपने बगल में दबा रखे है, नीचे गिर जाते हैं अर्थात नष्ट होने लगते है कहा तो यहाँ तक जाता है कि संकीर्तन में काफी शक्ति होती है और, संकीर्तन से हमारे हाथो की रेखाएं तक बदल जाती है

परन्तु यदि हम आध्यात्मिकता की बात को थोड़ी देर के छोड़ भी दें तो एक्यूप्रेशर सिद्धांत के अनुसार मनुष्य को हाथों में पूरे शरीर के अंग व प्रत्यंग के दबाव बिंदु होते हैं, जिनको दबाने पर सम्बंधित अंग तक खून व ऑक्सीजन का प्रवाह पहुंचने लगता है और, धीरे-धीरे वह रोग ठीक होने लगता है और, यह जानकर आप सभी को बेहद ख़ुशी मिश्रित आश्चर्य होगा कि इन सभी दबाव बिंदुओं को दबाने का सबसे सरल तरीका होता है ताली।

श्रीरामकृष्ण देव कहा करते थे, ‘ताली बजाकर प्रातः काल और सायं काल हरिनाम भजा करो। ऐसा करने से सब पाप दूर हो जाएंगे। जैसे पेड़ के नीचे खड़े होकर ताली बजाने से पेड़ पर की सब चिड़ियां उड़ जाती हैं, वैसे ही ताली बजाकर हरिनाम लेने से देहरूपी वृक्ष से सब अविद्यारूपी चिड़ियां उड़ जाती हैं।

प्राचीन काल से मंदिरों में पूजा, आरती, भजन-कीर्तन आदि में समवेतु रूप से ताली बजाने की परंपरा रही है, जो हमारे शरीर को स्वस्थ रखने का एक अत्यंत उत्कृष्ट साधन है। चिकित्सकों का कहना है कि हमारे हाथों में एक्यूप्रेशर प्वाइंट्स अधिक होते हैं। ताली बजाने के दौरान हथेलियों के एक्यूप्रेशर केंद्रों पर अच्छा दबाव पड़ता है। जिससे शरीर की अनेक बीमारियों में लाभ पहुंचता है और शरीर निरोगी बनता है, अतः ताली बजाना एक उत्कृष्ट व्यायाम है।

इस तरह ताली दुनिया का सर्वोत्तम एवं सरल सहज योग है और, यदि प्रतिदिन यदि नियमित रूप से ताली बजाकर कई रोग दूर किए जा सकते हैं एवं, स्वास्थ्य की समस्याओं को सुलझाया जा सकता है इस तरह ताली दुनिया का सर्वोत्तम एवं सरल सहज योग है।

© कुंवर वीर सिंह मार्तंड कोलकाता 
[29/06, 10:29 am] विजेन्द्र मोहन बोकारो: मंच को नमन
विधा:-- *लेख*
विषय:-- *पूजा करते समय ताली क्यों बजाते हैं?*

जब आरती भजन कीर्तन के समय मंदिर में या पूजा स्थल पर
हमसब प्रभु के पास भक्तिमय हो जाते हैं। उस समय मां-बाप को देखकर ताली बजाते हैं। जब बुद्धि विकसित हुई तब अपने दादा जी से इस बात की जानकारी लिए। क्यों हम लोग आरती के समय ताली बजाते हैं?
 आध्यात्मिक एवं योग के संबंध से प्रश्न का उत्तर दिए। जो आज तक विश्वास के साथ मेरी आत्मा में समावेश है।
*आध्यात्मिक कारण:*- जब हम प्रभु के शरण में जाते हैं उस समय संसार विहीन हो जाना चाहिए। ताली बजाने से एकाग्रता होती है। उस समय श्री कृष्ण के चरणों में समर्पित हो जाते हैं। अपने हाथों में जो पाप जमा किए हैं वह नीचे गिर जाता है। और हाथों की रेखाओं में परिवर्तन होने लगता है। इसलिए ताली बजाना चाहिए।

*योगिक कारण:*-- ताली बजाना एक अच्छा व्यायाम है और कंधो का व्यायाम होता है ।हमारे हाथों से शरीर के हर अंग जुड़े रहते हैं ।जब हम ताली बजाते हैं तो एक्यूप्रेशर से हाथों के बिंदुओं पर दबाव पड़ता है इससे शरीर में जहां भी नसें बंद रहती है वो खुल जाती है। अगर आप प्रात कालीन उठकर शांत वातावरण में ताली बजाते हैं। उस से प्रभु के समीप जाते हैं एवं शरीर के बेहतरीन स्थित रहती है।
इस प्रक्रिया को वैज्ञानिक तौर पर भी मान्यता मिली हुई है। जिसके कारण पूरे विश्व इस ताली बजाना अपना रहें है।

विजयेन्द्र मोहन।
[29/06, 12:06 pm] रागनि मित्तल: जय मां शारदे
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 अग्निशिखा मंच
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 दिन -बुधवार 
दिनांक- 29 /6/2022 लेख--
प्रदत्त विषय- *भजन करते समय ताली क्यों बजाते हैं*

 वैसे तो ताली बजाने के कई फायदे हैं कई कारण है ।
                ताली बजाना शारीरिक ,मानसिक, सामाजिक ,धार्मिक, आध्यात्मिक दृष्टिकोण से हितकारी है ।अब यहां पर भजन करते समय ताली बजाने की बात है, तब मैं इसके कुछ कारण और लाभ बताती हूं।
          सर्वप्रथम भजन गाते समय यदि हम अपने हाथों से ताली बजाते हैं तो उस ताली की आवाज मे हमें बाहर कहीं और की आवाज सुनाई नहीं देती है तो हमारा मन अपने ही भजन में पूरी निष्ठा से, पूरी तन्मयता से लगा रहता है ।
         दूसरा कारण यह है जब हम भजन गाते हैं और उसके साथ में ताली बजाते हैं , तो ताली की आवाज एक संगीत का कार्य करती है।जो भजन को मधरता प्रदान करती है।
              तीसरा कारण यह है, जब हम भजन के साथ ताली बजाते हैं तो उसकी आवाज बहुत तेज होती है जो दूर- दूर तक जाती है। जिससे कि बाहर के लोगों को भी यह पता चलता है कि यहां भजन हो रहे हैं। वे भी उसका लाभ उठाने या उसको सुनकर के प्रसन्न होने से वंचित नहीं रह पाते हैं।
            ताली बजाने के और भी बहुत सारे कारण और बहुत सारे फायदे भी हैं। लेकिन यहां भजन गाते समय ताली बजाने की बात ही करनी है, इसीलिए मैंने इतना ही व्यक्त किया है ।

रागिनी मित्तल 
कटनी ,मध्य प्रदेश
[29/06, 12:33 pm] आशा 🌺नायडू बोरीबली: विधा - लेख 
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🌹 भजन करते समय तालियां क्यों बजाई जाती हैं?🌹
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           काफी पुराने समय से ताली बजाने की प्रथा चली आ रही है। ईश्वर के भजन पूजन, आरती कीर्तन, धर्म-कर्म के कार्यों में ताली बजाने की प्रथा स्वाभाविक है। ताली बजाना धार्मिक रूप से अनिवार्य है, पर इसका वैज्ञानिक रूप भी बहुत महत्वपूर्ण और महान है। आइए समझते हैं इसे।
            कहते हैं, प्रतिदिन अगर हम मात्र 2 मिनट ताली बजा बजाएं, तो यह हमारे स्वास्थ्य के लिए बहुत लाभदायक सिद्ध होता है ।इसलिए इसे व्यायाम के रूप में लिया जा रहा है। जब हम ताली बजाते हैं, तो पूरे शरीर में प्रतिक्रिया होती है। हमारी मांसपेशियां उत्तेजित होने लगती हैं ।पसीना आने लगता है। हमारी हथेली में संपूर्ण शरीर के पॉइंट्स हैं, जिन्हें एक्यूप्रेशर पॉइंट कहा जाता है ।जब हम जोर- जोर से ताली बजाते हैं, तो इन बिंदुओं ,पॉइंट पर दबाव पड़ता है ।जिससे प्रत्येक अंग का रक्त संचार बढ़ता है ।जिससे हमारे शरीर के प्रत्येक अंग सुचारू कार्य करने लगते हैं और हमारा स्वास्थ्य सदा स्वस्थ रहता है।
          हमारे पूर्वज एवं हमारे ऋषि-मुनियों संत महात्माओं ने हजारों लाखों वर्ष पहले ही यह सारी बातें जान ली थी इसका फायदा जनकल्याण के लिए आवश्यक है इसलिए पूजा अर्चना आरती कीर्तन में अनिवार्य है ताली बजाने की परंपरा का रूप दिया गया ,व

काताकि प्रत्येक व्यक्ति इससे लाभान्वित हो सके व स्वस्थ रह सके ।
        अतः ताली बजाना दुनिया का सर्वोत्तम सरल व सहज योग है ,जो हमें सदा स्वास्थ्य लाभ प्राप्त कराता रहता है। इसलिए नियमित रूप से ताली बजाइए और सदा सदा स्वस्थ रहिए।
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डॉ.आशालता नायडू.
मुंबई .महाराष्ट्र.
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[29/06, 3:18 pm] Dravinasi🏆🏆: ।अग्नि शिखा मंच दिनांक 29 जून 2022 दिन बुधवार विषय भजन करते समय तालियां क्यों बजाई जाती हैं। लघुकथा तालियां बजाने का कोई एक निश्चित कारण नहीं है।अनेक लोग अपनी अपनी समझ से तालियां बजाने का कार्य करते हैं। वैसे सभी लोग अपने अपने मन को खुश करने के लिए करते है। वैसे तो किसी कार्य के लाभ अथवा हानि दोनो होते हे।जब कार्य अनियमितता या अनियंत्रित कार्य किया जाता है तब। हानियां होती है। तथा जो कार्य स्वार्थ सहित किये जाते हैं।वह निरर्थक की श्रेणी में आते हैं।इसी तरह अनेक लोग अनगिनत लाभ ही लाभ दर्शाते हैं। बिना जानकारी के जब तक सत्य जानकारी नहो तब तक दूसरों को नहीं बताना चाहिए। इस तरह से लाभ की जगह हानि की ज्यादा संभावना रहती है। लोगों के कहने के अनुसार तालियां बजाने से भगवान की प्राप्ति होती तो कोई ढूंढते दिखाई ना देते। किसी कार्य के फल निहित ही है। डॉ अविनाशी
[29/06, 3:25 pm] निहारिका 🍇झा: नमन अग्निशिखा मंच
विषय;-भजन के दौरान ताली क्यों बजाते हैं।
दिनाँक ;-29/6/2022
पूजन के बादभजन के दौरान ताली बजाना।
ताली बजाना एक प्रकृतिक प्रक्रिया है। जब हमें कोई बात पसंद आती है तो स्वमेव ताली बज के
जाती है।।
धार्मिक दृष्टि से ताली बजाने का बहुत महत्व है कहते हैं कि ताली बजाने से देव जागृत होते हैं।ताली बजाने के माध्यम से हम ईश भक्ति में तल्लीन हो जाते हैं।इस दौरान हमारा ध्यान अन्य कोई ओर नहीं जाता।
ताली बजाने में दोनो हाथ जुड़ते हैं जिसका स्वास्थ्य पर सकारात्मक प्रभाव पड़ता है।।
हमारे शरीर मे कई एक्यूप्रेशर पॉइंट हैं जिनका स्नायुतन्त्र के सुचारू रूप से चलने में अहम योगदान है।ताली बजाने से रक्त संचरण सुचारू रूप से होता है।
कहते हैं यदि नियमतः रोज ताली बजायी जाए तो हम स्वस्थ रह सकते हैं।।
निहारिका झा
खैरागढ़ राज.(36 गढ़)
[29/06, 3:26 pm] पल्लवी झा ( रायपुर ) सांझा: विधा-लेख
विषय-भजन करते समय ताली क्यों बजाते हैं ?
तिथि-३०जून २०२२

प्राचीन काल से हमारे पूर्वजों द्वारा ताली बजाने की परंपरा चलती आ रही है और यह तो निश्चित तौर पर पता है कि हमारे पूर्वज बड़े ज्ञानी तर्कशास्त्र में निपूर्ण और आध्यात्म के साथ व्यवहारिक दृष्टिकोण को देखतै हुए ही सभी कार्य करते थे ।
         भजन के वक्त जब हम ताली बजाते हैं तो हम अपनी शक्ति भजन और भगवान में ही एकाग्र करते हैं ताली बजाने से हम उस भजन के प्रति और भी आकृष्ट होते हैं भजन न आने पर भी हम ताली के माध्यम से अपने भाव प्रदर्शित कर उसमें शामिल होते हैं और ताली एकसाथ बजने से एक लय उत्पन्न होती है इससे वहां उपस्थित लोगों के अलावा आस-पास के लोग भी इसकी ओर आकर्षित होते‌ हैं इसलिए ताली पूजा-पाठ की एकाग्रता और मानसिक शांति प्रदान करने आवश्यक है ।
     वहीं जब हम ताली बजाते हैं तो हमारी दोनों हथेलियों में दबाव की वजह से रक्त संचरण तेजी से होता है और यह हथेलियों के माध्यम से पूरे शरीर में आक्सीज पहुंचाने का कार्य करता है जिससे हमारे शरीर में नयी सकारात्मक ऊर्जा का निर्माण होता है । आजकल भाग-दौड़ की जिंदगी में लोगों के चेहरे की मुस्कान छीन गयी है और लोग भजन आदि के लिए समय भी नहीं निकाल पाते तो सुबह की सैर में ताली बजाने को व्यायाम का रूप देकर इससे लाभान्वित होने के लिए प्रारंभ किया गया है तो भजन में ताली बजाने के कारण और लाभ यही है।

पल्लवी झा (रूमा)
रायपुर छत्तीसगढ़
[29/06, 3:47 pm] Nilam 👏Pandey👏 Gorkhpur: अग्नि शिखा मंच
29/06/22
विधा - लेख 
विषय - भजन गाते समय ताली बजाने क्यों बजाते हैं
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भजन गाते समय ताली बजाने के लिए ताली बजाना स्पष्ट क्रिया है। हालांकि साथ ही यह ध्वनि अशुभ प्रभावों को भी दूर करती है। सकारात्मक मन से की गई कोई भी ध्वनि बुराई को दूर करती है। ताली की ऐसी आवाज वातावरण से बुराई को दूर करती है और चारों ओर सकारात्मक ऊर्जा का निर्माण करती है। इसलिए, भजन गाते समय ताली बजाने की यह क्रिया पूजा स्थल के पास सकारात्मक माहौल बनाने में मदद करती है।

ताली बजाते और भजन की लय गिनते समय हथेलियों पर हमारे दबाव बिंदु नियमित अंतराल के बाद सक्रिय हो जाते हैं। प्राथमिक दबाव बिंदुओं के सक्रिय होने से हमारे मन में सकारात्मकता और उत्साह का निर्माण होता है।

भजन के संगीत में तल्लीन भक्त आमतौर पर एक श्रव्य ध्वनि के साथ ताली बजाते हैं। कई बार लोगों को भजन के बीच में दिव्य अवस्था में प्रवेश करते देखा जा सकता है। यह संगीत की लय में उनके शरीर और मन की एकाग्रता को दर्शाता है। इसलिए संक्षेप में, भजन के दौरान ताली बजाना बेहतर एकाग्रता और भगवान की भक्ति के लिए किया जाता है।

नीलम पाण्डेय
 गोरखपुर उत्तर प्रदेश
[29/06, 4:07 pm] ओम 👅प्रकाश पाण्डेय -: भजन करते समय तालियाँ क्यों बजाई जाती है? ---- ओमप्रकाश पाण्डेय
इसका कोई कारण तो कहीं लिखा नहीं है और न कोई वैज्ञानिक कारण है. लेकिन मेरे विचार से भजन ईश्वर के साधना का एक माध्यम है. अब बहुत बड़े साधु, महात्मा व साधक व्यक्ति तो साधना करते समय अपने मन को एकाग्रचित्त कर लेते हैं. क्योंकि उन्हें साधना करने का अभ्यास रहता है. एक बार अगर मन एकाग्रचित्त हो गया , तो उनके लिए ईश्वर का ध्यान करना आसान हो जाता है.
लेकिन सामान्य व्यक्ति, जिसके पास परिवार व समाज का बहुत बड़ा दायित्व है, परन्तु वह कोई साधक नहीं है, तो वह अपने मन को एकाग्रचित्त कैसे करे? 
तो हमारे मनीषियों ने कहा कि संगीत भी एक महत्वपूर्ण माध्यम है मन को एकाग्र करने का. इसलिए भजन में ताली के साथ साथ ढोलक, मजीरा, हारमोनियम आदि वाद्ययंत्रों का भी उपयोग किया जाता था. ताली बजाना भी उसी का एक अंग है. ताली बजाते समय, व्यक्ति का मन ईश्वर के भजन में एकाग्रचित्त होकर लगा रहता है.
[29/06, 4:26 pm] 💃💃sunitaअग्रवाल: विषय __ भजन कीर्तन के समय ताली क्यों बजाई जाती है

      ताली बजाने का मुख्य कारण स्वास्थ्य की दृष्टि से उचित है । दोनों हाथ जुड़ते हैं पॉइंट दबते है जिससे शरीर की समस्त नसे सक्रिय हो जाती है सिर से पैर तक रक्त प्रवाह आसान हो जाता है । 
      धार्मिक दृष्टि से देखा जाए तो भजन के समय एक लय मैं ताली बजाने से भक्त भक्ति में डूब जाता है सारा वातावरण सकारात्मक ऊर्जा से परिपूर्ण हो जाता है । 

     तीसरा कारण है जैसे हास्य को योग माना गया है वैसे ही ताली बजाना योग का एक प्रकार ही है ताली बजाने के कई तरीके हैं तरीको का उपयोग करने से हमारे मस्तिष्क में तरंगे उठती है जो शरीर के सभी भागों को स्वस्थ
 रखती है ।
     हम अपनी खुशी , उल्लास उमंग को प्रगट करने के लिए भी ताली बजाते हैं।

सुनीता अग्रवाल इन्दौर स्वरचित🙏🏻🌹
[29/06, 4:34 pm] रवि शंकर कोलते क: बुधवार दिनांक २९/६/२२
विधा**** लेख 
विषय**#**भजन गाते समय
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                       ताली क्यों बजाई
                            °°°°°°°°°°
                           जाती है ***#
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      भजन गाते समय दोनों हाथ से ताली बजाए जाती है । 
मन जब भजन में रंग जाता है इंसान तब अपने आप ताली बजाने लगता है या बाकी लोगोकों ताली बजाते देख वो ताली बजाना शुरू कर देता है । 
           ताली बजाने के पीछे एक वैज्ञानिक कारण भी है जो हमें नहीं पता । और वह यह है कि जब ताली हम जोर से अपनी हथेलियों को एक दूजे पर मारते हैं तब हथेली पर कुछ ऐसे दबाव बिंदु होते हैं जो दबने से रक्त का प्रवाह सुचारू रूप से चलता है जिसके कारण बहुत से रोग अपने आप दूर होते हैं । जैसे कि ह्रदय, फेफड़े ,अपचन , गुर्दे नसों में दर्द इत्यादि
         ताली बजाने का एक और भी कारण है । हमारे शरीर पर अगर किसी अदृश्य साया है तो वह आवाज से भग जाता है । क्योंकि मंदिर के पवित्र वातावरण में ऐसी शक्तियां ठहरती नहीं । 
         दोनों हाथ से ताली हाथ ऊपर करके भी बजाए जाती है तब ऐसी मान्यता है कि हमारे संचित पाप अपने आप नीचे गिर जाते हैं जिस प्रकार से कोई बगल में छिपी वस्तु हाथ ऊपर करने से अपने आप नीचे आ जाती है ।
         हम अपने मुंह से जब हरी नाम का उच्चारण करते हैं उस वक्त भी शरीर के भीतरी अवयव पर उसका प्रभाव पड़ता है । जैसे कि हरी विठ्ठल शब्द उच्चारते समय ठ्ठ पर ज्यादा जोर लगता है तब अंदर के हृदय की धमनियों पर उसका प्रभाव पड़ता है । इन धमनियों में जो मेन जैसी वस्तु जमा होती है जिसे हम ब्लॉकेजेस बोलते हैं वे नष्ट होते हैं ऐसा मेडिकल साइंस कहता है ।
       इसलिए प्रभु की आराधना करते समय जो भजन गाया जाता है उसमें हम जरूर ताली बजाएं और अपने रोग दूर करें ।

प्रा रविशंकर कोलते
     नागपुर
[29/06, 4:54 pm] Anita 👅झा: विषय __ भजन कीर्तन के समय ताली क्यों बजाई जाती है
स्वास्थ के प्रति सजगता चेतना स्फूर्ति तो होती ही है साथ ही 
भजन कीर्तन में ताली समर्पण का भाव होता है , मंदिरो घरों में भग़वन को जगाने हेतु ताली बजाई जाती है ।आरती ,अंत में भी ताली भाव विभोर हो बजाई जाती है 
हिन्दू रीति रिवाजों के अंतर्गत मान्यताओं के अनुसार भोग अर्पण करते वक्त बच्चों की पैदाइश पर तीन सात एक ताली का महत्व है 
पुराने समय में ध्वनि यंत्रो का उपयोग नही था गाँव देहातों में आज भी अपनी ख़ुशियाँ प्रगट करने ताली का उपयोग होता है 
कोई थाली बजाकर कोई ताली बजा सन्देश देते है बेटा हुआ तो तीन से सात ताली बेटी हुई तो एक ताली अब समय बदल रहा है , 
विद्युत यंत्रो का उपयोग करने लगे है । एक व्यक्ति के द्वारा ही मंदिर के पट सुबह खुल जाते है विद्युत यंत्रो की करतल ध्वनि से सुस्वागतम् गीत ताली से शुरूवात होती है आजकल विविध सम्मेलनो अपनी अभिव्यक्ति मोबाईल पर वाह वाह के साथ तालियाँ लगातार बजती रहती है 
साथ ही सचेत चेतना जगाने आज भी अपनी बात तालियों के माध्यम से प्रगट करते है ।
[29/06, 5:14 pm] रानी अग्रवाल: लेख।
२९_६_२०२२,बुधवार।
विषय_ भजन कीर्तन करते समय तालियां क्यों बजाई जाती हैं? 
     हमारा देश भारत एक आध्यात्मिक देश है,यहां का हर भारतवासी अध्यात्म में विश्वास रखता है।लोग भजन _कीर्तन करते हैं उनके माध्यम से अपने आराध्य को मनाते हैं ,ध्यान_ योग लगाते हैं,पूजा _पाठ करते हैं,भक्ति में लीन हो आनंद प्राप्त करते हैं।
     भजन कीर्तन में खूब तालियां बजाईं जाती हैं और आनंद लिया जाता जाता है।
ताली बजाने से क्या_ क्या लाभ होते हैं यदि हम ये जान लें तो अपने आप समझ आ जायेगा कि तालियां क्यों बजाते हैं?
     तालियां बजाना आध्यात्मिक परंपरा है। ताली बजाने से हमारा ध्यान इधर_ उधर नहीं जाता,भक्ति में लीन हो जाता है।वातावरण संगीतमय हो जाता है ।जब हम दोनों हाथ ऊपर करके ताली बजाते हैं उसका अर्थ है कि जाने _ अनजाने में किए गए हमारे पाप झड़ जाते हैं,हम पापों से मुक्त होकर हल्का महसूस करते हैं,दोनों हाथ ऊपर करने का अर्थ पूर्ण समर्पण होता है,हम ईश्वर से कहते हैं देखिए हम पूर्ण रूप से आपको समर्पित हैं,ये देखकर ईश्वर भी तुरंत अपने भक्त की पुकार सुनते हैं,उसके पास आ जाते हैं।
     ताली बजाने का वैज्ञानिक और वैद्यकीय महत्व भी है।हमारे हाथ की हथेलियों में हमारे शरीर की हर नस होती है, उनमें रक्त संचार होता है, ताली बजाने से शरीर के हर अंग का रक्त प्रवाह ठीक हो जाता है,यहां तक कि दिमाग की बहुत सी बीमारियां भी ठीक हो जाती हैं।
आजकल जो एक्यूप्रेशर की प्रथा है उसके अनुसार हमारे हाथों में हरेक अंग का प्वाइंट होता है जो ताली बजाने से दबता है और हमें रोगों से मुक्ति मिलती है इसलिए हम देखते है कि जहां कहीं भी योग क्लासेस चलती है वहां लोग कुछ देर के लिए दोनों हाथों को मिलाकर तालियां बजाते हैं।
     तालियां बजाने हमारी बहुत सी भावनाओं को प्रदर्शित करता है जैसे_ ये प्रतीक है प्रसन्नता का,हम जब कभी खुश होते हैं तो ताली बजाते हैं, ताली बजाने से हमारे अंदर नई ऊर्जा का सृजन होता है,किसी का ध्यान आकर्षण करने के लिए भी ताली बजाते हैं और किसी को चुप कराने के लिए भी ताली बजाकर उसे चुप रहने का इशारा कर देते हैं,किसी को बधाई और शाबासी देने के लिए ऐसा करते हैं, ताली बजाने में आनंद भरा है,उत्साह भरा है,नई उमंग भरी है,हिम्मत भरी है।
     इस्प्राकार हम देखते हैं कि ताली बजाने के अनेक लाभ हैं
इसलिए भजन कीर्तन में ताली बजाई जाती है।
 फिर हम क्यों न बजाएं ताली,
जब चाहो बजाओ" ठोको ताली"।
स्वरचित मौलिक लेख_____
रानी अग्रवाल ,मुंबई।
[29/06, 5:45 pm] कुम कुम वेद सेन: विषय भजन करते समय ताली क्यों बजाते

भजन करते समय ताली बजाने से एक प्रकार का संगीतमय वातावरण हो जाता है।
भजन के साथ ताली का धुन
सुनने में आकर्षक और लयात्मक लगता है

वैसे ताली बजाने के कई फायदे हैं
पहला फायदा यह है कि शरीर में रक्त संचार में तीव्रता आती है
दूसरा फायदा यह है कि एक्यूप्रेशर के पॉइंट्स पर जब दबाब पड़ते हैं तो अनेक प्रकार की छोटी-छोटी बीमारियां अपने आप ठीक होने लगते हैं

ताली बजाना एक प्रकार का व्यायाम है जिसमें मस्तिष्क के न्यूरॉन और कंधे के मसल्स हड्डियां सब सक्रिय हो जाती हैं जो शरीर के लिए बहुत उपयोगी है।
धार्मिक बिंदु को ध्यान में रखकर वैज्ञानिक दृष्टिकोण से अध्ययन करने पर भारतीय संस्कृति की हर क्रिया बहुत उपयोगी लाभप्रद कहलाती है

कुमकुम वेद सेन
[29/06, 5:50 pm] मीना कुमारी परिहारmeenakumari6102: आरती,भजन, अथवा कीर्तन करते समय तालियां क्यों बजाई जाती है....?
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         हमारे सनातन धर्म में जब भी आरती भजन अथवा कीर्तन होता है, तो उसमें सभी लोग तालियां जरूर बजाते हैं, लेकिन हममें में से यह अधिकांश लोगों को यह मालूम नहीं होता है कि आखिर यह तालियां क्यों बजाई जाती है...? तो ज्यादातर लोग बिना कुछ जाने- समझे ही तालियां बजाया करते हैं और घर मैं भी बचपन से ही पूर्वजों को ऐसा करते देखते रहे हैं ।प्राचीन काल से मंदिरों में पूजा आरती, भजन ,कीर्तन आदि में समवेत रूप से ताली बजाने की परंपरा रही है ।जो हमारे शरीर को स्वस्थ रखने का एक अत्यंत उत्कृष्ट साधन है ।डॉक्टरों का कहना है कि हमारे हाथों में एक्यूप्रेशर पॉइंट्स अधिक होते हैं, ताली बजाने के दौरान हथेलियों के एक्यूप्रेशर केंद्रों पर अच्छा दबाव पड़ता है ।जिससे शरीर के अनेक बीमारियों में लाभ पहुंचता है और शरीर निरोगी बनता है। इसलिए ताली बजाना एक उत्कृष्ट व्यायाम है।
          श्री रामकृष्ण देव कहा करते थे की 'ताली बजाकर प्रातः काल और सायंकाल हरि नाम भजो'। ऐसा करने से सब पाप दूर हो जाएंगे जैसे पेड़ के नीचे खड़े होकर ताली बजाने से पेड़ पर की सब चिड़िया उड़ जाती हैं, वैसे ही ताली बजाकर हरि नाम लेने से देह रूपी वृक्ष से सब अविद्यारूपी चिड़िया उड़ जाती हैं।
                ऐसा कहा जाता है कि जब हम कीर्तन के समय हाथ उठाकर ताली बजाते हैं, तो इसमें काफी शक्ति होती है ,यहां तक की संकीर्तन से हमारे हाथों की रेखाएं तक बदल जाती हैं।
         इस तरह ताली बजाना दुनिया का सर्वोत्तम सहज ,सरल योग है। यदि प्रतिदिन नियमित रूप से ताली बजाकर कई रोग दूर किए जा सकते हैं और स्वास्थ्य की समस्याओं को सुलझाया जा सकता है।


 डॉ मीना कुमारी परिहार
[29/06, 5:51 pm] सुरेन्द्र हरडे: अग्निशिखा मंच को नमन

आज की विधा *लेख*

विषय *भजन गाते समय ताली क्यों बजाई जाती है*
         भारत आध्यात्मिक विश्व गुरु है। रामकृष्ण गौतम गांधी की यह पावन भूमि देवी देवताओं हिंदु मुस्लिम शिख ईसाई सभी धर्मो मानसन्मान रखते हैं। अनेक त्यौहार या मनाऐ जाते हैं।
ताली क्यों बजाई जाती है इसका वैज्ञानिक कोई पृष्ठ भूमि नहीं है भारत में देवी देवताओं की पूजा अर्चना करते समय तालियां बजाने की परिपाटी चली आ रही है। ताली बजाने से दोनों हाथों का घर्षण होने से जो सकारात्मक उर्जा प्राप्त होती है। इसी वजह से तालियां बजाने से दोनों हाथों जुड़ते हैं नसों की बिंदु दब जाने रक्तप्रवाह सही होता है। 
    धार्मिक दृष्टि से इसका विचार किया एक लय में ताली बजाने भक्ति रस में डुब जाने से जिंदगी में सकारात्मक आती है। गलत विचार नहीं आते आनंद की अनुमति प्राप्त होती है।
     आजकल हास्य क्लब जोर जोर से तालियों बजाने से इक्युप्रेशर अपने आप हो जाता हैं। किसी का स्वागत शादी विवाह में मंगलाष्टक होते ही आतिशबाजी बैण्ड बाजा बाराती तालीया बजाते हैं अपनी खुशी का इजहार करते हैं उल्लास उमंग को प्रगट करने के लिए ताली बजाने ने रितिरिवाज है।
     कुछ हास्य कवि सम्मेलन हास्य कवि ताली नहीं बजाओंगे
ऐसा बोलकर जबरदस्ती श्रोता ओ से ताली बजावा लेते हैं।

सुरेंद्र हरडे
नागपुर
दिनांक २९/०६/२०२२
[29/06, 6:52 pm] पुष्पा गुप्ता / मुजफ्फरपुर: 🌹🙏अग्नि शिखा मंच 
विषय: " भजन के समय ताली क्यों बजाते हैं "
विधा : लेख
दिनांक: 29/6/22
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    भजन के समय ताली बजाने के कई
कारण है:--
    1 : सबसे पहला कारण तो है कि ताली के साथ मन का तल्लीन होना है।ईश्वर की भक्ति मे मन मगन हो जाता है,और,झूम उठता है ।
      2: पूरा शरीर झंकृत हो उठता है ।सक्रियता बढ़ जाती है ।
      3: संगीत के साथ इसका ताल मेल खूब बैठता है , जैसा संगीत वैसी ताली ।
      4:भजन के समय ताली बजाने से
बाहरी ध्वनियां प्रभावित नही करतीं ।
जिससे ध्यान ईश्वर पर केंद्रित हो पाता है।
      5 : भजन के समय ताली बजाने से
दुःख- दैन्य कम होता है ।
  कवि शिरोमणि भक्त , महाकवि तुलसीदास ने "रामचरित मानस" में
भजन के समय तालियों का महत्व बतलाते हुए कहा है कि -----
 " राम नाम सुन्दर कर तारी ।
   संशय विहग उड़ावन हारी ।। "
राम नाम जप के साथ-साथ यदि 
सुन्दर तालियाँ हो तो संशय रूपी
पक्षी निश्चय ही उड़ जाते हैं ।
       तालियाँ एक्यूप्रेशर का काम करतीं है जो हमारी शारीरिक चेतना और तेजस्विता प्रदान करती है और उर्जा बढाती है ।
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स्वरचित एवं मौलिक रचना 
 रचनाकार-डॉ पुष्पा गुप्ता
 मुजफ्फरपुर बिहार 
🌹🙏
[29/06, 7:16 pm] मुकेश कबीर भोपाल: आज का विषय रोचक है लेकिन इसमे इम्प्रोवाइजेशन के ज़्यादा ऑप्शन नहीं है क्योंकि शास्त्रों में ताली बजाने के सीमित कारण ही बताए हैं जो लगभग सभी सदस्य बता भी रहे हैं ।रामकृष्ण परमहंस ने एक बार कहा था कि भजन के साथ ताली बजाने से पूर्वजन्मों के पाप कट जाते हैं, यह बात बहुत बारीक और वैज्ञानिक है इसको इग्नोर नही किया जा सकता क्योंकि पाप हमेशा तनाव के रूप में मन मे प्रवेश करते हैं ,जितना बड़ा पाप उतना ज़्यादा तनाव, और हम खुद करके देख सकते हैं कि ताली बजाने से तनाव से मुक्ति मिलती है लेकिन सवाल है कि भजन के साथ ही ताली क्यों तो इसके सिर्फ दो ही कारण हैं कि पहले हिंदस्तान में भजन के अलावा और गायन था ही नहीं ,भजन को आदि संगीत कहा जा सकता है,उस वक़्त कोई लाफ्टर क्लब, कोई बॉलीबुड संगीत नही था इसलिए भजन ही करना होता था लेकिन भजन भी सामूहिक ज़्यादा होता था और सामूहिक भजन में ताली बहुत ज़ुरूरी है तभी सबकी लय एक सी रहेगी,आज तो ढोलक और तबला है लय देने के लिए लेकिन पुराने ज़माने में क्या था ,"अपना हाथ जगन्नाथ" सारे काम हाथ से ही होते तो ताली भी हाथ से देना बनता है ...
मेरी बात पसन्द आयी हो तो  
"दे ताली"
                    *डॉ. मुकेश "कबीर"* 🙏🙏

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