Type Here to Get Search Results !

अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच के ब्लॉक पर आज दिनांक 27 /6 /2022 को प्रदत्त विषय**** गुल्लक ****पर बाल रचनाएं पढ़ें *******डॉ अलका पांडे मुंबई



गुल्लक
 गुल्लक मेरी  मुझको प्यारी 
यह रूप रंग में है न्यारी।।
बचत करना हमको सिखलाती संकट में है काम आती।।
दादा जी ने हमको सिखाया।
 बच्चों पैसे को  बचा कर रखना।।

गुल्लक  बचत करने  की आदत डालती । 
मम्मी को जब बढ़ती जरूरत ।।
मेरी गुल्लक काम आती ।
मम्मी खुश हो गले लगाती ।।
 मेरी गुल्लक मुझको प्यारी ।
यह रूप रंग में है न्यारी।।

जब मेले में जाता हूं ।
नई  गुल्लक ले आता हूं।।
मेहमानों  से जो पैसे मिलते ।
गुल्लक के पेट में रखता हूं ।।
पैसे रहते  सदा सुरक्षित।
गुल्लक को छुपा कर रखता हूं।।

गुल्लक मेरी मुझको प्यारी  ।
यह रूप रंग में है न्यारी।।
जब जब यह भर जाती है ।
 तोड़कर पैसा निकालते हैं।।
पैसों से मैं दादा दादी के लिए ।
जरूरत का सामान ले आता हु।।

अलका पाण्डेय मुम्बई

♣️♣️♣️♣️♣️♣️♣️♣️♣️♣️♣️♣️♣️♣️







[27/06, 9:00 am] वैष्णवी Khatri वेदिका: सोमवार /27/6/2022
आज का विषय/गुल्लक बाल गीत 

मेले से मैं गुल्लक लाया।
उसको मैंने बड़ा सजाया।।
माँ पापा जब पैसे देते।
गुल्लक अपनी कर में लेते।।

सिक्कों की हम गिनती करते।
नोटों को गिन गिन कर रखते।।
पात्र हवाले सिक्के करते।
फिर मोड़ कर नोट है भरते।।

रकम बचा कर हम हैं रखते।
आड़े वक्त इसको खर्चते।।
बचत करना सीख हैं जाते।
आड़े वक्त काम हैं आते।।

माँ का चश्मा टूट गया था।
घर को कोई लूट गया था।।
माँ को बड़ी असुविधा होती।
वो तो किसी से न कुछ कहती।।

माँ का जब जन्मदिवस आया। 
गुल्लक फोड़ी चश्मा लाया।।
माँ को चश्मा बड़ा ही भाया।
खुश हो मैं फूला न समाया।

गुल्लक हमारी बड़ी प्यारी।
लगती है वो न्यारी न्यारी
मेरी मात बलैयाँ लेती।
मुझे वो आशीष है देती।।

वैष्णोखत्रीवेदिका
जबलपुरमध्यप्रदेश
[27/06, 9:11 am] Nirja 🌺🌺Takur: अग्नि शिखा मंच
तिथि -२७-६-२०२२
विषय-बाल कविता गुल्लक
             गुल्लक
गुल्लक गुल्लक मेरी गुल्लक
छोटी सी सुंदर मिट्टी की गुल्लक 
कितनी भरी तू कितनी खाली
 देखो मैने कितनी बचत कर डाली 
मुझे बाज़ार में क्रिकेट किट है भाया
पापा ने कहा मुझसे ,जैसे ही तुम्हारी 
गुल्लक भरे, क्रिकेट किट मैं लाया
तब से पैसे मैं जोड़ रहा हूॅं
गुल्लक को मैं भर रहा हूॅं 
पापा ने कहा है मुझसे, घर में
जब भी तुम देखो,खाली कमरे में बिजली पंखा चलते
उसको जब जब बंद करोगे
अपनी गुल्लक तब तब भरोगे 
गुल्लक आधी से ज्यादा भर रही है
क्रिकेट किट पास आ रही है
कभी लगता पापा मुझसे
ज्यादा जानते हैं, तभी तो धरती के गड्ढे रुपी गुल्लक में पानी भरा
हैं, ऐसा वह मुझसे कहते हैं। 

नीरजा ठाकुर नीर
 पलावा मुंबई महाराष्ट्र
[27/06, 9:38 am] शोभा रानी तिवारी इंदौर: गुल्लक बाल कविता

चून्नू मुन्नू जब मेले में जाते,
 गुल्लक खरीदकर लाते थे,
 फिर उनको जो पैसा मिलता,
 पैसों को गुल्लक में डालते थे।

  जब-जब गुल्लक भर जाता,
  उसे फोड़कर रुपए गिनते थे ,
  आड़े समय में काम आता था,
  पैसा माता - पिता को दे देते थे।

  जन्मदिन पर तोहफे देते लाते,
  अपने लिए खिलौने खरीदते हैं,
  बचत करने की आदत पड़ जाती,
  जीवन में मितव्ययी बन जाते हैं।

श्रीमती शोभा रानी तिवारी इंदौर
[27/06, 9:51 am] Dravinasi🏆🏆: अग्नि शिखा मंच 27 जून 2022 दिन सोमवार विषय गुल्लक बाल गीत गुल्लक बच्चों का है खजाना, एक एवं कर भर जाते। जन्म दिवस में फोडा जाता, पैसे देख के खुश हो जाते।। मनमे होता खेल ले आये,बेठ के उसमें खेले खेल। पर दादीआकरके कहती, जमा रखेगे लेंगे रेल।। बातें सुनकर खुशी मनाये, पर चिंता में सो ना पाते। गुल्लक बच्चों का है खजाना, एक एक कर भर जाते। ‌ ‌ ‌। मेले में पैसे ले जये,मन मन के लड्डू खाये। बार बार दादी से कहते, रेल लिवा दो खुशी मनाये। कोई पैसे जब देते थे,झट गुल्लक में डालन जाते। गुल्लक बच्चों का है खजाना, एक एक कर भर जाते। डॉ देवीदीन अविनाशी हमीरपुर उप्र
[27/06, 10:24 am] रागनि मित्तल: जय मां शारदे
*********
 अग्निशिखा मंच
***********
 दिन -सोमवार 
दिनांक- 27/6/2022 बाल गीत
प्रदत्त विषय - *गुल्लक*

 पिंकू, चिंकू ,गुड़िया मुनिया,मेले से गुल्लक लाए ।
अब सब में यह शर्त लगी है किसकी पहले भर पाए ।
रोज सभी डालते पैसे मम्मी,पापा से लेते। 
जल्दी-जल्दी जाकर अपनी गुल्लक में भर देते।
एक महीने के बाद सभी बोले अब गुल्लक लाओ।
देखें किसकी कितनी भर गई सभी मिलकर बतलाओ।
सब की गुल्लक पूरी भर गई पिंकू की लेकिन नहीं भरी।
जब सब हंसने लग गए तब मम्मी ने बताई बात बड़ी।
इसकी भर जाती सबसे पहले पर इसने काम बड़ा किया।
एक मांगने वाला आया था गुल्लक से उसको दान दिया।
सारे बच्चे शर्माए फिर बजाई ताली।
अपने-अपने पैसे देकर भर दी गुल्लक खाली।

रागिनी मित्तल 
कटनी ,मध्य प्रदेश
[27/06, 11:46 am] विजेन्द्र मोहन बोकारो: मंच को नमन
विधा:-- *बालगीत*
शीर्षक:-- *गुल्लक*

दादू के संग मान्यू मेल आया,
मेले मे गुल्लक देख कर जिद कर खरीद कर घर ले आया
रोज सुबह स्कूल से पहले
मां- पापा,दादू-दादी को
 प्रणाम कर कहता 
इसमें कॉइन डालो।
सब लोग पांच का सिक्का डालते।
 एक महीने में भारी होगया 
दादू उसे तोड़ दिए
 इसे गिनना सिखाया
गिरने के बाद बोला ₹225 हुए
उस रूपए को बैंक में मान्यू के
नाम जमा करने के बाद बचत खाता साथ में नया गुल्लक
बाजार से खरीद कर दिए।
मान्यू बहुत खुश हो गया
अपने दोस्तों को दिखाकर
दादू को शुक्रिया अदा किया।

*बालमन छोटी-छोटी कामों से खुश हो जाता है।।*

विजयेन्द्र मोहन।
[27/06, 1:11 pm] रवि शंकर कोलते क: सोमवार दिनांक २७/६/२२
विधा *****बाल गीत 
विषय***#*** गुल्लक***#
                   ^^^^^^^^^

चिंटू ने मां से कहा जब तू बाजार जाएगी ।
मेरे लिए खिलौनेके बदले गुल्लक लाएगी ।।
रिंकी ने पूछा चिंटू से गुल्लक क्यूं मंगाया ।
वो ब्यांक है बच्चोंकी जो खुशी दे जाएगी ।।१

मां ने ला दिया गुल्लक है बहुत न्यारी ।
जिसपे की गई है बहुत मस्त चित्रकारी।।
जमा करूंगा मैं नियमित रूपसे रुपए ।
खरीदूगा मां के लिए साड़ी सुंदर प्यारी ।।२

बचत करने की आदत गुल्लक सिखाएं ।
जमापूंजी भविष्य में किसी काम आए ।।
अपना पैसा सम्मान से जीना सिखाता ।
किसीपे क़र्ज़ लेनेकी नौबत न आ जाए ।।३

हमारी जिम्मेदारी अब तक मां ने ली ।
खाना कपड़ा दिया स्कूल की भरी फी ।।
बच्चों का भी फ़र्ज़ है कि मां को सुख दे ।
दुख दर्द सहे मां ने दूसरों की सेवा की ।।४


प्रा रविशंकर कोलते
      नागपुर
[27/06, 1:24 pm] ब्रज किशोरी त्रिपाठी: २७-६-२०२२
बिषय- गुल्लक

बच्चों को गुल्लक बडी़ है प्यारी।
शानू के बाबा ने बचत सिखाई।
धनतेरश को शानू की गुल्लक आई।
आते ही सब.पर धाक जमाई।

जानु बोला कितनी सुन्दर गुल्लक है भाई।
भानू झट से गुल्लक को टीका लगाई।
बडी़ सलोनी सुन्दर है
लक्ष्मी इसके अन्दर है।-
रानू बोला हमको भी दिखलाओ भाई।

शानू बोला मु्ँह दिखाई
लाओ।
तब गुल्लक को हाथ लगाओ।
जब गुल्लक भर जायेगी
तब संकट में काम आयेगीं

बचपन से बचत करना सिखो।
बाबा ने मेरे हमे सिखाई।
शानू के लिए एक गुल्लक आई।

स्वरचित
बृजकिशोरी त्रिपाठी
गोरखपुर। यू.पी
[27/06, 1:43 pm] निहारिका 🍇झा: नमन मंच
अग्निशिखा
विषय;-गुल्लक
विधा;-बालगीत
दिनाँक;-27/6/2022
गुल्लक लगती हमको प्यारी 
इसमें बसती जान हमारी।
घर मे आते जब मेहमान
मिलता उनसे हमको मान।
 त्यौहारों पर भी मिलता
बड़ों से हमको जो इनाम
उसको जमा करने के
गुल्लक ही तो आती काम।।
देख के भारी भारी गुल्लक
खुशियां हम सबमें है छातीं
करते हम फिर इंतजार
गुल्लक से बरसें रुपये हजार।।
कर पाएं हम इनसे
किसी की तो मदद इक़ बार।।
निहारिका झा
खैरागढ़ राज(36 गढ़)
[27/06, 2:02 pm] 💃💃sunitaअग्रवाल: विषय~ गुल्लक
शीर्षक~ जमा मैं मज़ा
विधा ~कविता

चुनिया मुनिया गई पापा के संग घूमने मेला
तरह तरह के खिलौने देख कर रही थी तंग पर पास न था धेला
पापा ने दोनों को समझाया
दोनों को समझ आया
देखने लगी सुन्दर रंग बिरंगी गुल्लक 
पापा ने कहा,,"जमा करो, पैसे अपने,ना करो पूरे इतने"
बात समझ आई मुनिया चुनिया को
खरीदी सुंदर गुड़ियां के मुँह वाली गुल्लक

रोज देख खुश होती , मिलने वाले पैसे करने लगी जमा 
ताली बजा , नाचती सबको दिखाती यह हमारी मिनी बैंक 
जमा मैं मज़ा है सब दोस्तों को भी बताती
एक दिन,
तोड़ी गुल्लक निकले पैसे कुल जमा 250
लगी सोचने दोनों क्या करें इन पेसो का, क्यों करें "वेस्ट ऑफ मनी "खिलौनों में
चुनिया ने कहा,"माँ का चश्मा," 
मुनिया बोली हां दादाजी का गर्म तकिया 
दोनो एक साथ बोल उठी , इतने पैसों में तो आ जाएगा चश्मा व तकिया
 पापा का हाथ पकड़ नाच उठी मुनिया चुनिया 
कहने लगी अरे, पापा कितना मजा 
*जमा मैं मज़ा* 
हां हां हां सब हंसने लगे। 


सुनीता अग्रवाल इन्दौर स्वरचित🙏🏻🙏🏻🌹
[27/06, 2:38 pm] वीना अचतानी 🧑🏿‍🦽: वीना अचतानी 
विषय**** गुल्लक ****
मुन्नी के पापा गुल्लक लाए
गुल्लक ने उसके पैसे बचाए
नाना नानी जब सिक्के दे जाऐं 
सब गुल्लक में समाए
मुन्नी रोज़ हिसाब लगाए
मेरे पास इतना पैसा है
सोच सोच कर इतराए 
ये बचत करने की आदत
जिन्दगी को खुशहाल बनाए।।
वीना अचतानी 
जोधपुर ।।
[27/06, 2:39 pm] साधना तोमर: गुल्लक (बालगीत)

छोटी सी गुल्लक यह, 
मेरी मम्मी ने दिलायी। 
सिक्के डालकर कुछ,
मैंने प्यार से हिलायी। 

मेरी दादी और नानी ने,
कुछ रुपए मुझे दिये।
जोड़-जोड़ कर मैंने वे,
बहुत सारे कर लिये।

बूंद बूंद से ही तो देखो,
घड़ा भर जाता है।
कोड़ी-कोड़ी जोड़कर,
खजाना कहलाता है।

मांँ के जन्मदिन पर,
गुल्लक मैंने वह तोड़ी।
उपहार माँ के लिए मैं,   
लाया मिठाई थोड़ी।

मांँ को दिया प्यार से, 
मिठाई भी खिलायी।
गले से लगाया मांँ ने,
आंँखें थी भर आयी।

माथा चूम-चूमकर मेरा,
बलिहारी वह जाती थी।
अपने हाथों से मिठाई,
प्यार से खिलाती थी।

डा. साधना तोमर
बड़ौत (बागपत)
उत्तर प्रदेश
[27/06, 2:50 pm] Anita 👅झा: *गुल्लक जादूगर झूमरु *

आओ बच्चों तुम्हें दिखाये ।
गुल्लक बजा खेल दिखाये 
झूमरु जादूगर की विविध कलायें 
गुल्लक संग भीड़ लगी चौबारे में 

बबलू पिंकु ,पिंकी गुल्लक लेते 
धूम मचाते झूमरू गुल्लक वाला है 
अजब ग़ज़ब के खेल तमाशे है 
बूढ़े जवान बच्चों की भीड़ लगी है 

गुल्लक बजा रंग जमाया है
बच्चों के हाथों में गुल्लक दे 
झूमरू ने ख़ूब रंग जमाया 
रँगो से साज़ सजाया झूमरू है

बंदर भालू शेर चीते गधे घोड़े 
खोल पहन संग बैठे गुल्लक है
रोज़ी रोटी अजब मिसाल हैं 
अपनी झोली चादर फैलाये 
झूमरू जादूगर बन बहुरूपिया हैं
अनिता शरद झा अटलांटा
[27/06, 2:53 pm] कुंवर वीर सिंह मार्तंड कोलकाता: 🌺 आज का विषय/गुल्लक f
🌺 बाल गीत 

बूंद बूंद से घट घट भरता है
कदम कदम से पथ कटता।
एक एक पैसा यदि डालो
शनै: शनै: गुल्लक भरता।

बोलो गुल्लक क्या होता है
देखा है तो बतलाओ।
नहीं जानते अगर इसे
तो दादी से पूछो जाओ।

मिट्टी से ही बनता है यह
शक्ल घड़े जैसी होती।
बंद हर हर तरफ से होता है
ऊपर संधि बनी होती।

उसी संधि से रुपए पैसे
इसमें डाले जा सकते।
भर जाए तो इसे तोड़कर
सभी निकाले जा सकते।

यह भारत की जमा योजना
बच्चों बहुत पुरानी है।
जमा वही कर पाते
जिनने बात बड़ों की मानी हैं।

फिजूल खर्ची मत करना तुम
जीभ चटोरी मत करना।
जो भी पैसे बच जाएं
गुल्लक में डाल जमा करना।

जब भी ऐसा मौका आए
मां के पास न पैसा हो।
गुल्लक तोड़ उसे दे देना
बच्चा हो तो ऐसा हो।

माता कितने आशीष देगी
शीश झुका कर लेना तुम।
तुम पर कोई कमी न होगी
जब सीखोगे देना तुम।

© कुंवर वीर सिंह मार्तंड, कोलकाता 
[27/06, 3:14 pm] Nirja 🌺🌺Takur: अग्नि शिखा मंच
तिथि -२७-६-२०२२
विषय-बाल कविता गुल्लक
             गुल्लक
गुल्लक गुल्लक मेरी गुल्लक
छोटी सी सुंदर मिट्टी की गुल्लक 
कितनी भरी तू कितनी खाली
 देखो मैने कितनी बचत कर डाली 
मुझे बाज़ार में क्रिकेट किट है भाया
पापा ने कहा मुझसे ,जैसे ही तुम्हारी 
गुल्लक भरे, क्रिकेट किट मैं लाया
तब से पैसे मैं जोड़ रहा हूॅं
गुल्लक को मैं भर रहा हूॅं 
पापा ने कहा है मुझसे, घर में
जब भी तुम देखो,खाली कमरे में बिजली पंखा चलते
उसको जब जब बंद करोगे
अपनी गुल्लक तब तब भरोगे 
गुल्लक आधी से ज्यादा भर रही है
क्रिकेट किट पास आ रही है
कभी लगता पापा मुझसे
ज्यादा जानते हैं, तभी तो धरती के गड्ढे रुपी गुल्लक में पानी भरा
हैं, ऐसा वह मुझसे कहते हैं। 

नीरजा ठाकुर नीर
 पलावा मुंबई महाराष्ट्र
[27/06, 3:22 pm] पल्लवी झा ( रायपुर ) सांझा: बाल गीत 
    गुल्लक 

आज मैं जब मेला जाऊंगा 
माँ से गुल्लक खरीदाऊंगा 
रखुंगा मैं उसका हमेशा ख्याल
भरा रहेगा उसमें जो माल ।

बड़ा सा उसका पेटू होगा ,
पैसा उसमें खूब भरेगा ।
जब मैं जाता अपनों के घर 
शगुन में मिलते पैसे हर घर ।

पाई पाई जोड़ा करूंगा ,
अपनी गुल्लक भरा करूंगा ।
जब आयेगा राखी त्योहार,
बहना को दूंगा इससे मैं उपहार।

आये गुल्लक मुसीबत में काम ,
करे समस्या को यह सदा तमाम ।
इसलिए बचत हमको है करना ,
गुल्लक को अपने घर रखना ।

पल्लवी झा (रूमा)
रायपुर छत्तीसगढ़
[27/06, 3:57 pm] ओम 👅प्रकाश पाण्डेय -: गुल्लक ( बालगीत)----- ओमप्रकाश पाण्डेय
मिट्टी का एक गुल्लक छोटा
यह जान से भी प्यारा होता
मामा नाना नानी दादी दादा
से जो भी पैसा बच्चों को मिलता
सब जमा इसी में हो जाता....... 1
यह बच्चों का अपना बैंक होता
हर बच्चे का अपना गुल्लक होता
छोटी छोटी जरूरतें काट कर
टाफी बिस्किट का मोह छोड़ कर
पैसा इसमें जमा वह करता रहता........ 2
रोज रोज इसका वजन बढ़ता
रोज रोज खुशी बच्चों को मिलता
हम अभी नहीं फोड़ेंगे इसको
मन ही मन हर बच्चा कहता
बड़ी मुश्किल से वह मन को रोकता........ 3
होली या दीवाली पर्व के पहले
इसको प्रेम से फोड़ा जाता
यह पैसा तो है केवल मेरा
यह भाव हर बच्चे के मन में होता
फिर पड़ाका, फुलझड़ी, रंग खरीदा जाता......... 4
बचपन से ही बचत करने का
गुल्लक बच्चों को शिक्षा देता
वह व्यर्थ पैसा खर्च नहीं करता
छोटी छोटी बचत करने से ही तो
एक बड़ा राशि एक दिन हो जाता........... 5
( यह मेरी मौलिक रचना है ----- ओमप्रकाश पाण्डेय)
[27/06, 4:08 pm] मीना कुमारी परिहारmeenakumari6102: गुल्लक (बाल कविता)
***********************
 जी हां, मैं गुल्लक हूं
 मैं बच्चों का खिलौना हूं
मेरा रूप रंग -बिरंगा
खूबसूरत चित्रकारी, नक्काशी
से सजी
मेरा मनोहारी रूप,अनोखा रूप
मोहित करती
बच्चों के बीच खूब सजाती
मेले,और बाजारों में खूब बिकती
बच्चे जिद करते मम्मी -पापा से 
गुल्लक चाहिए अभी मुझे
ला दो ना पापा!
खूब संजोकर मुझे लाते घर
सजाकर रखते प्यार से मुझे
जब जाते रिश्तेदारों के घर
खूब मिलते पैसे
खुशी होकर बच्चे टांफी खाते ,कुछ बचाकर मुझमें रखते
 पैसे बचत का हुनर सीखाती हूं
कितना पैसा डाला मुझमें
इसका रोज हिसाब लगाते
फिर क्या खुशी से कहते वाह मेरे पास इतना पैसा
अरे श्याम तू बता तेरे पास कितने हैं गुल्लक में जमा
बच्चों मुझ गुल्लक का एहसान मानों
जीवन का मूल सीखाती हूं
बच्चों में ये बचत की आदत
तुम्हारे जिन्दगी में खुशहाली है लाती
 घर में दादा -दादी , नाना नानी से पूछो
बचत की आदत में ही है समझदारी

 डॉ मीना कुमारी परिहार
[27/06, 4:43 pm] सुरेन्द्र हरडे: अग्निशिखा मंच नागपुर

आज की विधा *बालगीत*

विषय:- *गुल्लक* 

पिंटू मां के साथ बाजार गया
बाजार में गुल्लक देखा पिंटू बोला
मां, मां, मुझे गुल्लक चाहिए मां,
बोली गुल्लक तु क्या करेगा।।१।।

पिंटू ने बडे जिद से गुल्लक 
लिया रोज एक एक रुपया जमा करुंगा।बडे भैय्या ने गुल्लक 
देखा पिंटू को डर हुआ।।२।।

मां मेरी गुल्लक रख दो कही छुपाकर ऐसी जगह जिसका 
पता चले चिंटू भैय्या मेरे गुल्लक पर नजर गड़ाए है अपने पैसे खर्च किएं।।३।।

मुश्किल से बीस रुपए मैंने जोडे होंगे किसे पता है शायद ये भी थोडे होंगे जब सौ रुपए होगे
तो परियों की किताब खरीद कर
पढोगा ।।४।। 

सुरेंद्र हरडे
नागपुर
दिनांक २७/०६/२०२२
[27/06, 5:05 pm] कुम कुम वेद सेन: विषय गुल्लक
दिवाली का त्यौहार आने वाला है
बाजार तरह-तरह के खिलौने से सजे हैं
बच्चे दादा जी के साथ बाजार गए
बच्चों ने पूछा दादाजी यह क्या है
दादाजी ने कहा यह गुल्लक है
पैसा जमा करते हैं
एक बैंक है बच्चों के लिए
इसे खरीद लाते हैं दादा जी ने
गुल्लक खरीदा
सभी बच्चे घर में बहुत उत्साहित है
बच्चे आपस में बात करते हैं
यह बच्चों का बैंक कहलाता है
इसमें हम सभी पैसे डालेंगे
प्रतिदिन सुबह उठकर दादा जी बच्चों को पुकारते
गुल्लक में अपनी ओर से रोज पैसे डालते
इस तरह से बच्चों को पैसा बचाना
दादा जी ने अच्छी तरह सिखाया
अगली दिवाली को बच्चों ने गुल्लक फोड़ दी
गुल्लक से हजारों रुपए निकल आए
फिर दिवाली में नई गुल्लक खरीद लिए
बच्चों का बैंक हमारा गुल्लक

कुमकुम वेद सेन
[27/06, 5:08 pm] आशा 🌺नायडू बोरीबली: 🌹शीर्षक - गुल्लक 🌹
********************
पप्पा ला दो , एक गुल्लक , जोड़ूंगा बहुत पैसा ।     

पैसा जोड़ जोड़कर , अमीर बनूंगा , अमीर बनकर , आपके मेरे मम्मी के , सबके सपने , पूरे करूंगा ।               

जब आपके पास, पैसा न होगा , मैं अपने गुल्लक से आपको पैसा दूंगा ।     

आप चिंता न करो पापा, अपने गुल्लक को ,   
हमेशा भरता रहूंगा।   

नानी दादी , कुल्फी खाने देंगी पैसा , मैं उसे गुल्लक में डालूंगा। 

तीज त्यौहार में,       
मान सम्मान में , मिलेंगे जो रुपए , उसे भी गुल्लक में डालूंगा।                  

भरती जाएगी मेरी गुल्लक, मैं होता जाऊंगा अमीर , एक दिन करोड़पति, कहलाऊंगा।
*******************
डॉ.आशालता नायडू.
मुंबई .महाराष्ट्र.
********************
[27/06, 5:15 pm] डा. अंजूल कंसल इन्दौर: अग्निशिखा मंच 
विषय- गुल्लक 

नन्हे की बड़ी प्यारी बुआ आईं
गर्मी की छुट्टियों के दिन थे भाई 
बुआ बहुत सुंदर सी गुल्लक लाईं
पास बुलाकर,भतीजे को समझाईं।

नन्हे देख यह, गुल्लक बुआ लाई 
ऐसा कहकर, सौ का नोट दिखलाई 
मेरी प्यारी पिंकी,रानी तू भी आजा रे 
इस गुल्लक में कुछ, पैसे डाल जा रे।

गुल्लक देख बच्चे बहुत खुश हुए 
रोज -रोज एक रुपया डालने लगे 
जल्दी-जल्दी गुल्लक भरती गई 
पिंकी नन्हे गुल्लक ले उछल पड़े।

चलो मम्मी मेला, देखने शहर चलें
वहां लगा हुआ है,जोर शोर से मेला
हम भी खेलेंगे, नए नए खेल देखेंगे 
एक और सुंदर सी,गुल्लक खरीद लेंगे। 

डॉक्टर अंजुल कंसल "कनुप्रिया"
27-6-22
[27/06, 6:10 pm] रानी अग्रवाल: गुल्लक_ बालगीत।
२७_६_२०२२,सोमवार।
शीर्षक_ प्यारी गुल्लक।
मुन्ना मेले से गुल्लक लाया,
देख_ देख बहुत हर्षाया।
उसपे बनी बढ़िया चित्रकारी,
लगती सुंदर,प्यारी_ प्यारी।
गुल्लक ले के सबके पास गया,
दादा,दादी,मम्मी,पापा,भैया।
कहता सबसे दे दो रुपे_ पैसे,
गुल्लक जल्दी भर जाए ऐसे।
दादा बोले _ले बेटा,
सीखना धंधा करना।
दादी बोली _ले बेटा,
सीखना बचत करना।
मम्मी बोली_ ले बेटा,
राजा बेटा बनना।
पापा बोले _ले बेटा,
सीखना श्रम करना।
भैया बोले _थोड़ा मुझे दे देना,
मुन्ना रूठा,किया मुहूं बिचकाना।
गुल्लक ने सिखाया सबक, आदरणीय बनी शिक्षक।
बचत आती काम समय पर,
हाथ न फैलाना पड़े बुरे वक्त पर
छोटी मोटी जरूरतें करती पूरी,
जब आ पड़ती असमय मजबूरी
 मेरी गुल्लक सबसे न्यारी है,
मुझे गुल्लक बड़ी प्यारी है।
स्वरचित मौलिक बालगीत_ 
रानी अग्रवाल,मुंबई।
[27/06, 6:30 pm] अंजली👏 तिवारी - जगदलपुर: बालगीत
गुल्लक
********
मम्मी से मंगाएगा
बाजार से एक गुल्लक
रोज पैसै डालुगा 
चाहे चिल्लर हो या रूपये
ऐसे पैसे जमा नहीं होते
जितने देते मेहमान 
सब खर्च हो जाते
पैसे नहीं खाली हाथ
कुछ खरीदने हो तो 
 सबकी ओर देखो
कोई खरीदने के लिए
 पैसे लेलो कह दे
मम्मी पापा से
 मांग नहीं सकते
बेवजह चार बातें
 सुन नहीं सकते
इसलिए मम्मी से 
आज गुल्लक मंगाया हूं
अपने पैसे गुल्लक में डालूंगा
जरूरत के समय उसमें से खर्च करूंगा
किसी के आगे हाथ नहीं फैलाऊंगा
अभी से पैसे की कीमत जानूंगा
तभी बडा‌ होकर पैसे कमाऊंगा
रचनाकार
अंजली तिवारी मिश्रा जगदलपुर छत्तीसगढ़।
7987708655
[27/06, 9:19 pm] पुष्पा गुप्ता / मुजफ्फरपुर: 🌹🙏अग्नि शिखा मंच 
विषय : " गुल्लक "
बालगीत
दिनांक:27/6/22
**********************
माँ मुझे एक गुल्लक ला दो
मै उसमे पैसे डालूँगा--
नहीं खाऊँगा चाट- पकौड़े
मै पैसे रोज बचा लूँगा ।
           दादा- पापा पैसे देते,
          "जा बेटे कुछ खा लेना-"
           माँ मुझे जब टिफिन है देती
           कहती पैसे बचा लेना ।
खूब पढ़ोगे बड़े बनोंगे ,
एकदिन बन जाओगे विद्वान-
एक- एक पैसे बचाओगे तो,
बन जाओगे एकदिन धनवान !!

******************************
स्वरचित एवं मौलिक रचना 
रचनाकार-डॉ पुष्पा गुप्ता
 मुजफ्फरपुर बिहार 
🌹🙏

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.