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अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच के ब्लॉक पर आज दिनांक 18/ 5/2022 को प्रदत्त विषय पर लेख** लू लगने पर मृत्यु क्यों होती है †*****पर रचनाकारों के लेख पढ़े *****डॉ अलका पांडे मुंबई

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लू लगने से मृत्यु क्यों होती है ?

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हम सभी धूप में घूमते हैं फिर कुछ लोगों की ही धूप में जाने के कारण अचानक मृत्यु क्यों हो जाती है ?
यह बहुत ही गंभीर विषय है और जानना भी जरूरी है और परहेज करना भी जरूरी है कि लू लगने से मृत्यु क्यों हो जाती है,?

हमारे शरीर का तापमान हमेशा 37° डिग्री सेल्सियस होता है, इस तापमान पर ही हमारे शरीर के सभी अंग सही तरीके से काम कर पाते है ।

पसीने के रूप में पानी बाहर निकालकर शरीर 37° सेल्सियस टेम्प्रेचर मेंटेन रखता है, लगातार पसीना निकलते वक्त भी पानी पीते रहना अत्यंत जरुरी और आवश्यक है ।

पानी शरीर में इसके अलावा भी बहुत कार्य करता है, जिससे शरीर में पानी की कमी होने पर शरीर पसीने के रूप में पानी बाहर निकालना टालता है । (बंद कर देता है )

 जब बाहर का टेम्प्रेचर 45° डिग्री के पार हो जाता है और शरीर की कूलिंग व्यवस्था ठप्प हो जाती है, तब शरीर का तापमान 37° डिग्री से ऊपर पहुँचने लगता है ।

 शरीर का तापमान जब 42° सेल्सियस तक पहुँच जाता है तब रक्त गरम होने लगता है और रक्त में उपस्थित प्रोटीन पकने लगता 
है ।

 स्नायु कड़क होने लगते हैं इस दौरान सांस लेने के लिए जरुरी स्नायु भी काम करना बंद कर देते 
हैं ।

 शरीर का पानी कम हो जाने से रक्त गाढ़ा होने लगता है, ब्लडप्रेशर  लो हो जाता है, महत्वपूर्ण अंग (विशेषतः ब्रेन) तक ब्लड सप्लाई रुक जाती है ।
 व्यक्ति कोमा में चला जाता है और उसके शरीर के एक-एक अंग कुछ ही क्षणों में काम करना बंद कर देते हैं, और उसकी मृत्यु हो जाती है ।

गर्मी के दिनों में ऐसे अनर्थ टालने के लिए लगातार थोड़ा-2 पानी पीते रहना चाहिए और हमारे शरीर का तापमान 37° मेन्टेन किस तरह रह पायेगा इस ओर  ध्यान देना चाहिए  ।

कृपया 12 से 3 बजे के बीच घर, कमरे या ऑफिस के अंदर रहने का प्रयास करें ।

तापमान 40 डिग्री के आस पास विचलन की अवस्था मे रहेगा ।

यह परिवर्तन शरीर मे निर्जलीकरण और सूर्यातप की स्थिति उत्पन्न कर देगा ।

कृपया स्वयं को और अपने जानने वालों को पानी की कमी से ग्रसित न होने दें ।

किसी भी अवस्था में कम से कम 3 लीटर पानी जरूर पियें । किडनी की बीमारी वाले प्रति दिन कम से कम 6 से 8 लीटर पानी जरूर लें ।

जहां तक सम्भव हो ब्लड प्रेशर पर नजर रखें । किसी को भी हीट स्ट्रोक हो सकता है ।

ठंडे पानी से नहाएं । इन दिनों मांस का प्रयोग छोड़ दें या कम से कम 
करें ।

फल और सब्जियों को भोजन मे ज्यादा स्थान दें ।

हीट वेव कोई मजाक नही है ।

एक बिना प्रयोग की हुई मोमबत्ती को कमरे से बाहर या खुले मे रखें, यदि मोमबत्ती पिघल जाती है तो ये गंभीर स्थिति है ।

शयन कक्ष और अन्य कमरों मे 2 आधे पानी से भरे ऊपर से खुले पात्रों को रख कर कमरे की नमी बरकरार रखी जा सकती है ।

अपने होठों और आँखों को नम रखने का प्रयत्न करें ।

इस सन्देश को ज्यादा से ज्यादा प्रसारित कर अपना और अपने जानकार लोगों का भला 
करें ।
इन बातों को ध्यान में रखेंगे तो गर्मी से मृत्यु और लू लगने से मौत को टाला जा सकता है और इस बात पर हम सभी लोगों को ध्यान देना बहुत जरूरी है गर्मी से बचाव करें खूब पानी पिए, और हो सके तो दोपहर को बाहर ना निकले यह बातें ध्यान में रखना अति आवश्यक है इन दिनों
अलका पाण्डेय मुम्बई

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18/05, 1:36 am] रानी अग्रवाल: अग्निशिखा मंच।
विधा_ लेख।१८_५_२०२२
विषय_ लू लगने से मौत क्यों हो जाती है? इससे बचने के उपाय क्या है?
     यूं तो हम सभी जानते हैं कि गर्मियों में जब अति तेज धूप होती है और गर्म हवाएं चलती हैं उन्हें लू कहते हैं।सिर्फ अधिक गर्मी हो तो उसे लू नहीं कहा जाता परंतु जब अत्यधिक गर्मी के साथ जो गरम हवाएं चलती हैं उन्हें ही लू कहा जाता है।
     हम सभी लू के कहर से वाकिफ हैं।गरम देशों में ये हमेशा रहती हैं जो मध्य रेखा के आसपास हैं।हमारे देश भारत में भी उत्तर_ दक्षिण भारत में अधिक लू चलती हैं।जब ग्रीष्म ऋतु में गर्मी बढ़ती है,तापमान ऊंचा चढ़ने लगता है तब लू आती है।वैज्ञानिक दृष्टि से हमारे शरीर का साधारण तापमान 37डिग्री सेल्सियस रहता है जिसमे हमारे शरीर के सब अंग ठीक से काम करते रहते हैंपर जब शरीर का तापमान इससे अधिक होता है तो हम बीमार कहलाते हैं।यदि बाहर का तापमान 42डिग्री से ऊपर हो जाए तो इसका हमारे शरीर पर विपरीत असर पड़ता है।हमारे शरीर के अंग सुचारू रूप से कार्य नहीं कर पाते जैसे हमारे शरीर में पानी की मात्रा काफी है,लू के कारण शरीर का पानी कम होने लगता है,हमारे स्नायु सिकुड़ने लग जाते हैं,हमारे रक्त में पानी कम होने से वो गाढ़ा हो जाता है जिससे हृदय पर दवाब पड़ता है और ये मृत्यु का कारण बन जाता है,इसी वजह से रक्त का प्रवाह मस्तिष्क तक नही हो पाता यह भी मृत्यु का कारण बनता है।बाहर की अत्यधिक गर्मी को हमारा शरीर सहन नहीं कर पाता और मनुष्य मृत्यु को प्राप्त होता है।
    लू से बचने के उपाय___
हमने जान लिया कि पानी हमारे शरीर का एक आवश्यक तत्व है।लू के प्रभावसे बचने के लिए _१)हमें गर्मी में पानी खूब पीना चाहिए।
२)अपने शरीर के तापमान को 37 डिग्री तक बनाए रखना चाहिए।
३)हमें बाहर धूप में नहीं निकलना चाहिए।
४)ठंडे पदार्थों का सेवन करना चाहिए जैसे शरबत,ठंडाई,छाछ आदि।
५)अधिक पानी वाले फल खाने चाहिए जैसे तरबूज,खरबूज आदि।
६)ठंडक पहुंचाने वाली सब्जियां जैसे लौकी, तुराईं,ककड़ी_ खीरा आदि खाना चाहिए।
७)ठंडे पानी से स्नान करना चाहिए। 
८)यदि बाहर निकलना ही पड़े तो गर्म धूप से बचने के सभी उपाय करने चाहिए जैसे_ धूप का चश्मा पहनना,छतरी लेना,टोपी पहनना या सिर पर कपड़ा लपेटना,साथ में पानी या ठंडा पेय जरूर रखना,पैदल न चलकर वाहन में सफर करना आदि।हां और एक जरूरी बात यदि आप अधिक क्रोध करने वाले व्यक्ति हो तो जरा अपने गुस्से पर काबू रखना,इसकी गर्मी भी जान ले सकती है।
    इस प्रकार हमने जाना कि लू से मृत्यु क्यों हो जाती है और इससे बचने के उपाय क्या हैं।सो सावधान लू से बचें और अपना ख्याल रखें।
स्वरचित मौलिक लेख______
रानी अग्रवाल,मुंबई।
१८_५_२०२२,बुधवार।
[18/05, 7:52 am] कुंवर वीर सिंह मार्तंड कोलकाता: 🌺 बुधवार /18/5/ 2022
🌺
 विधा -  लेख/लू लगने पर मृत्यु क्यों होती है ।बचने के उपाय
समीक्षक - 

जैसे ही गर्मी का मौसम आता है उत्तर भारत में गर्मी का प्रकोप बढ़ जाता है। धरती तवे की तरह तपने लगती है।  गर्म हवा चलने लगती है जिसे लू कहते हैं। लगता है खौलते हुए पानी की गर्म भाप हो। समान्यतः शरीर का तापमान लगभग 37 डिग्री सेंटीग्रेट होता है किन्तु वातावरण का तापक्रम 50 डिग्री सेंटीग्रेट तक चला जाता है अर्थात शरीर के तापक्रम से 13 डिग्री सेंटीग्रेट अधिक। बाहर निकलने की हिम्मत नहीं पड़ती। लेकिन निकलना तो पड़ता ही है। ऐसे में खूब पसीना आता है। फलस्वरूप धीरे धीरे शरीर में में पानी की कमी हो जाती है।तब शरीर इस गर्मी को झेल नहीं पाता। और गर्मी की चपेट में आ जाता है। जिसे लू लगना कहते हैं।  शरीर एक दम शिथिल पड़ जाता है, ऐंठन होने लगती है।कमजोरी आ जाती है। कभी कभी आदमी बेहोश भी हो जाता है। आदमी की सोचने समझने की क्षमता कम होने लगती है।दिमाग, हृदय, लिवर, किडनी आदि अंग विशेष रूप से प्रभावित होते हैं। पेशाब आना बंद हो जाता है।  यदि समय पर उपचार नहीं मिला तो आदमी की मौत भी हो सकती है।
लू से बचने के लिए क्या करें?
लेकिन अगर हम पहले से इसके प्रति सतर्क रहें तो अपने को सुरक्षित रख सकते हैं। 
सबसे आवश्यक है अच्छी मात्रा में पानी पीना। जूस पियें, शरबत पियें, ग्लूकोज युक्त पानी पियें।आम खायें, आम का पन्ना पियें। तरबूज, खरबूज, ककड़ी, खीरा आदि अधिक जल वाले फल खाएँ। धूप में अधिक देर न रहें। अगर बहुत आवश्यक न हो तो बाहर न निकलें। ठंडे तापमान वाले स्थान पर रहें। रास्ते में हों तो बीच बीच में छाया में खडे हों। सिर पर तौलिया रखें। मिल जाय तो सिर पर पानी डालें। पतले और सफेद सूती कपड़े पहनें। 
लू लगने पर क्या करें?
अगर किसी कारण वशतः लू गई हो तो हमें निम्नलिखित उपाय करने चाहिए-
अगर लू लग गई है तो यथा शीघ्र छाया में जाएँ। शरीर पर गीला कपड़ा लपेटें। टब में पानी लेकर उसमें बैठें। काँख और पीठ पर बर्फ मलें। ए.सी. है तो उसमें बैठें। डीहाइड्रेशन हो गया हो तो डाक्टर के पास जाएं। सैलाइन लगवाएं। 

डॉ. कुँवर वीर सिंह मार्तण्ड
कोलकाता
[18/05, 7:59 am] Nirja 🌺🌺Takur: अग्नि शिखा मंच
तिथि- -१८-५-२०२२
विषय-लेख लू लगने पर मृत्यु क्यों होती है, बचाव के उपाय

     लू एक तेज गर्म शुष्क हवा है जो   अप्रैल  मई और जून में चलती है। 
इसे हीट स्ट्रोक भी कहा जाता है। जब मनुष्य अत्यधिक तेज धूप और गर्मी के संपर्क में आता है तो शरीर का तापमान बढ़ने लगता है। सामान्यतः तापमान बढ़ने से शरीर पसीना निकाल कर स्वयं को ठंडा रखता है। जब व्यक्ति गर्म हवाओं के संपर्क में आता है तो शरीर से पसीना निकलना कम हो जाता है और शरीर का तापमान बढ़ने लगता है। अगर इस समय व्यक्ति को डाॅक्टरी मदद नहीं मिली तो शरीर का तापमान बढ़ते जायेगा और मरीज की मृत्यु भी हो सकती है। 
बचाव -  तेज धूप में न निकलें अगर निकलना ही पड़ जाये तो शरीर को और खासकर सिर को ढंक कर निकलें। पानी खूब पियें ताकि शरीर का तापमान बढ़ने ना पाये। ठंडी जगह जैसे ए सी से एकदम धूप में ना निकलें। लस्सी छाछ जलजीरा कच्चे आम का पना पियें। काॅटन के कपड़े पहने। कच्चा प्याज़ खायें भी और अपने पास भी रखें। प्याज़ अधिक गर्मी सोख  लेता है। बुखार बढ़ने पर कच्चा प्याज़ पैर के तलवे पर रगड़ें और तत्काल डाॅक्टर की मदद लें। 

नीरजा ठाकुर नीर
पलावा मुंबई
महाराष्ट्र
[18/05, 8:29 am] 👑सुषमा शुक्ला: "लू लगना क्या है ?

लू लगना एक ऐसी स्थिति है जो तब होती है जब एक व्यक्ति बहुत लंबे समय तक बहुत गर्मी में रहता है, चाहे वह काम कर रहा हो, व्यायाम कर रहा हो या बस गर्म वातावरण में बैठा हो।

यह समस्या शरीर के अत्यधिक गर्म रहने के कारण होती है, आमतौर पर लम्बे समय तक गर्म तापमान में रहने या शारीरिक परिश्रम के कारण। यदि आपके शरीर का तापमान 40 डिग्री सेल्सियस या उससे अधिक हो जाता है, तो आपको यह समस्या हो सकती है। गर्मी के महीनों में यह स्थिति सबसे आम है। "

 उपाय,

रोगी को यदि १०३ डिग्री से ज्यादा बुखार हो जाता है तो बर्फ की पट्टियां रखते रहना चाहिए। प्याज का रस उसके तलवों पर और हाथों पर रगड़ ते रहे। लौकी का रस भी इसमें बहुत उपयोगी है जो ताप को ज्वर को खींच लेता है। केरी का पना कारगर सिद्ध होता है। साथ ही नींबू जलजीरा मिलाकर शिकंजी देते रहना चाहिए।
रात बे रात हम ये उपाय कर सकते हैं।

 इसके बाद भी यदि आराम न पड़े तो तुरंत डॉक्टर का उपचार करना चाहिए।

प्रस्तुतकर्ता सुषमा शुक्ला
[18/05, 10:18 am] विजेन्द्र मोहन बोकारो: मंच को नमन
विधा:-- *लेख*
विषय:-- *लूं लगने पर मृत्यु क्यों होती है?और बचने के उपाय।

लेख:-- बिहार के गया जिले में मार्च के अंतिम महीने से गर्मी का माहौल शुरू हो जाता है। क्योंकि गया शहर के चारों दिशा में पहाड़-ही पहाड़ है। अतः इस शहर की खासियत यह है की जाड़ा और गर्मी दोनों अधिक होते हैं । *मुख्य कारण पहाड़ है*।
गर्मी के प्रकोप जब बढ़ जाता है  यो लगता है धरती के अंदर से तापमान बढ़ा दिया गया है।  जिसके कारण गर्म हवा चलने लगती है इसे कहते हैं *लूं*। सुबह के 10:00 बजे से लूं चलने लगती है। तापमान 40 से ऊपर रहता है। प्रायः बच्चों के स्कूल 11:00 बजे तक बंद हो जाता है। जो बड़े बुजुर्ग अपने काम धंधे के लिए जाते हैं तो घर से ठंडक चीज लेकर जाते हैं। जैसे खीरा ककड़ी तरबूज लस्सी छाछ आम पन्ना कुछ भी पेट भर लेकर जाते हैं साथ में प्याज रखते हैं। प्याज की क्षमता है गर्म हवा को अपने आसपास को रोक कर रखें । अतः जो व्यक्ति बाजार में अधिक देर तक रहना है अपने अपने पॉकेट में प्याज रखते हैं वहां का यह चलन है। यह सब तत्काल लू से बचने का तरीका है जो अपनाते है।

*लू लगने पर क्या करें?*

अगर आपके शरीर में गर्म हवा प्रवेश कर गई है तत्काल शीघ्र छाया में बैठे जब शरीर का तापमान नीचे की ओर आने लगे मिट्टी के घड़े-सुराही के पानी पीए साथ उसी पानी से स्नान करने से शरीर के तापमान नॉर्मल हो जाता है। इसके बाद भी अगर बेचैनी लगती है तो शाम को कच्चे आम को पका कर पूरे शरीर में रगड़ रगड़ कर स्नान करें। डिहाइड्रेशन हो गया है गुलकोज पानी पीते रहे। गर्मी शुरू होते ही सूती कपड़े पहनना शुरू करें।
इस तरह से गर्मी के मौसम और लूँ से अपने को बचा सकते हैं।


विजयेन्द्र मोहन।
[18/05, 11:42 am] रवि शंकर कोलते क: बुधवार दिनांक १८/५/२२
विधा****लेख
विषय**
 #*** लू लगने पर मृत्यु       
                   क्यों होती है ? **#
      बचने के उपाय क्या है ? 
           °°°°°°°°°°°°°

      जैसे ही होली और बसंत का मौसम खत्म होता है धीरे धीरे अप्रैल से गर्मी का प्रकोप चालू होता है । 
        खासकर मई जून में इस गर्मी के मौसम में तेज धूप रहती है और गर्म हवाएं भी चलती है ।     इस हाल में सारे रास्ते निर्जन दिखाई देते हैं । हमें हिदायत  दी जाती है कि तेज धूप गर्मी में घर के बाहर नहीं निकलना चाहिए । क्योंकि इतनी भीषण गर्मी में अपने शरीर का तापमान बढ़ता है जिसके कारण शरीर का पानी कम होता है । खून गाढ़ा होता है जो धमनियों में ठीक से प्रवाहित नहीं होता । और यही कारण है कि खून ह्रदय तक नहीं पहुंचता और इंसान की मृत्यु होती है । 
जिसे हम कहते कि लू लगने से अचानक इंसान की मौत हुई ।
  लू से बचने के उपाय 
      ************
१) घर से बाहर ना निकले ।
२) बहुत जरूरी काम है तो सर को कपड़े से ढक ले । सूती वस्त्र पहने । ढीले कपड़े पहने
३) पास में दो प्याज रखें पानी की बोतल रखें ।
४) लंबा सफर हो तो बीच-बीच में पानी पी लिया करें । छांछ शरबत या चाय पीए ।
५) घर आए मेहमान को पहले पानी पिलाए बाद में उसकी खातिरदारी करें ।
६) अगर तबीयत ठीक ना हो तो घर से बाहर ना निकले ।
७) सुबह शाम सुपाच्य भोजन करें 
८) घर ठंडा है इसलिए कूलर पंखे की व्यवस्था करें खिड़कियां दरवाजे बंद रखें ।
९) शाम को टहलने या कहीं बैठने के लिए निकले ।
१०) बहुत ज्यादा  फ्रीज का ठंडा जल ना पिए ।
 ११) हमेशा साधारण मटके का जल ही पिए ।
       यह अपने घरगुती उपाय करने से आदमी लू की लपेट से बच सकता है । हमें इन नियमों का पालन कर अपने आप को सुरक्षित रख सकते हैं ।

प्रा रविशंकर कोलते
     नागपुर
[18/05, 12:13 pm] वैष्णवी Khatri वेदिका: बुधवार /18/5/ 2022
विधा -  लेख/लू लगने पर मृत्यु क्यों होती है ।बचने के उपाय।

दुनियाभर में गर्मी बढ़ती जा रही है। ज़्यादा गर्मी के संपर्क में आने से शरीर के ज़रूरी अंगों पर असर पड़ता है। गर्मी में लोग घर में ए सी या कूलर चलाकर बैठे रहते हैं। पर सब ऐसा कर नहीं पाते। बाहर तो निकलना ही पड़ता है। और बाहर तेज़ गर्मी में ज़्यादा देर तक रहने से लू लग जाती है। लू लगना ख़तरनाक और जानलेवा भी हो सकता है। अगर आप 40 डिग्री सेल्सियस से पार में लंबे समय तक रहते हैं तो उससे सनस्ट्रोक या हीटस्ट्रोक हो सकता है उसीको लू लगना कहते हैं। इससे ब्रेन, दिल, लिवर, किडनी और मांसपेशियों को  नुकसान पहुँचता है।

शरीर से पानी निकल जाने के कारण सबसे ज़्यादा असर किडनी पर पड़ता है। ऐसे में पेशाब होना एकदम बंद हो जाता है। ज़रूरी अंगों को नुकसान पहुंचने से मौत भी हो सकती है.

ज़्यादा समय तक हीट में रहने से शरीर का तापमान उसे सहन नहीं कर पाता। शरीर में ऐंठन होती है और शरीर एकदम थक जाता है। कभी-कभी तो बेहोशी और चक्कर आने लगते हैं। शरीर डीहाइड्रेट हो जाता है। पसीना निकलना बंद हो जाता है। इससे मानसिक स्थिति पर असर पड़ता है।
 लक्षण-
शरीर एकदम गर्म और लाल हो जाता है। स्किन एकदम ड्राई हो जाती है। पसीना एकदम बंद हो जाता है। हाथ-पैरों में ऐंठन होने लगती है। चक्कर आने लगते हैं। दिल की धड़कन तेज़ हो जाती है। सांस तेज़ चलने लगती है। 

इस गर्मी से बचने के लिए सबसे ज़रूरी है कि अच्छी मात्रा में पानी पिएं। लिक्विड ज़्यादा लें। फ्रूट जूस पिएं। खीरा, तरबूज़, अनार खाएं। शरीर में पानी की कमी नहीं होनी चाहिए। ज़्यादा गर्मी में ज़्यादा समय तक रहना अवॉइड करें। थोड़े ठंडे तापमान में रहें। कम और पतले कपड़े पहनें ताकि पसीना निकलने से शरीर की गर्मी निकलती रहे।

लू लगना जानलेवा हो सकता है। अगर लू लग गई है तो जितना जल्दी हो सके छांव में जाएं। शरीर पर गीला तौलिया लपेटें। टब में पानी भरकर उसमें बैठें। कांख और पीठ पर बर्फ़ मसलें। इस तरह से शरीर से गर्मी निकालने से राहत मिल सकती है। अगर AC है तो उसमें बैठें। अगर डीहाइड्रेशन है तो अस्पताल जाएं।
वहां नसों के अंदर सलाइन डाला जाता है और हाइड्रेशन थेरेपी दी जाती है।

ये टिप्स अपना कर लू से बचा जा सकता है ।

वैष्णो खत्री वेदिका
[18/05, 12:22 pm] राम Ram राय: लू  लगना-कारण और निवारण
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---श्रीराम राय

अत्यधिक गर्मी के कारण जब शरीर से पसीना निकलना बंद हो जाता है और शरीर का तापमान सामान्य से अधिक बढ जाता है (कभी कभी104 डिग्री फॉरेनहाइट के करीब पहुंच जाता है) तब हम ऐसी स्थिति को लू लगना कहते हैं। लू लगने से व्यक्ति की मृत्यु तक हो जाती है ।आजकल भीषण गर्म हवाएं चल रही हैं । इन गर्म हवाओं की चपेट में आने से व्यक्ति लू का शिकार हो सकता है । लू लगने की बीमारी किसी भी उम्र में हो सकती है -चाहे शिशु हो या वृद्ध व्यक्ति हो । शरीर में जल की मात्रा संतुलित नहीं रहने पर शरीर का तापमान बढ़ने लगता है ,त्वचा रूखी हो जाती है ,सिर में भारीपन, ओंठ, गला का सूखना, पेशाब नहीं होना आदि लू लगने के लक्षण हैं।
वैसे तो मैं  चिकित्सा शास्त्र से पूरी तरह अनभिज्ञ हूं । लेकिन मेरा स्नातकोत्तर का विषय जंतु विज्ञान रहा है। इसके आधार पर मैं इस तथ्य पर पहुंचा हूं कि गर्मी के कारण शरीर में वाष्पीकरण  अधिक होने से जल की कमी होने लगती है । शरीर में जल की कमी होने से रक्त प्रवाह पर  प्रतिकूल स्थिति उत्पन्न होती है । शरीर से हानिकारक पदार्थों को छानने का कार्य किडनी के द्वारा किया जाता है । किडनी में जब रक्त पहुंचता है तब रक्त से हानिकारक पदार्थों को किडनी छानकर अलग कर देता है , जो कि मूत्र के रूप में शरीर से बाहर हो जाते हैं । इस प्रक्रिया में जल की अहम भूमिका रहती है। जल जितना अधिक  शरीर में रहेगा रक्त उतना ही तरलता लिए रहेगा , और उतनी ही सहजता से किडनी हानिकारक पदार्थों को छानते रहेगा । अत्यधिक गर्मी मे रहने से शरीर में जल की कमी हो जाती है । इसके कारण पेशाब की मात्रा घटने लगती है और किडनी पर भार पड़ता है। पेशाब का रंग भी गाढा होने लगता है । नाभी के नीचे   भयंकर दर्द होने लगता है। ऐसी स्थिति में अल्कासाइट्रोन नामक दवा डॉक्टर से परामर्श लेकर जल के साथ लेने से तत्क्षण आराम मिलता है। इससे पेशाब खुलकर आता है और किडनी सुचारू रूप से कार्य करने लगती है।
लू लगने को हल्के-फुल्के में नहीं लेना चाहिए । गर्मी के दिनों में जैसे ही व्यक्ति को लू लगने का एहसास हो तुरंत ही सचेत हो जाना चाहिए । इन दिनों सर दर्द , बुखार , उल्टी इत्यादि की समस्या आने पर शरीर को अधिक से अधिक ठंडे वातावरण में रखना चाहिए । गर्मी में ही आम का सीजन होता है । कच्चे आम को उबालकर या पका कर उसके गुदे का पूरे शरीर में लेप लगाना चाहिए । कच्चे आम को पका कर, शरबत बनाकर पीते रहने से लू का असर समाप्त हो जाता है। घर से बाहर निकलते समय व्यक्ति विभिन्न प्रकार के उपाय करते हुए, जैसे टोपी, गमछा, छतरी आदि साथ रखना चाहिए। गर्मी में यदि कच्चे नारियल को चबाते रहे , तब शरीर में जल का संतुलन बना रहता है । इससे शरीर को पर्याप्त मात्रा में खनिज तत्व भी प्राप्त होते हैं।  साथ ही तैलीय पदार्थों का सेवन न कर ताजे फलों तरबूज, खरबूज,अंगूर, खीरा,नारंगी आदि का अधिक से अधिक सेवन करते रहना चाहिए। बुजुर्गों के अनुसार लू में निकलते समय पास में सफेद प्याज रखने से लू का असर कम होता है इस बात की पुष्टि पूरी तरह से मैं नहीं कर सकता हूं। लेकिन कच्चे प्याज का सेवन गर्मी के मौसम में अत्यंत फायदा पहुंचाता है । जहां तक हो सके नींबू पानी का  सेवन अत्यंत फायदेमंद होता है। नारियल का पानी भी पीने से लू लगने का डर कम हो जाता है । एक बात का और ध्यान रखना चाहिए कि गर्मी में बाहर से आकर तुरंत ठंडे जल का सेवन नहीं करना चाहिए। जहां तक हो सके बोतलबंद कोल्ड ड्रिंक्स आदि के सेवन से बचना चाहिए। गर्मी में बाहर निकलते समय ओआरएस का घोल साथ में रखना चाहिए।
@श्रीराम राय, शिक्षक 7903404755
[18/05, 12:50 pm] अंजली👏 तिवारी - जगदलपुर: विषय-लू लगने के कारण और उपाय ।
लू अत्यधिक गर्मी की और‌ ताप की वजह से लगती है ।  जब हम धूप में घर से बाहर निकलते हैं तो गर्म हवा हमारे शरीर को तपाकर शरीर की नमी को शोक लेता‌ है ।और शरीर में अत्यधिक ताप की वजह‌ से   लू लग जाता है जिससे हमें निम्न ‌लक्षण शरीर में देखने को मिलते हैं । जैसे तेज बुखार  ,सर दर्द हाथ पैर दर्द  आदि ।।
इसके उपाय ‌‌बचाव के लिए हमें गर्मी के दिनों में कम निकलना चाहिए , घर‌ के अंदर ही रहना‌ चाहीए यदी ज्यादा जरुरी काम‌हो तो बर पर कपड़ा, गमछा, चुन्नी ढककर जाना ‌है आखो‌‌ को‌ तेज गर्मी से बचाने के लिए  धूप से बचाने के लिए धूप का चश्मा, पहनना है एवं छांव में ‌रहना‌ चाहिए।
सिर में धूप  न‌ लगे इसलिए छतरी का उपयोग करना चाहिए ‌।
पानी बहुत पीना चाहिए ।
अपने आपको ठंडा रखना चाहिए 
आम को आग में बूझकर उसका पनाह‌, शरबत‌ पीना चाहिए शिकंजी चावल का‌ पानी‌ पीना चाहिए ।
इस प्रकार लूं से हमें बचाव  उपाय दोनों का ध्यान रखना चाहिए।
अंजली तिवारी मिश्रा जगदलपुर छत्तीसगढ़।
में मंच में नहीं आ रही हूं। रस्ते में हूं दिल्ली गई थी । काव्य रत्न पुरस्कार लेने ।🙏
[18/05, 1:25 pm] Dravinasi🏆🏆: अग्नि शिखा मंच दिनांक 18मई 2022 दिन बुधवार विषय लू लगने से मौत क्यो हो जाती है ।    प्रायः शरीर का तापमान 37Dc रहता है इससे ज्यादा या कम होने से शरीर की क्रियाएं बाधित या मंद पड़ जाती है। अतः सभी को चाहिए कि संतुलन बनाए रखने प्रयास किए रहना चाहिए। गर्मी के दिनों में वातावरण का तापमान बहुत ज्यादा होने के कारण जब कोई अधिक तापक्रम में रहते हैं तब तभी शरीर का तापमान भी बढ़ने लगता है। जिससे शरीर में पानी गर्मी के कारण सूखने लगता है।  पानी के सूखने के बाद रक्त का पानी भी सूखने के कारण रक्त गाढ़ा होने लगता है और शरीर का तापमान अधिक होने के कारण क्रियाएं सुचारू रूप से नहीं होती इसी को लू लगना कहते है।           लू से बचाव हेतु बार बार जल्दी जल्दी पानी पीते रहना चाहिए। तथा तथा अधिक तापक्रम में बचाव हेतु छाया में रहे पूरे शरीर को ढके रहना चाहिए एवं प्याज का प्रयोग ज्यादा से ज्यादा करना सबसे महत्वपूर्ण बचाव हेतु सावधानी ही सबसे कारगर दवा है ।           डॉ देवीदीन अविनाशी
[18/05, 2:11 pm] निहारिका 🍇झा: नमन अग्निशिखा मंच
विषय-लू के कारण व बचाव।।
दिनाँक-18/5/2022

भारत के उत्तर पूर्वी शुष्क क्षेत्रों में जब उत्तर पूर्व व पूर्व से पश्चिम।की ओर बहुत ही गर्म धूल भरी हवाएं चलती हैं जिसे लू कहते हैं।यह मई व जून के माह में चलती है जिस समय तापक्रम 40डिग्री सेल्सियस से ऊपर ।कभी कभी तो 45-46 भी हो जाता है।
लू से हानि--
मानव शरीर एक नियत तापक्रम को ही सहन कर सकता है।यदि हमारे शरीर का तापक्रम 37डिग्री सेल्शियस से अधिक होने लगे तो हाथ पैर में दर्द जलन आँखों ,सारे शरीर में ऐंठन आदि होने लगते हैं।
इससे बचने के।लिए हम फ्रिज,कूलर  ए सी  का सहारा लेते हैंकिन्तु हमेशा तो हम इनके साथ नहीं रह सकते।जब हम इनसे बाहर निकलते हैं तो बाहरी गर्म हवा(लू) की चपेट मे आ जाते हैं 
फलस्वरूप पानी की कमी,बुखार सिर दर्द हाथ पैर दर्द आदि के कारण  हमें कमजोरी लगती है।यह स्थिति बढ़ने पर खतरनाक हो जाती है।।इससे सदा सतर्क सजग व बचे रहें।खाली पेट न रहें।
बाहर निकलें तो पानी जरूर रखें।एक कच्चा प्याज भी लू से बचाता है।।कच्चे आम का शर्बत  भी इससे रक्षा करता है।।
सावधानी में ही इसका बचाव है।।
निहारिका झा
खैरागढ़ राज.(36 गढ़)
[18/05, 3:03 pm] सुरेन्द्र हरडे: अग्निशिखा मंच को नमन

विधा :- *****लेख********

विषय *लू लगने पर मृत्यु क्यों होती है*
      *बचने के उपाय*क्या है*?

        भारत में में मुख्यत: तीन ऋतुएं मानी जाती है। बसंत में पतझड़ के बाद अप्रैल से गर्मी का प्रकोप शुरू हो जाता है मई में तो  सूरज अपनी उफान पर होता नागपुर चंद्रपुर अकोला में तापमान 45 डिग्री से ऊपर  होता है। उत्तर भारत हो राजस्थान में तेज गर्मी हर कोई व्यक्ति परेशान होता जिसके पास घर नहीं पंखा कुलर नहीं उसके तो हाल पूछो मत? मध्यम वर्ग के लोग जैसे तैसे गर्मी का प्रकोप सहन करते रास्ते पर रहने वाले भिखारी लोग 
इतनी गर्मी में सहन होते काल के गाल में समा जाते हैं।
   भीषण गर्मी के कारण जब तन का पसीना निकलना बंद हो जाता है शरीर का तापमान सामान्य तापमान से अधिक बढ़ जाता है 
104 डिग्री फाॅरेनहाइट तक पहुंच जाता है तब लू लगना कहते कभी आदमी गस्त खाकर मौत होती है
उसको 🌞 Sun Strok कहते हैं। भीषण गर्म हवा के थपेड़े ऐसे लगते  हैं जैसे गर्म अंगारे अपने तन को जला रहे हैं
 इसके लिए उपाय
1 कोशिश किजिए बाहर कमसे कम घर से निकले
2 लिंबु सरबत इत्यादि व्यवस्था पर घर कर दिजिए 

सुरेंद्र हरड़े
नागपुर
दिनांक 18702/2022
[18/05, 3:22 pm] कुम कुम वेद सेन: विषय लू लगने पर मृत्यु क्यों होती है बचने के उपाय

देश के सभी हिस्सों में गर्मी बहुत ज्यादा नहीं पड़ती है लेकिन बिहार राज्य में गर्मी अधिक पड़ती है गर्म हवा मार्च महीने से ही शुरू हो जाती है जेठ वैशाख में तो चरम सीमा पर गर्मी रहती है शरीर के तापमान से वातावरण का तापमान बहुत ज्यादा बढ़ जाता है कुछ ऐसा इलाका है जो पहाड़ी इलाका कहलाता है वहां पर हरे-भरे जंगल नहीं है जिसके कारण गर्म हवा रात रात में भी चलती रहती और लू लगने का बहुत ज्यादा खतरा रहता है अगर सावधानी नहीं रखी गई तो लू लग ही जाती है लू लगने पर क्या क्या उपाय करना चाहिए इसके विषय में थोड़ा मैं लिख रही हूं।

लू लगने पर सबसे पहले ठंडे ठंडे पानी से शरीर को लगातार पोछते रहिए। कांख में डोलिया में बर्फ डालकर दोनों तरफ दबाकर रखें।
 डीहाइड्रेशन से बचने के लिए सौफ का पानी, कच्चा आम पका कर पूरे शरीर में लगाना है साथ ही साथ आम का शरबत भी पीते रहना है जितना रसीला पानी वाला फल है उसका सेवन करते रहिए। ओ आर एस का सेवन नियमित रूप से करते रहें चीनी नमक पानी का घोल बनाकर पीते रहे मोटा तौलिया 
सिर के ऊपर रखें पैर के तलवों को पानी से पोछते रहना है।
अगर बुखार आ गया है तो डॉक्टर की सलाह लीजिए पानी की कमी हो गई है तो सलाइन अवश्य करवाइए

लू लगने से बचने के लिए खीरा ककड़ी तारबुज का सेवन करते रहें सत्तू का घोल पीते रहने से शरीर में पानी की कमी कम होती है इसीलिए वैसे शहरों में या गांव में ठेला पर सत्तू का आम का घोल  मिलता रहता है।

गर्मी के दिनों में प्याज का सेवन फायदेमंद होता है कच्चा प्याज सलाद के रूप में अवश्य खाते रहे
गर्मी के दिनों में तला छना खाद्य पदार्थ का प्रयोग कम करें बासी खाना का बिल्कुल इस्तेमाल ना करें। प्याज को पॉकेट में अवश्य रखें इससे गर्मी नहीं लगती है।

गर्मी लगने से मौत का कारण यह है कि शरीर में पानी की कमी होने लगती है जिसे व्यक्ति समझ नहीं पाता है और कभी-कभी तो पानी के कमी के कारण बेहोश हो जाता है बोली लड़खड़ा ने लगती है और सही समय पर चिकित्सा नहीं मिली तो मृत्यु होने का डर बना रहता है। दही छाछ का सेवन जरूरी है।

कुमकुम वेद सेन
[18/05, 3:28 pm] आशा 🌺नायडू बोरीबली: (लेख) ‌                    🌷 लू लगने से मृत्यु क्यों होती है ,उससे बचने की क्या उपाय हैं?🌷
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         अधिक तेज धूप की वजह लू लग जाती है। जिसमें तेज बुखार आता है। शरीर तपने लगता है। सारा शरीर परेशानी से भर उठता है। बेचैनी बढ़ जाती है ।हरारत से चैन खत्म हो जाता है। मुंह सूखने लगता है ।खाया पिया नहीं जाता। बेचैनी बढ़ जाती है ।शरीर अंगारे की तरह जलता है । न खाया जाता है ,न पिया जाता है। कमजोरी बढ़ जाती है।
         इसलिए जब भी गर्मियों में घर से बाहर  निकलते हो, अपने साथ एक प्याज जरूर रखें। उससे लू नहीं लग पाती है। पानी खूब पीना चाहिए। कानों को कपड़ों से या स्कार्फ से ढक लेना चाहिए। जिससे लू की गर्म हवा कानों को न भेदें। कच्चे आम का पना पीना चाहिए और ठंडी़
वस्तुओं का सेवन करना चाहिए।
         अगर लू लग गई है, तो पीने के लिए पना दें। सुपा गिला करके उसका पानी जिसे लू लग गई है उस पर छिनकें , उसकी ठंडक अच्छी लगती है और बुखार भी कम हो जाता है ।प्याज पीसकर पैर के तलवों में  लगाते हैं ।डॉक्टर की दवा के साथ ठंडे पेय देने चाहिए ।जैसे ठंडा मट्ठा, लस्सी, शरबत ,आम का पना, इन से राहत मिलती है ।धूप में निकलने से बचना चाहिए।
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डॉ. आशालता नायडू.
मुंबई . महाराष्ट्र .
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[18/05, 3:32 pm] ओम 👅प्रकाश पाण्डेय -: लू कैसे लगता है और बचने के उपाय ---_ ओमप्रकाश पाण्डेय
सामान्यतः जब बहुत तेज गर्मी हो रहा हो और दिन में अगर तेज हवा चलने लगे , तो उस हवा को लू कहते हैं अर्थात गर्मी के मौसम में दिन में जो तेज हवा चलता है, उसे लू कहते हैं. अगर कोई भी आदमी खाली पेट, बिना सर ढ़के अधिक गर्मी में बाहर निकलता है तो उसे लू लगने की सम्भावना काफी रहता है. अगर आपको लू लग गया तो तेज बुखार , शरीर में दर्द आदि होने की सम्भावना रहती है.
लू से बचने के लिए, व्यक्ति को गर्मी के समय कभी भी खाली पेट बाहर नहीं निकलना चाहिए. आप भरपूर पानी पीजिये. सर पर कोई टोपी या तौलिया अवश्य होना चाहिए. बीच बीच में भी खूब पानी पीते रहना चाहिए.
एक बार अगर लू लग गया तो डाक्टर से दिखा कर उचित उपचार करना चाहिए. आम का पन्ना भी बना कर घर पर पी सकते हैं.
[18/05, 4:36 pm] वीना अचतानी 🧑🏿‍🦽: वीना अचतानी 
विषय*लू कैसे लगता है  और बचने के उपाय ***
           गर्मी  में  लू लगने की समस्या बहुत  आम होती है। तेज़  धूप और गर्म हवा से ले लगती है।।।
लक्षण--- लू लगने के बाद शरीर अपना तापमान  नियन्त्रित  नहीं  कर पाता ।पसीना नहीं  आता ।जी मिचलाना और उल्टी आना भी हो सकता है ।त्वचा  पर लाल चकते हो जाते हैं ।धड़कन तेज़  हो जाती है।सिर में  दर्द  बना रहता है ।मानसिक  स्थति  बिगड़ने लगती है।याददाश्त पर असर होता  है।बुखार  बढ़ता जाता है।त्वचा रुखी और नर्म हो जाती है।
बचाव के उपाय----- ठन्डे स्थान पर लेट जाऐं ।शरीर को हवा लगने दें।गीले कपड़े  से शरीर  को हल्के  हाथों से पोंछें । ताजा  पानी, नींबू  पानी, पीना अधिक लाभदायक होता है ।गीला तौलिया  सिर पर रखे, ठंडे पानी से स्नान  करें  । तेज़ धूप और गर्म हवा में  न निकले ।सोडा, कोल्ड ड्रिंक,  चाय, काॅफी न पियें । धूप में  संती कपड़े  पहन कर निकले।कभी भूखे पेट धूप में  न निकले।अपनी जेब में  छोटा सा प्याज़  रखे, यह लू से बचाव करता है।
वीना अचतानी 
जोधपुर ।।।
[18/05, 4:42 pm] Anita 👅झा: नमन मंच 
बुधवार दिनांक १८/५/२२
विधा-लेख
विषय - लू लगने पर मृत्यु       
                   क्यों होती है ? 
      बचने के उपाय क्या है ? 
मौसम की मार झेलते गर्म हवायें सुर्य का ताप दिन चढ़ते ही लु के रूप में परिवर्तित हो मानव शरीर आक्रमण कर घातक बन जाते है । समय के अनुसार सभी को लु से बचने अपनी जान की हिफ़ाज़त करनी चाहिए  
भूख प्यास से जब व्याकुल होते इंसान गर्म हवा लु के थपेड़े से अपने आपको बचा नही पाते है अपनी रक्षा नही कर पाते है काल के ग्रास में समा जाते है । इंसान जब अपने विषय में बचने के उपाय सोचता है तो पशु पक्षियों के विषय में भी सोचता है ।पानी सकोरे अन्न के दाने के साथ रखता है उसी प्रकार अपनी जीवन रक्षा के लिये विभिन्न प्रांतो में खान पान से अपनी हिफ़ाज़त करता है ।जैसे गर्मी के जेठ बैसाख में छत्तीसगढ़ में सुबह से इंसान रात का बना चावल पानी में डूबा कर रख जिसे बोरे ,बासी कहा जाता है , मिट्टी के बर्तन में प्याज़ के साथ खा कर साथ लेकर निकल पड़ता है खेतों में करने के बाद आम के पेड़ नीचे बैठ कच्चे आम का पना ,पौदीने की चटनी के साथ खा पीकर अपने आपको लु के थपेड़ों से बचाये रखते है , ये जन सामान्य की जीवन शैली है , अब तो राज्य सरकार ने भी गर्मी लु से बचने बासी डे के रूप में मनाया गया और गर्मी लु से बचने खान पान जीवन शैली को गर्मी में अपनाकर लु से बचने का अनुरोध किया है। 
इस तरह हर प्रांतो में महत्व दिया जाता है उत्तर बिहार में चने के सत्तू का घोल शीतल जल में बना उपयोग सर्वाधिक किया जाता है 
दक्षिण में इमली भात गुजरात में रसम भात पंजाब में राजमा चावल 
सबका अपना महत्व उपाय होता है 
रसीले फल साग भी अपना विशेष स्थान लु से बचने का रखते है 
अनिता शरद झा
[18/05, 6:01 pm] मीना कुमारी परिहारmeenakumari6102: लू लगने पर मृत्यु क्यों होती है..? और इससे बचने के उपाय
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दिन -ब - दुनियां भर में गर्मी बढ़ती जा रही है। गर्मियों के मौसम में ज्यादा हिट होने से या ज्यादा समय तक हिट में रहने से शरीर का तापमान उसे एडजस्ट नहीं कर पाता है। इसकी वजह से शरीर को नुक्सान होता है। शरीर एकदम से थक जाता है। शरीर में ऐंठन होती है।
       अगर गर्मी 40 डिग्री सेल्सियस से पार हो जाता है हम इसमें लम्बे समय तक रहते हैं तो उससे हीट स्ट्रोक हो सकता है जिसे लूं लगना कहते हैं।
1-इसमें शरीर के अंगों को नुक्सान पहुंचता है।
2-जैसे ब्रेन,दिल,लिवर , किडनी और मांस पेशियां
3-ऐसे में पेशाब होना एकदम बंद हो जाता है।
4-कभी-कभी इंसान बेहोश हो जाता है।
5-जरूरी अंगों को नुक्सान पहुंचाने से मौत भी हो जाती है
7-सबसे ज्यादा असर किडनी पर पड़ता है।
       यह सर्वविदित है कि हर वर्ष लूं से क‌ई लोगों की मृत्यु हो जाती है लेकिन  डॉक्टरों का कहना है कि अगर गर्मी के मौसम में हम ठीक ढंग से अपना ख्याल रखें और कुछ सावधानियां बरतें तो लूं के प्रकोप से बच सकते हैं। लू से बचने के कुछ महत्वपूर्ण उपाय हैं---
1- गर्मियों के दिनों में हल्का भोजन करें।
2-पूरी बाजू के कपड़े पहनें और नंगे पैर बाहर ना निकलें।
3-ज्यादा देर तक धूप में रहना हो तो जाते का इस्तेमाल करें।
4-अधिक मात्रा में पानी पियें।
5- घर पर ही आम का पन्ना बनाकर पियें। लू से बचने कि यह सबसे असरदार घरेलू उपाय है।
6-धनिये और पुदीने दोनों की ही तासीर ठंडी होती है। लू से बचने के लिए गर्मियों में रोजाना धनिये और पुदीना कि जूस बनाकर  पियें।
7-सब्जियों का सूप बनाकर रोजाना सेवन करना चाहिए।
8-शरीर को ठंडा रखने के लिए दिन में एक या दो बार नींबू पानी का सेवन करना चाहिए।
9- गर्मियों में बेल का शर्बत अमृत के समान होता है। इसके सेवन से शरीर में ठंडक बनी रहती है और लूं से बचाव होता है।


डॉ मीना कुमारी परिहार
[18/05, 6:15 pm] शेभा रानी तिवारी इंदौर: लू से लोग मारे जाते हैं तथा इसके उपाय बताइए

 गर्म हवाएं जो लू कहलाती हैं, बेहद खतरनाक होता है ।यह शरीर के तापमान को बढ़ा देता है। जब शरीर का तापमान 42 का स्तर पार कर जाता है, तब खून भी गर्म होने लगता है ।शरीर में स्नायु कड़क हो जाती है, और श्वास लेने में तकलीफ होती है और मृत्यु भी हो जाती है।
 इनसे बचने के लिए यह उपाय करना चाहिए ज्यादा पानी पीना चाहिए ।भोजन में सलाद दही छाछ का प्रयोग करें ।ठंडे पानी से नहाना चाहिए। कच्चे आम का पना लाभदायक होता है ।

श्रीमती शोभा रानी तिवारी,
 इंदौर मध्य प्रदेश
[18/05, 6:20 pm] 😇ब्रीज किशोर: अंगना शिखा मंच
   १८-५-२०२२
  बिषय - लू  लगने पर मृत्यु 
                  हो जाती है
  लेख  - बचाव के उपाय

लू लगना प्राकृतिक आपदा है गाँव देहात मे ग्रामीणों को
ज्यादे लगता है बैसाख, जेठ माह मे कडी़ धूप होती है इस
माह मे सबसे तेज पछुआ हवा चलती है जो एक दम सुखी और गर्म शरीर जलाने
वाली होती इसी को लू कहते है लू लगने पर शरीर का ताप मान ज्यादे बढ़ जाता और शरीर से पसीना निकला बन्द
हो जाता है। तापमान बढने से दिमाग और दिल पर असर होने से मरीज की मृत्यु हो जाती है ।
बचाव-तेज धूप मे निकले से पहले तरल पदार्थ और ज्यादे
मात्रा मे पानी का इस्तेमाल करे अपने पास पानी जरूर रखें बदन पूरा कपड़े से ढ़का
 होना चाहिये दूर जाना हो तो
वाहन से जाये या शाम को निकले।सिर पर कपड़ा बाधे 
ताकी सिर पर तेज धूप का असर न हो निम्बू पानी, आम का पना ,छाछ,लस्सी का दिन मे दो,चार बार प्रयोग जरूर करे। लू मे प्याज भी कारगर है प्याज खाये और अपने जेब मे रंखे प्याज गर्मी सोखती है। चना जौ का सत्तू और प्याज का इस्तेमाल ग्रामीण लोग करते है लू से
बचने के लिए।लू लग जाये तो मरीज को ठंडे़ पानी से नहला कर पंखा मे रखें सिर पर पानी से भीगा कपड़ा रखें
और आम का पना नमक ,चीनी के साथ या छाछ नमक ड़ाल कर,ग्लुकोज डाल कर पानी मे दें।डाक्टर से सम्पर्क करे 
मरीज का कमरा बहुत ठंडा रखने की कोशिश करे घबराहट होने पर मरीज हाथ की गदेली और पैर का तलवा
मुलायम सुती कपडा लेकर रगडिये रगडने से मरीज को आराम मिलेगा।
स्वरचित
बृजकिशोरी त्रिपाठी उर्फ भानुजा गोरखपुर यू.पी
[18/05, 7:00 pm] डा. अंजूल कंसल इन्दौर: अग्निशिखा मंच
 विषय -लू लगने पर मृत्यु क्यों होती है?

 अप्रैल मई जून में बहुत गर्मी पड़ती है। इस गर्मी के प्रकोप से कई बार लू लग जाती है।इस बात की सावधानी रखें, ज्यादा गर्मी में ना रहें, और तेज धूप में भी ना रहें। यदि कहीं ऐसा वातावरण हो तो छांव में चले जाएं।
 लू से बचने के उपाय-
१- पानी के छींटे मुंह और बदन में दें।
२- सिर को ढक कर रखें।
३- पतले और महीन कॉटन के कपड़े पहनें। ४-जेब में प्याज अवश्य रखें और बीच-बीच में सूंघते जाएं।
५- पानी छाछ शरबत पेय पदार्थ पिएं। ६-कूलर पंखे की व्यवस्था रखें ।
७-खस लगवालें खिड़कियों पर।
८- घर में मटके का पानी पिएं।
९- कच्चे आम का पना पिएं।
१०- लू लगने पर कच्चे आम को हाथ पैर में मलें।
 इन घरेलू उपायों से व्यक्ति लू की चपेट में आने से बच सकता है।

 डॉक्टर अंजुल कंसल "कनुप्रिया"
18-5-22

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