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अखिल भारती अग्निशिखा मंच के ब्लॉक पर आज दिनांक 13 /5/2022 को** भगवान बुध **पर रचनाकारों की रचनाएं पढ़ें**** डॉ अलका पांडे


बुद्ध भगवान

अहिंसा परमो धर्म या संदेश फिर से दे जाओ   
हे बुद्ध तुम आकर मानव का हृदय परिवर्तन कर जाओ। 
 विकारों के इस महान अंधकार से
मानव को बचा लो  ।
 प्रेम की  मानवता की  रोशनी भर जाओ ।।
हे बुद्ध तुम  इस संसार को बचा लो ।
खेल रही बुराइयों का जड़ से खात्मा कर जाओ ।।


महात्मा बुद्ध तुम अपना संदेश फिर से दे जाओ ।
शांति का पाठ तुम फिर से आ कर पढ़ाना ।।
तेरे उपदेशों को भूल गए हैं लोग । लोगों को सारी बातें आकर समझना।।
 तुम वापस इस धरा पर फिर सेआना ।
 तेरी जरूरत आन पड़ी है ।।


हे शांतिदूत तेरी शिक्षा से मानो का कल्याण होगा ।
 तुम आकर शांति सौहार्द की शिक्षा मानव  को दे जाओ।।
 आपस में मारकाट को बंद करा जाओ  
मानव मानव के प्रति प्रेम की ज्योति जला जाओ।।
 आपस के  जलन, नफरत , लालच, के सारे विकारों को मिटा जाओ।
 शांतिदूत तुम फिर से इस धरा पर आ जाओ।।


श्री महात्मा बुद्ध तुम नफरत की आंधियों को मिटा जाओ ।
में प्रेम सहयोग के अंकुर पल्लवित कर जाओ।।
प्राणी  मात्र मानव पर मानव  में करुणा उपचार जाओ ।
अमीरी गरीबी का सारे भेद मिटा जाओ ।।
सबका सब तरह से कल्याण करके चले जाओ।
 हे बुद्ध तुम इस धरती को स्वर्ग बना जाओ ।।

अलका पाण्डेय मुम्बई

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[13/05, 8:42 am] कुंवर वीर सिंह मार्तंड कोलकाता: 🌺शुक्रवार -13//5/ 2022
🌺विषय / भक्ति गीत/  बुध देव भगवान

*चलो बुद्ध की ओर चलें*

कष्ट बढ़ रहे दुनिया में, चारों ओर महामारी।
ऐसे में हम जाएं कहाँ, बढ़ती जाती लाचारी। 
एक उपाय यही है बस, आओ वही उपाय करें।
चलो बुद्ध की ओर चलें, चलो धर्म की ओर चलें
🙏🙏

दुख ही दुख है जीवन में तृष्णा इसका कारण है
अष्टांगिक जो मारग है वो ही एक निवारण है। 
इसीलिए प्यारे मित्रो अष्टांगिक मारग पकड़ें।
चलो बुद्ध की ओर चलें, चलो मोक्ष की ओर चलो।
🙏🙏

सम्यक दृष्टि कर्म वचन सम्यक हो संकल्प सदा
स्मृति औ व्यायाम समाधि सम्यक हो आजीविका
सब कुछ सम्यक रखना है तो बस इतना सा काम करें
चलो बुद्ध की ओर चलें चलो शान्ति की ओर चलें।
🙏🙏

यहाँ अहिंसा परम धर्म है हिंसा पाप पहाड़ है
किसी जीव के भक्षक पर बस रक्षक का अधिकार है.
यही बताया था गौतम ने हिंसा का परित्याग करें।
चलो बुद्ध की ओर चलें नहीं युद्ध की ओर चलें। 
🙏🙏

मुक्ति खोजता है मानव किंतु कहां वह पाता है
जन्म जन्म शुभ कर्म करे बुद्ध तभी बन पता है
यदि पाना है मोक्ष तुम्हें तो केवल यह शुभ कर्म करें।
चलो बुद्ध की ओर चलें, नहीं युद्ध की ओर चलें।  

© डॉ. कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड,
कोलकाता

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[13/05, 8:58 am] साधना तोमर: महात्मा बुद्ध 

 हे महात्मा बुद्ध! 
शान्ति दूत बनकर
 आओ फिर से
 इस धरा पर। 
  दो शान्ति 
 सौहार्द की शिक्षा
मानव को आकर। 

मानव के हृदय में
  मानव के प्रति
प्रेम की ज्योति जला दो। 
 ईर्ष्या, द्वेष नफरत के
  सभी विकारों को 
हमेशा के लिए गला दो। 

अहिंसा ही धर्म हो
  अब इंसान का। 
हर प्राणी में रूप दिखे
  उसे भगवान का। 
कष्ट दूसरों के देख
 उसका हृदय करुणा से
 आप्लावित हो जाये। 
  परहित के अंकुर
  हिय भूमि पर
प्रस्फुटित हो आये। 

शक्तिशाली होने का मनुष्य
   दम्भ न भरे। 
प्रकृति पर विजय का स्वप्न
  चित्त न धरे। 
प्रकृति के कहर से डरे। 
  सन्तुलन उसका
छिन्न भिन्न न करे। 

रिश्ते न बंटे सीमाओं में
विस्तार अति विस्तार हो जाये। 
सारा जग ही एक सुन्दर सा
  हो जाये। 
असंख्य रत्नों की प्रसूता
 यह धरा फिर से 
उन अनमोल रत्नों को
  जन्म दे। 
बुद्ध जैसे महापुरुष
मेरी मातृभूमि का
 सब तिमिर मिटा उसे
नई रोशनी से भर दें। 

डा. साधना तोमर
बड़ौत (बागपत) 
उत्तर प्रदेश
[13/05, 9:43 am] Anita 👅झा: नमन मंच 
विषय -भक्ति गीत ,बुध देव भगवान 
बोधि वृक्ष
हम कुदरत के अंश हैं 
ऐ धरा तु मौन खड़ी हैं 
कैसी कैसी विपदाओं ने जन्म लिया हैं 
प्रकृति के घेरे में भय से आतंकित जनमानस हैं 
युगों युगों की पहचान बताते हैं ।
 अहिंसा परमोधर्म का लक्ष्य बताते 
मानवता ने फिर आख़िर जन्म लिया हैं 
ज्ञान विद्या अथाह सागर जन्म लिया हैं
पूनम उजयारी में चमत्कृत ज्ञान वाणी हैं 
सिद्धार्थ से गौतम बुद्ध कहलाये थे ।
ऐ धरा दूर मौन खड़ी हैं ।
प्रकृति की विपदाओं से क्यों दूर खड़ी है ।
आत्मनिर्भर बन उत्साह जगाना है 
ये जग सारा उजियारा हो जाये ।
जनमन विश्वास जगाना हैं 
अपने ईमान धरम से खुद को बचाना हैं 
प्रकृति स्वरुप जीवन संतुलन बनाना हैं ।
जन जीवन के सारे भेद मिटाना हैं 
कर्म ही पूजा कर्म ही ईश्वर ,
राह जीवन की सफल बनाना हैं ।
आओ मिलकर आत्मनिर्भरता ,
की नई सीख जगायें ।
कुदरत के अंश हो ,
काम ऐसा कर जाये ।
जिसकी ख़ुशबुओं से ,
संसार महक जाये ।
घर मधुबन में फूल ऐसे खिलाओं ।
जिसकी सीख से ,
माली मन जनमन गूँजती हो जाय ।
बोधिवृक्ष बन पेड़ ऐसा लगायें।
मधुर स्वाद संवाद लक्ष्य बन जाय 
जिसकी सुगंध सीख बन जाय ।
ये जग सारा उजियारा बन जाये ।


अनिता शरद झा आद्या 
रायपुर-छतीसगड़
[13/05, 10:44 am] विजेन्द्र मोहन बोकारो: मंच को नमन
विधा:-- भक्ति गीत
विषय:-- *बुद्ध भगवान*

वैशाख पूर्णिमा है महान दिन
आज जन्म उत्सव मनाते हैं।

 सिद्धार्थ से गौतम बुद्ध बनकर
 संदेश दिए *अहिंसा परमो धर्म*।
बताकर मानव हृदय परिवर्तन कराएं।
अपने विचारों से संसार के मानव जाति को रोशनी से भर दिए।।

ये गौतम बुद्ध फिर से आकर शांति के पाठ पढ़ो औ तेरे उपदेश पूरे संसार भूल गए हैं ।
तुम वापस इस धरा पर फिर से आओ।
ये प्रभु तुम आकर शांति सौहार्द की शिक्षा फिर से संसार में बांटो।
तुम्हारे संदेश से संसार को कल्याण होगा।
हे प्रभु!! फिर से इस धरती को स्वर्ग बनाओ।
तुम्हारे संदेश से आपस के जलन, नफरत, लालच, अमीरी- गरीबी मिट जाएगा ।।
शांति दूत फिर से आ जाओ।

*साधना से संबोधित तक संदेश फिर सुनाओ।।*

विजयेन्द्र मोहन।
[13/05, 11:04 am] राम Ram राय: बुद्ध भगवान की जय
--------------
रुको सन्यासी आज तुम्हारा 
वध उत्सव मनाऊंगा!!

नाम मेरा है अंगुलिमाल 
क्या भय तुम्हें नहीं लगता।
काट डालता हर पथिक को 
जो इधर आने लगता।
काट तुम्हारी उंगलियों को 
माला में गूंथ पहनूंगा।
रुको सन्यासी आज तुम्हारा 
वध उत्सव मनाऊंगा।।

सुन दहाड़ उंगलीमाल की, 
बुद्ध कहे कि आ जाओ।
जो भी इच्छा हो तेरी, 
अब झट से पूरी कर जाओ।
मै भागूंगा न तेरे भय से,
आओ पास मैं यही रहूंगा।।
रुको सन्यासी आज तुम्हारा
 वध उत्सव मनाऊंगा।।

देख सामने बुद्ध को 
दौड़ पड़ा वह हत्यारा विकट।
 खड़े बुद्ध मुस्काते रहे,
 नहीं पहुंच पा रहा था निकट।
ठहरो ठहरो चिल्ला कर बोला
 अभी काट कर खाऊंगा।।
रुको सन्यासी आज तुम्हारा 
वध उत्सव मनाऊंगा।।

दौड़ दौड़ कर हत्यारे का
 हाल हो रहा था बेहाल।
 खड़े बुद्ध के पास नहीं 
पहुंच पा रहा था अंगुलीमाल।
 लगा करने विनती प्रभु ! 
कैसे निकट पहुंच पाऊंगा।।
रुको सन्यासी आज तुम्हारा 
वध उत्सव मनाऊंगा।।

तब बुद्ध ने उपदेश दिए, 
सत्य अहिंसा अपनाओ।
करो प्रभु की प्रार्थना, 
नहीं किसी को कभी सताओ।
पापों से मुक्ति दिला दो ,
अहिंसा पथ अपनाऊंगा।।
अहिंसा पथ अपनाऊंगा।।
----श्रीराम राय
[13/05, 12:49 pm] रवि शंकर कोलते क: शुक्रवार दिनांक १३/५/२२
विधा ****काव्य
विषय #**बुद्ध देव भगवान**#
                    ^^^^^^^^
अहिंसा परमो धर्म का 
संदेश देने वाले ।।
शांति पथपे दुनियाको 
लेके जाने वाले ।।
तुम फिर से जनम लेकर आओ ।
हे बुद्ध देव भगवान हमें बचाओ ।।धृ।।

लालच स्वार्थ में मानव भटक गया ।
मोह माया के फंदे में लटक गया ।।
दुख दर्द की बेडियों से उसे छुडाओ ।।१

की तुमने बहुत कठिन तप साधना ।
षडरिपू वश किए ना रही वासना ।।
मन की अशांति चंचलता को मिटाओ ।‌।२

अंगुलिमालको शांति पथ दिखाया ।
मन में उसके भाव दयाका जगाया ।।
हे मानव मनमें प्रेम दीप जलाओ ।। ३

प्रा रविशंकर कोलते
     नागपुर
[13/05, 1:27 pm] शेभा रानी तिवारी इंदौर: महात्मा बुद्ध 

बुद्ध ने शांतिदूत बनकर जन्म लिया,
अज्ञान को मिटा ज्ञान का प्रकाश दिया,
 नि:स्वार्थ उन्होंने मानवता की सेवा की,
 अहिंसा परमो धर्म का उपदेश दिया।

भगवान बुद्ध अहिंसा के पुजारी थे ,
सत्य, अहिंसा को ताकत बनाकर,
अंगुलीमार का किया हृदय परिवर्तन ,
निश्छल ,पवित्र था उनका तन -मन।

  आज जग में फैला अंधियारा है ,
लालच ,भ्रष्टाचार का बोलबाला है,
 गौतम बुद्ध जी फिर से आ जाइए ,
और इस भूमि से पाप को मिटाइए।

श्रीमती शोभा रानी तिवारी इंदौर मध्य प्रदेश
[13/05, 2:43 pm] आशा 🌺नायडू बोरीबली: 🌷 बुध्द देव 🌷
********************
गरीबों के देव , बने बुद्धदेव ।                  

न ऊंच-नीच , न अमीर गरीब ।            

न छोटे बड़े , न छूत अछूत ।           

सबके लिए है, समान भावना ।         

सबके लिए है,           
समान स्थान ।           

सबके लिए है , समान स्नेह प्यार । ‌     

न कोई अपना, न कोई पराया ।          

रंक से लेकर , राजा तक ।                

राजा से लेकर, रंक तक ।                

सबके लिए , एक जैसी भावना ।     

तभी तो, समस्त संसार में , छा गए भगवान बुध्द। 

अहिंसा और प्रेम की, भाव की भावना में, डूबा गए संसार ।        

नमन उन्हें , शत शत नमन।
*******************
डॉ. आशालता नायडू .
मुंबई . महाराष्ट्र .
********************
[13/05, 3:25 pm] वैष्णवी Khatri वेदिका: शुक्रवार -13//5/ 2022
विषय / भक्ति गीत/ बुध देव भगवान

कुकुभ छंद महात्मा बुद्ध


शुद्धोधन के भवन में आज,
चमका एक सितारा था।
माया देवी माँ ने उन पर,
अपना तन मन वारा था।

विश्वामित्र से शिक्षा ले कर,
उपनिषद वेद पढ़ डाले।
गुरु निगरानी में गौतम ने, 
दाँव युद्ध के गढ़ डाले।

भविष्यकथन से डर पिता ने,
उनकी शादी कर डाली।
तीन महल बनाए तात ने,
गौतम खो जाए आली।।

एक दिवस देखा बूढ़े को,
उसकी जर्जर थी काया।
लाठी लेकर चलता था वो,
कांपे उसकी थी छाया।।

दूजा रोगी ने भी उसको,
बड़े सोच में था डाला।
आनन पीला पड़ा हुआ था,
बदन पड़ गया था काला।

तीसरा झटका तब लगा जब,
अर्थी एक दिखाई थी।
लोग रो रहे थे पीछे से,
जैसे हुई विदाई थी।।

इससे आकुल हो गौतम ने,
सोच लिया घर छोड़ूँगा।
सत्य खोजकर मैं आऊँगा,
तब तक शक्ल न मोड़ूँगा।

किसी से मैं नहीं बोलूँगा,
ऐसा मन में ठाना था।
भूखे पेट न पूजा होती,
ऐसा मन ने माना था।

वैशाख पूर्णिमा के दिन वो,
वटतरु के बैठे नीचे।
अपने को तप में लीन किया 
बैठे थे अखियाँ मीचे।।

मन भी हो गया शुद्ध उनका,
ज्ञान अनोखा पाने से।
नाम पड़ गया बुद्ध तभी से
परिज्ञान के आने से।

अहिंसा परम धर्म मान कर,
सभी को तुल्य माना है।
उत्कृष्ट कर्म करते जाओ,
सबको जग से जाना है।

वैष्णो खत्री वेदिका
[13/05, 3:27 pm] Dravinasi🏆🏆: अग्नि शिखा मंच दिनांक 13 मई 2022दिन शुक्रवार विषय बुद्ध भगवान विधा काव्य। सत्य अहिंसा समता का, सबके हित संदेश दिया। जिसनेजाना मानाजगमें, अपनी मंजिल पाय लिया।। मानवता धर्म कर्म ही पूजा,का सिद्धांत दिया जगको। बुद्ध ज्ञानभगवान ही जाने,भटकों का उद्धार किया। सत्य अहिंसा समता का सबके हित संदेश दिया डां देवीदीन अविनाशी
[13/05, 3:30 pm] सुरेन्द्र हरडे: अग्निशिखा मंच को नमन

आज की विधा *भक्ति गीत*

विषय *बुद्ध भगवान*

भगवान गौतम बुद्ध तुम्हें 
कोटी कोटी नमन।

आज से ढाई हजार साल पहले वैशाख पूर्णिमा के दिन महाराज
शुद्धोधन महारानी महामाया के
गर्भ से जन्म लिया इस धरापर।१।

तुम सिध्दार्थ युवराज से गौतम
बुद्ध बनकर शांति अहिंसा का 
संदेश दिया मानुष का हृदय 
परिवर्तन करने आए भारत में।२। 

माता का छत्र चला गया 
नहीं मिला माता साथ तुम्हे
बचपन नहीं रुचि थी बालपन
सब राजपाट छोड़ दिया।।३।।

भगवान गौतम दिया दुनिया को
शांति अहिंसा का अपनाया
बोधी वृक्ष के नीचे तपश्चर्या से
बन गये भगवान गौतम बुद्ध।४। 

आज जग में सभी जगह अंधियारा लालच भ्रष्टाचार है
जगह जगह शांति अमन ऐ
शब्द है कोसो दूर।।५।। 

अंगूली माल दिया उपदेश 
मन का किया परिवर्तन 
वैशाली नगर वधू आम्रपाली के जीवन का किया कायापलट।६।।

अपना संदेश फैलाया दुनिया भर 
जन्म है तो मृत्यु है यह संदेश दिया गौतम बुद्ध फिर से आओ
इस धरा पर युद्ध न हो बुद्ध हो।७।

महामानव बाबासाहेब ने बुद्ध
धर्म की स्थापना की पांच लाख
अनुयायियों ने नागपुर में दिक्षाभुमी बौद्ध धर्म को अपनाया 
कोटी कोटी नमो भगवान बुद्ध।८।

सुरेंद्र हरडे
नागपुर
दिनांक १३/०५/२०२३
[13/05, 4:12 pm] डा. अंजूल कंसल इन्दौर: अग्निशिखा मंच
विषय- भगवान बुद्ध 

आ जाओ यहां शांति दूत बनकर 
मिटा दो अंधकार सर्व उजियारा बन कर आनंद शक्ति भर दो जन-जन मानस मन 
प्रेम ज्योति जला दो जीवन के उपवन ।

शांति का विस्तार कर दो गृहस्थ जीवन प्रकाश पुंज समा जाए निश्चल अंतर्मन मोहमाया लोभ ईर्ष्या मिट जाए मन
निस्वार्थ भावना जागृत हो जाए तन।

बुद्ध सत्य का बोध जागृत कर मानव में
प्रेम करुणा मैत्री से आल्हादित भाव भर दो प्रकृति संतुलन का विनाश ना करें कोई जन
 बुद्ध पीपल पूर्णिमा है ऑक्सीजन का स्रोत।

डॉक्टर अंजुल कंसल" कनुप्रिया"
13-5-22
[13/05, 4:17 pm] Nirja 🌺🌺Takur: अग्नि शिखा मंच
तिथि - १३-५-२०२२
विषय- भक्ति गीत , भगवान बुद्ध

लुंबिनी के शाक्य कुल में
राजा शुद्धोधन के घर पैदा हुए 
बहुत सरल चित्त थे वह 
सिद्धार्थ था नाम उनका 
यशोधरा के साथ विवाह कर
राहुल के पिता बने। 
बुढ़ापा मृत्यु बीमारी देख कर 
मन बहुत विचलित हुआ उनका
 यह सब देख वो सोच में पड़ गये
एक दिन सोती यशोधरा और राहुल को छोड़,उत्तर खोजने निकल गये। 
कई तपस्वियों का साथ किया 
फिर ज्ञान मिला पीपल पेड़ के नीचे 
वह वृक्ष फिर बोधि वृक्ष कहलाया। 
उन्होंने बुद्ध धर्म बनाया 
जिसमें सभी थे एक समान
न कोई ज्यादा ना ही कोई कम 
उन्होंने देश विदेश में धर्म और अहिंसा का प्रचार किया।सब जीव एक हैं। 
 और सभी को जीने का हक है
  यह समझाया
    अहिंसा परमो धर्म 
यह सब को सिखलाया

नीरजा ठाकुर नीर
पलावा मुंबई
महाराष्ट्र
[13/05, 4:19 pm] 👑मीना त्रिपाठी: *बुध देव (भक्ति कविता )*

बुध देव🙏का साथ हो तो
दिन अच्छे -ख़ासे बन जाते हैं
अगर रहे किसी के कमजोर, तो
ग्रह दशा सब बिगड़ जाते हैं!
एक आपके बली रहने से
राहु-केतु सब रहते ठीक
मगर हुए नाराज़ तो, सभी
ग्रह-दशा खराब हो जाते हैं।
देते हैं सारी सुख-सुविधा
नव ग्रहों में रखते स्थान
बुधवार को पूजे जाते स्वयं
विध्नहर्ता गणपति भगवान!
है बुध देव की महिमा अपरंपार
करते संसार पर उपकार
हे बुध देव , हे भगवान
करो मेरा प्रणाम स्वीकार!

*मीना गोपाल त्रिपाठी*

*13/5/2022*
[13/05, 4:48 pm] ओम 👅प्रकाश पाण्डेय -: बुद्धदेव भगवान --- ओमप्रकाश पाण्डेय
संसार के जीवन चक्र को
 समझने व सुलझाने इसके
रहस्यों को चुपके से एक दिन
तुमने छोड़ दिया सुख राजमहल का....... 1
गलीयों में घूमें गाँव गाँव घूमें
पता लगाने को कि इस दुनिया में
क्यों पड़ता कोई बीमार यहाँ पर 
जन्म कोई लेता क्यों बार बार यहाँ ........ 2
बोधगया में बोधिवृक्ष के नीचे
एक दिन जब तुम ध्यानमग्न बैठे थे
चिन्तन कर रहे थे इसी रहस्य का
जीवन चक्र का ज्ञान हुआ तुम्हें तब......... 3
अपूर्ण इच्छा से ही होता मनुष्य का
पुर्नजन्म इस संसार में बारम्बार
कम से कम इच्छा अगर रक्खोगे
पुर्नजन्म का कभी कष्ट नहीं होगा.... .. 4
अधिक इच्छा रखने से मानव को
कष्ट बहुत होता जीवन में उसको
अधूरी इच्छाऐं जब रह जाती उसकी
जीवन मृत्यु के चक्र में वह फंस जाता........ 5
( यह मेरी मौलिक रचना है ---- ओमप्रकाश पाण्डेय)
[13/05, 5:56 pm] कुम कुम वेद सेन: विषय भक्ति गीत गौतम बुद्ध

बुद्धम शरणम गच्छामि
संघम शरणम गच्छामि
गौतम बुद्ध के अनुयायियों
सदा इन मंत्रों का उच्चारण किया

था एक सिद्धार्थ नामक बालक
राजा शुद्धोधन का एकमात्र पुत्र
परवरिश हुई राजकुमार की भांति

जिज्ञासा वर्ष पत्नी यशोधरा
पुत्र राहुल को छोड़ सत्य की खोज में निकले

जीवन में उन्हें कुछ घटनाएं बहुत तड़पाती
वृद्ध शरीर लाचार काया
मृत्यु पश्चात चार कंधों पर सवार होकर जाना
इन घटनाओं को देख ह्रदय बेचैन हो गया
जीवन की सच्चाई क्या है
इस जिज्ञासा को लेकर घर का त्याग किया

पीपल बट वृक्ष के नीचे उनकी जिज्ञासा में
एक ज्ञान की प्राप्ति हुई
संसार माया नगरी है इसकी
जानकारी ज्ञान तपस्या के पश्चात मिला

सत्य की खोज में यह महसूस किया
जीवन का सुख दुख एक क्रम है
सभी को किसी न किसी रूप में भोगना है
कर्म का फल ही जीवन है
पदयात्रा के दौरान एक डाकू से
मुलाकात हो गई
इस मुलाकात में डाकू गौतम बुद्ध से
प्रभावित होकर अपनी जीवन धारा को ही बदल दिया
उनके जीवन की तपस्या के पश्चात जो आभामंडल पर तेज विद्यमान था
वह अतुलनीय था
आगे चलकर सम्राट अशोक बुद्धम शरणम गच्छामि संघम शरणम गच्छामि के अनुयाई बन गए

कुमकुम वेद सेन
[13/05, 6:09 pm] वीना अचतानी 🧑🏿‍🦽: वीना अचतानी 
विषय*भगवान बुद्ध पर कविता **
बुद्ध से जो संदेश मिला है
उस पर करें अमल
प्रेम भाव अविरल
करना न किसी से छल
मानव जीवन मिला है
रखना इसे निर्मल
स्वर्ग नर्क किसने देखा
किसने देखा कल
परम धाम में जाना है तो
बुद्ध की राह पर चल
जो है दीन हीन निर्बल
उन पर दया कर
प्रज्ञा, शील ,करूणा अपना 
मोक्ष की कामना कर।।।
वीना अचतानी 
जोधपुर ।।।
[13/05, 6:47 pm] निहारिका 🍇झा: नमन अग्निशिखा मंच
विषय;-बुद्ध देव
दिनाँक;-13/5/2022
शांति का प्रतीक बुद्ध
अहिंसा का पर्याय बुद्ध।
जन की पीड़ा देख कर
संसार से विरक्त बुद्ध।
छोड़ दिया राज पाट
और छोड़ा पत्नी पुत्र
दुनिया के कष्ट हरने
बन गए तथागत बुद्ध।
माह था बैसाख 
और तिथि पूर्णिमा
हुए अवतरित इस जगत में बुद्ध।
उनकी सीखों से चला
दुनिया में धर्म बुद्ध(बौद्ध)।
निहारिका झा
खैरागढ़ राज.(36गढ़)🙏🙏

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