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अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच के ब्लॉक पर आज दिनांक 12:05: 2022 को दिए गए **चित्र पर **रचनाकारों की रचनाएं पढ़ें ****डॉ अलका पांडे



चित्र पर कविता


*राम की लीला*देखो बैंगनी आम*

**केसा  है यह चमत्कार  प्रभु का देखो ।*
*अचंभित हो गई  दुनिया बैगनी आम देखो।।*
*आम के बागानों में,*
*कभी न देखे जामुनी आम!*
*लहराते ये रसीले आम,*
*प्रभु  तूने किया कैसा कमाल।।*
*हरे हरे पीले पीले आम को सभी जानते है।*
*अनगिनत जात है उसकीयह भी जानते है ।।*
**अब देख बैगनी आमों को*
*नतमस्तक हो जाते  हम सब !*
*कैसी रे तेरी लीला अदभुद प्रभु।।*
*हरे भरे पेड़ों पर, लदे- फदे हैं बैंगनी आम।**
*हरे- पीले  यहाँ बैंगनी फले हैं आम। ।*
*देख कर इन्हे मुँह में पानी भर आता।*
 *मीठे- मीठे   रसीले  मन भावन लगे हैं आम।।*
 *सुंदर-से बाग में   लहराते इतराते आम ।*
*लदा-फदा आमो से बगीचा रसिले बड़े  मीठे हैं आम।।*
*माली की मेहनत  आज रंग ले आई है ।*
*सभी फलों का राजा कहलाता  हैं आम है ।।*
*हरी - हरी पत्तियों से सज्जित है* ।
*आमों से भरा वृक्ष देख अचम्भित है ।।* *
*वाह रे प्रभु तेरी लीला है न्यारी है* ।
*जामुनी आम देख मन हुआ  प्रफुलित है। ।*
*प्रभु इसे क्या तेरा चमत्कार जानूं।*
*क्या विज्ञान का कोई  आविष्कार मानूँ ।।*
*मन में उठ रहे अनगिनत सवाल है।*
*मौसम की कोई क्या आपदा समझू ।।*
*चर्चा का विषय हो गया ये आम,*
*पूछने लगे लोग इसके दाम,और काम।।*
*ज़िक्र इतना हुआ इसका देखने आने लगे लोग***  *
*लिखने लगे कविता गीत गजल पैगाम।।*
*सच तो यह है कि लाल हो पीला हो*
*जामुनी हो या हरा हो या  मटमैला  हो*
*आम तो आम है रस की खान हैं,* 
*खट्टा- मीठा आम होता रसीला। ।*
*लदा फदा देखा डाल पर, इसका रंग अजी़ब ।*
*जामनी रंग में देखो , मुंह में भरता पानी  ।।*
*आमों की कई किस्म मैने देखी , दिखी यह किस्म मुझे नई ।*
*देख अनोखा रंग , जिज्ञासा भरता मन  में  ।।*
*लगे फल डाली पर झूम रहे, मगर तना है झुका  ।*
*देख रसीले आम को, हारा है नेक इरादा मेरा ।।*
*यू पी और  गुजरात में, बहुत  होते है  आम ।*
*वनराज भी कहे इसे, मिलता खा़स मुकाम ।।*
*चमत्कार देखा अजुबा , हैरत में पड़े सभी ।।*
*ढेर सारे  उग आए बागों में ये मनमोहक प्यारे-से आम ।।*
*प्रकृति के उपहार से भर गया है, धरती माँ का आँचल हरा भरा ।।*
*मन आह्लादित हो जाता, देख इनका जामनी प्यारा रंग।।*
*हो रहे सुशोभित सुंदर-फल,लम्बी हरी पत्तियों के सँग।*
*मौसम की हर आफ़त को,  ये  पेड़ सदा सह लेते।।*
*रहकर संग-संग झुककर इनके *फल, सबका मन हर लेते।।*
*ये बैगनी जामनी प्यारे फल ।*
*हरे हरे पत्तों के संग झूक कर सलाम करते फल ।।***

अलका पाण्डेय मुम्बई
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[12/05, 12:52 am] रानी अग्रवाल: रसीले बैंगनी आम।🥭
अग्निशिखा मंच।१२_५_२०२२. 
विधा_ चित्र पर कविता।
शीर्षक_ रसीले बैंगनी आम।🥭
[Image 743.jpg]
है कितनी प्यारी प्रकृति,
कितनी सुंदर इसकी कृति।
प्रकृति है हमारी मित्र,
खुशबू बिखेरती जैसे इत्र।
कभी_ कभी अजूबे दिखलाती,
कुछ अनोखा करिश्मा कर बताती
देखो यहां,दिए बैंगनी आम,
है ना अचंभा! हे राम!
भले हीआमों का रंग ना हो आम,
पर स्वाद में है इनका बड़ा नाम।
ये देखिए खूब रसीले हैं,
मीठे हैं,खूब पकेले हैं।
खाकर तो देखिए, जनाब,
आ जायेगा आपको ताव।
फिर न भाएगा दूजा आम,
ये ही स्वाद लगेगा तमाम।
जल्दी लाकर खा लीजिएगा,
ऋतु बीत गई तो पछताइएगा।
मंगाइये आज ही,लीजिए स्वाद
इस का स्वाद रह जायेगा याद।।
स्वरचित मौलिक रचना_____
रानी अग्रवाल,मुंबई।
(आजकल अमेरिका में)
१२_५_२०२२.गुरुवार।
[12/05, 2:03 am] Anita 👅झा: चित्र आधरित रचना 
मन उपवन की बगिया में 
कोयल कुक रही हैं 
जामुनी बैगनी आमों का सुन्दर मनमोहक बगीचा है 
क़तारों से लगे हुये है 
पत्तों की हरियाली में लदे हुये है 
स्वाद रंग रूप में बढ़ते आम हैं
नाम बैगनी जामुनी रसभरी है 
हरियाली सुगन्धित मोहित है 
फलों से लदी सुन्दर डाल हैं 
मीठी रानी बन रंग रुप दिखा 
स्वाद में कमाल कर ज़ाती हैं 
फलों का राजा अलफ़ंजो कहलाता आम हैं 
लगी प्रदर्शनी आमों की बगिया में केशरिया हैं 
मुखौटों संग आयें बच्चे चौसा लंगड़ा कलमी बादामी सेंद्ररी नाम 
सब ने कहा - कमाल का स्वाद हैं
 कहलाता फलों का राजा बैगनी आम हैं ।
सब के मन को भाता है 
अनिता शरदझा 
बैगनी जामुनी रसीले आम है 
बाग आम का
[12/05, 8:28 am] 😇ब्रीज किशोर: प्रभू का करिश्मा देखो हरी हरी डाल में बैगनी आम।
अभी तक तो नही देखी थी बैगनी
हरे हरे पिले पिले बहुत रसीले
देखी थी आम।

ऐसा रंग तो जामुन का होता
 है।
 पर आज देखी गुच्छे गुच्छे लटक रहे है बैगनीआम।
लीला तेरी अजब है भगवन कर दी बैगनी आम।

इन्हे देख मन मे उठता है अन्दर से किस रंग होगा आम
मीठे मीठे बहुत रसीले होते
थे होते थे पिले आम।

जग मे मचा है शोर निराले
देख बैगनी आम।
कोई कहता ईश्वर की लीला
कोई कहता माल का है काम।

वैसे आम फलो का राजा खाते अमीर गरीब।
देश क्या विदेश मे भी जाता 
 है भारत का आम।

फलो से लदा पेड़ को देख
 समझ मे आया।
पेडो़ से ही झुकना मानव ने सीख कर अपनाया।

जीतना उम्दा फल है ये उतने
ही मिलने
[12/05, 8:59 am] कुंवर वीर सिंह मार्तंड कोलकाता: 🌺विषय- चित्र पर कविता
हर चित्र कुछ कहता है 

आम हरे होते हैं कच्चे
पककर होते पीले।
नई नस्ल कुछ ऐसी आई
दिखें बैगनी नीले।

कहते हैं जापान देश में
होते ऐसे आम।
मीठे औ’ गुणकारी होते
इनके ऊंचे दाम।

नाम मियाजाकी है इनका
इसी शहर से आए।
अपनी गुणवत्ता के कारण
विश्वपटल पर छाए।

भारत में भी आम जामुनी
पैदा किए गए हैं।
आम और जामुन दोनों के
मिलते स्वाद नए हैं।

खास लोग इनको खा पाते
कैसे खाएं ‘आम’।
आम जिस तरह चूसे जाते
वैसे चुसते ‘आम’।

खास लोग ही क्रय कर पाते
इन आमों को भैया।
आम लोग तो कीमत सुनकर
करते दइया दइया।

© कुंवर वीर सिंह मार्तंड कोलकाता
*********
[12/05, 9:00 am] 👑सुषमा शुक्ला: *रसीले आम*

फलों का राजा आम,
🥭🥭🥭🥭🥭🥭🥭🥭

, दुनिया भर में इसका नाम,,, 
तोता परी अलफांजो नीलम
इस पर चलेगी सब की कलम

मधुर रसीला स्वाद लिए,,
हर मन को यह भाता है,,
कुदरत का कमाल देखो बैंगनी आम भी आता है।

बच्चे बूढ़े सभी का प्रिय,
मनभावक मनमोहक स्वाद,,,
इसकी शोभा कितनी न्यारी,,,, भरे पूरे और प्यारी प्यारी।

वन उपवन और बाग बगीचे,,, कि यह शोभा बढ़ाएं,,,, अलग-अलग रंगों से सबके मन को यह लुभाए।


पोषण का यह धनी,,,
 बाजार में जब यह आता है,,, सबके मन क ललचाता है,,
देख देख मुंह में पानी आता है।

विविध रंगों की इसकी छटा है,,,,
 स्वाद भी निराला।
स्वाद में खट्टा मीठा आम,,,, चटकारे ले लेकर खाते,,,,
 मिलकर हम सब रंगीले आम।
🥭🥭🥭🥭🥭🥭🥭🥭
स्वरचित रचना सुषमा शुक्ला इंदौर
[12/05, 9:28 am] राम Ram राय: चित्र पर कविता
🥭🥭🥭🥭🥭🥭

🥭🥭🥭🥭🥭🥭
सुबह बीत गई,हो गई शाम
चलो आज करने कुछ काम
देखेंगे हम खेत खलिहान
और बगीचे जहां हैं आम।।

कितना सुंदर कितना प्यारा 
हवा मतवाली सुंदर नजारा
आम की लदी डालियों से
कोयल ने है कू कू पुकारा।।

ऐसा नजारा कहीं न पाऊं
पके सिंदूरी आम चुराऊं
अग्निशीखा के इसी मंच पर
जी करता झट तोड़ खाऊं।।

जितने यहां कवि लोग भरे
उतने आम नजर आते हैं।
अलका जी के साथ सभी
आज आम जी भर खाते हैं।।
---श्रीराम राय palolife.com
[12/05, 9:53 am] विजेन्द्र मोहन बोकारो: मंच को नमन
विधा:-- *चित्र पर आधारित कविता*

देखो भाई, ईश्वर और कृषि विज्ञान की करिश्मा हरी- हरी पेड़ में बैंगनी- बैंगनी आम के
बग़ीचे में झुके हुए हैं डाली
देख कर खाने को तरसे सपरिवार।

 देख कर बगीचे के संरक्षण आ कर सबको दिए एक-एक बैगनी आम।
स्वाद में बहुत रसीले मीठे आम
तो लगा की खा रहा हूं दुधिया मालदा आम पर है बहुत मंहगे।

इसलिए बर्षो से अंतरराष्ट्रीय बाजार में मचा रहा है शोर।
बाजार में तो आम को फलों का राजा माना जाता हैं।
देखो अंतरराष्ट्रीय स्तर पर बैंगनी आम इंडिया को किंग मेकर बना दिया।
हमारा देश फलों के राजा से विश्व विख्यात हुआ है।
भारतीय कृषि विज्ञान का है कमाल।

विजयेन्द्र मोहन।
[12/05, 10:15 am] वैष्णवी Khatri वेदिका: गुरुवार 12//5/2022
विषय- चित्र पर कविता
हर चित्र कुछ कहता है 


आम प्यारा कितना रसीला
छिलका इसका पर्पल नीला।
कितना सुंदर मन को भाया।
इसको देख मन ललचाया।
कुदरत की महिमा तो देखो।
आम्र की अरुणिमा तो देखो।
पीले तोतिये आम देखे।
नहीं पता ये किसके लेखे।
तोते कोयल इसको खाते।
मधुर और भी ये हो जाते।
फल का ये राजा कहलाता।
मुँह में नीर नाम से आता।
बड़ा महंगा पर्पल आता।
अब भारत भी इसे उगाता।
इसके फूल बौर कहलाते।
ये पेड़ अमराई में आते।
पेड़ आम से लदे हुए हैं।
आम धरा को चूम रहे हैं।
इसकी छटा कितनी निराली।
हरी जामुनी काली काली।
ईश तुमने क्या है बनाया।
सबके मन को है भरमाया।
सकल फलों का है ये राजा।
समीर मिलती ताजा ताजा। 

वैष्णो खत्री वेदिका
जबलपुरमध्यप्रदेश
[12/05, 11:37 am] साधना तोमर: आम का मौसम आया,
मुंह में पानी भर आया।
लदे हुए हैं सारे वृक्ष,
हर्ष मन में लहराया।

हरे पीले जामुनी ये,
बहुत रसीले आम हैं।
खाकर सो जाते हम,
करते फिर आराम हैं।

आम का बाग सुन्दर,
देखो यह हमारा है।
फलों का राजा आम,
जन-जन को प्यारा है।

आम की टहनी भी तो,
यज्ञ समिधा बन जाती।
पूजा-अर्चना में ये तो,
देखो है काम आती।

इसके पत्ते उपयोगी,
कलश पर सजाते हैं।
बन्दनवार कभी-कभी
इनसे हम बनाते हैं।

 डा.साधना तोमर
बड़ौत (बागपत)
उत्तर प्रदेश
[12/05, 11:39 am] Nirja 🌺🌺Takur: 
अग्नशिखा मंच
तिथि- १२-५-२०२२
विषय- चित्र पर कविता

लगे हैं देखो बैंगनी आम 
देखे ना सुने कभी ऐसे आम 
क्या यह आम की नई प्रजाति है 
क्या इसको खाने से भी 
मुॅंह में मिठास भर जाती है
आम इतने है कि डाली ज़मीन छू रही 
कुदरत भी देखो कैसे खिलखिला रही 
कितने आम हैं पेड़ों पर,कुछ तो 
हाॅं यह आम की ही एक जाति है
अगर यह आम कुदरती हैं तो 
यह ईश्वर का आशीर्वाद हैं
और अगर इसमें जो रंग मिलाया है
तो यह करती सेहत बर्बाद है। 

नीरजा ठाकुर नीर
पलावा मुंबई
महाराष्ट्र
[12/05, 12:47 pm] रवि शंकर कोलते क: गुरुवार दिनांक १२/५/२२
विधा***** काव्य
विषय**
    #**चित्राधारित रचना**#
             ^^^^^^^^^^
कुदरत का ये सुंदर नजारा देखो ।
अजब बैंगनी आम ये प्यारा देखो ।।
बड़ी गजबकी जादूगरनी हैं कुदरत ।
इसका ये रंगीला खेल न्यारा देखो ।।१

मीठा आम सारे फलों का राजा है ।
सारे जहां में इसका गाजावाजा है ।।
यह तो हरेक का है पसंदीदा फल ।
इसे तो पक्षीयों ने भी नवाजा़ है ।।२

उसका मीठा रस सबको भाता है ।
आम गर्मी के मौसममें ही आता है ।।
धूप लगी तो इसका पन्हा पीजिए ।
ये हरपार्टीमें अपना रंग जमाता है ।।३

प्रा रविशंकर कोलते
     नागपुर
[12/05, 12:57 pm] 👑मीना त्रिपाठी: *चित्र आधारित रचना*

लाल पीले हरे नारंगी
देखे विविध रंगों के आम!
पर नही देखा आज तक
ऐसा अद्दभुत बैंगनी आम!

बुजुर्गों का भी है पसंदीदा
बच्चों में भी लूट मचती
कोई पीता रस उसका
कोई काटकर खाता आम!

है मशहूर सभी फलों में
कहलाता फलों का राजा आम!
छोटे-बड़े सब ललचायें
देखकर पेड़ों में लदा आम!

*मीना गोपाल त्रिपाठी*
*12 / 5 /2022*
[12/05, 1:10 pm] निहारिका 🍇झा: नमन अग्निशिखा मंच
विषय;-चित्राभिव्यक्ति
दिनाँक;-12/5/2022
 ' "आम""
सबके मन को भाता है
आम फलों का राजा है
बस गर्मी में मिलता है
बाकी में तरसाता है।।
देखा आज बड़ा अजूबा
दिखे जामुनी आम रसीला
लगता है वेरायटी हाइब्रिड
होती होगी खास बड़ी
किस्म यही इस आम की।
जो "आम 'नहीं है दिखती
देख बगीचा मन ललचाया
आम से मुंह मे पानी आया।।
लगे सदा मनभावन आम।
खाते इसको लोग तमाम।।
निहारिका झा
खैरागढ़ राज.(36 गढ़)
[12/05, 1:37 pm] शेभा रानी तिवारी इंदौर: चित्र पर आधारित कविता

 पंचतत्व से बनी यह धरती,
 प्रकृति ने सुंदर संसार दिया,
 सूरज, चंदा, नदियां, पर्वत,
 हमें जीने का आधार दिया।

 बैगनी आम से झुकी डालियां,
 प्रकृति ने धरा को उपहार दिया,
 लटक रहे इन बैगनी आमों से ,
 देखो धरा ने है श्रृंगार किया।

 आम देखकर मन ललचाता है,
 नाम सुन मुंह में पानी आता है ,
आम फलों का राजा कहलाता है,
 कई प्रजातयों में मिल जाता है ।

आम कहते हैं लेकिन यह खास है,
 रसीला है यह इसमें मिठास है ,
 बहुत गुण छिपा है इस आम में,
 इसका स्वाद सबको आता रास है।

 श्रीमती शोभा रानी तिवारी इंदौर
[12/05, 1:48 pm] 😇ब्रीज किशोर: प्रभू का करिश्मा देखो हरी हरी डाल में बैगनी आम।
अभी तक तो नही देखी थी बैगनी
हरे हरे पिले पिले बहुत रसीले
देखी थी आम।

ऐसा रंग तो जामुन का होता
 है।
 पर आज देखी गुच्छे गुच्छे लटक रहे है बैगनीआम।
लीला तेरी अजब है भगवन कर दी बैगनी आम।

इन्हे देख मन मे उठता है अन्दर से किस रंग होगा आम
मीठे मीठे बहुत रसीले होते
थे होते थे पिले आम।

जग मे मचा है शोर निराले
देख बैगनी आम।
कोई कहता ईश्वर की लीला
कोई कहता माल का है काम।

वैसे आम फलो का राजा खाते अमीर गरीब।
देश क्या विदेश मे भी जाता 
 है भारत का आम।

फलो से लदा पेड़ को देख
 समझ मे आया।
पेडो़ से ही झुकना मानव ने सीख कर अपनाया।

जीतना उम्दा फल है ये उतने
ही मिलने है आसान।
कंकड खां कर भी देता है रसीले फल का दान।
आंधी पानी सब सह कर रहता सीना तान।

कोई कहता विज्ञान ने किया
 है ऐसा कमाल।
मै तो कहती यह सब प्रभू तुने बाग वाले को किया है मालामाल।
जामुनी रंग के आम ने खूब धूम मचाया।
इसकी एक झक पाने की लोगो ने दौडा़ लगाया।

भानुजा
[12/05, 2:57 pm] आशा 🌺नायडू बोरीबली: चित्र पर आधारित
   जामुनी आम 
******************
फलों का राजा हैआम, आम केहैं अनेक प्रकार, छोटे बड़े कई आकार में आते हैं आम , हरे पीले केसरी ,देखे थे आम, पर नहीं देखे थे जामुनी रंग के आम, क्या कुदरत का करिश्मा है , ये इतने आकर्षक हैं, खाने में मीठी है , ये सबका मन लुभाते हैं, ये बच्चे से बूढ़े तक , सभी को भाते हैं , आम का मौसम हो , तो कोई दूसरा फल , किसी को भाता ही नहीं, इसीलिए तो कहलाताहै फलों का राजा आम,
दुनिया भर में फैला है, इसका स्वाद , इसीलिए तो बड़ी मात्रा में होता है निर्यात।
******************** डॉ. आशालता नायडू.
मुंबई . महाराष्ट्र .
*******************
[12/05, 3:12 pm] सुरेन्द्र हरडे: अग्निशिखा मंच को नमन

आज विधा की विधा :- *चित्रपर आधारित रचना*

   शीर्षक *बैंगनी आम*

निसर्ग सबसे बडा कलाकार हैं
करते रहता अद्भुत चमत्कार हैं
इस परमात्माकी माया है गजब 
ईश्वर का ये अनुपम उपहार है ।।१।।

अब तूने ये बैंगनी आप बनाया 
देखनेवाला हर कोई चकराया
रस भरे आम हैं बहुतही मीठे
ये बैंगनी रंग सबको है भाया ।। २

ये फलों का राजा हर कोई खाता है 
अलग अलग नामोंसे जाना जाता है 
हरा आम की अपनी अलग मिठास है 
इसे नरही नहीं पक्षीभी चावसे खाता है ।।३

ये तो गर्मी के मौसम में हीं आता है 
हरेक इसका रस शरबत पन्हा पीता है
इसका पन्हा हमें लू से राहत दिलाता
ये खटाई और अचारके काम आता है ।।४

कवि ---- सुरेंद्र हरड़े
                 नागपुर
           दिनांक *१२/०५/२०२२*
[12/05, 3:25 pm] Dravinasi🏆🏆: अग्नि शिखा मंच दिनांक 12 मई 2022दिन गुरुवार विषय चित्र पर आधारित कविता मुक्तक चित्र देख कर ध्यान आ रहा, क्या से क्या सब हो जायै। कलयुग का दूसरा चरण है, सबको नहीं समझ आये।। अब तकआम दिखे हरे पीले,कल की कला हीये जाने। ‌ कई रंग अब देख रहे,जो सबको है,आति भाये।। डॉ देवीदीन अविनाशी
[12/05, 3:41 pm] ओम 👅प्रकाश पाण्डेय -: फलों का राजा आम (चित्र पर आधारित कविता) --- ओमप्रकाश पाण्डेय
साल भर जिसका रहता इंतज़ार
लो अब आ गया फलों का राजा आम
हरे पीले कुछ लाल पीले सुन्दर आम
मीठे मीठे रसीले स्वादिष्ट आम....... 1
कोई इसे तो कहता लंगड़ा आम 
तो कोई इसे कहता कपूरी आम 
तो कोई कहता इसको चौसा आम 
हर प्रदेश में इसका है अलग अलग नाम....... .. 2
दशहरी आम की तो बात न पूछो
खुशबू फैलाती अपने चारों ओर
खास लखनवी अंदाज में यह तो
होती केवल लखनऊ के चारों ओर.... ..... 3
हापुस आम की है तो बात निराली
सबसे मंहगा यह तो बिकता
पूरे दुनिया में है इसका नाम
रत्नागिरी की शान है हापुस.......... 4
बच्चे जवान हों या बूढ़े
सबके मन को यह भाता
लोग बड़े चाव से खाते इसको
आमरस की तो है बात निराली ........... 5
( यह मेरी मौलिक रचना है --- ओमप्रकाश पाण्डेय)
[12/05, 3:47 pm] मीना कुमारी परिहारmeenakumari6102: लाल-लाल रसीले आम
##############

 आमों के पेड़ों पर देखो
लटक रहे हैं गुच्छे -गुच्छे आम
झूम रहे हैं हवा के संग
टहनी के दामन को थाम
लाल -लाल सुन्दर आम
जन -जन का प्यारा आम
मीठे -मीठे रसीले आम
फलों का राजा है आम
पके -पके हैं लटके आम
गर्मी में तरोताजा करता है आम
प्यारा -प्यारा रसीला आम
दिल को खुश करता है आम
बूढ़ों को भी खूब भाता आम
चाहे अमीर या हो गरीब
सबको खूब भाता आम
बच्चे भी इसे प्रेम से खाते
भांति -भांति के स्वादिष्ट आम
हर कोई देख इसे ललचाते
बिना खाये भी रहा न जाये
मीठे-मीठे रसीले आम
उपवन में गुच्छों से भरा है आम
लाल -लाल लागे प्यारा आम

डॉ मीना कुमारी परिहार
[12/05, 4:34 pm] कुम कुम वेद सेन: चित्र पर आधारित

कुदरत की अद्भुत लीला
प्रकृति के नियम है अनोखे
तस्वीर तो दूर से देखने पर लीची लगती
पर जूम करके देखा तो आम मिला
दिल और दिमाग मैं उथल-पुथल होने लगा
आज तक ऐसा आप हमने नहीं देखा
आम लाल पीला हरा सभी देखा
पर बैगनी आम पहली बार देखी

सोचने पर या फल मजबूर कर दिया
यह आम मिलता कहां है
किस मौसम का यह करिश्मा है
या किसी वनस्पति शास्त्र का नुस्खा नया है
पर बगीचे में पेड़ फलों से लदे हैं
देखने में बहुत ही सुंदर लग रहा
फलों का राजा है आम
गर्मियों में आम का बहार है
कहने को तो सभी आम अच्छे हैं
पर मेरी पसंद का मालदा आम
सर्वोपरि है
वैसे समय-समय पर हर आम
बहुत स्वादिष्ट है
आम पर कितने मुहावरे बन गए हैं
आम के आम गुठलियों के भी दाम
आम के पत्तों को पूजा में लगाते हैं
मंजर की खुशबू से वातावरण सुगंधित हो जाता
छोटे-छोटे तिगोले भी खाने में लगते लाजवाब
कच्चे आम हैं तो भी प्रिय हैं
पक गए तब तो सोने में सुहागा है
आम इसीलिए तो फलों का राजा कहलाता

कुमकुम वेद सेन
[12/05, 4:49 pm] वीना अचतानी 🧑🏿‍🦽: वीना अचतानी, 
विषय***चित्र पर आधारित कविता *
गर्मी के मौसम में आता 
फलों का राजा कहलाता 
स्वाद में मीठा रसीला आम
हर खोई देख इसे ललचाये
बिन खाये रहा भी न जाये
सुन्दर रसीला आम
कितना रंग रंगीला आम
सेहत को दुरुस्त बनाये
ज्यादा खाने से हानि कर जाये
पेड़ों पर लटके रसीले आम 
झूम झूम कर जी ललचाये आम
आया मौसम फिर आम का
बच्चों को बहुत ही भाते आम।।।।।
वीना अचतानी 
जोधपुर ।।
[12/05, 7:09 pm] डा. अंजूल कंसल इन्दौर: अग्निशिखा मंच 
विषय- चित्र देखकर कविता 

वाह दिख रहा है खूबसूरत नजा़रा 
लगा है पेड़ पर बैंगनी आम प्यारा 
एक दो नहीं सौ सौ की बहार है
देख आमों को मुंह में पानी आता।

आम कहलाता फलों का राजा 
स्वाद इसका मीठा मीठा रसीला
 नन्हे नन्हे बच्चे बूढ़े और जवान 
आम खाते फेरें बार बार ज़बान।

इसको खाने से गर्मी की तपन होती दूर 
आमरस आमपाक करे खाने को मजबूर 
दशहरी चौसा अलफांजो तोता परी 
नीलम बादामी पका पका सिंदूरी। 

अंतरराष्ट्रीय मूल्य है बहुत ज्यादा 
भारत का आमों का इतिहास न्यारा 
आओ आज खाएं बैंगनी आम राजा
अग्निशिखा मंच में सुंदर चित्र है आया।

डॉक्टर अंजुल कंसल "कनुप्रिया"
12-5-22






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