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अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच के ब्लॉग पर आज दिनांक 10 \2/2021 को दिए गए चित्र पर रचनाकारों की रचनाएं पढ़ें अलका पांडे मुंबई






सच्चा देशभक्त

सुभाष चंद्र बोस नाम था 
वह क्रांति की सुलगती  ज्वाला था ।।
अपना जीवन अर्पण किया राष्ट्रभक्ति में जीवन तर्पण किया ।।
 भारत मां का सच्चा सपूत था जन-जन का वहां प्यारा पुत  था ।।
 अंग्रेजों से ऐसा टकराया 
कभी ना उसने हार मानी ।।
 सुभाष चंद्र बोसनाम  हुआ 
देश भक्ति से अमर हुआ ।।
अंग्रेजों को ललकारा था ।
 तूफान से भरा सीना था ।। आकर्षक व्यक्तित्व का वह मालिक था
 हर जनता की आंख का तारा था ।।
 जीवन उसने देश को अर्पित किया
 ,"*तुम मुझे खून दो*
 *मैं तुम्हें आजादी दूंगा,**"
 या उसका नारा था।।
 गर्व  है इस भारत मां के लाल पर उसने स्वतंत्रता का मतलब समझाया था ।।
हिम्मत हारना उसको कभी गवारा नहीं था 
जापान गया वह लौट के ना फिर आया था ।।
ऐसा लाल भारत मां का सच्चा सहारा था 
आज भी वह हमें देश भक्ति समझाता है।।
अलका पाण्डेय मुम्बई

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[10/02, 9:24 am] 👑सुषमा शुक्ला: अग्निशिखा मंच🙏✒️

*आज का विषय*
*सच्चा देशभक्त* *सुभाष चंद्र बोस*


वीर सुभाष भारत का उजियारा,,, जिसकी गौरव गाथा को याद रखेंगे,,,, युग युग तक भारतवासी। मिट्टी में जिस ने मिला दी अपनी जवानी अच्छी खासी।


तन मन धन वार दिया,,,,
 मां पर जा कुर्बान किया,,,, हृदय में अलख जगा दिया,, जोश पूर्ण राष्ट्रीयता का भाव सजा दिया
 देश का जांबाज बॉस कहलाया।

बॉस की अमर कहानी,,,
 शेर की मांनिद उसकी जवानी,,,, मातृभूमि उसकी रवानी ,,,,,
गौरव गाथा जन जन ने जानी,,l

 स्वरचित रचना सुषमा शुक्ला

🌹🌹🌹🌹
[10/02, 9:27 am] 👑सुषमा शुक्ला: अग्निशिखा मंच🙏✒️

*आज का विषय*
*सच्चा देशभक्त* *सुभाष चंद्र बोस*


वीर सुभाष भारत का उजियारा,,, जिसकी गौरव गाथा को याद रखेंगे,,,, युग युग तक भारतवासी। मिट्टी में जिस ने मिला दी अपनी जवानी अच्छी खासी।


तन मन धन वार दिया,,,,
 मां पर जा कुर्बान किया,,,, हृदय में अलख जगा दिया,, जोश पूर्ण राष्ट्रीयता का भाव सजा दिया
 देश का जांबाज बॉस कहलाया।

बॉस की अमर कहानी,,,
 शेर की मांनिद उसकी जवानी,,,, मातृभूमि उसकी रवानी ,,,,,
गौरव गाथा जन जन ने जानी,,l

 स्वरचित रचना सुषमा शुक्ला

🌹🌹🌹🌹
[10/02, 10:43 am] आशा 🌺नायडू बोरीबली: (चित्र पर आधारित)
🌷 नेताजी सुभाष चन्द्र बोस🌷
********************

23 जनवरी 1897 को,
प्रभावती जानकीनाथ बोस के घर, जन्मा था एक महान ।


नाम था सुभाषचंद्र बोस, वह पढ़ने में था बहुत बुद्धिमान , ‌ ‌ उसने आईसीएस में दिखा दिया कमाल , पर मातृभूमि की सेवा का ले संकल्प , आईसीएस को दिया त्याग ।

                           अपनी मातृभूमि की खातिर , ‌ अपना सब कुछ कुर्बान किया , ‌‌ तुम मुझे खून दो , मैं तुम्हें आजादी दूंगा ।


और आजाद हिंद फौज किया तैयार , ‌ था वह भारत मां का सच्चा सपूत ,‌  
देश प्रेम लोगों के मन में भरमाया था।


कहा , जिसमें देश प्रेम की हो भावना , वे आगे आए ,अपना तन मन धन, ‌ अपना जीवन , अपना सर्वस्व भारत मां को करे अर्पण ।


लोगों को आजादी की राह दिखाई, अंग्रेजों के विरुद्ध आवाज उठाई,
अपने देश को करना है आजाद , तो फिरंगियों को करना होगा बाहर।


लेकर तिरंगा हाथ में, फहराया था अभिमान से, युवाओं में जोश जगाया, देश से अंग्रेजों को दूर भगाया ‌।


कहते हैं विमान दुर्घटना में, गए उनके प्राण , किंतु इस आशंका का अब तक नहीं मिला कोई प्रमाण।


वो था भारत का सच्चा सपूत , परमवीर ,साहसी, निडर , जय हिंद का नारा दिया जिसने , भारत को आजाद किया जिसने।


वो था ,भारत का गौरव,
अगाध मातृभूमि के लिए, अपना सर्वस्व निछावर किया , ‌ उन्हें प्रणाम, कोटि-कोटि प्रणाम।
*******************
स्वरचित रचना. 
डॉ . आशालता नायडू .
मुंबई . महाराष्ट्र .
********************
[10/02, 10:47 am] 👑डॉ ऊषा पाण्डेय: *नेता जी सुभाष चन्द्र बोस*

23 जनवरी सन् 1897 को
सुभाष चन्द्र बोस जी धरा पर आये।
माता प्रभावती जी अरु पिता जानकी नाथ बोस जी खुशी से फूले न समाये।

माता - पिता के चौदह बच्चों में 
थें वे नवीं संतान।
उड़ीसा राज्य का कटक शहर, था उनका जन्म स्थान।

देश प्रेम की भावना बड़ी प्रबल थी इनके अंदर।
जानते थे अंग्रेजों के खिलाफ
लड़ना है हमें एक जुट होकर।

'राष्ट्र के लिए स्वाधीनता सर्वोपरि है', नवयुवकों को समझाया।
'तुम मुझे खून दो, मैं तुम्हे आजादी दूँगा' इस नारे को जन जन तक पहुँचाया।

'आजाद हिंद फौज' की स्थापना कर स्वतंत्रता आंदोलन को आगे बढ़ाये ।
भारत माता के इस सुत ने
अंग्रेजों के दाँत खट्टे किये।

आजादी के इस नायक को
दुनिया मे सम्मान मिला
भारत के इस वीर पुत्र को
देशभक्ति विरासत मे मिला

सुभाष चन्द्र बोस जी, आप थें
ईमानदार, कर्तव्यनिष्ठ और 
महान
हम सब भारतवासी करते हैं
आपको नमन

डाॅ0 उषा पाण्डेय 
स्वरचित
[10/02, 10:50 am] शेभारानी✔️ तिवारी इंदौर: नेता जी सुभाष चंद्र बोस 
*******************
 इंकलाब का नारा देकर जिसने
 जन-जन में जोश जगाया था ,
 जंजीरो से देश को मुक्त करवाने,
 सुभाष इस धरती पर आया था।

 रग- रग में जिसके देशभक्ति थी,
 आजादी का बिगुल बजाया था,
 फिरंगियों के दमन चक्र के आगे ,
 केवल अपना लोहा मनवाया था।

 हमें मुफ्त में नहीं मिली आज़ादी,
 हम सबने अपना खून बहाया था ,
 अपने ही खून से हस्ताक्षर करके,
   हमने नया इतिहास बनाया था।

  तुम खून दो ,मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा,
  नेता सुभाष की ही जुबानी थी,
  प्रेरणा बने रहे भारतीयों के लिए,
 जय हिंद ,जय हिंद ही निशानी थी ।।

  वह तो आज़ादी का था दीवाना,
  मुख पर सूर्य सा प्रभावी तेज था,
  कोई भी न बांध सका उन्हें कभी,
  उनके अंदर तूफानों सा वेग था।

  बलिदानों ने अपना खून बहाया,
  भारत मां के चरणों में शीश चढ़ाया ,
  तब जाकर के सब भारतीयों ने,
  स्वतंत्र होने का बहुत सुख पाया ।

  नमन करते हैं हम सब सुभाष को ,
  हम उन्हें कभी भी नही भूल पाएंगे ,
  नेता सुभाष जी की गौरव गाथा ,
  सदियों तक जन -जन को सुनाएंगे ।

श्रीमती शोभा रानी तिवारी ,
619 अक्षत अपार्टमेंट , खातीवाला टैंक इंदौर मध्य प्रदेश मोबाइल 8989409210
[10/02, 11:08 am] 👑मीना त्रिपाठी: *नेताजी सुभाषचंद्र बोस ( चित्र आधारित )*

क्रांतिकारी दूतों के मन में
नेताजी ने स्वप्न सजाया था
'खून के बदले आज़ादी का'
मतलब उन्हें समझाया था

'अन्याय सहने वाला भी'
होता बड़ा अन्यायी है
हृदय-हृदय तक सभी के
बात उन्होंने पहुंचाया था

हर योग्यता से ऊपर होती
है देश की आज़ादी अपनी
फाड़कर अपनी कीमती डिग्रियां
जन-जन में अलख जगाया था

प्रखर बुद्धि , प्रखर विवेक
प्रखर मन में सदा उद्वेग रहे
शत- शत नमन हे वीर योद्धा
इतिहास में गाथा अमर रहे!

*मीना गोपाल त्रिपाठी*
 *कोतमा , अनुपपुर*
 *गुरुवार*
*10 फरवरी 2022*
[10/02, 11:55 am] विजेन्द्र मोहन बोकारो: मंच को नमन
विषय:-- *चित्र पर आधारित कविता*

१८९७ के २३जनवरी को
प्रभावती जानकी नाथ बोस
एक बालक के माँ बनी।
 नाम हुआ:---
*सुभाष चंद्र बोस* पढ़ने में बुद्धिमान,बना आईसीएस लेकिन लिया मातृभूमि की सेवा का संकल्प अपना पद को त्याग दिया। अपना जीवन कुर्बान कर दिया और देश को आवाहन किया *।
*तुम खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा*
आजाद हिंद फौज किया तैयार
देश प्रेम के नौजवानों को तैयार किया अपना सर्वस्व भारत मां को निछावर करो। लोगों को आजादी की राह दिखाए, अंग्रेजों के विरुद्ध आवाज उठाई।
१९४३ में पहला जंग जीता।
वीर सुभाष भारत को आजादी का राह दिखाया। 
इनकी गौरव गाथा को याद रखेंगे हम कृतज्ञ भारतवासी।
जिसने हृदय में अलख जगा दिया जोश पूर्ण राष्ट्रीयता का भाव सजा दिया। 
*देश के महानायक कहलाया*।
*जिनकी गौरव गाथा जन जन तक है प्यारी*।



विजयेन्द्र मोहन।
[10/02, 12:13 pm] वीना अचतानी 🧑🏿‍🦽: वीना अचतानी 
विषय* पर आधारित कविता *
***सुभाषचंद्र बोस ****
शत् शत् नमन 
सुभाषचंद्र बोस 
देशप्रेम के प्रेरणा का नाम
आज़ादी के लिये किया त्याग
भारत भू का उजियारा 
सुभाषचंद्र पैदा होते ही
गणिको ने लिख डाला 
वह वीर चक्रवर्ती होगा 
या होगा त्यागी सन्यासी 
जिसके गौरव को याद
करेंगे युग युग तक भारतवासी 
भारत की स्वतंत्रता की खातिर 
अपने प्राण न्यौछावर किये
शेर सी हुँकार से बोले
तुम मुझे खून दो
मैं तुम्हें आज़ादी दूंगा 
तुम्हें बलिदान करना होगा 
आज़ादी के चरणों में जो
जयमाल चढ़ाई जायेगी
सुनो वह तुम्हारे शीशों 
के फूलों से गूंथी जाएगी ।।।।।
वीना अचतानी 
जोधपुर ।।।
[10/02, 12:29 pm] कुंवर वीर सिंह मार्तंड कोलकाता: 🌺विषय- चित्र पर कविता
हर चित्र कुछ कहता है 

वीर सुभाष तुम्हारा शत शत अभिनंदन। 
तुम थे भारत माता के पावन चंदन।

घर घर गांव गांव में खबरें पहुंचा दी।
खून मुझे दो बदले में लो आजादी।

सत्य अहिंसा प्रेम न कुछ दे पाएंगे।
आजादी के स्वप्न, स्वप्न रह जायेंगे। 

तुमने अपनी फौज बनाई लड़ने को
सिर देकर स्वाधीन देश को करने को। 

जन्म दिवस को आज पराक्रम दिवस कहें।
एक मात्र नेता जी वो ही गए कहे।l

लेते उनका नाम स्वयं झुक जाता सिर।
ऐसा योद्धा हुआ कभी न होगा फिर।।

© कुंवर वीर सिंह मार्तंड,  कोलकाता
[10/02, 12:30 pm] मीना कुमारी परिहारmeenakumari6102: स्वतंत्रता संग्राम के महानायक
 सुभाष चंद्र बोस
**************************
"वो खून किस मतलब का
जिसमें उबाल का नाम नहीं
वो खून किस मतलब का
आ सके देश के काम नहीं"
        यह वीर इतिहास-पुरुष की अनुपम अमर कहानी है
 जो रक्त कणों से लिखी गई जिसकी जय हिन्द निशानी है.
         'सुभाष चन्द्र बोस'वह नाम है जो शहीद देशभक्तों के इतिहास में स्वर्ण अक्षरों में लिखा है। सुभाष चंद्र बोस जी की लोकप्रियता इतनी अधिक थी कि भारत के लोग उन्हें प्यार और श्रद्धा से' नेता जी' कहते थे। उनके व्यक्तित्व एवं वाणी में एक ओज एवं आकर्षण था। उनके हृदय में देश के लिए मर मिटने की चाह थी। उन्होंने आम भारतीय के हृदय में इसी चाह की अलख जगाई।
       सुभाष चंद्र बोस का जन्म 23जनवरी 1897को उड़ीसा प्रांत में कटक में हुआ था। उनके पिता श्री जानकी दास बोस एक प्रसिद्ध वकील थे। प्रारम्भिक शिक्षा कटक में प्राप्त करने के बाद वे कलकत्ता में उच्च शिक्षा के लिए गए। आई.सी.एस.की परीक्षा उत्तीर्ण करके इन्होंने अपनी योग्यता का परिचय दिया। देश के लिए अटूट प्रेम के कारण ये अंग्रेजों की नौकरी नहीं कर सके। बंगाल के देशभक्त चितरंजन दास की प्रेरणा से यह। राजनीति में आते। गांधी जी के साथ असहयोग आंदोलन में भाग लेकर वह जेल भी गये। 1939में ये कांग्रेस के अध्यक्ष चुने गए। गांधी जी के अहिंसावादी विचार इनके क्रांतिकारी विचारों से मेल नहीं खाते थे इसलिए इन्होंने कांग्रेस छोड़ दी। तत्पश्चात सुभाष जी ने फावर्ड ब्लांक की स्थापना की। उन्होंने पूर्ण स्वराज्य कि लक्ष्य रखा। उनका नारा था 'जय हिन्द'।वह हिन्दू मुस्लिम एकता के समर्थक थे।
       'बंगाल के बाघ'कहे जाने वाले नेता जी सुभाष चन्द्र बोस 'अग्रणी'स्वतंत्रता सेनानियों में से एक थे। उनके नारों 'दिल्ली चलो'और 'तुम मुझे खून दो , मैं तुम्हें आजादी दूंगा'से युवा वर्ग में एक नये उत्साह का प्रवाह हुआ था।
   सन् 1942में नेता सुभाष चंद्र बोस जर्मनी से जापान ग्रे। वहां उन्होंने 'आजाद हिन्द फौज'का संगठन किया। इनकी फौज ने अंग्रेजों से डटकर मुकाबला किया। जापान में परमाणु बम गिरने से आजाद हिंद फौज को हथियार डालने पड़े। कम पैसों और सीमित संख्या में सैनिक होने पर भी नेताजी ने जो किया, वह प्रशंसनीय है।
     नेताजी भारत को एक महान विश्व शक्ति बनाना चाहते थे। उन्होंने अंडमान निकोबार को स्वतंत्र कराया। किन्तु दुर्भाग्यवश एक विमान दुर्घटना में उनका देहान्त हो गया।। वह आज हमारे बीच नहीं हैं, पर उनका बलिदान, देशप्रेम एवं आदर्श जीवन हमें सदैव प्रेरणा देता रहेगा।
"वे कहां गए, वे कहां रहे, ये अधूरी अभी कहानी है।
हमने तो उनकी न‌ई कथा, आजाद फौजी से जानी है।।"
    सुभाष चंद्र बोस के निधन से भारत को अपार क्षति हुई। सुभाष चंद्र बोस जैसा वीर, निर्भीक राष्ट्र नेता मर कर भी अमर हो जाता है। उनका आज भी भारतवासी बड़े आदर और श्रद्धा से नाम लेते हैं।
      "जिसके गौरव को याद रखेंगे
युग-युगान्तर तक
प्यारा सुभाष!,न्यारा सुभाष!नेता सुभाष!
भारत भूमि का सच्चा सपूत था"

 डॉ मीना कुमारी परिहार
[10/02, 1:47 pm] सरोज दुगड गोहाटी: * नेता जी सुभाष चन्द्र बोस *

भारतीय आजादी के देदिप्य मान चमकते नक्षत्र थे नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ! आपका प्रखर तेजस्वी व्यक्तित्व बचपन से ही दिखनें लगा था ! आप जब पहले दिन स्कूल जाने वाले थे तो रिक्शे पर चढ़ने की उतावली में गिर पड़े तो आपकी बहनों नें कहा आज आप स्कुल नहीं जा सकते ! तो आप सारा दिन रोते रहे की मेरा एक दिन बर्बाद हो गया ! 
 आप के जीवन पर स्वामी विवेकानंद और अरविंदो घोष का बहुत असर था !
आपने पन्द्रह वर्ष की उम्र तक इनकी बारे में जितनी जानकारी उपलब्ध थी सब पढ़ डाली ! आपके व्यक्तित्व में वही चिंगारी वहीं तेज था जो विवेकानंद जी में था ! दोनों ही सुदर्शन व्यक्तित्व के स्वामी थे ! दोनों ही बंगाली थे ! दोनों का कार्य क्षेत्र कलकता था ! विवेकानंद की तरह ही आपने देश विदेशों की यात्राऐ की ओर अपने व्यक्तित्व का विकास किया ! आप में एक ऐसा जोश और ऊर्जा थी कि वह किसी भी व्यक्ति के अंदर देश प्रेम की चिंगारी सुलगा सके !
आप की नेतृत्व क्षमता किशोर उम्र से ही दिखनें लगी थी ! कालेज में उन्हें रंग भेद भारतीयों के साथ अंग्रेजों की बद सलुकी उन्हे व्यथित करती थी ! वो मन ही मन देश की आजादी का सपना देखने लगे थे ! उस समय कालरा नामक बिमारी से हजारों लोग मर रहे थे मगर अंग्रेज सरकार का इस तरफ कोई ध्यान नहीं था ! ये देख नेताजी का खुन खौल उठा ! वो नई विचारधारा के नौजवान थे और देश के लिए कुछ करना चाहते थे !
             बैचलर की डिग्री हासिल कर आप सिविल सर्विस की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गये ओर एक साल के अंदर ही सीविल सर्विस की परिक्षा में चौथा रैंक प्राप्त किया ! 
उस समय देश में गांधीजी का असहयोग आंदोलन चल रहा था ! सुभाष चंद्र बोस आई एस बन अंग्रेजों की नौकरी करना नहीं चाहते ......थे !
उन्होंने देश की आजादी के लिए कुछ करने की सोची !
१९२३ को नेशनल युवा कांग्रेस के अध्यक्ष बना दिये गये !
इसी बीच आपको मांडला जेल में बंद कर दिया गया ! इसके पीछे अंग्रेजों के गंदे दिमाग की काली सोच थी ! मांडला जेल में इतने चूहे , मच्छर , मलेरिया ,टीवी आदि बिमारियों का प्रकोप था ? खराब खाने से कैदी जल्दी बीमार पड़ जाते ! वहीं उन्हें टीवी हुआ और आप इलाज के लिए युरोप गये ! उस तीन बर्ष की समय में आपने समाजवाद का गहन अध्ययन किया एमिली नामक महिला से मिले बाद में उन्होंने एमिली से विवाह कर लिया ! 
कालांतर आपके एक पूत्री भी हुई अनीता बोस !
तीन बर्ष विदेश में रहकर भी आपकी लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई थी !
सन १९३८ में कांग्रेस अध्यक्ष चुन लिए गये !
गाँधी जी ने कहा " सुभाष अगर तुम चुनाव जीतते हो तो ये मेरी हार होगी?"
तब आपने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया  
आल इंडिया फारवर्ड ब्लाक की स्थापना की थी !
     उनकी अंग्रेज विरोधी गतिविधियों को देख उन्हे अपने घर में नजरबंद कर दिया गया ! वहां से भेस बदलकर पेशावर पाकिस्तान ,काबुल, मास्को से 
बर्लिन तक जा पहुंचे ! 
उस समय दुसरा विश्वयुद्ध चल रहा था ! जो भी युद्ध बंदी बनाए जाते उनमें अधिकांश बंदी भारतीय थे ! आपने उन बंदियों को साथ लेकर आजाद हिंद फौज की स्थापना की ! आप हिटलर से मिले ! हिटलर ने आपको जर्मनी से जापान पहुंचने में मदद की !आप एक पनडुब्बी की सहायता से मेडागास्कर तक गये ! आपने कैप्टन माधौसिंह की मदद से सत्तर हजार सैनिकों की सेना तैयार की ! कहते हैं आपके भाषणों में ऐसा जादू था की बर्मा की स्त्रियां अपनें आभूषण और बच्चे नेताजी को सौंप देती की आप इन्हे प्रशिक्षण दो और फौज में भर्ती करो ! 
आजाद हिंद फौज सिंगापुर से अंडमान निकोबार से होती हुई गंगा के मैदानों तक पहूंची !
आप जो वर्दी पहनते थे वो आपके अंदर के कुशल प्रशासक के उर्वर सोच की देन थी ! 
    ६ जुलाई रेडियो रंगून से नेताजी ने देश को संबोधित किया और कहा ......
राष्ट्र पिता आजादी की इस लड़ाई में हमें आशीर्वाद दीजिए !
सभी जानते हैं कि गांँधीजी नेता जी को पसंद नहीं करते थे ! दोनों की विचारधारा अलग थी !नेता जी ने इसका कभी बुरा नहीं माना ! वे कहते थे हम दोनो का मकसद एक है... देश की आजादी ?
१८ अगस्त १९४५ को ताइवान में एक विमान दुर्घटना में आपकी मौत हो जाती है ! आपके शरीर के अवशेष नहीं मिले !
एक चमकीले सितारे की तरह नेताजी सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में कहीं खो गये ???
देश का दुर्भाग्य है कि देश ने एक कुशल प्रशासक , जोशीला नेता एक महान क्रांतिकारी को दिया ! 
जिसका नारा था ... तुम मुझे खुन दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा ! 
" जय हिंद "
कदम से कदम बढ़ाए जा खुशी के गीत गाए जा ये जिंदगी है कौम की कौम पे लुटाए जा !
गाँधीजी को राष्ट्रपिता का संबोधन नेता जी ने ही दिया था !
लोगों में जोशीले जज्बे को भरने वाले चिर युवा अमर शहीद नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को शत् शत् नमन !
आपके प्रेरणादाई जीवन संस्मरणं सदियों तक लोगों में देश प्रेम की भावना भर कर प्रेरित करते रहेंगे ! 

मौलिक स्वरचित
सरोज दुगड़
खारुपेटिया 
असम 
🙏🙏🙏
[10/02, 2:22 pm] रवि शंकर कोलते क: गुरुवार दिनांक १०/२/२२
विधा****कविता
विषय*****
   भारत के स्वतंत्र सेनानी
         ^^^^^^^^^^^^
              सुभाष चंद्र बोस
                  ^^^^^^^^

वीर सुभाष चन्द्र बोस पूत हिंदका प्यारा ।
मातृभूमि के लिए जिसने सब कुछ वारा ।।
अंग्रेजों से टकराया मरते दम तक जो ।
क्रांतिज्योत जलाई दिया मुक्ति का नारा ।‌।१

तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें आजादी दूंगा ।
गद्दार फिरंगों से अंतिम सांस तक लडूंगा ।।
चाहे मेरी जान क्यूं न जाएं मां की खातिर ।
मैं इस मिट्टी की खातिर अपने प्राण दूंगा ।।२

सुभाष ने आजाद हिंद फौज तैयार की ।
फिरंगों को अपने दम पर ललकार दी ।।
भारत के नौजवानों में जोश भर दिया ।
अमन प्यार के साथ हाथों में तलवार दी ।।३

प्रभावती जानकी नाथ का पुत्र एक महान ।
मां की सेवा की करदी जां अपनी कुर्बान ।।
ऐसा तेज साहसी वीर कभी न होगा ।
हिंद के इस जांबाज को शत-शत प्रणाम ।।४

प्रा रविशंकर कोलते
     नागपुर
[10/02, 2:43 pm] ओम 👅प्रकाश पाण्डेय -: नेता जी आप हमारे हृदय में अमर हैं
( चित्र पर आधारित कविता) ---- ओमप्रकाश पाण्डेय

हे महान सपूत देश के 
माँ भारती के लिए बलिदान किया
तुमने अपना सारा जीवन
दिया देश को नया नेतृत्व
जब थी उसे तुम्हारी जरूरत
नेता जी तुम हो अमर आज भी........ 1
अहिंसा व हिंसा कौन है रास्ता
इस निर्थक बहस में जब 
उलझा था पूरा देश अपना 
 देश को तब तुमने बताया
सर्वोच्च है राष्ट्र हित , राह से बढ़कर सदा
नेता जी तुम हो अमर आज भी..... .. 2
तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें दूंगा आजादी
यह आवाह्न नहीं मंत्र था सबके लिए
फिर माँ भारती के वीर सपूतों ने
परदेश में भी दे दिया एक फौज तुमको
पछाड़ कर दुश्मनों को, तुम आ गये कोहिमा तक
 नेता जी तुम हो अमर आज भी ........ 3
फहरा दिया तिरंगा अंडमान व कोहिमा में
राष्ट्र को नवचेतना दी परदेश से
विश्वास दिया मुक्ति का दासता से
नई ऊर्जा नया शक्ति नया विहान दिया
आज पूरा देश करता गुणगान तेरा
हाथ जोड़ कर वन्दना हम कर रहे
नेता जी तुम हो अमर आज भी......... 4
( यह मेरी मौलिक रचना है ------- ओमप्रकाश पाण्डेय)
[10/02, 3:56 pm] पुष्पा गुप्ता / मुजफ्फरपुर: 🌹🙏अग्नि शिखा मंच 🙏🌹
     विषयः चित्र आधारित रचना 
          दिनांक: 10/2/22
*********************************
हे भारत के लाल- नौनिहाल 
तूने कितना किया कमाल,,,,
आजादी दिलाने में ,,,,,×3
"तुम मुझे खून दो ,,,,
मैं तुम्हें आजादी दूँगा "
ये थे सुभाष चंद्र के बोल,
कैसा क्रान्तिकारी अनमोल।
इनमे देश भक्ति छाई ,,,,,,
कैसी वेदना उमड़ कर आई।
इनका व्यक्तित्व था कितना प्यारा,
फिर भी अंग्रेजों को ललकारा।
इनकी स्मृतियाँ थी तूफानी,
जिसने पिलाया अंग्रेजो को पानी।
हिटलर ने इनकी मेधा पर ,,,,,,
थे , रीझा करते हर दिन ,,,,,।
भर पूर सहारा मिला सभी से ,
पर ईश्वर को गँवारा न था,यह दिन।
आई.ई.एस. की नौकरी छोड़ कर,
"भारतमाता की जय "का व्रत ले ,
सचमुच गुमसुम , हुआ एक दिन !! 
न जाने किस तहखाने में !!
आजादी दिलाने में,,,,, ×3
हे भारत के लाल- नौनिहाल 
तूने कितना किया कमाल 
आजादी दिलाने में,,,,,×3
********************************
स्वरचित एवं मौलिक रचना 
रचनाकार-डॉ पुष्पा गुप्ता  
मुजफ्फरपुर 
 बिहार 🌹🙏
[10/02, 4:14 pm] रामेश्वर गुप्ता के के: ।हमारे देश के नेताजी। 
हमारे देश के प्रिय नेता जी, 
श्री सुभाष चंद्र बोस जी है। 
जिन्होंने एक नारा दिया है, 
तुम खून दो मै आजादी दूंगा है।। 
हमारे...................... 1 
बंगाल का वह लाल है, 
गर्म खून और देश प्रेमी है। 
देश प्रेम बसा था हृदय में, 
वह आजादी का शेर है।। 
हमारे....................... 2 
श्री सुभाष चंद्र बोस जी से, 
देश प्रेम की नयी धारा बनीहै। 
उनके जैसे एक देश प्रेमी ने, 
देश में आजादी नीव रखी है।। 
हमारे....................... 3
आओ अपने उस नेता को, 
श्रद्धा देकर प्रणाम करते है। 
अपने वीर सुभाष नेता को, 
जै कहकर हम नमन करते है।। 
हमारे........................ 4
स्वरचित, 
रामेश्वर प्रसाद गुप्ता ।
[10/02, 4:35 pm] निहारिका 🍇झा: नमन अग्निशिखा मंच
दिनाँक;-10/2/2022
विषय;- चित्राभिव्यक्ति (नेताजी सुभाष चन्द्र )
विधा:-मनहरण घनाक्षरी
(8,8,8,7)
माँ भारती के लाल थे।
वीरता की मिसाल थे।
कटक में थे जन्मे वो
बंगाल के बाघ थे।।1।।
उनमें जोश था भरा
नायक था नाम मिला 
आजादी का जुनून था।
दुश्मन अंग्रेज था।।2।।
खून दो आजादी मिले
युवाओं में जोश भरे।
नारे को उनने दिया।
नेताजी नाम मिला।।3।।
विवेकानंद के शिष्य थे।
 निर्भीक व निडर थे।
खाईं गोलियाँ सीने पे।
कभी नहीं डरे थे।।4।।

निहारिका झा🙏🙏
खैरागढ़ राज.(36 गढ़)।।
[10/02, 5:16 pm] Nirja 🌺🌺Takur: 
अग्निशिखा मंच
तिथि - 9- 2 -2022
विषय- चित्र पर कविता

नेता जी आप हमेशा अमर रहेंगे
आपके सिध्दांत हमेशा जीवित रहेंगे। 
कटक उड़ीसा के मशहूर वकील 
जानकी नाथ बोस के घर पैदा हुए
पढ़ने में थे होशियार , आगे बढ़ते गये
प्रेसीडेंसी में कॉलेज पढ़ने गये, 
समाज सेवा का भूत चढा़ तो कॉलेज से निकाले गये। 
जब फैली महामारी हैजा की
लोग कीड़े मकोड़ों की तरह मरने लगे
बोस समाज सेवा करते ,
 लावारिस लाशों को जलाते 
वहीं इन्होने प्रण लिया भारत को सपनों का भारत बनाउंगा। 
स्टूडेंट काउंसिल के लीडर बने 
भारतीय स्टूडेंट के अधिकारों के लिए खड़े हुए और कॉलेज से निकाले गये। 
इंडिया सिविल सर्विस की 4 साल की कठिन पढ़ाई 7 महीनों में पूरी कर ली। 
रैंक होल्डर हो कर भी इन्होने सर्विस छोड़ दी। 
उनका मानना था अपराध तो बड़ा होता है,
पर उसका विरोध ना करना उससे भी बड़ा अपराध होता है। 
1930 में लाहौर अधिवेशन में झंडा फहराकर आजादी की मांग की। 
एक समय ऐसा आया लोग गांधी जी से अधिक उनकी बात सुनने लगे। 
गरम दल के विचार लोगों को पसंद आने लगे
आजाद हिंद फौज की रचना की। अंग्रेजों के नाक में दम करने लगे
"तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आज़ादी दूंगा" ये नारा दिया
प्लेन क्रैश में मरे या मार डाला गया
इनकी मृत्यु पर भी बहुत बात उठी
आज भी पता नहीं है नेता जी मरे या मार डाला गया
नेता जी का देहांत हुआ है
उनके विचारों का, हमारे स्नेह का अंत नहीं हुआ है। वो हममें हमेशा जीवित रहेंगे।

नीरजा ठाकुर नीर
पलावा डोंबिवली
महाराष्ट्र
[10/02, 5:19 pm] सरोज दुगड गोहाटी: * नेता जी सुभाष चन्द्र बोस *

भारतीय आजादी के देदिप्य मान चमकते नक्षत्र थे नेताजी सुभाष चन्द्र बोस ! आपका प्रखर तेजस्वी व्यक्तित्व बचपन से ही दिखनें लगा था ! आप जब पहले दिन स्कूल जाने वाले थे तो रिक्शे पर चढ़ने की उतावली में गिर पड़े तो आपकी बहनों नें कहा आज आप स्कुल नहीं जा सकते ! तो आप सारा दिन रोते रहे की मेरा एक दिन बर्बाद हो गया ! 
 आप के जीवन पर स्वामी विवेकानंद और अरविंदो घोष का बहुत असर था !
आपने पन्द्रह वर्ष की उम्र तक इनकी बारे में जितनी जानकारी उपलब्ध थी सब पढ़ डाली ! आपके व्यक्तित्व में वही चिंगारी वहीं तेज था जो विवेकानंद जी में था ! दोनों ही सुदर्शन व्यक्तित्व के स्वामी थे ! दोनों ही बंगाली थे ! दोनों का कार्य क्षेत्र कलकता था ! विवेकानंद की तरह ही आपने देश विदेशों की यात्राऐ की ओर अपने व्यक्तित्व का विकास किया ! आप में एक ऐसा जोश और ऊर्जा थी कि वह किसी भी व्यक्ति के अंदर देश प्रेम की चिंगारी सुलगा सके !
आप की नेतृत्व क्षमता किशोर उम्र से ही दिखनें लगी थी ! कालेज में उन्हें रंग भेद भारतीयों के साथ अंग्रेजों की बद सलुकी उन्हे व्यथित करती थी ! वो मन ही मन देश की आजादी का सपना देखने लगे थे ! उस समय कालरा नामक बिमारी से हजारों लोग मर रहे थे मगर अंग्रेज सरकार का इस तरफ कोई ध्यान नहीं था ! ये देख नेताजी का खुन खौल उठा ! वो नई विचारधारा के नौजवान थे और देश के लिए कुछ करना चाहते थे !
             बैचलर की डिग्री हासिल कर आप सिविल सर्विस की पढ़ाई के लिए इंग्लैंड गये ओर एक साल के अंदर ही सीविल सर्विस की परिक्षा में चौथा रैंक प्राप्त किया ! 
उस समय देश में गांधीजी का असहयोग आंदोलन चल रहा था ! सुभाष चंद्र बोस आई एस बन अंग्रेजों की नौकरी करना नहीं चाहते ......थे !
उन्होंने देश की आजादी के लिए कुछ करने की सोची !
१९२३ को नेशनल युवा कांग्रेस के अध्यक्ष बना दिये गये !
इसी बीच आपको मांडला जेल में बंद कर दिया गया ! इसके पीछे अंग्रेजों के गंदे दिमाग की काली सोच थी ! मांडला जेल में इतने चूहे , मच्छर , मलेरिया ,टीवी आदि बिमारियों का प्रकोप था ? खराब खाने से कैदी जल्दी बीमार पड़ जाते ! वहीं उन्हें टीवी हुआ और आप इलाज के लिए युरोप गये ! उस तीन बर्ष की समय में आपने समाजवाद का गहन अध्ययन किया एमिली नामक महिला से मिले बाद में उन्होंने एमिली से विवाह कर लिया ! 
कालांतर आपके एक पूत्री भी हुई अनीता बोस !
तीन बर्ष विदेश में रहकर भी आपकी लोकप्रियता में कोई कमी नहीं आई थी !
सन १९३८ में कांग्रेस अध्यक्ष चुन लिए गये !
गाँधी जी ने कहा " सुभाष अगर तुम चुनाव जीतते हो तो ये मेरी हार होगी?"
तब आपने कांग्रेस से इस्तीफा दे दिया  
आल इंडिया फारवर्ड ब्लाक की स्थापना की थी !
     उनकी अंग्रेज विरोधी गतिविधियों को देख उन्हे अपने घर में नजरबंद कर दिया गया ! वहां से भेस बदलकर पेशावर पाकिस्तान ,काबुल, मास्को से 
बर्लिन तक जा पहुंचे ! 
उस समय दुसरा विश्वयुद्ध चल रहा था ! जो भी युद्ध बंदी बनाए जाते उनमें अधिकांश बंदी भारतीय थे ! आपने उन बंदियों को साथ लेकर आजाद हिंद फौज की स्थापना की ! आप हिटलर से मिले ! हिटलर ने आपको जर्मनी से जापान पहुंचने में मदद की !आप एक पनडुब्बी की सहायता से मेडागास्कर तक गये ! आपने कैप्टन माधौसिंह की मदद से सत्तर हजार सैनिकों की सेना तैयार की ! कहते हैं आपके भाषणों में ऐसा जादू था की बर्मा की स्त्रियां अपनें आभूषण और बच्चे नेताजी को सौंप देती की आप इन्हे प्रशिक्षण दो और फौज में भर्ती करो ! 
आजाद हिंद फौज सिंगापुर से अंडमान निकोबार से होती हुई गंगा के मैदानों तक पहूंची !
आप जो वर्दी पहनते थे वो आपके अंदर के कुशल प्रशासक के उर्वर सोच की देन थी ! 
    ६ जुलाई रेडियो रंगून से नेताजी ने देश को संबोधित किया और कहा ......
राष्ट्र पिता आजादी की इस लड़ाई में हमें आशीर्वाद दीजिए !
सभी जानते हैं कि गांँधीजी नेता जी को पसंद नहीं करते थे ! दोनों की विचारधारा अलग थी !नेता जी ने इसका कभी बुरा नहीं माना ! वे कहते थे हम दोनो का मकसद एक है... देश की आजादी ?
१८ अगस्त १९४५ को ताइवान में एक विमान दुर्घटना में आपकी मौत हो जाती है ! आपके शरीर के अवशेष नहीं मिले !
एक चमकीले सितारे की तरह नेताजी सम्पूर्ण ब्रह्माण्ड में कहीं खो गये ???
देश का दुर्भाग्य है कि देश ने एक कुशल प्रशासक , जोशीला नेता एक महान क्रांतिकारी को दिया ! 
जिसका नारा था ... तुम मुझे खुन दो मैं तुम्हे आजादी दूंगा ! 
" जय हिंद "
कदम से कदम बढ़ाए जा खुशी के गीत गाए जा ये जिंदगी है कौम की कौम पे लुटाए जा !
गाँधीजी को राष्ट्रपिता का संबोधन नेता जी ने ही दिया था !
लोगों में जोशीले जज्बे को भरने वाले चिर युवा अमर शहीद नेताजी सुभाष चन्द्र बोस को शत् शत् नमन !
आपके प्रेरणादाई जीवन संस्मरणं सदियों तक लोगों में देश प्रेम की भावना भर कर प्रेरित करते रहेंगे ! 

मौलिक स्वरचित
सरोज दुगड़
खारुपेटिया 
असम 
🙏🙏🙏
[10/02, 5:26 pm] कुम कुम वेद सेन: नमन अग्निशिखा मंच

चित्र पर आधारित


तुम मुझे खून दो
मैं तुम्हें आजादी दूंगा

यह नारा से एक मन मस्तिष्क में
छवि उभरती रहती है
उस छवि में सुभाष चंद्र बोस
क्रांतिकारी नेता की तस्वीर है

श्रीमती प्रभावती बोस के नंदन रहे
भारत देश के वह चंदन बने
पूरे भारतवासी करती है अभिनंदन

कुशाग्र बुद्धि तेजस स्वभाव खोलता खून
भारत के क्रांति पर अपना जीवन किया कुर्बान

वकील पिता रहे 14 भाई बहनों
उनका स्थान 9वी पर रहा ऐसा लगता
नवग्रह के एक सितारा सुभाष बोस रहे

सरकारी पदाधिकारी पद को त्याग दिया
भारत देश के जुल्मों के खिलाफ आवाज उठाया
भारत मां के ऐसे थे नौनिहाल
उनके जैसा मिलता नहीं कोई मिसाल

उनके जीवन के वीर गाथाओं
अद्भुत एक श्रृंखला एक कड़ी है
जिससे भारत की आजादी जुड़ी है


कुमकुम वेद सेन
[10/02, 6:11 pm] 💃💃sunitaअग्रवाल: शीर्षक_, देशभक्त सुभाषचंद्र बोस


ये पावन धरा देवभूमि हमारी,
    जहां राम कृष्ण ने जन्म लिया
 वहा रहते वचन निभानेवाले,
तुम मक्कारी के गुल खिलाने वाले 
      भोली भाली जनता को हो भरमाते ,
मासूमों पर कत्ल कर दहशत बरपाते हो ,
हम इस भू से तेरा अस्तित्व मिटा देगे ,
नापाक अंग्रेजो , देशछोड़ो तुम जहरीले नाग हो।

दिया नारा सुभाष ने ," सुनो देशवासियों ,*तुम मुझे खून दो** *मैं तुम्हे आजादी दूंगा*

पूरे देश में दे नारा, जगाई अलख 
*आजाद हिन्द फौज बनाकर* 
की गर्जना , अब सहन न करेंगे तुम्हारा दखल,
सर्वोपरि है राष्ट्र हित मौका परस्तो की बातो में न बहना 
आजादी हमारा गहना ।
इन नारों ने जन जन को असीम जोश से लबरेज कर दिया 
*दिल्ली चलो*,*जयहिंद* जयभारत ।
कदम कदम बढ़ाए जा , खुशी के गीत गाए जा ।
ये जिन्दगी है कौम की , काेम पर लुटाए जा ।
भारत माँ के वीर सपूत तुझे लख लख नमन , वंदन अभिनंदन ।


सुनीता अग्रवाल इंदौर स्वरचित धन्यवाद 🙏🙏
[10/02, 6:43 pm] सुरेन्द्र हरडे: अग्निशिखा मंच को नमन

आज की विधा:- चित्र पर आधारित रचना

*शत शत नमन सुभाष जी*

प्रभावती, जानकीनाथ के द्वार
पर ईश्वर ने एक बालक दिया
नाम रखा सुभाष बुध्दि का 
विलक्षण प्रतिभा का धनी था।१।।

आय. सी.एस. बन गये पिता
की इच्छा पूरी की नहीं करनी थी
गुलामगीरी मन में ठान ली, भारत
मां को अंग्रेजों से मुक्त कराना।२।

बावन्न वे कांग्रेस के अध्यक्ष बने
समझ गये नहीं मिलेगी अंहिसा 
से आजादी यही कारण था 
आजाद हिंद सेना बनायी।।३।।

इंकलाब का नारा देकर
भारतीयों को अंग्रेजों को भगाने अलख जगाई प्रेरित हूऐ सब भारतवासी नमन करते सुभाषजी।। ४।।

जर्मनी के हिटलर को मिले
जपान के साथ आजाद हिंद
सेना से कोहिमा अंदमान निकोबार तिरंगा फहराया।।५।। 

तूम बन गये बंगाल के वीर पुरुष
खून देकर आजादी मांगी
देशहित में जीवन किया बलिदान शत् शत् नमन करते सुभाषजी।६

तुम बोले "मुझे खून दो बदले में दुंगा आजादी" जय हिन्द के नारों
मे हर दिल में ज्वाला भर दी
अमर हो गए नेताजी तुम पर है सबको अभिमान ।।७।।

आपका जनम दिन बनाते हैं
पराक्रम दिन कहलाते सारे
देशवासी श्रध्दागत होकर
आज करते नमन सुभाषजी।८।

सुरेंद्र हरड़े
नागपुर
दिनांक १०/०२/२०२२
[10/02, 6:56 pm] डा. अंजूल कंसल इन्दौर: वीर नेता सुभाष चंद्र बोस 
चित्र आधारित रचना

देशभक्ति की, मिसाल बनकर 
आजा़द भारत,की चाह रखकर 
अंग्रेजों को नाकों,चने चबवा कर
दुश्मनों के दांत,खट्टे कर दिए तुमने।

"तुम खून दो,मैं आजादी दूंगा"
का नारा गुंजायमान हुआ 
जय हिंद का बिगुल बजाया 
वंदे मातरम गान मुखरित हुआ।

सैन्य पोशाक में सुभाष चंद्र लगें 
देशभक्त का जोश तुम्हारे तन में, 
वीर प्रतापी सूर्य तेजोमय मुख पर 
स्वतंत्रता-बिगुल बजाया निर्भय होकर।

जन-जन में भर दिया जोश-हिम्मत 
आजा़दी का नव- स्वप्न जगमगाया 
क्रांतिकारी,सिर पर बांध लिया कफन
आजा़द भारत का मतलब समझाया।

प्रखर ज्ञान, प्रबल विवेक से 
मातृभूमि का संकल्प लिया 
आजा़द हिंद फौज बनाकर 
योद्धा,सुभाष अमर हो गया।

सुभाष तुम्हारा करते हैं अभिनंदन 
थाली में सजाया,अक्षत रोली चंदन 
तुम्हारी गौरव-गाथा सदियों तक गूँजेगी स्कूल पाठ्यक्रम में,बच्चों में जोश भरेगी।
 
डॉक्टर अंजुल कंसल "कनुप्रिया"
10-2-22
[10/02, 7:04 pm] वीना अडवानी 👩: देश भक्ति गीत
*************

भारत की धरती का सुनो
एक स्वर्णिम इतिहास है
यही पर जन्में राम तो
यही पर वृंदावन धाम है।।

भारत की पावन स्वतंत्र धरती 
आज युद्धवीरों से मिला वरदान है।।
अशोक सम्राट , मुगल साम्राज्य
परचंम एसे जिनकी गूंजे जय जयकार है।।

स्वर्णिम धरती की माटी रंगी
बलिदानियों के रक्त से कभी
आज एसे भारत देश पर जन्मी मैं
गौरवान्वित हूं, खुद पर अभिमान है।।

विश्व धरोहर ताजमहल , हिमालय
इनका भी विश्व में खूब बखान है।।
काश्मीर की सुंदरता देख कर आज भी
मंत्रमुग्ध समस्त जहांन है।।

देश भक्ति का गीत लिख रही मैं
लेखिका वीना ये तेरा नसीब और मान है
धरा , इतिहास , सौंदर्य लिख सुनाऊं
यही तो मेरी कलम का यशगान है।।

वीना आडवानी तन्वी
नागपुर, महाराष्ट्र
********************
[10/02, 7:18 pm] Chandrika Vyash Kavi: नमन मंच
दिनांक -: 10/2/2022

 सुभाष चंद्र बोस के स्वतंत्रता का नारा 
        ब्रिटिश राज्य का ही नहीं 
        समाजवाद का भी था नारा
         जिन्होंने अपना सिक्का गाड़ 
         जंग जीत जॉर्ज पंचम को हटा
     खाली छतरी पर अपना स्थान बनाया !
           वे जीवन से कभी ना हारे 
             दे गए जय हिंद का नारा !

           जो समय की धारा में बहकर प्रलय को 
              थामने का निर्णय लिया करते हैं 
              जो गंगा से प्रचंड वेग को शिव की 
               जटा सम आश्रय दिया करते हैं 
               भयमुक्त हो तूफान में शिखर की   
                      चट्टानों पर अडिग रहे
                वही बर्फीली चट्टानों का गर्म लहु बन 
                        इतिहास रचा करते हैं !

                   भारत के इतिहास में आजाद 
                   सुभाष चंद्र बोस की भी कहानी है
                    भारत की आजादी में उनके
                       खून की बूंदों से लिखी
                       जय हिंद की निशानी है !
                भारत का वीर सपूत क्रांतिकारी 
                   कहलाया यह उनकी गाथा है 
               बेखौफ स्वतंत्रता के हवन कुंड में 
                        वे कैसे गोते लेते थे 
                    हम सबको अपनी जुबानी है !

                    तुम मुझे खून दो मैं तुम्हें 
                    आजादी दूंगा का नारा
                    कहने वाले आजाद बोस 
                    त्यागी थे या सन्यासी
           मां भारत को जीवन समर्पित करने वाले 
                थे वे पहले भारतवासी !
              लगता है आज महानायक बोस के
                  चक्रव्यूह में फस जाने से पहले
                       क्यों ना हो पाई 
                     यह दुनिया आभासी !

                        इंसान बंध जाता है 
                      तूफान नहीं बांधे जाते हैं
                          देह बंध जाते हैं 
                       पर इरादे नहीं बंधते हैं !
               दृढ़ प्रतिज्ञ सेनानी थे बोस 
                 चालाकी कर निकल गया
                   अंग्रेजों की मुट्ठी से पारा
                      बन फिसल गया !

                   दुर्योधन के छल से 
                   देवकीनंदन भागे थे 
                 रानी लक्ष्मीबाई के डर से 
                       अंग्रेज भागे थे !
           हाहाकार मचा था बोस भागा है
           सन 1941 को सुभाषचंद्र बोस ने 
अंग्रेजों का पिंजड़ा तोड़ा था! 
            
             चंद्रिका व्यास 
            खारघर नवी मुंबई
[10/02, 7:20 pm] रानी अग्रवाल: " वीर" नेताजी सुभाष चंद्र बोस
१०_ २_२०२२,गुरुवार।
विधा_ चित्र पर कविता
शीर्षक_ वीर,नेताजी सुभाष चंद्र
नेताजी से आजादी के दीवाने,
देखे आजादी के सपने सुहाने।
मंजूर नहीं थी किसी की गुलामी
हर कीमत चाहिए थी आजादी।
शांति_ अहिंसा से न होगा ऐसा
अंग्रेजों को दो जैसे को तैसा।
कांग्रेस बंटी नरम गरम दल में,
सुभाष का गरम खून हलचल में
अपनी" आज़ाद हिंद सेना बनाई
शत्रु से करनेआजादी की लड़ाई।
" तुम मुझे खून दो,
   मैं तुम्हें आजादी दूंगा"का नारा
" जयहिंद सुन लो, चलो दिल्ली
कहकर देशवासियों " ललकारा।
ना पैदा हुआ आज तक ऐसा वीर
विदेशों में जा लिखी देश तकदीर।
माना लोहा हिटलर ने भी,
साथ दिया,बोला ले लो आजादी।
" कदम _ कदम बढ़ाए जा,
 खुशी के गीत गाए जा" ये गीत,
देश पर मर मिटना ही संगीत।
मातृभूमि पर शीश चढ़ाने होंगे,
पुत्र,भाई,सुहाग,शहीद होने होंगे।
इतिहास से गुम इसे वीरों के नाम,
संदिग्ध मौत मिली,कौन संग्राम?
इसे वीर जवान,बहादुर नेता,
न सुने हमने ना सतयुग न त्रेता।
ए! बहादुर नौजवान तुझे नमन है
आजाद आज भारत का चमन है।
स्वरचित मौलिक रचना _ रानी अग्रवाल,मुंबई।
[10/02, 9:06 pm] साधना तोमर: आजादी का दीवाना था,
सुभाष बड़ा मस्ताना था,
अर्पण जीवन देशहित में,
वीर जाना पहचाना था।

मातृभूमि माँ मानी थी,
आजादी की ठानी थी,
अंग्रेज़ों से नहीं डरे वह,
जोश में भरी जवानी‌‌‍‍‍ थी।

तन मन धन सब वारा था,
देश बड़ा ही प्यारा था,
हिंद फौज का सेनानी वह,
भारत का राजदुलारा था।

खून बदले आजादी दूंगा,
दुश्मन से भी नहीं डरुँगा,
संग चलो तुम भारतवासी ,
कष्ट तुम्हारे मैं हर लूँगा।

अनूठी वह कहानी ‌ थी,
नहीं किसी ने जानी थी ,
 कहां गया वह लाल हमारा ,
 मृत्यु जिनकी अनजानी थी।

 डा, साधना तोमर
  बड़ौत (बागपत)
   उत्तर प्रदेश
[10/02, 10:14 pm] चंदा 👏डांगी: $$ नेताजी सुभाष चंद्र बोस $$
माता प्रभाती देवी और जानकी नाथ जी के घर कटक मे 23 जनवरी 1897 मे वीर बहादुर बेटे ने जन्म लिया जिनका नाम सुभाष चंद्र रखा गया। उनकी बहादुरी के सब कायल थे। पराधीन रहना उन्हे कभी स्वीकार नही था।वो अपने दोस्तो को भी भारत को आजाद करने की ही बाते करते थे।किस तरह से अंग्रेजो को भारत छोड़ने पर मजबूर किया जाए, इसी सपने के साथ बड़े होकर उन्होने आजाद हिन्द फौज की स्थापना की।
तुम मुझे खून दो मैं तुम्हे आजादी दुंगा का नारा देकर ही नेताजी ने साबित कर दिया था की देश को आजाद करने के लिए वो कुछ भी कर सकते है। ये उन्होने साबित भी किया।
वीर पराक्रमी बहादुर नेताजी की स्मृति मे पराक्रम दिवस मनाया जाता है।
यह देश नेताजी का सदियो तक ऋणी रहेगा ।
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏

चन्दा डांगी रेकी ग्रैंडमास्टर 
चित्तौड़गढ़ राजस्थान
[10/02, 10:15 pm] सुरेन्द्र हरडे: *हमारा गणतंत्र*

भारत का गणतंत्र विशाल हमारा
फहरे सदा तिरंगा प्यारा, प्यारा
हिंदुस्तान के कण कण में गुंजे
वंदे मातरम का सुन्दर नारा।।१।।

भारत में है हिमालय ऊंचा
ताजमहल है दुनिया का अजुबा
विविधता में एकता है भारत में
मंदिर मस्जिद गिरजाघर गुरुद्वारा
।।२

देशभक्ति की ज्वाला जन जन में
मातृभूमि की रक्षा के लिए
शीश चढ़ाए वीर सैनिक हमारा
भारत का है वीर दुलारा।।३।।

कोटि-कोटि नमन तुम्हे
वीर जवानों 
लहू से रक्षा करते भारत
बनकर तुम सदा प्रहरी।
इसी लिए चैन की नींद लेते हम।४

संविधान के निर्माते बाबासाहब
जाती -धर्म का भेदभाव नहीं
सब मिल जुलकर रहते यहां
गणतंत्र दिवस आया आज।।५।।

राम-कृष्ण गौतम गांधी की धरती
फिरंगी ने दो सौ साल राज किया
भगतसिंह सुखदेव राजगुरु हंसते
हंसते फांसी के फंदे पर झूले।।६।

सुभाष ने कहा तुम मुझे खून दो,
मै तुम्हे आजादी दुंगा
वहीं आखिर सफल हुआ , महावीर भारत में हुए 
शांतिका संदेश दिया।।७।।

सत्यम ,शिवम सुंदर भारत हमारा
वसुधैव कुटुंबकम् का मंत्र दिया
अमर रहे गणतंत्र हमारा
सदा लहरा रहे तिरंगा हमारा।८।।

सुरेंद्र हरडे
नागपुर
दिनांक २३/०१/२०२२

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