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अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच के ब्लॉक पर आज दिनांक 19 /1/ 2022 को दिए गए विषय ,,"माघ स्नान का महत्व ,"पर रचनाकारों के विचार पढ़ें अलका पांडे मुंबई


 Alka: माघ स्नान का महत्व
19/1/2022


धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से शास्त्रों में माघ स्नान का बड़ा महत्व बताया है। इसे मोक्ष प्रदाता कहा गया है। मान्यता है किमाघ मास में प्रयागराज में त्रिवेणी संगम पर स्नान करने से दस हजार अश्वमेघ यज्ञ करने के बराबर फल प्राप्त होता है। माघ मास में प्रात:काल ब्रह्म मुहूर्त में जागकर गंगा, नर्मदा, यमुना, क्षिप्रा आदि पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का क्षय होता है। इस माह में दान-पुण्य, रोगियों, निशक्तों की सेवा करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। व्यक्ति की आध्यात्मिक चेतना जागृत होती है। कहा जाता है माघ स्नान के फलस्वरूप ही प्रतिष्ठानपुरी के राजा पुरुरवा को अपनी कुरूपता से मुक्ति मिली थी और उन्होंने दैदीप्यमान काया प्राप्त की थी। इसी स्नान के प्रताप से गौतम ऋषि द्वारा शापित इंद्र भी श्राप मुक्त हुए थे।
: पौष शुक्ल पूर्णिमा , माघ स्नान प्रारंभ हो जाता है।  माघ का पूरा माह पवित्र नदियों में स्नान, दान, पुण्य के लिए शुभ होता है।

माघ स्नान का बड़ा महत्व
धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से शास्त्रों में माघ स्नान का बड़ा महत्व बताया है। इसे मोक्ष प्रदाता कहा गया है। मान्यता है किमाघ मास में प्रयागराज में त्रिवेणी संगम पर स्नान करने से दस हजार अश्वमेघ यज्ञ करने के बराबर फल प्राप्त होता है। माघ मास में प्रात:काल ब्रह्म मुहूर्त में जागकर गंगा, नर्मदा, यमुना, क्षिप्रा आदि पवित्र नदियों में स्नान करने से पापों का क्षय होता है। इस माह में दान-पुण्य, रोगियों, निशक्तों की सेवा करने से शुभ फल प्राप्त होते हैं। गगा नदी जिसमें एक बार डुबकी लगाने से समस्त पापों का नाश होता है और व्यक्ति की आध्यात्मिक चेतना जागृत होती है। कहा जाता है माघ स्नान के फलस्वरूप ही प्रतिष्ठानपुरी के राजा पुरुरवा को अपनी कुरूपता से मुक्ति मिली थी और उन्होंने दैदीप्यमान काया प्राप्त की थी। इसी स्नान के प्रताप से गौतम ऋषि द्वारा शापित इंद्र भी श्राप मुक्त हुए थे।

माघ माह में स्नान, जप, तप का फल
इस माह का पुण्य कई गुना है। इस माह के दौरान हरिद्वार, नासिक, उज्जैन, इलाहाबाद इत्यादि में स्नान करने से पुण्य फलों की प्राप्ति होती है। इस माह में स्नान के बाद दान-पुण्य अवश्य करना चाहिए। इस माह में अपने गुरु या ईष्ट के मंत्रों का जाप करने से आत्मसंयम की प्राप्ति होती है। यहां तक किइस माह में पवित्र नदियों के तट पर निवास करने का भी बड़ा महत्व है। इसे कल्पवास कहा जाता है। पुराणों में कल्पवास का वर्णन मिलता है, जिसमें स्पष्ट कहा गया है किमाघ माह में पवित्र नदियों के तट पर कल्पवास करना चाहिए। इस दौरान संयम, धैर्य और मौन रहते हुए सात्विक जीवन जीना चाहिए।

 उससे स्नान करें। शुद्ध वस्त्र धारण करके घर के देवी-देवताओं की पूजा करें और यथाशक्ति गरीबों को भोजन करवाएं। गायों को हरा चारा खिलाएं। पक्षियों को दाना डालें। इससे आपको पुण्य फलों की प्राप्ति होगी। इस दिन शिवार्चन और विष्णुपूजा करना पुण्यदायी होता है।


अलका पाण्डेय मुम्बई
[19/01, 10:39 am] वैष्णवी Khatri वेदिका: बुधवार /19/1/2022
विषय  _माघ स्नान का महत्व
 विधा -  लेख 

पद्मपुराण में कहा गया है कि भगवान विष्णु को माघ मास में व्रत-दान और तपस्या से भी अधिक प्रसन्नता 
माघ मास में स्नान से होती है। स्वर्गलाभ, पापों से मुक्ति और भगवान वासुदेव की प्राप्ति के लिए प्रत्येक मनुष्य को माघ स्नान भी इसी माघ महीने में करना चाहिए।
मौनी अमावस्या के दिन व्रती को स्नान, उपवास और पूरे दिन मौन रहकर नारायण का चिंतन करना चाहिए।

प्रयाग में हर वर्ष माघ मेला लगता है जिसे कल्पवास भी कहा जाता है। वेद, मंत्र व यज्ञ आदि कर्म ही 'कल्प' कहे जाते है। माघ मास में संगम तट पर निवास को ही कल्पवास कहा जाता है।

मोक्ष प्रदान करने वाला माघ स्नान, पौष पूर्णिमा से आरंभ होकर माघ पूर्णिमा को समाप्त होता है। कहा कि जहां कहीं भी जल हो वह गंगाजल के समान ही पवित्र होता है फिर भी प्रयाग, कुरुक्षेत्र, हरिद्वार, काशी, नासिक, उज्जैन तथा अन्य पवित्र तीर्थों और नदियों में स्नान का बड़ा महत्व है।  माघ में स्नान करने पर भगवान विष्णु सुख-सौभाग्य, धन-संतान और मोक्ष प्रदान करते हैं। माघ का स्नान पौष शुक्ल पूर्णिमा 17 जनवरी प्रारंभ होकर माघ शुक्ल पूर्णिमा 16 फरवरी को पूर्ण होगा। यह पूरा माह पवित्र नदियों में स्नान, दान, पुण्य के लिए शुभ होता है।

माघ माह के दौरान कृष्ण पक्ष में संकट चौथ, षटतिला एकादशी, मौनी अमावस्या आती है तो शुक्ल पक्ष में वरदतिलकुन्द-विनायक चतुर्थी, वसंत पंचमी, शीतला षष्ठी, रथ-अचला सप्तमी, जया एकादशी व्रत और माघी पूर्णिमा जैसे पर्व आते हैं। मकर संक्रांति से ही देवों के दिन शुरू होते हैं और उत्तरायण शुरू होता है।इस दिन सत्यनारायण कथा कराने से हजारों यज्ञों के बराबर फल मिलता है।

वैष्णो खत्री वेदिका
[19/01, 11:04 am] विजेन्द्र मोहन बोकारो: मंच को नमन
विधा:-- *लेख*
शीर्षक:-- *माघ स्नान का महत्व*

धार्मिक और आध्यात्मिक दृष्टि से शास्त्रों में माघ स्नान का बड़ा महत्व बताया गया है। बुजुर्गों का कहना है की माघ मास में प्रयागराज में त्रिवेणी संगम पर स्नान करने से अश्वमेघ यज्ञ करने का बराबर फल प्राप्त होता है। माघ मास में प्रातः काल ब्रह्म मुहूर्त में नदियों में स्नान करने से पापों का क्षय होता है। लेकिन करोना कॉल में
घर पर ही स्नान करना लाभदायक है। हर घर घर में गंगाजल रहते हैं उसके दो-तीन बूंद स्नान के समय बाल्टी में मिलाले स्नान करने के बाद दान पूर्ण करें। इसे कल्पवास कहा जाता है पुराणों में कल्पवास का वर्णन मिलता है जिसमें स्पष्ट कहा गया है कि माघ माह में पवित्र नदियों के तट पर कल्पवास करना चाहिए। लेकिन परिस्थिति के अनुसार बदलना भी जरूरी है।
घर पर ही गरीबों को भोजन कराएं। इससे आपको पुण्य फलों की प्राप्ति होगी। माघ पूर्णिमा के दिन स्नान करके सत्यनारायण भगवान की पूजा करनी चाहिए सब कष्ट का निदान कर देते हैं।

विजयेन्द्र मोहन।
[19/01, 11:29 am] शेभारानी✔️ तिवारी इंदौर: माघ में स्नान का महत्व 

माघ शब्दमाध से बना है,जिसका संबंध श्रीकृष्ण के माधव स्वरूप से है। ऐसा माना जाता है कि इस माह गंगा स्नान करने से सारे पाप से मुक्ति मिल जाती है । और व्यक्ति शरीर और आत्मा से नया हो जाता है। जो भी व्यक्ति इस माह स्नान दान ,जप -तप करता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है ।इस माह गर्म पानी को छोड़कर सामान्य जल से स्नान करना चाहिए , गुड़ और तिल का प्रयोग लाभकारी होता है। इस माह भारी भोजन छोड़कर सादा भोजन करना चाहिए।

 शोभा रानी तिवारी इंदौर
[19/01, 11:37 am] आशा 🌺नायडू बोरीबली: ( लेख )
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  🌹 माघ स्नान का महत्व🌹 
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         हमारे हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक मास का नाम उसकी नक्षत्र से जुड़ा है ।इस मास का नाम माघ मास इसलिए रखा गया है ,कि यह मघा नक्षत्र की पूर्णिमा से प्रारंभ होता है। यह हमारी पंचांग के अनुसार वर्ष का 11वां महीना होता है। इस वर्ष यह 18 जनवरी से प्रारंभ होकर 16 फरवरी तक माघ मास रहेगा ।इस बीच अनेक त्यौहारों का आगमन होता है ।पंचमी से बसंत ऋतु का आगमन होगा , तिल चतुर्थी, रथ सप्तमी ,भीमा अष्टमी आदि त्यौहार इस मास में आते हैं। इस माह में पवित्र नदियों में स्नान का अत्यधिक महत्व है। ऐसा माना जाता है, कि पवित्र नदियों में डुबकी लगाते ही सारे पाप धुल जाते हैं।
         पौराणिक कथा अनुसार गौतम ऋषि ने इंद्र देव को श्राप दिया था। इंद्रदेव ने गौतम ऋषि से क्षमा याचना की, तो उन्होंने प्रायश्चित के रूप में इंद्रदेव को गंगा स्नान करने की सलाह दी।  जिसके फलस्वरूप गंगा स्नान करने पर उन्हें श्राप से मुक्ति मिली ।इसीलिए गंगा या अन्य पवित्र नदियों में स्नान का विशेष महत्व है। साथ ही अपनी अनेक मनोकामनाएं भी पूरी होती हैं ।इस माह में पवित्र नदियों में स्नान कर दान पुण्य का भी विशेष महत्व है।
         कहते हैं, माघ द्वादशी के दिन यम ने तिल का निर्माण किया था और राजा दशरथ ने उसे अपने खेतों में बोया था। इसलिए इस दिन उपवास रखकर तिल का दान करना एवं तिल ग्रहण करने की प्रथा है।
               माघमासे  गमिष्यन्ति गंगा यमुना जगने। ब्रह्मविष्णु महादेव रूद्रादित्यम रूद्रणाः ।। अर्थात , माघ माह के अमावस्या को प्रयाग के गंगा संगम में स्नान करने से अनंत पुण्य मिलता है। सारे पापों से मुक्ति मिलती है और स्वर्ग का द्वार खुल जाता है ,क्योंकि इस दिन ब्रह्मा, विष्णु, महेश ,रुद्र ,आदित्य ,तथा मरुद्रण आदि प्रयाग संगम में स्नान करने आते हैं ।अतः इस दिन का अत्यधिक महत्व है । गंगा                                      स्नान कर दान पुण्य कर जीवन को सफल व सार्थक बनाने का मास है, माघ मास। अतः हमें अवश्य ही माघ मास में पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए।
********************स्वरचित रचना .
डॉ . आशालता नायडू .
मुंबई . महाराष्ट्र .
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[19/01, 12:16 pm] रामेश्वर गुप्ता के के: माघ स्नान का महत्व :
माघ स्नान से होती है स्वर्ग की प्राप्ति
भगवान नारायण को प्रिय माघ मास
स्वर्ग लोक की इच्छा को पूरा करने के लिए माघ पुण्य स्नान का समय 9 जनवरी से प्रारंभ हो गया है। शास्त्रों एवं पुराणों के अनुसार पौष मास की पूर्णिमा से माघ मास की पूर्णिमा तक माघ मास में पवित्र नदी नर्मदा, गंगा, यमुना, सरस्वती, कावेरी सहित अन्य जीवनदायनी नदियों में स्नान करने से मनुष्य को पापों से छुटकारा मिल जाता है और स्वर्गलोकारोहण का मार्ग खुल जाता है।

महाभारत में है उल्लेख : महाभारत के एक दृष्टांत में इस बात का उल्लेख करते हुए कहा गया है कि इन दिनों में अनेक तीर्थों का समागम होता है। वहीं पद्मपुराण में कहा गया है कि अन्य मास में जप, तप और दान से भगवान विष्णु उतने प्रसन्न नहीं होते जितने कि वे माघ मास में स्नान करने से होते हैं।

यही वजह है कि प्राचीन ग्रंथों में नारायण को पाने का सुगम मार्ग माघ मास के पुण्य स्नान को बताया गया है।

एक दिन स्नान आवश्यक
ज्योतिषाचार्य पं. राजकुमार शास्त्री के अनुसार निर्णय सिंधु में कहा गया है कि माघ मास के दौरान मनुष्य को कम से कम एक बार पवित्र नदी में स्नान करना चाहिए। भले पूरे माह स्नान के योग न बन सकें लेकिन एक दिन के स्नान से स्वर्गलोक का उत्तराधिकारी बना जा सकता है। इस बात का उदाहरण इस श्लोक से मिलता है।

॥ मासपर्यन्त स्नानासम्भवे तु त्रयहमेकाहं वा स्नायात्‌ ॥
अर्थात् जो लोग लंबे समय तक स्वर्गलोक का आनंद लेना चाहते हैं, उन्हें माघ मास में सूर्य के मकर राशि में स्थित होने पर अवश्य तीर्थ स्नान करना चाहिए।
संकल्प ले ं
॥ स्वर्गलोक चिरवासो येषां मनसि वर्तते
यत्र काच्पि जलै जैस्तु स्नानव्यं मृगा भास्करे॥
अर्थात् माघ स्नान का संकल्प शास्त्रों के अनुसार पौष पूर्णिमा को ले लेना चाहिए। स्नान के बाद भगवान विष्णु का पूजन-अर्चन करना चाहिए। हो सके तो एक समय भोजन का व्रत करना चाहिए।
दान का विशेष महत्व : माघ मास में दान का विशेष महत्व है। दान में तिल, गु़ड़ और कंबल का विशेष पुण्य है। मत्स्य पुराण का कथन है कि माघ मास की पूर्णिमा में जो व्यक्ति ब्राह्मण को ब्रह्मावैवर्तपुराण का दान करता है, उसे ब्रह्मलोक की प्राप्ति होती है।
माघ मास में पवित्र नदियों में स्नान करने से एक विशेष ऊर्जा प्राप्त होती है। वहीं शास्त्रों व पुराणों में वर्णित है कि इस मास में पूजन- अर्चन व स्नान करने से भगवान नारायण को प्राप्त किया जा सकता है। वहीं मास के स्नान से स्वर्ग की प्राप्ति का मार्ग भी प्रशस्त होता है।
माघ की विशेषता को लेकर सदियों से पूरे भारत वर्ष में नर्मदा व गंगा सहित कई पवित्र नदियों के तट पर माघ मेला भी लगते हैं।
संकलन :
रामेश्वर प्रसाद गुप्ता।
[19/01, 1:02 pm] रवि शंकर कोलते क: बुधवार दिनांक **१९/१/२२ 
विधा****लेख
विषय*******
         #*माघ स्नानका महत्व*#
                   ^^^^^^^^^^
      
      भारत की संस्कृति अध्यात्म से जुड़ी है । पूरे साल भारत के कोने कोने में दान व्रत उपवास पूजा अर्चना चलती ही रहती है ।
हमारे भारत में हजारों मंदिर हैं ।
भारत भूमि एक पुण्य धरा है  जहां हर युग में प्रत्यक्ष भगवान अवतरित हुए हैं और उन्होंने पापों  को मिटाकर बलशाली किया है ।
        यह सही है इन दिनों मनुष्य यथाशक्ति दान धरम जरूर करें । ईश्वर की पूजा-अर्चना करें । गंगा स्नान करें । इससे भगवान प्रसन्न होते हैं ।पाप धुल जाते हैं ।
          अपने हाथों किसी प्रकार का पाप ना हो इसलिए मानव मानवता के पथ चले किसी का मन ना दुखाए । मन से षड्ररिपुओंको भगाने का प्रयत्न करें ।
          इंसान ने कालानुसार परिस्थिति के अनुसार अपने धर्म रीति-रिवाजों का पालन करें । माघ में गंगा स्नान करने से बहुत पुण्य मिलता है । हरेक ने गंगा स्नान करना चाहिए मगर हर किसी को यह संभव नहीं कि वो गंगा स्नान करें ।
ऐसी स्थिति में वह घर पर ही इस विधि को पूर्ण कर सकता है । आज कोरोना के कारण व्यक्ति कहीं जा नहीं सकता । और किसी की आर्थिक स्थिति गंगा स्नान की इच्छा होने के बावजूद उसे रोक देती है । ऐसे में उसने घरपरही गंगाजल का उपयोग कर या गंगाजल नहीं हो तो तुलसी के पत्ते पानी में डालकर स्नान कर सकता है । ऐसा करने से भी मन से कार्य करने से पुण्य प्राप्त होता है ।

प्रा रविशंकर कोलते
     नागपुर
[19/01, 1:47 pm] Nirja 🌺🌺Takur: अग्निशिखा मंच
तिथि - 19,,1,,22
विषय- माघ स्नान का महत्व

   पुराणों के अनुसार माघ महीने में 
तीर्थ में स्नान का बहुत महत्व है।  मघा नक्षत्र होने के कारण इस महीने का नाम माघ  पड़ा। इसकी पूर्णिमा से ही शुभ कारण शुरु हो जाते हैं। माघी पूर्णिमा को नदी किनारे मेला लगता है। पूर्णिमा के दिन संगम में स्नान करने से मनु्ष्य पाप मुक्त हो जाता है। 
पुराणों में कहा गया है माघ मास में प्रयाग में तीन बार स्नान करने से मनु्ष्य को पृथ्वी में दसहजार अश्वमेघ यज्ञ करने के बराबर फल प्राप्त होता है। 

नीरजा ठाकुर नीर
पलावा डोंबिवली
महाराष्ट्र
[19/01, 1:56 pm] वीना अचतानी 🧑🏿‍🦽: वीना अचतानी 
विषय ***माघ स्नान का महत्व ****
माघ स्नान  करने वाले मनुष्यों  पर भगवान्  विष्णु  प्रसन्न  रहते हैं ।माघ का पूरा माह पवित्र  नदियों  में  स्नान  , दान पुण्य के लिये शुभ होता  है ।प्रयाग  में  हर वर्ष  लगने वाले इस माघ  मेले को कल्पवास भक कहा  जाता है ।वेद मन्त्र व यज्ञ आदि कर्म  ही "कल्प"कहे जाते हैं ।पुराणों में माघ मास के समय संगम के तट पर निवास को ही कल्पवास  कहा जाता  है ।स्नान दान करने के लिये माघ महीना  उत्तम माना जाता है। 
            माघ माह की एसी महिमा है कि इसमें  जहाँ कहीं  भी जल होवह गंगा झल के समान होता है । फिर भी प्रयाग, कुरुक्षेत्र,  हरिद्वार,  काशी, नासिक, उज्जैन तथा अन्य पवित्र  तीर्थों  और नदियों  में स्नान  का बहुत  महत्व है ।इससे सुख, धन, सन्तान सौभाग्य और मोक्ष मिलता है।
              माघ स्नान  पंष पूर्णिमा  से आरम्भ  होकर माघ पूर्णिमा  को समाप्त  हो जाता  है।माघ मास में  जो मनुष्य  पवित्र  नदियों  में  स्नान  करता है, उसे एक विशेष  प्रकार  की सकारात्मक  उर्जा  प्राप्त  होती है, जिससे उसका  शरीर  निरोगी और आध्यात्मिक शक्ति  से सम्पन्न हो जाता है ।।
वीना अचतानी 
जोधपुर ।।।।।
[19/01, 3:37 pm] कुंवर वीर सिंह मार्तंड कोलकाता: 🌺 बुधवार /19/1/2022
🌺विषय  _माघ स्नान का महत्व
 विधा -  लेख 
मघा नक्षत्र के कारण इस मास का नाम माघ पड़ा है। इस माह का हिन्दू शास्त्रों में बहुत महत्व बताया गया है। इस माह से मांगलिक कार्य प्रारंभ हो जाते हैं।पवित्र नदियों के तट पर मेले लगते हैं। इस माह से सूर्य जब उत्तरायण होने लगता है तो धीरे-धीरे ठंड भी कम होने लगती है। इसी माह में हेमंत ऋतु के बाद शिशिर ऋतु का प्रारंभ होता है।और इसी महीने की शुक्ल पंचमी से वसंत ऋतु का आरंभ होता है। 
माघ मास में कई महत्त्वपूर्ण व्रत होते हैं, 
इस मास में 'कल्पवास' का विशेष महत्त्व है। 'माघ काल' में संगम के तट पर निवास को 'कल्पवास' कहते हैं। माघ माह में जहां कहीं भी जल हो तो ऐसा माना जाता है कि वह गंगाजल के समान पवित्र हो जाता है। जो भी माघ माह में गंगा स्नान करता हैं लक्ष्मीपति भगवान विष्णु की कृपा प्राप्त करता है। माघ माह में स्नान करने से सुख-सौभाग्य, धन-संतान और मोक्ष की प्राप्ति होती है। इस मास में शीतल जल के भीतर डुबकी लगाने वाले मनुष्य पापमुक्त हो जाते हैं।
 
यह भी कहा जाता है कि माघ माह में देवता धरती पर आकर मनुष्य रूप धारण करते हैं और प्रयाग में स्नान करने के साथ ही दान और जप करते हैं। इसीलिए प्रयाग में स्नान का खास महत्व है। जहां स्नान करने से सारी मनोकामनाएं पूर्ण हो जाती है। माघ पूर्णिमा के दिन पुष्य नक्षत्र हो तो इस तिथि का महत्व और बढ़ जाता है।  
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कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड, कोलकाता
[19/01, 3:45 pm] निहारिका 🍇झा: नमन अग्निशिखा मंच
विषय;--माघ स्नान का महत्व
दिनाँक;-19/1/2022
हमारी भारतीय संस्कृति सदा से अक्षुण्ण व अप्रतिम रही है।रज रज इसका चंदन जैसा 
हर पत्थर ईश समान है।।
इस संस्कृति में दान  पुण्य दया सद्भाव आस्था जैसे गुणों का अति महत्व है।।
यूँ तो हमेशा ही  स्नान  उपरांत पूजन व हर कार्य का महत्व है।किंतु बैसाख ,कार्तिक, माघ मास में स्नान विशेष फलदायी है।।
माघ मास में तीर्थ स्थल ,गंगा,नर्मदा नदी में स्नान विशेष फलदायी है।कहते हैं इन मास में स्वयं नारायण की साक्षात कृपा प्राप्त होती है।।
इस मास की अमावस्या को,"मौनी स्नान"व पूर्णिमा स्नान का अति महत्व है।।इस मास से दिन तिल तिल कर बढ़ने लगता है एवं प्रभु नारायण को तिल विशेष पसंद है ।इसके अतिरिक्त इसी मास में तिल संकष्टी व्रत सिद्धि विनायक का होता है ।अतः यह माह देवों को अति प्रिय है।इसलिए इस मास में तिल दान  व पुण्य का विशेष महत्व है।।
इस लिये माघ मास में स्नान व पूजन विशेष फलदायी है।।
वर्तमान परिस्थितियों में तीर्थ स्थल व नदियों में जाना सम्भव न हो तो घर में ही शुद्ध जल से स्नान के उपरांत गंगा जल सींचने से माघ स्नान सम्पूर्ण हो जाता है।।
""🙏🙏श्री नारायणाय नमः""
निहारिका झा
खैरागढ राज .(36 गढ़)
[19/01, 4:06 pm] डा. अंजूल कंसल इन्दौर: माघ महीने का महत्व 

ऐसा माना जाता है कि व्यक्ति शरीर और आत्मा से नया हो जाता है।जो भी व्यक्ति इस माह स्नान दान और जप तप करता है उसे मोक्ष की प्राप्ति होती है। माघ मास में संगम में कल्पवास करने की परंपरा भी है।             माघ मास की शुरुआत हो चुकी है। 
          हिंदू कैलेंडर के अनुसार यह वर्ष का 11वां महीना है। धार्मिक दृष्टिकोण से इसका बहुत महत्व है। माघ शब्द माध से बना है जिसका सम्बंध श्रीकृष्ण के माधव स्वरूप से है। इस महीने को बहुत पवित्र माना जाता है ।
       मान्यता है कि इस माह में गंगा स्नान करने से सारे पापों से मुक्ति मिल जाती है। माघ मास में संगम पर कल्पवास करने की परंपरा है।पद्म पुराण के अनुसार पूजा करने से भी भगवान श्री हरि को उतनी प्रसन्नता नहीं होती है जितनी कि माघ महीने में स्नान करने से होती है। यदि पवित्र नदियों में स्नान नहीं कर पाते तो इस महीने में सुबह जल्दी उठकर स्नान के पानी में गंगा जल मिलाकर स्नान करें।माघ महीने में भगवान विष्णु और सूर्य देव की पूजा से विशेष लाभ होता है।

डॉक्टर अंजुल कंसल "कनुप्रिया"
19-1-22
[19/01, 4:23 pm] रानी अग्रवाल: माघ स्नान का महत्व
२९_१_२०२२, बुधवार।
विधा लेख।
     माघ स्नान का हिंदू पुराणों में अत्यधिक महत्व बताया गया है।इसे हमारे अध्यात्म से भी जोड़ा जाता है।लगभग हर स्थान पर कहा गया है कि माघ महीने में पवित्र नदियों में स्नान करने से मोक्ष की प्राप्ति होती है,सारे पाप धुल जाते हैं,मृत्यु पश्चात वैकुंठ धाम की प्राप्ति होती है।
     इस माह दान _ पुण्य करने की महिमा भी बताई गई है।क्योंकि इस समय सर्दी रहती है इसलिए गर्म चीजें जैसे तिल, गुड़,कंबल आदि के दान को प्राथमिकता दी जाती है। दान करने से भी तो पुण्य और मोक्ष कमाने की भावना ही काम करती है।
     ये सारी बातें धर्मानुसार सही हैं।पर मैं मानती हूं कि हर इंसान का पहला धर्म "मानवता" होना चाहिए।यदि हम मानव सेवा में अपना धन लगाएं,जरूरतमंदों की मदद करें,दुखियों का दुख_ दर्द दूर करें,एक दूसरे के काम आएं तो निश्चित ही यह धरती ही स्वर्ग बन जायेगी,हमें जीते जी स्वर्ग मिल जाएगा,मरने के बाद वाले स्वर्ग की आवश्यकता ही न रहेगी,न ही मोक्ष की।
     अपनी प्रथाओं में हमें विश्वास,आस्था रखनी चाहिए पर अंधविश्वासी नहीं होना चाहिए।इंसान इंसान के काम आए ,यही हमारा सबसे बड़ा धर्म होना चाहिए।इसके लिए कोई विशेष महीने विशेष दिन देखने की जरूरत नहीं है।हर दिन योग्य है।
स्वरचित मौलिक लेख_____
रानी अग्रवाल,मुंबई।
२९_१_२०२२,बुधवार।
[19/01, 4:28 pm] हेमा जैन 👩: *माघ स्नान का महत्त्व**

 माघ स्नान से आध्यात्मिक शक्ति मिलती है और शरीर निरोगी बनता है।

माघ मास में, जो पवित्र जलस्रोतों में स्नान करता है, उसे एक विशेष आध्यात्मिक शक्ति प्राप्त होती है। ऐसी मान्यता है कि, माघ स्नान मानव शरीर में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढाता है और रोगाणुओं को नष्ट करता है। जिससे उसका शरीर निरोगी हो जाता है।
माघ स्नान से समस्त पापों से मुक्ति मिलती है।
भौगोलिक दृष्टि से प्रयाग में गंगा एवं यमुना इन पवित्र नदियों का संगम है । महाभारत के अनुशासन पर्व में कहा गया है कि, माघ मास में जो प्रयाग संगमतीर्थ पर अथवा गोदावरी, कावेरी जैसी अन्य पवित्र नदियों में भक्तिभाव से स्नान करते हैं, वे सभी पापों से मुक्त हो जाते हैं

*हेमा जैन*
[19/01, 4:42 pm] ओम 👅प्रकाश पाण्डेय -: माघ स्नान का महत्व ( लेख) --- ओमप्रकाश पाण्डेय
प्रयागे  माघमासे तुल्यहं  स्नानस्य यद्रवेत
दशाव्श्रमेघसहस्त्रेण तत्फलं  लभते भुवि
माघ के महीने में प्रयाग के संगम अथवा नदियों में स्नान करने से भगवान विष्णु प्रसन्न होते हैं. इस दिन स्नान करने से सुख, सौभाग्य, धन, संतान, वैभव और मोक्ष प्राप्त होता है.
यह पवित्र माह पौष शुक्ल 17 जनवरी से शुरू होकर माघ शुक्ल पूर्णिमा 16 फरवरी को पूर्ण होता है. स्नान करके दान देने से पुण्य मिलता है.
[19/01, 4:56 pm] सुरेन्द्र हरडे: अग्निशिखा मंच को नमन

आज की विधा :-लेख

विषय  *माघ मास मे स्नान का महत्व*

      भारत की आध्यात्मिक पावन भूमि है। रामकृष्ण गौतम की भूमि इसमें अनेक वेद पुराण बड़ा  पारंपरिक तरीके से स्नान का महत्व है उसमें ही माघ मास का स्नान बड़ा महत्वपूर्ण और बड़ा पुण्य फलदाई माना जाता है। हिंदू धर्म में माघ मे स्नान बड़ा महत्वपूर्ण है पुराणों में कहा है कि भगवान विष्णु को प्रसन्न करने के लिए और सुख प्राप्ति के लिए धन संतान प्राप्त करने के लिए एवं मोक्ष प्रदान करने के लिए माघ मास में स्नान करना अति पुण्य के लिए आवश्यकता है। यह सतरा जनवरी से आरंभ होकर सोलह फरवरी तक रहेगा । यह बड़ा पवित्र मास कहा गया है।
     महाभारत में एक बड़ा अच्छा दृष्टांत  है इस बात का उल्लेख करते हुए इन दिनों में अनेक तीर्थों का समागम होता है वही पद्म पुराण में कहा गया है कि अन्य मास में जितना स्नान का महत्व प्राप्त नहीं होता उतना महत्व माघ मास में स्नान करने से होता है भगवान विष्णु जी को प्रसन्न करने के लिए इस मास में स्नान करने से दान पुण्य करने से उचित फल प्राप्ति होती है।
   जैसा कि उपरोक्त कोलते जी ने कहा है कि", किसी को कुछ कारणवश स्नान करना संभव नहीं होता या वृद्ध व्यक्तियों को या महामारी की वजह से इच्छा हो कर भी पवित्र नदियों में स्नान करने नहीं जा सकते । उनके लिए जल में  तुलसी के पत्तियों  डालकर स्नान करने भी यह महत्व प्राप्त होता है ।क्योंकि भगवान विष्णु को तुलसी की पत्री, बड़ी प्रिय है भारत में  हिंदू धर्म में यह महिना बडा पवित्र होने से स्नान करने से पुण्य प्राप्त होता है।

सुरेंद्र हरडे
नागपुर
दिनांक १९/०१/२०२२
[19/01, 5:02 pm] श्रीवल्लभ अम्बर: 🙏नमन मंच🙏

विषय,,,माघ स्नान का महत्व,,,
      ये भारत देश, मान्यताओं,का त्योहारों का,दान, धर्म,कर्म का देश है,,, यहा, नदियों, पर्वत, वृक्ष,,सभी को पूज्य माना गया है,,,एवम तीज, त्योहार, माह,,सभी को उत्सव के रूप में मनाया जाता है,,,
     ठीक इसी प्रकार माघ माह,,में समस्त पुण्य कर्म इसलिए किए जाते है कि,,,इस मास भगवान विष्णु  अति प्रसन्न होकर शक्छत समक्ष रहते है और उस प्रसन्नता अवस्था में तीर्थ स्थान,,प्रयाग राज में उनके दर्शन,, स्नान, वृत,पूजा,दान से उन्हें अधिक प्रसन्नता प्राप्त होती है,,,इस माह को अति महत्वपूर्ण माना गया है,,,
      भगवान सुख, सौभाग्य,लक्ष्मी ,धन, संतान एवम मोक्ष प्रदान करने वाले विष्णु है जगत नियंता है,,, एसा कहा गया है,,,

🙏 श्रीवल्लभ अम्बर🙏
[19/01, 5:26 pm] कुम कुम वेद सेन: विषय माघ महीने में स्नान का महत्व

माघ महीने में गंगा स्नान का महत्व दर्शाते हुए यह कहा गया है कि गंगा स्नान से सभी पाप से मुक्त हो जाते हैं
जहां तक मेरा विचार है कि भारतवर्ष में धर्म संस्कृति कर्म दान जैसे त्योहारों का अत्यधिक महत्व है कभी फसल के आधार पर कभी रंगो के आधार पर कभी वृक्षों की पूजा व्रत के रूप में करते हैं अर्थात हम लोग प्रकृति की पूजा हमेशा करते रहते हैं जिस प्रकृति के हम एक अंश है ।
हमारे धर्म में हमारे देश में तीज त्यौहार व्रत में किसी न किसी रूप में प्रकृति की पूजा की जाती है कभी पर्वत की पूजा करते हैं कभी नाग की पूजा करते हैं कभी नदियों की पूजा करते हैं।
स्नान का महत्व बहुत अधिक है विशेषकर संगम में प्रयागराज हो या इलाहाबाद कहीं भी जहां 3 नदिया एक साथ मिल जाती हैं उस संगम स्थल पर स्नान का महत्व बढ़ जाता है हर घर में गंगाजल होते हैं जो अपने गंगा तक नहीं पहुंच पाते हैं वह उन गंगाजल से घर में ही स्नान कर लेते हैं अभी तो करो ना काल में 2 वर्षों से यह सब भी बंद है उसका मुख्य कारण है बीमारी को फैलाना नहीं है।
इस बिंदु पर जब सोचते हैं तो मेरे दिमाग में एक विचार आता है मन चंगा तो कठौती में गंगा और मन को ही जितना आप शुद्ध स्वक्ष बनाए वह आपके व्यक्तित्व के लिए सुंदर और सहज होगा आपका घर एक मंदिर है मंदिर में स्वच्छ जल है वही गंगा है मन को शुद्ध रखें क्रोध ईर्ष्या द्वेष से दूर रखें दान पुण्य की क्रिया करें तो आपका घर मंदिर और आपका जल गंगाजल
गंगा स्नान के बाद माघ महीने में सत्यनारायण की पूजा का भी महत्व है इस पूजा के माध्यम से मन में एक विशेष शांति मिलती है घर में सकारात्मक ऊर्जा आ जाती हैं कुछ ऐसे तीज त्यौहार व्रत होते हैं जिसमें की नियमानुसार घर में करते रहने से घर की ओर जाए जो है हमेशा सकारात्मक रहती है

कुमकुम वेदसेन
[19/01, 5:29 pm] Anita 👅झा: नमन मंच 
माघमास में स्नान का महत्व 
आप सभी ने सार्थक वर्णन किया 
हमारे पूर्वज कहा करते थे सागरिका की सभी नदियों संगम में  स्नान का बड़ा ही महत्व है पर मानसिक पूजा स्नान सच्चे मन से अपने आराध्य पितामह को याद करते ॐ लक्ष्मी नारायण दिवाकर परभकराय आदित्याय नमः कह शुद्ध जल से प्रातःकाल घर में जहाँ से आपको सुर्यकिरणे दिखाई देती है जल अर्घ दे स्नान का भी उतना ही महत्व देवी शंकाभरी दुर्गे देवी का पाठ आदित्य नमः कह उतना ही लाभ कारी होता है प्रतिदिन आदऊ राम तपो वनादिगमनम का पाठ भी श्रेयसकर होता है हिन्दु पंचाग तिथि में बारह महीने की अपनी अलग महत्ता होती है माघ मास तिल गणेश विघहर्ता का  सारे संकटो से रक्षा करने फलदायी माघ मास होता है ॐ ग़म ग़म गण गण गनपतेये नमः 🌺🙏
[19/01, 5:49 pm] डा. बैजेन्द्र नारायण द्िवेदी शैलेश🌲🌲 - वाराणसी - साझा: आदरणीय मंच को नमन
माघ मास में स्नान का महत्व
माघ महीने में स्नान का विशेष महत्व है। धार्मिक ग्रंथों में वर्णित किया गया है कि जो व्यक्ति शीत ऋतु में कंसर्ट सहकर पूजा अर्चना करने वाले होते हैं और नित्य माधव के चरणों की सेवा करते हैं उन्हें गोलोकवास पर्याप्त होता है।यह राधाकृष्ण के भक्तों की सर्वोपरि अभिलाषा होती है।कृष्णस्तु भगवान स्वयं। उनका सानिध्य भक्ति कीउत्कृष्ट स्थिति है। पवित्र सरिताओ में स्नान पूजा,पाठ ,झटका लक्ष्य आत्मोन्नति का साधन है।
सो सब कर्म धर्म जरिए जाऊं।
जँह न्याय पद पंकज भाऊ।।
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डॉ ब्रजेन्द्र नारायण द्विवेदी शैलेश वाराणसी
[19/01, 6:09 pm] मीना कुमारी परिहारmeenakumari6102: माघ मास का महत्त्व
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शास्त्रों एवं पुराणों के अनुसार पौष मास की पूर्णिमा से माघ मास की पूर्णिमा तक माघ मास में पवित्र नदी नर्मदा,इंगित, यमुना, सरस्वती ,कावेरी सहित अन्य जीवनदायिनी नदियों में स्नान करने से मनुष्य पापों से छुटकारा मिल जाता हैऔर स्वर्ग लोक जाने का मार्ग खुल जाता है।
      माघ मास में पवित्र नदियों में स्नान करने से एक विशेष ऊर्जा प्राप्त होती है। वहीं शास्त्रों व पुराणों में वर्णित है कि इस मास में पूजन -अर्चन वह स्नान करने से भगवान नारायण को प्राप्त किया जा सकता है।
       "स्वर्गलोक चिरवासो येषां मनसि वर्त्तते।
यत्र काच्पि जलै जैस्तु सनानतव्यं मृगा भास्करे।।"
       अर्थात माघ स्नान का संकल्प शास्त्रों के अनुसार पौष पूर्णिमा को ले लेना चाहिए। स्नान के बाद भगवान विष्णु का पूजन अर्चन करना चाहिए। हो सके तो एक समय भोजन का व्रत करना चाहिए।
      माघ स्नान करने वाले मनुष्यों पर भगवान विष्णु प्रसन्न रहते हैं तथा उन्हें सुख-सौभाग्य, धन-संतान और मोक्ष प्रदान करते हैं।

 डॉ मीना कुमारी परिहार
[19/01, 6:28 pm] Chandrika Vyash Kavi: नमन मंच
विषय -: माघ मास का महत्व
दिनांक -: 19/1/2022

पुराणों में माघ मास के महात्म का वर्णन मिलता है यह मघा नक्षत्र युक्त पूर्णिमा से प्रारंभ होता है इसलिए इसे माघ मास कहते हैं !  कहते हैं माघ कृष्ण द्वादशी को यमों नय तिल का निर्माण किया था और दशरथ ने पृथ्वी पर लाकर खेतों में बोया था अतः मनुष्य को उस दिन तिल का दान करना चाहिए और खाना चाहिए !इस दिन भगवान विष्णु की पूजा होती है और सूर्य की पूजा का भी महत्व है ! माघ महीने में पवित्र नदी में स्नान दान आदि का काफी महत्व है माघ पूर्णिमा और माघी अमावस्या में जगह-जगह मेले लगते हैं और स्नान दान पुण्य किया जाता है नदी स्नान से श्रीहरि की प्राप्ति होती है !

          चंद्रिका व्यास 
        खारघर नवी मुंबई
[19/01, 7:38 pm] पल्लवी झा ( रायपुर ) सांझा: नमन मंच 🙏🏻

माघ महीने में स्नान का महत्व (लेख)

हमारे शास्त्रों में माघ महीने का बहुत महत्व पूर्ण स्थान है । वर्ष के बारह महीने में पूस के बाद माघ महीने का आना हमारे लिए विशेष महत्व रखता है । सारे धार्मिक  एवं मांगलिक कार्य फिर से प्रारंभ हो जाते हैं । 
         श्रीहरि विष्णु की पूजा विशेष रूप से की जाती है । हमारे यहां छत्तीसगढ़ का प्रयाग कहलाने वाली राजिम नगरी में श्रीराम के सुंदर रूप की छवि है यहाँ माघ के पूरे एक महीने बढ़िया मेला लगता है ।  
           लोग यहां के त्रिवेणी में स्नान कर भगवान के दर्शन कर स्वयं को धन्य मानते हैं ।     
     इसी तरह पवित्र गंगा नदी  में भी इस दिन बहुत भीड़ रहती है लोग भगवान भास्कर को अर्ध्य देकर माँ गंगे को प्रणाम करते हुए अपने पापों से मुक्ति के मार्ग प्रशस्त करते हैं।  गंगा नदी में बैक्टीरियों फेज होने से हमारे शरीर से बैक्टीरिया का नाश होता है ।
इसलिए निरोगी काया की इच्छा से भी हम वहां स्नान को महत्व देते हैं ।


पल्लवी झा (रूमा)
रायपुर छत्तीसगढ़
[19/01, 7:43 pm] चंदा 👏डांगी: *माघ स्नान का महत्व*
हमारे देश मे हमेशा से जीवन की राह सुगम करने के लिए स्नान, ध्यान, पूजा,दान को महत्व दिया गया जिससे पीछे मूल उद्देश्य प्राणी मात्र तथा प्रकृति की सेवा करना है जिसे हर महीने के व्रत त्योहार के रूप मे हम सहजता से करते है ,इन्हे धर्म का रूप देने से सभी इसे श्रद्धा से करते है ।
माघ मास का स्नान भी स्वास्थ्य की दृष्टि से उत्तम है नदियों को सनातन से पवित्र मानते है इसके पीछे यही भावना है की हम नदियों को गन्दा नहीं करे ।हमे व्रत त्योहार देखा देखी करने की बजाय पर्यावरण का ध्यान रखते हुए करना चाहिए। 

चन्दा डांगी रेकी ग्रैंडमास्टर मंदसौर मध्यप्रदेश

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1 Comments
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  1. आज सभी माघ मास में स्नान का महत्व पर अपने विचार लेकिन द्वारे पटल पर प्रस्तुत किये ।यह अभी आनेवाली पिढी को नहीं पता है उसकी जानकारी बढ़िया जानकारी अग्निशिखा मंच कर रहा है सभी लेखकों धन्यवाद

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