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अखिल भारतीय अग्नि शिखा मंच के block per आज दिनांक 15 जारा 2030 को आप बाल दिवस पर कविता हैं और रचना कालों को सफल का पांडे मुंबई


बाल दिवस

नेहरू चाचा को करते हम सलाम
अमन-शांति का दे गए वो पैगाम
जगत को लड़ाई से बचाया
हम बच्चों को बहुत प्यार किया 
चाचा नेहरु का जन्मदिवस बच्चों के नाम
नेहरू चाचा तुम्हें बच्चे करते सलाम।।
देश को दी अनेको हैं योजनाएं
लोहा और इस्पात के कारखाने बनाए
बांध बने बिजली निकाली गई।।
नहरों से खेतों में हरियाली छाई 
प्रगति का काम कर दिखाया
नेहरू चाचा को बच्चे बहुत प्यारे थे ।
स्कूलों में मनाया जाता है या दिवस
भारत माता के राजदुलारे थे!,
देश के पहले पधानमंत्री थे,
अचकन में गुलाब का फूल लगाते थे,
हमेशा ही मुस्काते रहते थे!
अलका पांडे

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[15/11, 8:08 am] विजेन्द्र मोहन बोकारो: मंच को नमन
  विषय:-- *बाल दिवस*

चाचा नेहरू भारत माता के ,
   महान सपूत थे ।

   क्या बच्चे क्या बूढ़े वे तो
   सबको जान से प्यारे थे।

चाचा को सबसे पहले,
 कर्तव्य शीलता भायी थी.
जो कि उन्होंने दुख दर्दों में,
 हंस हंसकर अपनायी थी।।

इसीलिए जन गण मन के,
  वे हंसाते हुये सितारे थे..

देशप्रेम का सिंधु लहरता था,
 उनके अंतर्मन में .
स्वाभिमान का सूर्य चमकता था,
नित उनके जीवन में .
कायरपन के अंधियारे मे ,
 साहस के उजियारे थे।।

विश्व शांति के लिये उन्होंने,
 अपना सब कुछ वारा था.
पतितों को आगे बढ़ करके,
 उनने दिया सहारा था .
अन्यायों के तूफानों से,
 चाचा कभी ना हारे थे ..

हम सब उनके पथ पर,
 निर्भय होकर बड़ते जायेंगे.
उनके आदर्शों को हम,
 जीवन भर नहीं भुलायेंगे.

नन्हीं पीढ़ी के चाचा ही,
  सच्चे इक रखवारे थे ..
चाचा नेहरू भारत माता की,
  आंखों के प्यारे तारे थे ......

विजयेन्द्र मोहन।
[15/11, 8:19 am] कुंवर वीर सिंह मार्तंड कोलकाता: 🌺सोमवार 15//11/ 2021
🌺समय - सुबह ८ से शाम ७ बजे तक 
🌺 आज का विषय_बाल दिवस
🌺 बाल गीत 

नेहरू जी का जन्म दिवस।
कहते इसको बाल दिवस।

जब बच्चों से मिलते थे।
बच्चे चाचा कहते थे।

पहले प्रधान मंत्री थे।
नव भारत के संत्री थे।

जब जब यह दिन आता है
बच्चों को अति भाता है।

खुशियां खूब मनाते हैं 
गीत खुशी के गाते हैं।

बच्चो मेरी बात सुनो
तुम भी सपने खूब बुनो।

खेलो कूदो पढ़ो लिखो।
सबसे आगे सदा दिखो।

पढ़ लिख ऊंचे बनना है
नाम देश का करना है।

खुद भी तुम्हें निखरना है।
भारत को भी गढ़ना है।

© कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड, कोलकाता
[15/11, 8:42 am] 👑सुषमा शुक्ला: पावन मंच को प्रणाम🙏 

 बाल गीत,, 

*बारिश पर बाल गीत*, 
विधा,,,कविता

बारिश की नन्ही फूहार, खेत खलियानों की चले बयार,,
गोलू मोलू चले बहार , मां से
 कर लिया करार,l

कागज की नाव चलाएं ,डबरो में छप छप करते जाएं
होमवर्क को किया किनारा,
मस्ती में झूमा जग सारा💐

बारिश की हरियाली छाई ,धरती को हरि चूनर पहनाई,
आज पढ़ाई की कर दो छुट्टी ,,
ना करेंगे हम कभी कुट्टी,


मस्तीखोर है जरूर, यह तो हमारा काम है ।😀
पढ़ लिख कर हम आगे बढ़ेंगे, देश का रोशन नाम करेंगे

गोलू मोलू नाम है अपना, मां बाबा का है यह सपना, मस्त खिलंदर और कलंदर
भारत को महकाएगे,
हर पल आगे बढ़ते जाएंगे🥀🥀🥀🥀🥀🥀

सुषमा शुक्ला स्वरचित💐
[15/11, 8:56 am] Anita 👅झा: आज के विषय में 
कविता
ये रिश्ते 
ये रिश्तों की कहानी सब की ज़ुबानी “
वो मेरा प्यारा बचपन ,जिसे मै ढूँढ रहा था ।
माँ का प्यारा आँचल ,कवच बना था ।
पिता उँगली थामें , बड़ा हुआ था ।
वो साहस की ,अनमोल डगर थी ।
जिसे मै ढूँढ रहा था ,
वो मेरा प्यारा बचपन था ।
ज़ंजीरो ने जकड़ रखा था ।
प्रेम प्यार की , अनमोल डगर थी ।
बचपन जिसको ढूँढ रहा था ।
आँखों में वो , प्यारी छवि थी ।
वो बचपन , मै ढूँढ रहा हूँ 
क़िस्से कहानियों में ,मशहूर हुआ करते थे ।
वो मेरा प्यारा बचपन 
ज़िद के आगे ज़ोर नही थी ।
बुद्धि से पैदल ,चल पड़े थे ।
पड़ते थे जब चार वो डंडे 
विद्या की अनमोल सीख थी 
 कहाँ गया वो सारा बचपन 
 दुनिया की बदहाली में ढूँढ रहा हूँ  
प्यारा बचपन , 
 खेल निराले साँप सीढ़ी के थे 
चढ़ कर गिरना ना ,गिर कर चढ़ना ,
आगे चल कर ,राह पकड़ना ,
 बंद हो गई ,चाह दीवारों की 
फिर से पचपन बचपन को 
आख़िर ढूँढ लिया हैं ।
अजब खेल गजब तमाशे
जीवन की ये अनमोल ये पल हैं 
बचपन जिसको ढूँढ लिया ,
मुस्कानो के अनमोल वो पल हैं 
हर घड़ी हर पल , बदलते रिश्ते हैं 
ख़ुशियों के अनमोल ये पल हैं 
घर मधुबन गुलज़ार बनाते
बचपन के अनमोल वो पल हैं 
डर के आगे जीत हैं 
जीत जाओगे हर वो बाज़ी 
धर्य विश्वास की अमोल धरोहर ,
बचपन की सीख यही हैं 
जीवन के दो अनमोल रतन हैं ।
वो मेरा प्यारा बचपन 
जिसे मै ढूँढ रहा था ।
अनिता शरद झा
रायपुर -छतीसगड़
[15/11, 10:23 am] 👑पदमाकाक्षी शुक्ला: 🙏🌹 *नमन मंच* 🌹🙏
🙏🌹 *जय अम्बे* 🌹 *१५/११/२१* 🌹🙏
🙏🌹 *बाल कविताःनवजात शिशु* 🌹🙏

नवजात शिशु की आंखों में ।
स्नेह छलक रहा है ।।
भाषा मौन की लगे फिर भी।  
कुछ तो कह रहा है ।।

रोता है कभी हंसता है। 
समझाता है बात।। 
उनकी बात समझ ना पाए। 
करता है उत्पात।। 

मुख है कोमल भोली आँखें। 
लगे कितना प्यारा ।। 
मन चाहे गले से लगाये। 
सबसे लगे न्यारा।। 

सच्चाई और मासूमियत ।
हंसी लगे प्यारी।। 
शुरू करें जब रोना तब भी।
 दिल की खिले क्यारी।। 

पेट दर्द से रोता है तब ।
दूध पिला रहे हम।। 
रोता है जब भूख लगे तब ।
लोरी गा रहे हम।। 

प्यारा सा बचपन बच्चों का । 
समझ ना पाए हम।।
कहते कुछ वह, करते कुछ हम।
प्यार बरसाए हम।। 
🙏🌹पद्माक्षि शुक्ल 🌹🙏
[15/11, 10:35 am] वीना अचतानी 🧑🏿‍🦽: वीना अचतानी 
अग्निशिखा मंच को नमन 
विषय*** बाल दिवस ****
पंछियों ने छोड़ा बसेरा 
जागो बच्चों हो गया सवेरा 
फूलों से महकते रहो
चिड़ियों से चहकते रहो
सूरज की तरह चमकते रहो
चँदा सी शीतलता में रहो
हमेशा खिलखिलाते रहो
बचपन है एसा ख़ज़ाना
आता नहीं दुबारा 
बचपन की बात निराली 
हर दिन होली हर रात दीवाली 
बाल दिवस पर सब बच्चे 
नाचे गाऐं, खुशी मनाऐं
वो बचपन सुहाना 
होमवर्क न करने पर
बहाने बनाना
दोस्तों के साथ घूमना
छोटी छोटी बातों पर
रूठ जाना
कितना सुहाना था
बचपन हमारा
काश:
लौट आए दुबारा ।।।।
वीना अचतानी 
जोधपुर ।।
[15/11, 11:21 am] रामेश्वर गुप्ता के के: । बाल दिवस-बाल गीत।
बच्चों की दुनिया,
मधुर होती है।
प्यार भरी मुस्कान,
भोली सूरत होती है।।
बच्चों..................1
खेल खेलने में उनकी,
खुशी छुपी होती है।
बच्चों की दुनिया,
क्या रंगीन होती है।।
बच्चों.................2
ईश्वर भी बच्चे,
पसंद करते हैं।
सबकी खुशी के लिए,
बच्चे धरती आते हैं।।
बच्चों...................3
ईश्वर का लाख शुक्र है,
प्यारे बच्चे यहां आते हैं।
उन्हें धरती में भेजकर,
भगवान खुश होते हैं।।
बच्चों.....................4
स्वरचित,
रामेश्वर प्रसाद गुप्ता।
[15/11, 11:53 am] निहारिका 🍇झा: नमन अग्निशिखा मंच
आयोजन;-बाल गीत
दिनाँक15/11/2021
सोमवार
🌹बाल दिवस🌹
आज दिवस है इतना पावन
चाचा नेहरू का है जन्मदिन
बाल दिवस कहलाता है।
रौनक दिखे सभी शाला में
बच्चो के नित कलरव की।
धूम धाम से मना रहे
बाल दिवस''उत्साह के संग
कोई बना है आज डॉक्टर 
कोई दिखे वकील
कोई पढ़ाता कक्षा में 
रूप धरे इक़ शिक्षक का।
बने कोई हैं व्यापारी
बेच मनभावन चीज 
भले मुनाफा नहीं कमाते
पर कमा रहे वो इक़ मुस्कान।
बाल दिवस है बच्चो का
 प्यारा एक पर्व महान।।
निहारिका झा
खैरागढ राज.(36 गढ़)
[15/11, 12:09 pm] 💃💃sunitaअग्रवाल: विषय__ बच्चें
विधा__ कविता
शीर्षक__ भोले बच्चें 
दिन ___ सोमवार


         हम सरल सहज बच्चें ,
मन के भोले बच्चें, 
         नटखट , शैतान बच्चें,
दुसरे के बाग से आम चुराते बच्चें ,
दूसरे के घर की घंटी बजाते बच्चें, कोई पकड़ न सके भागते बच्चें तरह तरह के अजीब प्रश्न पूछते बच्चें,
हम भोले भाले , सहज बच्चें,
रहते दिल के सच्चे बच्चें
पल मै हंसना, पल मै रोना ,
पल मै रूठना, पल भर में मान जाना,
न मन में रहता द्वेष भाव,
न अमीरी गरीबी, ऊंच नीच का भेदभाव, 
न होता अहसास अभाव,
हम सरल सहज बच्चें ,

बच्चों की भोली बातें,
मन को करती अति हर्षित,
होते हर घर आंगन के ध्रुव तारे,
धरा के चमकते सितारे,
 निहित हमारे घर की खुशहाली,
इन बच्चों से छाई हरियाली,
हम सरल सहज बच्चें,___
न इनको भूत भविष्य की चिन्ता,
निर्मल पावन मन रहता सदा संता,
हम दे बच्चो को देशभक्ति संस्कृति संस्कार,
जीवन उनका ले सुन्दर आकार 
ना करें वो बड़ो से तकरार, 
करें उज्जवल भविष्य का निर्माण।
हम सरल सहज बच्चें, मन के भोले बच्चें।



सुनीता अग्रवाल इंदौर मध्यप्रदेश स्वरचित धन्यवाद🌹
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
[15/11, 12:34 pm] रवि शंकर कोलते क: सोमवार दिनांक १५/११/२१
विषय***बाल गीत
#बाल दिवस/चाचा नेहरू दिन#
          ^^^^^^^^^^^^^

कितने मनोहर प्यारे हैं बाल जवाहर ।
सबकी आंखके तारे हैं बाल जवाहर ।
जैसे खिला हों गुंचा किसी बाग़का ।।
सबके राजदुलारे है बाल जवाहर।‌१
 
बने आजादी के वो शिल्पकार जवाहर ।
कर गए ख्वाब हिंद के साकार जवाहर ।।
बचपनमें ही स्वतंत्रताके ख्वाब देखे थे ।
प्रगत भारत के थे रचनाकार जवाहर ।।२

मां भारती के जवाहर अरमान बने ।
बच्चों के होंठों के वो मधुर गान बने ।।
इध बच्चोंके चाचानेहरू कहलाने वाले ।
बाल जवाहर भारत के पंतप्रधान बने ।।३

आज भी सबके होठों पे उनका नाम है ।
देख उन्हें चेहरे पे आ जाती मुस्कान है ।।
उनकी कुर्बानी को देश कभी न भूलेगा ।
हम बच्चों का उनको शत शत प्रणाम है ।।‌४

भोले बच्चे तो भगवान के रूप होते हैं ।
पल में हंसते हैं और पलमें ही रोते हैं ।।
फिक्रोंगम भेदभाव से रहते दूर सदा । 
मस्ती खेलकूद के सपने संजोते हैं ।।५




प्रा रविशंकर कोलते
     नागपुर
[15/11, 12:55 pm] वैष्णवी Khatri वेदिका: सोमवार 15//11/ 2021
समय - सुबह ८ से शाम ७ बजे तक 
विषय_बाल दिवस (बाल गीत)

 उत्साह से परिपूर्ण बच्चे।
सही दिशा पाते बच्चे। 
विश्व को बदलते बच्चे।
प्यारे-दुलारे होते बच्चे।।
 
सबके सहारे होते बच्चे।
खुशियों से भरपूर बच्चे। 
सब दुखों को हरते बच्चे।
सही दिशा मिल जाए तो।।

जीवन कला सिखाते बच्चे।
चंचलता से भरपूर बच्चे।
अकेले भोले होते बच्चे।
संगठित तो शैतान बच्चे।।

परोपकारी भी होते बच्चे।
चाँद को छूते हैं ये बच्चे।
सितारों को लजाते बच्चे।
उत्साह कूट-कूट भरा है।।
 
देश के कर्णधार हैं बच्चे।
इन्हें नैतिकता से भरपूर करो।
ईमानदारी का समावेश करो। 
तो विश्व-अग्रणी करेंगे बच्चे।

 वैष्णो खत्री वेदिका
जबलपुर
[15/11, 12:56 pm] वीना अडवानी 👩: बाल कविता

मोटू, पतलू की वार्ता
****************

हम मोटू, पतलू थे दो भाई
गप्पों में हमने महारथ थी पाई
वार्ता, शर्त हमनें खुब लगाई
मां की डांट भी खूब है खाई।।

एक दिन मोटू बोला मुझसे
सुन ओ मेरे पतलू भाई
बाजू के घर में नई घंटी लगी है
क्यों ना बजा शरारत हमनें मचाई।।

पतलू बोला सुन ओ मोटू
ये बात न मेरे दिल में आई
चल जल्दी से घंटी बजाएं
फिर दौड़ हम छिप जाते।।

नये पड़ोसी पहले ही थे जाने
मोटू पतलू की शैतानी पहचाने
फर्श पे चिपकू गोंद बिछाई
फिर चुपके से घात लगाई।।

जैसे ही मोटू पतलू थे आए
झटपट से वो घंटी बजाए
पैर चिपक गये चिपकू गोंद में
सब निकल कर बाहर आए।।

सब मिल मोटू पतलू को मार लगाए।।
कान पकड़ उठक बैठक भी करवाए
सबक दिया मां ने भी उन्हें अच्छा
दिन में तारे खूब नज़र थे आए।।

मोटू बोला पतलू से सुन ओ भाई
अब ना करेंगे शैतानी तौबा है भाई
आज तो दंड-बैठक से टांगे करराही
ये थी बाल कविता जो मैंने सुनाई।।

वीना आडवानी तन्वी
नागपुर, महाराष्ट्र
*********************
[15/11, 12:57 pm] ♦️तारा प्रजापति - जोधपुर: अग्निशिखा मंच
15/11/2021 सोमवार
विषय-बाल-दिवस

बाल-दिवस

प्यार किया नेहरू ने इतना,
 चाचा बच्चों के कहलाते हैं।
याद में उनकी आज भी हम सब,
बाल-दिवस उत्सव मनाते हैं।।

मात-पिता की आंखों के तारे,
पूरे करने है उनके सपने सारे।
राजा बेटा कहकर बुलाते हैं,
याद में उनकी आज भी हमसब
बाल-दिवस उत्सव मनाते हैं।

कच्ची मिट्टी से ये बच्चें,
मन के निर्मल,होते सच्चे।
जैसा ढ़ालते ये ढ़ल जाते।
याद में उनकी आज भी हम सब,
बाल-दिवस उत्सव मनाते हैं।।

धरती माँ की गोद में पलते,
अंधियारे में बन,दीपक जलाते,
पग-पग राह दिखाते हैं।
याद में उनकी आज भी हम सब,
बाल-दिवस उत्सव मनाते हैं।

पढ़-लिख कर इंसान तुम बनना,
कठिनाइयों से कभी न डरना,
फूल से जीवन मुस्काते हैं।
याद में उनकी आज भी हम सब,
बाल-दिवस उत्सव मनाते हैं।

देश के तुम रखवाले बनना,
नाम देश का ऊंचा करना,
गुरुवर हमें यही समझाते हैं।
याद में उनकी आज भी हम सब,
बाल-दिवस उत्सव मनाते हैं।।
                         
                           तारा "प्रीत"
                        जोधपुर (राज०)
[15/11, 1:01 pm] सरोज दुगड गोहाटी: * अग्नि शिखा काव्य मंच *
* १५/ ११ / २०२१ / बाल गीत *

चाचा नेहरू का जन्म दिन मनाते ,
 बच्चों मिलकर बाल दिवस मनाते !

चाचा नेहरु को बच्चे बहुत ही प्यारे ,
तुम ही बनोगे इस देश के रखवारे !

पढ़-लिखकर जीवन में कुछ बनना ,
अपनां भविष्य तुम खुद ही संवारना !

 मौज मस्ती खेल-कूद जी भर करना ,
पर पढ़ाई से कभी भी जी नहीं चुराना !

गया बचपन कभी वापस नहीं आता ?
बच्चों तुम समझ लेना ये सच्ची बात ,

मस्त अलमस्त तुम्हारा प्यारा बचपन ,
मगर अपनें लक्ष्य के प्रति होना सजग !

सरोज दुगड़
खारूपेटिया 
असम 
🙏🙏🙏
[15/11, 1:40 pm] डा. बैजेन्द्र नारायण द्िवेदी शैलेश🌲🌲 - वाराणसी - साझा: , आदरणीय मंच को नमन
एक दृष्टि उन पर भी डालो
माता-पिता बहुत निर्धन है रखते यद्यपि
ऊंचा मन हैं जीते बहुत सहज।
 जीवन हैं बच्चे को कैसे शिक्षा दें सब मिलकर कुछ युक्ति निकालो।एक दृष्टि
उन पर भी डालो।।
अधिक नहीं सहयोग तनिक दो
उनके हक में थोड़ा लिख दो
वे भी अपने पंथ प्रगति का
 क्या होगा कुछ देखो भालो।।
एक दृष्टि उन पर भी डालो।।
बूंद बूंद से घड़ा है भरता
सागर कौन शीश पर धरता
बादल हर तालाब को भरता
कहता जल न बहे संभालो।।
एक दृष्टि उन पर भी डालो।।
भी हैं इस देश के बच्चे
उम्र के कच्चे मन के सचचे
पढ़ लिखकर होंगे ये अच्छे
दे दुलार इनको भी पालो।
एक दृष्टि इन पर भी डालो।।
अपने देश के ही यह धन है
इनके पास भी सुंदर मन है
होंगे योग्य करेंगे सेवा
घर को अपने आप बचा लो।।
एक दृष्टि इन पर भी डालो।।
--------
डॉ ब्रजेन्द्र नारायण द्विवेदी शैलेश वाराणसी🌷🙏
[15/11, 1:45 pm] अंजली👏 तिवारी - जगदलपुर: बालकविता
*********
नन्हा मुन्ना बेटा हूं
तेरा ही राज दुलारा हूं
पहले तो मुझे प्यार करती थी 
गले से लगाती‌ थी
अब प्यार तुम नही करती हो
दूर तुम क्यों रहती हो
गोद में ‌भी नहीं उठाती हो
गले से भी लगाती हो
पहले रोता‌ था‌ तो 
चंदा मामा मुझे दिखाती थी
कहती थी चंदा मामा घर जायेंगे
गिर पुड़ी खायेंगे
अब तो चंदा मामा पास हो गया है 
विक्रम ने रास्ता बना दिया है
चलों ना अम्मा आओ ना 
गोद में उठाओ ना
चंदा मामा दिखाओ ना
चंदा मामा के घर जायेंगे
खिर पुड़ी खायेगे ।
तेरा ही‌ बेटा हूं
नन्हा मुन्ना प्यारा हूं ।
अंजली तिवारी मिश्रा जगदलपुर छत्तीसगढ़
[15/11, 1:52 pm] शेभारानी✔️ तिवारी इंदौर: बाल मजदूर

 हम भी हैं इस देश के बच्चे,
 भौतिक सुखों से हम दूर हैं ,
  पेट की आग बुझाने को हम,
 काम करते हैं, मजदूर हैं
, हां - हांहम मज़दूर हैं ।

जिन हाथों में पुस्तक होनी थी,
 उन हाथों में औजार है,
 आंखों में सपने नहीं बस,
पेट में भूख की आग है,
 पेट की आग बुझाने को मजबूर हैं,
 हां -हां हम मजदूर हैं।

 बालश्रम प्रतिबंधित है,
 फिर भी हम मिल जाते हैं ,
कम पैसों में अधिक काम ,
मालिक हमसे करवाते हैं,
 इतनी नफरत ना हो हमसे ,
हम भी चमन के फूल हैं,
 हां हां हम मजदूर हैं।

 श्रीमती शोभा रानी तिवारी 619 अक्षत अपार्टमेंट खातीवाला टैंक इंदौर मध्य प्रदेश मोबाइल 8989 409 210
[15/11, 2:13 pm] शुभा 👅शुक्ला - रायपुर: बाल दिवस 
👫👭👨‍👩‍👧‍👧👩‍👩‍👧‍👧👬👭👫
नन्हे मुन्ने प्यारे बच्चों खुशियाँ तुम बिखराओ आज 
जनम दिवस चाचा नेहरू का बाल दिवस मनाओ आज 

नेहरू जी नेक दिल के थे जिंदादिली नस नस मे भरी थी  
छोटे बच्चे जहाँ भी दिखते दरियादिली बस बह पड़ती थी 

बाल दिवस पर प्यारे बच्चों झूम झूम के गाओ गाना 
नाटक करो और कविता सुनाओ देख रहे हैं चंदामामा

उछल कुद और साथ मस्ती के एक बात तुम ध्यान मे रखना 
एक नेक इंसा ही बनना गलत राह मे कभी नही पड़ना 

देश का आदर्श नागरिक बनके भारत को शीर्ष तक ले जाना 
देश को स्वच्छ और स्वस्थ बनाकर सत्य अहिंसा प्रेम फैलाना 

आदर करना बड़े बुजू्र्गों का छोटो को सम्मान देना 
चाहे कितनी मुश्किल आयें जीवन पथ पर अविरल बढना 

हम सबने अब छोड़ दिया सब भार तुम्हारे काँधे पे 
हम सारे अब तुम्हारे सहारे विश्व ढालो नये सांचे मे 

देश ने किया है तुम पे भरोसा भरोसे का सम्मान रखना
बढता रहे देश सदा प्रगति पथ पर वसुधैव कुटुंबकम का मान रखना

शुभा शुक्ला निशा
[15/11, 2:25 pm] स्नेह लता पाण्डेय - स्नेह: नमन पटल
विधा- बालगीत
विषय- बाल दिवस

बाल दिवस आया

बाल दिवस है देखो आया,
चाचा नेहरू की याद दिलाया।
बच्चों के थे प्यारे चाचा,
प्यार थे बच्चों को करते।व
बच्चों की खुशियों की खातिर,
काम बहुत वह करते थे।
गुलाब फूल पसंद बहुत था,
बच्चों को फूल समझते थे।
गुलाब की तरह ध्यान रखते,
बच्चे होते कोमल चंचल,
झगड़ते रहते मन निश्छल।
दिखाते गुस्सा दो पल का,
साथ मित्र का हरदम का,
माँ बाप की आँखों के तारे,
उनके जीवन के सहारे।
बच्चे जब खुश रहते है,
माँ बाप बहुत खुश होते।
उनके सुखी जीवन की सदा
प्रार्थना प्रभु से करते।

स्नेहलता पाण्डेय 'स्नेह'
[15/11, 2:51 pm] Nirja 🌺🌺Takur: अग्निशिखा मंच
तिथि - १५-११-२०२१
विषय- बाल दिवस
            बाल दिवस

बच्चे होते हैं बिल्कुल ही भोले ,
छल कपट का नाम नहींं है
जो मन में है वही मुख से बोले। 
निश्छल है इनकी हँसी 
‌देख इनकी मुस्कुराहट
सबकी है थकान उतरती
बोली है इतनी मीठी 
जैसे मुॅंह में घुली मिश्री 
नन्हे नन्हे कदमों से यह आगे बढ़ते
डगमग डगमग चलते गिरते औ संभलते
खेल खेलते साथ साथ में
लड़ते और झगड़ते बात बात में
पल में रुठें पल में माने
कभी बुने ना , कपट के ताने बाने
चाचा नेहरु की दिखाई राह पे चलते नेहरु जी ने बच्चों को प्यार बहुत किया
अपना जन्मदिन बच्चों के नाम किया
हर साल हम बाल दिवस मनाते हैं
बच्चों के साथ साथ हमको 
चाचा नेहरु भी याद आते हैं।
हमको चाचा नेहरु के समान बनना है
हो कर बड़े हमें देश की सेवा करना है

नीरजा ठाकुर नीर 
पलावा डोंबिवली
महाराष्ट्र
[15/11, 3:43 pm] चंदा 👏डांगी: $$ बालदिवस $$

बचपन मेरा बीते कुड़े के ढेर पर 
झूठे पत्तल दोने से पेट अपना भरूं 
पढ़ने की कोई पूछो मत
कपड़ा मिल गया पड़ा कहीं
आपके लिए गंदगी,मच्छर या बिमारी
मेरे लिए तो यही है जीवन के सहारे 
स्कूल कपड़े तो दूर की बात 
मिल जाए भरपेट खाना
बालदिवस से मुझे क्या लेना 
मुबारक हो आप सभी को बालदिवस 
हमारे लिए तो सारे दिन समाना 

चन्दा डांगी रेकी ग्रैंडमास्टर 
रामटेकरी मंदसौर मध्यप्रदेश
[15/11, 4:20 pm] 💃वंदना: तुलसी जी का भजन

मंदिर भीतर सांवरियो बाहर बैठी तुलसा
झालो दई दई बुलावे भीतर आजा तुलसा।

नई  नई  नई रे सांवरिया राधा रानी लड़ेगा
राधा रानी लड़ेगा रुकमा रानी लड़ेगा
नई नई रे सांवरिया सतभामा लड़ेगा।

मंदिर भीतर सांवरियो बाहर बैठी तुलसा
झालो दई दई बुलावे भीतर आजा तुलसा।

टीको लायो सांवरियो पैरों पैरों तुलसा
झाला लायो सांवरियो पैरों पैरों तुलसा
नथनी लाइव सांवरिया पैरों पैरों तुलसा।

नई नई नई  रे सांवरिया राधा रानी लड़ेगा
राधा रानी लड़ेगा रुकमा रानी लड़ेगा
नई नई रे सावरीया सतभामा लड़ेगा।

हरवो लायो सांवरियो पैरों पैरों तुलसा
चूड़ी लायो सांवरिया पैरों पैरों तुलसा
पायल लायो सांवरियो पैरों पैरों तुलसा

चुनर लायो सांवरियो ओढ़ो ओढ़ो तुलसा
मेहंदी लायो सांवरियो राचो राचो तुलसा
महावर लायो सांवरिया राचो राचो तुलसा।

नई नई रे सावरीया राधा रानी लड़ेगा
राधा रानी लड़ेगा रुकमा रानी लड़ेगा
नई नई रे सावरीया सतभामा लड़ेगा।

मंदिर भीतर सांवरियो बाहर बैठी तुलसा
झालो दई दई बुलावे भीतर आजा तुलसा।

वंदना शर्मा बिंदु देवास मध्य प्रदेश
[15/11, 4:36 pm] ओम 👅प्रकाश पाण्डेय -: बाल दिवस ( बाल गीत) --- ओमप्रकाश पाण्डेय
चौदह नवम्बर का दिन हम
हर वर्ष मनाते बाल दिवस
पर केवल गुब्बारे उड़ा कर
रस्म अदायगी बस करते सब
पर बच्चे भविष्य हैं राष्ट्र का
कौन बतायेगा इन बच्चों को....... 1
आजादी के संघर्षो में सब के साथ
खून बहा इस देश के बच्चों का भी 
खुदीराम बोस तो केवल था अठारह का
मुश्किल से मूंछे निकलीं थी
कर दिया न्योछावर जीवन अपना
कौन बतायेगा इन बच्चों को......... 2
हंसते हंसते दे दिया जीवन
गुरु गोविंद सिंह जी के नौनिहालों ने
अजीत सिंह था अठारह का
फतेह सिंह था सोलह का
जुझार चौदह जोरावर नौ का था
कौन बतायेगा इन बच्चों को......... 3
किसका किसका मैं नाम बताऊँ
किसकी किसकी उम्र बताऊँ
छांती से खींच खींच कर अताताईयों ने
झोंक दिया नौनिहालों को अंगारों में
फिर भी स्वतंत्रता की आग नहीं बुझी
कौन बतायेगा इन बच्चों को....... 4
आजादी के इतने सालों के बाद भी
बाल मजदूर हर गली में हैं
चौराहों पर भीख मांगते
भूखे नंगे घूमते रहते चारों ओर
क्या ये भी भविष्य हैं इस देश का
कौन बतायेगा इन बच्चों को...... 5
( यह मेरी मौलिक रचना है ---- ओमप्रकाश पाण्डेय)
[15/11, 4:59 pm] 💃वंदना: कविता  अंगूर

उठ बिटिया जल्दी से उठजा अपनी अखियां खोल।
देख वही नीली दस्ती में  लाया में अंगूर।

जल्दी से खा ले वरना आ जाएंगे लंगूर।
देख वही नीली दस्ती  में लाया हूं अंगूर।

लंगूर भूल से कह डाला ये तो है नन्हे फूल।
देख वही नीली दस्ती में लाया हूं अंगूर।

भैया और बहना को भी देना तू जरूर।
देख वही नीली दस्ती में लाया हूं अंगूर।

जा जल्दी से जाकर अपनी मम्मी को भी ढूंढ।
देख रही नीली दस्ती में लाया हूं अंगूर।

बात बात में रोना मत तू तो है मेरी हूर।
देख रही नीले दस्ती मे लाया हूं अंगूर।

अपना और  अपनों का भी रखना अब तू ध्यान।
देख वही नीली दस्ती में लाया हूं अंगूर।

हु मैं बहुत पास में तेरे समझ ना मुझको दूर।
देख वही नीली दस्ती में लाया हूं अंगूर।

तुम सब की सांसो में मैंने बसा लिया एक ठौर।
देख  वही नीली दस्ती मे लाया हूं अंगूर।

उठ बिटिया जल्दी से उठ अपनी अखियां खोल।
देखो ही नीली दस्ती में लाया हूं अंगूर।

चाहे हो कितनी ही बड़ी पर मेरे लिए तू छोटी सी
उठ बिटिया जल्दी से उठ जा अपनी अखियां खोल
देख वही नीली दस्ती में लाया हूं अंगूर।

यह मेरी स्वरचित रचना है

वंदना रमेश चंद्र शर्मा
52 सर्वोदय नगर देवास
[15/11, 5:36 pm] 😇ब्रीज किशोर: *१४/११/२०२१*   
   *बच्चे मन के सच्चे*
बच्चे मन के सच्चे सबको 
लगते प्यारे ,
ये बगिया के फूल है घर के है उजियारे।
इनसे घर चहका करता है जैसे चिडियाँ चहके।
बच्चे रात रानी जैसे है घर आंगन महके।
बारिष की फुहार है बच्चे इन्द्रधनुष सा दिखे।
जा घर मे बच्चै छोटे नहि सुना सुना लगे।
छोटे बच्चे से घर मे रौनक ही
रौनक रहती।
 घर के सारे सदस्य के ओठो पर हसीं सदा थीरकती।
बच्चो के कीलकारी से सब 
दुःख हो जाये दूर।
बच्चे संग बच्चे बन जाये अमीर हो या हो मजदूर।
आओ मील कर बच्चो के भभीष्य को चमकाये।
इन बच्चो को पढ़ने भेजे जीवन सफल बनाये।
*बृजकिशोरी त्रिपाठी*।
*गोरखपुर. यू. पी*
[15/11, 5:51 pm] रजनी अग्रवाल जोधपुर: शीर्षक-"बाल दिवस" 14 नवंबर"

आओ खेलें ,
बाल दिवस पर खेल,
मातृभूमि की आजादी हित, 
 हो गए हैं बलिदान, याद करें हम उनकी शान , 
 और बढ़ाएं उनका मान , 
 दुश्मन के दिल को दहला दे, 
 कर दे अपना जीवन महान , 
 बाल दिवस पर खेले खेल , 
जीवन में करें वीरता का मेल , 
 आज के दिन चाचा नेहरू का , 
 मिलकर मनाए जन्मदिवस , 
जो सब बच्चों के प्यारे थे , 
 सबसे न्यारे और दुलारे हैं , 
 शांति दूध कहलाने वाले , 
 जीवन में आदर्श दिखाने वाले ,
 आज बाल दिवस है भाई , 
मिलकर खेले सब भाई भाई , 
आज 14 नवंबर है बाल दिवस है भाई .

स्वरचित रचना , रजनी अग्रवाल
 जोधपुर .
[15/11, 6:01 pm] रानी अग्रवाल: १५_११_२०२१,सोमवार।
विषय_बालदिवस।
विधा_ बालगीत।
शीर्षक _मेरे लिए बालदिवस का मतलब_____
१४नवंबर को होता बालदिवस,
साल के३६५ दिनों में सबसे सरस
पंडित नेहरू का जन्मदिन,
मनाया जाता जैसे" बाल दिन"।
चाचा नेहरू थे सबके प्यारे,
बच्चे लगते थे उन्हें बड़े दुलारे,
हमको देश का भविष्य बताया,
अंबर के चांद_ सितारे बुलवाया।
हम विद्यालय में बाल दिन मनाते,
अपने विद्यालय को खूब सजाते,
होते भाषण,करते नेहरू को याद,
गीत प्रतियोगिता,और वाद विवाद
विद्यालय में शिक्षक देते उपहार,
उस दिन देते विशेष लाड_प्यार,
मात_पिता लुटाते अपना प्यार,
देते हमें मन पसंद सुंदर उपहार।
खूब खाते खुशी से खेलते हम,
आनंद ही आनंद, विसराते गम,
यही कहते हम एक स्वर,
बारंबार आए १४नवंबर।
स्वरचित मौलिक रचना_____
रानी अग्रवाल,मुंबई,१५_११_२१.
[15/11, 6:09 pm] आशा 🌺नायडू बोरीबली: 🌹बाल दिवस🌹
****************
      (बाल गीत)

आओ मनाएं मिलकर बाल दिवस।
आओ मनाएं मिलकर बाल दिवस है । चाचा नेहरू का हैआज जन्मदिन । ‌ चाचा नेहरू को हैं हम सब बच्चे प्यारे। अपने माता पिता के हम बच्चे राज दुलारे । चाचा नेहरू का जन्मदिन मनाना है आओ मिलकर मनाएं बाल दिवस । अगर उनका जन्मदिन मनाना है , तो उनके सपनों को साकार करना है। खेलकूद के साथ-साथ कुछ बनना व कुछ करनहै देश को प्रगति के पथ पर ले जाना है । आंखों में हो खुशी और अधरों पर हो मुस्कान। यह है चाचा नेहरू का ऐलान ।भाईचारा झलकता हो हर दिल में सुख का सागर हो बसा हो घर घर में ।
आओ मनाएं मिलकर बाल दिवस।
 रहें प्यार सी हम सब मिल जुल कर।
********************डॉ . आशालता नायडू.
भिलाई . छत्तीसगढ़
15/11/2021.
[15/11, 6:43 pm] सुरेन्द्र हरडे: अग्निशिखा शिखा मंच को नमन🙏🌹🌷🌹🌷🌸🌺🌸

आज की विधा :- बालगीत
विषय:- *बालदिवस*

चलो चलो आज है बालदिवस
जोर शोर मनाएंगे बालदिवस
सबकी आंख के सितारे चाचा
बच्चों के है लाडले चाचा।।१।।

तुम हो आधुनिक भारत के शिल्पकार, स्वतंत्रता संग्राम में
गांधी जी के साथ जुड गए
भारत को आजादी दिलाई।।२।।

बच्चे जब खुश होते उनके
लाडले चाचा बच्चों करते प्यार
गुलाब के फूल सदा रहते 
बच्चों कोई फुल समझते।।3।।

भारत के प्रधानमंत्री बनने 
बाद भारत नया दौर आया
भिलाई स्टील इकाई का एंव भाकरानांगल बांध बनाया।४।।

आराम हराम है का नारा दिया
देश के विकास लिए सदा रहे
पंचवार्षिक योजना बनाई, भारत एक खोज किताब लिखी।। ५।।

चाचा हमारे शांति के दूत 
गांधी अहिंसा के साथ थे
रुस को दोस्ती कर नवभारत का
निर्माण किया बच्चों के प्यारे चाचा।।६।।

सुरेंद्र हरडे
नागपुर
दिनांक :- १५/११/२०२१
[15/11, 6:48 pm] डा. अंजूल कंसल इन्दौर: अग्निशिखा मंच 
शीर्षक -बाल दिवस 

आज आया प्यारा बाल दिवस 
चाचा नेहरू को बच्चे याद करें
बच्चों को बहुत प्यारे नेहरू जी 
अचकन पर गुलाब सज रहा। 

बच्चे मन के हैं सीधे-सच्चे 
चाचा नेहरू का बहुत भाते 
मात पिता के हैं राज दुलारे 
गीत-कहानी नानी-दादी सुनावें।

बच्चों पढ़ाई लिखाई खूब करो 
अब लॉकडाउन के दिन भूलो
स्कूल जाकर शिक्षा ग्रहण करो 
देश के सच्चे वीर नागरिक बनो।

डॉक्टर अंजुल कंसल "कनुप्रिया"
15-11-21
[15/11, 8:01 pm] रागनि मित्तल: जय मां शारदे
************
अग्निशिखा मंच
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दिनांक- 15/11/2021
बालगीत-
शीर्षक- *चुन्नू की नाव*

चुन्नू ने नाव बनाई ।
रंग-बिरंगी झालर लगाई।
टब में भरकर पानी लाया। 
फिर छोटी बहना को बुलाया।
दोनों नाव लगे चलाने।
जोर-जोर से ताली बजाने।
चलते-चलते नाव बहने लग गई।
गुड़िया रानी रोने लग गई।
गुड़िया को अब कैसे मनाएं।
चुन्नू भैया जुगत लगाएं।
रंग-बिरंगे कागज ले आया।
ढेर सारी नाव बनाया।
खुश हो गई गुड़िया रानी।
तभी बरस गई बरखा रानी।
चुन्नू, गुड़िया खूब नहाये।
झूम-झूम के नाचे गाये।

रागिनी मित्तल
कटनी, मध्य प्रदेश



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