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अखिल भारतीय अग्नि शिखा मंच के ब्लॉक पर आज दिनांक 12 11 2021 को विषय प्रदत" हमारे राम" पर भक्ति की भक्ति भक्ति में डूबी रचनाएं पढ़ें, अलका पांडे मुंबई




डॉ अलका पाण्डेय मुम्बई 
शीर्षक -हमारे राम

हमारे राम जय श्री राम
जयश्री राम , जयश्री राम 
वंदन करते है जयश्री राम !!!

जयश्री राम भारत की पहचान है 
राम हमारे आस्था के प्रतिमान है!!

हमारे राम जय श्री राम
जयश्री राम नाम का कर लो सुमिरन !
मिट जायेगे सकल दुख दारुन !!

मर्यादा में रहने का पाठ पढ़ाते !
हनुमान के सीने में घर बनाते !!

जयश्री राम केवट का विश्वास है 
जयश्री राम अहिल्या का तारनहार है !!

हमारे राम जय श्री राम
जयश्री राम , जयश्री राम 
वंदन करते है जयश्री राम !!!

जय श्री राम नहीं बसते महलों और चौबारा में !
राम तो बसते है निर्धन की आस्था की कुटिया में !!

जय श्री राम हमारे अंतस की प्यास है !
राम हमारे पूजा , अरमान है भगवान है !!

आया आज उत्सव का दिन 
अयोध्या के विजय का दिन !!

आओ मिलकर दीप जलाये 
जय श्री राम का नारा लगाये !!

हमारे राम जय श्री राम
जयश्री राम , जयश्री राम 
वंदन करते है जयश्री राम !!!

राम मंदिर का शिलान्यास हो कर रहेगा !
जय श्री राम जय सिया राम का उद्घोष होकर रहेगा !!

आकाश से फूलों की वर्षा होगी 
राम नाम के जयकारे से सृष्टी मतवाली होगी !!

जय श्रीराम नाम की महिमा अद्भुत
जयश्री राम नाम लोकहित कारी !!

 राम बसते हैं घायल जटायु की साँसों में ! 
राम बसते हैं अंगद के पौरो के छालों में 
 हमारे राम जय श्री राम
जयश्री राम , जयश्री राम 
वंदन करते है जयश्री राम !!!

डॉ अलका पाण्डेय मुम्बई 
अलका पाडेंय (अगनिशिखा मंच)
देविका रो हाऊस प्लांट  न.७४ सेक्टर १
कोपरखैराने  नवि मुम्बई च४००७०९
मो.न.९९२०८९९२१४
ई मेल alkapandey74@gmail.com

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[12/11, 7:39 am] Anita 👅झा: अग्नि शिखा मंच को नमन 
भक्ति गीत -
विषय -हमारे राम 
रामकथा का सार 
गुरू वशिष्ठ की सीख रामकथा का सार है 
पुरुषोत्तम राम की जनवाणी में छाई आस हैं 

गुरू शिष्य मान बचाने रूप बदल आये हैं 
माया की नगरी में ज्ञान दीप जलाने आये हैं

दशरथ नंदन राम की नगरी अयोध्या हैं 
गुरू वशिष्ठ की सीख से पारंगत हो 

अपने सत्यकर्मो का अधिकार जमाया हैं 
दर्शन मात्र की अभिलाषा से प्रेम बन छाये हैं 

 हे अन्तरयामी जनमानस की आस तुम हो 
पुरुषोत्तम रामकथा की जनवाणी में छाई हैं 

गुरू शिष्य का अभिमान बचाने रूप बदल आये हो 
गहन सुरक्षा अन्य जल की भूख मिटाने आये हो 

शिलालेख कर्मप्रधान जनमानस विश्वास यही हैं 
जनजागरण आस जगाने मायानगरी में आये हैं 

कर्मवीर बलवीर केशरीनंदन कलयुग कथा यही हैं 
अपने पितामह जल दान अर्पण सरयूतट आये हैं 

 महादेव की भक्ति में राजीव लोचन कहलाये हो 
शान्तचित अनुरागीमन की प्यास बुझाने आये हैं
   श्रीमती अनिता शरद झा रायपुर
[12/11, 8:01 am] कुंवर वीर सिंह मार्तंड कोलकाता: 🌺शुक्रवार -12//11/2021
🌺विषय - भक्ति गीत /हमारे राम

भारत के जन–मन–मानस में बसे हमारे राम।
दिवाली के दीपों के मिस हंसे हमारे राम।

राज्य त्याग, वन वन में भटके, सबसे मिले जुले।
रावण का वध करने तरकश कसे हमारे राम।

बंदर भालू मित्र बनाए, तार अहिल्या दी।
पर बजरंगबली के मन में बसे हमारे राम।

माया मोह सभी से ऊपर, उठकर सदा रहे।
दुनिया फंसती, मगर कहीं न फंसे हमारे राम।

© कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड, कोलकाता
[12/11, 8:32 am] सरोज दुगड गोहाटी: * अग्नि शिखा काव्य मंच *
* शुक्रवार:- १२/११/ २०२१ /*
* बिषय :- भक्ति गीत /हमारे राम *

तेरे राम मेरे राम हमारे राम ,
हम सबकी आस्था के राम !
पितृ आज्ञा से वनवासी राम ?
लौटे मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम !

राम हमारे जीवन के आधार ,
राम नाम ही सबको देता त्राणं !
राम नाम का तब सहारा लेकर ,
हनुमान संजीवनी से देते प्राणं !

केवट की नाव में चढ़कर ,
सबरी के झूठे बेर चखकर !
पत्थर को अहिल्या बनाकर ,
रावणं का कर दिया उद्धार !

रीति नीति ओर धर्म का पालन कर ,
विभिषण शुग्रीव को मित्र बनाकर !
राम नाम पत्थर का सेतु बनाकर ,
रावणं की सोने की लंका जलाकर !


गुरू आज्ञा से शिव तोड़ा शिवधनुष !
मिथिला सुकुमारी से पाणींग्रहणं ,
भरे दरबार धोबी नें किया प्रश्न.. ?
बात न्याय की सीता को भेजा वन !

सरोज दुगड़
खारूपेटाया 
असम 
🙏🙏🙏
[12/11, 8:55 am] साधना तोमर: संगति

तेरी संगत में हे भगवन हम तो कुंदन हो गए।  
शीतलता मिली है मन को हम तो चंदन हो गए।। 

मन-मंदिर में तुम्हें बसाकर आनंदानुभूति करें, 
श्रद्धा -भक्ति के पुष्पों से स्वर मेरे वंदन हो गए।। 

रसना मेरी बने सार्थक शब्द-शब्द में नाम तेरा, 
हिय-वीणा के तारों के स्वर ये अभिनंदन हो गए। 

 जग ने जख्म दिये हैं जो अब हमें परवाह नहीं, 
कंटकों के दूर सारे मन से अब बंधन हो गए। 

तेरी संगति में यह जीवन धन्य हुआ है प्रभु मेरा, 
पथरीली राहें भी अब तो मनमोहक नंदन गये। 

तेरी सुधियों के दीप को मन में सदैव जलाया है, 
उसकी आभा में दमके ये जीवन गुलशन हो गये। 

डा. साधना तोमर
बड़ौत (बागपत)
उत्तर प्रदेश
[12/11, 9:31 am] वीना अचतानी 🧑🏿‍🦽: वीना अचतानी 
विषय ****राम भक्ति गीत*****
घर आये राम ,लखन और सीता
अयोध्या सुन्दर सज गई।
माता कौशल्या बाँटे बधाई 
प्रीत दिल मे न समाई।
चौदह वर्ष बिताये वन में 
बेटे बहू घर आए।
घर घर होते श्रृँगार नगर में 
दीपों का त्यौहार ।
मंगल गीत सुनाये प्रजाजन
सोना चाँदी वारे।
राज तिलक गुरु वशिष्ठ रहे
सबके मन हर्षाये।
नोबत, झांझ नगाड़े बाजे
माँ आरती उतारे।
ब्रह्म, विष्णु, महेशदेव सब
कर जोड़े खड़े ।
पुष्प कोटि नभ से बरसे
अयोध्या के भाग्य जगे।
घर आये राम लखन और सीता 
अयोध्या सुन्दर सज गई।।।।।
 वीना अचतानी ।
जोधपुर ।।
[12/11, 10:20 am] 👑पदमाकाक्षी शुक्ला: 🙏🌹 *नमन मंच* 🌹🙏
🙏🌹 *जत्र अम्बे* 🌹 *१२/११/२१* 🌹🙏
🙏🌹 *हमारे राम* 🌹🙏


*मन बसे सीताराम*

सरल स्वभाव,चले वनवास , वह है हमारे राम
संहार दशानन का करते, वह है हमारे राम।। 
मन बसे सीता राम।। 

उद्धार किया है चरण रज से, अहल्या को तार दिया। 
अवगुण दूर करो है प्रभुजी, उद्धार करना राम ।।
मन बसे सीता राम ।।

राह देखती शबरी कबसे, खा रहे झूठे बोर । 
देने ज्ञान नवधा भक्ति का, कुटीर पधारे राम।। 
मन बसे सीता राम।। 

 प्यार मिले तुम्हारा मुझ को, जीवन सफल हो जाये । 
आप बसे हो कण कण में प्रभु, ह्रिदय पधारो राम।। 
मन बसे सीता राम।। 

🙏🌹स्वरचित रचना 🌹🙏
🙏🌹पद्माक्षि शुक्ल 🌹🙏
[12/11, 11:05 am] डा. बैजेन्द्र नारायण द्िवेदी शैलेश🌲🌲 - वाराणसी - साझा: मंच को नमन
++++++
एक गीत-मेरे राम
-------
  विप्र धेनु सुर संत के लिए
 इस धरती पर आए ।
दशरथ के आंगन में अपना बचपन खेल दिखाए।।
 विश्वामित्र यज्ञ की रक्षा किए बंधु के साथ 
किए असुर ताड़का हनन, गए तब मिथिला नगर पधार 
वैदेही से नाता जोड़े पुनः अवध में आए।
धर्म ध्वजा फहराने के हित वन मे नाथ सिधाए।। 
नित्य नई योजना बनाते रहे किंतु निष्काम।।
विप्र धेनु सुर संत के लिए जगह में आए राम।।
कोर्ट में कामदगिरि पर है अपना समय बिताए ।
कृपा प्राप्त कर साधु संत की दंडक वन मन भाए।।
समाचार शूर्पणखा सेवा पा आ पहुंचा दशकंधर। राम लखन बिन देख कर गया कुमति शून्य कुटिया पर। 
बहुत बहुत दुख पाए वन मैं सीता संग श्री राम।। 
विप्र धेनु सुर संत के लिए जग में आए राम।।
वर्षा धूप शीत को सहकर
 जंगल जंगल घूमे 
खोज प्रिया की करते-करते किष्किंधा को चूमे।
अंजनी नंदन जांबवान सुग्रीव मित्रता पाए
 वैदेही का पता लगाने वानर भालू सिधाए। 
सहे अपार व्यथा निज उर में रघुवर ललित ललाम।।
 विप्र धेनु सुर संत के लिए जग में आए राम।।
खबर मिली लंका में बैठी है सीता बेचारी।
 रावण द्वारा कठिन कष्ट नित सहती है बेचारी।।
सेतबंध कर युद्ध किए
 पा गए विजय श्री राम ।।
तहस-नहस करके अरिकुल को अवध चले श्री राम।।
विप्र धेनु सुर संत के लिए जग में आए राम।।
स्वयं आजीवन कोई सुख नहीं पाए राम।।

।।विप्र धेनु सुर संत के लिए जग में आए राम।।
कष्ट मिटा भक्तों का मन में अति सुख पाए राम 
विप्र धेनु सुर संत के लिए जग में आए राम ।।
जय श्रीराम ।
जय श्रीराम।।
 जय श्रीराम।।।
 जय श्रीराम।।।।
डॉ ब्रजेन्द्र नारायण द्विवेदी शैलेश वाराणसी

🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻🌻
[12/11, 11:29 am] वैष्णवी Khatri वेदिका: 12 Nov 2021श्री राम रसायन। ( गीत )
श्री राम रसायन कहाए,
श्री राम रसायन कहाए।
नाश करके सारे पापों का, 
ज्ञान की ज्योति जलाए। श्री राम ....2

राम अनन्त हैं अपरम्पार हैं, 
उनसे महान न कोई।
राम ही सृष्टि के पालनहार,
उन सा सुखदाई न कोई।
जो ध्याए वो आत्मिक, 
मानसिक सुख वाला हो जाए।
राम नाम को जपने वाला, 
सकारात्मक उर्जा पाए। श्री राम ....2

राम अजर अमर बनाता, 
सर्वसिद्धि का आधार।
कीर्ति विभीषण की भी फैली,
जैसे हो सूर्य-प्रकाश। 
राम नाम अविनाशी व्यापक, 
सब परिपूर्ण हो जाए।
राम है चेतन आनंद राशि, 
अविनाशी, निर्गुण पाए।श्री राम ....2

कोई दुखी देह, कोई हृदय से, 
कोई करे धन की है आस।
इस जगत् में बस है वही सुखी, 
जो श्री राम का दास।
सच परिवर्तित कभी न होता,
देश भले बदल जाए।
राम के अक्षर मधुर व सुन्दर, 
निर्मल अंतर्मन हो जाए।श्री राम ....2
वैष्णो खत्री वेदिका
[12/11, 12:35 pm] रागनि मित्तल: जय मां शारदे
*********
 अग्निशिखा मंच 
दिन -शुक्रवार 
दिनांक- 12/ 11/ 2021 

भक्ति गीत - *मेरे राम*
 
नोट- गहुआरो का मतलब -छोटा सा

मेरो राम गहुआरो।  
नजर कोई इसपे ना डारो।
छोटी- छोटी पैंया है, छोटी अंगुलियां ।
छोटो सो राज दुलारो। नजर कोई इस पे ना डारो।

मैया कौशल्या के प्राणों से प्यारा, 
दशरथ को लाल दुलारो।
नजर कोई इसपे ना डारो।

घुंघराली लट हैं चितवन अनोखी, दिखत है सबसे प्यारो। 
नजर को इस पे ना डारो।
मेरो राम गहुआरो। 
नजर कोई इसपे ना डारो।

रागिनी मित्तल
 कटनी ,मध्य प्रदेश
[12/11, 12:38 pm] विजेन्द्र मोहन बोकारो: मंच को नमन
विषय:-- भक्ति गीत
शीर्षक:--- *बंसी की धुन*

सुन बंसी की धुन सुबह शाम रे
मोरे श्याम मोरे श्याम मोरे ....!
सुन बंसी के धुन सुबह शाम रे।

चाहे कल हो चाहे आज
चाहे दिन हो चाहे रात
चाहे घर हो चाहे गांव
चाहे धूप चाहे छाव रे...!

सुनू बंसी के धुन सुबह शाम लें
मोरे श्याम मोरे श्याम
मोरे श्याम मोरे श्याम मोरे श्याम रे
सुनो बंसी के धुन सुबह शाम रे।

जो हो खुशियों की फुहार
यार रंगों की बहार
मोहे ऐसी लगी प्रीत
गांव मीत का मै गीत
गा के सुनो संगीत
सुनू बंसी के धुन सुबह शाम रे।

विजयेन्द्र मोहन।
[12/11, 12:40 pm] आशा 🌺नायडू बोरीबली: 🌹 भक्ति गीत 🌹
*****************
       हमारे राम
    ************

जय राम श्री राम जय जय राम जय राम श्री राम जय जय राम हम सबके दुख हरते राम‌ ‌ ‌ सुख संपत्ति देते राम जय राम श्री राम 
जय जय राम
जय राम श्री राम जय जय राम । ‌ 

धरती से गगन तक मुझ से तुम तक ‌ सबके मन में बसते राम जय राम श्री राम जय जय राम जय राम श्री राम जय जय राम ।             

कण कण के वासी राम अपार सुख देते राम भेद भाव न रखते राम सबको गले लगाते राम जय राम श्री राम जय जय राम जय राम श्री राम जय जय राम।
*******************
स्वरचित रचना
डॉ . आशालता नायडू .
भिलाई . छत्तीसगढ़ .
********************
[12/11, 12:46 pm] ♦️तारा प्रजापति - जोधपुर: अग्निशिखा मंच
12/11/2021 शुक्रवार
विषय-भक्ति गीत

पड़ी है देनी 
उन्हें परीक्षा
जो कोई 
सच की राह चला है 
देनी पड़ी अग्निपरीक्षा 
माता सीता को
भक्त प्रह्लाद ने
झेली विपदाएं
सच की बलिवेदी पर
राजा हरिश्चंद्र ने
चढ़ा दिया अपने 
प्यारे पुत्र को
चलता है संसार
झूठ के पैरों से
पंगु सच पड़ा है
आज किसी कोने में
झूठ के बलबूते पे
खड़ी इमारत है
दफ़न हो गया
सच किसी गलियारे में
जीते हरदम वही
जो झूठ के सहारे हैं
सच्चे तो 
हर बार ही हारे हैं
पग पग 
झूठ का जाल बिछा है
मनुष्य के लिए
ये श्राप है
कोई वरदान नहीं है
सच का पथ 
आसान नहीं है।
                 तारा "प्रीत"
             जोधपुर (राज०)
[12/11, 12:53 pm] रामेश्वर गुप्ता के के: भक्ति गीत - हमारे राम। 
हमारे राम की महिमा है, 
क्या मै इसे बखान करू।
राम नाम बोल बोलकर, 
राम नाम में खो जाऊँ।। 
राम नाम.................. 1 
राम नाम में वह शक्ति है, 
महिमा रोज बरसती है। 
जो राम नाम नित लेता है। 
राम नाम से जय होती है।। 
राम नाम................... 2 
यह शरीर एक पिंजरा है, 
इस में जीव बंधा रहता है। 
न उड पाये या भाग पाये, 
इस कैद मे फंसा रहता है।। 
राम नाम.................... 3
जन्ममरण एक बन्धन है, 
जीव एक सत्य गठ बंधन है। 
स्वयं का रचा ये जंजाल है, 
नहीं छूटता, माया जाल है।। 
राम नाम.....................4
राम की महिमा अपरंपार है, 
राम ही कराता भव से पार है। 
राम नाम के इन दो अक्षर में, 
इसी में समाया ये संसार है।। 
राम नाम..................... 5
राम से प्यार कर के जीना है, 
जगत मिथ्या का अम्बार है। 
हर जगह बयाप्त राम रमा है, 
राम के बिना नीरस संसार है।। 
राम नाम........................6
स्वरचित, 
रामेश्वर प्रसाद गुप्ता ।।
[12/11, 1:14 pm] रवि शंकर कोलते क: शुक्रवार दिनांक*** १२/११/२१ 
विधा ****भक्ति गीत
विषय******
        #*** हमारे रामजी***#
                    ^^^^^^^

हमारे रामजी है ।
    जग की नैया के खिवैया ।। 
रामजी बिन चले ना ।
      जीवन गाड़ी का पहिया ।।धृ

राम बिना हम जा न पाए भवपार ।
दुख के भंवर में डूबे नांव हर बार ।।
उसके इषारेसे उड़े सांसकी चिरैया ।।१

कीजिए राम का सुमरन हे मानव । 
शरण में आए बड़े बड़े दुष्ट दानव ।।
वही है रहीम नानक येशु कन्हैया ।।२

कुछ दिनके है साथी सुखकेअंबार ।
शाश्वत है रामजी नश्वर है संसार ।। 
ये मायावी जीवन है भूल भुलैया ।।३

प्रा रविशंकर कोलते
     नागपुर
[12/11, 1:31 pm] सरोज दुगड गोहाटी: * अग्नि शिखा काव्य मंच *
* शुक्रवार:- १२/११/ २०२१ /*
* बिषय :- भक्ति गीत /हमारे राम *

तेरे राम मेरे राम हमारे राम ,
हम सबकी आस्था के राम !
पितृ आज्ञा से वनवासी राम ?
लौटे मर्यादा पुरुषोत्तम श्री राम !

राम हमारे जीवन के आधार ,
राम नाम ही सबको देता त्राणं !
राम नाम का तब सहारा लेकर ,
हनुमान संजीवनी से देते प्राणं !

केवट की नाव में चढ़कर ,
सबरी के झूठे बेर चखकर !
पत्थर को अहिल्या बनाकर ,
रावणं का कर दिया उद्धार !

रीति नीति ओर धर्म का पालन कर ,
विभिषण शुग्रीव को मित्र बनाकर !
राम नाम पत्थर का सेतु बनाकर ,
रावणं की सोने की लंका जलाकर !


गुरू आज्ञा से शिव तोड़ा शिवधनुष !
मिथिला सुकुमारी से पाणींग्रहणं ,
भरे दरबार धोबी नें किया प्रश्न.. ?
बात न्याय की सीता को भेजा वन !

सरोज दुगड़
खारूपेटाया 
असम 
🙏🙏🙏
[12/11, 1:48 pm] 😇ब्रीज किशोर: *अग्नि शिखामंच*
*स्वतंत्र लेखन*
*जग मे है कितने राम*
**********************
राम हमारे राम तुम्हारे, इस जग मे है कितने राम।
सब के अपने अपने राम।

बालक राम अवध मे जन्मे।
कौशल्या के दुलारे राम।
दशरथ के प्राणो से प्यारे राम।
केकई के अति प्यारे राम।
जन जन के राज दुलारे राम।
सब के अपने अपने राम।
जग मे है कितने राम।

शबरी के है अपने राम जूठे बेर प्रेम से खाये राम।
सुतिक्षण के है अपने राम दिल मे अपना रुप दिखाये राम।
अनुसुइया के अपने राम पुत्र प्रेम मे बसते राम।
भरद्वाज के अपने राम कणकण मे है बसते राम।
सबके अपने अपने राम।
जग मे है कितने राम।

लक्ष्मण के अपने राम सेवा भाव मे बसते राम।
भरत के अपने राम आज्ञा मे है बसते राम
शत्रुघ्न के अपने राम उनके मौन मे बसते राम।
सबके अपने अपने राम।
जग मे है कितने राम।

सुग्रीव के है अपने राम मित्रता मे बसते राम।
बाली के है अपने राम मोक्ष मे है बसते राम।
विभीषण के अपने राम शरणागत मे बसते राम।
रावण के है अपने राम दुश्मनी मे बसते राम।
हनुमत के है अपने राम रोम रोम मे बसते राम।
सबके अपने अपने राम।
जग मे है कितने राम।

 बालमीक के राजा राम रामायण पहले लिख डाला।
तुलसी के है प्रभूवर राम राम
चरित्र मानस लिख डाला।
सबके अपने अपने राम।
जग मे है कितने राम।

सबके प्रेम मे बसते राम।
सबके अपने अपने राम।
जग मे है कितने राम।
भारत के कण कण मे राम।
 *स्वरचित*
  *बृजकिशोरी त्रिपाठी*
[12/11, 1:57 pm] वीना अडवानी 👩: भक्ति गीत

झंकार वीणा से मधुर आती है
मां वीणा वादिनी वीना तेरी
आराधना कर स्तुति गाती है।।
कृपा दृष्टि अनुपम कृपा तेरी
कलम में रस बरसाती है।
मधुर ताल मिल शब्दों संग
वीणा सुर लिख सजाती है।।
तेरे आंचल की छाव में ही 
ज्ञान भरपूर वीणा पाती है।
हे वीणा वादिनि मां शारदे
वीणा नतमस्तक हो दर 
तेरे आज शीश झुकाती है।।
देना ज्ञान का अथाह सागर
यही कलम लिख ज्ञान
विरह वेदना भुलाती है।।२।।

वीना आडवानी तन्वी
नागपुर, महाराष्ट्र
********************
[12/11, 2:03 pm] विजेन्द्र मोहन बोकारो: मंच को नमन
विषय:-- *राम तुम्हारे युग के रावण*

हे राम तुम्हारे युग का रावण अच्छा था।
दस के दस चेहरे सब "बाहर रहता था"।
रावण होना भी कहां आसान।
रावण में अहंकार था पश्चाताप भी था।
रावण मे सीता के अपरहण की ताकत थी।
रावण में वासना थी संयम भी था।
वो बिना सहमति पराई स्त्री को स्पर्श न करने का संकल्प भी था।
सीता जीवित मिली ये राम की ताकत थी
पर पवित्र मिलि ये रावण की मर्यादा थी।

हे राम तुम्हारे युग का रावण अच्छा था।
दस के दस चेहरे सब बाहर रखता था।।

राम मर्यादा के रूप में युगो युगो तक प्रेरणा स्रोत है।
इनका चरित्र चिंतन आचरण व्यंग नहीं आज के लिए आइना है।।

विजयेन्द्र मोहन।
[12/11, 2:15 pm] Nirja 🌺🌺Takur: अग्निशिखा मंच
तिथि-१२-११-२०२१
विषय- हमारे राम 

दशरथ के राजदुलारे राम 
कौशल्या के प्यारे राम 
ठुमक ठुमक कर चलते राम
बाल लीला दिखाते राम
संग तीनो भाइयों के  
गुरु वशिष्ठ आश्रम जाते राम 
वेद ,धर्म, धनुष बाण की 
शिक्षा ग्रहण करते हैं राम
ऋषियों के यज्ञ बचाने को 
ताड़का सुबाहु मारे राम
ऋषि विश्वामित्र के संग 
जनकपुरी को पहुंचे राम
शिव धनुष तोड़ा,तीनों भाई संग
,उर्मिला,मांडवी श्रुति कीर्ति
सीता संग फेरे लिए थे राम 
सांवले सलोने सीता के मन भाये राम
कैकेई को कुटिल मंथरा का ग्रहण लगा
लक्ष्मण सीता संग , वन को भेजे राम
पूर्ण कुटी में शूर्पनखा का बदला लेने
आया था वो रावण,सीता हरण हुआ
तब स्वर्ण मृग लेने गये थे राम
उन्हे खोजते खोजते लक्ष्मण हनुमान संग, लंका पहुंच गये थे राम 
रावण का फिर वध किया 
सीता को वापस लाये राम
जिस दिन वह पहुंचे अयोध्या 
दीप जला कर सबने पूजे राम
जन जन के है़ प्यारे राम 
सबके दु:ख हर लेते राम 
ऐसे ही हैं हमारे राम

नीरजा ठाकुर नीर
पलावा डोंबिवली
महाराष्ट्र
[12/11, 2:16 pm] निहारिका 🍇झा: , नमन अग्निशिखा मंच
विषय;-भक्ति आराधना
दिनाँक;-12/11/2021
🌹जय श्री राम🌹
दशरथ नँदन जय श्री राम
कौसल्या के सुत हैं राम
बाल रुप मे लीला दिखा के
मन हर लेते बालक राम।।
चले वनों को शिक्षित होने
विश्वामित्र के शिष्य हैं राम।
शिला रुप मे पड़ी अहिल्या
तारणहार बने थे राम।।
तोड़ धनुष शिव जी का जिनने
जानकी वल्लभ जय श्री राम।।
पितृ वचन की आन निभाने
वन वन भटके सीता राम।
दैत्यों का सँहार करन को
साथ चले थे लक्ष्मण राम
सत्य धर्म स्थापित करने
वध करते रावण का राम
जीत लिया लंका को जिनने
लौट के आये राजा राम।
राम राज स्थापित करके
बन गए वो पुरुषोत्तम राम।
जन जन के वो पालन हारे
भक्त मनोहर सीता राम।
जय श्री राम जय श्रीराम
जय श्री राम ..........।।
निहारिका झा।🙏🙏🌹🌹
[12/11, 2:52 pm] 👑सुषमा शुक्ला: श्री राम,,,


कौशल्या का लाला, 
दशरथ का राजदुलारा,,,
 मेरा राम लला भक्तो का कष्ट मिटा।

भक्तों के कष्ट मिटाए, सबकी पीर भगाए,
मां सीता के प्रिय हम सबको ही ये भाए🙏🍁


शबरी के तारणहार,
भक्तों को करे दुलार,
रावण को मोक्ष दिया है,,
सब का उद्धार किया है।

दीन दयालु बड़ा कृपालु,
सबका जीवन दाता,,,,
 तेरी कृपा मिल जाए,,,
 जीवन का हर दुख जाता।

जय श्री राम जय जय श्री राम🙏🙏🙏🙏🙏🙏🌷🌷🌷🌷


स्वरचित रचना, प्रेषित करता, सुषमा शुक्ला🙏
[12/11, 3:05 pm] ओम 👅प्रकाश पाण्डेय -: आओ मेरे सीताराम ----- ओमप्रकाश पाण्डेय
तुम तो थे राजा श्री राम
फिर काहे घूमे जंगल जंगल
क्या ढूंढ रहे थे गाँव गाँव
तुम तो साक्षात ईश्वर ही थे
क्या कमी तुम्हें थी अवधपुरी में ...... 1
दशरथ के मेरे राजकुमार
कौशल्या नन्दन मेरे श्रीराम
जानकीवल्लभ सीताराम
जय रघुनंदन जय श्रीराम
प्रेम से बोलो सीताराम..........2 
विद्यानिधी होकर भी शिष्य बने
वशिष्ठ विश्वामित्र के थे परम शिष्य
अस्त्रों शस्त्रों व वेद शास्त्रों का
ज्ञान लिया आश्रम में उनसे 
हे विद्यानिधी तुमको प्रणाम........ 3
केवल तुमने ही इस जग में 
खोज खोज कर अपने भक्तों का
उद्धार किया अपने कृपा दृष्टि से
अहिल्या केवट सबरी या हो जटायु
इसलिए तुम कहलाते भक्तवत्सल....... 4
तुम थे राजकुमार अवधपुरी के
फिर भी जंगल जंगल गाँव गाँव में
खोज खोज कर भालू व बानर की
तुमने एक विशाल सेना बनायी
कर दिया राक्षसों को बंसविहीन धरा से ....... 5
आज फिर से तुम्हारे इस धरती पर
अत्याचार बढ़ गया है नर-राक्षसों का
गाँव गाँव में त्रस्त हैं कितनी सीता
भक्तों का करने उद्धार हे भक्तवत्सल
आओ मेरे सीताराम.......... 6
( यह मेरी मौलिक रचना है----- ओमप्रकाश पाण्डेय)
[12/11, 3:49 pm] शेभारानी✔️ तिवारी इंदौर: मां दुर्गा का भजन 

मैं आई हूं मैया द्वार तेरे, चरणन में अपना लेना,
 मैं दर्शन की हूं अभिलाषी ,दरश मुझे दिखला देना

 भक्ति के रंग में रंगे है सब फूलों से दरबार सजा बजने लगी मंगल ध्वनियां,चरणों में है शीश झुका, भक्तों की विनती सुन लो ,मेरी बिगड़ी बना देना ,
मैं दर्शन की हूं अभिलाषी दरश मुझे दिखला देना।

 जग की जननी हो, तुम ही तो खेल रचाती हो दुष्टों को संहारती,भक्तों को राह दिखाती हो,
 हम याचक हैं तुम दाता,खाली झोली मां भर देना मैं दर्शन की हूं अभिलाषी दरश मुझे दिखला देना।

 जोतावाली, शेरावाली, तुम से जग में उजाला है फूलों में खुशबू तुमसे ,तुमसे ही मुंह में निवाला है चमत्कार कुछ ऐसा करो,कोरोना को मां भगा देना मैं दर्शन की हूं अभिलाषी ,दरश मुझे दिखला देना 

 शोभा रानी तिवारी मध्य प्रदेश
[12/11, 3:52 pm] रानी अग्रवाल: ११_११_२०२१.शुक्रवार।
विधा_ भक्तिगीत ।शीर्षक_
"कृष्णा,तुम्हें ना भूल जाऊं मैं"
एक ही प्रार्थना है,
          तुम्हें ना भूल जाऊं मैं,
तेरी याद रहे सदा,
           तेरे ही गुण गाऊं मैं।
तुम जो नयनों में बस गए हो,
मेरे रोम_ रोम में रस गए हो,
अब ऐसा ना हो जाए,
    अपनी राह से भटक जाऊं मैं।
तुम्हें भुला निष्ठुर ना बन जाऊं मैं,
पल भर को भी दूर ना जाऊं मैं।
तेरे भरोसे छोड़ दी है जीवन नैया,
अब तुम्हें ही पार लगानी है भैया।
ना चाहूं हीरामोती न कोई दौलत,
नाम तेरा जपूं, दे दो ये मोहलत।
हंसती रहती,रहती हूं सदा प्रसन्न,
 तुम आन बसे हो मोहन मेरे मन।
अब कोई दुख,दुख नहीं देता,
चाहे जो हो सुख ही सुख देता।
देने और सिर्फ देने के भाव भर दो काम आऊं किसी के,ऐसा कर दो
बस,इन्हीं भावों को रखना कायम
बिना मांगे ही सबकुछ पाए हम,
तेरी ही स्मृति में रहें हम हरदम,
तेरी ही याद में निकल जाए दम।
देह छूटे तो भी ,पहुंचें तेरे द्वार,
जैसा यहां पाया,वहां भी ,
तेरा प्यार पाऊं मैं,
ए कृष्णा! तुझे ना भूल जाऊं मैं।
स्वरचित मौलिक भक्तिगीत_
रानी अग्रवाल,मुंबई,११.११.२१.
[12/11, 4:09 pm] 💃वंदना: श्री राम

राम को राम रहने दो
राम को राम रहने दो

न बांधों कोई बंधन में
न उलझाओ राजनीति में...

राम तो सबके है प्यारे
राम तो तारन हारा  है...

राम के नाम पे चालें
सियासी छोड़ दो चलना...

बीती सदियां कई तंबू में
दिन मेरे राम ने काटे...

अब मिला ठौर जाकर के
आए दिन है बड़े अच्छे...

सजी है अयोध्या दुल्हन सी
हो रहा है भूमि पूजन...

सजी है दीप मालाएं
दिवाली आज हो जैसे...

प्रफुल्लित मन हमारा है
प्रफुल्लित मन तुम्हारा है...

जय श्री राम जय कारा
चहूं दिश गूंजता नारा...

राम को राम रहने दो। 

वंदना शर्मा बिंदु
देवास
[12/11, 4:21 pm] हेमा जैन 👩: विषय -भक्ति गीत

राम नाम की मोहे
           प्रीत ऐसी लागी,
कि बलि बलि जाऊ
       प्रभु राम नाम रत लागी

सुध -बुध खोयी ऐसी 
  राम -नाम धुन ऐसी लागी
सुबह -शाम राम नाम जपु
     मेरे मन ऐसी ज्योत जगी 

अपने प्रभु के दर्शन की
          आस ऐसी जागी
हो गई मैं तो
          प्रभु राम तिहारी

कब दोगे दर्श मोहे प्रभु
              कब संगम होगा
संग तुम्हारे प्रभु
    यही गाउ मैं हर दम होगा

हेमा जैन (स्वरचित )
[12/11, 5:03 pm] 💃💃sunitaअग्रवाल: शीर्षक _*मेरे राम*


मेरे राम,राम, राम श्री राम
दशरथ नंदन श्री राम,राम राम,
लग जाए तो उई राम, राम राम
श्री राम, उठते राम, बैठते राम
कोई मिल जय तो राम राम ,
जन-जन के सपने, लगे श्रीराम अपने,।            
राम कथा का सुनकर वाचन,
जनमानस राम-राम लगा जपने,
राम भारत की हर रज कण-कण में,
राम बसते है जन जन के क्षण-क्षण में,
राम नाम की माला फेरत हो जाते पुण्य उदित,
राम हमारे हृदय में रचे-बसे है,
पंच तत्व की निर्मित काया,
मिले राम नाम की छाया,
राम का नाम उच्चारणसे मणिपुर चक्र होता प्रकाशित,
शिव ने भी राम नाम को जीभ के अग्र भाग में किया विराजित,

राम नाम भजने से सकारात्मक शक्तियां होती मुदित,
वनवासियों का किया उद्घार ,
मां अहिल्या के तारणहार,
ऊं नाम लेने मात्र से राम शब्द होता गुंजित,
धर्म को मानते हैं धर्म की नहीं मानते हैं, फिर भी राम धारी कहलाते ,
राम की करें निन्दा फिर भी राम करे चिंता,
अयोध्या में रहते तो राजा बनकर रह जाते,
वन- वन भटके तो मर्यादा पुरुषोत्तम कहलाये,
राम का बल और विवेक धर्म ध्वजा है,
शोध और धैर्य राष्ट्र ध्वजा ,
राम से भी बड़ा राम का नाम,

, तिर गया राम नाम लिखा पत्थर,
स्वयं राम ने फेंका तो डूब गया,
देख रहे थे हनुमन आराध्य को परेशान, बोलें हाथ जोड प्रभु से ,
जो छूटेगा वो डूबेगा, आपका साथ होगा वो तेरेगा,
राम नाम सच, अन्तिम सत्य , अग्नि ही परम सत्य ।
मेरे राम राम राम श्री राम, दशरथ नंदन श्री राम राम राम ।।


सुनीता अग्रवाल इंदौर मध्यप्रदेश स्वरचित🌹
धन्यवाद 🙏🙏
२१/०४/२०२१
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[12/11, 6:09 pm] सुरेन्द्र हरडे: अग्निशिखा मंच को नमन

आज की विधा भक्ती-गीत

विषय :- *हमारे राम*

हे प्रभु राम तेरे कितने नाम
तूम हो जीवन का आधार
पिता के आज्ञा किया पालन
राम लक्ष्मण जैसा बंधुभाव।।१।।

गुरु की आज्ञा का किया पालन
शिवधनुष्क तोड़कर राजा
जनक की पुत्री से हुआ विवाह
अयोध्या में हुआ जयजयकार।२।

लक्ष्मण ने अपने राम सेवा भाव
चौदह साल का हुआ वनवास
राम जानकी लक्ष्मण निकले 
वन भरत के हृदय में बसते।३।।

सुग्रीव बाली युद्ध में बाली को
मारकर मित्रता निभायी 
सीता की खोज करने के लिए
हनुमानजी को भेजा लंका ।।४।।

घमंडी रावण को मारा 
विभिषण को किया लंका राजा
हनुमानजी के हृदय में बसते राम
हे तुम ही मर्यादा पुरुषोत्तम राम।

आदर्श पुत्र आदर्श भाई प्रजा
का लाडला दुलारा राम राज्य
का निर्माण इस धरा पर सभी
गुणो की हो खान हे राम! हे राम।

सुरेंद्र हरडे
नागपुर
दिनांक १२/११/२०२१
[12/11, 6:18 pm] डा. बैजेन्द्र नारायण द्िवेदी शैलेश🌲🌲 - वाराणसी - साझा: एक गीत :प्रीति को पथ राम देना
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आस्था के शुभ चरण को नित नए आयाम देना ।
आपसे सादर विनय है प्रीति को पथ राम देना।।

समय की यह सिला तो नित अग्रगति है ले रही
 नर्मदा के मध्य निष्ठा तरल नौका खे रही।
 पांव यदि थकने लगें तो ,आप ही विश्राम देना ।।
प्रीति को पथ राम देना।।

सरस कंधों पर पवन के सुरभि की चादर समेटे।
ले हृदय में लालसा आकर तुम्हारी अंक भेटे ।
कुछ न कर पाना तो इसको रूप देना नाम देना ।।
प्रीति को पथ देना ।।

कई युग से विरद सुनकर चित्र पट पर जो बनाया ।
बिखरने से बचा लेना सहज काया मुक्त माया ।
सांत्वना के शब्द से ही भावना निष्काम देना ।।
प्रीति को पथ राम देना ।।

अब न आहत हो हमारा मन वचन अपना निभाना।
 मत इसे भटकाव देना व्यर्थ में करके बहाना ।
मांगता है कौन तुमसे सुखद ही परिणाम देना ।।
प्रीति को पथ राम देना ।।

यात्राएं हो रही हैं नित निरंतर नीर बनकर 
सामने गिरिशिखर आते रोकते पग पीर बनकर ।
पा सकूं संतोष निधि जिस दर मुझे वह धाम देना।।
 प्रीति को पथ राम देना।।
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डॉ ब्रजेन्द्र नारायण द्विवेदी शैलेश वाराणसी 9450186712
[12/11, 7:58 pm] स्नेह लता पाण्डेय - स्नेह: नमन पटल

भक्ति गीत

होती जय जय कार, आज श्री रघुवर जी की।
धर्म को मिली जीत, नमामि जय विजय कर की।

तव दर्शन का लाभ, जानते  हैं सब कोई।
मिला चरण रज नाथ, पाहन  अहिल्या होई।

मित्र धर्म का मान,  रखना आपसे सीखे।
शरण विभीषण दीन, सखा सम तुम्हें दीखे।

विजया दशमी पर्व, खुशी से सभी मनाते  ।
चंहुँ  दिशि हर्षोल्लास,  गीत मंगलमय गाते।

स्नेहलता पाण्डेय 'स्नेह'
[12/11, 7:58 pm] पूनम सिंह कवयित्र� � इशिता स� �डीला: भक्ति गीत
मन मन चला 
इसे सम्भालो प्रभु
मन मेरा नही मेरा 
इसे स्वीकारो प्रभु
तुमरे लिए ही घायल
मुझे सहारा दो प्रभु
मन बस तेरा मुझे थाम लो प्रभु
आयी तुम्हारे शरण
मुझे दया दृष्टि दो प्रभु 
हूँ बस तुमारी पुजारन 
ये मान लो प्रभु 
@इशिता सिंह

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