Type Here to Get Search Results !

अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच की नोक पर आज दिनांक 11 2021 को हृदय के पट खोल पर भक्ति गीत पड़े अलका पांडे मुंबई


ह्दय पट खोल ...
19/11/2021

ह्दय द्वार  के तुम  पट खोलों 
राधेश्याम सियाराम मन से बोलो ।।
कर ले आराधना जप ले कृष्ण मुरारी । 
किसी अपने  का दिल कभी न तोड़ो ।।

शिवशंकर है भोले नाथ 
राम है जानकी के नाथ ।
कान्हा राधे के साथ विराजे 
विष्णु लक्ष्मों साथ विराजे ।।
धरा गगन में दूजा न कोई 
तनिक प्रेम से पुकारे कोई ।
कष्टों को पल में हरते रहते 
सपनों में आकर हँसाते रहते ।।
गोकुल वृंदावन बरसाना 
लिख गई तेरी प्रेम कहानी 
गंगा , यमुना , सरस्वती 
नदीयों की कह रही कहानी 
ईश्वर की लीला का कोई न दे सका आज तक बयानी ।।
युगों युगों से चली आ रही ईंश्वर के भक्तों की ग़ज़ब कहानी ।।

कोई नहीं है , नामों में भेद,  सब एक हैं , नाम अलग हैं । 
कोई भी नाम पुकारो 
कृष्ण कहो या राम कहों 
इनमें भेद न कोई पाओं ।।
इष्ट देव तो सब है सब है एक रुप ।
धर्म कर्म में आस्था होगीं नेक सभी काज होंगे तभी ईंश्वर के दर्शन पाओगें ।।
प्रेम समर्पण भक्ति भाव से 
स्वर्ग लोक जाओगें ।।

ह्दय द्वार के तुम पट खोलो 
राधेश्याम , सियाराम मन से बोलों ।।

डॉ अलका पाण्डेय मुम्बई

🟠🟣🔵🔴🟢🟡⚫🟤🟡🟢🔴🔵🟣🟠


[19/11, 5:10 am] विजेन्द्र मोहन बोकारो: मंच को नमन
विधा:-- *भक्ति गीत*
शब्द:-- *ह्रदय पट खोल*

*आरती श्री विष्णु जी की*

 हे प्रभु हम सब के हृदय पट खोल।
तेरे द्वार पर खड़े, ओम् जय जगदीश हरे।।
स्वामी जय जगदीश हरे।
भक्त जनों के संकट दूर करें।।
जो ध्यावे फल पावे,
 दुख बिनसे मन का।
सुख संपति घर आवे, 
कष्ट मिटे तन का।।
माता पिता तुम मेरे शरण गहूं किसकी।
तुम बिन और न दूजा आस करूं जिसकी।।
तुम पूरण परमात्मा, तुम अंतर्यामी।
पार ब्रह्म परमेश्वर,तुम सबके स्वामी।।
तुम करुणा के सागर, तुम पालनकर्ता।
मैं मूर्ख खल खामी, कृपा करो भर्ता।
तुम हो एक अ गोचर सबके प्राणपति
किस विधि मिलूं दयामय तुमको मैं कुमति।।
दीन बंधु दुखहर्ता, ठाकुर तुम मेरे।
अपने हाथ उठाओ, खोल दो ह्रदय पट को।।
विषय विकार मिटाओ पाप हरो देवा।
श्रद्धा भक्ति बढ़ाओ संतन की सेवा।।
तन मन धन सब है तेरा स्वामी सब कुछ है तेरा।
तेरा तुझको अर्पण क्या लागे मेरा।
श्याम सुंदर जी की आरती जो कोई नर गावे।
कहत शिवानंद स्वामी सुख संपति पावे।।

विजयेन्द्र मोहन।
[19/11, 5:56 am] विजय 👅कांत द्विवेदी /खारघर: विजय कान्त के दोहे
*****************
(
*****************
दोपहरी का रवि निकर
हुआ शाम अवसान।
 गहन प्रभाव प्रचंडता
हो गयी अन्तर्ध्यान ।।

 रहा सुमन के संग जो
 सौरभ देता छोड़।
सूखने लगता पुष्प जब
बैठ वृन्त के क्रोड ।।

काया जब जर्जर हुई
मिटती जीवन चाह ।
जले ज्योति अंतर धिमिर
मनवा बेपरवाह ।।


जगत सरोवर मन सुमन
पाकर निज अनुकूल ।
खिल जाता है हर्ष से
सुख जाता प्रतिकूल।। ‌


-------विजयकान्त द्विवेदी

(१९/११/२०२१ प्रात:४:५५)

*सर्वाधिकार सुरक्षित*
*मौलिक रचना*
[19/11, 7:01 am] Anita 👅झा: मंच को नमन 💐🙏
दिनांक-१९-११-२०२१
विषय -हिर्दय पट खोल 
हिर्दय पट खोल तोहे पिया मिलेंग़े 
गिरधारी रे बलहारी रे 
जीने का सहारा तेरा नाम रे 
दुनिया में तेरा ही इक नाम रे 
घट घट की प्यासी मीरा दिवानी रे 
मोहनी सुरत कृष्ण मुरारी रे 
हिर्दय पट खोल तोहे पिया मिलेंगे
दर दर घूमें मीरा दिवानी रे 
कदम की छाया आस लगाये रे 
बंशीवट बैठी मीरा दिवानी रे 
कृष्णा मोहन प्राण बसे थे 
मीरा धुन बंशी बजी थी 
मीरा ने पिया विष का प्याला 
दर्शन को प्यासी मीरा प्यारी 
हिर्दय पट खोल तोहे पिया मिलेंगे
आयें प्यारे मोहन कृष्ण मुरारी रे 
देखत जगत निहाल हुआ रे 
पिताम्बर धारी कृष्ण मुरारी रे 
अनिता शरद झा रायपुर
[19/11, 11:03 am] वीना अचतानी 🧑🏿‍🦽: वीना अचतानी 
अग्नि शिखा मंच को नमन 
विषय ***भजन***
****ह्रदय पट खोल *****
पूजनिय प्रभो हमारे 
ह्रदय पट खोल दिजिये
छोड़ देवें छल कपट को
मानसिक बल दिजिये
हर्ष में हो मग्न सारे
शोक सागर से तरें
वेद की बोलें वाणी
सत्य को धारण करें 
हे पूजनिय प्रभो हमारे 
ह्रदय पट खोल दिजिये 
धर्म मर्यादा चलाकर
लाभ दें संसार को
भावना मिट जाए मन से
पाप-अत्याचार की
रोग पिड़ित विश्व के
संताप सब हरें 
वायु-जल सर्वत्र हों शुभ
सुगन्ध को धारण करें 
स्वार्थ मिट जाए हमारा
प्रेम पथ विस्तार रहे 
नाथ करूणा रूप करूणा
आपकी सब पर बनी रह
हे परमपूज्य प्रभो
ह्रदय पट खोल दिजिये 
स्वरचित मौलिक, 
वीना अचतानी 
जोधपुर । ।
[19/11, 11:05 am] रामेश्वर गुप्ता के के: हृदय के पट खोल-कविता
हृदय के पट खोल,
इसमें श्री राम बसेगे।
राम की महिमा बोल,
तुझे श्री राम मिलेगे।।
हृदय................... 1 
जीवन है माया नगरी,
ब्यापी है घर में सगरी। 
राम नाम रट को बोल, 
तुझे प्रभु दर्शन होगे।। 
हृदय.................. 2 
राम बसे है रोम रोम में, 
वह ही बसे सारे जग में। 
मन में राम रस को घोल, 
तुझे राम के दर्शन होगे।। 
हृदय..................... 3
राम नाम महिमा जानो, 
निज हिय में राम बसालो। 
मन की आंखे तू खोल, 
तुझे हरी रामजी मिलेगे।।
हृदय.................... 4
स्वरचित, 
रामेश्वर प्रसाद गुप्ता।
[19/11, 11:10 am] वीना अडवानी 👩: भक्ति गीत
*********

भज ले हरी का नाम बंदे।।2।।
भज ले हरी का नाम बंदे।।2।।

पुण्य कमा , कुछ धर्म ही कर ले
मानव , पशु , पंछी की सेवा कर
जीवन तेरा सार्थक कर ले।।

भज ले हरी का नाम बंदे।।2।।

समय का मोल तुम अब जानो
भक्ति रस को भी पहचानो
पुण्य कर्म संग शक्ति मिलेगी
मिली जीवन को सार्थक कर मानो।।

भज ले हरी का नाम बंदे।।2।।

वीना आडवानी तन्वी
नागपुर , महाराष्ट्र
********************
[19/11, 12:04 pm] 😇ब्रीज किशोर: *अग्नि शिखा मंच को*
        .*नमन है*
*माँ शारदे को नमन है.विद्वत* *जनो को प्रणाम साथी बहनो*
        *को राधे राधे*
   *भक्ति से भरी कविता*
क्यों निर्थक डोलता हृदय के पट खोल दें।
देख ले नयन भर श्याम को मानव जीवन सफल कर ले।

जसुदा के लाला बन्शी वाला
प्रीत कर ले माखन चोर से।
काली कमली वाला जब बस जायेगा गिरेगा आँसु नयन के कोर से।

क्यौ दुनिया के मोह मे मन को बसा कर उम्र बरबाद करता है।
कई जनम के बाद मानव शरीर मिला है क्यौ न भलाई
का काम करता है।

कर भलाई होगा भला मन मे
उठेगा लगन सेवा भाव का।
मन को लगा लो हरि के चरण
मे भूल जायेगा चीन्ता अपने आप का।

क्यौ बौराया फिरता भूल कर
अपने आप को 
तू भी है अंस है मत भूल उ स 
 परमात्मा को।



क्यौ नीर्थक डोलता हृदय केपट खोल तोहे श्याम.मिलेगा।
बृजकिशोरी त्रिपाठी
 गोरखपुर यू.पी।
[19/11, 12:05 pm] स्नेह लता पाण्डेय - स्नेह: नमन पटल
आज का विषय- भक्ति रस 

नगर को खूब सजा दो आने वाले हैं श्रीराम
राहों में फूल बिछा दो आने वाले हैं श्री राम।

वो भी क्या दिन था जब जन्में थे श्री राम ,
नाच रही थी पूरी अयोध्या भूल सारे काम।
आज झूम के सब नाचो आने वाले हैं श्री राम।

वो भी क्या दिन था जब बने दूल्हा श्री राम।
धनुष को पल में तोड़ दिया हुआ जग में नाम।
गर्व से फूल गई छाती आने वाले हैं श्री राम।

वो भी क्या दिन थे वन को गमन किये श्री राम।
अयोध्या नगरी रोई कैकेयी ने किया बुरा काम।

वो भी क्या दिन था जब रावण स लड़े श्रीराम।
रावण को मुक्ति दे डाली पंहुँच गया वो श्री धाम।

स्नेहलता पाण्डेय 'स्नेह'
[19/11, 12:11 pm] रवि शंकर कोलते क: शुक्रवार दि*** १९/११/२१
विधा*****भक्ति गीत
विषय***
     #***वन में चले रघुनाथ***#
                  ^^^^^^^^^^

बनमे चले रघुनाथ सियावर ।।
            सीता लछमन साथ ।।
                           बनमे*** ।।धृ

रघुकुल रीत प्रभु ने चलाई ।।
पितृवचन की लाज बचाई ।।
         कैकई ने किया घात ।।१

राज महलों की रानी सीता ।
वनवास को चली है माता ।।
             देने पति का साथ ।।२

डगमगाए कदम पिता के ।
धीरज छूटे सब जनता के ।।
        अखिनन में बरसात ।।३

अयोध्या के ये राज दुलारे ।
चौदा वर्ष वनवास सिधा रे ।।
          कैसी विधि की मात ।।४

प्रा. रविशंकर कोलते,
      नागपुर ३०
[19/11, 1:04 pm] रागनि मित्तल: जय मां शारदे
********
 अग्निशिखा मंच
 दिन- शुक्रवार
 दिनांक -19/11/2021 भक्ति गीत 
प्रदत्त विषय- *हृदय पट खोल* 

ह्रदय पट खोल दिए मैंने ,
जिसमें हर पल है सियाराम ।
युगल छवि देख कर तेरी।
आंखें सजल होती मेरी। 
जपूं तुम्हे आठो याम। 
जिसमें हर पल हैं सियाराम ।

शबरी ने राह निहारे थी। 
वह तुम पर बलिहारी थी।
देख आई चेहरे पर मुस्कान ।
जिसमें हर पल है सियाराम । 

श्रापित अहिल्या बन गई पत्थर ।
आ जाओ अब छू लो रघुवर।
लगा रही हूं तेरा ध्यान। जिसमें हर पल है सियाराम।

अधम ,पतित, पापी सभी लोग 
कष्ट निवारो, दूर करो रोग ।
सबका दूर करो अज्ञान। 
जिसमें है हर पल सियाराम।

ह्रदय पट खोल दिए मैंने ,
जिसमें हर पल है सियाराम

रागिनी मित्तल
कटनी,मध्यप्रदेश
[19/11, 1:04 pm] वीना अचतानी 🧑🏿‍🦽: वीना अचतानी 
अग्नि शिखा मंच को नमन 
विषय ***भजन***
****ह्रदय पट खोल *****
पूजनिय प्रभो हमारे 
ह्रदय पट खोल दिजिये
छोड़ देवें छल कपट को
मानसिक बल दिजिये
हर्ष में हो मग्न सारे
शोक सागर से तरें
वेद की बोलें वाणी
सत्य को धारण करें 
हे पूजनिय प्रभो हमारे 
ह्रदय पट खोल दिजिये 
धर्म मर्यादा चलाकर
लाभ दें संसार को
भावना मिट जाए मन से
पाप-अत्याचार की
रोग पिड़ित विश्व के
संताप सब हरें 
वायु-जल सर्वत्र हों शुभ
सुगन्ध को धारण करें 
स्वार्थ मिट जाए हमारा
प्रेम पथ विस्तार रहे 
नाथ करूणा रूप करूणा
आपकी सब पर बनी रह
हे परमपूज्य प्रभो
ह्रदय पट खोल दिजिये 
स्वरचित मौलिक, 
वीना अचतानी 
जोधपुर । ।
[19/11, 1:05 pm] कुंवर वीर सिंह मार्तंड कोलकाता: 🌺शुक्रवार -19//11/2021
🌺विषय भक्ति गीत

तुलसी जी की आरती
*******************
ॐ जय तुलसी माता। 
ॐ जय तुलसी माता।
सब रोगों की रक्षक
सबकी सुख दाता।

अग–जग की तू माता,  
सबकी वर दाता।
सब योगों से बढ़कर, 
तू है भव त्राता। 
ॐ जय तुलसी माता।

बटु पुत्री हे श्यामा
सुर बल्ली ग्राम्या।
विष्णु प्रिये हे देवी
जन जन सुख पाता।
ॐ जय तुलसी माता।

हरि के शीश विराजत
वंदित त्रिभुवन से।
पतित जनों की तारक
विनय करें तुमसे।
ॐ जय तुलसी माता।

लेकर जन्म विजन में
दिव्य भवन आई।
नर नारी ने तुमसे
सुख संपति पाई।
ॐ जय तुलसी माता।
 
© कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड, कोलकाता
[19/11, 1:32 pm] Nirja 🌺🌺Takur: अग्निशिखा मंच 
तिथि १९-११-२०२१
विषय- भक्ति गीत  

दशरथ के राजदुलारे राम 
कौशल्या के प्यारे राम 
ठुमक ठुमक कर चलते राम
बाल लीला दिखाते राम
संग तीनो भाइयों के  
गुरु वशिष्ठ आश्रम जाते राम 
वेद ,धर्म, धनुष बाण की 
शिक्षा ग्रहण करते हैं राम
ऋषियों के यज्ञ बचाने को 
ताड़का सुबाहु मारे राम
ऋषि विश्वामित्र के संग 
जनकपुरी को पहुंचे राम
शिव धनुष तोड़ा,तीनों भाई संग
,उर्मिला,मांडवी श्रुति कीर्ति
सीता संग फेरे लिए थे राम 
सांवले सलोने सीता के मन भाये राम
कैकेई को कुटिल मंथरा का ग्रहण लगा
लक्ष्मण सीता संग , वन को भेजे राम
पूर्ण कुटी में शूर्पनखा का बदला लेने
आया था वो रावण,सीता हरण हुआ
तब स्वर्ण मृग लेने गये थे राम
उन्हे खोजते खोजते लक्ष्मण हनुमान संग, लंका पहुंच गये थे राम 
रावण का फिर वध किया 
सीता को वापस लाये राम
जिस दिन वह पहुंचे अयोध्या 
दीप जला कर सबने पूजे राम
जन जन के है़ प्यारे राम 
सबके दु:ख हर लेते राम 
ऐसे ही हैं हमारे राम

नीरजा ठाकुर नीर
पलावा डोंबिवली
महाराष्ट्र
[19/11, 2:00 pm] Anshu Tiwari Patna: भक्ति गीत
------------
 हे प्रभु ,सुनो मेरी अरज
 तेरी भक्ति का अमृत पीते रहूं मैं 
 तेरे साथ ही हो मेरा सिर्फ नाता
 इस दुनियावी मोह माया से
 मैं निकल कर चलूँ, 
 तेरी भक्ति में हमेशा डूबी रहूं।
 ना सरोकार मुझे ना हो कोई नाता
 हे प्रभु ,तेरी सिवाय
 जग में दूजा ना कोय,
 इस जग में तू ही है, बस तू ही है
 मेरा पालनहार, मेरा तारणहार।
  तेरे संग की ,तेरी भक्ति की
 बस चाहत मुझे,
   ना जानू में कोई रिश्ते नाते,
 ना कोई माई बाप ना भाई बहन
 ना पति ना बच्चे ,
यह तो सिर्फ छलावे हैं भुलावे हैं
 यह रिश्ते तो सिर्फ इस जन्म का है
 पर हे प्रभु ,तेरे संग तो रिश्ता मेरा
 जनमो जनम का है
 शरण में ले ले मुझे तू अपनी
 हे प्रभु ,मान मेरी अरज 
कर मुझ पर कृपा।
 धन्यवाद 
अंशु तिवारी पटना
[19/11, 2:11 pm] रजनी अग्रवाल जोधपुर: शीर्षक-भक्ति गीत

1.सखी मोहे प्रभु मिलन की चाह,
बता दे मोहे अब तो कोई राह,

2.बिना दरस के मैं यूं तड़पू जल बिन मछली दाह ,
सखी मोहे,,,,,,,

3. मेरे रहबर मेरे मालिक,
 अब तो प्रभु की छांह,
बता दे सखी,,,,,

4. प्रभु बिन जग सूना लागे,
मिट गई सारी चाह,
बता दे सखी,,,,,,

स्वरचित भक्ति गीत रजनी अग्रवाल
  जोधपुर
[19/11, 2:38 pm] सुरेन्द्र हरडे: अग्निशिखा मंच को नमन

विधा भक्ती-गीत 
     
हे साई नाथ हृदय पटल खोलो
तेरे दरबार में आया हूं
तू ही है सब का दाता
हे साई तू सब का प्यारा।।१।।

तेरे दरबार जो आता वह
वह खाली हाथ नहीं लौटता
तेरे सामने अमीर गरीब भक्त 
है समान तू ही दुखहर्ता।।२।।

भक्तो को चमत्कार दिखाये
ना तेरा कोई ठिकाना 
फिर भी तु है शिरडी में साई
भक्तो का दाता हैं साई।।३।।

श्रद्धा ,सबुरी से सब सुखी
तन मन धन है तेरा बाबा
दुखी भक्त तेरे पास आते
श्रद्धा से नतमस्तक होते।।४।।

साई तेरे है हजारों हाथ
शिरडी में भक्त तेरे पास आते
हंसते हंसते सुखमय हो जाता
हे साई राम बोलो! बोलो साई।५।

सुरेंद्र हरडे
नागपुर
दिनांक १९/११/२०२१
[19/11, 3:02 pm] अंजली👏 तिवारी - जगदलपुर: भजन
आया कार्तिक महिना  
पवित्र महिना‌ है ये पयारी
जोड़ें इसे आस्था‌ से हर नर नारी
नाहने जाये नदी तालाब
जोत जलाये मन से भगवान की
कार्तिक भगवान मोर पर करें सवारी
रोज भ्रमण करें जगत की सारी
भजन कीर्तन कर मनाये उन्हें सब प्राणी
हे कार्तिकेय अब हमें दो जीवन सुखदाई
हर कष्ट मिटाओ हमारी सारी
विष्णु नारायण कृष्ण शिव की कथा‌ सुने हम सब‌ प्राणी
कार्तिक महिना कमा लो पुण्य सारी
गलती हो गई हो तो क्षमा करो हर
गौरी नंदन हमारी
भक्ति गीत
अंजली तिवारी मिश्रा जगदलपुर छत्तीसगढ़।
[19/11, 3:05 pm] Anita 👅झा: *प्रकाश पर्व पर हाईकु*
एक ओंकार
नानक आपको है 
कोटि नमन 

प्रकाश पर्व 
दिव्य ज्योत जलायें
विस्वास जागे 

भक्ति साधना 
सत्संग मार्ग यही 
अरदास है 

मन निर्मल 
वाणी की मधुरता 
से गुणगान 

आध्यम योग 
साहित्यिक मित्र है 
 ज्ञान मार्ग है 

मिल आध्यम 
चमत्कृत करता 
योग साधना 

ज्ञान प्रकाश 
कर्मेसू कौशलम
रोग निदान

जग कल्याण
साधना कर्म केन्द्र 
तपो भूमि है 

स्वास्थ साधना 
आध्यात्म योग ज्ञान 
हरिद्वार है

बुद्धि चेतना
रोग निदान करत 
मुक्ति मार्ग है 

मानस जन
प्रकाश पर्व पर 
अरदास है 

अनिता शरद झा मुंबई
[19/11, 3:35 pm] निहारिका 🍇झा: नमन अग्निशिखा मंच 
विषय;-आराधना (प्रकाश पर्व)
दिनाँक;-19/11/2021
गुरु नानक देव""🙏🙏🌹🌹
दिखलाई सत्य मार्ग की 
राह सभी को।
पर सेवा और पर पीड़ा में 
जीवन है बिताया।।
उनकी ही वाणी आज 
'गुरु बानी' बन गयी।
जन जन में जिनने ज्ञान की 
अलख जगाई थी।
उनके प्रकाश से ही 
प्रकाशित है ये चमन।
उन दिव्य आत्मा का है
आज जन्म दिन।
जिसको मनाते हैं सभी 
उत्सव प्रकाश का।।
उनको है नमन आज 
बार बार है नमन !!
आप सभी को प्रकाश पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं🙏🙏🌹🌹निहारिका झा।।
[19/11, 3:36 pm] ओम 👅प्रकाश पाण्डेय -: भक्ति गीत - हृदयपट खोल ----ओमप्रकाश पाण्डेय
राम नाम भज ले मन
भक्तिभाव से जीवन में
राम भला करेगें तेरा
और कोई नहीं है जग में
हृदय में तेरे सियाराम है
हृदयपट खोल कर ले दर्शन........ 1
न तो मन्दिर में बैठा वह
न तो पूजा में भी वह है
मन्दिर दर्शन पूजा पाठ
भी मन करता तो कर ले
पर दर्शन करना हो तो
हृदयपट खोल कर ले दर्शन........... 2
मन चंगा तो कठौती में गंगा
संत रविदास जी कहते थे
सूरदास को बिन आंखों के भी
कृष्ण कन्हैया दिखते थे
फिर मन चिंता क्यों करता तूं
हृदयपट खोल कर ले दर्शन ........... 3
चित्रकूट के घाट पर
चंदन लगवाया प्रभु ने
भक्त तुलसी के हाथों से
फिर धन्य हो गया कणकण
अपने प्रभु का करके दर्शन
हृदयपट खोल कर ले दर्शन..... ..... 4
( यह मेरी मौलिक रचना है ---- ओमप्रकाश पाण्डेय)
[19/11, 3:41 pm] ♦️तारा प्रजापति - जोधपुर: अग्निशिखा मंच
19/11/2021 शुक्रवार
विषय-भक्तिगीत

क्या होगा उस पार

जो हुआ अच्छा हुआ,
जो हो रहा है,अच्छा ही है,
और जो होगा,अच्छा ही होगा,
सब कुछ अच्छा है इस पार।
फिर क्यों सोचे,रे साथी,
क्या होगा उस पार?

प्रारब्ध का सब खेल है खेले,
सबने अपने सुख-दुःख झेले,
दुनियां में नित लगे हैं मेले,
निराकार ईश्वर ने उठाया,
सबका जीवन भार।
फिर क्यों सोचे रे साथी,
क्या होगा उस पार?

औरों के जो आये काम,
यहीं पर मक्का,यहीं पर धाम
 सबके भीतर रहता राम,
मनुष्य जीवन का,
बस यही है सार।
फिर क्यों सोचे रे साथी,
क्या होगा उस पार?

कभी किसी को न धोखा देना,
कभी किसी की न बददुआ लेना,
बीते सच में ये दिन ये रैना।
राम -भरोसे चल रहा,
ये सारा संसार ।
फिर क्यों सोचे रे साथी,
क्या होगा उस पार?
              तारा "प्रीत"
           जोधपुर (राज०)
[19/11, 3:59 pm] रानी अग्रवाल: १९_११_२०२१,शुक्रवार।
विषय_ हृदय पट खोल।
विधा भक्तिगीत।
शीर्षक_
बावरे, हृदय पट खोल रे,
अंतर में कान्हा रह्या डोल रे।१।
चर्म चक्षु बंद कर देखो,
कान्हा रह्यो,ज्ञान चक्षु खोल रे।२।
पल भर ध्यान लगाऔ,
अंदर कान्हा,रह्यो डोल रे।३।
मेरे कानन में बज रहे,
कृष्ण नाम के ढोल रे।४।
मेरे श्वासोच्छवास में,
कान्हा नाम की गंध घोल रे।५।
तेरौ ही नाम जपै दिन राते,
मेरी जुबां बोले तेरे बोल रे।६।
हृदय कुंज निवास कान्हा कौ,
बस्यौ कान्हा प्रेम अनमोल रे।७।
कर में कान्हा नाम की माला,
कृष्णा में रह्यौ मन डोल रे।८।
कटि पे ओढ काली कंबरिया,
कान्हा कौ ना कोई मोल रे।९।
मेरौ सर तेरे चरणों पै,
सब है गयौ गोल रे।१०।
नयन बंद कर दीठौ,
खुले नैनों से ना तोल रे।११।
मेरा ना मुझमें कुछ रहा,
सबहीं दीन्हों तोमे घोल रे।१२।
कान्हा ऐसी बंधी अटूट बंधन में,
कबहुं ना दीयौं खोल रे।१३।
कान्हा_कान्हा बोल रे मन,
हरदम कृष्णा_कृष्णा बोऋ रे।१४।
स्वरचित मौलिक भक्तिगीत___
रानी अग्रवाल,मुंबई,१९_११_२१.
[19/11, 4:20 pm] 👑पदमाकाक्षी शुक्ला: 🙏🌹 *नमन मंच* 🌹🙏
🙏🌹 *जय अम्बे* 🌹 *१९/११/२१* 🌹🙏
🙏🌹 *भक्ति गीत* 🌹 *ह्रदय पट खोलो* 🌹🙏


हो जाए जो दर्शन तेरा ।
 *ह्रदय का पट खोलो* ।
कहनी है दिलकी बात मुझे ।
 आकर कुछ तो बोलो।। 

माया के बंधन में रहते ।
जन्मांतर से भटके ।। 
पट्टी मोह की लगी नयना। 
दर्शन से हम अटके।। 

*दिलके द्वार अब तो खोल दो*। 
तडपाओ ना कान्हा ।।
रास दरश के प्यासे नैना। 
राधाजी को लाना।। 

कार्तिक पूनम चांद प्यारा। 
शीतलता है छाई।। 
आजा कान्हा, आजा कान्हा। 
कितनी देर लगाई।। 

🙏🌹 पद्माक्षि शुक्ल 🌹🙏
[19/11, 4:41 pm] आशा 🌺नायडू बोरीबली: (भक्ति गीत)
    🌹 गणेश स्तुति 🌹 
  🙏🙏🙏🙏🙏🙏

ओम नमो गण गणपते नमः ओम नमो गणपताय नमः
ओम नमो प्रथम पूज्याय गणपति नमः
ओम नमो भालचंद्राय गणपति नमः
ओम नमो लंबोदराय गणपति नमः ओम नमो एकदंताय गणपति नमः ओम नमो भगवताय गणपति नमः ओम नमो सुपकर्णाय‌ गणपति नमः
ओम नमो गणेशाय गणपति नमः ओम नमो विनायकाय गणपति नमः ओम नमो विघ्नेश्वराय गणपति नमः ओम नमो शिवावयाय गणपति नमः ओम नमो पार्वतीनंदाय गणपति नमः ओम नमो शिवप्रियाय गणपति नमः ओम नमो पराक्रमाय गणपति नमः 
ओम नमो ‌श्री गणपति नमः।
*******************
डॉ . आशालता नायडू.
भिलाई . छत्तीसगढ़ .
19/11/2021.
*******************
[19/11, 4:45 pm] +91 70708 00416: शिवजी हैं भोले -भाले
*******************
शिवजी हैं भोले-भाले 
फणि का हार पहनने वाले
जटा को रखने वाले
शिव शंभु हैं जग के रखवाले
सृजन का आधार 
संस्कृति का आभार
हे त्रिपुरारी! बोलो शिवशंकर की
संसार का पाप ताप मिटाओ
भवसागर से पार उतारो
आकर तुम उद्धार करो
तुम ही कैलाशपति
तुम ही जगत के स्वामी
पशुपति भी तुम ही हो
तुम जय गंगाधर हो
जय डमरूधर हो
तुम ही संकट हर्ता
तुम ही मंगल कर्ता
अजय अमर अविनाशी
तुम ही काशी विश्वनाथ हो
तुम ही शिव, तुम ही शंकर
मृत्युंजय भी तुम ही हो
तुम ही गणों के स्वामी
त्रिनेत्र खोल दो अपना
संसार से पाप मिटा जाओ
हाथ जोड़ मैं करूं
भोले शंकर को प्रणाम
सेवक बनकर रहूं सदा
मिले मोक्ष परमधाम
नित शंकर की पूजा करें
माता गौरी के साथ
विद्या, बुद्धि, बल मिले
जो करें महाशिवरात्रि व्रत
वो पाये सुखधाम

डॉ मीना कुमारी परिहार
[19/11, 6:28 pm] ♦️तारा प्रजापति - जोधपुर: अग्निशिखा मंच
19/11/2021 शुक्रवार
विषय-भक्तिगीत ह्रदय के पट खोल

हरिओम हरिओम बोल
तोहे प्रभु मिलेंगे
ह्रदय के पट खोल
तोहे प्रभु मिलेंगे
मिला है बड़े भाग से
मानुष जन्म अनमोल
हरिओम हरिओम बोल
तोहे प्रभु मिलेंगे
ह्रदय के पट खोल
तोहे प्रभु मिलेंगे
विषय विकार को
तज कर प्राणी
आत्म रस को घोल
तोहे प्रभु मिलेंगे
ह्रदय के पट खोल
तोहे प्रभु मिलेंगे
गुरु वचनों को
जीवन में लगाकर
कर जीवन का मोल
तोहे प्रभु मिलेंगे
ह्रदय के पट खोल
तोहे प्रभु मिलेंगे
बाहर नहीं तुम्हें
 मिलेंगे भगवन
भीतर मन में टटोल
तोहे प्रभु मिलेंगे
ह्रदय के पट खोल
तोहे प्रभु मिलेंगे।

                 तारा "प्रीत"
              जोधपुर (राज०)
[19/11, 6:46 pm] वैष्णवी Khatri वेदिका: प्रभु अबूझ पहेली    

प्रभु अबूझ पहेली, 
पोथी से विज्ञ न होते।
छोड़ सारे बन्धन,
इसमें ही तन्मय होते।।

छोड़ लोभ माया,
हो जा ईश्वर में लीन।
यदि पाना है मोक्ष,
हो आराधना में लीन।।

ज्ञान है लौकिक,
हर कोई जान है पाया। 
भगवान अलौकिक,
उन्हें कौन समझ पाया? 

भूखे को भोजन, 
आनन्दित हो जाएगा।
तृप्ति की गहराई, 
साक्षात् प्रभु को पाएगा।।

फूटे बीज से अंकुर, 
भगवन का दर्शन होता।
प्रणाम की मुद्रा में,
प्रभु का अस्तित्व होता।। 

पेड़ों की छाँव तले,
तपती धूप उखड़ी साँसें।
जल की आतुरता,
ईश्वर का उपहार साँसें।।

वैष्णोखत्रीवेदिका
[19/11, 6:51 pm] निहारिका 🍇झा: नमन अग्निशिखा मंच 
विषय ;-भक्ति गीत 
प्रदत्त पँक्ति;-ह्रदय के पट खोल
दिनाँक;-19/11/2021
देंगे तुझको दर्शन कान्हा 
ह्रदय के पट खोल।
प्यारे ह्रदय के पट खोल।।
आस ज्योत को मन मे जला ले
भज ले उनका नाम
इक़ पल में ही बन जाएंगे
बिगड़े तेरे काम।
ह्रदय के पट खोल
प्यारे ह्रदय के पट खोल।।1।।
बिन मांगे वो देने वाले
ना मुंह से कुछ बोल
खाली झोली तेरी भरेंगे
भज ले उनका नाम 
प्यारे ह्रदय के पट खोल।।
ह्रदय के पट......।।।2।।
निहारिका झा
जय श्री राधे कृष्णा।।
🙏🙏🌹🌹


Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.