Type Here to Get Search Results !

अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच के ब्लॉक पर आज दिनांक 1 11 2021 को बाल गीत पढ़ें दीपावली पर अलका पांडे


1/10/2021
विषय - दीपावली

शीर्षक- रोशनी का त्योहार 

आई आई देखो दिवाली आई लेकर रोशनी का जगमग उजाला लाई


आया रोशनी का त्यौहार 
लाया उजालों का उपहार ।।

रोशन हुआ सारा  शहर ।
घर आँगन गली गली नगर ।।

दीपमालाओ ने तम भगाया
रोशनी का परचम लहराया ।।

कोरोना की कोई बिसात नही 
रोशनी ने उसको मात दे डाली ।।

घर आंगन गली गली सज रही 
नई नवेली दुल्हन सी जगमगा रही 

दुकाने बाज़ार सजे रौनक़ भरपूर 
भूल गये कोरोना आनंद में भरपूर 

रोशनी के इस त्यौहार ने 
मारा तिमिर और जग रोशन किया ।।

ग़रीबों की झोपड़ी भी आज जगमगाई । 
अमीरों के महल भी 
झिलमिलायें ।। 

आया रोशनी का त्यौहार 
लाया उजालो का उपहार ।।

डॉ अलका पाण्डेय मुम्बई 
मौलिक

🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴






[01/11, 10:12 am] विष्णु शर्मा हरिहर 🧑🏿‍🦽: माटी के दीप जलाएं!


नहीं खरीदे बिल्कुल मित्रों ,इन चीनी सामानों को।

देश विरोधी पाक परस्ती, बल मिलता शैतानों को।।

दीप पर्व पर अपने घर पर, माटी के दीप जलाएं।

एक सरीखे दीपक जगमग, आपस में प्रेम बढ़ाएं।।

धरती मांँ भी याद रहेगी, याद रहेंगे भाई भी।

समरसता के भाव बहेंगे, दृश्य बहुत सुखदाई जी।

स्नेह पूर्ण बाती के द्वारा, दीप जलेंगे माटी के।

दिल से दिल के तार जुड़ेंगे, रीत प्रीत परिपाटी के।

कुंभकार के चाक चलेंगे, होगी नूतन रचनाएं।


हरी भरी फिर धरती होगी , नंदन कानन सरसाएं।

हरिहर उर की भावना, सबके मन की बात।

उजियारा हर तरफ हो ,छटे अंधेरी रात।।



विष्णु शर्मा'हरिहर'
[01/11, 11:40 am] वीना अडवानी 👩: आया दीपों का त्योहार
*********************

दीप जले जगमग-जगमग हर ओर
रौशन हुआ फिर संसार।।
देखो कैसे सज रहा है फिर
फटाकों, दीपों, मिठाईयों संग बाजार।।

रंग-रोगन, साफ-सफाई हर घर में
सजा फूलों से भी हर घर-बार।।
खुशियां बिखर रही चहू ओर देखो
सजा मंदिर, गुरुद्वारे संग भी हर दरबार।।

इतनी सुन्दर अनुपम छटा है बिखरी
लाया खुशियां खूब दीपावली त्यौहार।।
बच्चे सभी जच्च रहे नये वस्त्रों में देखो
फटाकों संग चेहरे पर रौनक की झंकार।।

दीपों का त्यौहार आया, दीपों का त्यौहार
अंबर भी भरा सितारों से उजियारा अपार।।
चांद की दुधिया रौशनी में नहा रही रौशनी
करो मिल सभी अतिथियों का सत्कार।।

आया दीपों का त्योहार।।२।।

वीना आडवानी तन्वी
नागपुर, महाराष्ट्र
*********************
[01/11, 12:42 pm] वैष्णवी Khatri वेदिका: 01 Nov 2021 दिवाली (बाल गीत)

दिवाली का त्यौहार आया।
सभी का आंगन जगमगाया।
बाहर भीतर दीप जलाते।
हर आंगन हैं सबको भाते।।

पग-पग दिखे यहाँ उजियाली।
जगमग जगमग दीपक आली।
नदियों नहरों में दीपक चलते।
प्यारी लहरों में है पलते।।

आई दिवाली प्यार बाँटो।
जीवन में से खुशियाँ छाँटों।
राम आज अवधपुरी लौटे।
झूम उठे बड़े और छोटे।।

गणपति जी को घर में लाते।
संग लक्ष्मी को भी बुलाते।
रिद्धि सिद्धि को सँग लाते।
द्वारे पर शुभ लाभ बनाते।।

सब मन में उल्लास भरा है।
रंगोली सजी ये धरा है।
बुराई की हार है होती।
सच्चाई की जय है होती।।

वैष्णो खत्री वेदिका
[01/11, 1:08 pm] स्नेह लता पाण्डेय - स्नेह: नमन पटल
आज का विषय - बाल गीत

दीये ले लो बाबूजी

बाबूजी दीये ले लो।
थोड़े पैसे मिल जाएंगे।
घर के लिए राशन पानी
गणेश लक्ष्मी आ जाएंगे।

घर में राह देख रही है,
छोटी बहन पटाखे की।
नई फ्रॉक की जिद पकड़े है,
देखकर पड़ोस वालों की।

माँ भी दिनभर करती काम,
किसी तरह से गुजारा होता।
कई कई दिन फांके रहते,
कोई भी न सहारा होता।

दिन भर से हूँ बैठा मैं,
एक भी दिया नहीं बिका।
मोमबत्ती लाइट की मांग बढ़ी।
किसी को दिया नहीं दिखा।

मुझ गरीब की बात सुनकर,
ले लो कुछ दिए बाबूजी।
माँ लक्ष्मी आशीष देंगी,
पूरी होगी आपकी हर आरज़ू।

स्नेहलता पाण्डेय 'स्नेह'
[01/11, 1:14 pm] रजनी अग्रवाल जोधपुर: विषय "दीपावली"

 1.दीपावली का पर्व है, दीप जलाओ आज। सारे गम ही मिटेंगे , पूरे होंगे काज ।

2. फुलझडियों को छोड़ते , 
बीती सारी शाम , 
अब तो सबको मिल गए , 
 अपने अपने राम ।

3. क्यों पटाके छोड़े हो, 
क्यों जलाए हो अर्थ, हाथ ना कुछ भी आए हैं , 
समय हो गया व्यर्थ ।

4. दीपावली मना रहे ,
 हिलमिल सारे लोग, बच्चों की मुस्कान में
 ही , 
बसे हैं शुभ संजोग ।

5. जगमग जगमग दीप है , 
उजियारे की रात , सबके दुख ही मिटेंगे, भूलो दुख की बात ।

6. प्रेम प्यार दीपक हुए,
 स्नेह भरी सौगात, अंधियारे से लड़ रही उजियारे की रात ।

स्वरचित रचना दोहे रजनी अग्रवाल 
   जोधपुर
[01/11, 1:31 pm] रवि शंकर कोलते क: सोमवार दिनांक **०१/११/२१
विधा**** बाल गीत 
विषय****#** दीपावली***#

आओ राम हरि शंकर ।
        हम दिवाली मनाएंगे ।।
फुलझड़ियां जलाएंगे ।
        बंदूक भी चलाएंगे ।।
पापा कहे बम न फोडो ।
        वर्ना तुम जल जाएंगे ।।१

आज तो हम खूब मिठाई ।
             सेव चकली चखेंगे ।।
नए नए आधुनिक बढ़िया ।
             कपडे हम पहनेंगे ।।
घरमें होगी जगमगाहट ।     
           मांलक्ष्मीको पूजेंगे ।।

छीन ली थी कोरोना ने ।
           हमसे सारी खुशियां ।।
हर तरफ थी बस उदासी ।
           बेबसी तनहाइयां ।।
आज हम सारी कसर ।
            ना छोड़ेंगे बाकी ।
होगी बस मौज मस्ती ।
            ना दुख की घडियां ।।
 

प्रा रविशंकर कोलते
    नागपुर
[01/11, 1:51 pm] Nirja 🌺🌺Takur: दीपावली

जगमग जगमग करती आती है दीवाली
दीपों से सज कर मुस्कुराती है दीवाली
सजे हुए हैं घर और बाज़ार
खुश रहो मस्त रहो कहती है दीवाली

साफ सफाई कई दिनों से कर रही है मां
नये परदे लगाती घर को चमका रही मां
स्वादिष्ट पकवान खूब मिठाई बनाती है
हमारे लिए नये कपड़े खरीदती है मां

 सबके लिए क्या,खुशियां लाती दीवाली
सभी चेहरे पर क्या मुस्कान लाती है दीवाली
 कई जो हैं कोरोना के मारे हुए
उन्हे बार बार डराती है दीवाली

धीरे - धीरे संभल रहे हैं हम
फिर से खड़े होना सीख रहे है़ हम
बहुत हिम्मत हममें है बाकी अभी
अपने डर से लड़ कर जीत रहे हैं हम

नीरजा ठाकुर नीर
पलावा डोंबिवली
महाराष्ट्र
[01/11, 2:04 pm] 👑पदमाकाक्षी शुक्ला: 🙏🌹 *नमन मंच* 🌹🙏
🙏🌹 *जय अम्बे*🌹 *१/११/२१* 🌹🙏
🙏🌹 *बाल कविता* *दीपावली* 🌹🙏

मां दिए बेचने जाता हूं 
 देर से लौट कर आऊंगा,।।
आज कमाई ज्यादा होगी ।
 एक टी शर्ट में लाऊंगा।। 

बहना के लिए एक फराक।
 एक नई सारी लेना है। 
चप्पल पिताजी के लिए भी।
फिर फुलझडियां मां लेना है ।।

कैसे पाना सारे पैसे ।
तेरी शुभकामना से मिले ।
मेहनत मुझे करना है मां । 
आज बिक जाए सारे दिए ।।

तो पैसे ज्यादा आएंगे।
 घर में दिवाली मनाएंगे ।।
 एक साथ दिए जलाएंग ।
  बांटकर मिठाई खाएंगे।।

🙏🌹 पद्माक्षि शुक्ल 🌹🙏
[01/11, 2:54 pm] साधना तोमर: दीपावली (बालगीत)

शुभ दीपावली आयी है,
सोनी मोनी तुम आओ।
सुंदर से ये दीप सजे हैं,
तुम सब इन्हें जलाओ।

चीनी लड़ियों को फैंको,
मिट्टी के दीये ही लाने हैं।
नहीं विदेशी में उलझे, 
स्वदेशी ही अपनाने हैं।

आत्मनिर्भर बने सभी, 
यही हमारा नारा है।
ऊंची उड़े उड़ान सभी,
फैलायें सब उजियारा है।

पटाखे नहीं छुड़ाना है,
नहीं प्रदूषण को फैलायें। 
आओ सभी संकल्प करें,
पर्यावरण शुद्ध बनायें।

लक्ष्मी गणेश की पूजा में,
हम सब शीश नवाते हैं।
मिलजुलकर आओ सब,
पावन त्यौहार मनाते हैं।



डा साधना तोमर
बड़ौत (बागपत)
उत्तर प्रदेश
[01/11, 3:18 pm] विजेन्द्र मोहन बोकारो: शुभ दीपावली के अवसर पर
मेरी बिटिया ने सजाई 
आंगन दरवाजे पर रंगोली
देखकर सबका मन हर्षित हुआ
दिवाली त्योहार दीप मिलाकर 
दीप जलाएंगे ।
रंग बिरंग बस्त्र पहनकर
दिवाली के त्योहार दीप को मिला कर
दीप जलाएंगी।
बम पटाखे फोड़ेंगी खुब मिठाई खाएंगी
दिवाली के त्योहार मिलने घर जाएंगी
सभी सहेलियों के साथ रात में
बम पटाखे फोड़ेंगी।
सुनो पापा आज के दिन कुछ 
नहीं कहना मस्ती का दिन है।
फुल एंजॉयमेंट करने देना।।

विजयेन्द्र मोहन।
[01/11, 3:34 pm] शुभा 👅शुक्ला - रायपुर: दीपावली की शुभकामनाओ के साथ 
💐💐💐💐💐💐

जगमग जगमग जगमगाती 
ये दिवाली आई है 
विश्व बंधुत्व और भाई चारे का 
अमर संदेसा लाई है 

मन मे हो जो भी कडवाहट 
आज सब बिसरा के 
एक दूजे को गले लगाने ये 
पुनीत दिवाली आई है 

कही पटाखे कहीं लक्ष्मी बम 
कही पे फूटा एटम बम तो कही 
पट पट जल रही बम लडियां 
मीठी मठरी नमकीन और 
हाय वो खोवे की गुजिया 

दीवाली है मिलन का उत्सव 
आओ हम मिल दीप जलायें
हिनदू मुसलिम सिकख ईसाई 
दीवाली मे दिल भी मिलाये 

देसी दियो के साथ दिवाली 
बिना प्रदुषण के मनायेगे 
ले संकल्प आज हम सब ये 
कि रोशनी देसी ही जगमगायेगे 

हार जीत और ऊंच नीच का भेद मिटा 
लगाये हम सब एक है का नारा 
विदेशो की खूब कर ली नकल 
अब स्वदेश की संस्कृति छूलें यारा 

हम हिन्दुस्तानी सबसे अलग हैं 
याद दिलाने हरषित दिवाली आई है 
विश्व बंधुत्व और भाईचारे का 
अमर संदेसा लाई है 

शुभा शुक्ला निशा
रायपुर छत्तीसगढ़
9826635678
[01/11, 3:41 pm] 😇ब्रीज किशोर: अग्नि शिखा मंच
 १/११/२०२१
 वीधा।- कविता
बिषय - दिपावली
दिपावली दीपो का त्यौ हार।
खील बताशों का त्यौहार।
फूल झडी़ पटाखों का त्यौहार।
लक्ष्मी गणेश पूजन का त्यौहार।


अमावस की रात अंधेरी
ज्यौती माँ ने मन मे सोची
कैसे मिटेगीं रात अंधेरी।
नन्हा दीपक माँ से बोला
घर घर माँ दिपक जलवाओ।
ऐसे मिटेगी रात अंधेरी।


घर बाहर चौरा चौबारा।
मन्दिर कूँआ और देवालय
जगमग जगमग दीप जलेगा।
ऐसे मिटेगा जग का अंधेरा।


बच्चे छोडे़गे खूब पटाखें
लक्ष्मी जी का पूजन करेगें
गणेश जी से विद्या बुद्धि मांगेगें।
 हिल मिल सब से गले मिलेगें।
प्रेम से हम सब गले मिलेगें ।
आपस मे सब गले मिलेगें।
 स्वरचित
       बृकिशोरीत्रिपाठी उर्फ
भानुजा गोरखपुर यू.पी
[01/11, 3:45 pm] डा. बैजेन्द्र नारायण द्िवेदी शैलेश🌲🌲 - वाराणसी - साझा: मां मैं भी पापा के साथ में जाऊँगा बाजार।
मिट्टी के दीए लाऊंगा
उनको दूंगा बार।
एक रखूंगा दरवाज़ा पर
एक नीम के नीचे
एक रखूंगा तुलसी चौरा
तब फिर घर के पीछे।
चारों ओर उजाला होगा
जगमग रात करेगी
दीपों की माला चन्दा
तारों से बात करेंगी।
लाई मीठा और बताशा
फूल खरीद कर लायेंगे
लक्ष्मी गणेश की मूर्ति पर
पूजा करके चढ़ायेंगे।।

हाथ जोड़कर उनके आगे
सभी का भला मांगेंगे
उन्नति हो घर गांव की अपने
इतना ही हम चाहेंगे।।
+++++++
ब्रजेन्द्र नारायण द्विवेदी शैलेश वाराणसी
[01/11, 3:47 pm] वीना अचतानी 🧑🏿‍🦽: वीना अचतानी 
विषय **दीवाली बाल कविता ***
लेकर जीवन में खुशहाली 
आई दीवाली 
दियों से सज गई चौखटें
रंगीन हो गई झालरों से दीवारें 
हँसते चेहरे हर कहीं 
हर जगह कैसी उजियारी फैली
आई दीवाली 
खुशियों की बौछार दीवाली
जीवन में उपहार दीवाली
दीपों का त्यौहार दीवाली
आई दीवाली बंट रही मिठाई
घर घर जग मग दीप जलते
खूब धूम धड़ाके के फटाके फूटते
आकाश मे सर सर राकेट फूटते
चून्नू मुन्नू पर मस्ती छाई
फटाके छोड़ते खूब खाते मिठाई
दीपों की इस सुन्दर पंक्ति में 
मेरा भी एक दीप सजा दो
दीपों का जगमग संसार
एक दूजे से बढ़ता प्यार ।।।।
वीना अचतानी 
जोधपुर ।।।
[01/11, 3:48 pm] डा. महताब अहमद आज़ाद /उत्तर प्रदेश: *दीप जलायेंं*

प्यार के दीप जलायें!
दिलों से नफ़रत मिटाये!!
रूठा जो कोई अपना!
मिलकर सब उसे मनाये!!

खुशी के जब दीप जलाये!
यह जिम्मेदारी भी निभाये!!
आँगन में एक पेड़ लगाये!
पर्यावरण को हम बचाये!!

मिट्टी के दीप जलाये!
गरीब को गले लगाये!!
चीन का करे बहिष्कार!
राष्ट्र को मजबूत बनाये!!

यह त्यौहार है अलबेला!
 सजता खुशियों का मेला!!
सब मिलकर मनाते इससे!
रहता नहीं कोई अकेला!! 

ईद की मीठी शीर!
दिवाली की मिठाई!! 
दुश्मन से यह कहती! 
हिंदू मुस्लिम भाई भाई!! 

*डा. महताब अहमद आजाद*
उत्तर प्रदेश
[01/11, 4:18 pm] Anita 👅झा: आओ प्रेम का दीप जलाये 
आओ मिलकर दीप जलाये 
आशाओं का संचार जगाये 
रिश्तों की डोर को अनमोल बनाए
ममता के उदगारों से दिवाली मनाये 

मिट्टी माँ काली की पूजा काल 
में लाल फूल खिलते हिंदुस्तान में

लाल फ़ुल खिलते है हिंदुस्तान में 
हँसता हुआ सबेरा हिंदुस्तान का 
लहराता जल यमुना संध्याकाल का 
बच्चों की मुस्कानो गुलाबों में हिंदुस्तान है

वसुधेव्य कुटुम्बक अस्तित्व जगा हिन्दुस्तान में 
जलचर नभमंडल दीपदान कर 
मानवता का जन संचार जगाया हिंदुस्तान में 
रामचरित सत्कर्म कथा इतिहास हिन्दुस्तान में 


मिट्टी माँ काली की पुजा होती हिन्दुस्तान में 
लाल
मिट्टी माँ काली की पूजा काल 
में लाल फूल खिलते हिंदुस्तान में 

दिवाली 
नव दीपों के साथ मिलकर मनाते दिवाली है 
पुरानी यादों साथ लेकर मनाते दिवाली हैं 
रिश्तों में रस घोल अनमोल बनाती 
तहज़ीब तक़दीर मदमस्त बनाती दिवाली हैं 

दीये -बाती हर साँस आस की यही कहानी है 
मिलन -बिछोह ,लाभ -हानि शुभ -लाभ 
जीवन के रँग़ो रागो अनमोल कहानी हैं 
सीख जीवन को आगे बढ़ाती कहानी हैं

रचनायें अनमोल धरोहर सुकून दे जाती है 
जीवन में निखार लेकर आई दिवाली हैं 
अनमोल रत्नो रँगो से घर घर को सजाती 
नभमण्डल आशाओं में मनायें दिवाली हैं 

चाहत के रँग फाटकों फुलझड़ियों के 
साथ आई दिवाली है 
खील बताशे मिठाइयों की यही कहानी है 
जय सियराम जय सियाराम बोल 
हर घर आँगन की रौनक़ बन आई दिवाली है 

 दीपावाली की शुभकामनाये आप सभी को 💐🙏
[01/11, 4:19 pm] निहारिका 🍇झा: नमन मंच
विषय;-दीपावली
दिनाँक;-1/11/2021
 ।।।🌹दीवाली🌹।।।
माँ लक्ष्मी के रूप अनेक।
उनको प्यारा हर दिल नेक।
तुम हो कमला कमल निवासिनी ।
श्री गणेश संग तेरा पूजन,तुझको करते तन मन अर्पण ।
खील बताशे का भोग लगाएं।
दीपों से हम थाल सजाएँ ।
मन में फैले ज्ञान उजाला
भक्ति से महके जग सारा।
हर बच्चे के हाथ में रोटी,और पटाखे कपड़े खिलौने।
अपनी कृपा का अमृत दे दो सबके घर में खुशियाँ भर दी।
इतनी करती तुझसे कामना ,
सबकी रात दीवाली कर दो।।। ""जय माँ लक्ष्मी''
निहारिका झा
""🙏🙏
[01/11, 4:23 pm] +91 70708 00416: मंच को नमन 🙏
बाल कविता
1/11/21
      दिवाली आई रे
,*******************
दिवाली आई रे
खुशियां साथ लाई ये
हर जगह बंट रही मिठाई ले
खुशियों के गीत गाओ बहन और भाई रे
दीपों से सजाओ थाली
रंग-बिरंगे रंगों से सजाओ रंगोली
सबका मन है हर्षाया
सोनू जल्दी आओ
अरे मोनू तुम भी आओ
बम पटाखे फोड़ेगे
फुलझड़ी भी छोड़ेंगे
खूब मिठाई खाएंगे
जगमग जगमग दीप जलाएं
एक दूजे से प्यार बढ़ाएं
दिवाली आई ये
हर घर सजी फूलों की माला
ढेर सारा उपहार लाया दिवाली


 डॉ मीना कुमारी परिहार
[01/11, 4:58 pm] ♦️तारा प्रजापति - जोधपुर: अग्निशिखा मंच
1/11/2021सोमवार
विषय-दीपावली

आयी दिवाली,आयी दिवाली
जगमग करती,आयी दिवाली।
बच्चें खुशी से नाच रहे हैं,
बच्चों के मन,भायी दिवाली।

रंग-बिरंगे सुंदर रंगों से
दीदी ने आज रंगोली सजायी,
ख़ुशियों के रंग लायी दीवाली,
आयी दिवाली,आयी दिवाली।

शक्कर के हाथी और घोड़े 
बुआ बाज़ार से दीये ले आयी,
चमकी अमावस की रात काली
आयी दिवाली,आयी दिवाली।

मां ने स्वादिष्ट पकवान बनाये
हम सबने खूब छक के खायी,
दादी मां ने है रसोई संम्भाली
आयी दिवाली,आयी दिवाली।

गुड्डू-गोलू सूतली-बम फोड़ते
मुन्नी-चुन्नी ने फुलझड़ी जलायी,
अमावस की रात हुई उजयाली
आयी दिवाली,आयी दिवाली।

सबने लक्ष्मी जी पूजन किया
 सबने मिलकर आरती गायी,
सज गयी दीपों वाली थाली
आयी दिवाली,आयी दिवाली।।
                           तारा "प्रीत"
                         जोधपुर (राज०)
[01/11, 5:03 pm] रानी अग्रवाल: दीपावली।
१_११_२०२१,सोमवार।
विधा_ बालगीत।
शीर्षक_दीपावली।
हम बच्चों के मन में खुशहाली है,
क्योंकि आई दिवाली है दिवाली है
दादाजी ने बताया ,आज
अवधपुरी से लौटे थे राम,
पिता का आज्ञा पालन और,
रावण का करके काम तमाम।
मां ने नया रंगवा लिया है घर,
मिठाई,नमकीन बना,घर पर।
द्वार पे सुंदर सा तोरण लगाया है,
बिजली वाले बल्वों से सजाया है।
मेरी मां ने आंगन में रंगोली बनाई,
तरह_तरह के रंगों से सजाई है।
दरवाजे पर शुभ_लाभ लगा दिए,
दोनों ओर स्वास्तिक भी बना दिए
सबके लिए नए कपड़े आए हैं,
पापा ने मुझे खिलौने दिलवाए हैं।
भाई, बड़ा आनंद आ रहा है,
खुशी के मारे मन फूला जा रहा है
चलो_ चलो सब दिवाली मनाएं,
दीपों से घर आंगन को जगमगाएं।
दूर करें बुराइयों के तम को,
गुणों का प्रकाश चाहिए हमको।
शुभ मुहूर्त में करें लक्ष्मी पूजन,
फल,मेवा,मिठाई कर सब अर्पन।
फिर चलें जलाने फुलझड़ी,
जलाएं फाटकों की लंबी लड़ी।
भूलकर शिकवे,मिलें गले,
छू कर चरण बड़ों के,आशीष लें।
नए साल का करे हृदय से स्वागत, अतिथियों की करें खूबआवभगत
कर मां_पिता सब देवों को प्रणाम
कहते हम"जय श्री राम,
               जय श्री राम।"
आप सभी को शुभ दीपावली।
स्वरचित मौलिक रचना______
रानी अग्रवाल मुंबई,१_११_२०२१.💡
[01/11, 5:23 pm] कुम कुम वेद सेन: विषय दीपावली

जग मग जग मग दीप जले
घर आंगन खूब सजे

पापा बाजार से आए
नए नए कपड़े लाए

मिठाई और पटाखा लाए
चलो पटाखा धूप में सुखाएं

मां कर रही है सफाई
घर बाहर जगमगाई

छोटा सा घरौंदा बना है
हम सभी उसे सजाए हैं

यह मेरे सपनों का है घरौंदा
घरौंदा सुंदर रंगों से रंगा

छोटे-छोटे बर्तन लाए
सभी में बताशा मिठाई सजाए

लक्ष्मी गणेश की करेंगे पूजा
मंगल गान करेंगे सब मिल दूजा

चलो चलो अब रात हुई
दीप जलाने का समय हुई


मुन्ना मुन्नी सब है खुश
नाच रहे हैं लेकर मिठाई

कुमकुम वेद सेन
[01/11, 5:29 pm] ओम 👅प्रकाश पाण्डेय -: दीपावली ( बालगीत) ----- ओमप्रकाश पाण्डेय
आज से छुट्टी है दीपावली की
खूब धूम धड़ाका करेंगे हम
सब मिल सफाई करेंगे घर की
दीये जलायेंगे हम चारों ओर
लावा फरुही और मीठा खायेंगे
जगमग होगी हमारी दीपावली......... 1
मम्मी मैं तो फुलझड़ी पड़ाका लूंगा
चकली और साथ में लूंगा अनार
इतने में छोटा चिन्टू भी बोला
मैं तो लाल पीले हाथी घोड़ा लूंगा
जब तक चाहूँ खेलूँ उससे , 
जब मन चाहे खा लूं उनको ...... . 2
इतने में बड़की पिंकी भी आ गयी
बोली मैं तो पापा से लूंगी टाप व जींस
बच्चों के पापा भी आ गए बीच में
बोले बच्चों की माँ कुछ तुम भी बोलो
सोने का हार दिला दो वह धीरे से कान में बोली......... 3
इतने में दादा जी बोले कि बच्चों बताओ
दीपावली हम क्यों और कब मनाते हैं
रावण वध किया प्रभु राम ने विजयादशमी को
उसके बीस दिन बाद पूरा हुआ वनवास राम का
दीपावली मनाया अयोध्या ने फिर पिंकी बोली ........ 4
दादी भी आ गयी इतने में सबके बीच
बोली खुशियाँ दीपावली की खूब मनाओ
फोड़ो पड़ाके फुलझड़ियां जलाओ
दीप जलाओ प्रकाशित कर दो घर आंगन
पर संकल्प करो सब कुछ होगा स्वदेशी ........ 5
( यह मेरी मौलिक रचना है ---- ओमप्रकाश पाण्डेय)
[01/11, 5:30 pm] 💃💃sunitaअग्रवाल: शीर्षक__ जगमग दिवाली 

आया आया, दिवाली का त्योहार आया,
खुशियों का अंबार लाया, 
बच्चों चले नए कपड़े, मिठाई, और पटाखे लेने बाजार,
हों रहा बाजार जगमग , जगमग गुलजार,
टीनू मीनू , चीनू हो जाओ,झटपट 
तैयार, 
बाजार, घर , महालक्ष्मी मंदिर,
रंग बिरंगी रोशनी से सजे हैं,
बच्चों तुम कर लो मजे है,
कोरॉना दुम दबाकर भाग चुका,
डर भी साथ ही गया हैं, पर फिर भी तुम बच्चों को नियमों का पालन करना होगा क्योंकि सावधानी में ही समझदारी है।
हां बच्चों , एक बात और ,
गरीब का घर भी रोशन हों , फुटपाथ पर बैठे हुए वृद्ध आदमी, छोटे बच्चों से ही दिवाली सामान खरीदे ,
प्रदूषण मुक्त पटाखे फोड़े, ताकि स्वस्थ पर्यावरण बना रहें,
 बच्चों , कम से कम पांच पेड़ जरूर लगाए।
जीवनदायिनी वायु वातावरण मैं पर्याप्त मात्रा में उपलब्ध रहें।
आया है दिवाली का त्योहार खुशियों का अंबार।

सुनीता अग्रवाल इंदौर मध्यप्रदेश स्वरचित
🙏🙏
[01/11, 5:58 pm] आशा 🌺नायडू बोरीबली: 🌹 बाल गीत 🌹
*****************
   विषय - दीपावली
******************
 
आई दिवालीछाई दिवाली घर घर को रौशन कर गई दिवाली । दीपमाला की रोशनी से जगमगा उठा घर अंगना। दिलों को भी रोशनकरगई दीपमालाओं की जगमगाहट । खुशी व आनंद का त्यौहार ‌ उत्साह और उमंग से है भरपूर । ‌‌अंधकार को हरने वाली
प्रकाश पुंज फैलाने वाली हृदय के तार तार को आलोकित करने वाली। बच्चे बूढ़े के चेहरों पर मुस्कुराहट लाने वाली हमारे त्योहारों की रानी है हमारी दीपावली । 
दिये से दिये जला़ओ
 दीपोत्सव मनाओ ।
खूब आनंदउल्लासमें डूबो
उमंगित हो , खुशियां मनाओ।
आई दिवाली छाई दिवाली घर घर को रौशन कर गई दिवाली ।
********************स्वरचित रचना 
डॉ . आशालता नायडू .
भिलाई . छत्तीसगढ़.
*******************
[01/11, 6:04 pm] आशा 🏆🏆जाकड इन्दौर: .बाल गीत

 शुभ दीपावली - शुभ दीपावली ः

ओहो दीपावली मनाएं खुशियों के दीप जलाएं 
शुभ दीपावली शुभ दीपावली 
दूर गगन में फैल रहा है अज्ञान का अंधियारा 
दीप जलाकर रोशन कर दें फैला दें उजियारा
 जगमग जगमग रोशन कर दे ऐसी धूम मचाए 
शुभ दीपावली - शुभ दीपावली।
 
आदर्शों के दीप जलाकर कर दें धरा उजियाली
जगमग जगमग रोशन कर दें हर घर में दिवाली।
 ईर्ष्या- नफरत दूर भगा कर प्रेम के फूल खिलाएँ
 शुभ दीपावली - शुभ दीपावली
 ओहो दीपावली मनायें खुशियों के दीप जलाएं ।
शुभ दीपावली- शुभ दीपावली।


आशा जाकड़
[01/11, 6:16 pm] शेभारानी✔️ तिवारी इंदौर: दीपावली
***********
 आओ हम दीपावली ऐसे मनाएं,
 खुशियों के कुछ पल उन्हें दे आएं,
 जो बच्चे अनाथ हैं इस दुनिया में ,
 प्यार की फुलझडियां संग जलाएं।

 जिनके जीवन में घोर अंधेरा है,
 खुशी नहीं,जनके चेहरे उदास हैं,
 पतझड़ ही पतझड़ है चारों ओर,
 न हरियाली,खुशहाली मधुमास है,
 न उनकी धरती ना ही आकाश है ,
  जहां टूटा हुआ मनोबल है उनका,
  उन्हें अपने आप पर न विश्वास है,
 टूटे मनोबल की बैसाखी बन जाएं,
 आओ दीपावाली हम ऐसे मनाएं।

 गरीबों की झोपड़ी में अंधियारा ,
चारों ओर से दुखों ने ही तो घेरा है ,
 संकट का ग्रहण सदा लगा रहता,
 दर्द और उदासियों का ही पहरा है,
 आधनंगे चिथड़ों में लिपटे बच्चे,
 भूख और,प्यास से रिश्ता गहरा है,
 उनकी आंखों में नहीं कोई सपना है,
 मुरझाया हुआ सभी का चेहरा है,
 उनकी झोपड़ी में हम दीप जलाएं,
 आओ दीपावली हम ऐसे मनाएं।

शोभा रानी तिवारी 619 अक्षत अपार्टमेंट
खाती वाला टैंक इंदौर मध्य प्रदेश ,
8 989409210
[01/11, 6:22 pm] 👑सुषमा शुक्ला: दिवाली,,

 बाल गीत।।

दीपावली का त्यौहार आया,,, बच्चों के मन को भाया,,,,
 नए-नए कपड़े सिलवाए,,, छखकर मिठाई खाएं।

रात को दिए जलाए,, फुलझड़ी फटाके चलाएं
अनार की हो गई भरमार
मम्मी का माना आभार

मां ने समझाया दूर रहकर पटाखे चलाओ,,, 
मन मुदित हर्षाता जाए,,,
यह त्योहार बार-बार आएl

मम्मी ने खूब पकवान बनाए,,,
मस्ती में बच्चे खाते जाएं ,,,
मां ने समझाया बड़ों के चरण स्पर्श करते जाएं


सुषमा शुक्ला🌷🙏
[01/11, 6:49 pm] पूनम सिंह कवयित्र� � इशिता स� �डीला: Namn manch अग्नि शिखा 
विषय बाल गीत 
शीर्ष क दीवाली
दिवाली आई है ,रोशनी लाई ह ,
अम्मा बनाएगी लडू, मेरे मन को भायी है,
मैं चकरी चलाऊंगी ,अनार भी दगा लूँगी,
मगर मत कहना बम फोड़ो,
आवाज़ से ही डर जाऊँगी,
में नाज़ुक सी गुड़िया हूँ,
नाम मेरा लाडो है ,
पटाख़े नही पसन्द मुझे भी ,
मेरी बछिया भी डर जावे ह ,
अम्मा कहती है ,दीवाली नाम ह उसका,
सबकी घर में फैले खुशिया न दिखे कोई दुखी सा,@ishita singh 
Lucknow, u.p
[01/11, 6:56 pm] डा. अंजूल कंसल इन्दौर: अग्निशिखा मंच 
विषय दीपावली - (बाल कविता)
शीर्षक जगमगा रहे दिए 

आओ बच्चों मनायें दिवाली 
पूज्य दादा दादी को बुलाओ 
घर में आई खूब खुशहाली 
झूमो मस्ती से,खुशी मनाओ।

आज अवधपुरी में आए राम 
शुभ लाभ लगाओ द्वार पर 
रंग बिरंगी रंगोली आज बनाओ 
आंगन में भी बंदनवार सजाओ।

चौमुख आज दियरा जलाओ 
चमचम जगमगाए माटी दिए 
पकवान थाली में मीठा सजाओ 
पूजा थाली में ज्योत जलाओ।

दादी ने गुजिया मिठाई बनाई है
जलेबी की खुशबू रसोई से आई है 
गुलाब-जामुन, दही-बड़े बड़े मजेदार 
माँ खिलाएं खुश होकर बार-बार।

अंधकार को प्रकाश से खूब भर दो 
लक्ष्मी मैया आईं,खील बताशा लाईं 
शुभ मुहूर्त में किया लक्ष्मी जी का पूजन 
दीपावली मिलने आ रहे आत्मीय स्वजन।

चाइनीज़ सामान का बहिष्कार करो 
अनार फुलझड़ी पटाखे चाइनीज़ ना लो
स्वदेशी वस्तुओं से दीपावली मनाओ 
बड़ों के चरण स्पर्श कर आशीर्वाद लो।

 डॉक्टर अंजुल कंसल "कनुप्रिया"
1-11-21
[01/11, 6:57 pm] कुंवर वीर सिंह मार्तंड कोलकाता: बाल कविता

दीपावली

जब भी आयी दिवाली।


हमको भायी, तुमको भायी 
सबको भायी दिवाली।
घर आंगन की हुई सफाई
जब भी आयी, दिवाली।

अम्मा ने पकवान बनाए
हलुआ पूड़ी मालपुआ।
घर बाहर लाइटें जलाईं
जब भी आयी दिवाली।

लक्ष्मी और गणेश सजाए
पूरी गई अल्पनाएं।
दीप जले, कंदील जलाई
जब भी आयी दिवाली।

चरखी चलीं, फुलझड़ी फूटी
खाए खील बतासे भी।
सब बच्चों ने मौज मनाई
जब भी आयी दिवाली।

© कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड, कोलकाता
[01/11, 7:07 pm] सुरेन्द्र हरडे: *बालगीत**
दीपावली आयी रे पिंटू पिंकी सोनु नाचने लगे खुशी उमंग के साथ बड़ी धूम धड़ाके से दीपोत्सव बनाएंगे आओ जल्दी।।१।।

घर घर में रोशनी हो
अंधेरे का नाश हो
विघालय की हो गई छुट्टी
आओ दिपावली बनाएंगे।।२।।

नरक चतुर्दशी शी मंगलस्नान
करेंगे नये नये वस्त्र पहनेंगे
हो हाथ में फुलझड़ी धुम 
धड़ाके से दिपावली मनाऐगे।३।

नहीं लग रहा कोरोना डर
बच्चों फिर भी साफ-सफाई
मास्क पहनेंगे, नहीं करेंगे 
लापरवाही कोरोना को भगाएंगे।

लड्डुओं मिठाई सेव चकली 
नमकीन फरसान का स्वाद लेंगे
मां लक्ष्मी का पूजन करेंगे 
आतिशबाजी करेंगे ताली बजाएंगे

नहीं फोडोंगे बड़े आवाज वाले 
बंमफोडी नहीं करेंगे पर्यावरण
की रक्षा करेंगे, पेड़ पौधे लगाओ
दिपावली पर हरा भरा विश्व होगा।

सुरेंद्र हरड़े
नागपुर 
दिनांक ०१/११/२०२१
[01/11, 7:07 pm] चंदा 👏डांगी: $$ बालगीत $$
    $$ दिवाली $$

पूर्वी चली दिवाली मनाने
लेकर आर्या ,रिया को साथ 
अपने नानी जी के गांव 
देख रही थी उनका गांव 
हो गया कितना साफ 
कहीं नही था कोई कचरा 
नहीं दिखी पाॅलीथीन की थैलियां 
पूर्वी, आर्या, रिया खुश थी 
देख गांव का हाल 
घर आकर नानी से बोली 
गांव आपका बहुत साफ है 
ऐसी क्या हो गई बात 
नानी बोली देखो बच्चों 
सफाई रखना अपने हाथ 
दिवाली पर सफाई करते सभी
पर नयी मुहिम चलाई इस बार 
कचरे के डिब्बे दो रखेंगे 
सुखा गीला अलग डालेंगे 
पाॅलीथीन का उपयोग नहीं करेंगे 
कचरा जलने को भेजेंगे 
कारखाने की किलन मे 
बात मानी मेरी सब लोगों ने 
हो गया गांव पुरा साफ 
इस दिवाली आया नही देखो
डेंगू और मलेरिया 
सफाई देखकर भाग गया 
दुम दबाकर कोरोना भी 
मिन्नी चुन्नी टुन्नी नाच उठी 
वाहहह क्या बात है नानी 
हम भी सोसाइटी मे अपनी
आपकी मुहिम चलाएँगे 
दोनों ने फिर बनाई मिठाई 
मिलकर नानी के साथ 
सबने मिलकर फिर शाम को
दिये जलाये माटी के 
फटाखे किसी ने नही फोड़कर 
बांटी मिठाई पूरे मोहल्ले मे 
🪔🪔🪔🪔🪔🪔🪔
चन्दा डांगी डांगी रेकी ग्रैंडमास्टर 
रामटेकरी मंदसौर मध्यप्रदेश
[01/11, 7:16 pm] सुरेन्द्र हरडे: आज के विषय बालगीत दिवाली 
विषय पर लिखी रचनाएं एक बढ़कर एक थी दिवाली सब से ज्यादा खुशी बच्चों को होती 
नहीं जाना है स्कुल
कपड़े नये नये पहनेंगे
फुलझड़ी पटाखे फोड़ेंगे
फरसान लड्डु मिठाई 
खायेंगे 
बेहतरीन रचनाएं के सभी सदस्यों का तहेदिल शुक्रिया अदा करते हैं 
अग्निशिखा परिवार
आज कार्यालयीन काम के व्यस्त एवम दिपावली तैयारी के व्यस्त होने से सभी रचनाकारों विस्तृत समिक्षा नहीं कर पाया 
अभी कुछ सदस्यों ने 
इस सप्ताह साहित्यकी विधा का विश्राम लगाने की गुहार लगाई इस बात पर अलकाजी विचार सहानुभूति पूर्वक एवं दिपावली त्यौहार हंसी खुशी त्यौहार बनाने 
सभी सदस्यों दिपावली हार्दिक शुभकामनाएं🌹🙏🌹🌺🌷💐🌷🌺🌷🌷🌺💐🌷🌺🌷🌹🙏🌹🌺🌷💐
[01/11, 9:53 pm] पुष्पा गुप्ता / मुजफ्फरपुर: 🙏🌹अग्नि शिखा मंच 🌹🙏
     ❤ विषय: दीपावली ❤
        🦚 विधा: काव्य🦚
      🌺दिनांक:1/11/21🌺
*********************************
 आया दीपावली का त्योहार ,
 चलो सजायें अपना घर द्वार ।

 दरवाजे पर लगाएँ बंदनवार ,
 घरौंदे को देते घर का आकार ।

लक्ष्मी गणपति का पूजन करते,
मोदक लावे से कुल्हिया भरते ।
 
पूड़ी - खीर और मिठाई खाते ,
सब मिलकर हम मौज मनाते ।

पटाखे और फुलझरी उड़ाते ,
दीपों की हम पाँत बिछाते ।

जगमग- जगमग यह त्योहार ,
कितना पावन यह त्योहार ।
🌹🙏
********************************
स्वरचित एवं मौलिक रचना 
डाॅ.पुष्पा गुप्ता 
मुजफ्फरपुर 
बिहार 
🌹🙏

Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.