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अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच के block पर आज दिनांक 26 /10/2021 को लघु कथा विषय "अंजर पंजर ढीले होना "पर लघु कथाओं का आनंद लें और रचनाकारों को हौसला अफजाई करें अलका पांडे मुंबई


अंजर पंजर ढीले होना 
लघु कथा 
राधा की सहेली आज अपने गांव से राधा से मिलने आई थी राधा की सहेली भोली बहुत अच्छी थी हर काम में ,परंतु बहुत ही सुकुमार थी धीरे-धीरे काम करती राधा बड़ी फुर्तीली थी l हर काम बहुत जल्दी से निपटा लेती ,और घंटों पैदल चलने की उसकी आदत थी ! राधा ने कहा चलो शाम को बाजार जाते हैं l भोली ने कहा रिक्शा कर लो , में पैदल नहीं चल पाएगी, रिक्शा कर लेते हैं l
राधा ने कहा आधा किलोमीटर ही तो है 10 मिनट में पहुंच जाएंगे क्यों रिक्शा करना इसी बहाने चलना हो जाता है ब्लड सरकुलेशन भी अच्छा होता हैl सेहत बनती है ,कुछ पैदल भी चला कर ,भोली बोली चल तू कहती है तो आज मैं भी पैदल चलती हूं ,दोनों सहेलियां बातें करते करते किसी तरह बाजार पहुंचे बाजार में तमाम सामान खरीदा गया और घर के लिए रवाना होने लगे तो , भोली बोली मैं बहुत थक गई हूं राधा अब मुझ से सामान उठाकर नहीं चला जाएगा राधा बोली सामान मैं उठा लेती हूं तू धीरे धीरे चल घर एकदम पास में हैl लंबा रास्ता नहीं है अब भोली की हालत खराब हो गई थी उसके उसके अंजर पंजर सब ढीले हो चुके थे वह हापने लगी थी और बड़ी मुश्किल से घर तक पहुंची ,
राधा ने उसका हाल देखा तो कहा भोली इतना भी तू चल नहीं पाती है तुझे डॉक्टर को दिखाना चाहिए तू आधा किलो मीटर में हापने लगती है ! तुझे डॉक्टर को दिखाना चाहिए कहीं तुझे कोई प्रॉब्लम ना हो ,तो भोली बोली कुछ नहीं मैं बिल्कुल चलती नहीं हूं और तूने मुझे इतना चला दिया आज मैं परेशान हो गई ,तुझसे मैं अकेली होती तो रिक्शा करती पर तेरी वजह से मैं चली, इतना चली और उसके बाद भी तुम मुझे डॉक्टर को दिखाने को बोल रही है राधा नहीं मानी और पास के डॉक्टर को बुलाया ,डॉक्टर ने चेकअप किया तो कहा आप को। दिखाना चाहिए क्योंकि इतना कम चलने पर यदि हापने लगे तो अंदर कहीं ना कहीं कुछ कमी रह जाती है उन्होंने कहा आप रोज आधा घंटे जरूर चला करें ,पैदल चलना अच्छा हैं l 10 मिनिट चलने पर भी आपके आपके अस्तर पंजर ढीले होने लगे तो कहीं ना कहीं तबीयत आपकी बराबर नहीं है ! तब भोली बोली राधा तूने बहुत अच्छा किया नहीं तो मुझे पता ही नहीं चलता कि मेरे अंदर कुछ कमी है l मैं तो सोच रही थी कि मै चलती नहीं हूं इसलिए हाप जाती हूं ,अब से मैं रोज जरूर आधा घंटा चला करूंगी चलना ही सेहत के लिए अच्छा है ,तब मेरे अंजर पंजर भी डील नहीं होंगे और मैं स्वस्थ रहूंगी , तब राधा जोर से बोली मेरी बात समझ आई ना चलना ही सेहत के लिए बहुत जरूरी है 
अंजर पंजर सब सही रहते हैं! 
अलका पांडे मुंबई

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[26/10, 8:07 am] कुंवर वीर सिंह मार्तंड कोलकाता: 🌺मंगल वार - 26//10 /2021
विषय_अंजर पंजर ढीले होना – अभिमान नष्ट होना
🌺विधा - लघुकथा 
भारतीय हिंदू चाहे कितना भी नास्तिक हो भगवान की छवि के सामने स्वाभाविक रूप से उसके हाथ जुड़ ही जाते हैं, मस्तक झुक ही जाता है। कुंवर भी तथाकथित रूप से नास्तिक ही थे। 
कुंवर जब सपरिवार वृंदावन घूमने गए तो धार्मिक भाव से ओतप्रोत होकर सपरिवार नंगे पैर बांके बिहारी के दर्शन करने गए। वहां से राधा गोविंद मंदिर गए। निधि वन गए। प्रेम मंदिर गए।रंग जी मंदिर गए। और भी अनेकों मंदिरों में प्रभु के दर्शन करते हुए घूमते रहे। 
सब इतने आनन्द विभोर हुए कि रात में वहीं रुक गए और दूसरे दिन पुनः बांके बिहारी के दर्शन किए। तत्पश्चात वैष्णो देवी के दर्शन करते हुए गोवर्धन पहुंचे। 
वहां देखा, लोग नंगे पैर गोवर्धन की परिक्रमा कर रहे थे। *लेकिन कुंवर और उसके परिवार के अंजर पंजर ढीले हो चुके थे।* अब एक कदम भी चलने की क्षमता नहीं रह गई थी। 
अंततः उन्होंने अंध विश्वास को धता बताते हुए ऑटो से परिक्रमा करने का निश्चय किया। परिक्रमा पूरी करके गिरिराज जी के दर्शन किए और सहर्ष अपने घर लौट आए। 
© कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड, कोलकाता
[26/10, 10:23 am] Nirja 🌺🌺Takur: अग्निशिखा मंच
तिथि- २६-१०-२०२१
विषय- लघुकथा अंजर पंजर ढीले होना
         अभिमान नष्ट होना
                 भ्रम 

         राम प्रताप जी कभी गांव के जमींदार थे अब जमींदारी प्रथा तो खत्म हो गई उनका प्रभाव भी धीरे - धीरे कम होने लगा पर उनके मन को इसे स्वीकार करने में बहुत तकलीफ होती है कि छोटे लोगों ने भी तरक्की कर ली है। नौकरों से डांट डपट कर बात करना उनकी आदत बन चुकी है। उनके सामने सब चुप रहते पर आदर कोई नहीं करता है। 
   आज उनकी कार घर से करीब २ किलोमीटर दूर ख़राब हो गई ,उनको पैदल ही घर के रास्ते पर बढ़ना पड़ा। गांव के कुछ लोग उन्हें अनदेखा करते हुए मोटर साइकिल पर आगे निकल गये। तब घर पहुंचते-पहुंचते उनके शरीर के साथ-साथ अभिमान के अंजर पंजर ढीले हो गये। 

नीरजा ठाकुर नीर
पलावा डोंबिवली
महाराष्ट्र
[26/10, 10:44 am] 😇ब्रीज किशोर: *अग्नि शिखा मंच*
    *२६/१०/२०२१*
    *विधा - लघुकथा*
    *बिषय - अंजर पंजर*
                 *ढीला होना*
       द्वापर युग की बात है।
     कंश कृष्ण बलराम को 
    मारना चाहता था नन्हे 
   कृष्ण को मारना चाहत था
    लेकिन सफल नही हो   
    पाया कृष्ण का उम्र ११वर्ष हो गया कंश ने कृष्ण
 के चाचा अक्रूर जी को कृष्ण और बलराम को लाने
के लिए भेजा अक्रूर जी जानते थे की कंश के मन मे खोट है।कृष्ण बलराम को क्षति पहुचायेगा यही सोच कर मथुरा मे जगह जगह विश्वास पात्र को तैनात कर दिये थे
  कंश यह सोच कर खुश हो रहा था की कल तो मुष्टिक और चाणूर जो उनके पहलवान है कृष्ण बलाराम को मार डालेगें और उसका जीवन सुरक्षित हो जायेगा।
 कृष्ण जी अपने चमत्कार से अक्रुर जी को यह बिश्वास दिलाये कि कंश से कृष्ण को कोई खतरा नहीं है।
 कृष्ण बराम जब मथुरा पहुँचे तो नगर के दरवाजे पर
कुबलिया पीड़ हाथी मस्त हो कर चिल्ला रहा था।उसको कृष्ण बलाराम के उपर छोड़
गया।बलराम उसको मार डाले दोनो भाई एक एक दाँत 
लेके आगे बढे़ जो देखे नत मस्तक हो जाँय। 
 और आगे बढे़ तो पहलवान रास्ता रोके कृष्ण बलाराम ने
दोनो का अंजर पंजर ढीला कर दिया दोनो स्वर्ग सिधार गये। बचे थे मामा कंश तो उनको कृष्ण ने बाल पकड़ कर सिंघासन से निचे फेका उनके सिर से मुकुट गिरा और कन्हैया ने लपक के पकड़ लिया लेकिन कंश का एक ही वार से *अंजर पंजर ढीला होगया*प्राण पखेरू उड़ गये*
नाना उग्रसेन को गद्दी पर बैठाये और अपने माँ बाबा को कैद से छुडाने जेल के तरफ चल दिये।
  स्वरचित
     बृजकिशोरी त्रिपाठी उर्फ
   भानुजा गोरखपुर यू.पी
[26/10, 10:47 am] आशा 🌺नायडू बोरीबली: (लघुकथा)
🌷अंजर पंजर ढीले होना🌷
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         कुरुक्षेत्र का युद्ध महाभारत कहलाता है। कौरवों ने सोचा, कूटनीति से चौरस में पांडवों को हराकर, हमने पांडवों के अंजर पंजर ढीले कर दिए। पर वे यह जान न सके, जैसी करनी वैसी भरनी, भला करो या बुरा कर करो । बारह साल वनवास और एक साल अज्ञातवास के बाद ,पांडव जब लौटे तो अपने अधिकार अनुसार आधा राज्य पाना चाहा । कौरवों के अन्याय और घमंड ने उन्हें पांच गांव तो क्या सुई की नोक बराबर जमीन भी देना स्वीकार न किया । अंततः महाभारत का धर्म युद्ध हुआ ।एक तरफ करोड़ों सैनिकों की अपार सेना और दूसरी तरफ अकेले श्री कृष्ण थे। कोरवों ने सेना ले ली और पांडवों को अकेले श्री कृष्ण मिले। श्री कृष्ण ने अर्जुन को समझाया उसके सारथी बने ।पूरी सेना को मार्गदर्शन दिया। युद्ध में पांडवों ने कौरवों के अंजर पंजर ढीले कर दिए। अपने साथ हुए अन्याय व अपमान का बदला लिया । युद्ध में पांडव विजयी हुए ।सदा सच्चाई व न्याय की ही विजय होती है।
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स्वरचित मौलिक रचना
डाॅ . आशालता नायडू.
भिलाई . छत्तीसगढ़ .
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[26/10, 11:24 am] वीना अचतानी 🧑🏿‍🦽: वीना अचतानी 
मंच को नमन
विषय**अंजर पंजर ढीले होना **
छोटे से गांव में आए दिन चोरियां होती रहती थीं ।कुल 80,000 आबादी है।सब एक दूसरे को जानते और अधिकतर रिश्तेदार थे।सब गाँव वाले चकित थे कि आखिर ये चोरियां कौन करता है, कभी किसी की बकरी,कभी फसल चोरी हो जाती।अगर रात को घर के बाहर कोई सामान भूल जाता सवेरे तक वह भी गायब हो जाता ।इस समस्या से छुटकारा पाने के लिए गांव में पंचायत बिठाई गई, एक एक करके सबको पहरे का काम दिया गया, परन्तु परिणाम वही, चोरियां होती रहीं ।तब सब गाँव वालों ने फैसला किया सब गाँव वाले रात को छिप कर पहरा देंगे
रात होते ही सब पेड़ों के पीछे दीवारों के पीछे छिप गए। आधी रात एक आदमी मुँह ढके किसनू के घर की तरफ जा रहा था, जैसे ही उसने बकरीखोली सब लोग उस पर बिजली की तरह टूट पड़ेउसके अंजर पंजर ढीले कर दिये चौकीदार भोलाराम था।रात भर उसे रस्सी से बांध कर रखा ।सवेरे पंचायत बुलाई गई , उसने बताया उसे नशे की लत लग गई है ,वह सामान चुरा कर पास वाले गांव में बेच कर उन पैसो से नशा करता है।।जैसे ही उसके माता पिता को पता पड़ा वे भी बिजली की तरह उस पर टूट पड़े ।उसके अंजर पंजर ढीले कर दिये।उसको जो अपनी चौकीदारी पर अभिमान था ,वह सब नष्ट हो गया ।तब सब गाँव वालों ने मिल कर उसे नशा मुक्ति केन्द्र पर भेज दिया ।।
वीना अचतानी 
जोधपुर ।।।
[26/10, 12:52 pm] रवि शंकर कोलते क: मंगलवार दिनांक २६/१०/२१
विधा*******लघु कथा 
विषय*****
  #**अंजर पंजर ढीले होना**# 
        ( अभिमान नष्ट होना ) 
              ^^^^^^^^^^

      मित्रों, आज का विषय बड़ा चिंतनीय है । इस पर हर मनुष्य ने विचार करना चाहिए । स्वाभिमान और अभिमान यह एक सिक्के के दो पहलू हैं। हर इंसान में यह दोनों वृतियां मौजूद होती हैं । अच्छा बुरा स्वभाव हर इंसान में होता है । लेकिन कभी-कभी अच्छा स्वभाव बल, पैसा, ईर्षा अहंकार के कारण बुरा बन जाता है । और इसी अहंकार के कारण उस मनुष्य का ,नाम, प्रतिष्ठा सब कुछ खत्म होता है । हमारे समाज में बहुत ऐसे उदाहरण है जिनमें से एक है रामायण का चरित्र जो अहंकार से खुद को ले डूबा वह है शक्तिशाली लंकाधिपति रावण ।
        एक तरफ राम जो है विनम्र अहिंसा वादी ,प्रेम का पुजारी प्रजादक्ष और दूसरी तरफ रावण अहंकारी, दुष्ट और बदनियत ।
         रावण एक ब्राह्मण पुत्र थे परम शिव भक्त थे फिर भी अहंकार के कारण वो राम से युद्ध हार गए । रावण को लगा कि कोमल तन के धनुषधारी श्री राम लक्ष्मण, केवल अपने हनुमान और अपनी छोटी सी वानर सेना तथा कम सैनिक संख्या के सहारे मुझ से क्या युद्ध करेगा । रावण से जीतना असंभव है । उसने सोचा कि श्रीराम विशाल सागर पार करके लंका तक पहुंच ही नहीं सकता । यही रावण अहंकार के नशे में भूल गया कि श्री राम स्वयं ईश्वर है । और ईश्वर को असंभव को संभव करना कोई कठिन काज नहीं ।
             राम के नाम से हर पत्थर तैर गया और पत्थरों के आधार पर पुल तैयार होकर श्री राम सेना के साथ श्रीलंका पहुंचे । और दुष्ट रावण को ललकार कर युद्ध किया । 
           रावण जब युद्ध हारने लगा तब उसके अंजर पंजर ढीले होने लगे । अभिमान का विशाल पहाड़ टूट कर बिखर गया । और इस तरह रावण का अभिमान नष्ट हुआ । सत्य की असत्य पर विजय हुई । 

प्रा रविशंकर कोलते
     नागपुर
[26/10, 1:48 pm] कुम कुम वेद सेन: विषय अंजर पंजर ढीला होना

सामाजिक मान प्रतिष्ठा वाले व्यक्ति जिनका नाम सत्य प्रकाश मिश्रा था नाम के अनुसार ही उनके व्यक्तित्व का व्यक्तिगत गुण और व्यवहार सामाजिक प्रतिष्ठा मान सम्मान परिवार एवं गांव में बना हुआ था सभी को ऐसा विश्वास था मिश्रा साहब के जैसा आचरण बहुत कम लोगों को देखने में मिलता है।
रहन-सहन खान-पान विचार छोटे बड़े सभी को आदर सत्कार करना और यथोचित प्रतिष्ठा देते हुए स्थान देना उनके व्यक्तित्व का एक प्रशंसनीय कर्म था।
सरकारी पदाधिकारी होने के बावजूद भी समाज को यह महसूस नहीं होने दिया कि इतने ऊंचे पद पर वह कार्यरत है उनके परिवार में तीन बेटियां और एक इकलौता पुत्र रहा बेटियां सब बड़ी थी पुत्र सबसे छोटा इसलिए सब का लाडला था तीनों पुत्रियां की शिक्षा गांव के ही स्कूल में मिला और गांव के पास जो शहर था उसी में उच्च स्तरीय शिक्षा भी प्राप्त की साथ ही साथ अन्य तकनीकी शिक्षाओं में भी पारंगत है ईश्वर के आशीर्वाद से तीनों पुत्रियों की शादी अच्छे परिवार में हो गई जिससे कि मिश्रा जी बहुत ज्यादा प्रसन्न चित रहा करते थे उन्हें यह महसूस होता था कि मैंने अपनी जिम्मेवारी सफलतापूर्वक ही भाई है पुत्र की एक रोता रहा और दिमाग में अच्छी एजुकेशन देने के उद्देश्य से बचपन से ही उसे दूर के शहर में हॉस्टल में रहकर पढ़ने की व्यवस्था कर दी गई 12वीं पढ़ाई तक तो अच्छे से उनका पुत्र जिसका नाम कुलदीपक था निकाल लिया लेकिन जब उच्च शिक्षा के लिए दाखिला मिल गई तो उसके
बाद उसके विचारों में बदलाव आ गया कुछ ऐसी संगति में फस गया कि वह ड्रग का सेवन करने लगा
एक दिन मिश्रा जी को यह पता लगा की उनका पुत्र जो कुलदीपक है वाह ड्रग का सेवन कर रहा है। वह बहुत ज्यादा ही परेशान हो गए सोच ही रहे थे कि शहर जाकर अपने पुत्र को ले आवे इसी बीच उनके घर एक समनआया जो थाना से आया था मिश्रा जी का तो अंजर पंजर ढीला होने लगा उनके सारे अरमान अभिमान पर पानी फिर गया। परेशानी की अवस्था में शहर पहुंचे वहां देखा उनका पुत्र इस अपराध में लिप्त है और गिरफ्तार हो गया है पिता होने के नाते अपराधी को जमानत दिलवाना था पर उनकी दिली इच्छा नहीं हो रही थी अपने आप में बहुत ही शर्मिंदगी महसूस कर रहे थे

कुमकुम वेद सेन
[26/10, 2:06 pm] शेभारानी✔️ तिवारी इंदौर: अस्थि पंजर ढीले होना
 सुरेखा अमीर बाप की बिगड़ी औलाद थी। वह बहुत बत्तमीज थी। किसी को अपने सामने कुछ नहीं समझती थी। एक बार बस कंडक्टर को जोरदार चांटा मारा, क्योंकि उसने उस दिन उसे नमस्ते नहीं किया था।यहां तक कि कॉलेज के प्रोफेसर भी उससे डरते थे। एक बार कॉलेज की तरफ से पिकनिक जाने का प्रोग्राम बना। सुरेखा भी जा रही थी, उसने कहा मैं अपनी कार से अकेले जाऊंगी। प्रिंसिपल ने यह शर्त रखी कि, सभी साथ में जाएंगे ।मजबूरन उसे भी बस में जाना पड़ा। उसका सामना उसी कंडक्टर्स से हुआ, उसने कहा क्यों रे! तू यहां क्या कर रहा है मेरे सामने मत आना वरना फिर से चांटा पड़ जाएगा। कंडक्टर ने सोचा कि आज तो इसका घमंड तोड़ने का अच्छा मौका है। जब बस एक जगह पर रुकी सभी नाश्ता करने के लिए उतर गए। सुरेखा भी उतर गई, सभी वापस आ गये,पर कन्डक्टर उसके आए बिना ही बस आगे बढ़ाने का संकेत दे दिया। वह छूट गई अब क्या.... सारा घमंड चूर हो गया ,अब क्या करें? वह चलती चलती थककर चूर हो गई। उसका अस्थी पंजर ढीले हो गए। थोड़ी अक्ल ठिकाने आई ।उसने फोन किया अपने मित्र शेखर को मैं इस जगह पर हूं ,बस को वापस लाओ।बस को फिर वापस लाया गया और फिर उसे बस में बैठाकर ले गए। आखिर उस दिन कंडक्टर को तसल्ली हो रही थी। 

श्रीमती शोभा रानी तिवारी,
इंदौर मध्य प्रदेश
[26/10, 2:39 pm] निहारिका 🍇झा: नमन अग्निशिखा मंच

विषय;-अंजरपंजर ढ़ीले होंना-थकान से चूर हो जाना
दिनाँक ;-26/10/2021
रजनी शासकीय सेवारत थी।उस पर घर व बाहर कार्य की जिम्मेदारी थी वह लगातार अपने कर्तव्य का निर्वहन करती थी।अभी कार्यव्यस्तता दोनों जगह अधिक थी ,दीवाली का पर्व जो आने वाला था ,साफ सफाई,बनाना करना बहुत कुछ करना था लगातार काम से थकान भी हो रही थी उसने सोचा एक दिन अवकाश लेकर कुछ आराम से शेष काम निबटा लेगी। उसने मशीन में ढेर से कपड़े डाले व क्रॉकरी वगैरह निकाल कर ऊनी कपड़ों को धूप में रखा कि इसकी काम करने वाली का बेटा आकर कहने लगा "माँ की तबियत ठीक न होने के कारण वह 2 दिन नहीं आएगी।अब क्या करती सारा काम फैला हुआ था। उसने सारी क्रॉकरी साफ की 2 मशीन कपडे धोए,सभी का नाश्ता खाना तैयार करते करते खिलाने के बाद जब स्वयं की पारी आयी तब तक उसके पूरे अंजर पंजर ढ़ीले हो चुके थे शाम के 5 बज चुके थे खाने की इच्छा मर गयी थीअतः सभी के लिए चाय बनाई व एक कप चाय से ही काम चला लिया।।
निहारिका झा।।।
[26/10, 2:40 pm] रजनी अग्रवाल जोधपुर: शीर्षक-"अंजर पंजर ढीले होना लघु कथा"

रीमा एक 18 साल की कॉलेज की विद्यार्थी है। उसको बहुत तेज स्कूटी चलाने में बहुत आनंद आता है ।उसे सब सलाह देते थे कि इतनी तेज मत रफ्तार रखा करोअपनी स्कूटी की ।लेकिन वह किसी की भी नहीं सुनती थी, और सब की सलाह ताक पर रखती थी। एक बार वह परीक्षा देकर घर लौट रही थी। वही रफ्तार वही विचार, चली जा रही थी ।उसी समय एक ट्रैक्टर वाला डगमगाता हुआ आया ,अपने को संभाल नहीं पाया और स्कूटी से बुरी तरह से टकरा गया । रीमा की स्कूटी के अंजर पंजर ढीले कर दिए ‌। रीमा भीअपने आप को संभाल नहीं पाई और जोरदार या यूं कहे कि खतरनाक टक्कर का शिकार हुई ,और सड़क की दूसरी छोर पर लहूलुहान होकर गिर गई ।उसे प्रायः होश भी ना रहा ।उसके इर्द-गिर्द भीड़ इकट्ठी हो गई ।रीमा के बैग से उसका पता लगाकर उसके घर फोन करके सूचना दी ,कि आपकी बेटी का एक्सीडेंट हो गया है और वह बेहोशी की हालत में 9th सी रोड पर पड़ी है ।उसकी स्कूटी के भी अंजर पंजर ढीले हो गए हैं ।आप शीघ्राअतिशीघ्र आकर उसे संभाले।

स्वरचित लघु कथा रजनी अग्रवाल
  जोधपुर
[26/10, 2:44 pm] रागनि मित्तल: जय मां शारदे
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 अग्निशिखा मंच 
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दिन- मंगलवार 
दिनांक- 26/10/ 2021 लघु कथा 
प्रदत विषय- *अंजर पंजर ढीले होना*

 राधा रोज ही अपनी सखियों के साथ नदी में नहाने ,कपड़े धोने और पानी भरने जाती। सभी सखियां हंसी मजाक करते हुए अपना कार्य आसानी से निपटा लेती। एक दिन राधा को कपड़े धोने में कुछ देर हो गई। सारी सखियां उसको छोड़ के घर वापस आ गई थी ।वह बाद में अकेली कपड़े धो कर घर वापस आ रही थी। तभी उसने देखा की एक बैल पीछे से आ रहा है। वोआगे जल्दी-जल्दी चलने लगी ।लेकिन बैल ने भी रफ्तार पकड़ ली। राधा करीब-करीब दौड़ने लगी थी ।वो बड़ी मुश्किल से दौड़ते-दौड़ते घर पहुंची। तब कहीं जाकर के बैल ने उसका पीछा छोड़ा ।सामने उसकी भाभी खड़ी थी। बोली नंद रानी ऐसे तो आप बड़ी धाकड़ बनती हैं ।बड़ी शक्तिशाली बनती हैं ।अब आपके तो *अंजर पंजर ढीले* हो गए ।

रागिनी मित्तल 
कटनी, मध्य प्रदेश
[26/10, 2:50 pm] वीना अडवानी 👩: अस्थि पंजर ढ़ीले पड़ना
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राजा अपने मां बाप की इकलौती संतान था। राजा को वो हर एक सुख उसके पिता ने दे रखे थे जो एक आम परिवार की पहुंच से बहुत दूर हों। अपने बेटे राजा के लिए अपने काम से अतिरिक्त काम कर भी पैसा अर्जित करते थे। राजा की पढ़ाई लिखाई भी उच्च कोटि के विद्यालय में करवाई। राजा को कभी काम करने की जरूरत ही नहीं पड़ी। एक बार आकास्मिक ही राजा के पिता की मृत्यु हो गई। राजा के सर से पिता का साया उठ गया अब मां की जिम्मेदारी भी राजा पर थी। राजा को ये ना पता था की उसके पिता ने उसकी कुछ महंगी ख्वाहिशों को पूरा करने के लिए बाहर से कर्ज भी उठा रखा था। पिता की मृत्यु से पहले तो उसे ना कभी मेहनत करने का अनुभव था और ना ही किसी भी तरह की जिम्मेदारी को उठाने का अनुभव था। अचानक जब उसके कांधों पर पिता के द्वारा लिये गये ऋण और घर की जिम्मेदारी आ गई तो उन जिम्मेदारियों को पूरा करते-करते उसके अस्थि पंजर सब ढ़ीले पड़ गये। जिंदगी सामान्य होते-होते उसके विवाह की उम्र भी निकल गई। राजा ने अपने नाम अनुसार सदैव राजाओं सी जिंदगी व्यतीत की थी, आज भी वो किसी की बात न सुन पाता था, हाज़िर जवाब था और रुबाबदार भी इसलिए आफिस में भी टीक ना पाया। आज खुद का बड़े शहर का मकान किराए पर देके, खुद छोटे शहर में किराए के मकान में रहता है और अपने मकान के किराए से मिलने वाली मोटी रकम से दोनों मां बेटा जीवन यापन कर रहे। राजा आज भी राजा है नाम अनुरुप और काम देख तो उसके अस्थि पंजर ढ़ीले पड़ जाते।।

वीना आडवानी तन्वी
नागपुर, महाराष्ट्र
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[26/10, 2:50 pm] विजेन्द्र मोहन बोकारो: मंच को नमन
विधा:--लघु कथा
शीर्षक:--- *अंजर पंजर ढीले होना* *(अभिमान नष्ट होना)*

गांव में प्रतिष्ठित परिवार के यहां उनके पुत्री की शादी होने वाली थी। गांव के सभी सदस्य मिलकर विवाह कार्यक्रम का सफल बनाने का प्रयोजन किए। बारात समय पर आ गई उनके मान सम्मान में कोई कमी नहीं होने दिया गया। बारात के एक महत्वपूर्ण सदस्य की इच्छा हुई अंग्रेजी शराब पीने की उसकी भी इंतजाम लोग कर दिया एक व्यक्ति को मोटरसाइकिल से दुकान पर भेज देने का प्रबंध किया। आप जाइए जो इच्छा हो उसका सेवन करें। पीने के बाद जो व्यक्ति मोटरसाइकिल से ले गया उन्हें जलमासा पहुंचा देंगा। प्रस्ताव से सहमत होकर मोटरसाइकिल पर बाराती के महत्वपूर्ण व्यक्ति व्यक्ति बैठ गये दुकान पर जाकर जमकर सेवन किए। लौटने के समय मोटरसाइकिल मे कुछ मशीनरी खराबी होने के कारण। स्टार्ट नहीं हो रहा था। वहां से कोई साधन भी नहीं था कि लौटा जाए। अंत में दोनों व्यक्ति मोटरसाइकिल दुकान पर छोड़ दिये। पैदल ही आने के प्रयास किए । बराती के महत्वपूर्ण सदस्य पैदल चलते चलते उनके शरीर के अंदर पंजर सब ढीले होने लगे। उनका सभी अभिमान नष्ट हो गया।

बारात विदा हो जाने के बाद एक कहानी बन गई। जो व्यक्ति मोटरसाइकिल पर लेकर गए थे। उनका यही कहना था हम गांव वाले पैदल चल सकते हैं शहरी बाबू को अंजर पंजर ढीला करना था अभियान नष्ट करना था। मोटरसाइकिल में कोई खराबी नहीं थी पेट्रोल ऑफ कर दिए थे।

 अतः शहरी बाबू के लोग गांव में जाकर उनके अनुकूल व्यवहार करना चाहिए।

विजयेन्द्र मोहन।
[26/10, 2:52 pm] Anita 👅झा: विषय -अंजर पँजर ढीले होना 
लघुकथा
हौंसला
पप्पु साईकिल उठा भोर के उजाले में फ़ुटबाल ग्राउण्ड पहुँच जाता है 
मम्मी - कहाँ चले ,पप्पु पढ़ाई से तुम्हारा ३६ का आँकड़ा है ।तुम्हारी परीक्षा आ रही है ।पढ़ाई कर लो  
देखो पीछे से टोका टाकी मत किया करो ?मम्मी - आज कोच ,सेहत, स्वाद ,दिशा संकेत संवाद का राज बताने वाले है । 
तभी पीछे से पप्पु के पापा आ गये ।कहने लगे - मै भी आपके साथ चलूँगा । 
नही पापा आप तो आज मैच देखने मम्मी को साथ लेकर आना ।आज आपका बेटा अनिरुद्ध थापा ,मेसी की तरह खेलेगा । और सबके अंजर पँजर ढीले कर देगा । 
पप्पु के पापा ने सोचा - चलो मेरी साधना तो सफल हुई । मै पढ़ कर बैंक का बाबु ही रह गया ।पप्पु विदेश भी जाएगा ,भारत का नाम भी रौशन करेगा । और आफ़िसर भी बनेगा 
मम्मी ने पापा से कहा -देखो इसकी पेण्ट में होल ही होल है ।उसे परवाह ही नही इसे पहन खेलने जाता है , पहले तो अपने ही अस्थि पँजर ठीक कर ले । 
तभी पप्पु अपने जूते की लेश बाँध रहा कहता - मम्मी पापा जब फटें नोट , होल वाले नोट चला सकते है । तो में इण्डिया का सपोर्ट
कर गोल मार मेडल तो ला ही सकता हूँ ।
मेरी साईकिल का कमाल देखिएगा । में आपके लिये साईकिल रेश जीत स्कूटर दिया । तो अबकी बार पापा के लिए कार तो लाऊँगा ही । 
मम्मी पापा की ओर देख मुस्काई । पप्पु को लगा आशीर्वाद मिल गया ।
अनिता शरद झा रायपुर
[26/10, 2:54 pm] पूनम सिंह कवयित्र� � इशिता स� �डीला: मंच अग्नि शिखा 
विषय.. अंजर पंजर ढीले होना, 
ज़ब देखो तब ताने, तुमने एहि किया वो नहीं किया दादा क़ो दवाई टाइम से नहीं दी, अम्मा क़ो चाय नहीं दी, सुरभि क़ो लेने नहीं गई, मानसी क़ो पकोडे बना कर नहीं दिए. उफ्फ.. ताने ही ताने.. वो सुबक सुबक कर रोती कितना ही अच्छा कर लो तब भी बस ताने ही ताने एक निवाला भी गले के नीचे फुर्सत से जो उतार पाई हो, बस वो काम के लिये ही तो बनी थी 
एक दिन ना जाने क्यूँ. रास्ते में.. उसकी बचपन की सहेली मिली जो सफ़ेद कोट पहनी थी, पता चला वह आज बड़ी डॉक्टर है. उसके आँखो के सामने उसके पुराने सपने तैरने लगे की आज वह भी डॉक्टर होती.. अब्ब भी देर नहीं हुई है. वह ड़र बनेगी. औऱ. दे देगी तलाक. विदित क़ो जो कुछ भी नहीं समझते मुझे हर बात में कमी.... आज उसने दिल कड़ा करके फैसला सुना ही दिया.. दे रही हूँ तुमको तलाक. अब्ब सब काम तुम सही समय से करना क्योंकि मेरे कॉम में हज़ार कमिया है ना.. बस अब औऱ नहीं.. औऱ उसने घर छोड़ दिया... विदित औऱ पूरा घर हक्काबक्का रह गया.. विदित क़ो तो पूरेसमय विभा क़ो घुमते देखकर उसी तरह खुद की कल्पना मात्र से अंजर पंजर ढीले हो गए.. आज सब काम करने.. से विदित क़ो एहसास हुआ की विभा जितना में तो क्या कोई नहीं कर सकता.. मेरे तो एक ही दिन में अंजर पंचर ढीले हो गए ये सोचकर विदित विभा क़ो मनाने चल दिया औऱ एक वादे के साथ की अब्ब विभा की मदद वह हर काम में करेगा औऱ विभा का सपना पूरा करने में.. पूरी मदद करेगा. @ishita singh 
Teacher in sandila block
[26/10, 2:55 pm] डा. बैजेन्द्र नारायण द्िवेदी शैलेश🌲🌲 - वाराणसी - साझा: आदरणीय मंच को नमन
विषय- अंजर पंजर ढीले होना।
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हम यात्रा पर जा रहे थे, नैनीताल।
ऊपर पहुंचने से पहले ,बस के ड्राइवर ने कहा -"इंजन में खराबी आ गई है, यहां से आप लोग ऊपर चले जाएं। मात्र 2 किलोमीटर है"!, मेरे मित्र ने कहा-" हम लोग तो देहात के रहने वाले हैं? 2 किलोमीटर तो चल ही सकते हैं! आओ चलें!" शहर के रहने वाले लोगों ने बैठकर प्रतीक्षा करना उचित समझा। हम दोनों धीरे-धीरे ऊपर चढ़ना शुरू किए। बीच में खाईं -खंदक,कतार में लहराते वृक्ष,और ऊंचे-ऊंचे पर्वतीय शिखरों को देखते हुए भय का अनुभव करते हुए, रोमांच को अपने हृदय में धारण करते हुए, किसी तरह तल्लीताल पहुंचे। इच्छा हो रही थी, अभी कहीं किसी होटल में चल कर दो बेड लिया जाए और आराम से सो जाया जाए। किंतु पेट में चूहे और बिल्ली दोनों कूद रहे थे। ढूंढते ढूंढते हम एक दुकान पर पहुंचे ।वहां सबसे पहले चाय की मांग की और उससे पूछे भोजन भी मिल जाएगा? उसने "हां "में सिर हिला दिया।
चाय पीते पीते ऐसा लगा, अब हम में बैठने की सामर्थ्य नहीं है !हमारे अंजर पंजर ढीले हो गए थे ,किंतु तब तक होटल वाले ने दोनों के सामने चार चार रोटी और थोड़ी-थोड़ी सब्जी दूध के ऊपर की मलाई चीनी डाल कर के दे दिया। जल्दी-जल्दी हम दोनों ने उसे उदरस्थ किया और मल्लीताल की तरफ होटल खोजने चल पड़े। एक सस्ता सा होटल मिला--" जेनेवा"। वहां एक रात के सौ रूपये ,एक बिस्तर का किराया था। हम लोगों के पास पैसे भी बहुत नहीं थे। एक ही बेड लिया गया। मनीष और हम दोनों ने उसी में गुड़ी मुड़ी सोकर एक ही कंबल में अपनी रात काट लिया। सुबह उठे तो नैनीताल का दृश्य देखकर बहुत सुख हुआ ।किंतु कल की थकान अभी भी हमें कह रही थी-"
 दुस्साहस मत करना। यह पहाड़ है ,यहां की यात्रा 9 दिन चले अढ़ाई कोस की होती है।।"
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डॉ ब्रजेन्द्र नारायण द्विवेदी शैलेश वाराणसी 9450186712
[26/10, 3:18 pm] 💃वंदना: लघु कथा
अंजर पंजर ढीले होना
थक कर चूर होना
दिवाली नजदीक आ रही थी घर का सारा काम बाकी था अभी तक कुछ समझ नहीं आ रहा था क्या करूं कहां से शुरू करूं दीपावली के ठीक बाद घर में बेटी की शादी भी थी नीना सोच सोच कर घबरा रही थी अभी तो बिटिया की शादी की भी तैयारी करना है फिर उसने सोचा क्यों ना लिस्ट बनाई जाए क्या काम किस तरह करना है। धीरे-धीरे वह काम को अंजाम देने लगी पहले घर की साफ सफाई लिपाई पुताई क्या लेना है क्या देना है साज सज्जा दीया बाती मिठाई प्रसादी लक्ष्मी पूजा का सामान लक्ष्मी पूजा की तैयारी सब पहले किया जाए उसके बाद धीरे-धीरे शादी की तैयारी शुरू करना है यह सब सोचकर वह एक एक काम को अंजाम देने लगी काफी हद तक उसका काम हो चुका था दीपावली की साफ सफाई में ही उसके अस्थि पंजर ढीले पड़ चुके थे वह थक कर चूर हो गई थी ठीक 1 महीने बाद बिटिया की शादी होनी थी थोड़ा बहुत आराम करके वापस शुरुआत करनी थी फिर उसने सोचा नहीं सुबह नया काम वह एक नए जोश को लेकर फिर से काम में लग चुकी थी सारी थकान को भूल कर एक नई ऊर्जा के साथ वह अपने काम को अंजाम दे रही थी वह काफी खुश थी वह पूरी लगन से मेहनत से अपने काम पर ध्यान दे रही थी।

वंदना शर्मा बिंदु देवास मध्य प्रदेश
[26/10, 3:44 pm] ओम 👅प्रकाश पाण्डेय -: अंजर पंजर ढीले होना ( अभियान नष्ट होना) --- ओमप्रकाश पाण्डेय
मैं ग्यारह मई को स्टेटस जा रहा हूँ अपने बेटों के पास , वर्मा जी ने दोस्तों के साथ आज मार्निंग वाक करते समय कहा. वर्मा जी के दो बेटे हैं और दोनों अमेरिका में रहते हैं. अपने दोनों बेटों का जिक्र वर्मा जी अक्सर अपने दोस्तों से किया करते थे, उनका कितना बड़ा घर है, कितनी बड़ी गाड़ी रक्खे हैं, कितना डालर सैलरी है, आदि. दोस्त लोग भी सुना करते थे , कोई इन बातों पर ध्यान नहीं देता था, लेकिन उनके कहने के अंदाज से अहंकार का बोध तो हो ही जाता था. हालांकि आज कल अमेरिका, यूरोप, अस्ट्रेलिया में भारत के बहुत से युवा नौकरी तो करते ही हैं. वैश्वीकरण के दौर में यह तो होना ही था. दूसरे नौकरी की तलाश में भारत से पहले भी लोग बाहर जाते ही थे, यद्यपि जाने की गति आज बढ़ गई है.
खैर वर्मा जी अमेरिका चले गए, लोग भी इस बात को भूल चुके थे. अचानक कई महीनों के बाद एक दिन वे अपनी मित्र मंडली को दिखाई पड़े. देखने से लगता ही नहीं था कि ये वही वर्मा जी हैं. लोगों ने पूछा भाई वर्मा जी सब ठीक तो है. वर्मा जी ने अनमने भाव से कहा हां सब ठीक ही है. खैर कुछ दिनों बाद काफी पूछने पर पता चला कि इस बार उनके दोनों में से किसी बेटे ने उन्हें व उनकी पत्नी को कोई खास महत्व नहीं दिया और पांच महीने उनके घर में ही पड़े रहे और उनकी उपेक्षा झेलते रहे. अपने ही बेटों के अपमानजनक वयवहार ने वर्मा दम्पति के अंजर पंजर ढीले कर दिए थे और वे निराश मन से अपने देश वापस आ गए.
( यह मेरी मौलिक रचना है ---- ओमप्रकाश पाण्डेय)
[26/10, 4:01 pm] रानी अग्रवाल: अंजर_ पिंजर ढीला होना।
२६_१०_२०२१,मंगलवार।
विषय_ अंजर_ पिंजर ढीला होना। विधा_ लघु कथा।
     अभी दिवाली नजदीक ही है।
लोगों ने अपने घर की साफ_ सफाई का काम जोरों में शुरू कर दिया है।
अपने घर को तरह_ तरह से सजाने के अरमान सबको पूरे करने है।
     मेरी सहेली मीना भी इस कार्य में जी_ जान से जुट गई है।नीचे की अलमारियां तो आराम से साफ हो जाएंगी,स्टूल पर चढ़कर ऊपर की छतें साफ करती है।
     एक दिन में उससे मिलने गई,उसने दरवाजा खोला तो वो हांफ रही थी।मैनें कहा_"ये क्या हाल बना रखा है? वो बोली_"दिवाली की सफाई में लगी हूं और क्या?घरवाले कोई मदद नहीं करते।" मैने देखा " उसके अंजर_ पिंजर ढीले हो चुके थे।"
     मैने उसे समझाया__"देख,एक साथ ज्यादा काम मत कर,थोड़ा_ थोड़ा करके कर,अपने खाने_ पीने का ध्यान रखना, वरना" तेरे अंजर_पिंजर ढीले हो जायेंगे फिर दिवाली क्या खाक मनाएगी।"
    मेरी बात उसकी समझ में आ गई ,वह बोली_"ठीक है,मैं ध्यान रखूंगी,बाबा! मुझे अपने अंजर_पिंजर ढीले नहीं करने,मुझे दिवाली मजे से मनानी है।"वह उठकर गई ,हम दोनों के लिए शरबत बनाकर लाई,हमने पिया।फिर मैं उसके घर से आ गई।
     बस मैं अपनी सभी प्यारी बहनों से ये कहना चाहती हूं कि दिवाली की सफाई जरूर करो पर उस हद तक नहीं कि तुम्हारे"अंजर_पिंजर ढीले हो जाएं।"
स्वरचित मौलिक लघु कथा__
रानी अग्रवाल,मुंबई,२६.१०.२१.
[26/10, 4:08 pm] सरोज दुगड गोहाटी: * अग्नि शिखा काव्य मंच *
* मंगलवार - २६/१०/२०२१ /
* बिषय - अंजर पंजर ढ़ीले होना - *अभिमान नष्ट होना *

दिपावली का त्योंहार नजदीक आ गया। था ! मनोरमा जी अपनी बहू के साथ मिलकर घर की साफ-सफाई कर रही थी ! उनकी बहू मीना एक खुशमिजाज और मिलनसार लड़की थी ! दोनो सास बहु हँसते बतियाते मजे से सारा काम निपटा लेतीं थी ! एक दिन एक ऊंची चांग पर मनोरमा जी कुछ सामान रख रही थी की अचानक उनका पैर फिसला और वह ऊंचाई से गिरी और उनके पैर की हड्डी टूट गई ?
             उनको पक्का प्लास्टर चढ़ गया ! डाॅ • डेढ़ महीने का बेडरेस्ट बता दिया ?
मीना अपनी सासुमाँ का तन मन से ख्याल रखती ! घर का सारा काम निपटाती ! 
दीपावली वाले दिन उसने पुरे घर की घुलाई कर पूजा की तैयारी की ! आँगन में सुंदर रंगोली बनाई ! कई तरह के पकवान बनाए ! शाम को सासु माँ को तैयार कर सुँदर सी साड़ी पहनाई ! मनोरमा जी बहू की बलैया लेती हुई बोली बहू इतनी सेवा तो मेरी सगी बेटी भी नहीं करती और प्यार से अपने गले लगा लेती है ! मीना उनको प्रणाम कर कहती हैं माँ मैं आपकी बेटी ही हूँ !
            शाम को मीना ने घर को दियों से रोशन करती है ! नन्ही मानसी आँगन में फुलझडी जलाकर खुश होती है ! पुरा परिवार एक संग खाना खाता है ! 
महेश जी भगवन के सामने हाथ फैला कर प्रार्थना करते हैं कि प्रभु ये घर युँही ही अपनी कृपा दृष्टि बनाए रखना ! और सोने सुंदर झूमके अपनी बहू और पत्नी को उपहार में देते हैं और मुस्कुरा कर कहते हैं घर लक्ष्मीयों यूँ ही घर पर 
अपनी कृपा बनाए रखना ! सास बहू दोनों खिलखिला कर हंँस पड़ती है ! 
मनोरमा अपने बेटे से कहती हैं बहू को रोशनी दिखा कर लाओ जाओ दोनों घूम कर आओ !
      मीना रात को रोशनी देख कर घर वापस आती है ! कपड़े बदल कर बिस्तर पर ढ़ेर हो जाती है ! वह अपनें पति से कहती हैं मम्मी काम में हाथ बंटाती है तो पता नहीं चलता अकेले दीपावली का काम कर के मेरे अस्थि-पंजर ढ़ीले हो गये हैं ?
मुकेश मंद-मंद मुस्कुरा कर कहता है प्रिये तुम अब आराम करो ! मम्मी को सुबह मैं नित्यकर्म करवा दूँगा और सुबह की चाय भी बना दूँगा ! बच्चों की कल स्कूल की छूटी है देर से उठेंगे ! सुबह मैं छज्जू हलवाई से नाश्ते के लिए गर्म कचौड़ीयाँ और गरमागरम जलेबियां ले आऊंगा ! गर्म चाय और गर्म कचौड़ीयाँ खाकर तुम्हारी थाकान मिट जायेगी ! मीना अपने भाग्य पर इठलाती मुकेश के आगोश में सिमट गई और कहने लगी कि उसे कितना प्यार करनें वाला परिवार मिला है ! तब मुकेश उसे गले लगाते हुए कहता तुम भी तो माँ का कितना ख्याल रखती हो ! दोनों की आँखो में प्रेम के दिये टिमटिमानें लगते हैं !

सरोज दुगड़
खारूपेटिया 
असम 
🙏🙏🙏
[26/10, 4:51 pm] 💃💃sunitaअग्रवाल: विषय_ अस्थि पंजर ढीले होना 

शीर्षक_ पूजा पाठ 
    
       पोती जेमिनी अमेरिका से दीवाली पूजा, शादी के लिए भारत आई हुई थीं । देखती दादी रोज सुबह उठकर, स्नान कर घर की पूजा पाठ कर फिर बांके बिहारीजी के मन्दिर 108परिक्रमा करती। यह तो उनका रोज का अटल नियम था । जैमिनी को देख मन करने लगा मुझे भी दर्शन कर पूजा करना चाहिए ।
   दूसरे दिन सुबह पोती दादी संग मंदिर गई , सोच रही थीं बचपन से देख रही हूं दादी को जरा भी अन्तर नही आया नियम से समय से सब काम करती हैं , इसके बाद भी मुस्कुराती रहती हैं थकान तो मानो छू के भी नही गई, एक के बाद एक मंदिर मैं पूजा करना गणेशजी शिवजी, दुर्गा मैया जी की राधा कृष्ण फिर बांके बिहारी की नित्य 108परिक्रमा करना कार्तिक का महीना चल रहा है तो पूजा का समय भी बढ़ जाता है , पता नही दादी यह सब कैसे कर लेती हैं । दादी ने टोका जैमी तेरा ध्यान कहा है ? चल जल्दी पूरी कर फेरी फिर घर जाना है मेरी तो होने को आई जैमी ने दादी को अचरज से देखा ,मेरी तो अभी शुरू ही की है मैं तो पूजा करते करते ही *अंजर पंजर ढीले पड़ गए*यह देख दादी हंसने लगीं।
जैमी तुम सारा दिन मोबाईल लैपटॉप पर काम करती हो, तुम्हारा सोना , जागना, उठना सब देर से ,अनियमित दिनचर्या है 
बैठे बैठे शरीर की नसें कमजोर हो जाती हैं , असर तो होना ही है तुम लोग आजकल जिम जाते हो , बीच में ही छोड़ भी देते हो नियम तो नियम हैं , मेरे तो ठाकुरजी की सेवा ही मेरा जिम है, उनकी कृपा से ही मैं स्वस्थ और मजबूत रहती हूं।
जैमिनी दादी की इतनी सुंदर बात सुनकर है हतप्रभ रह गई__
जल्दी सोना, जल्दी उठना, दिनचर्या मैं शामिल कर लिया। 

सुनीता अग्रवाल इंदौर मध्यप्रदेश स्वरचित धन्यवाद 🙏🙏
[26/10, 4:59 pm] सुरेन्द्र हरडे: अग्निशिखा मंच को नमन🙏
आज की विधा *लघु कथा*

विषय:-अंजर पंजर ढीले होना

अर्थ:- अभिमान नष्ट होना

     विंग कमांडर विजय वर्मा ने पान टपरी के सामने अपनी चमचमाती कार रोककर कहां ", ऐ, रम्या एक बढ़िया पान लगाओ चटनी चमन, और दो मसाला पान रमेश पान लगाते हुए देखा,' ओ साहब, पान देने के लिए नीचे उतरना पड़ता इतना ही कहते हुए विंग कमांडर विजय बड़े आगबबूला हुए। कारण की उनकी बीवी अमिता और साथ में साले साहब उस कार में बैठे थे साले और बीवी के सामने रमेश ने उनकी बेइज्जत की थी विंग कमांडर विजय ने कहा ",मुझे पहचानता नहीं ?साहब मैं आपको अच्छी तरह पहचानता हूं। आप तो बार-बार किसी की भी आदमी की बेइज्जत करते हैं वायुसेना का छोटा स्टेशन होने की वजह से सभी लोग एक दूसरे को अच्छी तरह जानते थे।
     विंग कमांडर विजय बड़े सख्त अनुशासन के पक्के थे इतना ही नहीं कोई वायुसैनिक स्टेशन के बाहर कार्यालय समय के अलावा सलाम नहीं ठोकता तो बड़े गुस्सा होते थे उनको अपने पद का बड़ा अहंकार, घमंड था, वह कार से बडे गुस्से से उतरे रमेश की कालर पकड़ने लगे, रमेश के दो दोस्तों ने विग कमांडर को जोर से धक्का दिया इस चक्कर में वह अपना संतुलन खोने की वजह से धड़ाम से कार के ऊपर गिर गए और उनकी कमर फैक्चर होगी और दोस्तों ने कहा ," इन्सान ने इंन्सान की तरह व्यवहार करना चाहिए। रमेश और सभी लोगों ने अस्पताल लेकर गए अस्पताल में विंग कमांडर के *अंजर पंजर ढीले हो* चुके थे सारा अभिमान एक पल में चकनाचूर हो गया था। तीन महीने के बाद उनकी पदोन्नति हुई।और वो ग्रुप कैप्टन बन गए हैं अब वह दिल्ली वायुसेना में पदस्थ है इसलिए कभी पद का दुरुपयोग नहीं करना चाहिए और घमंड नहीं करना चाहिए।

सुरेंद्र हरड़े
नागपुर
दिनांक २६/१०/२०२१
[26/10, 5:41 pm] 👑सुषमा शुक्ला: लघु कथा,, *अंजर पंजर ढीले होना*
अहंकार का तिरोहित होना


मंजुला का विवाह एक मध्यम परिवार में होता है। मंजुला पढ़ाई में भी बहुत अग्रणी रही पाक कला कौशल खेलकूद सभी में उसका कोई सानी नहीं था।
 बस एक कमी थी उसको अपने आप पर बहुत घमंड था। और अपने घमंड के मदमस्त में वह चूर रहती थी। किसी को कुछ नहीं समझती थी
नए परिवार में आकर भी वहां अपने मायके की जीवन शैली को ही अपनाती रही। जिससे परिवार वालो के अंदर खटास भर गई।

दीपावली का त्यौहार आता है मंजुला बहुत अच्छे से घर को सजाती है। सुंदर पकवान बनाती है और सज धज कर लक्ष्मी पूजा में अपने पति मिनेश के साथ बैठती है ।
किंतु आरती के दौरान उसको चक्कर आ जाता है और गिर पड़ती है जिससे उसके पैर की हड्डी में हेयर क्रैक ए जाता है।

अब यहां पर परिवार के लोग मंजुला का पूरा ध्यान रखते हैं। उसके अहंकार को भूल जाते हैं। और उसकी सेवा सुश्रुषा करके उसको स्वस्थ कर देते हैं।

 मंजुला में परिवर्तन आता है और वह एक बहुत कुशल गृहणी बनकर अपने आप को प्रस्तुत करती है। और परिवार में हिल मिल कर रहती है इस प्रकार से उसके अंजर पंजर या उसका घमंड पूर्णतया तिरोहित हो जाता हैl
*संदेश*
*कितनी भी काबिलियत योग्यता हो, परंतु मनुष्य का घमंड उसको नीचे *गिराता है* *इसलिए अहंकार से दूर रहा जाए*
🌹🌹🌹🌹
स्वरचित लघु कथा ।
सुषमा शुक्ल
[26/10, 5:41 pm] वैष्णवी Khatri वेदिका: 26 Oct 1921

अंजर पंजर ढीले होना लघुकथा

दिव्यांग बच्चे भीख माँग रहे थे। जैसे ही पुलिस आई वे अपनी बैसाखी छोड़कर पूरे पैरों से भागने लगे। पुलिस की पकड़ में बड़ी मुश्किल से एक बच्चा आया और दूसरा नदारद हो गया।

पकड़ कर पूछा तो बच्चे दीनू ने रोते हुए बताया कि मेरे माता-पिता बहुत गरीब हैं। कई बार घर में राशन नहीं होने के कारण पूरे परिवार को भूखा ही सोना पड़ता था। उस दिन भी घर में कुछ खाने को नहीं था इस कारण में रोता हुआ बाहर निकला।

तभी एक आदमी मेरे पास आया और कहने लगा-"मैंने सब सुन लिया है। तेरे घर की हालत ठीक नहीं है। मुझे तुम्हारे परिवार पर बड़ी दया आ रही है। मेरे साथ चलो। मैं तुम्हें बहुत अच्छी नौकरी दिलवा दूँगा। अभी अपने माता-पिता को कुछ भी नहीं बताना। बाद में सरप्राइज़ देना। ख़ूब सारे पैसे देखकर तुम्हारे माता-पिता हैरान और खुश हो जाएँगे।"

वो मुझे ट्रेन में बैठा कर ले गया। न जाने कौन सा शहर था। वहाँ जाकर पहले तो बहुत ख़ातिरदारी की। खाना खिलाया। उसके बाद एक कमरे में बंद कर दिया। जहाँ पर बहुत सारे बच्चे थे। उन बच्चों को भीख माँगने की ट्रेनिंग दी जा रही थी कि हाथ-पैर होते हुए भी अपंग बनकर कैसे भीख माँगी जा सकती है।

मैंने इंकार किया तो कहने लगे-'भीख तो मंगवाएँगे ही। इसके लिए चाहें तुम्हारे हाथ-पैर सच में ही क्यों न तोड़ने पड़ें। इस डर से फिर मैंने भी भीख माँगना शुरू कर दिया।

थोड़े दिनों के बाद दूसरा बच्चा राजू भी एक मंदिर में भीख माँगता हुआ पकड़ा गया। उसने बताया कि मम्मी-पापा हमेशा पढ़ने के लिए बोलते रहते थे। मुझे पढ़ना अच्छा नहीं लगता था। मैं ज्योंही घर से नाराज़ होकर बाहर निकला तो एक लड़का मिल गया। वह कहने लगा कि पढ़ाई में क्या रखा है। मस्ती के दिन हैं। चलो मेरे साथ। हम मज़े करेंगे। आगे की कहानी लगभग दीनू जैसी ही थी। दोनों भिखारियों के सरगना के हाथों फंस चुके थे।

उनके कहने पर पुलिस ऑफ़िसर ने पूरी टीम के साथ मकान पर छापा मारा तो सरगना के अंजर पंजर ढीले हो गए। अपराधी गुंडों को पकड़ कर जेल में डाला गया।

वहाँ बहुत से बच्चे मिले।उन्हें पकड़कर पहले रिमांड होम भेजा गया। बाद में बच्चों से पता लेकर उनको उनके माता-पिता के हवाले किया गया और 

बच्चों के माता-पिता उन्हें गले लगा कर बहुत खुश हुए। बच्चों ने भी अपने माता पिता का कहना मान कर आगे बढ़ने की क़सम खा ली। उनके परिवार खुशी से रह रहे हैं। बच्चों को कभी भी ऐसी नहीं करनी चाहिए। माता-पिता बच्चों के भले के लिए ही डाँटते या मारते हैं।

वैष्णो खत्री वेदिका
[26/10, 5:48 pm] रामेश्वर गुप्ता के के: अंजर पंजर ढीले होना-लघुकथा
राजीव अपने घर का एकलौता लडका है। उसके पिता जी का बड़ा ब्यौपार है। उसके परिवार में रूपयो की कोई कमी नहीं है। आज राजीव ओडी गाड़ी के शोरूम जाकर अपने लिए ओडी गाड़ी घर ले आया।मां ने समझाया :
इतना खर्चीला मत बनो। समय बीता, राजीव की शादी हो गई। घर में बहू आ गई। अब राजीव के खर्चे और बढ गये।
एक दिन राजीव के पिता जी ने राजीव को बुलाया और उससे खर्चे कम करने के लिए कहा। इतना सुनते ही राजीव और उसके पिता जी में कहा सुनी बढ गई और राजीव ने अपनी पत्नी के साथ घर छोड़ने का फैसला कर लिया।
घर छोडने के बाद उसे न कोई अच्छा काम मिला और न ही उसे ढंग की रहने की जगह मिली। उसे एक महीने के बाद ही उसके अंजर पंजर ढीले हो गये। 
स्वरचित, 
रामेश्वर प्रसाद गुप्ता ।
[26/10, 5:52 pm] डा. अंजूल कंसल इन्दौर: अंजर पंजर ढीले होना- थकान से चूर होना

कांति बाई फलों का टोकरा लेकर आ गई। घर की घंटी बजाई।मैंने दरवाजा खोला और फलों को देखना शुरू किया। मैंने कांति बाई को देखा और पूछ बैठी-
" कांतिबाई, आज तेरे अंजर पंजर क्यों ढी़ले हो रहे हैं। रोज तो खुशी-खुशी फल बेचकर जाती थी। कांति बाई दुखी होती हुई बोली-" बाईसा मेरे बड़े बेटे को कोरोना हो गया है, उसे अस्पताल भर्ती किया है। मेरे पैरों में जान नहीं है। ये चिलचिलाती धूप अब सहन नहीं हो रही है। बाई साहब, जल्दी से फल ले लो। मुझे अस्पताल जाना है।"
"ठीक है" कह कर मैंने कुछ फल ले लिए और पैसे दे दिए।कांतिबाई की हालत ठीक नहीं लग रही थी। फल के अतिरिक्त कुछ रुपए और,मैंने उसे पकड़ा दिए-" बेटे का इलाज करवा लेना। अपने अंजर पंजर ढी़ले ना होने दे।अभी तुझे बहुत काम करना है।"
 कांति बाई फुर्ती से उठी और आंखों से ओझल हो गई ।

डॉक्टर अंजुल कंसल "कनुप्रिया"
26-10-21
[26/10, 6:50 pm] आशा 🏆🏆जाकड इन्दौर: लघुकथा
मुहावरा - अस्थि पंजर ढीले होना 

भारती के पति एनटीपीसी में एडीशनल मैंनेजर थे।उसके दो बच्चे थे एक बेटा और बेटी ।बेटा इन्जीनियर बन गया और बिटिया भी इंजीनियर । उसकी बड़ी इच्छा थी बेटा विदेश में जाकर रहे और उसका बेटा सिंगापुर सर्विस करने चला गया फिर आरती के पति ने शानदार कोठी बनवाई फरीदाबाद में। आरती के बेटे ने सिंगापुर में एक लड़की पसंद कर ली तो आरती ने बड़े खुश होकर अपनी बेटे की शादी कर दिया और कुछ दिनों के बाद उसने अपनी बेटी की भी शादी कर दी। आरती बहुत खुश थी कि मैंने समय रहते अपनी सारी जवाबदारी पूरी कर दी ।उसके पति रिटायर हो गए थे तो बस वो कभी - कभी अपने बेटे के पास चली जाती लेकिन अपने रिश्तेदार ( सास,ननद) से ज्यादा मतलब नहीं रखती थी उसके कोई फ्रेंड भी नहीं थी।आरती के पति भी ज्यादा किसी से मेलजोल नहीं रखते थे और विशेषकर वह अपने से नीचे लोगों से ज्यादा बातचीत भी नहीं करते थे । कोरोना काल में सर्वेन्ट का घर पर आना बंद हो गया सारा काम अब आरती को ही करना पड़ता घर भी काफी बड़ा था घर की सफाई, गार्डन की सफाई बर्तन वगैरह सभी काम करना पड़ता था। किसी को काम करने की बिल्कुल आदत नहीं थी लेकिन उसके पति अब आरती की हेल्प करने लगे और बर्तन वह साफ कर देते ,आरती घर की सफाई करती खाना बनाती है इस तरह से मिलजुल कर काम कर लेते। बाहर गार्डन था तो माली बाहर आकर पेड़ -पौधों की सफाई कर जाता था। बेटी नोएडा में रहती थी ।घर काफी बड़ा था तो आरती ने बिटिया को 1 साल पहले ही अपने पास बुलवा लिया था । उन सभी को एक वैक्सीन लग चुकी थी और दूसरा वैक्सीन लगवाने की तैयारी में थे तभी अचानक आरती को बुखार सा गया जब कि आरती बिल्कुल घर से बाहर नहीं जाती थी ,ना आरती की बेटी- दामाद और न आरती के पति। केवल उनके यहां दूध वाला दूध देने आता था पता नहीं कैसे आरती को बुखार आ गया । आरती ने डॉक्टर से पूछ कर दवा ली और अपना पूरा ध्यान रखा लेकिन धीरे-धीरे बेटी और दामाद को भी बुखार हो गया । अब आरती के पति सभी का ध्यान रखते लेकिन कुछ दिन के बाद उन्हें भी बुखार आ गया जबकि वे सभी ऊक साल से योगा कर रहे थे ,काढ़ा वगैरह भी लेते थे ।आरती के पति को एकदम सांस लेने में मुश्किल होने लगी तब आरती ने रिहन्द नगर के अस्पताल में उनको भर्ती करवा दिया जहांँ उनको ऑक्सीजन लगाई गई लेकिन फिर भी उनको आराम नहीं मिल रहा था तब आरती ने अपने बेटे को फोन किया लेकिन उस समय फ्लाइट बंद थी इसलिए बेटा नहीं आ सका बस वहीं से वह डॉक्टर से बातचीत करता रहा।आरती ने अपनी ननद को फोन किया कि दीदी प्रार्थना करो आपके भाई की तबीयत ठीक नहीं है 
आरती की ननद ने अपनी मांँ को भी फोन किया सभी भगवान से प्रार्थना करने लगे लेकिन आरती के पति को आराम नहीं मिल रहा था और वहां के डॉक्टर भी ज्यादा ध्यान नहीं दे रहे थे जो उनकी हॉस्पिटल की इंचार्ज थी उसके पति कभी आरती के पति के साथ काम करते थे लेकिन लेकिन उसने उनके लिए कोई रिकमन्ड नहीं की । आरती ने फिर अच्छे हॉस्पिटल के लिए बहुत कोशिश की लेकिन किसी अच्छे हॉस्पिटल में उन्हें बैड नहीं मिला और कहीं बैड मिला तो ऑक्सीजन की समस्या थी। हार कर बड़ी मुश्किल से गुड़गांव के एक हॉस्पिटल में उन्हें बैड व आक्सीजन दोनों की सुविधा मिली। उसने अपने पति को वहांँ एडमिट कर दिया उनको वहाँ रेमिडसिविर भी लगाया गया लेकिन कोई फायदा नहीं हुआ । आरती अकेली ही अपनी बेटी दामाद के साथ हॉस्पिटल भागती रही ।कोरोना के कारण कोई रिश्तेदार भी आ नहीं सका और आसपास के लोगों ने भी कोई सहायता नहीं की क्योंकि आरती किसी से वास्ता रखती नहीं थी। कोरोना की मार ने आरती के अस्थि पंजर सब ढीले कर दिए और तीन-चार दिन के अंदर ही आरती के पति आरती को रोती -बिलखता छोड़ कर चले गये।


आशा जाकड़
[26/10, 7:18 pm] शेभारानी✔️ तिवारी इंदौर: अस्थि पंजर ढीले होना
 सुरेखा अमीर बाप की बिगड़ी औलाद थी। वह बहुत बत्तमीज थी। किसी को अपने सामने कुछ नहीं समझती थी। एक बार बस कंडक्टर को जोरदार चांटा मारा, क्योंकि उसने उस दिन उसे नमस्ते नहीं किया था।यहां तक कि कॉलेज के प्रोफेसर भी उससे डरते थे। एक बार कॉलेज की तरफ से पिकनिक जाने का प्रोग्राम बना। सुरेखा भी जा रही थी, उसने कहा मैं अपनी कार से अकेले जाऊंगी। प्रिंसिपल ने यह शर्त रखी कि, सभी साथ में जाएंगे ।मजबूरन उसे भी बस में जाना पड़ा। उसका सामना उसी कंडक्टर्स से हुआ, उसने कहा क्यों रे! तू यहां क्या कर रहा है मेरे सामने मत आना वरना फिर से चांटा पड़ जाएगा। कंडक्टर ने सोचा कि आज तो इसका घमंड तोड़ने का अच्छा मौका है। जब बस एक जगह पर रुकी सभी नाश्ता करने के लिए उतर गए। सुरेखा भी उतर गई, सभी वापस आ गये,पर कन्डक्टर उसके आए बिना ही बस आगे बढ़ाने का संकेत दे दिया। वह छूट गई अब क्या.... सारा घमंड चूर हो गया ,अब क्या करें? वह चलती चलती थककर चूर हो गई। उसका अस्थी पंजर ढीले हो गए। थोड़ी अक्ल ठिकाने आई ।उसने फोन किया अपने मित्र शेखर को मैं इस जगह पर हूं ,बस को वापस लाओ।बस को फिर वापस लाया गया और फिर उसे बस में बैठाकर ले गए। आखिर उस दिन कंडक्टर को तसल्ली हो रही थी। 

श्रीमती शोभा रानी तिवारी,
इंदौर मध्य प्रदेश
[26/10, 7:41 pm] +91 70708 00416: मंच को नमन, 🙏
विषय-अंजर -पंजर ढीले होना
विधा-लघुकथा
         बहुत दिनों से बीमार चल रही गंगू बाई ने तो अब आशा ही छोड़ दी थी कि मैं कभी ठीक नहीं हो पाऊंगी....? कैंसर की बीमारी से हताश...? गंगू बाई को एक बेटा था जो विदेश में नौकरी करता था। पिता भी काफी बूढ़े हो चुके थे....वो अपना ख्याल रख लें यही बहुत बड़ी बात थी... उनकी सेवा करने के नाम पर कोई नहीं... ऐसे में गंगू बाई..? बेटा कभी-कभी फोन कर लिया करता था..... सभी की चहेती निशा जो कि पेशे से नर्स थी, गंगू बाई की भी देखभाल किया करती थी। गंगू बाई ने खुश होकर निशा को गले लगा लिया और खूब रोने लगी,फिर बोली"-बेटी निशा मुझे तो कोई बेटी नहीं हुई पर तूने बेटी का फ़र्ज़ निभाया है......इतनी सेवा.... मैं तो धन्य हो गई.....'युग-युग जियो बेटी 'खूब आशीर्वाद दिया। अपनी राय की ड्यूटी पूरी कर निशा अपने घर पहुंचती है... बच्चे दौड़कर मां की गोद में बैठ जाते हैं.. बच्चों को गोद में पुचकारते -पुचकारते निढाल हो जाती है,... उसके अंजर-पंजर ढीले हो जाते हैं।

डॉ मीना कुमारी परिहार
[26/10, 8:13 pm] चंदा 👏डांगी: $$ अस्थि पंजर ढीले होना $$

बात मेरे दसवीं की बोर्ड परीक्षा की है । मई का महीना था मेरे दो पेपर हो गए थे,तीसरे पेपर के दिन मैं दोपहर को पढ़ाई कर रही थी कि अचानक मुझे नींद आ गई । सवा तीन बजे विद्यालय के चपरासी की आवाज से मेरी नींद खुली ।मैं एकदम से उठी और देखा की सवा तीन बज चुकी है ,मैं जल्दी से तैयार होकर विद्यालय पंहुची । एक तो देर हो गई और परीक्षा नहीं दे पाने के डर से मैं दौड़ते हुए विद्यालय पंहुची तक तक मेरे अस्थि पंजर ढीले हो चुके थे । लेकिन मेरे लिए अच्छी बात ये रही कि साढ़े तीन बजने के बाद भी प्रिंसिपल सर ने मुझे परीक्षा देने की अनुमति दी ।बस मेरा आधा घंटा कम मिला ।

चन्दा डांगी रेकी ग्रैंडमास्टर 
रामटेकरी मंदसौर मध्यप्रदेश
[26/10, 8:32 pm] पुष्पा गुप्ता / मुजफ्फरपुर: 🌹🙏अग्नि शिखा मंच 🙏🌹
 विषय:अंजर- पंजर ढीला होना
विधा : लधुकथा
दिनांक: 26/10/21
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     रामनाथ पेशे से वकील थे,,, अपने इलाके के संपन्न और सुशील व्यक्ति,,,
सबके आदर के पात्र,,,न कभी किसी से 
झगड़ा ,,न अनबन ,,,।
      घर भी पूरी तरह व्यवस्थित,,,बच्चे भी 
अपनी ' अपनी दुनिया में खुश ,,,,सभी नौकरी पेशे में ,,,। परन्तु हाय यह क्या ?
     उनके परिवार पर किसीकी बुरी नजर 
लग गयी,,, और देखते ही देखते पता नही
क्या हो गया ,,,,,!!
      रामनाथ अब बूढ़े हो चले थे ,,,,,यूँ 
कहें कि पचहत्तर बसंत देख चुके थे ।
अब उनकी वाणी हद से ज्यादा कर्कश हो गयी थी ,,,,सब पर झल्ला जाना ,,,गंदी
गालियां देना,,,उनकी आदत बन गयी थी।
पति- पत्नी का तकरार जाने अनजाने चलता रहता।
    उनकी पत्नी सुशीला ,,, नाम और काम मे भी बहुत नेक थी किन्तु पति की बदमिजाजी से वह भी तंग आ गयी थी ।
रामनाथ खाना पानी कुछ भी माँगता तो, गाली भरी --ऊँचीआवाज़ में ही बोलता ।
  अड़ोस- पड़ोस भी उसके व्यवहार से तंग थे ।
   एक दिन एक पड़ोसी ने डाटते हुए कहा---" ओ रामनाथ चा ,आपका अंजर- पंजर ढीला पड़ता ही जा रहा है,,,क्या बात है ? हमेशा सबको घुड़कते रहते हैं? "
       अन्य लोगों ने भी इस बात को हवा दी,,,,,सुशीला मन ही मन खुश हो रही थी,,,
    रामनाथ का चेहरा उतर, गया ,,,,वह घर मे घुस गया,,,,,।
   
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स्वरचित एवं मौलिक रचना 
-- डॉ पुष्पा गुप्ता
 मुजफ्फरपुर
 बिहार 
🌹🙏

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