Monday, 11 October 2021

Akhil Bharati agnishikha Manch ke block per Aaj dinank 11/ 10/2021 ko bal geet" pita hamare" shikshak per padhen aur rachnakaron Ko shean Alka Pande Mumbai


पिता हमारे 

ईश्वर का दिया वरदान हैं पिता ।संस्कारों की खान है पिता ।।
ज्ञान का भंडार है पिता । 
बच्चों का जीवन सुरक्षित रखते है पिता ।।
बच्चों को सच्चाई के पथ पर चलाते हैं पिता ।
उंगली पकड़कर चलना सिखाते हैं पिता ।।
धर्म और कुल की मर्यादा का ज्ञान कराते हैं पिता ।
नैतिकता का पाठ पढ़ाते हैं पिता ।।
देवता तुल्य होते है  पिता ।
ईश्वर का वरदान है पिता ।।
वेद , पुराण ,उपनिषद है पिता ।
एक नाता ,एक रिश्ता है एक अनुपम संबंध है पिता ।।
शीतल मंद बयार हैं पिता । 
बरगद सी घनी छांव है पिता ।
ईष्या,जलन से सदा बचाते हैं पिता ।।
दुख में सुख की वर्षा हैं पिता । 
हमारी सारी सुविधा सुविधा है पिता ।।
हमारी पहचान है पिता ।
हमारे गुरु हैं पिता ।।
तिनका तिनका जोड़ कर प्यार का घर बनाते है पिता । 
अपने बच्चों को उसमें सुरक्षित रखते हैं पिता ।।
बच्चों की उत्तम परवरिश करते हैं पिता । 
परवरिश में अनेकानेक दर्द सह जाते हैं पिता ।।
अविराम भरण पोषण करते हैं पिता ।बचपन से लेकर जवानी तक हमारे ऊपर प्रेम बरसाते हैं पिता ।।
बच्चे बेशक भूल जाए पिता को । 
पर बच्चों को कभी नहीं भूल पाते हैं पिता ।।
उनको अपने पैरों में खड़ा कर जाते हैं पिता । 
उन्हें उनकी मंजिल तक पहुंचाते हैं पिता ।।
अपमान का घूंट पीकर बच्चों की इच्छाएं पूरी करते हैं पिता ।
ईश्वर का वरदान हैं पिता । 
बच्चों के उज्जवल भविष्य बनाते हैं पिता ।।
बच्चों के लिये जितें हैं पिता ।
घर फलता फूलता है यदि साथ हैं पिता ।।
अलका पाण्डेय

❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️❤️





[11/10, 7:39 am] रामेश्वर गुप्ता के के: पिता हमारे (बालगीत)
पिता हमारे,
कितने अच्छे है।
सुबह सबेरे हमदोनों, 
सैर पर जाते है।। 
पिता............... 1 
प्रात: नमन करते, 
रोज हम सूरज को। 
दिन मधुर मेरा, 
मेरे पिता बनाते है।। 
पिता................ 2
रोज हमको वह, 
पाठ को पढाते। 
गणित अंग्रेजी सब, 
अच्छे से समझाते है।। 
पिता................. 3 
अच्छे स्कूल में, 
मै पढता हूँ। 
पिता जी के कारण, 
अच्छे नम्बर आते है।। 
पिता.................. 4
हर जरूरत को मेरी, 
पूरी वह करते है।
मेरे पिता मेरे गुरु है, 
सही राह बताते है।। 
पिता................. 5
इस संसार में, 
मेरे पिता ईशतुल्य। 
मेरा घर मंदिर है, 
यह हम जानते है।। 
पिता................. 6
स्वरचित, 
रामेश्वर प्रसाद गुप्ता ।
[11/10, 8:31 am] विजेन्द्र मोहन बोकारो: मंच को नमन।
विधा:-- *बाल गीत*
शीर्षक:--- *पिता*

हमारे लिए
संसार होता है पिता।
मां का सिंगार होता है पिता।
भगवान के रूप में होता है पिता।
अपना पेट काट काट कर 
हमें खिलाता थे पिता।
खुद के इच्छाओं को दिल दबाते थे पिता।
मुझे अपने कंधों पर बैठाकर
 घूमाते थे पिता।
घोड़ा बन अपनी पीठ पर चढ़ाते थे पिता।
मैंने कभी आराम करते नहीं देखे पिता को।
समझे नहीं हम आपकी भावनाओं को हे पिता।
सोचते थे नाजाय़ज दखल देते हैं पिता।
आपके आशीर्वाद से सब कुछ पाया है मैंने।
 पिता को कोटि कोटि प्रणाम करता हूं।

विजयेन्द्र मोहन।
[11/10, 9:46 am] आशा 🌺नायडू बोरीबली: 🌹 पिता हमारे **************

*हो हमारे जन्मदाता
ये जीवन 
तुम्हीं ने दिया ।
पाकर ये
सुंदर काया
हुई कृतार्थ मैं 
इस जीवन में ।
ईश्वर ने 
सृष्टि सजाई 
तुम ने संवारा 
जीवन मेरा ।
कितना ही 
उपकार करूं मैं
कभी उऋण 
हो सकती नहीं मैं ।
लाड़ प्यार से
पाल पोसकर
शिक्षा है तुमने
दान किया।
आज जीवन में
जो खुशहाली
उसकी नींद 
तुम्हीं ने डाली है ।
 सदा हो सर पर
हाथ तुम्हारा 
यही है हम सब की 
अभिलाषा।
मां बाबा को हे ,ईश्वर दे,
सुख शांति
दीर्घायु वह
सुस्वास्थ्य ।
***************
डाॅ.आशालता नायडू
भिलाई .छत्तीसगढ़.
****************
11/10/2021.
[11/10, 10:11 am] कुंवर वीर सिंह मार्तंड कोलकाता: 🌺सोमवार 11/10/ 2021
🌺समय - सुबह ८ से शाम ७ बजे तक 
🌺 आज का विषय_ पिता हमारे
🌺 बाल गीत 

काम हमारे करते सारे 
कितने प्यारे पिता हमारे।

मां ने हमको जन्म दिया है
जीवन देते पिता हमारे।

मां ने ममता की छाया दी
धूप दिखाते पिता हमारे।

धरती जैसी माता होती
आसमान से पिता हमारे।

खाना पीना कपड़ा लता
सभी जुटाते पिता हमारे।

खेल खिलौने और किताबें
हमें दिलाते पिता हमारे।

बाग बगीचे चिड़ियाखाना
सभी दिखाते पिता हमारे।

आइस क्रीम हो चॉकलेट हो
लेकर आते पिता हमारे।

अगर जरा तबियत खराब हो
दवा खिलाते पिता हमारे।

इतना सब कुछ कैसे पाते
अगर न होते पिता हमारे।

© कुंवर वीर सिंह मार्तंड, कोलकाता
[11/10, 10:47 am] 💃वंदना: विषय हमारे पिता
कविता  अंगूर

उठ बिटिया जल्दी से उठजा अपनी अखियां खोल।
देख वही नीली दस्ती में  लाया में अंगूर।

जल्दी से खा ले वरना आ जाएंगे लंगूर।
देख वही नीली दस्ती  में लाया हूं अंगूर।

लंगूर भूल से कह डाला ये तो है नन्हे फूल।
देख वही नीली दस्ती में लाया हूं अंगूर।

भैया और बहना को भी देना तू जरूर।
देख वही नीली दस्ती में लाया हूं अंगूर।

जा जल्दी से जाकर अपनी मम्मी को भी ढूंढ।
देख रही नीली दस्ती में लाया हूं अंगूर।

बात बात में रोना मत तू तो है मेरी हूर।
देख रही नीले दस्ती मे लाया हूं अंगूर।

अपना और  अपनों का भी रखना अब तू ध्यान।
देख वही नीली दस्ती में लाया हूं अंगूर।

हु मैं बहुत पास में तेरे समझ ना मुझको दूर।
देख वही नीली दस्ती में लाया हूं अंगूर।

तुम सब की सांसो में मैंने बसा लिया एक ठौर।
देख  वही नीली दस्ती मे लाया हूं अंगूर।

उठ बिटिया जल्दी से उठ अपनी अखियां खोल।
देखो ही नीली दस्ती में लाया हूं अंगूर।

चाहे हो कितनी ही बड़ी पर मेरे लिए तू छोटी सी
उठ बिटिया जल्दी से उठ जा अपनी अखियां खोल
देख वही नीली दस्ती में लाया हूं अंगूर।

यह मेरी स्वरचित रचना है

वंदना रमेश चंद्र शर्मा
52 सर्वोदय नगर देवास
[11/10, 11:33 am] 👑पदमाकाक्षी शुक्ला: 🙏🌹 *अग्नि शिखा मंच* 🌹🙏
🙏🌹 *जय अम्बे*🌹११/१०/२१🌹🙏
🙏🌹बाल कविताः हमारे पिता 🌹🙏
🙏🌹 *बाहर लेकर जाओ पापा* 🌹🙏

मुझको गोद में बिठाना ।
घरसे बाहर है जाना ।।
मुझको खिलौने दिलाना ।
मुझे छोड़ कहीं न जाना।। 

मुझे चाहिये बोल- बेट।
क्रिकेट साथ में खेलते।।
पापा बोलिंग आप करो। 
रन के लिए हम भागते।। 

पापा को आज हराना। 
जीत की खुशी मनाना।। 
चॉकलेट है दिलवाना। 
दोनों साथ साथ खाना ।। 

सागर किनारे घुमाना । 
रेती का महल बनाना ।।
पापा कुल्फी है खाना। 
आज खुशी साथ मनाना।। 

🙏🌹पद्माक्षि शुक्ल 🌹🙏
[11/10, 12:17 pm] 👑सुषमा शुक्ला: कविता का शीर्षक है पिता🙏

पिता परिवार का मुखिया और सूत्रधार होता है ,,जो कांधे पर जिम्मेदारियों का निर्वाह करता है🌷 पिता जीवन का सच्चा हीरो है जो सही मार्ग दिखलाता है🌷

पिता प्रेरणा देते और सच्चे इंसान हैं ,यह परिवार के भगवान हैं 🌷 वे जीवन के मूल्य सिखातेहैं,, आगे बढ़ने का हौसला दिलाते हैं🌷🌷

पिता बरगद की छांव है अनुशासन की आव है🙏 आंसू छुपा कर हरता सब दुख है ,,और देखो हम सबको घाव छुपाकर देता सुख है💐💐💐

घर के हाल पता ना चले किसी को,, खुद की तकलीफ को छुपा कर रखता है🌷🌷 वह बड़े नसीब वाले होते हैं जिनसे सिर पर पिता का साया होता है🙏🙏 हर ख्वाहिश पूरी हो जाती है जब पिता साथ होता है🌷🌷



हमको छांव में रखकर वह जलता रहता है 🙏और सिर्फ और सिर्फ परिवार की चिंता
 में घू लता रहता है पिता का सम्मान करो और इनके भी
 साथ खड़े रहकर चलते रहो🙏💐🙏💐🙏

स्वरचित🌷 सुषमा शुक्ला
[11/10, 12:21 pm] शुभा 👅शुक्ला - रायपुर: मेरे पापा प्यारे पापा
****************
मै हूं अपने पापा की लाडली 
हरदम स्वस्थ प्रसन्न रहती हूं
रहूं कभी भी और कहीं पर 
उनके है दिल में बसती हूं 

गोदी में पाया है मैंने उनसे
अत्यधिक प्यार दुलार 
मां तो आखिर मां ही होती पर पापा का कम नहीं है प्यार

जब मैं बिल्कुल छोटी थी बड़ी शरारती करती थी 
मां मेरी तंग हो जाती है पापा 
के संग हंसती थी

उनकी उंगली थाम के मैंने
जीवन पथ पर चलना सीखा
जीवन की विषम परिस्थितियों में मैंने गिर गिर कर फिर उठना सीखा

मुझको शाला छोड़ने जाते
अवकाश के पहले ही आ जाते
उनसे दूरी मुझको खलती वो भी 
मुझ बिन रह नहीं पाते

पसंद नहीं था मेरा बाहर जाना
पर इच्छा को मेरी हरदम माना 
जहां भी जब घूमना मैं चाहूं 
मुझे लेकर हो गये रवाना

जब परीक्षा में रात को पढ़ती
मेरे साथ वो भी जागते
जरा कभी जो मैं घबराऊं
बैठ मेंरी हिम्मत बढ़ाते

अब हो गरी है मेरी शादी 
अब ना रही मैं उनकी शहजादी
फिर भी मुझपे जान छिड़कते
मिलने के बहाने ढूंढते रहते 

गर मुझको कुछ हो जाए तो
सारा मायका सर पे उठाते
ससुराल में मेरी आ धमकते
मुझको अपने गले लगाते

कोई इच्छा ना रही ऐसी 
जो पूरी ना हो पायी हो
भाग्य नहीं सौभाग्य ये मेरा 
इनके घर जन्म लेकर आई हूं

तो ऐसे हैं मेरे ये प्यारे पापा
जंग से निराले न्यारे पापा
मैं हूं उनकी सोन चिरैया
ये हैं मेरे लाडले पापा

शुभा शुक्ला निशा
रायपुर छत्तीसगढ़
[11/10, 12:34 pm] डा. महताब अहमद आज़ाद /उत्तर प्रदेश: बच्चों का अरमान पिता।
घर की शान है पिता।।
पिता की छाया।
आसमान का साया।।
परेशानी अगर आयें।
पिता ढ़ाल बन जायें।।
पिता ने चलना सिखाया।
आसान सफर बनाया।।
देख मेरे दुख को।
पिता को कुछ न भाया।।
पिता का सब करें सम्मान।
उनका सब रखें ध्यान।।
*डा.महताब अहमद आज़ाद* उत्तर प्रदेश
[11/10, 12:43 pm] शेभारानी✔️ तिवारी इंदौर: हमारे पिता 

हमारे पिता हमारा विश्वास हैं,
 जीवन में वही सबसे खास है,
 हम सब तो नन्हे- नन्हे तारे हैं,
 वही तो हमारा आकाश हैं ।

 उंगली पकड़कर चलना सिखाते हैं,
 पीठ पर बिठाकर हमें खिलाते हैं,
 हाथ पकड़कर स्कूल ले जाते हैं,
 और हमारा गृह कार्य करवाते हैं,
 हमारे दुख सुख का ख्याल रखते ।

  हर रोज हमें घुमाने ले जाते हैं,
  हमारे पसंद की चीज दिलाते हैं,
  परिवार का पूरा ध्यान रखते हैं,
  हम सबको प्यार भी करते हैं।

पिता हैं तो जीवन खुशहाल है,
वर्ना जीवन में उदासी के साये हैं,
सही-गलत क्या , हमें सिखलाते,
हमारे किस्मत को चमकाते हैं।

 श्रीमती शोभा रानी तिवारी ,
619अक्षत अपार्टमेंट खातीवाला टैंक इन्दौर
मध्य प्रदेश।
[11/10, 12:49 pm] वीना अडवानी 👩: पिता हमारे
*********

पिता हमारे बहुत हैं खास
इनसे खरें हम कितनी आस।।

खुद को खूब खपाते हैं
हम ये समझ ना पाते हैं।।

खुद पहने सादा सा हर दम़
हमें अच्छा पहना हीरो बनाते है।।

अतिरिक्त कार्य भी कर दफ्तर में
सब पूरत पूरी कर जाते हैं।।

फिर भी सभी मां को चाहते
पिता ये भी देख खुश हो जाते हैं।।

थके हारे जब आते घर पिता
हम गले पिता के लग जाते हैं।।

पिता भी देखो प्यार पाके बच्चों से
पल में थकावट भूल बच्चे बन जाते हैं।।

वीना आडवानी तन्वी
नागपुर, महाराष्ट्र
******************
[11/10, 12:59 pm] चंदा 👏डांगी: $$ पिता $$

नही किया किसी को कभी मना
मांगा जिसने भी उसको वो दिया
हम सबको पढ़ाया जितना हम चाहते
सुनी नही कभी उनकी ऊंची आवाज 
फिर भी हम सब डरते करके लिहाज 
पढ़ाई की उन्होंने सिर्फ कक्षा छह तक 
 चुटकियों मे करते हल सारे सवाल
करते नही थे कभी कोई बवाल 
सम्मान देते थे उनको सारे गाँव वाले 
कपड़े की कीमत रखते थे सबसे कम
ग्राहक उनकी दुकान पर रहते हरदम 
बच्चों को बनाया जीवनयापन लायक 
श्रद्धांजली अर्पित करते हम आज
14 अक्टूबर को पुण्यतिथि है खास
जीवन सभी का सवारकर 
हो गए आप ब्रह्म लीन
चतुर्दशी थी सामयिक मे बैठे थे 
गुरू वन्दना करते हुए संथारा पूर्वक  
स्वर्ग है सिधाये शत शत नमन 

चन्दा डांगी रेकी ग्रैंडमास्टर 
रामटेकरी मंदसौर मध्यप्रदेश
[11/10, 1:45 pm] 💃💃sunitaअग्रवाल: शीर्षक- पिता का साया
विधा - कविता
नाम- सुनीता अग्रवाल

     🌸 खुशियों का केंद्रबिंदु पिता,
🌸 मेरे हजारों सपने की ताबीर पिता,
🌸 मां का इंतजार, मां का श्रृंगार पिता
🌸 मां को मां कहलाने का अधिकार पिता,
🌸 हम भाई- बहन पर अंकुश है पिता,
🌸 हम बच्चो के खातिर, अपने सुख त्यागे वो पिता,
🌸 बचपन में चलते चलते यदि लड़खड़ा जाऊ तो सहारा देते पिता,
🌸 हमारे सारे अच्छे- बुरे कामों को ध्यान में रखते पिता,
🌸 उचित समय पर डाट लगाते पिता,
🌸 त्योहारों पर नए कपड़े पहन सके पर,
🌸 अपनी इच्छाओं को मारते पिता,
🌸 आसमान से ऊंचे, सागर से गहरे ,
🌸 धर्म संस्कृति, सत्यता, कड़े अनुशासन, के हिमायती मेरे पिता,
🌸 फैसले लेते कठोर, लेकिन आज हम सफल मुकाम पर खड़े वो पिता,
🌸 सोचती क्या पिता को न आते आंसू कभी,
🌸 बड़े होने पर- - - - 
🌸 मैने अपने जीवन में रोते देखा केवल दो बार,
🌸 मेरी बिदाई पर, पढ़ने भाई गया बाहर,
🌸 जिंदगानी के तूफान, सफल 
खिवेया मेरे पिता,


सुनीता अग्रवाल इंदौर
स्वरचित 
धन्यवाद🙏🙏
[11/10, 2:00 pm] Anshu Tiwari Patna: पिता
-------
 पिता के साथ बच्चे
 शहंशाह बन जाते हैं,
 जो चाहे सब मिल जाता 
 चाहे पिता खुद की 
इच्छाओं का अंत कर दें

 खुद की ख्वाहिशों दबाकर
 हम बच्चों की इच्छाएं
 हमेशा पूरा करते,
 फिर भी चेहरे पर 
कभी शिकन नहीं देखा,।
 चेहरा देखकर जान जाते
 दिल का हाल वे
 बोलने के पहले 
ख्वाब पूरे करते हैं पिता, 
 उनके कंधों पर बैठ महसूस
 होता राजगद्दी 
मिल गई हो जैसे।
 ऊंगली थामें चले बिता संग
 महसूस होता महफूज है
 जहां की बदनियतों से।
 मचलें खिलौनों को जब 
दुकान पूरी ही घर आ गई। 
 पिता वह बरगद है
 जिस पर हम बच्चे बेल
की तरह लिपट 
अपनी जिंदगी जीते हैं,
 पिता है तो हम शहंशाह है
  वरना नून तेल लकड़ी के 
चक्कर में मारे मारे फिर रहे।
 धन्यवाद
 अंशु तिवारी पटना
[11/10, 2:05 pm] वीना अचतानी 🧑🏿‍🦽: वीना अचतानी 
अग्निशिखा मंच को नमन 
विषय***** पिता *****
पिता को हर घड़ीं हमारा प्रणाम है
पिता बिना अधूरा हमारा नाम है
पिता धन है दौलत है खज़ाना है
पिता है तो कदमों तले ज़माना है
पिता घर है रौनक है अंगना है
पिता है तो माँ के हाथ कंगना है
पिता से बनता हमारा परिवार है
पिता प्रतीक्षा है उमंग है सार है
पिता हमारे जीवन का अभिकर्ता है
पिता त्याग है,श्रम है सफलता है
पिता से ही जीवन में चंचलता है
पिता धूप है ,पानी है छाता है
पिता हमारा जीवन सुख निर्माता है
पिता नियम है संयम है अनुशासन है
पिता प्रश्न है उतर है समाधान है
पिता है तो हर मुश्किल आसान है
पिता बच्चों के चेहरे की मुस्कान है।।
वीना अचतानी 
जोधपुर ।।।
[11/10, 2:05 pm] डा. बैजेन्द्र नारायण द्िवेदी शैलेश🌲🌲 - वाराणसी - साझा: आदरणीय मंच को नमन 
एक रचना -मेरे पिता
------------
 मेरे पिता, देवता मेरे ईश्वरके वरदान हैं।
जीवन के हर एक पड़ाव पर देते हमको ज्ञान हैं।।

छोटी रही उम्र जब अपनी ,उंगली पकड़ चलाए थे।
 राजा बेटा खूब पड़ेगा जोर जोर से गाए थे ।।
उनका आशीर्वाद मिला ,हम बने आज इंसान हैं ।।
मेरे पिता देवता मेरे ईश्वर के वरदान हैं।।1
 सुख से हम सब
 रहते हैं 
वह शीतल बरगद छाया हैं ।
प्राण देह में हम उनके , वह सबल हमारी काया हैं ।
उनकी शिक्षा सुरक्षा पर नित करते अभिमान हैं।। 
मेरे पिता देवता मेरे ईश्वर के वरदान हैं ।। 2
जन्म से लेकर ,अब तक हम को पाले पोसे बड़ा किए।
 दिए सहारा मन वाणी ,,कर्मों से हमको खड़ा किए ।
वर्तमान अस्तित्व हमारा उनकी ही पहचान है ।।
मेरे पिता देवता मेरे ईश्वर के वरदान हैं ।।3
जब भी प्रगति मार्ग को हमने ,चुना सहारा बने सदा। आवश्यकता पड़ी विमर्श से सहयोगी वह हुए सदा ।
जीवन पथ पर कभी नहीं वे आने दिए व्यवधान हैं ।।
मेरे पिता देवता मेरे ईश्वर के वरदान हैं।।4
 पिता ही हैं परिवार हमारे ,सारे गुणों की खान है ।
इसीलिए सारे घरवाले देते उन्हें सम्मान हैं ।।
मिलते सभी प्रेम 
 सबके लिए ही वह आसान है ।।
मेरे पिता देवता मेरे ,ईश्वर के वरदान हैं ।।5
**डॉ बृजेंद्र नारायण द्विवेदी शैलेश वाराणसी 94 50 18 6712🙏🙏🌻🌻🌻
[11/10, 2:12 pm] वैष्णवी Khatri वेदिका: 11 Oct 2021
मेरे पिता (बाल गीत)

पापा मेरे पापा मेरे।
प्यारे प्यारे पापा मेरे।
हाथी बन सूँड उठाते हो।
घोड़ा बन हमें घुमाते हो।।

किसी बात पर शर्त लगाते।
हार मिले तो खुश हो जाते।
उंगली पकड़ चाल सिखाते।
दिवाकर को छूना बताते।

झुकना डरना नहीं सिखाते।।
फोटो खींच अल्बम बनाते।
हर फ़र्ज को निभाते पापा।
जीवन भर ऋण देते पापा |

हम सबका अभिमान पिता हैं।
हमारा स्वाभिमान पिता हैं।
धरती और अनन्त पिता हैं।
अकेलेपन की छवि पिता हैं।

वैष्णो खत्री वेदिका
[11/10, 2:26 pm] ♦️तारा प्रजापति - जोधपुर: अग्निशिखा मंच
11/10/21 सोमवार
विषय- पिता 

मौन का मुख पर
लगा के पहरा,
मन में दर्द 
छुपाए गहरा,
इसकी हस्ती,
माने कौन?
दर्द पिता का,
जाने कौन?

बच्चों का घोड़ा 
बन जा जाता
पाई-पाई कर
पैसा जोड़ा'
अंतर मन
 पहचाने कौन?
दर्द पिता का,
जाने कौन?

बच्चों के सुख 
के लिए,
आंसू तक 
 इसने पिये,
इसका मर्म,
पहचाने कौन?
दर्द पिता का,
 जाने कौन?

प्यार माता का
दिख जाता है,
पिता इसे नहीं
कह पाता है,
प्रेम के रस को,
छाने कौन?
दर्द पिता का,
जाने कौन?

लिखी गयी
मां पर कविता,
जीत गयी
मां की ममता,
पिता पर लिखे 
फ़साने कौन?
दर्द पिता का 
जाने कौन?
            तारा "प्रीत"
        जोधपुर (राज०)
[11/10, 2:39 pm] रवि शंकर कोलते क: सोमवार दिनांक ११/१०/२१
विधा****बालगीत
विषय***हमारे पिता


पिताजी हमारे लिए गर्व अभिमान है ।
हमारे जीवन की आन बान शान है ।।
उन्हीं से हम जाने जाते हैं जहांन में ।
उनके दिलमें बसती हमारी जान है ।।१


माता ने अपनी कोख से जनम दिया ।
पिता ने हमको पालकर जीवन दिया ।।
श्रम कर पिता ने लाया घर में अनाज ।
मां ने पकाकर नित उधरभरण किया ।।२

पिता ने शिक्षा दी मां ने दिए संस्कार ।
मां है बागिया तो पिताजी है बहार ।।
हम बच्चों की दौलत है माता पिता ।
मां है दिया तो पिताजी है उजियार ।।३

प्रा रविशंकर कोलते
नागपुर ३०
[11/10, 2:43 pm] निहारिका 🍇झा: नमन अग्निशिखा मंच
दिनाँक;-11/10/2021

🌹पिता🌹
पिता मेरे जीवनाधार
उनने दिया सुंदर संसार।
हर इच्छा वो पूरी करते
मुझे लगें जादुई चिराग
खूब घुमाते खेल खिलाते
सही समय पढ़ने बैठाते।
करते मुझको बहुत वो प्यार।
उनसे ही ही सपने साकार।
गलती हुई अगर हो मुझसे
करते माफ वो हर बार
मेरे सपनों की खातिर 
कर देते वो खुद को वार
फिर भी न वो होते उदास
पिता से ही यह सुंदर संसार।
पिता मेरे जीवनाधार।।
निहारिका झा
खैरागढ राज.(36 गढ़)।।
[11/10, 2:46 pm] हेमा जैन 👩: *अग्निशिखा मंच **

🌹विषय :-पिता🌹


घर की मजबूत नींव होते है पिता 
घरौंदे की बुनियाद होते है पिता, 

बच्चों के सांता क्लाज़ होते है पिता 
बच्चों के हर सपने पूरे करतेहै पिता,

बेटे के आदर्श पुरुष होते है पिता 
 बेटी का स्वाभिमान होते है पिता,

पहले कदम की रफ़्तार होते है पिता
 कांधो से मेला दिखाए वो होते है पिता,

बच्चों के मन की जाने है पिता
बच्चों की दुनियां होते है पिता,

हर ख़्वाइश ऐसे ये पूरी करते
जैसे कोई जादूगरी ये करते ,

खुद के सपनों को दफन करते
हमारे अरमान को पूरा करते,

ईश्वर का आशीर्वाद होते पिता
हर घर की जान होते है पिता।

हेमा जैन (स्वरचित )
[11/10, 3:08 pm] Nirja 🌺🌺Takur: अग्निशिखा मंच
तिथि-११-१०-२०२१
विषय- पिता हमारे

पिता हमारे, जीवन में मेरे ,ऐसे बसे हैं। 
जैसे वट वृक्ष ,जो हमेशा छाया देते हैं
 माँ के माथे का सूरज हैं पिता
दादी और दादा कि आस हैं पिता
परिवार के लिये हमेशा खटते,
पर चेहरे पर मुस्कान लाते हैं पिता
पिता हैं जीवन के पहले शिक्षक
जो उंगली पकड़ राह दिखाते,
और रक्षा करते बनके रक्षक।
 पिता हमारे, दे कर अच्छे संस्कार 
  जीवन हमारा तार देते हैं।
पिता हमारे ,हमारी ख़ुशी पर
 अपनी ख़ुशी वार देते हैं।
पिता शब्द में ही ऐसा जादू है
कि बाज़ार के सारे खिलौने
अपने लगने लगते हैं।
सभी बच्चों को लगता कि
पिता मुझे ही अधिक चाहते हैं।
पिता की कठोरता से ना हो दुःखी
 इनकी कठोरता में ही ममता छुपी।

नीरजा ठाकुर नीर
पलावा डोंबिवली
महाराष्ट्र
[11/10, 3:28 pm] Anita 👅झा: अग्नि शिखा मंच 
विषय -पिता 
बाल गीत 
*अच्छे सच्चे पिता *

बचपन की वो, ख़ुशहाली है ।
पिताकी वो ,लाड़ों राज दुलारी है।
सुनहरे ख़्वाबों वाले ,दिन बचपन के आयें ।
महकते चहकते पिता की ,मीठी वाणी हैं 
 लुका छिपी का ,वो खेल खिलायें 
सारे जग से भय को , वो दूर भगायें हर मुश्किल को ,वो आसान बनाये 
 मेरा स्वाभिमान,अच्छे सच्चे पिता
अब शरारती आँखों वाला ,ये बचपन छूट रहा है ।
रंग रूप निखार लाया ,घर मधुबन यौवन है ।।
पिता की मुरत इन , आँखों में बसती है ।
अरमानो के रूप में बसते ,पिता की ये मुरत है ।।
पिता की बाँहों में झुल ,बेबी डाल बनी प्यारी है ।
परियों की रानी बन उड़ जाऊँ ,
मन आगंन उपवन है ।।
पिता का है रूप निराला , मुस्कानों में ख़्वाब सजें है ।
 पिता के मन ख़्वाब सजाऊँ ,उड़ फिर आऊँ नील गगन से ।।
हर सपने पुरे कर ,पिता मन आस सजाऊँ।
बचपन पिता की लाठी ,पकड़ ख़्वाब सजाऊँ ।।
अच्छे सच्चे पिता ने नयी ,राह डगर पकड़ सिखाई ।
करूँ सारा जीवन अर्पण ,पिता के अरमान सजाऊँ ।। 
 
श्रीमती अनिता शरद झा आद्या
रायपुर छत्तीसगढ़
[11/10, 4:05 pm] +91 70708 00416: मेरी ताकत मेरे पिता
    *********************
मेरा साहस मेरी इज्जत
मेरा सम्मान है पिता
मेरी ताकत मेरी पूंजी
मेरी पहचान है पिता
आपकी आवाज मेरा सुकून है
आपकी खामोशी एक अनकहा संबल
चाहे कहें हम पिता या बाबा
या अब्बू, डैडी या पापा
ये तो बस पुकारने के लिए हैं नाम
पर ये व्यक्ति नहीं आम
ये हैं हमारे जन्मदाता
सारे घर की रौनक उनसे
सारे घर की शान है पिता
मेरी इज्जत मेरी शोहरत
मेरा मान हैं मेरे पिता
मुझे हिम्मत देनेवाला
मेरा अभिमान है पिता
सारे घर की जान है पिता
आपकी मुस्कान मेरी ताकत
हर पल का साथ खुशनुमा एहसास
दुनियां में सबसे ज्यादा
आप ही हैं मेरे लिए खास पापा
आपकी शुक्रगुजार है
मेरी हर एक सांस
कोटि-कोटि नमन ऐसे पापा को
जो हर पल साथ निभाया है

 डॉ मीना कुमारी परिहार
[11/10, 4:27 pm] कुम कुम वेद सेन: विषय पिता
दुनिया में आकर आंखें खुली
दो प्यारा चेहरा देखने को मिली
रिश्तो को तो जान न पायी
पर वह दोनों मां पापा कहलायी

पहली नजर की वह तस्वीर
मानू मेरी सांसे की है वह तकदीर

पापा तुम मेरी शान हो
मेरे जीवन के अरमान हो
मेरी मान और सम्मान को
तेरी बरगद की छाया में सुख मिलती है

पापा मेरे तुम कितने अच्छे हो
भोले भाले मनके तुम सच्चे हो
मुझे खुश रखने के लिए
कितने रूप तुम बनाते हो
कभी घोड़ा बनते कभी हाथी
कंधों पर बैठकर सैर कराते
गोदी में रखकर झूला झूलाते

अंगुली पकड़कर पापा
तुमने मुझे चलना सिखाया
बातें कर कर मुझे बोलना सिखाया
जल्दी बाहर से आते
मेरे लिए कुछ ना कुछ जरूर लाते
वक्त मुझे रहता है तेरा इंतजार
कैसे कहूं पापा तुम मुझे करते हो प्यार मैं तुझे करती हूं प्यार

पर जब देखती हूं कुछ लोगों को
जिनकी नजरों में पापा की कद
हो गई है छोटी, उनकी बातें
हो गई है झूठी, वह बन गए हैं पराए
सोचो उस पापा के दिल की भावनाएं
सब कुछ लुटा कर भी खुद को नहीं समझ पाए
बिखरी हुई भावनाएं टूटा हुआ संसार
फिर भी देते हैं अपने बच्चों को प्यार

कुमकुम वेद सेन
[11/10, 5:09 pm] ओम 👅प्रकाश पाण्डेय -: पिता हमारे (बाल गीत) ---- ओमप्रकाश पाण्डेय
रोज सबेरे पहले उठते
सुबह सुबह टहलने जाते
व्यायाम भी वहीं पर करते
घर आकर फिर चाय पीते
फिर वे अखबार भी पढ़ते
पिता हमारे सबसे प्यारे....... 1
रोज रोज आफिस भी जाते
सूट बूट में आफिस को जाते
बहुत सुन्दर होता पहनावा
कभी नहीं नागा करते वे
मम्मी उनको लंच भी देती 
पिता हमारे सबसे न्यारे......... 2
शाम को बैठते साथ हमारे
हमें मैदान में खेल खेलाते
हम दौड़ लगाते, झूला झूलते
दीदी मम्मी भी साथ खेलती
दादी दादा जी भी होते साथ
पिता हमारे हमें खेलाते........ 3
कभी कभी जब मन होता
हम सबका होमवर्क कराते
अगर हम पूछते कुछ उनसे
पिता जी हमारे बताते उसको
राम कथा सुनाते रात को
पिता हमारे घर के शिक्षक......... 4
बड़ा स्नेह दुलार करते
टाफी और बिस्कुट भी देते
पर बहुत अनुशासन प्रिय भी हैं
सुधारते रहते गलती हम सबकी
साथ साथ हम भोजन करते
पिता हमारे मुखिया घर के......... 5
( यह मेरी मौलिक रचना है ---- ओमप्रकाश पाण्डेय)
[11/10, 5:12 pm] 💃rani: अग्निशिखा मंच 
विषय---बाल गीत 
शीर्षक---- हमारे पिता
दिनांक---11-10-2021
 
माँ जितना प्यार है करती, पिता भी उतना ही करते हैं,
 माँ का प्यार है दिख जाता, पिता का प्यार छुपा रहता । ।
 हमारी ख्वाइशों को, पूरा करने की खातिर दिन भर, 
परिश्रम, संघर्ष हैं करते, हमारी झोली खुशियों से भरते । 

आएँ जब भी काम से रात को,खाली हाथ कभी ना आते, कभी खिलौने, कभी मिठाई कुछ न कुछ छुपाकर लाते ।
फिर हम को अचानक से जब पास बुलाते,
हमारे चेहरों की खुशियों को दुगुना कर जाते ।

दिन भर की थकान भी उनकी तब दूर हो जाती,
 जब उन्हें देखकर हम बच्चे होठों पर मुस्कान हैं लाते । कभी पढ़ाते, कभी कोई खेल भी हमें सिखलाते,
माँ हमको संस्कार हैं देती 'रानी' तो
 पिता हमें दुनिया सेजूझना सिखलाते,
 जीवन के संघर्षों को जीतने की राह हमें बताते 

रानी नारंग
[11/10, 5:15 pm] रजनी अग्रवाल जोधपुर: शीर्षक-"पिता हमारे"

1. पिता हमारे हमको प्यारे,
माता घर को संभाले,
पिता बाहर का सब काम ,
दोनों के ही हम हैं दुलारे , 
पिता हमारे,,,,

2. आर्थिक बोझ पिता के कांधे ,
कोई कोई मां भी साथ दे , 
दोनों मिलकर बच्चों का , 
जीवन संवारे निखारे पिता हमारे,,,,,,

3. सारे संस्कार निभाए , 
 बच्चों को संस्कारित कर दे , 
खेलकूद में प्रेम सिखा दे , 
 सत्यम् शिवम् सुंदरम् पढ़ा दे ,
 पिता हमारे,,,,,,,

4. पिता के कंधों पर चढ़ देखा , 
सब जीवन का सार , मां के आंचल में संवारा संसार , 
बाहरी दुनिया देखी पिता के सहारे , 
 पिता हमारी,,,,,,,

5. एक थे हमारे बापू प्यारे , 
एक लंगोटी सी धोती ,
 हाथ में डंडा सबसे न्यारे , 
सत्य अहिंसा के पुजारी , 
राष्ट्रपिताथे वे हमारे, 
 पिता हमारे,,,,,, 

स्वरचित बालगीत
 रजनी अग्रवाल
 जोधपुर
[11/10, 5:49 pm] Nilam 👏Pandey👏 Gorkhpur: अग्निशिखा मंच 
🙏नमन मंच 🙏
आज का विषय- पिता हमारे
 विधा - बाल गीत

घर की अपने जान शान हैं पिता हमारे
हम बच्चों पर जान लुटाते पिता हमारे 
कभी प्यार से घोड़ा बनते
 कभी डांट लगाते हैं
 जब उनके स्कूटर की आवाज सुनाई देती है
 हम सब शांत हो जाते हैं
हमें बुखार जो आ जाए तो परेशान टहलते पिता हमारे 
 सारे तीज त्योहारों पर मौज हमारी होती थी
बाजार की सारी खुशियां ही 
अपनी मुट्ठी में होती थी
 उनकी प्रिया बजाज पर
 हम सैर सपाटे पर जाते थे
 चाट पकौड़ी आइसक्रीम मिठाई
 हमें खिलाते पिता हमारे
पापा के कंधे पर चढ़कर
सबसे ऊंचे हम हो जाते थे 
पापा की उंगली थाम हमें
 सारे संभल मिल जाते थे
कोई चिंता फिकर ना होती 
जब साथ में होते पिता हमारे

स्वरचित बाल गीत
नीलम पाण्डेय गोरखपुर उत्तर
[11/10, 6:37 pm] सुरेन्द्र हरडे: श्रीअग्निशिखा मंच को नमन
आज की विधा :- बालगीत
विषय :-* *हमारे पिता*

पिता हमको भ्रम और भय
के संशय से निकालते हैं
सत्य के राह पर सदा 
चलना सिखाते हैं।।१।।

तुम हम को पढ़ाते ,लिखाते हो अपने पैरों पर खड़ा रहने के लिए
बल देते हो तूम न होते तो हम भी कहा होते ?जैसे बिना फूल के गंध नहीं होती।।२।।

आप के आश्रय के बिना 
बच्चा अनाथ है दोनों के
बीच प्यार का मजबूत रिश्ता है
बच्चों का जीवन फुलवारी सा
हंसता खिलता है।।३।।

सुरेंद्र हरडे 
नागपुर
दिनांक:- ११/१०/२०२१
[11/10, 6:38 pm] 😇ब्रीज किशोर: *पिता*
        ---------
पिता रोटी है पिता कपड़ा है पिता मकान है,
पिता नन्हे से परिन्दे का बड़ा आसमान है,

पिता है तो हर घर मे हर पल राग है,
पिता से माँ की चूड़ी है बिन्दी है सुहाग है, 

पिता है तो बच्चों के सारे सपने है ,
पिता है तो बाज़ार में सारे खिलोने अपने है,
पिता बच्चो.का ए.टी.यम कार्ड है।
पिता बच्चों के लिये बरगद की छाँव है।
पिता जीवन की तपिस से बच्चो को बचाती है।
पिता बच्चों के लिए मलय समीर है।
पिता बच्चो के लिए दुनिया मे सब से अमीर है।
पिता की बनियाइन फटी है पर बेटा का.सूट तैयार।
पिता की चप्पलें टूटी है पर बिटिया के तीज के कपडे तैयार है।
माँ ममता की मुरत है तो पिता त्याग की सुरत है।
माँ घर आंगन है तो पिता घर की छाजन है।
माँ को प्यार से हक करते हो
पिता को भी प्यार से एक बार हक कर के देखो न।
पिता के कलेजे मे भी ममता होती है।
जैसे पत्थर रवि के ताप से पसीज कर शीलाजीत बनता है।
उसी तरह पिता का प्रेम बच्चो के लिए अमृत होता है।
अमृत पास है तो जीने की तमन्ना बुलन्द है।
पिता नही है तो बिना छत के मकान जैसा बच्चे का जीवन है।
कहे भानुजा जब पिता है तभी उनसे दो मिठे बोल बोल दो।
बाद मे आँसू बहाने से क्या फायदा।
सब पिता को समर्पित कविता।
बृजकिशोरी त्रिपाठी।
गोरख पूर यू.पी
[11/10, 6:47 pm] डा. अंजूल कंसल इन्दौर: मेरे पिता 

पिता हैं सूत्रधार 
हमारे कर्णधार 
पिता अनुशासन 
बनाए संबंध अनुपम। 

पिता से सुरक्षित हम 
सत्यता का पाठ पढ़ाते 
पिता से हमारी पहचान 
बनाते भविष्य उज्जवल।

हमारे संग खेल खेलते 
कैरम शतरंज खूब खेलें 
स्कूल की पढ़ाई करवाते 
बस स्टॉप पर छोड़ने जाते।

पिता का मजबूत साया 
जैसे घने वृक्ष की छाया 
पिता का प्यार और दुलार 
छण छण उनकी याद दिलाता।

डा अंजुल कंसल "कनुप्रिया"
11-10-21
[11/10, 7:03 pm] आशा 🏆🏆जाकड इन्दौर: विषय - पिता



पिता होते हैं महान

सिखाते त्याग बलिदान
नहीं चाहते मान सम्मान 
अनेक गुणों की हैं खान 
पिता हैं ईश्वर का वरदान

पिता होते हैं वेद पुराण 
करते संस्कार का निर्माण
करें समस्या का समाधान
बच्चों के लिये वे भगवान


पिता चट्टान से होते अटल
पिता मन के होते सरल
दिखते कटु, होते कोमल
पिता अनोखे पर विरल
 

पिता बच्चों हेतु श्रम करते
बच्चों की इच्छा पूरी करते 
प्यार करते कभी डाँटते हैं
पर सदा भला ही सोचते हैं।

पिता होते ऊँचे आकाश
 दीपक में होता है प्रकाश
बच्चों का होते हैं विश्वास  
 माँ जीवन पिता हैं श्वास।।








आशा जाकड़
[11/10, 9:54 pm] पुष्पा गुप्ता / मुजफ्फरपुर: 🌹🙏अग्नि शिखा मंच 🙏🌹
विषय: *।मेरे पिता *
विधा: * बालगीत *
दिनांक:11/10/21
****************************************
🌹🙏
मेरे पिता हैं भोले- भाले,
पर हैं, वे तो बड़े निराले-
ज्ञान- ध्यान में बहुत बड़े ,
हैं , वह बरगद से खड़े ।

बचपन से सिखलाया ज्ञान
जब हम थे,तब बड़े नादान,
जब मुझसे गलती हो जाती -
बेचैनी उनकी बढ़ जाती।

प्यारी सीख जल्दी आ पाती,
डर की कोई बात न होती-
खेल-खेल में पाठ पढ़ाते ,
हम बच्चे तब खुश हो जाते ।
🌹🙏
********************************
स्वरचित एवं मौलिक रचना 
रचनाकार-डॉ पुष्पा गुप्ता
मुजफ्फरपुर 
बिहार 🌹🙏
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