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Agni Shikha Manch per Aaj dinank 31 2021 ko September mah ke lekhan Samman samaroh aur dipawali Kavya utsav per Rachna karo ki rachnaen padhe Alka Pande Mumbai



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सितम्बर माह का लेखन सम्मान समारोह
और दीपावली काव्य उत्सव

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आज हम दीपावली उत्सव मनाने जा रहे हैं आप सब दीपावली पर शानदार अपनी रचना प्रस्तुत करें और सुंदर सी फोटो  के साथ आप का वीडियो ,ऑडियो भी  लिखित  ..प्रेषित करना जरुरी है । 
🔲 🔴 🟠 🟠🔴🟣🟢⚫️🟤
      चार से छ : / 4 से 6 
🟢संचालन 🟢
🌺डॉ अलका पाण्डेय मुम्बई 
🌺सुरेन्द्र हरड़ें 
🌺शोभारानी तिवारी 

⚫️सरस्वती वंदना⚫️
🌺अलका पाण्डेय 

🟣स्वागत गीत 🟣
🌺शोभारानी तिवारी 

🟡आभार 🟡
🌺वैँष्णो खत्री 

🔴समारोँह अध्यक्ष 🔴
🌺राम राय जी - अध्यक्ष - श्री साहित्य औरंगाबाद 

🟢मुख्य अतिथि 🟢
डॉ कुंवर वीर सिंह मार्तंड( सम्पादक ) 

🔵विशेष अतिथि 🔵

आदरणीय आशा जाकर/
आदरणीय-संतोष साहू /वरिष्ठ पत्रकार/
आदरणीय- पी .एल शर्मा (सम्पादक 
आदरणीय जनार्दन सिंह ( सम्पादक ) 
आदरणीय- शिवपूजन पाण्डेय ( अध्यापक) 
🔴🔴🔴
डॉ अलका पाण्डेय मुम्बई
अध्यक्ष अग्निशिखा मंच  ..प्रे
🟣🟣🟣🟣🟣🟣🟣🟣🟣🟣🟣🟣🟣🟣🟣🟣[31/10, 4:05 pm] राम राय: *आज प्रकाशोत्सव अर्थात दीपावली के इस भव्य आयोजन के लिए परम आदरणीया डॉ अलका पांडेय जी के साथ आ सुरेंद्र हडरे जी,आ शोभा जी,आ वैष्णव जी,आ डॉ कुंअर वीर जी,आ संतोष जी के साथ अपने आपको खड़ा पा कर अत्यंत गौरव की अनुभूति हो रही है।*
*सर्व प्रथम लौह पुरुष सरदार बल्लभ भाई पटेल को मेरा नमन। आप सभी विद्वानों को नमन।*
*आज आप सभी मूर्धन्य विद्वानों के सतत अद्भुत कविता पाठ से यह अग्निशिखा का पटल सम्पूर्ण राष्ट्र में एक ख्यातिलब्ध पटल के रूप में स्थापित हो चुका है। आज यह जिस ऊंचाई पर पहुंच चुका है उसमें आप विद्वान रचनाकारों का अद्वितीय योगदान रहा है।जिसमे देश भर के कवि कवित्रियों ने बढ़चढ़ कर भाग लिया । परिणामस्वरूप यह मंच ख्याति के शिखर पर पहुंच गया। मुझे आशा ही नही पूर्ण विश्वास है कि आप सभी साहित्यकार सतत अपनी सुंदर रचनाओं को इस पटल पर प्रस्तुत करते रहेंगे और इसे समृद्धि प्रदान करते रहेंगे। आप सभी को एकता दिवस एवम दीपावली की हार्दिक शुभकामनाएं।*
*जय हिंद,जय पटेल*
---श्रीराम रॉय, अध्यक्ष
[31/10, 4:08 pm] Alka: अग्नि शिखा मंच, मुंबई
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31 अक्तूबर 2021, संध्या 4 बजे से 6 बजे तक।
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मुख्य अतिथि का वक्तव्य
**********************
परम आदरणीय अलका पांडेय जी, समारोह के अध्यक्ष राम राय जी, विशेष अतिथि आशा जाकड़ जी एवं संतोष साहु जी, सुरेंद्र हरडे जी, शोभा रानी तिवारी जी, वैष्णो खत्री जी एवं आज के इस दिवाली उत्सव के समस्त प्रतिभागी गण सभी का वंदन अभिनंदन।
बहुत प्रसन्नता की बात है अग्नि शिखा काव्य मंच निरंतर सृजन धर्मिता को बढ़ावा देता आ रहा है। और इसकी छत्र छाया में रचनाकार निरंतर कुछ नया कर रहे हैं, कुछ नया लिख रहे हैं। और नई नई विधाओं से परिचित हो रहे हैं।।
बहुत कम पटल है जो इतने सक्रिय हैं।। मैं मंच की अध्यक्ष आदरणीया अलका जी का हृदय की अनंत गहराइयों से स्वागत करता हूं। स्वागत उनका भी करता हूं जो अपना अमूल्य समय देकर रचनाओं की समीक्षा करते हैं और रचनाकारों का मनोबल बढ़ाते हैं।
अंत में मैं ईश्वर से करबद्ध प्रार्थना करता हूं कि यह पावन मंच इसी प्रकार समृद्धि पाता रहे।
साथ ही आज सितंबर मास के लिए सम्मान पाने हेतु सभी मित्रों को हार्दिक बधाई और शुभ कामनाएं।

इति शुभम्
आपका अपना
डा. कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड। कोलकाता
संपादक: साहित्य त्रिवेणी।
[31/10, 4:19 pm] आशा 🏆🏆जाकड इन्दौर: उद्बोधन

अग्निशिखा मंच की अध्यक्ष आदरणीया डॉ अलका पांडे जी समारोह के अध्यक्ष आदरणीय राम राय जी मुख्य अतिथि आदरणीय कुंवर सिंह मार्तंड जी, संचालक सुरेन्द्र हरडेजी, श्रीमती शोभा रानी जी विशेष अतिथि जनार्दन शर्माजी, पीएल शर्मा जी ,संतोष साहू जी शिवपूजन सहाय जी एवं वैष्णो खत्री जी सभी का वंदन अभिनंदन आप सभी को दीपावली की बहुत-बहुत जगमगाती शुभकामनाएं ।
               पिछले वर्ष कोरोना के कारण दीपावली बड़ी उदास ,गुमसुम रही इस बार सभी और सर्वत्र खूब धूमधाम दिखाई दे रही है लेकिन अभी भी कोरोना का कहर से हम सभी पूरी तरह से मुक्त नहीं हुए हैं इसलिए सभी को विशेष सावधानी रखनी चाहिए। मास्क का उपयोग बराबर करते रहे हैं लोगों से सामाजिक दूरी बनाए रखें। अपनी सुरक्षा का पूरा पूरा ध्यान रखिए
दीपावली दीपों का त्योहार है ,प्रकाश का पर्व है । अंधकार पर प्रकाश की विजय का पर्व है। यह हमारी मन के अंधकार रूपी को अज्ञानता को दूर कर ज्ञान रूपी प्रकाश से प्रकाश से भर देता है। यह कटुता को मिटाकर प्रेम व उल्लास का पर्व है । दीपावली पर्व आप सभी के जीवन में खुशियां लाए, आप सभी के सपने पूरे हो सुख समृद्धि का भंडार रहे आप सभी को अच्छा लिखें घूमने नहीं आप उपलब्धियां प्राप्त हो ।दीपावली की आप सभी को पुनः शुभकामना ।
सभी प्रतिभागियों को बहुत बहुत शुभकामना ।अलका जी ने मुझे.विशेष अतिथि के रूप में आमंत्रित किया। प्रिय अलका जी का हृदय से आभार। दीपावली उनके जीवन में पूरे परिवार में विशेष खुशियां लाए।
सभी -सभी को पुनः शुभकामनाएँ।

आशा जाकड़
अध्यक्ष
अंतर्राष्ट्रीय हिंदी परिषद
 इंदौर इकाई मध्य प्रदेश


🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴दीपोत्सव - 

दीपोत्सव का पर्व मनायें ।
आओ मिलकर दीप जलायें ।।

दीपोत्सव का पर्व मनायें ।
लक्ष्मी पूजन विधी से करवाये ।।
दुख सब जीवन के मिट जायें ।
अंधेरा दिलो का दूर हो जायें ।।

दीपोत्सव का पर्व मनायें ।
स्वदेशी दीपक ले कर आये ।।
ग़रीबों का रोज़गार बढ़ायें ।
मीठाईयां घर पर ही बनायें।।

दीपोत्सव का पर्व मनायें ।
फटाके अब नही छुड़ायें ।।
प्रदूषण से सबको बचायें ।
जन जन में जाग्रति लायें ।।

दीपोत्सव का पर्व मनायें ।
महामारी से सबको बचायें ।।
मास्क पहन कर बहार जायें ।
बच्चो को यह सब समझायें ।।

दीपोत्सव का पर्व मनायें ।
सब को ख़ुशियों से मिलवायें ।।
बड़े बुज़ुर्गों का आशीष पाये ।
स्नेहभरी झप्पी नही ले पायें ।।

दीपोत्सव का पर्व मनायें । 
चहके और सबको चहकाये ।।
दूर रह कर ही हाथ मिलायें । 
घर आँगन रांगोली सजायें ।।

दीपोत्सव का पर्व मनाये 
आओ मिलकर दीप जलायें ।।
डॉ अलका पाण्डेय

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[31/10, 4:08 pm] Alka: ये प्रकाश का पर्व
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ये प्रकाश का पर्व, खुशी से जीवन को भर दे।
अन्धकार को हरे, धरा को ज्योतिर्मय कर दे।

जलें दीप मालाएं घर घर, कंदीलें चमकें।
फूल खिले खुशियों के दिल में हरसिंगार महकें।
फूटें रंग अनार, फुलझड़ी, चरखी मन भावन
बनें पुए पकवान मिठाई, हर्षित घर आंगन।
जय गणेश, जय लक्ष्मी का स्वर, मन पावन कर दे।
ये प्रकाश का पर्व, खुशी से जीवन को भर दे।


जीत असत पर सत की होती, यह संदेश मिले।
न्याय फले फूले अन्याय को निश्चित दण्ड मिले।
सतपथ पर चलने वालों की होती जीत सदा।
कवि की प्रखर लेखनी लिखती उनके गीत सदा।
मां वाणी भी कलमकार को अपना आशिष दे।
ये प्रकाश का पर्व, खुशी से जीवन को भर दे।

© कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड
[31/10, 4:15 pm] Alka: दीपावली

जगमग जगमग करती आती है दीवाली
दीपों सज कर मुस्कुराती है दीवाली
सजे हुए हैं घर और बाज़ार
खुश रहो मस्त रहो कहती है दीवाली

साफ सफाई कई दिनों से कर रही है मां
नये परदे लगाती घर को चमका रही मां
स्वादिष्ट पकवान खूब मिठाई बनाती है
हमारे लिए नये कपड़े खरीदती है मां

 सबके लिए क्या,खुशियां लाती दीवाली
सभी चेहरे पर क्या मुस्कान लाती है दीवाली
 कई जो हैं कोरोना के मारे हुए
उन्हे बार बार डराती है दीवाली

धीरे - धीरे संभल रहे हैं हम
फिर से खड़े होना सीख रहे है़ हम
बहुत हिम्मत हममें है बाकी अभी
अपनेज्ञडर से लड़ कर जीत रहे हैं हम

नीरजा ठाकुर नीर
पलावा डोंबिवली
महाराष्ट्र
[31/10, 4:18 pm] शेभारानी✔️ तिवारी इंदौर: दीप 
******
दीप तुम्हें तो जलना होगा ,
दीप तुम्हें तो जलना होगा,
 अंतर्मन के कलुष मिटाने,
 तम को भी तो पीना होगा 

दीप तुम्हें तो जलना होगा
। नन्हा सा यह दीपक है ,
 तूफानों से घबरा जाता ,
लेकिन अपने अस्तित्व बचाने,
 खुद निडर हो संभल भी जाता ,
अपने प्रकाश की किरणों को ,
सभी और फैलाना होगा ,
दीप तुम्हें तो जलना होगा ।

त्याग तुम्हारे मन के अंदर,
 खुद जलकर रोशन करते हो,
 जब तक दिया बाती का संग है,
 तब तक तुम भी जी लेते हो,
 सूर्य किरण ना बन पाए फिर भी,
 अमावस के तम को हरना होगा,
 दीप तुम्हें तो जलना होगा।

 चाहे महल हो या हो झोपड़ी,
 जहां जलाओ जल जाता है,
जाति पांति सेऊपर उठकर ,
प्रेम का संदेश फैलाता है ,
घृणा नफरत को दूर भगा ,
बुराइयों से लड़ जाना होगा,
 दीप तुम्हें तो जलना होगा ।

असंख्य गुण है दीपक में ,
परोपकारी बन जाता है ,
जब लोग नींद में ख्वाब बुनते हैं,
वह इतिहास बनाता है,
 मानव मानव से प्यार करें,
 मानव धर्म सीखाना होगा ।
दीप तुम्हें तो जलना होगा ।


श्रीमती शोभा रानी तिवारी 619 अक्षत अपार्टमेंट खातीवाला टैंक इंदौर मध्य प्रदेश मोबाइल 89894 09210
[31/10, 4:21 pm] वैष्णवी Khatri वेदिका: अग्निशिखा मंच को नमन मैं वैष्णो खत्री वेदिका आज मैंने दीवाली की खुशियों को अपने शब्दों में बांधने का प्रयास किया है।  

आओ मिल मनाएँ खुशियाँ 
आज दीवाली आई है
धन-धान्य खुशियाँ लेकर
लक्ष्मी रानी आई है ।

1- भेद-भाव को भूल कर
आओ गले लग जाओ जी
छोड़ पुरानी बातों को,
आगे बढ़ते जाओ जी
झूम कर मनाओ खुशियाँ 
आज दीवाली आई है 
धन-धान्य खुशियाँ लेकर
लक्ष्मी रानी आई है ।

2- स्वार्थ भाव छोड़ कर 
द्वार दीन के तुम जाना,
ढेरों दीप जलाए तुमने,
जला वहाँ दीपक आना,
उनके दर भी आए खुशियाँ 
आई आज दिवाली है
धन-धान्य खुशियाँ लेकर
लक्ष्मी रानी आई है 

3- बुजुर्गों और बीमारों का
रखना ध्यान दीवाली में,
भूल न जाना तुम फूलों को ,
अपनी ही नादानी में,
दूसरों को तुम देना खुशियाँ,
आज दिवाली आई है,
धन-धान्य खुशियाँ लेकर
लक्ष्मी रानी आई है ।

4- आशीष बडों से तुम लेना,
स्नेह छोटों को भी देना,
साथ अशक्तों का देकर, 
संस्कृति को बचा लेना
मूल्यों को बचाकर तुमने,
सभ्यता तुमने बचाई है,
धन-धान्य खुशियाँ लेकर
लक्ष्मी रानी आई है ।


श्रीमती वैष्णो खत्री 
से. नि. शिक्षिका केन्द्रीय विद्यालय
[31/10, 4:27 pm] Anita 👅झा: **बड़ा प्यारा सजा है*
*दरबार मातारानी का* *
आया नवरात्र सातवाँ दिन 
कालरात्रि मातारानी का है 
कालरात्रि तपस्वनी शनीनियत्रित करती है 
शास्त्रचित्रयोग देवत्व ले कर जाती है 
बड़ा प्यारा सजा है
दरबार मातारानी का है
मां कालरात्रि को काली, 
महाकाली, भद्रकाली, भैरवी, 
मिृत्यू, रुद्रानी, चामुंडा, चंडी, 
रौद्री और धुमोरना देवी कहलाती है ।
बड़ा प्यारा सजा है
दरबार मातारानी का है 
सागरिका की नदियों में बहती है 
रक्त बीज की बहती धाराओं में 
चण्ड मुण्ड संहार करने आई है 
हे कालरात्रि सिद्धिधात्री आई है 
बड़ा प्यारा सजा है
दरबार मातारानी का है 
गर्दभ परिश्रमी वाहन सवारी है 
निर्भय को बल देने वाली है 
कृपा सुधा बरसाने वाली है 
त्रिनेत्रो ब्रह्मांड धरा समाई है 
बड़ा प्यारा सजा है
दरबार मातारानी का है 
सब भक्तों की शनिशक्ति है 
सहस्त्र देवत्व में लीन संकटहारी है 
अभयदान वरदान दे ग्रहबाधा दूर करती है 
गुड़ भोग लगत अकाल मृत्यु दूर करती है
करती कल्याण मयी कल्याणी हैं 
बड़ा प्यारा सजा है
दरबार मातारानी का 
अनिता शरद झा स्वरचित मौलिक
[31/10, 4:27 pm] पुष्पा गुप्ता / मुजफ्फरपुर: 🙏🌹अग्नि शिखा मंच 🌹🙏
      विषय: दीपावली + लक्ष्मी पूजा
               🦚लोकभाषा🦚 
      ❤ दिनांक: 31/10/21❤
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🌹❤🌹❤🌹❤🌹❤🌹❤

निहुरी- निहुरी मैया , गोर लागिले
सेबक पर होखु अब सहाय जी ×2
        ससुराल में देलु मैया,,,,,,
        अन्न - धन संपत्ति,,,,,,,
        नैहर सहोदर जेठ भाई जी×2
        अपना ला देलु मैया ,,,
        अमर सिन्दूरवा हो,,,,
        जनम- जनम अहिवात जी×2
        झूला झूलन के रेशम डोरी
        गोद मे संतति पुष्प जी,,,,
        साँझ भईले मैया 
         आरती ऊतारिले,,,
         जगमग - जगमग करे
         दीप जी ,,,
         जय जय देवी मैया 
          जय जी ,,,,,,,
          जय जय जय जय 
          जय जी,,,,×2
जय जय जय जय जय जी,,,, 3
🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹🙏🌹
********************************
स्वरचित एवं मौलिक 
डा पुष्पा गुप्ता 
मुजफ्फरपुर 
बिहार 
🌹🙏
[31/10, 4:28 pm] ओम 👅प्रकाश पाण्डेय -: दीपावली -ओमप्रकाश पाण्डेय
दीपों की लड़ियां झूलती झूम के
जब मेरे घर के दिवारों चौबारों पर
उतर आता फिर चांद ज़मीं पर
फिर रात वहीं पर रुक जाती  है
है मेरे घर की जगमग दिवाली ........१
बच्चों के कोलाहलों से गूंजती दिशाऐं
पड़ाकों के आवाज़ों से गुंजायमान हर कोना
फुलझड़ियों की रोशनी फैली हैं हर दिशा में
नववधुऐं सज धज कर बिखेर रहीं खुशियां
है मेरे घर की जगमग दिवाली ..........२
भगवान राम का हुआ राजतिलक
दिवाली मनाया  हर घर ने
दीप जल उठे हर आंगन व चौबारों पर
मिठाईयाँ बाटीं गयी दोनों हाथों से
है मेरे घर की जगमग दिवाली .........३
हे लक्ष्मी मैया हम संतान हैं तेरे
कृपा करो हम सब पर मैया
भरा रहे हर घर धन धान्य से
खुशियों से सब जियें जीवन अपना
है मेरे घर की जगमग दिवाली .........४
दिवाली है प्रतीक समृद्धि का
है प्रतीक यह खुशियों का
मिटाता यह अंधकार धरा से
प्रकाशित होता है जग सारा
है मेरे घर की जगमग दिवाली .........५
( यह मेरी मौलिक रचना है ..... ओमप्रकाश पाण्डेय ) 
[31/10, 4:32 pm] वीना अडवानी 👩: आया दीपों का त्योहार
*********************

दीप जले जगमग-जगमग हर ओर
रौशन हुआ फिर संसार।।
देखो कैसे सज रहा है फिर
फटाकों, दीपों, मिठाईयों संग बाजार।।

रंग-रोगन, साफ-सफाई हर घर में
सजा फूलों से भी हर घर-बार।।
खुशियां बिखर रही चहू ओर देखो
सजा मंदिर, गुरुद्वारे संग भी हर दरबार।।

इतनी सुन्दर अनुपम छटा है बिखरी
लाया खुशियां खूब दीपावली त्यौहार।।
बच्चे सभी जच्च रहे नये वस्त्रों में देखो
फटाकों संग चेहरे पर रौनक की झंकार।।

दीपों का त्यौहार आया, दीपों का त्यौहार
अंबर भी भरा सितारों से उजियारा अपार।।
चांद की दुधिया रौशनी में नहा रही रौशनी
करो मिल सभी अतिथियों का सत्कार।।

आया दीपों का त्योहार।।२।।

वीना आडवानी तन्वी
नागपुर, महाराष्ट्र
*********************
[31/10, 4:34 pm] रवि शंकर कोलते क: #****दिपावली****#
       ^^^^^^^^^^

धरती पर आ गए हो ।
           अंबर से आज तारे ।।
माटी के दीप देखो ।
            नन्हे से प्यारे प्यारे ।।धृ।।

ये दीये सुघड़ सलोने ।
       अनमोल है खिलौने ।।
लेटी है जिसपर निर्भय ।
        उस लौ के हैं बिछौने ।।
नहीं भेद इनके मन में ,
         जले मंदिर गुरुद्वारे ।।१

आंधी से नहीं डरते ।
         तूफां से नहीं ये बुझते ।।
होते रवि चंदा के ।
          घर-घर में यही जलते ।।
ये लाज आरती की ,
          है शाम का सखारे ।।२

आगे तुम्हारे सब तारे ।
          हैं लाचार बेसहारे ।।
जगमग दिवाली की है ।।
          दम से दियों तुम्हारे ।।
तुलसी के भाई तुम हो ,
          भगवान के दुलारे ।।३

प्रा रविशंकर कोलते
     नागपुर
[31/10, 4:37 pm] विजेन्द्र मोहन बोकारो: शुभ दीपावली के अवसर पर
मेरी बिटिया ने सजाई 
आंगन दरवाजे पर रंगोली
देखकर सबका मन हर्षित हुआ
दिवाली त्योहार दीप मिलाकर 
दीप जलाएंगे ।
रंग बिरंग बस्त्र पहनकर
दिवाली के त्योहार दीप को मिला कर
दीप जलाएंगी।
बम पटाखे फोड़ेंगी खुब मिठाई खाएंगी
दिवाली के त्योहार मिलने घर जाएंगी
सभी सहेलियों के साथ रात में
बम पटाखे फोड़ेंगी।
सुनो पापा आज के दिन कुछ 
नहीं कहना मस्ती का दिन है।
फुल एंजॉयमेंट करने देना।।

विजयेन्द्र मोहन।
[31/10, 4:45 pm] रानी अग्रवाल: दीपावली
३०.१०.२०२१.शनिवार।
दीपावली काव्य सम्मेलन हेतु रचना।शीर्षक_ दिवाली।
दीपों का त्योहार दिवाली,
करे दूर अंधकार दिवाली।
जगमग_जगमग ज्योत जले,
जगे उमंग और उत्साह पले।
होय उजियारा,फैले प्रकाश,
लक्ष्मी का प्रवेश,मिले सकाश।
सबके जीवन में हो खुशहाली,
मन के फूल खिले,छाए हरियाली।
खूब बने पकवान ,मिठाई बंगाली,
घरघर हो पूजनआरती की थाली।
धनतेरस,अन्नकुट भाईदूज निराली
कहीं न गम हो,
     बजे खुशियों की ताली,
कहीं न तम हो,
     जली हो दीपों की आली।
हर घर केवल हर्ष हो,
       चले पवन मतवाली,
कोई घर न हो सूना खाली,
मित्रों आपको "हैप्पी दिवाली"।
"आली रे आली, दिवाली आली"
कहती मेरी कविता, छोटी वाली,
क्योंकि मैं हूं महाराष्ट्र में रहनेवाली।
स्वरचित मौलिक रचना______
रानी अग्रवाल,मुंबई।३०.१०.२१.
[31/10, 4:53 pm] कुम कुम वेद सेन: दिवाली का त्यौहार
दिलों में उमंगों का बहार
रंगोली से सजे हैं द्वार
सज रही है दीपो से घर वार

लक्ष्मी सरस्वती का है आगमन
द्वार खुला रखें सभी भाग्यवान
घर-घर लगे हैं बंदनवार
गा रहे हैं सभी मंगलगान

आ रही है प्रभु की सवारी
अयोध्या की सजावट निराली
चारों ओर फूलों की क्यारी
नृत्य कर रही है बाला
हाथों में लेकर फूलों की माला

घर-घर द्वारे बने हैं स्वस्तिक
चमक रही है शुभ लाभ की ज्योति
रिद्धि सिद्धि आनंद प्रमोद
सात सभी के हैं गणपति
पूजन अर्चन करती हूं वंदन दूर करे विघ्न बाधाओं का बंधन
अभिलाषी है सब आपके आशीर्वचन

कुमकुम वेद सेन
[31/10, 4:54 pm] सुरेन्द्र हरडे: *दिपावली* 
*आओ दीप जला औ*   

दिपावली, दिपावली आयी रे!
नई उमंग,उल्हास से मनाओ रे
यह पर्व प्रकाश का है दिपोत्सव
अंधेरे को मिटाऐ दीप जलाओ।1।

हर घर बाहर भीतर
नीचे उपर हर जगह 
उजियारा हो,पग -पग,जगमग
मन मन दिया जला औरे।।२।।

भारत की यह पाक भूमि रामकृष्ण गौतम -गांधी  
सरदार की अखंडता की ज्योत जलाकर आओ मिलकर सब दिया जलाओ।।३।।

अतिषबाजी, रोषणाई होगी,
घर घर से अंधेरा मिटेगा मां लक्ष्मी का पूजन करेंगे धन धान्य की वृद्धि होगी, पीडा दर्द हटेगा।४।।

घर घर खुशियों के दीप जले
यही कामना करते है, सभी लोग
खुशियां पाएं मां लक्ष्मी से प्रार्थना
करते हैं जीवन समृद्ध बनाओ।५।

सुरेंद्र हरडे 
नागपुर
दिनांक ३१/१०/२०२१
[31/10, 5:04 pm] वीना अचतानी 🧑🏿‍🦽: "दीप जलता रहे "
  नेह के ताप से,
 तम पिघलता रहे, 
  प्रेम आशा की,
  गंगा बहती रहे,
  स्नेह का दीप जलता रहे ।
   प्रकाश पुंज दीप,
   उन्नति का प्रतीक ,
    उदासी के सन्नाटे टूटे,
    उजियारे की सरगम फूटे,
    माटी का दीप जलता रहे ।
     समता,ममता चिन्तन अर्चना, 
     सब बाँटा एक सरीखा,
     काया में यह छोटा, 
     विश्वास का दीप जलता रहे ।
      बाती इसकी हरे,
       दूर तक अन्धेरा, 
       देव, दनुज हो या मानव,
       भेद न उसने करना सीखा,
        समता का दीप जलता रहे ।
        सदियों बाद भी,
        वही दीप माटी का,
        वही रूई की बाती, 
         घी की समिधा,मन मे ,
          आशा का दीप जलता रहे ।
          जब चहुँ ओर निराशा होती, 
          तब आशा एसे ही दीप,
          की तरह चमकती रहे, 
          दिलों में उल्लास भरता रहे,
           आशा का दीप जलता रहे ।।।
            एक दीप लेकर,
             प्रण किया मैने, 
             घर में किसी के,
             अन्धेरा न रहे, 
              उमँग का दीप जलता रहे ।
              दीप और रोशनी का है,
               अद्भुत मिलन,
               उष्मा भरा ऊर्जावान भरा  
                एक छोटा सा दीया,
                घर घर में उजाला, 
                करता रहे,
              दीप ज्ञान का जलता रहे ।।
              वीना अचतानी, 
               जोधपुर (राजस्थान)......
[31/10, 5:05 pm] 💃वंदना: दिवाली
दिवाली आई दिवाली
आई रे आई दिवाली।

सोचा घर में पेंट करवाऊं
पिया जी ने आंख दिखलाइ।

यूं ही कर लो ना साफ सफाई
पिछले साल ही की थी पुताई।

सोचा घर में लगाऊ लाइट
पिछला बिल ही भारी था भाई।

दिए से भी होगी रोशनाई
प्रिय देखो दिवाली आई।

मैंने सोचा बनाऊं मिठाई
पिया कहे डायबिटीज छाई।

देखो नाम तुम्हारा कितना मीठा
जैसे बिंदु में बूंदी समाई।

मैंने कहा लाओ नई साड़ी
पहले अलमारी करो प्रिय खाली।

अब कैसे मनाऊं दीवाली
सब में तो तुम्हारी मनाई।

अब जो शिकायत भाई
देखो आई दिवाली आई।

भाव भक्ती से होगी दिवाली
मन में श्रद्धा रखो मेरी प्यारी।

ना दिखावा करेंगे कोई
लक्ष्मी वंदना करें हम दोई।

बाजारों में छाई महंगाई
निकलेगा दीवाला भाई।

दिवाली आई दीवाली
आई ये आई दीवाली।

वंदना शर्मा बिंदु देवास मध्य प्रदेश।
[31/10, 5:06 pm] Alka: ‌
  🌹दीप जलाएं 🌹
******************

दिये से दिया जलाएं । धन की लक्ष्मी को ,,,, मैं हृदय सेअपने घर बुलाएं। स्वागत सत्कार में कोई कमी न होने पाए । ‌ ‌‌ दियों की जगमगाहट में लक्ष्मी देवी के पदचाप बनाएं । फूलों की माला पहनाकर चंदन कुमकुम का तिलक लगाएं । ‌ कमल के पवित्र फूल पर लक्ष्मी जी का आसन सजाएं । धूप दीप गंध जलाकर पूरा घर आंगन महकाएं। रंगोली और चौक पूरकर मां के आगमन की राह बनाएं । मिठाई और पकवानों की सुंदर आकर्षक थाल सजाएं । ‌ पटाखे और फुलझड़ी जलाकर ‌‌ ‌ माता के स्वागत का माहौल बनाएं ‍। कपूर ,धूप दीप ,गंध जलाकर ‍ ‌ मां लक्ष्मी देवी की आरती गाएं । चंदन कुमकुम फल फूल चढ़ाकर श्रद्धा से शंख बजाएं । दिल की गहराइयों और श्रद्धा से ‌ नतमस्तक हो कर शीश नवाएं। धन की देवी लक्ष्मी देवी को पूजें ‌‌ अपने घर में सदा के लिए बताएं।  
                            लाही बताशे, मिठाइयां चढ़ाकर ‌‌ प्रेम से सबको प्रसाद खिलाएं। ‌ दिल के दीए जलाकर अपने अंतर्मन को जगमगाएं।
********************
स्वरचित मौलिक रचना
डॉ . आशालता नायडू .
भिलाई . छत्तीसगढ़ .
********************
[31/10, 5:14 pm] आशा 🏆🏆जाकड इन्दौर: एक दीया ऐसा भी

एक दीया हम ऐसा जलाएं  
हृदय के भीतर प्रकाश करें 

एक दीया विश्वास का जलाएं 
जिन की हिम्मत टूट गई है 

एक दीया समानता का जलाएं 
जहाँ भेदभाव की दीवार खड़़ी है

एक दीया हम धैर्य का जलाएँ
जहां शांति मुँह मोड़ गई है।

एक दीया सीमा पर रक्षक हेतु 
जो देश के लिए जान दे रहे हैं

एक दीया उस मानवता हेतु 
जो इंसानियत को भूल गए हैं  

एक दीया उनकी खातिर भी
जिनके घर अंधकार फैला है।

एक दीया उस राह में जलाएं 
 जो पीछे छूटती जा रही है।। 

एक दीया हम प्रेम का जलाएं 
जो कटुता की अंगार बुझा दे।

 एक दीया हम ऐसा जलाएं
 अंधकार को जड़ से मिटा.दे।



 आशा जाकड़
[31/10, 5:17 pm] 👑पदमाकाक्षी शुक्ला: 🙏🌹 *नमन मंच* 🌹🙏
🙏🌹 *जय अम्बे* 🌹 *३१/१०/२१* 🌹🙏
🙏🌹 *दीपावली* 🌹🙏

खुशी का तोरणद्वार लगाए, 
आंगन रंगोली से सजाये।। 
हर कोने में दीपक जलाए। 
हर रिश्ता स्नेह से निभाए।। 

गांठ प्रतिशोध की छुट जाए। 
एक दूजे से प्यार बढाए।। 
मनसे हर पल साथ बिताए। 
नए पंथ पर साथ निभाए ।।

मिलकर कुछ वादा है करना ।
पर्यावरण को है बचाना ।।
दूर हमें पटाखा से रहना। 
अंधकार मन से भी मिटाना।। 

पूर्ण करें अपने सपनों को। 
प्यार बांटते है अपनों को।।  
सबसे दूरी बनाये रखना। 
सबके हिरदय में है रहना।। 

🙏🌹स्वरचित रचना 🌹🙏
🙏🌹पद्माक्षि शुक्ल 🌹🙏
[31/10, 5:23 pm] सरोज दुगड गोहाटी: * अग्नि शिखा काव्य मंच *
* दिनाँक :- २९/१०/ २०२१ /
* दीपावली उत्सव *
      
पितृ आज्ञा कर शिरोधार्य
 वन को गये कूँवर श्री राम ,
चौदह बर्ष का काट वनवास !
लौटे र्मयादा पुरूषोत्तम श्री राम ,

अयोध्या का कण कण पुलकित ,
 देहरी - देहरी घर दीप जगमगते
आकाशी तारे दीपक बन कर ,
अमाँवस्या को जग- मग करते !

शरद श्रतु का सुखद आगमन ,
प्रकृति विहंस कर मुस्कुराए !
दीपावली का मंगल त्यौंहार ,
जीवन को रोशन कर जाए !

जब भगवान महावीर नें ,
किया विजातिय का उच्छेद !
आत्माँ का उद्धवारोहण कर ,
मुक्ति वरण किया परिनिर्वाण !

ज्ञान का दीपक जब जलता ,
मिटता मन अज्ञान अंधियार !
इसी बात की याद में हम सब ,
मनाते दीपावली का त्योंहार !

सरोज दुगड़ 
खारूपेटिया 
असम 
🙏🙏🙏
[31/10, 5:29 pm] +91 70708 00416: मंच को नमन 🙏
विषय -दीपावली
31/10/21

      आओ मिलकर दीप जलाएं
     ***********************
आओ मिलकर दीप जलाएं
रिश्तों की मिशाल बनाएं
आओ हम सब मिलकर दीपों की माला बनाएं
उमंग भरी खुशियों से दीपावली मनाएं
धनतेरस पर हम सब मिल बाजार जाएं
लक्ष्मी गणेश की मूर्त्ति घर ले आएं
चांदी के सिक्के से पूजन करें
आओ हर्षोल्लास से दीपावली मनाएं
 द्वेष भावना को त्यागकर
दोस्ती का नया दीप जलाएं
कर दें सारा जग रोशन
कहीं न हो अब अंधियारा
आओ हम सब दीपावली मनाएं
आओ प्यार से रूठों को हम मनाएं
मिठाइयों से प्यार की मिठास बढ़ाएं
ऐसे ही कायम रहे हम सब का प्यार
 आओ हम सब मिलकर दीपावली मनाएं

 डॉ मीना कुमारी परिहार
[31/10, 5:38 pm] 💃💃sunitaअग्रवाल: शीर्षक_ दीवाली 

    श्री अग्रसेन जी महाराज का जन्म पांच हजार साल पहले हुआ था श्री राम जी के पुत्र कुश की चोतीसवी पीढी मैं हुआ था। महाराज जी को तीन बार लक्ष्मी जी ने वरदान दिया था," जो कोईअग्र बंधु सातिया , छाबड़ी मांडकर व्यापार करेगा , सफलता पायेगा , सुख शान्ति बनी रहेंगी,
दिवाली पर अग्रसेन महाराज की पूजा करने का अति महत्व है __ 
  
   महाराजा अग्रसेन जी ने सबको दिया अधिकार कोई छोटा न बड़ा सब कोई है समान,
क्षत्रिय से वैश्य कहलाए, हिंसा का त्याग किया, *राज्य में एक रुपया, एक ईट का नियम बनाया*।
यदि तुम चाहो खुशहाली , श्री अग्रसेन जी की पूजा करना हर दीवाली।
 श्री अग्रसेन जी ने वरदान पाया लक्ष्मी जी का। 
तेरे राज्य में सदा सुख शान्ति समृद्धि का वास रहें,
श्री अग्रसेन जी महाराज की पूजा करना हर दिवाली पर,
हर सनातनी , अग्रवशंज चरणों में सर रखकर श्रद्धा सुमन अर्पित करना, 
श्री अग्रसेन जी की आरतीउतारना पूजा करना हर दिवाली पर,
* श्री हनुमान भजे श्री राम को,
लक्ष्मी जी को भजे श्रीअग्रसेनजी
श्री अग्रसेन जी की कृपा जा पर , 
लक्ष्मी जी उसको न तजे,
लक्ष्मी जी को माने हर कोई पर महाराज अग्रसेन सा ना कोई ,
श्रीगणपति संग लक्ष्मी जी सोहे,
विराजे अग्रसेन जी हर दीवाली पर, 
अग्र बंधुओं भूल न जाना करना पूजा हर दीवाली पर, 
गणेशजी, लक्ष्मी जी, कुबेर जी की करे पूजा जो कोई , उसे अग्रहेश्वरी महालक्ष्मी का आशीष पावे ।

सुनीता अग्रवाल इंदौर मध्यप्रदेश स्वरचित धन्यवाद 🙏🙏
[31/10, 5:39 pm] रजनी अग्रवाल जोधपुर: विषय "दीपावली"

 1.दीपावली का पर्व है, दीप जलाओ आज। सारे गम ही मिटेंगे , पूरे होंगे काज ।

2. फुलझडियों को छोड़ते , 
बीती सारी शाम , 
अब तो सबको मिल गए , 
 अपने अपने राम ।

3. क्यों पटाके छोड़े हो, 
क्यों जलाए हो अर्थ, हाथ ना कुछ भी आए हैं , 
समय हो गया व्यर्थ ।

4. दीपावली मना रहे ,
 हिलमिल सारे लोग, बच्चों की मुस्कान में
 ही , 
बसे हैं शुभ संजोग ।

5. जगमग जगमग दीप है , 
उजियारे की रात , सबके दुख ही मिटेंगे, भूलो दुख की बात ।

6. प्रेम प्यार दीपक हुए,
 स्नेह भरी सौगात, अंधियारे से लड़ रही उजियारे की रात ।

स्वरचित रचना दोहे रजनी अग्रवाल 
   जोधपुर
[31/10, 5:40 pm] रजनी अग्रवाल जोधपुर: विषय "दीपावली"

 1.दीपावली का पर्व है, दीप जलाओ आज। सारे गम ही मिटेंगे , पूरे होंगे काज ।

2. फुलझडियों को छोड़ते , 
बीती सारी शाम , 
अब तो सबको मिल गए , 
 अपने अपने राम ।

3. क्यों पटाके छोड़े हो, 
क्यों जलाए हो अर्थ, हाथ ना कुछ भी आए हैं , 
समय हो गया व्यर्थ ।

4. दीपावली मना रहे ,
 हिलमिल सारे लोग, बच्चों की मुस्कान में
 ही , 
बसे हैं शुभ संजोग ।

5. जगमग जगमग दीप है , 
उजियारे की रात , सबके दुख ही मिटेंगे, भूलो दुख की बात ।

6. प्रेम प्यार दीपक हुए,
 स्नेह भरी सौगात, अंधियारे से लड़ रही उजियारे की रात ।

स्वरचित रचना दोहे रजनी अग्रवाल 
   जोधपुर
[31/10, 5:44 pm] डा. महताब अहमद आज़ाद /उत्तर प्रदेश: "दीवाली के दीप"

दीवाली के दीप जले
फूलों की खुशबू महकें 
मेंरे भारत देश में ,हमारे भारत देश में 

मिटे अंधेरें नफरत के 
फुलझड़ी प्यार की छूटे ,
मेंरे भारत देश में ,हमारे भारत देश में 
कभी किसी से बैर न हो  
सब अपने हो कोई गैर न हो 
मेंरे भारत देश में ,हमारे भारत देश में 
घर घर मे धन धान्य भरी हो।
ईश कृपा बरसाये।
मेंरे भारत देश में ,हमारे भारत देश में डा. महताब अहमद आज़ाद, उत्तर प्रदेश
[31/10, 5:46 pm] अंजली👏 तिवारी - जगदलपुर: आओ जलाये मीटटी का दीया
दूर करें अंधियारा
हर तरफ रोशनी हो
कहीं ना रह पाये अंधेरा
मन में एक‌दीप जलाते
सारी बुराई जला डाले
आओ सब मिलकर एक दीप जलाये
मिटा दे सारा जगत का अंधेरा
संचय न रहे ऐसे हो मन में उजाला
सब मिल जाय 
गिले सिकवे हट जाय
आओ एक दिन जलाते
मिटा दे अंधेरा
आती है दिपावली हर साल
मिलकर मनाने दीपो का त्यौंहार
अंजली तिवारी मिश्रा जगदलपुर छत्तीसगढ़।
[31/10, 5:51 pm] रामेश्वर गुप्ता के के: धन्यवाद,32-रामेश्वर प्रसाद गुप्ता।
।दीपावली।
दीपावाली की बात,
बहुत खास होती है।
मन प्रसन्न हो जाता है,
दिवाली दिल से होती है।।
दीपावली..................1
तीन दिन का त्योहार है,
साल भर से इंतजार है।
धनतेरस एवं छोटी दीवाली,
बड़ी दिवाली होती खास है।।
दीपावली....................2
धनतेरस में धातु घर ले आते,
जैसे लक्ष्मी घर आ जाती है।
बड़ी दीपावली ,लक्ष्मी पूजन से,
लक्ष्मी साक्षात घर आती है।।
दीपावली......................3
घर बाहर रोशनी होती है,
नये कपड़े सब पहनते हैं।
खील गट्टे का भोग लगाते हैं,
ब्यापारी लक्ष्मी को मनाते हैं।।
दीपावली.......................4
सब पर लक्ष्मी कृपा करती है,
मेहमान घर में पधारते हैं।
यह लक्ष्मी जी की महिमा है,
सब लोग लक्ष्मी को मनाते हैं।।
दीपावली.......................5
स्वरचित,
रामेश्वर प्रसाद गुप्ता।
[31/10, 5:53 pm] 💃rani: चलो चले आज एक ऐसे माहौल में
जहाँ खुद को ही नहीं 
औरों को भी खुश किया जाए
आ रही है दिवाली तो 
क्यों ना उन घरों को भी 
रोशन किया जाए और 
उनसे खरीददारी की जाए

जिनकी वजह से
घर हमारे रोशन होते
वह मिट्टी के दीए बनाने वाले 
जो आस लगाए रहते हैं कि
इन दीयों को बेचकर घर 
अपना रोशन करेंगे कि
अपने बच्चों को नए वस्त्र, 
मिठाई, पटाखे दिला कर
उनको खुश करेंगे 

जो खुशी इन दीयों को जलाने में 
वह नकली लाइटों में कहाँ
  शुद्ध होता वातावरण
असली दीयों से यहां 

और वह भी 
जो लक्ष्मी, माँ गौरी माँ,
गुड़िया की मूर्तियां बनाते हैं 
पूजा करते वक्त हम 
उन्हें थाली में सजाते 
तो उन मूर्तिकारों के घर
भी पूजा आसान बनाएं
हम सबकी की आस्था 
उनकी बनाई लक्ष्मी पर 
और बनाने वालों की
हम खरीदारों पर आस 

तो उनकी आस ना 
रह जाए अधूरी और
ईश्वर का  आशीष  
हम भी पाएं

और वह जो
धान और शक्कर के 
खिलौने सजाए बैठे हैं 
दिवाली पर यह भी तो 
कतार लगाए बैठे हैं 
तो उनके लिए भी 
कुछ खर्च करके क्यों ना 
उनकी दिवाली मीठी की जाए 

हम पर जो कृपा है
ईश्वर की क्यों ना
हम भी मानवता दिखाएं 

और वह भी जो
वंदनवार, फूलों की
दुकान लगाए बैठे हैं
इक-इक फूल से
माला है बनाते
उन फूलों से ही तो
घर में सजावट होती 

नकली वंदनवार कहां
खुशबू बिखेरते अपने
घर में खुशबू फैले 
उनका भी जीवन 
सुगंधित हो जाए 

और वह भी जो
पटाखों की छोटी-छोटी 
दुकानें सजाए बैठें हैं 
आने जाने वालों से 
उम्मीद लगाए बैठे हैं 
जो माल उनका बिक जाए
तो उनके घर भी रौनक
आ जाए 

तो आओ क्यों ना इन
सबका त्योहार खुशहाल
बनाया जाए, अपना घर
तो हम सजाते ही हैं
थोड़ा सा इनके जीवन
को भी 'रानी' सजाया जाए ।

                  रानी नारंग
[31/10, 5:58 pm] साधना तोमर: ज्योति पर्व

आओ प्रेम के दीप जलायें,
मिलकर ज्योति पर्व मनायें।

मन से ईर्ष्या-द्वेष मिटाकर, 
नफरत का विद्वेष हटाकर, 
हर मन को कर दे रोशन, 
दिल में ऐसी उमंग जगायें, 
आओ प्रेम के दीप जलायें।
   
तिमिर घना यह मिट जाये,
ज्ञान सदा ही विजय पाये, 
असत्य पर सत्य - जय की, 
उस जीत को फिर दोहरायें, 
आओ प्रेम का दीप जलाये।

भूखा-प्यासा हो कोई अगर,
बेबस लाचार ललचाई नजर, 
उम्मीद जगे हमसे जब ऐसी, 
कुछ पल ही सही दर्द बटाएं, 
आओ प्रेम का दीप जलाएं।

भय और वितृष्णा मिटाकर, 
आंखों में सपने जगा कर, 
जाति-धर्म सब-भेद भुला दे, 
अमन के सब फूल खिलायें,
आओ प्रेम का दीप जलायें।

स्वच्छ गली, घर और आँगन,
स्वच्छ धरा और स्वच्छ गगन, 
स्वस्थ रहे यह तनमन अपना, 
स्वच्छता को हम यूँ अपनायें, 
आओ प्रेम का दीप जलाएं।

चहुँ दिशा जगमग हो जाये, 
खुशियों से जीवन भर पाये, 
हर गरीब के घर-आंगन का, 
सुन्दर अब परिवेश बनाये, 
आओ प्रेम के दीप जलायें।

लक्ष्मी गणेश का पूजन करें, 
श्रद्धा और भक्ति के भाव भरे, 
घर-घर में प्रकाश जगे अब, 
आतिशबाजी सभी छुड़ाये, 
आओ प्रेम के दीप जलायें। 
 
डा, साधना तोमर
बड़ौत (बागपत) 
उत्तर प्रदेश
[31/10, 6:00 pm] वैष्णवी Khatri वेदिका: आभार 
🔴आज दिनांक 30 अक्टूबर 2021को आदरणीया डॉ अलका पाण्डेय जी मुम्बई और श्री सुरेन्द्र हरड़े जी और श्रीमती शोभारानी तिवारी जी के सशक्त संचालन में सितम्बर माह का लेखन सम्मान समारोह और दीपावली काव्य उत्सव का रंगा रंग कार्यक्रम बहुत ही सफल रहा है।

 कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना के बिना हो ही नहीं सकती। श्रीमती अलका पाण्डेय जी द्वारा प्रस्तुत सुमधुर सरस्वती वंदना ने सबको माता की भक्ति में सराबोर कर दिया। श्रीमती शोभारानी तिवारी जी द्वारा प्रस्तुत स्वागत गीत ने सबका हृदय जीत लिया।

इसके लिए आप सभी रचनाकारों को बहुत बधाई। आपने बहुत ही सुंदर उत्कृष्ट और शानदार रचनाएँ तथा ऑडियो इस काव्य गोष्ठी के पटल पर प्रस्तुत की हैं। इसके लिए मैं आप सबको पुनः धन्यवाद देती हूँ।

हमारी आज की काव्य गोष्ठी के मुख्य अतिथि डॉ कुंवारी वीर सिंह मार्तंड एवं मंच के अध्यक्ष महोदय आदरणीय श्री राम राय जी अध्यक्ष - श्री साहित्य औरंगाबाद से जी पूरे समय मंच पर उपस्थित रहकर हमारा हौसला बढ़ाते रहे। मैं दोनों अतिथियों का हृदय से बहुत-बहुत आभार व्यक्त करती हूँ।

 हमारे आज के संचालक डॉ अलका पाण्डेय जी और श्री सुरेन्द्र हरड़े जी जिन्होंने बहुत ही सुंदर शानदार संचालन किया है। उनको भी मैं बहुत-बहुत बधाई देती हूँ। एक बार पुनः आपका धन्यवाद और बधाई।

हमारे विशेष अतिथि आदरणीय श्री संतोष साहू जी, श्रीमती आशा जाकड़ जी को भी मैं हार्दिक धन्यवाद देती हूँ। आप सब बहुत सहयोग कर रहे हैं। एक बार पुनः आप सभी को मेरा हार्दिक आभार।

वैष्णो खत्री वेदिका
[31/10, 6:02 pm] 👑सुषमा शुक्ला: कविता का शीर्षक

(((( *दिवाली की सफाई कामवाली बाई* *नहीं आई* 

आपबीती कथा😃😌 कभी खुशी कभी गम।।। 
यही जीवन का सरगम।

सांसो का सुरमंडल छेड़ो,,,,
 बाई से मुंह कभी न मोड़ो।,,,,
 बाई लगती सब की मैया,,
 शीतल मधुकर इसकी छैया।😂

बाई रूपी शक्ति का साधक बनना। 
निष्ठावान उपासक बनना 🙏 हर हाल में इसको पटा के रखना,,
 वरना टूट जाएगा सपना😌

चंपाकली सी छवि मनोहर,
 मन को है दुलराती।। मोगरा चमेली की खुशबू आए,, जब बाई सज धज कर आती🥰

बाई ने कभी युद्ध भूमि में कला दिखाई।
 हम सब की बैंड बजाई😌
 कर दी सबकी त्राहि-त्राहि,,, जय हो बाई,, जय हो बाई🙂

मोबाइल धारी बर्तन मांजे ,,, और करे झाड़ू कटका।।। 
गुस्सा आ जाए तो लगा दे सब का फटका🤔

नहीं आई है बहुत दिनों से काम वाली महारानी।। 
और घर में नहीं है कोई,, कौन भरे अब घर का पानी?
😁😁😁😁
स्वरचित सुषमा शुक्ला🙏
[31/10, 6:09 pm] जनार्दन शर्मा: दिवाली दोहे ।
आई है दीपावली, बाँटो खुशियाँ प्यार।
दीपक से दीपक जला, दूर करो अँधियार॥1॥

लौटे आज अवधपुरी, राम काट वनवास।
झूम उठी नगरी सकल, मन में भर उल्लास॥2॥

द्वारे रंगोली बनी, मन में भरे उमंग।
गणपति घर ले आइये, लक्ष्मी जी के संग॥3॥

रिद्धि सिद्धि को साथ ले, घर में करो प्रवेश।
बाट तिहारी जोहते, लक्ष्मी और गणेश॥4॥

बरसों से है चल रही, अम्बर ये ही रीत।
होय बुराई पर सदा, अच्छाई की जीत॥5॥

रावण सम भाई नहीं, देखो सकल जहान।
जिसने बहना के लिए, दे दी अपनी जान॥6॥

अवधपुरी में आज तो, छाई अजब बहार।
बैठी है सारी प्रजा, आँख बिछाये द्वार॥7॥

नाचो गाओ खूब री, सखी मंगलाचार।
आज अवध में हो रहा, पुनः राम अवतार॥8॥

आज जला सबने दिये, सजा लिए हैं द्वार।
ताकि राम के पाँव में, चुभे न कोई ख़ार॥9॥

अपनी ताक़त पे कभी, करना नहीं गुमान।
अंहकार बन छीन ले, ये तो सबके प्राण॥10॥

छोड़ पटाखे मत करो, पर्यावरण ख़राब।
अगली पीढ़ी को सखा, देना हमें जवाब॥11॥

श्रेणियाँ:
[31/10, 6:18 pm] हेमा जैन 👩: आओ मिलकर इस दिवाली,
 उम्मीदो का ऐसा दीप जलाये,
कि गरीबो की कुटिया में 
अंधेरा दूर कर रौशनी फैलाये, 

आयी जो ये महामारी, 
इसको मिलकर दूर भगाये, 
आओ मिलकर दीप जलाये, 
हर कोने का अंधेरा दूर भगाये, 

आओ इस दिवाली, 
पटाखों की लड़ी नहीं, 
गरीब बच्चों के जीवन मे, 
खुशियों की झड़ी लगाए, 

गुझिया, शकरपारे, चक्की सी, 
मिठास औरो के जीवन मे लाये आओ इस दिवाली मिल कर 
दीप जलाये अंधेरा दूर भगाये, 

रंग बिरंगे रंगों से, 
सजी रंगोली सा, 
सबके जीवन में, 
ख़ुशियों के रंग भर दो 

ज्योति पर्व की इस बेला मे, 
आलौकित है मन का आँगन, 
मन का अंधकार मिटाकर, 
नफरत की दीवार जलाये 

आओ मिलकर दीप जलाये
हर कौने का अँधियारा दूर भगाये🌹
हेमा जैन, इंदौर (स्वरचित )
[31/10, 6:19 pm] निहारिका 🍇झा: 🌹"एक दीप''🌹
प्रज्वलित कर सकें एक दीप ऐसा जो........।।
एक दीप ऐसा जो आंधियों में जल सके।
लड़ सके अंधेरों से,दे सके रौशनी।
प्रज्वलित कर सकें एक दीप ऐसा जो
प्रेम से सधा हुआ ,भाव से गुंथा हुआ।
नेह की बाती से,रिश्तों को जोड़ दे।।
प्रज्वलित कर सकें एक दीप ऐसा जो
शान्ति का प्रतीक हो ,हर दिशा में व्याप्त हो।।
प्रज्वलित कर सकें एक दीप ऐसा जो
अज्ञानता को दूर कर ज्ञान का प्रकाश दे।
प्रज्वलित कर सकें एक दीप ऐसा जो।
आस्था की ज्योत को हर दिलो में भर सके।
प्रज्वलित कर..........।।।।।
आप सभी को पंचदिवसीय दीप पर्व की हार्दिक शुभकामनाएं ।।
निहारिका झा 🙏🙏🌹🌹
खैरागढ़ राजनांदगांव (छ.ग.)
[31/10, 6:21 pm] ♦️तारा प्रजापति - जोधपुर: बनना हो तो दीपक बन

तम अज्ञान का दूर करे
विकारों से हम रहें परे
पाक-पवित्र हो जाये मन
आलौकित पथ हो जीवन
बनना है तो दीपक बन

सच की राह पे चलना है
परवाना बन कर जलना है
तन-मन-धन कर अर्पण
आलौकित पथ हो जीवन
बनना है तो दीपक बन

प्यार से तुम झोली भर दो
अपनी कृपा सब पे कर दो
मिले सभी को अपनापन
आलौकित पथ हो जीवन
बनना है तो दीपक बन

भोर का तारा चमका है
 फूलों का मुखड़ा दमका है
प्रफुल्लित है जन-जन
आलौकित पथ हो जीवन
बनना है तो दीपक बन

हर चेहरे पर मुस्कान खिले
खुशियां सबको भरपूर मिले
धरती नाचे, झूमे ये गगन
आलौकित पथ हो जीवन
बनना है तो दीपक बन
                          तारा "प्रीत"
                       जोधपुर (राज०)
[31/10, 6:25 pm] चंदा 👏डांगी: $$ दिवाली $$

दिवाली आई हैआई है दिवाली आई है
दो सालों के बाद रोनक आई है आई है
दिवाली आई हैआई है दिवाली आई है 
कोरोना ने था बहुत सताया 
नहीं कोई बाज़ार मे नज़र आया 
घर-घर मे पड़े थे फाके 
इस बार फिर से चैन है आया 
रोनक बाजारों मे है छाई
हो गई घर की रंगाई पुताई 
अब है मिठाई बनाने की तैयारी
रोशनी मिट्टी के दिये की ही करना
कुम्हार के घर भी रोनक होगी
देश की अर्थ व्यवस्था सुदृढ होगी
बेरोजगारी की दर घटेगी 
एक बार फिर मेरा ये कहना 
दिये मिट्टी के ही जलाना 

चन्दा डांगी रेकी ग्रैंडमास्टर 
रामटेकरी मंदसौर मध्यप्रदेश
[31/10, 6:28 pm] 😇ब्रीज किशोर: अंग्निशिखा मंच
     ३१/१०/२०२१
   बिषय दिपावली
आज अवध मे खुशियाँ छाई। 
खुशी मनाये हर नर नारी।
लौट के आये दोनो भाई।
 और साथ में सिया दुलारी।

 चौदह वर्ष बाद घर आये।
  तिनो माता थाल सजाऐ।
 आओ सखियाँ मंगल गाए।
  राम के आये खुशी मनाये


श्री राम संग हनुमतआए
अंगद विभीषण भी आए
और जाम्बवन्त सुग्रीव आए।
आज अवध खुशी मनाए।

जगमग जगमग दिप जले।
राम जी सबसे गले मिले।
 आज अवध मे मनी दिवाली।
 हर चेहरे पर खुशी नीराली।
 भानुजा राम प्रभू के गुण गाये।
 प्रभू चरण मे शीश झुकाये।
[31/10, 6:29 pm] प्रेरणा सेन्द्रे इंदौर साझा: शीर्षक - माटी के दिये की आकांक्षा

दिवाली हर वर्ष मनाते हैं अबकी बार कुछ नया करो 
कुम्हार ने बनाए माटी के दिये, उसे खरीद कर तो देखो। 

धरा की माटी बुला रही, कुम्हार ने किया अथक परिश्रम
मिट्टी के दीये बनाकर रिझाए, दिखता कुम्हार का श्रम।

कुम्हार माटी के दीये, बेच रहा घर को करें रोशन उसकी देहरी पर भी, दिया जले करो ऐसा जतन।

कुम्हार माटी के दीए चाक पर, घुमा कर बना रहा परिवार सबका घर रोशन करने, सड़क पर बेच रहा।

कुम्हार के घर भी दिया जले,अब कि इस दीपावली 
माटी के दिये खरीद लो,मिलेगी उसको रोजी-रोटी

खुशियों की पोटली भरी, देखकर खूब मुस्कुराओ किसी भूखे नंगे को खिलाकर, पहना कर, तो देखो 

अपना घर जगमगाता देखकर,बहुत हर्षित हुए हम
 कुम्हार का घर रोशन करके,अति प्रसन्न हुए हम।

मेहनतकश को भी अपने, जश्न में शामिल करके तो देखो 
उसके परिवार का घर- आंगन, रोशन होगा करके तो देखो

प्रण करो,चाइनीज़ दिये झालर कभी,कुछ भी ना खरीदेँगे
गोबर- माटी के दीए खरीद कर,गरीब का जीवन संवारेंगे।

अब कि ऐसी नायाब खुशहाल दीवाली मनायेंगे,
कुम्हार के घर भी खुशी की लौ जगमगायेंगे।


 डॉक्टर अंजुल कंसल "कनुप्रिया"
31-10-21
[31/10, 6:29 pm] प्रेरणा सेन्द्रे इंदौर साझा: अग्निशिखा मंच
शीर्षक -"शुभ दीपावली"🎊


जगमगाती आई दिवाली 
खुशबू की छाई हरियाली 
घर द्वार की साफ-सफाई
 मन से दरिद्रता भगाई।🎉
 
द्वार पर तोरन डाल सजाए 
पांच दिन का आगाज जगाय 
धनतेरस पर पूजा करें कुबेर की
 मन से धन धान की आस की। 👜

नरक चतुर्दशी सुहागन करें सुहाग
 तन मन धन से बने जग मग 
 दीपावली पर द्वार दीप जलाएं
लक्ष्मी- गणेश पूजा आरती गाएं🤷‍♀️

परमा पर गोवर्धन द्वार बिठाये
अन्नकूट का भोग लगाकर जीवाये  
भाई दूज पर भाई को टीका लगाए  
साल भर रक्षा का वचन निभाए। 👩‍❤️‍👨

पांच दिन झिलमिल दीप जलाये
घर लक्ष्मी विराज दीपावली आये 
बुराई का नाश कर शुभ मंगल हो
 कोरोना मुक्त दीपावली शुभ हो।
 🎊🎉🎉🎉🎉🎉🎉🎉🎉


       प्रेरणा सेन्द्रे 
     स्वरचि

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आभार 
🔴आज दिनांक 30 अक्टूबर 2021को आदरणीया डॉ अलका पाण्डेय जी मुम्बई और श्री सुरेन्द्र हरड़े जी और श्रीमती शोभारानी तिवारी जी के सशक्त संचालन में सितम्बर माह का लेखन सम्मान समारोह और दीपावली काव्य उत्सव का रंगा रंग कार्यक्रम बहुत ही सफल रहा है।

 कार्यक्रम की शुरुआत सरस्वती वंदना के बिना हो ही नहीं सकती। श्रीमती अलका पाण्डेय जी द्वारा प्रस्तुत सुमधुर सरस्वती वंदना ने सबको माता की भक्ति में सराबोर कर दिया। श्रीमती शोभारानी तिवारी जी द्वारा प्रस्तुत स्वागत गीत ने सबका हृदय जीत लिया।

इसके लिए आप सभी रचनाकारों को बहुत बधाई। आपने बहुत ही सुंदर उत्कृष्ट और शानदार रचनाएँ तथा ऑडियो इस काव्य गोष्ठी के पटल पर प्रस्तुत की हैं। इसके लिए मैं आप सबको पुनः धन्यवाद देती हूँ।

हमारी आज की काव्य गोष्ठी के मुख्य अतिथि डॉ कुंवारी वीर सिंह मार्तंड एवं मंच के अध्यक्ष महोदय आदरणीय श्री राम राय जी अध्यक्ष - श्री साहित्य औरंगाबाद से जी पूरे समय मंच पर उपस्थित रहकर हमारा हौसला बढ़ाते रहे। मैं दोनों अतिथियों का हृदय से बहुत-बहुत आभार व्यक्त करती हूँ।

 हमारे आज के संचालक डॉ अलका पाण्डेय जी और श्री सुरेन्द्र हरड़े जी जिन्होंने बहुत ही सुंदर शानदार संचालन किया है। उनको भी मैं बहुत-बहुत बधाई देती हूँ। एक बार पुनः आपका धन्यवाद और बधाई।

हमारे विशेष अतिथि आदरणीय श्री संतोष साहू जी, श्रीमती आशा जाकड़ जी को भी मैं हार्दिक धन्यवाद देती हूँ। आप सब बहुत सहयोग कर रहे हैं। एक बार पुनः आप सभी को मेरा हार्दिक आभार।

वैष्णो खत्री वेदिका


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