Wednesday, 13 October 2021

अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच के ब्लॉक पर Aaj dinank 13/10/2021 किसको प्रदत्त विषय नवरात्रि का महत्व रचनाकारों के आने को पढ़ें और हौसला अफजाई करें अलका पांडे मुंबई



नवरात्रि का महत्व

हिंदू कैलेंडर के मुताबिक शारदीय नवरात्रि हर साल शरद ऋतु में अश्विन शुक्ल पक्ष की प्रतिपदा से शुरू होते हैं और इसका विशेष महत्व है. इस साल शारदीय नवरात्रि 7 अक्टूबर से शुरू होगई हैं, नवरात्रि में नौ दिनों तक भक्त मां के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं और मां को प्रसन्न करने के लिए व्रत भी किया जाता है. मान्यता है कि नौ दिनों तक भक्तिभाव से मां दुर्गा की पूजा करने से वह प्रसन्न होकर भक्तों के सभी कष्ट हर लेती हैं. नवरात्रि के पहले दिन मंदिर साफ करके वहां कलश स्थापना की जाती है. लेकिन क्या आप जानते है ​कि नवरात्रि क्यों मनाए जाते हैं और इसका क्या महत्व है.

नवरात्रि का महत्व
हिंदू धर्म में नवरात्रि एक साल में चार बार आते हैं लेकिन चैत्र और शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व है. ​हिंदू नववर्षक की शुरुआत चैत्र नवरात्रि से मानी जाती है. वहीं शारदीय नवरात्रि का भी अलग महत्व है. कहा जाता है क शारदीय नवरात्रि धर्म की अधर्म पर और सत्य की असत्य पर जीत का प्रतीक है. धार्मिक मान्यताओं के अनुसार इन्हीं नौ दिनों में मां दुर्गा धरती पर आती है और धरती को उनका मायका कहा जाता है. उनके आने की खुशी में इन दिनों को दुर्गा उत्सव के तौर पर देशभर में धूमधाम से मनाया जाता है. श्रध्दालु पहले दिन कलश स्थापना कर इन नौ दिनों तक व्रत-उपवास करते हैं.


नवरात्रि मनाए जाने को लेकर दो पौराणिक कथाएं प्रचलित है. पहली कथा के अनुसार महिषासुर नामक एक राक्षक ने ब्रह्मा जी को प्रसन्न कर उनसे वरदाना मांगा था कि दुनिया में कोई भी देव, दानव या धरती पर रहने वाला मनुष्य उसका वध न कर सके. इस वरदान को पाने के ​बाद महिषासुर आतंक मचाने लगा. उसके आतंक को रोकने के लिए शक्ति के रुप में मां दुर्गा का जन्म हुआ. मां दुर्गा और महिषासुर के बीच नौ दिनों तक युद्ध चला और दसवें दिन मां ने महिषासुर का वध कर दिया.

दूसरी कथा के अनुसार जब भगवान राम लंका पर आक्रमण करने जा रहे थे तो उससे पहले उन्होंने मां भगवती की अराधनी की. भगवान राम ने नौ दिनों तक रामेश्वर में माता का पूजन किया और उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर मां ने उन्हें जीत का आर्शीवाद दिया. दसवें दिन राम जी ने रावण को हराकर लंक पर विजय प्राप्त की थी. तभी तक विजयदशमी का त्योहार मनाया जाता है.
अलका पांडेय

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[13/10, 9:09 am] 😇ब्रीज किशोर: अष्टम् माँ महागौरी।
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,माता महागौरी तेरे दर्शन को तेरे मन्दिर आती हूं।
माँ महागौरी तेरे मन्दिर में तेरा आसन सजाती हूं।
गले मे हार फूलो का सजा है फूलो से आसन।
माँ पारिजात के फूलो से तेरा श्रीगांर करती हूं।
माँ तेरे दर्शन के लिये।
तेरे मन्दिर में आती हूं।
मांंग में मंग टीका कानो मे कुडंल है सुन्दर
माँ के गले का हरवा चन्दा सा चमकता है।
माँ महागौरी तेरे दर्शन को तेरे
मन्दिर में आती हूं।१!
माता तेरे अंगो की चुनरी तारो से चमकती है।
हाथो में लेकर पियरी तेरे मन्दिर मे आती हूं।
माँ महागौरी तेरे दर्शन को तेरे मन्दिर....।।२।।
 माता तेरे हाथो की चुडियाँ संगीत सा खनती है।
हाथो में ले के कंगन तेरे मंन्दिर में आती हू।
माता महागौरी...।।३।।
माता तेरे पायल के घुघुरू रून झुन रून झुन बजते है।
हाथो में लेके तेरे पावो की बिछुआ तेरे मन्दिर में आती हूं।
माता महागौरी ...।। ४।।
माता महागौरी को हलवा, पूड़ी ,चने का भोग लगता है।
हाथो में लेके नारियल चुन्नी तेरे मन्दिर में आती हूं।
माता महागौरी तेरे दर्शन को तेरे मन्दिर में आती हूं..।। ५।।
स्वरचित
  बृजकिशोरी त्रिपाठी(भानुजा)
गोरखपुर ,यू.पी
[13/10, 11:51 am] कुंवर वीर सिंह मार्तंड कोलकाता: 🌺बुधवार =13/10/ 2021
🌺विषय _नवरात्रि का महत्व
🌺 विधा - लेख 
नव रात्रि दुर्गा के नौ रूपों के पूजन का पर्व है।
दुर्गा के नौ रूप हैं – 1) शैलपुत्री, 2) ब्रह्मचारिणी, 3) चंद्रघंटा, 4) कूष्माण्डा, 5) स्कंदमाता, 6)कात्यायनी, 7) कालरात्रि, 8) महागौरी, 9) सिद्धिदात्री

नव रात्रि पूजा साल में दो बार पड़ती है। वसंत की शुरुआत में वसंती नव दुर्गा एवं शरद ऋतु के प्रारंभ में शारदीय नवरात्रि। 

नवरात्रि पर्व, माँ-दुर्गा की अवधारणा भक्ति और परमात्मा की शक्ति की पूजा का सबसे शुभ और अनोखा समय माना जाता है। यह पूजा वैदिक युग से पहले, प्रागैतिहासिक काल से चली आ रही है। ऋषि के वैदिक युग के बाद से, नवरात्रि के दौरान की भक्ति प्रथाओं में से मुख्य रूप गायत्री साधना का हैं। नवरात्रि में देवी के शक्तिपीठ और सिद्धपीठों पर भारी मेले लगते हैं । माता के सभी शक्तिपीठों का महत्व अलग-अलग हैं। लेकिन माता का स्वरूप एक ही है। कहीं पर जम्मू कटरा के पास वैष्णो देवी बन जाती है। तो कहीं पर चामुंडा रूप में पूजी जाती है। बिलासपुर हिमाचल प्रदेश मे नैना देवी नाम से माता के मेले लगते हैं तो वहीं सहारनपुर में शाकुंभरी देवी के नाम से माता का भारी मेला लगता है। लोक मान्यताओ के अनुसार लोगो का मनना है कि नवरात्रि के दिन व्रत करने से माता प्रसन्न होती है।

नवरात्रि के पहले तीन दिन देवी दुर्गा की पूजा करने के लिए समर्पित किए गए हैं। यह पूजा उसकी ऊर्जा और शक्ति की की जाती है। प्रत्येक दिन दुर्गा के एक अलग रूप को समर्पित है। पहले दिन माता के शैलपुत्री, दूसरे दिन ब्रम्ह्चारिणी और तीसरे दिन चंद्रघंटा स्वरुप की आराधना की जाती है।


नवरात्रि के चौथे, पांचवें और छठे दिन लक्ष्मी- समृद्धि और शांति की देवी, की पूजा करने के लिए समर्पित है। शायद व्यक्ति बुरी प्रवृत्तियों और धन पर विजय प्राप्त कर लेता है, पर वह अभी सच्चे ज्ञान से वंचित है। ज्ञान एक मानवीय जीवन जीने के लिए आवश्यक है भले ही वह सत्ता और धन के साथ समृद्ध है। इसलिए, नवरात्रि के पांचवें दिन देवी सरस्वती की पूजा की जाती है। सभी पुस्तकों और अन्य साहित्य सामग्रियों को एक स्थान पर इकट्ठा कर दिया जाता हैं और एक दीया देवी आह्वान और आशीर्वाद लेने के लिए, देवता के सामने जलाया जाता है।

नवरात्रि का सातवां और आठवां दिन
सातवें दिन, कला और ज्ञान की देवी, सरस्वती, की पूजा की है। प्रार्थनायें, आध्यात्मिक ज्ञान की तलाश के उद्देश्य के साथ की जाती हैं। आठवे दिन पर एक 'यज्ञ' किया जाता है। यह एक बलिदान है जो देवी दुर्गा को सम्मान तथा उनको विदा करता है।

नवरात्रि का नौवां दिन
नौवा दिन नवरात्रि का अंतिम दिन है। यह महानवमी के नाम से भी जाना जाता है। इस दिन कन्या पूजन होता है। जिसमें नौ कन्याओं की पूजा होती है जो अभी तक यौवन की अवस्था तक नहीं पहुँची है। इन नौ कन्याओं को देवी दुर्गा के नौ रूपों का प्रतीक माना जाता है। कन्याओं का सम्मान तथा स्वागत करने के लिए उनके पैर धोए जाते हैं। पूजा के अंत में कन्याओं को उपहार के रूप में नए कपड़े प्रदान किए जाते हैं।
दशहरा
इस दिन ब्राह्मण सरस्वती-पूजन तथा क्षत्रिय शस्त्र-पूजन आरंभ करते हैं। विजयादशमी या दशहरा एक राष्ट्रीय पर्व है। अर्थात आश्विन शुक्ल दशमी को सायंकाल तारा उदय होने के समय 'विजयकाल' रहता है। यह सभी कार्यों को सिद्ध करता है। आश्विन शुक्ल दशमी पूर्वविद्धा निषिद्ध, परविद्धा शुद्ध और श्रवण नक्षत्रयुक्त सूर्योदयव्यापिनी सर्वश्रेष्ठ होती है। अपराह्न काल, श्रवण नक्षत्र तथा दशमी का प्रारंभ विजय यात्रा का मुहूर्त माना गया है। दुर्गा-विसर्जन, अपराजिता पूजन, विजय-प्रयाग, शमी पूजन तथा नवरात्र-पारण इस पर्व के महान कर्म हैं। इस दिन संध्या के समय नीलकंठ पक्षी का दर्शन शुभ माना जाता है। क्षत्रिय/राजपूतों इस दिन प्रातः स्नानादि नित्य कर्म से निवृत्त होकर संकल्प मंत्र लेते हैं।इसके पश्चात देवताओं, गुरुजन, अस्त्र-शस्त्र, अश्व आदि के यथाविधि पूजन की परंपरा है। नवरात्रि के दौरान कुछ भक्तों उपवास और प्रार्थना, स्वास्थ्य और समृद्धि के संरक्षण के लिए रखते हैं। भक्त इस व्रत के समय मांस, शराब, अनाज, गेहूं और प्याज नहीं खाते। नवरात्रि और मौसमी परिवर्तन के काल के दौरान अनाज आम तौर पर परहेज कर दिया जाते है क्योंकि मानते है कि अनाज नकारात्मक ऊर्जा को आकर्षित करता हैं। नवरात्रि आत्मनिरीक्षण और शुद्धि का पर्व है और पारंपरिक रूप से नए उद्यम शुरू करने के लिए एक शुभ और धार्मिक समय है।

© कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड, कोलकाता
[13/10, 11:52 am] 👑सुषमा शुक्ला: श्री गणेशाय नमः *नवरात्रि पर लेख* 

*विषय,,, मां की भक्ति के नाम पर गरबा डांडिया नृत्य का, फूहड़ता या व्यावसायिक हो जाना क्या उचित है*?
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,*दुर्गा परम सनातनी*,, 
*जग की सृजन हार*,,,,
 *आदि भवानी *महादेवी* ,,,
*सृष्टि का* *आधार*


*प्रारंभ*,,,,,, गरबा गुजरात राजस्थान मालवा प्रदेशों में प्रचलित लोक नृत्य जिसका
 उद्गम गुजरात है। गरबा समृद्ध परंपरा का निरूपण करता है। गरबा डांडिया रास का रंग देश भर में बिखरने लगता है। मां दुर्गा की आराधना गरबा/ डांडिया करके प्रसन्न किया जाता हैl
 नवरात्र के 9 दिनों में मां को प्रसन्न करने के उपाय में से एक है नृत्य। शास्त्रों में नृत्य को साधना का एक मार्ग बताया है। *खूबसूरत पारंपरिक पोशाक और डांडिया की खनक माहौल को और खुशनुमा बना देती है*

शाब्दिक अर्थ गरबा का शाब्दिक अर्थ पर गौर करें तो यह गर्भ से बना है नवरात्रि के पहले दिन छिद्र, लेस लगा एक मिट्टी के घड़े को स्थापित किया जाता है। जिसके अंदर दीपक प्रज्वलित किया जाता है।
 एक चांदी का सिक्का रखते हैं इस दीप को दीप गर्भ कहते हैं।।

*आज गरबे के नाम पर अश्लीलता बढ़ती नग्नता का बोलबाला है*। मां की आराधना, सिद्धि आराधना के लिए होता है। किंतु युवाओं ने भोग विलास लवर पॉइंट मात्र बना डाला। फैशन शो बन कर रह गया। नवरात्र में कुछ लोगों द्वारा व्यापार का रूप दे दिया गया है। विभिन्न स्थानों में गरबा आयोजन के नाम पर व्यापार करने लगे ।
गार्डन में महंगे दाम पर डांडिया गरबा कराकर अच्छा खास पैसा वसूलते हैं। *महिलाएं विशेष तौर पर संस्कृति को त्याग कर पश्चिमी सभ्यता का अनुसरण करने लगी* विभिन्न पर्व आयोजक धार्मिक गीतों की जगह अश्लील गीतों पर गरबा करवा रहे हैं।

*उपाय*
 गरबा डांडिया उत्सव में फिल्मी अशलील पूर्ण गानों पर प्रतिबंध लगाया जाए।
*तड़क-धड़क उत्तेजित वेशभूषा पर प्रतिबंध होना चाहिए*
गरबा डांडिया आयोजक की अनुमति 11:00 बजे तक ही दी जाए
धार्मिक उन्माद लव पॉइंट के बढ़ते मामले पर गंभीरता से विचार करें। और गरबे के नाम पर खिलवाड़ बर्दाश्त ना करें।🙏

निकासी द्वार पर लोगों के,,
 बिना छूकर निकलने वाली,,, यानी टच फ्री मोड दरवाजे लगाने होगे।
आयोजन स्थल को दो बार सैनिटाइजर किया जाए
क्षमता 50% या 200 से ज्यादा लोग शामिल ना हो ।
गाइडलाइन के अनुसार ही आयोजन होl

*Thermal screening* मैं बुखार पीड़ित मिले तो,, प्रवेश नहीं होना चाहिए

आयोजन स्थल पर पार्किंग व्यवस्था आयोजक करेंगे। दिशा निर्देश के उल्लंघनों पर इसकी जवाबदारी आयोजक मंडल की होगी। नियमानुसार दंडात्मक कार्यवाही भी की जाएगी।

इस प्रकार मां के गरबे की गरिमा परंपरा को बनाए रखना,,, हम भारतवासियों का कर्तव्य है।🙏

*दिव्य है आंखों का नूर,, करती है संकटों से दूर*,,,
 *मां की छवि है निराली*,,
 *नवरात्र में आई खुशहाली*

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सुषमा शुक्ला🌹
[13/10, 1:11 pm] रवि शंकर कोलते क: बुधवार १३/१०/२१
विधा ***** लेख
विषय***
     #**नवरात्री का महत्व**#
                ^^^^^^^^^^
      
       हिंदू धर्म व धार्मिक मान्यता के अनुसार मा दुर्गा के पूजन का बहुत महत्व है । इसे भक्ति का पर्व भी कहा जाए तो गलत नहीं है क्योंकि ९ दिवस लोग भक्ति भाव से मां भगवती की अर्चना में डूबे रहते हैं, भक्ति में लीन होते हैं । जिससे तन मन शुद्ध, पवित्र होते हैं । सुख समृद्धि की याचना करते हैं मां का आशीर्वाद प्राप्त करते हैं ।
         यह पर्व अश्विनी शुक्ल की प्रतिपदा से आरंभ होता है लोग अपने-अपने भक्ति भाव के अनुसार मां के नौ रूपों की आराधना करते हैं । ऐसा कहते हैं की मां भगवती धरती पर आती है । यह धरती ही उसका मायका है और जब भी कोई बेटी अपने पिता के घर या अपने मायके में आती हैतो बड़ा ही प्रफुल्लित और प्रसन्नता का , प्रेम और भक्ति भाव का वातावरण तैयार होता है । बस उसी तरह जब माता रानी का नवरात्रि में आगमन होता है तो इस धरती पर चारों और भक्ति भाव , हर्ष उल्लास, प्रेम का माहौल होता है । इस आनंदमय वातावरण में लोग भक्ति के रंग में डूब जाते हैं । अलग-अलग प्रांतों में मां के नौ रूपों में आराधना की जाती है । बंगाल में बहुत सुंदर इस का पर्व मनाया जाता है गुजरात में डांडिया नृत्य खेला जाता है ,उस के नौ रूपों की नव दिवस भक्ति करते हैं ।
        मां ने सदा अपने भक्तों की रक्षा की है दुष्ट दानों से भक्तों को बचाया है बड़े-बड़े राक्षसों का वध किया है ।
         श्रीराम ने मां की आराधना की और शिव भक्त दुष्ट रावण को मारकर विजयदशमी को विजय प्राप्त की । इस विजयादशमी के दिन को दशहरा कहते हैं क्योंकि श्री राम ने 10 मुंह वाले रावण का वध किया था । 
      इस नवरात्रि का धार्मिक महत्व बहुत है क्योंकि इस पर्व में दुष्ट प्रवृत्ति का ,घृणा ,क्रोध अपराध का विनाश होता है । असत्य पर सत्य की विजय हुई है । हर तरफ प्रेम और आनंद का वातावरण निर्माण होता है। प्रेम से ही संसार चलता है, नफरत से नहीं । 
और यह प्रेम मां से ही हमें मिलता है क्योंकि मां ममता, वात्सल्य दया करुणा की देवी होती है ।  

प्रा रविशंकर कोलते ,
    नागपुर
[13/10, 1:23 pm] वीना अचतानी 🧑🏿‍🦽: वीना अचतानी 
विषय नवरात्री पर लेख******
श्री दुर्गा पूजा विशेष रूप से वर्ष में दो बार की जाती है।अश्विन शुक्ला प्रतिपदा को जो नवरात्र प्रारम्भ होते हैं ,उन्हें शारदीय नवरात्र कहते हैं ।चैत्र शुक्ला प्रतिपदा से आरम्भ होने वाले नवरात्र वार्षिक नवरोत्र कहलाते हैं ।मता के नौ रूपों की प्रतिदिन पूजा अराधना होती है । माँ का पहला रूप है।।
1) शैल पुत्री *** देवी का पहला नाम शैलपुत्री कहा गया है, वे पर्वतराज हिमालय की पुत्री हैं ।।
2) ब्रह्मचारिणी *** देवी का एक लक्ष्य अपने भक्तों को सच्चिदानन्दमय ब्रह्म स्वरूप की प्राप्ति कराना है। इसलिए उन्हें ब्रहमचारणी कहते हैं ।।
3) चन्द्रघन्टा ****चन्द्रमा जिसके मस्तक में स्थित हो उस देवी को चंद्रघंटा कहते हैं ।।
4) कूष्माण्डा **** जिनके थोड़े से मुस्कराने से ब्रह्मांड उत्पन होता है।वे देवी कूष्माण्डा कहलाती हैं ।।।
5 ) स्कंदमाता*** पार्वती के एक पुत्र का नाम स्कंद है । उनकी माता होने से वे स्कंदमाता कहलाती हैं ।।
6) कात्यायनी *** देवताओं का कार्य सिद्व करने के लिए देवी महर्षि कात्यायन के आश्रम पर प्रकट हुईं ।अत:उनकी कात्यायनी से प्रसिद्ध हुई।
7) कालरात्रि *** सबको मारने वाले काल की मी रात्रि होने से देवी का नाम कालरात्रि है।
8) महागौरी ***देवी ने तपस्या द्वारा गौर वर्ण प्राप्त किया था, इस कारण वे महागौरी कहलाती हैं ।।
9) सिद्धिदात्री *** सिद्वि अर्थात् मोक्ष प्रदान करने के कारण देवी सिद्धिदात्री कहलाती हैं ।।।
         जयकार करो माता की आओं शरण भवानी की ।। जय माता की।।
वीना अचतानी 
जोधपुर ।।।।
[13/10, 1:56 pm] रजनी अग्रवाल जोधपुर: लेख--
शीर्षक-"नवरात्रि का महत्व"

कहां जाता है कि शारदीय नवरात्रि धर्म की अधर्म पर, असत्य की सत्य पर ,जीत का प्रतीक है ।धार्मिक मान्यता है कि इन्हीं 9 दिनों में मां दुर्गा धरती पर आती है ।धरती को उनका मायका कहा जाता है ।उनके आने की खुशी में इन दिनों को दुर्गा उत्सव के रूप में बड़े धूमधाम से नवरात्रि के रूप में मनाया जाता है ।यह अंबा विद्युत का प्रतिनिधित्व है ।बसंत और शरद ऋतु की शुरुआत और सूरज के प्रभावों का महत्वपूर्ण संगम है ।यह संगम मां दुर्गा की पूजा के लिए पवित्र समय माना जाता है। नव दुर्गा माता पार्वती के नौ रूपों को एक साथ कहा जाता है । इनको ही पापों की विनाशिनी कहा गया है इन सब के अलग-अलग वाहन और अस्त्र -शस्त्र हैं। प्रथम शैलपुत्री द्वितीय ब्रह्मचारिणी तृतीय चन्द्रघण्टे चतुर्थ कुष्मांडे पंचम स्कंदमाता सष्ठम् कात्यानी माता, सप्तम कालरात्रि ,अष्टम महागौरी ,नमी नव दुर्गा सिद्धिदात्री ।नवरात्रि की सभी को हार्दिक शुभकामनाएं ! जय दुर्गे मां! जय गौरी अंबे! काली माता जय जय मां! सब का कल्याण कर!

लेखिका रजनी अग्रवाल
[13/10, 1:59 pm] शेभारानी✔️ तिवारी इंदौर: नवरात्रि और मेरी श्रद्धा 
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शारदीय नवरात्रि नव दुर्गा की उपासना का पर्व है। यह हर वर्ष श्राद्ध खत्म होते ही शुरू हो जाता है। हिंदू पंचांग के अनुसार आश्विन के शुक्लपक्ष की प्रतिपदा से नवरात्र पर्व शुरू होता है। घर-घर घट स्थापना की जाती है ,और मां की आराधना करते हैं ।पहले दिन शैलपुत्री दूसरे दिन ब्रह्मचारिणी तीसरे दिन मां चंद्रघंटा चौथे दिन मां कूष्मांडा पांचवे दिन मां स्कंदमाता छठे दिन मां कात्यायनी सातवां दिन मां कालरात्रि आठवें दिन महागौरी और नौवें दिन सिद्धिदात्री की पूजा की जाती है। हर दिन अलग-अलग रूपों में मां की पूजा की जाती है। मेरी नवरात्रि में मां दुर्गा पर अटूट आस्था और विश्वास है ।मैं भी व्रत फलाहर करती हूं। नव दुर्गा पर आस्था है और उन्हें सच्चे मन से पूजोगे तो उनका फल अवश्य मिलता है। इस नवरात्रि में सुबह शाम मां की आराधना, पूजा आरती ,भजन ,कीर्तन होता है। घर का माहौल आनंद देने वाला होता है ।सब मिलकर एक साथ मां की आराधना में लीन रहते हैं ।धार्मिक माहौल रहता है। सब एकता के सूत्र में बंधे रहते हैं ,और इससे प्यार और विश्वास के रिश्ते मजबूत होते हैं। मैं मां दुर्गा जी से यही प्रार्थना करती हूं , कि अपने भक्तों को धनधान्य से पूर्ण कर दें।सबको आनंद दे और कष्टों का निवारण करें ।अपने भक्तों की झोली खुशियों से भर दे ।सबकी मुराद पूरी हो, और जो लोग बेटियों पर बुरी नजर डालते हैं ,उन दुष्टों का संहार करें ,उनको तुरंत सजा मिले। मैं पुरुषों से यह भी अपेक्षा करती हूं कि ,जिस प्रकार नवरात्रि में मां दुर्गा की आराधना की जाती है,नारी भी मां दुर्गा कि स्वरूप है ,उनका भी सम्मान होना चाहिए। मैं मां से एक विनती करती हूं कि, मेरी लेखनी में धार दें,और मेरी लेखनी हमेशा चलती रहे ।

श्रीमती शोभा रानी तिवारी 619 अक्षत अपार्टमेंट खातीवाला टैंक इंदौर मध्य प्रदेश मोबाइल 89894 09210
[13/10, 2:16 pm] वैष्णवी Khatri वेदिका: बुधवार =13/10/ 2021
विषय _नवरात्रि का महत्व
विधा - लेख 

हिंदुओं का एक प्रमुख पर्व है नवरात्रि। यह संस्कृत शब्द है जिसका अर्थ है 'नौ रातें'। इन रातों में देवी के नौ रूपों की पूजा और दसवाँ दिन दशहरा होता है।
पौष, चैत्र, आषाढ, अश्विन मास में प्रतिपदा से नवमी तक मनाया जाता है। नवरात्रि को नराते और नवरात्र भी कहते हैं।

नौ दिन दुर्गा देवी के विभिन्न स्वरूपों की पूजा की जाती है। जो इस प्रकार हैं-शैलपुत्री, ब्रह्मचारिणी, चंद्रघंटा, कूष्माण्डा, स्कंदमाता, कात्यायनी, कालरात्रि, महागौरी, सिद्धिदात्री।

माता के शक्तिपीठों का महत्व अलग है लेकिन माता का स्वरूप एक ही है। कटरा में वैष्णो देवी, हिमाचल प्रदेश में चामुंडा, नैना देवी, माँ वज्रेश्वरी कांगड़ा वाली, ज्वालामुखी देवी, माँ चिंतापुरनी उना, माँ मनसा देवी पंचकुला, माँ कालिका देवी कालका और सहारनपुर में शाकुंभरी देवी के नाम से पूजी जाती है।

नवरात्रि विभिन्न भागों में अलग ढंग से मनायी जाती है।
 गुजरात में देवी के सम्मान में गरबा'आरती' से पहले और डांडिया समारोह उसके बाद किया जाता है। बंगालियों के मुख्य त्यौहारो में दुर्गा पूजा मनाई जाती है। नवरात्रि पूजा प्रागैतिहासिक काल से चली आ रही है। देवी के शक्तिपीठ और सिद्धपीठों पर भारी मेले लगते हैं ।
 
नवरात्रि के पहले दिन माता के शैलपुत्री, दूसरे दिन ब्रम्ह्चारिणी और तीसरे दिन चंद्रघंटा स्वरुप की आराधना की जाती है। चौथे, पाँचवें और छठे दिन लक्ष्मी- समृद्धि और शांति की देवी, की पूजा की जाती है। सातवें दिन सरस्वती जी की और आठवें दिन देवी दुर्गा को सम्मान तथा उनको विदा करने के लिए यज्ञ किया जाता है।

नौवा दिन महानवमी के नाम से जाना जाता है। इस दिन नौ कन्याओं जो कि दुर्गा के नौ रूपों का प्रतीक मानी जाती हैं की पूजा की जाती है। कन्याओं के पैर धो कर, टीका लगाकर कन्याओं को उपहार दिए जाते हैं।

स‍िद्धि और साधना की दृष्टि से से शारदीय नवरात्र का बहुत महत्व है। इस नवरात्र में लोग अपनी आध्यात्मिक और मानसिक शक्ति-संचय के लिए अनेक प्रकार के व्रत, संयम, नियम, यज्ञ, भजन, पूजन, योग-साधना आदि करते हैं। आदिकाल से दुर्गा-उपासना और आराधना चली आ रही है। 

वैष्णो खत्री वेदिका
[13/10, 2:21 pm] विजेन्द्र मोहन बोकारो: मंच को नमन
विधा :-- *लेख*
विषय:-- *नवरात्रि का महत्व*
हिंदू पंचांग के अनुसार प्रत्येक वर्ष दो बार नवरात्रि हम लोग मनाते हैं। वर्ष के प्रथम माह चैत्र मास में तथा दूसरे बार आश्विन माह में शारदीय नवरात्रि खूब धूमधाम से मनाते हैं। इस वर्ष 7 अक्टूबर से 15 अक्टूबर तक मां का अलग-अलग रूप में आवाहन करके पूजा करेंगे हैं। आज अष्टमी है आज की पूजा काफी महत्वपूर्ण होती है गौरी मां की पूजा-अर्चना होता है।ऐसा मान्यता है नौ दिनों तक भक्तिभाव से माता की पूजा करने से वह प्रसन्न होकर भक्तों के सभी कष्ट हर लेती हैं। नवरात्रि के पहले दिन पूजा स्थल को साफ करने के बाद स्नान करने के बाद कलश स्थापना की जाती है।
 मैं बताना चाहूंगा नवरात्रि क्यों मनाते हैं और इसका महत्व क्या है। 
*नवरात्रि का महत्व*
हिंदू धर्म के नवरात्रि प्रत्येक वर्ष दो बार आता हैं लेकिन चैत्र और शारदीय। लेकिन शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व है हिंदू पंचांग के अनुसार शुरुआती दौरे में चैत्र नवरात्रि मनाई जाती है। शारदीय नवरात्रि धर्म के आधार पर और सत्य की असत्य पर जीत का प्रतीक है। हिंदू धर्म के मान्यता के अनुसार मां दुर्गा का मैंके धरती माता है हर वर्ष 9 दिन के लिए मां अपने मैकें आती है। पौराणिक कथाएं के अनुसार महिषासुर नामक एक राक्षस ने ब्रह्मा जी को प्रसन कर उसने वरदान मांगा था कि दुनिया में कोई भी देव दानव धरती पर रहने वाला मनुष्य उसका बध न कर सके। इस वरदान के तत्पश्चात महिषासुर आतंक मचाने लगा उसके आतंक को रोकने के लिए शक्ति के रूप में मां दुर्गा का जन्म हुआ मां दुर्गा और महिषासुर के बीच 9 दिन तक युद्ध चला और 10वे दिन के बाद महिषासुर का वध कर दिया गया।

दूसरी कथा यह है श्री राम लंका पर चढ़ाई करने जा रहे थे उसके पहले उन्होंने मां भगवती की आराधना नौ दिन रामेश्वर में माता का पूजन किया और उनकी भक्ति से प्रसन्न होकर मां ने उन्हें जीत का आशीर्वाद दिया। भगवान श्री राम रावण को हराकर लंका पर विजय प्राप्त की थी तभी से विजयादशमी के त्यौहार मनाया जाता है। दसवीं के दिन हर शहर में रावण वध किया जाता है। विजयदशमी का त्यौहार मनाया जाता है लोग आपस मे गले मिलते हैं।

विजयेन्द्र मोहन।
[13/10, 2:32 pm] कुम कुम वेद सेन: विषय नवरात्रि का महत्व

नवरात्रि पर्व वर्ष भर में 2 बार आता है पहला चैत्र शुक्ल 1 से 9 तक। चैत्र नवरात्रि जिस दिन प्रारंभ होती है उसी दिन विक्रमी संवत का नया वर्ष प्रारंभ होता है। विक्रमादित्य राजा होने के साथ ही जनहित लोकमंगल के लिए समर्पित साधक भी थे। वे प्रजा की छोटी से छोटी इकाई के अधिकारों के लिए पूर्ण जागरूक रहते थे और अपने इसी कर्तव्य की पूर्ति के लिए बड़े से बड़ा खतरा उठाने और त्याग करने के लिए तैयार रहते थे। उनकी आदर्श निष्ठा की झलक सिहासन बत्तीसी की कथाओं में भी मिलती है। लोकमानस और शासन तंत्र के आदर्श समन्वय के प्रतीक के रूप में उन्हें मान्यता दी गई और उनके राज्याभिषेक को नवीन संस्कार से जोड़कर उनकी कृति को अमर बना दिया गया। चैत्र नवरात्रि का प्रथम दिन नवीन संवत्सर तथा समापन दिवस भगवान राम का जन्मदिन नवमी होता है।


दूसरी नवरात्रि आश्विन शुक्ल 1 से 9 तक पड़ती है इससे लगा हुआ विजयादशमी पर्व आता है ज्योतिष शास्त्र के अनुसार नक्षत्रों की गणना अश्विन नक्षत्र से प्रारंभ होती है इस आधार पर आश्विन मास ज्योतिष वर्ष का प्रथम मास माना जाता है।

इस प्रकार दोनों नवरात्रि पर्व के साथ नए शुभारंभ की भावना मान्यता जुड़ी हुई है। ऋतु के संधि काल इन्हीं पर्वों पर पड़ते हैं। संधि काल की उपासना की दृष्टि से सर्वाधिक महत्व दिया गया है। प्रातः और सायं ब्रह्म मुहूर्त एवं गोधूलि बेला दिन और रात्रि के संधि काल हैं इन्हें उपासना के लिए उपयुक्त माना गया है इसी प्रकार रितु संधि काल के 9 दिन दोनों नवरात्रों में विशिष्ट रूप से साधना अनुष्ठानों के लिए महत्वपूर्ण माने गए हैं


नवरात्रि के संबंध में पुराणों में एक उपाख्यान है कि महिषासुर नाम का दैत्य महा अभिमानी था अपनी सत्ता जमाने के लिए उसने सूर्य अग्नि इंद्र वायु यान वरुण आदि सभी देवताओं को अधिकार च्युत कर दिया था। तब सभी देवता ब्रह्मा जी के पास गए जहां भगवान विष्णु और शिव जी भी विराजमान थे। महिषासुर के अत्याचारों को सुनकर विष्णु और शिव को बड़ा क्रोध आया और उस क्रोध ने एक महा तेज का रूप धारण कर लिया। सभी देवताओं का तेज भी उसमें मिल गया और उसने एक महाशक्ति उत्पन्न हुई जिसके तीन नेत्र और आठ भुजाएं थी यही भगवती दुर्गा थी जो नौ रूपों में पूजी जाती हैं सभी देवताओं ने अपने-अपने आयुध उन्हें दे दिए इस प्रकार के संगठन से शक्तिशाली बनकर देवी ने महिषासुर को ललकारा इस महासंग्राम में प्रलय काल का सादृश्य दिखलाई पड़ने लगा महिषासुर के साथ ही भी एक साथ दुर्गा पर झपटे पर उनके अपूर्व शक्ति द्वारा सबका एक साथ संहार कर डाला। अंत में महिषासुर भी मारा गया और देवताओं तथा मुनियों ने देवी की जय जय कार की देवी प्रसन्न होकर बोली आप जैसे शांति प्रिय और सत्व गुण संपन्न महात्माओं और देवताओं के कल्याण का मैं सदैव ध्यान रखूंगी और उनकी सहायता के लिए सदैव तैयार रहूंगी इसी उपलक्ष में देवी सत्ता के शक्ति के पूजन के निमित्त इस पर्व को सामूहिक धर्म अनुष्ठान के रूप में मनाया जाता है
यह पर्व असत्य पर सत्य की विजय का संदेश देता है अधर्म पर धर्म के विजय का संदेश देता है जब जब दुनिया में अधर्म का बोलबाला हुआ है पापों का बढ़ता हुआ साम्राज्य हुआ है तब तक देवी की कृपा से अधर्म असत्य और पापों का नाश हुआ है।

कुमकुम वेद सेन
[13/10, 3:29 pm] रामेश्वर गुप्ता के के: नवरात्रि का महत्व।
नवरात्रि उत्सव में देवी के नौ दिनों का विशेष महत्व है। इन दिनों में नौ देवियों का प्रादुर्भाव होता है। उन देवियों के दर्शन और पूजन से भक्त जनों के मनोरथ पूर्ण होते है।
1-श्री शैलपुत्री
2-श्री ब्रह्मचारिणी
3-श्री चंद्रघंटा
4-श्री कुष्मांडा
5-श्री स्कंदमाता
6-श्री कात्यायनी
7-श्री कालरात्रि
8-श्री महागौरी
9-श्री सिद्धिदात्री
एक समय संसार में दैत्यों का आतंक बहुत बढ गया था। दैत्य महिषासुर, देवों को बहुत सताने लगे थे। देवताओं के यज्ञ को विध्वंस कर देते है। फिर देवताओं ने देवी का आव्हान किया। देवी के आव्हान से नवरात्रि में नौ देवियाँ प्रकट हुई। देवी के प्राकट्य से देवी ने देत्यों का संहार किया और फिर से इस संसार में देवताओं का पूजन एवं यज्ञ से शुभ संस्कार होने लगे। देवताओं ने देवी को प्रतिष्ठित करके आशीर्वाद प्राप्त किया और संसार में सुख शांति का संचार हुआ और अपने भक्तों की देवी ने रक्षा की। यही नौ देवियों के पूजन का महत्व है।।
द्वारा : रामेश्वर प्रसाद गुप्ता ।
[13/10, 4:55 pm] सुरेन्द्र हरडे: * *🙏मां दुर्गा को नमन🙏*

आलेख **नवरात्रि का महत्व*

     नवरात्रि में नौ दिनों तक मां दुर्गा के अलग अलग स्वरूप में नौ देवियों को पूजा आराधना अर्चना की जाती है मां के प्रति श्रद्धा आस्था का प्रतीक है भारतीयों में दिखाई जाता है विशेषता हिंदू धार्मिक परिवारों में यह उत्सव बड़े धूमधाम से मनाया जाता है।
      ऐसे कहा जाता है कि धर्म की अधर्म पर सत्य की असत्य पर जीत का यह पर्व है इसको दसवे दिन विजयदशमी दसरा त्यौहार के रूप में सारे हिंदुस्तान में बड़े धूमधाम से मनाया जाता है रावण का प्रतीकात्मक पुतला बनाकर राम जी के द्वारा जलाया जाता है इसीलिए सत्य की असत्य पर जीत का पर्व है।
     नवरात्रि उत्सव देवि का प्रतिनिधित्व करता है बसंत की शुरुआत और शरद ऋतु की शुरुआत जलवायु और सूरज के प्रभाव को महत्व नवरात्रि उत्सव मनाया जाता है इन दिनों मां दुर्गा की पूजा पहले दिन से और इस समय 7 अक्टूबर से से 14 अक्टूबर तक बनाया जा रहा है।
मां को प्रसन्न करने के लिए जगह जगह पर गरबा नृत्य आयोजन किया जाता है हर साल शरद नवरात्रि का पर्व बड़े धूमधाम से मनाया जाता है कहा जाता है इन दिनों से मां दुर्गा की पूजा करने से हर मनोकामना पूरी हो जाती है इन दिनों पूजा पाठ के साथ दान करने से पुण्य एवं बड़ा शुभ माना जाता है इन नौ दिनों में गरीबों को मदद दान देने से मां दुर्गा बहुत प्रसन्न होती है नवमी के दिन कन्या पूजन के साथ यह पर्व समाप्त हो जाता है आज अष्टमी का दिन है बड़े धूमधाम से सारे देश में अष्टमी मनाई जा रही है उत्साह उमंग उल्लास के साथ मां की आराधना करने से सारे दुख दर्द समाप्त हो जाते हैं शांति मिल जाती है।
     पश्चिम बंगाल में यह उत्सव दुर्गा पूजा उत्सव के रूप में बड़े रूप से बनाया जाता है मां के नव रूप है पहाड़ों वाली शेरोवाली महिषासुरमर्दिनि इन दिनों रात्रभर जागरण सब थके भारी दिन में काम करने वाले लोग रात के समय मां की आरती करते हैं।
     स्त्री शक्ति का प्रतीक मा दुर्गा इन दिनों महिलाएं हर एक दिन रंग अलग-अलग रंगों की साड़ियां पहनकर अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं जैसे पीला हरा ग्रे केसरिया सफेद लाल नीला गुलाबी जामुनी और अपनी श्रद्धा प्रकट करते हैं।
     
सुरेंद्र हरड़े 
नागपुर
दिनांक १३/१०/२०२१
[13/10, 5:14 pm] ♦️तारा प्रजापति - जोधपुर: अग्निशिखा मंच
13/10/2021 बुधवार
विषय-नवरात्रि का महत्व

भारतीय सँस्कृति में नवरात्रि पर्व का विशेष महत्व है।नवरात्रि का पर्व वर्ष में दो बार आता है।प्रथम चैत्र माह में एक से नो तिथि व द्वितीय अश्वनि मास के शुक्लपक्ष की एक से नो तिथि तक नवरात्रि का पर्व बड़ी श्रद्धा से मनाया जाता है। नवरात्रि का पर्व शक्ति पर्व के रूप में भी मनाने की परंपरा रही है।नवरात्रि में मां दुर्गा के नो रुपों की 1 शैलपुत्री 2 ब्रह्मचारिणी,3 चन्द्रघट 4 कूष्माण्डा 5 स्कंदमाता 6 कात्यायनी 7 कालरात्रि 8 महागौरी 9 सिद्धि दात्री,की पूजा अर्चना करके मनाया जाता है। शास्त्रों में नवरात्रि के पर्व को मनाने के आरम्भ को लेकर कई कथाएं प्रचलित है। नवरात्रि के प्रथम दिवस पर घरों में घट स्थापना की जाती है।ततपश्चात निन्तर नो दिनों तक माता के नो रूपों की श्रद्धा से आरधना की जाती है।कहते है कि पहले जब राजाओं का राज था और राजा जब युद्ध पर जाते थे तो नो दिन उपवास रखकर मां भवानी से शक्ति प्राप्त करते थे। भक्तजन नो दिनों तक मां दुर्गा की स्तुति करते है और फिर दसवें दिन रावण दहन का पर्व अति उत्साह से मनाते हैं। पहले के समय में नवरात्रि एक आस्था पर्व के रूप में मनाया जाता था।पर वर्तमान में इसका स्वरूप बदल गया है।अब माता में वो पहली सी श्रद्धा नहीं रही।गली-गली में बड़े-बड़े पंडाल बनाकर माता की मूर्ति स्थापित कर दी जाती है।रात-रात भर लोग डीजे की ताल पर नाचते हैं। शायद नवरात्रि का पवित्र पर्व आज मात्र गरबा पर्व बन कर रह गया है। उपवास के नाम पर कई कई बार गरिष्ठ भोजन खाया जाता है जो स्वास्थ्य के लिए हानिकारक है।हमें एक बार फिर से माता के पवित्र स्वरूप को पहचान कर नवरात्रि पर्व को आस्था व श्रद्धा का पर्व बनाना है।
                         तारा "प्रीत"
                        जोधपुर (राज०)
[13/10, 5:32 pm] आशा 🌺नायडू बोरीबली: नवरात्रि का महत्व‌ 🌹🌹🌹🌹🌹🌹
      ‌ हमारा देश त्योहारों का देश है प्रतिवर्ष दो बार नवरात्रि में शक्ति की देवी दुर्गा मां की आराधना,उपखसशा विधि पूर्वक की जाती है। सिद्धि और साधना की शक्ति शारदीय नवरात्रि का महत्व बहुत अधिक माना जाता है इस नवरात्रि में लोग अपनी आध्यात्मिक और मानसिक शक्ति के अनुसार संयम और नियम भजन पूजन ,योग साधना द्वारा देवी की श्रद्धा और भक्ति पूर्व पूजा पाठ कर अपने मन शरीर के लिए यथा योग्य शक्ति प्राप्त करते हैं।
        हमारे देश में आदिकाल से शक्ति की उपासना की प्रथा चली आ रही है। महा पुराण के अनुसार देवासुर संग्राम का विवरण दुर्गा देवी की उत्पत्ति का कारण बना। समस्त देवी देवताओं की समुच्य शक्तियों से देवताओं और सृष्टि को बचाने के लिए मां दुर्गा पृथ्वी पर प्रगट हुई ।पूजा ,उपासना, पूजन, पठन पाठन, आदि विधि विधान उपासना चली आ रही है ।
        नवरात्रि के इन नौ दिनों में दुर्गा देवी के नौ रूपों के दर्शन होते हैं।उनकी पूजा अर्चना की जाती है। अष्टमी का बहुत अधिक महत्व होता है ।इस दिन कन्याओं को जिमाने की प्रथा है ।माना जाता है कम से कम नौ कन्याओं को जिमाना चाहिए।नौ कन्याओं को जिमाने से नौ दुर्गा देवियों का आशीर्वाद मिलता है। इन 9 दिनों में हम देवी की भक्ति भावना में डूबे रहते हैं ।इससे हमें शक्ति मिलती है ।हमारे विचारों में शुद्धता और पवित्रता आती है ।हम मिलजुल कर संगठित होकर रहना सीखते हैं ,जो हमारे जीवन को सुख शांति प्रदान करती है ।दसवे दिन दशमी मनाई जाती है ।याने दशहरे का त्यौहार मनाया जाता है, जो बुराई से अच्छाई की ओर हमें ले जाता है और भाईचारे की भावना को बढ़ाता है इस दिन दुश्मन को भी गले लगाने की प्रथा है इन त्योहारों से हमारी मनोभावों को बल मिलता है इसलिए इसे पूर्ण श्रद्धा और भक्ति से मनाना चाहिए।
****************स्वरचित व मौलिक रचना
डाॅ . आशालता नायडू.भिलाई . छत्तीसगढ़
****************
[13/10, 5:38 pm] ओम 👅प्रकाश पाण्डेय -: नवरात्रि का महत्व ---- ओमप्रकाश पाण्डेय
पहले के समय तो, सामान्य लोगों के लिए दशहरा का मतलब केवल राम रावण युद्ध और असत्य पर सत्य एवं अधर्म पर धर्म का विजय. परन्तु कुछ क्षेत्रों में इस अवसर पर दुर्गा पूजा भी बहुत धूम धाम से मनाया जाता है.
नवरात्रि, माँ दुर्गा के नव रुपों के आराधना का महान पर्व है.
शक्ति की देवी की आराधना बड़े ऋद्धा और पवित्र मन से की जाती है. परन्तु इन अवसरों पर जो भक्ति के स्थान पर दिखावा का प्रदर्शन होता है वह कष्टकारी लगता है. माँ का बड़ा महत्व है, वे महादेवी हैं, दुष्टों की संहारक हैं. माँ की नवरात्रि में पूजा करने से शक्ति और सामर्थ्य प्राप्त होता है.
[13/10, 5:46 pm] +91 70708 00416: नवरात्रि का महत्त्व
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आओ सखी नवरात्रि में पूजन करें
नवरात्रि में नवदुर्गा नव रूप धरे
हर रूप मां का अति लुभाती
शैलपुत्री तुम प्रथम रूप कहलाती
हिमवान की दुलारी कहलाती
ब्रह्मचारिणी तुम द्वितीय रूप में आती
दुखियों को दुःख से तुम तारती
आओ सखी नवरात्रि में मां का पूजन करें
आओ सखी मां की महिमा गाएं
चंद्रघंटा तृतीय रूप है तेरा
असुर, दुष्ट कम्पित होते सारे
कुष्मांडा तेरा रूप है चतुर्थ
उल्लास भर देती सम्पूर्ण
पंचम रूप स्कन्दमाता कहलाती
कार्तिक पुत्र संग पूजी जाती
षष्ठम रूप कात्यायनी हो तुम
कात्यायन ऋषि की पुत्री हो तुम
आओ सखी नवरात्रि में मां का पूजन करें
कालरात्रि तेरा सप्तम रूप है
दुष्टों का संहार करती तुम
अष्टम रूप है महागौरी का
सुन्दर फूलों सी कोमल नारी
अलौकिक सौन्दर्य की प्रतिमूर्ति
नवम रूप सिद्धिदात्री हो तुम
सुख समृद्धि की माता हो तुम
आओ सखी नवरात्रि में मां का पूजन करें
आओ सखी मां की भक्ति करें


 डॉ मीना कुमारी परिहार
[13/10, 5:53 pm] निहारिका 🍇झा: नमन अग्निशिखा मंच
विषय;-नवरात्रि महात्म्य
दिनाँक;-13/10/2021
नवरात्रि पर्व आस्था व विश्वास का प्रतीक करते सभी माँ जगदम्बे का आराधना और पा जाते मनवांछित वरदान।
वर्ष में 4 नवरात्रि आतीं हैं ।2 गुप्त नवरात्रि( माघ मास व आषाढ़ मास)जो कि संत वैरागी के लिए होतीं व 2 नवरात्रि अश्विन मास व चैत्र मास की सामान्य जन इनमें भक्ति भाव मे तल्लीन होकर माँ का आराधना करता है।।चैत्र मास एकम से हमारा नव वर्ष प्रारम्भ होता है।।
नवरात्रि पर्व सदा संक्रमण काल का द्योतक है।इस समय ऋतु परिवर्तन होता है जिससे स्वास्थ्य गत समस्याओं का सामना करना पड़ सकता है जिसका निराकरण दैवीय आराधना व्रत से सम्भव है।व्रत में अल्पभोजन ,साधना संयम के माध्यम से मनुज इस समस्या का सामना कर के निराकरण कर पाने में सफल हो जाता है।इसे अध्यात्म के संग विज्ञान की दृष्टि से भी देखें तो निराहार रहना शरीर प्रणाली के परिशोधन के लिए अति आवश्यक है। इस लिए इस व्रत की महत्ता अधिक बद्व जाती है।।
नवरात्रि का प्रारंभ ज्योत ज्वारे से होकर कन्या पूजन व ज्योत विसर्जन पर समापन होता है।यह हमारी अक्षुण्ण सनातन धार्मिक सँस्कृति की एक अमूल्य धरोहर है जो सदा ही वंदनीय व अनुकरणीय है।।
निहारिका झा🙏🙏
[13/10, 6:36 pm] डा. अंजूल कंसल इन्दौर: नवरात्रि का महत्व 

चातुर्मास बीत चुका है। धरती हरियाली की चादर ओढ़ कर मुस्कुरा रही है।कार्तिक मास का धवल चंद्रमा धरा का स्वागत चांदनी बिखेरता हुआ,कर रहा है।
     इसी के साथ पितृपक्ष की समाप्ति होती है और प्रारंभ होता है नवरात्रि पर्व।इस बार नवरात्रि पर मां का अद्भुत रूप निराला देखने को मिला। उन्हें देखकर लगता है, मां कोरोना के कहर से उबार रही हैं। मां आदिशक्ति की मुस्कान बिखेरती प्रतिमा का आभामंडल बरबस अपनी ओर खींचता प्रतीत होता है। 
         नवरात्रि पर्व नौ दिनों का होता है, फिर विजयादशमी पर्व मनाया जाता है। भगवान राम ने इसी दिन रावण का वध किया था। मां दुर्गा ने नौ रात्रि एवं दस दिन के युद्ध के उपरांत, महिषासुर पर विजय प्राप्त की थी।दसवें दिन,दशहरा असत्य पर सत्य की विजय के रूप में मनाया जाता है।
         अबकि बार ऐसा लगता है कि महामारी पर इससे ही मिलेगी विजय। पूरी दुनिया कोरोना से त्रस्त है। इम्यूनिटी बढ़ाने की बात हो रही है। समय पर रितु अनुरूप भोजन करना चाहिए। नवरात्रि पर नौ दिन के उपवास एवं देवी आराधना की जाती है। महामारी पर नियंत्रण करने के लिए नवरात्रि से हमें नियंत्रण की सीख भी मिलती है।
       चेतना जागरण का पर्व है नवरात्रि। हमारे अंदर छिपी चेतना का जागरण और विषयों का त्याग, नवरात्रि का मुख्य संदेश है। माता को पुष्पांजलि अर्पित करते हैं। महा आरती के बाद गरबा नृत्य करते हैं, आराधना करते हैं। ज्वारे बोते हैं और कन्या भोज कराते हैं। नवरात्रि हमारी संस्कृति की धरोहर है जिसका वंदन अभिनंदन करते हैं। नवरात्रि का मुख्य संदेश है-

            पवित्रता की परात में
        साधना की सौगात है नवरात्रि 
          सच्चे भक्तों की नवदुर्गा से 
              सीधी बात है नवरात्रि 

डॉक्टर अंजुल कंसल "कनुप्रिया"
13-10-21
[13/10, 6:50 pm] रानी अग्रवाल: नवरात्र का महत्व
२३_१०_२०२१,बुधवार।
विधा_लेख।
विषय_नवरात्र का महत्व।
हमारा देश भारत तो त्योहारों का देश है ।यहां हमेशा ही कोई न कोई त्योहार होता है।नवरात्र त्योहार नौ दिन नौ रात्रि का होता है इसलिए नवरात्र कहलाता है है।
भारत में धार्मिक भावना बड़ी प्रबल है,इसलिए हर त्योहार बड़ी उमंग उत्साह से मनाया जाता है।इनसे हमारी आस्था जुड़ी होती है,इसलिए पर किसी प्रकार की बहस करने के लिए कोई स्थान नहीं है।
     नवरात्रि का त्योहार वर्ष में दो बार आता है ।चैत्र महीने के प्रथम नौ दिन और अश्विन महीने के नौ दिन।इन त्योहारों का भौगोलिक, पौराणिक,वैज्ञानिक,धार्मिक,व्यक्तिगत कारण होते हैं।
     भौगोलिक_मौसम से,पौराणिक_कथाओं से।चैत्र की नवरात्रि में देवी द्वारा राक्षसों का वध(महिषासुर आदि),अश्विन की नवरात्र में दशहरा के दिन राम द्वारा रावण का बध यानि अधर्म पर धर्म की विजय,वैज्ञानिक_इन दिनों यज्ञ खूब किए जाते हैं जिनमें तरह तरह की सामग्री की आहुति दी जाती है।हवन के धुएं से पर्यावरण शुद्ध होता है,धार्मिक_ये सारे त्योहार हिंदू धर्म की आस्था के प्रतीक हैं,व्यक्तिगत_जिसकी जैसी ,जितनी श्रद्धा वो उस प्रकार से पूजन_अर्चन करता है।
"जाकी रही भावना जैसी,
प्रभु मूरत देखी तिन वैसी"।
     नवरात्रि का उद्देश्य शुद्धिकरण भी है।इन दिनों लोग उपवास करते हैं, अन्न का त्याग करते हैं,विशेष प्रकार का भोजन करते हैं।जिससे शरीर की रोगमारक क्षमता(इम्यूनिटी) बढ़ती है,शरीर की क्रियाएं शुद्ध होती हैं,शुद्ध अन्न से मन शुद्ध होते हैं,विचार शुद्ध होते हैं,दृष्टि शुद्ध होती है।
     इसलिए हमें इन त्योहारों के महत्व को समझकर अपनी श्रद्धा अनुसार मनाना चाहिए।अपनी कुतर्क का कीड़ा इनमें नहीं डालना चाहिए।पवित्र रहकर इनकी गरिमा को बनाए रखना चाहिए।
" जय माता दी"।
स्वरचित मौलिक लेख_रानी अग्रवाल ,मुंबई,१३.१०.२१.
[13/10, 6:53 pm] 💃💃sunitaअग्रवाल: विषय_ नवरात्रि का महत्व 

       नवरात्रि पर्व वर्षभर में चार बार आती है, चैत्र मास शारदीय नवरात्रि का विशेष महत्व है, इस दिन धरती पर माँ अपने मायके आती हैं लोग भक्ती भाव से माँ की आराधना करते हैं, उपवास रखते हैं, इसका महत्व और भी बढ जाता हैं , महिषासुर नामक दैत्य ने ब्रह्मा जी घोर तपस्या करके वरदान प्राप्त कर लिया था
मुझे कोई भी नही मार सके न देव दानव , नही मानव । इस वरदान की वजह से तीनों लोको में आतंक मचा रखा था सभी दुखी थे तब माँ अम्बे महागौरी ने नौ दिनों तक राक्षस से युद्ध किया , अपने त्रिशूल से दानव का संहार किया। 
          महत्वऔर भी अधिक इसलिए है श्री राम जी ने माँ की पूजा की थी लंका पर विजय प्राप्त करने के लिए माँ से विजय होने का आशिर्वाद मिला था । राम जी को सफलता मिली।
 
माँ के नौ रूपों की पूजा नौ दिनों तक की जाती हैं , पूरे देश का सामाजिक हिन्दू त्यौहार है इसे सभी धर्म जाति के लोग सोहद्रता एकता के साथ मनाते है। इन्ही पर्वो की वजह देश की धर्म व 
संस्कृति संस्कार सुरक्षित है विश्व मैं पहचान हिंदू राष्ट्र के रुप में कायम है।

जय अम्बे गौरी मैया 🙏🙏🌹🙏🏻🌹🙏🏻🌹🙏🏻

सुनीता अग्रवाल इंदौर मध्यप्रदेश स्वरचित 🙏🙏
[13/10, 8:40 pm] चंदा 👏डांगी: $$ नवरात्रि का महत्व $$

हमारा देश त्यौहारों का देश है । त्यौहार हमारी सांस्कृतिक धरोहर है । हर त्यौहार का अपना महत्व और कारण है । 
नवरात्रि साल मे चार बार मनाई जाती है , दो गुप्त नवरात्रि होती है और एक बसंत ऋतु मे तथा दूसरी शरद ऋतु मे मनाई जाती है । नवरात्रि मनाने वाले व्रत उपवास रखते है ।दोनो ही नवरात्रि के समय मौसम परिवर्तन होता है तो स्वास्थ्य की दृष्टि से भी व्रत का विशेष महत्व है । 
शारदीय नवरात्रि मे असत्य और दुराचार को मिटाने के लिए माँ दुर्गा ने दैत्य महिषासुर का वध करने के लिए धरती पर अवतार लिया था ।
नवरात्रि मे माँ दुर्गा के नौ रूपों की पूजा की जाती है ।

चन्दा डांगी रेकी ग्रैंडमास्टर 
रामटेकरी मंदसौर मध्यप्रदेश

🔴🔵🟠🟢🟤⚫🟣🟡🔴🟠🔵🟤⚫🟣🟡








[13/10, 3:49 am] रामू भैया 🥶😡कोटा - वाटसप: 🌲आश्विन शुक्लपक्ष🌲
      १३ - १० - २०२१
        🌷 आज 🌷

   शुक्लपक्ष आसोज अष्टमी ,आनंदी बुधवार
   खेल रहे दशरथ के आँगन ,चारों राजकुमार
   चारों राजकुमार , कविमन, लगा रहा गूढ़ार्थ
   खेल रहे हों मूर्तिमान ज्यूँ , चारों ही पुरुषार्थ

  मुल़क रही तीनों माताएँ,खुश आँगन के कोने
  फैल रहे हैं रजत स्वर्ण के ,चारों ओर खिलौने
  जिसकी 'भृकुट' हिले, हिल जाए , सारी सृष्टि
  बालरूप में वही कर रहा , आज यहाँ रसवृष्टि

    रामूभैया ! रघुकुलवंशी , जागे पुण्य अनूप
    क्षीरसागरी लीलाधर के ,चारों बालस्वरूप
[13/10, 5:21 am] Anita 👅झा: 🌺🙏नव शुभ्योदय
नवरात्र अष्टमी महागौरी 

सर्वमंगल मंग्ल्ये, शिवे सर्वार्थ साधिके. शरण्ये त्र्यम्बके गौरि नारायणि नमोस्तुते..
बड़ा सुंदर सजा है दरबार मातारानी का 
करते है जय गुणगान माता रानी का 

महागौरी हिमालय तप से मलिन हुआ है 
 शिव गंगा से निखर ले आई है 
 कान्तिमय विषसमारुढ़ा देवी है 
ओजस्विनी नव सिद्धिदात्री मातारानी है 

बड़ा सुंदर सजा है दरबार मातारानी का 
करते है जय गुणगान माता रानी का

महागौरी रूप में देवी करूणामयी, है 
, हे स्नेहमयी हे करुणानयी महागौरी है 
दुःख भंजन देख ,सिंह तपस्या करते है 
सवारी गौरी सिंह संग मुस्कान लौट आई है 

बड़ा सुंदर सजा है दरबार मातारानी का 
करते है जय गुणगान माता रानी का

महागौरी गंगा-जल सरताज रजत 
फ़ुल देवी विद्युत मालाधारणि है 
कांतिमान गौर वर्ण की हो जाती हैं 
सुंदर कांति रूप मुखरित नाम गौरी है 
महागौरी पादारविन्दों जगप्रतिष्ठात्री है 

बड़ा सुंदर सजा है दरबार मातारानी का 
करते है जय गुणगान माता रानी का

सुख शान्तिदात्री धन धान्य स्वास्थ प्रदायनी 
डमरूवाद्य आद्या महागौरी प्रणमाभ्यहम्॥
बड़ा सुंदर सजा है दरबार मातारानी का 
करते है जय गुणगान माता रानी का

अनिता शरद झा रायपुर
[13/10, 8:33 am] Hemlata Manvi: श्री नवरात्रि अष्टम् दिवस:महागौरी देवी
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अष्टम् शक्ति माँ अंबे की, देवी महागौरी! 
अन्नपूर्णा चैतन्यमयी, कल्याणी पौरी!! 

भक्ति करें महागौरी की, मिटे जन्मों के पाप! 
मनवांछित फल दायिनी, नासें सब अभिशाप!! 

श्वेतांबरा माँ कांतिमयी, वृषभा असवारी!! 
चतुर्भुजी डमरू धरी, अभया सुकुमारी!! 

शंख चंद्र कुंदपुष्प सी, श्वेत अलौकिक कांति! 
पुंगी फल अति प्रियम है, अंतस भाव सुशांति!!

मुद्रा अभय त्रिशूल धरी, महादेव प्रमदा। 
जन्म-जन्म संचित करम, पापमोचिनी शुभदा ।।

कमनीया लावण्यवती, देवी महागौरी। 
जगती की रक्षा हित,सदा रहें त्रिपुरारी।।

हेमलता मिश्र "मानवी" नागपुर महाराष्ट्र
[13/10, 9:09 am] 😇ब्रीज किशोर: अष्टम् माँ महागौरी।
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,माता महागौरी तेरे दर्शन को तेरे मन्दिर आती हूं।
माँ महागौरी तेरे मन्दिर में तेरा आसन सजाती हूं।
गले मे हार फूलो का सजा है फूलो से आसन।
माँ पारिजात के फूलो से तेरा श्रीगांर करती हूं।
माँ तेरे दर्शन के लिये।
तेरे मन्दिर में आती हूं।
मांंग में मंग टीका कानो मे कुडंल है सुन्दर
माँ के गले का हरवा चन्दा सा चमकता है।
माँ महागौरी तेरे दर्शन को तेरे
मन्दिर में आती हूं।१!
माता तेरे अंगो की चुनरी तारो से चमकती है।
हाथो में लेकर पियरी तेरे मन्दिर मे आती हूं।
माँ महागौरी तेरे दर्शन को तेरे मन्दिर....।।२।।
 माता तेरे हाथो की चुडियाँ संगीत सा खनती है।
हाथो में ले के कंगन तेरे मंन्दिर में आती हू।
माता महागौरी...।।३।।
माता तेरे पायल के घुघुरू रून झुन रून झुन बजते है।
हाथो में लेके तेरे पावो की बिछुआ तेरे मन्दिर में आती हूं।
माता महागौरी ...।। ४।।
माता महागौरी को हलवा, पूड़ी ,चने का भोग लगता है।
हाथो में लेके नारियल चुन्नी तेरे मन्दिर में आती हूं।
माता महागौरी तेरे दर्शन को तेरे मन्दिर में आती हूं..।। ५।।
स्वरचित
  बृजकिशोरी त्रिपाठी(भानुजा)
गोरखपुर ,यू.पी
[13/10, 11:00 am] पुष्पा गुप्ता / मुजफ्फरपुर: 🌹🙏 नमन मंच🙏🌹
         ❤विषय : *देवी गीत *❤
   
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🙏🌹 
देवी अईली मोरे अंगना
कि रूनु- झुनू
दुर्गा अईली मोर अंगना  
कि रूनु झुनू ,,,×2
जबे हम जानती ,,
कि देवी मईयाँ अईहें,,,×2
हम कलशा धरईती
रूनु- झुनू,,,,
देवी अईली मोरे ,,,,×2
जबे हम जानती,,
कि देवी मईया अईहें 
हम चुनरी बेसईती,,
रूनु- झुनू,,,,
देवी अईली मोरे,,,,×2
जब हम जानतीं 
कि देवी मईयाँ अईहें
हम दिअरा जरवती
रूनु झुनू,,,,
देवी अईली मोरे ,,, ×2
जब हम जानती 
कि देवी मईयाँ अईहें 
हम अँचरा बिछईती
रूनु- झुनू ,,,,
देवी अईली मोरे अंगना
रूनु झुनू ,,,,
मैया अईली मोरे अंगना
रूनु -झुनू ,,,,,, × 2
🌹🙏
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स्वरचित एवं मौलिक रचना 
डाॅ.पुष्पा गुप्ता 
मुजफ्फरपुर 
बिहार 
🙏🌹
[13/10, 11:18 am] सुरेन्द्र हरडे: *शारदा मां*
जय शारदे माता! मैया जय शारदे माता!!
वेद बखानी महिमा विद्यावर दाता।।जय शारदे माता मैया जय शारदे माता।।1।।
बुद्धि वर्धिनी अंब्मे,कर पुस्तक सोहे।
वीणा पानी सरस्वती सुरनर मुनि मोहे।।जय०।।2।। 
पद्मासन पर शोभित, शुभ मंगल  
कारी।
हंस वाणी जननी चार भुजा धारी।जय।।3।।
ब्रह्मा विष्णु सदाशिव पूजी तो तू देवा।
ज्ञान प्रकाश न करणी करते जन सेवा। जय।।4।।
प्रतिदिन भक्त मनावे गांव में नर नारी।
माघ सुदी पांचे को, उत्सव भारी।जय।।5।।
जो कोई मनस ध्यावै विद्यावर पावै।
जग में यह फैलावे, पंडित हो जावै।जय।।6।।
भक्ति भाव दरशावै,गुणी गान करै।
मोदक का भोग लगाओ जय जय कार करै।।जय।।7।।
यह आरती शारदा की क्या कोई नर गावैं।
को दारूका भगवती इच्छा फल पावै।। जय।।8।।
जय जय शारदे माता। मैया जय शारदे माता।।
[13/10, 11:24 am] रागनि मित्तल: जय मां शारदे
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अग्नि शिखा मंच
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दिन- बुधवार
दिनांक- 13/10/2021
        भक्ति गीत
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      माता का भजन 
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आसरा एक तेरा, एक तेरा सहारा ।
सुन ले फरियाद मेरी आ मुझे दे किनारा।
आसरा एक तेरा एक तेरा सहारा ।

जख्मी जग ने किया है 
दर्द दिल में है भारी, 
आके मरहम लगा दे तू है मैया हमारी,
मैने मजबूर होकर आज तुझको पुकारा।
आसरा एक तेरा ,एक तेरा सहारा।

आधियां चल रही है,रात भी है तूफानी,
बड़ा लंबा सफर है और कश्ती पुरानी,
एक तुझ पर ही मैया जोर चलता हमारा ।
आसरा एक तेरा, एक तेरा सहारा।

दर्द दिल में भरा है इसे मां बांट लेना
मेरे अवगुणों को मात् स्वीकार लेना,
मुझको भी तारो मैया तुम ने लाखों को तारा।
आसरा एक तेरा एक तेरा सहारा।
सुन ले फरियाद मेरी आ मुझे दे किनारा


रागिनी मित्तल
 कटनी, मध्य प्रदेश
[13/10, 11:44 am] 👑सुषमा शुक्ला: नवरात्रि🌹 हाइकु


नवरात्रि का🌹
पर्व मनाए मां को🌹
मनाते जाएं🌹

पूजा अर्चना🌹
तोरण से सजाएं🌹
भोग लगाए🌹

मां की ममता🌹
सब पर दया है🌹
आशीष देवे🌹

मां के नौ रूप🌹
हर महिमा न्यारी🌹
दुखों को तारे🌹

रूप दमके🌹
पायल छमके है🌹
मंगल करनी🌹

जय माता दी🌹
जय कारा लगाते 🌹
मां के द्वारे जाते हैं🌹

सुषमा शुक्ला 
इंदौर। मध्यप्रदेश🙏
[13/10, 3:59 pm] 💃वंदना: ।। भजन।।

ओ जंगल के राजा,मेरी मैया को ले कर आजा।
मैंने आंस की ज्योत जलाई मेरे नैनों में मां है समाई।

मेरे सपने सच तू बनाजा, मेरे सपने सच तू बना जा।
ओ जंगल के राजा, मेरी मैया को ले कर आजा।

हर पल मां के संग बिराजो, अजब तुम्हारी भक्ती 
है,अजब तुम्हारी भक्ति है।

शक्ति का तुम बोझ उठाते, अजब तुम्हारी शक्ति 
है ,अजब तुम्हारी शक्ति है।

तेरे सुंदर नयन कटीले, दो रंग के पीले पीले
मेरी मां को मुझसे मिला जा, मेरी मां को मुझसे मिला जा आरे ओ जंगल के राजा......

पवन रूपी मां के प्यारे, चाल पवन की आ जाओ
चाल पवन की आ जाओ।

देवों की आंखों के तारे ,आओ धरम कमा जाओ
आओ धरम कमा जाओ।

आ गहनों से तुम्हें सजाऊं,और पांवमें घुंघरू पहनाऊ , मैं  बजाऊं ढोल और ताशा।

मैं बजाऊं ढोल और ताशा ओ ,ओ,ओ
ओ जंगल के राजा मेरी मैया को ले कर आजा।

कब से तरस रहे दो नैना दर्शन  तो दिखला जा
आरे ओ जंगल के राजा मेरी मैया को लेके आजा।

वंदना शर्मा बिंदु
देवास मध्य प्रदेश।
[13/10, 5:46 pm] +91 70708 00416: नवरात्रि का महत्त्व
###########

आओ सखी नवरात्रि में पूजन करें
नवरात्रि में नवदुर्गा नव रूप धरे
हर रूप मां का अति लुभाती
शैलपुत्री तुम प्रथम रूप कहलाती
हिमवान की दुलारी कहलाती
ब्रह्मचारिणी तुम द्वितीय रूप में आती
दुखियों को दुःख से तुम तारती
आओ सखी नवरात्रि में मां का पूजन करें
आओ सखी मां की महिमा गाएं
चंद्रघंटा तृतीय रूप है तेरा
असुर, दुष्ट कम्पित होते सारे
कुष्मांडा तेरा रूप है चतुर्थ
उल्लास भर देती सम्पूर्ण
पंचम रूप स्कन्दमाता कहलाती
कार्तिक पुत्र संग पूजी जाती
षष्ठम रूप कात्यायनी हो तुम
कात्यायन ऋषि की पुत्री हो तुम
आओ सखी नवरात्रि में मां का पूजन करें
कालरात्रि तेरा सप्तम रूप है
दुष्टों का संहार करती तुम
अष्टम रूप है महागौरी का
सुन्दर फूलों सी कोमल नारी
अलौकिक सौन्दर्य की प्रतिमूर्ति
नवम रूप सिद्धिदात्री हो तुम
सुख समृद्धि की माता हो तुम
आओ सखी नवरात्रि में मां का पूजन करें
आओ सखी मां की भक्ति करें


 डॉ मीना कुमारी परिहार
[13/10, 7:47 pm] श्रीवल्लभ अम्बर: सिद्धि दाती की आज है उपासना ।
उसके चरणों में लगी सारी भावना।

 नो नो रूप धरे माता ने,,
   हर एक रूप है जग से न्यारा।
     मन भावन अति सुंदर प्यारा।
 
 नौ रूपों का वर्णन क्या है,,
  जगत समाया इसमें महामाया है।
   मां के बिन संसार है एसा,,
    जगत समाया सागर जैसा।

 प्रथम शैल पुत्री कहलाई,
   तप से हिमालय की कहलाई,।
द्वितीय ब्रम्हचारिणी कहलाती,,
  साधना हो तो ब्रम्ह दर्श कराती।

तृतीय, चंद्रघंटा,का स्वरूप,
  चंद्र छबि सा निखरे रूप।
चतुर्थ कुष्मांडा जग का ताप हरे,,
  अपने उदर में पालना करे।

 शक्ती से जिनकी जन्म सनत कुमार,
   तब कहलाई स्कंदमाता,,
बन कात्यायनी छठे रूप में,
 देवताओं का कार्य सिद्ध करने आई,

  ,सप्तम कालरात्रि बन है आई,,
    दुष्टों का काल कहलाई,,
कठिन तप जब किया स्वयं ने,,
   तो महागौरी कहलाई।

 सर्वार्ध सिद्ध नौमी है आई,
  मोक्ष दायिनी,कहलाई,,
समस्त श्रुष्टास्वामी नी,,
 जगत इसी का नाम,,
 नौ रात्रि कहलाती,,
 सारे जग का करे कल्याण,,,।

इनके गुणों का क्या हो बखान,,,
तेरी, मेरी,जग,की महिमा जान।
 आदि, अंत,मध्य,इसके अनुसार।
मां की।लीला अपरम्पार,,।

🙏 श्रीवल्लभ अम्बर🙏

महिषासुर मर्दिनी
13/10/2021.

महिषासुर मर्दिनी आजा मेरे द्वारे 
नवरात्री के उत्सव में मंडप सजाया हैं ।
अखंड ज्योत का दीपक जलाया हैं 
पंचमेवा का भोग लगाया , आजा मेरी मैया ।।

तेरी जय जय कार करते है । 
ढोल ताले बजा आरती करते हैं ।।
महापर्व महाशक्ति से जागेगा घर संसार ।
महापूजा , महाशक्ति से होगा बेड़ा पार ।।

मैया चण्डमुण्ड विनाशनी , महिषासुर मर्दिनी ।
भक्तों के दुखो को हरती , सबकी मुरादें पूरी करती ।।
जय जय माँ विजया , जय हो जगजननी।
माँ दुर्गा का अवतार हो , भक्तों का करती कल्याण ।।
अलका पाण्डेय मुम्बई
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