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अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच के ब्लॉग पर आज दिनांक 28 10 2021 को पढ़ें चित्र पर कविता दिए गए चित्र पर रचनाकारों की रचनाएं पढ़ें और उनका हौसला अफजाई करें अलका पांडे मुंबई



[28/10, 1:33 am] Alka: समोसा



गरम समोसे निकल रहे हैं ।
जिनको खाना है आ जाओ ll 
समोसे खाने से मन तृप्त हो जाएगा ।
होटल से ले आऊंगा गरम गरम समोसा 
जो न खाए वह पछताए ।।
चाय के साथ-साथ निराला समोसा ।
और चाय है यदि मनभावन  तो मज़ा दुगना ।
गरमा गरम निकल रहे हैं आओ मेरे भाई गरम-गरम खाते जाओ ।।
व्यापारी नजरों से बड़े जतन से बनाया है ।
आलू के मसाला  में इसे लपेटा है ।।
गरम तेल में फिर इसको मैं तलता  हूं 
बड़ा मजेदार पकवान है ।।
हरी धनिया पुदीने मिर्ची की चटनी है जायकेदार ।
खाओगे तो खुश हो जाओगे सुबह सवेरे समोसे ले जाओ ।।
पत्नी खुश हो जाएगी गरमा गरम चाय पिला आएगी ।
जैसे ही मैं समोसे निकालते हैं ।
लोग जब खत्म कर देते हैं ।।
खाली हाथ नहीं जाना समोसे लेते जाना ।
   बस मस्त मसालेदार समोसे गरमा गरम भूख मिटाते ।।
अमीर और गरीब दोनों के ही मन को भाती समोसे ।
अमीर का है पेट भरे गरीब की आत्मा तृप्त करें।।
 बच्चे बूढ़े सब शोक से खाते सब की भूख मिटाता है ।
स्कूल में पढ़ने वाले बच्चे चटकारे लेकर खाते हैं ।।
बड़ा हो बिजनेसमैन या मजदूर हो इंसान सबके मन को भाता है ।।
या मसालेदार समोसा इसकी खुशबू से ही लोग खींचे चले आते हैं ।
मुंह में पानी आता है बडे मसालेदार ।।
एक बार जो खाले बार-बार ही खाए
जैसे निकले गरम समोसा कड़ाई से लोग हाथ फैला कर एक प्लेट एक प्लेट 
ग्राहक मेरे लिए तो भगवान है 
उनको खिलाकर में भी खुश हो जाता हूं मेरी कढ़ाई कभी खाली ना होने पाए यही दुआ में करता हूं 
चटनी के साथ खाओ और भैया मेरे समोसे ले जाना 
और समोसे खाना सब को खिलाओ गरमा गरम मसालेदार समोसा 
समोसे का ढेर है लाल पीले सुनहरा रंग तिकोना है आकार 
बड़ा कुरकुरा कुरकुरा है जायकेदार बार-बार मन करेगा इसको खाने का समोसा बड़ा है जायकेदार 
देखो समोसा कैसा मुस्कुरा रहा है 
सब के दुख को हर रहा है 
चेहरे पर मुस्कराहट हैं 
आंखों में चमक भी ला रहा है 
बड़ा है मनभावन समोसा 
बड़ा ही मनभावन समोसा

अलका पाण्डेय मुम्बई
[28/10, 7:13 am] Nirja 🌺🌺Takur: 
अग्निशिखा मंच
तिथि - २८-१०-२०२१
विषय-चित्र पर कविता

कढ़ाई में गरम गरम तलते हैं समोसे
मुझे अपनी ओर खींचते हैं समोसे
मैदे की सुनहरी परत है करारी
अंदर मसालेदार आलू का स्वाद है भारी
साथ में तीखी मिरची  है तली 
कहती है मुझे खा कर देख तो सही
संसार के हर कोने में पाया जाता हूँ
कहीं सब्जी ,कहीं कीमा से भरा जाता हूँ
साथ में गर  गरम चाय हो जाये 
आज के दिन की सुंदर शुरुआत हो जाये
साथ में हरी चटनी है जरुरी, 
जिसमें तीखी मिरची के साथ,
नीबू की खटाई है पड़ी
डाक्टर ने मना किया है खाने को समोसे
 अगर एक समोसा खाने को मिल जाये
तब जीवन में आंनद ही आनंद हो जाये

नीरजा ठाकुर नीर
पलावा डोंबिवली
महाराष्ट्र




[28/10, 9:04 am] 👑सुषमा शुक्ला: समोसा,,,,

हे🍁
प्रिय🍁
समोसे🍁
हरशाते🍁
मनभावन🍁
हम सब मिल🍁
गरम खाते जाते🍁
चटकारे लेके🍁
तली मिर्ची  से🍁
चटनी संग🍁
हर पल🍁
रिझाते🍁
ऐसे🍁 
हो🍁

ओ🍁 
मेरे🍁
समोसे🍁
तेरे साथ🍁
 चाय मिलती🍁
स्वाद दुगुना  रे🍁
हम सबका होता🍁
कड़क चटपटा🍁
स्वाद भरा तू हे🍁
मटर आलू🍁
पनीर से🍁
भरवा 🍁
तुम🍁 
हौ🍁

🙂🙂🙂🙂

स्वरचित
 सुषमा शुक्ला
[28/10, 10:32 am] ♦️तारा प्रजापति - जोधपुर: अग्निशिखा मंच
28/10/2021 गुरुवार
विषय-चित्राधारित रचना

गर्म-गर्म तेल में
छम-छम नाचे समोसे,
लाला जी की दुकान का
नाम है राम-भरोसे।
बाहर से कड़क और
अंदर से नरम,
ठंडा अच्छा लगता नहीं
खाते हैं गरम-गरम।
भरा है इसके पेट में
आलू का मसाला,
खाये इसे जीजी-जीजा
और खाये साली-साला।
बच्चे हो या हो बूढ़े
स्वाद सभी को भाता,
कोई हरी चटनी से तो
कोई इसे सॉस से खाता,
गर्मा-गर्म झारे में देखकर
मुँह में पानी भर आता,
कोई वहीं पर खा लेता और
कोई घर ले जाता।
हरी चटनी इसका
और स्वाद बढ़ाय,
मज़ा और दुगना हो जाये
गर संग हो गर्म चाय ।
कोई पनीर भर देता इसमें
कोई भर देता कीमा,
कोई चटपटा कर देता है
कोई कर देता धीमा।
धन्यवाद उस मित्र को
जिसने पहला समोसा खिलाया,
बधाई का वो पात्र है 
जिसने पहला समोसा बनाया ।।

                       तारा "प्रीत"
                  जोधपुर (राज०)
[28/10, 10:41 am] पूनम सिंह कवयित्र� � इशिता स� �डीला: अग्निशिखा मंच 
विषय चित्र आधारित कविता 
गर्म समोसे देख के मुझको आयेमुँह में पानी ,
रहा न जाये बिन खाये ,
लालच इतना भारी ,
कहे डॉक्टर तल भुना करता नुकसान बड़ा 
पर ये जो मन है बिल्कुल करें अनसुना ,
कल ही मैंने देखे ,गर्म समोसे पड़े तेल में ,
जैसे मुझको बुला रहे ,आओ इशिता रानी क्यो लालच रही हो खड़े खड़े ,
देख बोलते समोसों को रह गयी हक्का बक्का ,डॉक्टर की एक न सुनी खाये तीन चार इक्क्ठा ,
फिर उठी मरोड़ पेट में ,
दर्द ने रख दिया करके तोड़ ,
हाथ जोड़ कान मैं पकड़ी 
एक बहुत है अब न खाऊँगी और ,
स्वास्थ्य जरूरी सबसे है
हो जाए कभी कभार ,कोई बात नही   स्वास्थ वर्धक चीज़ खाना पहले है। 
बाकी कोई बात नहीं ishita singh
[28/10, 11:02 am] 👑पदमाकाक्षी शुक्ला: 🙏🌹 *नमन मंच* 🌹🙏
🙏🌹 *जय अम्बे*🌹 *२८/१०/२१* 🌹🙏
🙏🌹 *चित्र पर आधारित*. *समोसा* 🌹🙏

किसमिस प्याज पनीर बटाटा। 
नाम समोसा से पहचाना।। 
मैदा की पूरी में भरना। 
गरम मसाला से बनवाना । ।। 

आटा को तैयार किया है। 
त्रिकोण आकार से सजाया।। 
गरम तेल में डाला उसको। 
हरी आँच पर नाच नचाया।। 

हुआ रंग कुरकुरे गुलाबी।
खाने को अब मन ललचाया।। 
फिर तो डाली मीठा चटनी। 
चटकारे  ले लेकर  खाया।। 

खाते छोले के साथ कभी ।
प्याज टमेटा डालकर सभी।। 
 बहता है पानी आंखों से।। 
फिर भी खानेको मन तरसे।। 

प्रख्यात है समोसा जग में। 
नुकसान बडा करे समोसा।। 
मन में लालच पैदा करता। 
सभी को भाता है समोसा।। 

🙏🌹पद्माक्षि शुक्ल 🌹🙏
[28/10, 11:49 am] आशा 🌺नायडू बोरीबली: सभी खाते हैं समोसा
मन को भाता है समोसा।एक पहेली समोसे पर यौं है --- तीन पैर की तितली
नहा धो कर निकली ।
********************स्वरचित रचना 
डॉ . आशा लता नायडू.
भिलाई . छत्तीसगढ़ ऋ
[28/10, 11:50 am] आशा 🌺नायडू बोरीबली: 🌹 चित्र पर आधारित🌹 
 ऐसा कोई ना होगा    जिसे समोसा पसंद होगा। बच्चा हो या बूढा         हर किसी को भाता है          यह समोसा।                 छोटे हो या बड़े         ‌  हर किसी का मन पसंद होता है ये सम़ोसा ।      भूख लगे तो दो समोसे से भर जाता है पेट ।‌  पार्टियों का होता है      यह राजा ।               सभी खाते हैं समोसा     मन से पसंद से ।    समोसे का नाम सुनते ही मुंह में आने लगता हैपानी  और मन ललचा उठताहै। समोसा है ही ऐसा       हर किसी को अपनी ओर खींच ही लेता है।    कितनाहीकंट्रोलकरो  ‌या करो डायटिंग ‌             मन हार ही जाता है    और समोसा पेट में चला ही जाता है ।             जब गिनती से मिलते हैं समोसे                         तो एक से मन कभी नहीं भरता कम से कम दो समोसा खाने का तो दिल जल जाता ही है
[28/10, 11:50 am] आशा 🌺नायडू बोरीबली: सभी खाते हैं समोसा
मन को भाता है समोसा।एक पहेली समोसे पर यौं है --- तीन पैर की तितली
नहा धो कर निकली ।
********************स्वरचित रचना 
डॉ . आशा लता नायडू.
भिलाई . छत्तीसगढ़ ऋ
[28/10, 12:12 pm] रानी अग्रवाल: चटपटा समोसा।
२८.१०.२०२१.गुरुवार।
विधा_चित्र पर कविता।
शीर्षक_चटपटा समोसा।
वाह! देख गरम समोसा,
मुंह में पानी आय,
गरम_ गरम,चटनी के साथ,
कोई जल्दी दे खिलाय।
रंग सुनहरा,आकार तिकोना,
अंदर आलू मसाला,
खाते हैं देवर_ भाभी,समधी,
जीजा और साला।
खट्टी_मीठी चटनी संग,
खाओ लेकर स्वाद,
एक बार जो खाय लिया,
हरदम रहता याद।
 समोसे ने लालू की याद दिलाई,
"जब तक रहेगा समोसे में आलू,
तब तक रहेगा,बिहार में लालू"
यह थी उनकी रूबाई।
खाओ समोसा होटल में,
या रेड़ी पर खाओ,
बीबी के हाथों का हो तो,
चाट_चाट कर खाओ।
कभी समोसे को खाओ,
रगड़ा में डुबाय,
मीठी_तीखी चटनी डारी के,
नाक नीर बहाय।😄
मजा हो जाए दोगुना,
जो संग चाय मिल जाय,
जीभ स्वाद भूले नहीं,
लोग खाय इतराय।
खातिरदारी में ये पाए उच्च स्थान,
नमकीन पकोड़ी मिठाई से महान
इसके आगे ना इडली_ सांभर,
न कोई डोसा है,
इतने बढ़िया स्वाद का,
भईया केवल समोसा है।
खूब तेल में तलकर,
बनाए इसे हलवाई,
जी भरता चाहे जितनी,
कर लो इसकी बढ़ाई।
आओ मित्रों घर पर मेरे,
बड़े प्रेम से परोसा है,
चाय के साथ नाश्ते में,
आज गरम समोसा है।
खाकर इनको ,
हो जाओगे तुम प्रसन्न,
घर वापस जाने को,
न मानेगा तन_मन।
स्वरचित मौलिक कविता___
रानी अग्रवाल,मुंबई,२८.१०.२१.
विशेष नोट__
(चाहे दे दो कोई विषय,
दे दो कोई भी चित्र,
सुंदर रचना रच डालेंगे,
मेरे सुजान कविगण मित्र।)
[28/10, 12:18 pm] वीना अडवानी 👩: अल्का दी आपने सितम ढ़ाया
😡***********************😡

ये कैसा सितम अग्निशिखा
 मंच ने ढ़ाया।।
सुबह-सुबह गरम समोसे दिखा
हमारा मन ललचाया।।

अलका दीदी सच मुंह में खूब
पानी है आया।।
ये पानी ही उधर की भूख दुगना
सुबह ही कराया।।

बताओ सिर्फ चित्र भेज क्यों 
सबको ललचाया।।
चित्र दिखा बस आपने दीदी
 सबका सत्कार कर पैसा बचाया।।

हमनें तो बाम्बे आने का था खूब 
विचार था बनाया।।
आपके घर भरपेट खाके दावत उड़ाने
 का विचार मन ने खूब था बनाया।।

आपने समोसे का चित्र भेज अपना
पल्ला झाड़ हमें सताया।।
तीन पैर की तितली तेल में नहा कर
यही  पहेली हम सभी से हल कराया।।

वीना आडवानी तन्वी
नागपुर, महाराष्ट्र
******************
[28/10, 12:40 pm] वैष्णवी Khatri वेदिका: चित्रधारित कविता 28 Oct 2021

रसोई में बनता समोसा।
छोले संग चलता समोसा।
सभा में यही धाक जमाता।
चाय के सँग समोसा आता।।

समोसे की यहाँ रुत आई।
छोले सँग है चाट बनाई।
जो भी चाय समोसा लेता।
समोसा ग़म को भुला देता।।

समोसा बड़े चाव खाते।
सभी को समोसे हैंभाते।
मुझ में जब भी आलू भरता।
गर्म तेल में नर्तन करता।।

समोसा आलू प्यार करता।
पूरी जलन आप ही सहता।
समोसे राज ऐसा कर दो।
बढ़े वजन को तुम कम कर दो।।

समोसे पर पैसा न जाए।
सुबह समोसे फ्री में खाएँ। 
इसमें थोड़ी चटनी डालो,
गर्म इसे है झटपट खा लो।

वैष्णो खत्री वेदिका
[28/10, 1:10 pm] विजेन्द्र मोहन बोकारो: मंच को नमन
विधा:--चित्र पर आधारित कविता
शब्द:-- *समोसा*

मामा का समोसा नानी के चार्ट
बोकारो  में फेमस समोसा ठेला

मामा का समोसा ठेला
डीपीएस स्कूल के नुक्कड़ पर
गरम गरम तेल में 
छम छम नाचे समोसा
मामा का समोसा बच्चों को
खूब भातें खाकर
 मम्मी पापा के लिए लेआते
ताकि स्कूल जाने के समय
 पैसा मिले।
दादी को भी मन भाता
मां पैसा नहीं देती दादी देती
वोलती स्वाद सभी को भाता
हरी चटनी के साथ गरम-गरम समोसे देख कर मुंह में पानी भर जाता साथ में कॉफी का मजा दो गाना हो जाता।
बच्चे सब बड़े हो गए चलेंगे बाहर पढ़ने
लेकिन अब हर घर के पति  मामा का
समोसा लेकर ही घर घुसते।
*मामा का समोसा*

विजयेन्द्र मोहन।
[28/10, 1:11 pm] स्मिता धारसारीया Mosi: छवि विचार 

समोसा और चाय की प्याली का प्यार 
है चर्चे इनके प्यार के चहुं और बेशुमार 
एक  बैगर दूसरे की नहीं जमती ,
मिल जाते जब दोनों चढ़ता  इनका खुमार 

देख गरम समोसा ,
 सबके मुँह में पानी आता ,
बच्चे ,बूढ़े सभी सब ,
इनकी तरफ  खींचे jजाते 

शादी ,ब्याह ,पार्टी  हर उत्सव में
 ये अपना जलवा दिखाता 
नमकीन ,तीखे ,चटपटे ,
मन यह सबका  लुभाता 

ठंड का मौसम आया ,
आओ सब  मिल खाये समोसा ,

इसके स्वाद का लुफ्त उठायें 
खट्ठी ,मीठी चटनी संग ,
स्वाद  इनका और बढ़ जाए |
स्मिता धिरासरिया ,बरपेटा रोड
[28/10, 1:13 pm] स्नेह लता पाण्डेय - स्नेह: नमन पटल

आज का विषय- चित्र आधारित रचना

गरमा गरम समोसे चटनी, महिमा इसकी जाय न बरनी।
देख के  मुँह में आये पानी, झट खाने पर शरम न आनी।
मन करता है ज्यादा खाऊं, हिस्सा  दूसरे का  उड़ाऊँ।
खाते  ले  ले कर चटकारे, पेट  भरे  फिर बाद  डकारे।
पेट बाद में गुड़ गुड़ होए, पकड़ पेट तब  काहें रोये।
साथ में चाय भी मिल जाये, परमानंद  प्राप्त हो जाये।
अदरक वाली कड़क सी चाय,साथ समोसे बहुत ही भाय।
अमीर-गरीब सब हैं खाते, खाने में नहि हैं शर्माते।
मेज पर ये  सजते पहले, सर्दी इनको देखत दहले।
चलचित्र में भी महिमा इसकी,नायिका भी दीवानी जिसकी।
हाथ समोसा नायक गाए, शालू शालू वो चिल्लाए।
मन पर होता नहीं नियंत्रण, देख अधीरा  होए तन मन।
पेट बाद में गुड़ गुड़ होए, पकड़ पेट तब  काहें रोये।
डॉ  जब भी प्रतिबंध लगाए ,  सपन में समोसा आ ललचाये।
पत्नी को हो कभी मनाना।,गरम समोसे ले घर जाना।
भूल जायगी झगड़ा सारा, गिर जाएगा उसका पारा।
किस विधि से हैं इसे बनाते, सबको भलीभाँति समझाते।
कर मैदे को पहले खस्ता, ले लो आलू सबसे सस्ता।
चटपटा मसाला फिर डालें, अच्छे से नमक  मिला लें। 
 मैदे से तिकोन बनता , आलू  भरा तेल में छनता।।
गाया मैंने समोसा गान, आजहि समोसे लेना छान।
भरकर जी भर अपने खाना, थोड़ा मुझ तक भी पहुँचाना।

स्नेहलता पाण्डेय 'स्नेह'
[28/10, 1:13 pm] सरोज दुगड गोहाटी: * अग्नि शिखा काव्य मंच *
* चित्र देख कविता लिखो *
* दिनाँक - २८/१०/२०२१ / वृहस्पति वार /

समोसे में  भरा आलू ,अदरक ,मिर्च ,
मैदे में बंन्द गर्म तेल में होती सिकाई !

दूर तक फैलती खुशबु खिंचे आते लोग ,
 जल्दी  आकर लगाते समोसे का भोग,

साथ में  तीखी हरी ,मीठी वाली सौंठ ,
कहीं मिलता आलू ,छोले का  झोल !

गली ,मोहल्ले , नुक्कड़ टपरी दुकान ,
हिन्दुस्तानी की समोसे बसती है जान !

हर बेचनें वाले का अलग अंदाज है ,
हर खानें वाला जी भर लेता स्वाद है !

शाम की अदरक वाली चाय और समोसे 
बन जाती शाम हो जाती बल्ले - बल्ले !

जहाँ कहीं चार यार मिलते कहीं पे ,
उनको याद आती चाय और समोसे !

स्कूल ,कालेज हो युनिवर्सिटी का कैंटिन ,
चाय और समोसे बिन लगता सब सुने!

औरतों की शापिंग रह जाती अधूरी ,
 ना खाती सखियों संग समासे चटनी !

जब कभी अचानक आते  मेहमान ,
रसगुल्ले ,समोसे से होता सत्कार !

कारीगर भट्टी की गर्मी में तपते पिघलते  , 
ना जानें कितनों की क्षुधा तृप्त करते !

हमारे जीवन का अभिन्न अंग गर्म समोसे ,
अदरक वाली चाय इसके संग- संग चले !

फेरी वाले घुमते आवाज देते  गरम समोसे ,
झूंड के झूंड बच्चे गली में  दौड़े चले आते !

वक़्त वे वक्त आता सबके काम ,
समोसा खा भूख मिटाना आसान !

लज्जत ओर स्वाद में लगता बेमिसाल है ,
सारे हिन्दुस्तान की बसती इसमें जान है !

सरोज दुगड़
खारूपेटिया 
असम 
🙏🙏🙏
[28/10, 1:36 pm] रवि शंकर कोलते क: गुरुवार दिनांक**२८/१०)२१
विधा***कविता
विषय***#चित्राधारित रचना**#
                    ^^^^^^^^^

जब भी कहीं ये समोसा नजर आए ।
मेरा मन तो बस खाने को ललचाए ।।
सुबह  हो  या  फिर  शाम  नाश्ते में ।
समोसा ही खानेको बस मिल जाए ।।१

इसे ईम्ली पुदीनाकी चटनी संग खाएं ।
ये  खाने में  फिर तो चार चांद लगाए ।।
और हरी तली  मिर्ची अगर मिले तो ।
चटोरे  एक  नहीं चार चार  खा जाएं।।२


ये  त्रिकोणी  समोसा  है सबसे न्यारा ।
आलू से इसका रिश्ता गहरा  प्यारा।।
यह  गरम-गरम  कहीं भी मिलता है।
व्यंजनोंमें अव्वल जैसे गगनमें तारा ।।३

यह  सस्ता   स्वादिष्ट  शुद्ध तेल में तले ।
खानेवाला  तृप्त  होकर  फूलसा खिले ।।
खाना अगर नमिले तो कोई फिक्र नहीं ।
भूखा  न रहे  कोई  अगर समोसा मिले ।।४

प्रा रविशंकर कोलते
     नागपुर
[28/10, 1:43 pm] रजनी अग्रवाल जोधपुर: शीर्षक" समोसे"
 
क्याखूब बनाए समोसे,
हम सबको भाये समोसे , 
हम सबको प्यारे समोसे , 
 आलू के मसाले भरोसे, 
 हम सब ने खाए समोसे , 
 अब तो तरह-तरह से बनते , 
 पनीर, पोहे ,सब्जी, भाजी, 
 यह खूब बनाए समोसे, 
मैदा का खोल लपेटें हैं,  
रुचि रुचि खाए समोसे,
भरे तेल कढ़ाई में डालें, 
करछी से चलाएं समोसे , 
देखें थाली में भरे हुए,  सब को ललचाए समोसे , 
जग रूठ जाए पर यह नहीं रूठे प्रिय संग उड़ाए समोसे ,
अम्मा ने बनाए समोसे बारिश में खाए समोसे हर ऋतु में भाये समोसे चाय संग खाए समोसे वाह भाई वाह समोसे,,,

स्वरचित कविता 
 रजनी अग्रवाल
  जोधपुर
[28/10, 1:57 pm] वीना अचतानी 🧑🏿‍🦽: वीना अचतानी, 
विषय*** समोसा ******
 दादी  बनाती जब समोसा 
उसे कहती तिकोना
दादा जी फरमाते
नाम में  क्या रखा है
समोसा  कहो या कहो तिकोना 
है स्वाद में  लाजवाब 
पनीर आलू  मटर भर
जब बनाती समोसे
बच्चे  बूढ़े सब 
शौक से खाते
तेल में  तला जब
सुनहरा सुनहरा  होता
सबके मुँह में  पानी  भर आता 
कोई हरी चटनी 
कोई साॅस से खाता 
चटकारे लेकर कहते
फास्टफूड से भी 
इसका स्वाद निराला 
सर्दी  बरसात में  सबको भाता
चाय के साथ स्वाद
और बड़ जाता
काश:एसा भी हो जाता
कितने भी खाओ समोसे
मोटापा नहीं  आता 
न जाने किसने
किया  अविष्कार 
उसको तो सादर नमस्कार ।।।।।
वीना अचतानी 
जोधपुर ।।।
[28/10, 2:16 pm] 💃💃sunitaअग्रवाल: शीर्षक_ गरम समोसा 

होली ,दीवाली बनता समोसा
तरह तरह का मसाला भरता,
छोटू ,मोटू चिंटू को बहुत भाता ,
लें चटखारे , चटनी के संग खाता।

तेल भरे स्विमिंग पूल में,
लाल लाल करारे करारे तैरते समोसे , देख छोटू बोला ,
ऊपर नीचे हो रहा समोसा जैसे 
खेल रहा कबड्डी, 
तभी मोटू ने अपनी खिसकी , ऊंची की चड्डी, 
हां, हां, हां कर दोनों लगें हंसने,
पर मोटू अपनी ही धुन में मगन,
होठों पर जीभ फेरते हुए , माँ दो ना माँ दो ना लगा रटने, 

तभी दादी ने डांट लगाई , 
दूर हटो बच्चों गरम है कड़ाई ,
लग जाएगा चटकार तो फूट जाएगी रुलाई, 
चिंटू ने जोर से सांस खींची ,बोला 
माँ, कैसी बड़ी अच्छी खुशबू आ रही है,
मज़ेदार , जानदार अब रहा न जाता , तेजी से गर्म समोसा 
मां की आँख बचा, मुँह मै रख 
सी सी करता बाहर भागा खेलने ।


सुनीता अग्रवाल इंदौर मध्यप्रदेश स्वरचित 🙏🙏
[28/10, 2:28 pm] रागनि मित्तल: जय मां शारदे
*********
 अग्निशिखा मंच 
***********
दिन -गुरुवार 
दिनांक- 28 /10/2021 
चित्र आधारित रचना 

कड़ाई से निकल रहे गरमा गरम समोसे ।
सब के मुंह में पानी आता बुआ मामी हो या मौसे। 
तिकोने समोसे दिखते बड़े हैं प्यारे। 
भारत के हर एक कोने में पसंद करते हैं सारे ।
तीखी  चटनी इसके साथ में बहुत है भाती।
चटकारे ले लड़कियां खाये, चटनीऔर डलवाती ।
मेहमान आ जाए अगर अचानक नाश्ता है भरपूर ।
मंगा लिए समोसे तुरंत पूरा हुआ दस्तूर ।
एक जगह तो ऐसे बनते,जैसे मसाला खट्टा चूरन।
 आकर कटनी में पूछ लो समोसे वाला पूरन।

 रागिनी मित्तल 
कटनी ,मध्य प्रदेश
[28/10, 2:51 pm] शेभारानी✔️ तिवारी इंदौर: समोसा

कड़ाही में गर्म तेल
छम छम नाचे समोसा
जी सबका ललचाए
समोसा सबको भाए।
इमली के चटनी संग,
स्वाद और बढ़ जाए
समोसा देखकर सबके,
मुंह में पानी आ जाए।
आलू ,प्याज मिर्च, धनिया,
गरम मसाला और खटाई,
हल्दी,नमक  मिलाकर,
गोल  गोल बॉल बनाई।
मैदा को  अच्छे से गूंथकर,
बेलकर समोसा बनाया,
गरम गरम खाने में,
बड़ा मज़ा हमें आया।

शोभा रानी तिवारी इन्दौर
[28/10, 3:21 pm] अंजली👏 तिवारी - जगदलपुर: समौसा 
बच्चे बुढ़े सभी को पसंद आये 
करारे करारे कुरकुरे‌ समोसे
खाये तो मजा आ जाये
भुख लगी समोसा तो मंगवाये
समोसा के साथ मटर सब्सी आयी 
चटकारा लेकर  खुब मजे‌ से खाई जाती
तीन कोने का‌ ये समोसा
आलू मसाले का भरावन
मेहमान नवाजी हो या रिश्तेदारी
गरम गरम मन से खाये
  ठंडा  हो तो स्वाद  ना आये 
सबका मनपसंद है त्रिकोनी समोसा 
क्यों ना‌ भाये मौसा का‌ मौसा है
ये समोसा🙏
अंजली तिवारी मिश्रा जगदलपुर छत्तीसगढ़
[28/10, 3:47 pm] रामेश्वर गुप्ता के के: समोसा।
गरमागरम समोसे बन रहे है,
कढाई में कैसे वे छन रहे है।
आफिस हो या सड़क किनारे,
रूपये तीस में दो मिल रहे है।।
गरमागरम...................... 1 
लोग सुबह की सैर कर रहे है, 
संग मिलकर समोसे खा रहे है। 
गर्म समोसे सबको ललचा रहे है, 
लोग बच्चों केलिए ले जा रहे है।। 
गरमागरम....................... 2
समोसा, नास्ता स्वाद बढा रहा है, 
हरकोई समोसा खाकर जा रहा है। 
चटनी संग खाने का मजा और है, 
समोसा नास्ता सबको भा रहा है।।
गरमागरम...........................3
दिल्ली के समोसे बहुत मशहूर है, 
लोगों की पहुँच इनपर भरपूर है। 
आप इसे ठेले वाले के यहाँ खायें, 
या इन्हें आप होटल बैठकर खायें।। 
गरमागरम.......................... 4. 
 स्वरचित, 
रामेश्वर प्रसाद गुप्ता ।
[28/10, 3:49 pm] ओम 👅प्रकाश पाण्डेय -: समोसा ----- ओमप्रकाश पाण्डेय
पचास रुपये के पांच समोसे
गर्म गर्म ताजे ताजे खाओ समोसे 
खुद भी खाओ घर भी ले जाओ
साथ में मीठी खट्टी चटनी खाओ
खाओ नहीं तो फिर पछताओगे...... 1
मेरा समोसा है  निराला सबसे
बना हुआ है देशी गेहूं  के मैदे से
तला हुआ  है शुद्ध देशी घी में
देशी हाथों से बना हुआ है
पूर्णतः स्वदेशी नास्ता है यह.......... 2
अजवाइन सौंप धनिया मिर्चा
मंगरैला गरम मसाला इसमें
सब केरल से मगवाया है
जितना भी तुम खाओ दीदी
मन करेगा और खाने को... ....... 3
इसका जरा  हसीन चेहरा देखो
कितना लाल लाल है चेहरा
गरम गरम निकला कढ़ाई से
गरम गरम खाते जाओ 
पांच दस समोसे घर भी ले जाओ........ 4
अपने देश में सबका प्यारा
बच्चे बूढ़े व चाहे हों जवान
सब खाते हैं इसको चाव से
मन अगर करता हो किसी का
गरम जलेबी के साथ भी खाओ..... ..... 5
( यह मेरी मौलिक रचना है ---- ओमप्रकाश पाण्डेय)
[28/10, 4:36 pm] पुष्पा गुप्ता / मुजफ्फरपुर: 🙏🌹अग्नि शिखा मंच 🌹🙏
विषय: * चित्राधारित रचना *
शीर्षक:  * गरम समोसे *
दिनांक:28/10/21
*******************************
समोसे देखकर जी ललचाया-
सबके मुँह में पानी भर आया ,

गरम - गरम  ताजे  समोसे-
गर्म तेल से छनकर निकले,

इसका  स्वाद  निराला  होता-
नमकीन और चटकीला होता,

साथ में, मीठी  चटनी  भाती-
चाट- पकौड़े  की  बन  आती,

सब व्यंजन पर यह है भारी -
इसका बनना  सदा  है जारी ,

सुबह- शाम का यह जलपान-
चौक-चौराहे की सजी दुकान ,

पुरे  देश  में  यह  मिलता  है,
कीमत  इसमे कम  लगता है।
😄😄
*******************************
स्वरचित एवं मौलिक रचना 
रचनाकार -डॉ पुष्पा गुप्ता
मुजफ्फरपुर 
बिहार 
🌹🙏
[28/10, 4:43 pm] कुम कुम वेद सेन: समोसे

सबकी पसंद समोसे
सदाबहार समोसे
आलू और मैदे की दोस्ती का
अद्भुत कमाल है समोसे
भीनी भीनी समोसे की खुशबू
हल हलवाई की रौनक समोसे
हर गली नुक्कड़ पर बिके समोसे
शहर का मॉल हो गया हलवाई
समोसे से अपनी दुकान सजाई
कॉलेज के पढ़ने वाले हो
या दीदी भाभी चाची मौसी
समोसे के नाम पर थोड़ी देर
अवश्य रुक जाएं
ऑफिस की मीटिंग हो या
बर्थडे पार्टी या कोई समारोह
डिब्बा प्लेट में शोवे समोसे
वह दिन याद आता है
जब ऑफिस से लौटते
हाथ में होते समोसे
चाय के साथ समोसे
उस पर हरी चटनी
घर हो या सिनेमा का मैटिनी
लाजवाब जोड़ी समोसे चाय की
खा कर मन ना भरे
ना खाए तो जी ललचाए

कुमकुम वेद सेन
[28/10, 4:45 pm] डा. बैजेन्द्र नारायण द्िवेदी शैलेश🌲🌲 - वाराणसी - साझा: आदरणीय मंच को नमन आज अपने सभी पटेल के मित्र समोसा खाने पर जुटे हुए हैं हम लोग भी उसका स्वाद ले लें।
++++++++++
होने को सांझ बैठना अब क्या भला मकान पर चलो घूमते हुए चले हम सड़क वाली दुकान पर।।
गरम समोसा चलता होगा अपना सागर भैया एक समोसे की कीमत है केवल 5 रुपैया।।
चार अगर हम तुम खाएंगे रुपये लगेंगे  बीस।
अदरक मिर्ची की चटनी निकाल देगी खीस।।
आलू और मसाला मिलकर स्वाद बनाएंगे अच्छा कहेंगे और खा लो प्रेम से लेकर तुम दो दो बच्चा।।
लेकिन भाई अपना पाकिट जितना करे गवाही उतना ही सामान को लेना मत करना मनचाही।।
डॉ ब्रजेन्द्र नारायण द्विवेदी शैलेश वाराणसी
🌻🌻🌻🌻🌻🌻
[28/10, 4:55 pm] डा. अंजूल कंसल इन्दौर: चित्र देखकर रचना 
विषय -समोसा 

तीन पंखों की तितली 
नहा धोकर निकली 
बच्चों बताओ ? कौन 
मैडम- समोसा-समोसा।

गरम गरम समोसों को देख कर
गर्म कढा़ई में धीरे-धीरे तले जाते 
खाने को मन मचले, ललचा जाएं 
झटपट खाकर काम को निकलते। 

अहा! बहुत स्वादिष्ट लज्जतदार 
आलू का मसाला मिर्च-मसालेदार
प्याज हरे- भरे धनिया से सजाया 
काजू पुदीना किशमिश जायकेदार।

मीठी चटनी है,खूब चटपटी रसदार 
समोसे देख जीभ मुस्कुराए,बार बार
भारत के सभी,भिन्न भिन्न प्रदेशों में 
समोसे ने खूब धाक जमाई तल कर।

समोसे खा-खा कर लेते चटखारे 
कभी दोनों में रखकर खाते जाते
कभी टिशू पेपर से काम चलाते 
बच्चे- बड़े-बूढ़े स्वाद लेकर खाते।

कुरकुरे समोसे देख मुंह में आए पानी 
झटपट उठाकर खाएं,कप में चाय डिली
वाह! वाह! गरमा- गरम चटपटे समोसे ने 
चाय से दोस्ती की,मुहब्बत करने की ठानी। 

डॉक्टर अंजुल कंसल "कनुप्रिया"
28-10-21
[28/10, 5:05 pm] +91 70708 00416: मंच को नमन 🙏
        विषय-चित्र‌आधारित 
        28//10/21
      वाह समोसे
******************
वाह वाह ये समोसे
तेरा स्वाद है निराला
गर्मा-गर्म समोसे
बूढ़े -बच्चे सभी को है भाता
बहुत बढ़ाते प्यार समोसे
खूब खाओ  यार समोसे
लगते खाने में स्वादिष्ट
चाय की चुस्की के साथ
तो तेरी अदा का क्या कहना
चटनी और समोसे की तो
बात ही कुछ और है
यूं तो लाख खाने की चीजें हैं
पर तुम्हारे स्वाद क्या कहना
पार्टी में समोसा खाने से  अनुपम 
स्वाद बढ़ जाता है
महफ़िल की जान और शान तू समोसे
काश! तुम में इतना दम होता
तुझे खाने से वजन हो जाता कम
तुझे खाने से बहुत हानियां
फिर भी लोग खाने से नहीं 
परहेज करते
वाह वाह करते खूब खाते

 डॉ मीना कुमारी परिहार
[28/10, 5:28 pm] निहारिका 🍇झा: नमन अग्निशिखा मंच
विषय:-चित्राभिव्यक्ति
दिनाँक;-28/10/2021
  🌹समोसा🌹
नाश्ते का होता सरताज
गरम समोसा लज्जतदार
बच्चे बड़े सभी को भाये
देखें जब भी मन ललचाये
खट्टी मीठी चटनी के सँग 
लगे समोसा जायकेदार। 
जब  भी आये अतिथि द्वारे
करते स्वागत समोसे न्यारे।
आलू मटर की जुगलबंदी
समोसे को दे नयी ताजगी
कुरकुरे खस्ता गरम समोसे
मुंह मे रखते ही हैं घुलते
साथ मे कड़क अदरक की चाय।
इनसे मन कभी न भर पाए।।
है हर दिल को सदा ही भाये
समोसे
आओ मिल कर जी भर खाएं
मन को आनन्दित कर जाएं।।
निहारिका झा🙏🙏
खैरागढ राज.(36गढ़)
[28/10, 5:30 pm] 💃rani: अग्निशिखा मंच 
विषय---चित्र पर आधारित
 शीर्षक--- समोसा
दिनांक 28-10-2021 

गरमा गरम समोसे ले लो गरमा गरम समोसे
 स्टेशन पर रुकते ही गाड़ी, आती है आवाज़ ।
 फिर हवा में फैली खुशबू साँसो को महकाती
 और समोसा खाने को तबीयत मचल जाती ।
आलू-मटर के भरावन से भर बने समोसा 
कहीं-कहीं पनीर वाला भी मिले समोसा ।
आकार तिकोना इसका मेहनत से बनाते 
और खाने वाले स्वाद से इसके खुश हो जाते ।
 हरी चटनी हो या इमली की दोनों स्वाद बढ़ाती 
छोले संग मिले समोसा तब कीमत इसकी बढ़ जाती ।
 घर में भी जब आए मेहमान तो चाय संग परोसा जाए कभी-कभी छोटी सी पार्टी हो घर में तो सब मिलकर बनाएं ।
 कहीं ठेले पर, कहीं दुकानों पर, कहीं होटल में भी मिलता जिसे देख हर छोटे-बड़े का मन खुशी से खिलता जाए ।यह हाथों की कारीगरी एक-सा आकार देती है
 और जब तला जाए तो इसकी खुशबू अपनी और खींच लेती है ।
हर किसी की चाहत होती चाय संग मिल जाए समोसा और हर महफिल की शान बढ़ाए 'रानी' जब परोसा जाए  समोसा ।
                   रानी नारंग
[28/10, 5:30 pm] Anita 👅झा: चित्रआधारित रचना 
*मनभावन समोसा* 
अतिथि देव कहते भारत की शान आगत स्वागत समोसे की शान है 

समोसे तलते देख मुँह आता पानी 
बच्चे बूढ़े और जवान सबको भाता 

आगत स्वागत में समोसा राजा 
अपने रंग रूप करारे स्वाद लाता 

ना ,ना कहते सबके मन को भाता 
सी ,सी करते सबके मन को भाता 

समोसा खट्टी मिट्ठी चटनी खाओ समोसे आलू राजा जम कर खाओ 

आलू मटर गाजर विविध रूप संग 
किटी पार्टी घर ,बार ,बगीचा संग 

नेता हो अभिनेता सबके मन भाता आलू समोसे राजा सबके मनभाता 

अतिथि देव कहते भारत की शान आगत स्वागत समोसे की शान है 
अनिता शरद झा रायपुर
[28/10, 6:54 pm] सुरेन्द्र हरडे: अग्निशिखा मंच को नमन🙏
आज की विधा :- चित्र पर
आधारित रचना
       *समोसे*
गर्मा -गरम समोसे कड़ाई में
तल रहे हैं,क्या देखना बाबू
बच्चे बूढ़े सभी लगते अच्छे
खाने में है लज्जददार।।१।।

समोसे को ही बोलते हैं 
बंगाल में सिंघाड़ा,मैदे की लोई बेलन से बेलते,डाल के आलू मसाला तलते गरमागरम तेल में।

समोसे तेरे नाम है अनेक दही- समोसा छोले समोसा नाश्ते में लगता बड़ा स्वादिष्ट चाय के साथ खाने में आता मजा समोसा।।३।।

घर हो महाविद्यालय के कॅन्टीन, में या फिर सिनेमा घर सिनेमा 
देखते हर कोई खाता है मेले में बजार में दिखता है।।४।।

हरी चटनी , इमली चटनी के
साथ खाते हो तली हुई हरी
हरी मिर्च के साथ मेवा काजू
किसमिस ,हो शाही समोसा।।५।।

सुरेंद्र हरड़े
नागपुर
दिनांक:- २८/१०/२०२१
[28/10, 7:07 pm] सरोज दुगड गोहाटी: * अग्नि शिखा काव्य मंच *
* चित्र देख कविता लिखो *
* दिनाँक - २८/१०/२०२१ / वृहस्पति वार /

समोसे में  भरा आलू ,अदरक ,मिर्च ,
मैदे में बंन्द गर्म तेल में होती सिकाई !

दूर तक फैलती खुशबु खिंचे आते लोग ,
 जल्दी  आकर लगाते समोसे का भोग,

साथ में  तीखी हरी ,मीठी वाली सौंठ ,
कहीं मिलता आलू ,छोले का  झोल !

गली ,मोहल्ले , नुक्कड़ टपरी दुकान ,
हिन्दुस्तानी की समोसे बसती है जान !

हर बेचनें वाले का अलग अंदाज है ,
हर खानें वाला जी भर लेता स्वाद है !

शाम की अदरक वाली चाय और समोसे 
बन जाती शाम हो जाती बल्ले - बल्ले !

जहाँ कहीं चार यार मिलते कहीं पे ,
उनको याद आती चाय और समोसे !

स्कूल ,कालेज हो युनिवर्सिटी का कैंटिन ,
चाय और समोसे बिन लगता सब सुने!

औरतों की शापिंग रह जाती अधूरी ,
 ना खाती सखियों संग समासे चटनी !

जब कभी अचानक आते  मेहमान ,
रसगुल्ले ,समोसे से होता सत्कार !

कारीगर भट्टी की गर्मी में तपते पिघलते  , 
ना जानें कितनों की क्षुधा तृप्त करते !

हमारे जीवन का अभिन्न अंग गर्म समोसे ,
अदरक वाली चाय इसके संग- संग चले !

फेरी वाले घुमते आवाज देते  गरम समोसे ,
झूंड के झूंड बच्चे गली में  दौड़े चले आते !

वक़्त वे वक्त आता सबके काम ,
समोसा खा भूख मिटाना आसान !

लज्जत ओर स्वाद में लगता बेमिसाल है ,
सारे हिन्दुस्तान की बसती इसमें जान है !

सरोज दुगड़
खारूपेटिया 
असम 
🙏🙏🙏
[28/10, 8:28 pm] चंदा 👏डांगी: $$ चित्र आधारित रचना $$
         $$ समोसा $$

कढ़ाई मे तलते देख समोसा 
खाने को सबका जी ललचाए 
सुबह का हो या नाश्ता शाम का
चाय के साथ हर कोई खाय 
साॅस और  चटनी  इसका स्वाद बढाए 
आलू प्याज के चटपटे समोसे
मावे के बने मीठे समोसे
तले खाने का मन ना हो 
बेक्ड समोसा भी बन जाए 
तिल दाल के ड्राय समोसे 
पन्द्रह दिन तक खाये जाओ 
समोसे के स्वाद  अनोखे 
ठेला हो या रेस्टोरेंट 
सब पर भीड़ दिखे हरदम 

चन्दा डांगी रेकी ग्रैंडमास्टर 
रामटेकरी मंदसौर मध्यप्रदेश
[28/10, 8:39 pm] 😇ब्रीज किशोर: अंग्निशिखा मंच
 २८/१०/२०२१
  बिषय- चित्र आधारित रचना कविता
चाट पकौड़ी की को ई
बात करो तो मुँह मे पानी आता है।
चाट पकौड़ी की दुकान पर बच्चें दौड़ के जाते है।
उनके साथ ही माँ बाप भी चाट शौक से खाते है।
चाट मे समुसा पर मीठी चटनी डलवाते है।
 अपने खाते है घर के लिए पैक करवाते है।
 जब हम छोटे थे माँ से घर पर सामुसा बनवाते थे
 चाट वाले जैसा नहीं है और रोते रोते खाते थे। 
फिर  बाबा कहते आज घर का खालो कल बाजार चलेगें।
हम सब  समुसा खायेगें साथ में घर भी ले जायेगें।
हो हल्ला करते हुए हम बच्चे
खुशी मनाते है। 
    स्वरचित 
 .. बृजकिशोरी त्रिपाठी उर्फ
   भानुजा  गोरखपुर यू.पी
[28/10, 8:42 pm] 💃💃sunitaअग्रवाल: शीर्षक_ गरम समोसा 

होली ,दीवाली बनता समोसा
तरह तरह का मसाला भरता,
छोटू ,मोटू चिंटू को बहुत भाता ,
लें चटखारे , चटनी के संग खाता।

तेल भरे स्विमिंग पूल में,
लाल लाल करारे करारे तैरते समोसे , देख छोटू बोला ,
ऊपर नीचे हो रहा समोसा जैसे 
खेल रहा कबड्डी, 
तभी मोटू ने अपनी खिसकी , ऊंची की चड्डी, 
हां, हां, हां कर दोनों लगें हंसने,
पर मोटू अपनी ही धुन में मगन,
होठों पर जीभ फेरते हुए , माँ दो ना माँ दो ना लगा रटने, 

तभी दादी ने डांट लगाई , 
दूर हटो बच्चों गरम है कड़ाई ,
लग जाएगा चटकार तो फूट जाएगी रुलाई, 
चिंटू ने जोर से सांस खींची ,बोला 
माँ, कैसी बड़ी अच्छी खुशबू आ रही है,
मज़ेदार , जानदार अब रहा न जाता , तेजी से गर्म समोसा 
मां की आँख बचा, मुँह मै रख 
सी सी करता बाहर भागा खेलने ।


सुनीता अग्रवाल इंदौर मध्यप्रदेश स्वरचित 🙏🙏

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