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अखिल भारती अग्निशिखा मंच के ब्लॉक पर आज दिनांक 27 10 2021 को आयुर्वेद के महत्व पर लेख का आनंद लें डॉ अलका पांडे मुंबई



आयुर्वेद का हमारे जीवन में क्या प्रभाव है , ।।

आयुर्वेद का हमारे जीवन में गहरा प्रभाव है हम सोते जागते आयुर्वेद में तो जीते है भारत की सबसे पूरानी  चिकित्‍सा पद्धति हैं , "आयुर्वेद "आयुर्वेद का महत्‍व आज भी हमारे जीवन में बना है। कहते है इसकी उत्‍पत्ति लगभग 5,000 साल पहले भारत में हुई थी। इसे अक्‍सर सभी चिकित्‍सा प्रणालियों की जननी भी कहा जाता है। आयुर्वेद में कहा गया है कि स्‍वास्‍थ्‍य और तंदुरुस्ती, मन, शरीर और आत्‍मा के मध्‍य संतुलन होना 
जरुरी है । 
मेरे नाना "वैघनाथ दीक्षित "वैघ "थे और सारी दवा , पिस्टी , मंकरध्वज , सतफला चूर्ण , शिखियाँ , ज्वनप्राश, आदि सब मैंने ननिहाल में बनते देखा है , मेरे नाना साईकल से बहुत दूर दूर तक इलाज करने जाते थे । 
आयुर्वेद में स्वास्थ्य को बढ़ावा देते  है, और बीमारियों से  दूर रहना बताते है । हर  स्वास्थ्य समस्याओं का उपचार आयुर्वेद से किया जा सक‍ता है। आयुर्वेद रोकथाम पर विशेष बल देता है, यह एक सुखद जीवन के लिए स्‍वच्‍छ विचार, श्रेष्‍ठ जीवनशैली और जड़ी-बूटियों के उपयोग में संतुलन को प्रोत्साहित करता है। आयुर्वेद व्‍यक्ति को यह समझने में सहायता करता है कि वह अपनी शारीरिक संरचना के अनुरूप शरीर, मन और चेतना में संतुलन कैसे बनाएं, क्‍योंकि प्रत्‍येक व्‍यक्ति की शारीरिक संरचना भिन्‍न-भिन्‍न होती है।
हम अपने दैनिक जीवन में माँ दादी - नानी को देखते-सुनते हैं कि किसी को पेट दर्द होने पर या गैस होने पर अजवायन, हींग आदि लेने को कहा जाता है; खाँसी-जुकाम, गला खराब होने पर कहा जाता है कि ठण्डा पानी न पियो; अदरक, तुलसी की चाय, तुलसी एवं काली मिर्च या शहद और अदरक का रस, अथवा दूध व हल्दी ले लो, आदि। अमुक चीज की प्रकृति ठण्डी है या गर्म, इस प्रकार के सभी निर्देश घर में मिलते हैं जो आयुर्वेद के ही अंग हैं। इस प्रकार हम अपने बुजुर्गों से पीढ़ी दर पीढ़ी घर में प्रयुक्त होने वाले पदार्थ़ों के औषधीय गुणों के विषय में सीखते चले आ रहे हैं। हमें अपने घर के आँगन अथवा रसोई घर से ही ऐसे अनेक पदार्थ मिल जाते हैं, जिन्हें हम औषधि के रूप में प्रयुक्त कर सकते हैं। इस प्रकार हम इस आयुर्वेदीय पद्धति को अपने जीवन से अलग कर ही नहीं सकते, रात दिन आयुर्वेद के संग रहते हैं तो हम पर इसका रंग तो चढ़ा है । हमारे पास तमाम नुक़्से है , 
देखा जाये तो हर घर में एक वैघ मौजूद है , रसोई में आयुर्वेद की दवाईयां भी मौजूद है । 
आयुर्वेद भोजन तथा जीवनशैली में सरल परिवर्तनों के द्वारा रोगों को दूर रखने के उपाय सुझाता है।
आयुर्वेदिक चिकित्सा विदेशी दवाओं से सस्ती है क्योंकि आयुर्वेद चिकित्सा में सरलता से उपलब्ध जड़ी-बूटियाँ एवं मसाले काम में लाये जाते हैं।
आयुर्वेदिक औषधियों के कोई दुष्प्रभाव नहीं होते है । यह नुक़सान नहीं पहुँचाते ।

आयुर्वेद जीवन को ठीक प्रकार से जीने की कला को ही आयुर्वेद कहते है । क्योंकि यह विज्ञान केवल रोगों की चिकित्सा या रोगों का ही ज्ञान प्रदान नहीं करता, अपितु जीवन जीने के लिए सभी प्रकार के आवश्यक ज्ञान की प्राप्ति कराता है।
आयुर्वैद का हमारे जीवन में बहुत महत्व है ।वह सरलता से उपलब्ध हैं आयुर्वेद को अपनायेंगे उसके हर घटकों को समझेंगे तो हम स्वस्थ रहेगें निरोगी रखना ही आयुर्वेद का खास काम है । 
आयुर्वेद का कहना है । 
सभी सुखी व निरोगी रहे , 
इससें बढकर और क्या ....
आयुर्वेद हमारे पैदा होते ही घुटी के साथ रच बस जाता है पेट दर्द हींग,चोंट लग गई हल्दी का दूध , नीम के पत्ते , तुलसी के पत्ते , दांत दर्द लौंग का तेल , अजवायन , आदि सब आयुर्वेद औषधि है जिनका प्रभाव हमेशा रहेगा और हमारा औषधालय रसोई हमेशा वैघ का काम करता रहेगा । 

डॉ अलका पाण्डेय मुम्बई

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[27/10, 8:07 am] कुंवर वीर सिंह मार्तंड कोलकाता: *हमारे जीवन में आयुर्वेद का प्रभाव*

कहा जाता है– एक तंदुरस्ती हजार नियामत। हर आदमी चाहता कि वह स्वस्थ रहे। स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क होता है। 
कोई आवश्यक नहीं कि आप बहुत मोटे ताज़े हों। जरूरी यह है कि आप नीरोग हों। 
स्वस्थ शरीर में एक विशेष ताजगी होती, चुस्ती फुर्ती होती है। 
अगर किसी कारण वश मनुष्य बीमार पड़ जाए तो उसे दवाओं की आवश्यकता पड़ती है। आजकल एलोपैथिक दवाइयों का प्रचार बहुत अधिक है। इससे जल्दी रोग मिट जाता है। किंतु इसके कुछ साइड इफेक्ट भी होते हैं। जो एक रोग मिटाते तो दूसरे रोग को पैदा करते हैं। 
हमारे देश की सबसे प्राचीन औषधि विज्ञान आयुर्वेद है। यह प्राचीन ऋषि मुनियों द्वारा तैयार किया गया। इसी क्रम में सबसे पहले आयुर्वेद का उद्भव हुआ। आयुर्वेदिक पद्धति सहस्रों वर्ष़ों से हमारे जीवन में रची बसी हुई है।
हम अपने दैनिक जीवन में देखते हैं कि किसी को पेट दर्द होने पर या गैस होने पर अजवायन, हींग आदि लेने को कहा जाता है; खाँसी-जुकाम, गला खराब होने पर कहा जाता है कि ठण्डा पानी न पियो; अदरक, तुलसी की चाय, तुलसी एवं काली मिर्च या शहद और अदरक का रस, अथवा दूध व हल्दी ले लो, आदि। 
अमुक चीज की प्रकृति ठण्डी है या गर्म, यह जानकारी आयुर्वेद से ही मिलती है।
इस प्रकार हम अपने बुजुर्गों से पीढ़ी दर पीढ़ी घर में प्रयुक्त होने वाले पदार्थ़ों के औषधीय गुणों के विषय में सीखते चले आ रहे हैं। हमें अपने घर के आँगन अथवा रसोई घर से ही ऐसे अनेक पदार्थ मिल जाते हैं, जिन्हें हम औषधि के रूप में प्रयुक्त कर सकते हैं। इस प्रकार हम इस आयुर्वेदीय पद्धति को अपने जीवन से अलग कर ही नहीं सकते । आयुर्वेद‘ शब्द का अर्थ हुआ-’जीवन का विज्ञान‘। साधारण भाषा में कहें तो जीवन को ठीक से जीने का विज्ञान ही आयुर्वेद है।
यह विज्ञान केवल रोगों की चिकित्सा या रोगों का ही ज्ञान प्रदान नहीं करता, अपितु जीवन जीने के लिए सभी प्रकार के आवश्यक ज्ञान की प्राप्ति कराता है।
महर्षि चरक ने ’चरक-संहिता‘ नामक ग्रन्थ में आयुर्वेद की परिभाषा देते हुए भी कहा है – जिसमें हित आयु, अहित-आयु, सुख आयु और दुख आयु का वर्णन हो, उस आयु के लिए हितकर व अहितकर द्रव्य, गुण, कर्म का भी वर्णन हो एवं आयु का मान व उसके लक्षणों का वर्णन हो, उसे आयुर्वेद कहते हैं।
इससे स्पष्ट होता है कि आयुर्वेद के ये सिद्धान्त किसी विशेष व्यक्ति, जाति या देश तक सीमित नहीं हैं, ये सार्वभौमw हैं। जिस प्रकार जीवन सत्य है, उसी प्रकार ये सिद्धान्त और नियम भी सभी स्थानों पर मान्य और सत्य हैं, अतः शाश्वत, सार्वभौम एवं सर्वजनीन हैं। इनमें ’सर्वे भवन्तु सुखिनः, सर्वे सन्तु निरामयाः‘ अर्थात् ’सभी सुखी हों और सभी निरोग हों‘ का भाव निहित है। निष्कर्ष के रूप में आयुर्वेद एक चिकित्सा-पद्धति होने के साथ-साथ एक संपूर्ण जीवन-पद्धति व साधना-पद्धति भी है।

© कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड, कोलकाता
[27/10, 8:40 am] आशा 🌺नायडू बोरीबली: 🌹🌷लेख 🌷🌹
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        (शीर्षक)
🌹 आयुर्वेद का हमारे जीवन में क्या प्रभाव है‌ ?🌹

          सृष्टि की रचना हुई है ,तब से मनुष्य अपनी आपाधापी में लगा है। अपनी स्वाभाविक इच्छाओं को पूरी कर जीवन यापन कर रहा है। जीवन में आने वाले सुख दुःख में जीवन जी रहा है।
          मनुष्य का शरीर स्वस्थ रहें इसके लिए वह अनेक प्रयत्न करता है। थोड़ी सी सर्दी होने पर वह अदरक की चाय पीता है ।पेट दर्द या गैस हो तो अजवाइन खाता है ।सर्दी खांसी के लिए तुलसी अदरक का रस लेता है। शहद ,काली मिर्च ,हल्दी आदि तत्वों का प्रयोग कर अपने शरीर को शारीरिक तकलीफों से बचाता है।
         बीमार होने पर कई प्रकार की चिकित्सा द्वारा शरीर को संभाला जाता है, जिसमें सबसे आगे एलोपैथी है ,किंतु आयुर्वेदिक पद्धति हमारे जीवन में हजारों वर्षों से चली आ रही है ,जो हमारे घर के आंगन से ,हमारे घर की रसोई तक में प्राप्त होने वाली वस्तुओं से चिकित्सा आसानी से, व बिना खर्चे के हो जाती है। इसीलिए हम आयुर्वेदिक चिकित्सा को अपने जीवन से अलग नहीं कर सकते।
          "आयुर्वेद "का शाब्दिक अर्थ होता है "जीवन का विज्ञान" क्योंकि इससे हम स्वास्थ्य रक्षा और रोग निवारण प्राप्त कर सकते हैं ।यह हमारे लिए बहुत कल्याणकारी है। इसीलिए इसे "सर्वे भवंतु सुखिनः , सर्वे संतु निरामया:" कहा गया है, अर्थात सभी सुखी रहें और सभी निरोगी रहें का भाव नीहित है ।
         ‌‌ अंत में हम यह कह सकते हैं कि आयुर्वेदिक एक चिकित्सा पद्धति होने के साथ-साथ एक संपूर्ण जीवन पद्धति व साधना भी है ।इसीलिए जन जीवन में इसका अत्यधिक महत्व है ।सर्वसाधारण से लेकर अमीरों तक के जीवन पर इसका अत्यधिक प्रभाव पड़ता है।यह घरेलू नुस्खे की खान है,जो‌ आसानी से प्रत्येक के घरों में उपलब्ध हो जाती है। इसी से इसका महत्व और प्रभाव बहुत अधिक है।
********************स्वरचित मौलिक रचना
डॉ . आशालता नायडू .
भिलाई . छत्तीसगढ़ .
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[27/10, 9:06 am] पूनम सिंह कवयित्र� � इशिता स� �डीला: नमन मंच अग्निशिखा 
विषय हमारे जीवन में आयुर्वेद का प्रभाव 
प्रकृति खजाना है, 
ज्ञान का, चमत्कार का, 
प्रकृति ने दिया हमको आयुर्वेद के रूप में अनमोल रतन, 
जिससे धन्य हुआ हर व्यक्ति, 
हम आभारी है इस आयुर्वेदरूपी रतन के, जिसने हमको ज्ञान कराया हमारी 
वनस्पति की ताकत पत्तियों के चमत्कार, पौधों की जड़ो में छुपी सेहत की घनिष्ठ दोस्त, हमारे साथ रहने वाली, हमारी रसोई में मिलने वाली उन अमृत रुपी मसालों की शक्ति के बारे में, आयर्वेद वो प्रकाश है जो हमें उम्मीद की किरण दिखता है ज़ब हम निराश हो जाते है , चुपके से वह हमारा हौसला बढ़lता है, कहता है 
मत करो विश्वास अंग्रेजी दवाओं पर ये कुछ नहीं बस देती है पल भर का आराम.. करो विश्वाश, मुझ पर एक विश्वाश के साथ, में हर जख्म तुम्हारा भर दूंगा आलिंगन में तुमको भर लूंगा 
क्योंकि में नहीं वो औषधि जो तुमको भ्र्म में रखू मैं करूँगा तुमको चमत्कारिक रूप से स्वस्थ 
बस पकड़े रहो मेरा हाथ एक आशा औऱ एक विश्वाश के साथ. @ishita singh. Sikshika in sandila block
[27/10, 10:56 am] रामेश्वर गुप्ता के के: आयुर्वेद का हमारे जीवन में प्रभाव।
आयुर्वेद चिकित्सा भारत की उच्च कोटि की चिकित्सा पद्धति है। यह ऋषियों और मुनियों ने इसे विकसित किया है। ऋषि धन्वन्तरि, च्यवन और पातन्जलि आदि मुनियों ने जड़ी बूटी का आविष्कार किया और आयुर्वेद को भारत में विकसित किया और विश्व में इसका प्रचार किया है। आज के युग में स्वामी रामदेव और श्री महेश योगी ने आयुर्वेद को श्रेष्ठ चिकित्सा पद्धति कहा है। डेगू आदि बीमारियां आयुर्वेद से तुरंत ठीक हो जाती है। अंग्रेजी दवाओं का लाभ तुरंत होता है, परन्तु अग्रेजी दवाओं का दुष्प्रभाव भी होता है।
पुराने समय में पारा से स्वर्ण बनाने की पद्धति काफी प्रचलित थी।
आजकल डाबर, वैद्यनाथ और झंडू आदि संस्थान आयुर्वेद की दवाई बनाने के श्रेष्ठ संस्थान है। आयुर्वेद की एक खास बात यह कि इसके इलाज का शरीर पर कुप्रभाव नहीं पडता है।
इस प्रकार हम यह कह सकते है कि आयुर्वेद आजकल की उच्चकोटि की चिकित्सा पद्धति है।
द्वारा :
रामेश्वर प्रसाद गुप्ता ।
[27/10, 11:15 am] विजेन्द्र मोहन बोकारो: मंच को नमन
विधा:-- * *लेख*
शीर्षक:--- *आयुर्वेद का हमारे जीवन में क्या प्रभाव है?*

जब से सृष्टि की रचना हुई ऋषि मुन्नी के ज्ञान से उपजा आयुर्वेद हर रोग की दवा है। रामायण में भी चर्चित है लक्ष्मण के मूर्छित हुए थे ज्ञानी ऋषि ने आकर संजीवनी बूटी लाने की सलाह दिए कहां मिलेगा उसकी भी पता बताएं हनुमान को यह काम सौंपा गया संजीवनी बूटी ले आए उसको देने के बाद श्री लक्ष्मण स्वस्थ होकर खड़े हो गए। हमारे घर में दादी नानी के नुस्खे प्रचलित है उनका कहना है कि मेरे रसोई घर में आयुर्वेद की भंडार है जिसे आप पहचानिए और प्रयोग करें। जैसे जब बच्चे जन्म लेते हैं तेल मे जायफल डालकर मालिश करते हैं तो बच्चे तंदुरुस्त होते हैं। और गहरी नींद में सोते हैं। जायफल ठंडी में गर्म करता है।
अंग्रेजो के शासन में आयुर्वेदिक दवा विलुप्त हो गए। अंग्रेजी दवा खाने से उस रोग का निदान हो जाता है कुछ समय के लिए लेकिन जब मौसम बदलते हैं फिर वह जो शुरुआत करती है तो रोग ऊपज जा । अगर आप आयुर्वेदिक दवा सेवन करते हैं रोग जड़ से खत्म हो जाता है। आयुर्वेदिक दवा सस्ती भी है और घर के रसोई में भी उपलब्ध है सिर्फ आपको पहचानना है जैसे अगर आपको खांसी हो रही है तुलसी अदरक की चाय पी ले। ज्वाइंट पेन पेन हो रही है तो गर्म दूध में हल्दी डालकर पिएं। आपकी रसोई में जितना मसाले है आप प्रयोग करते हैं आयुर्वेदिक दवाई ही है। लॉन्ग दालचीनी, जावित्री जीरा हल्दी धनिया इत्यादि आयुर्वेदिक दवा ही है इसकी उपयोगिता उम्र सहनशक्ति की तरह प्रयोग किया जाता है। हमारे समझ से आयुर्वेदिक को अपनाकर भारत को आत्मनिर्भर बनाया जा सकता है।

विजयेन्द्र मोहन।
[27/10, 11:22 am] 👑पदमाकाक्षी शुक्ला: 🙏🌹 *नमन मंच* 🌹🙏
🙏🌹 *जय अम्बे*🌹 *२७/१०/२१*🌹🙏
🙏🌹 *आयुर्वेद का हमारे जीवन में प्रभाव* 🌹🙏

पहले के जमाने में घने जंगल थे, और बहुत सारी वनस्पति रहती थी, सभी लोगों वनस्पति से प्रेम करते, पहचानते थे, प्रकृति ही हरेक का जीवन में महत्व का अंग था। 

          हम अपने दैनिक जीवन में देखते-सुनते हैं कि किसी को पेट दर्द होने पर या गैस होने पर अजवायन, हींग आदि लेने को कहा जाता है; खाँसी-जुकाम, गला खराब होने पर कहा जाता है कि ठण्डा पानी न पियो; अदरक, तुलसी की चाय, तुलसी एवं काली मिर्च या शहद और अदरक का रस, अथवा दूध व हल्दी ले लो, आदि। अमुक चीज की प्रकृति ठण्डी है या गर्म, इस प्रकार के सभी निर्देश आयुर्वेद के ही अंग हैं। इस प्रकार हम अपने बुजुर्गों से पीढ़ी दर पीढ़ी घर में प्रयुक्त होने वाले पदार्थ़ों के औषधीय गुणों के विषय में सीखते चले आ रहे हैं। हमें अपने घर के आँगन अथवा रसोई घर से ही ऐसे अनेक पदार्थ मिल जाते हैं, जिन्हें हम औषधि के रूप में प्रयुक्त कर सकते हैं। इस प्रकार हम इस आयुर्वेदीय पद्धति को अपने जीवन से अलग कर ही नहीं सकते ।
      लडाई में भी गहरा घाव, वनस्पति के लेप से ठीक होते थे, कई वनस्पति के काढा से रोग पर नियंत्रण कर पाते थे, और ओपरेशन के बाद यही वनस्पति से दवाई बनाकर दी जाती थी। 
       वस्ती बढने लगे, प्रकृति का नाश होने लगा, और स्पर्धा बढ़ती गई। अब आयुर्वेद के डॉक्टर की पढाई को बच्चे अस्वीकार करने लगे, बड़ा डॉक्टर बननेकी चाहत में एलोपैथी की मांग बढ़ने लगी,  

            ’आयुर्वेद‘ शब्द का अर्थ हुआ-’जीवन का विज्ञान‘। साधारण भाषा में कहें तो जीवन को ठीक प्रकार से जीने का विज्ञान ही आयुर्वेद है, क्योंकि यह विज्ञान केवल रोगों की चिकित्सा या रोगों का ही ज्ञान प्रदान नहीं करता, अपितु जीवन जीने के लिए सभी प्रकार के आवश्यक वनस्पति का ज्ञान की प्राप्ति कराता है।
       आयुर्वेद दवा ,कफ, पित्त, वायु, नाडी की परख से ही दवाई देते है, एलोपैथी जैसी दवा से कु प्रभाव नहीं पडता , आयुर्वेद की दवा के उपचार से क्रोनिक बिमारी में फायदा होता है,हां जहां ओपरेशन की ज़रूरत है वहां अब तो एलोपथी की एन्टीबायोटीक दवा लेनी ही पडती है, चाहे वह दवाकी साइड ईफेक्ट हो,।।।।
       आयुर्वेदिक दवा से संपूर्ण रोग मुक्त हो जाते है यह बात सत्य है, और दवाई हानि नहीं पहुंचाती है, पर हार्ट की सर्जरी में , या कोई रोग की गंभीरता के वक्त एलोपथी दवाई लेनी ही पडती है,
       जमाना बदल चूका है, औषधी के गुणों को हम भूल चूके है,जागृत होने की जरुरत है, तो आयुर्वेद दवाई का महात्म्य समझें। और थोड़ा वनस्पति के ज्ञान से बच्चों को बचपन से ही ज्ञान मिले, पर्यावरण की रक्षा का महात्मा समझे, शिर दर्द, खाँसी, कफ, हल्का बुखार, अस्थमा, जैसे रोग निवारण शक्ति आयुर्वेद दवा से हमें प्राप्त होगा, 
                   हमारे एक रिश्तेदार को भगंदर हुआ था, बड़े बड़े डॉक्टर जो एम डी गायनेक थे, चार बार ओपरेशन करने से कुछ फायदा नहीं हुआ। हिम्मत हार चुका मानव आयुर्वेद डॉक्टर से ओपरेशन करवाया, भयंकर यातना के बाद, छे महिने में वह ठीक हो गया। उपाय तोम उत्तम आयुर्वेद डॉक्टर भी कर पाते है, विश्वास और उत्तम, डॉक्टर से मुलाकात होनी चाहिए। 

🙏🌹 पद्माक्षि शुक्ल 🌹🙏
[27/10, 11:36 am] वैष्णवी Khatri वेदिका: अ. भा. अग्निशिखा मंच
बुधवार =27//10/ 2021
विषय _आयुर्वेद का हमारे जीवन में क्या प्रभाव है
 विधा - लेख 

हजारों वर्षों से आयुर्वेद से रोगों के उपचार और स्वस्थ जीवन शैली के लिए आयुर्वेद को ही प्रमुख माना गया है इससे अच्छा स्वास्थ्य बनता है, इसी कारण आधुनिक विश्व में भी मैं भी आयुर्वेदिक उपचारों को नहीं छोड़ा है। यह चिकित्सा आधुनिक जीवन शैली को परिवर्तित कर स्वास्थ्य हेतु अच्छे आते हैं विकसित करती है।प्राकृतिक उत्पादों से दैनिक जीवन में इस्तेमाल होने वाली और तनाव मुक्त और रोग मुक्त बनाने वाली वस्तुओं को तैयार किया जाता है। इसका प्रयोग जीवन को स्वस्थ और सुखी बनाता है। 


आयुर्वेद त्रिदोष सिद्धांत यानी तीन दोष - वात, पित्त और कफ को संतुलित कर शरीर को स्वस्थ और मन और चेतन को संतुलित बनाए रखता है। इसका उद्देश्य हर उम्र के लोगों को स्वस्थ्य बनाए रखना। 
शरीर, मन और चेतना की विकृति वाले दोषों को आयुर्वेद संतुलन में रखता है।
 
 
आयुर्वेदिक दर्शन के अनुसार हमारा शरीर पांच तत्वों जल, पृथ्वी, आकाश, अग्नि और वायु से मिलकर बना है। वात, पित्त और कफ इन पांच तत्वों के संयोजन और क्रमपरिवर्तन हैं जो सभी निर्माण में मौजूद पैटर्न के रूप में प्रकट होते हैं।
 

भौतिक शरीर में वात नामक सूक्ष्म ऊर्जा है, पाचन और चयापचय की ऊर्जा को साफ करती है। वात ऊर्जा श्वास, मांसपेशियों, ऊतक, हृदय की धड़कन को नियंत्रित करता है। वेस्ट में संतुलन मे रचनात्मकता और लचीलेपन को बढ़ावा देता है। वात का संतुलन न हो तो भय और चिंता पैदा होती है। पित्त पाचन, अवशोषण, चयापचय और शरीर के तापमान को नियंत्रित रखता है। संतुलन न होने से, पित्त क्रोध, घृणा और ईर्ष्या पैदा करता है।

कफ़ ऊर्जा हड्डियों, मांसपेशियों का निर्माण करती है और "गोंद" प्रदान करती है जो कोशिकाओं को जोड़े रखती है। इससे जोड़ों और त्वचा को चिकनाई मिलती है और प्रतिरक्षा भी बनी रहती हैं। कफ़ से प्यार, शांति, क्षमा बनी रहती है और ईर्ष्या, लालच का दमन होता है।

खानपान में सुधार करके और आयुर्वेद का लाभ उठाकर आप स्वस्थ स्वास्थ्य और वजन को सहेज कर रख सकते हैं और यदि संतुलित भोजन व्यायाम आदि किए जाएँ तो सोने पर सुहागा होगा।

योग और ध्यान और व्यायाम के नियमित अभ्यास से हम अपने मन को शांत और कोशिकाओं में अधिक ऑक्सीजन मिलने के कारण शरीर को संक्रमण रोगों से बचा सकते हैं। अवसाद और चिंता से भी छुटकारा मिल सकता है तथा अपना कायाकल्प भी कर सकते हैं 
अवसाद और चिंता को दूर रखने के लिए आयुर्वेद में शिरोधारा, अभ्यंगम, शिरोभ्यंगम, और पद्यभंगम जैसे व्यायामों की सलाह दी जाती है।

आयुर्वेद में पंचकर्म में एनीमा, तेल मालिश, शुद्धिकरण और अन्य प्रक्षालन के माध्यम से शारीरिक विषाक्त पदार्थों को समाप्त कर शरीर का शुद्धिकरण किया जाता है।बगिलोय, आंवला, जीरा, इलायची, सौंफ और अदरक, शहद आदि अपनाकर हम कई बीमारियों का इलाज़ करते हैं।


वर्तमान में प्राचीन कला के महत्व को समझ रहे हैं और आधुनिक चिकित्सा विज्ञान के साथ आयुर्वेद का संबंध बनाके आयुर्वेद पर अधिक शोध लाने की भी कोशिश की जा रही है। इस चिकित्सा विज्ञान में लोगों की विचारधारा और जीवन शैली में भी बहुत तेजी से बदलाव आ रहे हैं।
अध्ययनों में पता चला है कि अब ये हवा में भी मौजूद है। ऐसे में अपनी रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाकर ही हम इससे जीत सकते हैं। इसके लिए कई तरह की जड़ी बूटियाँ और वनस्पति हमारे काम आएंगी।

वैष्णो खत्री वेदिका
[27/10, 11:53 am] Anita 👅झा: मंच को नमन 
विधा -लेख 
विषय *-आयुर्वेद का हमारे जीवन में महत्व *
जहाँ एलोपैथिक दवा बीमारी होने की मूल कारण पर ना जाकर इसको दूर करने पर केंद्रित होती है वहीं आयुर्वेद हमें बीमारी होने की मूलभूत कारणों के साथ-साथ निदान के विषय में भी बताता है । 
आयुर्वेद का महत्व बताती , आधुनिक जीवन शैली स्वास्थ्य-उन्मुख आदतों को प्राकृतिक पदार्थों, दवाओं और जड़ी-बूटियों के उपयोग के प्राचीन काल से मिला ज्ञान है । 
शुद्ध हवा पीपल नीम वृक्षारोपण पर्यावरण सुधार स्वकक्षता अभियान में कितना ज़रूरी है कोरोना काल ने जनमानस को समझा दिया है 
शुद्ध पानी ,हमें स्वस्थ, सुखी, तनाव मुक्त रहना सिखाती है और रोग मुक्त जीवन जीने में मदद सार्थक होता है 
आयुर्वेद का मुख्य उद्देश्य महत्व मन, शरीर और आत्मा के बीच व्यक्तिगत संतुलन को बहाल करना सिखाती है ।
योग और आयुर्वेद प्रतिरक्षा को मजबूत करने पर ध्यान केंद्रित करते हैं नकारात्मक प्रभावों से लड़ने के लिए प्रभावी, सुलभ और किफायती साधन प्रदान करते हैं । योग तन, मन और आत्मा को जोड़ता है। योग श्वास तकनीक प्रक्रिया फेफड़ों के स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद करती हैं।
 योग शरीर और मन को स्वस्थ रखने के लिए एक आध्यात्मिक प्रक्रिया है।
आयुर्वेद प्राकृतिक एवं समग्र स्वास्थ्य की पुरातन भारतीय पद्धति है| 
संस्कृत मूल का यह शब्द दो धातुओं के संयोग से बना है आयुः वेद आयु अर्थात लम्बी उम्र जीवन और वेद अर्थात विज्ञान अतः आयुर्वेद का शाब्दिक अर्थ जीवन महत्व बताते है|
अनिता शरद झा रायपुर
[27/10, 11:56 am] Nirja 🌺🌺Takur: अग्निशिखा मंच
तिथि- २७-१०-२०२१
विषय- लेख-, आयुर्वेद का हमारे जीवन में महत्व
             अच्छा स्वास्थय ही जीवन का मूल मंत्र है। उसको पाने के रास्ते अलग-अलग हैं। जैसे योग ,व्यायाम, फल और ताजा खाना। 
            इतना करने के बाद भी बढ़ती उमर या ऐसे ही कभी स्वास्थय में परेशानी आ ही जाती है तब दवाईयां लेनी ही पड़ती है। तब हमारे सामने बहुत सारे रास्ते होते हैं।
१-एलोपैथी
२-होम्योपैथी
३-आयर्वेदिक

     एलोपैथी में दवाईयां बहुत जल्दी असर करती हैं पर उनके साइड इफेक्ट्स बहुत होते हैं।

होम्योपैथी- बहुत अच्छी होती है पर धीरे से असर करती है। 
३-आयुर्वेदिअ ही अच्छी होती है जो असर भी जल्दी करती है और साइड इफेक्ट न हीं होता। इसकी दवाईयां हमारे देश में ही बनती हैं। इस लिए आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति अच्छी मानी जाती है। 

नीरजा ठाकुर नीर
पलावा डोंबिवली
महाराष्ट्र
[27/10, 12:20 pm] वीना अडवानी 👩: आयुर्वेद का महत्व
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आयुर्वेद वो वैद्यिक उपचार की पद्धति है जो सदियों से समस्त धरा पर मानवों द्वारा उपयोग में लाई जा रही है। जिसमें यदि दवा दुआ बन असर नहीं करती तो, शरीर को नुकसान भी नहीं पहुंचाती है। हमारे देश में या समस्त पृथ्वी पर उत्पन्न होने वाली प्राकृतिक जड़ी बूटियों के माध्यम से दवा बनाई जाती है। हाल भी में धरा पर फैली इस सदी की भयावह महामारी से तो सभी रुबरु हुए थे और अभी भी इसी महामारी का खौंफ वैज्ञानिक संदर्भ के अनुसार अभी भी खतरा बना हुआ है। इस महामारी में पूर्णतः रुप से तो नहीं परंतु ये भी कहना उचित न होगा की पचास प्रतिशत से अधिक यदि इस महामारी पर काबू यदि पाया गया तो वह काबू जड़िबूटियों को प्रयुक्त कर बनाये गये काड़े के सेवन से। इस महामारी में जहां एक ओर काड़े के कारण जड़ी-बूटियों की मांग में वृद्धि हुई वहीं गिलोए या गिलोए से बनी आयुर्वेदिक वटी ने भी अपने जादू की छटा बिखेरी है। आयुर्वेदिक पद्धति हमारे ऋषियों द्वारा बहुत ही अधिक प्रयुक्त में ली जाती थी। आज भी आयुर्वेद का बोलबाला है। आयुर्वेद पद्धति के अंतर्गत प्रयुक्त होने वाली विभिन्न दुर्लभ औषधियां जो दुर्लभ और दुर्गम भरी पहाड़ी क्षेत्रों, जंगलों इत्यादि में ही प्राप्त होती है जिसके लिए हमारे जैसे ही कई इंसान जी तोड़ मेहनत कर अपनी जान जोखिम में डाल इन महत्वपूर्ण औषधियों से समस्त संसार को रोग प्रतिरोधक क्षमताओं से लड़ने के लिए औषधी प्रदान करते हैं। 

वीना आडवानी तन्वी
नागपुर, महाराष्ट्र
८७८८३१२४१७
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[27/10, 12:27 pm] सरोज दुगड गोहाटी: * अग्नि शिखा काव्य मंच *
* भ २०२१ / बुधवार *
आयुर्वेद का हमारे जीवन में क्या प्रभाव है !
हमारी भारतीय संस्कृति में आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति का बहुत महत्व है !
जो पूर्णतः प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति है!
हमारा भोजन ही हमारी दवा है !हम भारतीय श्रतु के अनुरुप ही भोजन करते हैं जो अपनें आप में औषधी है !
हमारा खान- पान पहरावा ऋतु के अनुरूप होता था !
 ये एक वैज्ञानिक चिकित्सा पद्धति है जिसका उल्लेख आयुर्वेद के ग्रन्थों में मिलता है ! हमारे मसाले ,दालें और शाक भांजी सभी औषधिय गुणों से भरपुर है ! 
हमारे यहाँ भोजन एक विज्ञान है ! ऋत, हित ,मित, परिमित भोजन पर बल दिया जाता है ओर हर भोजन के गुण धर्म का विशद विवेचन आर्युवेद के ग्रन्थों में मिलता है ! हर जड़ी बुटी ,बनस्पति औषधिय गुणों से भर पुर है !
हमाँरी माँताए अपनें अनुभव से छोटे-छोटे इलाज खुद कर लेती जो कि कारगर होते थे ! आयुर्वेद रोग को जड़ से मिटाते है जबकि अंग्रेजी दवा रोग को दबाती है ! 
हम अंग्रेजी उपचार को एकदम नकार नहीं सकते ! गंम्भीर शल्यचिकित्सा , एक्सीडेंट में अंग्रेजी इलाज का सहारा लेना पड़ता है ! हर व्यक्ति अपनें शरीर को समझें तो कई सारी बिमारियों का इलाज आयुर्वेद से सम्भंव है ! हर बात में गोली खाना ठीक नहीं उसके साइड इफेक्ट्स भी होते हैं ! 
आज आहार ,विहार और निहार हमारी दिनचर्या बाधित है ! भोजन बनाने में कई सारी विरूद्ध चीजों का इस्तेमाल किया जाता है जो बिमारियों का प्रमुख कारण बन गया है ! 
आज हमारे खान-पान पर बाजारवाद हावी हो गया है !फुड चैन करोड़ों का व्यापार कर रही है और हम क्या खाये क्या पहनें बता रही हैं !
जब अमेरिकन लाल मूँह के बंदरों की तरह गुफाओं में रहते तब हमारे पास आयुर्वेद था ! पताँजली था ! जेट आज उड़ रहै हमारे हनुमान जी उस ज़मानें में पहाड़ लेकर उड़ गये संजीवनी बुटी लाकर लक्ष्मण को जीवित किया था ! 
हमारे यहाँ औषधिय वृक्षों की पूजा की जाती है ! तुलसी तो अमृत सम मानी जाती है और पूजी जाती है !
हमें अपने घर वापस लौटना ही होगा और शुद्ध आहार , सात्विक जीवन चर्या , आयुर्वेद को अपना कर रोग मुक्त 
भारत वापस पाना होगा ?

सरोज दुगड़ 
खारुपेटिया 
असम
🙏🙏🙏
[27/10, 12:51 pm] रवि शंकर कोलते क: कट पपबुधवार दिनांक २७/१०/२१
विधा********लेख
विषय*****
  #***आयुर्वेद का हमारे
              जीवन में
                 क्या प्रभाव है***#

     आयुर्वेद हमारी पुरानी स्वास्थ्य संबंधी शारीरिक चिकित्सा पद्धति है जो अद्भुत ,चमत्कारी, बेमिसाल बेजोड़ है ।  
इसका मूल सिद्धांत है # सर्वे भवंतु सुखिनः । सर्वे संतु निरामया: । सारे लोग सुखी और निरोगी रहें यह मुख्य उद्देश्य है । जग में और भी पद्धतियां हैं जैसे एलोपैथी ,होम्योपैथी ,यूनानी 
इत्यादि । 
        हर मनुष्य की शारीरिक रचना अलग-अलग है, हर व्यक्ति में त्रिदोष होते हैं वात पित्त कफ और 3 गुण होते हैं , सत रज तम। 
और इन्हीं त्रिगुणात्मक गुण दोष के कारण हर मनुष्य का स्वभाव, रहन-सहन खान-पान में बदलाव नजर आता है । अलग-अलग रोग भी पैदा होते हैं जिसका इलाज आयुर्वेद रोग मूल से नष्ट कर व्यक्ति को स्वस्थ करता है । मगर इस पद्धति के अनुसार बहुत से नियंत्रण/अंकूश हमारे खानपान और रहन-सहन पर आते है । इसीलिए बहुत से लोग इस पद्धति को स्वीकार नहीं करते क्योंकि खादाड़ अपनी जीव्हा पर नियंत्रण नहीं रख सकते । हमेशा उटपटांग बेवक्त खाते पीते रहते हैं । आयुर्वेद के अनुसार अगर चिकित्सा होती हैं तो वह रोग मूल से नष्ट होता है, थोड़ा समय लगता है ।
      मगर आज एलोपैथी झटपट रोग नियुक्ति करती है , आज के आधुनिक विज्ञान के जमाने में शरीर का मशीन द्वारा निरीक्षण किया जाता है और इसलिए यह पद्धति सभी पसंद करते हैं ।
          परंतु इससे आयुर्वेदिक पद्धति का महत्व कम नहीं हुआ है बल्कि अब इस आधुनिक युग में सभी लोग इसे चाहने लगे हैं ।
महर्षि चरक ने अपने आयुर्वेद में घरेलू उपाय भी बताए हैं। अनेक वन औषधियों से चिकित्सा की जाती है । आज भी बहुत सी कंपनियों तथा पतंजलि द्वारा भी आयुर्वेदिक अब बहुत प्रचलित प्रसारित हो रहा है । 
     हमारे रसोई घर में बहुत सी चीजें होती है जैसे लौंग इलाइची काली मिर्च अदरक कलमी और अजवन जो हमारी खासी कफ को दूर करते हैं । आयुर्वेद दूर्धर रोग भी नष्ट करता है जैसे सब जानते हैं हनुमान जी ने संजीवनी बूटी लाकर लक्ष्मण के प्राण बचाए थे ।
      आयुर्वेद ने (नई चिकित्सा पद्धति में) उपकरणों का उपयोग शुरू किया है ।
       मित्रों ,अंत में मैं यही कहूंगा कि आयुर्वेद ही एक ऐसी पद्धति है जो रोगों को समूल नष्ट करती है
तुरंत आराम देना इसका उद्देश्य नहीं बल्कि रोग नष्ट करना है । इसलिए दुनिया में इसका महत्व कम नहीं है और ना कभी कम होगा ।

प्रा रविशंकर कोलते
     नागपुर
[27/10, 1:01 pm] शेभारानी✔️ तिवारी इंदौर: आयुर्वेद का जीवन में महत्व

आयुर्वेद शब्द का अर्थ है, जीवन का विज्ञान। यह विज्ञान केवल रोगों की चिकित्सा या रोगों का ही ज्ञान प्रदान नहीं करता , अपितु जीवन के लिए सभी प्रकार के आवश्यक ज्ञान की प्राप्ति करता है जब सृष्टि की रचना हुई है, तभी से मनुष्य भूख, प्यास, नींद, आदि स्वभाविक इच्छाओं की को पूरा करने एवं शारीरिक व्याधियों से छुटकारा पाने के लिए प्रयत्नशील रहा है। इसी क्रम में सबसे पहले आयुर्वेद का उद्भव हुआ। आजकल हम एलोपैथी ,होम्योपैथी, नेचुरोपैथी , रेकी आदि अनेक प्रकार की चिकित्सा पद्धतियों का प्रयोग करते हैं ,परंतु आयुर्वेद पद्धति हजारों वर्षों से हमारे जीवन में रची बसी है। हम देखते हैं कि पेट दर्द या गैस होने पर अजवाइन ले लेना ,खांसी जुकाम या गला खराब होने पर अदरक ,तुलसी की चाय पीना और शहद का अदरक का रस लेना, दूध में हल्दी डालकर लेना, यह सब आयुर्वेद के अंग हैं। हम आयुर्वेदिक पद्धति को हमारे जीवन से अलग नहीं कर सकते ।इसमें स्वास्थ्य समस्या के मूल कारण का पता लगाकर उसे खत्म करने का काम किया जाता है ।यही कारण है कि भारत के अलावा आज दुनिया भर में आयुर्वेद को काफी महत्वपूर्ण स्थान दिया गया है ।गिलोय, आंवला ,तुलसी ,हल्दी ,काली मिर्च, को आयुर्वेद में अहम स्थान दिया गया है ।यह रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़ती है ,और आजकल गोलियों के रूप में भी उपलब्ध हैं ।अतः आयुर्वेद का हमारे जीवन में विशेष महत्व है।

 श्रीमती शोभा रानी तिवारी इन्दौर
[27/10, 1:21 pm] 😇ब्रीज किशोर: *अग्नि शिखा मंच*
    *२७/१०/२०२*
*लेख आयूर्वेद का हमारे* *जीवन मे क्या प्रभाव है*
आयूर्वेद हम सब के जीवन का अभिन्न जरूरत पहले कोई एलोपैथिक दवा कम इस्तेमाल होता था आयूर्वेद की दवा बैद्द लोग देते थे।चरक संहिता आयूर्वेद की
अच्छी कितब है।
दिनचर्या मे सुबह उठने से लेकर शाम सोने तक तरीका आयूर्वेद मे बताया गया है कैसे खाना है क्या खाना है
ऋतु के हिसाब से लिखा है।
आयूर्वेद मे हर रोग की दवा जडी़ बुटी से बनती है जीसका कोई रियेक्सन नहीं होता है।
 हर मनुष्य कैसे स्वस्थ रह सकता है हर उमर की हिसाब क्या खाया जाँय क्या न खाया जाँय।
 चरक ऋषि ने आँवला से च्यवनप्राश बनाया जो ठंडक 
 का टानिक है।पेट के मरीज के लिए त्रिफला जिसमे हर्रा बहेर्रा आँवला तीन फल रहते है पहले के लोग यह सब जरूरत के अनुसार दवा के रुप लेते है।
 सूर्य उगने के पहले उठना और आठ बजे रात तक सोना आयूर्वेद मे निर्देश है रात मे मूली दही खाना मना है।आयूर्वेद आरोग्य का खजाना है। स्वस्थ जीवन जीने के लिए बच्चे बुढे़ जवान सबके लिए आयूर्वेद कारगर है।
  *स्वरचित*
  *बृजकिशोरी त्रिपाठी उर्फ* 
  *भानुजा गोरखपुर*
[27/10, 1:23 pm] डा. बैजेन्द्र नारायण द्िवेदी शैलेश🌲🌲 - वाराणसी - साझा: स्वच्छ रहे तन स्वच्छ रहे मन स्वच्छ रहेगा जीवन।
स्वास्थ्य सदा होगा अच्छा तो लगेगा दिन भी कंचन।।
अच्छा है हम सब प्रयास कर शुद्ध रखें परिवेश
शुद्ध रहेगा वातावरण जब स्वस्थ रहेगा देश
स्वच्छता देश में लाना है
 हमें यह देश बचाना है।।
पीएम सीएम डीएम नेता सब देते संदेश चलो लगाएं वृक्ष रखे हम गांव शहर और देश
। बूढ़े नौजवान शब्द मिलकर करेंगे काम आगे बढ़ेगा देश हमारा होगा सबका नाम।
देश का नाम बढ़ाना है
 देश को हमें बचाना है।।
विद्यालय हो घर हो या हो अपना बाजार
कहीं नहीं रखना है गंदगी आसपास अंबार।।
कूड़े से ही आती मक्खी मच्छर फैलता डेंगू
पिछले साल बीमारी से ही मर गया गांव का बेचू
बीमारी दूर भगाना है 
हमें यह देश बचाना है।।
प्रधानमंत्री बार-बार 
देते हैं यह संदेश
प्यारे भाइयों आसपास का स्वस्थ रखो परिवेश
वृक्ष लगाओ शुद्ध हवा में
ऑक्सीजन को पाओ
अपनी खेती अपना जीवन मेहनत करके बचाओ
देश की प्रगति कराना है
 हमें यह देश बचाना है।।
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डॉ ब्रजेन्द्र नारायण द्विवेदी शैलेश वाराणसी
[27/10, 1:57 pm] रजनी अग्रवाल जोधपुर: शीर्षक-"आयुर्वेद का हमारे जीवन में क्या प्रभाव है"

आयुर्वेद का हमारे जीवन में बहुत महत्वपूर्ण स्थान है ।यह जीवन को ठीक प्रकार से जीने की कला और विज्ञान है। क्योंकि यह विज्ञान सिर्फ रोगों की चिकित्सा और ज्ञान ही नहीं देता वरण जीवन जीने के लिए आवश्यकता की वस्तुओं का ज्ञान भी प्राप्त करवाता है। यह 5000 साल पुरानी चिकित्सा पद्धति है ।जो हमारी आधुनिक जीवन शैली को भी पूर्णतया ठीक करती है। यह लंबे समय तक सुखी और आरोग्य जीवन जीने की ओर स्वस्थ जीवन जीने में बने रहने में सहायक होती है। इस प्रकार हमारे जीवन में आयुर्वेद का गहन प्रभाव पड़ता है।

स्वरचित लेख 
  रजनी अग्रवाल
    जोधपुर
[27/10, 2:38 pm] कुम कुम वेद सेन: विषय आयुर्वेद का हमारे जीवन में क्या महत्व है

प्राचीन पद्धति आयुर्वेद है मनु स्मृति इस बात का प्रमाण है कि आयुर्वेद ऋषि मुनि के अन्वेषण का एक ऐसा विद्या है ऐसी औषधि है जो मानव शरीर के विकार को प्राकृतिक वन संपदा के माध्यम से स्वस्थ कर देती है सभ्यता के विकास के साथ साथ आयुर्वेद की दूसरी विद्या होम्योपैथ और एलोपैथ का विकास हुआ और हमारी प्राचीन पद्धति धीरे धीरे धूमिल पड़ती गए फिर भी ऐसा मानना है कि प्राकृतिक संपदा से की गई उपचार शरीर को नीरोग स्वस्थ बना देती है
मानव व्यक्तित्व पित्त कफ वात 3 का मिश्रण है शरीर में यदि किसी रोग की उत्पत्ति होती है उसका मुख्य कारण होता है शरीर में जो हार्मोन संतुलित निकलने चाहिए वह असंतुलित हो जाते हैं असंतुलित हार्मोन का कारण कफ पित्त बात और थॉट प्रोसेस है।
संजीवनी बूटी हमारे आसपास मौजूद है मैं एक अनुभवी घटना की चर्चा कर रही हूं। जौंडिस रोग जिसे पीलिया कहते हैं पूरा शरीर बिल्कुल पीला हो जाता है लीवर का फंक्शन बहुत ही खराब हो जाता है भूख नहीं लगती है और एलोपैथिक में इसकी कोई चिकित्सा नहीं है सिवाय ग्लूकोज पानी देते रहिए विटामिन बी कंपलेक्स खाइए और बेड रेस्ट में रखिए।
ऐसे ही एक रोगी हमारे परिवार में रहे डॉक्टर के अनुसार बिलीरुबिन बहुत ज्यादा है भगवान भरोसे हैं बात है बहुत पुरानी लेकिन अनुभवी है और भूमि आंवला का पता तथा जड़ को पीसकर गोली बनाकर 7 से 5 दिन दिन भर में तीन बार देती रही और पांचवें दिन पूरे शरीर का रंग धीरे-धीरे बदलने लगा डॉक्टर खुद इस बात पर आश्चर्य में चले गए इतना ज्यादा बढ़ा हुआ बिलीरुबिन 5 दिन में कैसे कम हो गया यह है आयुर्वेद का कमाल।
उसके बाद मैंने भूमि आंवला की खेती करनी शुरू की और लगभग अनेकों पर रोगियों की वह पत्ता और जड़ उपलब्ध कराती रही बहुत लोग उससे लाभान्वित भी हुए।

हर घर के किचन में इतने मसाले हैं जिन का सही उपयोग नियम पूर्वक किया जाए तो प्रतिरोधक क्षमता निश्चित ही बढ़ जाती है कुछ तो विश्वास का कमाल है और कुछ ज्ञान का। ज्ञान और विश्वास जब एक साथ किसी भी विषय पर कार्य करते हैं तो परिणाम हमेशा सकारात्मक मिलता है
मैं इसी प्रकार का एक दूसरा उदाहरण प्रस्तुत कर रही हूं पटना शहर में एक आयुर्वेदाचार्य हुआ करते थे जिनकी औषधि रामबाण थी और एक ऐसे रोगी जो ब्लड कैंसर से पीड़ित थे उनकी चिकित्सा उनके द्वारा की गई और उन्होंने शर्तिया इलाज दी थी कि आप अपनी मर्जी बताइए कितनी आयु तक आप जीना चाहते हैं उन्होंने कहा मैं 80 वर्ष तक देना चाहता हूं या आप एकदम 80 वर्ष तक जीवित रहेंगे और नियम पूर्वक उनकी दवा खाते रहे कभी भी हिमोग्लोबिन डाउन नहीं हुआ प्लेटलेट्स कम होता था लेकिन फिर दवा से सु
तुंरत बढ़ जाता था। एक अनहोनी कमाल था इस प्रकार हम समझते हैं कि मानव जीवन मैं आयुर्वेद का बहुत महत्व है हर इंसान का झुकाव उस ओर होना चाहिए वर्तमान समय में बाबा रामदेव ने इस विषय पर बहुत अच्छा कार्य किया है और आयुर्वेद का प्रचार और प्रसार बहुत सही तरीके से राष्ट्रीय स्तर पर अंतरराष्ट्रीय स्तर पर की गई है जिसका परिणाम भी लोगों को मिलता जा रहा है आयुर्वेद का हर छोटे से छोटे बीमारी और बड़े से बड़े बीमारी में इलाज किया जा सकता है थोड़ा समय अवश्य लगता है पर चिकित्सा सफलीभूत होता है।
जीवन शैली रहन सहन आचार विचार तीन स्तंभ है मानव जीवन के ।इन तीनों को सुचारू रूप से चलाने के लिए आयुर्वेद के शरण में अवश्य जाना चाहिए आयुर्वेद का मानव के जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है।
कुमकुम वेद सेन
[27/10, 2:44 pm] ♦️तारा प्रजापति - जोधपुर: अग्निशिखा मंच 
27/10/21 बुधवार
विषय-हमारे जीवन में आयुर्वेद चिकित्सा का महत्व

      आयुर्वेद पुरातन भारतीय प्राकृतिक चिकित्सा पद्धति है।आयर्वेद का शाब्दिक अर्थ जीवन का विज्ञान है। आयुर्वेद चिकित्सा द्वारा किसी भी रोग को कुछ समय के लिए दबाया नहीं जाता।अपितु रोग को समूल नष्ट कर दिया जाता है।पुरातन काल से भारतीय चिकित्सा प्रणाली का,चिकित्सा जगत में महत्वपूर्ण योगदान रहा है।प्रकति के हिसाब से मानव शरीर पांच तत्वों से निर्मित है।
भूमि,गगन,वायु,अग्नि और आकाश।
इन पांच तत्वों के उतार-चढ़ाव से शरीर रोग ग्रसित हो जाता है।
आयुर्वेदिक चिकित्सा, वात दोष-जिसमें वायु और आकाश तत्वों की प्रधानता होती है।पित्त दोष- जिसमें अग्नि तत्व की प्रधानता होती है।कफ दोष-जिसमें पृथ्वी और जल तत्वों की प्रधानता होती है।इन दोषों का प्रभाव मनुष्य की शारीरिक सरंचना के साथ -साथ उसकी मानसकि स्थिति पर भी पड़ता है।
    भारत में आयर्वेद का ज्ञान गुरु-शिष्य की परम्परा के अंतर्गत ऋषि मुनियों द्वारा मौखिक रूप से दी जाती थी।चरक संहिता,सुश्रुत संहिता और अष्टांग ह्रदय के पुरातन ग्रन्थ हैं।इन ग्रन्थों में प्रकति में व्याप्त पंच महाभूतों-पृथ्वी,जल,वायु,अग्नि व आकाश तत्वों के मनुष्यों के ऊपर पड़ने वाले प्रभावों तथा स्वस्थ एवं सुखी जीवन के लिए संतुलन बनाये रखने में अपनी मुख्य भूमिका निभाता है। आज की जीवन शैली में मनुष्य के स्वास्थ्य के लिए आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति अत्यंत महत्वपूर्ण हैं।चिकित्सा क्षेत्र में आयुर्वेद चिकित्सा प्रणाली सुरक्षित व कारगर सिद्ध हो रही है।
                            तारा "प्रीत"
                        जोधपुर (राज०)
[27/10, 4:46 pm] ओम 👅प्रकाश पाण्डेय -: आयुर्वेद का हमारे जीवन में प्रभाव ---- ओमप्रकाश पाण्डेय
अनादि काल से आयुर्वेद से ही हमारे देश में लोगों की चिकित्सा होती थी और लोग स्वस्थ होते थे. लेकिन बाद में विदेशी आक्रमणकारियों के आने के बाद यूनानी व अंग्रेजों के राज्य में एलोपैथी अथवा आधुनिक चिकित्सा व्यवस्था देश में फैल गयी और आज आयुर्वेद का प्रभाव नगण्य हो गया है.
लेकिन आयुर्वेद एक पूरी तरह से वैज्ञानिक चिकित्सा व्यवस्था है और यह जीवन के सम्पूर्णता में विश्वास रखती है. यद्यपि आज जंगल कट जाने के कारण और पूरे देश में शहरीकरण हो जाने से उपयुक्त जड़ी-बूटी सहज उपलब्ध नहीं है, लेकिन बाबा रामदेव जैसे अनेक लोगों ने फिर से आयुर्वेद के चिकित्सा व्यवस्था को पुनः स्थापित करने के लिए बड़े जोर से प्रयास शुरू कर दिया है और हमें विश्वास है कि आयुर्वेद पुनः अपने खोये हुए गौरव को प्राप्त करने में सफल होगा.
आयुर्वेद के दवाईयों का कोई बिपरित परिणाम (साइड इफेक्ट्स) नहीं होता और यह बहुत ही सस्ती चिकित्सा व्यवस्था है. आवश्यकता है कि सरकार इसके विकास के लिए आवश्यक कदम उठाये और शोध को बढ़ावा दे. 
( यह मेरी मौलिक रचना है ---- ओमप्रकाश पाण्डेय)
[27/10, 4:53 pm] 💃वंदना: हमारे जीवन में आयुर्वेद चिकित्सा का महत्व

स्वस्थ्य स्वास्थ्य रक्षणं,आतुरस्य सविकार प्रशमनं
स्वस्थ के स्वास्थ की रक्षा,आयुर्वेद का प्रथम प्रायोजन है।
आयुर्वेद चिकित्सा समस्त रोगों को जड़ मूल से नाश करती है ना कि कुछ समय के लिए रोग को दबाना एलोपैथिक दवाई कुछ समय के लिए कारगर रहती हैं तुरंत असर भी होता है किंतु कुछ समय के लिए आयुर्वेद चिकित्सा समय तो लेती है वह पूर्ण रूप से स्वस्थ कर देती है दोबारा समस्या नहीं झेलना पड़ती। जैसा कि मानव शरीर पंच तत्वों से बना हुआ है उसी प्रकार पंच तत्वों का तालमेल भी आपस में बिठाना पड़ता है जरा से ताजा उतार-चढ़ाव से तालमेल बिगड़ जाता है और तत्वों के दोष उभर आते हैं। व्यक्ति वात पित्त कफ दोष से ग्रसित हो जाता है अतः आचार विचार बिगड़ जाते हैं। इसीलिए कहा जाता है सदाचार पर ध्यान दिया जाए स्वास्थ्यप्रद सात्विक भोजन ले
ईश्वर में आस्था बनाए रखें औषधि युक्त पौधे अपने घर में भी लगाए रखें इससे बीमारी ही नहीं अपितु वातावरण छुट्टी भी मिलती है। आतः कई पौधे हमारी आस्था के प्रतीक भी होते हैं आयुर्वेद हमारे जीवन में चिकित्सा ही नहीं बल्कि हमारी आस्था से भी जुड़ा हुआ है।

वंदना शर्मा बिंदु देवास मध्य प्रदेश
[27/10, 4:53 pm] +91 70708 00416: मंच को नमन 🙏
विधा #आलेख
विषय# आयुर्वेद का हमारे जीवन में क्या प्रभाव है..?

     आयुर्वेद विश्व की सबसे प्राचीनतम चिकित्सा पद्धति है जो अनादि एवं शाश्वत है। आयुर्वेद शब्द का अर्थ है जीवन कि विज्ञान। आम भाषा में कहें तो जीवन को ठीक प्रकार से 'जीने का विज्ञान' ही आयुर्वेद है, क्योंकि यह विज्ञान केवल रोगों की चिकित्सा का ही ज्ञान प्रदान नहीं करता, अपितु जीवन जीने के लिए भी सभी प्रकार के आवश्यक ज्ञान को प्राप्ति कराता है। आयुर्वेद का प्रयोजन है स्वस्थ व्यक्ति के स्वास्थ्य का संरक्षण करना।
      बहुत सीमित अर्थ में ही हम इसे एक चिकित्सा प्रणाली भी कह सकते हैं, क्योंकि यह स्वास्थ्य -रक्षा और रोग निवारण, दोनों के लिए व्यवस्थित और क्रमबद्ध ज्ञान भी प्रस्तुत करता है।
        हम अपने दैनिक जीवन में देखते-सुनते हैं किसी को पेट दर्द होने पर या गैस होने पर अजवाइन, हींग आदि लेने को कहा जाता है ठण्डा पानी न पियें, अदरक तुलसी की चाय, तुलसी एवं काली मिर्च या शहद और अदरक का रस या दूध व हल्दी ले लें आदि। इस प्रकार के सभी निर्देश आयुर्वेद के ही अंग हैं।इस प्रकार हम अपने बुजुर्गों से पीढ़ी दर पीढ़ी घर में मौजूद पदार्थों के औषधीय गुणों के विषय में सीखते चले आ रहे हैं। हम अपने घर के आंगन अथवा रसोई घर से ही ऐसे अनेक पदार्थ मिल जाते हैं जिन्हें हम औषधि के रूप में प्रयुक्त कर सकते हैं। इस प्रकार हम इस आयुर्वेदीय पद्धति को अपने जीवन से अलग कर ही नहीं सकते। 
    अंत: शाश्वत, सार्वभौम एवं सर्व जनीन है। इनमें ", सर्वे भवन्तु सुखिन:, सर्वे सन्तु निरामया" अर्थात सभी सुखी हों और सभु निरोग हों का भाव निहित है। निष्कर्ष के रूप में आयुर्वेद एक चिकित्सा- पद्धति होने के साथ-साथ एक सम्पूर्ण जीवन पद्धति व साधना -पद्धति है।
  
डॉ मीना कुमारी परिहार
[27/10, 5:02 pm] वीना अचतानी 🧑🏿‍🦽: वीना अचतानी, 
विषय**हमारे जीवन में आयुर्वेद का महत्व ****
आयुर्वेद एक वैकल्पिक चिकित्सा प्रणाली है , जिसकी जड़ें भारतीय उपमहाद्वीप में है। आयुर्वेद विश्व की सबसे प्राचीन तम चिकित्सा पद्धति है।यह जीवन जीने का एसा तरीका सिखाता है,जिससे जीवन लम्बा और खुशहाल बने।आयुर्वेद को जीवन का विज्ञान भी कहा जाता है ।जिसमे मानव शरीर को होने वाले रोग और रोग मुक्त करने की सारी विधियों का वर्णन है । आयुर्वेद रोग को जड़ से खत्म करता है।यह रोगों कोसही करता है ,और रोगों को आने से भी रोकता है।
              आयुर्वेद की दवाइयां अधिकतर पौधे, फूलों , फलों और जड़ी बूटियों के घटक से बनाई जाती हैं । आयुर्वेद हमारी आधुनिक जीवनशैली और स्वस्थ उन्मुक्त आदतों को प्राकृतिक पदार्थों दवाओं और जड़ी बूटियों के उपयोग के प्राचीन ज्ञान के साथ मिलाता है, ताकि हमें स्वस्थ सुखी तनावमुक्त और रोग मुक्त जीवन में मदद मिले।इसका उद्देश्य मन शरीर और आत्मा के बीच सन्तुलन को बनाए रखना है।
वीना अचतानी 
जोधपुर ।।।।
[27/10, 5:33 pm] निहारिका 🍇झा: नमन मंच 
 विषय;-आयुर्वेदचिकित्सा का हमारे जीवन पर प्रभाव।
दिनाँक:-27/10/2021
सनातन काल से हमारी संस्कृति प्रकृति की छांव में ही पल्लवित होती रही है।इन वन कानन से ही अनेक रोगों का शमन होता रहा है।हमारे वेदों में भी इसका वॄहद वर्णन किया गया है।। आचार्य ऋषि "चरक'' आयुर्वेद के जनक माने गए हैं।चरक संहिता में अनेक दिव्य आयुर्वेद औषधियों का वर्णन है जिनका प्रयोग आज भी प्रासंगिक है।।
हमारी रसोई स्वयं एक औषधालय से कम नहीं है इसमें मौजूद समस्त मसालेअनेक औषधीय गुण युक्त हैं जो अनेक गम्भीर रोगों के निदान में भी कारगर सिद्ध हुए हैं इसे विश्व के वैज्ञानिकों ने भी प्रामाणिक माना है।कोरोना काल मे इसका हम सभी ने घर बंद की स्थिति में इसका प्रत्यक्ष अनुभव किया है।।
आयुर्वेद औषधियों की यह विशेषता है कि यह रोग का निदान करतीं हैं बिना किसी दुष्प्रभाव के।सम्भवतः इसी कारण अब मानव समाज एलोपैथी को त्याग कर आयुर्वेद की ओर अग्रसर हो रहा है।।
निहारिका झा
खैरागढ राज.(36 गढ़)
[27/10, 5:43 pm] अंजली👏 तिवारी - जगदलपुर: विघा -लेख
आयुर्वेदिक का हमारे जीवन में क्या लाभ है 
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आयुर्वेदिक का हमारे जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है ।
महत्त्व है हर बिमारी दूर करने 
शारिरिक तकलीफ दूर करने के लिए आयुर्वेदिक तरीका ही सही‌है
जो हमारे पूर्वजों चलाते‌ आ रहे हैं 
जब ऐलोपेथिक और अंग्रेजी दवाइयां नहीं आई थी ।तब वैद्यों के द्वारा आयुर्वेद चिकित्सा पद्धति से ही उपचार किया जाता है
आज भी आयुर्वेद चिकित्सा महत्वपूर्ण भूमिका निभा रहा‌ है
सबसे अच्छी आयुर्वेदिक दवाओं से इलाज जो शरीर को नुक्सान नहीं पहुंचाता।
जो ख़ासकर जड़ी बूटियों से द्वारे बनी होती‌ है। बिना डरे व्यक्ति आसानी से खा लेता‌ है।
शरीर पर कोई साइड डिफेक्ट भी नहीं होता है।
शरीर को फायदा भी‌ करती है
विशैले चीजो और पुरानी बिमारी को ठीक कर देती करती है
जो अंग्रेजी दवा कभी कभी ग़लत साबित ‌होती‌ है और जल्दी ठीक होने के चक्कर ‌मे जान भी चली जाती है ।
इसलिए आयुर्वेद चिकित्सा का हमारे जीवन में महत्वपूर्ण स्थान है
अंजली तिवारी मिश्रा जगदलपुर छत्तीसगढ़
[27/10, 6:28 pm] 💃💃sunitaअग्रवाल: विषय_आयुर्वेद का महत्व

    जैसा की नाम से विदित है , आयु बड़ाने का ज्ञान, आयुर्वेद अमृत है, प्राचीन चिकित्सा पद्धति है, हमारे ऋषि मुनियों द्वारा अन्वेषित पांच हजार साल पुरानी
अति सर्वश्रेष्ठ चिकित्सा प्रणाली है । इस विधा मै भी कई आधुनिक साधनों का प्रयोग चिकित्सक कर रहें है , विदेशों में भी मुंहमांगी कीमत पर विदेशी इलाज करवा रहें हैं , इसका लाभ लेने विदेशी भारत आते हैं। इस विधि से ईलाज कराने से कोई दुष्परिणाम देखने मै नही आया है।
त्रिदोष वात , पित्त, कफ गलत खान पीन ,अनियमित दिनचर्या की वजह सर से हर किसी को कुछ न कुछ बीमारी आती जाती रहती हैं यह प्रणाली जड़ से रोग को खत्म कर देती हैं।
   बचपन में सर्दी खांसीबुखार हो जाने पर वैद्य जी नाड़ी देखकर पुड़िया देते थे ," कहते दिनभर मैं तीन बार शहद के साथ ये पुड़िया लेना है । पुड़िया जादू का सा असर करती दो तीन दिन में ही स्वास्थ लाभ मिल जाता ।
   अब लोगों का रुझान आर्युवेद की बढ़ गया है।
    हमारी भारत भूमि देव भूमि है राम और कृष्ण की जन्म भूमि है प्रभु का असीम आशिर्वाद हमारी धरती को प्राप्त है हिमाचल के उत्तराखंड के वनों में अत्यन्त दुर्लभ जड़ी बूटियों का खजाना मौजूद हैं , जानकर , ज्ञानी चिकित्सक घोड़ों पर बैठकर जाते है , कई कई दिनों की तलाश ने के बाद जड़ी बूटी ढूंढ कर लाते हैं।
    आज भी कई परिवारों में *दादी माँ का खजाना* है बडे़ बूढ़े रसोई में मौजूद_हल्दी हींग मेंथीदाना लौंग ,दालचीनी, अथाह वस्तुएं है , सर्दी खांसी, बुखार , जोड़ों का दर्द , माइग्रेन, और भी अन्य बीमारी मैं दादी माँ 
खजाना खुल जाता है। यह चिकित्सा विधि अति विशिष्ट है ।


सुनीता अग्रवाल इंदौर मध्यप्रदेश स्वरचित धन्यवाद जी 🙏
[27/10, 6:29 pm] रानी अग्रवाल: आयुर्वेद।
२७_१०_२०२१,बुधवार।
विधा_ लेख।
विषय_ आयुर्वेद का हमारे जीवन में प्रभाव_____
     हमारा देश भारत एक प्राचीन देश है। इसके इतिहास के ५०००वर्षों पुराने साक्ष्य हैं। उस समय ऐलोपैथिक, होमियोपैथिक जैसी कोई दवाइयां नहीं थीं।लोगों को आयुर्वेद का ज्ञान था जिससे उनका स्वास्थ्य अच्छा रहता था। 
     आयुर्वेद दो शब्दों से बना है आयुर यानि लंबी आयु और वेद यानि विज्ञान अर्थात लंबी आयु जीने का विज्ञान।यह एक चिकित्सा पद्धति है जिससे हमारा स्वास्थ्य अच्छा रहता है।यह मुख्यतः जड़ी_बूटियों के औषधीय गुणों को पहचानकर उपचार करती है।इसका प्रखर ज्वलंत उदाहरण रामायण काल में मिलता है जब श्री लक्ष्मण जी को शक्ति बाण लगता है,हनुमानजी संजीवनी बूटी लेकर आते है और उससे लक्ष्मण जी को पुनर्जीवन प्राप्त होता है।
     यह शरीर के तीन प्रकार के दोषों पर केंद्रित है। वे दोष हैं_ कफ, पित्त,वायु।इसका मानना है कि यदि ये तीन सही अनुपात में हों तो हम स्वस्थ और यदि इनका अनुपात बिगड़ा तो बीमार।
     हमारी रसोई भी आयुर्वेदिक भंडार है।तरह_तरह के मसाले,अन्य वस्तुएं औषधीय गुणों से भरी हैं जैसे_हल्दी,हींग,दालचीनी,इलायची, लौंग, गुड़ आदि।
     सामान्य जनों की जानकारी में तुलसी का पौधा अत्यंत गुणकारी है।यह चौबीसों घंटे प्राणवायु देता है,इसके पत्ते,रस अनेक रोगों पर गुणकारी है ,इसलिए आप घर में इसे जरूर रखें।
     यह प्रणाली ऋषि चरक,सुश्रुत आदि से लेकर आज के बाबा रामदेव तक चली आ रही है।यह हमारे देश की अपनी देसी चिकित्सा प्रणाली है हमें इसे अपनाना चाहिए व इसका सम्मान करना चाहिए।
धन्यवाद।
स्वरचित मौलिक लेख______
रानी अग्रवाल,मुंबई,२७.१०.२१.
[27/10, 6:30 pm] हेमा जैन 👩: विषय -आयुर्वेद का हमारे जीवन में महत्व

सेहत हमारा खजाना है आज इस आधुनिक युग में महामारियां घर करती जा रही है आए दिन नई -नई बीमारियां पनप रही है और और इनके लिए कई नए- नए इलाज आते जा रहे हैं जैसे कि एलोपैथी, होम्योपैथी,अंग्रेजी दवाइयां किंतु इन सब में से ज्यादा कारगर होता है आयुर्वेदिक इलाज क्योंकि आयुर्वेदिक इलाज जड़ से समस्या को खत्म कर देता है और इस आयुर्वेदिक इलाज के कुछ साइड इफेक्ट भी नहीं होते हैं यह कोई नुकसान देह नहीं होती है और यह काफी सालों से परंपरागत पुराना हमारे पूर्वजों से चला आ इलाज की एक पद्धति है तो यह काफी अनुभवी इलाज है और काफी कारगर इलाज है इसलिए आयुर्वेद का हमारे जीवन में बहुत महत्व है

हेमा जैन (स्वरचित )
[27/10, 6:51 pm] पुष्पा गुप्ता / मुजफ्फरपुर: 🌹🙏अग्नि शिखा मंच 🙏🌹
विषय:हमारे जीवन मे आयुर्वेद का महत्व 
विधा: लेख 
दिनांक: 27/10/21
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     आयुर्वेद चिकित्सा प्रणाली भारत की
अनुपम देन है, अभी से करीब 5000 वर्ष पहले से ,,,यह चिकित्सा पद्धति कार्य कर रही है, शरीर के साथ उत्तम स्वास्थ्य का होना ,अति आवश्यक है ।
      आयुर्वेद चिकित्सा औषधीय गुणों से भरपूर होती है,,,पर्यावरण और जंगल
इसके मुख्य संसाधन हैं,,,,इसलिए इसका
समुचित रख रखाव और सुरक्षा की पूरी 
जिम्मेदारी हम सबकी है ।
     युगों पहले की बात भला कौन भूल सकता है ,,जब लक्षमण को शक्ति बाण लगा था,,, तब संजीवनी बूटी का पर्वत लाकर हनुमान ने वैद्यराज को सौंपा था,
और इस औषधीय गुणों के रामवाण
चिकित्सा से लक्षमण का प्राण लौट आया था,,,,,।
    ऐसी ताकत है औषधीय गुणों/ चिकित्सा पद्धति की,,,,,
  इसके लिए एक सूत्र वाक्य प्रचलित है---
" :सर्वे भवंतु सुखिन: सर्वे संतु निरामया
सर्वे भद्राणि पश्चंति,मा कश्चित् दुख भाग्भवेत"
भारतीय गुणों से भरपूर यह चिकित्सा पद्धति कार्य कर रही है,,,,अब विश्व में सभी इसका लोहा मान रहे हैं,,,,,,,
🌹🙏
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स्वरचित एवं मौलिक आलेख 
डाॅ पुष्पा गुप्ता
 मुजफ्फरपुर
 बिहार 
🌹🙏
[27/10, 6:55 pm] डा. अंजूल कंसल इन्दौर: अग्निशिखा मंच 
विषय- आयुर्वेद का हमारे जीवन में प्रभाव 

आयुर्वेद में मौसम के अनुकूल रोगों का उपचार किया जाता है ।ऋतु-त्यौहार पर फल मिष्ठान भोजन के फायदे के बारे में जानकर,आप भी आश्चर्यचकित रह जाएंगे।शरद और बसंत ऋतु में मौसमी बीमारियां अधिक होती हैं।
    हमारे देश में छः ऋतुयेँ होती हैं। ऋतु संधि काल नवरात्रि पर्व दीपावली होली साथ-साथ आते हैं। होली के पश्चात चैत्र नवरात्रि एवं दीपावली से पूर्व शारदीय नवरात्रि का वर्णन मिलता है।
 नवरात्रि के इन 9 दिनों में कफजन एवं पित्तजन व्याधियों से बचने के लिए उपवास गरबा नृत्य किए जाते हैं। ताकि रितु कालीन बीमारियों से बचे रहें। इन दिनों में धूप दीप हवन किया जाता है। उनमें गूलर पीपल पलाश दूर्वा नागर मोथा कपूर जटामासी, चंदन को घृत में मिलाकर हवन करने से वातावरण शुद्ध होता है। उनसे सूक्ष्म कीटाणु भी नष्ट होते हैं।
 आयुर्वेद में रितु अनुसार आहार-विहार से स्वस्थ रहा जा सकता है।
 सर्दी जुखाम में एक दो ग्राम सोंठ मिलाकर गर्म मीठी-मिश्री मिला दूध लें।
 बुखार आने पर कुटकी चिरायता और खांसी में मुनक्का और मिश्री को मुंह में रखकर चूसने से खांसी में आराम मिलता है।आयुर्वेद का हमारे जीवन में विशेष महत्व है।

 डॉक्टर अंजुल कंसल "कनुप्रिया"
27-10-21
[27/10, 7:05 pm] आशा 🏆🏆जाकड इन्दौर: मनुष्य के जीवन में आयुर्वेद का बड़ा ही महत्व पूर्ण स्थान है। यह तो हम सभी जानते हैं की स्वास्थ्य ही हमारा सबसे बड़ा धन है अगर शरीर स्वस्थ है तो हमारे पास सबसे बड़ी पूंजी है और स्वस्थ शरीर में ही स्वस्थ मस्तिष्क रहता है। तन मन अगर हमारे स्वस्थ होते हैं तो हमारे मन में अच्छे विचार आते हैं ,अच्छा बोलते हैं , अच्छा सोचते हैं और अच्छे ही काम करते हैं इसलिए स्वस्थ शरीर बहुत अधिक आवश्यक है। प्राचीन समय से ही हमारे देश में आयुर्वेदिक इलाज इलाज होता रहा है कुछ आयुर्वेदिक दवाइयां तो हम लोग प्रायः पुराने समय से घर में इस्तेमाल करते थे ।आजकल सभी लोग एलोपैथिक दवाइयों का इस्तेमाल करने लगे क्यों की एलोपैथिक दवाइयां जल्दी से अपना असर दिखाती है और बीमारी को रोकने में कामयाब हो जाती है लेकिन वह बीमारी को जड़ से नहीं मिटाती हैं और उनका साइड इफेक्ट भी हो जाता हैं जबकि आयुर्वेदिक दवाइयां देर से असर करती हैं लेकिन बीमारी को जड़ से मिटा देती हैं और उनका कोई साइड इफेक्ट भी नहीं होता है अक्सर हम लोग पहले आयुर्वेदिक दवाइयों का घर में इस्तेमाल करते थे पेट दर्द होने पर मीठा सोडा नींबू और थोड़ा सा नमक पानी में मिलाकर पीने से पेट का दर्द ठीक हो जाता है बुखार आने पर काढ़ा पीना , पानी में बताशा काली मिर्ची लॉन्ग को उबालकर पीने से बुखार तुरंत ठीक हो जाता था।घर के बुजुर्ग लोग प्राय,: ऐसी दवाओं का इस्तेमाल करते थे जिससे बुखार और सर्दी जुकाम भी ठीक हो जाता था।
आंवला का इस्तेमाल करना बहुत फायदेमंद होता है । रात को पानी में आंवले की तीन चार कली डाल देते है. फिर उसी पानी से सुबह आंखों को धोते हैं । आंवले से आंखें धोने से आंखों की रोशनी तेज हो जाती. है और बाल बढ़ाने के लिए प्रायः महिलाएँ आंवले को पीसकर सिर में लगाती हैं ।आंवले का मुरब्बा पेट के लिए बड़ा फायदेमंद होता है ।छोटी-छोटी बीमारियाँ पहले लोग घर में ही ठीक कर लेते थे । आयुर्वेदिक दवाइयों के जनक आचार्य सुश्रुत जी माने जाते हैं। वे चीर फाड़ भी आयुर्वेदिक तरीके से ही करते थे। कोरोना संकट आने पर पुनः आयुर्वेदिक दवाइयों का प्रयोग होने लगा है यह बहुत हर्ष की बात है और बाबा रामदेव आयुर्वेदिक दवाइयों का सुबह इंडिया टीवी पर सभी बीमारियों के लिए आयुर्वेदिक दवाइयां बताते हैं। जय बाबा रामदेव की आयुर्वेदिक 
दवाएं।

आशा जाकड़
[27/10, 7:18 pm] सुरेन्द्र हरडे: अग्निशिखा मंच को नमन
विधा :- लेख
*आयुर्वेदिक का हमारे जीवन में महत्व*
     भारतीय जीवन में आयुर्वेदिक का महत्व प्राचीन काल से महत्वपूर्ण माना गया है भारत में अनेक ऋषि मुनि वनस्पतियों का संशोधन करके अनेक औषधियों का निर्माण किया है आयुर्वेदिक जो काम बीमारी को पूरी तरह से नष्ट करता है शरीरिक व्याधी मुलता नष्ट करने की ताकत आयुर्वेद में है भारत में चरक संहिता चरक ऋषि मुनि ने आयुर्वेदिक में बहुत महत्वपूर्ण स्थान मनाया है। अनेक औषधीय ऐसी है जो एलोपैथिक होने से उसका विपरीत परिणाम हो जाता है लेकिन आयुर्वेद में दवाई में कोई विपरीत परिणाम नहीं होता ताकत बढ़ाने का च्यावनप्राश बहुत महत्वपूर्ण है।
     आज भारत में आयुष मंत्रालय जोकि आयुर्वेदिक संबंधित यूनानी चिकित्सा पद्धति रोग निवारण हो जाता है एक इसका सबसे बड़ा प्राचीन उदाहरण नालंदा तक्षशिला विश्वविद्यालय में चिकित्सा पद्धति के लिए आयुर्वेद का ही सहारा लिया जाता है चाणक्य यह बात कबूल की है काढा से रोग निवारण हो जाता है बैद्यनाथ आयुर्वेदिक औषध निर्माण करता है बुद्धिमता के लिए महिलाओं के लिए टॉनिक निर्माण करते हैं दंत मंजन हो लाल मंजन बड़ा महत्वपूर्ण है अंग्रेजी दवा गलत साबित होती है कभी-कभी इसके साइड इफेक्ट भी दिखाई देते हैं लेकिन आयुर्वेद चिकित्सा कोई साइड इफेक्ट नहीं होने की वजह से हमारे जीवन में आज भी महत्वपूर्ण स्थान बना है।

सुरेंद्र हरड़े
नागपुर
दिनांक २७/१०/२०२१/
[27/10, 10:28 pm] चंदा 👏डांगी: $$ आयुर्वेद का हमारे जीवन मे महत्व $$

आयुर्वेद जिसे हमारे वैद्य मुनियों ने कठिन तपस्या और मेहनत के द्वारा हमारे अच्छे स्वास्थ्य के लिये कुछ विशेष प्रकार की जड़ी बुटियों से नुस्खे तैयार किये गये है इसे हम देशी नुस्खे भी कह सकते है और दादीमा का खजाना भी । हजारों वर्षो से निरोगी रहने के लिए इन्ही का उपयोग किया जाता रहा है और आगे भी किया जाता रहेगा इनकी उपयोगिता हमेशा रहेगी ।जिसे कोई नकार नही सकता है ।
चन्दा डांगी रेकी ग्रैंडमास्टर 
रामटेकरी मंदसौर मध्यप्रदेश

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