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अखिल भारती अग्निशिखा मंच के ब्लॉग पर आज दिनांक 21/10/2021 21 को चित्र पर कविता पढ़"ें दिए गए चित्र पर "कविता रचनाकारों की कविताओं को पढ़ कर उनका हौसला अफजाई करें अलका पांडे मुंबई


चित्र पर कविता 
केसरिया बाना 

केसरिया रंग ने मन को लिया मोह ।खुबानी को दिया अपना रंग देखो ।।कितना प्यारा रंग खूबानी पर खिलता है कश्मीर में और हिमाचल में रहता हैं ।।

उत्तराखंड की वादियां पुकारती है ।इसका नाम पर कहते है कविता है ।।
यह पेट का हर रोग हरता है।
 नाम इसका खुबानी है रंग केसरिया ।।

हमको यह देता है मधुर -मधुर स्वाद 
और शरीर को देता है भरपूर प्रोटीन ।।
कितना मोहक है यह कोमल कोमल ।सुंदर -सुंदर प्यारा प्यारा तन है ।।

हरे हरे पेड़ पर लटकता है केसरिया बाना पहन । 
 पैर के गठिया दर्द में राहत देता है ।।
  वात कफ को दूर कर शरीर को राहत देता है ।
तासीर इसकी गर्म है मीठा-मीठा स्वाद हैं ।।

जब होते हम बीमार आती है इसकी याद 
खट्टा मीठा स्वाद निराला फल है या बड़ा महान।।
कोई इसको आरू कहता कोई कहता खूबानी ।
दवा समझकर जो खाते हैं रहते हरदम निरोगी ।।

शरीर को देता पोषक हैं इसके पेड लगा लो भाई।
    खूबबानी कश्मीर और हिमाचल का रहने वाला है ।।
चीन और चाइना इसको करता पसंद है ।कैंसर से यह लड़ जाता है जीवन देता है ।।

यह भरपूर हैं वजन घटाता है ।
सबका बच्चे बूढ़े सब पसंद करते हैं ।।
पहाड़ों की सुंदरता बहुत बढ़ाता हैं ।
उत्तर भारत में ही पाया जाता और कहीं नहीं है उगता हैं ।।
Alka Pande Mumbai

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[21/10, 8:46 am] 👑सुषमा शुक्ला: चित्र पर आधारित रचना शीर्षक
 *खुबानी फल*

🍁केसर सा रंगीन खुबानी,,
 क्या खूब खट्टा मीठा क्या,,,,, इसकी रवानी,,,,, विटामिन फाइबर का भंडार,,,
 शानदार इसकी पैदावार
🍁🍁🍁🍁
 चटकीला रंग आकर्षित करता,,,,
 मन में मीठे भाव भरता,,,,
 रोगों से है दूर करता,,
 डॉक्टर को चलता करता🍁🍁🍁🍁
खुबानी उद्गम है अमेरिका,,,,, विटामिन मिनरल में,,
 ना कोई इसके सरिखा,,,,,, सदाबहार,,, फल उपलब्ध है,,,,, 
चटकारे लेकर खाते,,
 सुलभ हैl
🍁🍁🍁🍁
हमारी सेहत का खजाना है,,,,
 यह हम सब ने हीं जाना है,, रसदार भरपूर सुगंध से ,,
भरा फल है,,,, स्वास्थ्य बनाए रखने का,,
 सुंदर हल हैl
🍁🍁🍁🍁
कैंसर, मधुमेह से,,,
 छुटकारा दिलाता,,, विटामिन ए, सी भरपूर मिलता,,, पाचन क्रिया दुरुस्त करता,,,, दुख से निजाद दिलाता,,,
🍁🍁🍁🍁
स्वरचित रचना,,,,
 सुषमा शुक्ला🍁
[21/10, 9:24 am] Anita 👅झा: *सुंदर सजीली नारंगी खूबानी है* 
खूबानी का फल होता मीठा है 
फ़ाइबर विटामिन से भरपूर 
स्वाद रंग रूप चटखारे ले खाते है 
अपनी मनमोहक छवि से भाता है 

अपनी पहुँच लिये दुर्लभ फलआहार है 
केंसर ,मधुमेह स्वास्थ स्वाद 
बढ़ता है 
रंग पीला सूख मेवा होता 
सूखें मेवे में होती गिनती है 

हर दिल अजीज फल कहलाता है 
सब मन रंग रुप लुभाता खूबानी है 
अनिता शरद झा
[21/10, 9:34 am] पूनम सिंह कवयित्र� � इशिता स� �डीला: मंच अग्निशिखा 
चित्र आधारित रचना खुबानी फल खुबानी फल, अनमोल है, 
दिखता गोल गोल है, 
खट्टा मीठा औऱ रसभरा 
दिखता कितना भरा भरा, 
रंग में नारंगी है 
महिमा इसकी निराली है, 
रखोगे जो इसका साथ 
नहीं आएगा बुढ़ापा पास 
दिखता अति सुन्दर, 
है ये एक अनमोल धरोहर, 
अलग ही इसकी शान है, 
खुबानी इसका नाम है. 
इशिता सिंह
[21/10, 10:43 am] वीना अचतानी 🧑🏿‍🦽: वीना अचतानी, 
विषय ***चित्र पर आधारित कविता ,
खुबानी प्रकृति का है अद्भुत वरदान 
 इसका जन्म स्थान है भारत और पाकिस्तान 
खट्टा मीठा स्वाद है इसका 
पोषक तत्वों से भरपूर 
आँखो को देता फायदा
दिल भी रखता दुरूस्त 
कैंसर को खत्म कर देता 
दिमाग भी रखता शीतल
भरपूर फाईबर वाला
विटामिन ए, सी से भरपूर 
इसको खाने से बढ़ता है खून
खुबानी ताज़ी हो चाहे सूखी
खाने से उम्र बढ़ती 
गर्मियों का फल है 
नियमित खाने से
त्वचा में निखार है आता 
चेहरा सुन्दर बन जाता ।।।
स्वरचित मौलिक, 
वीना अचतानी 
जोधपुर ।।।।
[21/10, 11:51 am] Nirja 🌺🌺Takur: 

खुबानी खुबानी हो तुम कितने रसीले।
नारंगी केसरिया सा है रंग ,
लगते हो कितने शरमीले।
विटामिन हैं तुममें भरे। 
जिसको तुम मिलते
बीमारी से वो ना डरे। 

नीरजा ठाकुर नीर
पलावा डोंबिवली 
महाराष्ट्र
[21/10, 1:01 pm] वीना अडवानी 👩: वसुंधरा की पावन देन
खुबानी खूब है भाती।।

पर क्या कहूं मैं जनता
बजट में हर किसी के ना समाती।।

एक्सपोर्ट की बली ये चढ़ जाती
तभी इतरा खुबानी अपना भाव सुनाती।।

भारत देश की धरी पर पाई जाती
किस्मत में भारत के कम
विदेशियों के हिस्से में अधिक समाती।।

बताओ स्वाद में बढ़िया
दिखने में भी सुंदर
खुबानी तू क्यों विदेशियों को हसाती।।

भारत देश के किसानों, व्यापारियों
भारत की जनता को वंचित कर सताती।।

वीना आडवानी तन्वी
नागपुर, महाराष्ट्र
********************
[21/10, 1:10 pm] अंजली👏 तिवारी - जगदलपुर: कविता
रंग मेरा चोखा
चाहे स्वाद हो
खट्टा चाहे मीठा
केसर सा रंग मेरा
सब को लगू प्यारा
सुन्दर देख हर कोई आते
रहे ना दूर कोई मुझसे
चाहे अपने हो चाहे पराये
पास खिंच लाता हूं
सबको अपने सुन्दरता से
लुभाता हूं
नया नया यौवन मेरा
नया जीवन मेरा
नीखरु मैं हर रोज
यही जीवन जीने का
 अंदाज़ मेरा🙏
रचनाकार
अंजली तिवारी मिश्रा जगदलपुर छत्तीसगढ़
[21/10, 1:21 pm] 😇ब्रीज किशोर: *अंग्नि शिखा मंच*
*बिषय चित्र पर आधारित*
*दिनाकं २१/१०/२०२१*

सुन्दर केसरिया रंग निराला
पहाडो पर यह रहता है।
सबके मनको भाता है।
निरोगी काया बनाता है।
बच्चों को भी भाता है।


तन पर के सरिया बाना है।
लुभावना रंग सुहाना है।
रंग भी सुन्दर काम भी सुन्दर
खूबानी कहलाता है।
सबके मन को भाता है।


केसरिया रंग बीरो की शान
यह पहाड़ों मे रहता है।
जो खाय खूबानी मधुरी
बोले बानी ,
खंट्टा मिठा स्वाद गजब है।
पेट का यह इलाज है।


इससे नेह लगाओ भाई।
यह तेरे शरीर की दवाई।
यह उत्तराखंड से आई।
इस को अपने घर मे लाओ।
रोगो को तुम मार भगाओ।
बच्चे खाये बुढे़ खाँये।
खुबानी सबके मन को भाँये।

*स्वरचित* 
       *बृजकिशोरी त्रिपाठी*
*उर्फ भानुजा गोरखपुर*
[21/10, 1:36 pm] वैष्णवी Khatri वेदिका: गुरुवार 21//10/ 2021
विषय- चित्र पर कविता खुबानी

केसरिया रँग तेरा है।
सेहत के संग फेरा है।
गीली रसीली तू खुबानी।
सूखी भी सेहत की रानी।।

पोषण से भरपूर ख़ुबानी।
गुठलीदार फल ख़ुबानी।
लाभ देती सूखी खुबानी।
जरदालु कुशमालु भी खुबानी।।

काबुल गिर पर अधिक होता।
फिर यह मेवा भारत आता।
बीजों से तेल निकाला जाता।
कडुए बादाम तेल कहलाता।।

कतीरे जैसी गोंद निकलती।
जो चेरी गम है कहलाती।
फल सितंबर तक पकते।
पेड़ मझोले डील के होते।।

हर साल इसके पत्ते झड़ते।
सूखे फल भी लाभ करते।
रंग इसका चमकीला होता।
विटामिन सी और ई होता।।

पोटेशियम भी ज़्यादा होता। 
शरबत भी जायकेदार होता।
पेड़ 12 मीटर ऊँचा होता।
पेड़ घना और सुंदर होता।।

फूल 5 पंखुड़ियों वाले होते।
सफेद गुलाबी रंग के होते।
फल आड़ु के बराबर होता।
पीले से नारंगी हो जाता।
 
घाम पड़े लाल हो जाता।
सूखा फल पौष्टिक होता।
ज़्यादा गरमी में मर जाता।
ताजा बीजों को रोपा जाता।।


वैष्णो खत्री वेदिका
[21/10, 1:45 pm] रवि शंकर कोलते क: गुरुवार दिनांक ***२१/१०/२१ विधा**** कविता
विषय ****चित्र आधारित रचना
   
    #***केसरिया खुबानी***# 
               ^^^^^^^^^^

अरी ओ केसरिया खुबानी खुबानी ।
तुम्हारा नाम है हर एक के जुबानी ।।
तुम सबको चंगा रखनेमें हो माहिर ।
पोषक तत्वोंकी बहती तुममें रवानी ।‌१

ये तनसे गोल रंग आकर्षक प्यारा है ।
ये स्वास्थ्य वर्धक रोगी का सहारा है ।।
इसका खट्टा मीठा स्वाद बहुत भाए ।
इसका केसरी बाना सबसे न्यारा है ।।२

ये विटामिन युक्त पचन क्रिया बढ़ाएं ।
ये कैंसर गठिया पेट का दर्द मिटाएं ।।
बच्चे बूढ़े सभी इसको करते पसंद ।
यह फल है एक दवा सारे ही खाएं ।।३

उत्तर भारत इसका प्यारा ठिकाना है ।
रहती पेड़पे केसरी इसका बाना है ।।
ये आरू खुबानी नाम से है मशहूर ।
इसके गुण तासीर को सबने जाना है ।।४

प्रा रविशंकर कोलते
     नागपुर ३०
[21/10, 2:06 pm] निहारिका 🍇झा: नमन अग्निशिखा मंच
दिनाँक;-21/10/21
विषय;-चित्र लेखन
केसरिया है बाना जिसका 
उत्तराखंड की शान।

मनमोहक है रूप निराला
सेहत से भरपूर।
खट्टा मीठा स्वाद है इसका
सबके मन को भाता
कोई कहे खुबानी इसको
 आरु से मशहूर।
रोग हटाता, वजन घटाता
प्रोटीन का भंडार।
करलो इसका सेवन हरदम
रोग हटें हजार।।
निहारिका झा
खैरागढ (36 गढ़)
[21/10, 2:19 pm] चंदा 👏डांगी: $$ चित्र आधारित रचना $$

दिल की सुनो तुम 
खाओ रोज थोड़ी खुबानी 
खून बढ़ाए सुंदर बनाए 
सेहत का ये खजाना 
खूबसूरत केसरिया रंग लगे प्यारा 
संग संग लगती सुंदर 
साथ रहने का देती संदेश 
खट्टी मीठी खूब रसीली 
सबके मन को भाये खुबानी 
बच्चे बूढ़े और जवान
करते इसको सब सलाम

चन्दा डांगी रेकी ग्रैंडमास्टर 
रामटेकरी मंदसौर मध्यप्रदेश
[21/10, 2:49 pm] 👑पदमाकाक्षी शुक्ला: 🙏🌹 *नमन मंच* 🌹🙏
🙏🌹 *जय अम्बे* 🌹 *२१/१०/२१* 🌹🙏
🙏🌹 *चित्र पर आधारित ख़ुबानी* 🌹🙏

कई नाम से जाना जाता ।
सबके मन को मैं भाता हूं।। 
केसरि रंग मुझको मिला है। 
मानव तन शौर्य बढाता हूं।।

*ख़ुबानी*-एप्रीकॉट कहते। 
मैं पीच की तरह दिखता हूं ।।
खट्टा मीठा स्वाद से भरा। 
गर्म तासीर में रखता हूं।। 

मौसंबी-अनार दोस्त बने। 
तीनों विटामिन सी बांटते।। 
पोटेशियम ए विटामिन भी। 
आम की तरह सबको देते।। 

फोस्फोरस-कोपर मुझमें है। 
फ़ाइबर छुपा मेरे तन में ।।
भीतर मैग्नेशियम भरा है।।
अपनाना तुम मुझको मन से।। 

🙏🌹पद्माक्षि शुक्ल 🌹🙏
[21/10, 3:13 pm] हेमा जैन 👩: विषय :-चित्र आधारित

 खुबानी की खूबियां देखो
इसकी प्यारी रंगत देखो,

कई गुणों का है ये राजा
तभी तो ये सबको मनभाता

विटामिन की प्रचूर मात्रा लिए
कॉलेस्ट्राळ को दूर करता,

एनीमिया भी ये दूर करता
आँखों को स्वस्थ रखता

सेहत का भंडार होता इसमें
ऐसा होता है ये खूबसूरत फल

हेमा जैन (स्वरचित )
[21/10, 3:15 pm] कुम कुम वेद सेन: रंग मेरा है केसरिया
इसलिए तो पड़ती है सबकी नजरिया

नाम मेरा है खुबानी
लोग कहते हैं अपनी जुबानी

स्वाद मेरा है खट्टा मीठा
कीमत मेरी है तीखा तीखा

मुझको अपना लोगे खा लोगे
शरीर को बना दोगे निरोग

विटामिन ए, ई काम में हूं खजाना
प्रतिदिन खाओ करो ना बहाना

सभी शहरों में नहीं पाया जाता
मै अनमोल कहलाता

कच्चे में में हरा लगता
पकने के बाद केसरिया

गुच्छो में मैं रहना जानता
अनेक बीमारियों का दवा बनता

मेरे पेड़ का फल भी खाओ
सेवन करो पत्तों का हो जाओ निरोग

सभी शहरों में नहीं पाया जाता
बर्फीली जलवायु मेरी है जन्मदाता

दिखने में मैं हूं गोल मटोल
बिकने में हूं सीधे तौल

कुमकुम वेद सेन
[21/10, 3:51 pm] रागनि मित्तल: जय मां शारदे अग्निशिखा मंच दिन गुरुवार दिनांक दिनांक 2110 2021 चित्र आधारित रचना 

हरे-हरे पत्तों के बीच में ढेर लगी खुबानी।
देख-देख इसको आता है सबके मुंह में पानी ।
केसरिया रंग इसका सबके मन को भाए। 
विटामिन ई की भरपूर मात्रा इसमें हम पाए।
मंझोले कद का ये पौधा है ,दिखता बड़ा ही सुंदर।
रस भरा फल संतुष्ट कर देता है बाहर और अंदर ।
इसके सूख जाने पर भी स्वाद बड़ा ही भाता ।
खा-खा कर बच्चे बोले और भी दो मुझे माता।
जितना सुंदर यह दिखता है, उतना ही खट्टा-मीठा ।
खाकर इसको सुंदर हो गई मीना, मंजू , रीटा ।

रागिनी मित्तल
 कटनी ,मध्य प्रदेश
[21/10, 4:29 pm] ♦️तारा प्रजापति - जोधपुर: अग्निशिखा मंच
21/10/2021 गुरुवार
विषय-चित्राधारित रचना

खुर्बानी से लदी डालियां,
मन सबका ललचाती है।

खट्टी-मीठी,रस-रसीली,
सबके मन को भाती है।

रंग नारंगी,पर नहीं नारंगी,
नारंगी का भान कराती है।

पौष्टिकता का है खज़ाना,
स्वास्थ्य सबका बढ़ाती है।

नानी जब भी घर आती है,
डलिया भर-भर लाती है।

मां जब छुपा कर रखती,
मुन्नी छुप कर खा जाती है।

बीज जब आते है मुहँ में,
दादी मुँह बिचकाती है।
                        तारा "प्रीत"
                   जोधपुर (राज०)
[21/10, 4:45 pm] 💃वंदना: चित्र पर आधारित

रंग और रूप पे क्यों इतना नाज करती हो
जिंदगी चार दिन की है इतना क्यों अकड़ती हो

हरी भरी लदी लदी सी तुम खुबानी हो
रूप और गुण की भरपूर सी खुमारी हो

रंग केसरिया चुनके तुम्हें दाता ने दिया
आरोग्य शक्ति का वरदान तुम्हें दान दिया।

मधुर रसीली मनमोहिनी सी लगती हो
तभी तो सब के मन पर राज खूब करती हो।

उम्र पर जोर नहीं राज सब पर करती हो
बड़ा या छोटा तुम सबके मन को भाती हो

रंग और रूप पे क्यों इतना नाज़ करती हो
जिंदगी चार दिन की इतना क्यों अकड़ती हो।

वंदना शर्मा बिंदु देवास मध्य प्रदेश
[21/10, 4:58 pm] +91 70708 00416: मंच को नमन, 🙏
चित्र आधारित रचना
विषय खुबानी
          लाल पीला खुबानी
      ********************
 खुबानी पहाड़ी, है गुठलीदार फल
सबको है भाये यह रसदार फल 
खुबानी लाल -पीली होती
ये स्वादिष्ट खट्टी और मीठी होती
खुबानी का स्वाद निराला
बेहद गुणकारी है खुबानी 
फाइबर से युक्त है खुबानी
उत्तर भारत और पाकिस्तान का
यह है महत्वपूर्ण फल
मिलते इसमें विटामिन
जोड़ों के दर्द और गठिया में दे आराम
शारीरिक दुर्बलता और दे खांसी में राहत
रुखी त्वचा और कान दर्द में भी कारगर
फलों के दुकानों में है खूब सजती
खुबानी हमको भी प्यारी
आपको भी प्यारी
वाह खुबानी सबके मुख के स्वाद में रचता बसता
खुबानी खुबानी

 डॉ मीना कुमारी परिहार
[21/10, 4:59 pm] विजेन्द्र मोहन बोकारो: चित्र पर आधारित रचना

हरे हरे पत्तों के बीच मैं हूं खुबानी।
 देख कर लोगों को आता है मुंह में पानी।।

मैं हूं गुठीला फल रहता हूं बर्फीली जगह।
हिमाचल कश्मीर के बादलों में रहता हूं।।

रंग पीले और लाल में हूं मुझे आलूबुखारा और अंजीर मुनक्का के समान फल के रूप में प्रयोग करते हैं।।

मैं दीर्घायु बनाने वाला फल हूं जैसे चाहो प्रयोग करो कोई हानि क्या संभावना नहीं।।

ज्वर अपच मे खाओ फायदा ही फायदा
मैं विटामिन से भरपूर हूं खाने से शक्ति शक्ति।।

मधुर रसीली मनमोहिनी सी लगती हूं तभी तो सब के दिल पर राज करता हूं।।

विजयेन्द्र मोहन।
[21/10, 5:18 pm] सुरेन्द्र हरडे: अग्निशिखा मंच को नमन🙏

    विषय **चित्र आधारित रचना
                    खुबानी
                   """""""""""" 
इसका केसरी रंग
      हर किसीको भाता है 
विटामिन से भरा है
        हर कोई इसे खाता है ।१।

यह मिलता कश्मीर हिमाचल में
       रहता है ये हरे हरे पेड़ पर
स्वाद है खट्टा मीठा इसका
       पाचक रस से भरपूर है।२।

महंगा नहीं सस्ता फल है 
     हर आदमी खरीद सकता है
जो भी खाए इसको सदा
     वो निरोगी रह सकत है।३।

कवि """ सुरेंद्र हरडे
            नागपुर
दिनांक :- २१/१०/२०२१
[21/10, 5:18 pm] सरोज दुगड गोहाटी: * अग्नि शिखा काव्य मंच *
* चित्र देख कविता लिखो *
* २१/१०/ २०२१/ वृहस्पतिवार /
        
            ‌* खुबानी *

पहाड़ों की रानी खुबानी रंगदार 
लाल हरी मुलायम चिकनी सलोनी !
खानें में खट्टी - मिठी बेमिसाल स्वाद ,
पौष्टिकता ओर अनंत गुणो से भरपुर !

पहाड़ी स्त्रियों का रूप रंग होता बेजोड़ ,
 लाल गालों की लाली खुबानी से करते हौड़ !
चिकना मखमली पीला कलेवर तुम्हारा ,
पहाड़ी ललना के गालों सा चिकना सलोना !

ना छिलके उतारने का कोई झंझट ,
बीज तुम्हारा कितना होता फायदेमंद !
अंदर से उसके निकलता खारा बादाम ,
आम के आम गुठलियों के मिलते दाम !

 पहाड़ी झरने के किनारे-किनारे ,
पहाड़ी किशोरी टोकरी भर चले !
झरने सी निश्चल पहाड़ी सुंदरी ,
रसीली खुबानीयाँ बेचने चली !

हरी खुबानी खट्टी -मीठी रसीली सेहतमंद ,
सुख जाती तब सिकुड़ झुर्रिदार होती,
यौवन और बुढ़ापे का फर्क बताती ?
पका फल पकी उम्र सदा मिठास दे जाती !!

सरोज दुगड़
खारुपेटिया 
असम 
🙏🙏🙏
[21/10, 5:24 pm] 💃rani: अग्निशिखा मंच
 विषय---चित्र पर आधारित
 विध--- कविता 
दिनांक-21-10-2021 

                  खुबानी 

नारंगी रंग का खूबसूरत इक मीठा फल खुबानी ।
भारत और पाकिस्तान में मिले अधिकतर खुबानी ।।
फल और सूखे मेवे दोनों रूप में मिले खुबानी ।
अनंत गुणों की खान है यह खुबानी ।।
 कई विटामिन और खनिज से भरपूर है खुबानी ।
कमजोरी को भी तो दूर करें यह खुबानी ।।

जलने पर भी करें उपयोग तो मिलता है आराम ।
आयुर्वेदिक दवाओं में तो आता है बहुत काम ।।
बैक्टीरिया से लड़ने में मिलती है ताकत बहुत ।
क्षय रोग,खांसी,गठिया अल्सर में भी देता आराम ।।

 इसका तेल भी है कई गुणों से भरपुर ।
इसके तेल की मालिश से त्वचा सुँदर हो जाए ।।
जोड़ों के दर्द में भी इसका तेल आराम दिलाए ।
दो बूँद तेल दूध में डालकर पी लो कृमि नष्ट हो जाए ।।
हर तरह से लाभकारी कुदरत ने दिया उपहार हमें ।
 इसको उपयोग में लाकर 'रानी' भरपूर लाभ उठाएँ ।।

                           रानी नारंग
[21/10, 5:48 pm] रजनी अग्रवाल जोधपुर: शीर्षक "केसरिया एप्रीकॉट "चित्र आधारित कविता

 केसरिया दम भरने वाला , 
सब में जोश जगाने वाला , 
एप्रीकॉट है मतवाला,
 इसे देखकर मुंह में पानी ,
 आओ मिलकर कहे कहानी ,
 उत्तरांचल का बड़ा है रुतबा , 
हिंदी में यह खुर्बानी कहाऐ , 
 सबके मन को ही है भाऐ , 

जहां खुर्बानी का पेड़ खड़ा , 
 सबको आता बड़ा मजा, 
 खड़ा- खड़ा देता है , सबको वीरता का फतवा , 
भारत की वीरता ही निशानी
लाखों ने दी अपनी कुर्बानी , 
 हमारे देश के झंडे की वाणी , 
सफेद हरा और केसरिया , 
हम सबको करता , 
धानी -धानी,
वाह वाह खुर्बानी , 
सुंदर है तेरी कहानी , तेरे रंग से सबने पहचानी , 
 तू ही वीरता की है निशानी,
तुझे देख मुंह में आता पानी,,,,,,,

स्वरचित चित्र आधारित कविता
 रजनी अग्रवाल
  जोधपुर
[21/10, 5:52 pm] शेभारानी✔️ तिवारी इंदौर: चित्र पर आधारित कविता 

खूबानी लदी है डालियों में,
 केशर चटकीला दिखता है ,
खट्टा मीठा स्वाद है इसका,
 रसभरी जैसा लगता है ।

बहुत पौष्टिक होता है 
विटामिन भी मिल जाता है,
 हर रोज इसे खाने से ,
रोग दूर हो जाता है ।

गोल गोल सुंदर दिखता,
यह गुणों का खजाना है,
 सभी के मन को भाता है,
 हमें भी खुबानी खाना है।

 श्रीमती शोभा रानी तिवारी इंदौर
[21/10, 6:12 pm] रामेश्वर गुप्ता के के: ।आढू।
आढू ऐसे चपके है,
वह एक दूसरे के है।
गुलाबी और पीले है,
सब डाली से जुड़े है।।
आढू.......................1
सब आपस मै बंधे है,
अपनी जड़ों से लगे है।
अपने सुन्दर रूप लिये है,
सबको वह ललचाते है।।
आढू......................2 
काश्मीर में यह होते है,
सारी दुनिया यह पहुचे है।
इनके पेड़ फलो से भरे है,
दिल में हमेशा वह रहते है।।
आढू........................3
फलों की सुन्दरता देखकर,
यह मन कहीं खो जाता है।
इसकी बगिया की महक से, 
यह सांसो में बस जाता है।। 
आढू......................... 4
स्वरचित: रामेश्वर प्रसाद गुप्ता।
[21/10, 6:45 pm] डा. अंजूल कंसल इन्दौर: चित्र आधारित कविता 
शीर्षक - रंग केसरी खुबानी 

खुबानी है रसीली,रस से भरी 
सबको भाए,इसका रंग नारंगी
स्वाद मीठा-मीठा अति गुणकारी 
उत्तराखंड की है, ये शान निराली।

खुबानी दिखे,मधुर मन मोहिनी 
विटामिन ई युक्त, फाइबर भरपूर 
देखकर इसका सुंदर सलोना रूप 
केसरी रंग मोहे,मुंह में आता पानी।

नानी आती भर- भर कर लातीं 
उनकी पोटली में खूब मुस्कुराती 
स्वास्थ्य वर्धक है,खाकर खुबानी
बार-बार खाने को जिह्वा ललचाती।

एनीमिया को दूर-दूर कर देती 
स्वाद सेहत मैग्नीशियम भरी 
पोटेशियम से भरी है खुबानी 
केसरिया रंग से खूब इतराती। 

डॉक्टर अंजुल कंसल"कनुप्रिया"
21-10-21
[21/10, 6:47 pm] आशा 🏆🏆जाकड इन्दौर: चित्र पर आधारित कविता


वाह यह पहाड़ों की महारानी
 मनमोहक आकर्षक ,सुहानी
 केसरिया रंग में लटके खुबानी 
 ये है हमारी वीरता की निशानी

कुछ खट्टे कुछ मीठे पर स्वादिष्ट
जो खाते हैं वह होते हैं हृष्ट पुष्ट
हम इसे चाहकर नहीं खा पाते
इसके दर्शन ही होते हैं दुर्लभ

उत्तरांचल में तो ये खूब मिलते 
तभी वहां के लोग गुलाबी होते 
काश हमारे यहाँ भी खूब होते 
हम सब भी इनका आनंद लेते

एक दूसरे से वे ऐसे हैं चिपके  
हम एक.माँ के बच्चे है जैसे
संगठन में है ताकत, एकता
इसलिए वे सदा एकजुट रहते

कितने सुंदर लग रहे हैं प्यारे 
सचमुच ये हैं बिल्कुल न्यारे 
उपवन की शोभा को बढ़ाते
रूप -सुगंध से सब ललचाते

आओ हम सब इसका स्वाद लें
 कुछ खट्टी - मिठास ग्रहण करें 
 जब सामने हैं, मनभावन फल
तो क्यों ना हम इसका स्वाद लें।।





 आशा जाकड़
[21/10, 9:41 pm] पुष्पा गुप्ता / मुजफ्फरपुर: 🌹🙏अग्नि शिखा मंच 🙏🌹
विषय: चित्र आधारित रचना 
विधा: काव्य 
दिनांक:21/10/21
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फल है मीठा खुबानी -
यह करता है मेहरवानी ।
बीमारी दूर भगाता है ,
सबको यह फल भाता है ।

खट्टा- मीठा स्वाद निराला 
इसको खाता है दिल वाला ,
आरू इसका दूसरा नाम-
करता है यह काम महान ।

रंग है इसका बड़ा अनोखा
नारंगी रंग, हरे पत्तों के बीच,
कितना सुन्दर यह दिखता है
पहाड़ों के बीच यह उगता है।
🙏🌹
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स्वरचित एवं मौलिक रचना 
-डॉ पुष्पा गुप्ता
मुजफ्फरपुर 
बिहार

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