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अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच के ब्लॉक पर आज दिनांक 18 2021 को बालवीर विषय गोलगप्पे पर रचनाकारों की रचनाएं पढ़ें अलका पांडे मुंबई


बाल गीत 
गोलगप्पे

मेले की सैर में खाते गोलगप्पे 
आओ चून्नु आओ मुन्नू 
चलते है मेले की सैर करने
खाते हैं गोलगप्पे , पानी पूरी 
 अरे ऽऽऽऽऽऽऽऽ
ज़रा सा नाम लिया मूँह में पानी आया 
बहुत पंसद है गोलगप्पा पुचका 
नाम लेते ही कुछ कुछ होता है !
गोल गप्पा खाते  हैं पूरा मूंह खोलते हैं । पानी भी माँग कर पी जाते हैं । 
एक दो चार प्लेट से भी पेट नहीं भरता है सूखी पूरी चट करते 
मीठा तीखा मिला कर हाथो को डूबकी लगा कर आता है मज़ा 
ठेले वाले चाचा खोमचे वाले मामा सबकी खायेंगे पानी बतासे 
आत्मा तृप्त करेगे !!
माँग कर पानी पीने का मज़ा ही बहुत है ।
भैया उस सूखी पूरी का तड़का हाय हाय क्या कहने .....
दम निकल जायेगा चल 
मुन्नू जल्दी कर मेले में होगी भीड 
गोलगप्पे सब ख़त्म न हो जाए 
क्या मज़ा थाभईया
 गलियों में खाने का 
हाय कोरोना सब बंद करवाया 
गोलगप्पे को तरसाया 
एक बार खा लेता कोरोना फिर कहीं नहीं जाता इसी पानी में डूबकी लगाता और .....
दम तोड़ देता ....
किया कमाल गोल गप्पें ने कोरोना को भगाया मिर्ज़ा लगी तेज कोरोना भागा तेज चीन पर जा  गिरा जय बेलो गोलगप्पे की 
पुचेके महाराज की पानी पुरी रानी की जय....
डॉ अलका पाण्डेय मुम्बई ौौ
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[18/10, 8:55 am] कुंवर वीर सिंह मार्तंड कोलकाता: 🌺सोमवार 18/10/ 2021
🌺समय - सुबह ८ से शाम ७ बजे तक 
🌺 आज का विषय_  गोलगप्पे
🌺 बाल गीत 

गोल गोल और फूले फूले 
लगते ज्यों छोटे कुप्पे।
पानी पूड़ी,पुचका अथवा
कहते इन्हें गोलगप्पे।

आलू चोखा, इमली पानी
इनके साथ में आते हैं।
खट्टे मीठे और चटपटे
मिलकर स्वाद बढ़ाते हैं।

तरह तरह का चोखा बनता
तरह तरह का पानी है।
धनिया और पुदीना पानी
इनका कोई न शानी है।

छेद अंगूठे से करते हैं
उसमें चोखा भर देते।
फिर पानी में इसे डूबा कर
झट दौना में रख देते।

चटकारे ले ले सब खाते
सारे स्वर हैं खुल जाते ।
इसके आगे सभी मिठाई
व्यंजन फीके पड़ जाते।

सुन पुचका वाले का स्वर
महिलाएं तुरत निकल पड़ती।
पकड़ पकड़ हाथों में दौने
वे खाने पर पिल पड़ती।

भले उन्हें नुकसान करे
पर नहीं छोड़ती हैं खाना।
होवे पेट खराब भले
मंजूर हॉस्पिटल जाना।

पुचका वाला गंदे हाथों
पुचका खूब खिलाता है।
नहीं जानता वह घर घर में
बीमारी फैलता है।

हमें चाहिए मित्रो, इनको 
खाना जल्दी बंद करें।
अगर शौक हो खाने का
तो घर पर ही तैयार करें।

© कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड, कोलकाता
[18/10, 8:58 am] 😇ब्रीज किशोर: अग्नि शिखा मंच
 को नमन है
१८/१०/२०२१
विधा बाल कविता
 बिषय    गोल गप्पे
 दशहरा का मेला लगा आज रावण मरेगा।
*********************
रामू  श्यामु दोनो भाई
आज गये मेला देखने।
रामू बोला भाई चलो 
हम तुम रावण चलके
देखे।


रावण है बुराई का पुतला
उसको आज जलायेगें
इससे भैया. सीख मिलती
बुरा काम कभी नहीं करेगें

इतने मे गोल गप्पे पडा़
दिखाई ।
रामू के मुँह मे पानी आई
बोला गोल गप्पे खाओ
 भाई।
  श्यामु बोला पापा से बता
   आये तब  गोल गप्पेभाई
   पापा बोले चलो मेरे भी
   मुँह मे पानी आई।


पापा को चटनी वाला
मम्मी खाती तीखा तीखा
रामू बोला हम बच्चो मत
देना तुम फिका फिका।
हम चटपटे गोल गप्पे
खाँयेगें मुन्नी को खिलायेगें।

नही भाई हमे गोल गप्पे नही
 हम आलु की टिक्की खाँयेगे।
 मुझे पसंद है मटर की चाँट
 उपर से मीठी चटनी डालेगें
 रामु बोला चलो अब घर
 अभी दुर्गा भसान देखने जायेगें।
स्वरचित
बृजकिशोरी त्रिपाठी उर्फ
  भानुजा गोरखपुर
[18/10, 9:23 am] पूनम सिंह कवयित्र� � इशिता स� �डीला: अग्नि शिखा मंच 18.10.21विधा बाल कविता 
विषय.. रसगुल्ले 
अम्मा दे दो रसगुल्ले, 
काले काले भरभरे 
मीठा मीठा रस भरा है, 
लगते बड़े रसीले, 
लाल नहीं पीले नहीं है 
है वो काले काले, 
जैसे खाये जामुन 
वइसे ही है मन भावन, 
करना कोई भेद नहीं, 
एक मुझे मुन्नी क़ो भी देना एक ही, 
मिल कर हम खायेंगे 
खूब धूम मचायेगे,  
स्वरचित इशिता सिंह शिक्षिका
[18/10, 9:44 am] वीना अचतानी 🧑🏿‍🦽: वीना अचतानी 
विषय*** गोलगप्पे  बाल कविता ***
कितने ही फास्ट फूड आए
पर गोलगप्पे का मुकाबला 
नहीँ  कर पाए
गोलगप्पे  का नशा  सब
पर छाएअगर तीखा हो तो
मज़ा बहुत  आए
जब मन को कुछ न भाए
तो पानी  पूरी  खाऐं
हर उम्र के लोगों को भाए
कितने नाम है तेरे
पानी पूरी, गोलगप्पे, 
बताशा,  फुचका, गुपचुप
जितने नाम है उतने ही
पानी तेरे में  समाए
खट्टा पानी, मीठापानी, 
तीखापानी, पुदीना
जलजीरा और आलू
बूँदी तेरा स्वाद बढ़ाए
तेरे अन्दर  आलू चटनी
भर बड़ा सा मुँह 
खोल के खाते
अगर बाद मे न मिले
सूखी पपड़ी तो 
गोलगप्पे  जैसा मुँह फुलाते।।।।
स्वरचित मौलिक 
वीना अचतानी 
जोधपुर ।।।।
[18/10, 10:16 am] आशा 🌺नायडू बोरीबली: ‌‌     
 ( बाल गीत )
************
🌹 गोल गप्पे 🌹
****************

जी को ललचाते हैं ,
ये गोल-गप्पे
देख देख कर
इन गोलगप्पों को
लार टपकाते हैं बच्चे।

 कितनी ही खा लो      मन नहीं भर पाता है        और, और खाने का मन होता जाता है ।       

बच्चा हो या बूढ़ा गोलगप्पे खाने से अपने को रोक नहीं पाता है। 

शादी ब्याह, समारोह की शान है ये गोलगप्पे     सारी भीड़ अपनी ओर खींच लेता है ,               
ये गोलगप्पे।              

अच्छा चलता है   गोलगप्पे  का व्यवसाय गोलगप्पे वाला ठेला एक लगाता है ।                  

 अटारिया पर रहता है अपने बच्चों को कान्वेंट में पढ़ाता है              कार में घूमता है।        

सारे सपने पूरे करता है और सुकून की जिंदगी जीता है ।                  जय हो गोलगप्पे की  ‌ जय हो ,जय हो!
*******************
स्वरचित मौलिक रचना
डाॅ .आशा‌लता नायडू .
भिलाई . छत्तीसगढ़ .
*******************
[18/10, 11:29 am] वैष्णवी khatri वेदिका: अ. भा. अग्निशिखा मंच 
सोमवार 18/10/ 2021
गोलगप्पे बाल गीत

 नाम है इसका गोल गप्पा
फूला फूला पूरा कुप्पा।
पानी पूरी भी कहलाता।
सबके मन को है यह भाता।।

इसको सभी मज़े से खाते।
बच्चे बूढ़े सब को भाते।
सूजी आटे का यह बनता।
चकले बेलन से यह ढलता।।

तेल में जाकर नाच करता।
फूल फूल कर कुप्पा होता।
अंदर इसके आलू भरदो।
सँग में मीठी चटनी कर दो।।

तीखा खट्टा पानी डालो।
मुँह को खोल गप्प से खा लो।
जलजीरा भी सबको भाता।
असल मजा ठेलों पर आता।।

भैया सूखी पूरी देता।
इसका पानी मन को सेता।
सबका दिल आतुर हो जाता।
फुल्की देख फिसल है जाता।।

वैष्णो खत्री वेदिका
[18/10, 11:36 am] 💃वंदना: गोलगप्पे

गोल मटोल गोल गोल गप्पे
बच्चे बूढ़े सबको लगते अच्छे।

खट्टे मीठे तीखे तीखे
आंखों में पानी भर लाते ।

गोल मटोल गोल गोल गप्पे
देख के मुंह में पानी आए

दिख भर जाए गोलगप्पे
बाकी सब फीके पड़ जाए

पूरा की पूरा मुंह खोलो
खाओ गटकों मजे उड़ाओ।

जैसे ही आया गोलगप्पे वाला
सब लोगों का मन भर माया

चाय पर चर्चा बहुत हुई
अब गोलगप्पे का नंबर आया।

वंदना शर्मा बिंदु देवास मध्य प्रदेश
[18/10, 11:48 am] शेभारानी✔️ तिवारी इंदौर: गोलगप्पा

सोनू, मोनू ,जल्दी आओ,
गोलगप्पे वाला भैया आया,
 सुंदर-सुंदर गोलगप्पे लाया,
खट्टा-मीठा पानी  भी लाया ।

 आओ हम सब मिलकर  खाएं,
गोलगप्पा खाकर मौज मनाएं,
तीखा मीठा, खट्टा-मीठा पानी ,
गोलगप्पे में भरकर हम का जाएं।

 पानीपूरी खाने का  असली मजा ,
ठेलों पर ही खाने में ही  आता है,
गोलगप्पे का  नाम सुनकर ही ,
 सबके मुंह में पानी आ जाता है।

श्रीमती शोभा रानी तिवारी इन्दौर
[18/10, 12:18 pm] निहारिका 🍇झा: नमन अग्निशिखा मंच 
विषय;-गोलगप्पे
बाल गीत।।
दिनाँक18/10/2021
गोलगप्पे !गोलगप्पे !
नाम अनेक व स्वाद निराले
कोई कहता गुपचुप इनको 
कोई कहे पानी पूरी
खट्टे मीठे स्वाद के होते
 इनकी है दुनिया दीवानी।
जब सुनते नाम जो इनका
आये मुंह मे पानी।।।
ज्यों ही घर से बाहर निकले
जिद करती है बिटिया रानी
मुझे खिला दो गोल गप्पे
ठुनक रही है मुनिया रानी
मुनिया के सँग मम्मी पापा 
सबकी  भाते गोलगप्पे।
मार्केट, मेला की शान बने
ये प्यारे गोल गप्पे।।
जो खाये ललचाये 
जो नहीं खाये वो भी ललचाये।
होते ऐसे गोलगप्पे।।
मीठा तीखा पानी 
ला देता मुंह मे है पानी।।
दुनिया इसकी दीवानी।।
निहारिका झा।🙏🙏
[18/10, 12:25 pm] 👑पदमाकाक्षी शुक्ला: 🙏🌹 *नमन मंच* 🌹🙏
🙏🌹 *जय अम्बे* 🌹१८/१०/२१,🌹🙏
🙏🌹बालकविताः *गोलगप्पे* 🌹🙏


पुचका वाला आया है ।
गोल-गप्पा खिलाया है।।
चटपटा खट्टा मीठा पानी। 
मुन्नू ने दौड लगाया है।। 

मस्त गोल गप्पे खाना है। 
भैय्याजी यह पैसा लेलो। 
आलू भी पूरी में डालो । 
खट्टा मीठा पानी भरलो।। 

मीठा थोडा कम डालना ।
धनिया फूदिना का पानी।। 
खट्टा, मीठा, तीखा पुचका।
आने लगा मुँह में भी पानी।। 

भैय्याजी मनमें मुस्काए। 
गंदा हाथों पकड़ा पूरी ।।
अंगूठा से छेद लगाया। 
 पानी में डूबा है पूरी ।।

हाथ में कटोरी पकडाया। 
झटपट पुचका उसमें डाला।। 
मुन्ना ने मुँह बडा कर दिया। 
पुचका का स्वाद है निराला।। 

ओह !! यह तो ज़्यादा मीठा। 
तीखा पानी ज़्यादा डालो।। 
तीखा पानी नाक में गया। 
थोडा मीठा चटनी डालो ।।

तीखा मीठा खट्टा पानी ।
मुँह खोल गप्पे खा रहे हम।। 
चटकारा लेकर खाते है। 
ज्यादा खाने को तरसे मन।। 

घरमें बनाते गोल गप्पे। 
भैय्याजी जैसा स्वाद कहां।। 
चटकारे ले खाते  रहते ।
गंदा पानी सोचते कहां?।। 

🙏🌹स्वरचित रचना 🌹🙏
🙏🌹पद्माक्षि शुक्ल 🌹🙏
[18/10, 1:04 pm] श्रीवल्लभ अम्बर: नमन मंच,
  विषय गोलगप्पे,,
   
     ये गोलगप्पे है गोलमोल।
     ऊपर से गोलमटोल,
      अंदर पूरी पोल्मपोल।
      फिर भी यह,अपने अंदर,
      आलू, बूंदी,खट्टा पानी,
       सब भर लाता है,,।
       अपने अंदर पा कर दर्द,
       सबको स्वाद दिलाता है।
        सबका आनंद उसका जीवन है।
         स्वयं कुर्बान हो कर,
         सबको आनंद दे जाता है।
          फिर भी गोलगप्पा,
          अजर, अमर, कहलाता है।

    🙏 श्रीवल्लभ अम्बर🙏
[18/10, 1:14 pm] विजेन्द्र मोहन बोकारो: मंच को नमन
विषय:-- *बाल कविता गोलगप्पे*

*बनारसी गोलगप्पे खा* 
*लो चुन्नू मुन्नू मैं आ गया हूं*!!

उठो दादू उठो गोलगप्पे चाचा आ गये है।
उठो दादू उठो रुको चाचा दादू आ रहे हैं।।

आओ चुन्नू मुन्नू अपने अपने हाथों में दोना 
लेकर खड़े हो जाओ खट्टा मीठा पानी पुदीना पानी जलजीरा पानी सबको एक तरह के दूंगा तब चाचा खट्टा पानी दो।
जी भर कर खाओ पैसा का चिंता ना करो
अंत में तुम्हारे दादू खा कर पैसा देखें।।

ले ले बेटा बेटी सूखी पूरी चटपटा खा ले।
जाके मम्मी से पूछो,मै आंगन में आकर खिला दूंगा मेरी तो चाची है शर्माए नहीं, जाओ चाचा अंदर आंगन में।

अंदर जाकर गुपचुप खिलाने के बाद दादू खाया वोले कल भी आना बच्चों जब तक रहेंगे रोज आकर खिला देना चुन्नू मुन्नू सुनकर खुश होकर दादू के गले लग गए।

शादी विवाह समारोह की शान है गोलगप्पे बच्चा हो या बुढे खाने में अपने को रोक नहीं पाते।

विजयेन्द्र मोहन।



गोलगप्पे का नशा सब उम्र पर को भाए।
इसके कितने नाम है गुपचुप, पानी पुरी।।
[18/10, 1:26 pm] रवि शंकर कोलते क: सोमवार दिनांक १८/१०/२१
विधा*****बाल गीत
विषय***#°°°°गोल गप्पे°°°#
                       ^^^^^^

आओ चुन्नू मुन्नू हम खाएंगे गोलगप्पे ।
खाते-खाते गोल गप्पे  मारते हैं गप्पे ।।
खट्टे मीठे गुपचुपके बच्चे सब दीवाने । 
बूढ़े भी जवान  बने खाकर गोलगप्पे ।।१

गोलगप्पे खानेका मजाही कुछ और है ।
खाने के लिए करते  सारे मस्ती शोर है ।।
कोई नहीं कहता कि ये मुझे नहीं पसंद ।
हरेक  खाने वाला हो जाता  सराबोर है ।।२

हम  जब  भी  शादी  ब्याह में जाते हैं ।
अक्सर  मेगी  गोल  गप्पे ही  खाते हैं ।।
मुंह में  पानी  आता  है देख गोलगप्पे ।
गर्दी के मारे हम बच्चे खा नहीं पाते हैं ।।‌३

जब जब  गांव  हमारे  लगता है मेला ।
पांडे तिवारी का  याद आए हमें ठेला ।। 
घेर लेते  हैं  बच्चे  सब खोंचेवाले को ।
कभी धक्कामुक्की  कभी हो झमेला ।।४ 

सुन गोलू तू पहले से ही है गोल मटोल ।
ज्यादा खाके तू और न बन जाना गोल ।।
सभी कहने लगे न जादा खा गोलगप्पे ।
वरना   गोलू  तू   बन  जाएगा  रे ढोल ।।

प्रा रविशंकर कोलते
     नागपुर
[18/10, 1:37 pm] वीना अडवानी 👩: गोलगप्पे
*******

अरे हम रह गये तब हक्के बक्के
जब देखा खा रही महिला गोलगप्पे
भूल गई लबों की लिपिस्टिक मेकअप
गिरा मुंह से पानी ले हुए भौंचक्के।।

अरे हम रह गये तब हक्के बक्के
जब देखा खा रही महिला गोलगप्पे

शादी ब्याह में भी टूट पड़ती ये भुखड़
जैसे इन महिलाओं ने कभी ना चखे।
धक्का मुक्की एसे करती जैसे हो
कहीं फ्री की कोई सेल लगी हटके।।

अरे हम रह गये तब हक्के बक्के
जब देखा खा रही महिला गोलगप्पे

जितना देती ना लिफाफे में नेक
उससे अधिक वसूल करना चाहती
चाट पर चाट कटोरी कितना ये
गटके, फिर भी गोलगप्पे चाहती।।

अरे महिलाओं भरे बाजार में 
मुंह फाड़ी शर्म ना आती ।।
महिलाएं बोली हक हमारा ही 
गोलगप्पों पर तुम्हें ये समझ ना आती।।

वीना आडवानी तन्वी
नागपुर, महाराष्ट्र
*******************😋😋😋😋
[18/10, 1:57 pm] हेमा जैन 👩: विषय :- *गोल गप्पे *


गोल- गोल गोलगप्पे
    लगते है ये कितने अच्छे,

खट्टे -मीठे से ये लगते
       सबको ये अच्छे लगते,

खा कर बचपना लौट आता
        जैसे ही ये जाते मुँह में

छोटे-बड़े से ये गोलगप्पे
     लगते है हमेशा से अपने

उदासी दूर भगाये पल में
      मुँह में पानी लाते पल में


अमीर -गरीब सब चाव से खाते
ऐसे है ये प्यारे गोलगप्पे

हेमा जैन (स्वरचित )
[18/10, 2:03 pm] रजनी अग्रवाल जोधपुर: शीर्षक "गोलगप्पे"

आओ आओ गोलगप्पे खाएं, 
गोल गोल देख जी ललचाए , 
मन भरमाए , 
मुंह में पानी भर भर जाए , 
आओ आओ गोलगप्पे खाए,,,,,
खट्टा मीठा तीखा पानी,
 याद करें तो मुंह में आए , 
पिचके भी गप्पे हमको भायें ,
सौंठ, चटनी, दही से, मिलाकर चाट बनाएं, आओ आओ गोलगप्पे खाएं,,,,, 
मौज मनाएं मिलकर खाएं , 
ठेले की घंटी पर भागे,  एक दूजे से निकले आगे ,
 गोल-गोल देख मन ललचाए ,
 आओ आओ गोलगप्पे खाएं  , ,,,,,
हर प्रांत में इसको खाते , 
शादी ब्याह और पार्टी में भी, 
 गोलगप्पे भी होते ,
भीड़ भाड़ में होते बड़े-बड़े लोग भी दिखते, 
 कहीं इसे पानीपूरी कहते , 
कहीं कहते पानी बताशे , 
देखो भाई गोलगप्पे के तमाशे , 
 जिसने ना खाए वह भी ललचाए , 
खाकर भी खाते जाए
आओ आओ गोलगप्पे खाएं,,,,,,

स्वरचित बालगीत रजनी अग्रवाल
  जोधपुर
[18/10, 2:10 pm] ओम 👅प्रकाश पाण्डेय -: गोलगप्पे (बालगीत) ----- ओमप्रकाश पाण्डेय
चाटवाले चाचा रोज शाम को
मेरे गली में लेकर ठेला आते
चाट पकौड़ी टिकिया और
गोलगप्पे भी वह लेकर आते
हम सब बच्चे बड़े चाव से खाते....... 1
सबसे बढ़िया गोलगप्पे होते
खट्टी मीठी चटनी होती
खट्टा  मीठा पानी इसका होता
भीतर इसके आलू मटर भी भरता
बड़े प्रेम से सबको खिलाता........ 2
पांच रूपए के पांच गोलगप्पे
खट्टे मीठे गोलगप्पे खाओ
दीदी भाभी माता जी आओ
साथ में अपने बच्चों को लाओ
जोर जोर से वह आवाज लगाता ...... 3
गोलगप्पा है बड़ा निराला
जो खाता इसको उसे मजा आता
नहीं खाता तो मुंह से लार टपकता
जितना खाओ उतना ही मन करता
गोलगप्पे का पानी मैं मांग मांग कर पीता....... 4
जब भी जाओ गोलगप्पे के  ठेले पर
मोहल्ले की चाची दीदी भाभी
सभी घेरे रहती हैं उसको
खाती हैं  चाट पकौड़ी गोलगप्पे
खाने से ज्यादा सब शोर मचाती........ 5
( यह मेरी मौलिक रचना है ----- ओमप्रकाश पाण्डेय)
[18/10, 2:10 pm] 👑सुषमा शुक्ला: गोलगप्पे ,,,

बचपन से अभी तक गोलगप्पे खाते आ रहे,,,,, खट्टी-मीठे पानी से चटकारे लेते जा रहे।।

कभी गोलगप्पे में बूंदी भरें कभी आलू,,
चाव से खाते गोलू मोलू और लालू।।
  
पूरा मुंह खोल कर गोलगप्पे गप्प कर जाते,,,,,,
आखिरी में दही पापड़ी चाट का,,,,,  गोलगप्पा भी मांगने से बाज नहीं आते।😁
चटकारे लेकर खा जाते😁

गोलगप्पे वाले को हर महिला भैया कहती"""
उसकी पत्नी के लिए खतरा टल जाता,,,,
 और वह सुख से रहती।।


सुषमा शुक्ला 

स्वरचित
[18/10, 2:53 pm] रामेश्वर गुप्ता के के: ।गोलगप्पे। 
गोलगप्पे यह गोल गोल, 
खाने में कितने है अच्छे। 
देखते ही मुंह में पानी आये,
कोई कहता पानी के बतासे।।
गोलगप्पे...................... 1 
चाट का ये राजा कहलाता,
स्वाद में होते यह बेमिसाल। 
किसी भी चौराहे चले जाये,
नुक्कड़ की दुकान में दिखते।। 
गोलगप्पे..................... 2. 
कोई इन्हें पानी पूरी कहता, 
एक पत्ते में छै नग मिलते। 
एक पत्ते से शुरूआत करते, 
दो पत्ते तक जरूर पहुंचते।। 
गोलगप्पे...................... 3
शादी में पहला स्टाल लगता, 
पहले पानी पूरी से पेट भरते। 
चाट का स्वाद यह बढा देता, 
पनपसंद चाट यह गोलगप्पे।। 
गोलगप्पे...................... . 
स्वरचित, 
रामेश्वर प्रसाद गुप्ता ।
[18/10, 3:44 pm] कुम कुम वेद सेन: विषय गोलगप्पे

गोलगप्पे की दुकान
से हो रही मेले की पहचान

जो मेले घूमने जाता
पहले गोलगप्पे खाता

हरी चटनी लाल चटनी
खट्टा पानी मीठा पानी

दही गोलगप्पे पानी गोलगप्पे
जी भर कर खाओ गोलगप्पे

उम्र चाहे कोई भी हो
सब के मुंह में आ जाते पानी

चाची हो या भाभी
दादी हो या नानी

सबकी पसंद है गोलगप्पे
गली-गली लगती है ठेलें

ठेले पर लगती है मेले
सब की गिनती अपनी-अपनी है

हाथ में दोना मुंह में पानी
कितना कह लो है गंदे पानी

फिर भी भर जाते मुंह में पानी
बड़े चटपटे लगते हैं गोलगप्पे

खाते जाओ खाते जाओ
गोलगप्पे का आनंद उठाते जाओ

गोलगप्पे की ठेले की कभी
बंद होती नहीं दुकान

सदा चलती रहती है
गली का ठेला हो या मॉल की सजी-धजी दुकान

कुमकुम वेद सेन
[18/10, 3:47 pm] सरोज दुगड गोहाटी: * अग्नि शिखा काव्य मंच *
* बाल गीत - गोलगप्पे *
* सोमवार - १८/१०/२०२१/

गोलगप्पे का ठेला गली में आया ,
टन- टन घंटी बजाए 
बच्चे गोलगप्पे खाने को ललचाए !
बड़ों बुढ़ो के भी मुंह में पानी आए !
खूब करारे फूले -फूले सबको भाए ,
 इमली वाला पानी मूंँह में पानी लाए!
धनिया ,पुदिना , हरी मिर्च, अदरक ,
बीसों मसाले पानी चटपटा बनाए !
आलू का चोखा , घुघनी ,बुंदी भर-भर ,
सी सी कर सब दोने  चट कर कर जाए !
बच्चे, युवतियां महिलाएं बुढ़ो का भी मन ललचाए ?
जब दोना ले लेते हाथ में फिर धिरज नहीं रख पाए ,
सारे पकवान मिठाई भैया पानी पुरी सब पर भारी भैया!
पानी बताशे ,पुचका , पानी पूरी गोलगप्पे ,
खाते खाते मुँह फूल के हो जाते  कूप्पे !
एक मसाला पूरी भैया खूब निम्बू निचौड़ के देना ,
थोड़ी पापड़ी मीठी सौंठ दही डाल कर देना !
दौना चाट- चाट के सखियाँ स्वर्गिक सुख का आनंद लेना !!

सरोज दुगड़
खारुपेटिया 
असम 
🙏🙏🙏
[18/10, 3:54 pm] 💃rani: अग्निशिखा मंच
विषय---गोलगप्पे 
विधा---कविता 
दिनांक----18-10-2021 

गोलगप्पे 

पानी पतासे, पानी पुरी, पुचकी या कहो गोलगप्पे,
छोटे-बड़े सभी की पसंद सदा रहे हैं गोलगप्पे ।
मीना,शीना,राजू,दीपू सब मिलकर बाजार जाते हैं, गोलगप्पे के ठेले पर सबसे पहले खड़े हो जाते हैं ।

खट्टा मीठा पानी इसका सबको बहुत ही भाता है,
आलू,बूंदी का मसाला, इसका स्वाद बड़ा जाता है ।
कहीं पुदीने,इमली का खट्टा मीठा पानी तो,
कहीं हींग का, नींबू का पानी भी मिलता है ।
जल जीरे का पानी, लहसुन का पानी भी मिलता है ।
अलग-अलग हर पानी का आता जब स्वाद,
तब इसकी कीमत बढ़ जाती है । 

गोल गोल आकार है जिस कारण गोलगप्पा कहलाए,
जब भी कोई घूमने जाए यह सबके मन को ललचाए ।जहाँ खड़े हों गोलगप्पे के ठेले 'रानी'
                           भीड़ वहाँ लग जाती है,
और  खड़े  इंतजार में कब अपनी  बारी आती है ।
 ठेले वाले से कोई मीठा कोई तीखा की फरमाइश बताएं, बच्चे हो या बड़े सब खा कर गोलगप्पे खुश हो जाएं ।

                            रानी नारंग
[18/10, 4:08 pm] रागनि मित्तल: जय मां शारदे
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 अग्निशिखा मंच 
दिन-सोमवार 
दिनांक -18/10 /2021 प्रदत्त विषय- गोलगप्पे बाल गीत

छोटे बड़े सभी खाते हैं बूढ़े हो या बच्चे। 
गोलगप्पे सबको बहुत स्वादिष्ट लगते,सबको लगते अच्छे।
 ₹2 मां से लेकर भागे पानीपुरी के ठेले में।
लड़कियां ढूंढ रही है गोलगप्पे का ठेला सावन के इस मेले में। 
चटकारे ले ले कर खाती पानी और मांगती हैं ।
खट्टी मीठी चटनी उसमें ऊपर से वो डालती हैं। 
गोल गोल गोलगप्पा  सबके मनको भाता है।
खुद पेट फोड़ता अपना और सब को ललचाता है। 
इसकी भी देखो अलग कहानी,
खट्टा तीखा खुद सहता,
 पर सब की भूख मिटाता है।

रागिनी मित्तल
 कटनी ,मध्य प्रदेश
[18/10, 4:18 pm] डा. बैजेन्द्र नारायण द्िवेदी शैलेश🌲🌲 - वाराणसी - साझा: मंच को नमन
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गोलगप्पे (बाल कविता)

वह आया गोलगप्पे वाला
ठेलिया पर रखे हैं थाला
उसमें सजा हुआ गोलगप्पा
ड्रम में भरा है खारा पानी नमक मिर्चा धनिया जीरा से बना हुआ स्वादिष्ट है व्यंजन
एक भगोन ने में रखे हैं
मसल मसल कर पक्का आलू
एक भगोने  ने में रखे हैं।
छोला उबला हुआ मटर का अलग से रखी है ।
बर्तन में नमक मिर्च और धनिया बुक्का ।
खाएंगे हम सब गोलगप्पा।
सबसे छोटे  नाती ने आ
दरवाजे पर उसको रोका ।
सब बच्चों ने एक साथ मिल खाया खट्टा मीठा गोलगप्पा। और तालियां बजा बजाकर अच्छा है ,उस पर लगाया ठप्पा।।
यद्यपि उसमें तीखा पानी था बच्चों की भी मनमानी जमकर खूब खाए गोलगप्पा बोले आकर पैसा दे दो पप्पा।।
सो रुपए का खाया हमने, बहुत मजा ही आया हमको, अब जब जब वह सामने घर के सामने आएगा
हमें से हर कोई खाएगा पापा बोले नहीं देंगे पैसा,
बच्चे बोले--" भला होगा कैसे ऐसा बच्चों की बात आप मानेंगे हमारी खुशी के लिए सब कुछ करेंगे।।"
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डॉ ब्रजेन्द्र नारायण द्विवेदी शैलेश वाराणसी
[18/10, 4:31 pm] +91 70708 00416: मंच को नमन 🙏
विषय-गोलगप्पे
बाल कविता
18/10/21

        गोलगप्पे वाला
*********************
देखो  जल्दी -जल्दी आओ
गोलगप्पे वाला है आया
देख सबका मन ललचाया
गोलू आओ सोनू आओ
चलो उसे बुलाते हैं
कहीं और न चला जाये
गोलगप्पे का है स्वाद निराला
जो है खाता हो जाता  उसका दीवाना
ये गोलगप्पे हैं गोल-गोल
 मुंह में डालो हो जाते घोल-घोल
आलू, मटर,इमली का पानी
जब भर जाता इसके अन्दर
बड़े चाव से खाते बूढ़े और बच्चे
गोलू ने कहा-ऐ गोलगप्पे वाले भैया पहले मुझे खिलाओ
फिर मुझसे पैसे पाओ
अब  हाथ में दोना थमाया
गोलगप्पे उसमें झट से डाला
गोलू-मोलू ने गाल फुलाया
 वाह इसका स्वाद है चटपटा
थोड़ा खट्टा और मीठा और डाल दो भैया
पुदीना का  मसालेदार पानी भी डालो भैया
अब तो गोलगप्पे घर में भी  बनाते हैं
पर गोलगप्पे वाले भैया जैसा स्वाद कहां

 डॉ मीना कुमारी परिहार

पहले
[18/10, 4:32 pm] +91 70708 00416: मंच को नमन 🙏
विषय-गोलगप्पे
बाल कविता
18/10/21

        गोलगप्पे वाला
*********************
देखो  जल्दी -जल्दी आओ
गोलगप्पे वाला है आया
देख सबका मन ललचाया
गोलू आओ सोनू आओ
चलो उसे बुलाते हैं
कहीं और न चला जाये
गोलगप्पे का है स्वाद निराला
जो है खाता हो जाता  उसका दीवाना
ये गोलगप्पे हैं गोल-गोल
 मुंह में डालो हो जाते घोल-घोल
आलू, मटर,इमली का पानी
जब भर जाता इसके अन्दर
बड़े चाव से खाते बूढ़े और बच्चे
गोलू ने कहा-ऐ गोलगप्पे वाले भैया पहले मुझे खिलाओ
फिर मुझसे पैसे पाओ
अब  हाथ में दोना थमाया
गोलगप्पे उसमें झट से डाला
गोलू-मोलू ने गाल फुलाया
 वाह इसका स्वाद है चटपटा
थोड़ा खट्टा और मीठा और डाल दो भैया
पुदीना का  मसालेदार पानी भी डालो भैया
अब तो गोलगप्पे घर में भी  बनाते हैं
पर गोलगप्पे वाले भैया जैसा स्वाद कहां

 डॉ मीना कुमारी परिहार
[18/10, 4:43 pm] चंदा 👏डांगी: $$ गोलगप्पे $$  

पापा अब तो मुझे खिलादो आप
गोलगप्पे बड़े मजेदार 
कितने अच्छे लगते 
कुरकुरे गोल गप्पे 
इमली का स्वादिष्ट पानी
भरा है उसमे आलु का मसाला 
पानी मे हिंग लगती मजेदार
पापा आज चलो बाजार 
अब तो कोरोना दिखता नही 
कब तक घर मे बन्द रहेंगे 
और कितना हम सहेंगे 
पापा मुझको गोलगप्पे खिलादो 

चन्दा डांगी रेकी ग्रैंडमास्टर 
रामटेकरी मंदसौर मध्यप्रदेश
[18/10, 4:49 pm] सुरेन्द्र हरडे: अग्निशिखा मंच को नमन

आज की विधा :- बालकविता

विषय:-  *गोलगप्पे*
           0️⃣0️⃣0️⃣0️⃣0️⃣

बारह महीने मेरी पूछ रही थी
यह दुनिया मुझे प्यार से कहते गोलगप्पे, खट्टे मीठे गोलगप्पे बच्चों से बूढ़े तक खाते जाते।१।

पिंकी का जन्मदिन था ड्रेस खरीदने बाजार गए, खरीदारी हुई
फिर दिखा तिवारी का गोलगप्पे का ठेला, गोलगप्पे खाने गए।२।

 पिंकी चिंटू को पसंद के गोलगप्पे तिवारी भैया ने के हाथ में प्लेट दी शुद्ध पानी में दिए गोलगप्पे, खट्टे मीठ्ठे गोलगप्पे , सबने खाए।।३।।

इसको बोलते गोलगप्पे या पानी पूरी या पुचका  कोलकाता में खाते थे अमिताभ बच्चन गोलगप्पे गरीब हो अमीर  सबको भाते।४।

खट्टी मीठी  पानी पुरी बड़ी लगती स्वादिष्ट देखने से ही मुंह में आता पानी मुंह खोलो अंदर जाती सीधी
कितना भी खाओ नहीं भरता मन
यह हमारे गोलगप्पे, गोलगप्पे।५।

सुरेंद्र हरड़े
नागपुर
दिनांक १८/१०/२०२१
[18/10, 4:52 pm] जनार्दन शर्मा: *दास्तान-ऐ-गोलगप्पे* 😊😊 हास्य रचना 
एक दिन स्कूल  कि छोरियों ने मिलकर,
*बाहर गोलगप्पे खाने का मन बनाया*
मानो पुरा स्कूल  ठेले के आसपास आया 

रंग बिरंगे परिधानों से सजी वो नवयौवनायें 
उस चाटवाले को घैरकर,मन,ही मन ललचाये,
मानो जैसे भोजन देख,कौवे, कांवकांव चिल्लाए
  
ठेले वाला भी उन्हें  देखकर पहले तो चकराया,
रख के संयम उसने फिर,सबको दौना पकडाया,
पर सब कि एक साथ चिल्लाहट से वो घबराया,

हर बार एक नई तरुणी,कोमल हाथ को बढ़ाती,
वही दुजी कोई,नये स्वाद कि फरमाइशी बताती,
तो तिसरी सी,सी,कर बहुत मिर्ची है चिल्लाती
एसेही सब मिल,गोलगप्पे वाले का बैंड बजाती,

सब ने मिलकर पेट भर, खूब गोलगप्पे दबायें,
पर खाने का बिल देख,सब के सिर चकरायें
बिल के पैसे कम पड़ गये,उधार न किया जाये,

ठेलेवाला नगद पर अड़ गया,नगद ही दे के जाये
नहीं तो अपने सब मोबाइल वहां धर के जाये, 
सभी के चेहरे पे उड़ी हवाईयां पैसे के पड़े लाले, 

तभी वहां से गुजरी प्रिंसीपल,सबके पैसे चुकाये
नाक कटादी स्कूल कि,सबको वो सजा सुनाए,
खड़ी हो गई बिचारी, *जैसे लौट के बुद्धू घर को आये*    😄😄😄😊
स्वरचित 
*जनार्दन शर्मा*
( अध्यक्ष मनपसंद कला साहित्य मंच इंदौर  )
[18/10, 4:57 pm] पूनम सिंह कवयित्र� � इशिता स� �डीला: अग्नि शिखा मंच 
विधा बाल कविता 
विषय गोलगप्पे 
कल तो बड़े लगाए थे गप्पे, 
बड़े बड़े थे वीर किस्से 
आज खिलाओ गोल गप्पे 
कहा लेते हो कितना तीखा 
जरा सा कड़वा, फिर क्यों चीखा, 
खट्टे पे  मंन चल गया सबका 
खिला दो गोल गप्पे हमका, 
थोड़ा रखना जीरा पानी, 
थोड़ी अमचूर रसीली हो,. 
हा बड़े पतीले से खिलाना, 
जिसमें हींग भी बड़ी हो, 
आखिर में मीठी  चटनी का 
खाऊगी कर के मुँह, बड़े बड़े 
अब्ब्ब ना वादे से हटो  पीछे 
खिलl दो  मुझे आज गोलगप्पे, 
इशिता सिंह, शिक्षिका
[18/10, 5:50 pm] रानी अग्रवाल: गोलगप्पे
१८.१०.२०२१.सोमवार।
विधा_बालगीत।
शीर्षक_गोलगप्पे।
मुन्नू आओ,चुन्नू आओ,
मुनिया रानी, तुम भी आओ,
आकर गोल गप्पे खाओ,
खाकर सी_सी शोर मचाओ।
बीच छेद कर इसे फोड़ते,
मीठी चटनी,मूंग,आलू भरते ,
फिर तीखे पानी में डुबोते,
बड़ा मुंह खोलकर इसको धरते।
जैसा जी चाहे कर लो,
जो रुचे वो अंदर भर लो,
आलू, उबली मूंग या रगड़ा,
खाकर कभी न करो झगड़ा।
खुशबू इसकी दूर से आए,
देख के मुंह में पानी आए,
होते कितने मीठे,तीखे,खट्टे,
लगते बड़े ही मजेदार चटपटे।
जी करता और_ और खाएं,
ज्यादा खाकर तो पछताएं,
सो भैया, थोड़ी में मनाओ मोज,
और चार_छह बस खाओ रोज।
स्वरचित मौलिक बालगीत____
रानी अग्रवाल,मुंबई,१८.१०.२१.
[18/10, 6:13 pm] anita 👅झा: बाल गीत -गोलगप्पें 
गोलगप्पें सा मुँह फुलायें हों
हर सवाल का जवाब तुम हों 
तुमने ही सिखाया मुझे है 
माता दुनिया की पहली गुरू हों 

मुस्कानो से भर जवाब मुझे दे दो 
जब फटे नोट चल सकते है
फटी जींस चल सकते है । 
ममत्व ज्ञान दीप सिखाती है ।

मन से बड़ा ना कोय गीत सुन 
बऊआ को गले लगाती है 
मुस्कानो से भर कहती है 
मेरे गोलगप्पें सा प्यारा बऊआ है 
अनिता शरद झा
[18/10, 6:34 pm] डा. अंजूल कंसल इन्दौर: गोलगप्पे- बाल कविता 

चलो आज गांधी हाल के मेले चलेँ
भर-भर गोल- गोल गोलगप्पे खाने 
नाम सुनते ही मुंह में आ गया पानी
ज्यादा मिर्च से याद आएगी नानी।

चिंटू मिंटू चुनिया मुनिया बेबी शेबी
गोल-गप्पे वाले को घेर कर बोलीँ-
शर्मा भैया, जल्दी खिलाओ गोलगप्पे 
एक दो तीन चार,अब रुक नहीं सकते।

उधर से प्रिंसिपल मैडम आ गुजरीँ 
पास बुलाकर बच्चों से प्यार से बोलीं-
"बेटा इससे कोरोना फैलने का डर है
देखो इसके हाथ-नाखून साफ नहीं है।

सुनो  रे  गोल- गप्पे  वाले  भैया 
हाथों में दस्ताने पहन लो रे भैया 
इन  मटकियों को भी  ढ़क लो  रे 
बच्चों को साफ जलजीरा पिलाओ रे।

हां मैडम जी!कह,उसने झट दस्ताने पहने 
सोशल डिस्टेंसिंग बना बच्चों को खिलाए
सब बच्चोँ ने खूब खुश होकर भर-भर खाए
खाने के बाद मास्क लगाकर घर को भागे। 

डॉक्टर अंजुल कंसल "कनुप्रिया"
18-10-21
[18/10, 7:00 pm] आशा 🏆🏆जाकड इन्दौर: गोलगप्पे अरे भई गोलगप्पे 
खाकर होते फूल के  कुप्पे 
सब मुंह फाड़ के उन्हें खाते
पर मुझे बिल्कुल नहीं भाते

 पहले उसमें इक छेद करते
 फिर उसमें आलू छोले भरते
 खट्टे -मीठे जल में उसे डुबोते 
 दोने में रख फिर प्रेम से खाते 
 पर  मुझे बिल्कुल नहीं भाते 


लोग बाजार दौड़  खाने जाते 
हर्षित होकर वे शान से जाते 
जैसे बड़ा काम करने को जाते
खुश गोलगप्पे ठेले पर पहुंचते 
पर मुझे वे बिल्कुल नहीं भाते

मैं जब भी खाती हूं गोलगप्पे 
घर पर करती हूं तैयारी पहले
हरे धनिया पुदीना की चटनी
बनाती हूँ खट्टी- मीठी चटनी 
फिर पानी में प्रेम से मिलाती 
तब मैं गोलगप्पे प्रेम से खाती 


आप भी कभी मेरे घर आएँगे 
आपको गोलगप्पे खिलाऊंगी 
अपने हाथों से बनाकर चटनी 
प्रेम से  गोलगप्पे  खिलाऊंगी
आप सभी का स्वागत है आइए
 गोलगप्पे खाइए और खिलाइए


आशा जाकड़
[18/10, 8:10 pm] 💃💃sunitaअग्रवाल: शीर्षक__ गोल गोल  गप्पे


  जायकेदार रसदार मजेदार 
गोल गोल, गोल गप्पे 
आओ आओ बच्चो  ,
मैं लाया , अनेकों स्वाद  में गोल गप्पे, 
खट्टा मीठा, तीखा, पुदीना हींग
जलजीरा, 
सोनू आओ, मोनू आओ, गोलगप्पे खाओ,

जायकेदार ,रसदार, मजेदार, स्वाददार 
प्यारे बच्चों रखो स्लेट, ये पकड़ों प्लेट, 
आओ आओ  बच्चों मजे से खाओ ,
कैसा लोगे खट्टा मीठा, तीखा पुदीना , जलजीरा 

बच्चों तीखा पानी  लो , नमकीन लो, नही नही खट्टा मीठा लो , अरे अरे हींग जीरा पानी वाला गोलगप्पे लो ,
देखो देखो आया ना मजा ,
सी सी करते जा रहे हो , और और दो कहते जा रहें हो,  
रसदार मजेदार स्वाददार  बच्चों। और लो और लो  , 
माँ  ,बस यही एक ऐसी डिश है जो हाथ में पकड़े सामने कर और भये एक और देना , एक गोलगप्पा, और और_______
जायकेदार रसदार मजेदार स्वाद दार ।

सुनीता अग्रवाल इंदौर 🙏🙏

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