Friday, 17 September 2021

अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच के ब्लॉक पर आज आप सब लोग भक्ति गीत पढ़िए और आनंद ले डॉ अलका पांडे मुंबई

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17/09, 7:08 pm] Alka: ब्रह्मा विष्णु ओ और सदा शिव सब मैं तेरी शक्ति माँ 
कभी तू तब गौरी माँ  कभी तू कमला मां कभी काली का रुप माँ !!
माँ तू ही बता कैसे तुझ को रिझाऊँ । 
कदम कदम पर खाई बड़ी भारी खाई ।.
दुखों ने घेरा है संताप का डेरा है 
किस विधी चल कर आऊँ । 
तेरी मर्ज़ी से ही सब काज बने 
तेरी मर्ज़ी से ही सबके भाग्य बने 
ना ना प्रकार के खेल खिलाती माँ ।
तेरी महिमा कोई न जाने , चुटकी में काम बनाती माँ ।।
तू ही शक्ती तू ही भक्ती तू ही विघा तू बसी हर नारी में 
माँ राम भी तू रावण भी तू ही युद्ध का चक्रव्युह रचाती ।।
कभी ज्वाला बन सागर उदर समाती ,कभी पूजा की पावन ज्योत बन प्रकाश फैलाती ।।
कालचक्र का पहिया तेरे हाथों में 
जब जिधर देखे उधर नाच नचाती ।।
चली आती हो शक्ती बन नवरात्री में ,अंखड ज्योत जहां जलती , वहीं के सब पाप मिटाती । 
मनोकामना सबकी पूर्ण करती ।।तुम मस्तक का चंदन हो फूलों की बगिया हो । 
माँ तुम सब कुछ हो सारी दुनियाँ हो । 
माँ चांद जैसी शीतल मख़मल सी नर्म । 
माँ दुर्गा अवतर्णी माँ सबकी वैतरणी , माँ धर्म माँ कर्म ।।
सुख दुख के भंवर में फँसी जीवन नैया । 
कभी डूबती कभी उबरती कोई नहीं खैवेया ।।
भय समाया ह्दय में सुध बुध खोई 
याद कर मैया तुम्हें बार बार फूट फूट कर रोई ।।
पाप पूण्य का चक्कर समझा दे मैया । 
धर्म कर्म का ज्ञान बताते मैया ।।
जीवन सफल बना दे मैया 
कुछ शक्ती मुझ में भर दे मैया 
डॉ अलका पाण्डेय मुम्बई
[17/09, 7:10 pm] सुरेन्द्र हरडे: अग्नि शिखा मंच  मुंबई
    भक्ती गीत

        *राम भजन*

छोड़ दे बुराई त्याग दें अविचार 
   कर भजन प्रभु का,
             करले बेड़ा पार ।।धृ

प्रभु भजन से कभी होती नहीं हानी ।।
अहंकार ना कर तू मत कर मनमानी ।।
     मन में ईश्वर को  तू निहार ।।‌१

रामके मर्जी बिन  एक पत्ता भी न
हिले ।
भक्ति कर प्रभुकी सुखशांति मनको मिले ।।
     वो दुखकी नाव लगाएं पार।।२

कवि -- सुरेन्द्र हरडे 
                नागपुर
दिनांक 17/09/2021
[17/09, 7:25 pm] हेमा जैन 👩: *गणेश भक्ति गीत*


करती हूँ वंदना तेरी गणपति
करती हूँ वंदना तेरी गणपति 
रह ना जाए मेरी ये भक्ति आधी
ये भक्ति आधी,

चतुर्थी को तुम पधारे
चतुर्थी को तुम पधारे 
घर -घर आकर तुम विराजे
तुम विराजे,

दस दिवस तक सब करते अर्चना
दस दिवस तक सब करते अर्चना
भक्ति भाव की सी लहर उठती
जैसे लहर उठती,

आकर सभी तुम विघ्न हरते
आकर सभी तुम विघ्न हरते
और हमको भवपार कराते
भवपार कराते,

करती हूँ वंदना तेरी गणपति
करती हूँ वंदना तेरी गणपति
रह ना जाए मेरी ये भक्ति आधी
ये भक्ति आधी

करती हूँ वंदना तेरी गणपति


*हेमा जैन **(स्वरचित )
[17/09, 10:48 pm] आशा 🏆🏆जाकड इन्दौर: गजानन आना बारम्बार
  खुशियाँ लाना अपार ।।
विघ्नों की हर्ता, कष्टों के हर्ता हो मंगल दायक ,
प्रथम पूज्य हो शंकर नंदन हो सिद्धि विनायक,
तुमसे ही समृद्धि आवे हो सुख- शांति का भंडार।
खुशियाँ लाना अपार ।

अज्ञान का छाया अंधेरा कर सकते हो उजेरा
विपदाओं का लगा है डेरा करोना रूप  घनेरा 
करोना से सब त्रस्त हुए संकट कर दो निवार।
खुशियाँ  लाना अपार ।

काम शुरू करते हम पहले नाम तुम्हारा लेते,
वंदन करते, अर्चन करते और आरती  करते,
मोदक भोग लगाएं गजानन आशीष की बौछार।
खुशियाँ लाना अपार ।


आशा जाकड़
9754969496
[17/09, 10:54 pm] डा. अंजूल कंसल इन्दौर: गणपति आयो रे 

नाचत गावत गणपति आयो रे 
संग साथ रिद्धि सिद्धि लायो रे 

आरती थाल सजाओ रे 
स्वर्ण कलश भरावो रे 
बार-बार चँवर डुलावो रे 
नाचत गावत गणपति आयो रे-----

ढोल नगाड़े बजावो रे 
द्वारे बंदनवार लगाओ रे
 हिलमिल गीत गाओ रे 
नाचत गावत गणपति आयो रे-----

गणपति आरती गावो रे 
शुभ लाभ सथिया बनावो रे 
जगमग ज्योत जलावो रे 
नाचत गावत गणपति आयो रे------

लड्डुअन का भोग लगाओ रे 
मेवा माखन मिश्री खिलाओ रे 
पार्वती नंदन को मनावो रे 
नाचत गावत गणपति आयो रे ----
संग साथ रिद्धि सिद्धि लायो रे------ 

डा अँजुल कंसल "कनुप्रिया"
17-9-21इंदौर मध्यप्रदेश






[17/09, 11:09 am] सरोज दुगड गोहाटी: * अग्नि शिखा काव्य मंच * 
* शुक्रवार १७/ ९/ १०२१ 
* विधा - भक्ति गीत *

सदगुरू शरण में जाइए मेटे मन अंधियार,
भव के संचित कर्म मल पल में ही झड़ जाए !

 ज्ञान ,दर्शन, चारित्र, तप ले लो शरणां चार ,
 आत्मा का कल्याण मोक्ष मार्ग विख्यात !

  सुख- दुख होता सदा कृत कर्मों का खेल ,
  ईश्वर कुछ करता नहीं आत्म कृतत्व होए !

 अजर अमर है आत्मा इसका नाश नां होए ,
 मरण शील काया तेरी कब तक रखनां मोह ?

इन्द्रियों का संयम् कर चित का निग्रह होए ,
आत्मा से आत्मा का स्पर्श तूंँ परमात्मा होए !

मुक्त जीव परमात्मा आवागमन मिटाए 
सिद्ध शीला जा बैठिये आठों कर्म खपाए !

जो हम पाना चाहते वह सब है हमारे पास ,
आत्मा उद्बावरोहणं चेतना का साक्षात्कार

सुख क्या है और दुख क्या मन में होता प्रश्न ?
भोगोपभोग में सुख नहीं त्याग से मिलजाए !

महाश्रमण से गुरू मिले नंदनवन सा संघ ,
मैं हूं शरण तिहारी भव - भव के मेटो बंध !

सरोज दुगड़
खारूपेटिया 
असम 
🙏🙏🙏
[17/09, 11:16 am] Anita 👅झा: विषय -भक्ति -गीत 
*माँ सरस्वती की वंदना करता इतिहास है *
अवतरण दिवस उजालों के दीप है 
जीवन नैया भवसागर पार लागते है 
उजालों का दीप जला हिंदुस्तान है
गाँधी बापू मोदी रचित हिंदुस्तान है 

प्रेम उजालों का दीप जलाये 
आओ मिलकर दीप जलाये 
आशाओं का संचार जगाये 
मानवता का संचार जगायें 

विश्वास ,श्रद्धा ,भक्ति ,त्याग से 
रिश्तों की डोर को मज़बूत बनाए
वसुद्धेव कुटुम्बक अस्तित्व जगायें 
उजालों का दीप हिंदुस्तान जगायें 

रामचरित सत्कर्मो का इतिहास है 
नवजागरण हिन्दुस्तान मान बढ़ा है 
उजालों का दीप जला हिंदुस्तान है 
महिमा मण्डित से हिंदुस्तान है
अनिता शरद झा रायपुर
[17/09, 11:17 am] 💃वंदना: विषय भक्ति गीत
गणेश वंदना

आओ गजानन गौरी के लाला
शिव शंकर के लाल गणराज
सब देवन में देव कहाए 
महिमा तुमरी बरणी ना जाए...

आओ गजानंद गोरी के लाला
शिव शंकर के लाल गणराज।

खजराना दरबार लग्यो है
खाली हाथ भगत नहीं जाएं
जो जो मांगे सो सो दे वे
महिमा तुमरी बरणी ना जाए...

आओ गजानंद गोरी के लाला
शिव शंकर के लाल गणराज।

रिद्धि सिद्धि भरतार कहांए है
मोदक लडु़वा के भोग लगाए
भगत की नैया पार लगाएं
महिमा तुमरी बरणी ना जाए...

आओ गजानंद गोरी के लाला
शिव शंकर के लाल गणराज।

कर जोड़ू मैं करूं वंदना
गणपति लागू तुमरे पांय
दर्शन की मोरी अखियां प्यासी
तुमरी महिमा बरणी ना जाए...

आओ गजानंद गोरी के लाला
शिव शंकर के लाल गणराज।

वंदना शर्मा बिंदु 
देवास मध्य प्रदेश
[17/09, 11:17 am] रवि शंकर कोलते क: #***श्री गणेश वंदना***#
          ^^^^^^^^^^

हे लंबोदर गजमुखा ।
             हे देवा गणपति ।।
हम बालक हैं तेरे ।
             दीजे ज्ञान सुमति ।।धृ

विष्णु शिवशंकर तेराही ध्यान करते ।।
इंद्र चंद्र भी तेराही गुणगान करते ।।
हे भोलचंद्र मोरया ,
                  हरो विघ्न दुर्गति ।।१

सब देवों में तुम्ही प्रथम पूजे जाते ।।
तेरे पूजनसे सब काम सफल होते ।।
हम आये शरण तेरे ,
                  हो हमारी प्रगति ।।२

प्रा रविशंकर कोलते
      नागपुर ,३०
           महाराष्ट्र ।
[17/09, 11:23 am] रागनि मित्तल: जय मां शारदे
************
 अग्नि शिखा मंच 
दिन -शुक्रवार 
दिनांक -17/9/ 2021 प्रदत्त विषय- *भक्ति गीत* 

कैसे बताएं श्याम ने क्या- क्या नहीं दिया।
अपने गले लगा कर मुझे हंसना सिखा दिया।

खाता रहा हूं ठोकरें दर-दर की उम्र भर, 
मंजिल का मेरे श्याम ने रास्ता दिखा दिया 
अपने गले लगा कर मुझे हंसना सिखा दिया ।

गिरता रहा हूं उम्र भर उड़ने की चाह में,
बाहें पकड़ के श्याम ने चलना सिखा दिया।
अपने गले लगा कर मुझे हंसना सिखा दिया।

तड़पा हूं जिनकी चाह में रातों को जाग कर ,
सपना वो मेरे श्याम ने दिन में दिखा दिया ।
अपने गले लगा कर मुझे हंसना सिखा दिया ।
कैसे बताएं श्याम ने क्या क्या नहीं दिया ।

रागिनी मित्तल 
कटनी, मध्य प्रदेश
[17/09, 11:51 am] डा. महताब अहमद आज़ाद /उत्तर प्रदेश: "यह देश हमारे लिए परिवार हमारा"

देश हमारा है, यह देश हमारा!
उर्दू का, हिंदी का है साझा यह गहवारा!! 
देश हमारा है, यह देश हमारा! 
सारी दुनिया में सुंदर है और है न्यारा!
देश हमारा है, यह देश हमारा!! 

शांति का प्यार का है न्यारा यह वतन! 
सूफियों का साधुयों का प्यारा यह चमन!! 
शृषियों का मनीवियों का संतों का वतन!!
गानियों, विघानियों और भोगियों का यह वतन!! 
नदियोंं में बहती है यहाँ दूध का धारा! 
देश हमारा है, यह देश हमारा!! 

प्यार के सदभाव के यहाँ गीत ग़ज़ल है! 
मुहब्बत की निशानी एक ताज महल है!! 
ईद के दीवाली के है, होली के मेले! 
मिलजुल मनाते है सभी नही रहते अकेले!! 
सब एक ही ईश्वर के बंदे, गूंजता नारा! 
देश हमारा है, यह देश हमारा!! 

मंदिरों के कलश ऊँचे, ऊँची मीनारें!
सबकी भलाई चाहतें गुरूओं के गुरूदारें!! 
भाई सेभाई के यहॉ रिश्तें है पुरानें!
ताऊ,चाचा,,भाई, भाभी प्रेम के गाने!! 
यह देश हमारें लिए परिवार हमारा!
देश हमारा है, यह देश हमारा!! 

डा. महताब अहमद आज़ाद 
उत्तर प्रदेश
[17/09, 11:51 am] वैष्णवी Khatri वेदिका: रक्षा कवच

आकर्षक काया तेरी 
सुख व शांति लाए।
किरणों जैसी आभा तेरी 
उजाला लाए।
सबसे पहले पूजा तेरी 
करते हम सब।
तेरा आशीर्वाद मन-माँगी 
मुरादें लाए।

मन्दिर में धूप व दीपों की
 ज्योति जलाएँ।
अपने हृदय के मंदिर में
 झांकी सजाएँ।
रक्षाकवच वरदान पाकर 
हम न अघाते।
भोले भंडारी के सुत को 
मन में बिठाएँ।

वैष्णो खत्री वेदिका 
 जबलपुर
[17/09, 12:00 pm] आशा 🌺नायडू बोरीबली: 🌹 भक्ति गीत🌹
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जय जय गण देवा 
***************
🌷🌷🌷🌷🌷
शक्ति दायक बुद्धि विनायक गणपति देवा जय जय गण देवा ।

 एकता के प्रतीक गजानना सूप कर्ण ,सूक्ष्म नेत्र, लंबोदर विनायका जय जय गण देवा ।

एकदंत  
वक्रतुंडाय मूषक वाहक विवेकशील, सुख समृद्धि प्रदायका जय जय गण देवा ।

 बाधाओं को हरने वाले सब के तारणहार विवेकशीलता के परिचायका निर्मलता प्रदायका
हे प्राणाधार
जय जय गण देवा ।

हे जगवंदन ‌ संकर सुवन भवानी नंदन
हे , ओमकारेश्वरा
जय जय गण देवा

हे , अनंत कोटि ब्रह्मांड नायक
 शास्त्रों के ज्ञाता प्रथम पूज्य गणपति देवा जय जय गण देवा 
जय जय गणेश देवा
जय जय गणपति देवा

********************
डाॅ . आशा लता नायडू .
भिलाई . छत्तीसगढ़ .
********************
[17/09, 12:17 pm] 👑मीना त्रिपाठी: *प्रार्थना गजानन से*

हे!गजानन पधारो..पधारो घर हमारे!
बेकल हैं नयना.. बेकल हैं उर हमारे!

देखो कैसी ये हवा चली है
कैसे मन में सबके मैल जमी है
कर दो पावन हर हृदय प्रभुजी!
दो निश्छल संसार प्रभुजी!

हे!गजानन पधारो..पधारो घर हमारे!
बेकल हैं नयना.. बेकल हैं उर हमारे!

धरम - अधर्म जाति- पाती का
मन से सबके बैर हरो जी!हे!प्रभुजी!
बसे अनेकता में फिर एकता
ऐसा ही आशीष दो प्रभुजी!

हे!गजानन पधारो..पधारो घर हमारे!
बेकल हैं नयना.. बेकल हैं उर हमारे!

    *मीना गोपाल त्रिपाठी*
   *17 सितम्बर 2021*
[17/09, 12:19 pm] वीना अचतानी 🧑🏿‍🦽: वीना अचतानी 
मंच को नमन
विषय ****भक्ति गीत *****
बृज के नन्दलाल, राधा के साँवरिया 
सब दुख दूर हुए, जब तेरा नाम लिया 
मीरा ने पुकारा तुम्हें, गिरधर गोपाला
भर गया अमृत से ,विष का भरा प्याल
कौन मिटाये उसे, जिसे तुने राख लिया
जब तेरी गोकुल पर,आई विपदा भारी
एक इशारे से , सारी विपदा टाली
नैनो में श्याम बसे, मन में बनवारी
सुध बिसराय दई,मुरली की धुन प्यारी
देख रहे हो तुम, मेरे दुखड़े सारे
कब दर्शन दोगे ,नयनों के तारे।।।
वीना अचतानी 
जोधपुर ।।।।
[17/09, 12:23 pm] Anita 👅झा: भक्ति -गीत
  विषय -विसर्जन 
शीर्षक *-सिद्ध हस्त गणपति* 
आया रे आया रे गणपति आया 
सुखकर्ता विघ्नहर्ता गणपतिआया
मनोभाव संचित कर श्रद्धा भक्ति 
विश्वासों के दीप जलाने आया 

अंतरमन स्नेह प्रेम अविरल लाया 
राह दिखाते महिमा मण्डित लाया
ज्ञान तपस्या त्याग सत्कर्म आस 
लिए तिलक एकता संचार जगाया 

सूरत से सीरत भले ,उदर पुष्ट भेद 
करे , विसर्जन दुर्गुणो का 
सूक्ष्म नयन विशाल कर्ण लक्ष्य भेद 
जग में रह अस्तित्व समझाया 

प्रथमपूज्य गणपति गौरी कहलाये हो !
विदाई रंग गुलाल नित्य गीत संग !
फिर ज्ञान दीप जलाने आते हों !
हे गणपति हे सिद्धिविनायक हों
अनिता शरद झा रायपुर
[17/09, 12:51 pm] Nirja 🌺🌺Takur: अग्निशिखा मंच
तिथि-१७-९-२०२१      
विषय- भक्ति गीत
   गणपति वंदना

गणपति हो तुम शंकर के प्यारे 
मां गौरा के राज दुलारे 
कार्तिक के तुम हो भाई
ऋध्दि-सिध्दि के हो पति प्यारे

मोदक लड्डू तुमको भाये
मूषक राज तुम्हें सवारी करायें
संकट सबके हर लेते हो
भक्त जन तुम्हरे गुण गायें

गई मां स्नान को,व्दार पर तुम्हें बिठायें। 
रोका व्दार पर,शंकर जी जो अंदर जायें
काटा सिर जो शंकर जी को आये क्रोध 
गज शिशु का फिर शीश लगायें

प्रथम पूज्य कौन हो,हुआ इस पर विवाद
किसकी पूजा पहले हो,किसको हो बाद
शिव ने कहा ब्रह्मांड के लगाओ चक्कर
पहले आये मेरे पास सबकी पूजा उसके बाद

माता पिता ही ब्रह्मांड हैं मेरे
मातापिता के लगाये सात फेरे
पहले पहुंचे गौरा शंकर के पास
आशीष पाये,पहली पूजा होय तुम्हारे

नीरजा ठाकुर नीर
पलावा डोंबिवली
महाराष्ट्र
[17/09, 1:24 pm] 👑सुषमा शुक्ला: ओम गण गणपतए नमो नमः 🙏 ओम सरस्वती नमो नमःl
पावन मंच को प्रणाम🙏


*मां का भक्ति गीत*

🌹हे मां जगत जननी तेरा दर प्यारा लगे तुझसे जो प्रीत लगाई, वही हर पल नियारा लगे।🌹

असुरों का संहार किया, जग को तुमने तार दिया, भक्तों पर उपकार किया, हमने तुझको प्यार किया।🌹

तेरे दर पर जो भी आता, मांगी मुराद पूरी पाता, तेरे दर्शन के अभिलाषी, हर पल में शिश नवाती।🌹

हे जगदंबे मात भवानी ,तू ही जग की महारानी, जग की तारणहार है तू, संसार का उद्धार करें तू।🌹

तेरे द्वारे शीश झुकाऊ, कोरोना से मुक्ति पाऊ,
हर पल तेरी चौखट पर आऊं, तुझसे ही मैं प्रीत लगाऊ।🙏



सुषमा शुक्ला इंदौर
स्वरचित
[17/09, 1:41 pm] कुंवर वीर सिंह मार्तंड कोलकाता: शुक्रवार -17/ 9/ 2021
विषय -भक्ती गीत /
आज बंगाल में विश्वकर्मा पूजा हो रही है। जितने तकनीकी प्रतिष्ठान हैं सब धूम धाम से पूजा में जुटे हैं। अतः आज मैने भी विश्वकर्मा की वंदना ही लिख डाली। सबको विश्वकर्मा पूजा की शुभ कामनाएं। आज हमारे प्रधान मंत्री मोदी जी का जन्मदिन भी धूमधाम से मनाया जा रहा है। वो भी विश्वकर्मा के काम को और आगे बढ़ा रहे हैं। उन्हें भी जन्मदिन की हार्दिक शुभ कामनाएं।

विश्वकर्मा की वंदना

जय विश्वकर्मा देवा, जय विश्वकर्मा देवा।
अग जग के अभियंता, नित्य करें सेवा।
जय विश्वकर्मा देवा ,.....

वास्तु तुम्हारे पिता, धर्म के सुत जो कहलाते।
धर्म, ब्रह्म के पुत्र, ईश से हैं सीधे नाते।
जय विश्वकर्मा देवा ….

मनु, मय, त्वष्टा, शिल्पी सुत हैं और देवज्ञ कहें।
भिन्न भिन्न शिल्पों में सब पारंगत है।
जय विश्वकर्मा देवा ….

लोहा लकड़ी तांबा कांसा, ईंट और सोना।
शिल्प कला के विविध क्षेत्र में अभी बहुत होना।
जय विश्वकर्मा देवा ….

सतयुग में था स्वर्ग बनाया, त्रेता में लंका।
द्वापर में द्वारिका बनाकर बजा दिया डंका।
जय विश्वकर्मा देवा ….

रचा हस्तिनापुर तुमने ही, पुरी सुदामा की।
चक्र सुदर्शन, इंद्र बज्र, कुछ छोड़ा ना बाकी।
जय विश्वकर्मा देवा ….

शिव त्रिशूल हथियार देवताओं के हैं जितने।
आभूषण रच दिए देवियों परियों ने पहने।
जय विश्वकर्मा देवा …

पृथ्वी पर जितनी रचनाएं सब विश्वकर्मा की।
तकनीकी दुनिया में उनसे कुछ न रहा बाकी।
जय विश्वकर्मा देवा ….

विश्वकर्मा का वंदन जो नर, प्रेम सहित करते।
निशि दिन उन्नति करते, जग में नए रंग भरते। 
जय विश्वकर्मा देवा ….

© कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड, कोलकाता
[17/09, 1:41 pm] शुभा 👅शुक्ला - रायपुर: जय श्री गणेशा
🌹🌷🌹🌷🌹
हे गणराज गजानन वंदन मुसक पर बैठे सुखनंदन
पार्वती तुम्हें गणु पुकारे महादेव सुत हे अभिनन्दन

अद्भुत रूप शौर्य के स्वामी एकदंत लंबोदर ज्ञानी
महिमा क्या और कैसे सुनाए इनका जग में नहीं कोई सानी
 
क्रतिकेय सम ज्येष्ठ भ्राता ऊषा के तुम लाडले भ्राता 
 रिद्धि सिद्धि के पति परमेश्वर कहलाओ तुम बुद्धि विधाता 

मात पिता की कर परिक्रमा प्रथम पूज्य का आशीष पाय
सबकी इच्छा पूरण करते विघ्न विनाशक तुम कहलाए

लड्डू और मोदक तुम खाते सबसे ज्यादा तुम्हे ये भाते
 माता पार्वती पूजा जो करती छुपकर लड्डू चट कर जाते 

सबकी विनती सुनते दाता मेरी तरफ क्यों ध्यान ना जाता 
क्या मै इतना दुराचारी हूं मेरा संकट टाला नहीं जाता 

 गणराजा इतनी बस विनती माफ कर दो अपनी सब गलती 
 हम सब आए शरण तुम्हारी अब तो बहा दो करुणा तृप्ति

वक्रतुंड तुम महाकाय हो सूर्य के जैसे तेजोमय हो
कृपा करो प्रभु गजवदना तुम दया से भरे सागर हो।।

शुभा शुक्ला निशा
रायपुर छत्तीसगढ़
[17/09, 1:54 pm] ♦️तारा प्रजापति - जोधपुर: अग्निशिखा मंच
17/9/2021शुक्रवार
विषय-भक्ति गीत

अंदर के पट खोल......

मन्दिर के पट
बन्द तो क्या?
अंदर के पट खोल रे,बन्दे---
हरिओम हरिओम बोल।

अंदर तेरे राम रमईया
अंदर बहती गंगा मैया,
अंदर भोले नाथ विराजे
बंसी बजाये मधुर कन्हैया,
बन्द आँखे खोल, रे बन्दे....
 हरिओम हरिओम बोल।

झूठी माया,झूठी काया
मनुज इसमें क्यों भरमाया,
छोड़ के सब कुछ यही है जाना
जीवन भर जो तूने कमाया,
ग़फ़लत में मत डोल रे,बन्दे......
 हरिओम हरिओम बोल।

लाख चौरासी काट योनियां
आख़िर जन्म मानुष को पाया,
पशुओं वाले कर्म तू करता
खाया सोया और बस जाया,
मनुष्य जन्म अनमोल रे बन्दे....
 हरिओम हरिओम बोल।

लेख ललाट का मिटे न भाई
है पत्थर पे लकीर,
जो आया सो जायेगा
राजा, रंक फ़क़ीर,
 बदल जाए कब खोल रे,बन्दे......
हरिओम हरिओम बोल।।
                          तारा। "प्रीत"
                        जोधपुर (राज०)
[17/09, 1:55 pm] 💃💃sunitaअग्रवाल: गणेशजी की प्रार्थना 

रास्ते पर पड़े पत्थरो को भी ,
सरताज बनते देखा है,

गली के फकीर को भी , महाराज बनते देखा है,

गूंगे को भी जयकारा लगाते हुए देखा है,

बहरे को मंगलपाठ सुनते हुए देखा है,
झुकाकर शीश, रगड़ते नाक, 
खजराना के गनु बाबा धाम में
हर असंभव को संभव होते देखा है,

है गणेश जी , मेरे संग मेरा पूरा परिवार इस ग्रुप के सभी भाई बहन को उत्तम स्वास्थ्य, सुन्दर मन, धर्म धन दौलत से भरा पूरा रखना। 🙏
जय गनु बाबा की , खजराना गणेश धाम की।🙏
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
सुनीता अग्रवाल इंदौर मध्यप्रदेश स्वरचित 🙏🙏🌹
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
[17/09, 1:56 pm] निहारिका 🍇झा: नमन अग्निशिखा मंच 
विषय-भक्ति आराधना
दिनाँक-17/9/2021
जय माँ शारदे।
माँ शारदे माँ भगवती 
तू कौशिकी ,वागीश्वरी 
मुझे ज्ञान दे मुझे तार दे।
तू श्वेत कमलों में बसी ,
वीणा तेरे है कर सजे।
मुझे ज्ञान का वरदान दे।।माँ शारदे....।।1।।
घट घट में तेरी है छवि 
करुणा मयी ममता मयी
तेरे प्रेम से दुनिया बनी
मुझे प्रेम दे मुझे ज्ञान दे।    

माँशारदे...।।2।।
तेरे दिव्य ज्ञान प्रकाश से
तम दूर हो मिले रौशनी।
अपनी शरण में मुझको ले
माँ भारती माँ भगवती!
मुझे ज्ञान का अधिकार दे।माँ शारदे..।। 3।। 🙏🌹
निहारिका झा
[17/09, 2:37 pm] ओम 👅प्रकाश पाण्डेय -: भज मन जय सियाराम ---- ओमप्रकाश पाण्डेय
कण कण में है सीताराम
जिधर भी देखो सीताराम
सबके प्यारे सीताराम
सबके तारक सीताराम
भज मन जय सियाराम...... 1
दशरथ के प्यारे सीताराम
कौशल्या के प्यारे सीताराम
लक्षमण के प्यारे सीताराम
भरत शत्रुघ्न के प्यारे सीताराम
भज मन जय सियाराम......... 2
केवट के तारक सीताराम
शबरी के तारक सीताराम
जटायु के तारक सीताराम
सब भक्तों के तारक सीताराम
भज मन जय सियाराम....... .. 3
भजो नाम बस सीताराम
ध्यान में रखो बस सीताराम
सपने में भी बस सीताराम
सबके भगवन बस सीताराम
भज मन जय सियाराम........... 4
निशदिन ध्यान करे बजरंगी
निशदिन ध्यान करे महादेव
ब्रह्मा नारद आरती गावें
देवों के देवाधिदेव बस सीताराम
भज मन जय सियाराम......... 5
( यह मेरी मौलिक रचना है ----- ओमप्रकाश पाण्डेय)
[17/09, 2:42 pm] कुम कुम वेद सेन: भक्ति गीत
जय राम श्री राम जय राम श्री राम
कौशल्या के लाला अयोध्या के राजा
जय राम श्री राम जय राम श्री राम
कष्ट मिटाए दुख हटाए
जय राम श्री राम जय राम श्री राम
जग को बसाए जग को बनावे
जय राम श्री राम जय राम श्री राम
नाम तुम्हारे लेने से सबका हो कल्याण
जय राम श्री राम जय राम श्री राम
नाम जपे सो पाये नैया पार
जय राम श्री राम जय राम श्री राम
दीन दयाला पूर्ण करें सकल मनोरथ
जय राम श्री राम जय राम श्री राम
केवट का तारणहारा सुग्रीव का मदद हारा
जय राम श्री राम जय राम श्री राम
लंका विनाशक विभीषण सहायक
जय राम श्री राम जय राम श्री राम

कुमकुम वेद सेन
[17/09, 2:57 pm] 👑पदमाकाक्षी शुक्ला: 🙏🌹अग्नि शिखा मंच🌹🙏
🙏🌹जय अम्बे🌹१७/९/२१🌹🙏
🙏🌹भजनः *मां तेरा कहां ठिकाना* 🌹🙏


ओ अँबे माता तेरा कहाँ,
 ठिकाना बतलाओ ना, 
ओ महालक्ष्मी माते तेरा,
अता पता भी बतलाओ ना, 

किसी ने बताया रहती हो कोल्हापुर, 
किसी ने बताया रहती हो गब्बर गढ़
 जन्मांतर से ढूँढ रही हुं, 
फिर भी दर्शन पाए ना, 
ओ अँबे माता तेरा,
 कहाँ ठिकाना बतलाओ ना, 
ओ महालक्ष्मी माते तेरा, 
अता पता भी बतलाओ ना, 

अणु अणु में बसती माता,
मेरे ह्ररदय में रहती माता, 
आँखें खोलके देखुँ तुझ को ,
फिर क्यूँ नजर दिख पाए ना,? 
ओ अँबे माता तेरा,
 कहाँ ठिकाना बतलाओ ना, 
ओ महालक्ष्मी माता तेरा, 
अता पता भी बतलाओ ना, 

तुम दर्शन बिना जीवन सुना ,
तेरे प्यार को तरसते मनवा,
अँखियाँ की ये प्यास बुझाने , 
दर्शन तुम तो दे जाना, 
ओ अँबे माते तेरा कहाँ, 
ठिकाना बतलाओ ना, 
ओ महालक्ष्मी माते तेरा, 
कहाँ ठिकाना बतलाओ ना,

 🙏🌹स्वरचित भजन, 🌹🙏
🙏🌹पद्माक्षी शुक्ल, 🌹🙏
[17/09, 3:43 pm] रामेश्वर गुप्ता के के:           ।भक्ति गीत। 
  ।आओ गणपति।
आओ गणपति जी को मनायें,
अपने घर गणपति जी ले आये।
सुबह शाम आरती उनकी उतारें,
जीवन में सुख शांति ले आयें।।
आओ............................ 1 
गणपति जी प्रथम पूज्य वे रहते,
दुख दर्द सब भक्तों के वह हरते।
मधुर मुस्कान चेहरे पर वे रखते,
सभी भक्तजन पूजा कर रिझाते।।
आओ.......................... 2 
गणपति हमारे सबके कष्ट हरते,
भक्त उनके द्वारे हाजरी लगाते।
भजन उनके सबको प्रिय लगते,
भजन गाकर सुख शांति में रहते।। 
आओ............................3
गणपति के द्वारे एक लंगड़ा पुकारे,
मागे गणपति से वे सारे कष्ट निवारे।
घर में पधारे है मेरे प्यारे गणपति जी,
वह जग को सुख सम्पत्ति देने वाले।।
आओ...............................4
स्वरचित,
रामेश्वर प्रसाद गुप्ता ।
[17/09, 3:53 pm] Dr Rashmi👑👑 Shig ( Allbad): विश्वकर्मा पूजा

हे विश्वकर्मा महाराज कारवाँ रोको नहीं निर्माण जगत संसार का।

है सृजन की कामना हम सब को आपके आशीर्वाद का।

चल पड़े हैं जो चरण विकास के,अब उन्हें हम मोड़ने की चाह छोड़े।

तप पराजित कब हुआ इनसान का,हो विजय की चाहना तो साथ दो।

धन्य है आप का सुन्दर सृजन आपकी कला,जो रचा संसार को सुन्दर बना।

तेरी कला कितनी गजब,यों गढ़ा पाषाण जो ईश्वर बना।

तप पराजित कब हुआ आपका ही विजय की चाहना तो साथ दो।

डॉक्टर रश्मि शुक्ला 
प्रयागराज 
उत्तर प्रदेश 
भारत
[17/09, 4:05 pm] डा. बैजेन्द्र नारायण द्िवेदी शैलेश🌲🌲 - वाराणसी - साझा: आदरणीय मंच को नमन विश्वकर्मा देवताओं के कला शिल्पी हैं उनके सम्मान में कविता
ओ सृजन के देवता 

विश्व के क्रम को सजाए
देवता श्रम को बनाएं 
पत्थरों में प्राण डालें
 बना निर्मिती रास्ता ।
ओ सृजन के देवता।।

मूक स्वर की प्रकृति को जीवंतता से भर दिए
भटकते मनु वंशजों को
जिंदगी का स्वर्गीय
कला को तुमने संवारा
जैसा प्रभु था चाहता।।
हो सृजन के देवता।।

मंत्र है हर हाथ में
यंत्र तेरे साथ में
युक्ति है साकार होती
मूल खड़बड़ प्रकृति भी
आकार पा साकार होती
पवन भी सहयोग में आ
तूलिका को थाम ता।
सृजन के देवता।।
+++++
डॉ ब्रजेन्द्र नारायण द्विवेद्वी शैलेश वाराणसी
[17/09, 4:40 pm] अंजली👏 तिवारी - जगदलपुर: विषय-भक्ति गीत आस्था
जय गणेश जय गणेश देवा
माता आपकी पार्वती पिता महादेवा
 हर विध्न को हरन करो हे विध्न हरता
शरन में आये प्रिय दुर्वा चढ़ाये तुम्हारी
पुजन हमारी स्वीकार करो हे गणपती देवा 
मनोकामना पूर्ण करो मोदक का भोग लगाएं तुम्हारी
देवताओं में प्रथम पुजा होये तुम्हारी
सबके प्रिय हो तुम हे गणेश देवा
बारम्बार प्रणाम करें तुम्हारी
शरण आये अब पूर्ण करो हर काम हमारी 
यही विनती और प्रार्थना है तुमसे हमारी
हर विध्न हरन करो हे बलिहारी
हे गणेश देवा हे गणेश देवा।
जय गणेश जय गणेश
अंजली तिवारी मिश्रा जगदलपुर छत्तीसगढ़।
[17/09, 4:57 pm] विजेन्द्र मोहन बोकारो: मंच को नमन
विधा:-- भक्ति गीत
विषय:-- गणेश उत्सव

 गणपति है प्रथम देवता 
 सारे जग के रखवाला।
विनती सुनो मेरी गण राजा
मेरे घर में जरूर आ जाना,
मेरे घर में जरूर आ जाना।।
सारे जग के तुम हो रखवाला,
विनती सुनो गण राजा
रिद्धि सिद्धि के तुम हो दाता
भक्तों के भाग्य विधाता
शंकर के लाल गण राजा
आज मेरे घर जरूर आ जाना।।
माथे मुकुट गले मोतियन माला
कानन कुंडल हाथ में भाला
मस्तक सिंदूरी शोभे गण राजा
सूर्य चंद्रमा मस्तक धारे।
आज मेरे घर जरूर आ जाना
आने से सारा दुख मिट जाए दे दो 
 वरदान, तुम ही हो देवता में बड़ा न कोई दूजा सर्वप्रथम होती है तुम्हारी पूजा
बुद्धि के दाता गण राजा।
आज मेरे घर जरूर आना
आज मेरे घर जरूर आना।।

विजयेन्द्र मोहन।
 बोकारो ( झारखंड)
[17/09, 5:30 pm] Chandrika Vyash Kavi: सरस्वती वंदना
************
 (भक्ति गीत) 
दिनांक-: 17/9/2021

हे माँ शारदा,कर तु इतना वादा
दे शीतल पवन और मन तेरा
 करेगी तू दुःख दूर मेरा 
हे माँ शारदा, हे माँ शारदा !

जिह्या  को मिठास दी
 उत्कृष्ट वाणी दे के 
संगीत से भरा मन
 दिल को तार देके 
अहसान इतना करना
दिल में सदा ही रहना !

हे माँ शारदा ,हे माँ शारदा !

मेरे मन के उपवन में तू 
संगीत बन के आना 
दे तार  वीणा  का तू 
मेरे सुर से सुर मिलाना 
इस मन के उपवन में 
सदा वास  हो तुम्हारा !

हे माँ शारदा , हे माँ शारदा !

माँ ,विद्या की विधाता तू
   वर्णो की है ज्ञाता 
वेदो की परिभाषा तू
 ऋषियो की है  अभिलाषा
दे ज्ञान का पिटारा 
उद्धार कर हमारा !

हे माँ शारदा , हे माँ शारदा !

कर जोड़ करती हूँ 
वंदन सदा तुम्हे मैं 
है ज्ञान की पिपासा मेरी
तू  पूरी करना आशा 
सदा लेखनी में  मेरे
वरदान बन के रहना !

हे माँ शारदा , हे माँ शारदा !

जीवन के सफर में गर 
भटके है मेरा मन 
लिख न पाऊ मैं अगर 
संग रहना बनके  दुख भंजन 
गुरु बनके मेरी तू 
सदा  लेखनी में रहना !

हे माँ शारदा , हे माँ शारदा

           चंद्रिका व्यास
         खारघर नवी मुंबई
[17/09, 5:30 pm] रजनी अग्रवाल जोधपुर: शीर्षक-"भक्ति गीत"

कान्हा कान्हा याद करूं दिन रैन , 
 दरस दिखा दो,
 नैन मिला लो , 
तभी मिलेगा मुझे चैन ,,,,,,
1. मैं जन्मों की प्यासी हूं मोहन , 
 भटक रही हूं जग में सोहन , 
अब तो सुना दो मीठे
 बैन , 
कान्हा कन्हा,,,,,,,,
 2.औड़ चुनरिया तोरे रंग में ,
जाऊं कहां किस ओर , 
 नहीं सूझे , 
किससे पूछूं? तेरी नगरी , 
जानू किससे तेरा मारग ,
 कान्हा कान्हा ,,,,,,,,
3.तेरे बिन सूनी मेरी अटरिया , 
 बांधे बैठी मैं अपनी गठरिया , 
आरती गाऊं भजन सुनाऊं ,
कान्हा कान्हा,,,,,,,,,

 स्वरचित भजन गीत रजनी अग्रवाल
  जोधपुर
[17/09, 5:32 pm] वीना अडवानी 👩: गजानना
*******

गजानना गजानना 
तू ही मेरा गजानना
भक्ति मे तेरी डूबा ये जहां।।

मोदक, लड्डू, बूंदी, मेवा
आओ खिलाऐं तुझे मना
तू हर दे पूरे विश्व के विघ्न
पुकारे तुझको हर एक जना।।


गजानना गजानना 
तू ही मेरा गजानना
भक्ति मे तेरी डूबा ये जहां।।


सर्वप्रथम तुझे ही पूजे भक्त
यही आशिष दिये पिता महा
शिव पार्वती का प्यारा तू कहत
समस्त ब्रम्हांड मात पिता मे ही समा।।


गजानना गजानना 
तू ही मेरा गजानना
भक्ति मे तेरी डूबा ये जहां।।


प्रिय अपने वाहन मुशक संग भी 
नटखट अटखेली कर बांधे समां
ढ़ोलक बजा अपने पिता का गणु
नाचे तू कभी कदम उठा कभी जमा।।

गजानना गजानना 
तू ही मेरा गजानना
भक्ति मे तेरी डूबा ये जहां।।


वीना आडवानी तन्वी
नागपुर, महाराष्ट्र
*******************
[17/09, 5:37 pm] पुष्पा गुप्ता / मुजफ्फरपुर: 🌹🙏अग्नि शिखा मंच 🙏🌹
🌹🌹शबरी सोच रही है मन में 🌹🌹
             ☘️भक्ति गीत ☘️
        🦚दिनांक:17/9/21
*******************************

🍂शबरी सोच रही है मन में 
     वन में आएंगे भगवान ।
    अपने अंचल से मैं तो डगर बुहारंगी
    वन-उपवन से मैं फूल- चुन लाऊंगी
    इसी राह से आएंगे भगवान----
    वन में आएंगे भगवान ।
    -*शबरी ............
    पंपा सरोवर से जल, भर लाऊंगी
    अपनें श्री राम जी के चरण धुलाऊंगी
    आसन बिराजेन्गे भगवान -----
     वन में आएंगे भगवान ।
    -*शबरी ..............
     वन-में से चख-चखके बेर तोड़ लाऊंगी
    अपने श्री राम को मीठेफल खिलाऊंगी 
    मन ही मन में हुलसेंगे भगवान----
     वन में आएंगे भगवान ।*
     -* शबरी ..सोंच रहीं हैं मन में 
         वन में आएंगे भगवान ,,×3
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 स्वरचित एवं मौलिक रचना 
 रचनाकार-- डॉ. पुष्पा गुप्ता,
 मुजफ्फरपुर
 बिहार
🌹🙏
[17/09, 5:43 pm] +91 70708 00416: मंगलमूर्ति गजानना
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घर में पधारो गजानन जी
मेरे घर में पधारो
 हे मंगलमूर्ति गजानना
तुम सुखकर्ता मूषकवाहना
शिवगौरा के तुम हो लाल
एकदंत लंबोदर कहलाते
मोदक प्रिय से गणपति नंदन
तेरा भक्त करें सब वंदन
प्रथम पूजा आपका होवे
ले नाम काज पूर्ण होवे
विहनहर्ता, मंगलकर्ता नाम सुहावे
गणेश जी के रूप निराले
आज्ञा पालन हेतु दिया शीश कटाया
वचन दिया माता को दिया उसे निभाया
गणपति बप्पा मोरया गूंजे घर -घर आज
देते खूब आशीष करते पूरी सबकी आस

डॉ मीना कुमारी परिहार
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