Monday, 13 September 2021

Akhil Bharati e anushika Manch ke block per Aaj dinank 13021 ko balgeet shikshak per Rachna a padhen aur rachnakar on ko sar doctor Alka Pande Mumbai




3/9/2021

अनोखी बिल्ली - अलका 

बिल्ली बैठकर बोली म्याऊँ 
चूहे को मैं  आराम से खाऊँ 
सब दोस्तों को दावत खिलाऊँ 
जी भर सबको दूध पिलाऊँ 

बिल्ली ने सोचा करु व्यापार
सस्ता बेचूँगी सभी सामान
सबका पेट भरने का करु जतन 
खुशी खुशी सबको बाटू धान 

बच्चे बुढे मिलकर करो घमाल 
दिल मे कभी न आये  मलाल 
सबका रखना  तुम ख्याल 
आज कुछ कर दिखाये कमाल 

रामदेव बाबा से सिखा है योग 
छोड़ देना होगा हमको सारे भोग 
मन में  अपने कभी न लाना लोभ 
सबका तन मन रहें  सदा निरोग 

सुन कर बाते सभी नेक 
सबने दिया बिल्ली को चेक 
दे रही मूँछों पर अपने ताव 
बिल्ली बनी नेता खाने को दिया केक 

बिल्ली बनी आज महान 
छोटा सा है उसका जहान 
मार भगायें सारे शैतान 
बोली कर गई मैं काम महान 
अलका पाण्डेय -

🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴




[13/09, 9:11 am] रामेश्वर गुप्ता के के: । बिल्ली। 
बिल्ली रानी ये बड़ी सयानी,
खाती रोटी पीती वह पानी।
दूध सबके घर का पी जाती,
पकड़ कभी वह हाथ न आती।।
बिल्ली.......................... 1 
सब घर के चक्कर वह लगाती,
दूध और चूहे पर घात मारती। 
हट्टी कट्टी मोटी वह होती रहती, 
सबके ऊपर म्याऊं वह करती।। 
बिल्ली........................... 2
काली बिल्ली खतरनाक दिखती, 
अपना शिकार वह खूब करती। 
म्याऊँ म्याऊं वह कहकर गुर्राती, 
खुद को सबका दादा समझती।। 
बिल्ली............................. 3
उसके छोटे छोटे बच्चे संग चलते, 
किसको भी हाथ लगाने नहीं देती। 
देखते देखते वे बच्चे बड़े हो जाते, 
मुंह में दबाये अपने घर ले जाती।। 
बिल्ली.............................. 4
स्वरचित, 
रामेश्वर प्रसाद गुप्ता ।
[13/09, 10:36 am] वैष्णवी Khatri वेदिका: काली बिल्ली चौपाई 


घर मेरे इक बिल्ली आई।
काली बिल्ली सबको भाई।
चुपके चुपके से वह आती।
नहीं ज़रा सा शोर मचाती।।

जब हल्की सी आहट पाती। 
झट से छत पर वो चढ़ जाती।।
दूध तलाशी के लिए आती।
बड़े मज़े से चूहा खाती।।

म्याऊँ म्याऊँ है वो करती।  
लोगों का है मन वो हरती।।
मेरे घर में खुशियाँ भरती।
सो जाएँ सब तो पग धरती।

बिल्ली बिल्ली बिल्ली प्यारी।
हम सबकी है बड़ी दुलारी।।
जब भी बिल्ली भवन न आती।
दूध मलाई मुझे न भाती।।

 वैष्णो खत्री वेदिका 
जबलपुर मध्यप्रदेश
[13/09, 10:49 am] विजेन्द्र मोहन बोकारो: मंच को नमन
विधा:-- बाल गीत
शब्द:-- *बिल्ली*

मुनिया की प्यारी उजली बिल्ली मौसी
मुनिया के पास दिन-रात रहती है
सुबह म्याऊं म्याऊं कर मुनिया को उठाती
मुनिया झट-पट रोटी- पानी किचन से देती
बिल्ली मौसी बिल्ली मौसी------!

रोटी पानी खा कर घर-घर घूमने जाती
ग्वाला को देख कर आती दूध पीकर जाती मोटी ताजी उजली बिल्ली मौसी
सबको खूब म्याऊं म्याऊं करके खुश करती बच्चों के प्यारी बिल्ली मौसी लगती

म्याऊं म्याऊं करके गुर्राती सबको हंसाती
चूहा को देखकर उसके पीछे पीछे भागती
पकड़ कर खूब मजे से खाती घूम घूम कर
दूध, मलाई किचन में तलाशती ।

बिल्ली मौसी बिल्ली मौसी सबके प्यारी
हम बच्चों के साथ खुब खुशियां बांटती
म्याऊं म्याऊं करके सबको हंसाती।
दोपहर में सो जाने से सन्नाटा छा जाती।।

*प्यारी बिल्ली मौसी बिल्ली मौसी*
 *हम बच्चों को खूब भाती*!!

विजयेन्द्र मोहन।
[13/09, 11:39 am] Nirja 🌺🌺Takur: अग्निशिखा मंच
तिथि -१३-९-२०२१
विषय- बाल गीत -बिल्ली

काली बिल्ली बड़ी छबीली
म्याऊं म्यांउ करती हो। 
मालिक से तुम दूध मांगती
प्यार अपना दिखाती हो

बिल्ली हो तुम बड़ी सयानी
घर-घर में घुस जाती हो। 
ढूंढ- ढूंढ़ कर ,देख परख कर
दूध सबके पी जाती हो। 

चूहे तुम को बहुत प्रिय हैं
घर भर में दौड़ाती हो। 
उपवास रखा है साल भर का
कहकर उन्हे छकाती हो। 

शेर की मौसी होती तुम 
दाव सारे उसे सिखाती हो। 
जब तुमको वह खाने आता 
पेड़ पर चढ़ जाती हो। 

तुमसे खूब चिढ़ जाता वह 
तब तुम उसे बताती हो। 
एक दाव बचा कर रखा 
उसको तुम जताती हो। 

नीरजा ठाकुर नीर
पलावा डोंबिवली
महाराष्ट्र
[13/09, 11:45 am] 👑मीना त्रिपाठी: *बिल्ली*

इक प्यारी बिल्ली रोज घर आती
देता कान्हा उसे दूध - रोटी
वह भी प्यार बहुत करती
धम्म से बैठ जाती गोदी

म्यांऊ - म्यांऊ वह दिनभर करती
आगे - पीछे डोला करती
देखकर उसकी भोली सूरत
कान्हा ने बांधी गले में घंटी

हो बंद गर दरवाजे तो
खोलने को लगाती जोर
गले की घंटी रह-रहकर
खूब मचाती शोर

होते जानवर भी प्रेम के भूखे
प्रेम मिले तो देते प्रेम
कहते बिल्ली को सब मौसी
वह भी करती हमसे प्रेम

*मीना गोपाल त्रिपाठी*
*13 सितम्बर 2021*
[13/09, 12:11 pm] वीना अडवानी 👩: हमारे प्रिय प्रधानमंत्री श्री मोदी जी
****************************

श्री मोदी जी आप कितने चालाक 
चतुर हैं ये हमने है जाना।।
चुनौतियों से घिरा था जब देश
 आपके निर्णय चातुर्य को पहचाना।।

देश मे कोरोना काल मे लाकडाऊन का  
निर्णय लेना तो था एक बहाना।।
परिवार मे गिरती प्रेम, आपसी सामंजस्य
के गिरते स्तर को आपने वक्त पर था जाना।।

आपने बंद किया सभी को घरों मे मक़सद था
सबका बस अपने परिवार संग वक्त बिताना।।
लोट आए वही प्रेम अपनत्व तब तक कठोर
आपके नर्णय तब नहीं, पर अब पहचाना।।

बिछी खाट फिर घर के आंगनों मे देखा 
बच्चों संग बड़ो का वक्त बिताना।।
बड़े बुजुर्गो को मिला साथ अपने बच्चों
देखा हमनें वो खुशी से आंखों का डबडबाना।।

 बड़ा पुन: जब प्रेम, सौहार्द्र अपनों मे अपनत्व
 देखा आपका लाकडाऊन मे ढ़ील दे जाना।।
आपके बेहतरीन रवैय्ये के कितने दीवाने
यही आपको भी था महसूस करा सच बतलाना।।

श्री मोदी जी आपके हर चतुराई भरे निर्णय का
उद्देश्य सिर्फ देश को है प्रगति, प्रेम से भर जाना।।
आदर से भरी मेरी कलम को भी आज इंतजार
था नित आपकों शब्दों संग महका कर सजाना।।

श्री मोदी जी आप कितने चालाक
चतुर है ये हमनें है जाना।।२।।

वीना आडवानी तन्वी
नागपुर, महाराष्ट्र
******************

यह मेरी ही लिखी कविता है जो दिल से सच्चाई भरे जज़्बातों संग लिखी है। क्यों कि लाकडाऊन के चलते बहुत से बिखरे परिवार एक हुए हैं।

वीना आडवानी तन्वी
*******************
[13/09, 12:15 pm] रागनि मित्तल: जय माँ शारदे
***********
अग्नि शिखा मंच
दिन-सोमवार
दिनांक-13/9/2021
बालगीत- 
शीर्षक- *बिल्ली*

दबे-दबे पैरों से आती।
घात लगाकर चूहे खाती।
पीकर दूध करे मनमानी।
कितनी नटखट बिल्ली रानी।
दूध दही ये सब गिराती।
आहट तक न मिल पाती।
जब भी ये पकड़ी जाती।
सरपट वापिस दौड़ लगाती।

रागिनी मित्तल
कटनी, मध्य प्रदेश
[13/09, 12:17 pm] निहारिका 🍇झा: नमन अग्निशिखा मंच 
विषय;-बाल गीत
    बिल्ली 
बिल्ली रानी बिल्ली रानी 
बिल्ली रानी बिल्ली रानी
जब सुनते हैं म्याऊँ म्याऊँ
सजग हुए फिर चूहे सारे
 उनको लगती काल की रानी
अगर दिख गए तुम्हें ये चूहे 
उन्हें मार तुम करो पार्टी
तुम्हें देख कर हम भी डरते
जाने क्या क्या तुम चट कर जाओ।
रखी मिठाई अगर है बाहर
इक़ पल में गायब कर जाओ
डांट हमें फिर तुम खिलवाओ।।
बिल्ली रानी बिल्ली रानी
बिल्ली......।।।।
निहारिका झा🌹🌹🙏🏼🙏🏼
[13/09, 12:56 pm] आशा 🌺नायडू बोरीबली: 🌹चालाक बिल्ली 🌹 
*******************

बिल्ली कहलाती है , शेर की मौसी । बिल्ली दिखती है शेर समान होती है बहुत चालाक चोरी करके पेट भर्ती है होती है बहुत सुंदर लगती है बहुत प्यारी। पर मानी जाती है अशुभ अगर बिल्ली रास्ता काट ले तो समझते हैं काम पुरा ना होगा बिल्ली पालना शौक तो है पर उसे कम ही लोग पसन्द करते हैं ।
घरों में छुप छुप कर
घुसती है ,
दूध उसे है बहुत प्रिय 
मिल जाए या दिख जाए
फटाफट चट कर जाती है
चूहे और बिल्ली की है
पुरानी दुश्मनी ।
जिस घर में बिल्ली हो 
चूहा न घुस पाता है।
मछली भी है उसे पसंद
त्रृप्त होकर खाती है ।
म्याऊं म्याऊं की सुनआवाज , लोग सावधान हो जाते हैं, दौड़ भागकर दूध बचाते अपने को प्रसन्न पाते हैं । बिल्ली रानी बड़ी सयानी
दबे पांव है आती
 कब आती ,कब जाती 
कोई समझ नहीं पाता है 
********************
डाॅ .आशालता नायडू.
भिलाई . छत्तीसगढ़ .
********************
[13/09, 12:57 pm] कुंवर वीर सिंह मार्तंड कोलकाता: आज का विषय_ बिल्ली 
बाल गीत 
🐈🐈🐈🐈🐈🐈🐈🐈
बिल्ली रानी बिल्ली रानी
करती रहती है शैतानी।
🐈
दबे पांव जब घर में आती
चूहों की आफत आ जाती।
🐈
दौड़ दौड़ बिल में घुस जाते
जाने पर ही बाहर आते।
🙏
अगर रसोई में घुस पाती
दूध दही सब चट कर जाती।
🐈
मछली मांस खूब भाता है
मालिक अगर खिला पाता है।
🐈
कुत्ते जब इसको दौड़ते
चूहे खूब खुशी हो जाते।
🙏
म्याऊं म्याऊं जब करती है
लगता मैं आऊं कहती है।
🐈
सत्तर सत्तर चूहे खाकर
कहीं बैठती ध्यान लगाकर।
🐈
बच्चो सुनो हमारा कहना
बिल्ली से बचकर ही रहना।
🐈🐈🐈🐈🐈🐈🐈🐈
© कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड, कोलकाता
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
[13/09, 1:01 pm] वीना अडवानी 👩: चालाक बिल्ली
************

चालाक बिल्ली
दबे पांव आई
रसोईघर का धूम
मलाई बड़े चाव से खाई
देखी मैं जब बिल्ली को
खूब जोर से चिल्लाई
डर के मारे भिगी बिल्ली
झटपट दौड़ लगाई।।
खरी खोटी मे कहे जा रही
गुस्सा, तो हंसी भी आई।।
कही दिल मे मेरी ही गलती
फोन पर जो गप्पे थी लड़ाई।।
भुगत अब खुद तू वीना खुद
से ही मन मे बुदबुदाई।।
हाय रे बिल्ली खाई मोटी परत
मलाई जो दूध मे थी आई।।२।।


वीना आडवानी तन्वी
नागपुर, महाराष्ट्र
******************
[13/09, 1:15 pm] 😇ब्रीज किशोर: अग्नि शीखा मंच
   १३/०९/२०२१
विधा बाल कविता 
बिषय -बिल्ली 
 बिल्ली बोली म्याऊँ म्याऊँ।
अब तो मै चली बाजार।
लेने केला दूध दही अनार।
मुझको हज करने जाना है।
चूहो पर अब दयाल दिखाना है।
बिल्ली बोली म्याऊँ म्याऊँ।
तुम चूहे क्यों डरते हो।
घर घर चोरी करते हो।
देखो मेरे हाथ मे माला है।
मुझे दिल्ली तक जाना है।
तुम एक मेरे.साथ चलो।
मौसी हूँ न मुझ से डरो।
चूँ चूँ बोला तुझ से डरता कौन।
जीतने साथ गये हो गये मौन।
मै भी चलता साथ तुम्हारे।
मेरे दो बच्चे है प्यारे प्यारे।
जो मै भी हो गया मौन।
उनसे बाते करेगा कौन।
तुम अकेली ही चली जाओ।
झूठ बोल कर चूहे खाँओ।

स्वरचित
 बृजकिशोरी त्रिपाठी
   गोरखपुर यू.पी
[13/09, 1:19 pm] स्मिता धारसारीया Mosi: बिल्ली

बिल्ली रानी बड़ी सयानी ,
करती अपनी मनमानी ,
चुपके से ये आती ,
दूध मलाई चट कर जाती ,
शेर की ये मौसी कहलाती ,
चूहों से हमें बचाती ,
बच्चों को ये खूब भाती ,
गोल मटोल इसकी आंखे होती , 
पुरे घर की ये चक्कर लगाती ,
यह सबकी प्यारी होती ,
दीपावली में लक्ष्मी कहलाती ,
जहां इसका आगमन होता , 
वोआँगन शुभ कहलाता ,
यात्रा में ये रास्ता काटे ,
तो जाना अशुभ कहलाता ,
इसकी भी अनोखी कहानी ,
बिल्ली रानी बड़ी सयानी |

स्मिता धिरासरिया बरपेटा रोड
[13/09, 1:43 pm] रजनी अग्रवाल जोधपुर: शीर्षक "बिल्ली"

1. बिल्ली रानी बड़ी सयानी ,
 चली कुएं पर भरने पानी ,
 भूल गई बाल्टी लानी, अपनी भूल सोचने लागी , 
याद आ गई अपनी नानी , 
 बिल्ली रानी बड़ी सयानी,,,,,,

2. दूध मलाई सब की खानी चोरी चुपके ली है चुरानी , 
  आई मालकिन वह मुस्कानी , 
 मुंह में भर लाई है पानी ,
 उसने उसको बेचारी जानी। ,
 बिल्ली रानी,,,,,,,,

3. घर घर जाकर ही है जानी , 
मिली एक घर में महारानी , 
 निकली हो बहुत ही दानी , 
 दूध रोटी मिलाकर लानी , 
 देखकर बिल्ली को हैरानी , 
   बिल्ली रानी बिल्ली रानी,,,,,,,

स्वरचित बाल गीत
 रजनी अग्रवाल
 जोधपुर
[13/09, 1:51 pm] 👑पदमाकाक्षी शुक्ला: 🙏🌹अग्नि शिखा मंच🌹🙏
🙏🌹जय अम्बे१३/९/२१🌹🙏
🙏🌹बाल कविताः *मुन्ना ने भगाया बिल्ली को* 🌹🙏

गणपति बप्पा घर में आए ।
लड्डूओं का भोग लगाएं ।।
चूहा राजा लड्डू खाए ।
चूहा के पीछे बिल्ली भागे।।

 मुन्ना ने बिल्ली को देखा ।
 लड्डु खातै चूहा देखा ।।
गणेश जी का वाहन मूषक ।
 बिल्ली को डंडे से भगाए ।।
 
मुन्ना ने बिल्ली को दूध दिया ।
बिल्ली रानी बड़ी सयानी।। 
बिल्ली को दूध पसंद नहीं ।।
करती है अपनी मनमानी।। 

बिल्ली के मुंह पानी आया। 
चूहा का शिकार है करना ।    
दूध तो आज लगता है फिका ।
मूषक को आज ही पकड़ना।। 

बिल्ली ने छलांग लगाया। 
बिल्ली ने चूहा को पकड़ा।  
चूं चूं लगा चिल्लाने चूहा। 
मुन्ना ने बिल्ली को पकड़ा।। 

बिल्ली को भी मार भगाया ।
बिल्ली म्याऊँ म्याऊँ चिल्लाए ।। 
बिल्ली से चूहा को बचाए ।
बापा गणेश जी मुस्काए ।।  

🙏🌹पद्माक्षि शुक्ल🌹🙏
🙏🌹स्वरचित रचना 🌹🙏
[13/09, 2:01 pm] कुम कुम वेद सेन: विषय बिल्ली

बिल्ली रानी बिल्ली रानी
तू तो सात घरों की है रानी
आंखे तेरी चकमक चकमक
कानों की है तू पतली
रंग तेरा है सफेद और काली
पर रहती हो तो बिल्कुल मतवाली

चटपट पी जाती हो दूध
म्याऊं म्याऊं कर जाती भाग
कभी तू बन जाती है पालतू
कभी तू कहलाती है नटखट

बिल्ली रानी बिल्ली रानी
खतरे का देती है तू संदेश
रास्ता काट बचा लेती
तू तो है बड़ी सयानी
बिल्ली रानी बिल्ली रानी
तू तो है 7 घरों की नानी

कुमकुम वेद सेन
[13/09, 2:11 pm] ♦️तारा प्रजापति - जोधपुर: अग्निशिखा मंच
13/9/2021 सोमवार
विषय- बिल्ली (बाल-गीत)

गोलू ने एक बिल्ली है पाली,
थोड़ी सफ़ेद थोड़ी काली।

उछल-कूद ख़ूब करती है
नहीं किसी से वो डरती है,
 वो है नाज़ो- नखरेवाली 
गोलू ने एक बिल्ली है पाली।

दूध मलाई चाव से खाती है
घर से बाहर ना वो जाती है,
है उमर उसकी अभी बाली
गोलू ने एक बिल्ली है पाली।

छोटे-छोटे कान है उसके
बहुत नुकीले दांत है उसके,
चाल उसकी बड़ी मतवाली
गोलू ने एक बिल्ली है पाली।

मम्मी जब उसे दूध पिलाती
ख़ुशी से अपनी पूंछ हिलाती,
है बहुत ही वो भोली-भाली
गोलू ने एक बिल्ली है पाली।

गोलू को बहुत ही प्यारी है
बड़ी पक्की दोनों की यारी है,
बहुत ही है वो क़िस्मत वाली
गोलू ने एक बिल्ली है पाली।
                      तारा "प्रीत"
                  जोधपुर (राज०)
[13/09, 2:18 pm] वीना अचतानी 🧑🏿‍🦽: वीना अचतानी 
मंच को नमन
विषय**** बिल्ली *****
बिल्ली कितनी प्यारी 
भूरे भूरे बालों वाली 
मुलायम बाल हैं इसके
पंजे हैं पैने पूँछ कड़ी 
आँखें है चमकीली 
मूछ है खड़ी म्याउं
म्याउं करती रहती
चूहों के पीछे दौड़ती
दूध मलाई चट कर जाती
भूखी बिल्ली भागी
चूहे के पीछे धम् से 
गिरी पानी में 
हो गई गीली भूरी बिल्ली 
अब तो छींकने लगी बिल्ली 
अब तो नहीं भागती
चूहों के पीछे
ओढ़ कर चदरिया 
माला जपती करती
चूहों का इन्तज़ार 
सौ चूहे खा कर
माला जपती भूरी बिल्ली ।।।।
स्वरचित मौलिक 
वीना अचतानी 
जोधपुर ।।।।
[13/09, 2:53 pm] +91 98448 10527: अग्नि शिखा मंच
सोमवार
13/9/2021
बालगीत
शीर्षक=बिल्ली
आई मेरे घर एक प्यारी सी बिल्ली।
जिसे देखकर
मैं हर गम भूली।
कभी मेरे पीछे छुपती है।
कभी मेरे बाहों में कूद ती है।
मैं बात करू उसके साथ।
मुझे ताकती रहती है।
प्यारी उसको मेरी पायल की आवाज़।
उसे सुनके वो खिल उठती है।
उसके साथ मैं बनती हु बच्ची।
हर गम में भूलती हु।
बच्चे से ज्यादा मुझे प्यार करे वो ।
उसपे में वारी जावू ।
बिल्ली रानी मेरी
हर पल तुझ संग मैं खेलू।
*******
अन्नपूर्णा, प्रेमनाथ भांडगे.
       हुबली
[13/09, 3:04 pm] 💃वंदना: बिल्ली

कहें रयों लल्ला मैया से
तू सुन ले बतिया मोरी.....।

बिल्ली आई छीका तोड़ा
चट कर गई माखन लोई....।

ना खायो मैंने दधि माखन मां
ना चोरी माखन लोई....।

झूठो दोष मड़े है गोपियां
तू तो जाने मोहे....।

बिल्ली आई छीका तोड़ा
चट कर गई माखन लोई....।

मोसे जोरा जोरी कर मोहे
मुख लिपटायो माखन....।

धमकायो मोसे नाच नचाए
जरा ना गलती मोरी ....।

कह रयों लल्ला मैया से
सुन लेना बतिया मोरी....।

बिल्ली आई छीका तोड़ा
चट कर गई माखन लोई....।

वंदना शर्मा बिंदु देवास मध्य प्रदेश।
[13/09, 3:09 pm] Anita 👅झा: बिल्ली - बाल गीत 

जेलिया की प्यारी बिल्ली 
 दुधिया रंग नैन कजरारे 
रूप सुहाना नैन मतवाले रे 
गले में बांधे घंटी सुहानी रे

 चटक मटक कर बिल्ली रानी रे
छैल छबीली बाँकड़ बिल्ला रे 

बाराती बन बाकड़ बिल्ला रे 
साथीयों संग शोर मचाया रे 
भागे दौड़े शोर मचायें रे 
मूँछों में ताव बिल्लो राजा रे

हयात मालकीन बिल्ली रानी रे 
रंगा सियार बन ब्याह रचाने आया रे 

बाराती बने देखे सयाने 
बाकड़ बिल्ला के साथी कहते 
ये रूप रंग दीवाना कौवे की जात रे 
 तु बिल्ली हैं चटखोर चाल रे 

 बाज़ रहेरे ये रूप रंग दीवाना 
बिल्ला कौवे की जात रे 
 बिल्ला बिल्ली रानी को
धमा चौकड़ी उधम मचाते देख जूही -जेलिया ने कर दिया कमाल रे 
बंद कर दिया हयात के कपाट रे 
अनिता शरद झा
[13/09, 3:52 pm] Nirja 🌺🌺Takur: अग्निशिखा मंच
तिथि -१३-९-२०२१
विषय- बाल गीत -बिल्ली

काली बिल्ली बड़ी छबीली
म्याऊं म्यांउ करती हो। 
मालिक से तुम दूध मांगती
प्यार अपना दिखाती हो

बिल्ली हो तुम बड़ी सयानी
घर-घर में घुस जाती हो। 
ढूंढ- ढूंढ़ कर ,देख परख कर
दूध सबके पी जाती हो। 

चूहे तुम को बहुत प्रिय हैं
घर भर में दौड़ाती हो। 
उपवास रखा है साल भर का
कहकर उन्हे छकाती हो। 

शेर की मौसी होती तुम 
दाव सारे उसे सिखाती हो। 
जब तुमको वह खाने आता 
पेड़ पर चढ़ जाती हो। 

तुमसे खूब चिढ़ जाता वह 
तब तुम उसे बताती हो। 
एक दाव बचा कर रखा 
उसको तुम जताती हो। 

नीरजा ठाकुर नीर
पलावा डोंबिवली
महाराष्ट्र
[13/09, 4:02 pm] रानी अग्रवाल: १३_९_२०२१,सोमवार।
अ. भा. अग्निशिखा मंच।
विधा_बालगीत।विषय_बिल्ली।
आई बिल्ली,आई बिल्ली,
चूहे की उड़ गई खिल्ली।
बिल्ली बैठे घात लगाए,
जैसे ही चूहा बाहर आए।
बड़ी जोर से जालिम झपटी,
पर भाग निकला चतुर कपटी।
बिल्ली रह गई मल के हाथ,
अबकी पकडूं दो चूहे साथ।
चूहों की जान पे बन आई,
जैसे_तैसे जान अपनी बचाई।
बिल्ली है शेर की मौसी,
मारे पंजा ,चेहरा खोंसी।
बिल्ली आती दबे पांव,
कोई न समझे उसका दांव।
दूध मलाई चट कर जाए,
मालिक समझ भी न पाए।
जब तक मालिक जाग के आए,
बिल्ली तो कब की भाग जाए।
कई लोग इसे घर में पालते,
दिल से स्वजनों सा चाहते।
सबके जीवन में एक तत्व है,
हर जीव का अपना महत्व है।
"जियो और जीने दो"
जीवन का रस पीने दो।
चलो बिल्ली मौसी "बाय",
फिर मिलेंगे,करेंगे"हाय"।
स्वरचित मौलिक बालगीत___
रानी अग्रवाल,मुंबई,१३.९.२१.
[13/09, 4:10 pm] +91 70708 00416: मंच को नमन, 🙏
दिनांक-,13/9/21
विधा-बाल कविता
शीर्षक-बिल्ली रानी

 बिल्ली रानी बिल्ली रानी
तुम क्यों करती हो शैतानी
बिल्ली बोली म्याऊं-म्याऊं
बिल्ली रानी बिल्ली रानी
तुम हो बहुत सयानी
बिल्ली बोली म्याऊं-म्याऊं
मैं काहे को घबराऊं
घर-घर झांकती ताकती
झटपट दूध चट कर जाती
बिल्ली रानी बिल्ली रानी
तुम क्यों करती हो मनमानी
घर-घर की चौकीदारी करती
झटपट चूहे चट कर जाती
बिल्ली रानी बिल्ली रानी
बिल्ली करती म्याऊं-म्याऊं
खीर, रेवड़ी खूब है भाती
अगर सामने कुत्ता आ जाये
लंबे पांव खिसक जाती
बिल्ली रानी बिल्ली रानी
बिल्ली बोली म्याऊं-म्याऊं
मुझे हुआ है आज जुकाम
चूहे चाचा चूर्ण दे दो
जल्दी हो जाए आराम
चूहा बोला बतलाता हूं
एक दवा बेजोड़
अब चूहे खाना बिल्कुल दो छोड़
बिल्ली रानी बिल्ली रानी

 डॉ मीना कुमारी परिहार
[13/09, 4:28 pm] ओम 👅प्रकाश पाण्डेय -: बिल्ली मौसी बड़ी सयानी ( बाल गीत) ---- ओमप्रकाश पाण्डेय
चुपके चुपके घर में आती
जा कर चौके में घुस जाती
चोरी चोरी सब दूध पी जाती
फिर धीरे से जाती भाग 
बिल्ली मौसी बड़ी सयानी........ 1
म्यायूं म्यायूं कह कर यह
बच्चों को भी खूब डराती
कभी कभी तो बड़े लोग भी
इसी तरह बच्चों को डराते
बिल्ली मौसी बड़ी सयानी .........2
चूहा बहुत डरता बिल्ली से
धीरे से यह आती घर में
कोने में बैठती चुपके से
ढूंढ ढूंढ कर खाती चूहे को
बिल्ली मौसी बड़ी सयानी......... 3
पर डरती बहुत कुत्ते से यह
जरा सा भी आवाज अगर
सुन ले यह कुत्ते की कहीं भी
छिप जाती कोने में चुपके से
बिल्ली मौसी बड़ी सयानी........ 4
इसके बच्चे होते बहुत ही प्यारे
सफेद काले भूरे रंग के होते
छोटे बच्चे इनको लेकर गोद में
दिन भर खेलते रहते इनसे
बिल्ली मौसी बड़ी सयानी........ 5
( यह मेरी मौलिक रचना है ------ ओमप्रकाश पाण्डेय)
[13/09, 4:30 pm] शेभारानी✔️ तिवारी इंदौर: बिल्ली

बिल्ली रानी बड़ी सयानी ,
उछल कूद तुम करती हो ,
चूहों को तुम बहुत डराती ,
पर कुत्तों से तुम डरती हो।

 चमकती हुई आंखें तुम्हारी,
शेर की मौसी कहलाती हो,
 दूध मलाई जहां दिखे तो ,
पल भर में चट कर जाती हो।

 म्याऊं म्याऊं कर शोर मचाती ,
अपनी मनमानी तुम करती हो ,
चूहे बिल्ली का खेल निराला,
 लुकाछिपी खेला करती हो ।

करती हो तुम बहुत शैतानी ,
किसी के हाथ नहीं आती हो,
 गर सामने कोई दिख जाए ,
तो तुरंत तुम छुप जाती हो ।

श्रीमती शोभा रानी तिवारी इंदौर मध्य प्रदेश
[13/09, 4:33 pm] रवि शंकर कोलते क: सोमवार दिनांक १३/९/२१
विधा***कविता
विषय***"बाल गीत
       #** बिल्ली***#

म्याऊं म्याऊं करती घर में फिरती हो ।
चूहे दूध दही की खोज करती हो ।
आजकल ये चीजें तुम्हें मिलती नहीं ।
बहुत बार प्यासी भूखी ही रहती हो ।।१

सब तुमको शेरनी की मौसी कहते हैं ।
सारे तुम्हारा उधम उत्पात सहते हैं ।।
सफेद काली सुनहरी रंगोंमें खूब लगे ।
लाड प्यार करते तुमसे सब चाहते हैं ।।२

चूहे के साथ खेलती मस्त घुल मिलती ।
फिर आराम से उसपर तुम टूट पड़ती ।।
अंधेरे में अपना खाना ढूंढ लेती हो ।
छोटे बच्चों का सदा मनोरंजन करती ।।३

प्रा रविशंकर कोलते
      नागपुर
[13/09, 5:12 pm] अंजली👏 तिवारी - जगदलपुर: बालगीत -बिल्ली 
बिल्ली करती म्याऊं म्याऊं
सब जान जाते बिल्ली आई
चूहे डरकर भाग जाते
जहां देखते बिल्ली आई
बिल्ली चूहा दोनों मिलकर
आपस में खेलते छूपा छाई
दूध छूपा कर जल्दी से रख लो
बिल्ली रानी दूध पीने आई
मेरे हिस्से का भी दूध पी लेगी सारी
मैं फिर रह जाऊंगा खाये मलाई
बिल्ली आई बिल्ली
म्याऊं म्याऊं चिल्लाई
अंजली तिवारी मिश्रा जगदलपुर छत्तीसगढ़
[13/09, 5:33 pm] 👑सुषमा शुक्ला: बिल्ली,
🐱

बिल्ली बोली म्याऊं,
 मैं ना घबराऊ, चूहे राजा जल्दी आजा,
 ऐसा प्यार जताऊ ।

बिल्ली पहुंची फ्लाइट से दिल्ली,
सोचा मिल जाएगी मलाई,
चूहे राजा छुप कर बैठे,
खुल गई उसकी कलई।

बारिश में बिल्ली जो आई ,
धूम मचाती घूम गई,
सीके पर देखा दही मलाई।
देखो कैसी मस्ती छाई।

बिल्ली रानी बड़ी सयानी ,
चूहे को याद करा दी नानी,
सौ चूहे खाकर बिल्ली
काशी धाम को देखो चली।
🐱🐱🐱🐱

स्वरचित रचना सुषमा शुक्ला
[13/09, 5:53 pm] सरोज दुगड गोहाटी: * अंग्नि शिखा काव्य मंच *
* बिषय - बिल्ली *
* विधा - बाल गीत 

मेरे घर के पिछवाड़े में रहती प्यारी बिल्ली ,
काला चमकीला रंग रोंयेंदार बिल्ली झबरी !
बांध जैसी हरे रंग की आँखे चमकती  
दूध - दही खानें को हरदम मचलती ,
ताका-झांकी करती दूध पर मंडराती ,
मौका पाकर दूध की मलाई खूब उड़ाती !
कभी अपने बिल्ले से लड़ती खूब गुर्राती ,
 अभी कुछ दिन पहले काली बिल्ली ब्याई,
छोटे-छोटे चार मखमली काले बिल्ले लाई !
इतने प्यारे , कोमल काले रेशम के गोले ,
चारों एक दूजे पर चढ़कर लगाते गलगोते !
हम उसे हाथों में लेकर खेलनें को मचलते ,
पर गुर्राती खूंखार काली बिल्ली से डरते ?
जब खतरा महसूस करती काली बिल्ली ?
बच्चे मूँह में दबा कर सुरक्षित स्थान रखती, 
बच्चों का रखती ध्यान माँ है बात नहीं भूलती ,
माँ हो चाहै बिल्ली ममता एक तराजू तुलती ! 

सरोज दुगड़ 
खारूपेटिया 
असम 
🙏🙏🙏
[13/09, 5:57 pm] 💃💃sunitaअग्रवाल: विषय_ बिल्ली
दिन__ सोमवार
            १३ सितम्बर २०२१
विधा___ कविता 

   शीर्षक__ भूरी बिल्ली

मोनू की भूरी बिल्ली
कमाल करती, मचाती धमाल,
दिनभर भागती, दौड़ती खेलती,
मोनू संग, हम सब देख हो जाते दंग,
भूख लगने पर करतीर म्याऊं म्याऊं,
मोनू की भूरी बिल्ली___

भर भर कटोरा दूध देते, नटखट 
कर जाती झटपट चट ,
रोज वह नियम से आती,
पेट भर जाता चली जाती,
मोनू की भूरी बिल्ली___
सारे चूहे छूप जाते देख बिल्ली रानी को,
बार बार बिल के अंदर बाहर होकर बहुत उड़ाते खिल्ली, 
बिल्ली ने सोचा बहुत हो गया,
अब मजा चखाऊ
घात लगा, झपट्टा मार पकड़ा, मोटा चूहा,
बाकि चूहे यह देख , हों गए नो दो ग्यारह,
मोनू की भूरी बिल्ली कमाल__
चोर सिपाही का खेल निराला, बच्चों को लगता प्यारा,,।
धन्यवाद
स्वरचित 
सुनीता अग्रवाल इंदौर 🙏🙏
[13/09, 5:59 pm] हेमा जैन 👩: *विषय -बिल्ली*

🌹🌹बालगीत 🌹🌹

🙏🙏अग्निशिखा मंच 🙏🙏


प्यारी सी छोटी सी
मेरी बिल्ली नन्ही सी,

चुपके- से दबे पाँव आती
पर सबको देख भाग जाती,

अपनी मोटी- मोटी आँखों से देखती 
एक टक अपने शिकार चूहें ढूंढती,

किन्तु देख बिल्ली मेरा बालक
हर्षित हो जाता है मेरा बच्चा,

बोलता मासूमियत से रोज मुझे
मम्मी बिल्ली के लिए दूध दे दो मुझे,


जरा डर नहीं लगता उसे बिल्ली से
जैसे दोस्त हो कोई उसकी ऐसे

सच कहते है लोग सदा जहाँ 
बच्चे मन के सच्चे होते है यहाँ,

बिल्ली भी उसकी बाल संग खेलती
फिर धीरे से पलंग नीचे छुप जाती


ऐसी ही होती है ये प्यारी सी बिल्लियाँ
सदा अपने में मस्त रहती बिल्लियाँ

हेमा जैन (स्वरचित )
[13/09, 6:40 pm] डा. अंजूल कंसल इन्दौर: अग्निशिखा मंच
विषय- बिल्ली

 बिल्ली गई पाठशाला

एक दिन बिल्ली की समझ में यह आया 
क्यों ना बैग लटका, मैं भी चलूं पाठशाला 
चटपट उसने ड्रेस पहनी,फ्रिल वाली फ्रॉक 
बालों में लगा रिबन लाल, पहुंच गई स्कूल।

मैडम बिल्ली पहने ऊंची एड़ी सैंडल 
छड़ी लेकर आई हाथ,संभाले साड़ी 
बच्चों पढ़ो A B C D जल्दी-जल्दी 
एम फॉर मदर ,हाँ एफ फार फादर ।

एक बिल्ली म्याऊं- म्याऊं कर जोर से बोली 
मैडम जी बताइए, यह मदर उल्टी क्यों पड़ी?
तभी मैडम जी हंसी, यह डब्लू है वह बोलीं-
यह मदर उल्टी नहीं, सीधा सादा सा डबलू है 

सब बिल्ली खिलखिला कर हंसने लगीँ
आज A से Z तक पढ़ लिया मैडम जी 
अब हम खूब पढ़ लिख कर,लंदन जाएंगे 
हम सब भारत की बहुत धाक जमाएंगे ।

डॉक्टर अंजुल कंसल "कनुप्रिया"
13-9-21
[13/09, 6:40 pm] पुष्पा गुप्ता / मुजफ्फरपुर: 🌹🙏अग्नि शिखा मंच 🙏🌹
      * विषय: * बिल्ली रानी * 
            * बाल कविता *
         * दिनांक:13/9/21*
************************************
बिल्ली रानी म्याऊँ-म्याऊँ 
जी करता है तूझे चिढ़ाऊँ
म्याऊँ,म्याऊँ,म्याऊँ म्याऊँ 

दबे पाँव तुम आती हो,
अपना जी बहलाती हो, 
जब दिख जाता दूध मलाई,
चट तुरत उसे कर जाती हो

बिल्ली रानी म्याऊँ म्याऊँ 
जी करता है तूझे चिढाऊँ
म्याऊँ म्याऊँ म्याऊँ म्याऊँ!

चूहे की तुम दुश्मन हो ,
उसकी खोज में हरदम हो
चूहे बिल मे घुस जाते है-
तब पकड़ नहीं तुम पाती हो

बिल्ली रानी म्याऊँ म्याऊँ 
जी करता है तूझे चिढाऊँ 
म्याऊँ म्याऊँ म्याऊह म्याऊँ!!

*********************************
स्वरचित एवं मौलिक रचना 
रचनाकार-डॉ पुष्पा गुप्ता 
मुजफ्फरपुर
 बिहार 
🌹🙏
[13/09, 7:04 pm] सुरेन्द्र हरडे: अग्निशिखा मंच को नमन
आज की विधा :- बालगीता
विषय *बिल्ली*

म्याऊं म्याऊं करती
एक घर से दूसरे घर जाती है 
चूहा दिखती ही जब झपटती है
बेचारी दूध दही खाती है।।१।।

कुछ नहीं मिलता तो घर
में ही म्यांऊ म्यांऊ करके शोर मचाती है, घरवालों की सारी नींद खराब करती है।।२।।

अंधेरी में चमकती आंखें बड़ी डरावनी लगती है काली बिल्ली सफेद बिल्ली बड़ी प्यारी लगती है
पिंकी पाली यह सफेद बिल्ली।३।

बंद आंखों से घर का दूध पीती है किसी को ना दिखे इसलिए अपनी आंखें बंद करती है लगता है मुझे कोई देखने वाला नहीं है कल सब्जी आंखें देखती है मानू से आने के बाद भाग जाती है।।४।।


खुद के बच्चों की संभालती है
मुंह में पकड़ती है लेकिन मैं दात नहीं गडने देती, ही प्यारी ममता
मां ही दिखाती है।।५।।

देखभाल करती है बच्चे की
 बड़े होने का इंतजार करती है ऐसी प्यारी बिल्ली ऐसी है प्यारी बिल्ली।।६।।

सुरेंद्र हरड़े नागपुर
दिनांक १३/०९/२०२१
[13/09, 10:39 pm] सरोज लोडाया कवि: *बिल्ली*

पुस्सी पुस्सी बिल्ली 
कहाँ थी इतने दिन 
म्याऊं ,म्याऊँ करती?
पूरा घर में घुमती थी!

मेम साहब .मेम साहब,
गयी थी लंडन मेम साहब,
हफ्ते भर घुमकर आयी 
थक गयी हूँ ,सोना है मुझे।

पुस्सी ..पुस्सी क्यों गयी थी?
लंडन ही क्यों गयी थी ?
कहाँ थी इतने दिन पुस्सी
खबर कुछ नहीं मिली !

ढूंढने चुहा मैं गयी थी लंडन
मेरी आँख बचाकर गया चुहा
लंडन ब्रिज के नीचे रही थी
क्या खबर दू ?कैसे दू?

ओहो पुस्सी जाने दो अब,
लंबी है तेरी कहानी पुस्सी,
उठना है जल्दी मुझे सो जा,
म्याऊं ..म्याऊं बंद कर सो जा।

डाॅ.सरोजा मेटी लोडाय।
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