Thursday, 9 September 2021

अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच के ब्लॉक पर आज दिनांक 99 2021 को चित्र पर रचनाएं पढ़ें और आनंद ले डॉ अलका पांडे मुंबई


चित्र पर कविता 

रोना आ रहा है 

थक गया हूं होमवर्क करते करते ऑनलाइन की पढ़ाई तोबा रे तोबा ।।टीचर मुझको क्या क्या कहती 
कुछ समझ नहीं आता रे ।।
ऑनलाइन ने मार डाला रे । 
मम्मी मुझको डांट रही खेलना कूदना बंद हुआ ।।
दोस्त यार सब छूट गए ।
कंप्यूटर से नाता जुड़ गया रे ।।
कम्पूटर के उसके सामने बैठ बैठ के कमर टूट गई हाय रे ।
हाय यह पढ़ाई हाय रे हाय यह पढ़ाई ।।
ढेर सारा होमवर्क पड़ा हैं । 
कैसे मम्मी को समझाऊँ ।।
रुलाई फूट पड़ी है पहले कितना अच्छा था ।
स्कूल जाते थे दोस्तों से मिलते थे ।।खेलकूद में मन लगता था ।
घर आने पर  मम्मी प्यार से खाना खिलाती थी ।।
फिर शाम को गार्डन में खेलने जाते थे ।
हाय रे हाय लाख डाउन ने हम बच्चों पर जुल्म किया ।।
होमवर्क करते करते मेरा तो सर दुख गया ।
कैसे मैं मम्मी को बोलू बहुत हुआ अब बंद करो यह पढाई ।।
यह कंप्यूटर के सामने बैठ कर मेरी कमर टूट रही है । 
मुझ पर दया भी खा लो मुझको कुछ देर आराम करने दो ।।
हाय रे हाय क्या करूं होमवर्क खत्म होता नहीं ।
लगता है मुझको कुछ यू …
क्यों ना टीचर को ही मैं अब ब्लॉक कर दूं ।
टीचर को ब्लॉक करके मैं पढ़ाई से छुटकारा पा जाऊँ ।।
और मस्त होकर फिर मैं वीडियो गेम खेलता रहूं । 
बोलो बोलो कैसा है यह मेरा यह आईडिया ।।
तुमको भी जरूर पसंद आया होगा मेरा आईडिया ।।
मेरे सब दोस्तों ने यह बात मान ली है ।टीचर को ब्लॉक कर के हम बच्चे आपस में बैठेंगे ।।
गेम खेल कर मन बहला पायेगें ।
खत्म हुआ लाकडाऊन । 
तो फिर से स्कूल जाएंगे।।
हाय रे हाय होमवर्क ने मार डाला 
डॉ अलका पाण्डेय मुम्बई
🙎🙎🙎🙎🙎🙎🙎🙎🙎🙎🙎🙎🙎🙎🙎









[09/09, 10:01 am] विजेन्द्र मोहन बोकारो: मंच को नमन
 विधा:-- *चित्र पर आधारित कविता*
शीर्षक:- बच्चा के जिद्दी होना

कोरोना काल में जिद्दी हो गया राजू,
मां समझा कर कहती मत रो,
बार-बार पापा से मुंह न लगाओ
सुनो, पापा की आवाज,क्या कहते
लाक डाउन जब खत्म होगा
तुम्हारे सब खिलौने खरीद देंगे
जिद्धी होना अच्छा कहां है बोलो राजू!
मैं फिर से वचन देता हूं छोड़ो जिद्दी पन।
चलो करो होमवर्क कंप्यूटर पर
ढेर सारा होमवर्क पड़ा है।
नहीं तो टीचर मम्मी को कहेगी
राजू पर ध्यान दें ठीक से पढ़ाई करें
चलो जिद्धी छोड़ो तुम मेरा राजा बेटा है
हंसो आकर गले लग जाओ।
गुड बॉय।

विजयेन्द्र मोहन।
[09/09, 10:10 am] 😇ब्रीज किशोर: अंग्नि शिखा मंच
जय माँ हंसवाहिनी
९/०९/२०२१
बिषय चित्र आधारित
          बाल कविता
 माँ माँ सुनो न कब स्कूल खुलेगा।
बोलो माँ बोलो न।
बेटा जब कोरोना जायेगा।
माँ कोरोना कब जायेगा।
इसने मुझे बहुत रूलाया है।
आन लाइन पढ़ते.पढ़ते मन मेरा उब गया है।
दोस्तो से मिले एक अरसा बीत गया है।
लैप टाप पर काम करते करते कमर मेरी दु ःखती है।
 स्कूल मे दोस्तो के संग बहुत मजा आते थे।
 घर आने बाद हम पार्क मे सी .सा खेलते झूलते थे
यह लाक डाउन हमे बहुत रूलाया है।
माँ माँ अब मै आनलाइन नहीं पढ़ुगा।
माँ जब स्कूल खुलेगा तब मै पढ़ने जाऊँगा।
माँ कोरोना को भगाओ ना।
अब तो दवा सूई सब बन गया है न।
माँ माँ मै कडुई दवाई पी लूगा।
लेकिन स्कूल मे पढ़ने मै
 जाऊँगा।
 माँ मेरी अच्छी माँ मुझे खेलने जाने दो।
मै लैपटॉप पर होम वर्क कर लिया अब तो जाने दो। माँ मै थोडी़ देर मे खेल कर आ जाऊँगा।
दोस्तों के संग मौज मस्ती कर पढ़ने बैठ जाऊँगा।
माँ माँ मेरी बात मान जाओ। अब मुझको और न रूलाओ।
माँ मेरी प्यारी माँ कोरोना को भगाओ।
स्कूल को खुलवाओ,कोरोना को भगाओ।
  बृजकिशोरी त्रिपाठी
  .गोरखपुर, यू.पी
[09/09, 11:16 am] वैष्णवी Khatri वेदिका: मासूम है चेहरा तेरा,
खुशी रूठने का है फेरा।
मुस्कान से निज बनाते हो,
रूठ कर भी दिल चुराते हो।।
मासूम से चले आते हो।
छोटू तुम सबको भाते हो।
मासूम सी मुस्कान तेरी।
देखूँ भागे थकान मेरी।
जीने की उमंग जगती है,
चिन्ता छोड़ के भागती है।
मिले नहीं सुकून इस जग में,
नए हौसले भरते पग में।।
तुम माता का संसार हो,
तुम्हीं तो उसका करार हो।
तेरी किलकारी खुश होती,
आत्म प्यार दुलार सब देती।

वैष्णो खत्री वेदिका
जबलपुर
[09/09, 12:26 pm] शेभारानी✔️ तिवारी इंदौर: चित्र पर आधारित कविता 
 घर में रहकर बोर हो गए हैं,
 दोस्तों से मिल नहीं पाते हैं,
 मन की बात नहीं कह पाते हैं ,
हम दोस्त मिल नहीं पाते हैं।
टी.वी देखने में मन नही लगता,
न ही पढ़ना अच्छा लगता है,
कोरोना ने हमें अलग कर दिया है,
 घर में रहना अच्छा नहीं लगता।
हम भी बाहर निकलना चाहते हैं,
दोस्तों के साथ खेलना चाहते हैं।
बहुत दुखी हैं मेरा मन,
अपने मन को बहलाता हूं,
उल्टा सीधा चेहरा बना,
खुद हंसता हूं और हंसाता हूं

शोभा रानी तिवारी इंदौर मध्य प्रदेश
[09/09, 12:33 pm] 👑सुषमा शुक्ला: चित्र पर आधारित रचना,

मंच को नमन🙏

लगता है कड़वी दवा दी बबुआ को ,,
मन खराब था बबुआ का,, मम्मी कब ठीक हो जाऊंगा,, फिर स्कूल पढ़ने जाऊगा l

मासूम चेहरे ने मन हरशा दिया,, देखकर मासूमियत,,, दिल ललचा गया। 
भोला भोला सा प्यारा चेहरा,, बुखार देख कर मन को घबरा दियाl

छोटा नन्हा सा बिचकाता मुंह,, कड़वी गोली से घबरा जाता है,,, कब बाहर जाकर खेलूंगा,,, दोस्तों की मस्ती झेलूंगा।

मेरे दिल का दर्द जान लो,,
 मम्मा दोस्तों के संग जाने दो,,,
पढ़गा लिखूंगा हर पल ,
आप भी चाहोगे मुन्ना खुश रहे पल पल।

 स्वरचित रचना सुषमा शुक्ला
[09/09, 1:00 pm] श्रीवल्लभ अम्बर: बबुआ कहिन,,,
    धोखे में हमका कड़वी दवा दी है,,,
    हमे अब बहुत घुस्स आ आ रही है।
    बताओ तुम्हारे साथ का सलूक किया जाए।
     मार दिया जाए,या छोड़ दिया जाए।

    हमरी शक्ल के का हाल हुई गए।
    तनिक तो देखो महतारी।
    कितनी सुंदर शक्ल थी हमारी।
    सब बिगड़ गई पी के दवा तुम्हारी।

    अब हमरी अंटी सट कली है,,
    नीम सी गोली गटक ली है।
    अब पूछो ना हम क्या करेंगे।
    हमारी ही समझ नहीं आ रहा क्या करेंगे।

   पर एक बात बता दे,,तूफान खड़ा कर देंगे।
   सारे घर को हवा में उड़ा देंगे,।
   फिर हमसे ना कहना,बबुआ ।                                     
   ये क्या कर दिया।
   साड़ी को फ़ाड़ के ,
   रुमाल कर दिया।
   हा,,, हा,,,

🙏 श्रीवल्लभ अम्बर🙏
[09/09, 1:01 pm] आशा 🌺नायडू बोरीबली: 🌹 चित्र पर आधारित
********************
     "नटखट चिंटू"
      **********

छोटा हूं पर खोटा हूं सब कहते हैं शैतानी का पिटारा हूं ।डांट पड़ती बार-बार मुंह बन जाता हर बार। मम्मा कहती नटखट चिंटू पापा कहते नकलची बंदर प्यार तो सभी करते पर हर पल डांटते डांटते      
कभी थकते । सब कहते चिंटू चिंटू मैं भागता रहता इधर से उधर, हाथ नहीं आता किधर । प्यार से गोद में उठा लेती मम्मा, चूम चूम कर समझाती मम्मा । पर नटखट चिंटू हूं मैं तो नटखट में ही भाता हूं प्यार करते सब मुझको इसीलिए इतराता हूं।
******************
स्वरचित रचना
डाॅ.आशालता नायडू
भिलाई . छत्तीसगढ़ .
******************
[09/09, 1:07 pm] वीना अडवानी 👩: बात-बात पे वो हसाऐ
अजीब शक्ल बनाऐ।।
रोते को भी वो मनाऐ
हसे और बस हसाऐ।।

कभी ना रूठे बबलू
कोई चिढ़ाऐ तुम हो डब्लयु
वो भी सुन टेड़ा चेहरा बनाता
आंखें भींच सबको ही चिढ़ाता।।

जहां भी हो गम़ की चिंगारी
वहां हंसी की फुलझड़ी जलाता
सबका चेहता नटखट बबलू
मां से डांट और मार भी खाता।।

वीना आडवानी तन्वी
नागपुर, महाराष्ट्र
******************
[09/09, 1:16 pm] स्मिता धारसारीया Mosi: छवि विचार 

थक गया हूँ ,ऊब गया हूँ ,
घर पर रहकर बोर हो गया हूँ ,
ना रही मस्ती , ना रहा खेल , 
हो गया सब पेल ,
दोस्तों के संग हॅसने और हँसाने का 
बीत गया एक जमाना ,
हे कृष्ण ,तुम जल्दी आओ ,
कंस कोरोना का मार भगाओ ,
बच्चों पर अपने तरस खाओ ,
हमें फिर से दुनिया की सैर कराओ ,
हमें इस कैद से मुक्त कराओ , 
हे कृष्ण ,तुम जल्दी आओ |

स्मिता धिरासरिया ,बरपेटा रोड
[09/09, 1:54 pm] ♦️तारा प्रजापति - जोधपुर: अग्निशिखा मंच
9/9/2021 गुरुवार
विषय-चित्राधारित रचना

नहीं पीना है
मुझे रोज-रोज दूध,
कभी तो मम्मी
फ्रूटी पिला दो,
मुँह बिचका कर
बोला चुन्नू।
रोज खिला देती हो
पोहे, परांठे,
कभी तो
पिज्ज़ा-बर्गर,
खिला दो मम्मी,
मुँह बिचका कर
बोला चुन्नू।
घर का बना 
खाना खा-खा कर
मैं ऊब गया हूं,
कभी तो होटल
ले जाया करो मम्मी,
मुँह बिचका कर
बोला चुन्नू।
सब दिन
बस पढ़ो-पढ़ो,
कभी तो कार्टून
 देखने दो मम्मी,
मुँह बिचका कर
बोला चुन्नू।
ऑन लाइन
पढ़ते-पढ़ते,
आदत हो गयी है
अब स्कूल मत
भेजना मम्मी,
मुहँ बिचका कर
बोला चुन्नू।
                तारा "प्रीत"
           जोधपुर (राज०)
[09/09, 2:21 pm] वीना अचतानी 🧑🏿‍🦽: वीना अचतानी 
मंच को नमन 
चित्र पर आधारित रचना *****
मेरा बचपन भी साथ ले आया 
जब मेरे बच्चे ने मुँह बनाया 
बचपन का हर लम्हा उसके
शरारती मुख पे उभर आया 
जब कहानी सुनाती परियों की
मुँह बना कर हँसता परी से
मिलने की वह ज़िद करता 
शरारत से वह रूठता खिलौनों 
की ज़िद करता रूठना मन भाता
मेरे दिल के कोने में है अब भी
एक मासूम बच्चा जो हँसता 
मुँह बनाता रूठ जाता अपनी
बात मनवानी हो तो रो देता
ना किसी से बैर, ना भेद भाव
साथ घुल मिल जाता अपनी ही
दुनियां में मस्त रहता तोतली 
बोली बोलकर मुँह बनाता हँसता 
रूठता सबके मन को भाता ।।।।।
स्वरचित मौलिक 
वीना अचतानी 
जोधपुर, ।।।।।।
[09/09, 2:36 pm] डा. बैजेन्द्र नारायण द्िवेदी शैलेश🌲🌲 - वाराणसी - साझा: आदरणीय मंच को नमन
चित्र पर आधारित रचना
क्रोधित बच्चा।
++++++++++++
दिल का सच्चा
अक्ल का कच्चा
मां की डांट सुन
हुआ क्रोधित बच्चा।
उसके मन का ना हुआ किसी ने उसे जलती आग छूने ना दिया।
खिलौने को पटक रहा था
छोड़ने से मना कर दिया गया।
सामने खाने की वस्तु आई क्रोधित हो फेंक दिया।
बहन ने कान खींचे
मन ही मन गुस्सा हुआ पर आंखों और अधर ने
मन की बात खोल दिया।
-----------
डॉ शैलेश वाराणसी👏👏👏👏🌻🌻🌻🌻
[09/09, 2:55 pm] अंजली👏 तिवारी - जगदलपुर: चित्र से
घर में रहकर ‌बोर हो गया हूं
अम्मा अब मुझे जाने दो
अपने दोस्तों के साथ खेलने दो
कहना तुम मेरी नहीं सुनती‌ हो
घर के अंदर ‌ही‌ खेलने बोलती‌ 
हो
ये घर नहीं जेल हो गया‌है
 घर के अंदर बंद बहुत ही गया है
बाहर की याद आ रही है
खुले हवा में जरा सांस लूंगा
स्वच्छ वातावरण में घूम कर
आऊंगा
दिमाग मेरा काम न कर रहा है
बंद बंद में मेरा दिमाग भी बंद‌ हो गया‌ है
बाहर घूमूंगा दिमाग को तरोताजा करूंगा
मास्क पहनकर घर से निकलूंगा
लापरवाही नहीं करूंगा
फिर तुम सबसे आकर मिलूंगा 
रचनाकार
अंजली तिवारी मिश्रा जगदलपुर छत्तीसगढ़
[09/09, 2:59 pm] रामेश्वर गुप्ता के के: 'मुह क्यूँ बनाता है' । 
लडका मुंह क्यों बनाता है,
लगता यह मां को चिढाता है।
लगता इसे खाना नहीं मिला,
इसलिए मुंह बना चिढाता है।
लडका....................... 1 
बच्चे बड़े नाजुक होते है,
बड़े प्यार से सम्भाले जाते है।
इनकी हर बात ख्याल रखना है,
तभी इन्हें ढंग मालूम पडना है।।
लडका.......................... 2
अगर कोई विकृति कभी आती है,
डाक्टर सलाह बहुत काम आती है।
इन बच्चों के लिए हम कुछ सोचे, 
इनके लिए भी नयी दुनिया बनायें।।
लडका............................. 3
जब हम बचपन की तरफ देखते है, 
आज बहुत सुधार हम देखते है। 
इन बच्चों को प्यार हम सिखलायें, 
इन्हे हम एक अच्छा इंसान बनायें।। 
लडका............................ 4
स्वरचित, 
रामेश्वर प्रसाद गुप्ता ।
[09/09, 3:25 pm] 💃💃sunitaअग्रवाल: विधा _ कविता
शीर्षक _ परेशान बिट्टू
दिन_ गुरुवार
         ९ सितम्बर २०२१

बिट्टू घर में रह रह कर, हो गए हो बोर, 
मेरा कुछ काम करते नही, नही तुम्हारा कोई ठौर,

सारा दिन उधम मचाते, तरह तरह
का मुंह बिचकाते,
छोटी बहना को क्यों डराते ,
मैं हों जाति हैरान परेशान,
बात बात पर तुम करते छुटकी से
लड़ाई, मन लगाकर न करतेपढ़ाई

गाल फुलाकर, होठ बिचकाकर
आंखे चौड़ी, नाक टेढ़ी कर
छोटू को डराते हो ,
मेरा काम बात बात पर बड़ातेहों,
यदि मानो कहना तो
मैं भी करूं तुम्हारी मन की पूरी
ले जाऊंगी मॉल घुमाने,
छुक छुक ट्रेन में बिठाउगी,
दिलाऊं नए नए खिलौने
झूला झुलाऊ , आईसक्रीम खिलाऊं, तुम्हारी मनपसंद गेम
बिट्टू ने सुना, हां हां हां हां हां
बोला, माँ मानूं तेरा कहना पढूंगा,
लिखूंगा, न दूंगा शिकायत का मौका,
माँ मैं आपकी सुनूं, आप मेरी, मैं भी खुश , आप भी खुश।


सुनिता अग्रवाल इंदौर मध्यप्रदेश स्वरचित धन्यवाद🌹🙏🏻🙏🏻
[09/09, 3:30 pm] ओम 👅प्रकाश पाण्डेय -: कैसा तो मन हो जाता है ( एक छोटे बच्चे की माँ से शिकायत) ---- 
( चित्र पर आधारित कविता) ---- ओमप्रकाश पाण्डेय

रोज तुम दूध ही पिलाती
मैं दूध नहीं पीऊंगा आज
यह तो मीठा बिल्कुल नहीं
बार बार केवल दूध ही पीने से 
कैसा तो मन हो जाता है....... 1
थोड़ी सी भी खांसी आती
तुम तुरन्त दवा पिला देती
अजीब सा स्वाद होता उसका
मुंह का स्वाद बिगड़ जाता
कैसा तो मन हो जाता....... 2
रोज रोज तुम स्कूल भेजती
रोज रोज मैं जाता भी हूँ
पर केवल पढाई वहाँ होता
दिन भर एक ही जगह बैठे बैठे
कैसा तो मन हो जाता......... 3
हमको बाहर जाने न देती
दोस्तों से नहीं मिल पाता
खेल नहीं पाते हैं हम
बिना खेले दोस्तों के साथ
कैसा तो मन हो जाता है......... 4
थोड़े से पैसे दे दो मुझको
बाहर चाट पकौड़ी खाऊंगा
पानीपुरी गोलगप्पा टिकिया
जिस दिन भी मैं नहीं खाता
कैसा तो मन हो जाता है........ 5
( यह मेरी मौलिक रचना है ----- ओमप्रकाश पाण्डेय)
[09/09, 3:36 pm] पुष्पा गुप्ता / मुजफ्फरपुर: 🌹🙏अग्नि शिखा मंच 🙏🌹
     विषयः * चित्र आधारित रचना *
दिनांक:9/ 9/ 21
*********************************
नन्हा सा बालक है ,
वह बाढ़ में ---
भटकता हुआ  
आ गया है ,,कहीं से,,,
उसे न अपना नाम पता है,
न ही ठिकाना,,,,
जाये तो ,जाए कहाँ ?
कोई कुछ दे देता है,,,
तो वह चुपचाप 
खा लेता है ,,,
फिर वह बिलखने 
लग जाता है ,,,
कितनी बड़ी लाचारी है,
इसपर पड़ी--
विपदा भारी है,,,
मात- पिता से बिछुड़ 
गया है,,,,
वे भी खोज रहे होंगे 
और कितना,,,,
बिफर रहे होगे..... !!
आह ! यह कैसी है नियति ?
जिस पर पड़ी हो
ऐसी विपत्ति ,,,,,
हे प्रभु! 
लौटा दो इसके दिन !!
लौटा दो इसके दिन!!
***********************************
स्वरचित एवं मौलिक रचना
 रचनाकार-डॉ पुष्पा गुप्ता
 मुजफ्फरपुर 
बिहार
🌹🙏
[09/09, 3:53 pm] 👑पदमाकाक्षी शुक्ला: 🙏🌹अग्नि शिखा मंच🌹🙏
🙏🌹जय अम्बे🌹9/9/21🌹🙏
🙏🌹चित्र पर आधारितः *बोर हो जाते है* 🌹🙏

जब से हुई है शाळा बंद ।
बातें करना हो गया बंद।।
 रूम में बैठो पढ़ाई करे ।
पूरा दिन मास्क लगाए ।।

कम्प्यूटर कभी बंद होगा। 
पढ़ाई हमारी रूक जाती।। 
कैसे बढाए टका हमारा। 
पापा की डांट पडती रहती।। 

बंद हो जाती जब पढाई, ।
भाई बहन से होती लड़ाई।। 
मित्र से मिले नहीं हम जबसे। 
चैन नहीं मिलता है तबसे।। 

घरमें खाना खाते रहते ।
वजन से हम बढ़ते रहते ।।
जब घर में फुटबॉल खेलते । 
मम्मी डाँटना शुरु करते।। 

मां-पापा ओफिस घरमें ।
चूप रहें की धमकी देते ।।
 टीवी ,मस्ती, बंद हुआ। 
दिमाग अब तो बोर हो गया।। 

🙏🌹पद्माक्षि शुक्ल🌹🙏
[09/09, 4:17 pm] 👑मीना त्रिपाठी: *चित्र आधारित*

लौकडाउन में नित नए-नए
करता रहता मुन्ना कमाल!
मम्मी की नाक में कर दम
रोज मचाता नया धमाल!

मम्मी को जब आया गुस्सा
दिया थप्पड़ गाल पर चार!
बेदुर काढ़े रो रहा है मुन्ना
मल- मल गाल बार- बार!

न स्कूल न क्लासें मुन्ना की
करे मम्मी को दिनभर हैरान!
हे!भगवान कब खुलेगा स्कूल
कहती मम्मी हो- हो परेशान!

*मीना गोपाल त्रिपाठी*
*9 सितम्बर 2021*
[09/09, 4:38 pm] निहारिका 🍇झा: नमन अग्निशिखा मंच 
विषय;-चित्राभिव्यक्ति

दिनाँक-9/9/2021
सीख माँ की जब भी मिले
बालक मुंह बिचकात।
कहता बात है मम्मी से 
सुनो लगा कर कान।।
घर मे होकर कैद हम
कितने दिन से आज।
घूमना फिरना बंद हुआ
कर न सकें कोई काज
मन नहीं है पढ़ने का 
फिर भी आज है क्लास
बोर विषय के बोर पाठ 
कैसे पढ़ें हम आज।
जाने न देती तुम मम्मी
खेलने दोस्त के साथ
मास्क लगाओ दूरी बनाओ
सदा सिखाती बात।
मन नही है पढ़ने का
बालक मुँह बिचकात।।
निहारिका झा🌹🌹🙏🏼🙏🏼
[09/09, 4:39 pm] डा. अंजूल कंसल इन्दौर: मेरा प्यारा नन्हा 

बड़ा अजब गजब है नन्हा
मुंह है बनाया मेरे नन्हे ने 
होंठ बिचका,आंखें मिचका 
अजब दास्तां सुनाई नन्हे ने। 

दादाजी ने झट छड़ी उठाई 
मुन्ने की पीठ पर दे-दे जमाई 
"अरे दादू मैंने कुछ नहीं किया
सिर्फ आपका चश्मा ही तोड़ा है" 

अच्छा जी! दादू बोले सुन नन्हे राजा
कैसा मुंह बनाया मुझे ना दिखे राजा
बाजार जाकर नया चश्मा बनवाऊँगा 
तब तेरा मुंह देख कर, तुझे चिढ़ाऊँगा। 

तभी दादी बोली-"सुन मेरा प्यारा नन्ना 
आजा मेरे पास,जल्दी मेरे गले लग जा"
"मैं तुझे दूंगी गोल गोल लड्डू और मिठाई 
तू भूल जाएगा दादा जी की छड़ी- पिटाई
नन्हा हंस दिया हा-हा-हा,"मेरी प्यारी दादी"।

डॉक्टर अँजुल कंसल "कनुप्रिया"
 इंदौर मध्य प्रदेश 9-9-21
[09/09, 4:40 pm] Nilam 👏Pandey👏 Gorkhpur: अग्निशिखा मंच 
9/9/21
नमन मंच 🙏
चित्र आधारित कविता

इसमें मेरी क्या गलती है
 जो मैं सबसे छोटा हूं
 मम्मी भी डांट लगाती हैं
 पापा भी डांट लगाते हैं
 जब देखो भैया भी हमको
 धमका कर जाते हैं 
 इसमें मेरी क्या गलती है जो मैं घर में छोटा हूं

 पापा ले ऑफिस का काम बैठ जाते हैं 
भैया भी हरदम 
कुछ पढ़ता लिखता है
मम्मी को घर के कामों से
 फुरसत कभी ना मिलता है
 मेरे संग ना कोई खेले क्योंकि मैं सबसे छोटा हूं

 मैं किसी से बात नहीं करूंगा 
नहीं किसी की बात सुनुंगा
 ले खेल- खिलौने अपने
 अकेला ही मैं खेला करुंगा 
 इसमें मेरी क्या गलती है
 जो मैं सबसे छोटा हूं

 मुझको भी गुस्सा आता है 
मेरा भी मन घबराता है
मुझको साथ सभी का भाता है
मुझे अकेला छोड़
भईया बाहर जाता है
इसमें मेरी क्या गलती है
जो मैं सबसे छोटा हूं

 दादू पापा को डांट लगाओ ना
कोई मम्मी को भी धमकाओ ना
  दादा दादी जल्दी से तुम घर आ जाओ ना
 मेरी तरफ से तुम इनको अच्छी डांट लगाओ ना
 इसमें मेरी क्या गलती है जो मैं सबसे छोटा हूं

स्वरचित कविता
नीलम पाण्डेय
गोरखपुर उत्तर प्रदेश
[09/09, 5:09 pm] Padma✔️✔️ Tiwari Damoh: चित्र आधारित रचना


मैंने ऐसा क्या किया
हर कोई मुझे डांटता है
काम ही काम बताते सब
कोई नहीं पुचकारता है।।

कहना सब का कितना मानू
मेरी कोई नहीं सुनता
रूठ जाऊं या रोने लगू
फर्क किसी को नहीं पड़ता।।

हो गया हूं गुस्सा
नहीं करूंगा बात किसी से
पापा मम्मा भैया कोई भी
मतलब नहीं मुझे किसी से।।
पदमा तिवारी दमोह मध्य प्रदेश
[09/09, 5:54 pm] Chandrika Vyash Kavi: नमन मंच
दिनांक-: 9/9/2021
विषय -: चित्र पर आधारित 

क्यों मुँह बिचकाये है तू राजा
     किस बात से बजा है
         तेरा बैंड बाजा
  आँखें फटी और ओंठ निकले हैं  
           गुस्सा छोड़ तु     
        मम्मी के पास आजा !

   अॉनलाइन में पढ़ते पढ़ते
       मैं बहुत ही पक जाता
      टीचर जो समझाती है
    कुछ समझ में नहीं है आता  
        मम्मी कब तक चलेगा          
              यह कोरोना 
    क्यों कोई इसे भगा नहीं पाता !

बेटा करो प्रार्थना ईश्वर से तुम
कहो माफी मांग रहे हैं आपसे हम
    पुनः पृथ्वी को हरित बना 
          ऋंगार करेंगे
      घर घर पेड़ लगाएंगे हम! 

   अॉनलाइन से छुटकारा देकर 
        दूर करो सारे मेरे गम
     मित्रों से मिलवाने की अब 
        कृपा करो मेरे भगवन !

        मन लगाकर खूब पढूंगा
        वादा करता हूँ मैं तुमसे
          स्कूल रोज जाऊंगा
        दांडी कभी नहीं मारूंगा !

               चंद्रिका व्यास 
            खारघर नवी मुंबई
[09/09, 6:10 pm] रानी अग्रवाल: ९_९_२०२१.गुरुवार।
विषय_चित्र पर कविता।
मेरा लल्ला।
[Image 506.jpg]
ये क्या हो गया लल्ला?
गोरे से कैसे हो गया कल्ला?
कैसे हो गया तू इतना बदसूरत?
मेरा लल्ला था इतना खूबसूरत।
कौन सी बात पे उखड़ गए?
जो बाल भी थोड़े उड़ गए।
ऐसी कौनसी बात बढ़ गई?
जो भौंहे तुम्हारी चढ़ गईं।
कौनसी इसी सुन ली तान?
जो तन गए तुम्हारे कान।
आंखें क्यों हो गईं इतनी डरावनी?
ये तो लगती थीं कितनी सुहावनी।
नाक में क्या चीज घुसड गई?
जो नाक तुम्हारी सिकुड़ गई।
ऐसा किसी ने क्या कह दिया?
जो तुमने अपने होंठ लिए दबा।
क्या हो गया जो गाल फूल गए?
ये कौनसी झूला में तुम झूल गए?
तुमरी ऐसी शकल ना देखी जाय,
जल्दी ऐसी बना जो मन को भाए
क्रोध छोड़ बेटा,मुस्कुरा दे,
जल्दी से प्यारी मुस्कान दे।
दिखा अपना मासूम रूप,
छह जाए जिससे प्यार की धूप।
दौड़कर आंचल में भर लूं तुझे
तू मुझे चूम,मैं चूम लूं तुझे।
खिलाऊं माखन_मिसरी,
पिलाऊं दूध_पानी,
 तुझ पर ममता लुटाए,
वारी_वारी जाए मां"रानी"।
स्वरचित मौलिक रचना____
रानी अग्रवाल,मुंबई,९_९_२१.
[09/09, 6:16 pm] कुम कुम वेद सेन: चित्र पर आधारित

मैं नन्हा मुन्ना तेरा बेटा
पूरे दिन सबका मन लगाता
मेरी मर्जी का काम ना होता
मैं दौड़ा दौड़ा गार्डन जाता
सब लोग मुझे डांटा करते
वापस घर जाओ मास्क लगाओ
मैं रोता रोता घर आता
घर पर हूं दांत खाता
बिना पूछे जो तुम जाता
कोरोना का समय आता
घर में बीमारी क्या हो जाता

मास्क सब रखते अपने पास
मुझे नहीं कभी देते
मैं सब के पास जाता और रोता
मुझे देदो मास्क मै जाऊंगा
फिर भी मुझे नहीं मिला
रोने के सिवा कोई नहीं गिला
पापा ने उठाया मुझे गोद
रोते-रोते पापा को कहा
चलो तुम डाटो सबको
नहीं तो मैं मुंह फुला कर
सभी को करता रहूंगा तंग

कुमकुम वेद सेन
[09/09, 6:24 pm] सुरेन्द्र हरडे: अग्निशिखा मंच को नमन
विधा:-
*चित्र पर आधारित रचना*
 शीर्षक :- कोरोना में बच्चों की मुस्कान गायब

कोरोना क्या आया,
आफत गले आयी
बच्चों की चेहरे की ,
मुस्कान गायब हूयी।।१।।

फूल से कोमल बच्चें 
पर ऑन लाइन पढाई 
का बोझ आया
क्या करें बेचारे।।२।।

खेलकूद मौज मस्ती
पर पाबंदी आयी,
जैसे जीवन की ,
हलचल पर मंदी छाई।।३।।

बच्चों को कभी ना रूलाना
मां से बच्चों को अलग नही
करना ,कब तक खिलौने से
दिल बहलाओगे।।४।।

खिलौना के साथ खेलना था
पढाई के लिए मोबाइल हाथ
आया क्या करें जनाब?
बच्चों की मुस्कान गायब हुई।।५।

सुरेंद्र हरडे
नागपुर
दिनांक ०९/०९/२०२१
[09/09, 7:21 pm] आशा 🏆🏆जाकड इन्दौर: चित्र पर आधारित कविता

अरे गुस्सा क्यों हो रहा है बेटा
 क्यों नाक मुंह सिकोड़़ रहा है 
 क्यों आंखें दिखा रहा है मुन्ना
क्यों अपने ओठ फुला रहा है

 गुस्सा ना करूं तो क्या करूं?
 मास्क पहन पहन हुआँ परेशां
 मां निकल रही अब मेरी जान 
अब नहीं पढ़ूँगा मैं ऑनलाइन 


आखिर कब तक करोना चलेगा
मास्क सेअब मेरा दम घुटने लगा
शुद्ध हवा का मजा कम होने लगा 
इस आवरण को अब हटाना.होगा।ः


बेटा कुछ दिन की बात और है 
फिर तुम बिना मास्क के घूमना
आराम से खुले मुँह स्कूल जाना 
और ठंडी हवा का आनंद लेना।।

आशा जाकड़
[09/09, 7:54 pm] चंदा 👏डांगी: $$ चित्र आधारित रचना $$

देखो कितना गुस्साया हूँ
करता मुझसे कोई बात नही 
स्कूल बन्द है ,दोस्त नही है 
मम्मी पापा बहुत व्यस्त है 
इन सबमे देखो मैं त्रस्त हूँ
बाहर जाने देते नही 
घर मे कोई आता नही 
करूँ तो करूँ क्या मैं 
देख देखकर मोबाइल को 
अब ये मुझको भाता नही 
कोरोना का प्रभाव 
अब झेला जाता नही 
बोलो कौन करे बाते मुझसे 
हाय कब तक रहूँ मैं ऐसा 
कोई उपाय बतादो ना 
कोरोना को भगादो ना 
हँसी मेरे मुखड़े की 
कोई वापस ला दो ना 

चन्दा डांगी रेकी ग्रैंडमास्टर 
रामटेकरी मंदसौर मध्यप्रदेश


[09/09, 8:46 pm] Alka Pandey 1: चित्र पर आधारित।
गुस्सा

छोड़ो रूठना रूठा ना ऐसा गुस्सा भी क्या
आंख नाक चड़ा मुंह क्यों है सूजा
हो रहा चिड़चिड़ा मन ही मन रो रहा
मेरे लाल बता तुझको क्या हो गया।

क्या लगी है नजरिया किसी की तुझे
जैसे हंसना हंसाना तू भूल गया
मांगे चंदा अगर तो मे लाकर के दू
क्या परात में तारे सजा करके दू।

तू है सबका दुलारा मेरी जान है तू
तुझसे रोशन है मेरा संसार यूं
तूझ से ही शुरू तुझपे ही खतम
मेरा गौरव है तू मेरा अभिमान है तू

आजा बाहों का झूला झुलाऊं तुझे
लोरी गा गा के बेटा सुलाऊ तुझे
तुझसे आशा जुड़ी है मेरी बहुत
मेरे कल के बुढ़ापे की लाठी हैं तू

छोड़ो रूठ ना  रुठाना ऐसा गुस्सा भी क्या
आंख नाक चढ़ा मुंह क्यों है  सूजा
हो रहा चिड़चिड़ा मन ही मन रो रहा
मेरे लाल बता तुझको क्या हो गया।

वंदना शर्मा बिंदु देवास मध्य प्रदेश।
[09/09, 8:48 pm] Alka Pandey 1: 🌺गुरुवार -9/9//2021

🌺विषय- चित्र पर कविता
हर चित्र कुछ कहता है 

कोरोना अब तो वापस जा
दो वर्षों पहले का मौसम
फिर से वापस ला।

खूब भोगाया तूने भाई
कितनी कितनी आफ़त आई।
पहले बूढ़े पुनः बड़ों पर
एक एक कर लहरें आई।
और कौन सी लहर बची है
खुल कर हमें बता।
कोरोना अब तो …….

स्कूलों पर पड़ गए ताले
शिक्षा के दिन आ गए काले
खेल कूद सब बंद हो गए
बोर हो रहे बैठे ठाले।
गेम खेलते मोबाइल में
होते पिता खपा।
कोरोना अब तो …….

ऑन लाइन हो रही पढ़ाई
कुछ आई कुछ समझ न आई।
किससे पूछें जाएं कहां अब
जब भी जटिल समस्या आई।
पिता व्यस्त अपने कामों में
मां को नहीं पता।
कोरोना अब तो …….

अब तो तुझसे घृणा हो गई
दो दो सालें नष्ट हो गईं।
ऑन लाइन ही हुई परीक्षा
पूरी कक्षा पास हो गई।
कौन खास है कौन नॉर्मल
कैसे लगे पता।
कोरोना अब तो …….

अब तो बस रोना आता है
अब तू तनिक नहीं भाता है
क्रोध आ रहा है अब तुझ पर
जाता है कि नहीं जाता है।
अब वैक्सीन पड़े लगवानी
तुझको बता धता।
कोरोना अब तो …….

©️ कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड, कोलकाता


WhatsApp

No comments:

Post a Comment