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अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच के ब्लॉग पर आज पढ़िए बाल गीत गाय के ऊपर डॉ अलका पांडे मुंबई




विषय - गाय 
शीर्षक-गौ माता 

गाय हमारी माता है 
हमें दूध मक्खन देती है ।।
हर अंग में गाय माता के,
सब देवों का धाम है में,
पूजा हम गौ माता की करते है । 
कृष्ण कन्हैया को अति प्यारी हैं।। 
गौ माता को बारम्बार प्रणाम है।।
नेत्रों में हैं सूर्य चंद्र,विराजे 
मस्तक  ब्रम्हा, देव विराजे 
सींगों में विष्णु महेश का वास है 
गऊ मूत्र में जगदम्बा,का निवास हैं ।।
मुख में चारों वेद विराजें,विराजे 
भजते रहो सब आठों याम 
गौ माता के श्री चरणों में,
बारम्बार प्रणाम है।।
कहते है रोमकूप में ऋषिगण रहते,
यक्ष महाबली बायें विराजे 
गरुण दाँत में सर्प नाक में विराजे ।।
वरुण कुबेर जी दायें  विराजे 
कानों में अश्वनीकुमार का निवास है 
गौ माता की महिमा अपरम्पार है । 
गौ माता के श्री चरणों में,
बारम्बार प्रणाम है।।
थनों में सागर बहता है । 
मूत्र स्थान में विराजती गंगा मैया है ।।
गुदा में सारे तीर्थ बसें और,
गोबर में लक्ष्मी रानी,रहती है । 
वर्णन करना बहुत कठिन है,
करोङों नाम  देवी देवता का निवास है 
गौ माता के श्री चरणों में,
बारम्बार प्रणाम है।।
गाय हमारी माता है 
पृष्ठभाग यमराज विराजें,
रम्भाने में बसते प्रजापति,
उदर में हैं कार्तिकेय का वास 
जिह्वा में हैं सरस्वती,विराजे 
तैतीस कोटि देवों को मन से,
सुमिरे ‘परशुराम’ है,
गौ माता के श्री चरणों में,
बारम्बार प्रणाम है।।
हर अंग में गौ माता के,
सब देवों का धाम है,
पूजा हम गौ माता की करते 
कान्हा जी को अति प्यारी हैं। 
गौ माता के श्री चरणों में
बारम्बार प्रणाम है।।
डॉ अलका पाण्डेय मुम्बई




🙏🌹अग्नि शिखा मंच🌹🙏
🙏🌹जय अम्बे🌹2/8/21🌹🙏
🙏🌹बालगीतः *गाय* 🌹🙏

मां कहते है *गाय* तुझे । 
देख अनेक रंग है तेरा।। 
मुन्नू कहते है मुझको। 
एक ही रंग है मेरा।। 

 तुझे रूप अलग मिला है ।
पर मैं समझ नहीं पाता।। 
दो पाँव दिया है मुझको ।
तेरा चार समझ न आता।। 

दूध न मिलता बछड़े को। 
मुझे दुध मिल जाता है।। 
पसंद तेरा दूध मुझे ।
बछड़ा नीर बहाता है।। 

में मां से रुठ जाता हूँ , 
बछड़ा भी रूठे तुमसे ?
मां मुझे मनाती रहती । 
दूर करे बछड़ा तुझसे ।।
 
क्यों तुम बोल नहीं पाती? ।
ज़ुबान दोनों ने पाया।। 
हम कैसे समझे तुझको? ।
हमने तुझको रूलाया।। 

🙏🌹पद्माक्षि शुक्ल🌹🙏


मंच को नमन
विधा:-- बालगीत
शीर्षक :--- *गाय*

घर-घर में हो एक गाय
और गांव -गांव में गौशाला
ऐसा अगर हो जाए तो
फिर भारत किस्मत वाला।।

गाय हमारी माता है यह
नहीं है भोग का साधन
इसकी सेवा कर ले समझे
हुआ है प्रभु का आराधना।।

दूध पिए हम इसका अमृत
गाय ने हमको पाला है
घर घर में हो एक गाय
और गांव गांव में गौशाला।।

गाय दूर करती है निर्धनता
उन्नति हमें बनाएं
जो गाय के साथ रहे वो
भवसागर पार कर जाए।।

गाय खोल सकती है सबके
बंद भाग्य का ताला
घर घर में हो एक गाय
और गांव गांव में गौशाला।।

पचगव्य है अमृत यह तो
सचमुच जीवन- दाता
स्वस्थ रहे मानव इस हेतु
आई है गऊ माता।।

गाय सभी को नेह लूटाए
क्या गोरा क्या काला
घर घर में हो एक गाय
और गांव गांव में गौशाला।।


विजयेन्द्र मोहन




🌺2/ 8/ सोमवार 2021
🌺समय - सुबह ८ से शाम ७ बजे तक 
🐄🐄🐄🐄🐄🐄🐄🐄
🌺आज विषय - गाय 
🌺 बाल गीत
🐄🐄🐄🐄🐄🐄🐄🐄
कितनी भोली भाली गाय
करती सदा जुगाली गाय।
🐄
मेरे घर पर तेरे घर पर
घर घर जाती पाली गाय।
🐄
कई रंग की पाई जाती
पीली धौली काली गाय।
🐄
पूंछ हिला कर करती रहती
मच्छर से रखवाली गाय।
🐄
चार पैर दो सींग नुकीले
लंबे कानों वाली गाय।
🐄
भर भर देती दूध बाल्टी
चार चार थन वाली गाय।
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️
© कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड, कोलकाता
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏



* अग्नि शिखा काव्य मंच *
* २/८/२०२१ सोमवार 
 *बिषय - गाय 
* विधा - बाल गीत 
मेरे बचपन की है ये कहानी ,
आपको सुनाती अपनी जुबानी !
गौरी गाय हमारे घर पर पालती थी ,
माँथे पर था सुंदर सफेद तिलक !
पीला - भूरा चमकता सुनहरा रंग ,
पाँव में उसके घूंँघरू बंधे थे !
चलती जब बजते थे छम-छम ,
ठाकुर जी चूल्हे पर रोटी बनाते !
पहली रोटी उसको जाकर खिलाती ,
रोटी खाकर मूक आँखो से प्यार जताती!
सुबह चुलाई बाबा चरानें ले जाते ,
घर लोट कर शाम को खूब रंम्भाती !
बड़ी सी हाँडी में पकता था दानां,
बड़े प्रेम से गौरी उसको खाती !
उसके गोबर ओर चिकनी मिट्टी से , 
घर का चूल्हा लीपा - पोता जाता !
रहीमाँ बीबी उसके गोबर से ,
ढ़ेर सारे उपले - कंडे बनाती थी ,
मैं भी अपनी सहेलियों के संग !
मै सुंदर - सुंदर खिलौनें बनाती थी !
मेरे बाबा घर गौरी सातवीं पीढ़ी थी ,
प्रतिबर्ष एक बछिया जनकर !
अपना गऊ वंश बढ़ाती थी !

सरोज दुगड़ 
खारुपेटिया 
असम 
🙏🙏🙏



गाय
****

गाय हमारी पूज्यनीय माता
बैल हमारे पूजनीय नन्दी।।
पूजन करो सब इनका
सफल होएगी हर संधी।।

गाय का दूध है बलशाली
पिये जो बने प्रभावशाली
होता है इससे बुद्धि विकास 
जिंदगी मे भरे प्रकाश।।

पहली रोटी गाय को समर्पित
करे जो..
भरे उसके घर धनधान
चहु ओर ख्याति मिले उसे 
जग मे हो पहचान।।


वीना आडवानी"तन्वी"
नागपुर, महाराष्ट्र
******************



अग्निशिखा मंच
तिथि-२-८-२०२१
बिषय -बाल गीत -गाय

      मेरी गाय

मेरे घर में है सुंदर सफेद गाय । 
जिसको छूने मात्र से भागती सारी बलाय।  
खूब दूध देती वह जो मुझे बहुत सुहाय। 
पर मुन्नी को दूध पीना जरा ना भाय। 
अम्मा कहती दूध पीने से ताकत आती है। 
मजबूत होते दांत ,,हड्डी, त्वचा सुंदर होती है। 
खूब दूध पीले मुन्नी ,बाल तेरे घने होंगे।    
शरीर होगा स्वस्थ्य,दिमाग के घोड़े दौड़ेंगे। 
पिता जी कहते,गाय में ३३कोटि देवता रहते। 
गाय की सेवा जो करते,सीधे स्वर्ग जाते। 
आयुर्वेद में गोबर,गोमूत्र से हैं दवाई बनाते। 
 दूध से दही मक्खन, घी,बना व्यापार करते। 
भगवान श्रीकृष्ण मुरली बजाते गाय चराते। 
इस तरह गाय की रक्षा का वह संदेश देते। 

नीरजा ठाकुर नीर
पलावा डोम्बिवली
महाराष्ट्र



अग्नि शिखा मंच 
गाय - बालगीत।
गाय  हमारी गऊ माता है,
तैतीस करोड़ देव बसते है।
जिस घर यह पाली जाती है, 
वहां श्री लक्ष्मी जी रहती है।। 
गाय........................... 1 
सुबह और शाम दूध देती है, 
सबको वह प्यारी लगती है।
सफेद रंग की गाय हमारी है, 
सबको बहुत वह भाती है।। 
गाय.......................... 2 
गाय देश का प्रिय पशुधन है, 
घर की वह जैसे सदस्य सी है। 
आंगन या बाहर भी रहती है, 
मां मां वह करती रहती है।। 
गाय........................... 3 
हमारी गाय का एक बछडा है, 
वह गाय संग घूमता रहता है। 
गाय उसे बहुत प्यार करती है, 
गाय बछड़े संग वह रहती है।। 
गाय.......................... 4
स्वरचित, 
रामेश्वर प्रसाद गुप्ता ।



गाय

आज हमारी सभ्यता ने
  इतनी तरक्की कर ली
कि हम अपनी संस्कृति की
 परम्परा ही भूल गये, 
 परोपकार करने को जो
  रहते थे सदा ही तत्पर
वही आज जग-जीवों को
   कष्टों के शूल दे गये। 
आस्था का प्रतीक मान
      जिस गोमाता की
  तन-मन से सेवा करते थे, 
उसमें देवताओं का वास मान
      घर समृद्धि से भरते थे। 
आज उस गाय को भूखी, प्यासी, 
      कचरा खाते देखकर भी 
       हम उसकी दुर्दशा पर
        द्रवित नहीं होते हैं, 
    क्यों हृदय की धरा पर हम
     कठोरता के बीज होते हैं। 
 बेटी के विवाह और व्यक्ति के
   अन्तिम समय पर गोदान
            किया करते थे, 
 जो बैल कभी पूज्य थे हमारे 
  उन्हें ही घर से बाहर करते हैं। 
जिन खेतों में कभी वे अन्न उगाते थे
    उनमें क्षुधा शान्त करने को
      यदि घुस जायें तो आज 
     भालों की नोंक से मरते हैं। 
 वाह रे मनुष्य! तेरी प्रगति आज
     मानवता ही मिटा डाली, 
नहीं डरता ईश्वर के कहर से भी
 तुमनें केवल दानवता ही पाली। 
   
डा. साधना तोमर


बाल गीत -गाय 

छोटी छोटी गईया गोकुल मेरो धाम 
गौंउँन संग आये मदन गोपाल 
गौंऊन संग बाजे मुरलियाँ मदन गोपाल 
बाजे मन मोहना मदन गोपाल 

मधुबन में गीत सुनायें 
छोटी छोटी गैया छोटो मेरो ग्वाल 
बछिया संग नाचें छोटों मेरो ग्वाल 
मदन गोपाल संग नाचें मेरो ग्वाल

गईया मेरी कामधेनु 
सेवा मेरा काम 
मैया की सेवा में है 
चारों मेरे धाम 
छोटी छोटी गईया गोकुल मेरो धाम 
अनिता शरद झा





जय मां शारदे
***********
 अग्निशिखा मंच 
दिन -सोमवार 
दिनांक- 27/7/ 2021 विधा- बालगीत 
प्रदत्त विषय - *गाय* 

गाय हमारी भोली भाली।
मां सी प्यारी और निराली।
खुद तो घास पात है खाती।
हमको मीठा दूध पिलाती।
इसके रग-रग में भगवान ।
पूजे इसको हर इंसान। 
बेटू पूंछ पकड़कर खेलें ।
मुनिया के खेल बड़े
अटकेलें।
कान पकड़के वो घुमाती।
पर गाय नहीं उसे भगाती। 
प्यार करे बच्चों को पूरा। 
उसके बिन है घर अधूरा। 
जब घूमने जाती गैया। 
बच्चे पूछते बताओ मैया। 
क्यों गैया को बाहर भेजो।
मेरा खाना उसको दे दो। 
थक जाती है घूम-घूम कर ।
हम प्यार करें उसे चूम- चूम कर ।

रागिनी मित्तल 
कटनी, मध्य प्रदेश


अ. भा. अग्निशिखा मंच
2/ 8/ सोमवार 2021
विषय - गाय 
बाल गीत 

हम गाय को मानते माता।
तुम हो हमरी जीवन दाता।
सोम दूध दे हमको सींचे।
ममता करती आँखें मींचे।

बछड़ा माता से है कहता। 
भूख प्यास मैं सब कुछ सहता।
केवल भूसा खिला दो माई।
खाएँ मानव लाल मलाई

भूख लगी पय दे दे माता।
मालिक को भी तरस न आता।
सूखा भूसा ना मिल पाता।
चक्कर भूख से वह लगाता।।

अपने बच्चे का हक देती।
बछड़ा खाए कचड़ा रेती।
फिर भी हमसे मान न पाते।
उसका हक भी नहीं चुकाते।

गौ माता के प्रति सारे जन।
बदल गए हैं सबके ही मन।
गौरस आधार नहीं बताते।
गौ के प्रति मोह नहिं जगाते।

गाय दूध से पलते बच्चे।
फिर भी गौ को देते धक्के।
बच्चों में संस्कार न आते।
माँ-पिता को बाहर भगाते।

 वैष्णो खत्री वेदिका
जबलपुर

 
 

ar


गाय,,,,

गाय पूजनीय माता है ,यह प्राचीन समय में समृद्धि का प्रतीक होती रही हैl स्वर्ण आभूषणों के साथ-साथ गायों को भी दिया जाता था l जिस राज्य में जितनी गाय उतना व समृद्धि शालीll

 कृष्ण गाय प्रेम को भला कौन नहीं जानता lइसलिए इनका नाम गोपाल पड़ाl

 गाय का दूध बलशाली है बुद्धि विकास में सहायक है lसभी जानवरों में इसको पवित्र माना जाता हैl गो पूजा की जाती हैl गाय पूजा के अनुष्ठान रिवाज हैl
 गाय के दूध का उपयोग पूजा अभिषेक व अन्य पवित्र उद्देश्य से किया जाता है।।।

*गौ माता की करते पूजा,
 श्री कृष्ण को कोई भाए न दूजा,,
 गैया चराते बांसुरी बजाते,
 गायों की घंटी में बस जाते
🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🙏🏼🌹🌹🌹🌹🌹

सुषमा शुक्ला इंदौर


अग्निशिखा मंच
2/8/2021 सोमवार
विषय-गाय, बाल-गीत

श्यामू ने एक गाय पाली,
थोड़ी भूरी थोड़ी काली।

सुबह-सुबह वो देता चारा
कभी गाय न सिंग मारा,
सीधी-साधी भोली-भाल
श्यामू ने एक गाय पाली
थोड़ी भूरी थोड़ी काली।

माता से वो दूध दूहाती
सबके ह्रदय को हर्षाती,
शान है सबसे निराली
श्यामू ने एक गाय पाली
थोड़ी भूरी थोड़ी काली।

माता कह कर उसे बुलाते
खल,भूसी घास खिलाते,
दिन भर करे वो जुगाली
श्यामू ने एक गाय पाली
थोड़ी भूरी, थोड़ी काली।

गऊ माता की हत्या करते
ईश्वर के न कोप से डरते,
नियत है जिनकी काली
श्यामू ने एक गाय पाली
थोड़ी भूरी, थोड़ी काली।

गऊ माता का मान करना
अमृततुल्य दुग्धपान करना
जिस घर गौ,वो भाग्यशाली
श्यामू ने एक गाय पाली
थोड़ी भूरी थोड़ी काली
                     तारा "प्रीत"
                  जोधपुर (राज०)

गाय 

गाय हमारी माता है , 
होता जिस घर इनका निवास , 
होता वहाँ सारे दोषों का नाश ,
दूध ह इनका गुणों की खान ,
बनाता हमें शक्तिवान 
बनते इससे तरह तरह के मेवा मिष्टान 
शुभ काम में गोबर को इनके पूजा जाता ,
कीटाणुओं को ये भगाता ,
मूत्र इनका ओषधि के काम आता , हर रोगोँ को ये दूर भगाता ,
  देव तुल्य है इनका स्थान , 
सनातन धर्म की देवी है महान ,
आओ सबमिल इनकी रक्षा करेँ ,
गौ सेवा की बात करे |

स्मिता धिरासरिया ,बरपेटा रोड




*#अग्निशिखा मंच* 🌹🌹🙏🙏🌹🌹
*दिन सोमवार*
*दिनांक 2 अगस्त 2021*
*विषय बालगीत*
*शीषर्क गाय*

ग्वाला चाचा ला रहे, बोलो
मटकी भर-भर कहां से दूध!
चुन्नू - मुन्नू हैं बड़े हैरान!!
कहां से आता इतना दूध !

ग्वाला बोला.. गौ माता देती
मुझको मटकी भर - भर दूध!
बच्चों पी लो झटपट खुशी से
हो जाओगे बड़े झट पीकर दूध!

जो पियोगे गौ माता का दूध
हो जाओगे खूब बलवान!
और घृत , महि खाकर
बन जाओगे पहलवान!

लड़ रहे थे अब चुन्नू - मुन्नू
कौन पियेगा पहले दूध!
दोनो ही कह रहे..गौ माता मेरी
हम!! पियेंगे पहले दूध!
*मीना गोपाल त्रिपाठी*


शीर्षक-" गैया"
     
क्यों लड़ते हो
 भैया -भैया ,
 तेरी गैया ,मेरी गैया , 
बस कान्हा है ,
नाच नचैया , 
सब को नचाये ,
 नाच कन्हैया , 
गोपी बोले दैया दैया! आ गए हो ब्रज में 
ऐसो मैया , 
 मटकी फोड़े , 
माखन खबैया , 
हाय रे मैया !
हाय रे मैया!
 नाग नथैया , 
राक्षसों को खत्म करैया , 
 गौमाता को एक रखिया , 
गाय चरैया , 
गोवर्धन उठैया, बृजवासी को एक रखैया , 
 इंद्र के कोप से सवे बचैया , 
गैया -गैया 
मेरी भैया
सारे जग को दूध पिलैया 
माखन दही घी दिवैया, गोबर से उपले बनाई के , 
उन्हें जलाई के,
 खाना बनाई के , सबै खेलैया ! 
गैया मैया !गैया मैया !

 स्वरचित बाल गीत
   रजनी अग्रवाल
   जोधपुर



$$ गाय $$
      $$ बालकविता $$

चीनु तुमने सुना होगा 
हम गाय को कहते माता 
हाँ मुन्नी पर एक सवाल है 
हम क्यों कहते गाय को माता 
मुन्नी बोली आओ बेठो मैं बतलाती
गाय बच्चे को प्यार से पालती 
नहीं कभी अकेला छोड़ती 
बच्चे भी सब संग मे रहते उसके 
नहीं रहती वो कभी गंदगी मे 
मक्खी पास उसके फटक न पाती 
याददाश्त है उसकी तगड़ी 
कभी न भूलती घर का रास्ता 
बच्चे दिनभर दूर रहकर भी
ढूंढ ही लेते अपनी माँ को
दूध मे गाय के इतनी ताकत 
याददाश्त हम सबकी बढ़ाती
 सुनो इसलिए हम कहते हैं 
गाय को गौमाता 

चन्दा डांगी रेकी ग्रैंडमास्टर 
रामटेकरी मंदसौर मध्यप्रदेश



बाल गीत**गाय माता
%%%%%%%%%%
कृष्ण कन्हैया को प्यारी गौमाता
बच्चों को भी भाती है
भूरी, सफेद, चितकबरी गैया
घर घर पूजी जाती है।
गाय माता के मुख मे बच्चों
चारों वेद विराजे हैं
ऋग्वेद, साम,अथर्व,यजुर्वेद ने
गाय माता के गुण गाये हैं।
गाय का दूध करेगा तुमको
हष्ट पुष्ट और बलवान
उसके चरणों में शीश झुका कर
बच्चों नित करना उसको परनाम।
पहली रोटी गाय को नित प्रति
जो कोई भी खिलायेगा
पुण्य मिलेगा उसे सदा ही
बच्चों वह अपना नाम कमायेगा।
मौलिक रचना
     लीला कृपलानी


वीना अचतानी 
अग्नि शिखा मंच को नमन 
विषय ****गाय ****
जन जन में घर घर में 
पूजी जाती
सुख स्मृद्धि लाती
अपने तन का दूध पिलाती
दुध पूत सम्पन्न करती
गाय हमारी भोली भाली
हमको मीठा दूध पिलाती 
काली काली आँखों वाली
चाल चले मतवाली
यह सबसे पावन प्राणी है
गौ माता ही भारत 
की पहचान है
रोम रोम हमारा ॠणी है
इनकी तुम सेवा करो 
जीवन देगी तार
सेवा खातिर गौ की 
ग्वाला बने नन्दलाल
 माता समझो गाय को
होगा कल्याण 
दूध दही घी गाय का
होता अमृत समान 
सुबह और शाम को 
परिवार को दे रही अमृत
डोर से बन्धी रहती
गाँव के हर आँगन में 
धरती पर वरदान है गैया
अनगिनत दुआएं देती
ऋषि मुनियों की पर्ण 
कुटी में रहती
सत युग से त्रेता युग से
हे माता गैया
सुख समृद्धि सब लाती
अचल सम्पदा लाती ।।।।।
स्वरचित मौलिक 
वीना अचतानी 
जोधपुर, ।।।।।


नमन मंच 
बालगीत 
विषय : गाय

भूरी आंँखों वाली थी वो,
 मेरी गैया प्यारी सी ।
पूँछ हिलाकर जब वो खेलें,
 लगती थी मतवाली सी।

सुबह सवेरे वो उठ जाती ,
मा मा का है राग सुनाती ।
देख के हमको आता तब ,
वो भी खुशी थी हो जाती।

कहने को वो पशु थी पर ,
स्नेह बड़ा थी दिखलाती ।
समीप में देख छोटे बच्चों को, 
शांत से थी वो हो जाती ।

घास फूस वो खाकर हमको,
 दूध बहुत सा दे जाती।
उसके दूध से फिर मम्मी,
 दही ,मट्ठा ,खीर ,घी बनाती ।

हरदम जो थी शोर मचाती ,
देख बीमार घर में किसी को।
 एक बार ना आवाज लगाती, 
दरवाजे पर लगा टक- टकि ।

मानों खैरियत थी मनाती,
भूख प्यास सब भूल कर अपनी। 
खामोशी वो तब हो जाती,
खामोशी उसकी पर सौ-सौ बात कह जाती।

हम सब के संग रह कर वो,
 हमारा हिस्सा थी बन जाती है। 
माँ-माँ की आवाज लगाकर,
 हर पल वो थी लाड़-लड़ाती।

रहती जिस आंँगन में वो,
सुख समृद्धि वहांँ है आती।
सारी दुनिया में वो यारों,
गौ मांँ के नाम से पूजी जाती है।।

©️®️पूनम शर्मा स्नेहिल ☯️




बाल गीत-- गाय
---------------
 सोनी गाय हमारी है
 घास और चारा खाती है
 रंग इसका तो काला है
 पर मीठा और सफेद दूध
 हमें पिलाती है,
 बछड़ा है इसका भोला सा
  प्यार बहुत करती है उससे 
जैसे करती मेरी मां मुझसे।
  मां तो मां होती है 
बछड़े की हो या मेरी 
मां ने यह समझाया मुझे
 प्यार करती ढेर सारा
 अपने बच्चों से 
रक्षा भी वह करती है,
 हिम्मत नहीं किसी की भी
 जो आंख उठाकर   
बछड़े को देखें
  सिंगों से वह उसे मारती
 जो बछड़े को सताता है
 ढेर सारा प्यार मुझे 
वह करती है।
 मां मुझे है कान्हा बुलाती
 कहती मैं भी प्यार करता हूं
 अपनी गौ माता सोनी से
 कान्हा भी प्यार करते 
अपनी नंदी गैया माता से,
 दूध दही माखन मिश्री 
कान्हा जैसा ही  
मुझे भी पसंद है 
मैं भी गौ माता का लाडला हूं
 प्यार मुझे वह करती है।
 धन्यवाद 
अंशु तिवारी पटना



गाय ( बालगीत) ---- ओमप्रकाश पाण्डेय
माँ मुझको एक रोटी दे दो
गौ माता आयी दरवाजे पर
रोज उसे रोटी तुम देती हो
आज उसे मैं रोटी दूगां
गाय हमारी माता है ......... 1
रोज दूध पीता हूँ इसका
खूब बढियां और मीठा होता
ताकत हमको दूध से मिलता
बुद्धि भी बढती है दूध से
गाय हमारी माता है ..... .. 2
काली भूरी सफेद चितकबरा
कई रंगों में गाय होता है
वैसे तो ये बड़ी प्यारी होती 
पर छेड़ोगे तो सींग मारती
गाय हमारी माता है ........ 3
घास भूंसा चोकर यह खाती
पर रोटी गुड़ भी ये खाती हैं
दिनभर चाहे जहाँ भी घूमें
शाम होते घर लौट आती
गाय हमारी माता है ........ 4
गौ को हम सब माता कहते
पूजा भी हम इनकी करते
इनके गोबर से खाद बनता
आंगन भी इससे लीपा जाता है
गाय हमारी माता है ......... 5
( यह मेरी मौलिक रचना है ------ ओमप्रकाश पाण्डेय)


गौ माता

गौ माता हमारी पूज्यनीय माता,
गौ सेवा महती पुण्य प्रदान कर्ता।

 गाय - सेवा जग में श्रेष्ठतम सेवा ,
 माता- पिता से भी उच्चतम सेवा 

गाय का दुग्ध करे शुद्ध तन-मन,
गाय- सेवा से तर जाये जीवन।

गाय का दूध बहुत स्वास्थ्यवर्धक ,
रखे तेज मस्तिष्क, स्फूर्ति दायक।

गाय का दूध मानव को हितकारी ,
जो पिए समझो वह है गंगा तारी।

बंदकरो गौवध गौमाता को पूजो,
दूसरो कोई कर्म जग में न दूजो।

 हिन्दू पुराण की गज़ब है माया,
 गौ माता में अखिल विश्व समाया।

गाय - आवाज़ से शुद्ध वातावरण,
मां की ध्वनि से पापों का निवारण ।

धेनु का मूत्र करती निरोगी काया,
दूध से बनते दही, घी,पनीर, मावा।

गाय के गोबर से ही बनता ईंधन,
गाय गोबर से सजते कच्चे भवन।

गौदान ही मानव को मोक्ष दिलाए,
पूँछ पकड भवसागर तर जाए।



आशा जाकड़
 9754969496



गौ मां

हे गौ मां तुम्हें प्रणाम 
दूध दायिनी मोक्ष प्रदायिनि, अमृत की हो दाता।
भूसा घास को खाने वाली, जय जय हो माता।।
उदर भरे जो बच्चों का, जय हो मां का धाम ।
हे गौ मां तुम्हें प्रणाम । 

बहुत मनोहर सुंदर सी, अद्भुत जिनकी काया।
गौ मूत्र में बसती गंगा जी, गोबर में लक्ष्मी माया।।
रोम रोम में देवी देवता, पाते हैं विश्राम।
हे गौ मां तुम्हें प्रणाम।

दुर्बल निर्बल जो कोई, उसका बलवान सहारा। 
दुनिया से ठोकर खाकर, जो सच्चे मन से पुकारा।।
कामधेनु मां बनकरके, पूरे करती सब काम।
हे गौ मां तुम्हें प्रणाम ।

तप अधार ऋषि-मुनियों की, लाज बचावन हारी।
मां के दूध सा जीवन तुझमें, जय जय हो महतारी।।
वेद पुराणों ने गाई, महिमा तेरी तमाम।
हे गौ मां तुम्हें प्रणाम।

परदेसी तो स्वार्थ बसमें, निकट आपके आया। 
नहीं कल्पना जो भी की थी, वह सब कुछ भी पाया।।
मैया आशीर्वाद चाहिए, तुझे जपूं मैं आठो याम।
हे गौ मां तुम्हें प्रणाम

सुधीर अवस्थी ' परदेशी '
9454874675





गाय

 गाय होती है सीधी- साधी
यह गाय हमारी माता है,
 उसका मीठा अमृत दूध ,
बच्चे, बड़ों को भाता है।

 चुन्नू गाय अपना दूध पिला ,
 मां बनकर ही पालती है,
 परोपकारी बनती है सदा,
 सबका जीवन संवारती है।

 गाय के दूध से हम ,
मक्खन ,घी भी बनाते हैं ,
 तरह-तरह की मिठाइयां बनाते,
 कुल्फी, श्रीखंड भी बनाते हैं।

   गाय भूरी,काली चितकबरी,
 कई रंगों में दिख जाती है,
 बदन को सहलाओ उसके,
सिर हिलाकर आशीष देतीहै।

 कभी ना मारें प्यारी गाय को,
 हर रोज उनका ध्यान रखें ,
आवो उनकी सेवा करके,
 अपना जीवन धन्य करें ।

श्रीमती शोभा रानी तिवारी मध्य प्रदेश


गाय

दादा जी बैठे कुर्सी पर
आवाज देकर बच्चों को बुलाया
सबसे पूछे बच्चों यह बताओ
गाय को माता क्यों कहते हैं

सुनकर बच्चे सभी मौन रहे
दादा जी बोले सुनो बच्चों
गाय हमारी माता है हम सभी
गाय की करते हैं पूजा
गाय हमें दूध देती है वह दूध
सर्वोत्तम मानी जाती है मां के दूध और गाय के दूध में अंतर नहीं, गाय को हम लोग गौ माता करते हैं

गाय पशुओं में श्रेष्ठ है
भगवान श्री कृष्ण जिन्हें हम कान्हा कहते वे गाय की सेवा
 करते
कान्हा गाय के दूध घी मक्खन का भरपूर सेवन करते थे

जानते हो बच्चों गाय श्रेष्ठ पशु
मानव का वह कष्ट हर लेती
हिंदू धर्म में गौ दान उत्तम माना
गाय को लक्ष्मी का रूप माना
घर-घर हो गाय हर घर लक्ष्मी

आधुनिकता में भूल गए सारी बातें, पर याद रखो गाय हमारी माता है सेवा करना हमारा धर्म है

कुमकुम वेद सेन



🐂🐂🐂🐂🐂🐂🐂🐂🐂 गाय माता सुबह सवेरे उठ जाती
 रंभा कर अपने बच्चों को बुलाती
 वह मेरी गाय माता 
कहने को तो वह पशु है 
किंतु हमारे परिवार का अभिन्न अंग है वह गाय माता इसने हमें
 जब दिखाती है पीठ
 हमारी चढ़ती है 
आगे पीछे घूमती है 
शांति भी वह रहती है
 मुझे अपनी कपिला का दूध बहुत मीठा लगता है
 वह चिल्ला कर
 हम उससे खेलते हैं 
घास फूस खाकर हमको अच्छा दूध पिलाती है 
गाय मेरी माता है हमको बहुत अच्छी लगती है
 मेरे घर में गाय को पहली रोटी का भोजन दिया जाता है 
गाय कामधेनु है 
मां कहती है उसमें सभी देवता निवास करते हैं 
गाय का दूध स्वास्थ्य के लिए लाभदायक होता है 
रहती है भाई आंगन में 
पूजी बढ़ जाती है
 उसके गोबर दूध से हम बहुत सी चीजें बनाते हैं
 और हमारे लिए उपयोगी है
 गाय हमारी माता है
 हमको बहुत अच्छी लगती है
🐂🐂🐂🐂🐂🐂🐂
कुमारी चंदा देवी स्वर्णकार



मंच को नमन 🙏
विधा-बाल कविता
2/8/21
               गौ माता
           ***********
आओ गोलू आओ मोनू
 हम गौ माता की वन्दना करें
गौ माता हमारी पूजनीय हैं
आओ हम इनकी पूजा करें
गौ माता की सेवा से हो जाते हम भवसागर पार
  गौ माता कर देती जीवन तार
आओ लल्लू आओ मल्लू
गौ माता की महिमा गाएं
परम पूज्य व पापहारिणी
हमारी गौ माता हैं
इनके आगे देवताओं ने भी
शीश झुकाया है
आओ करें हम सब गौ माता की वन्दना
वेद,पुराण, उपनिषद भी
करते वन्दना
चारों धाम का पुण्य हमें
गौ सेवा से मिल जाता
दूध, दही, और घी सब गौ माता से मिल जाता
आओ हम सब मिल करें वन्दना
गौ माता को करते हम सब कोटि-कोटि नमन!!

डॉ मीना कुमारी परिहार



🌹🙏अग्नि शिखा मंच 🙏🌹
विषय: गाय
विधा: काव्य 
दिनांक:2-8-21
*****************************
देखो, कितनी प्यारी गाय,
हम सबकी दुलारी गाय-

हम सब इसको माता कहते
इसमे कई देव है -- रहते ।

सुन्दर-सुन्दर बछड़े देती ,
बदले मे नहीं कुछ लेती ।

मीठा दूध देती है गाय ,
इससे होती अच्छी आय ।

दूध पीकर बलवान है बनना,
इसका दाना कम ना करना ।

हरी घास पर चरने देना ,
इससे है बहुत सुख लेना ।
 
*********************************
स्वरचित एवं मौलिक रचना
 रचनाकार-डॉ पुष्पा गुप्ता 
मुजफ्फरपुर 
बिहार 
🙏


अग्निशिखा मंच को नमन
विधा:-बालगीत
विषय :- *गाय*

जब- जब रंभाती है गैय्या
कहती चारा दे दो कन्हैया
धूप लगे हैं बांध पेड़ के नीचे
मै भी पावू रे हरे पेड़ छैय्या।।1।।

उछल कूद जब करते गाय के बछड़े
खेले उनके साथ बच्चे दुबले,तगडे
कभी पीठ पर बैठे और गिर जाये तो 
कभी छिले घुटने कभी टूटे जबड़े,।।2।।

यह सारे बाल गोपाल देखो
 है प्यारे कृष्ण कन्हैया
ग्वाले बन के जाते जंगल चराने ।गैय्या
भूख लगे तो खाते गोपाल काला
धर्म-जात भेद मिटे है
बनते सारे बंधु भैय्या।।3।।

दुध बछड़े को पिलाकर
कुछ हमारे लिए बचाती
मां का फर्ज गौमाऐ
देखो कैसे निभाती।।4।।

हर गांव शहर मे बच्चों की
होती है पाठशाला,
मेरे भारत में हो घर -घर में
एक एक गौशाला ।।5।।

प्राध्यापक रविशंकर कोलते
नागपुर
दिनांक:- 02/08/2021

नमन अग्निशिखा मंच 
दिनाँक ;-2/8/2021
विषय ;-बालगीत
   🌹गाय🌹🐂🐂
मुझको प्यारी मेरी गैया ।
नाम है उसका श्यामा गैया।
नेह जताती उसकी आंखें
फिक्र करे जैसे हो मैया
मीठा दूध मुझको देती
दही घी भी उससे है मिलता।
पंचगव्य उसका है अमृत 
रोगों से वो सदा बचाता।।
कितनी चीजें उससे मिलतीं।
""गौ माता'' मैं उसे बुलाऊँ।।1।।
उसका बछड़ा प्यारा लगता 
साथ मेरे वो खेला करता
गले की घन्टी रुमझुम बजती 
सांझ ढले जब घर वो आती
 बछड़े संग फिर लाड़ लड़ाती
मीठा दूध मुझे फिर मिलता
 उसका साथ मुझे है भाता
मुझको बहुत भली वो लगती
"उसके बिन मै जी न पाऊँ
पहली रोटी उसे खिलाऊँ
"गौ माता ''मैं उसे बुलाऊँ।।2।।
निहारिका झा🙏🏼🙏🏼🌹🌹


अग्निशिखा मंच को🙏
आज की विधा *बालगीत*
विषय *गाय*

लाल,काली, सफेद रंगो की होती गायें हमारी माताऐ सबको ही भाऐ,हमको देती है वो पौष्टिक दूध बच्चों को वह तंदुरुस्त बनाए।।1।

बच्चे गायों को ले जाते चराने
जंगल में उनको हरी पत्तियां घास खिलाने, खाकर हमको देती है वो
मीठा दुध, बच्चे हैं बड़े दूध के दीवाने।।२।।

गाय माता हे करो उसकी सेवा
गोमाता की सेवा है मानवता की सेवा गाय दूध ही नहीं देती
वह पूरे परिवार देती है मेवा।।३।।

कृष्ण ने गाय को पाला था
हर घर में हो गौशाला
बच्चों के लिए रहती है हर
गांव शहर में रहती पाठशाला।।४।

जिस घर में होती है गाय वहां नहीं होती है निर्धनता उस घर में
देवि-देवता रहता है निवास और उस घर में रहती हंसी-खुशीया।5।

सुरेंद्र हरडे कवि
नागपुर
दिनांक 02/08/2021


नमन मंच
दिनांक-: 2/8/2021
विषय-: गाय (बाल कविता )

   गाय है मेरी भोली भाली 
  कितनी सुंदर कितनी प्यारी
   गोरी उसका नाम रखा है 
 पर वह मुझसे बहुत खफा है !

   मुझको देख भंभराती है (चिल्लाती है) 
 जाने कुछ कहना चाहती है 
 दोस्त बना लो तुम मुझको
 दाना पानी मैं दूंगा तुमको! 

जब मैं उसके घास खिलाता 
    देख मुझे पूंछ हिलाती 
     खुद तो घास खाती है
   मुझको मीठा दूध पिलाती है! 

      गाय का दूध मैं पीता हूं
    बछड़े को भी पीने देता हूं 
      गाय उसकी माता है 
      गाय मेरी भी माता है !

            चंद्रिका व्यास
          खारघर नवी मुंबई


१_८_२०२१
अ. भा. अग्निशिखा मंच
विषय_गाय,विधा_बालगीत
"मेरी गऊ माता"
मेरा घर रोज आती एक गाय,
जोर से रंभाती भांय_भांय,
मैं ताजी रोटियां खिलाता जाय,
इतराती,पूंछ हिलाती,रोटी खाय,,
समझ जाता मैं,पानी देता पिलाय,
फिर भी वहीं खड़ी रहती नाजाय।
फिर मैं उसके गले लग जाता हूं,
पुचकारकर बतियाने लगता हूं,
मैं कहता_तू बड़भागिनी मैया,
द्वापर में कान्हा तुम्हें ही चरैया,
मां, तू कितनी भोली दयालू होती, 
दूध,दही,घी,मक्खन सब देती,
गऊ माता तेरे हर हिस्से काअर्थ,
गौमूत्र,गोबर भी ना जाए व्यर्थ,
नंदिनीबन तू भवसागर पार कराए
३३करोड़ देवता तेरे उर में समाए।
बछड़े संग रहतीअपने तबेले में,
सर्दी,गर्मी, सब सहती अकेले में,
मैया तू खाती घास_चारा,
सुना है,कसाई चलाए तुझ पर आरा?
सुनकर रोने लगी गैया,
भरकर आंसू बोली मैया_
"बेटा! बड़ा हो तू बनना गो रक्षक,
समझाना,न बने कोई मेरा भक्षक।
मैं बोला_"मैया मत करै हाय_हाय
तेरी सेवा में आऊंगा धाय_धाय,
गौशालाएं दूंगा बनवाय,
जहां गऊऐं रहेंगी आय,
तू फिकर करियो नाय,
सबरे सुख दूंगो लाय,
अब चल अपने तबेले जा,
तेरी मेरी बाय_बाय(bye)
स्वरचित मौलिक बालगीत
रानी अग्रवाल,मुंबई द्वारा।
२_८_२०२१.


अग्निशिखा मंच
विषय- गाय माता 

कन्हैया चराए ढेरों गैया माता
 सफेद काली भूरी गौ माता 
हरी- हरी घास चरती जाती
घर-घर अंगना पूजी जाती।

गाय माता का पौष्टिक दूध 
पीकर होवें बलवान हृष्टपृष्ठ
सब वेदों में पूजी जाती मैया 
ऋग्वेद साम अर्थव यजुर्वेद ।

घर-घर निकले पहली रोटी गैया-मैया की 
गाय को खिलाओ,बच्चों पुण्य कमाओ 
गाय कराती वैतरणी,नदी पार मोक्ष मिले 
गाय की पूंछ पकड़ भवसागर तर जाएं।

गोवध अन्याय ना करो, पूजो गैया माता 
गाय में समाए पूज्य करोड़ों देवी देवता 
गाय की सेवा सब कष्टों को दूर करें 
पर्यावरण शुद्ध करें गाय का गोबर ।

गौमूत्र सेवन से स्वस्थ होवे काया 
बनें निरोगी,रोगों की अचूक दवा 
एक गौ का दान सौ गरुड़ पुराण समान 
अंत समय भाग्यवान गऊदान कर पाता।

डा अँजुल कंसल"कनुप्रिया"
2-8-21




🌷नमन अग्नि शिखा मंच🙏🌷
     🌷 जय माँ शारदे वर दे🌷🙏
      🌷विधा कविता🌷
 . 🌷 बिषय गाय बालगीत🌷
सबसे सुन्दर मेरी गैया ।
काली काली लागे अति सुन्दर।
गाय माता तुझे कहते है।
एक सुन्दर सा है बछडा़
तेरा।


हमको यही बात सताता।
बछडा तेरा दूध कम पाता।
जैसे थन मे दूध आता।
ग्वाला बछडे़ को खीच ले जात।


बछडा़ तेरा तुझे पुकारे।
फिर क्यौ नही उसे पुचकारे।
मै रोता तो माँ मनाती।
लड्डू पेड़ा हमे खीलाती।
तू क्यौ नही कुछ कह पाती।


तेरा बछड़ा रोता है ।
हमको बहुत दुःख.होता है।
सुन न प्यारी गैया माता ।
तेरा दूध हम सब को भाता।
मानव तुझको बहुत सताता।


तब भी तुम मानव के संग ही रहती हो।
कितना उपकार हम.पर करती हो।
दाना भूषा खाती हो मीठ दूध पिलाती हो।
जलाने को उपले भी देती हो।
पापा तेरे चरण है छुते।
गैया माता तुमको कहते।
 **स्वरचित**
  **बृजकिशोरी त्रिपाठी**
   **गोरखपुर, यू.पी**



Dr. Devi deen avinashi 9335594320
दिनांक2.8.21
विषय. गाय...
गाय फिर रहीं डंडे खाती, कुछ को ध्यान नहीं आये।
दूध दे रही होती हैँ जब,तबभी खाना नापायें।।
कस बेढंगी रीति पनप गई, दोषी कौन किसको माने।
अविनाशी अमृत स दूध दें,फिर भी वो हक,कल ना पाये ।।


नमन पटल
बाल गीत
विषय - गाय

सफ़ेद गैया के माथे पर,
काला तिलक है लगा हुआ।
कितनी प्यारी लगती गैया।
मुन्नू पूँछ पकड़ कर खड़ा हुआ।

कब से तुम रम्भा रही हो,
बछड़े को पुकार रही हो।
अभी गया है वो चरने,
क्यूँ तुम इतनी घबरा रही हो।

कितनी सीधी हो तुम गैया,
जितनी मेरी मम्मी है।
उतना ही प्यार करती बछड़े से।
जितना मम्मी मुझसे करती हैं।

तुम तो इतनी प्यारी हो।
गौ माता हमारी हो।
सबके खुशियों की चाभी हो।
दूध की नदियाँ बहाती हो।

दूध से बनती कितनी चीजें,
दही,पनीर,श्री खण्ड,मिठाई।
हम सब पीकर सेहत बनाते,
बच्चों की बढ़ती लंबाई।

मम्मी कहती चुन्नू बेटा,
जल्दी से तुम दूध पीलो।
ताकत तुममें आ जाएगी
सीमा पर जा दुश्मन से लड़ लो।

स्नेहलता पाण्डेय'स्नेह'


किसे दोष दें
संस्कारों को या
खुद के स्वभाव को
***************

किसे दोष दूं आज बच्चपन
से सीखे हर एक संस्कारों को
या सबको साथ ले चलने 
वाले स्वभाव को अपने...

देखे सबकी खुशी और 
चेहरे पे एक मधुर 
मुस्कान के हम सपने ।।


क्या समाज का यही 
रवैय्या होता है...
जो इमान से आगे बढ़े
 वही रोता है..
संस्कार मे नहीं मेरे आज
भी राजनीति...
दर्द मेरा कराह के आज
तंहा रोता है..।।

भला किया बुरा पाऐ
बुरा करना सीख ना पाऐ
साथ लेके चलना सिखे जिन्हें
वही राह मे शब्दों के कांटे बिछाऐ।।

वीना...।।

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1 Comments
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  1. वाह बहुत सुंदर अलका जी ,धन्यवाद बहुत मेहनत की आपने

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