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Akhil अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच के ब्लॉक पर "आज कलम तोड़ "शीर्षक से लघु कथाएं लिखी गई हैं आप यहां सभी रचनाकारों की लघु कथाएं पढ़ें और आनंद ले डॉ अलका पांडे मुंबई





अग्निशिखा मंच 
लघुकथा 

शीर्षक - क़लम तोड़ना 

आज सबकी जबान पर सिर्फ़ “सुरभी “का नाम था जबसे उसका उपन्यास “ स्त्री “ आया हर कोई उसकी कलम का दिवाना हो गया हैं । 
सुरभी पहले भी लिखती आई है लोगों ने खूब सराहा हैं , पर इस उपन्यास में तो उसने “कलम तोड़ “ कर लिखा है 
स्त्री संवेदनाओं का ऐसा चित्रण मानव यह हर घर की कहानी हो हर स्त्री की अपनी कहानी हो , यही वजह है की पाठकों ने पसंद ही नहीं किया उसे  शीर्ष पर बैठा दिया । 
पर सुरभी ख़ुश नहीं वह सोच रही है मैंने ऐसा कुछ नहीं लिखा सिर्फ़ और सिर्फ़ अपना ही यथार्थ हूबहू लिखा है । 
और मैं चाहती हूँ स्त्री को इतना कभी सहन न करना पडें की उसके आंसू सूख जाये व पाषाण मन जायें , नहीं नहीं मैं कदापि ऐसा नहीं चाहूँगी मैं महिलाओं को जाग्रत करुगी , अपने लिये सोचे डर कर न जियें , और अपना सम्मान कभी न खोये,  अपनी मर्यादाओं के साथ कर्तव्यों का निर्वाह कर शान से जियें ओर सुरभी नये उपन्यास को लिखने बैठ गई ।

अलका पाण्डेय मुम्बई

लघुकथा का शीर्षक***ह्रदय हीनता
^^^^^&
गिरीश बाबू अपने दोनों पोतों को स्कूल से घर लाकर ए सीआन करके पलंग पर आकर लेट गए।उनकी पत्नी मनोरमा रसोईघर में पोतों को खाना खिलाने में व्यस्त हो गयीं।
 .गिरीश बाबू को अभी आँख लगी थी तो धड़ाम की आवाज आई वे हड़बड़ा कर उठे इतने में काम वाली बाई दौड़ती हुई आयी और बताया कि बाउ जी मांजी बेहोश होकर गिर गई हैं वे फौरन रसोई की ओर भागे और मनोरमा को पलंग पर लिटा कर होश में लाने की कोशिश करते हुए डाक्टर को फोन किया।डाक्टर ने चैक करके बताया कि इनको आईं सी यू में लेजाना होगा गिरीश बाबू एम्बुलेंस में मनोरमा कोलेकर अस्पताल पहुंचे।उपचार शुरू हुआ तब तक दोनों बेटे बहू भी अस्पताल पहुंचे।
दिन से रात रात से दिन होते होते तीन दिन निकल गए बेटों को भी लगने लगा कि हमकब तक यूं छुट्टी लेते रहेंगे तो उन्होंने डाक्टर पर छुट्टी देने का दबाव डाला और डॉक्टर ने अपनी रिस्क पर घर ले जाने की अनुमति दे दी।
  मां को घर लाने के बाद उनके दिमाग में आया कि पता नहीं मां कब चल बसें तो अखबार में उनके शोक संदेश छपवाने की क्यों न तैयारी कर ली जाये।लिहाजा बड़े बेटे ने पत्रिका का कार्यालय में फोन लगा कर संपादक को कह दिया कि कल के अखबार में मेरी मां के शोक संदेश के लिए जगह खाली रखना और यह भी कह दिया कि संदेश मै खुद लिख कर लाऊंगा।संपादक के हामी भरने पर दोनों बेटे बहुऐं और दोनों पोतेशोक संदेश लिखने में अपनी अपनी राय देने लगे।
बड़ी बहू जिसका मायका अमेरिका में था उसका कहना था कि संवेदक के नाम के साथ अमेरिका निवासी भी लिखा हो तो पोता बोला दादी की फोटो के साथ कोठी का भी फोटो आना चाहिए वगैरह वगैरह।मसलन मां का दुख किसी को भी नहीं।
गिरीश बाबू उनसब की ह्रदय हीनता पर दो आंसू बहा कर चुप चाप अपनी पत्नी के मुर्झाए चेहरे को देख रहे थे।
इतने में तो पत्रिका कार्यालय से फोन आया कि अखबार का मैटर टेबल पर जाने का समय होगया है इसलिए शोक संदेश जल्दी लायें
बस बड़ा बेटा बिना मां को देखे बिना पापा से पूछे बगल में कलम तोड़ लिखा संदेश दबाकर कार्यालय चला गया।
मौलिक रचना
....लीला कृपलानी


वीना अचतानी 
अग्नि शिखा मंच को नमन 
विषय ****कलम तोड़ना *****
******** मदर्स-डे ******
   आज महेश के घर काफी रौनक थी। तीनों बहुओं ने मदर्स डे मनाने का फैसला किया । घर को सजाया गया । पार्टी में क्या क्या बनेगा, कौन कैसी साड़ी पहनेगी, मैचिंग ज्वेलरी आदि। महेश की पत्नी रीना ने अपनी खास सहेलियों को न्योता भी दिया । महेश की माँ सफेद साड़ी पहने एक कोने में कुर्सी पर बैठी उनकी हलचल देख रही थी।मगर उनसे किसी ने खाने को नहीं पूछा ।
                  शाम होते ही मेहमानों ने आना शुरू कर दिया ।सब खुश थे, माँ को मालाएं पहनाई गईं ।अनेको उपहार मिले ।सबके सामने प्यार से खाना खिलाया गया ।कुछ समय बाद पार्टी समाप्त हुई ।मेहमान धीरे धीरे जाने लगे ।
                और फिर नियत समय पर वृदाआश्रम से माँ को लेने गाड़ी आई। और माँ खाली हाथ आँखों में आँसू भरे गाड़ी में बैठ गई ।।।
स्वरचित मौलिक 
वीना अचतानी
जोधपुर ।।।।।

अग्नि शिखा मंच
दिनाकं १०/०८/२०२१?/
जय माँ शारदे वर दे
विधा। लघुकथा
बिषय। कलम तोड़ना
मर्मस्पर्शी कथा लिखना
**लायक बेटे बेटी पराई**
यह बात शहर की है।एक ईन्जीनियर साहब अपने दो बेटे एक बेटी तीनो बच्चो को अच्छी शिक्षा दिलवाये।लड़की की शादी भी अच्छे परिवार मे किये थे।
सब लोग आस पडो़स के भी उनके किस्मत को सराहते कि कितनी अच्छी तकदीर है दोनो बेटे लड़की सब विदेश मे अच्छा पैसा कमारहे है। पैसे की कोई कमी नही है।
समय बीतता रहा दोनो पति पत्नी की उमर अब ज्याद हो गई थी।
कई बार बेटो से कहे तुम दोनो मे से एक यहाँ आ जाओ अब हम लोगो की तवियत ठीक नहीं रहती दोनो मे से कोई आने को तैयार नही हुआ। एक दिन पत्नी मनोरमा की तवियत अचानक खराब हो गई उनको दिल दौरा पडा था।अमेरिका दोनो बेटो से बात किये।दोनो ने आना कानी की ईन्जीनियर साहब बहुत दुःखी हुए। तब निर्दयता की हद हो गई जब बडे बेटे ने बोला पिता जी मैने छोटे से बोला है माँ के मरने पर तुम चले जाना आप पर मै आजाऊँगा मकान भी तो बेचनी रहेगी यह बात सुन कर ईन्जीनियर साहब बहुत दुःखी हुए इस के आगे बेटा क्या बोला कुछ नहीं सुने।
उन्होंने तुरन्त अपने पुत्री को फोन लगाया बोले नीलू तेरे माँ को हार्ट अटैक पडा है कल से बेहोस है। बेटी यह सुनकर रो पडी़ बोली पापा माँ को देखना ।मै अगली फ्लाइट से इनके साथ आरही हूं भइया से कहे किसी अच्छे डाक्टर को दिखाये तब तक मै पहूंच जाऊँगी।सुन के ईन्जीनियर साहब धिरेसे बुदबुदाये तेरा भाई माँ के मरने पर आयेगा।
स्वरचित
बृजकिशोरी त्रिपाठी
गोरखपुर, यू.पी



आज का विषय:--- *लघु कथा*
  शीर्षक:---- *कलम तोड़ना*
                यानि *(मर्म स्पर्शी*)

हमारे प्रथम राष्ट्रपति बचपन से मेघावी छात्र थे। अपने गांव के विद्यालय में वर्ग 9 में परीक्षा से कुछ समय पहले बहुत बीमार हो गये थे।जिसके कारण विद्यालय नहीं आ रहे थे। जब परीक्षा के समय हुआ तो किसी प्रकार घर से विद्यालय आते और परीक्षा देकर चले जाते। परीक्षा समाप्त होने के बाद कुछ दिन के पश्चात कक्षा में वर्ग शिक्षक परीक्षा फल की घोषणा किए तो उसमें राजेंद्र प्रसाद का नाम नहीं था।
 निराश होकर वर्ग शिक्षक से जानकारी लिए मेरा नाम नहीं है ? 
वर्ग शिक्षक बोले तुम बहुत दिनों तक वर्ग में उपस्थित नहीं थे।इसके कारण तुम इसी वर्ग में रोक दिये रूक गये हो। 
इसी बीच में प्रधानाध्यापक महोदय आकर घोषणा किए ये छात्र राजेंद्र प्रसाद पूरे विद्यालय में 100% अंक प्राप्त किया हैं ,इसलिए इसका नाम में घोषित कर रहा हूं। छात्र अस्वस्थ होने पर भी *कलम तोड़ मेहनत कर अपना भविष्य सुधारा हैं ।मैं इसके उज्जवल भविष्य की कामना करता हूं। पूरे विद्यालय में ताली के गड़गड़ाहट से वातावरण *मर्मस्पर्शी* *हो गया*।

विजयेन्द्र मोहन।


बेटी अपनी पर बहन पराई


दादा जी के दो बेटे और एक बेटी थी दादाजी बड़े ईमानदार मेहनती और नेक दिल वाले इंसान रहे इत्तेफाकन से दादी जी का निधन बहुत जल्दी हो गया इसलिए उन्हें अकेले ही जीवन यापन करना पड़ा पर उनकी दोनों बहुएं बेटे पोते पोते सब बड़े ही लाइक थे चुकी संस्कार बहुत अच्छे मिले हुए दादा जी के निधन होने के पहले ही दादाजी ने अपनी इच्छा जाहिर की कि हमारी संपत्ति में दोनों बेटों और बेटी का भी हिस्सेदारी होनी चाहिए यह उनकी इच्छा थी दादाजी की तो मृत्यु हो गई पर उनके बेटे की इमानदारी इतने उच्च कोटि थी कि अपने पिता के अंतिम इच्छा को पूरा करने के लिए जायदाद की संपत्ति में बेटी को भी एक हिस्सेदारी बना दिया सब लोग बहुत खुश थे बेटी भी खुश मायके में भाई ने मेरे पूरे मान सम्मान से मेरी कदर की
  पर कुछ ही वर्षो बाद दादा जी के छोटे बेटे की अचानक मृत्यु हो गई उन्हें भी तीन बेटी और तीन बेटे रहे बड़ा ही विपत्ति का समय उस परिवार पर आया लेकिन सभी ने मिलजुल कर उस विपत्ति का सामना किया और धीरे-धीरे संघर्ष कम होने लगे तीनों बेटियों की भी शादी हो गई तीन बेटे भी अपने हिसाब से अच्छी नौकरी में ही रहे लेकिन जब संपत्ति का बंटवारा होने की बात हुई तो इस बार बेटियों का संपत्ति में कोई भी अधिकार नहीं मिला
बेटियां सब एक साथ जब मिलती थी तो यह कहती थी कि दादाजी ने कितनी इमानदारी से अपनी संपत्ति में बेटा बेटी अलग नहीं किया लेकिन ऐसा क्या हुआ कि इस कानून नियम को परिवार का दूसरा पीढ़ी नहीं अपना सका कहीं ना कहीं मन में एक लालच बन गया दादा जी के छोटे बेटे कि अचानक मृत्यु होने के कारण उन्होंने अपनी संपत्ति का बंटवारा यथोचित समय पर नहीं कर गए थे फल स्वरूप बेटे के मन में जो भी आया अपने हिसाब से सब ने संपत्ति का बंटवारा कर लिया किसी ने भी अपनी बहनों के लिए नहीं सोचा

इसलिए कहा जाता है बेटी अपनी होती है बहन पराई होती

कुमकुम वेद सेन


मंगलवार दिनांक १०/८/२१
विधा ****लघु कथा
विषय** #***कलम तोड़ना***#
     (बहुत मर्मस्पर्शी रचना करना)

    मित्रों, कोई भी रचनाकार या रचना धर्मी, साहित्यकार अपनी रचना का निर्माण करता है तो केवल स्वांत सुखाय के लिए नहीं
बल्कि समाज और देश के हित मे हों । रचना में अच्छा शब्द चयन हों , अच्छा भाव हों ।और विषयानुरूप हों । 
        हमारे भारतीय साहित्य में ऐसे अनेक रचनाकार,कवि साहित्यकार निर्माण हुए जिन्होंने अपनी अमिट छाप जनमानस पर थोड़ी है । आज भी हम उनका उदाहरण देते हैं। विश्वविद्यालयों में उनके साहित्य का पाठ पढ़ाया जाता है यह बहुत बड़ी उपलब्धि है उनकी साहित्यिक रचनाओं की ।
        मुंशी प्रेमचंद जी ने गोदाम और निर्मला जैसी महान कृति तैयार की । कवियों में महादेवी वर्मा, निराला , कवि गीतकार नीरज ,और मधुशाला के निर्माता हरिवंश राय बच्चन जी हैं । इनकी कृतियां मनोरंजन के साथ-साथ बहुत बोधमय और प्रेरणास्पद हैं आम आदमी की रुचि को ध्यान में रखते हुए उपन्यास का निर्माण करने वाले गुलशन नंदा को जनता ने बेहद पसंद किया उनके एक उपन्यास पर कटी पतंग जैसी बहुत बढ़िया फिल्म बनी ।
             आज सबकी जुबान पर जन गण मन, वंदेमातरम और सारे जहां से अच्छा जैसी बेहतरीन, अमिट ,मीठी जैसी राष्ट्रभक्ति की रचना करने वाले रविन्दनाथ टैगोर ,बंकिम चंद्र चटोपाध्याय और सर मोहम्मद इकबाल जैसे बेहतरीन साहित्यकार जिन्होंने अपनी कलम तोड़ी है अपनी साहित्यिक निर्मिती के लिए । इन बहुत अत्यधिक मर्मस्पर्शी रचनाओं को हम और आने वाली पीढ़ियां सदियों तक नहीं भूल पाएगी ।
      कोई भी रचनाकार ऐसी रचना का निर्माण करें कलम तोड़ कर जिसे सारा समाज और देश याद करें ।
     ऐसे अद्भुत रचनाकार को हमारा कोटि-कोटि नमन ।

प्रा रविशंकर कोलते
     नागपुर ३०


$$ कलम तोड़ना $$

कान्ति लाल जी ने अपने बेटे सतीश को बैंक से लोन लेकर इन्जीनियरिंग की पढ़ाई करवाई । खुद शिक्षक थे पर गुस्से के तेज तर्रार और पत्नी आलसी और लापरवाह ।इसलिए कभी घर मे पैसा रहता ही नही । अक्सर उधार से काम चलाना पड़ता जिसका असर उनके तीनो बच्चो पर हुआ । बच्चे मे भी चिड़चिड़ापन और गुस्सा जन्मजात मिला । सतीश इन्जीनियर बनने के बाद भी कभी सन्तुष्ट नही रहता । पैसो की कमी और सबका खर्च चलाने मे परेशानी महसूस करता ।ऐसे मे उसकी शादी कर दी बहु कमला समझदार थी सोचा घर को सम्भाल कर चलाएंगे तो इन्ही पैसो मे आसानी से चल जायेगा । खूब मेहनत कर पुराना कर्ज उतारा सारी जिम्मेदारिया अच्छे से निभाने लगी पर उसके सास ससुर अपने बेटे से हमेशा शिकायत करते और बेटा बिना सोचे समझे उनके सामने ही अपनी पत्नी कमला को पीट देता । फिर भी उसने बिना किसी से शिकायत किये अपनी जिम्मेदारी बखुबी निभायी । कान्ति लाल जी, रमादेवी और सतीश हर समय दूसरों के सामने बहू की बुराई करते रहते दस बीस लोगों के सामने भी तमाशा बनाने से नही चुकते। 
लिखते लिखते कलम टुट जाये पर उनके कारनामे खतम नही होंगे जो उन्होंने किये । 

चन्दा डांगी रेकी ग्रैंडमास्टर 
रामटेकरी मंदसौर मध्यप्रदेश

नमन पटल🙏🙏
आज का विषय- क़लम तोड़ना (मार्मिक)
भाई आप जल्दी ठीक हो जाएंगे। राखी का त्योहार भी आने वाला है आप हमेशा मेरी राखी को अपने हाथों से बांधते हो,इस बार मेरे हाथ से राखी बंधवाकर ही घर वापस जाना। क्यों भाभी मैं ठीक कह रही हूं न?"
ठीक है मेरी प्यारी बहना जैसा तुम चाहती हो वैसा ही होगा लेकिन पहले इस अस्पताल ले तो छुट्टी मिले।
भाई बहन की बातों को सुनकर कविता मुस्कराए बिना न राह सकी।
भाई अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान नई दिल्ली में एडमिट थे।
दूसरे दिन निधि अपने भाई के लिए सुपाच्य खाना बनाकर अस्पताल ले गई। भाभी कह रही थी कि अस्पताल में डॉक्टर्स की हड़ताल हो गई है।
केवल एक दो जूनियर डॉक्टर ही आ रहे हैं। भाई को सीने में पाइप लगा था उनके सीने में पानी आ गया था अतः डॉक्टरों ने पानी निकालने के लिये पाइप लगाया था।
हड़ताल खत्म होने का नाम नहीं ले रहा था अतः सबलोगों ने निर्णय लिया कि भैया को घर ले जाते हैं वहीं पर किसी अच्छे अस्पताल में इलाज कराएंगे।
आज वह भैया को विदा करने स्टेशन आई थी।ट्रैन के चलने का समय हो गया था। निधि बहुत उदास थी न जाने क्यों उसे लग रहा था कि वह अब भैया को नहीं मिल पाएगी।
उसकी इस साल भाई को अपने हाथों से राखी बांधने की इच्छा अधूरी रह गई थी।
वह बार बार फोन करके भैया का हालचाल पूछती थी। 
माँ ने कहा कि भैया अब ठीक हो रहे हैं। पाइप अब थोड़ा ऊपर करके लगा दिया है।
पिता जी महामृत्युंजय का जाप करवा रहे थे। उन्होंने भैया के हाथ में एक मंत्रसिद्ध अंगूठी पहनाया था कि इससे भैया का कुछ अहित नहीं होगा।
इस तरह कुछ दिन बीते लेकिन एक दिन अनहोनी हो ही गई। भैया वॉशरूम जा रहे थे ।उस समय अंगूठी उनके हाथ में नहीं थी । उन्होंने ने किसी दुर्घटना ग्रस्त मरीज को देख लिया था और उन्हें अटैक आ गया-----उन्हें एक झटका लगा पाईप ऊपर होने की वजह से निकल गया और------😭😭
आज भी निधि राखी के त्योहार पर भैया को याद करते हुए सोचती है- "आखिर क्यों होती है हड़ताल"।

स्नेहलता पाण्डेय 'स्नेह'

अधूरी कहानी (कलम तोड़ना)
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 ऐश्वर्या ने बचपन से ही विश्व सुंदरी बनने का सपना देखा था,पर उसका सपना पूरा न हो सका और एक अच्छा लड़का देखकर माता- पिता ने उसकी शादी कर दी।
  ऐश्वर्या अपने ससुराल में सुखी थी ।पति मोहन मिलनसार था, उसका ध्यान रखता था ,और कभी-कभी वह माता- पिता से भी मिलाने ले जाता था। शादी के एक वर्ष बाद उसकी गोद हरी हो गई.. और एक सुंदर ,फूल सी बेटी इस परिवार में खुशियां लेकर आए गई , उन्होंने उसका नाम रुपल रखा।ऐश्वर्या ने उसे जब अपने हाथों में लिया तो उसकी इच्छाएं जो अचेतन मन में चली गई थी ,वह फिर से जागृत हो गई , उसने सोचा कि जो सपने मैं पूरा नहीं कर पाई वह सपना बेटी पूरा करेगी।रूपल बहुत सुंदर थी,... बड़ी -बड़ी अॉखें, घुंघराले काले बाल और रंग गोरा था।"मॉ ने बचपन में अपने सपने के बारे में रुपल को बता दिया था, और रूपल भी उसे अपने जीवन का लक्ष्य बना लिया ।रूपल जब 12वीं कक्षा में थी तभी उसकी मुलाकात राहुल से हुई ।राहुल उसी कॉलोनी में रहता था बस हाय हैलो था।एक दो बार के मुलाकात में वह रूपल से प्यार कर बैठा , लेकिन रूपल को‌ इन बातों से कोई मतलब नहीं था ,उसे तो आसमान छूना था ।इधर राहुल उसे पागलों की तरह प्यार करने लगा ,पर यह प्यार एकतरफा था।
एक दिन तो राहुल ने हद कर दी , अपने दोस्तों को लेकर रूपल के घर पहुंच गया और उसका हाथ मांगने लगा, कहने लगा मैं तुम्हें जीवन संगिनी बनाना चाहता हूं ।क्या तुम हां तुम पागल हो गए हो ?मैं और शादी तुमसे !क्यों मुझसे क्या बुराई है ?मैंने कभी इस बारे में सोचा भी नहीं है। राहुल ने गुस्से से कहा क्या तुम्हारे दिल में कोई और और है ?ऐसी बात नहीं है, पर मैं अभी शादी नहीं करूंगी ... पहले अपनी मंज़िल को हासिल करूंगी, उसके बाद ही कुछ सोचूंगी।राहुल ने गुस्से में कहा मुझे ना कहने का अंजाम तुम्हें भुगतना पड़ेगा, इतना कहकर वह वहां से वापस आ गया। राहुल के दिमाग में कुछ अलग ही खिचड़ी पक रही थी।वह रूपल से अपमान का बदला लेना चाहता था ।रूपल इन सब बातों से अंजान अपने फिटनेस पर ध्यान देने लगी और उठने बैठने के ,बात करने , खाना खाने और रेम्पवॉक की ट्रेनिंग लेने लगी।
एक दिन राहुल ने उसे बगीचे में मिलने के लिए बुलाया ,तो वह सहज भाव से राहुल से मिलने चली गई.. उसे क्या मालूम था कि इस समाज में विकृत मानसिकता के लोग ज्यादा हैं।आज भी स्त्री और पुरुष में समानता की बात करने वाले कुछ पल में औरतों की जिंदगी को नर्क बना देते हैं।रूपल जैसे ही वह राहुल के पास पहुंची तो उसने तेजाब की बोतल जल्दी से निकाला और उसके चेहरे पर फेंकते हुए कहा... जाओ अब तुम बन जाओ विश्व सुंदरी , इतना कहकर वहां से रफूचक्कर हो गया।रूपल जोर-जोर से रोने व चिल्लाने लगी आस -पास के लोग वहां इकट्ठे हो गए ।उसे तत्काल उसे अस्पताल में भर्ती कराया गया,उसकी एक आंख की रोशनी चली गई। चेहरा इतना कुरूप हो गया कि लोग देख कर डर जाते थे । आईना उसे देखकर स्वयं शरमाने लगा। कुछ समय बाद ऊपर का घाव तो भर गया, लेकिन जो घाव दिल में था वह नासूर बन गया पूरी जिंदगी भर के लिए विश्व सुंदरी बनने का सपना तो सपना बनकर ही रह गया ,वह खुद भी अधूरी हो गई और उसकी कहानी भी अधूरी हो गई।कलम टूट गई थी।

श्रीमती शोभा रानी तिवारी,
 619 अक्षत अपार्टमेंट खातीवाला टैंक इंदौर,
मध्य प्रदेश मोबाइल 8989 409 210



अ. भा. अग्निशिखा मंच
मंगल वार - 10/ 8/ 2021
विषय -कलम तोड़ना: 
अत्यधिक मर्मस्पर्शी रचना करना
विधा - लघुकथा 

अखबार खोला तो एक खबर पर मेरी दृष्टि पड़ गई। उसमें लिखा था कि ससुर ने अपनी दोनों बहुओं को गोली से मार डाला। जिसने भी सुना दाँतो तले उंगली दबा ली। 

कल की ही तो बात है कितनी धूमधाम से शादी हुई थी दोनों लड़कों की। एक ही दिन शादी थी। बारात गई। घर में नाच गाना हुआ। बड़ी खुशी से ससुर पगड़ी पहन कर यहाँ-वहाँ घूम रहे थे राजपूत और रईस जागीरदार। सासू जी तो थी नहीं बहुत पहले गुजर चुकी थी। बच्चों को उन्होंने ही पाला था। आर्मी में भेजने का निर्णय भी उन्हीं का था।

दोनों बहुएँ आईं तो घर में रौनक आ गई। घर में हर जगह चूड़ियों और पाजेब के स्वर गूंज रहे थे। पूरा घर खनकदार हो चुका था लेकिन यह मंजर ज्यादा दिन नहीं रहा।

शादी के 5 दिन बाद ही कारगिल की लड़ाई शुरू हो चुकी थी और उन्हें बुलावा आ गया। वे अपनी नवब्याहताओं को छोड़कर चले गए, देश की सेवा जो करनी थी। पिता भी आर्मी में कर्नल रह चुके थे, इस कारण बच्चों में भी देश प्रेम कूट कूट कर भरा था। 

कंपनी में जाते ही उन्हें देश सेवा का मौका मिला और लड़ते लड़ते कई दुश्मनों को मारते हुए दोनों एक ही दिन वीरगति को प्राप्त हो गए। उनका पार्थिव शरीर तिरंगे में लिपट कर घर आ गया।

पिताजी से तो कुछ बोला नहीं जा रहा था चुपचाप उस उनका क्रिया कर्म कर रहे थे। बहुओं की आँखों से ऑंसू सूख नहीं रहे थे। सुखते भी कैसे 9 दिन ही तो हुए थे शादी हुए। बड़ा गमगीन माहौल था। सब रो रहे थे, लेकिन ससुर ने कुछ ठान लिया था। ससुर ने उनके माता-पिता से कहा कि आप लड़कियों की दूसरी शादी कर सकते हो मुझे कोई एतराज नहीं है। बहुएँ से भी कहा कि आप घर जा सकती हो। कारण उन्होंने सोचा कि मैं वृद्ध हो चुका हूँ इन जवान लड़कियों की रक्षा कैसे करुँगा? लेकिन बहुएँ नहीं मानी।

एक दिन उनके ससुर बंदूक साफ कर रहे थे उसी समय बहुएँ आईं और उनके पैरों पर गिरकर बोलने लगीं कि पिताजी हमको घर मत भेजिए हम यही रहेंगे आपके पास। 
उसी समय न जाने कैसे उस राइफल में से गोली निकली जो कि दोनों बहुएँ जो आगे-पीछे खड़ी थीं के आर पार हो गई और दोनों ने वहीं दम तोड़ दिया। कर्नल साहब भी हक्के रह गए। उन्हें समझ नहीं आया कि क्या हो गया?
 लेकिन जो होना था वह हो चुका था। उसे हटाया नहीं जा सकता था। खबर फैल गई कि ससुर ने अपनी बहुओं को मार डाला।

 राजपूती खून था इस कारण उन्होंने मरने का निर्णय नहीं लिया आखिर तक अकेले सादा जीवन उच्च विचार रखते हुए जिए। यह सच्ची घटना पंजाब की है।

प्रथम दृष्टया यह लग रहा था कि उन्होंने ही बहुओं को मारा है लेकिन जब गहरी पड़ताल हुई तो पता लगा अचानक राइफल से गोली चल गई थी दोनों बहुएँ एक कतार में खड़ी थी इसके कारण दोनों के आर-पार निकल गई।

वैष्णो खत्री वेदिका
जबलपुर मध्यप्रदेश

अग्निशिखा मंच
तिथि-१०-८-२०२१
विषय -लघुक‌था-कलम तोड़ना

                आशीर्वाद
 
     तनु को आज एक कवि सम्मेलन में कविता सुनाना है। उसने पहले कभी इतने बड़े कवि सम्मेलन में कविता पाठ नहीं किया था , अब मंच में बोलने से डर लग रहा था। मंच पर जाने से पहले एक वरिष्ठ कवि मिले
 उन्होने कहा - " इतने बड़े मंच पर अच्छे अच्छे कवियों की हालत खराब हो जाती है और तुम तो नौसिखिया हो, तुम तो क्या ही पढ़ पाओगी। देखना कहीं हूट ना हो जाओ। "
  अब तो कविता की हालत और खराब हो गयी। जब उसका नाम पुकारा गया उसने सोचा मैं क्यों घबरा रही हूंँ ,आज के लिए मैने बहुत सुंदर मर्मस्पर्शी कलम तोड़ कविता लिखी है। उसने मां सरस्वती को प्रणाम कर आशीर्वाद मांगा। उसकी कविता खत्म होने के बाद एक क्षण सन्नाटा छाया रहा फिर पूरा प्रांगण भीगी आंखोंके साथ तालियों की गड़गड़ाहट से गूंज उठा। 
वरिष्ठ कवि नज़र नीची किये रहे। 

नीरजा ठाकुर नीर
पलावा डोम्बिवली
महाराष्ट्र



#अग्निशिखा मंच🌺🌸🙏🏽🙏🏽🌸🌺
दिन मंगलवार
दिनांक 10 अगस्त 2021
विषय कलम तोड़ना  

वृद्धि आज तैयार होने में कुछ ज्यादा ही समय ले रही थी। आज उसके पति इंदर को उनकी लिखी किताब " नारी अबला नही " पर शहर में एक भव्य आयोजन में पुरुष्कृत एवं सम्मानित किया जाना था। डी एम द्वारा इतने भव्य आयोजन में सम्मानित होना इंदर के लिए काफी गर्व की बात थी। इंदर काफी खुश था।होता भी क्यों नही...उसने नारी अत्याचार एवं घरेलू हिंसा के विरोध में इस किताब में बहुत ही सुंदर अपने विचार रखे थे और नारी को अपने ऊपर हुए अत्याचार के विरोध में किस तरह और कैसे विरोध करना चाहिए.. सब कुछ वर्णित था।
         इंदर कई बार आवाज लगा चुका था और जल्दी चलने को कह रहा था। वृद्धि हड़बड़ाते हुए उसके साथ कार में बैठ गई। उस भव्य आयोजन में जब मिस्टर एवं मिसेस को सम्मानित करने के लिए मंच में बुलाया गया तब इंदर अपनी पत्नी का सम्मान के साथ हाथ पकड़र मंच पर लेकर गया। तालियों की गड़गड़ाहट के बीच इंदर ने पुरस्कार ग्रहण किया और उस वक़्त वृद्धि अपने बालों से अपने दाएं गाल पर पड़े इंदर की उंगलियों के निशान को छुपाने में व्यस्त थी।

*मीना गोपाल त्रिपाठी*



🌺विषय -कलम तोड़ना: 
अत्यधिक मर्मस्पर्शी रचना करना
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🌺विधा - लघुकथा 
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कुंवर एक कवि था। लगभग हर प्रकार की कविताएं लिखा था और अच्छा से अच्छा लिखने का प्रयास करता रहता था। लेकिन उसने अपनी कविताओं पर कभी दंभ नहीं किया। 
वह कई व्हाट्सएप समूहों से जुड़ा हुआ था। उसका अपना पटल भी था। कई पटल ऐसे थे जिन पर निरंतर लेखन प्रक्रिया चलती थी। ये पटल कुंवर को अधिक पसंद थे। वह भी उन पर निरंतर दिए हुए विषय पर कलम चलाया करता था किंतु उसने ऐसा कभी नहीं सोचा कि वह कलम तोड़✍️ लिखता है। पटल के समीक्षक जो भी टिप्पणी लिख देते वह उसी में खुश हो लेता। 
चित्र पर लिखना बहुत बड़ी चुनौती होती है। क्योंकि उसमें आपकी अपनी अभिव्यक्ति दब जाती है। आपको चित्रानुसार ही लिखना होता है। किंतु कुंवर चित्रों पर लिखने में काफी कुशल रहा है।
 एक बार पटल पर एक चित्र दिया गया जिसमें एक महिला और एक पुरुष के हाथ जुड़े हुए थे। उसने बड़े मनोयोग से उस पर गीत लिखा – मेंहदी वाले हाथों से जब मेहनत वाले हाथ मिले…   
पटल पर सामान्यतः उसे अच्छा कह कर खानापूर्ति कर दी गई। क्योंकि उनके सामने सैकड़ों कविताएं होती हैं। अतः उतनी गंभीरता से पढ़ने का मौका नहीं होता। 
लेकिन जब कुंवर ने उस कविता को फेस बुक पर डाला तो तो लोगों ने बहुत प्रशंसा की। कुछ लोगों ने लिखा कि आपने इस गीत को लिखने में कलम ✍️ही तोड़ दी हैं। तब कुंवर को अपना परिश्रम सफल लगा। उसको बहुत प्रसन्नता हुई।
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️🙏
© कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड, कोलकाता

लघु कथा ( कलम तोडना )

मेरी सहेली रीता बचपन की दोस्त है हमने एक ही स्कूल से शिक्षा प्राप्त की | समय बीतता गया हमारी शादी अलग अलग शहर में हो गयी कई अर्सो से हम मिले भी नहीं |अचानक एक दिन गौहाटी के मॉल में मैंने उसे देखा ...अरे रीता फ़िलहाल कहा रहती हो कैसी हो .. सब ठीक है बच्चे बड़े हो गए ,.. रीता ने कहा और तुम सुनाओ कैसी हो ,आजकल तो तुम काफी लिखती हो ,हा रीता तू भी लिखना शुरू कर ,तू तो हिंदी में अब्बल दर्जे का अंक लाती थी ,नहीं नहीं मैं सब भूल चुकी हूँ ,यार कोशिश तो कर ..ठीक है तू बोलती है मै भी लिखना शुरू करुँगी और उसने लिखना शुरू किया इतनी मेहनत की आज कलम तोड़ लिखने लगी है ,उसकी लेखनी बड़े बड़े कवियों को भी मात देती है 

स्मिता धिरासरिया ,बरपेटा रोड

लघुकथा -मंगलवार 
विषय -क़लम तोड़ना 
मर्मस्पर्शी रचना करना 
अंतर्मन 
आज रंचू की क़लम सचमुच टूट चुकी थी । भावनायें आहत हुई थी । तभी अंतरमन भाव प्रगट हुये ।
अपनी माँ की बातें सीख देते हुए याद कर रही थी । कोई कुछ तुम्हें कहता है ,तुम्हारी भावनाएँ आहत होती है तो क्या ? झटक कर चलना सीखो , कही बातों को शरीर से चिपका कर ना रखो ।गंदगी हमेशा अस्वस्थ मानसिकता को जन्म देती है । तुम्हें मालूम नही , मैंने तुम्हारा नाम रचना इसलिये की मुझे ये गाना बहुत पसंद है “ जिसकी रचना इतनी सुन्दर वो कितना सुन्दर होगा “ तुम अब अपनी लेखनी पर प्रतिबंध लगाने वाली होती कौन हो ? तुम्हारी क़लम तो अपने बच्चे नवासे नवासियों के लिये चलती है तुम कहती हो , तुम्हारे वीराने की बहार है , ये भोले प्यारे बच्चे और उनके साथी जो रोज़ तुम्हारी कहानी से सीख ले ताज़े गुलाब की क़लम दे जाते रंग बिरंगी गुलाब तुम्हारी बग़िया में खिल तुम्हारी लेखनी में उत्साह बढ़ाते है हर पौधों में तुमने अपने सारे बच्चों उनके साथियों का नाम तख़्ती में लगा रखा है । जो तुमसे ज़्यादा अपने नाम का गुलाब पढ़ ख़ुश हो जाते है ।तुम्हारी चाकलेट वाली नाव की कहानी भले ही पुरानी जो तुम्हारे बच्चों पड़ोसियों के साथ उनके बच्चों को उतनी ही ख़ुशी आज भी देती है ।
इसलिए अपनी क़लम को मज़बूत बनाओ ऐसी उत्साहवर्धक रचना करो । ये तुम्हारे अंतर मन की आवाज़ है सब की क़लम तोड़ आगे बढ़ जायेगी । 
तभी बच्चों की आवाज़ सुनाई दी रंचू दादी आज १५ अगस्त सिल्वर जुबली है रंगबिरंगी फूलो संग तिरंगा फहराना है । 
और रचूँ नानी की क़लम चल पड़ी।
अनिता शरद झा रायपुर

।अग्नि शिखा मंच ।
       कलम तोड़ना-लघुकथा 
समीर एक मेधावी छात्र है। उसका शहर के डिग्री कालेज में भर्ती हो गई है। उसी समय उसके साथ घटना घटी। समीर के पिता जी सख्त बीमार हो गये। उनके इलाज के कारण घर में रूपयों की तंगी हो गई। ऐसे समय में समीर को अपनी फीस भरने में काफी तकलीफ हो रही थी।समय बदला, समीर को आर्डिनेन्स फेक्ट्री में टेक्नीशियन के पद के लिए नियुक्ति मिल गई। घर के सामने एक बैंक के आफिसर रहते थे, उन्होंने समीर को बुलाकर समझाया कि आगे की पढ़ाई के बजाय टेक्नीशियन की नौकरी ज्यादा अच्छी है और उसमें तुमको हर महीने वेतन भी मिलेगा। समीर ने फेक्ट्री में नियुक्ति लेली। उसका काम बहुत कठिन था।रोज निश्चित उत्पादन देने के लिए समीर को कलम तोड़ मेहनत करनी पड़ी और घाटे पर चलने वाली फेक्ट्री लाभ देने लगी। 
स्वरचित, 
रामेश्वर प्रसाद गुप्ता ।


लघु कथा कलम तोड़ना

      संजय जी के मित्र समीर बहुत अच्छे गायक थे। एक दिन वह अपनेसाथ गोष्ठी में ले गए। संजय जी का मन में परिवर्तन हुआ कार्यक्रम देख कर बहुत अच्छा लगा और उसी दिन से उन्होंने लघुकथा लिखने का श्रीगणेश कर दिया। संजय जी शरीर से अस्वस्थ थे उन्हें लिखने में भी परेशानी होती है । अस्वस्थ रहते हुए भी उनकी लगनशीलता के कारण उनकी 6 पुस्तकें प्रकाशित हो गई अनेक सम्मान मिले। और आज भी वह कलम तोड़ लिखते रहते हैं और की सभी लव कथाएं वर्तमान परिस्थितियों पर आधारित हैं सहज और सरल शब्दों में जिसकी सभी लोग प्रशंसा करते हैं।
पदमा तिवारी दमोह मध्य प्रदेश

नमन अग्निशिखा मंच 
दिनाँक;-10/8/2021
विषय;--लघु कथा।।
कलम तोड़ना;-अत्यधिक मार्मिक सृजन करना
रोहित बचपन से ही पढ़ने में मेधावी रहा।किताबें उसकी बहुत अच्छी मित्र रहीं।।उसने राजा हरिश्चंद्र, झाँसी की रानी लक्ष्मी भाई ,आजाद,भगत सिंह खुदीराम बोस और भी अन्य भारत माँ के सपूतों को कहानियों में पढ़ा व उसके बाल मन मे देश भक्ति का रंग गहरा होने लगा वह अपनी कलम की लेखनी के द्वारा इनके चरित्र को अपने शब्दों में ढाल कर कागज पर उकेरने लगा।पढ़ने में तो अच्छा था ही और देश भक्ति का जज्बा उसे सेना की ओर ले गया वह बहुत जल्द ही मेजर के पद पर शोभायमान हो गया।।अभी छूट्टी में घर आया था माँ पापा उसके लिये जीवन साथी की तलाश कर रहे थे बात लगभग तय थी बस दोनो को एक दूसरे को जानना था।।।वे दोनों मिले सुमि उसकी कल्पना के अनुरुप ही निकली।।सुमि ने उसे बताया कि वह भी लिखने की शौकीन है व विभिन्न पत्र पत्रिकाओं में उसकी रचनाओँ से प्रेरित है।।दोनो की यह रुचि मेल खाना बहुत संयोग की बात थी।।
विवाह की तिथि तय होती कि हेड ऑफिस से कॉल आ गया सीमा पर एलर्ट का।।अतः वह जल्द ही आने का वादा व अपनी लेखनी में सुमि को उकेरने का वादा करके चला गया।।
जंग छिड़ी व बहुत ही जांबाजी से रोहित ने दुश्मन का मुकाबला किया।किंतु जब बचाव का कोई सिरा नहीं दिखा तो उसने अपनी टोली को सुरक्षित जगह पर रख कर स्वयं को आगे कर दिया तथा दुश्मनों ने धुंआधार गोली बारी की जिससे वह अपने देश की रक्षा खातिर कुर्बान हो गया।।उसके पास एकसुमि को लिखा पत्र व उसके माता पिता की तस्वीर थी लिखा था""मेरी हमसफ़र किया था वादा साथ चलने का पर शायद यह मुमकिन नहीं।
मेरे माता पिता का मेरे अलावा कोइनहीँ।
तुम मित्र भी सखा भी सब कुछ तुम्हें माना ।
चलेंगे जीवन भर साथ 
मिल के रखेंगे उनका ख्याल
पर रब को यह मंजूर नहीं 
कहती थी तुम 
कितना अच्छा लिखते हो तुम
मुझ पर भी लिखो 
लिखने की चाहत लगता है 
पूरी होगी नहीं।
बस यही है कामना 
अगले जन्म में मिलो तो
 संग संग चलेंगे बहुत दूर तलक
है यही इल्तिज़ा तुमसे 
 देश के संग माँ पापा भी।
तुम्हारे हवाले
अलविदा कह रहा हूँ।
बिछड़ने का मन नहीं।
सदा रहना खुश तुम 
अपनी दुनिया मे।।
लिखना चाहता हूं 
बहुत कुछ तुम्हारे बारे में।
कलम मेरी टूट रही।।
अलविदा !अलविदा!!
निहारिका झा।

94 50 18 6712 
नमन अग्निशिखा मंच
 दिनांक 10. 8. 2021
 लघु कथा: कलम तोड़ना
अदालत में मुकदमा चल रहा था। अंजनी को मर्डर केस में उसके विरोधियों ने फंसा दिया था पुलिस ने तहकीकात किया और असली अपराधी को खोज कर कटघरे में ला खड़ा किया पुलिस के जूता आए हुए साक्ष्यों के आधार पर अपराधी का कृत्य सिद्ध हो गया। न्यायाधीश ने तीन दिन बाद उस मुकदमे में फैसला सुनाने की किसी निश्चित किया।
बहुत सोच-विचार के बाद न्यायाधीश ने भारतीय दंड संहिता के आधार पर विचार करते हुए लिखा--"अपराधी की उम्र बहुत अधिक नहीं है वह युवक है भविष्य में सुधर सकता है, किंतु मेरे दिए हुए समाधान से कहीं वह भविष्य में मैं इस प्रकार का कार्य करें और समाज को लक्षित करें इसलिए उसे मृत्युदंड दी जाती है"। ऐसा निर्णय सुना कर जज ने अपनी कलम तोड़ दिया जिस किसी ने सुना वाह न्यायाधीश के फैसले की प्रशंसा करता हुआ दिखा।
******डॉ ब्रजेन्द्र नारायण द्विवेद्वी शैलेश वाराणसी
11.8.21


कलम तोड़ (अत्यधिक मर्मस्पर्शी रचना करना) --- ओमप्रकाश पाण्डेय

अवतार बाबू आज आप बहुत चुप बैठे हैं क्या बात है? विवेक ने पहुँचते ही पूछा. वास्तव में अवतार और विवेक दोनों साथ साथ पास के मैदान में, जब से करोना का भय कुछ कम हो गया, मिलते थे. हालांकि दोनों मास्क लगाये रहते थे और एक दूसरे से दूरी बनाए रखते थे. अवतार ने कहा विवेक कल मुझे एक सब्जी बेचने वाली महिला ने एक ऐसी बात कही कि मैं सोंच में पड़ गया हूँ.
 ऐसी क्या बात उसने कह दिया, जरा मैं भी सुनु, विवेक ने कहा. असल में कल सुबह मैं टहलने निकला था. वह जो पुलिया के पास दो औरतें बैठती हैं न जो सब्जी रखे रहतीं हैं , मुझे वो दिखाई पड़ी. मैंने सोंचा चलो इन्हीं से सब्जी ले लेते हैं. पास पहुचने पर मैंने यूँ ही पूछ लिया कि काकी कैसा चल रहा है. वह बोली इस लाकडाउन में बिक्री तो कुछ हो नहीं रहा और उपर से मेरा आदमी जहाँ काम करता था, वह दुकान भी बंद हो गया है. वह भी बेकार बैठा है. बाबू जी खर्चा तो कम होता नहीं, काहे कि परिवार का पेट तो भरना ही है.
उसकी बात तो सही ही थी. मैंने कहा काकी तुम्हारी बात तो सही है, आज कल अधिकांश लोगों की आर्थिक स्थिति ऐसी ही है.
विवेक मैंने यूँ ही सहानुभूति के कारण उससे कहा कि देखो काकी सरकार और कई स्वयंसेवी संस्थायें राशन और अन्य दैनिक उपयोग की चीज़ें , शहर में बांट रहीं हैं, आप वहाँ से जा कर अपने जरूरत के लिए सामान ले सकती हो. आपकी परेशानी कुछ कम हो जायेगी. उसने मेरी बात सुन कर कुछ इस तरह मेरी ओर देखा जैसे मैंने कोई बहुत गलत बात कह दी हो. मुझे आश्चर्य हुआ. मैंने पूछा क्या बात है काकी. विवेक उसने जो बात कही उससे मैं हैरान हो गया.
उस सब्जी बेचने वाली ने कहा बाबू मैंने भी सुना है. लेकिन यह सहायता उन्हें मिलनी चाहिए जिनके पास वास्तव में आज जीवन चलाने के लिए कुछ भी नहीं है और भूखे मर रहे हैं. मैं क्यों लूं? मेरा आदमी, अगर उसका दूकान कुछ दिन और नहीं खुला, तो मेरी तरह वह भी सब्जी या फल गलियों में घूम घूम कर बेचेगा परन्तु यह सहायता जिनके लिए है, उन्हें ही लेना चाहिए. अभी हमारी हालत ऐसी नहीं है.
विवेक मैं तो सुन कर हतप्रभ रह गया. जिस देश में झूठ बोल कर बड़े बड़े आदमी पैसा कमाने में लगे हैं , रिश्वत लेने वालों की लाइन लगी है, इस महामारी में भी दवाईयों के मनमाने दाम लिए जा रहे हैं, बड़े बड़े कारपोरेट अस्पताल मनमाना पैसे ले रहे, वहीं पर आज एक थोड़ी सी सब्जी बेचने वाली महिला शान से कह रही है कि जब तक उसका काम चलेगा वह कोई सहायता नहीं लेगी. 
विश्वास करो विवेक पहले तो मुझे अपनी कानों पर विश्वास नहीं हुआ , लेकिन वह यही कह रही थी. उसका स्वाभिमान, ईमानदारी और स्पष्ट सोंच ने मुझे स्तब्ध कर दिया. शायद ऐसे ही करोड़ों ईमानदार लेकिन सामान्य लोगों के कारण आज भी मेरा देश जीवित है और चल रहा है.
( ये मेरी मौलिक रचना है ---- ओमप्रकाश पाण्डेय)


अग्निशिखा मंच
10/8/2021 मंगलवार
विषय-कलम तोड़ना (लघु-कथा
)
सुगंधा आठवीं कक्षा की छात्रा है।आज उसकी स्कूल में हिंदी निबंध लेखन की प्रतियोगिता थी।सुगंधा को पढ़ने-लिखने का बेहद शौक है।इसलिए उसने भी इस प्रतियोगिता में भाग लिया,और प्रथम स्थान प्राप्त किया।
सुगंधा की हिंदी की अध्यापिका ने सुगंधा को बुला कर उसे शाबासी देते हुए कहा कि- सुगंधा तुमने बहुत ही अच्छा लिखा है,और मेरा मानना है कि तुम अगर निरन्तर लिखती रहोगी तो एक दिन तुम बहुत अच्छी लेखिका बन सकती हो।
सुगंधा ने अध्यपिका जी के कहे अनुसार लेखन कार्य में रुचि लेना आरम्भ कर दिया। कॉलेज तक पहुँचते-पहुँचते सुगन्धा की कई कहानियां,लेख,कविताएँ स्थानीय पत्र-पत्रिका में प्रकाशित होने लगी।
माता सरस्वती की सुगन्धा पर विशेष कृपा रही।
आज दस वर्षों के पश्चात एक भव्य साहित्यक सामारोह में सुगन्धा को साहित्यजगत की 'सर्वश्रेठ साहित्यकार' के रूप में सम्मानित किया जा रहा था।
सुगन्धा के सम्मान में बोलते हुए साहित्यजगत के वरिष्ठ साहित्यकार श्री अरविंद गोपाल जी ने कहा कि- साहित्यजगत में सुगन्धा एक ऐसा चर्चित नाम है,जिसे परिचय की कोई आवश्यकता नहीं।अपनी भावपूर्ण कृतियों द्वारा सुगन्धा एक महान साहित्यकार बन चुकी है।उनकी भाषा में सरलता के साथ-साथ रोचकता भी बरक़रार है।उनकी सरस शब्दावली पाठक को बांधे रखती है।कुल मिलाकर सुगन्धा ने आज तक जीतना भी लिखा है, 'कलम तोड़' लिखा है।उनकी कलम को मैं नमन करता हूँ।उनको 'सर्वश्रेष्ठ साहित्यकार,का सम्मान-पत्र देते हुए मुझे अपार प्रसन्नता हो रही है।इसी आशा के साथ कि हमें इनको पढ़ने का सौभाग्य निरन्तर मिलता रहेगा,धन्यवाद।
                                  तारा "प्रीत"  
                            जोधपुर (राज०)

१०-८-२०२१
अखिलभारतीयअग्निशिखा मंच
विषय_"कलम तोड़ना"
विधा_लघुकथा।
मेरी सहेली"रानी"विद्यालय में शिक्षिका एवं प्रधानाध्यपिका रहीं हैं। वो उच्च शिक्षित महिला हैं।उनकी कई पुस्तकें प्रकाशित हो चुकीं हैं।साहित्य की हर विधा जैसे कविता, गीत,भजन, लघुकथा, सायली, हाइकु,समीक्षा,रिपोर्टिंग, आदि में उन्होंने लेखन कार्य किया है।
     उनके लिखने की अपनी एक विशेष शैली है जिसमें आंतरिक भावनाओं, व्यंग्य, हास्य का पुट, सत्याधार, नारी प्रधान रचनाएँ आदि का स्पष्ट उल्लेख होता है।उनके व्यंग्य के बाण ऐसे तीखे होते हैं कि बात सीधी दिल पर जाकर चोट करती है,संबंधित वर्ग तिलमिलाने लगता है।
     उनकी एक अंग्रेजी में लिखी पुस्तक("Art of Parenting,52Golden Tips,All time guide for All") आर्ट ऑफ़ पेरेंटिंग 52 गोल्डन टिप्स"बहुत प्रसिद्ध हुई है जो अभिभावकों के लिए लिखी गई है।इसके दो एडिशन निकल चुके हैं वर्ष 2007 और 2009में।लगभग 5000 पुस्तकें मुंबई शहर में बेची अथवा वितरित की जा चुकी हैं।तीसरे एडिशन का प्रयास जारी है।उनकी इस पुस्तक के लिए कई सामाजिक,आध्यात्मिक संस्थानों ने सम्मान किया है। हर कोई यही कहता है कि रानी जी कमाल के टिप्स दिए हैं आपने, बिल्कुल"कलम तोड़कर"लिखा है।आपकी इस पुस्तक के लिए समाज आपका ऋणी रहेगा।
     लोगों ने पुस्तक जहां_तहां से पुस्तक खरीदकर पढ़ते हैं,उन्हें फोन करते हैं,उनकी पुस्तक की प्रशंसा करते हैं,सराहते हैं,कहते हैं हम आप द्वारा दी गई टिप्स को फॉलो करेंगे।आपने "कलम तोड़" लिखा है। इतने वर्ष बाद भी किसी पाठक का अचानक फोन आ जाता है, तब लेखिका को लगता है कि यही मेरी सच्ची कमाई है।
    लोग कहते हैं कि हम रानीजी के उज्ज्वल भविष्य की कामना करते हैं और अपेक्षा करते हैं उनकी ऐसी और कई समाजोपयोगी पुस्तकें इसी प्रकार "कलम तोड़कर" लिखी हुई प्रकाशित हों।
स्वरचित मौलिक लघुकथा_
रानी अग्रवाल,मुंबई,१०.८.२१.


* अग्नि शिखा काव्य*
१०/७/२०२१ मंगलवार 
विधा - लधु कथा

बिषय - कलम् तोड़ना 
 डाॉ कन्हैयालाल जी सेठिया हमारे राजस्थानी साहित्य के शिखर पुरुष थे ! उनकी लेखनी नें राजस्थानी साहित्य को भरपुर समृद्ध किया ! आप मानव मन ओर प्रकृति के कुशल चितैरे थे ! 
जैसे सुभद्रा कुमारी चौहान की "झाँसी की रानी " डाॉ भूपेन हजारिका की" गंगा बहती हो क्युँ "वैसे ही डॉ कन्हैया लाल सेठिया की " धरती धोराँ री " की कविता हैं! जिसमें राजस्थान के गौरवशाली इतिहास ओर साँस्कृतिक विरासत का गुणगान किया ! जो सौ साल बाद भी जन-जन के मुंह बोलती है! कविता सुनकर लगता है कि लेखक नें अपनीं कलम तोड़दी है ? 

सरोज दुगड़
खारूपेटिया 
असम 
🙏🙏🙏


शीर्षक-"कलम तोड़ना"
 लघु कथा-

रमाकांत जज साहेब अपनी ईमानदारी और इंसाफ के लिए प्रसिद्ध है ।उनका बाबू राम 4 दिन से कुंज बिहारी के मंदिर में भजन कीर्तन में लगा हुआ है। बिना अर्जी बिना सूचना के ही चला गया है। जब लौटता है तो वह बहुत डरा हुआ सहमा हुआ था ।जज साहेब के कमरे में प्रवेश करता है डरता डरता सलाम करता है। रमाकांत अपने किसी आवश्यक फाइल में लगे हुए, उसका जवाब दे देते हैं। रामू एकदम से उनके पैरों में गिर पड़ता है ,और बोलता है मुझे माफ कर दे साहब! रमाकांत हक्का-बक्का होकर रामू की ओर देखते हैं! पूछते हैं ,क्या हुआ उसे? जमीन से उठाते हैं। वह 4 दिन का किस्सा उन्हें सुना देता है ।तो वेआश्चर्य से उसकी और देखते हैं और शांत हो जाते हैं। अरे यह क्या कह रहा है तू रामू ! तू 4 दिन से तो ओवर ड्यूटी ले रहा है ।घर पर भी मेम साहब की मदद कर रहा है। कांति जी रमाकांत जी यह मानने को तैयार नहीं होते हैं, तो रामू गवाही के लिए वहां के मंदिर के पंडित को बुला कर लाता है। रमाकांत कोई खास फैसला लिख रहे थे गर्दन जैसे ऊपर कि ,वे देखते ही रह गए ।हाथ की कलम से "बस" लिख कर कलम तोड़ दी !क्योंकि उन्हें लगा कि वह स्वयं कुंजबिहारी ही उसके सामने खड़े हैं और उस पंडित के पीछे पीछे वे
 चल पड़े । अब रामू भी अचंभित हो करके उनके पीछे पीछे चल पड़ा। मंदिर में पहुंचकर पंडित जी तो गायब हो गए और जज रमाकांत साहेब भजन कीर्तन में मगन होकर बैठे रहे। नौकरी घर परिवार सब कुछ छोड़ दिया। ऐसे उन्हें कुंज बिहारी जी मिल गए हो।

स्वरचित लघु कथा रजनीअग्रवाल 
     जोधपु

अग्निशिखा मंच को नमन
आज की साहित्य की विधा लघुकथा *कलम तोडना*

        रचनाकार, कथाकार साहित्यकार जो समाज में अच्छा, बुरा संवेदना दया सेवा भाव से साहित्य की निर्मिती करता है और कहा गया है की" साहित्य समाज का दर्पण है।हमारे भारत में एक से एक कलमकार हो गए भवभूती से लेकर भूषण कवि तक! *साहित्य समाज का दर्पण है"*
भारतवर्ष में कवि कालिदास ने एक से बढ़कर एक रचना लिखकर मेघदूत, अभिज्ञान शाकुंतलम् साहित्य में बहुत बड़ा योगदान दिया है प्रेमचंद जैसा कलमकार ने गोदान गबन निर्मला मानसरोवर और तीनसौ से ज्यादा कहानियां लिखकर कलम तोड़ कर अच्छे से अच्छे साहित्य के निर्मिती की है।उनके साहित्य में समाज में वेदना संवेदना कुरीतियों पर कुठाराघात किया है राष्ट्रकवि माखनलाल चतुर्वेदी ने राष्ट्रप्रेम की ज्वाला अपनी कलम से जागृत की एक चेतना जागृति करके भारत को स्वतंत्र मिलाने में बहुत बड़ा योगदान दिया। सूर्यकांत त्रिपाठी बड़े गरीब थे उनको मान सम्मान में मिली शाल एक गरीब भिकारी को जो कि जाड़े में कांप रहा था ठंड की वजह से उनको दे दी ऐसे फकीर साहित्यिक इसीलिए उनके कलम में दया वेदना दिखती है। महादेवी वर्माजी प्राकृतिक सौंदर्य का वर्णन अपने कलम तोड़कर पूरा किया है।
      सूर्यकांत त्रिपाठी महादेवी वर्मा जी का रिश्ता भाई-बहन का था जब वह राखी बांधने के लिए रक्षाबंधन के त्यौहार पर महादेव जी वर्मा के घर गए तो उन्होंने कहा ",बहन मुझे दो रुपए दे दीजिए महादेवी वर्मा चौक गई जब महादेवी वर्मा ने दो रुपए दिए तब बहन के नाते भाई से पूछ लिया ",भाई यह दो रुपए किस लिए थे तो उन्हें जो जवाब दिया वह बडा करुणामय है, बहन एक रुपया रिक्शा वाले के लिए और जो जब मुझे राखी बांध लेंगे तब एक रूपए आपके उपहार के रूप दिया जाएगा और दोनों भाई बहन हंसने लगे।
      प्रेमचंद ने अपनी कलम द्वारा ही कलम तोड़ कर अपना उधर निर्वाह जीवन यापन किया ऐसे बोले तो अतिश्योक्ति नहीं होगी ऐसे समाज के साहित्यकारों को शत शत नमन।

सुरेंद्र हरडे लघुकथाकार
नागपुर
दिनांक :- १०/०८/२०२१


🌹🙏अग्नि शिखा मंच 🙏🌹
विषय: * कलम तोड़ना *
विधा: * लघुकथा *
दिनांक: 10/9/21
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   लतिका का रिजल्ट आ गया, पेपर में 
दूसरे नंबर पर उसका नाम है,,,, घर में 
खुशियाँ छा गयी थी,,,,सबसे अधिक तो उसके पापा उछल रहे थे,,,क्योंकि अपने समय मे उनका सपना अधूरा रह गया था,
मैट्रिक की परीक्षा पास करने का अरमान होता है,,,,,सभी का।
        अपनी कमी को पूरा होते देख ,रमेश
बाबू खुशी से विह्वल हो रहे थे,,,,,और हो भी क्यों न ! मम्मी को आज बहुत अच्छा लग रहा था, वह मिठाइयो की थाल लेकर
पति और बेटी लतिका को ,,,शुभकामनाएँ 
और बधाई दे रही थी।  
         मिठाई खिलाते हुई मम्मी से पापा ने 
कहा " मुझे पता था कि था कि इसका परीक्षा का परिणाम बहुत ही अच्छा आएगा,,,क्योंकि प्रतिदिन लतिका परीक्षा  
देकर आती और पापा से खुश होकर कहती,,,,,"पापा आज मैनें कलम तोड़ कर 
लिखा है,,,उस- उस दिन उसके पापा दिल
से उसे आशीर्वाद देते !
   आज की तो पूछना ही क्या!,,,,,पापा ने कहा,,,, चलो हम सभी अगले सुबह मंदिर चलते हैं ,,,,,,
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स्वरचित एवं मौलिक रचना
 रचनाकार-डॉ पुष्पा गुप्ता 
मुजफ्फरपुर 
बिहार 
🙏


कलम तोड़ना( बहुत मार्मिक)

बेटे की जुदाई

जब से विमला को मालूम हुआ कि उसका बेटा हॉस्पिटल में भर्ती है उसे कोरोना हो गया हैऔर उसे ऑक्सीजन दी जा रही है तो विमला रोज भगवान से प्रार्थना करती और सुंदरकाण्ड पढ़ती कि मेरा बेटा जल्दी ठीक हो जाए और मैं जल्दी से उसके पास पहुंचकर उसे देख लूँ । विमला उस समय अपने भाई के पास जयपुर में ।
वह अपनी बेटी को फोन करती कि उसकी तबीयत कैसी है ?
बड़ी बेटी को मालूम था कि उसका भाई अब इस दुनिया में नहीं है लेकिन वह माँ से कह देती कि उसे वेंटिलेटर पर रखा है, अब कुछ कह नहीं सकते माँ।
विमला कहती कि मैं उसकी बहू कविता को फोन करती हूं,पोती रिनी को फोन करती हूं लेकिन कोई मेरा फोन नहीं उठा रहा है ?
सुधा बोली कि मां वे लोग भी परेशान होंगे इसलिए फोन नहीं उठा रहे होंगे ।
सुधा ने अपने मामा जी को फोन किया कि मामा जी हम कब तक झूठ बोलते रहेंगे आज 8 दिन हो गए हैं? मामा जी बोले" देख अगर जीजी को मालूम पड़ गया तो हमारे लिए मुसीबत हो जाएगी ,यहाँ भी बेटे बहू को 
कोरोना हो रहा है मैं तो खुद चलने फिरने से लाचार हूं। इसलिए तुम जीजी को अपने पास बुला लो और सच्चाई बता दो ।
सुधा ने छोटी बहन निशा से बात की कि हम कब तक झूठ बोलते रहेंगे।
छोटी बहन बोली मैं अपने ननद.से बात करती हूं वह भी जयपुर में रहती है।
दूसरे दिन ही छोटी बहन निशा बोली" दीदी मेरी ननद मम्मी को अपने यहाँ बुला रही हैं और उनका कहना है कि मैं सारी स्थिति संभाल लूंगी और मैं उनको अपने पास ही रख लूंगी । आपके पास रहती हैं ऐसे ही वह मेरे पास रह लेंगी। जब तक यह लोग डाउन नहीं खुल जाना तब तक।
विमला जब अपनी बेटी की यहाँ.पहुंँची तो दुखी मन से कहने लगी कि अब मेरा मन नहीं लगता है बेटे की तबीयत ठीक नहीं है इसलिए ।
ननंद बोली "मम्मी आप पहले खाना खा लीजिए उसके बाद फिर बात करते हैं। खाना खाने के बाद फिर विमला कहने लगी है ऐसा लगता है कि मैं बेटे के पास पहुंच जाऊं मेरी बड़ी इच्छा है कि मैं उसको देख लूँ।
तब धीरे से ननद ने कहा कि मम्मी वह तो कब के भगवान के पास पहुंच गए हैं ।आपको इन लोगों ने इसलिए नहीं बताया कि कहीं आप बीमार ना पड़ जाएँ। कलम तोड़ समाचार सुनकर विमला स्तब्ध रह गई ,सुन कर बोली तभी बहू फोन नहीं उठाती है । अरे मेरे जाने की दिन थे, भगवान ने उसे अपने पास बुला लिया क्या मालूम मैंने क्या पाप किए थे जो मुझे बेटे की मौत का समाचार सुनने के लिए जिंदा रखा।
बेटा मुझे अपने पास नहीं रखता था लेकिन वह मुझसे फोन पर बात कर लेता थि बस में इसी में ही खुश हो जाती थी । अब तो मेरा वह भी सहारा छूट गया। अब मुझे बेटी की जुदाई सहन करनी पड़ेगी


आशा जाकड़


मंच को नमन 🙏
विधा -लघुकथा
विषय-कलम तोड़ना
10/8/21

      कलम तोड़ना
******************
आदित्य बहुत होनहार लड़का था। वह अपने माता-पिता के साथ रहता था। पिता उसे पढ़ाने के लिए सरकारी विद्यालय में भेजते थे , क्योंकि पैसे की कमी थी। ग़रीबी के कारण खाना भी भर पेट नहीं मिल पाता था।
           "आदित्य जब विद्यालय जाता तो वह बहुत ध्यान लगाकर पढ़ता था और इसी वजह से वह बहुत समझदार हो गया और एक बार किसी चीज के बारे में सुन लेता तो फिर वह उसके बारे में पूरा जानता और कभी भी उसे नहीं भूलता था। वह इतना अच्छा लिखने लगा कि कोई भी उसका बराबरी नहीं कर सकता था।
        इसी कारण वह लिखने के बारे में पूरी तरह से जानने के लिए अपने अध्यापक के पास गया। अध्यापक ने कहा....जब भी कुछ लिखो तो ऐसा लिखो की कोई तुमसे अच्छा नहीं दिख सके न कोई तुम्हारा बराबरी कर सके।
इसके लिए तुम्हें बहुत पढ़ना और लिखना होगा। फिर तो"वह दिन-रात कुछ -न-कुछ लिखता ही रहता था। जिससे उसके लिखने की कला जागने लगी और वह बहुत सुंदर दिखने लगा। एक दिन कक्षा में प्राचार्य जी आए और बोले-कि आज सभी बच्चों को 'प्रकृति' पर एक लेख लिखना है।
उन सभी बच्चों के लेख में सबसे अच्छा था आदित्य का लेख और वह विद्यालय में टांपर हो गया। प्राचार्य ने जब लेख को पढ़ा तो....."उसमें कोई गलती बिल्कुल भी नहीं थी और भाषा भी शुद्ध हिन्दी में दु। तब विद्यालय के प्राचार्य ने आदित्य का सम्मान करते हुए सभी बच्चों और शिक्षकों के सामने कहा.. "वाह.... आदित्य तुमने तो कलम भी तोड़ दी"।

डॉ मीना कुमारी परिहार


अग्निशिखा मंच आज का विषय कलम तोड़ना

आज मैं सर्वश्रेष्ठ मार्मिक कथाकार के पुरस्कार वितरण समारोह में दर्शक दीर्घा में बैठी हूं। मैं जिसके साथ आई हूं वह सर्वश्रेष्ठ कथाकार के रूप में नामित है ,उनका नाम श्रीमती भानुजा है जो कि 85 वर्ष की महिला है ।अभी समारोह शुरू होने में कुछ वक्त था। मैं यादों के गलियारे में चली जाती हूं। मुझे याद है कि जब कभी हम भाई बहनों को कोई सवाल पूछना होता था वो जनरल नॉलेज का या इतिहास से संबंधित या साहित्य संबंधित कोई भी सवाल जिसका हल नहीं समझ में आता था। हम लोग भाग के मां के पास जाते थे, और झटपट उसका जवाब दे देती थी । आज के कंप्यूटर की तरह । मेरी मां जवाब के साथ में यह भी कहती तुम लोग तो हमसे ज्यादा पढ़े लिखे हो, मैं तो केवल नौवीं तक पढ़ी थी। लेकिन हां मैंने अपने समय को कभी बर्बाद नहीं होने दिया। आगे पढ़ाई नहीं कर पाई तो क्या बड़हलगंज के पुस्तकालय की कोई भी पुस्तक शायद ही बाकी रही हो जिसे मैंने ना पढ़ा हो । सही बात है उन्हें वेद पुराण वाल्मीकि कृत रामायण रामचरितमानस उपनिषद आदि और महान साहित्यकारों की कृतियां सब कुछ उन्होंने पढ़ा था शादी के बाद भी उन्होंने पढ़ने की रुचि को बनाए रखा।उसे याद भी रखा था। आज भी वह गोदान के बारे में ऐसे बताती जैसे उन्होंने अभी-अभी पढ़ा हो या शरतचंद्र के उपन्यास चरित्रहीन से बताती हैं जैसे बस तुरंत पढ़ कर उठी हैं‌ उन्होंने स्वाध्याय से बहुत सारा ज्ञान अर्जित किया था और इतिहास के मामले में तो उनको कोई पीछे कर ही नहीं सकता था। समय गुजरता गया अपने दायित्वों की पूर्ति करती रही ‌।वह अपनी पांच बेटियों और तीन बेटों की शादी कर ली नाती पोतों से घर भर गया ।सब अपने-अपने काम धंधे में लगे हुए थे ।सब अपने में मगन और मम्मी पापा अपने समय को आपस में बात करके या फिर साहित्य पर चर्चा करके निकालते थे ।उसी समय मैं उनके चौथे नंबर की पुत्री लेखन कार्य किया करती थी। उन्होंने कहा किस में लगी रहती हो और इसके पीछे जान देती रहती हो। मैंने उनसे कहा कि आप भी करके देखें बहुत अच्छा लगता है ‌उन्होंने एक प्रयास किया छोटा सा ।कुछ लाइनें जोड़ी मैंने कहा बहुत अच्छा लिखा है । उन्हें अच्छा लगा लिखने के कार्य और वह फिर अपनी कोशिश में कामयाब होती चली गई और इतना अच्छा लेखन कार्य करने लगी। उन्हें औरो से सराहना मिली । उन्होंने अपने अनुभव और दूसरों के दर्द को समझ कर के शब्दों को पिरोने की कोशिश की। फिर क्या उन्होंने एक एक मोतियों बड़े ही करीने से पिरो डाला ।वह बहुत ही अच्छा साहित्य लेखन करने लगी । उनको उनको श्रेष्ठ साहित्यकार के रूप में प्रस्तुत किया जाना मुझे बड़ा अच्छा लगता है। मैं आज इस सम्मान समारोह में बैठी हूं तो मुझे बहुत ही गर्व महसूस हो रहा है और अचानक से तालियों की गड़गड़ाहट के साथ संचालिका महोदया की आवाज सुनकर मैं यादों के गलियारे से बाहर आई,और वे बोल रही थी" कि अब आपके सामने सर्वश्रेष्ठ कहानीकार के बारे में संक्षिप्त परिचय देते हुए आपको उनका नाम बताती हूं।" संचालिका बोल रही थी कि "लेखिका के बारे में क्या कहें उम्र की सारी सीमाओं को तोड़ दिया और उन्होंने बता दिया कि अगर हम कोई काम करने को ठान ले और हमारे मन में लगन है तो कभी भी कोई काम किया जा सकता है। उसके लिए कोई सीमा नहीं है ।आज इनकी लेखनी के लिए और इनके द्वारा लिखी गई कहानियों के लिए मैं सिर्फ एक इतना कहना चाहूंगी कि इन्होंने तो कलम तोड़ दी कहानी लिख लिख कर इनका नाम श्रीमती भानुजा है।" फिर मैं अपनी मां को लेकर के स्टेज पर पहुंची जहां अतिथि महोदय ने मां को सम्मान पत्र और स्मृति चिन्ह प्रदान किया। वह पल मां की जीवन के लिए और मेरे जीवन के लिए भी सबसे यादगार पल था ‌।मां ने सबको धन्यवाद दिया ‌सचमुच में उन्हें जिस कहानी पर पुरस्कार मिला था उस कहानी में उन्होंने इतने सुंदर शब्दों का चयन करके एक एक स्त्री की अंतर वेदना को इतने मार्मिक ढंग से चित्रित किया था कि पढ़ने वाले को लगता था कि यह उसके आसपास की घटना है और हर कोई उस कहानी से अपने आपको जुड़ा हुआ पता था बहुत ही अच्छी कहानी लिखी थी इसके लिए संचालिका महोदय का वह शब्द सचमुच ही खरा उतरता है कि उन्होंने तो लिखने में कलम तोड़ दी है बहुत-बहुत बधाई के पात्र हैं
नीलम पाण्डेय गोरखपुर उत्तर


🙏🏻🙏🏻🙏🏻 कलम तोड़ना

शादी के बाद चंचल ने अपनी साहित्य सेवा की ओर बिल्कुल देखना पढ़ना सुनना छोड़ दिया था क्योंकि उसके परिवार के द्वारा उसे इस तरह से मानसिक शारीरिक आघात दिए गए थे उसने अपनी कलम को तोड़ दिया था अर्थात सब कुछ छोड़ दिया था वह कभी किसी की ओर निहारती ही ना थी इसी बीच उसके घर में एक दिन उसका छोटा देवर जो पढ़कर वापस आया उसने अपनी भाभी को देखा कि भाभी किस तरह से गुमसुम रहती हैं और अपने आप में घूमती रहती हैं उसमें धीरे-धीरे भाभी के विषय में जानना शुरू किया और 1 दिन ऐसा हुआ कि उसने अप्रत्यक्ष रूप से वह सारी गतिविधियां रख दी जिससे कि वह अपने आप कुछ बोलने सुनने पढ़ने और लिखने को मजबूर हो गई और देवर ने कहा कि मैं आज जीत गया भाभी आपने जो कलम तोड़ दी थी वह आज आपकी शुरू हो गई और मैं यही चाहता हूं कि भारत की प्रत्येक नारी अपनी कलम को सदा सचेत सजग और सक्रिय रहे यही मेरी आपसे प्रार्थना है आप अपनी कलम अब भारत की नारियों के लिए चलाएंगे और उन्हें आगे बढ़ने का अवसर प्रदान 💐💐💐💐💐करेंगी🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻


कुमारी चंदा देवी स्वर्णकार



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