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Akhil Bhartiya Anushka Manch ke block per Aaj dinank 30/8(2021(padhiye vishay Janmashtami aur आनंद लीजिए Alka Pande




बाल गीत 
जन्माष्टमी 

जन्माष्टमी का दिन है आया 
नंद किशोर का , जन्मोत्सव मनाया 
ना ना रुप धरे बंसीधर 
प्रेम का पाठ पढ़ाये ।।
ठुमक ठुमक पग धरे है कन्हा 
बाज रही पैरो की पैंजनिया 
शीश पर सोहे मोर मुकुट 
गोपियों की मटकी तोड़े 
मटक मटक आँखें मटकाये 
ग्वालों के संग गऊएँ चराये 
मटकी फोटे माखन चुराये 
माखन मिश्री खूब खाये ।।
मैया यशोदा को रिझायें 
कालंदी नदी में शेष नाग को नाथा 
ग्वाल बाल में आनंद समाया ।।
बाल लीलाएँ अति मनोहर 
गोपियाँ करे खूब शिकायत 
मैया दंड दे बांध ओखली 
कान्हा मंद मंद मुस्कुरायें 
ब्रह्माण्ड का  करायें दर्शन 
मैया यशोदा करती वंदन 
धन्य हो गई गोकुल नगरी 

डॉ अलका पाण्डेय
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३०/८/२०२१
कृष्ण ने लिया मनुज अवतार 

कृष्ण ने लिया मनुज अवतार 
भादो की घनघोर अंधेरी रात 
अष्टमी का था वह पावन दिन 
दुष्टों का करने संहार , कृष्ण ने लिया मनुज अवतार ।।


द्वापर युग में था कंस अत्याचारी 
कारागार में क़ैद किया बहन , बहनोई 
कारागार में देवकी मैया ने जन्म दिया 
वासुदेव ने यशोदा माँ के पास छोड़ा 
कंस के वध से लिया बचा ।।


घोर अंधेरी रात में , तूफ़ानी बरसात में 
वासुदेव ले कर चले श्याम सलोने कान्हा को 
यमुना ने प्रचंड रुप धर बंसी धर के पग पखारे ।
वासुदेव नंद के द्वार आ , बालकृष्ण को यशोद के पास सुलाया । ।

कृष्ण ने लिया मनुज अवतार 
ब्रज वासी झूम उठे जन्मोत्सव मनाया 
बाल रुप कान्हा का देख , जन जन मोहित हो उठा ।.
कान्हा दैत्य दानव का करने लगे संहार 
ग्वाल -बाल के संग खेले गोपियों को खूब छकाया ।।

बरसाने की राधा रानी के संग रास रचाया । 
मीरा हो गई कान्हा की प्रेम दिवानी
अलौकिक प्रेम की हुई अमर कहानी ।
गोवर्धन पर्वत उँगली पर उठा इंद्र का अंहकार तोड़ा ।।

कृष्ण ने लिया मनुज अवतार 
द्रोपदी के भाई बन ,चीर हरण से बचाया । 
अर्जुन के सारथी बन सत्य राह दिखाई 
अर्जुन को कर्मों का ज्ञान दे डाला 
गीता कलयुग की बन गई पथ प्रदर्शक 
कृष्ण से ज्ञान पा अर्जुन ने धर्म को जीता ।.
कृष्ण ने लिया मनुज अवतार 

डॉ अलका पाण्डेय मुम्बई

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[29/08, 12:23 pm] रवि शंकर कोलते क: रविवार दिनांक २९/८/२१

     #****कृष्ण भजन****#
                ^^^^^^^^

बिना श्याम जीवन में ।
        मिले ना कहीं चैन ।।
 जैसे चांद के बिना ।।
        है अंधेरी रैन ।।धृ।।

तुझे काशी काबा मथुरामें खोजें ।
रखूं उपवास व्रत निर्मल रोजे ।।
               अब तो दे दो दर्शन ।     
                 ना रूठिए सुषेण ।। १

मनके दर्पण में है प्रभु छब तेरी ।
करें पूजा हाथ आरती लब तेरी ।।
                 तुझे देखते रहते हैं ।
                  सदाही मेरे नैन ।।२

तू ही चंद्र सूर्य तू ही है प्रकाश ।
तू ही जल पवन तू ही भू आकाश।।

               घट घट में तू ही है ।
                 हर शै है तेरी देश ।।३

प्रा रविशंकर कोलते
     नागपुर
[29/08, 12:34 pm] 👑सुषमा शुक्ला: मां शारदे को नमन मंच को प्रणाम 🙏

कविता विधा
 *मनमोहना*

अरण्य में घूमती रही तुझको कान्हा ढूंढती रही;
 *मेरे मनमोहना*
 तू तो मेरे ह्रदय में रहाl

मन के तम को चीर कर,
अद्वितीय हुआ मिलन,
 दृग लोचन भीगे रहना
ओ मनमोहना l

अमृत पीयूष मन बरसा गई,
चंद्र ज्योति चमका गई,
 आज पूरी हुई साधना ,
हे मेरे *मन मोहना*

पृथक ना रहना कभी,
उल्लास खुशी से जीना अभी,
मनोरम दृश्य देखना, ओ मेरे मन मोहना, वह मेरे मन भावनाl

कोमल सुकुमार भाव लिए,
 वसंत दूत आगमन करें,
पोखर में सिरसिज खिले,
कैसा है प्रभावना,
  ओ मन मोहना

स्वरचित सुषमा शुक्ला इंदौर


*
[29/08, 2:59 pm] विजेन्द्र मोहन बोकारो: मंच को नमन
विषय:-- *सांवरे की सूरत आज भी*

*कृष्ण अष्टमी के उपलक्ष पर*

सांवरे कृष्ण की सूरत जग में है प्यारी,
तेरी मुस्कान भी जग में है सो न्यारी।
गोकुल वृंदावन नहीं पूरी सृष्टि में हो प्यारे।
तुम पे है पूरी दुनिया के लोग बलिहारी।।

जन्म देवकी से हुआ, जसुमति गोद सुलाया।
ग्वाल बाल के नहे की कीमत कौन चुकाया?

कर्तव्यों की राह पर,तुम हुए मजबूर,
वरना तुम हुए हो कभी, श्री राधे से दूर।।

बहुत दूर तुम आ गए, कृष्ण मुरारी आज
तुम्हारा कल है जन्मोत्सव,सुन लेना गायो की आवाज।
तुम बिन पूरा संसार सुना पड़ा है, जमुना हुई अधीर।
भक्तों ने रोज मुझसे पूछता बताओ राधिके वनिताओं के पीर।।

जाना,कर्तव्यों की राह पर तुम हुए मजबूर।
तुम भटकते रहो राधा कभी ना पाया चेन।।
तुम्हारी युद्ध विवशता नहीं राज की आस।
धर्म के मार्ग पर चलते शांति का प्रयास।।

भक्तों के तुम भगवान, मेरे हो अधीश
अब तो आओ बस जाओ आंखों में
राधा जोगन बनी निधिवन ढूंढ न जाएं
तेरे वंशी आज भी अधरों पर बिना राधे कान्हा नहीं।।

बिन राधा के आज भी कृष्ण रहे बेनाम।
बनवारी सबके हुए, राधा कृष्ण के नाम।।
           *राधे- राधे*
           *राधे कृष्ण राधे कृष्ण हरे हरे!!*
विजयेन्द्र मोहन।
[29/08, 3:18 pm] श्रीवल्लभ अम्बर: 🌹 कन्हैया🌹

    तेरी मुरली की धुन पर बलिहार जाऊं रे।
    वारी जाऊ रे, मोरे नटखट कन्हैया।

    बड़ा अद्भुत है तेरा चरित्र सुहाना।
    जन्मा,गोकुल में मथुरा में ठिकाना।
    कारागार में उत्सव मनाएं दीवाना।
    कारी अंधियारी रात में उजियारना।

    तेरी मुरली की धुन पर बलिहारी जाऊ रे।
    वारी जाऊ रे मोरे नटखट कन्हैया।

    ग्वाल ,ग्वाल न, सताए,माखन चुराए।
   माटी मुंह में देखो तो दुनिया बताए ।
   मा यशोदा को ,पल पल सताए।
   राधा रानी को,ढूंढे, नखरे दिखाए।

  तेरी मुरली की धुन पर बलिहारी जाऊ रे,
  वारी जाऊ रे,, मोरे नटखट कन्हैया।

  कंस मामा,का गर्व, आतंक मिटाया,।
  पूतना का दुग्धपान से,अंत,बताया।
  कालिया मर्दन,निर्मल सागर किया।
  कंदुक क्रीड़ा से मगन होके लुभाया।

  तेरी मुरली की धुन पे बलिहारी जाऊ, रे।
  वारी जाऊ रे, मोरे नटखट कन्हैया।

🙏 श्रीवल्लभ अम्बर🙏
[29/08, 3:27 pm] 💃वंदना: कान्हा

कान्हा ओ कान्हा
तू छोड़ तनिक बैंया
मोरे शीश के गगरिया
तू रोक ना डगरिया।

यू मोड़ना कलाइयां
झड़ जाए मोरी चूड़ियां
मार के कंकरिया
क्यों फोड़ते गगरिया।

चुनरी मोरी भीगोई 
सिंगार सारा भीगा
क्यों छेड़े आते जाते
काहे को है सताता।

जा के करूं शिकायत
सुन ओ यशोदा मैया
तो तेरो नंदलाला
है बहुत ही सताता।

मुरली मधुर बजाता
मोहन मुरारी प्यारा
बन श्याम की दीवानी
मैं जपु तेरी माला।

तू हें मेरा मोहन
मैं तिहारी राधा
तू है मेरा मोहन
मैं तिहारी राधा।

वंदना शर्मा बिंदु
देवास मध्य प्रदेश।
[30/08, 5:46 am] रेखा शर्मा 🧑🏿‍🦽: *💐श्री कृष्ण जन्माष्टमी की बहुत-बहुत बधाई शुभकामना💐*

 *अँगना में ललना*

*यशोदा जी झुलावे अँगना में ललना।*
*यशोदा जी झुलावे अँगना में ललना।।*

*अँगना में पलना, पलना में ललना।*
*यशोदा जी झुलावे अँगना में ललना।।*

*सुबह सवेरे मैया गा रही जी लोरी*,
*चाँदी का पलना हो रेशम की डोरी।*
*खींचे है मैया यशोदा डोर थोड़ी-थोड़ी।।*

*यशोदा जी झुलावे अँगना में ललना।।*

*दूध बिलोए मैया, झूमे है चुनरी,*
*झूमे टीका मैया का चंदा सी बाली।*
*नाक की नथनी झूमे लट काली काली।।*

*यशोदा जी झुलावे, अँगना में ललना*।

*खानके कंगना मोतियन की माला*,
*बाजूबंद मैया का, कमरबंद निराला।*
*मीठी मुस्कान से सजी है गौशाला।।*

*यशोदा जी झुलावे, अँगना में ललना।।*

*छम- छम पायल बाजे नूपुर निराली,*
*आँखों का कजरा बालों का गजरा।*
*हाथों में मेहंदी मैया के होठों पे लाली।।*

*यशोदा जी झुलावे अँगना में ललना,* 
*अँगना में पलना, पलना में ललना।*
*यशोदा जी झूलावे अँगना में ललना।।*

*रेखा शर्मा 'स्नेहा' मुजफ्फरपुर बिहार*
[30/08, 6:31 am] Anita 👅झा: 💐🙏नव शुभ्योदय आप सभी का स्नेहिल अभिनंदन 
स्वर्ग से शिव पार्वती कृष्णलीला देख मुस्काए है ।
माया की नगरी में बाल रूप कृष्ण
मुसकाए है ।
सुदर्शन चक्रधारी जग कल्याण रूप बदल माया नगरी आये है ।
गोकुल मथुरा धन्य हुई वृंदावन द्वारिकाधीश बन मुसकाए है ।
अद्भुत कृष्णलीला श्रीमद भागवत कहलाई है ।
वासुदेव की टोकरी में बाल कृष्ण कन्हाई है ।
जमुना पार लागते है ।
उमड़ घुमड़ कर आये बदरा 
बरसात की झड़ी लगी है ।
बादल बिजली अटखेलियाँ देख मुस्कानें कृष्ण लला है ।
बाल सखा संग भागे दौड़े कृष्ण आये कृष्ण लला है ।
मुँह खोल धरा समाहित खेल दिखाते कृष्ण लला है 
इंद्रधनुषी रँग सजा पृथ्वी की हरियाली में 
बाल सखा संग रूप बदल आये कृष्ण लला है ।
बाल सखा संग भागे दौड़े करते चोरी माखन कृष्ण लला है । 
कान पकड़ वो कहते मैया मोरी मैंने ही माखन खायों !
ले लो मेरी लकुटि कमरिया मैंने ही शोर मचाओं ।
बारिस की लहरों में बाल सखा संग मैंने नाच दिखायो।
रंग बिरंगी उड़ती चुनरियाँ वृक्षो की हरियाली में बाल सखा संग नाच दिखायों ! 
बाल रूप की अद्भुत लीला देख सबके मन को भायों है 
अनिता शरद झा रायपुर
[30/08, 10:06 am] 😇ब्रीज किशोर: जब जन्मे कृष्ण भगवान जेल दरम्यान मुरलिया वाले खुल गये जेल के ताले।
ले वसुदेव चले गोकुल को, जमुना बहे अगम अपारे ,मुरलिया वाले खुल गये जेल के ताले।
हरि पद छुअत थाह भई जमुना,वसुदेवही पार उतारे मुरलिया वाले खुल गये जेल के ताले।
ले सुत जाई दियो जसुदा को,
कन्या को गोद बैठारे मुरलिया वाले ,खुल गये जेल के ताले।
कन्या जब कंस लियो हाथो मे,कन्या उड़ गयो अकासे मुरलिया वाले ,खुल गये जेल के ताले।
रे कंसा क्या तू मुझको मारे, गोकुल मे जन्मे कान्हा कारे तुम्हे मारन वाले खुल गये जेल के ताले।
जब जन्मे कृष्ण भगवान, जेल दरम्यान मुरलिया वाले 
खुल गये जेल के ताले।
स्वरचित
   . . बृजकिशोरी त्रिपाठी
        गोरखपुर यू.पी
[30/08, 10:12 am] 👑सुषमा शुक्ला: कविता विधा शीर्षक *श्री कृष्ण*

🌹🙏श्री कृष्ण की अद्भुत अनुपम लीला,,,,
कानन कुंडल पीत पीला,,,
साधु संत के तुम सहाय, 
दानव को तुम मार भगाए🌹

हे करुणाकर, दया करो, कोरोना को दूर करो,,
 मानवीयता फूट फूट कर रोई ,,,
हे कृष्ण 
 करुणा करो🙏

हे जगदीश्वर कृष्ण कन्हैया ,,
मां यशोदा के लाला,, 
आज आपका जन्मदिन है।
बधाइयां है ,,
 पल पल आला🌹

🌺फूलों से भी कोमल हो, गिरीराज
 से हो तुम कठोर,,,,
एक बंसी अधर 
 पर साजे,,,,, 
एक उंगली गिरिराज विराजे🌹🌹🌹🌹🌹

स्वरचित रचना सुषमा शुक्ला
[30/08, 10:38 am] 👑गरिमा: राधा कृष्ण का प्रेम

प्रीत की रीत ऐसी लगी कान्हा,

अब छूटे से न छूटेगी। 

मैं  दुनिया के हर सुख दुःख भूली, 

कृष्ण अब तेरा ही सहारा है। 

दुनिया में प्रेम की कमी हो गयी, 

कृष्ण तुम वापस आ जाओ। 

हम तुम से ये विनती करते है,
राधा के पास आ जाओ। 

 कृष्ण का प्यार अमर है, 

राधा ने दिल  का नज़राना भेजा है। 

दही मिश्री तुम्हे बुलाती है ,

बासुरी की धुन याद दिलाती है। 

वन वन हम भटक रहे है, 

तुम गाय चराने  आ जाओ, 

राधा तुम्हारी राह देख रही है। 

उसकी पास तुम आ जाओ, 

राधा को कृष्ण की यादो ने घेर लिया, 

तुम उसके सपने सजा जाओ।। 

गरिमा लखनऊ
[30/08, 10:53 am] सुरेन्द्र हरडे: गोविंद की बाल लीला ।

    सुंदर बाल गोपाल को देवकी ने जन्म दिया ।
पर उसे पता नहीं था कि भगवान ने अवतार लिया ।
 कंस के डर से ले चले टोकरी में छुपाए गोकुल की ओर ।
अंधेरी में ही निकल पड़े चुपचाप वसुदेव ।
नहीं हुई थी भोर ।।१।।

जमुना ने रास्ता दिया कृष्ण को नमन कर के 
जो बह रही थी भर भर के
नागराज ने फन की बनाई 
छतरी रक्षा की बरसात से
पहुंचाया मां यशोदा की गोदमें ।२

     मां यशोदा खुश हुई 
उसे लगा भगवान ने कोई प्रसाद दिया । सूनी गोदी भर आए
कितने भाग्यवान थे नंद यशोदा भगवान उनके घर आए।।३।।

कृष्ण गोकुल में लीला करने लगे
गोपी को तंग करते माखन खाते
रास्ता रोकते, मटकिया फोडते
जमुना किनारे जाते खेले खेलते 
सबको तंगाते ।।४।।

   उखल से बांधा समझाया डांटा फटकारा ।
लीलाएं रचाकर कृष्णा ने आखिर अत्याचारी मामा कंस को मारा
  बहुत सुंदर था सांवरा कन्हैया 
  बंसी बजैया रास रचैया
 रूप मनोहा री जगत के पालन हारी । 
 धरती पर आए रुप लेकर विष्णु का कृष्ण मुरारी।।५।।

कवि सुरेंद्र हरडे
         नागपुर
दिनांक :- ३०/०९/२०२१
[30/08, 11:04 am] रवि शंकर कोलते क: सोमवार दिनांक ****३०/८/२१
विधा**** कविता 
विषय***#***कृष्ण -भजन***#
                        ^^^^^^^

तुम ही विष्णु तुम ही राम हो ।
        हे ब्रज के बांके बिहारी ।।
तुम ही शाम हो राधाजी के ।
        तुमही मीराके गिरधारी ।।धृ

ना इतना तरसाओ हमको ।
        अब देदो दर्शन बनवारी ।।
दरपे तेरे हम खड़े हैं कबसे ।
         ना कीजे विलंब मुरारी ।।१

दर्द का सागर भरता जाए ।
बैरी जगत ये छलता जाए ।।
         दुनिया के हर पीड़ा से ।
         हम तंग बहुत नर नारी ।।२

मेरी ही घर क्यों है अंधेरा ।
विपदाओने है मुझको घेरा ।।
        किस्मत ने भी मुंह फेरा ।
         अपनों ने ठोकर मारी ।।३

छोडो अब तुम रास रचाना ।
छोड़ हमें तुम कभी न जाना ।।
        खाली झोली भर दे मेरी ।
        विनती करें दुनिया सारी ।।४

हर तरफ अब त्राहि हाहाकार है।
छाया घना दुखका अंधकार है।।
        चला दो तुम अब सुदर्शन ।
        खत्म करो यह महामारी ।।५

प्रा रविशंकर कोलते
     नागपुर ३०






[30/08, 11:26 am] 😇ब्रीज किशोर: कान्हा ने लिए अवतार
     *******************
जन्म लिए जदूरइया सुनो हो सखी ब्रज मे।
जन्म लिए कृष्ण कन्हैया सुनो सखी ब्रज मे।
जसुदा के जन्मे ललनवा सुनो सखी ब्रजमे।
ब्रम्हा भी आये विष्णु भी आये,आये है डमरू बजइया सुनो हो सखी ब्रज मे।
जन्मे है कृष्ण कन्हैया..।।।।
रूद्राणी ब्रम्हराणी भीआई ,आई है लक्ष्मी मइया सुनो हो सखी ब्रज मे।
जन्मे है कृष्ण कन्हैया...।।
रूद्राणी डमरु बजावे, ब्रम्हाणी वेद सुनावे,लक्ष्मी करे ता ता थइया सुनो हो सखी ब्रज मे।
जन्मे है कृष्ण कन्हैया ...।।
सुर नर मुनि सब मुदित भये है,जुग जुग जीये जदूरइया सुनो हो सखी ब्रज मे।
जन्मे है कृष्ण कन्हैया सुनो सखी ब्रज मे।
[30/08, 11:37 am] बुद्धि🍑प्रकाश - दौसा -राज.: जन्माष्टमी (मनहरण घनाक्षरी छन्द)
      
      सभी आदरणीयों को जन्माष्टमी की हार्दिक शुभकामनाएं
      

जग में लियो है प्रभु,
     जन्म तारणहारी वो,
         जन्माष्टमी को सभी,
             पर्व जो मनाना है।
माखन मिश्री भोग है,
    दही भी खिलाना सभी,
          गैया को रोटी देकर,
               नाच भी नचाना है।
लीलाधारी लीला करे,
      बाँसुरी बजाते हैं वो,
           छुप-छुप मिट्टी खा के,
                मुँह को बनाना है।
        
मोर पंख धारण 'मन'
       करते हैं भाल पर,
            मुरली मनोहर की,
               छवि को बसाना है।

       बुद्धि प्रकाश महावर 'मन'
           दौसा राजस्थान
[30/08, 11:42 am] रामेश्वर गुप्ता के के: जन्माष्टमी - बालगीत
छोटे से मेरे कृष्ण कन्हाई,
घुटनन के बल चलते है।
मिट्टी सारे बदन लिपटाई,
कितने सुन्दर वह लगते है।।
छोटे से................... 1 
सुन्दर लटे काली घुंघराली,
मुख पर सुन्दर लगती है।
मेरे मोहन अति सुन्दर है,
मधुर मधुर मुस्कराते है।।
छोटे से.................... 2 
मात यशोदा के लाल दुलारे,
मंद मंद वह मुस्कराते है।
माखन मिश्री खाने वाले,
तीन लोक के वह स्वामी है।।
छोटे से.................... 3 
प्यारे मेरे है कृष्ण कनैइया,
तीन लोक के वह स्वामी है।
मात यशोदा जान न पाये,
यह सब प्रभु की माया है।। 
छोटे से..................... 4
जेल में कृष्ण का जन्म हुआ है, 
ताला सब स्वत: खुल गये है। 
प्रभु की लीला वह ही जाने, 
वसुदेव उन्हें गोकुल ले गये है।। 
छोटे से...................... 5
स्वरचित, 
रामेश्वर प्रसाद गुप्ता ।
[30/08, 12:08 pm] शुभा 👅शुक्ला - रायपुर: कान्हा 
🕵️🦁🐍💐🌷💐🌷💐🌷
रास्ते मे हमने फुल बिछाये कान्हा सुना है तुम आने वाले हो 
नैन तिहारे चरण पखारे ,कान्हा सुना है कि तुम आने वाले हो 

बाल्यकाल से जीवन पर्यन्त मीरा हरिनाम में डूबी थी 
जीवन के सारे दुख दर्द झेल गईं ऐसे प्रेममगन करने वाले हो सुना है कान्हा तुम 

तुमसे सबने प्रेम किया पर मीरा उनमें सर्वोपरि थीं 
नाम ले तुम्हारा पिया जहर प्याला उसे अपने में बसाने वाले हो सुना है कान्हा तुम 

सबकी परेशानियाँ मिटाकर दिल के गिले शिकवे भुलवा कर 
 प्रेम भाव से सबको गले मिलाने वाले हो कान्हा सुना है तुम

पीतांबरी तन पे तुम्हारे सोहे ,अधरो पे सुरीली मुरली बोले 
गोपी ग्वाल संग रास रचाने वाले हो कान्हा सुना है तुम

निश्छल प्रेम की अमर गाथायें आज भी हमे इतिहास बताये 
एैसे ही दिव्य प्रेम को समस्त जग मे फैलाने वाले हो कान्हा सुना है तुम

गोरी सी गाय का धौरा सा बछड़ु उसकी मैया का माँ दूध दूहती 
हम सबको भी कपिला के दूध का पान कराने वाले हो कान्हा सुना है तुम 

कुरूक्षेत्र मे वीर अर्जुन युद्ध परिणाम से डरने लगे 
धर्म अधर्म का भेद बता के विश्व मे शांति करवाने वाले हो कान्हा सुना है तुम

शुभा शुक्ला निशा
रायपुर छत्तीसगढ़
[30/08, 12:08 pm] कुंवर वीर सिंह मार्तंड कोलकाता: मित्रो, आप सबको श्री कृष्ण जन्म अष्टमी हार्दिक शुभ कामनाएं। 
मित्रो, इस अवसर पर पढ़ें यह गीत .....

हे गिरिवर धारी
*************
कृष्ण कन्हैया नाग नथैया,
हे गिरिवर धारी 
मेरी नाव पड़ी मंझदार
पार तुम कर दो बनवारी।

चारों तरफ कष्ट का मेला
क्या कर पाए जीव अकेला
सुख का नाम निशान नहीं है
कदम कदम पर व्यर्थ झमेला।
दुख भरे इस मर्त्य लोक में 
तुही एक सुखकारी। हे गिरिवर धारी….

दल हैं, दलबंदी दल दल है
सब को बस बोटों का बल है
सब के अंदर भरी गंदगी
कहीं नहीं कोई निर्मल है।
सभी स्वार्थ में लिप्त पड़े है
तूही एक उपकारी। हे गिरिवर धारी..…

कंस ठहाके मार रहे हैं
दुर्योधन हुंकार रहे हैं
शकुनी रोज चल रहे चालें
और युधिष्ठिर हार रहे हैं
चीख रही है देश द्रोपदी
कौन बढ़ाए साड़ी। हे गिरिवर धारी….

© कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड, कोलकाता
[30/08, 12:19 pm] रामेश्वर गुप्ता के के: जन्माष्टमी - बालगीत
छोटे से मेरे कृष्ण कन्हाई,
घुटनन के बल चलते है।
मिट्टी सारे बदन लिपटाई,
कितने सुन्दर वह लगते है।।
छोटे से................... 1 
सुन्दर लटे काली घुंघराली,
मुख पर सुन्दर लगती है।
मेरे मोहन अति सुन्दर है,
मधुर मधुर मुस्कराते है।।
छोटे से.................... 2 
मात यशोदा के लाल दुलारे,
तुतलाकर वह कुछ कहते है।
माखन मिश्री खाने वाले,
तीन लोक के वह स्वामी है।।
छोटे से.................... 3 
प्यारे मेरे है कृष्ण कनैइया,
त्रेलोक यश उनका गाते है।
मात यशोदा जान न पाये,
सब प्रभु की माया कहते है।। 
छोटे से..................... 4
जेल में कृष्ण का जन्म हुआ है, 
ताले सब स्वत: खुल जाते है। 
प्रभु की लीला वह ही जाने, 
वसुदेव उन्हें गोकुल ले गये है।। 
छोटे से...................... 5
स्वरचित, 
रामेश्वर प्रसाद गुप्ता ।
[30/08, 12:34 pm] वैष्णवी Khatri वेदिका: 30 अगस्त 2021

 शीर्षक 'कान्हा की बाँसुरी'

चाँद पर था खुमार, व चाँदनी में था शबाब।
कान्हा बजाए बाँसुरी, फाल्गुन का था मास।

भोले शंम्भू वृंदावन, समाधि त्याग के आए।
गोपियों से कृष्ण दर्शन की, गुहार हैं लगाए।
ललिता बनी द्वारपाल, प्रवेश नर था निषेध।
बिना अनुमति के कोई , ना कर पाए प्रवेश।
श्रीकृष्ण स्वयं को माने, शंकर जी का दास।
 कान्हा बजाए बाँसुरी, फाल्गुन का था मास।

पिया-मिलन मानसरोवर में, स्नान था पाया।
भोले शंकर ने अपना, अंग-अंग था सजाया।
सकल अंग सजा गोपी का, रूप था बनाया।
निधिवन में हुआ प्रवेश, प्रियतम दर्शन पाया।
उल्लसित गोपियों से थी, सुसज्जित ये रास।
कान्हा बजाए बाँसुरी, फाल्गुन का था मास।

कान्हा की थी स्वीकृति, आँख ही आँख में।
हो कर विमुग्ध जाकर, शामिल हुए रास में।
असलियत जान कान्हा, रास खेलें साथ में। 
बंसी गूँजे भाव विभोर हुए, शिवजी नाच में।
भोले को आनन्द विभोर, कर रही थी रास।
कान्हा बजाए बाँसुरी, फाल्गुन का था मास।

सुरीली तान गोपियों की, है सुध-बुध खोती।
परमात्मा प्राप्ति की, कामना प्रबल है होती।
हृदय चुराए भगवान, कल्याणकारी है होता।
मन में बसें कृष्ण तो, जीवन सफल है होता। 
शिवजी को था दिव्य, नृत्य के लिए उल्लास।
कान्हा बजाए बाँसुरी, फाल्गुन का था मास।

वैष्णो खत्री वेदिका जबलपुर ( मध्यप्रदेश ) ℃®कापीराइट /सर्वाधिकार सुरक्षित.
[30/08, 12:34 pm] वीना अडवानी 👩: जन्माष्टमी
*********

नटखट कान्हा कर अटखेली
कभी राधा कभी गोपियन को सताऐ
छेड़ तान मीठी बांसुरी की
खिंच सबको ले आऐ।।

गौ हो या गोपियन को वो
नटखट मंत्रमुग्ध कर जाऐ
चुरा खाऐ हर बार माखन सबका
फिर भी चहेता सबका कहलाऐ।।

फोड़े मटकी पनघट पे सबकी
कभी कालिया को धूल चटाऐ
ओ मेरे कान्हा तुम काहे को
दर्शन अब तक मुझको ना देने आऐ।।

तड़पत अंखियां तेरे दरस को
अब तो दरस दे तू कान्हा
तेरी भक्ति की दिलोजान से
अब तक तू क्यों ना माना।।

माखन मिसरी भोग बनाई
अपने हाथन से तुझे खिलाऊं
ना देख तुझे कान्हा मैं व्याकुल
जोर-जोर से बुलाई।।

तड़पत मेरे मन की व्यथा कान्हा
अखियन से बह कर आई।
अब तो आजा मेरे कान्हा जी
वीना मीरा बन यशगान तेरी गाई।।


वीना आडवानी तन्वी
नागपुर, महाराष्ट्र
******************
[30/08, 12:44 pm] आशा 🏆🏆जाकड इन्दौर: "आ जाओ श्रीकृष्ण हमार"

भक्त हाथ जोड़ करें पुकार 
आ जाओ श्रीकृष्ण हमार

जब होवे धर्म की हानि 
तुम धरती पर आ जाते  
भक्तों की पुकार सुनके 
बिगड़े कार्य तुम संवारते 
   तुम हो जगती के रखवार 
   आ जाओ श्रीकृष्ण हमार।।

मोर मुकुट, पीतांबर सोहे 
गल वैजन्ती कर वंशी सोहे 
वंशी की तुम तान सुनाओ
सारे जग के कष्ट मिटाओ
    तुम ही लगाते हो नैया पार 
    आ जाओ श्रीकृष्ण हमार।।

द्रोपदी की लाज रखी थी
पर्वत थाम सुरक्षा दी थी 
सुदामा से मित्रता निभाई
रुक्मिणी से व्याह रचाई
    तुम हो दीनन के भरतार
   आ जाओ श्रीकृष्ण हमार।।

भादों अष्टमी पर व्रत करते
कृष्ण जन्माष्टमी पर्व मनाते 
पूजन करके व अर्चन करते 
मंदिर भजन , झांकी सजते
     तुम हो सबके लड्डू गोपाल
     आ जाओ श्री कृष्ण हमार।।

कृष्ण हमारे सबके प्यारे
जग में सबके पालनहारे
जग में हाहाकार मच रहा
अब आ जाओ वंशी प्यारे।
         अब सुन लो विनती हमार
         आ जाओ श्रीकृष्ण हमार।।


आशा जाकड़
[30/08, 1:06 pm] विजेन्द्र मोहन बोकारो: मंच को नमन
विषय:-- *सांवरे की सूरत आज भी*

*कृष्ण अष्टमी के उपलक्ष पर*

सांवरे कृष्ण की सूरत जग में है प्यारी,
तेरी मुस्कान भी जग में है सो न्यारी।
गोकुल वृंदावन नहीं पूरी सृष्टि में हो प्यारे।
तुम पे है पूरी दुनिया के लोग बलिहारी।।

जन्म देवकी से हुआ, जसुमति गोद सुलाया।
ग्वाल बाल के नहे की कीमत कौन चुकाया?

कर्तव्यों की राह पर,तुम हुए मजबूर,
वरना तुम हुए हो कभी, श्री राधे से दूर।।

बहुत दूर तुम आ गए, कृष्ण मुरारी आज
तुम्हारा कल है जन्मोत्सव,सुन लेना गायो की आवाज।
तुम बिन पूरा संसार सुना पड़ा है, जमुना हुई अधीर।
भक्तों ने रोज मुझसे पूछता बताओ राधिके वनिताओं के पीर।।

जाना,कर्तव्यों की राह पर तुम हुए मजबूर।
तुम भटकते रहो राधा कभी ना पाया चेन।।
तुम्हारी युद्ध विवशता नहीं राज की आस।
धर्म के मार्ग पर चलते शांति का प्रयास।।

भक्तों के तुम भगवान, मेरे हो अधीश
अब तो आओ बस जाओ आंखों में
राधा जोगन बनी निधिवन ढूंढ न जाएं
तेरे वंशी आज भी अधरों पर बिना राधे कान्हा नहीं।।

बिन राधा के आज भी कृष्ण रहे बेनाम।
बनवारी सबके हुए, राधा कृष्ण के नाम।।
           *राधे- राधे*
           *राधे कृष्ण राधे कृष्ण हरे हरे!!*
विजयेन्द्र मोहन।
[30/08, 1:18 pm] 💃इंद्राणी साहू: *माखन चोर*
विधा - सरसी छंद गीत (16/11)
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~
भाद्र मास की रात्रि अष्टमी , घटा घिरी घनघोर ।
कारागृह में ज्योति पुंज सम , जन्म लिए चितचोर ।।

पाने को शुभ स्पर्श कान्ह का , बढ़ी जमुन की धार ।
छूकर पावन श्री चरणों को , हर्षित हुई अपार ।
पहुँचे यशुमति नंद आँगना , बनकर नन्दकिशोर ।
कारागृह में ज्योति पुंज सम , जन्म लिए चितचोर ।।1।।

लीला गोकुल में दिखलाते , धन्य हुआ यह धाम ।
तारन हार बने पापी के , श्याम और बलराम ।
रिझा रहे नटखट जन जन को , बनकर माखन चोर ।
कारागृह में ज्योति पुंज सम , जन्म लिए चितचोर ।।2।।

मटकी फोड़े माखन खाए , छेड़ रहे ब्रज नार ।
मगर श्याम से रूठ न पाईं , लुटा रही हैं प्यार ।
मधुर मुरलिया से मन मोहे , बाँध प्रीति की डोर ।
कारागृह में ज्योति पुंज सम , जन्म लिए चितचोर ।।3।।

कुंचित काले केश सुहावन , सूर्य चन्द्र से नैन ।
अधर सजी प्रातः की लाली , मधु सम मधुरिम बोल ।
श्याम वर्ण पीताम्बर देखे , हर्षित है मन मोर ।
कारागृह में ज्योति पुंज सम , जन्म लिए चितचोर ।।4।।


     *इन्द्राणी साहू"साँची"*
    भाटापारा (छत्तीसगढ़)
[30/08, 1:19 pm] सरोज दुगड गोहाटी: * अग्नि शिखा काव्य मंच*
* जन्माष्टमी - बाल गीत 

अब नांँ सताओ औ चितचोर कन्हैया ,
कयों फोड़ी मोरी माँखन की हँडिया !
मुख माँखन भरा क्यों झूट बतियाए
दाऊ का नाम लगा मुझे बरगलाए 

इधर- उधर ठूमक - ठूमक कर चलते ,
औखली रस्सी समेत लुढ़काते दौड़ते ,
मैया यशोदा के लाल कृष्ण कन्हैया !
निरख देवता श्रषी मुनी मन हर्षाते ,

तुम दूर नहीं जाना मेरे कन्हैया ,
मेरा मन बहुत ही घबरा जाता !
सोनें की वंशी घड़वा कर दूंगी ,
घर पर बैठ कर ही तुम बजानां !

गोपियों को मन भाता मुरली मोहन
कंकरिया से मक्खन मटकी फोड़ता !
जमुनां तट पर कंदम्ब की डाली बैठ ,
चीर हरण कर उनकों खूब सताता !

मैं तो कान्हा तुझसे हरदम हारी ,
पग-पग पर तेरी जाऊँ बलिहारी !
जो सुख स्वर्ग सुखों से बढ़कर ?
तुझे खिलाकर लल्ला मैं पाजाऊं

सरोज दुगड़
खारूपेटिया 
असम 
🙏🙏🙏
[30/08, 1:25 pm] साधना तोमर: कान्हा

भादौ मास की कृष्ण-अष्टमी, 
श्री कृष्ण ने जन्म लिया। 
विष्णु के अवतार कृष्ण ने, 
धरा को आकर धन्य किया। 

वसुदेव ने कान्हा को ले, 
गोकुल को प्रस्थान किया। 
बिजली कड़के, बादल बरसे, 
मेघों ने बहुत सम्मान दिया। 

चरण-कमल छूने को यमुना, 
उफन - उफन वह जाती है। 
छू उनके सुन्दर पांवों को, 
शान्त भाव से बह जाती है। 

नन्द यशोदा अभिभूत थे, 
सुन्दर सा पाकर वह लाल। 
मैया बार - बार बलिहारी, 
चूम रही थी उसका भाल। 

बाल-लीलाएँ बड़ी मनोहर, 
मन सबका हरषाती थी। 
कान्हा को ग्वालों के संग, 
माखन और मिश्री भाती थी। 

घर-घर जाकर मटकी फोड़े, 
माखन की चोरी करते थे। 
गोपियाँ जब देती उलाहना, 
डाँट से माँ की डरते थे। 

बांध ओखली से यशोदा माँ, 
सबक उन्हें सिखलाती थी। 
जल्दी ही फिर खोल उन्हें, 
प्यार बहुत ही दिखलाती थी। 


डॉ. साधना तोमर
बड़ौत (बागपत) 
उत्तर प्रदेश
[30/08, 1:30 pm] निहारिका 🍇झा: नमन अग्निशिखा मंच 
दिनाँक 30/8/2021
🌹जय श्री कृष्णा🌹
तेरी कृपा ने कान्हा ,दुनिया मेरी सँवारी।
तूने ही मुझको दी है ,ये जिंदगी है प्यारी।।
सुख दुख में मेरे कान्हा ,बस सँग तू रहा है।
राहों की विपदा हर के ,
मेरे सँग तू चला है।।
 जब भी मैं डगमगाऊँ, तेरा ही बल मिला है।
तूने हटा निराशा ,आशा से भर दिया है।
तेरी कृपा ने कान्हा.....।।।
भक्ति है तेरी मुझको ,दुनिया मे सबसे प्यारी।
जोगन बनी मैं तेरी, छोड़ी ये दुनिया सारी।
तेरे बिना ये दुनिया , मुझको न रास आये।
है कामना मेरी ये ,तू अपनी शरण मे ले ले ।
जपती हूँ नाम तेरा ,सब कुछ मेरा तू ही है।
अर्पण करूँ मैं तुझको, अपनी ये जिंदगी है।।
तूने कृपा की कान्हा ,जीवन को है सँवारा।
तेरी कृपा.....।।।
जय श्री कृष्णा🌹🌹🙏🏼🙏🏼
निहारिका झा
खैरागढ राज(36 गढ़)
[30/08, 1:30 pm] निहारिका 🍇झा: नमन अग्नि शिखा मंच 
दिनाँक 30?/8/2021
विषय;-श्री कृष्ण 
🌹 बाल गीत🌹
धूम मची है गलियन में 
खुशियां छायीं है मन मे
झूम रहे हैं गोलू मोलू
आयीं आज कन्हैया आठें
बना रहीं मम्मी पकवान
करें कृष्ण का हम श्रृंगार
होगी पूजन रात को आज
जन्म दिवस कान्हा का आज।
आओ बजाएं ताली 
देंगे उन्हें बधाई।
ढोल बज रहे मच गया शोर 
 जय कन्हैया का है शोर।।
जय कन्हैया लाल ,जय हो नँद के लाल की।।
जय श्री कृष्णा🙏🙏🌹🌹
निहारिका झा
खैरागढ राज.(36 गढ़)
[30/08, 1:31 pm] Anita 👅झा: बाल गीत - बाललीला 
मैया की आँखों में आँखें डाल
कहते कृष्ण कन्हाई है ।
कान पकड़ कर मैया कहती -
तु क्यों शोर मचाओ है ।
पकड़ी गई तेरी चोरी मोहें आँख दिखायों है ।
बादल संग बिजली खेली अटखेलियाँ ,
कान्हा तूँ क्यों दौड़ लगायों है ।
पकड़ी गई है तेरी चोरी 
तूँने ही माखन खायों है ।
बाल सखा संग खेले दौड़े ,
तु ने ही माखन खायों है । 
बादल संग जुगनू दौड़े है ,
कान्हा तूँ क्यों दौड़ लगायों है ।
बाल सखा संग मुस्कानो कृष्ण कन्हाई है ।
बेल पकड़ कर भागे दौड़े यमुना तट पर दौड़े लगायें कृष्णकन्हाई है 
धरा समाहित खेल दिखाते कृष्ण कन्हाई है ।
इंद्रधनुषी रँग बाल सखा संग रूप बदल आये कृष्ण कन्हाई है ।
बाल सखा संग भागे दौड़े करते चोरी माखन कृष्ण कन्हाई है । 
कान पकड़ वो कहते मैया मैंने ही माखन खायों !
ले लो मेरी लकुटि कमरिया मैंने ही माखन खायो है ।
बारिस की लहरों में बाल सखा संग मैंने नाच दिखायों है 
रंग बिरंगी उड़ती चुनरियाँ मैंने ही लटकायों है 
शेषनाग बाल सखा संग मैंने ही नाच दिखायों है 
बाल रूप की अद्भुत लीला देख सबके मन को भायों है 

अनिता शरद झा रायपुर
[30/08, 1:40 pm] वीना अचतानी 🧑🏿‍🦽: वीना अचतानी 
अग्नि शिखा मंच को नमन 
विषय*****जन्माष्टमी *****
******बाल गीत******
माखन चोर नन्द किशोर 
कितने तेरे रूप
जन्म लिया देवकी कोख से
कहलाये यशोदा नन्दन 
चले ठुमक ठुमक 
चले मटक मटक
बाजे छम छम पैंजनियां
शीश पर मोर पंख मुकुट 
हाथ में बँसुरिया
मुख पर माक्खन लिपटाये
भीतर ब्रहमांड समाए
माक्खन के लिये 
नाच उठे ममता का
 मोल चुकाने को
भक्तों का ह्रदय  
  रिझाने को 
कृष्ण सखा, कृष्ण प्रेम
कृष्ण की लीला 
अति न्यारी वन्दन
बारम्बार वन्दन
मोर मुकुट पीताम्बर धारी ।।।
स्वरचित मौलिक 
वीना अचतानी 
जोधपुर ।।।।
[30/08, 2:02 pm] चंदा 👏डांगी: • जय जय जय श्रीकृष्ण *
************************

कंस ने जाने कितने किये प्रयास 
खाली गया हर बार उसका वार
वध तो उसका होना ही था
देवकी नन्दन के हाथ 
जन्म लिया तुमने जेल मे 
लीला ऐसी खेली
पंहुच गये नन्द के अँगना 
देख यशोदा हर्षायी 
भेद कान्हा का जान ना पाई
बांहो का झुला दे हुलराया 
देवकी का दिल फिर घबराया
कैसे होगा असुरों का नाश
जब बच न सकेगी मेरी सन्तान 
कान्हा की लीला कोई जान न पाया
जन्म से ही तुने कितने खेल दिखाये
गोपियों से रास तो बहाना था 
लज्जा नारियों की बचाना था 
संहार असुरों का करने ही तो
तुने धरती पर जनम लिया था 

चन्दा डांगी रेकी ग्रैंडमास्टर 
रामटेकरी मंदसौर मध्यप्रदेश
[30/08, 2:35 pm] शेभारानी✔️ तिवारी इंदौर: तुम श्याम बनके आना


 जीवन की वृंदावन में ,बहार बनके छाना,
 राधा तो बन गई मैं ,तुम श्याम बनके आना,
 गोकुल की गलियों में , भंवरों के गुंजन में ,
हलचल है पनघट में ,खुशियों के मधुबन में,
 बरखा की फुहारों मेंश्वासों की सरगम में,
 पेड़ों के झुरमुट में, लोगों की आस्था में ,
बांसुरी की धुन से ,मुझे तुम रिझाना ,
राधा तो बन गई मैं ,तुम श्याम बनके आना।

 प्रेम ही वृंदावन, कृष्ण की भक्ति है ,
मन के भावों की ,सुंदर अभिव्यक्ति है ,
सृष्टि के कण-कण में ,प्रेम विद्यमान है,
वशीकरण मंत्र है ,जीवन की शक्ति है,
 प्रेम का संदेश ,घर-घर पहुंचाना,
 राधा तो बन गई मैं, तुम श्याम बनके आना ।

प्रेम ही ईश्वर है ,प्रेम शुद्ध साधना ,
प्रेम सुख का मंत्र है ,प्रेम है आराधना,
दिल की गहराइयों में, खुशबू का खज़ाना,
प्रेम है समर्पण,प्रेम सच्ची भावना,
तो कृष्ण की भक्ति में, सब रंग जाना,
 राधा तो बन गई मैं ,तुम श्याम बनके आना।

 श्रीमती शोभा रानी तिवारी 619 अक्षत अपार्टमेंट खातीवाला टैंक इंदौर मध्य प्रदेश मोबाइल 89894 09210
[30/08, 3:04 pm] कुंवर वीर सिंह मार्तंड कोलकाता: अग्नि शिखा मंच
30 अगस्त सोमवार

कृष्ण (बाल कविता)

कितने भोले भाले कान्हा
भक्तों के रखवाले कान्हा।

मां देवकी ने जन्म दिया था
जसुदा जी ने पाले कान्हा।

माता और पिता सब गोरे
पर मनमोहक काले कान्हा।

चुरा चुराकर माखन के संग
मिश्री खाने वाले कान्हा।

ग्वाल बाल मित्रों के संग में
गाय चराने वाले कान्हा।

उदासीनता जब आ जाए
वेणु बजाने वाले कान्हा।

जब भी कोई संकट आए
तुरत हटाने वाले कान्हा

गेंद गिरी जब कालीदाह में
नाग नथाने वाले कान्हा।

कंस भेजता रोज राक्षस
मार गिराने वाले कान्हा।

रात रात भर सुंदरियों संग
रास रचाने वाले कान्हा।

जन में मन में जग–जीवन में
प्रीति पगाने वाले कान्हा।

मथुरा जा मथुरा नरेश को
धूल चटाने वाले कान्हा।

मथुरा छोड़ द्वारका जाकर
शहर बसाने वाले कान्हा।

मित्र सुदामा को निर्धन से
धनिक बनाने वाले कान्हा।

दुष्ट अधर्मी दुर्योधन को
अति समझाने वाले कान्हा।

नासमझी का फल क्या होता
यह बतलाने वाले कान्हा।

और अंत में महाविनाशक 
युद्ध कराने वाले कान्हा।

कुरुक्षेत्र में गीता का उपदेश
सुनाने वाले कान्हा।

केवल पांच पांडवों को भी
विजय दिलाने वाले कान्हा।

और अंत बैकुंठ धाम में
वापस जाने वाले कान्हा।

कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड, कोलकाता
[30/08, 3:09 pm] +91 70708 00416: मेरे प्यारे मनमोहना
    ********************
मेरे प्यारे मनमोहना मनमोहना
तुम्हारी छवि है अति न्यारी मनमोहना
रास रचैया वृन्दावन के वासी मनमोहना
राधा तुम्हारी दर्शन को प्यासी मनमोहना
तुम बिन सुख चैन कैसे पाऊं मनमोहना
वंशी बन जाऊं तेरे होठों से लगा जाऊं मनमोहना
पल-पल रोती राधा तेरी याद में मनमोहना
बिरहा की मारी कबसे तरह रही मनमोहना
अंखियां हर पल बरस रही मनमोहना
अब तो दरश दिखा दो मनमोहना
छोड़ के अपने काशी मथुरा ओ मेरे मनमोहना
आओ बसों मेरे नैनों में मनमोहना
तुम तो श्याम सलोने नंदलाला मनमोहना
तेरे ही दरस को नित प्यासी मनमोहना
आ जाओ चितचोर सांवरिया मनमोहना
मेरे प्यारे मनमोहना मनमोहना!

डॉ मीना कुमारी परिहार
  मंच को नमन, 🙏
 30/8/21
[30/08, 3:09 pm] रवि शंकर कोलते क: सोमवार दिनांक ३०/८/२१
विधा ***बाल गीत
विषय ***
  #**** नटखट कन्हैया****#
               ^^^^^^^^^

ये देखने में है भोला ।
पर है ये बड़ा नटखट ।।
गैय्या चराने जाता है ।
रोज जमुनाजी के तट।।१

तंग करता है ये हरदम
रास्ते में गोपियों को ।
कभी फोड़ता मटकियां 
कभी खींचे उनकी लट ।।२

हर कोई कान्हैय्या की ।
रोज करता है तकरार ।।
पर हरदम ही नटखटिया ।
साफ कर जाता इनकार ।।३

कहता है मां यशोदा से ।
मैंने माखन नहीं खाया ।।
यह ग्वालन झूठी है मैया ।
इनको कभी नहीं सताया।।४

रोज लीलाए करता है ।
ये नन्हासा कान्हा मुरारी ।।
दैत्य मारे साधुके कष्ट हरे ।
ये जगत का पालन हारी ।।५

फन पे कालिया के नाचे ।      
बनके गर्दन काल कन्हैया ।।
गोवर्धन उठाए उंगली पर । 
देखो सहज बंसी बजैया ।।६

प्रा रविशंकर कोलते
      नागपुर है।
[30/08, 3:26 pm] रानी अग्रवाल: रानी अग्रवाल द्वारा लिखित भजन २८-७-२०२१.
[Image 464.jpg]
बांके बिहारी से प्रीत
आप आ गए घर पे हमारे,
हम हो गए दीवाने तुम्हारे।
अब खूब होंगी बातें,
अच्छी कटेंगी दिन_रातें।१।
सुबह उठते ही दर्शन करेंगे,
नयनों से नयन मिलेंगे।
तुमसे आशीर्वाद लेंगे,
हर काम में याद करेंगे।२।
चलते_फिरते तुम्हें निहारेंगे,
हम भी बांकी नजरों से देखेंगे।
हर जगह तुम्ही तुम होओगे,
हरदम मेरा पीछा करोगे।३।
मैं नहाकर,तुम्हें नहलाऊंगी,
भोजन बना,भोग लगाऊंगी।
हरदम तेरा गुण गाऊंगी,
प्यार में बावरी हो जाऊंगी।४।
तुम्हें गाकर भजन सुनाऊंगी,
तुम्हें बंसी बजाने कहूंगी,
तेरे गीतों पे मैं नाचूंगी,
साथ रास करने कहूंगी।५।
हर समय का हो गया साथ,
तुमने ले लिया हाथों में हाथ,
अब मगन हो बतियाएंगे,
मन की किसी को ना बताएंगे।६।
मेरे सारे डर भाग जायेंगे,
मेरे भाग्य अब जाग जायेंगे।
एक दूजे के समक्ष रहेंगे,
इक दूजे में खो जायेंगे।७।
मेरे हिरदय में बसे रहना,
मेरे मन को कसे रहना।
कभी दूर हो जाऊं तुमसे,
इतनी ढील कभी मत देना।८।
कान्हा तुम तो गए सज संवर,
लग जाएना किसी की नजर।
ऐसी मनमोहिनी सूरत,
जग की सुंदरतम मूरत।९।
ना बनना चाहूं राधा प्यारी,
ना मीर सी औकात हमारी।
हमें समझो, दासी तुम्हारी,
चाकर राखो,करुं मैं चाकरी।१०।
ध्यान रहे तुम्हारे चरणों में,
हमें ले लो अपनी शरणों में।
यूं ही बीत जाए उमरिया,
तेरे दर पे रहूं संवरिया।
तुम्ही लीजों हमरी खबरिया।११।
अब हम अलग दो नहीं रहे,
इस दुनिया से कैसे कहें?
ये समझ जायेंगे राज़,
जब पूरन होंगे सब काज़।१२।
हम भी दुनिया को दिखा देंगे,
कैसे होते हैं प्रेम दीवाने?
एक मैं हूं,एक तुम हो,
ये मैं जानूं या तुम जानो।१३।
स्वरचित मौलिक रचना।
रानी अग्रवाल,मुंबई।






[30/08, 3:34 pm] पूनम शर्मा: कृष्ण तेरी बांँसुरिया
*******************

कृष्ण तेरी जब बांँसुरिया ,
प्रेम की धुन सुनाएं ।
गोपीन संग वृंदावन में ,
राधा भी रास रचाए ।

यमुना तीरे जब कृष्णा तू,
 खेल कोई दिखलाए।
ग्वाल बाल सब आकर उस पल, 
तुझ संग धूम मचाए।

देख मुख में ब्रह्मांड ,
यशोदा म‌इया थी चकराई ।
भुला स्मृति म‌इया कि तूने ,
अपनी महिमा दिखलाई।

मोहित करती धुन मुरली की ,
और कहा ना जाए।
देख के सबतो सुध-बुध खोए ,
तुम मन ही मन मुस्काए।

रूप सलोना कान्हा तेरा ,
जादू कोई कर जाए।
शीश मोर मुकुट है सोहे,
जो हर्षित मन को कर जाए।

पा कर तुझको ख्वाबों में भी,
 मन मेरा तो इतराए ।
भोग लगाऊँ मिश्री माखन ,
जो आकर तू चख जाए ।

खबर मुझे तू भाव का भूखा,
नहीं चाहता कुछ भी।
रखता जो स्नेह हृदय में ,
तू उसका हो जाए ।

कट जाए हर विपदा उसकी,
जो तेरा साथ है पाए।
कृष्णा तेरी सुन बांँसुरिया ,
स्नेहिल ये बात बताएं।

पाकर हर क्षण तुझको संग,
 हर विपदा तब टर जाए।
भूल के वो जग सारा तब ,
बस तेरा ही हो जाए।।

©️®️पूनम शर्मा स्नेहिल☯️
[30/08, 3:42 pm] डा. बैजेन्द्र नारायण द्िवेदी शैलेश🌲🌲 - वाराणसी - साझा: कृष्ण
++++--
श्याम की बात ही निराली है
 मुख पर फैली हुई लट काली है
कभी पग आगे कभी पीछे रखे
चाल उसकी बड़ी मतवाली है।।

****
दोस्ती जिससे है वह कर लेता
हर जरूरत है पूरी कर देता
और के द्वारे भला जाएं क्यों
रिक्तियां वह है सारी भर देता।।
****
गोरी राधा ने उससे प्यार किया
ब्रज को विपदाओं से उबार दिया
जो थे बंधन में उनको मुक्त किया
खराब हो गया
 कुब्जा विधृता का भी उद्धार किया।।
***
धर्म रक्षा के हित आया था
प्रीति के साथ को निभाया था
अपनी वाणी से अमर गीता दिया
जिंदगी निष्कलुष बिताया था।।
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डॉ ब्रजेन्द्र नारायण द्विवेद्वी शैलेश वाराणसी
[30/08, 3:43 pm] सुरेन्द्र हरडे: अग्निशिखा मंच को नमन🙏

आज की विधा :- बालकविता

विषय:- *जन्माष्टमी*🌹🌹

    सुंदर बाल गोपाल को देवकी ने जन्म दिया ।
पर उसे पता नहीं था कि भगवान ने अवतार लिया ।
 कंस के डर से ले चले टोकरी में छुपाए गोकुल की ओर ।
अंधेरी में ही निकल पड़े चुपचाप वसुदेव ।
नहीं हुई थी भोर ।।१।।

जमुना ने रास्ता दिया कृष्ण को नमन कर के 
जो बह रही थी भर भर के
नागराज ने फन की बनाई 
छतरी रक्षा की बरसात से
पहुंचाया मां यशोदा की गोदमें ।२

     मां यशोदा खुश हुई 
उसे लगा भगवान ने कोई प्रसाद दिया । सूनी गोदी भर आए
कितने भाग्यवान थे नंद यशोदा भगवान उनके घर आए।।३।।

कृष्ण गोकुल में लीला करने लगे
गोपी को तंग करते माखन खाते
रास्ता रोकते, मटकिया फोडते
जमुना किनारे जाते खेले खेलते 
सबको तंगाते ।।४।।

   उखल से बांधा समझाया डांटा फटकारा ।
लीलाएं रचाकर कृष्णा ने आखिर अत्याचारी मामा कंस को मारा
  बहुत सुंदर था सांवरा कन्हैया 
  बंसी बजैया रास रचैया
 रूप मनोहा री जगत के पालन हारी । 
 धरती पर आए रुप लेकर विष्णु का कृष्ण मुरारी।।५।।

कवि सुरेंद्र हरडे
         नागपुर
दिनांक :- ३०/०९/२०२१
[30/08, 3:53 pm] 👑पदमाकाक्षी शुक्ला: 🙏🌹अग्नि शिखा मंच🌹🙏
🙏🌹जय अम्बे🌹30/8/21🌹🙏
🙏🌹बालगीतः *मक्खन लीला* 🌹🙏

चोरी चोरी आकर तुम ।  
मक्खन दही चुराते हो ।।
रोज छुपाकर रखती हूं । 
ढूंढ कहाँ से पाते हो? ।।

 रोज-रोज गो वालों की ।
 टोली लेकर आते हो ।।
चढ जाते हो खंभा पर। 
पिरामिड तुम बनाते हो।। 
फोड़ दिया मटकी तुमने। 
मिलकर धूम मचाते हो।। 
रोज छुपाकर रखती हूँ। 
ढूँढ कहाँ से पाते हो ?।। 

गोवालो की टोलीका। 
मुखिया बनकर आते हो।। 
मक्खन चुराते हो आप 
ग्वाल-बाल को देते हो।। 
हाथ पकड़ने जाएं तो,। 
छुड़ा कर भाग जाते हो।। 
रोज छिपाकर रखती हूँ। 
 ढूंढ कहां से पाते हो? ।।

बंसरी बजाकर मेरा। 
कान्ह मन मोह लेते हो।। 
बुढ्ढी कहकर मुझको तुम। 
अँगूठा दिखलाते हो ।।
नटखट कान्हा सपनें में। 
दर्शन देकर जाते हो।। 
रोज छिपाकर रखती हूँ। 
ढूँढ कहाँ से पाते हो।।

🙏🌹पद्माक्षि शुक्ल 🌹🙏
[30/08, 3:59 pm] ओम 👅प्रकाश पाण्डेय -: कान्हा आयो ( बाल गीत) --- ओमप्रकाश पाण्डेय
भादो की घनघोर अष्टमी
सुबह से गरज रहे बादल
बरस रही वर्षा चहुँ ओर
आधी रात बीत गयी
कान्हा आयो देवकी के गोद में ....... 1
हथकड़ी बेड़ी टूट गई
सो गये जेल के पहरेदार
ताला जेल का टूट गया
चल पड़े नन्द ले सर पर उनको
कान्हा आयो देवकी के गोद में......... 2
उफन रही थी जमुना उस रात
जैसे वह तोड़ देगी सीमाओं को
कान्हा का जैसे छुआ चरण
नतमस्तक हो गई तुरन्त वहीं
कान्हा आयो देवकी के गोद में.......... 3
चुपके से नन्द पहुंचे गोकुल में
दे दिया यशोदा माता को
खुश हो गई यशोदा आज
बन कर माता वह कान्हा की
कान्हा आयो देवकी के गोद में......... 4
नारायण की नर लीला देखो
जो अपनी कृपा से पार लगावे
भक्तों को इस भवसागर से
आज नन्द के माथेपर जमुना पार हुए
कान्हा आयो देवकी के गोद में......... 5
( यह मेरी मौलिक रचना है ----- ओमप्रकाश पाण्डेय)
[30/08, 4:23 pm] 💃वंदना: कान्हा

कान्हा ओ कान्हा
तू छोड़ तनिक बैंया
मोरे शीश के गगरिया
तू रोक ना डगरिया।

यू मोड़ना कलाइयां
झड़ जाए मोरी चूड़ियां
मार के कंकरिया
क्यों फोड़ते गगरिया।

चुनरी मोरी भीगोई 
सिंगार सारा भीगा
क्यों छेड़े आते जाते
काहे को है सताता।

जा के करूं शिकायत
सुन ओ यशोदा मैया
तो तेरो नंदलाला
है बहुत ही सताता।

मुरली मधुर बजाता
मोहन मुरारी प्यारा
बन श्याम की दीवानी
मैं जपु तेरी माला।

तू हें मेरा मोहन
मैं तिहारी राधा
तू है मेरा मोहन
मैं तिहारी राधा।

वंदना शर्मा बिंदु
देवास मध्य प्रदेश।
[30/08, 4:39 pm] डा. अंजूल कंसल इन्दौर: कृष्ण कन्हैया (बाल गीत)

छोटे से मेरो कृष्ण कन्हैया 
पैरों की बाज रही पायलिया 
घुटनन घुटनन चलत-मचलत हैं 
मोर पंख धारी सांवरी सुरतिया।

अधर रख बजावे मुरलिया 
ग्वाल बाल संग रास रचैया 
गोपियों की फोड़े मटकिया 
रुच रुच खावत माखनवा।

नटखट कान्हा यमुना तीरे 
कदम की डाल पर विराजे 
शीश मोर मुकुट पँख सोहे
कटि पीतांबर धारी मन मोहे। 

बांके बिहारी से हो गई प्रीत 
बावरी राधा दौड़ी दौड़ी आवे 
कान्हा राधा संग, रासलीला रचावें
कृष्ण कन्हैया भोला सा मुसकावे हैं 

डा अँजुल कंसल"कनुप्रिया"
30-8-21
[30/08, 5:09 pm] कुम कुम वेद सेन: सांवरे की सूरत आज भी

आंखें खुली हो या बंद
सांवरी की सूरत नैनों में है आज भी
कभी राधा के कान्हा कहलाए
कभी गोपियां तुझे पुकारे

हर युग कान्हा हो सांवरे
सभी के पल को नैनों में बसे हो आज भी

मुरली मयूर पंख की शोभा निराली
होठों से लगकर बांस बन गई मुरली

सिर पर धारण कर पंख बना सिरमौर
कितना विश्वास हुआ है जग में

पुस्तकों में रख पंखों की
बढ़ जाती है पुस्तकों की मान

पलके बंद हो गया खुली
सांवरी की सूरत नैनों में बसी है आज

गर्भ देवकी का ,गोद यशोदा
मथुरा वृंदावन की छवि सांवरे का

राधा के सांवरे रुकमणी के बाबरे 
दोनों के नैनो के हो तुम सांवरे

मथुरा वृंदावन यमुना का जल
पांव तेरी पखारे नैनों में बसाए

जग की हर नारी कभी बनी देवकी
कभी यशोदा का सुख लेती
हर मां का लाडला कहलाता सांवरे

तेरी जन्मों से पावन बनी जेल
तेरे उपदेश जीवन के बने हितोपदेश

सांवरी की सूरत सबकी नैनों में बसे हैं आज भी
पलकें खुली हो या बंद

कुमकुम वेद सेन
[30/08, 5:29 pm] Dr Rashmi👑👑 Shig ( Allbad): कृष्ण ने लिया मनुज अवतार 

चलो हम कृष्ण का पथ अपनाएँ,
मन ,वचन ,योग,क्रियाएँ संग अपनाएँ,

कृष्ण सिखाते हैं अनुशासन ,
नियमित सब होता है जीवन ,

सभी हर्षित हों,प्राणवान हों,
व्यक्ति समुन्नत हों,महान हों,

विषम परिस्थिति में भी संयत होकर हम संतुलन बनाएँ।

जब कृष्ण ने लिया मनुज अवतार ,
 आज मनुज ज्ञानी बन श्रेष्ठतम आचार
 
सही धारणाएँ जब होंगी,
उचित चेष्टाएँ तब होंगी,

तन सबल हों,बढ़े मनोबल, अंतर्मन उज्जवल हो जाएँ।

इन्द्रिय -बल संयत हो जाए, 
मन सामर्थ्य सृजन की पाए,

बुद्धि विवेकवान हो जाए, 
चित्त सहज निर्मल कहलाए, 

अहंकार के संग सभी मिल आत्मबोध अनवरत जगाएँ। 

ऐसा हो यह पथ हमारा, 
रहें नहीं भीतर अँधियारा, 

पथ की स्वच्छ दिशा हो जाए, 
जाग्रत जिजीविषा हो जाए, 

निविर्चार हो परम लक्ष्य की ओर समन्वित कदम बढ़ाएँ।

चलो मनुज कृष्ण का पथ अपनाएँ। 



डॉक्टर रश्मि शुक्ला 
प्रयागराज 
उत्तर प्रदेश
[30/08, 5:39 pm] ♦️तारा प्रजापति - जोधपुर: अग्निशिखा मंच
30/8/2021 सोमवार
विषय-जन्माष्ठमी (बालगीत)

जन्में कान्हा जेल में,
ताले खुल गये खेल में।
प्रकृति बन गयी ढाल,
नटखट नन्द गोपाल।

यशोदा का प्यारा,
गोकुल का दुलारा।
नंद जी का लाल,
 नटखट कृष्ण गोपाल।

धेनु चरावै,
बंशी बजावै।
घुंघराले है बाल,
नटखट कृष्ण गोपाल।

मटकी फोड़े,
अंबियाँ तोड़े।
मैया पूछे सवाल,
नटखट कृष्ण गोपाल।

माखन चुरावै,
गोपियों को सतावै।
 चलता टेढ़ी चाल,
नटखट कृष्ण गोपाल।

जमुना का तट,
पीपल का वट।
नाचे दे दे ताल,
नटखट कृष्ण गोपाल।

बृज- किशोरी ,
राधा-गोरी।
काला नन्द का लाल,
नटखट कृष्ण गोपाल।

पूतना को तारा,
कालिया को मारा।
कंश के बन गये काल,
नटखट कृष्ण गोपाल।।
                    तारा "प्रीत"
                जोधपुर (राज०)
[30/08, 5:39 pm] 👑मीना त्रिपाठी: *जन्माष्टमी (कविता)*

घनघोर घटाएं आतुर थीं
जैसे प्रलय मचाने को
देवकी-सुत निकल पड़ा था
भू- मंडल अपना बचाने को

वासुदेव की इक विनती पर
यमुना बौनी हो गई
चरण पखार आराध्य के
वह भी पावन हो गई

वासुकी ने अपने फनों का
दिया प्रभु को छत्र- छाया
और जन्मते ही कान्हा ने
दिखलाई अपनी माया!!

*मीना गोपाल त्रिपाठी*
*30 / 8 /2021*
[30/08, 6:13 pm] पुष्पा गुप्ता / मुजफ्फरपुर: 🌹🙏अग्नि शिखा मंच 🙏🌹
           🙏जन्माष्टमी 🙏
         🌹बालगीत-झूला 🌹
       🌿दिनांक: 30/8/21🌿
****************************************🌹🙏
झुला दो सखी पालना रे
झूले नंदलाला ,,,,,,,,,,,×2
के रे झू ले ,के रे झुलावै
के रे मुख चूमना रे
झूले नंदलाला ,,,,,,,,,
कृष्ण जी झूलें, यशोदा झूलावे
नंद मुख चूमना रे
झूले नंदलाला,,,,,,,
🌹🙏
*******************************
डाॅ.पुष्पा गुप्ता 
मुजफ्फरपुर 
बिहार 
🙏
[30/08, 6:15 pm] रजनी अग्रवाल जोधपुर: शीर्षक" जन्माष्टमी "

1. आया जन्माष्टमी त्योहार , 
 करो सब प्यार भरा व्यवहार , ‌
जल्दी उठ कर नहा लो धो लो , 
फटाफट हो जाओ तैयार , 
 आया जन्माष्टमी जोहार,,,,,,,,

2. चुन्नू मुन्नू फूल चुन लाओ , 
रेशम की डोरी में गूंथ गूथ कर , 
 रंग रंगीला बनाओ तुम हार , 
आया जन्माष्टमी त्योहार,,,,,,,,
3. तरह-तरह के भोग बनाएं ,
 अजवाइन ,धनिया, पंजीरी सजाएं ,
कर ले छप्पन भोग तैयार , 
आया जन्माष्टमी,,,,,,,

4. रात 12:00 बजे कान्हा जन्मे ,
 जय कन्हैया लाल , करें माखन मिश्री मनुहार ,
आया जन्माष्टमी त्योहार,,,,,,,

स्वरचित 
 रजनी अग्रवाल
    जोधपुर
[30/08, 6:20 pm] 
Padma✔️✔️ Tiwari Damoh: विषय कृष्ण ने लिया मनुज अवतार

जब जब बड़े असुर धरनि पर
भक्तों ने करी पुकार
भादो अष्टमी आधी रात
कृष्ण लिया मनुज अवतार।।

ज्यो ज्यो घड़ी जन्म की आई
देवकी के मन चिंता अपार
जन्मे है कृष्ण कन्हाई
खुले जेल के बंद किबाड।।

लेकर चल दिए वसुदेव
वर्षा हो रही मूसलाधार
चरण पखारे यमुना जी ने
उफान पर थी यमुना की धार।।

माटी खाई कान्हा तुमने
दिख लाया रूप विराट 
माखन चोरी ग्वाल बाल संग
सखाओं के थे बहुतई ठाट।।

ढूंढती हैं ब्रज की बाला
आ जाओ कान्हा एक बार
इंद्र ने कोप किया ब्रज पर
उगली पर गिरवर तुमने धार।।
पदमा तिवारी दमोह मध्य प्रदेश
सर्वाधिकार सुरक्षित किया है रचना मौलिक और स्वरचित है।
[30/08, 8:49 pm] 
अंजली👏 तिवारी - जगदलपुर: अम्मा कृष्ण कन्हैया बनूंगा
माखन मिश्री खाऊंगा
आज कृष्ण जी का जन्म उत्सव है
मुझे भी कृष्ण कन्हैया बना दो
संखाओ दोस्तों संग जाऊंगा
कान्हा जैसे बनूंगा
माखन खूब चुराऊगा
कदम के पेड़ में चढूंगा
कूद कूद कर खेलुगा
गोपीयो को नाच नचाउगा
सबका प्यारा मैं कान्हा बनूंगा
सुदामा बनेगा मेरा सच्चा दोस्त
जो मेरे‌साथ रहेगा
अम्मा कृष्ण कन्हैया बना दो

रचनाकार
अंजली तिवारी मिश्रा जगदलपुर छत्तीसगढ़





[30/08, 11:06 pm] 
डा. सुशील✔️✔️ सागर: महागुरु थे मेरे कन्हैया.... महागुरु 

कभी सूरदास ने एक स्वप्न देखा था, कि रुख्मिनी और राधिका मिली हैं और एक दूजे पर निछावर हुई जा रही हैं,। कल्पना कीजिये कि कैसा रहा होगा वह क्षण जब दोनों ठकुरानियाँ मिली होंगी। दोनों ने प्रेम किया था। एक ने बालक कन्हैया से, दूसरे ने राजनीतिज्ञ कृष्ण से। एक को अपनी मनमोहक बातों के जाल में फँसा लेने वाला कन्हैया मिले, और दूसरे को मिले थे सुदर्शन चक्र धारी, महायोद्धा कृष्ण।
      कृष्ण राधिका के बाल सखा थे, पर राधिका का दुर्भाग्य था कि उन्होंने कृष्ण को तात्कालिक विश्व की महाशक्ति बनते नहीं देखा। राधिका को न महाभारत के कुचक्र जाल को सुलझाते चतुर कृष्ण मिले, न शिशुपाल का वध करते बाहुबली कृष्ण मिले।
      रुख्मिनी कृष्ण की पत्नी थीं, महारानी थीं, पर उन्होंने कृष्ण की वह लीला नहीं देखी जिसके लिए विश्व कृष्ण को स्मरण रखता है। उन्होंने न माखन चोर को देखा, न गौ-चरवाहे को। उनके हिस्से में न बाँसुरी आयी, न माखन।
      कितनी अद्भुत लीला है, राधिका के लिए कृष्ण कन्हैया थे , रुख्मिनी के लिए कन्हैया कृष्ण थे। पत्नी होने के बाद भी रुख्मिनी को कृष्ण उतने नहीं मिले कि वे उन्हें "तुम" कह पातीं। *आप से तुम तक की इस यात्रा को पूरा कर लेना ही प्रेम का चरम पा लेना है।* रुख्मिनी कभी यह यात्रा पूरी नहीं कर सकीं।
     राधिका की यात्रा प्रारम्भ ही *'तुम'* से हुई थीं। उन्होंने प्रारम्भ ही *"चरम"* से किया था। शायद तभी उन्हें कृष्ण नहीं मिले।
     कितना अजीब है न! कृष्ण जिसे नहीं मिले, युगों युगों से आज तक उसी के हैं, और जिसे मिले उसे मिले ही नहीं।
     तभी कहा गया है कि कृष्ण को पाने का प्रयास मत कीजिये। पाने का प्रयास कीजियेगा तो कभी नहीं मिलेंगे। बस प्रेम कीजिये, जीवन भर साथ निभाएंगे कृष्ण। कृष्ण इस सृष्टि के सबसे अच्छे मित्र हैं। राधिका हों या सुदामा, कृष्ण ने मित्रता निभाई तो ऐसी निभाई कि इतिहास बन गया।
                    राधा और रुख्मिनी जब मिली होंगी तो रुख्मिनी राधा के वस्त्रों में माखन की गंध ढूंढती होंगी, और राधा ने रुख्मिनी के आभूषणों में कृष्ण का बैभव तलाशा होगा। कौन जाने किसे क्या मिला या नहीं मिला। *सब कुछ कहाँ मिलता है मनुष्य को... कुछ न कुछ तो छूटता ही रहता है।*
                 जितनी चीज़ें कृष्ण से छूटीं उतनी तो किसी से नहीं छूटीं। कृष्ण से उनकी माँ छूटी, पिता छूटे, फिर जो नंद-यशोदा मिले वे भी छूटे। संगी-साथी छूटे। राधा छूटीं। गोकुल छूटा, फिर मथुरा छूटी। कृष्ण से जीवन भर कुछ न कुछ छूटता ही रहा। कृष्ण जीवन भर त्याग करते रहे। *हमारी आज की पीढ़ी जो कुछ भी छूटने पर टूटने लगती है, उसे कृष्ण को गुरु मान लेना चाहिए।* जो कृष्ण को समझ लेगा वह कभी अवसाद में नहीं जाएगा। कृष्ण आनंद के देवता है। कुछ छूटने पर भी कैसे खुश रहा जा सकता है, यह कृष्ण से अच्छा कोई सिखा ही नहीं सकता।
आपको श्रीकृष्ण जन्माष्टमी की हार्दिक बधाई और शुभकामनाएं 🙏🌹🙏
[30/08, 11:20 pm] 
सरोज लोडाया कवि: माखन चोर

बुलाते सब मुझे गोपाल 
सदा करता हूँ गो पालन
मैं हूँ यशोदा नंद किशोर
 मैं करता हूँ सदा शोर
 लगाई मोर पंख सिर पर 
पितांबर वसन बदन पर
खेलता हूँ मुरली बजाते
मैं गोपियों के संग -संग
चढा है सब को भक्ति रंग
ब्रज देश का बालक मैं
कहलाता हूँ गोवर्धन मैं
देवकी वसुदेव का सुपुत्र 
तोडा़ मामा कंस कुतंत्र
सखा के साथ चला मैं
यमुना तट पर खेला मैं
मीरा के प्रभु मैं प्रेम मय
दुनिया में सब आनंद मय।

डाॉ. सरोजा मेटी लोडाय।

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