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Akhil Bharati Anshika Manch ke block per Aaj dinank 26 ko sab padhe Chitra per Rachna aur Chitra ka per preshit prashnon ka padhakar Anand len Alka Pande Mumbai


इमली - 

पेड की डाली पर लटक लटक लहराती इमली 
खट्टी -मीठी सबके मुख में पानी लाये इमली ।।

कच्ची पक्की इमली दोनों काम आती । 
माँ को ला कर देते वो चटनी बनाती ।।

बचपन में पेड़ों पर लटक लटक कर तोड़े इमली । 
दाँत खट्टे कर हमें सताती इमली ।।

इमली बच्चे खाते बड़े चाव से चटकारे ले । 
बडे देखते मूहं लटका के दांत साथ न दे ।।

पैडों पर लगी इमली गाँव की सैर कराये । 
शहरों में कहीं नज़र न आये इमली के पेड नैन रोये ।।

इमली ज़्यादा न खाना होंगे फोड़े फुंसी । 
बचपन में कहती रहती हमारी दोनों मौसी ।।

डॉ अलका पाण्डेय मुम्बई

🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴🔴


ब्रीज किशोर: इमली ओह खट्टी खट्टी डाली मे झुलती कितनी सुन्दर है।
डाली पर झुलती देख कर भी मुँह मे पानी आ गया है।

तुम्हें देख प्यारा बचपन याद आया बस्ते मे छुपा कर लाना।
चुपके से इमली बीन कर नमक चुरा कर स्कूल मे खाना।

बचपन मे छोटा डंडा फेक कर कुद कुद कर इमली तोड़ना
पिता जी या किसी बडे के आ जाने पर घर भाग जाना।


अरी डाल पर लटकती इमली
तुझे देख मन ललचाया।
लेकिन बिना दाँत इमली हाथ ली पर खाँ नही पाया।

हे पेड़ पर लटकती इमली तुने गाँव का सैर करा दिया।
बचपन की याद दिलाया फिर
वापस बुढ़ापा याद आया।

वैसे तो इमली नुकसान करती है बहुत सारे.रोग हो. जाते है।
लेकिन बचपन मे बच्चे.इमली बहुत खाते खिलाते है 

स्वरचित 
   बृजकिशोरी त्रिपाठी
   गोरखपुर, यू.पी
[26/08, 10:55 am] 
चंदा 👏डांगी: $$ चित्र आधारित रचना $$                     
           $$ इमली $$

इमली के स्वाद से नही है कोई अंजान
खट्टा मे मिठास ही है इसकी पहचान 
बच्चों से बड़ों तक सभी इसके मुरीद 
चटनी इसकी है सारे खाने की शान
पैड़ पर देखते ही इमली 
टपकती है सबके मुंह से लार 
तोड़े बिना रूकता नही किसी का हाथ
कर देती है सबके खट्टे दांत
स्वाद ही नही सेहत की है खान 
दक्षिण भारत की है ये विशिष्ट पहचान 
पत्ते भी इसके खुशबूदार 
बनाओ चटनी इसकी भी मजेदार 
आयुर्वेद मे है इसको खाने की मनाई 
फिर भी खाने से इसको
 अपनेआप को रोक न पाए कोई 
🥓🥓🥓🥓🥓🥓🥓
चन्दा डांगी रेकी ग्रैंडमास्टर 
रामटेकरी मंदसौर मध्यप्रदेश
[26/08, 12:42 pm] 
स्नेह लता पाण्डेय - स्नेह: नमन पटल
आज का विषय -चित्राधारित रचना

याद आ गया चित्र देखकर 
बचपन की जानी पहचानी इमली।
नमक लगाकर खाते इसको
स्कूल के पास से खरीदकर इमली।

माँ दादी थीं मना करतीं,
मत खाना बच्चों ज्यादा इमली।
पर ये कहाँ मानने वाला,
कदम ठिठकते देखकर इमली।

लगता देख कर कितना सुंदर
हरे पत्तों के संग लटकी कितनी इमली।
मुँह में आ जाता है पानी,
दिख जाती यदि कहीं पर इमली।

कच्ची इमली तो भाई कर देती
दाँत बड़े बड़ों के खट्टे।
पर चटखारे ले लेकर
खूब मजे से खाते बच्चे।

कच्ची इमली पक्की इमली
चटनी बहुत बनती अच्छी।
सांभर की जान है मीठी इमली।
इसके बिना वह फीकी लगती।

गुण-अवगुण मत देखो इसके,
कभी-कभी ले खाओ इमली।
पेड़ है इसका हरियाला प्यारा,
जिस पर लटक इतराती इमली।

स्नेहलता पाण्डेय 'स्नेह'
[26/08, 1:25 pm] 
रवि शंकर कोलते क: गुरुवार दिनांक २६/८/२१
विधा**"***** कविता
 विषय *"""*#***इमली****#
                     ^^^^^^^^
देख खट्टी मीठी इमली मन ललचाए ।
बच्चोंकी टोली तो इसपे लपक जाए ।।
टूट पड़ते पेड पे तोड़ने लेकर पत्थर ।
नमक मिर्च लगाके खूब मजेमें खाए।।१

बूढ़े बच्चे जवान खाते हैं इमली ।
चटकारे लेके मस्त दबाते है इमली ।।
कच्ची खानेका मजा कुछऔर ही है ।
जहां मिले पेड़ हथियाते हैं इमली ।।२

इमली तो खाने का स्वाद बढ़ाती है ।
बिन इसके गर्भवती रह न पाती है।।
इमली गुडकी चटनी को सब मांगते ।
यह भोजन में चार चांद लगाती है।।३

प्रा रविशंकर कोलते
     नागपुर
[26/08, 1:31 pm] 
विजेन्द्र मोहन बोकारो: चित्र पर आधारित कविता

विषय:-- *इमली के पेड़*

पोता- पोती मेट्रो शहर से,
बोकारो मेरे पास आए हुए है।

 मेरा घर शहर से दूर गांव में है,,
 वहां एक बगीचा है मैं रोज सुबह 
 टहलने जाया करता हूं।

उस में एक कोठी है, जिसे इमली
 कोठी कहा जाता है, गांव वाले कहते हैं रानी साहिबा ने इसे अपनी बेटी के लिए 
बनवाई, चूंकि उसे इमली बहुत पसंद था।

चलो मुझे भी दिखाओ दादू
शाम को शहर न जाकर मेरे साथ
चलना, कर लो दोस्ती Ok.।

देखो! यह इमली के पेड़ हमसे भी ज्यादा बुढ़ा है, छोटी-छोटी पत्तियों वाला छाया गहरी करता है।

बच्चे पकड़ कर झुमते पतली डंडी नहीं टूटती इसकी कोई भी।

लगी है इमली ऊपर में सब को लार टपकती, बच्चे दौड़े आते नीचे, पत्थर खूब चलाते, इमली के नीचे गिरने पर दौड़ कर उठाकर खाते....!

अपने चीये एक एक करके जेबी में भर लेते, फिर उनको दो- दो फाड़ कर के चंग
अष्ट चल लेते.....!

बगीचे के रखवाला पॉलिथीन में ढेर सारा इमली दे कर बोला बच्चों को बहुत पसंद है घर की स्त्रियां भी खाएंगे ले लो। पैसा देने पर बोला मेरा आशीर्वाद है बच्चों के बहुत खुश हुए।।

टारटरिक अम्ल की धारक इमली उपयोगी है।
संतुलित आहार हमारा इसके बिना नहीं है.....!!
 
विजयेन्द्र मोहन।
[26/08, 1:37 pm]
 वीना अचतानी 🧑🏿‍🦽: वीना अचतानी 
मंच को नमन चित्र पर आधारित रचना *
विषय ******ईमली ******
कभी ईमली सी खट्टी 
कभी गुड़ सी मीठी
याद आती है वो
शरारत बचपन की
मेरे आँगन में लगा 
वह ईमली का पुराना पेड़
दादा जी से भी बूढ़ा पेड़ 
अब तक याद है मुझे
इमली का था जो पेड़ 
भूली नहीं वो बात 
 पत्थर फेंक तोड़ते ईमली
में होता बड़ा स्वाद
वो बेबाक बचपन 
खा कर ईमली 
बीज गाड़ देते थे मिट्टी में
मेरा एक दोस्त ईमली लाया
अब तो उम्र के इस दौर में 
दाँत दगा दे जाते
कितना भी गुड़ मिलाओ
पर खा नहीं पाते
ईमली से खट्टे रिश्ते
आज क्यो हो गए हैं 
जो साथ थे अब
वो दूर क्यों हो गए हैं ।।।
स्वरचित मौलिक 
वीना अचतानी 
जोधपुर ।।।।।
[26/08, 1:42 pm] 
Nirja 🌺🌺Takur: अग्निशिखा मंच
तिथि- २६-८-२०२१
विषय - चित्र पर कविता

पेड़ में लटक-लटक ,हवा में झूम झूम। 
मुझे ललचाती इमली रानी घूम-घूम। 

हरी हरी इमली देखते और ललचाते
बच्चे मुझे पत्थर मार गिराते। 

कहती हूंँ एक बार खा कर तो देखो ,
 दांत खट्टे करती अच्छे अच्छों के। 

चटनी बनती मेरी चटाकेदार
गुड़ के संग खट्टी मीठी धमाकेदार। 

सांबर में मैं पड़ती स्वाद उसका बढ़ाती
चाट की मैं जान हूंँ, रसम की मैं शान हूंँ

गोली टाॅफी मेरी बनती,
 सबके दिलों में राज करती। 

नीरजा ठाकुर नीर
पलावा डोम्बिवली
महाराष्ट्र
[26/08, 1:56 pm] 👑
सुषमा शुक्ला: मंच को नमन 
चित्र आधारित रचना
इमली,,

खट्टी मिट्ठी गद्दर इमली,,
मनभावन चटकीली इमली
नमक मिर्च लगाकर खाते
मधुर स्वाद से भर जाते।

कबीट इमली दोनों खाई,,
 स्कूल में खूब धूम मचाई,, रीसेस में मस्ती छाई,,,
 मधुर इमलिया मन भाई।

पेड़ों पर चढ़ गए कभी हम,,, कभी पत्थर से गिराई इमली,, जमीन पर ढूंढ ढूंढ कर ,,,
झोले में भर लाई इमली।

बचपन में जब खाई इमली,,
दांतो ने खूब साथ दिया,,
 अब इमलिया खाने में,,,
दांतो ने साथ छोड़ दिया।

स्मृति की पोटली,,
हर पल याद आए,,
जीवन हे खट्टा मीठा ,,
यही तो हमको समझाए,,l

सुषमा शुक्ला स्वरचित रचना इंदौर
[26/08, 1:59 pm] 
शेभारानी✔️ तिवारी इंदौर: चित्र पर आधारित कविता
कच्ची इमली खट्टी होती है
पकने पर मीठी हो जाए
सबके मन को ललचाए
नाम से मुंह में पानी आ जाए

लटकी इमली हवा में झूलती
बच्चे , बड़ों के मन को भाती ,
बचपन का दिन याद आता है
पत्थरों से इमली तोड़ी जाती।

इमली का गूदा निकाल कर खाओ
चटनी अचार भी इसका बनाओ,
खाने का स्वाद भी बढ़ा देती है,
चटकारे ले लेकर इसको खाओ।

इमली सा रिश्तों में खटास न हो बिगड़ गये फिर मीठे न हो पाएंगे,
चाहे कितना भी मीठा मिलाओ,
 फिर भी वे सुधर नही पाएंगे।

श्रीमती शोभा रानी तिवारी इन्दौर
[26/08, 2:13 pm]
 सरोज दुगड गोहाटी: *अग्निशिखा काव्य मंच*
* चित्र देख कविता लिखो *
* २६/८/२०२१ गुरूवार *
   
इमली बच्चों की संगी- साथी ,
आधी छूटी में खरीदी खाई जाती !
नमक मिर्च मसाले में लिपटाकर ,
बड़े मजे से चुस-चुस खाई जाती 

 जुबान पर इमली का नाम 
मूँह से सबके टपकती लार !
जब भी चाट का दौना चाटे ,
इमली का स्वाद मन को भाये !

जब नव वधु छुपकर इमली खाये,
घर में खुशी की लहर छा जाये !
अजी सुनते हो की हाँक लगाकर ,
 फोन पर सबको खूब बधाई बाँटे !

बच्चे बुढ़े जवान सब एक समान ,
पानीपुरी खाने को हरदम तैयार !
भैया थोड़ा खट्टा तीखा खिलाओ ,
थोड़ी इमली पानी में ओर मिलाओ !

दांँत खट्टे करना यूँही नहीं कहते ,
अच्छे अच्छों को सबक सिखाते !
नौं रसों में एक खट्टा रस मानां जाता ,
इमली का प्रमुखता से नाम लिया जांता ! 

मौलिक स्वरचित 
 सरोज दुगड़
खारूपेटिया 
असम 
🙏🙏🙏
[26/08, 2:25 pm] 
वीना अडवानी 👩: इमली
*****

आड़ी टेड़ी मोटी पतली
लम्बी भूरी चपटी सी
दिखा के सौंदर्य रुप अपना
सबको खींच रिझाती हो।।
देख तुम्हें स्वादिष्ट समझ खाया
खट्टा मुंह इतना कर जाती हो।।
इतनी गुणकारी हो तुम सब्जी
दाल का स्वाद बढ़ाती हो।।
काली, लाल, हरे रुप मे अपनी
गुणवत्ता अपनी झलकाती हो।।
खट्टी, मीठी, तीखी चटपटी 
दुनिया तुम्हें बनाती है।।
पड़ी जो तुम समोसे के ऊपर 
समोसे का स्वाद बढ़ाती हो।।
 मेरे मन को जुबान को भाने वाली
तुम इमली कहलाती हो।।

वीना आडवानी तन्वी
नागपुर, महाराष्ट्र
*******************
[26/08, 2:36 pm] 
👑मीना त्रिपाठी: *इमली (चित्र आधारित)*

बचपन की कितनी ही न जाने
यादों में है खट्टी - मीठी इमली!
पिज़्ज़ा, बर्गर, और समोसों ने
छीन लिया बचपन वाली इमली!

नमक - मिर्च लगाकर देते जब
इमली वाले भैया दोनो में इमली!
आ जाती मुस्कान होठों पर ऐसे
जैसे कोई खजाना हो इमली!

*मीना गोपाल त्रिपाठी*
*अनुपपुर ( मध्यप्रदेश )*
*26 / 8 /2021*
[26/08, 2:47 pm] 
रजनी अग्रवाल जोधपुर: शीर्षक -" इमली"

1. इमली का बूटा, बूटे पे इमली, 
 कुछ मीठी कुछ खट्टी इमली , 
आओ री सखियां तोड़े इमली , 
हिलमिल खायें खट्ठ मीठी इमली , कुछ-कुछ अपनी जेब में भरले , 
कुछ बांधे ओढनी में अपनी , 
भागे कूदे धूम मचाए छुप-छुप खाएं हिलमिल इमली , इमली का बूटाका बूटा,,,,,,

2. इमली के पेड़ पर झूला डाले , 
ऊंची उड़ान ले तोड़े इमली , 
मुंह में पानी भर लाई इमली , 
उचके तोड़े बिखराय लें इमली , 
छीन झपट कर खाएं ले इमली , 
  नमक मिर्च से चटकाए ले इमली ,
 पेड़ों की डाली ढेर है इमली , 
इमली का बूटा,,,,,,,

स्वरचित कविता 
   रजनी अग्रवाल
  जोधपुर






[26/08, 3:15 pm] 
Anshu Tiwari Patna: देख इमली मन बड़ा हर्षाये
 खट्टी मीठी यह सबको बड़ा लुभाये
 बचपन की यादें ताजा हुई 
 कैसे मजे करते थे सखियों संग
 बड़े बुजुर्ग हमेशा ही कहते 
स्वास्थ्यकर नहीं है यह
 पर पर परम आनंद आता था 
इमली की पार्टी करने में
 आज भी मुंह में पानी भर आया
 देख ये मनभावन इमली
  खट्टी मीठी दिल को
 लुभाने वाली इमली ।
 धन्यवाद 
अंशु तिवारी पटना
[26/08, 3:38 pm]
 ओम 👅प्रकाश पाण्डेय -: ईमली ( चित्र पर आधारित कविता) --- ओमप्रकाश पाण्डेय
जब हम सब बच्चे हुआ करते थे
बाग में अक्सर खेला करते थे
सबका प्यारा ईमली का पेड़ था
कच्ची कच्ची ईमली खाते
नमक लगा कर ईमली खाते...... 1
बड़ी इठलाती है ईमली
पेड़ों पर यह टंगीं रहती है
पेड़ इसका बहुत बड़ा होता
छोटी छोटी पत्तियाँ होतीं
बहुत खट्टी होती कच्ची ईमली..... .. 2
माँ इसकी चटनी बनाती
नमक पुदीना भी मीलाती
कभी कभी चीनी भी मीलाती
हम सब खाते भोजन के साथ
भोजन का स्वाद फिर बढ़ जाता........ 3
पकी हुई ईमली भी खाते
बीन बीन कर नीचे पेड़ों के
कुछ खट्टा व कुछ होता मीठा
कभी कभी स्कूल के गेट पर
एक बुढ़िया बेचती टोकरी में लेकर......... 4
( यह मेरी मौलिक रचना है ---- ओमप्रकाश पाण्डेय)
[26/08, 3:45 pm] 👑
पदमाकाक्षी शुक्ला: 🙏🌹अग्नि शिखा मंच🌹🙏
🙏🌹जय अम्बे🌹26/8/21🌹🙏
🙏🌹चित्र पर आधारित रचनाः *इमली* 🌹🙏 

मीना देख, पेड़ पर लटके इमली । 
भाभी ने आज मंगवाई इमली।। 
स्कूल के लंच ब्रेक से भागते है। 
पेड़ पर चढकर, तोड़ना है इमली।। 

इमली की चटनी घर में बनाउंगी। 
संभार रसम भेल पुरी में डालुंगी ।।
इमली गुड़ की चटनी है मजेदार। 
खट्टा मीठा स्वाद लगे धमाकेदार।। 

खट्टी मीठी चटनी, तीखा पानी । 
याद करें तो आए मुँह में पानी ।।
रगडा पेटीस उपर,डालो चटनी। 
अच्छी नहीं लगे भेल बिना चटनी।।

पत्थर से तोड़ना हमें है इमली। 
झोली में घर लेकर जाए इमली।। 
रस से भर जाएगा मुँह में पानी। 
नमक मिर्च लगाकर खाना इमली ।।

*पद्माक्षि शुक्ल*
[26/08, 3:46 pm] 
कुम कुम वेद सेन: चित्र पर आधारित
इमली का पेड़

मैं हूं इमली का पेड़
मेरे फल कच्चे में होते खट्टे
पक जाए तो हो जाए मीठे खट्टे
मुझे देख सब के मुंह में आती पानी
मुझसे बढ़ जाती स्वाद
गोलगप्पे खाओ या चाट
मेरे बिना सजती नहीं स्वाद
खट्टी मीठी चटनी मुझसे बनती
दही बड़े के सिर पर मैं सजती
लंच हो या डिनर मेरे बिना अधूरी

नवविवाहित महिला खाए इमली
सासु मां का मन हर्षाए
नया मेहमान घर में आए
खुशियों से झोली भर जाए

पेड़ पर जब मै लटकी रहूं
मुझे तोड़ने को मारे डंडे
बच्चे ढेले मार मार तोड़े
मैं सब की मार झेलूं
कोई बचाए नहीं मुझे
पर मेरा माली मुझे तोड़े
हौले हौले धीरे धीरे

मैं हूं इमली का पेड़
स्वाद गुणों का हूं खजाना
नियमित सेवन मुझे करो
रोगों से निजात मिले

कुमकुम वेद सेन
[26/08, 4:01 pm]
 वैष्णवी Khatri वेदिका: इमली

बचपन में हम खाते इमली,
है खट्टी खट्टी मीठी इमली।
चटकारे ले खाते इमली।
नमक लगा के खाते इमली।।

दोस्तों संग हम चले जाते।
 झोली भर के इमली लाते।
फिर करें तोल हैं तोलाई।
किसके हिस्से कितनी आई।।

मैंने घर में पेड़ लगाया।
उस पर इमली लटकी भाया।
छोटी-छोटी पत्ती वाला।
छाया गहरी लगता काला।।

डाली पर हम झूला बाँधें।
ऊँची ऊँची पींगे साधें।।
मिलजुल कर सब सखियाँ गाती।
मीठी बोली धूम मचाती।।

बीजों को जेबों में भरते।
उनकी दो फाड़ें हैं करते।।
बीज से खेलते हम खेलें।
टार्टरिक अम्ल इमली लेलें।।

वैष्णो खत्री वेदिका
जबलपुर
[26/08, 4:06 pm]
 कुंवर वीर सिंह मार्तंड कोलकाता: 🌺गुरुवार -26/ 8/ 2021

🌺विषय- चित्र पर कविता
हर चित्र कुछ कहता है 

लटकी देख पेड़ पर इमली
***********************
लटकी देख पेड़ पर इमली 
मुंह में आया पानी।
याद आ गए बचपन के दिन
तब की सब शैतानी।

कैसे पेड़ों पर चढ़ चढ़कर
इमली तोड़ा करते।
लटक लटक पतली डालो पर
अपनी जेबें भरते।

लाकर देते मां को तो 
पहले तो डांटा करती।
किंतु शाम को चटपट चटनी
बना खिलाया करती।

दही बड़े हों याकि पकौड़े
याकि समौसे नीके।
बिन इमली की चटनी के
लगते सब के सब फीके।

पानी पूड़ी याकि पड़ाके
याकि गोल गप्पे हों
इमली के पानी बिन सारे
कभी नहीं अच्छे हों।

दक्षिण भारत में इमली बिन
चले न कोई काम।
तरह तरह के व्यंजन बनते
उससे सुबहो शाम।

खट्टे नीबू और आंवले
खट्टे हैं खुबानी।
आम नाशपाती खट्टे पर
इमली सबकी रानी।

© कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड, कोलकाता
[26/08, 4:18 pm] 
Anita 👅झा: चित्र आधारित रचना 
*बचपन लौट आया है *

प्रकृति की हरियाली है 
बचपन लौट आया है 
हरे भरे ताल तलैया है 
लोर डुबके ख़ूब नहायें

पेड़ो की हरियाली में 
लटक ,मटक इमली रानी है 
इमली खट्टी मीठे बेर 
मुँह में आया पानी है 

बचपन फिर से लौटा है 
गुलेल मार इमली गिराये 
नमक मिर्च डाल लाटा है 
बंदर देख खी खी करते है 

लालीपाप सा सुन्दर बनायें 
चाट चाट कर मन ललचाये 
चटखारे ले सबको लुभायें
पापा मम्मी की डाँट खायें 

आम्रकुंज कोयल कुक है 
पीपल छाँव झूले संगी है 
चहक़े महकें मन मतवाला 
बानर बाल सेना की टोली है 

प्रकृति प्रेम हरियाली है 
नव रूप शृंगार किया है 
शबरी की कुटिया 
का रूप निखर आया है 

ममता की छांव में 
हरियाली बन आई 
घर आगंन मधुबन 
ख़ुशियाँ बन छाई 

अनिता शरद झा मुंबई
[26/08, 4:25 pm] 
अंजली👏 तिवारी - जगदलपुर: चित्र देखकर
खट्टी मीठी इमली
पेड़ों पर लदी है
लोगों को ललचाने
फल तो फल 
पत्ते भी इसके काम आते।
 डगाल इसके पतले
मगर मारो तो
 निशान पड़ जाते
कमजोर दिखती है
 पर है सख्त
 जिन्दगी भी हमारी इमली
की तरह है खट्टी मीठी
कभी दुख कभी सुख
कभी खुशी कभी ग़म
ना रहे कोई भी हमेशा 
एक जैसा हरदम।
अंजली तिवारी मिश्रा जगदलपुर छत्तीसगढ़
[26/08, 4:26 pm] 
स्मिता धारसारीया Mosi: छवि विचार 

इमली का वो स्वाद ,
दिलाता बचपन की याद ,
कैसे दोना भर इमली खाते  
इसकी चटनी का चटकारे लेते 

बीज इसकी भूनकर खाते ,
गोलगप्पे संग इसका ,
पानी हम पीते , 
लू से हमको ये बचाती ,
इसके बैगर कोई चाट न भाती ,
खाने का ये स्वाद बढाती ,
खट्टी है ,मीठी भी है , 
बड़ी अनोखी है ,

स्मिता धिरासरिया
[26/08, 4:27 pm] 
रानी अग्रवाल: २६-८-२०२१. गुरुवार
चित्र पर कविता_विषय_इमली
इमली के बूटे लटक रहे,
मस्त हवा में मटक रहे,
देख मुंह में आया पानी,
खाना चाहे, इनको "रानी"।
उचक_उचक कर थक गई,
हाथ ना आई, रानी पक गई,
पेड़ पर ना चढ़ सकती है,
तोड़ कर ना खा सकती है।
फिर जमी पे नज़र दौड़ाई,
गिरी इमली बहुत सी पाई,
मुंह ने तुरंत लार बहाई,
झाड़_पोंछकर इमली खाई।
वाह री इमली! तेरी बात,
जीभ मीठी, खट्टे हुए दांत,
किट_किट बजे,चटखोरे लिए,
चटपटे स्वाद के मजे लिए।
सांभर का तू स्वाद बढ़ाए,
असली रसम भी तू बनाए,
खट्टी_मीठी चटनी बनती स्वाद,
लोग खाते दे_देकर तेरी दाद।
इसमें नमक लगाकर खाओ,
चटपटे चटखारे खूब पाओ,
हर घर में गली_गली,
सबके घर में रहती इमली।
स्वरचित मौलिक रचना___
रानी अग्रवाल, मुंबई,२६.८.२१.


[26/08, 4:31 pm] 
डा. बैजेन्द्र नारायण द्िवेदी शैलेश🌲🌲 - वाराणसी - साझा: आदरणीय मंच को नमन
"कृष्ण जन्माष्टमी आ रही है"
+++++++++++
 यह ऐसा त्यौहार है, जिसमें हमारे भारत का हर वह व्यक्ति जो कृष्ण से प्रेम रखता है। अति प्रसन्नता पूर्वक स्थिति की प्रतीक्षा करता है। और इसमें किए जाने वाले सभी तैयारियों और उत्सव की विभिन्न गतिविधियों में सहर्ष सहभागिता करता है।
कई दिन पहले से लोग श्री कृष्ण के बाल गोविंद स्वरूप की झूले पर झूलती हुई मूर्ति की कल्पना करते हैं।
उनके नए पुराने वस्त्रों का प्रक्षालन करते हैं नवीन वस्तुओं की व्यवस्था की जाती है। क्या क्या बनेगा, उन को भोग लगाने के लिए प्रसाद फल पंजीरी,कौन कौन से कार्यक्रम होंगे।? सभी उत्साहित रहते हैं।
कहीं श्रीमद्भागवत की कथा तो कहीं रामचरितमानस का पाठ। कहीं पर कृष्ण लीला का मंचन तो कहीं भजनों का आयोजन। कार की चित्र प्रतियोगिताएं और डायन के विभिन्न स्वरूपों का प्रदर्शन।
भारतीय जनमानस अपने कृष्ण से इतना अधिक जुड़ना चाहता है कि उनके जीवन के प्रत्येक पक्ष को मन वाणी में उतार लेना चाहता है। ऐसा हो भी क्यों ना, कृष्णा नहीं तो आश्वासन दिया है ---"ये यथा मां प्रपद्यंस्ते,तान् तथैव भजाम्यहम्।।"
क्यों मुझे जिस भाव से स्मरण करता है मैं भी उसी उतनी ही लगाव से अपने साथ स्मृतियों में जोड़ कर रखता हूं।
वाह रे कृष्ण !तुमने अधर्म का विनाश करके प्रेम का साम्राज्य स्थापित किया ।सभी के मन को तुष्ट किया। आदरणीय से माता बहनों के लज्जा की रक्षा का पाठ पढ़ाया। दुर्योधन जैसे आतताई और उसके अनर्थ मचाने वाले भाइयों का दमन कराया।गीता के अठारह अध्याय न आप द्वारा प्रदत्त न केवल भारत बल्कि सम्पूर्ण मानवजाति के लिए शाश्वत श्रेय का साधन है।
"
मैं धर्म की रक्षा के लिए धरा पर आया, और उसकी रक्षा करूंगा चाहे जिस प्रकार।"
आपने उस का संपादन किया। यह भी आश्वासन दिया आश्वासन दिया जिसका कोई नहीं होगा उस का मैं योग क्षेम वहन करुंगा।
ऐसी कृष्ण की क्यों न कोई प्रतीक्षा करें भादो की काली अंधियारी रात में हमारा तारणहार आ रहा है।
#######
डॉ ब्रजेन्द्र नारायण द्विवेद्वी शैलेश वाराणसी
[26/08, 4:39 pm] रामेश्वर गुप्ता के के: ।इमली का पेड़। 
ये देखो इमली का पेड़,
पकी लगी हुई इमली है।
जो कोई इन्हें देखता है
पाने की होड़ लगी है।।
ये दखो................. 1
कोई उसे पत्थर मारे, 
कोई डाल हिलाता है। 
इमली सारी पकी पकी, 
हाथ कोई न आये है।। 
ये देखो................. 2 
बच्चों को बहुत भाती, 
चटकारे लेकर खाते है। 
स्कूल के मध्याह्न में, 
सब बच्चे इसको खाते हैं।। 
ये देखो................3 
इमली पेड़ नहीं चढना, 
कच्ची डाल ये होती है। 
इसे देख नहीं ललचाना, 
इमली खटटी होती है।। 
ये देखो................. 4
स्वरचित, 
रामेश्वर प्रसाद गुप्ता ।
[26/08, 4:57 pm] 
♦️तारा प्रजापति - जोधपुर: अग्निशिखा मंच
26/8/2021 गुरुवार
विषय- चित्राधारित रचना

खट्टी- मिट्ठी,
 टेढ़ी- मेढ़ी,
हरी डाल पर,
लटकी इमली।
देखो भूरी 
कच्ची इमली,
बच्चों के मन,
भाती इमली।
बड़ो को भी,
 ललचाती है,
मुँह में पानी,
लाती इमली।
गोलगप्पों के साथ
इमली का पानी,
इमली की चटनी
बनाती मेरी नानी।
बड़े ही काम,
 आती है इमली।
बीज इमली के,
 हम सेक के खाते।
अष्टा चंगा में इसकी,
गोटियां बनाते।
बड़ी उपयोगी,
 हितकारी इमली।
बड़े-बड़े गुण रखती है,
बहुत फ़ायदेमंद,
होती है इमली।
कच्ची इमली
पक्की इमली,
लगती सबको,
 अच्छी इमली।
नमक लगा कर,
के बार मैंने भी
स्कूल में खायी इमली।
                       तारा 'प्रीत'
                     जोधपुर (राज०)
[26/08, 6:07 pm] 
निहारिका 🍇झा: नमन अग्निशिखा मंच 
🙏🙏🌹🌹
विषय:-चित्राभिव्यक्ति
दिनाँक;-26/8/2021
🥜 इमली 🥜
लगी हुई इस डाल पे देखो
खट्टी और रसीली इमली
देख देख मन ललचाता है
इसकी ओर खिंचा जाता है।
स्वाद भरी रसीली इमली।
हमको लगती प्यारी इमली।।
लगी हुई गुच्छो में है यह
झुकी हुई डाली में इमली
स्वाद निराला लगे है इसका 
मन को है भरमाती इमली।।
चटनी सांभर सब मे डालो
स्वाद निराला इसका पा लो
चटखारे दिलवाती इमली।
हमको है ललचाती इमली
हमको लगती प्यारी इमली।।

निहारिका झा,🙏🌹
[26/08, 6:11 pm] 
डा. बैजेन्द्र नारायण द्िवेदी शैलेश🌲🌲 - वाराणसी - साझा: चित्र पर आधारित रचना
इमली

एक साथ में गुंथी हुई है
हरे
भरे पत्तों के बीच
छुई मुई सी छिपी हुई है
 किंतु रही है सबको दीख।
खट्टी खट्टी मीठी मीठी स्वार्थ छिपा है इसके दल में चाहे उसको आज ही खाओ या प्रयोग कर लेना कल में। स्वाद अनूठा बहुत है इसका खाने को सब है ललचाते कुछ तो केवल चित्र देखते
जो श्रम करते हैं वह पाते।।
इसके पत्ते काम है आते चोट किसी को जब लग जाती पानी में उबालकर इसको अम्मा हाथ पैर पर लगाती।
बहुत काम की चीज है इमली कभी आप जब पा जाओगे कच्ची हो या पक्की प्रेम से चटकारे लेकर खाओगे।
-----------
डॉ ब्रजेन्द्र नारायण द्विवेद्वी शैलेश वाराणसी 9450186712
[26/08, 6:16 pm] सुरेन्द्र हरडे: अग्निशिखा मंच को नमन
विषय:-चित्रपर आधारित रचना

जब हम बच्चे थे
पेड से इमली तोड़ते थे ।
कच्ची इमली खाने में
मजा आता है।। १।।

ईमली सबको पसंद आती है
लड़कियां बड़े चाव से खाती है
हर घर में ये रसोई में होती है 
ये खाद्य पदार्थों का स्वाद बढ़ाती है।।‌२।।

ये दक्षिण भारतीयोंको
 बहुत पसंद हैं
इसे खाकर सारे 
हो जाते दंग है
बिना इमली के तो 
रसम बनता ही नहीं 
इमली दिखाती अपना 
रंग ढंग है ।।३।।

लडके से ज्यादा लड़कियों 
पसंद है खट्टी इमली नहीं
रोख पाती अपने आप को।
सहेलियां साथ नमक लगाकर 
आंखें बंद करके खाती इमली।
इमली से भोजन में आता है स्वाद
खट्टा मिठ्ठी बड़ी काम की है यह
इमली।।४।।

कवि सुरेंद्र हरडे 
नागपुर
दिनांक २६/०८/२०२१
[26/08, 6:19 pm] +91 70708 00416: इमली का पेड़
****************
इमली का यह पेड़ पुराना
लगता है बड़ी लुभावना
छोटी-छोटी हरी पत्तीवाला
सुखद लगती छाया इसकी
बच्चे पकड़ झूमते-गाते
इसकी पतली डंडी
कभी नहीं टूटती मजबूत डंडी
लग जाती जब इमली ऊपर
सबके मुंह में लार टपकती
बच्चे आते दौड़ पेड़ के नीचे
छोटे-छोटे पत्थर चलाते
इमली टूट नीचे गिर जाती
बच्चे दौड़ इमली उठाते खूब मजे में खाते
टारंटरिक अम्ल की धारक 
है इमली बहुत उपयोगी
इसके बिना नहीं है
संतुलित आहार हमारा
खट्टे-मीठे स्वाद से भरा
 लोगों का मन नहीं भरता

डॉ मीना कुमारी परिहार
[26/08, 6:53 pm] आशा 🏆🏆जाकड इन्दौर: चित्र पर आधारित कविता


पेड़ पर लटक रहे इमली के गुच्छे
भविष्य में सुनहरे दिन होंगे अच्छे
इमली से बचपन याद आने लगा 
बरबस ही मन क्यूँ ललचाने लगा।


पेड़ों पर चढ़कर खूब इमली तोड़ते थे 
खुद खाते थे, दूसरों को खिलाते थे।
शिकायत होती तो बाबा डांटतेभी थे 
कभी- कभी छड़ी से वे मारते भी थे।

 
कभी इमली अपने घर भी ले जाते थे 
फिर अम्मां से हम चटनी बनवाते थे।
चटनी से खाने का स्वाद बढ़ जाता था
फिर बाबा को हम पर दुलार आता था।

अम्मा कहती इमली नुकसान करती है ,
पर खाने में इसी से तो स्वाद बढ़ती है।
इसलिए दोस्तों इमली अवश्य खाओ 
लेकिन बस आवश्यकतानुसार खाओ ।
.
आशा जाकड़
[26/08, 6:56 pm]
 श्रीवल्लभ अम्बर: 🌹 अग्नि शिखा काव्य मंच🌹
 विषय ,,,,इमली,,
 चित्र आधारित रचना,,,

   खट्टे स्वाद का भान कराती इमली।
   चाहे जिसमें इसे मिलादो स्वाद बदल दे इमली।
 
  वृक्ष पर लद कद लगती इमली।
 अपनी और आकर्षित करती इमली।

 महिलाओं को खास पसंद है इमली।
 लड़कियों की स्कूल पे बिकती इमली।

  कचोरी,समोसे, चाट का रंग जमाती इमली।
  मेहंदी में मिला दो रंग च ढा ती इमली ।

 अच्छे अच्छे के दांत खट्टे करती इमली।
 देख के ही मुंह में पानी लाती इमली।

  मुंह में रखते ही आंख चलाती इमली।
 एसा लगता खाने वाला आंख मार रहा है।

  पर ऐसा नहीं स्वाद इमली का सर चढ़ रहा है।

🙏 श्रीवल्लभ अम्बर🙏
[26/08, 7:03 pm] Chandrika Vyash Kavi: नमन मंच
दिनांक --: 27/8/2021
विषय-: इमली

गर्मी की महारानी इमली 
इ से इमली पाठ पढा़ती
 इ से इमली कितनी खट्टी 
मुझको भाती इसकी चटनी !

व्यंजनों का स्वाद बढ़ाने वाली 
किसे पसंद नहीं होती है इमली
 बच्चे बूढ़े सभी चटकारे लेते
बिन तेरी चटनी भी
स्वादिष्ट न होती इमली !

स्वास्थ्यवर्धक होती तू इमली 
अनेक विटामिन और फाइबर देती 
इमली कितने रोगों का 
उपचार तू करती 
आम के आम गुठली के दाम कहते
 तेरे बीज भी गुणकारी होते 
 वजन घटा इम्युनिटी बढ़ाती 
तेरे छाल की पेस्ट भी इमली 
चेहरे का सौंदर्य बढ़ाती ! 

यादें भी होती खट्टी मिट्ठी
बिल्कुल तेरे जैसी इमली
देख तुझे मुहँ में पानी आता
चटकारे ले लेकर आज भी खाता !
 भूल न पाऊंगा तुझको मैं इमली
 स्वादों की महारानी है तु
बिन तेरे सांभर न बनता
कैसे रहें हम बिन तेरे इमली! 

चंद्रिका व्यास
खारघर नवी मुंबई
[26/08, 7:53 pm] पुष्पा गुप्ता / मुजफ्फरपुर: 🌹🙏अग्नि शिखा मंच 🙏🌹
विषय:चित्र आधारित रचना 
शीर्षक: * खट्टी मीठी इमली *
विधा: कविता 
दिनांक:26/8/21
****************************************
देखो कैसे पेड़ से झूल रही इमली,
इसे देखकर मुँह मे पानी भर आता।

इसका स्वाद बड़ा अनूठा,
कभी खट्टा तो कभी मीठा।

इसकी चटनी बड़ी निराली,
खट्टे - मीठे स्वादो वाली ।

पर इसको ज्यादा खाया जाना,
एक समय बीमार हो जाना ।

इमली स्वाद का संयम सिखलाती,
और खाने का अनुपात बतलाती ।

*********************************
डाॅ.पुष्पा गुप्ता 
मुजफ्फरपुर
बिहार
🙏
[26/08, 8:21 pm] सरोज लोडाया कवि: *इमली*

बचपन के ओ दिन 
खट्टी -मीठी यादें
आते हैं आजकल 
खेलते थे आँख -माचौनी,
दोपहर में इमली कूटके
खाते थे हम सखियों के साथ
थोडा़ मिर्च,थोडा़ नमक के साथ
टक -टक करते खाते थे 
याद आते ही आता है पानी
इमली के बूटा कितना मीठा
नज़र हमारी लगी रहती पेड पर
मजा़ आता था खाने में।

सरोजा मेटी लोडाय


[26/08, 4:31 pm] डा. बैजेन्द्र नारायण द्िवेदी शैलेश🌲🌲 - वाराणसी - साझा: आदरणीय मंच को नमन
"कृष्ण जन्माष्टमी आ रही है"
+++++++++++
 यह ऐसा त्यौहार है, जिसमें हमारे भारत का हर वह व्यक्ति जो कृष्ण से प्रेम रखता है। अति प्रसन्नता पूर्वक स्थिति की प्रतीक्षा करता है। और इसमें किए जाने वाले सभी तैयारियों और उत्सव की विभिन्न गतिविधियों में सहर्ष सहभागिता करता है।
कई दिन पहले से लोग श्री कृष्ण के बाल गोविंद स्वरूप की झूले पर झूलती हुई मूर्ति की कल्पना करते हैं।
उनके नए पुराने वस्त्रों का प्रक्षालन करते हैं नवीन वस्तुओं की व्यवस्था की जाती है। क्या क्या बनेगा, उन को भोग लगाने के लिए प्रसाद फल पंजीरी,कौन कौन से कार्यक्रम होंगे।? सभी उत्साहित रहते हैं।
कहीं श्रीमद्भागवत की कथा तो कहीं रामचरितमानस का पाठ। कहीं पर कृष्ण लीला का मंचन तो कहीं भजनों का आयोजन। कार की चित्र प्रतियोगिताएं और डायन के विभिन्न स्वरूपों का प्रदर्शन।
भारतीय जनमानस अपने कृष्ण से इतना अधिक जुड़ना चाहता है कि उनके जीवन के प्रत्येक पक्ष को मन वाणी में उतार लेना चाहता है। ऐसा हो भी क्यों ना, कृष्णा नहीं तो आश्वासन दिया है ---"ये यथा मां प्रपद्यंस्ते,तान् तथैव भजाम्यहम्।।"
क्यों मुझे जिस भाव से स्मरण करता है मैं भी उसी उतनी ही लगाव से अपने साथ स्मृतियों में जोड़ कर रखता हूं।
वाह रे कृष्ण !तुमने अधर्म का विनाश करके प्रेम का साम्राज्य स्थापित किया ।सभी के मन को तुष्ट किया। आदरणीय से माता बहनों के लज्जा की रक्षा का पाठ पढ़ाया। दुर्योधन जैसे आतताई और उसके अनर्थ मचाने वाले भाइयों का दमन कराया।गीता के अठारह अध्याय न आप द्वारा प्रदत्त न केवल भारत बल्कि सम्पूर्ण मानवजाति के लिए शाश्वत श्रेय का साधन है।
"
मैं धर्म की रक्षा के लिए धरा पर आया, और उसकी रक्षा करूंगा चाहे जिस प्रकार।"
आपने उस का संपादन किया। यह भी आश्वासन दिया आश्वासन दिया जिसका कोई नहीं होगा उस का मैं योग क्षेम वहन करुंगा।
ऐसी कृष्ण की क्यों न कोई प्रतीक्षा करें भादो की काली अंधियारी रात में हमारा तारणहार आ रहा है।
#######
डॉ ब्रजेन्द्र नारायण द्विवेद्वी शैलेश वाराणसी
[26/08, 4:39 pm] रामेश्वर गुप्ता के के: ।इमली का पेड़। 
ये देखो इमली का पेड़,
पकी लगी हुई इमली है।
जो कोई इन्हें देखता है
पाने की होड़ लगी है।।
ये दखो................. 1
कोई उसे पत्थर मारे, 
कोई डाल हिलाता है। 
इमली सारी पकी पकी, 
हाथ कोई न आये है।। 
ये देखो................. 2 
बच्चों को बहुत भाती, 
चटकारे लेकर खाते है। 
स्कूल के मध्याह्न में, 
सब बच्चे इसको खाते हैं।। 
ये देखो................3 
इमली पेड़ नहीं चढना, 
कच्ची डाल ये होती है। 
इसे देख नहीं ललचाना, 
इमली खटटी होती है।। 
ये देखो................. 4
स्वरचित, 
रामेश्वर प्रसाद गुप्ता ।
[26/08, 4:57 pm] ♦️तारा प्रजापति - जोधपुर: अग्निशिखा मंच
26/8/2021 गुरुवार
विषय- चित्राधारित रचना

खट्टी- मिट्ठी,
 टेढ़ी- मेढ़ी,
हरी डाल पर,
लटकी इमली।
देखो भूरी 
कच्ची इमली,
बच्चों के मन,
भाती इमली।
बड़ो को भी,
 ललचाती है,
मुँह में पानी,
लाती इमली।
गोलगप्पों के साथ
इमली का पानी,
इमली की चटनी
बनाती मेरी नानी।
बड़े ही काम,
 आती है इमली।
बीज इमली के,
 हम सेक के खाते।
अष्टा चंगा में इसकी,
गोटियां बनाते।
बड़ी उपयोगी,
 हितकारी इमली।
बड़े-बड़े गुण रखती है,
बहुत फ़ायदेमंद,
होती है इमली।
कच्ची इमली
पक्की इमली,
लगती सबको,
 अच्छी इमली।
नमक लगा कर,
के बार  मैंने भी
स्कूल में खायी इमली।
                       तारा 'प्रीत'
                     जोधपुर (राज०)
[26/08, 6:07 pm] निहारिका 🍇झा: नमन अग्निशिखा मंच 
🙏🙏🌹🌹
विषय:-चित्राभिव्यक्ति
दिनाँक;-26/8/2021
🥜 इमली  🥜
लगी हुई इस डाल पे देखो
खट्टी और रसीली इमली
देख देख मन ललचाता है
इसकी ओर खिंचा जाता है।
स्वाद भरी रसीली इमली।
हमको लगती प्यारी इमली।।
लगी हुई गुच्छो में है यह
झुकी हुई डाली में इमली
स्वाद निराला लगे है इसका 
मन को है भरमाती इमली।।
चटनी सांभर सब मे डालो
स्वाद निराला इसका पा लो
चटखारे दिलवाती इमली।
हमको  है ललचाती इमली
हमको लगती प्यारी इमली।।

निहारिका झा,🙏🌹
[26/08, 6:11 pm] डा. बैजेन्द्र नारायण द्िवेदी शैलेश🌲🌲 - वाराणसी - साझा: चित्र पर आधारित रचना
इमली

एक साथ में गुंथी हुई है
हरे
भरे पत्तों के बीच
छुई मुई सी छिपी हुई है
 किंतु रही है सबको दीख।
खट्टी खट्टी मीठी मीठी स्वार्थ छिपा है इसके दल में चाहे उसको आज ही खाओ या प्रयोग कर लेना कल में। स्वाद अनूठा बहुत है इसका खाने को सब है ललचाते कुछ तो केवल चित्र देखते
जो श्रम करते हैं वह पाते।।
इसके पत्ते काम है आते चोट किसी को जब लग जाती पानी में उबालकर इसको अम्मा हाथ पैर पर लगाती।
बहुत काम की चीज है इमली कभी आप जब पा जाओगे कच्ची हो या पक्की प्रेम से चटकारे लेकर खाओगे।
-----------
डॉ ब्रजेन्द्र नारायण द्विवेद्वी शैलेश वाराणसी 9450186712
[26/08, 6:16 pm] सुरेन्द्र हरडे: अग्निशिखा मंच को नमन
विषय:-चित्रपर आधारित रचना

जब हम बच्चे थे
पेड से इमली तोड़ते थे ।
कच्ची इमली खाने में
मजा आता है।। १।।

ईमली सबको पसंद आती है
लड़कियां बड़े चाव से खाती है
हर घर में ये रसोई में होती है 
ये खाद्य पदार्थों का स्वाद बढ़ाती है।।‌२।।

ये दक्षिण भारतीयोंको
 बहुत पसंद हैं
इसे खाकर सारे 
हो जाते  दंग है
बिना इमली के तो 
रसम बनता ही नहीं 
इमली दिखाती अपना 
रंग ढंग है ।।३।।

लडके से ज्यादा लड़कियों 
पसंद है खट्टी इमली नहीं
रोख पाती अपने आप को।
सहेलियां साथ नमक लगाकर 
आंखें बंद करके खाती इमली।
इमली से भोजन में आता है स्वाद
खट्टा मिठ्ठी बड़ी काम की है यह
इमली।।४।।

कवि सुरेंद्र हरडे 
नागपुर
दिनांक २६/०८/२०२१
[26/08, 6:19 pm] +91 70708 00416: इमली का पेड़
****************
इमली का यह पेड़ पुराना
लगता है बड़ी लुभावना
छोटी-छोटी हरी पत्तीवाला
सुखद  लगती छाया इसकी
बच्चे पकड़ झूमते-गाते
इसकी पतली डंडी
कभी नहीं टूटती मजबूत डंडी
लग जाती जब इमली ऊपर
सबके मुंह में लार टपकती
बच्चे आते दौड़ पेड़ के नीचे
छोटे-छोटे पत्थर चलाते
इमली टूट नीचे गिर जाती
बच्चे दौड़  इमली उठाते खूब मजे में खाते
टारंटरिक अम्ल की धारक 
है इमली बहुत उपयोगी
इसके बिना नहीं है
संतुलित आहार हमारा
खट्टे-मीठे स्वाद से भरा
 लोगों का मन नहीं भरता

डॉ मीना कुमारी परिहार
[26/08, 6:53 pm] आशा 🏆🏆जाकड इन्दौर: चित्र पर आधारित कविता


पेड़ पर लटक रहे इमली के गुच्छे
भविष्य में सुनहरे दिन होंगे अच्छे
इमली से  बचपन याद आने लगा 
बरबस ही मन क्यूँ ललचाने लगा।


पेड़ों पर चढ़कर खूब इमली तोड़ते थे 
खुद खाते थे,  दूसरों को खिलाते थे।
शिकायत होती तो बाबा डांटतेभी थे 
कभी- कभी छड़ी से  वे मारते भी थे।

 
कभी इमली अपने घर भी ले जाते थे 
फिर अम्मां  से हम चटनी बनवाते थे।
चटनी से खाने का स्वाद बढ़ जाता था
फिर बाबा को हम पर दुलार आता था।

अम्मा कहती इमली नुकसान करती है ,
पर खाने में  इसी से तो स्वाद बढ़ती है।
इसलिए दोस्तों इमली  अवश्य खाओ 
लेकिन बस आवश्यकतानुसार खाओ ।
.
आशा जाकड़
[26/08, 6:56 pm] श्रीवल्लभ अम्बर: 🌹 अग्नि शिखा काव्य मंच🌹
 विषय ,,,,इमली,,
 चित्र आधारित रचना,,,

   खट्टे स्वाद का भान कराती इमली।
   चाहे जिसमें इसे मिलादो स्वाद बदल दे इमली।
 
  वृक्ष पर लद कद लगती इमली।
 अपनी और आकर्षित करती इमली।

 महिलाओं को खास पसंद है इमली।
 लड़कियों की स्कूल पे बिकती इमली।

  कचोरी,समोसे, चाट का रंग जमाती इमली।
  मेहंदी में मिला दो रंग च ढा ती इमली ।

 अच्छे अच्छे के दांत खट्टे करती इमली।
 देख के ही मुंह में पानी लाती इमली।

  मुंह में रखते ही आंख चलाती इमली।
 एसा लगता खाने वाला आंख मार रहा है।

  पर ऐसा नहीं स्वाद इमली का सर चढ़ रहा है।

🙏 श्रीवल्लभ अम्बर🙏
[26/08, 7:03 pm] Chandrika Vyash Kavi: नमन मंच
दिनांक --: 27/8/2021
विषय-: इमली

गर्मी की महारानी इमली 
इ से इमली पाठ पढा़ती
 इ से इमली कितनी खट्टी 
मुझको भाती इसकी चटनी !

व्यंजनों का स्वाद बढ़ाने वाली 
किसे पसंद नहीं होती है इमली
 बच्चे बूढ़े सभी चटकारे लेते
बिन तेरी चटनी भी
स्वादिष्ट न होती  इमली !

स्वास्थ्यवर्धक होती तू इमली 
अनेक विटामिन और फाइबर देती 
इमली कितने रोगों का 
उपचार तू करती 
आम के आम गुठली के दाम कहते
 तेरे बीज भी गुणकारी होते 
 वजन घटा इम्युनिटी बढ़ाती 
तेरे छाल की पेस्ट भी इमली 
चेहरे का सौंदर्य बढ़ाती ! 

यादें भी होती खट्टी मिट्ठी
बिल्कुल तेरे  जैसी इमली
देख तुझे मुहँ में पानी आता
चटकारे ले लेकर आज भी खाता !
 भूल न पाऊंगा तुझको मैं इमली
 स्वादों की महारानी है तु
बिन तेरे सांभर न बनता
कैसे रहें हम बिन तेरे इमली! 

चंद्रिका व्यास
खारघर नवी मुंबई
[26/08, 7:53 pm] पुष्पा गुप्ता / मुजफ्फरपुर: 🌹🙏अग्नि शिखा मंच 🙏🌹
विषय:चित्र आधारित रचना 
शीर्षक: * खट्टी मीठी इमली *
विधा: कविता 
दिनांक:26/8/21
****************************************
देखो  कैसे पेड़ से झूल रही इमली,
इसे देखकर मुँह मे पानी भर आता।

इसका  स्वाद  बड़ा  अनूठा,
कभी खट्टा  तो कभी  मीठा।

इसकी चटनी बड़ी निराली,
खट्टे - मीठे   स्वादो   वाली ।

पर इसको ज्यादा खाया जाना,
एक  समय  बीमार  हो  जाना ।

इमली स्वाद का संयम सिखलाती,
और खाने  का अनुपात  बतलाती ।

*********************************
डाॅ.पुष्पा गुप्ता 
मुजफ्फरपुर
बिहार
🙏
[26/08, 8:21 pm] सरोज लोडाया कवि: *इमली*

बचपन के ओ दिन 
खट्टी -मीठी यादें
आते हैं आजकल 
खेलते थे आँख -माचौनी,
दोपहर में इमली कूटके
खाते थे हम सखियों के साथ
थोडा़ मिर्च,थोडा़ नमक के साथ
टक -टक करते खाते थे 
याद आते ही आता है पानी
इमली के बूटा कितना मीठा
नज़र हमारी लगी रहती पेड पर
मजा़ आता था खाने में।

सरोजा मेटी लोडाय


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