Type Here to Get Search Results !

अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच के ब्लॉक पर आज 9/8/ 2021 के विषय बाल गीत "भालू " पर रचनाकारों की रचनाएं पढ़ें ! डॉ अलका पांडे मुंबई




भालू - बालगीत 

भालू आया भालू आया 
लचक लचक के भालू आया 
छम छम करके नाच दिखाता 
मादरी ने उसको खूब नचाता 
बच्चों का मन बहलाता 
भालू उछल कूद खूब करता 
बच्चे मज़ा ले ले ताली बजाते 
सबको प्यारा लगता भालू 
काला -काला बडे -बडे बालों वाला 
तेज़ी से चलता है भालू 
मतवाली चाल हैं ।।
पानी में तैर जाता , मछलियों को पकड़ता भालू । 
एकांत में बैठ नींद लेता भालू 
गोल गोल आँखें प्यारी 
बच्चों को हँसाता भालू 
भालू आया भालू आया 
लचक लचक के भालू आया 
मदारी ने खूब नचाया 
बच्चों के संग नाचा भालू 
उठा पटक भी बहुत की 
मदारी ने भालू की शादी कराई 
भालू ने पहना सूट और उस पर टाई 
देख भालू की दुल्हन शर्माई 
उसने पहना सुदंर सा गाऊन 
भालू देख उसे चकराया 
मादरी से बोला जल्दी करना ब्याह 
मैं तो देख इसे , इस पर लट्टू हो गया 
यह मेरी घरवाली , 
अब जिंदगी का आयेंगा मजा 
हनीमून पर इंग्लैंड जायेगे 
हवाई जहाज़ की सैर कराऊँगा 
जंगल में बंगला बनाऊँगा 
मादरी ने फटकार लगाई 
खेल ख़त्म पैसा हज़म 
भालू आया भालू आया 

डॉ अलका पाण्डेय मुम्बई



🐻🐻🐻🐻🐻🐻🐻🐻
🌺आज विषय - भालू
🌺 बाल गीत 
🐻🐻🐻🐻🐻🐻🐻🐻
भालू वाला गांव में आया
डम डम डम डम ढोल बजाया
🐻
दौड़ दौड़ कर बच्चे आए
भालू देख बहुत सुख पाए
🐻
चला मदारी आगे आगे
बच्चे उसके पीछे भागे
🐻
बड़े चौक में जब वो आया
उसने आसन वहां जमाया।
🐻
घेर लिया बच्चों ने उसको
बोला, बच्चो पीछे खिसको।
🐻
उसने फिर डुगडुगी बजाई
बंसी की भी तान सुनाई।
🐻
भालू को थोड़ा टहलाया
डंडे से उसको धमकाया।
🐻
फिर उसको पहनाए घुंघरू
बोला अब चल हाे जा शुरू।
🐻
भालू लगा नाचने छम छम
बजा साथ में डमरू डम डम।
🐻
लचक लचक कर नाचा खूब
बच्चे नहीं रहे थे ऊब।
🐻
कहा मदारी बच्चो भाई
अब तो लाओ खेल दिखाई।
🐻
पैसा हो तो पैसा लाओ
चावल गैहूं ही ले आओ।
🐻
उसने चादर एक बिछाई
लगा बोलने लाओ भाई।
🐻
अनाज लाए पैसा लाए
भालू को कुछ खाने लाए।
🐻
सबको दिखा दिखाकर खेल
गया मदारी अपनी गैल।
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
© कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड, कोलकाता
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️



९-८-२०२१

बाल गीत

आज मदारी आया है।
काला भालू लाया है।

बच्चे सारे हुए इकट्ठे।

दुबले पतले हट्टे- कट्टे।

डम- डम- डम -डम डमरू बाजा।

नाच रहा है भालू राजा।

मीठा गाना गाया है।

आज मदारी आया है।।१।।

बोल जमूरे बोल- बोल।

दोनों आंँखें खोल - खोल।

अब कुर्सी पर चढ़ना है।

मुझसे कुश्ती लड़ना है।

भालू भी गुर्राया है।

आज मदारी आया है।।२।

भालू दाँव लगाता है।

कंधों पर चढ़ जाता है।

ढप- ढप -ढोल बजाता वो।

छम -छम नाच दिखाता वो।

सबके मन को भाया है।

आज मदारी आया है।।३।।


विष्णु शर्मा'हरिहर'




🌹🙏अग्नि शिखा मंच 🙏🌹
विषय: * भालू *
विधा : बाल कविता 
दिनांक:9/8/21
***************************************
देखो भालू वाला आया,
काला-काला भालू लाया।

ढम-ढम,ढम-ढम ढोल बजाता
भालू को वह खूब नचाता ।

दौड़े- दौड़े बच्चे आए ,
उनके संग बूढे भी आए ।

पहन पैजनी भालू नाचा,
खुश हुए चुन्नु के चाचा ।

थिरक-थिरक कर नाच दिखाए,
और बदले मे पैसे पाए ।

**************************************
स्वरचित एवं मौलिक रचना 
रचनाकार ~डॉ पुष्पा गुप्ता
 मुजफ्फरपुर
 बिहार 
 🙏

**बालगीत **


     **विषय :-भालू **

मेरा भालू मेरा सच्चा दोस्त
हर बच्चा मानता उसे दोस्त,

कोई उसे रॉकी बुलाता
तो कोई उसे चिंटू बुलाता,

तरह तरह के नामों से बुलाते
पर कभी ना उसे भालू बुलाते,

बच्चे मन के सच्चे होते है
वो खिलोने को भी दोस्त कहते,

पर सबसे प्यारा भालू ही लगता
तभी टेड्डी बियर अच्छा लगता,

मन की हर बातें उसे बताते
जैसे कोई अपने सखा को बताते,

निर्जीव में भी जान डाल देते बच्चे 
तभी भालू को अपना मानते बच्चे

हेमा जैन (स्वरचित )


अग्निशिखा मंच

विधा - बालगीत
शीर्षक - भालू राजा

 भालू राजा चले बाजार
 बन ठन कर होकर तैयार
 सूट बूट और टाई पहन कर 
आंख पर चश्मा और
सर पर हैट पहन कर
 आ गया भालू बीच बाजार 
देखा चूहा बेच रहा था पापड़ और अचार
  चूहा बोला भालू से
 दादा यहां तुम आए किस काज 
ले लो आलू कांदा या 
चाय पकौड़ी खा लो आज
स्वरचित बालगीत
नीलम पाण्डेय गोरखपुर उत्तर प्रदेश


विषय -भालू 

जगर- मगर, जगर- मगर
भालू आया भालू आया 
छमा छम नाच दिखाया 
मदारी ने भी खूब नचाया।

भालू के बड़े बड़े बाल 
गर्मी से होता बुरा हाल 
चिंकी पिंकी जल्दी आओ 
भालू को मूंगफली खिलाओ।

मदारी डमरु बजा- बजा 
भालू को खूब नचाता है 
राजू काजू पैसे लाओ 
मदारी भैया को दे दो ।

मदारी उदास होकर बोला
सरकार ने भी रोक लगा दी है 
पशु पक्षियों को न नचाओ
 पशुओं पर रहम खाओ ।

मेरा धंधा हो गया चौपट 
अब कैसे चलाऊं परिवार 
भालू को जंगल छोड़ आऊंगा 
बचपन से पाला मोह त्याग दूंगा।

डा अंजुल कंसल"कनुप्रिया"
9-8-21


नमन मंच 
भालु (बाल कविता )
भालु आया , भालु आया ,
मदारी संग भालु आया ,
चुनु मुन्नू सबके मन को भाया ,
नये नये ,करतब दिखाता ,
सबके मन को हर्षाता ,
सर्कस में ये नाच दिखाता ,
जब भी मदारी डमरू बजाता ,
उछल कूद ये मचाता ,
देख बच्चे इसे शोर मचाते ,
दौड़े भागे इसके पीछे आते ,
देख तमाशा ताली बजाते 
शहद देख ये खुश हो जाता 
दिखने में होता गोल मटोल ,
जंगल में रहना इसको भाता , 
सब बतियाते इससे प्यार के बोल ,
भालु आया ,भालु आया ,
काला सफ़ेद भालु आया 

स्मिता धिरासरिया ,बरपेटा रोड





देखो भालू आया
******************
आओ कल्लू आओ मल्लू
चलो देखें मदारी है आया
चलो चलें हम घर के बाहर
देखें हम भालू का तमाशा
देखो भालू आया भालू आया
काला लम्बे बालों वाला आया
मदारी लिये है एक बड़ा झोला
उसे जमीन पर रख बोला
फिर भालू को डंडा दिखलाया
और बजाया डमरू डमा-डम
लगा नाचने भालू छमा-छम
कहने लगे टुन्नु मुन्नु वाह भालू भाई
क्यों करते मदारी संग हाथा-पाई
खूब नाचो मस्ती संग भालू भाई
पैसे बरसने लगे खन-खनाखन
मदारी ने रखा जेब में फौरन
बढ़ा मदारी फिर आगे-आगे
भीड़ लिये बच्चों के पीछे-पीछे
कभी झपट कर हमें ड्रामे
कभी नाच कर हमें हंसाये

 डॉ मीना कुमारी परिहार





"भालू"
द्रोपती साहू "सरसिज"महासमुन्द, छत्तीसगढ़
शीर्षक: "भालू"
विधा-बालगीत (हिन्दी)
          *****
जंगल जंगल घूमता रहता,
तेंदू खाता है भालू।
चार चिरौंजी पा ही लेता,
तू तो है बहुत चालू।।

नखरा तेरा रहता ज्यादा,
तेंदू कच्चा खा लेता।
इंसानी फिर रोना रोता,
पास जाते मार देता।।

बेर देखते डटता खाने,
खाते खाते थक जाता।
प्यास लगी तो तू झट जाकर,
बस्ती पोखर घुस आता।।

काले काले बालों से मुँह,
हरदम ढंका रहता है।
नाई के घर में तुम जाकर,
क्यों न काटने कहता है।।

पाल लेते हैं कभी तुमको,
लिए मदारी चलता है।
खेल दिखाकर गाँव-गाँव में,
पेट तुम्हारा पलता है।।
       *******
पिन-493445
Email;dropdisahu75@gmail.com





अग्निशिखा मंच 
तिथि : 9/8/21 
विषय : भालू (बाल गीत)

देखो देखो भालू आया,
उसको भालू वाला लाया।
कैसे-कैसे नाच नचाया,
भालू ने करतब दिखलाया।

करतब भालू के देख के मुन्ना ,
मुन्नी संग है वो मुस्काया ।
मां से ले एक रूपया आया ,
तब भालू ने नाच दिखाया ।

शहद बड़ा ही प्रिय भालू को ,
शहद की खातिर पेड़ चढ़पाया।
साहस में होती है शक्ति,
शक्ति को इच्छा में जगाया।

काला काला भालू देखो ,
सबके मन को है ये भाया ।
उछल उछल कर नाचा भालू, मदारी ने जब डुगडुगी बजाया ।

देखो देखो भालू आया ,
उसको भालू वाला आया ।
सब लोगों ने देखा भालू ,
और फिर खूब मौज मनाया ।।

©️®️पूनम शर्मा स्नेहिल ☯️


अग्नि शिखा मंच
भालू-बालगीत
भालू आया भालू आया,
काला काला भालू आया।
बच्चों आयो देखने खेल,
पैर में बांध घुँघरू आया।।
भालू....................... 1 
छोलू मोलू बबलू आओ,
भालू का खेल देखने आओ।
मजा खेल का देखने आओ,
साथ मदारी का खेल पाओ।।
भालू.......................... 2 
भालू की नाक कितनी लम्बी,
तुम भी आओ देखो सब भी। 
जोर से मदारी डमरू बजाये,
खेल देखने मजा है वीरू जी।। 
भालू........................ 3 
छम छम नाचे भालू कालू है,
मजा देखने में खूब आये है।
बच्चों घर से पैसे लेकर आये, 
खूब जोर वह डमरू बजाये।। 
भालू......................... 4
स्वरचित, 
रामेश्वर प्रसाद गुप्ता ।
09-08-2021




सोमवार दिनांक***९/८/२१
विधा ****बालगीत
विषय*** #""""भालू"""""#
                    °°°°°°°°

भालू तेरे हैं लंबे घने काले बाल ।
तनसे भारी भरकम है मस्त चाल।।
मदारी के हुक्म से तू तरह तरह के।
नाच दिखाता है तू तेरा है कमाल।।१

भालू तुझे पसंद हैआलू सही बोल
खा खा के तू हो गया गोल मटोल
तुझे देख कर तो ऐसे लगता है
किसी बँड पार्टीका है तू बडा ढोल।।२

सुन गोलू शहर से अच्छा है जंगल
हे जीवन यहांका बड़ाकुशल मंगल
तेरे शहरआया है कोरोना भयानक
और होते रहते है खून मोर्चे दंगल।।३

गोलू पूछे तुम कैसे मोटू बन जाते ।
तुम कौनसी चक्कीकाआटा खाते।
तुम दिखते काले लगाते नहीं साबुन ।
लगता है यार तुम रोज नहीं नहाते।।४

पहले सर्कस में हम काम करते थे ।
हमको सदापिंजरे में बंद रखते थे।
हम इंसानों से अच्छे हैं वन्य प्राणी।
हम मजबूर थे हंटर की मार सहते थे।‌५

प्रा रविशंकर कोलते
      नागपुर ३०




जय मां शारदे
**********
अग्नि शिखा मंच
दिन-सोमवार
दिनांक-9/8/2021

बालगीत- *भालू*

*भालू* बजा रहा है बाजा। 
दूल्हा बने हैं चूहे राजा ।
एक,दो,तीन,चार,पांच, छः,सात।
कितनी लम्बी है बारात।
*भालू* को मच्छर ने काटा।
उछल कूदकर भालू भागा।
गिर गया वहां पर उसका बाजा ।
चिल्ला रहे थे चूहे राजा।

रागिनी मित्तल
कटनी,मध्य प्रदेश

९-८-२०२१.
अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच
विषय_भालू, विधा_बालगीत
बच्चा कहिन बच्चिन से,
हमरी सुनहु,कहैं सच्चिन ते,
हमार गली आइलै एक भालू,
उनकर मालिक का नाम कालू,
संग रहिलै भालू की भालिन,
पहिने लाल रंग कै रेशमी शालू।
दुनौ चाले एइसे मटक_मटक,
उनकर रीछन बारि रहैं लटक,
कालू बजैलै जोर ढोल ढमढम,
भालू_भालिन जोर नाचै छमछम।
भागभाग कै आए लईका लईकिन
उनकर माई हुं आगईलै संगिन,
मदारी भालून कै उछारा_कूदाया,
डमडम करकै उनका खूब नचाया
कहैं भालिन से दुल्हन बन जाओ,
ऊ बैठ गई,ओढकै लाल शालू,
कहै भालू से_दुल्हा बन जाओ,
पहिने कोट,टाई लगैईलै भालू।
भालू_भालिन दूनौ आए करीब,
वरमाला पहनाईकै,बनाए नसीब,
फिर भालू ताली बजैईलै,
भालिन उनकर साथ निभैईलै।
अब कालू कहिन देखे खेल ऐसा,
चलो, दे द्य़ो आटा,चावल,पैसा,
सबहैं ल्याये खूब दिये कालू कै,
कोई हाथ लगा देखा भालू कै।
भालिन_भालू_कालू आगे गईलै,
बच्चन_माई अपन घर लौट गईलै।
स्वरचित मौलिक बालगीत__
 रानी अग्रवाल,मुंबई,९.८.२०२१.षं




*अग्निशिखा मंच को नमन*
आज की विधा बालकविता
   विषय-- *भालू*
बालू पहले मदारी लेकर आता था यह सर्कस में दिखता अब नहीं दिखता।

चाचा के पीछे पड़े चिंटू पिंटू गोलू चाचा हमें चिड़ियाघर का भालू दिखाओ हमें अभी तक नहीं देखा
भालू सभी बच्चे बड़े खुश थे।१। 

चिड़ियाघर घर देखने गए चाचा 
के साथ टिकट निकालकर प्रवेश 
चिंटू, पिंटू ,गोलू बडे खुश थे
देखने मिलेगा भालू ।।२।।

जब पिंजरे के पास गए, देखा भालू काला-काला मोटा-मोटा,
लंम्बे लम्बे काले काले काले बालों
वाला भालू, सो रहा था।।२।।

देख देख रहे थे बच्चे पिंजरे में कब उठेंगा भालू बच्चे तालियां, शिटी बजा रहे उठ उठ जल्दी उठ
 देखने आऐ भालू तूझे उठ।।३।।

कालू भालू उठ कर खड़ा हुआ
पिंजरे के पास पैर पर खड़ा हुआ
देख रहा था बच्चों को बच्चो ने
मोबाइल से तस्वीरें खीची।।४।।

तंग मत करो भालू को,
अब उसका भोजन का हो गया 
समय,ऐसा था काला भालू
चाचा ने सब चिड़ियाघर देखा
शेर, हाथी, मोर हिरण।।५।।

चाचा ने कहा ,"चलो बच्चे घर
चलते चिड़ियाघर घर हो रहा बंद
बच्चे बड़े खुश थे आपस में बतियाने लगे। खुशी बच्चे आये
घर ,क्यु की देख लिया था भालू।५।

सुरेंद्र हरडे
नागपुर
दिनांक ०९/०८/२०२१

भालू ( बाल गीत) --- ओमप्रकाश पाण्डेय
मम्मी मुझको पैसे दे दो
बाहर भालूवाला आया है
डमरू बजा बजा कर 
वह भालू का खेल दिखाता है
भालू बहुत ही प्यारा है........ 1
काला काला यह होता है
बड़े बड़े बाल हैं इसके
इसका लम्बा सा मुंह होता
कभी कभी गुर्राता है
भालू बहुत ही प्यारा है....... 2
भालूवाला जब कहता है
तब यह नाच दिखाता है
तरह तरह से पांव हिलाता
कुर्सी पर भी बैठता है
भालू बहुत ही प्यारा है.......... 3
हम भालू पर तो बैठेंगे
घूम घाम कर आयेगें
अगर इसको न छेड़ो तो
यह बहुत सीधा साधा है
भालू बहुत ही प्यारा है.......... 4
बड़ा ताकतवर यह होता
पेड़ों पर चढ़ जाता है
मधु मक्खी के छत्ते से
शहद निकाल कर खाता है
भालू बहुत ही प्यारा है........ 5
( यह मेरी मौलिक रचना है..... ओमप्रकाश पाण्डेय)



बालगीत
****भालू***
देखो भालू आया
झूम झूम करता 
नाच दिखाया
मदारी डमरू बजाया
सबको देख भागने लगा
मंदारी ने रस्सा कस के पकड़ा
कही छूट ना जाय हाथ से भालू 
बच्चों को काट खाये 
 छम छम नाच दिखाता भालू।
। बच्चों को इसका नाच बहुत भाता
सभी इसे पसंद करते
जहां जान गये मंदारी भालू नचा रहा है
वहीं बच्चे सरपट‌ दौड‌ भागते
अंजली तिवारी मिश्रा जगदलपुर छत्तीसगढ़
7987708655



अग्निशिखा मंच
तिथि-९-८-२०२१
विषय -भालू ( बाल गीत )

डुग डुग डुग डुग डमरु बोला,
भालू ले कर आया मदारी भोला। 
काला काला है यह ,नाम इसका कालू
बड़े बड़े हैं बाल,देखो नाच दिखाता भालू
शहद है प्रिय भोजन इसका,
शहद समान खाना नहीं दूजा। 
खाने शहद पेड़ पर चढ़ जाता भालू। 
कहते हैं गुदगुदी सब को करता भालू। 
भोला का है यह कमाई का ज़रिया। 
नाच नाच कर सबके पेट भरता। 
जंगल में था इसका घर
काटा जंगल टूटा घर। 
पूछता यह सबसे,काटा जंगल तोडा़ घर, क्यूं तुमने मुझे किया बेघर,
शहर में फिर घुस आया भालू,
भोला मदारी हाथ पड़ गया भालू। 
नाच नाच कर सबको हंसाता
पर मन ही मन है रोता भालू। 

नीरजा ठाकुर नीर
पलावा डोम्बिवली
महाराष्ट्र


बाल गीत 
*एनिमेशन फ़िल्म* 
चाचू टी .वी पर एनिमेशन् 
मूवी दिखा रहे थे ।

घर आंगन बालमन की 
कथा बोल रही थी 
दादी नानी प्यारी बातों में 
मसगुल थी 

भागम भाग मची हुई थी ।
पापा चाचू ने रोक रखा था ।
फ़िल्म देख बन्दर ,भालू 
नाच रहे थे ।

चून्नु मून्नु ने धूम मचाई ,
गिलहरी संग ऊपर नीचे 
अजब गजब खेल तस्वीर देख रहे 
बादल में उड़ते घोड़े देख रहे थे 

भालू बन्दर नाच दिखा रहे थे 
चिप्स खिला चून्नु मून्नु को 
रंगीन चश्मे का सच देख रहे थे 
बादलों में रेल चल दिखा रहे थे  

चून्नु मूनूँ हाथी को हवा में 
उड़ते देखा 
सपने सारे सच हो गये थे 
हँसी ठहाँको की दादी नानी 
परिजन संग धूम मची थी 

श्रीमती अनिता शरद झा 
रायपुर -छत्तीसगढ



भालू, बाल कविता,

   एक जमाना था,।
   मदारी भालू का दीवाना था।
   उसका घर उसी से चलता।
   उसका पेट उसी से पलता।
   कहने को भालू बड़े बड़े बालों वाला।
   पर है बहुत समझदार मतवाला।
   दिखने में खतरनाक तो लगता है।
   पर नुकसान किसिका नहीं करता है।
   बहुत शांत और समझदार है ।
  खान पान उसका शाकाहार है।
  
  मदारी का सबसे आज्ञाकारी भालू।
  उसका राजा,प्रजा ,दरबारी भालू।
  उस्ताद जमुरे के पूरे करतब करता।
   मदारी,,,, जमूरे करतब दिखाएगा।
   भालू ,,,जरूर दिखायेगा,,,।
    शादी करेगा,,, हा जरूर करेगा।
    किससे करेगा,,
    भालू,,,,हेमामालिनी से,,,
    उस्ताद,,आइने में शक्ल देखी है,,
     भालू , हा देखी है,देवानंद दिखता हूं।
     
   बड़े बड़े बालों वाला,
   लंबे लंबे दांतो वाला,
   डरावना सा भालू है।
   पर मन से बड़ा मयालू है।
    पर मन से बड़ा मयालु है।

  🙏 श्रीवल्लभ अम्बर🙏


नमन अग्निशिखा मंच 
विषय;-बालगीत(भालू)
दिनाँक;-9/8/2021
शोर मचा है गली गली में 
भालू आया !भालू आया!!
रिंकी पिंकी चिंकू मोनू
शोर मचाते आये घर मे
निकलो सोनू घर से बाहर
देख मदारी भालू लाया।
खूब तमाशा देखगें सब 
यही दिखाने भालू आया
काला मोटा भालू आया
झूम झूम कर नाच दिखाता
डंडे के संग चक्कर खाता
खुश होकर सब देते नोट
देता मदारी उसको रोट
बच्चे सब हैं ताली बजाते।
भालू ने जब खेल दिखाया भालू आया !भालू आया!!
निहारिका झा🙏🏼🙏🏼🌹🌹



भालू
-------
 एक दिन मैंने 
अपने बचपन की 
कहानी सुनाई अपने बच्चों को,
 बताया उन्हे भालू मदारी
 का नाच देख खुश होते
 कैसे हम सब,
 लाडली पिंकी ने पूछा
- क्या कोई मदारी भालू
 को ले सड़कों पर घूमता था
 छू सकते थे आप सब भालू को।
 चिड़ियाघर में देख सकते हैं 
पर छू नहीं सकते।
 मम्मी हमे ेखना है-
 मदारी का खेल,
 भालू का नाच।
 फिर क्या हमने सारा
 खेल रच डाला भालू का
 पिंकी को भालू 
गुड्डू को मदारी बनाया,
 फिर बतलाया ऐसे नाचता था
भालू दो पैरों पर ठुमक ठुमक
  मदारी ने ब्याह रचाया
 काला काला भालू गोल मटोल भालू
 घूम घूम के नाचे सब
  बच्चे भी खुश हो गए।
 खुश होकर नाचने लगे
 कोरोना काल में नया
 खेल मिला उनको 
यूट्यूब गूगल पर दिखाया
 मैंने उनको मदारी का खेल।
 वे रोज अपने दोस्तों संग
 वीडियो कॉल पर यह ।
खेल खेलने लगे बताने लगे।
 बच्चों की जिंदगी बस
 मोबाइल लैपटॉप में बंद 
होकर रह गई है।
 भालू को देख बच्चे 
ताली बजा बजा कर 
खुश हो रहे हैं बच्चों
 संग मैंने भी अपने बचपन
 की यादें ताजा कर ली।
 वाह! हमारे बचपन के
 दिन कितने सुहाने थे।
 धन्यवाद 
अंशु तिवारी पटना




आज पटल पर प्रस्तुत है विषयाधारित बालगीत**भालू
एक मदारी चौक में आया
अपने संग वह भालू लाया
मदारी ने डुगडुगी बजाई
भालू ने भी ठुमकी लगाई।
आओ बबलू आओ बबली
भालू से भालूइन कर रही चुगली
भालू ने चुप का किया इशारा
तंग उससे वह था बेचारा।
भालू को केला है भाता
भालूइन को भाये गाजर
पर दोनों का नाच देख कर
हर बच्चा ताली बजाता।
भालू है इक सीधा प्राणी
करे कभी न वह मनमानी
जैसे रखो उसी में राजी 
करता कभी नहीं नादानी।
स्वरचित**
    लीला कृपलानी

बाल गीत
विषय भालू

भालू आया भालू आया
बच्चों ने खूब शोर मचाया
मदारी के इशारों पर
नाच नाच कर खेल दिखाया।।

आगे पीछे बच्चे घूमे
मदारी ने डमरू बजाया
ठुमक ठुमक के चले भालू राजा
खेल तमाशा खूब दिखाया।।

मदारी ने जब गाना गाया
बच्चों ने खूब ठहाका लगाया
इतने में आ गए बंदर मामा
भालू ने अपना दोस्त बनाया।।
पदमा तिवारी दमोह मध्य प्रदेश
@ सर्वाधिकार सुरक्षित/ यह रचना मौलिक और स्वरचित है।



आज पटल पर प्रस्तुत है 



* अग्नि शिखा काव्य मंच *
* सोमवार ९/८/२०२१ *
* बिषय- भालू * 
* विधा- बाल गीत 

राधे का प्यारा भालू झबरा ,
लाल आँखें काले घनें बाल !
ठूमक चलता मतवाली चाल ,
जब-जब राधे डुगडुगी बजाता !
भालू की कलाबाजियाँ खाता ,
बच्चे खुश हो ताली बजाते !
भालू करता सबको नमस्ते ,
जब से शुरू हुये ओलंपिक !
देश में सोने चाँदी के मैडल आए ,
भूरा का मन मचल उठा है !
भूरा से सुनें वादा लिया है ,
मुझे भी एथलीट बनना है!
देश के लिए सोना लाना है,
मालिक आप आराम से रहनां!
मैं सोना और नाम कमाँऊंगा ,
आप मुझे प्रशिक्षित कर दो !
मैं भी ओलंपिक में जाऊंगा ,
राधे की आँखे भर आई !
झबरा भालू को झप्पी पाई !!

सरोज दुगड़ 
खारुपेटिया 
असम 
🙏🙏🙏




.नमन अग्नि शिखा मंच
     ९/०८/२०२१
    विधा ---कविता
      बिषय ---- भालू
       बाल --कविता
देखो देखो भालू आया।
 मदारी ने डमरु बजाया।
चुन्नू आओ मुन्नु आओ।
देखो भालू ने नाच दिखाया।
मुन्नी आओ क्यौ डरती हो।
रानी को देखो भालू पर.बैठी है।
भालू की कर दी ऐसी की तैसी है।
भालू भी जगंल मे रहता है।
यह है पूरा साकाहारी।
देखो ये है पूरा फलहारी।
मधु इसको सबसे प्रिय है।
मधु मख्खी से यह नही डरता।
छत्ता तोड़ कर शहद पी जाता
भालू बच्चो को नाच दिखाता।
मदारी जब डमरू बजाता।
रूपये पैसे सब पा जाता।
उसी से भालू को फल ले आता।
देखो देखो भालू आया।
मदारी ने डमरू बजाया।
स्वरचित 
बृजकिशोरी त्रिपाठी
गोरखपुर ,यू.पी

अग्निशिखा मंच
9/8/2022सोमवार
विषय- भालू (बालगीत)

भालू आया भालू आया,
देखो बच्चो भालू आया।

गली-गली वो खेल दिखाये,
बच्चो के मन को हर्षाये।
मदारी ने सबको बुलाया,
देखो बच्चो भालू आया।
भालू आया--------------

काले-काले बाल है इसके,
बड़े-बड़े नाख़ून है जिसके।
मदारी ने डमरू बजाया,
देखो बच्चो भालू आया।
भालू आया------------

काला काला मोटा भालू,
बच्चे उसको कहते कालू।
बच्चो को गले लगाया,
देखो बच्चो भालू आया।
भालू आया------------

हाथ जोड़कर करे नमस्ते,
लोटपोट हुए बच्चे हँसते।
भालू ने करतब दिखाया,
देखो बच्चो भालू आया।
भालू आया...............

बार-बार वो सिर हिलाता,
बच्चो से वो हाथ मिलाता।
मदारी ने जमघट लगाया,
देखो बच्चो भालू आया।
भालू आया...............

ठुमकता हुआ चलता है,
गिरता कभी सम्भलता है।
भालू ने नाच दिखाया,
देखो बच्चो भालू आया।
भालू आया------------
                       
                        तारा "प्रीत"
                    जोधपुर (राज०)



बाल गीत
शीर्षक -"भालू"

1. भालू आया भालू आया ,
  मोटा तगड़ा धूम मचाता , 
  डुगडुगी पर नाच दिखाता , 
 बच्चों के मन को हर्षाता , 
भालू आया भालू आया .,,,,,,,

2. भालू वाला बड़ा सयाना , 
 बच्चों को उसने बैठाना , 
 हर बच्चा भालू का दीवाना , 
 शुरू हो गया ताली बजाना , 
 भालू आया भालू आया ,,,,,,

3. दुम हिलाता मुंह फुलाता , 
  दांतो की बत्तीसी दिखाता , 
नाक से खुन खुन शोर मचाता , 
 मुंह से भी फुनकारी भरता , 
 भालू आया भालू आया,,,,,,

4. सब बच्चों के मन को भाता , 
 उछल कूद कर नाच दिखाता ,
  सबके दिल को ही भरमाता , 
जादू सा सब पर छा जाता ,
भालू आया भालू आया,,,,,,

5. केला उछल कूद कर खाता , 
 भालू वाला गाना गाता, 
 बच्चा टोली उसे दोहराता ,    
उनके मुख पर खुशहाली लाता , 
भालू आया भालू आया,,,,,,,

स्वरचित बालगीत
  रजनी अग्रवाल
    जोधपुर





दिनांक 12-1-2021,
विधा - बाल गीत,
 विषय --भालू ,

मीना ,टीना ,राजू ,सोनू ,
जल्दी आओ ,जल्दी आओ ,
देखो भालू आया है ,
दो पैरों पर चलकर ,
करतब वह दिखलाया है ।

टांगे उसकी मोटी- मोटी,
बदन उसका लंबा है ,
घने -घने बाल हैं बदन पर,
 शिकार मछलियों का करता है।

 अच्छा तैराक भी होता है वह ,
अक्सर भालू मांसाहारी होता है ,
मधुमक्खी के छत्ते से निकाल,
 शहद पीता रहता है।

 कई प्रजातियां है इसकी,
 काला ,सफेद, भूरा रंग होता है ,
एकांत उसे पसंद है ,
वह जंगल में रहता है ।

अपने सख्त नाखून के सहारे,
  पेड़ों पर झट से चढ़ जाता है ,
 करतब देख सब खुश हो जाते हैं 
भालू सबका दोस्त बन जाताहै।

 श्रीमती शोभा रानी तिवारी 619 अक्षत अपार्टमेंट खातीवाला टैंक इंदौर मध्य प्रदेश मोबाइल 8989 409 210



$$ भोला भालु $$

मेरा भालु कितना भोला
नहीं किसी पर करता हमला 
उछलकूद वो दिनभर करता
बाबा उसे बाजार ले जाते
चौराहे पर खूब नचाते 
बच्चे बड़े सब पैसे देते 
घर हमारा उससे चलता
मैं भी उनके साथ मे जाता
प्यार मुझको बहुत है करता 
गाँव गाँव मे जाना पड़ता 
नहीं पढ़ाई मैं कर पाता 
काशः मैं भी पढ़ पाता 
बाबा की कुछ मदद कर पाता
नहीं कमाई भालु की खाता 
भालु को मैं प्यार से रखता
मेरा प्यारा भोला भालु 

चन्दा डांगी रेकी ग्रैंडमास्टर 
रामटेकरी मंदसौर मध्यप्रदेश




अग्निशिखा मंच
तिथि-९-८-२०२१
विषय -भालू ( बाल गीत )

डुग डुग डुग डुग डमरु बोला,
भालू ले कर आया मदारी भोला। 
काला काला है यह ,नाम इसका कालू
बड़े बड़े हैं बाल,देखो नाच दिखाता भालू
शहद है प्रिय भोजन इसका,
शहद समान खाना नहीं दूजा। 
खाने शहद पेड़ पर चढ़ जाता भालू। 
कहते हैं गुदगुदी सब को करता भालू। 
भोला का है यह कमाई का ज़रिया। 
नाच नाच कर सबके पेट भरता। 
जंगल में था इसका घर
काटा जंगल टूटा घर। 
पूछता यह सबसे,काटा जंगल तोडा़ घर, क्यूं तुमने मुझे किया बेघर,
शहर में फिर घुस आया भालू,
भोला मदारी हाथ पड़ गया भालू। 
नाच नाच कर सबको हंसाता
पर मन ही मन है रोता भालू। 

नीरजा ठाकुर नीर
पलावा डोम्बिवली
महाराष्ट्र





मंच को नमनकरती हुई मैं विजय बाली। ,,आया बुढ़ापा विषय ,, पर एक रचना प्रस्तुत कर रही हूं।

आया बुढ़ापा छूटा आया,अब आगे जाने क्या हो।
चाहें हम कोई रूठे न हम से,पर क्या पता जाने क्या हो।
जब थि बचपन मस्त खिलाड़ी ,बनके खेले गलियों हम
में,हुए जवां तो धर दिया अंदर,
अब जाने आगे क्या हो।

गुड़िया खेल खिलौने छूट,पड़ गये कुटुंब के चक्कर में, 
रस्ते आगे दीखे बहुत पर,जाने अपना अब क्या हो।
 सोचा था रहें यूं ही जवां पर, चांदी आ गई बालों में,
बालों को तो र॔ग डाला पर,गालों का अब क्या हो।
सब पर आती है यह अवस्था ,सच मानों दुखदायी है,
धीरे धीरे घिसट के चलने ,में तो कोई मजा ना हो।
आया बुढ़ापा छूटा आया,पर जाने आगे क्या हो।

रचनाकार ,,,,विजय बाली
जोधपुर



नमन पटल
आज की विधा -बालगीत

शीर्षक भालू आया

गाँव में आज मदारी आया,
संग में भालू लेकर आया।
डम डम डमरू तेज़ बजाकर 
बच्चों के मन को ललचाया।

चिंटू-पिंटू-मिंटू दौड़कर आये,
मायरा, लवी भी दौड़ी आईं।
देखकर भालू खुश हो गए,
उसकी सूरत  सभी को भाई।

कितना प्यारा लगता भालू
नाक है इसकी जैसे आलू।
गोल गोल आंखें हैं इसकी,
है  लंबे बालों वाला कालू।

नचाने लगा मदारी उसको,
कुदाने लगा मदारी उसको।
उछल उछल कर वह चलता,
बहुत मजा आता बच्चों को।

अब दिखायेगा खेल मदारी,
करता भालू के शादी की तैयारी।
ले आया  मदारी मादा भलुनी,
सज संवर के पहन कर नथुनी।

भालू को सूट बूट पहनाया,
आँखो पर ऐनक लगवाया।
चलता भालू मटक मटक,
भलुनी के संग नैन लड़ाया।

दोनों की अब हो रही शादी,
सारे बच्चे बन गए बाराती।
अपने अपने घरों से लाये पैसे।
पैसों से भर गई चादर सारी।

स्नेहलता पाण्डेय'स्नेह'


अ. भा. अग्निशिखा मंच
9/ 8/ सोमवार 2021
आज विषय - भालू
बाल गीत 

आया आया भालू आया।
लंबे बालों वाला आया।
मदारी था बांध के पगड़ी।
उसने रखी पोटली तगड़ी।।

बैठा बोला नाच दिखा दे।
अरे भोले रुसना सिखा दे।
है डमा डम डमरू बजाता।
भालू को छमा छम नचाता।। 

शहद देंगे बोला मदारी।
हाथ डंडा उठाया भारी।
जोर से डंडा है बजाता।
भालू अपना नाच दिखाता।।

है आगे-आगे भालू जाता।
बच्चा दल है शोर मचाता।
उसने भी देखी थी शादी।
शादी करूँगा हुआ राज़ी।।

भल्लूक ने शादी रचाई।
कोट पहना और नकटाई।
चलता था वह अकड़ अकड़ कर।
पत्नी लाई सखी पकड़ कर।।

दोनों ने जयमाला डाली।
भालू को तंग करे साली।
भोली साथ लगाए फेरे।
भालू बोला अब हम तेरे।

नर मादा भालू को लाता।
दोनों का ही नाच दिखाता।
मदारी भालू अब न दिखते।
पश्चिम के हाथों हम बिकते।

वैष्णो खत्री वेदिका
जबलपुर



मंच को नमन
विधा:- बाल गीत
विषय:-- *भालू*

 ओहो ! आया भालू काला
    लंबे -लंबे बालों वाला।।

   जूटे मोहल्ले भर के लड़के।
  भय है मेरी भैंस न भरके।।

   लिए मदारी था झोला ।
   उसे भूमि पर धर के बोला।

   अपना नाच दिखा दे भालू।
    पायगा तो रोटी आलू।।

   गाय उसने आ- आ- या- या
   भालू को डंडा दिखलाया।
   और बजाया डमरू डम - डम
   लगा नाचने भालू छम छम।।

   नाचो भाई येसे! येसे!
    कह कर मागने लगा पैसे
    भालू ने खुब हिलाया
    अपने बालों वाली काया।।

     भाई पैसे बरसे खन- खन
      उन्हें जेब में रखकर फौरन
       हंसता आगे बढ़ा मदारी।।

       भीड़ लिए लड़कों की भारी
       है, जो अध्यापक चिल्लाते
       आह! न लड़के पढ़ने आते।।

       वे भी अगर नचावे
       वो न मदरसा सुना पावे।।

विजयेन्द्र मोहन।



वीना अचतानी 
अग्नि शिखा मंच को नमन 
विषय ****भालू पर बाल कविता ***
भालू ने रचाई शादी
दुल्हन लाया लम्बे
काले बालों वाली 
भालू को नहीं 
सुहाए उसके बाल
ले गया उसको
नाई के पास
नाई ने रूपये
मांगे एक सौ साठ
अब कहाँ से लाए रूपये
नहीं है उसके पास
दोनों नाच नाच कर
बच्चों का मन बहलाते
बड़े बूढ़े उन पर
पैसे खूब लुटाते
पैसै हो गए बहुत  
सारे उनके पास
तब दुल्हन बोली
अब तो चलो
नाई के पास
भालू बोला प्यार से
अब नहीं चलेंगे
नाई के पास
तुम तो मुझे यों ही 
सुन्दर लगती हो
हर पल साथ देती हो
मुझे हो गया अब
तुमसे प्यार 
अब तो अच्छे लगते हैं 
तुम्हारे ये लम्बे
काले बाल ।।।।।
स्वरचित मौलिक 
वीना अचतानी 
जोधपुर ।।।।


विषय,
 भालू,


भालू आया भालू आया, उसने सुंदर नाच नचाया, पंजे के बल खड़ा हुआ, मस्ती में झूमा गाया।

भालू ने नाच दिखाया, 
मदारी ने डम डम ढोल बजाया,
सर्कस में है नाच दिखाया,
भालू आया,, भालू आया l

फिल्मी धुन बजाई,
 भालू ने शादी रचाई ,
उसकी पत्नी ने डांस दिखाया,,, दोनों ने मिलकर मस्ती में गाया ।

जंगल से आया भालू ,
नाम रखा ,,
उसका कालू,
लंबे पंजो वाला लालू,
खुश हुए चिंकी और शालू ।

स्वरचित बाल कविता ,
सुषमा शुक्ला इंदौर




Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.