Type Here to Get Search Results !

अखिल भारतीय अग्नि शिखा ब्लॉग पर आज पाल की बरसात पर रचनाकारों की रचनाएं पढ़ें डॉ अलका पांडे




अग्निशिँखा मंच 


२६/७/२०२१

बरसात 

अब
उदास सा
ठहरा सा
बारसात का पानी
जिसमें पहले जैसी
कागज की कश्तियाँ  कहाँ
कहाँ पहले जैसे बारसात के खेल.?
गुट्टे,शितोलियाँ,लँगड़ी, फुगड़ी
छिपा-छिपाई,गिल्ली-डंडा और
.....बच्चों की रेल
अब बच्चों को शायद..! 
बारिश का पानी नहीं लुभाता
नहीं लुभातीं कागज की वो कश्तियाँ।

बच्चे खेलते तो अब भी हैं, पर..
खुले आसमान में नहीं, बल्कि
बंद कमरे में...'मोबाइल-गेम'
अथवा टीवी पर...'कार्टून-चैनल'
अब कहाँ सुनाई देता है... 
बच्चों का वो शोर..उनकी खिल-
खिलाहट...?

शायद..! इसीलिए ...
आज उदास हैं..
गावों की गलियाँ..
बारसात का पानी..
और...बहुत कुछ...।

डॉ अलका पाण्डेय मुम्बई




नमन मंच

विषय;-कारगिल विजय।
दिनाँक26/7/2021
उन्नीसवीं सदी का था 
वर्ष रहा अंतिम।
छब्बीस थी जुलाई
जो भूल नहीं पायी।
नापाक पाक ने
टेढ़ी जो नजर डाली
रणबांकुरे जो माँ के 
निकले जो जोश में थे
सीमा की रक्षा खातिर 
दुश्मन पे टूटते थे ।
कितनों ने जाँ गंवायी
कितने हुए थे घायल
पर जज्बा उनका भारी
दुश्मन को था गिराया।
ले कर तिरँगा फिर वो 
जा पहुंचे चोटियों पर 
थी वीरों ने पताका 
फिर शान से लहरायी
वो कारगिल विजय का।
दिन आज का था पावन।
उन वीरों के चरण में 
करते सभी नमन।।
जय हिंद की सेना 
जय हिंद की सेना।।🙏🏼🙏🏼
निहारिका झा




कारगिल युद्ध
***********

युद्ध मे उतरे वीर सिपाही
भारत की जो शान है
भिड़ उठे आतंक से हर पल
LOC जो उनकी जान है..

भारत का हिस्सा कारगिल
कैसे हथियाने वो देते
पहले हमारे सीने से गुजरों
तभी तो वो खाने देते।।

हर पल सीना बड़ा डटे वो
मुंह के बल गिराया है
दुश्मन सुन लो भारत के
तुम्हें को कारगिल मे धूल चटाया है।।

वीर हैं भारत के वीर हम
तभी तो आतंक को खौंफ
जदा आज हमने कराया है।।2।।

वीना आडवानी"तन्वी"
नागपुर, महाराष्ट्र
******************


बारिश
******************
अपने देश के मनभावन मौसम पूरे वर्ष आवाजाही करते सब अपनी अपनी विशिष्टता से दुनिया में खुशहाली भरते

ठंडी, गर्मी, बारिश का मौसम आते दुनिया में बारी बारी रजाई में दुबक के,ए.सी लगा के बारिश का मजा लेती दुनिया सारी

शिशिर का मौसम होता मनभावन हरितिमा से निखर उठता प्राकृतिक वातावरण

पर बेमौसम की आवाजाही नेसबका जीना दूभर कर दिया बिन मौसम बारिश होने पर घर से निकलना दूभर हो गया

ढेर अनाज बर्बाद हो गया किसान फिर से कंगाल हो गया सरकार तो चला लेगी जैसे तैसे इनका दाना पानी मुहाल हो गया

अन्न के दाता कहलाते पर स्वयं का पेट ये भर नहीं पाते साल बरस तक मेहनत करते पर उसका फल ये पा नहीं पाते 

शुभा शुक्ला निशा
रायपुर छत्तीसगढ़



🌧️🌧️रिमझिम बरसात 🌨️🌨️

चंचल चपल सा मेरा मन
करता नादानियाँ मेरा मन,

आये जो सावन का महीना
रिमझिम बारिश में झूमें तन,

सौंधी-सौंधी सी मिट्टी से महके
हर घर -आँगन और मन सबके,

पेड़ों- फूलों की डाली संग गाये 
मेरा ये चंचल चपल सा मन लहराये 

कभी पर्वतो की ऊंची श्रृंखला में
कभी सुनसान पड़ी सी गलियों में,

छई-छपाक करे मेरा ये नादान मन
रिमझिम बारिश में मेरा झूमें तन,

छोड़ दुनियां की हया-लाज ये मन
जी भर के नाचे गाये मेरा ये मन

हेमा जैन (स्वरचित )


बाल गीत 
बरसात 

अम्मा झमाझम हो रही बरसात है,
हम सब मिलकर खुश हुए साथ है ।

चाची आँगन में बड़ा सा टब रख देना,
वर्षा रानी हमारा टब को पूराभर देना।

कागज की बड़ी नाव बना चाचू आना,
 दादा सुनो दीदी नाव पर बैठ न जाना।

इतराती इठलाती मटक मटकती नाव ,
पानी का झटका लगा तो डुबी नाव ।डॉक्टर रश्मि शुक्ला 
प्रयागराज उत्तर प्रदेश


बालगीत_बरसात
अ. भा. अग्निशिखा मंच
विषय_बरसात,विधा_बालगीत
मैया बोली लल्ला से,
घर में आ जा होगी बरसात।
काले बादल छा गए,
दिन में हो गई रात।१।
घुमड़_घुमड़ कर बदल छाए,
मचाया आसमां में शोर।
देख अपने प्रियतम को,
मदमस्त हो नाचा मोर।२।
आकाश में बिजली कड़की,
लल्ला की छाती धड़की।
जा लिपट गया मैया से,
जा सिमट गया बहिंया में।३।
लल्ला बोला मैया से,
मैं बारिश में भीगूंगा,
अपने दोस्तों संग मस्ती करूंगा,
छपाछप पानी में कूदूंगा,
जी भरकर नहाऊंगा।४।
नद्दी नाले उफनते देखूंगा,
बारिश में मौज मनाऊंगा,
आकार गरम पकोड़े खाऊंगा,
अदरककी गरम चाय पिऊंगा।५।
मैया बोली_जा,
जी ले अपनी जिंदगी,
जल से ही है जीवन,
कर लो इसकी वंदगी।६।
लल्ला कहे मैया से,
मां देख इंद्रधनुष आया,
देवों का संदेशा लाया,
पृथ्वी पर छाई खुशहाली,
हर ओर हरियाली ही हरियाली।७
लल्ला भी खुश,
मैया भी खुश,
लिखकर कविता हम भी खुश,
पढ़कर कविता तुम भी खुश।८।
स्वरचित मौलिक बालगीत_
रानी अग्रवाल,मुंबई,२६_७_२१.


कविता
  खूब करें पानी में मस्ती

खूब करेंगे पानी में मस्ती
धक्का मुक्की धींगा मस्ती
 दादी से भी नहीं डरेंगे
पापा से भी नहीं डरेंगे
खूब नहायें मौज करेंगे
कुछ उछलें,कुछ कूदेंगे
चलो करेंगे मौज मस्ती.
खूब करें पानी में मस्ती

मम्मा से छुपकर जायेंगे
छाता लेकर हम नाचेंगे
कागज की नाव बनाएंगे
नहीं डरेंगे,नहीं रुकेंगे
चलाएंगे पानी में कश्ती
खूब करें पानी में मस्ती

खूब करेंगे हल्ला गुल्ला
फिर खायें आलू का भल्ला
पापा ने यदि डाँट लगाई
पकड़ेंगे दादी का पल्ला
चलो लड़ें पानी में कुश्ती
खूब करें पानी में मस्ती

आशा जाकड़


अग्निशिखा मंच
बाल कविता (बरसात)

छम छम छम छम हुई बरसात 
चुन्नू मुन्नू आजाओ साथ साथ
मौसम सुहावना हो चला अब
आओ बनाएं कागज की नाव ।

देखो रंग बिरंगी नाव तैर रही 
ठुमक ठुमक चंचल चल रही 
चुनिया मुनिया तुम भी देखो 
अहांप्यारी सुंदर नाव चल रही।

ठंडी ठंडी हवा चल रही 
नाव में गुड़िया को बैठाएँ
गुड्डा भी पीछे पीछे आया 
बैंड बराती बाजा बजाएँ ।

करोना की अनोखी शादी 
हाथों को सैनिटाइज किया 
मुंह पर मास्क को लगाया 
सबको गर्म काढ़ा पिलाया।
शादी में शोर गुल मचाया ।

डा अंजुल कँसल"कनुप्रिया"
26-7-21



बालगीत-"बरसात"
द्रोपती साहू "सरसिज"महासमुन्द, छत्तीसगढ़
शीर्षक: "बरसात"
विधा-बालगीत
      *****
रिमझिम सी बरसात में,
भीगना अच्छा लगता है।
छतरी होती साथ तो भी,
भीगना अच्छा लगता है।।

रोकना चाहे मम्मी पापा,
ना खुद को रोक पाता हूँ।
साथी एक मेरे आ जाए,
सोनू को साथ बुलाता हूँ।।

बड़ा मजा आता हमको,
कूदें नाचें छई छपा छई,
जोर जोर से सुनकर शोर,
दौड़ी सिम्मी भी आ गई।।

उछल कूद पानी में हम,
कपड़े गंदे कर जाते हैं।
अब तो डांटेगी मम्मी,
बचने को गिड़गिड़ाते हैं।।
         *****
पिन-493445
Email: dropdisahu75@gmail.com


मंच को नमन 🙏
विधा -बाल कविता
27/7/21

        वारिश आई रे
    *****************
वारिश आई रे वारिश आई रे
छम-छम करती आई रे
मन को लुभाती आई रे
रिमझिम बारिश आई ये
चहुंओर हरियाली छाई रे
आओ मोनू आओ सोनू खेलें रे
आपकी मारें मौज -मस्ती कर लें रे
बादलों में बिजली कड़कती रे
 वारिश आई रे आई रे
पंख फैलाते मोर नाचे छम-छम रे
कोयल मधुर गाती गीत रे
फूलों की सुगंध से बगिया महकती रे
बादलों के बीच इन्द्रधनुष शोभती रे
खेतों, खलिहानों में फसलें लहराती रे
सर-सर हवाओं का चलना अच्छा लागे रे
वारिश आई रे वारिश आई रे
रिमझिम बारिश आई रे

डॉ मीना कुमारी परिहार



*कारगिल विजय दिवस*
       *कविता*

मैं कारगिल पर हूं लिख नहीं पाया कविता।
मैं कारगिल पर लिख नहीं पाया कविता।
नहीं दे सका जवानों को शाबाशी की जाओ वर्क में बना लो कब्र अपनी, भूलकर की तुम्हारा कोई बच्चा है घर में बच्चा है पत्नी के गर्भ में।

भूलकर की घर में बूढ़ी मां, बूढ़े पीता है जिन्हें अभी रामेश्वर, द्वारका ,गंगासागर घुमाना शेष है।

कि तुम्हारी इकलौती बहन भी है जिसे बचपन में बाल खींच खींचकर तुमने रुलाया था।
पर वह तुम्हारी निकर कमीज में बटन लगा देती थी स्कूल जाते वक्त।
मैं कारगिल पर नहीं लिख पाया कविता।
नहीं कर पाया जवानों को उद्बबोधन, की जाओ जरा छेल्लो सजा हमारे नींद में रहने की और सर कटा दो अपना।

कि हम तुम्हें नहीं दें पाएंगे माइनस दस-बीस-तीस डिग्री के लिए सही-सही युद्ध पोशाखे, सही-सही हेलीकॉप्टर, सही से टोली विमाने।

पर तुम मारना दस-दस को,
मार गिराना एक-एक घुसपैठिए को, क्योंकि हम तुम्हें देंगे शाबाशी।

तुम रखना भारत मां की शान हम तुम्हारे अर्थी पर फूल मालाएं चढ़ाएंगे मैं नहीं कर सका उद्बबोधन, मैं कारगिल पर लिख नहीं पाया कविता नहीं दे सका जवानों को शाबाशी।

की जवानों युद्ध विमानों, तोपों की कमी को अपनी शवों की संख्या से पूरी कर लो हम वो नहीं खरीद पाऐ, क्यों कि शह और मात के खेल में हम कई वर्षों से व्यस्त है।

रणनीति की मांग के बावजूद, देखो हम नहीं दे सकते तुम्हें इजाजत लक्ष्मण रेखा लांघने की,
पर रेखा का पूरा सम्मान करना और एक बार रणनीती की आवश्यकता को अपनी शवो की संख्या से पूरी कर देना मैं कारगिल पर लिख नहीं पाया कविता।।

*जय हिन्द - * जय - भारत*
सुरेंद्र हरड़े कवि
नागपुर
26/07/2021



🌷 देखो देखो बादल आए
 अपने साथ में पानी लाए 
पानी जब बरसता है
 बिजली भी दमकती है
 हम डर के मारे अपनी मां के पास छुप जाते हैं
 रामू डब्बू चिंटू सब छुपते हैं घर के अंदर
 जब मैं उनको बुलाती हूं बाहर आओ तो वह कहते हैं नहीं नहीं डर लगता है मैं कहती हूं नहीं डरो तुम 
जल्दी से बाहर आओ 
हम सब मिलकर बारिश में खूब नहाए कागज की हम नाव बनाएं 
और बारिश में हम उसे तैयार 
 तभी मम्मी बाहर आती है कहती है पानी में मत जाओ
जाओगे बीमार हो जाओगे 
डॉक्टर के पास जाओगे 
डॉक्टर सुई लगाएगा
 तुम चिल्ला चिल्ला कर सिर उठाओगे
 खाना पीना बंद हो जाएगा 
मन की चीज खाने को तरस जाओगे इसलिए मेरा कहना मानो
 पानी में तुम मत नहाना
नहीं नहीं मां मैं मेंढक की तरह पानी में खेलना चाहती हूं
 साथ में सब को खिलाना चाहती हूं सब खेलेंगे मजा आएगा
 हम भी मेंढक की तरह दौड़ेंगे और मेंढक की टर्र टर्रआवाज करेंगे
 मेरी प्यारी मां मुझको पानी में नहाने दो
 वर्षा का आनंद उठाने दो 
काले काले मेघों को हमारे साथ नहाने दो
 चले जाएंगे तो कहां से लाएंगे 
मुझे तो यही भातें हैं
 मुझे तो यही बातें हैं ऐसी प्यारी बरसात
 इससे हमें न करो तुम दूर
 मेरी प्यारी मां
लॉकडाउन में स्कूल है बंद 
पढ़ाई होती घर से
 हम तो अब बाहर भी नहीं जाते
 कि बारिश का आनंद ले ले 
इसलिए प्यारी मां मुझे बारिश में खेलने दो 
खेलने दो ✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻
खेलने दो🌷🌷🌷🌷😀😀😀😀

कुमारी चंदा देवी स्वर्णकार जबलपुर मध्य प्रदेश




नमन मंच 
बरसात (बाल गीत)

काले काले बादल आते ,
संग अपने वो मेघा लाते ।

रिमझिम बरखा की बूंदे ,
आकर नई फसल उगाते।

ग्रीष्म ऋतु की तपन मिटाते,
मौसम सुख में कर जाते।

फूलों की खुश्बू से देखो,
वातावरण को महका दे।

टिप-टिप गिरती बूंदे देखो,
मीठी सी एक धुन सुनाते।

कलरव करते पंछी भी ,
चाहो दिशा को है चहकाते।

बारिश के मौसम में अक्सर, कागज की हम नाव बनाते हैं।

उसे बहा पानी में अक्सर,
हम बच्चे हैं खुश हो जाते।

घुमड़- घुमड़ कर बादल आते ,
संग आपने वो मेघ है लाते।।

©️®️पूनम शर्मा स्नेहिल ☯️


नमन मंच
बरसात (बाल कविता) 
*******
दिनांक 26/7/2021

बिट्टू भाग भागकर आई
 घनघोर घटा भी है छाई
 पास नहीं था कोई छाता 
 तभी जोरों की बारिश आई !

देख मोहन को छाते में बोली
बारिश खेले है आंख मिचौली
घर से निकली तब धूप चढी़ थी
बारिश भी कितनी नकचढी़ है !

मेरी छतरी में तुम आ जाओ
कोई बहाने अब न बनाओ
आओ ,सर्दी हो जाएगी न्यारी
हल्दी वाला दूध पडे़गा भारी !

आज बारिश में मैं भीगूंगी
बरसात का आनंद मैं लुटूंगी
  खूब भीगी बिट्टु रानी
याद आ गई उसको नानी! 

नाक बंद हो गये थे दोनों सर्दी से
 लेना पड़ रहा था श्वास मुख से
    इंजेक्शन लगे चार चार
दूध हल्दी का पीना पड़ा बार बार! 

कान पकड़ तौबा की बिट्टु ने
   अब न भीगुंगी बारिश में
  आनंद तो लूंगी बरसात का
  पर, रेनकोट और छाते में! 

           चंद्रिका व्यास
          खारघर नवी मुंबई



अग्नि शिखामंच 
विषय---बरसात( बाल गीत)
दिनांक 26-7-2021

बच्चों की टोली देख बादल, मचाती है शोर,
घना घन बरसेंगे बादल, छाई घटा घनघोर । 
छम छम कर जब बरसे पानी, बच्चे धूम मचाते हैं,
कागज की कश्ती बनाकर, फिर पानी में चलाते हैं ।
शर्त लगाते आपस में, किस की कश्ती दूर तक जाएगी 
जीत जाएगी वह कश्ती, जो सबको पीछे छोड़ पाएगी ।
गीत खुशी के गाते बच्चे,उनके कोमल मन मुसकाते हैं 
 एक दूजे का हाथ पकड़़, मिलकर मौज मनाते हैं ।
 बारिश का मजा हैं लेते उनके तन मन भीगे जाते हैं छुट्टी कर स्कूल की बारिश का आनंद उठाते हैं ।
 और कहे माता-पिता से चलो कहीं हम चले घूमने
 राहों की हरियाली देख बच्चे खुश हो जाते हैं । 
असली नाव में बैठ करे जब नदी की सैर
तो उनके चेहरे रानी खुशी से खिल जाते हैं ।

    रानी नारंग


🙏🌹अग्नि शिखा मंच 🌹🙏
विषय: *बरसात *
विध: काव्य/ बालगीत 
दिनांक:26-7-2021
********************************
आई है बरसात सुहानी, 
रिमझिम बरस रहा है पानी ।

देखो कितना अच्छा लगता,
स्कूल नहीं अब जाना पड़ता।

मेढक टर्र- टर्र हैं टर्राते,
वर्षा में हम खूब नहाते ।

चलो कागज की बनाएँ,
इसे हम आँगन में तैराएँ ।

देखो ! दौड़ी मम्मी आई ,
हम दोनो को डाँट लगायी ।

"बर्षा में जब भींग जाओगे,
सर्दी- जुकाम ही पाओगे ।"

**************************************
स्वरचित एवं मौलिक रचना 
रचनाकार-डॉ पुष्पा गुप्ता 
मुजफ्फरपुर 
बिहार 
🙏



26 जुलाई 2021 
बरसात (बाल गीत)

काले काले बादल आए।
सँग में अपने बरखा लाए।।

रिम-झिम का गीत सुनाते,
खुशियों का संदेशा लाते।।

भीनी-सी सौरभ फैलाते,
धरती की प्यास है बुझाते।।

मोर पपीहा नाचे गाएँ,
दादुर टर से गुनगुनाएँ।।

जब बारिश का मौसम आता।
सब जनों को बड़ा ही भाता।।

कल-कल करती नदियाँ बोलें,
कई रंग की कश्तियाँ डोलें।।

मारें बच्चे हैं किलकारी,
उड़न-छू हुई गर्मी सारी।।

हम भी मिलकर बचपन लाएँ।
धमाचौकड़ी खूब मचाएँ।।

पानी में छप-छप हम करते, 
अँजुरी में बूँदों को भरते।।

गरमा-गरम पकौड़े खाएँ,
सौंधी चाय का मज़ा पाएँ।।

बारिश है ऋतुओं की रानी,
प्रकृति सारी हो गई धानी।।

खेत फ़सलें हरे सब होंगे, 
धन-धान्य से पूरित तब होंगे।।

वैष्णो खत्री वेदिका
जबलपुर


बरसात ---- ओमप्रकाश पाण्डेय
( बाल गीत) 
देखो देखो बादल आये
संग अपने वे बिजली लाये
कड़क कड़क कर बिजली चमके
काले काले खूब हैं बादल
जोर जोर से पानी बरसे.......... 1
रामू बबलू चिंटू सब आओ
बबली चिंकी रेनु शीला
तुम सब भी आज बाहर आओ
बारिस में खूब नहायेगा हम
जोर जोर से पानी बरसे......... 2
मम्मी हमको बाहर जाने दो
बरसात की यह पहली पानी
खूब छमा छम कूदेंगे हम
जी भर के आज नाचेंगे हम
जोर जोर से पानी बरसे.......... 3
वो देखो मेढक भी आये
साथ अपने बच्चों को लाये
मम्मी पापा तुम भी चलो
खूब आज भीगेंगे पानी में
जोर जोर से पानी बरसे........... 4
ओ देखो बिजली भी चमकी
जैसे फोटो खींच रहा हो बादल
आज स्कूल नहीं जाना है
जी भर के मस्ती करनी है
जोर जोर से पानी बरसे........... 5
( यह मेरी मौलिक रचना है ----- ओमप्रकाश पाण्डेय)


सोमवार-बालगीत-बरसात
पानी आया रिमझिम रिमझिम
ठंडी ठंडी हवा बही
बारिश की गीली मिट्टी से
सौंधी सौंधी खुशबू आई
बारिश के पानी में भिगे हम 
नाचे गाए कुदे सब दोस्त
खूब मस्ती करें बारिश में हम
भले डांट खाये घर में हम।
लेकिन नहीं छोड़ेंगे बारिश के
पानी में नहाना‌ हम ।
अंजली तिवारी मिश्रा जगदलपुर छत्तीसगढ़


नमन अग्नि शिखा मंच 
दिनांक -२६-७-२०२१
विषय -बरसात 
*कृष्ण लला* 
वासुदेव की टोकरी में लिए कृष्ण कन्हाई है जमुना पार लागते है 
उमड़ घुमड़ कर आये बदरा बरसात की झड़ी लगी है ।
बादल बिजली अटखेलियाँ देख मुस्कानें कृष्ण लला है ।
बाल सखा संग भागे दौड़े कृष्ण आये कृष्ण लला है ।
मुँह खोल धरा समाहित खेल दिखाते कृष्ण लला है 
इंद्रधनुषी रँग सज बाल सखा संग रूप बदल आये कृष्ण लला है ।
बाल सखा संग भागे दौड़े करते चोरी माखन कृष्ण लला है । 
कान पकड़ वो कहते मैया मोरी मैंने ही माखन खायों !
ले लो मेरी लकुटि कमरिया मैंने ही शोर मचाओं 
बारिस की लहरों में बाल सखा संग मैंने
नाच दिखायो।
रंग बिरंगी उड़ती चुनरियाँ वृक्षो की हरियाली 
में बाल सखा संग मैंने नाच दिखाओ ! 
अनिता शरद झा रायपुर



नमन अग्निशिखा मंच
विषय-बरसात (बाल गीत)
काले काले बादल छाए।
बारिश का सन्देशा लाये
मेघा गरजे घनन घनन
रह रह कर बिजली चमके 
जोर जोर से बरसे पानी।
शुरू हो गयी है बरसात।
सुबह से लेकर रात हो गयी
रुकी नहीं है ये बरसात।।
बंद है शाला बंद है ऑफिस
मम्मी पापा घर मे हैं
मौज ही मौज है अब तो आज।
सौंधी महक से महक रहा 
दिन भर देखो किचन है आज।
मना रहे हैं सोनू मोनू 
खत्म न हो ये बरसात।।
निहारिका झा


🙏🌹अग्नि शिखा मंच🌹🙏
🙏🌹जय अम्बे🌹26/7/21🌹🙏
🙏🌹 *बालगीतःबरसात*🌹🙏

 भाई ने सोना को बोला
 चल रे बहना बाहर जाते
 छोड़ पढ़ाई कल हम पढ़ते
 बारिश में हम खूब नहाते ,

देखो रिमझिम बारिश आई
पानी की जो बूंदे पड़ती, 
कैसे लगे पढ़ाई में मन 
हम बच्चों को अच्छी लगती,

  छाता लेकर निकले दोनों
  उड़ने लगा हवा में छाता
   झूम रहे थे प्रसन्नता से
 भीग गए पर बारिश भाता ,
 
ठंडक लाई बरखा आई
पानी में छप छपाक छैया,
ताल तलैया में नाव रखी, 
तैर रही कागज की नैया,

  देखो बहना सूरज भागा, 
  टर्रटर्र बोले मेंढक मामा , 
  नाच रहे पानी में मेंढक ,
   ताल तलैया में है धामा ,

अब सोना बोली भाई को, 
ठिक से तूम पढ़ाई करना, 
अब हम दोनों घर चलते हैं ,
पिताजी से नहीं है, डरना,

पाया घरमें गर्म दूध को, 
फिर तौलिया से पोछा बदन, 
करते दोनों साथ पढ़ाई, 
हो रहा ख़ुशी का स्पंदन ,

🙏🌹स्वरचित रचना🌹🙏
 🙏🌹पद्माक्षि शुक्ल,🌹🙏


नमन मंच 
बरसात 
बरखा रानी प्यारी आई , 
सबके मन को लुभाने आई ,
नन्ही बूंदों से मौसम सजाने आई ,
हरयाली की चादर उढ़ाने आई  
बरखा रानी प्यारी आई |
शीतल मंद हवा चली पुरवाई ,
गर्मी को भगाने आई , 
मन में मादकता छाई ,
बरखा रानी प्यारी आई |
सावन के झूले पड़ गये ,
बागों में फूल खिल गये 
कोयल कू कू गाने लगी ,
दुल्हन है शरमाई ,
बरखा रानी प्यारी आई |
नदियाँ गर्व से इठला रही ,
प्रकृति के मन की ज्योत जगाई ,
 बरखा रानी प्यारी आई |

स्मिता धिरासरिया बरपेटा रोड



अग्निशिखा मंच को नमन
आज का विषय :- बालगीत
       *बारिश*
बादल,बादल जी बोलो
तुम भी पढ़ने जाया करते हो
फिर क्युं गड-गड, गड-गड
शोर मचाया करते हो।।१।।

चम-चम चम -चम बिजली चमके
गड -गड ,गड-गड बादल गरजे
निकली बालक सेना घर से
दुबकी बैठी बूढी दादी।।२।।

सुखे-ताल तलैया भीगे
नदी नाले है उफान पर
बालक सेना बारिश में भीगे
खत्म हुऐ भभके गर्मी के
पांवों जलती धूप सिरानी।।३।।

आंगन वाले बरगद दादा
खुश है देखो सबसे ज्यादा
गुस्से में टूटा छप्पर
सुनकर बूंदों की शैतानी।।४।।

झमा -झम आई बारिश
बच्चों में आई खुशियां सारी
किसान दादा हुए खुश
अब लहराएंगे खेत खलियान
धरती पर हरियाली छायी
बारिश आयी - बारिश आयी।५।

सुरेंद्र हरड़े कवि
नागपुर
दिनांक २६/०७/२०२१



बरसात बाल गीत

टन टन टन घंटी बजी
झम झम झम बरसा आई
बच्चे स्कूल से भागे शोर मचाई

छप छप छप पानी में कूदे
भूल गए घर से छतरी लाना
साथ में रखे नहीं बरसाती जामा

चलो कूदते छप छप करते
भीगते पानी में आनंद लेते
पकड़ो पकड़ो खेल खेलते

बस्ता भींगे खबर नहीं इनको
मजाक करते सड़कों पर दौड़ते
दौड़ते दौड़ते धड़ाम से गिरते

याद आई अब क्या होगा घर को जाते
कपड़ों में लगे पूरे कीचड़
रोते रोते घर को पहुंचे

घर में जो देखा मां ने मुझे
मेरे कीचड़ से सने कपड़े
डांट नहीं पड़ी मुझको

रोया था मैं पूरे जोर से
हाय हाय क्या हो गया
चल गया मेरा नाटक का खेल

प्यार से मा ने दुलारा
दादी ने लिया तोलिया
जल्दी-जल्दी मुझे मिली है 
गरम गरम हल्दी वाले दूध

मजा आ गया बरसात में
खेला मिलजुलकर साथ मे
फिर जल्दी से आना तुम बरसात

कुमकुम वेद सेन



अग्नि शिखा मंच ।
बरसात - बालगीत ।
बरसात के ये दिन,
झमाझम होता पूरा दिन। 
बारिश मे भीगने में, 
खूब मजे होते सारा दिन।। 1
बरसात...........…..... 1 
बारिश की ये बडी बूंदे, 
जब मुह पर मुझे पडती। 
ठंडा होता वारिश का पानी, 
आखो से बूंदे मस्ती करती।। 
बरसात.................... 2 
हरजगह घर और आंगन में, 
बारिश ने खूब धूम मचाई। 
देखो हमसे खेलने के लिए, 
बारिश की बूंदे दूर से आई।। 
बरसात.................... 3
जिधर भी नजर फिराओ, 
सब जगह बारिश है आई। 
क्या बढिया होता ये मौसम, 
देखो बारिश नृत्य करने आई।। 
बरसात.....................…4
स्वरचित,
रामेश्वर प्रसाद गुप्ता ।


सोमवार दिनांक २६/७/२१
विधा**** बाल गीत
विषय ****
    #******बारिश*****#
              ^^^^^^^^^

ऐ छगन मगन पिंकीरिंकी आ बहार ।
बारिश गिरे झमाझम चले बयार ।।
आओ भीगे हम इस मस्तमौसम में।
तन पे ले रहे खग तरु ठंडी फुहार ।।१

स्कूल नहीं जाएंगे आज मारेंगे छुट्टी ।
ना पढ़ाई करेंगे और न लिखेंगे पट्टी ।।
खूब मस्ती हुडदंग आज हम करेंगे ।
गले मिलेंगे भूल जाएंगे बैर कट्टी ।।२

ताल नदी झरने भरके बह रहे हैं ।
खेलो संग हमारे हमसे कह रहे हैं ।।
ढोल बजाए मेघ नाच रही दामिनी।
बूदों की मार नर्म कुसुम सह रहें हैं।।३

इन थिरकते बच्चों को देख लगे ऐसा ।
हम भी नाचे झूमे आज इनके जैसा ।।
बच्चे बनकर चलो यार करेंगे धमाल ।
ऐसी खुशी ना मिले देख कर भी पैसा ।।४

प्रा रविशंकर कोलते
     नागपुर ३०
          महाराष्ट्र ।




मंच को नमन
 जय माँ शारदे
विधा। बाल गीत
बिषय बरसात

आओ चुन्नू आओ मुन्नु देखो देखो हो रही बरसात।
चिडि़या चहक रही पेडो़ पर।
कोयल बोले आम की डाल पर
बगुला पाती उड़त अति सुन्दर।
देखो बादल घुमड़ रहे झम झम हो रही बरसात।
आओ चुन्नू..।।।।।
देखो कैसी हरियाली छाई।
पवन चल रही है पुर्वाई।
हल लेकर निकले किसान।
होठो पर उनके है मुस्कान।
इस साल समय से हुई बरसात।
आओ चुन्नू.....।।।
ताल तलैया सब भर गये।
देखो पापा भैया भीग गये
सड़को पर है बहता पानी।
 भीग रही है बुढ़िया नानी।
इस मे अपनी नाव चलेगी।
काशी.से पटना पहूचेगी।
आज हो रही खुब बरसात
आओ चुन्नू....।।।
आओ हम सब झूला डाले।
झुले पर बैठ पेंग बढ़ा ले।
भाभी देखो कजरी गाये।
देख देख हम सब मुस्काये।
सबको अच्छी लगे बरसात।
आओ चुन्नू आओ मुन्नू देखो हो रही.बरसात।
बृजकिशोरी त्रिपाठी
गोरखपुर. यू.पी।




अग्निशिखा मंच
26/7/2021 सोमवार
विषय-बालगीत (बरसात)

मगनू आओ छगनू आओ
झोली में खुशियां भर लाओ,
छुटे कभी न हमारा ये साथ
आयी हैं देखो पहली बरसात।

कागज़ की हम नाव बनाये
पानी में फिर उसे चलाये,
चली नाव वाह क्या है बात
आयी है,देखो पहली बरसात।

 गीली मिट्ठी को पैरों से रौंदे
अपने-अपने बनाये घरौंदे,
मिलजुल कर हम सब साथ
आयी है,देखो पहली बरसात।

पेड़ों पर हम झूला डाले
रामू-श्यामू को भी बुलाले,
किसी की है न कोई जात
आयी है, देखो पहली बरसात।

बारिश में हम ख़ूब नहाये
झूमे- नाचे और हम गाये,
दिन हो या हो फिर रात
आयी है,देखो पहली बरसात।

आँगन में जब, पड़ती बुन्दे
बहना लायी राखी के फुन्दे,
 आगे बढ़ाओ अपना हाथ
आयी है,देखो पहली बरसात।


                        तारा "प्रीत"
                    जोधपुर ( राज०)


*# अग्निशिखा मंच*
*सादर नमन*🙏🌹
*दिन सोमवार*
*दिनांक 26 / 7 /2021*
*विषय बरसात ( बालगीत )*

उमड़ - घुमड़ कर आते मेघ
बच्चों को धमकाते मेघ!
कितना पानी तुमने रखा
बोलो न! अंदर अपने मेघ!

देखो कितना खुश है मेंढक
टर्र- टर्र करता जाता मेंढ़क!
राग न आता उसको फिर भी
कुछ भी, कुछ भी गाता मेंढक!

खूब झमाझम बरसा पानी
चारों ओर है पानी ही पानी!
खेत - खलिहान हरे हो गए, अहा!
कितना सुंदर है बरसात का पानी!

  *मीना गोपाल त्रिपाठी*
  *अनुपपुर ( मध्यप्रदेश )*


बरसात 
--------
 कितना सुहाना मौसम आया 
 रिमझिम बारिश लेकर आया,
  बादल हर जगह है छाए
बरसात के इस मौसम में 
हम सब मिल है मजे करते
 छप छपा छप दौड़े हम, वाह
 कागज की नाव सबौर दिख रही
 रंग बिरंगी नीली पीली
 तरह तरह के फल है मिलते
 आम जामुन के स्वाद निराले
  अभी तो कोरोना ने भी दया किया
 स्कूल नहीं जाना, मस्ती ही मस्ती
 धन्य है कोरोना बाबा
 आप तो ऐसे ही रहो
 हम भी खुश हैं बहुत खुश

 धन्यवाद
 अंशु तिवारी
 पटना


बरसात
                     ********************
 रिमझिम, रिमझिम बरखा आई ,
भर गए सारे ताल -तलैया ,
ठंडी -ठंडी चले पुरवाई ,
पानी में छप- छप करेंगे भैया ।

चुन्नू आओ, मुन्नू आओ,
 बंदर ,भालू सब आ जाओ ,
रंग- बिरंगी कागज लाओ ,
कागज की सब नाव बनाओ।

 उसको पानी में तैराएंगे,
 नाव में गुड़िया को बैठाएंगे,
जिसकी नाव आगे चलेगी ,
उसके लिए ताली बजाएंगे।

 पानी में ना उतरना तुम ,
दूर खड़े ही रहना तुम ,
यह पानी अमृत की धारा ,
मिलकर इसे बचाएंगे ।

श्रीमती शोभा रानी तिवारी इंदौर म.प्र.
मोबाइल 8989409210


* अग्नि शिखा काव्य मंच *
* बाल गीत *
* बरसात *
सावन की पहली बारिश आ गई ,
बच्चों के मन में खुशियां छा गई !
 आंगन में हौद का नाला डाट दिया ,
बहन भाइयों में मच गई होड़ा - होड़ !
छपाक - छप सब उसमें लगे तैरनें ,
ऊपर से बारिश की मीठी फुहारें !
सब बच्चे मस्ती में लगे नहानें ,
दादी मांँ नें बच्चों को पुकारा !
बाहर आओ लग जायेगी ठंड ,
बच्चे सुनी अनसुनी करने लगे !
पानी में मस्ती जी भर करनें लगे ,
अब लग गई कड़ाके की भूख !
मम्मी ने सबको आवाज लगाई ,
जल्दी-जल्दी सब बाहर आओ !
भजिया अदरक वाली चाय बनाई ,
बच्चों ने गपागप भजिया खाया !
हरी मिर्च ने मूंह को जलाया ,
सी सी हांँ हूं सब करनें लगे !
मम्मी नें सबको बर्फी खिलाई ,
सब बच्चों ने मिल कर ताली बजाईं !
आज बरसात का मजा आ गया भाई !!

सरोज दुगड़ 
खारूपेटिया 
असम 
🙏🙏🙏



⛈️⛈️⛈️⛈️⛈️⛈️⛈️⛈️
🌺26/ सोमवार 2021
🌺आज का विषय : बरसात 
🌺विधा: बाल गीत 
🌦️🌦️🌦️🌦️🌦️🌦️🌦️🌦️
बादल गरजे सारी रात
सारी रात हुई बरसात।
🌦️
बरसा है ऋतुओं की रानी
जमकर बरसाती है पानी
🌦️
ताल तलैया नद्दी नाले
जल पा हो जाते मतवाले।
🌦️
खेत किसान जोतने लगते
जगह जगह पर मेले सजते।
⛈️
पेड़ों पर झूले पड़ जाते
कजरी और मल्हारें गाते।
🌦️
बच्चे घर घर नाव बनाते
जाकर पानी पर तैराते।
⛈️
नन्ही नन्ही बूंदें पड़ती
बच्चों को हैं अच्छी लगती
⛈️
बच्चे घर से बाहर आते
नाच नाचकर खूब नहाते।
⛈️
बरस बरस बरसा तुम आना
ये मौसम है बहुत सुहाना।
⛈️
ना कोई धर्म वर्ण ना जात
सबके लिए एक बरसात।
🌦️
© कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड, कोलकाता
🙏🙏🙏🙏🙏🙏



जय मां शारदे
***********
अग्नि शिखा मंच
दिन-सोमवार
दिनांक- 26/7/2021
प्रदत्त विषय पर बालगीत
  शीर्षक - *बरखा रानी*

रिमझिम- रिमझिम पड़े फुहारे ,बरखा रानी आई।
नाच रही है मुनिया रानी, साथियों को संग लाई।
गोल-गोल रानी खेले, भीग गई है सारी।
मम्मी अब तो मारेगी,
चिंता हो रही भारी।
तभी एक बोली हम बुखार का करे बहाना।
नही डांटेगी मम्मी, आसान होगा मनाना।
मम्मी को चिंता होगी,हम डांट से बच जायेंगे।
भोली भाली मम्मी को, इस तरह मनायेंगे।
अपनी तरकीब में खुश होकर फिर से लगे नहाने।
झूम के बरसो बरखा रानी, गाना रहे थे गाने।

रागिनी मित्तल कटनी


$$ बालगीत $$
      $$ बरसात $$

लगा महीना सावन का 
बारिश ने धुम मचाई है 
रिमझिम रिमझिम बदरा बरसे 
छम छम पूर्वी नाचे,
संग मे आर्या रिया नाचे
टीना मीना तुम भी आओ
संग हमारे नाचो गाओ 
मालपुए पकौड़ी लाई हूँ
पिकनिक हम मनाएंगे 
छत पर कबूतर नाच रहे है 
लगाकर डुबकी पानी मे 
आओ हम सब भी नाचे 
छपाक छपाक कर पानी मे 
हवा चली तो उड़ गया छाता
हमको लग गई ठंडी है 
जल्दी से अब घर चले 
पोंछ तौलिये से अब 
कपड़े हमे बदलने है ।
मम्मा ने तब बोला सबको 
हल्दी दुध पिला देती हूँ 
ठंड तुम्हे नही लग पायेगी 

चन्दा डांगी रेकी ग्रैंडमास्टर 
रामटेकरी मंदसौर मध्यप्रदेश



बरसात(दोहे) 

सावन आया झूम के, ठंडी पड़े फुहार। 
पेड़ो पर झूले पड़े, गायें सब मल्हार।। 

तन-मन भीगे प्रेम से, मनभावन बरसात। 
आत्मिक आनंद-सा मिले,बहती शीतल वात।। 

प्रकृति दुल्हन सी सजे, घूंघट में शरमाय। 
धानी चूनर ओढ़ के, आंचल-सा लहराय।। 

मोर , पपीहा गा रहे, मीठे - मीठे बोल। 
सीखा रहे मानव को, मधुर वचन अनमोल।। 

डा. साधना तोमर
बड़ौत (बागपत) 
उत्तर प्रदेश




नमन पटल 
आज की विधा -बाल गीत

शीर्षक- बरसात

बहुत दिनों के बाद देखो,
अच्छी बारिश आई है।
छोटी छोटी गिरती बूंदे,
लगती कितनी प्यारी है।

सूरज मामा भाग गए।
बादल चाचा आये।
घुमर घुमर घूमे कैसे,
पानी है बरसाए।

सोनू खेल रहा बाहर,
नाव बना रहा कागज की।
मैं भी जा रहा हूँ बाहर,
लेने मजा आज बारिश की।

शीला ,मीरा भी आ गईं,
लेकर अपने -अपने नाव।
पानी में तैराया हमने,
दूर बहुत तक चली नाव।

छप छप पानी में कूदे हम।
गोल गुलैया भी घूमे।
एक दूजे का हाथ पकड़,
बारिश की मस्ती में भीगे।

स्नेहलता पाण्डेय 'स्नेह'




मंच को नमन करते हुए प्रस्तुत है आज के विषय**बरसात पर एक बाल गीत***
उमड़-घुमड़ कर आये बादल
झमाझम बरसा पानी
भर गये सारे ताल-तलैयां
खुश होगयी मछली रानी।
बहुत दिनों से सोये हुये
मेंढक मामा अब जागे
टर्र-टर्र की आवाज सुनाकर
टप-टप करके भागे।
सूखे पौधों में देखो अब
नयी नयी कलियां आंईं
मोर नाचने लगा अब तो
पपीहे ने टेर है लगाई।
धरती ने है ओढ़ी चूनर
चहुंओर है हरियाली छाई
कण कण में हैं खुशियां बिखरी
हवा भी है सरसाई।
मौलिक रचना
     लीला कृपलानी



वीना अचतानी 
अग्नि शिखा मंच को नमन, 
विषय ***बारिश बाल गीत ***
नन्हे जल कण
गए भाप बन
उसी भाप से
ठन्डक आई
बादल बरसे 
बरखा आई
घिरी घटाएँ 
घन घोर
जल की धारा झरती
बच्चे करते मनमानी 
नाच रहे सब बच्चे 
करके ताता थैया
चुन्नू मुन्नू को 
आवाज़ देकर 
थक गई मैया
बच्चे बनाते
कागज़ की नैया
संग संग 
दौड़ते जाते
पानी में खेलते
छपाक् छैया ।।।।
स्वरचित मौलिक 
वीना अचतानी 
जोधपुर ।।।।




पावन मंच को प्रणाम🙏 
दिनांक 26 ,7, 21
 बाल गीत,, 

*बारिश पर बाल गीत*, 
विधा,,,कविता

बारिश की नन्ही फूहार, खेत खलियानों की चले बयार,,
गोलू मोलू चले बहार , मां से
 कर लिया करार,l

कागज की नाव चलाएं ,डबरो में छप छप करते जाएं
होमवर्क को किया किनारा,
मस्ती में झूमा जग सारा💐

बारिश की हरियाली छाई ,धरती को हरि चूनर पहनाई,
आज पढ़ाई की कर दो छुट्टी ,,
ना करेंगे हम कभी कुट्टी,


मस्तीखोर है जरूर, यह तो हमारा काम है ।😀
पढ़ लिख कर हम आगे बढ़ेंगे, देश का रोशन नाम करेंगे

गोलू मोलू नाम है अपना, मां बाबा का है यह सपना, मस्त खिलंदर और कलंदर
भारत को महकाएगे,
हर पल आगे बढ़ते जाएंगे🥀🥀🥀🥀🥀🥀

सुषमा शुक्ला स्वरचित💐




अग्निशिखा मंच
तिथि-२६-७-२०२१
विषय-बालगीत-बरसात 
विधा-कविता
            समझदार राजू

छुट्टी की घंटी बजी,बस्ता ले बाहर भागा राजू.
 बरसात हुई खूब, घर जाये कैसे,सोचे राजू.
बस्ते को डाला कमीज के अंदर.
दरवाजे की तरफ दौड़ा जैसे बंदर.
 बाहर है पानी ही पानी सड़क बन गई नदी.
सब बच्चों की मम्मी आई,मेरी तो बीमार पड़ी.
खड़ा खड़ा सोचे राजू ,कुछ ना सूझे.
पड़ोस के पिंटू की मम्मी , घर चलने को पूछे
घर में देखा मां को तेज बुखार है आया.
.दौड़ा भीगता गया, वो डॅाक्टर को ले आया.
दूध के संग दवाई दिया मां को,तब चैन आया
दोस्त बोलें देख राजू पानी में मैने नाव तैराया.
साथ दोस्तों के, फिर राजू ने खूब नाव तैराया.


नीरजा ठाकुर नीर
पलावा डोम्बिवली
महाराष्ट्र




मंच को नमन
विधा:--बाल गीत
विषय:-- *बरसात*

देखो एक बार फिर से बारिश का मौसम आया,
अपने साथ सबके चेहरों पर मुस्कान लाया।

वर्षा में हवा कैसी चल रही है मंद- मंद
क्या बच्चे क्या बूढ़े सब लेते हैं आनंद।।

चारों ओर फैली यह अद्भुत हरियाली
इसकी मनमोहक छंटा है सबसे निराली।

यह देखो इस मौसम के गुण गाता,
बारिश का मौसम है जो सब के मन भाता।। 

आओ चुन्नू -मुन्नू- पप्पू बाहर निकलो
लो मनमोहक वर्षा के आनंद,मिलकर
कागज की नाव बनाकर पानी में दौड़ आएंगे।

आओ हम सब संग मिलकर झुमे,गाये
मनभावी बर्षा ऋतु का आनंद उठाएं।।


विजयेन्द्र मोहन।
बोकारो (झारखंड)



बरसात
---------------
श्रीराम राय
---------------
छाता ओढ़ आया है
 राजा बेटा आया है।

बाहर पानी पानी है
न करना मनमानी है ।

रखना छाता साथ है
सब कहते बरसात है।

वर्षा से जो भिंगेगा
 पास डॉक्टर जाएगा।

सुई लगेगी हाथ में
  रहना बच बरसात में।
--------- palolife.com ------




Post a Comment

0 Comments
* Please Don't Spam Here. All the Comments are Reviewed by Admin.