Friday, 16 July 2021

अखिल भारती अग्निशिखा मंच पर आज शायरी चंद रचनाकारों द्वारा रचित ब्लॉक पर पढ़ें अलका पांडे



सायली छंद 
१२३२१

पर्व 
नागपंचमी का 
आज आया है 
पूजा करते 
हम 

झूमते
गाते सब 
नागों को पूजते 
पावन त्यौहार
मनाते 

आया 
सावन महिना
झूला पड़े अमराई 
झूले सारी 
सखियाँ 

आई 
द्वारे ख़ुशियाँ
मंगलगान गाते है 
मगन झूमते 
सारे 

सावन 
ख़ुशियाँ बाँटता 
उत्सव खूब बनाता 
हरियाली मन 
भाती 

नागपँचमी 
में नागो 
की पूजा करते 
दूध पिलाते 
है 

डॉ अलका पाण्डेय मुम्बई




सायली,

मदन १
अपना रंग २
दिखा जाता,हंसता३ 
झूमता गाता २
गुनगुनाता १


प्रेम ,,१
रस बरसे,,२
तेरी पायल छनके,,३
मीठे बोल,,,४
सुनाएं,,,५


घटाघोप,
बरसात हुई
धरा खुश हुई
मस्ती छाई
अलसाई

सुषमा शुक्ला स्वरचित




अ. भा. अग्निशिखा मंच
शुक्रवार -16/‘7/ 2021
विषय - सायली 


प्रेम
विभिन्नता लिए
होता ढाई अक्षर
फिर भी
विशिष्ट।

कवि
भरसक प्रयासरत
शब्दों में बताना
जटिल है
प्रेम।।

प्रेम
बीज अंकुरित
भावना की उपजाऊ 
भूमि में 
होता।

( या यह कौन सा सही है)

प्रेम
बीज अंकुरण
हेतु आवश्यक है
भावना रूपी
भूमि।


अपनापन 
समर्पण समन्वय 
विकट परिस्थिति में 
साथी उपकरण
प्रेम।

जुड़ाव 
भाव देता
आत्मा की पवित्र 
अभिव्यक्ति है 
प्रेम।

उजाला 
उमंग उत्साह
दिल की सर्जनशीलता
मार्गदर्शक है
प्रेम।।

मनुष्यता 
का प्रमाण
चाहत और शक्ति
बेजोड़ अभिव्यक्ति
प्रेम।

मानव 
सभ्यता संघर्षों 
के बाद अनवरत 
जारी रखता
प्रेम।।

अंधकार 
में भविष्य 
की आशा जगाता
शक्ति देता
प्रेम।।

निस्वार्थ
प्रेम समर्पण
भक्ति रूप धारण 
कर लेता
प्रेम।।

जीवन 
पर्यंत चलती
एक व्यापक अवधारणा
होती है
प्रेम।।

अभिव्यक्त 
नहीं एहसास 
अथवा महसूस किया 
जा सकता
प्रेम।।

निस्वार्थ
प्रेम करना
धोखा नहीं देता
सम्पन्न करता
प्रेम।।
 
दिखावा 
आकर्षण भरा
बर्बादी की ओर 
धकेलता है
प्रेम।।
 
वैष्णो खत्री वेदिका
जबलपुर



नमन मंच
विषय --: विरह
विधा--: सायली 

कान्हा
तेरा प्रेम
सताये है मुझको
विरह में
तेरे! 

गलियां 
गोकुल की
सुनी पडी़ है
राह निहारे 
 तेरी !

  हे
मुरली मनोहर
तड़पे है राधा
  प्यार में 
     तेरे !

    

राधे
तेरा मुखडा़
याद आता है
पनघट पे 
मुझे !

कान्हा
संग झूले
सावन का झूला
याद आता 
है !

कान्हा
तेरी छबि 
हरदम रहती है
नयनों में
मेरे !

निर्मोही
सुनी रातें 
विचलित करती है
बिन तेरे
अब !

सुध
खो बैठी
विरह में तेरी
बरसाने की
राधा !

कान्हा
रास रच्चैया
गोकुल के ग्वाला
लौट आओ 
अब! 

चंद्रिका व्यास
खारघर नवी मुंबई


वीना अचतानी, 
अग्नि शिखा मंच को नमन 
विषय***** सायली *****

उसीके 
सामने उसकी
शिकायत हुई हमसे
खुदाया आज
 किसलिये ।।

लेकिन 
चलती रहती 
ज़िन्दगी हर पल 
ठहरती नहीं 
 इन्तज़ार ।।।

हर
दुखी पुकार
थक जाते कदम
 राहें रूक
  जाती ।।।

लिपट 
गई उदासी
इस ज़िन्दगी बीच
सुलझ पाएगी
 कभी ।।।।

 बन्द
लम्हे बज़्म 
रौनक बढ़ा कर 
चल दिये
 खुदाया ।।।।

स्वरचित मौलिक 
वीना अचतानी 
जोधपुर ।।।।




सायली छन्द

महामारी
कितने घर
उजाड़ गयी यहाँ
कितने हुए
अनाथ। 

वियोग
पीड़ा देता
छीन लेता है
अपने हमारे
हमसे। 

दिल
घायल होता
जब अपना कोई
धोखा देता
हमें। 

आँसू
बहाती आँखे
जब अपमान करे
अपना बेटा
यहाँ। 
 
क्यों
बोझ बने
माता पिता ही
सन्तति हेतु
आज। 


डा. साधना तोमर
बड़ौत (बागपत) 
उत्तर प्रदेश



शुक्रवार दिनांक***१६/७/२१
विधा*** सायली
विषय***** स्वतंत्र
        
१) अगर
            तुम ना
            मिलती तो जीनेकी
            चाहत ना
            होती
      
    २) ये
             तेरे प्यारका 
             ग़म जीने ना
             दे सनम
             मुझको
        
    ३) इस 
             बरसात में
             मन चाहता भीगने 
             आजा सनम
             मेरे

    ४) मुझे
             तुमसे मोहब्बत
             है सनम मगर
             कह नहीं
             सकता 

      ५) ऐ 
              बरखा रानी
              उधर खूब बरसती
              कभी इधर   
              बरस 


प्रा रविशंकर कोलते
    नागपुर



नमन मंच
आज की विधा -सायली छंद
सादर समीक्षार्थ प्रस्तुत

सावन
 झूमता आया
रिमझिम बूंदें बरसे
मन मोरा 
हरषे।

मेघा 
हैं छाए
गरजे, बरसे चमके
जियरा मोरा
डराए।

पायल
बूंदों की
झम झम बरसे
मोती सा
बिखरे।

पपीहा
पी गाए
काली कोयल कूके
मोर मोरनी
बिहसे

साजन
बसे परदेश
पाती नहीं भेजे
नहीं कोई
संदेश

जियरा 
बहुत घबराए
साजन बिन रतियाँ
नागिन सी
लागे।
🌺🌺🌺🌺🌺

प्रेम
दर्पण है
अनूठे प्यार का
उमड़ते जज़्बात
 का

प्रेम
विरह है
समर्पण भी है
आस भी 
है।

स्नेहलता पाण्डेय 'स्नेह'





प्रेम
संस्कार है
प्रेम विचार है
समर्पण है
निशब्द

फूलों 
की खुशबू
से जीवन महकाएं
खुशियां बांटें
सबको

सांवरिया
  मेरे हो 
तुम बिन मैं
जी नहीं
पाऊंगी
शोभा रानी तिवारी इन्दौर



नमन मंच 
सयाली छंद 
विषय -क़लम 

आपकी 
लेखनी क़लम
में साहित्य धारा
प्रवाहित
रहें 

आप 
निःस्वार्थ भाव 
है आस लिये 
वंदन चरण
 हैं ।

जग 
मातृ छाया 
घोर अँधेरा छाया 
आस मन 
लगा ।

विश्व 
जंग का 
ऐलान किया हैं 
खौप देख़ 
डरा ।

इंसान
स्वस्थ प्रसन्न
तुझे देखता अपलक 
ख़ुश होता 
 इंसान
अनिता शरद झा


नमन मंच
विधा:-- सायली

१) इंसान
   आगे बढ़ते
  गय पेड़ पीछे
 सकते गये
 धरा ।
 २) इंसानों
    को अधिक
   जमीन चाहिए थी
   लोभ से
   भरे।
३) पेड़
    रुक गए
   एक दिन पीछे
   हटते- हटते
    ठहरे ।
४) अब
    सामने समुद्र
   था या रेगिस्तान
   यहां भी 
     जाते।
५) अब
    पेड़ नहीं
   थे और जमीन
   अधिक छाया
    थी।

विजयेन्द्र मोहन।





अग्निशिखा मंच को नमन🙏
विषय:- सायली छंद

ओम्
गणपते नमः 
आशीष दो मुझे !!१!!
है तुमसे
बिनती

हे
विठू माऊली
सुनो अरज करुंगा। !! २!!
तेरी पैदल
वारी

कैसा
खेल रचाया
कोरोना तुने मानवके !!३!!
जीवनका सपना
बिघाड़ा

हे
प्रभु रामचंद्र
रावणसे किया युध्द !! ४!!
सीताको छुड़ाया
लंकादहन

सचिन
क्रिकेटका बादशाह
लगाया रनोका अबांर !!५!!
करूं बखान
आपका

धोनी
क्रिकेटका कर्णधार
छक्को का बादशाह।।६।।
तारीफ करु
आपकी।

हे
राम
प्रजा के राजा
सत्यवचनी प्रजापालक।।७।।
न्यायप्रिय




दिलीपकुमार
सिनेजगत महानायक
राज किया छेदशक !! ८!!
सायराबानु का
साथ

सोच
साथ निभाना
जिंदगी भर का। !!९!!
पतीपत्नी बनकर
रहना

सुरेंद्र हरड़े कवि
नागपुर महाराष्ट्र
दिनांक:-१६/०७/२०२१


नमन मंच
 सायली( विधा)

 मुझे
 याद आया 
वह जमाना पुराना
पर तुम
 भूले।

 वह 
हसीन वादियां 
मेरी जीवन की
 अनमिट कहानी
 है।
 तूने
 सोचा कैसे
 जीना सीख लिया
 तुझे बिन 
मैंने। 

 धन्यवाद
 अंशु तिवारी पटना
 अभी मैं सीख रही हूं आप लोगों के मार्गदर्शन में कोई त्रुटि हो तो जरूर मार्गदर्शन करें।
 मै शुक्रगुजार रहूंगी।




जय मां शारदे
***********
 अग्निशिखा मंच
 दिन- शुक्रवार 
दिनांक- 16/7/ 2021 

*सायली छंद* 

(1)श्याम 
पनघट आना 
राधा बुलाती है 
मेरी गागर 
उठाना।

(2)चुनरी 
लेकर श्याम 
कदम पर बैठे 
लाज हमें 
आती। 

(3)दूंगा 
चुनरी तुम्हारी 
पहले करो वादा 
नहीं नहाओगी 
उघारी।

(4)माखन 
बेचने जाऊं 
कान्हा पीछे आए 
माखन मेरा 
खाए।

(5)गिरधारी 
अरज हमारी 
अब सुनलो मुरारी 
आई शरण 
तुम्हारी।

रागिनी मित्तल
 कटनी, मध्य प्रदेश



अग्निशिखा मंच
16/7/2021 शुक्रवार
विषय-सायली विद्या

प्रभु
भक्ति तुम्हारी
करूँ दिन रात
सुनो मेरी
पुकार

गोपियाँ
रास रचाये
राधा कान्हा संग
झूमे सारा
वृंदावन

कृष्ण
बजावै बांसुरी
जमुनाजी के तीर
नाचे राधा
बावरी

राधा
हुई बावरी
खोये सुधबुध जब
बजाये बांसुरी 
कृष्ण

प्रभु
 भक्ति तुम्हारी
करूँ दिन रात
सुनो मेरी
पुकार

गोपियाँ
रेड रचाये
राधा कान्हा संग
झूमे सारा
वृंदावन

कृष्ण 
बजावे बांसुरी
जमुनाजी के तीर
नाचे राधा
बावरी

कहाँ
ढूंढते हो
परमात्मा को तुम
मिलेगा तुम्हारे
भीतर

नाम
राम का
कर देता है
भव सागर 
पार

खोलूँ
जब आँखें
प्रभु तेरे ही
हो मुझे
दर्शन
            तारा "प्रीत"
        जोधपुर (राज०)



सायली छंद
**********

भीगत 
नैन तड़पत 
मनवा कान्हा सुन
तेरे दरस
को।।

राधा
संग कान्हा
नाचे संग नाचे
रास रचात
है।।

माखन
रख तेरी
बाह मैं ताकूं
कान्हा कब
आओगे

बांसुरी 
की मधुर
धून सुन कर
नाच रही 
गोपियाँ।।

वीना आडवानी"तन्वी"
नागपुर, महाराष्ट्र
******************




🙏🌹अग्नि शिखा मंच🌹🙏
🙏🌹जय अम्बे 🌹 16/7/21🌹🙏
🙏🌹विधाःसायली🌹🙏

सुनना 🌹
मनुज समझना ,🌹 
धर्म को निभाना ,🌹
प्रेम पाना, 🌹
जगमें 🌹

प्रीत 🌹 
निभाने जीने 🌹
अमृत रस पाने 🌹
कपट नहीं 🌹
अपनाते 🌹 

जो 🌹 
करते है 🌹
प्रीत माधव से 🌹
अंतर भावसे🌹
नित्य 🌹

दर्शन 🌹
भीतरी पाए🌹
प्रेम अश्रु बहाए,🌹
धन्य बने🌹
 जीवन🌹

🙏🌹पद्माक्षि शुक्ल🌹🙏

,



**अग्नि शिखा मंच*
💕जय माँ शारदे💕
  **१६/०७/२०२१**
**********************
सायली
***
राम
नाम की
लूट है लूट 
सको तो
लूट
**
फिर
पिछे तुम
पछतायेगा जब प्राण
जायेगा छूट 
राम
 **
राम
से बडा़
राम का नाम
राम ने
एक
**
एक
अहिल्या तारी
नाम ने लाखो
को उद्धारी
राम
**
राम
से बडा़ 
राम का नाम
**********
मै
हरि से
मिलने गई हरि
ने पकडी
बाह
**
मै 
बावरी ऐसी
भई मिटी जनम
जनम का
प्यास
***
राधा
माधव चरण
बन्दौ बारम्बार एक
तत्व दो
तन

धरे
महिमा अमीत
अपार जय श्री
राधे कृष्णा
राधे
💕💕💕💕💕💕
**********************
**बृजकिशोरी*
  **त्रिपाठी गोरखपुर यू.पी**



शीर्षक-"सायली छंद"

1.आजा  
 मेरे साजना 
  तेरे इंतजार में , 
 जिया बेकरार 
     है.

2 सखी
   आए ना , 
  मेरे चित्त चोर  
  हो गई 
  भोर .

3. छाई  
   बेकरारी है , 
   कैसी ये खुमारी  
    बस में 
    नहीं .

4. प्रिय 
       मैं हूं  
      तुम्हारी ही अपनी  
         दिल की  
          रानी .

स्वरचित शायली छंद
  रजनी अग्रवाल
    जोधपुर



$$ सायली छंद $$
         $$ ममता $$

माँ
कैसी ममतामयी
देखकर दुखी सन्तान 
हो जाती
ममतामयी

मैंने 
दादीजी को
देखा सबके आँसू 
पौंछते हुए 
हमेशा 

दादी 
दर्द भूलकर 
करती सेवा सबकी
जताती नहीं
कभी

दादी
मेरी माँ
को करती बहुत 
सारा प्यार 
हमेशा

चन्दा डांगी रेकी ग्रैंडमास्टर 
चित्तौड़गढ़ राजस्थान




अग्निशिखा मंच 
विषय---सायली छंद 
शीर्षक---बरखा 
दिनांक---16-7-2021

1)

बरखा
रिमझिम-रिमझिम
 बरस कर बहला
रही दिल
 मेरा ।

2)

ठंडी 
पुरवाई चली 
सावन आ रहा
 इशारा कर 
रही ।

3)

घनघोर 
घटाएँ छाईं 
बादलों ने आकर
 फिर झड़ी
 लगाई ।

4)

धरती 
शीतल हुई 
छा गई हरियाली
पावस ऋतु 
आई ।

5)

मन 
भीगा-भीगा 
मिलन के प्रेम 
गीत गाने 
लगा ।

रानी नारंग



🌧️⛈️🌦️🌧️⛈️🌦️
शुक्रवार -16/‘7/ 2021
विषय - सायली 
🌦️⛈️🌧️🌦️⛈️🌧️
बादल
जमके बरसे
नाचे मन मोर
तन मन
हरसे।
🌦️
चमके
बिजुरिया आंगन
जीयरा डर जाए
कहां होंगे
साजन।
⛈️
पपिहा
पीयू बोले
खिड़की झांके प्रिया
बिरही जिया
डोले।
🌧️
नाचे
बाग मयूरा
बोले बादल संग
मिलन हुआ
पूरा।
🌦️
झूले
बाग पड़े
झूल रही सखियां
ऊंची पेंग
बढ़े।
⛈️
बांधी
हाथों राखी
बहना ने आकर
सिवई भी
चाखी।
🌧️
भले
चली जाना
लेकिन पावस तुम
बरस बरस
आना।
🌧️
© कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड, कोलकाता
🙏🙏🙏🙏🙏🙏




🌹🙏अग्नि शिखा मंच 🙏🌹
🌹विषय:* स्वैच्छिक *
🌹विधा: *सायली *
🌹दिनांक:16-7-21
*********************************
🌹
ऋतु
पावस की
सुहानी है लगती 
वर्षा की 
रानी
🌹
चूड़ियाँ 
हरी- हरी
गोरी की बाँहो
में सजती
खूब 
🌹
देखो
आया सावन
बहुत मन भावन
तन मन
 झूमें 
🌹
बादल
देखे मोर 
नाचा सघन वन
मत्त मगन
मन
🌹
कोयल
की कूक
भरती है हूक
प्यार की 
आस!
🌹
पपीहा
की बोली 
लगती है गोली
पीउ की 
रटन!
🌹
************************************
स्वरचित एवं मौलिक रचना
रचनाकार-डॉ पुष्पा गुप्ता 
मुजफ्फरपुर
बिहार 
🌹🙏



वृक्ष ----- ओमप्रकाश पाण्डेय
( विधा कविता --- सायली) 
मै
मात्र एक
वृक्ष नहीं हूँ
जीवन हूँ
तुम्हारा

जो
बीज तुमने
बोया था कभी
मै वही
हूँ

मैंने
तुम्हें दियें 
फल फूल हरियाली
आगे भी
दूगां

संरक्षण
करो मेरा
मत काटो मुझे
विनाश हो
जायेगा

तुम
जिओ और
मुझे भी मेरा
जीवन जीने
दो

तुम्हारे
पूर्वजों ने
पूजा है मुझे
तुम भी
पूजो

सुख
शान्ति और
फल फूल हरियाली
पाओगे मुझसे
सदा




अग्नि शिखा काव्य मंच 
१६ /७/२०२१ शुक्रवार
विधा - सयाली छंद
 🌹
संसार  
समुन्द्र की 
गहरी धार 
उतरना है पार 
 हिम्मत रख 
   🌹
जीवन 
की डगर
काँटो से भरी 
सम्भल चल
घायल 
  🌹
  आयेंगे 
सुख - दुख 
पग-पग पर 
हिम्मत रख 
किम्मत 
   🌹
पौरुष
होता सदा 
स्वागत सत्कार
जयकारा 
 संसार 
  🌹
 पिता 
होता सदा 
छायादार वृक्ष
दृढ़ तना 
  सहारा 
    🌹
  माँ 
 ठंडी छाँव
 है शीतल झोंका 
 ममता भरा 
 सदा 
  🌹
सरोज दुगड़
खारूपेटिया 
असम 
🙏🙏🙏

मंच को नमन, 🙏
विधा-सायली
16/7/21

1- मेरे
      दिल का
      चमन प्यारा है
      वतन न्यारा है
2- देवदूत
     हरि का
     संदेशा लाया है
     हर्षित हुआ
      मन
3- कैसे
     बताएं कि
      हम सब को
       ईश्वर ने
        बनाया
4 - स्त्री
       की व्यथा
       क्यों लिखी जाती
       जीवन की 
       गाथा
5 - मंजिल
      नहीं दूर
      हौसले कायम रहे
      जिन्दगी नूर
      है

 डॉ मीना कुमारी परिहार


अड्निशीखा मंच -मुंबई

*सायली* 

मौन 
में शब्द
निश्ब्द बन गये
नयन बोले
प्रेम।

प्रकृति
रूप निखरा
फूल -फल -पत्ते
श्रंगार किए
आज।

डाॅ. सरोजा मेटी लोडाय


१६_७_२०२१
अ.भा. अग्निशिखा मंच
विधा सायली छंद।विषय_विवाह
शादी,                
सबका सपना,         
बने कोई अपना। 
रहे सदा,
अपना।१।
विवाह,
है एक ,
खुशियों की चाबी।
कभी निकलती,
बदनसीबी।२।
विवाह,
सात फेरे,
केवल नहीं है।
जीवनभर का,
साथ।३।
पाणिग्रहण,
करता वर,
पिता कर देते,
पुत्री का,
कन्यादान।४।
विवाह ,
एक जुआ,
कोई जीतता इसमें,
कोई खाता,
मात।५।
विवाह,
पर देते,
मात_पिता बच्चों को,
शुभाशीष और
शुभकामना।६।
सदा,
सौभाग्यवती भव,
कहकर विदा करते,
कलेजा होता ,
भारी।७।
स्वरचित मौलिक सायली छंद
रानी अग्रवाल,मुंबई।१६_७_२१.



अग्नि शिखा मंच का आज का विषय***
सायली छंद
^^^^^^^^^^^^^^
1*भीड़
बढ़ गई
हर ओर देखो
मगर आदमी
अकेला।
2*
मांगा
वरदान मैंने
दुश्मन भाग जांयें
अचानक दोस्त
नदारद।
3*
दुनिया
मिली मगर
पर मेरी गलती
मिली नहीं
मुझे।
4*
मजहब
सबके समान
होते सदा सभी
पर सोच
अलग।
5*
आलस्य
सदा नगण्य
महत्वपूर्ण होता सदा
कर्मठता भरा
हाथ।
मौलिक
 .... ..लीला कृपलानी



नमन मंच 
सायली 

हे 
मनु संभल 
प्रतिशोध की अग्नि 
में मत 
जल 

है 
ये विनाशकारी 
करता जीवन को 
तारी तारी 
ये 

अवचेतन 
मन का 
द्वेष है ये 
उठाये वेग 
चित 

करता  
मन को 
व्याकुल और विचलित 
रोड़ा सफलता 
का 

स्मिता धिरासरिया ,बरपेटा रोड



अग्निशिखा मंच
तिथि-१६-७-२०२१
विषय सायली

मैं
भीग रही
इस बारिश में
जलाती याद 
तुम्हारी


अकेले
बिन तुम्हारे
कुछ ना सूझे
करुं क्या 
बताओ


कहे 
किसान बादल
जम के बरसो
धरती है
प्यासी

मन 
मेरा तो
सूखा ही रहा
हार गये
बादल

नीरजा ठाकुर नीर
पलावा डोम्बिवली 
महाराष्ट्र





सायली


💐💐💐💐💐
्हमने
 उसके साथ 
नहीं शिकायत की
किससे क्यों
किस्मत



प्रेम
 रंग बरसे
 मेरे बरसाने में 
राधा ढूंढे
कान्हा


वृंदावन 
रास रचाए
 कृष्ण कन्हैया मेरे 
सखियों संग
 राधा

बच्चे 
पढ़ाई करें
 तन मन योग 
सफल होते 
जिंदगी

✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻

कुमारी चंदा देवी स्वर्णकार जबलपुर मध्य प्रदेश


नमन मंच
सायली छंद

द्रोपती
पुकार रही
टेर सुनो बनवारी
उंगली कटी
तुम्हारी

मैंने
 फाडी रेशम
साड़ी तुम करो
याद मेरे
गिरधारी

अब
हमारी बारी
 खेचत दुष्ट दुशासन
मोरी साड़ी
केशव

करो
न देर
सुनो अब टेर
अब तुम्हारी
बारि

बिल खत
बहन तुम्हारी
पांचो पति मौन
जुआ खेल
हारे

सुनी
 टेर घनश्याम
नंगे पग धाये
बढ़ायो चीर
द्रोपती

पदमा तिवारी दमोह


अग्निशिखा मंच को नमन
विधा सायली


सुनो
पैसे से 
सेहत बड़ा है
करोना सिखलाया
आज।

हे
प्रभु मिटा
 भेदभाव जग में
सुख समृद्धि
भरदे।

प्यार
अनमोल है
नफ़रत मिटाती दिलकी
आदर सम्मान
करो।
डॉ गायत्री खंडाटे
हुबली कर्नाटक।




नमन अग्निशिखा मंच 
दिनाँक -16/7/2021
विधा;-सायली
हो 
जाता
घायल 
दिल मेरा 
अपनों ने दिया
ताउम्र का हैगम
 हूँकर्तव्य विमूढ़  
 दुःखित ह्रदय 
जान न पाता
  मिली सजा
  क्या ख़ता
  जिसकी 
   पायी
    सजा
      ये


सायली
---------
सदा
रिश्ते नाते
निभा रहे संबंद्ध
कर रहे
अनुबंद्ध
-------------
नारी
मन मीत
नहीं टूटे बंद्ध
संबल होता
विश्वास
------------
मिट्टी
दुख दर्द
सह कर पर
बांट रही 
उल्लास
--------------
नारी
सरिता सम
लेकर नव विश्वास
कठिन डगर
सहती

--------------
कन्या 
करते दान
लेना देना पाप
करना सब
परहेज़
--------------
दहेज
दानव बना
पिता हुआ लाचार
करो सब
बहिष्कार
--------------
डा अँजुल कंसल"कनुप्रिया"
23-7-20



अग्निशिखा मंच को नमन
विधा सायली


सुनो
पैसे से 
सेहत बड़ा है
करोना सिखलाया
आज।

हे
प्रभु मिटा
 भेदभाव जग में
सुख समृद्धि
दो।

प्यार
अनमोल है
नफ़रत मिटाती दिलकी
आदर सम्मान
करो।
डॉ गायत्री खंडाटे
हुबली कर्नाटक।


अग्निशिखा मंच को नमन
विधा सायली


सुनो
पैसे से 
सेहत बड़ा है
करोना सिखलाया
आज।

हे
प्रभु मिटा
 भेदभाव जग में
सुख समृद्धि
दो।

प्यार
अनमोल है
नफ़रत मिटाती दिलकी
आदर सम्मान
करो।
डॉ गायत्री खंडाटे
हुबली कर्नाटक।





🌹 1,,🌹
नभ
पे छायी
है लालिमा प्यारी
 उगने वाला 
 सूर्य

🌹2🌹

हुआ
अब अंधेरा
लौट रहे पंछी 
अपने घर
वापस
🙏🏼🙏🏼🌹🌹
निहारिका झा।।
नभ
पे छायी
है लालिमा प्यारी
 उगने वाला 
 सूर्य

🌹2🌹

हुआ
अब अंधेरा
लौट रहे पंछी 
अपने घर
वापस
🙏🏼🙏🏼🌹🌹
निहारिका झा।।



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