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चित्र पर कविता अग्नि शिखा मंच पर रचनाएं पढ़ें अलका पांडे





अग्नि शिखा मंच 1/7/ 2021
 चित्र पर कविता

त्यौहार तुम्हार आया 
ईद का चाँद निकल आया 
संग अपने भाई चारा और 
स्नेहिल सौग़ात लाया ।।
ईद मुबारक का दौर है 
गली गली में यही शोर है ।।
ये हिन्दुस्तान है सब धर्मों का 
होता यहाँ सम्मान है ।
हिन्दू ,मुस्लिम ,सिख ,ईसाई 
सब आपस में रहे भाई - भाई 
अ,लका पाण्डेय
,
🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷

🌾मंच को प्रणाम मां शारदे को नमन 👍
कविता का शीर्षक है (ईद मुबारक)🌹

भारत की भूमि पर त्योहार का सम्मान है , 
हर त्यौहार में इसका अभिमान है।
 ईद का त्योहार आया,
भाईचारा प्रेम सोहद्र्य का पैगाम लाया🙂

रोजा रखकर खुदा की इबादत की मेरे शहर ने,, 
सोशल डिस्टेंसिंग में ईद मनाएगा मेरा शहर🌷

सभी मस्जिदों पर रंग-बिरंगी रोशनी से सरोबार है मेरा शहर।
आज प्रेम से गले लग रहा मेरा शहर।


 वक्त की नजाकत देख ,
मोबारक बाद भी दे रहा मेरा शहर🙂
 एक दूसरे के लिए दुआ कर रहा मेरा शहर।

ईद की खुशहाली पर झूम रहा मेरा शहर ।
ईदगाह की नमाज घरों में पढ़ रहा मेराशहर, l

सभी शहर वासियों को शुभकामनाएं दे रहा,मेरा शहर।🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌷🌹🌹🌹🌹🌹

सुषमा शुक्ला इंदौर💐। स्वरचित


कौमी एकता चित्रधारित कविता

आओ मिलजुल कर देश बनाएँ।
अपने परिश्रम से इसे चमकाएँ।

भ्रष्टाचार और बेईमानी का न हो बोलबाला।
हँसते-हँसते देश की खातिर हम पी लें हाला।
ऐसा सकल वातावरण बनाएँ।
अपने परिश्रम से इसे चमकाएँ।
आओ मिलजुल कर देश बनाएँ।

हिन्दू, मुस्लिम, सिख, इसाई सबको मिला दें।
सब हों जाएँ एक अखण्डता की मोहर लगा दें।
इसकी एकता पर पूरा ध्यान लगाएँ।
अपने परिश्रम से इसे चमकाएँ।
आओ मिलजुल कर देश बनाएँ।

इसकी उन्नति हेतु तन-मन धन से जुट जाएँ।
सब धर्म एक हैं ऐसा सबको पाठ पढाएँ।
उन्नति हो ध्येय ऐसा इतिहास रचाएँ।
अपने परिश्रम से इसे चमकाएँ।
आओ मिलजुल कर देश बनाएँ।

नालन्दा में विद्या का अकूट भण्डार भरा था।
जग ने विज्ञान का पाठ यहीं से पढ़ा था।
हम भी इसे फिर से विख्यात बनाएँ।
अपने परिश्रम से इसे चमकाएँ।
आओ मिलजुल कर देश बनाएँ।



श्रीमती वैष्णो खत्री 
से. नि. शिक्षिका
केंद्रीय विद्यालय क्र.1छिन्दवाड़ा

 
माँ शारदे को वंदन 🙏
अग्नि शिखा काव्य मंच को प्रणाम 🙏
१/७/२०२१/ वृहस्पतिवार 
चित्र देख कविता लिखो 

भारत एक देश बहुत महान ,
हर घर्म का करता सम्मान!

अलग अलग त्योंहार है आते ,
सब मिल-जुलकर साथ मनाते 

हिन्दू ,मुस्लिम, सिक्ख ईसाई,
सब एक-दूजे के भाई-भाई !

 कभी मनाते ईद,दिवाली,वैशाखी,
 सबकी खुशियांँ होती है सांझा भाई !

तीन रंग का ध्वज है हमाँरा ,
तिरंगा हमको जान से प्यारा !

श्वेत रंग प्रतीक शान्ति भाईचारे का,
पीला ऱग आजादी के मतवालों का !

हरे रंग से सजी हमाँरी घरती माँता, 
धन-धान्य से भरपूर हमांँरी माँता !

प्रेम भाई -चारे की अलख जगादें,
अमन चैन का परचम फहरादें ! 

सरोज दुगड़
खारुपेटिया 
असम 
🙏🙏🙏

अभी उम्र के कच्चे हैं।
लेकिन मन के सच्चे हैं
मन में भाव एकता का है
यह भारत के बच्चे हैं।
एक साथ यह रहते हैं
राष्ट्रप्रेम में बहते हैं
माटी के यह परम भक्त हैं
भारत की कहते हैं।।
-------
डॉ ब्रजेन्द्र नारायण द्विवेद्वी शैलेश वाराणसी

तीस दिन रोजा रहकर अल्लाह को याद किया है
आज खुशी का दिन है ईद का चाँद निकल आया है
सबकी मुरादे पुरा करने ईद का चाँद निकल आया है।
चलो चलो सब ईद गाह चले साथ मिल कर नमाज पढ़ना है।
रामू श्यामू आओ सब मिल कर सेवाईया खाये।
अम्मी अब्बू से आज ईदी पाये।
 चलो हम सब मेला चले तरह की मिठाये।
 रजिया के लिए गुडियाँ ले आये।
पान की गिल्लौरी अम्मी 
 को लाये।
सब से आज दुआये पाये।
हम सब मिल कर ईद मनाये।
बृजकिशोरी त्रिपाठी
  गोरखपुर ,यू.पी


छवि विचार 

हम है हिंदुस्तानी ,
हम है हिंदुस्तानी ,
दूजी बात हमने न जानी,
हर धर्म,हर त्यौहार में ,
हम खो जाते है , 
हर रंग में हम रंग जाते है 
रंग केसरिया हमारी 
शौर्यता को दर्शाता है ,
सफ़ेद रंग अमन शांति बताता है ,
 रंग हमारा प्रतीक हरियाली का 
 हम है हिंदुस्तानी ,
हम है हिन्दुस्तानी ,
हिन्दू ,मुस्लिम ,सिख ,ईसाई 
हम है भाई , भाई 
ईद हो या दिवाली
 हर त्यौहार अपना है भाई

स्मिता धिरासरिया ,बरपेटा रोड


चित्र आधारित
पर सच हम हैं सच्चे
*****************

दिल के साफ,मन के सच्चे
हम वही तो हैं जो कहलाते बच्चे
भेद ना जाने कुछ भी हम कोई
तभी तो कहलाते हम कच्चे

पर सच हम हैं सच्चे।।2।।

धर्म जात पात ना जाने
बस खेल खेलना पहचाने
खेलें किसी भी धर्म के बच्चे संग
पाप मलिन भरें हमारे दिमाग मे सयाने।।

पर सच हम हैं सच्चे।।2।।

मंदिर भी जाते मस्जिद भी जाते
खेल खेल मे गुरूद्वारे हो आते
चर्च हो या कोई कहीं दरगाह
हम तो बस हाथ जोड़ना धर्म माने।।

पर सच हम हैं सच्चे।।2।।

जैसे थे बचपन मे वैसे रहने दो
मासूमियत सी मन की नदियां बहने दो
सिखाते आप बड़े ही हमें सब एक हैं
फिर क्यों कहते ये इंसा या वो ना नेक है।।

पर सच हम हैं सच्चे।।2।।

वीना आडवाणी"तन्वी"
नागपुर, महाराष्ट्र 
******************


वीना अचतानी 
अग्नि शिखा मंच को नमन, 
चित्र पर आधारित कविता ।।
चाहे जिस धर्म को अपनाऐं
सब अपने हैं 
मैं सबका हूँ 
मन में मुहब्बत 
का ज़ज्बा है
सबको अपना 
मानने वाले
ये नन्हे फरिश्ते
हिन्दुस्तान के 
तिरंगे के प्रतीक 
दुआ माँगते खुदा से
हर हाल में खुश रहना
अपने हिस्से की रोटी से
औरों की भूख मिटाना 
सद्भाव और मदद का
पैग़ाम देते ये नन्हें फरिश्ते
खुदा से दुआ माँगते 
नन्हे मासूम फरिश्ते।।।।।
वीना अचतानी 
जोधपुर ।।।।।


चित्र पर
बच्चे मन के सच्चे 
जैसे मन में डालो
वैसे ही‌ बनते
क्योंकि बच्चे होते है
मन के एकदम सच्चे
तीनों श्रद्धा से झुके हैं
देश के प्रति अपनी
 निष्ठा बता रहे हैं
हाथ जोड़ कर अपना धर्म भी निभा‌ रहे है
राष्ट्र के प्रति तिरंगा का संदेश ‌
देकर
लोगों को लडाई झगड़ा नहीं
सब मिलकर एक होकर
आपस‌ मे रहने की सीख दे रहे हैं
यही सिख बच्चों मे हर पिता को करना है
मन में उपजेगा अच्छा संस्कार 
करेंगे फिर अच्छे कार्य
वरना अपराध पनपते देर नही‌ मासूमों के हाथों में थमा दी जायेगी बंदूक हथियार
बंदूक हथियार हाथ में न थमाना
लड़ाई झगड़ा अपराध से दूर रखना
भाई चारा की सिख देना
हाथ जोड़ कर दुआ करें
यही अच्छे गुण तुम बच्चों पर डालना ।
रचनाकार
अंजली तिवारी मिश्रा लाल बाग जगदलपुर छत्तीसगढ़

आज का विषय -चित्र आधारित रचना
शीर्षक-कौमी एकता

चिकित्सक जब करता नहीं
जाति-धर्म में भेद कोई।
सीमा पर हैं डटे हुए हिन्दू
मुस्लिम, ईसाई ,सिख भाई।

जन्म समय मिलते नहीं
कोई ऐसे चिन्ह,निशान।
जो बतला सके किसी को,
हिन्दू ,सिख या मुसलमान।

फिर कैसे कहाँ से आ गया,
अलगाववाद का ये घमासान?
भोली जनता समझ न पाए,
होता इससे किसका नुकसान।

इन सब बातों में न फँसकर,
स्वंय और देश के हित सोचें।
स्वर्ग धरा निश्चित जाएगी बन,
मिलजुल सब भाईचारे से रहें।

संग में मनाए होली,ईद ,दिवाली,
सब धर्मों का सम्मान करें।
तेरा धर्म मेरी जाति को भूलकर,
हमारा प्यारा हिन्दुस्तान कहें।

गागर में सागर भर दिया मैंने,
अभी ईद मिलन में जाना है।
रजिया आपा राह देखती होगी।
उनसे ईदी लेकर भी आना है।

लगती हैं मुझे स्वादिष्ट कितनी,
ईद की मीठी सेवइयां और वड़े।
अम्मी कितने प्यार से खिलाती।
भाव देख दिल में कितना हर्ष बढ़े।

आती जब वह होली में घर मेरे,
रंग ,गुलाल सब मिल लगा देते।
वे भी रंग में रंग जाती सबके,
गुझिया, चिप्स की दावत देते।

सौ बातों की एक बात है भाई,
जो बात स्नेह के समझ है आई।
बंटवारे से नहि है कुछ मिलता,
शक्ति एकता की सदा ही सुहाई।

स्नेहलता पाण्डेय' स्नेह'

गुरुवार दिनांक १/७/२१
विधा****कविता
विषय*****
    #***चित्राधारित रचना****#
                ^^^^^^^^^

हसीन सबसे ये हमारा हिंदुस्तान है ।
जहां होता सभी धर्मों का सम्मान है ।।
हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई मिलके रहे ।
जुदा सबकेही रीतिरिवाज खानपान है ।।१

मिलजुल के सब लोग त्योहार है मनाते ।
गले एकदूसरे को प्यार से है लगाते ।।
कायम है यहां प्यार एका भाईचारा ।
सुख दुखमें एकदूजेका साथ है निभाते ।‌।२

सब धर्मी लोग हिंद की ताक़त है ।
आपसमें न भेदभाव न अदावत है ।।
मतभेद है मगर मनभेद नहीं यहां ।
दिलमें एकदूजे के लिए मुहब्बत है ।।३

हम रक्षाके लिए सब आरती अजान करते ।
वक्त आने पर सीमा पर बलिदान करते ।।
हमारी एकताको कोई मिटा नहीं सकता ।
हम बच्चें हिफाजते हिंदका ऐलान करते।।४



प्रा रविशंकर कोलते
      नागपुर
         महाराष्ट्र


 भारत महान देश आबाद है

ये बालक संगीत की तिहाई है

केसरिया, श्वेत, हरा मिल ताल है

गायन, वादन, नृत्य कला सब एक है

प्यार साथ शुभ गीता कुरान एकहै

मेरा भारत महान देश सब एक है

डॉक्टर रश्मि शुक्ला
 प्रयागराज

भोले भाले हैं बच्चे
मन के हैं यह कच्चे
पर दिल के हैं सच्चे

तिरंगा की है शान यह बच्चे
तीन रंगों में सजे संवरे हैं बच्चे
देखो कौमी एकता का पाठ पढ़ाते बच्चे
देश के प्रति समर्पण देते बच्चे
जात पात धर्म कर्म से अनजान बच्चे
जिस मिट्टी में रहते हैं यह बच्चे
उसकी गुणगान करते हैं बच्चे
नतमस्तक होकर सलाम करते हैं बच्चे
इनसे सीखे हम सभी
है कितने यह अच्छे बच्चे
दुनिया वाले इन्हें दूषित करना नहीं
यह है भावी पीढ़ी देश की
इनकी भावनाओं का करते सलाम
यह दुनिया को देते हैं पैगाम

कुमकुम वेद सेन


भारत महान देश आबाद है

ये बालक संगीत की तिहाई है

केसरिया, श्वेत, हरा मिल ताल है

गायन, वादन, नृत्य कला सब एक है

प्यार साथ शुभ गीता कुरान एकहै

मेरा भारत महान देश सब एक है

हरा से हरियाली सफ़ेद से शान्ति

केशरिया सबका बना सरताज 

ईद मनाओ गले मिल जाओ

भारत महान यह सन्देश फैलाओ

डॉक्टर रश्मि शुक्ला
 प्रयागराज

राष्ट्रीय एकता ---- ओमप्रकाश पाण्डेय
( चित्र पर आधारित कविता) 
कोटि कोटि हम भारतवासी
भारत माता की हैं संतान
जन्म लिया खेले कूदे यहाँ पर
इसकी मिट्टी में पले बढ़े हम
सत सत नमन तुम्हें माँ भारती........ 1
सत सत भाषाओं का देश है यह
अपनी अपनी बोली सब बोलते
अपना अपना रीति रिवाज है
पर मूल मंत्र तो एक है सब का 
सत सत नमन तुम्हें माँ भारती....... . 2
हर घर में देव निवास करते
हर घर मंदिर कहलाता है
अपनी अपनी देवों की पूजा करते
पर सबकी पूज्य तो तुम्हीं हो माँ
सत सत नमन तुम्हें माँ भारती........ . 3
कितने आक्रमण हुए हम पर
शक् हूंण तैमूर अंग्रेज मुगल तुर्क 
इन सबसे सदियों तक संघर्ष किया
पर अन्तिम विजय सदा हमारी होती
सत सत नमन तुम्हें माँ भारती..... ... 4
जैसे शांति पर्व और युद्ध पर्व
दोनों एक ही महाकाव्य के खंड है
वैसे ही अपने राष्ट्र जीवन में भी
विजयादशमी व दीपावली मनाते हैं
सत सत नमन तुम्हें माँ भारती....... 5
माना आज छायी है राष्ट्र क्षितिज पर
कुछ काले काले घने बादल
पर तेरे वीर संतानों के शौर्य से
चमकेगा फिर से अपना सूरज
सत सत नमन तुम्हें माँ भारती.. ..... 6
( यह मेरी मौलिक रचना है --- ओमप्रकाश पाण्डेय)


चित्र पर आधारित कविता

 भारत मां के हम बच्चे हैं,
  दिल पवित्र, हम सच्चे हैं ,
दुःख- सुख में साथ रहते हैं,
 नहीं किसी से हम डरते हैं।

 हम नागरिक हैं भारत के,
मेरा भारत देश महान है,
 हिंदू, मुस्लिम ,सिक्ख, इसाई,
 एक विधा की संतान हैं ।

मंदिर में श्लोक गूंजता,
मस्जिद में अजान है,
 वसुधैव कुटुंबकम यहां,
 हम सब तो इंसान हैं ।

दिवाली, ईद, गुरुनानक,क्रिसमस,
 मिलकर हम सब मनाते हैं ,
सभी धर्म का आदर करते ,
हर त्यौहार में खुश हो जाते हैं ।

जाति-पांति ,रीति-रिवाज अलग है ,
भिन्न-भिन्न पहनावा,व भाषाएं हैं,
 लेकिन दिल मे हमारे भारत है,
 हम सब भारत के वासी हैं।

 देश प्रेम की भावना है मन में,
 विश्व विजेता हमारी पहचान है,
 विश्व के पटल पर गूंजती,
  भारत की जय गान है।

श्रीमती शोभा रानी तिवारी 619 खातीवाला टैंक इंदौर मध्य प्रदेश

ईद मुबारक
***************
आया आया पवित्र रमजान का महीना आया
ईद की सुंदर सौगात है लाया
करते हैं सभी फलक के चांद का दीद
आओ आशिफ चलें , आओ अरबाज करने खुदा की इबादत
गले मिल मुबारक हो मुबारक हो
देकर मुबारकबाद मनाते हैं ईद
मिटाता है दिलों से नफ़रत अदालत को
पैगाम प्रेम और भाईचारे का लाता है ईद
मीठी सेव‌ईयों सा रिश्तों में मिठास लाता है ईद
चलो अब्बु ,अम्मी से लेते हैं अपनी ईदी
गिले शिकवे को हम मिटाएं
आओ हम सब ईद मनायें
बरसाता है ये प्रेम के रंग
हमेशा मनाते तुम सभी के संग
सभी धर्मों की एकता दर्शाता
प्रेम सोहार्द को अपनाता
करता प्यार का इजहार
लाता है अनमोल रिश्तों में निखार

 डॉ मीना कुमारी परिहार
  मंच को नमन 🙏
विधा-चित्र आधारित कविता
1/7/21



🌹🙏अग्नि शिखा मंच 🙏🌹
   🌳चित्र आधारित रचना 🌳
     🌲 दिनांक-1/7/21🌲
÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷
🌹
हम भारत के, नौनिहाल
देख रहे, कोरोना काल-
ईद के दिन,आरजू है - तुमसे,
हे अल्लाह !
अब समेटो इसे.....
इस बीमारी ने --
नाक में दम कर रखा है ।
सारे लोग, झेल रहे हैं-
नसीहत.....
इसबार का -
दूसरा फेज,,,,,
सबको कर दिया है --
हताहत-मर्माहत,
कितने घर परिवार का.....
उजड़ गया है --संसार ।
ऐ रहम दिल !
खुशनुमा बना दो....
दुनिया को अब !!!
🌹
÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷÷स्वरचित एवं मौलिक रचना रचनाकार-डॉ पुष्पा गुप्ता मुजफ्फरपुर बिहार ~~
~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~~

नन्हे मुन्नो की प्रार्थना 

हरा श्वेत और केसरिया 
तिरंगे का रंग है हमारा
हिंदू मुस्लिम सिख इसाई
सुख-दुख के हैं संगी साथी।

हिलमिल कर हम त्योहार मनाएँ
ईद दीवाली मिलकर पर्व मनाएं 
खील बताशे खुश होकर खिलाएं 
मीठी सेवईयाँ रुच-रुच कर खाएं।

एक दूजे पर जान छिड़क रहे हैं 
भाई जान कह गले से झूल जाते हैं 
भेद भाव आपस में नहीं करते हैं 
हम नन्हे-मुन्ने प्रार्थना अजान करते हैं। 

विश्व बंधुत्व मित्रता का पैगाम दे रहे हैं 
प्रेम एकता सौहार्द को अपना रहे हैं 
अनमोल रिश्तोँ को निभाते आ रहे हैं 
भाईचारे की भावना,मुबारकबाद देते हैं।

वेशभूषा पहनावा हमारा भिन्न भिन्न है
बोली भाषायें अलग,पर दिल मिलते हैं
देश प्रेम-राष्ट्र-भक्ति का गूँजता नारा है 
गीता कुरान बाइबल का बोलबाला है।

डा अंजुल कंसल"कनुप्रिया"
1-7-21

नमस्ते में ऐश्वर्या जोशी अग्निशिखा परिवार को मेरा नमन प्रतियोगिता हेतु मैं मेरी कविता प्रस्तुत करती हूं। 
विषय- मासूम सा दिल एकता का संदेश भेजें। 

मैं हूं एक मासूम दिल
ना भेद पता ना धर्म पता
ना रंग पता ना जात पता
मुझे तो सिर्फ 
प्यार भरा रिश्ता पता।

मैं हूं एक मासूम दिल
ना क्रोध पता ना द्वेष पता
ना हिंदू पता ना मुस्लिम पता
मुझे तो सिर्फ 
प्यारा सा इंसान पता।

मैं हूं एक मासूम दिल
ना वर्ण पता ना भाषा 
ना खान पता ना स्वाद पता
मुझे तो सिर्फ
दिल लगाने और
 लगवाने का तरीका पता।

मैं हूं एक मासूम सा दिल
मुझे तो सिर्फ हरे रंगों की
 तरह हरियाली फैलना पता।

मैं हूं एक मासूम दिल
मुझे तो सिर्फ नारंगी 
रंग की तरह नए 
उजालों के साथ चमकना पता।

मैं हूं एक मासूम दिल
मुझे तो सिर्फ श्वेत रंग की 
तरह पवित्र, शुद्ध, 
विद्या और शांत रहना पता।

मैं हूं एक मासूम दिल
ना उलझने पता न सुलझने पता
मुझे तो सिर्फ प्यार देना 
और लेना पता
मुझे तो बस 
समानता का भाव पता 
एकता का भाव पता।

धन्यवाद
पुणे


चित्र पर रजनी अग्रवाल के दोहे।
शीर्षक-दोहे

1. तिरंगा झंडा बना मिरा ,
 तीन रंगों के नाम.
प्यार मोहब्बत अमन का देते हैं पैगाम।

2. भेदभाव कोई नहीं, पहनकर वस्त्र रंगीन, हरा सफेद केसरिया लगे तिरंगा संगीन ।

3. मित्र न जाने ऊंच-नीच ,
 होय प्रीत की जीत, हिल मिल के जग जीत ले , 
जागे ऐसी प्रीत। 

4. मित्र कृष्ण सुदामा से बने ,
 करें स्नेह व्यवहार, चलती रहे यह मित्रता, नहीं हो जीत हार।

5. तारे गिनते ही रहे, मित्र बने हमदर्द ,
 एक दूजे के दर्द में ,
रात कटे नहीं सर्द ।

6. मीत ऐसा चाहिए अब ,
जैसे दीप बाती ,
 हरेक वक्त जलती रहे ,
कटती रहे राती ।

7.इक दूजे के लिए हो, कोई भी हो त्याग, खामोशी से देख लो, गाओ कभी ना राग ।

स्वरचित दोहे
 रजनी अग्रवाल जोधपुर


अग्निशिखा मंच
तिथि-१-७-२०२१
विषय -चित्र पर कविता

             हम हैं ‌‌हिंदुस्तान 

हम दोस्त हैं तीन,‌
 राजू अलबर्ट और करीम

तीनों की दोस्ती है खूब
सारे त्योहार मनाते भर‌पूर

क्रिसमस ‌में चर्च जाते,
दीवाली में दिये जला‌ते
ईद में पढते हैं नमाज
होली में बनते रंग‌बाज

हम हैं ‌‌भारत मां की जान ,
हम‌में बसता पूरा हिंदुस्तान ।

‌ये तीनों रंग प्या‌रे हैं हमको,
‌सब मिल ‌तिरंगा बनते हम तो।

नहींं किसी से हम डर‌ते हैं।
कोरोना से मिल कर लड़ते हैं।

नीरजा ठाकुर नीर
पलावा डोम्बिवली
महाराष्ट्र

चित्र आधारित रचना 
घर आंगन बालमन 
की व्यथा बोल रही हैं 
भाषा बोली मज़हब 
अलग अलग है 
तिरंगे का मान बचाना है 
दोस्ती निभा एक रंग 
रूप में समान है 
कहते बच्चा भोला नादान सोना मोना हैं 
अपनी अपनी ज्ञान उलझी बातें बताते हैं
कहते ना कर इतनी बड़ी बड़ी प्रेम की बातें 
दुआओं के लिये मिल जुलकर साथ रहना है 
अनिता शरद झा

अग्निशिखा मंच को नमन
आज का विषय:-
*चित्रपर आधारित रचना *

तिरंगे तुझे मेरा शत् शत् नमन
कुर्बान है तुझपर यह सारा वतन
यही है मेरा प्यारा - प्यारा भारत
तिरंगे, तुझे शत् शत् नमन।।१।।

सागर तट से हिमचोटी तक
गोहाटी से चौपाटी तक एक देश
है मेरा, कोटि-कोटि से गुंज जिस का,हिंद विजय का नारा यह देश
हमें है प्यारा जय भारत।।२।।

मेरे देश की माटी चंदन लगती,
मनभावन धरती का आंचल हरा है,तन के महके सुमन हम धरती के है लाल ,हम है भारती के भाल
यह धरती है गौतम- गांधी की
धरती पर दुश्मन न डालें डेरा।३।

यह मेरा प्यारा तिरंगा हरा, श्र्वेत,
केसरिया हिंदू मुस्लिम सिख ईसाई
सभी समुदायों है रहते हैं प्यार मोहब्ब्त से ना दंगा ना मारपीट रहते सौहार्दपूर्ण यह ही भारत।४।

यही हमारे मंदिर मस्जिद गिरजाघर है, यही हमारे
काबा-काशी बसते तीरथ सारे है
नाम निराले, मजहब न्यारे लेकिन
साईं सबको प्यारे ईश्वर, अल्ला
एक है ,सबका मालिक एक है।५।

सभी त्यौहारों एक साथ बनाते
रमजान एवं होली यही मेरा प्यारा भारत, यह तिंरगा नहीं भारत मां गहना है। ईश्वर अल्ला एक ही
 नाम, सबका प्यारा भारत मेरा।६

सुरेंद्र हरड़े कवि
नागपुर
दिनांक ०१/०७/२०२१

अग्नि शिखा 
नमन मंच
दिनांक--: 1/7/2021
विषय --: चित्र पर आधारित 
विधा --: मुक्तक

देश के सच्चे मित्र
     हैं ये बच्चे
तिरंगे की आन बान शान 
     हैं ये बच्चे 
जाति भेदभाव मिटा सम-भाव लिए
 शांति का पाठ पढ़ाते
     हैं यह बच्चे !

भेद मजहब में नहीं करता 
    है चांद भारत का
 ना करवा चौथ का है यह 
    ना ही चाँद ईद का 
  अखंड भारत का चंदा
      कहता है सबसे
 क्यों दिल को करते दुखी
  मैं तो चाँद हूं तुम सबका !

साहस, शक्ति और शांति का
       प्रतीक है भारत
 हर धर्म को अपने गोद में बैठा
     सम्मान देता है भारत
है कोई माई का लाल कह दे
जाति भेद-भाव रखता है भारत
अरे हिमालय सा विशाल ह्रदय 
         रखता है भारत !

    जिस माटी में पले बढे़ 
       देश वही है होता
जाति भले अलग हो रंग खून का
         एक ही होता 
  भारत के संस्कार की छाप 
    गीली माटी में इतनी गहरी छपती 
    कि कोई भारतीय गद्दार नहीं होता 
       इसीलिए भारत में हर बच्चे
       में सबको भगवान है दिखता !

          चंद्रिका व्यास
        खारघर नवी मुंबई


🌹चित्र आधारित 🌹

तीन रंग में रंगा है तिरंगा प्यारा 
 सभी धर्मो का समावेश जग से ये न्यारा,

हिन्दू मुस्लिम सिख़ ईसाई हो
हर मजहब से बढ़ कर ये होता

इसकी शान की खातिर हर बच्चा
करता दुआ व अमन चैन दिन रात

इनके मन के सच्चे भावों को देख
हर युवा वर्ग भी जोश में आ जाता

 इसकी शान के लिए कई शहीद हुए 
सब कुर्बान कर देते हसते हुए

इनकी इस शहादत पर फक्र होता
नहीं कोई इनके जैसा कभी होता

हेमा जैन

Photo from Rameshwar Prasad Gupta
हम हिन्द के है सिपाही,
सजग रहना मेरा काम है।
आ गयी है ईद की नमाज,
सजदे करते हम साथ है।।
हम हिन्द................. 1 . 
यह तिरंगा हमारी शान है,
इसका हमें अभिमान है।
ईद की नमाज में तिरंगा,
यही हमरे देश की शान है।।
हम हिन्द................ 2
आजादी की उस लड़ाई में, 
मिल हमने वह काम किया। 
देश को ऊंचा नाम किया,
भारत भूमि को नमन किया।।
हम हिन्द.................. 3
यह देश हमारा सबसे प्यारा,
मिलजुल कर हम रहते है।
आजादी के हम गीत गाते,
प्यार से हिलमिल रहते है।।
हम हिन्द................... 4
स्वरचित,
रामेश्वर प्रसाद गुप्ता ।
01-07-2021


*मन है हिंदुस्तानी*

हम हैं हिंदुस्तानी 
चाहे रंग अनेक 
केसरी,श्वेत हरा 
हम हैं हिंदुस्तानी।

 राम रहिम रुनम
सब में है भारतीयता
कभी न होगा भेदभाव
सब एक ही स्वर के धुन।

त्याग,प्रगति ,शांति का
लहराते है तिरंगा सदा,
लालच,द्वेष से मुक्त स्वर
 तन -मन सदा माँ का।

गंगा ,यमुना सरस्वति 
बहतीं निर्मल जल 
निखरता पावन भूमि
करते हैं सदा उन्नति।

डाॅ. सरोजा मेटी लोडाय

चित्र पर कविता_
इनके पहनावे भव्य हैं,
इनकी नजरें दिव्य हैं,
तिरंगे वस्त्रों की प्रेरणा पाई,
ईद पर भी देशभक्ति छाई।
किसने की ये सुंदर कल्पना?
जरा समझो उनके मन की भावना
मन को भाया ये यह पहनावा,
इसके आगे क्या काशी, कावा?
इन्हें देख आंखों में,
तिरंगा लहरा उठा,
आंखों से सरक सीधा,
दिल में जा बैठा।
हरा प्रतीक समृद्धि का हमारी,
श्वेत उस शांति का,जो प्रिय हमारी
केसरिया कहता वीरता कीकहानी 
"हम सब एक हैं"ये जग ने जानी।
नहीं कोई भेद_भाव सब अपने हैं
हो देश की उन्नति,यही सबके सपने हैं
दुआ करते हम सब मिल,
तन,मन,धन,लुटाएंगे,
चाहे चुकानी पड़े कोई भी कीमत,
भारत को "विश्व गुरु"बनाएंगे।
स्वरचित मौलिक रचना_
रानी अग्रवाल,मुंबई,१_७_२१.

अभी उम्र के कच्चे हैं।
लेकिन मन के सच्चे हैं
मन में भाव एकता का है
यह भारत के बच्चे हैं।
एक साथ यह रहते हैं
राष्ट्रप्रेम में बहते हैं
माटी के यह परम भक्त है
जय भारत की कहते हैं।।
-------
डॉ ब्रजेन्द्र नारायण द्विवेद्वी शैलेश वाराणसी

$$ चित्र आधारित रचना $$ 
               $$ संदेश $$

दुआ कर रहे है माँ भारती
रोक लो तुम अब इस विनाश को
कह रहे सभी लहर तीसरी
बच्चों पर भारी
हम मासूम ने तो नहीं किया
प्रकृति का दोहन 
फिर क्यों कर दिया हमको
घरों मे बंद 
मिल सकते नही दोस्तों से
जा सकते हम नहीं अपने विद्यालय 
अब तो बहुत हो गया
नहीं बची अब सहने की ताकत 
तिरंगे मान रखो माँ भारती
दुआ इतनी करते 
कोरोना को भगाओ विश्व से

चन्दा डांगी रेकी ग्रैंडमास्टर 
चित्तौड़गढ़ राजस्थान

हम नन्हे -मुन्ने हैं बच्चे 
मन के बिल्कुल सच्चे
रहते हम सदा मिलके
काम के भी हैं पक्के

मन में कोई भेदभाव नहीं
रखते किसी से बैर नहीं
बड़ों की सीख मानते सदा
करते कभी टकरार नहीं

 मिलजुलकर हम रहते है
 सत्य के मार्ग पर चलते हैं
 दया ,प्रेम,सेवा धर्म हमारा 
 ईमानदारी है कर्म हमारा

खूब पढ़ेंगे हम खूब लिखेंगे
कुल का नाम रोशन करेंगे
देश को हम आगे बढ़ाएंगे 
झंडे की शान मानबढ़ाएंगे

सत्य की हम राह चलेंगे 
आलस्य बिल्कुल नहीं करेंगे
 स्वाभिमानी बनकर जिएंगे
 मेहनत लगन से आगे बढ़ेंगे़।।


आशा जाकड़


मंच को नमन
विषय:--- *चित्र पर आधारित कविता*

बच्चे दिल के सच्चे,
सबके प्यारे लगते,
सबको अपना मांनने वाले
ये है राष्ट्रीय नौनिहाल फरिश्ते
भारत माता के अलग अलग धर्म के
फिर भी एक साथ है
 यह ही है भारत माता की पहचान
एक साथ बैठकर दुआ मांगते हैं
खुदा से कोरोना से दुनिया को
मुक्ति पाने का।
 हर हाल में खुश रहने का
भारत को सद्भाव और मददगार बनने का,
ईद के त्योहार पर खुदा से दुआ मांगते
 देश के नौनिहाल मासूम फरिश्ते।

विजयेन्द्र मोहन।


अग्नि शिखा मंच
दिनांक 1.7.2021
वार गुरुवार
विषय चित्र पर आधारित

धर्म सभी का अपनापन सिखाता है।
इन बच्चों से सीखें ये सभी का मान बड़ाते है।
दीवाली होली या हो ईद,
सभी साथ मनाते है।
और साथ साथ सहभागी बन खुशहाली लाते है।
बच्चे ही ईश्वर व अल्लाह का स्वरूप कहलाते है।
ये कभी किसी धर्म मे भेदभाव नही करते है।
बड़े होने पर धर्म के नाम इंसान ही राजनीति करते है।
जग जाहिर है बच्चे सभी धर्मों का मान बड़ाते है।
सारी दुनिया को कौमी एकता का पाठ पढाते है।
चाहे गीता कहो या कुरान,
सभी जिंदगी का पाठ पढाते है।
इसांन है तो प्रेम शब्द सभी के लिए एक.है।
मंजिल सभी की एक है,
रास्ते मंजिल पहुंचने के अलग अलग है।

दिनेश शर्मा इंदौर
मोब9425350174


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