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Friday, 4 June 2021

4/6/2021 हाइकु/

हायकु
विषय:-

हायकु
विषय:-
*सावन*
1
सावन आया
उमड़ घुमड़ के
बारिश हुई।
2
जग प्रसन्न
छटा रंगबिरंगी
नाचे मयूर।
3
दादुर गाये
उछल उछल के
बहता पानी।
4
बही बस्तियाँ
टूटे किनारे सभी
मचली नदी।
5
आँगन भरा
कमर तक पानी
छोरी शर्माती ।

@श्रीराम रॉय www.palolife.com


अग्नि शिखा मंच
   .बिषय सावन पर हायकु।
    १
   आई वरषा 
रिमझिम सावन
   वरषा रहा
   .२
दादुर बोले
कूद कूद कर
शोर मचाये
    . ३
धरती हरी
पेड़ मुस्कराये
नाचता मोर
     ४
   जानवर डूबे
   नदी में बाढ़ आई
     तट सब टुटे
          ५
    गाँव डूबा गया
  खेत मे भी पानी
     भरा कमर तक
          ६
   .  बोली नानी
    अनाज भीग गया
     बच्चे मागे रोटी
बृजकिशोरी त्रिपाठी 



*सावन*

सावन ऋतु
भर आया उमंग,
रोमांच धरा।

सावन मास,
कन्या बनी अवनी,
कलियाँ खिली।

हर्षित नेत्र,
फूल अनेक खिले,
मन बहला।

सावन रात
मैना मैनी मिलाप,
जन्नत हर्ष।

दौडे़ कन्याएँ,
तरु लता में झूले,
मुस्काते हुए।

इंतजार में ,
साजन तेरे लिए,
सावन आया।

डाॅ़ सरोजा मेटी लोडाय।


अग्नि. शिखा मंच
दिनांक 4.6.2021
वार शुक्रवार
विषय हायकू

1 नाचन आवे।
केवे आंगन टेड़ा।
बात बनावे।
2 दुख अपना।
में बताऊ किसको।
कोई न सुने।
3 मुहं मे राम।
बगल मे छुरीयां।
कैसे हो भलाः
4 अब उठ जा।
सुबह होने वाली।
आलसी हटा।

दिनेश शर्मा इंदौर
मोबाईल9425350174


 नमन मंच 

हाइकु 
आया सावन 
साजन याद आये 
नयन भीगे 

भीगे सावन 
दुल्हन शरमाये 
साजन आये 

धरती पर 
उगी  नई फसल 
सावन झड़ी 


उठे उमंग 
मन को  हरषाये 
सावन आये 


स्मिता धिरासरिया ,बरपेटा रोड



----------------
मेरी चाहत
मिले तुम्हें राहत
दुख दर्द से
**
गंगा की धार
कहती बार-बार
ले लो बहार
**
गांव का घर
भरी बरसात में
देता है डर
**
बड़ा शहर
गांव को लील रहा
बोता जहर
**
मास्क लगाओ
यदि जीना चाहते
दूरी बनाओ
-------+-++
डॉ ब्रजेन्द्र नारायण द्विवेदी शैलेश वाराणसी 9450186712



सावन ( हाईकू) ओमप्रकाश पाण्डेय
1.सावन आयो
छाये काले बादल
मेघा बरसे

2.कोयल बोले
पपीहा बोले कूं कूं
मनवा झूमे

3.नाचन लागे
आज नर व नारी
गावे कजरी

4.ओढ़ के आज
धरा धानी चुनरी
मचल रही

5.आसमान से
आज बरस रही
मानो अमृत

6.खोल लो दिल
भिंगा लो तन मन
खुशी में आज
( यह मेरी मौलिक रचना है.... ओमप्रकाश पाण्डेय)



नमन मंच 
दिनाँक 4/6/2021
विषय ;-सावन पर  हाइकू
 सावन आया
हर दिल पे छाया।
 झूमे है मन।।1।।
        🌹
मस्ती है छाई 
सावन ऋतु आयी।
मन को भायी।।2।।
        🌹
बरसे मेघा
प्यास बुझी धरा की
 सावन आया।।3।।
       🌹
उठे उमंग 
मन हुआ है चंग 
सावन रंग।।4।।
निहारिका झा🙏🙏🌹🌹


नमन मंच🙏🙏
आज की विधा -हाइक
विषय--सावन
🙏🙏
सवन आया~~
बह चली हवाएँ
मन चंचल

मन मयूर ~~
थिरक रहा झूम
सावनी छटा

विदेशी पिया~~
सावन में गोरिया
विरही बनी

कर श्रृंगार~~
रही दर्पण ताक
कोई न देखे

मन हर्षित~~
आये पी विदेश से
निरखे दृग 

सावन झूला~~
पेंग बढ़ाती तेज़
गोरी चंचल

मेहंदी रची ~~
हांथों को सजाकर 
मुस्करा रही

साजन आये~~
रंध्र रंध्र स्पन्दित
दिल धड़के

स्नेहलता पाण्डेय 'स्नेह'✍️✍️
नई दिल्लीव



नमन अग्निशेखर मंच
जय माँ शारदे 

मेरा प्रथम प्रयास 

हायकु

सावन आया 
अब तो आजा पिया
 अब तो आजा।

बादल आया 
रिमझिम फुहार 
लाया साथ में। 

तरस रहा
मन में मेरा पिया
अब तो आजा।

दूरी न सही
जाये मन मचला
 मचला जाये।

आंगन लगा
 पिया मन हर्षा जा
 याद दिला जा।

रेखा शर्मा 'स्नेहा' मुजफ्फरपुर बिहार



।शुक्रवार दिनांक ****४/६/२१
विधा ****हाइकु=( त्रिवली )
विषय****  
          #***सावन***#
               ^^^^^^^^
        
   रुत    सावन  ।।
झुमके आ  गई  रे ।
    मन   भावन  ।। १

    सुमन  खिलें ।।
गले  कलियन  के  ।
    भंवरे    मिले ।।२

     झूले  सखियां ।।
कर   रही   हैैं   सब ।
      प्रेम    बतियां ।।३

      जिया    तरसे ।।
पी  की   याद   आ  रही ।
      नैना      बरसे ।।४

        रंग      बिरंगे ।।
बाग   में    फूल   खिले ।।
         गा  रहे  भृंगे ।।‌५

        बरखा   रानी ।।
   चमके       बिजुरिया ।
        बरसा   पानी ।।६

         दादुर    बोले ।                    
    छेड़े    तान   कोयल ।
          मयूरा   डोले ।।७

         बादल   छाए ।।
     नीले   नभ  से  देखो ।
          जल   बर्साए ।।८

         ओ  घन  कारे ।
जी  न   लगे   पी  बिना ।
          चिट्ठी ले जा रे ।।९

          आया  सावन ।।
     सब  आए   पर  ना ।
          आया  साजन ।।१०

प्रा रविशंकर कोलते
     नागपुर 
        महाराष्ट्र ।



*अग्नि शिखा मंच*
            *जय अम्बे, ४/६/२१*
             *हाइकु*
     
            सावन आयो, 
          रिमझिम  बरसे 
             नैना तरसे,

सप्त रंगों से,
इन्द्रधनुष छाए, 
मन को भाए, 

              रंग बिखेरे,
           बादल सुनहरे, 
              मन हर्षाए, 
अंबर पर, 
बिजुरिया चमके, 
दिल धडके, 

            बच्चे तरसे,
         करते मनमानी,
             दौडे घर से, 

पांव डुबोया, 
पानी में छब छब, 
तन भिगोया, 

🙏🌹पद्माक्षि शुक्ल🌹🙏
🌹फिर से लिखा है, जी, 🌹


विषय सावन
विधा हाइकु

सावन आया
ओ मोरे सांवरिया
तू घर आ जा


बैरन रातें
सताए सारी रात
तू घर आ जा

वर्षा की बूंदे
खेतों में हरियाली
छाई बहार

करे इंतजार
दिल है बेकरार
तू घर आ जा

सूनी गलियां
देख दिल तड़पे
तू घर आ जा


कुमकुम वेदसेन




जय मां शारदे
***********
 अग्निशिखा मंच 
**************
दिन- शुक्रवार
 दिनांक -4/6/ 2021 
विषय- सावन 
विधा- *हाइकु* में प्रस्तुत रचना 

आ गए मीत।
मन मेरा गा रहा ।
सावनी गीत। 

घटा है घोर ।
सावन में यौवन।
नाचता मोर ।

सखी सुन री।
पुरवाई है आई ।
ओढ़ें चुनरी ।

दरख़्त कम। 
हरियाली खतम।
सूखा सावन ।

बरखा आई ।
रिमझिम फुहारे ।
मन को भाई ।

रागिनी मित्तल 
कटनी ,मध्य प्रदेश




मंच को नमन🙏

दिनांक 6/ 5/21
दिन शुक्रवार

 हाइकु,

सावन आया
मनभावन छाया
ऐसा लुभाया

गोरी का मन
मन में  है मुस्काती 
झूमती गाती

प्रेमिल जोड़े
चहुँ और बिखरे
सब  हैं झूले

राधा मुरारी
गिरिवर  धारी है
प्रेम पुजारी

स्वरचित,
 सुषमा शुक्ला,
 इंदौर

🌹आया सावन 🌹      
********************

       ओ रे साजन
      आ रे मन भावन
       आया सावन ।
      
        आया सावन 
         झूम झूम झूमें रे
         आजा साजन ।

        तडपत है
        जियरा तुझ बिन
        आश बंधी है ।

         तकत रहूं 
         क्षण क्षण तडपूं 
         पाश बंधा जा ।

         आया रे आया
         सावन झूम कर
          तृष्णा बुझा जा ।

          गले लगा जा 
    ‌‌    तन की प्यास बुझा
        आनंद दे जा ।

        ओ रे साजन 
        आ रे मन भावन
         आया सावन ।
********************
डाॅ. आशालता नायडू.
भिलाई . छत्तीसगढ़ .
********************



*हाइकु*
होटो पे तेरे 🌹
सदा मेरा नाम हो 🌹
सुबह शाम 🌹

दुर न होना,
कभी मुझसे तुम,
जो राधा श्याम 🌹
मनपसंद 🌹
मुरली कि धुन पे
हो तेरा नाम,

बिछड़े ना यूँ 🌹
 कभी जीवन में 
सदा हो साथ,
बस यही है 🌹
प्रीत जीवन कि
अमरप्रेम🌹
कि धारा बहे🌹
दुनिया याद रखे,
हमारा नाम 🌹
*जनार्दन शर्मा*(आशुकवि लेखक हास्य व्यंग्य ) 
अध्यक्ष मनपसंद कला साहित्य मंच इंदौर
         
अग्नि शिखा मंच 
विषय -हाइकु 
दिनांक -४-६-२०२१

सावन गीत 
सखियों संग बाजे 
पैंजनिया रे 

पहने धानी
चुनरियाँ गोरियाँ
संग नाचे रे 

मैना खोई
आम्र कुँज कोयल 
मनुहार रे 

मधु यामनी
रात सुहानी आई 
मनमीत रे 

सावन पड़े 
झूले नाचें सखियाँ 
नाचे मोर रे
अनिता शरद झा मुंबई
        🌺शुक्रवार -4/6/ 2021


🌺विषय - हांइकु-सावन -

सावन आए
रिमझिम बरसे
जल की धारा।

दादुर बोलें
तन मन हरसे
नचे मयूरा।।

खुशी कृषक
अब हल जोतेंगे
फसलें बोएं।

वक पंक्तियां
उड़े जल ऊपर
भोजन खोजें।।

नदियां भरी
चली इठला कर
प्लावन आया।

जैसे पतली
युवती तन पर
यौवन छाया।।

घन घमंड
में गरजे तरजे
गज के जैसे।

प्रिय के बिन
बिरही का मन तो
समझे कैसे।।

रात अंधेरी
निशिकर घन में
झांके चपला।

एक अकेली
कोई न घर पर
ताके अबला।।

पपिहा बोले
तरसे बिरहन 
पिया कहां रे।

गरजे घन
ठंडी पुरवा मत। 
जिया जला रे।।
सावन आए
रिमझिम बरसे
अखियां जैसे।

प्रिया अकेली
प्रियतम बाहर
धीरज कैसे।

निमिया पर
झूले भी पड़ गए
बिटिया झूले

राखी हाथों में
बंधवाकर भैया
मन में फूले

सारंग सुन
सारंग की सारंग
सारंग बोल्यो।

सारंग चली
ओट करि सारंग
सारंग निभो।


*************
© कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड, कोलकाता


अग्निशिखा मंच 
4/6/21
हाइकु 

श्याम बोले
 सुनो प्यारी राधा 
सावन आया 

ओ राधा रानी 
हठ  ना कर आजा
  मत तरसा 

 घन  उर में
बिजली है चमके
मन सिहरे

ये नन्हीं बूंदे 
छम छम बरसे 
मन हर्षाए

नीलम पाण्डेय गोरखपुर उत्तर प्रदेश



*अग्निशिखा मंच*
दिन : *शुक्रवार* 
दिनांक : *4/ 6/21* 
विधा : *हाइकु*

1. दरस दिखा 
जा तू अब तो पिया 
प्यासे हैं नैन।

2. ना देखूँ जो मैं 
तुझे पिया ह्रदय 
  रहे बेचैन।

3. देख के तेरी 
सूरत आता दिल 
को मेरे चैन ।

4. साथ तेरा जो 
पाया मैंने पाया ये
 भी अधिकार।

5. तुझ से प्रीत 
लगाऊँ हरदम 
तू मेरा प्यार।।


*पूनम शर्मा 




सावन पर 
हाइकु बारीश
**********

बारीश आती
हरयाली है छाती
क्या यह भाती।।

बारीश उफ्फ्
हर ओर कीचड़
बिमारी होती।

पेड़ो पे खूब
हरियाली आ नई
कोपलें खिलीं।।

मोर नाचता
बारिश मे पंख को
फैलाता हुआ।।

इन्द्रधनुष
की अनुपम छटा
बहती हवा।।

वीना आडवानी"तन्वी"
नागपुर, महाराष्ट्र
******************


शीर्षक-"सावन पर हाईकु"

1.कैसे बीता रे
मेरा यह सावन
मैं हूं  उदास.

आजा सांवरे
देखूं तेरी राह रे
चित्र लिखित .

3. नदिया भी तो
उछले कूदे है रे
 धन बरसे .

4. छले गए हैं
मेरे सपने सारे 
प्रीत के मारे.

5. कैसी अगन
तन मन  झुलसे
बूंदे बरसें .

6. मन के हारे
हार ही गये सब
जीते को जीत .

7. सावन ऋतु  
बड़ी सुहानी लागे

 जागी है  प्रीत .

 स्वरचित हाइकु 
रजनी अग्रवाल जोधपुर

र्मा स्नेहिल*
*सुधार के बाद पुनः प्रस्तुत*


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