Friday, 11 June 2021

11/6/2021/ हाइकु पर अग्निशिखा मंच की कार्यशाला_dr alka pandey


होली - हाइकु 

फागुन आया 
धरा रगों में डूबी 
यौवन छाया 

फगुआ रंग 
करते हुड़दंग 
रंगते अंग 

होली के रंग 
बरजोरी संग 
मलते रंग 

होली गुलाल 
मस्तक पे विराजे 
गाल गुलाबी 

आज सजन 
संग होली की मस्ती 
रंगे मिज़ाज 

होली उल्लास 
संजना संग खेले 
आस पुरानी 

हवा उड़ाएँ 
गगन पे गुलाल 
धरा नहाएँ 

श्याम बिहारी 
बरसाने की होली 
राधा से खेले 

राँधे गोपाल 
गोपियों संग होली 
मन से खेले 

राँधा के कन्हा 
पकड़े है कलाई 
रंगते तन 

फगुआ रंग 
जन जन पे चढ़ा 
बैरी है मीत 

ढोल मंजीरा 
तन मन थिरके 
रंग पे भंग 

गली मोहल्ले 
ढोल तासे बजते 
नाचते प्रेमी 

होली के रंग 
भीगा तन बदन 
बिन बारिश 

भांग चढ़ाई 
झूमने जग लगा 
मन है ख़ुश 

ठंडाई भांग 
सबको है पिलाते 
चढ़ता रंग 

सखियो संग 
करते है हुड़दंग 
होली मनाते 

रंगों की वर्षा 
पिया को  है भिगोती 
मन झूमता 

होली रंगों में 
हमजोली के संग 
भिगोते तन 

होली की छबी 
रंगों में डूबा मुख 
रंगा है तन 

डॉ अलका पाण्डेय

मंच को नमन🙏

दिनांक 11/  6/21
दिन शुक्रवार

 हाइकु,

सावन आया
मनभावन छाया
ऐसा लुभाया

गोरी का मन
हे मन में मुस्काती
झूमती गाती

प्रेमील जोड़े
झूमते गाते जाते
हे मुस्कुराते

राधा मुरारी
गिरिवर  धारी है
प्रेम पुजारी

सावन आया 
प्रकृति पर छाया
बयार लाया

स्वरचित
 सुषमा शुक्ला,
 इंदौर

आज की विधा - हाइकु

नमन मंच

सावनी घटा
चमकती बिजली
बालक डरा

 बरसे  पानी
छानी टप  टपके 
भीगे किसान

स्नेहलता पाण्डेय 'स्नेह'

मंच को नमन
हाइकु:--- होली

रंग फुहार
पिचकारी की धार
भींगे हैं तन।

उड़ा गुलाल
फागुन सराबोर
होली के रंग।

रंग उड़ाता
फागुन मन भाता
होली की धूम।

फाग के गीत
गुजिया की मिठास
सखियों के साथ।

होली के रंग
फागुन बरसाता
द्वेष मिटाता ।

प्रीत में रंग
मानव का जीवन
होली संदेश।

विजयेन्द्र मोहन।

शुक्रवार 11/6/ 2021

विधा : हाइकू
विषय : सावन

1
सावन बरसे
प्रिय बिन एकाकी
मन तरसे
2
चले पवन
शीतलता लेकर
हर्षित मन।
3
गरजे घन
कजरारे घुमड़े
भगे तपन।
4
पीऊ पुकारे
तड़पे बिरहन
पिया कहां रे।
5
ऊंच अटारी
हवा मधुर जिमि
स्वर्ग दुआरी।
6
उमड़े घन
झर झर बरसे
भीगे आंगन
7
बांधे पायल
छम छम नचती
गोरी पागल।
8
मोर पुकारे
घन गर्जन सुन
सांझ सकारे।
9
दादुर बोलें
कामसूत्र के सारे
परदे खोलें।
10
झिल्ली झंकारे
छनकते घुंघरू
यूं लगता रे।
11
प्यासी धरती
पीकर जल मीठा
खूब सिहरती
12
पानी बरसे
फसल उगे तब
धरती हरसे।
13
ऋतु की रानी
जब जब बरसे
हंसे जवानी।
14
हे ऋतु रानी
वर्ष वर्ष तू आना
लेकर पानी।
15
सुखा पड़ता
तेरे बिन संसार
भूखा मरता।
16
मेरे ईश्वर
धरती है हंसती
पानी पीकर।
**********
कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड, कोलकाता
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️

आज की विधा - हाइकु

सावन आया,
हरियाली है लाया,
फूल खिलाया।

मन हर्षाया
टिप टिप बूंदो से
प्यास बुझाया।

याद दिलाया
बचपन वाला वो
सावन आया।

©️®️पूनम शर्मा स्नेहिल ☯️

नमन मंच 

हाइकु 
आया सावन ,
साजन याद आये ,
नयन भीगे 

भीगे सावन ,
दुल्हन शरमाये ,
साजन आये 

धरती पर ,
उगाती नई फसल ,
सावन झड़ी 

सावन
*****

सावन आया
बदरा कारे छाऐ
मोर नाचे है

हरियाली है
पेड़ों पर कितनी 
मन लुभाती

कोयल कूके
मधुर आवाज़ है
अंबूआ डारी।।

पानी बरसा
शीतलता है भाती
राहत मिली

सावन आयो
झूले बंधे पेड़ो पे
साजन आओ

वीना आडवानी"तन्वी"
नागपुर, महाराष्ट्र
******************

विषय : हायकू

चल आहें भर

चल, आहें भर,
जिंदगी भरपूर जीता चल,
चल आहें भर।

चाहे रोटी या  
रजाई ,पूरा करता चल,
चल आहें भर।

दूर रह साकी ,
देख ,मेरा भी है घर,
चल आहें भर।

अच्छी सी हो ,
एक लुगाई ,प्यार देते चल,
चल आहें भर।

जिंदगी में हो ,
बहुत कमाई ,दर्द थोड़ा कम,
चल आहें भर।

खुशियां सारी ,
भरी पडाई ,गम नहीं मचल,
चल आहें भर।

भक्ति में हो 
लगन लगाई ,पाप दूर से टल
चल आहें भर।

खाए तगड़ा सेठ 
मलाई, कहीं निवाले कम
चल आहें भर।

राजनीति में है कमाई,
बदुआएं भी, नहीं हैं कम,
चल आहें भर।

लालचों की बाढ़ ,
है आई, यहा जिंदगी कम
चल आहें भर।

शेखर रामकृष्ण तिवारी
आबू धाबी/मुंबई
00971552243968
ब्लॉग  : इंसानियत की आवाज
          SHEKHAR R TIWARI, 
           SHEKHU

विधा                       कविता(हाइकू)

विषय                       सावन आया 

रचना                   नरेन्द्र कुमार शर्मा 
✍ ---------------------------------✍
                      हि0प्र0शिक्षा विभाग
------------------------------------------

उमड़ घुमड़ कर सावन आया,
बादल छाए कौंधी बिजली,
वो ऐसा मौसम बारिश लाया।


रिमझिम रिमझिम बारिश आई,
किसानों के चेहरे पे खुशियाँ छाई,
ये मौसम सबको भाया।


चरों ओर अब कीचड़ हुआ 
भर गया वो सूखा कुआँ 
मौसम ये झाग लेकर आया।


इस मौसम में नाचे मोर,
धुंध फैली चारों ओर 
ये मौसम राधा को भाया।


उमड़ घुमड़ कर सावन आया 
बादल छाए कौंधी बिजली 
वो ऐसा मौसम बारिश लाया 


✍------------🙏🏻-----------✍

हाइकु ःसावन



सावन आया
 खुशियाँ भर लाया
त्यौहार लाया


सावन आया
मैके की याद आई
 राखी बनाई

सावन आये
बेटियाँ याद करे
 बाबुल आये

 सावन लायो
मनभावन  रंग
 खुशी के संग

सावन आया
झूम झूम के लाया
  बरखा लाया

पेड़ो पे  झूले
 सखियाँ खूब झूलें
गीत भी गायें

 सावन में ही
 बालाएँ पहनती
हरी चूड़ियाँ
    

 आओ सखियाँ
पेड़ो पे झूला डालें
 साजन.झूलें


आशा जाकड़

🌹🌹हाइकू🌹🌹
🌹विषय -सावन 🌹

सावन आया
संग यादें लाया
मन हर्षाया

बारिश लाई 
सौंधी महक आई 
खुशियाँ लाई

भुट्टा खीरा 
संग अपने लाई
मौसम प्यारा

संग प्रीत के 
झूले भी याद आये
संग प्रीतम

हरा भरा है
प्रकृति का मौसम
ख़ुशी भरा है

हेमा जैन (स्वरचित )

अग्नि शिखा मंच
११/६/२०२१
सावन पर हायकू
     सावन आया
 मेरे को मन भाया
   वरसा पानी

   कोयल कूकी
झूला पडा अमवा
 .के डार पर 

   सखिया आई
   कजरी गीत गाई
   बकुला उडा

   भाभी सावन
  में मेहदी लगाई
  .अपने हाथ


   धरती धानी
चुनर ओढ ली है
  नाचता मोर

   दादुर बोले
पपीहा पी बुलाये
   घटा घेरती
बृजकिशोरी त्रिपाठी
गोरपूर यू.पी

हाइकु

विषय सावन

सावन रे
बरसों झम झम
सूखा खेत

बोए बीज
फसल उग जाए
मन हर्षे

गाए गीत
ओढे चुनरी
छायी खुशियां

मन तरसे
पी  के वास्ते
निहारु डगर

कुमकुम वेद सेन

सावन हाइकू
अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच
विषय_सावन पर हाइकू
शुक्रवार,११_६_२०२१.
आया सावन,
पिया मनभावन,
होए मिलन।१।
तुमरे बिन,
समस्त रात_दिन,
हैं गमगीन।२।
आप आइए,
मत भरमाइए,
फरमाइए।३।
चाहत पूरी,
न रहेगी अधूरी,
अति जरूरी।४।
तुम आओ तो,
जो चाहो वो पाओ तो,
मन भाओ तो।५।
एक मिलन,
इस भीगे सावन,
मिलो साजन।६।
आप आइए,
औ, ना कुछ चाहिए,
रुक जाइए।७।
स्वरचित मौलिक हाईकू
रानी अग्रवाल,मुंबई,११_६_२१.

अग्निशिखा मंच 🙏
विधा- हाइकु
विषय -सावन
दिनांक-11/6/21

सावन आया
बरसा रिमझिम
सौगात लाया
************
पानी बरसा
झमझम करती
बरसे मन
**************
फूल खिलते
भंवरा मंडराते
खुशियां लाते
***************
खिली धरती
बसुधा गीत गाये
मधुर राग
****************
कारे बदरा
बरसा टिप-टिप
आग लगाया
*****************
सावन मास
घर आयो सजना
नयना लड़ी
******************
मोर नाचते
बिजुरिया चमके
पपीहा गाते
*******************

डॉ मीना कुमारी परिहार


अग्नि शिखा
नमन मंच
विषय --: सावन
विधा--हाइकु
दिनांक--: 11/6/2021

बनी दीवाली
खेतों की हरियाली 
सावन आया !

  मेघ बनते
किसान खुश होते
  सावन आया !

 बोले कोयल
 कुहु कुहु करती
  गीत सुनाती !

सावन आया
बनती महारानी
बरखा रानी

 श्रृंगार कर 
दुल्हन बनी धरा 
  सावन आया! 

भीगे है मन
भिगोता तन मन 
सावन आया !

मेघ तडित
आलिंगन करते 
 एक दूजे से !

 भरी जवानी
 देखे प्रियतम की
 राह नवेली !

  कर ऋंगार 
पति के आवन की
  राह निहारे !

  भीगे है गोरी
साजन के आने से
   
  बारिश होती
 गोरी सकुचाती 
 भीगे वस्त्र में !

   सावन झूला
साजन झूलावे है
   मीत झूले है !

  सावन आया
हर त्योहार लाया
 खुशीयां आई !

  ताप गिरता
दे पानी की बौछारें
 जीवन देता !

 दादुर नाचे
सावन के आने से
  मेघा बरसे !

चंद्रिका व्यास
खारघर नवी मुंबई


अग्निशिखा मंच 
विशेष---सावन 
विधि---हाइकु 
दिनांक---11-6-2021 

बरखा रानी
खुशीयाँ है लाई
अग्न बुझाई  ।

सावन देख
हर मन हर्षाया
फूल मुस्काया  ।

मन उदास
सजन बिछोह में
अश्रु आँखों में 

याद जो आई 
दिल मचल उठा
टीस जगाई  ।

मनमोहक
फूल खिला प्यारा
सुंदर नज़ारा  ।


रानी नारंग

अग्निशिखा मंच को नमन🙏
आज का विषय :-*हायुकू*
  *सावन हायुकू*

मन    भावन
तन मन भिगोए 
आया सावन  ।।‌१

इंद्रधनुष्य
छाया आसमान में
देख मनुष्य ।। २

भृंगों की टोली 
पराग की झोलियां
किये है खाली ।।४

झूले पलना
राधा संग सखियां
तट   जमुना ।।‌५

कवि ==सुरेंद्र हरडे
             नागपुर
दिनांक:-11/06/2021

अग्निशिखा मच को नमन
विषय  :सावन
विधा   :हाइकु

सावन आया
हरा भरा प्रकृति
आनंदमय।।

रिमझिम सा
राग नया गा रही
वर्षा आज।।
मोरनी  खुशी
घुंघरू पहनती
नाचती आज,।।
किसान झूमा
लहराया फसल
देख सावन।।
पिया मिलन
 वेदना में तड़पे
देख सावन।

डॉ गायत्री खंडाटे
 हुबली,कर्नाटक।



उठे उमंग 
मन को  हरषाये ,
सावन आये 


स्मिता धिरासरिया ,बरपेटा रोड


शीर्षक-
हायकु सावन पर-

1. सखी लागे न

 जियरा मेरा आज 
  
मन उदास

2. आग जैसी  री
सावन में लगी है
   है बेहिसाब 

3 रात न बीते  , 
दिन हुए व्याकुल  
पिया की आस

4. बारिश  बूंदे 
कांपे मेरा जियरा 
      कैसे बचे जां 

5. आम्बुआ डाली 
  झूले पड़े री सखी
  आए वो याद

स्वरचित हाईकु
रजनी अग्रवाल जोधपुर

नमस्ते में ऐश्वर्या जोशी
अग्निशिखा परिवार को मेरा नमन प्रतियोगिता हेतु सावन विषय पर मैं मेरा हायकू प्रस्तुत करती हूं।

विषय- सावन

सावन माह
हरियाली फैलता
दिल गीत गाता।

सावन माह 
हर्षित करें मन
दिल को ठंड़।

सावन आया
मिलकर हम सब
सपने सजे।

सावन आया
मन चकोर हुए 
नाचती बैठी।

सावन आया
रिमझिम धुन सी
यादें पिया की।

सावन आया
तालाब नदी बहे
सुंदर लगे।

धन्यवाद
पुणे

हायकु सावन 

  नाचे कन्हैया 
बजाए बांसुरिया 
  मनमोहक 

  राधिका रानी 
चम्पा कुंज विहार
  सखियां आवें 

  कान्हा मुरली 
मोर पंख सजत 
  पीत वसन 

  श्याम बादल 
मेघालय अंबर 
   रे बरसत 

  सावन ऋतु 
हरियाली चुनरी 
 उड़ती जाए 

  धरा मुस्काए 
खेत खलिहान
   हँसते जाएं 

  पानी बरसे 
वर्षा अठखेलियाँ 
  जिया हर्षाए

  वृक्षारोपण 
आम पेड़ लगाओ 
  जन्म उत्सव

  हिंडोला झूलें
लहरिया चुंदडि़
  उड़ती जाए

  बिजुरी दिखे
घनघोर घटाएँ
  कड़की जाए

डा अंजुल कंसल"कनुप्रिया"
11-6-21

हायकू - सावन

सावन आया 
मन मयूर नाचे 
मन प्रसन्न

हिय में मेरे 
उठे रंग तरंग 
डोले रे मन 

बरसे मेघ 
रिमझिम सी बूंदे
मनमोहक 

आओ सखियां 
अरी ओ झूले झूला 
जाएं बहक 

छूं लूं घटाएं
उड़ू पवन संग 
हो मदहोश

ना रोको-टोको
झूम झूम के अब
आया सावन

सुमंगला सुमन


आया  सावन
मानते हैं पावन
हर्षित जन।

किसान देखा
आसमान की ओर
आया सावन।

मेंढक ,मोर 
चातक इंतजार,
आया  आवन।

भरी हरियां
खेत -खलियानों में
रंगा सावन।

हुलास यौवन 
तोता -तोती मिलाप
सिंचा सावन।

प्रकृति माँ
की गोदी भरादिया
हरा सावन।

डाॅ.सरोजा मेटी लोडाय।


शुक्रवार दिनांक***११/६/२१
विधा******हाइकु
विषय****#""सावन***#
                    ^^^^^

आया सावन ।
   जन हुए हर्षित ।।
मन     भावन ।।१

बहे   पवन ।।
     हरे   वन   जंगल ।
प्रसन्न   मन ।।२

कलियन   पे ।।
      जल बिंदु लगते ।
मुतियन    से ।।३

पावस  धारा ।।
      ताल नदी झरने ।
हसीं  नजारा ।।४

घटा है  छाई ।।
     बन राधा , सावन ।
लगे   कन्हाई ।।५

गोरी   सजके ।।
   चली  पी  से  मिलने ।
चोरी    चुपके ।।६

खींचे    आंचल ।।
      कलियों के भंवरे ।
 होके      पागल ।।७

प्रा रविशंकर कोलते
     नागपुर 
        महाराष्ट्र


11 जून 2021
हाइकू 

बिन पानी 

मानव का
जीवन होता पूर्ण
वर्षा सावन

फसलों में है
हरियाली भरती
वर्षा सावन

कुएँ, तालाब
सब हैं भर जाते 
वर्षा सावन।

धरा तल में
छिपे हैं जीव जंतु
वर्षा सावन।

मेंढ़क गाएँ
टर्र-टर्र की धुन
वर्षा सावन।

काले बादल
आकाश आच्छादित
वर्षा सावन।

झूलों पर हैं
युवतियाँ झूलती
वर्षा सावन।

त्योहार आते
रक्षा बंधन, तीज
वर्षा सावन।

वर्षा जल को 
करो तुम संचित
वर्षा सावन।
🙏🌹 अग्नि शिखा मंच🌹🙏
🙏🌹जय अम्बे🌹११/६/२१🌹🙏
       🙏🌹हाइकु ,सावन🌹🙏


छाया अंधेरा, 
जोर से हवा चली, 
है हरियाली, 

घर से आए, 
सखा संग खेलने, 
नाव चलाए, 

सावन आया, 
बच्चों ने फेंका छाता, 
कीचड हुआ, 

मधुर हास्य,
भीगा पानी में तन,
प्रसन्न मन, 

वर्षा में खेले, 
करते कलशोर, 
नाचे रे मोर, 

कान्हा की बंसी, 
नाद ब्रम्ह जगाए, 
खुशीयाँ छाए, 

🙏🌹पद्माक्षि शुक्ल, 🌹🙏


अग्नि शिखा मंच
दिनांक 11.062021
शुक्रवार
विषय सावन हायकू
1 .सावन का नाम
बरसात से काम
यही पैगाम ।
2 .बरसात मे
सुखे का क्या काम
सावन नाम।
3 .हरियाली है
हर  दिन सुहाना
सावन आना।
4. सावन माह 
नदियां लबालब
है लाजवाब।
5. सावन माह
बरसा की फुहार
सभी को प्यार।
6 . ठण्डा मौसम
बरसा का मौसम
हर कदम।
7 .फसल देख
किसान खुशहाल
बर्षा कमाल।

दिनेश शर्मा इंदौर
मोबाइल 9425350174


अरणीय मंच को नमन
हाइकु ( त्रिपदी)सावन
+++++++++
बादल आए 
नील गगन पर 
जिया लुभाए।
***
सावन आया 
नव रस बरसा
मुदित धरा। 
****
नदी तलइया
जल भर उमड़े
हिय डरपे ।
***
जल की बूँदें
टुप टुप गिरतीं
भीगी धरती ।
***
बरसा पानी
मन में अति खुश
परी सयानी ।
***
घास उगी है
जल गिरने पर
आश है जगी  ।
****
नदिया नाले
कल कल रव में
गीत सुनाते
***
नाविक आना
अपनी नौका लाना
हमें जाना है ।
***
नदी के पार
उस छोटे गांव में
मेरा घर है ।
***
नदी के बीच
लेकर पतवार 
चलें धारा में ।
***
झांकते वृक्ष
लगते हैं सुंदर
जलधारा में ।*
**
मित्र की बात
भला कैसे टाल दें
अच्छा नहीं है ।
-----------
डॉ ब्रजेन्द्र नारायण द्विवेदी शैलेश वाराणसी

*"माँ शारदा को नमन"*

                *"सावन"*
                  *हायकू* 

कैसे कहूँ मैं
सावन आने वाला
भरी गर्मी में

आंधी आयी थी
बरसाया था पानी
सावन जैसा 

सावन आया
वन मे नाचा मोर
हरे  है पेड़


नदिया बही
बादल झुमे गाए
सावन आया
*चन्दा डांगी*

जय मां शारदे
***********
अग्नि शिखा मंच
****************
दिन- शुक्रवार
 दिनांक- 11/6/ 2021 
विषय- सावन 
विधा- *हाइकु* में प्रस्तुत रचना 

आ गए मीत।
मन मेरा गा रहा ।
सावनी गीत। 

घटा है घोर ।
सावन में यौवन।
नाचता मोर ।

सखी सुन री।
पुरवाई है आई ।
ओढ़ें चुनरी ।

दरख़्त कम। 
हरियाली खतम।
सूखा सावन ।

बरखा आई ।
रिमझिम फुहारे ।
मन को भाई ।

रागिनी मित्तल 
कटनी ,मध्य प्रदेश


नमन  अग्नि शिखा मंच 
विषय;-सावन
विधा;-हाइकू
दिनाँक;-11/6/2021
बरसे मेघा
सावन का महीना
मन हर्षाता।।1।।
सावन ऋतु
हरियाली है छायी
 मन को भायी।।2।।
सावन झड़ी
आरंभ हो किसानी
 लगे है भली।।3।।
तप्त धरा पे
सावन की फुहारें
  मन हरषे।।4।।
निहारिका झा🌹🌹🙏🙏
सावन पर हाइकु

सावन आया
हर्षित तन मन
सब को भाया। 

पड़े फुहार
बरसत बदरी
हर्ष अपार। 

वन में डोले
मोर पपीहा अब
कोयल बोले। 

प्रकृति रानी
आंचल लहराये
चूनर धानी। 

बागों में झूले
झूल रही सखियाँ
 गम  को भूले। 

डा. साधना तोमर
बड़ौत (बागपत)



पेड़ लगाओ
परिवेश हो स्वच्छ
इस सावन

वैष्णो खत्री वेदिका
जबलपुर

अग्निशिखा मंच
तिथी ,,११,६,२०२१
विषय,, सावन


 १)  आया सावन
    ठंडा मौसम हुआ
      मनभावन

२) मेघ हैं छाए
 बिजली चमकती
 साजन आए

३) मन तरसाए
कहता है सावन
पिया बुलाए

नीरजा ठाकुर नीर
पलावा डोम्बिवली
महाराष्ट्र


नमन अग्निशिखा मंच
जय माँ शारदे
 प्रतियोगिता हेतु
दिनाँक - 11/6 /2021
विषय- सावन हाइकु

सुन सजना,
सावन आया सुन,
कोयल कुके।

बरखा देख
नाचे मन मयूर,
बहके मन।

आया सावन,
मेरे मन  भावन,
बरसे बूंद।

सुन सजना,
ला हरी- हरी चूड़ी,
पहनूंगी मैं।।

खनके चूड़ी,
करो मनसा  पूरी,
सुन सजना।।

रेखा शर्मा 'स्नेहा' मुजफ्फरपुर बिहार

मंच को सादर नमन
दिनांक  11 /  6 / 2021
दिन       शुक्रवार
*विषय      हायकू ( सावन )*

1) बरखा रानी
     लाई नई उम्मीदें
     खेतों में पानी

2) नैनों का पानी
     रिमझिम बरसा
     मेघ तरसा

3) है समाहित
      कान्हा की मुरली में
      छवि राधा की

  *मीना गोपाल त्रिपाठी*

      🙏सीखने की दिशा में कार्यरत हूं🙏


🌹 आया सावन🌹
         (हायकु) ‌

आ रे सावन
ओ रे मन भावन
आया सावन

आया सावन 
पिया मन भावन
आजा साजन

आ जा आकर
देजा अपना प्यार
छाए बहार

सजनी कहे 
मेरा भी मन चाहे
शर्माऊं काहे

बाहें पसारे
प्रियतम प्यारे
खड़ी हूं द्वारे 

आस लगाए 
हूं नयन बिछाए
क्यूं शरमाए

अब तो आजा
मेरी तृष्णा बुझा जा
गले लगा जा

आ रे सावन 
ओ रे मन भावन
आया सावन
*****************
स्वरचित व मौलिक
डाॅ . आशालता नायडू .
भिलाई . छत्तीसगढ़.
******************


सावन ( हाइकू) --- ओमप्रकाश पाण्डेय
1. झूमती हवा
चले ठंडी ठंडी
 सावन आयो

2. बहके मन
बहके नयनवा 
सवनवा में

3. मेघा गरजे
चमके बिजुरिया
मन हरसे

4. लगे कि ऐसे
बौराइल बा मन
बदरिया में

5. झूला पड़ल
गोरी मारे पेगंवा
सखिंया संग

6.ठंडी फुहार
जब गिरे धरा पे
खिले दिशायें

7.उगले सोना
फिर मोरे खेतवा
मनवा नाचे
( यह मेरी मौलिक रचना है ----- ओमप्रकाश पाण्डेय)

आया सावन
आई ठंडी फुहार
छाई बहार

बरसा पानी
ऋतु आई सुहानी
चूनर धानी

प्यारी धरती
ओढ़े चूनर धानी
वर्षा का पानी

महका वन
पुलकित है मन
खुशी जीवन

पपीहा गाते
भंवरे मंडराते
प्यास बुझाते


शोभा रानी तिवारी इन्दौर


वीना अचतानी, 
अग्निशिखा मंच को नमन, 
विषय**सावन  ** हाइकू ****
1)  सावन आया 
      वसुधा का ह्रदय 
      खिलखिलाया   ।

2)   है रिमझिम 
       सावन की बारिश 
       शायद तू है  ।

3)    हमें  लगता
        रोया करती शाख
       सावन बिना    ।

3)    पात पात में 
        तरू तरू बोलता
        प्रीत के बोल   ।

4)    वसंती वय
        मंडराते भ्रमर 
       अतृप्त चाह   ।

5)     फूलों  फूलों की 
          खुशबु  से चमन
          झोली भर दे  ।

6)      कटे जब से
          हरे भरे जंगल
          उदास  है सावन   ।

7)       पेड़ों के पते
          झूम झूम डोलते
           हवा से बोलते ।

 8)      वर्षा उदास 
           झूमती झालर सी
            बिन बरसे ।।

9)        नहीं  मनता
            कोई  उत्सव
            सावन के बिना  ।

10)      आया  सावन
            बुलबुल  गाती है
             शायद तू है ।।।
स्वरचित मौलिक 
वीना अचतानी 
जोधपुर (राजस्थान)....


अग्निशिखा
11/6/2021 शुक्रवार
विषय-हाइकु (सावन)

बरसे बूंदे
बरसता सावन
मेरे अंगना

सावन सूखा
बिन प्रियतम के
याद सताये

काली घटाएं
रिमझिम बरसे
सावन आया

बरसे पानी
महिना सावन का
ऋतु सुहानी

पिया परदेश
झूला कौन झुलाये
सूना सावन

कोयल बोले
हरियाला सावन
अम्बुवा डाली

फूल खिले है
महका उपवन
सावन आया

धरती गाये
ठुमकता सावन
झूमे गगन

भीगा सावन
धरती जल-थल
मनभावन

सावनी रात
चमकती बिजली
साजन दूर

                  तारा "प्रीत"
              जोधपुर (राज०)


* अग्नि शिखा काव्य मंच*
* शुक्रवार - १०/६/२०२१ 
* विधा - हाइकू 
* विषय- सावन  
* माँ शारदे को वंदन*

सावन ऋतु 
मन भावन आई 
बरसी बूँदे 

आया सावन 
बूंदों की छम-छम
मीठा संगीत 

उमड़ी घटायें 
घनघोर अंधेरा 
झूमाँ सावन 

घरती प्यासी
टूट कर बरसो 
प्रिय सावन 

जीव जगत 
पाता नव जीवन 
आता सावन 

भरी तलैया 
छलक गये ताल 
आया सावन

भाई की आस
बहनों को रहती 
सावन मास 

 सजी है सेज 
पिया मिलन रात 
आया सावन 

सरोज दुगड़
खारूपेटिया , गुवाहाटी
असम
🙏🙏🙏

अग्निशिखा मंच 
विषय -सावन हाइकू 
सावन -हाइकू 

कारी बदरी 
झक झोर बारिस 
मचायें शोर 

सावन भादो 
घन घोर घटायें 
बरसा पानी 

नाचे मोर
उपवन बहार 
 मन मतंग 

कोयल कुक 
पिया मनुहार है  
रास रंग 

 सावन झूम 
मधु मस्त बयार 
कारी बदरी 

सावन आया 
झक झोर बारिस 
शोर मचायें 

आम्र कुँज 
पिहु पिहु बोले रे 
पपिहरा रे 
अनिता शरद झा मुंबई




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1 comment:

  1. सुरेंद्र हरड़े कवि लघुकथाकार
    अग्निशिखा मंच के हायुकू समिक्षक

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