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शब्द नगरी ...

हौंसला बनाये रखना 

१८/५/२०२१


हौसला बनायें रखना 

समय बहुत बदल गया ।।

आज सभी लाचार है ।

धन दौलत सब बेकार है ।।

चीख पुकार  कोई  सुनता नहीं ।

हौसला बनाये रखना ।।

पास आकर सहारा देता नही।।

देख रहे सभी अत्याचार है । 

सबके सब देखो निराधार है ।।

हौसला बनाये रखना 

देखो इन दरिंदों को ।।

पर कुतर रहे पंरिदो के 

दर्द से सब बेज़ार है ।।

अपनों की सहते मार है ।

जग में विपदा भारी आई 

बड़ी बिकट घड़ी है आई ।।

हौसला बनाये रखना 

कितना बेबस है मानव 

लूट रहा आकर दानव।।

साँसों का व्यापार करता 

लाशों का है  ढेर लगाता ।।

सूख रहा आँखों का पानी । 

याद आ रही सबको नानी ।।

हौसला बनाये रखना 

घर बार सभी को निगल रहा । 

कोरोना की भेंट चढ़ रहा ।।

कोई पिता की लाश देख रहा 

कोई बेटे की लाश पर रो रहा 

हौसला बनाये रखना 

सबकी अपनी लाचारी है ।।

कंधा वो दे नही सकते  है । 

कोई नहीं देता है सहारा 

आँसू बहा रहा है बेचारा 

हौसला बनाये रखना 

कोरोना ने सबसे कराया किनारा ।

अपनी जान सभी को है प्यारी

ये दुनिया भी है अजब निराली 

देख जगत के हाल मन है उदास । 

बन गये हैं सब उसके दास 

तब प्रकट हुये भगवान 

हौसला बनाये रखना 

बोले मत रो मेरे बच्चे 

मन  में भर लें हौसला 

बन जा दुखीयों का सहारा 

सबको प्यार की झप्पी दे दे 

कुछ राहत कुछ साँसें  दे दे 

टूटा मन खिल जायेगा 

आँखों का पानी रुक जायेगा 

यह दुनियाँ है मेरी बनाई । 

हौसला बनाये रखना 

कर्मों का खेल होता रहेगा 

कई मंजर आयेंगे जायेगे 

तुम तो अपना काम करो । 

विधी का लिखा हो कर रहेगा ।।

हौसला बनाये रखना 

डॉ अलका पाण्डेय मुम्बई

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