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Tuesday, 18 May 2021

अंधा पीसे कुत्ता खाये .. असावधानी से अयोग्य को लाभ या मूर्खतापूर्ण ढंग से काम करोगे तो फल और पायेग ..

 

अग्निशिखा मंच 
१८/५/२०२१
विषय - अंधा पीसे कुत्ता खाये ..
असावधानी से अयोग्य को लाभ या मूर्खतापूर्ण ढंग से काम करोगे तो फल और पायेग .. 

लघुकथा 

रीमा और सीमा दो सहेलिया, थी , बहुत सुदंर और सुशील रीमा हर काम बहुत सावधानी से करती परन्तु सीमा लापरवाह हमेशा उसकी मेहनत का फल कोई न उठा लेता तब रिमा उसे कहती यह तो "अंधा पीसे कुत्ता खाये " वाली बात हो गई । 
सीमा कहती मैं तेरे समान तेज नहीं हूँ तब रीमा कहती यदि तुम होशियारी से सावधानी से काम करोगी लापरवाही छोड़ दोगी तो तुम भी मेरी तरह सब जगह नाम करोगी । 
सीमा ने सोच लिया अब कभी में असावधानी नहीं करुगी ।
आज क्लास में अचानक मेम ने परीक्षा पत्र दिया और कहाँ सबको एक घंटे में पूरा करना है । 
और सब को अलग अलग बैठा दिया गया सीमा के पास कंचन जो क्लास में फिसड्डी थी , सिमा ने अपना पेपर लिखना शुरु किया क्योंकि उसे सब आता था वह पेपर लिख गई एक ही प्रश्न बचा था की उसे बाथरूम जाना पड़ा वह यू ही उत्तर पुस्तिका खुली छोड़ कर बाथरूम चली गई कंचन ने मौक़े का फ़ायदा उठाया और सीमा की पुस्तक में से सब नक़ल कर उसके कुछ प्रश्न काट दिये यह सब रीमा  ने देखा और टीचर को बता दिया और कहाँ अभी नहीं मेडम रिज़ल्ट के दिनभर सीमा को डाँटना , 
सीमा आई आखरी प्रश्न किया और बुक टीचर को दे ख़ुशी ख़ुशी बहार आ गई
रीमा कैसा रहा पेपर सीमा अच्छा बहुत अच्छा , 
तीन दिन बाद टीचर ने क्लास में रिज़ल्ट सुनाने लगी रीमा  पुरी क्लास में प्रथम और कंचन दूसरे नम्बर पर सीमा फेल , सबका रिज़ल्ट घोषित होने के बाद सीमा रोती हुई टीचर को बोली मैंने सब प्रश्न किये थे , मुझे फेल क्यों कीया आपने , 
तब टीचर ने कहाँ मैंने नहीं फेल किया तुम्हारी असावधानी ने तुम्हें फेल किया "अंधा पीसे कुत्ता खाये "  वाली बात तुम पर लागू होती है । 
फिर उन्होंने सारी बात बता दी और रीमा को ँशैबासी दी की उसने कैसे ...मुझे बता दिया था कंचन कैसे तुम्हारी बुक से नक़ल कर तुम्हारे प्रश्न ही काट दिये थे  , फिर कंचन को बहुत डाटा टीचर ने और सही रिज़ल्ट दिया , कंचन को सजा दी की यदि दुबारा यह करते पकड़ी गई तो स्कूल से बहार , सीमा को कहाँ यह तो क्लास की परीक्षा थी यदि सच्च में फायनल परीक्षा होती तब तो तुम फेल थी सीमा । 
सीमा ने रीमा को गले लगाया और कहाँ आज से अभी से मैं लापरवाही छोड़ती हूँ , अब कोई , " अंधा पीसे कुत्ता खाये " मुहावरा सच्च नहीं होने दूँगी 

डॉ अलका पाण्डेय मुम्बई



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