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अग्निशिखा मंच २४/५/२०२१ कुछ चुनिंदा बाल गीत_agnishikha

अग्निशिखा मंच 
२४/५/२०२१


बाल गीत 
मछली रानी 

मछली जल की रानी है 
बच्चे सुनते उसकी कहानी है 
जल में विचरण करती है । 
करती वह हरदम मनमानी है ॥

पानी को स्वच्छ करती है 
उछल कूद कर हंसाती है ।।
रंग बिरंगी सुनहरी मछली है ।
बच्चो को बहुत लुभाती है ।।

गोल गोल छोटी सी है आँखें 
सुदंर सुदंर नज़ारा दिखाती आंखे 
प्रेम और नफ़रत का फ़र्क़ बताती 
दुश्मनो से सदा बचाती है आंखे 

सुदंर सुदंर पंख सुनहरे न्यारे 
छोटा सा मुख है प्यारा प्यारा 
बच्चे मुझ को देख ताली बजाते 
जल ही मेरे जीवन का सहारा ।।

मैं मँझली जल की महारानी हूँ 
पानी में ही रचती बसती पानी हूँ 
हर मौसम हर रात दिन पानी में रहूँ 
पानी मेरा जीवन पानी ही मेरी कहानी ।।
डॉ अलका पाण्डेयम
🌺आज का विषय 
🌺मछली 
🌺 बाल गीत 
शीर्षक : मछली रानी

मछली रानी मछली रानी
जल में कैसे रहती हो
इधर उधर हो दौड़ा करती
नहीं जरा भी थकती हो।

मछली रानी मछली रानी
ठंडक तुम्हें न लगती क्या?
नहीं कांपती नहीं ठिठुरती
स्वेटर नहीं पहनती क्या?

मछली रानी मछली रानी
कपड़े नहीं पहनती क्यों?
बिन कपड़े के सदा घूमती
मम्मी से ना कहती क्यों?

मछली रानी मछली रानी
जल से बाहर आओ ना
कितना सुंदर देश हमारा
इसे देखकर जाओ ना।

मछली रानी मछली रानी
जल बिन तुम मर जाती क्यों?
जब में तुमको हाथ लगाता
तुम इतनी डर जाती क्यों?

मछली रानी मछली रानी
क्या तुम पढ़ने जाती हो? 
मैडम तुम्हें काम जो देती
उसको तुम कर पाती हो?

मछली रानी मछली रानी
मेरे घर पर आओ ना।
मुझको तुम अच्छी लगती हो
दोस्त मेरी बन जाओ ना।

© कुंवर वीर सिंह मार्तंड, कोलकाता


मछली रानी

 चुन्नू मुन्नू सीमा देखा,
 मछली चतुर सयानी है,
 रंग-बिरंगे सुंदर-सुंदर,
 संसार  उसका पानी है।
प्रेम से  दाना खाती है,
 सबके मन को भाती है,
मछुआरों के जाल में फंसती,
 तो फिर वह डर जाती है,
 घूम घूम कर वह नहाती,
करतब सबको दिखलाती है ,
जल ही उसका जीवन है,
बाहर वह मर जाती है ,
 मित्र बनाएंगे हम तुमको,
 साथ तुम्हारे खेलेंगे ,
दाना तुम्हें खिलाएंगे हम,
 आपस में प्रेम बढ़ाएंगे ।

श्रीमती शोभा रानी तिवारी 619 अक्षत अपार्टमेंट खातीवाला टैंक इंदौर मध्य प्रदेश

अग्निशिखा मंच
तिथि- 24-5-2021
विषय- मछली

छोटी सी प्यारी सी नन्ही सी मछली।
लाल नीली आँखों वाली सुनहरी मछली।

नदी ,तालाब,समुद्र में ही घर बनाती हो तुम।
पानी के अंदर ही जिंदा रहती हो तुम।

लहराती , चंचल, भागती हुई मछली।
जल की रानी कहलाती है मछली।

तुम्हारा एक गुण मुझे बहुत अच्छा है लगता।
झुंड में एक साथ रहने से खतरा है टलता ।

पानी के कीड़ों को खाती हो तुम।
पानी को शुद्ध बनाती हो तुम।

शास्त्रों ,ज्योतिष में शुभ मानते तुम्हे।
बंगाल में सब पूजते तुम्हे।

जैसे हमें भाईयों के साथ घर में रहना अच्छा
लगता।
वैसे ही तुम को,घर का टैंक नहीं, नदी तालाब
अच्छा लगता।

नीरजा ठाकुर नीर 
पलावा डोंबीवली 
महाराष्ट्र

पापा देखो वो मछली आयी ( बाल गीत) ओमप्रकाश पाण्डेय
पापा देखो वो मछली आयी
छोटी छोटी मछली आयी
साथ में अपने बच्चे लायी
सबसे आगे देखो मम्मी है
पीछे पीछे सब उसके बच्चे 
सब मिल मस्ती करते रहते
पापा देखो वो मछली आयी....... 1
वो देखो वो लाल मछली
उसके पीछे  पीली मछली
अरे ये कहाँ से आयी इतनी मछली
कहाँ पे रहती इतनी मछली
चारों ओर मछली ही मछली
पापा देखो वो मछली आयी....... 2
चांदी जैसी चमक रहीं सब
मुंह से बुलबुले पानी की छोड़े
लईया भूजा दाने देते लोग
एक एक दाना खाती घूम कर
पानी में उछल कूद करती रहती
पापा देखो वो मछली आयी....... 3
खूब बड़ी वो मछली देखो
शायद वो रानी मछली है
कैसे लहर लहर कर तैरती
उसके पीछे झुंड मछली की
सब साथ साथ तैरते जल में
पापा देखो वो मछली आयी......... 4
जब भी हाथ बढ़ा कर छुओ
तुरन्त फिसल जाती तेजी से
डर जाती बच्चों को देख कर
पास नहीं किसी के आती है
अपने में ही सब तैरते मस्ती में
पापा देखो वो मछली आयी......... 5
(यह मेरी मौलिक रचना है---- ओमप्रकाश पाण्डेय)

अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच
विषय_मछली पर बाल गीत
मछली जल की रानी है,जानें हम
जीवन उसका पानी है, मानें हम।
ये तो वाटर प्रूफ है,
स्विमिंग की गुरु है।
विशालकाय व्हेल सी होती,
और होती है छोटी भी,
लम्बी सी,पतली सी होती,
और होती है मोटी भी।
कितने सुंदर होते इसके रूप_ रंग
चपलता देख इसकी ,रह जाते दंग
त्वचा में होती इसके लाइट,
अंधेरों में कर सकती फाइट।
सदा तैरती रहती है,
न कभी भी थकती है।
सीखो इनसे ,
मोहब्बत का फलसफा,
जल बिन मर जाती,
 इनसे सीखो वफा।
जन बचाने को करो माइग्रेशन,
ठंडे से गरम, ट्रांजीशन।
दूर गहरे समुन्दर बीच,
मछुआरा जाता है,
जल में फंसाकर, नाव भरकर,
घर लाता है।
उसकी जीविका हो तुम,
पालो उसका परिवार,
देख तुम्हें खुश होता,
चले उसका व्यापार।
ला रखूंगी  तुम्हें,
 घर फिश _पोंड,
बच्चों से कर लेना,
भावुक बोंड।
मैं न रहूं घर पे,
उनका मन लगा देना तुम,
रोते से चुप हो जाएं,
उनको बहला देना तुम।
तुम कितने काम आतीं,
अपना नाम कर जातीं।
जीविका,भोजन,मनोरंजन,
"रानी"करती तुम्हें मन से नमन।।
स्वरचित मौलिक रचना____
रानी अग्रवाल,मुंबई,२४_५_२०२१.

अग्निशिखा मंच को नमन🙏
आज का विषय:-बालगीत
         *मछली*
मछली जल की रानी हो
पानी ही तेरा निवास है।
रंग-बिरंगी मछलियां,बच्चो एवं बड़ों को मोहित करती हो।
मछली जल की रानी हो।।१।।

पानी बिना मछली नहीं,
पर्यावरण की रक्षा करती हो।
डाल्फिन मछली सागर में अठखेलियां करतब करती हो!२!

गोवा, उड़िसा में पुरी अठखेलियां
डाल्फिन का नृत्य देखने पर्यटक 
लोग दृश्य देखने आते हैं नृत्य देखकर खुशियों से झुम उठते हैं! मछली जल की रानी हो।।३।।

राजे-रजवाड़ों महल की शान हो।
घर घर में एक्वेरियम में ही रहती हो। बच्चों की तो लुभावती हो
विघालय से आते ही बच्चे तेरे साथ घंटों तक खेलते हैं।।४।।

हर रंगों में होती हो, कुछ
मछलियां तो पारदर्शी है
जो दिखने में बहुत सुंदर
 हो,मछली जल की रानी हो।।५।।

सारी दुनिया में खाने के
काम आती हो तु रोजगार का साधन हो , बंगाल में 
अचार, पुजा पाठ शास्त्रो,
ज्योतिष काम आती हो।
सच में तुम जल की रानी हो।६।।

शार्क मछलियों का वज़न 
टनों में होता है ,कुछ बड़े
बड़े जहाजों को दुर्घटना होने का धोका रहता है, वह कभी कभी
मुंबई के सागर में दिखती है,
मछली जल की रानी हो।।७।।

सुरेंद्र हरड़े कवि
नागपुर
दिनांक:-२४/०५/२०२१

🙏 अग्निशिखा मंच की प्रस्तुति      विषय --------मछली  (कविता)
।।जल की रानी कैसे कह लाऊंगी।।
🐟🐟🐠🐠🐠🐠🐟🐟

भागी बहुत बेचारी मछली 
हाफ गई तो हारी मछली 
गांव शहर फिरते मछुआरे 
फिरती मारी मारी मछली 
🐬🐬🐬🐬🐬🐬🐬

मछली जा चढ़ी पहाड़ पर ।
बोलो अब ना नीचे आऊंगी ।।
पहले साफ कराओ पानी ।
नहीं तो मैं मर जाऊंगी ।।
🐋🐋🐋🐋🐋🐋🐋

बना घोंसला पेड़ों पर ।
बन सुग्गो संग रह जाऊंगी ।।
गंदे कचरे वाले जल में ।
बोलो कैसे जी पाऊंगी ।।
🐳🐳🐳🐳🐳🐳🐳

सुंदर-सुंदर पंखों वाली ।
कीचड़ से मैं सन जाउंगी ।।
गंदे पानी में रहकर ।
जल की रानी कैसे कहलाउगी।।
🦐🦐🦐🦐🦐🦐🦐🦐

उपेंद्र अजनबी 
गाजीपुर उत्तर प्रदेश।।

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