Tuesday, 18 May 2021

अग्निशिखा मंच की सप्ताहिक प्रतियोगिता समपन्न ।

अग्निशिखा  मंच की सप्ताहिक प्रतियोगिता समपन्न । 



मंच की अध्यक्षा अलका पाण्डेय ने बताया की एक दिवसीय यह प्रतियोगिता का विषय था  "कारे कारे बदरा "

बारिश के आगमन में उसके स्वागत में यह विषय दिया गया था जिसमें क़रीब ६० कवि, कवियित्रीयों ने भाग लिया 

कार्यक्रम का उद्वघाटन  - सुनिलदत्त मिश्री / राइटर एक्टर फ़िल्म - छतिसगढ 

सरस्वती वंदना -

डॉ मीना परिहार -

शोभारानी तिवारी - 

समारोह अध्यक्ष -श्री वल्लभ अंबर ,मुख्य अतिथि - डॉ कुँवर वीर सिंह मार्तण्ड - सम्पादक नव त्रिवेणी - 

विशेष अतिथि 

राम राय - शिक्षक 

आशा जाकड - वरिष्ठ साहित्यकार

जनार्दन सिंह - सम्पादक - भोजपुरी संदेश 

पी एल शर्मा - सम्पादक अमृत राजस्थान थे 

मंच संचालन किया 

अलका पाण्डेय 

संचालन - सुरेन्द्र हरड़ें 

शोभारानी तिवारी ने किया 

कवि , कवियत्रीयों की कुछ झलकियाँ 

शीर्षक-काले काले बदरा 


कारे कारे बदरा ...

बरस बरस बाबूल अंगना जाना 

झम झमाझम बरस कर मेरी पीड़ा कहना !!

पवन हौले होले इठलाना बलखाना 

मेरे उर की अगन को मत हवा तुम देना !!

झमझमाझम बूँदें थिरक रही 

उमड घुमड़ कारी बदरी छा रही 

चपल चपला चमक चमक न डरईयों ! 

कड़कड़ाती बिजली गिर कर जान मत लेलईयों !!

बदरा रे कारे कारे - नीले नीले बदरा बरस बरस बाबूल अंगना जाना 

झम झमाझम बरस कर मेरी पीड़ा कहना !!


डॉ अलका पाण्डेय मुम्बई


काले बादल,काले बादल

कहां छुपे हो आवो ना

गर्मी से सब व्याकुल हैं

आकर तपन मिटाओ ना


श्रीमती शोभा रानी तिवारी इन्दौर


🌺कारे कारे बादल बरस गए घन घन, दामिनी चपला आसमान में ,

चमके है चम चमl


सुषमा शुक्ला🌺


आ आरे कारे बादरा 

तु नेह का जल बरसा

इस महामारी को धो दे रे बादरा

सबको कर दे स्वस्थ 


चन्दा डांगी रेकी ग्रैंडमास्टर 

चित्तौड़गढ़ राजस्थान


चार लाइन

     ओ कारे कारे बदरा

      तुमसे है प्रार्थना

      छम छम कर

      धरती पर आना

       इधर उधर ना भागों

     ओ कारे कारे बदरा।।


सुरेंद्र हरड़े कवि मंचसचालक

     नागपुर


वीना अचतानी, 

शीर्षक  कारे बदरा ।

किनारे पे सब्ज़े का यह लहलहाना, 

परिन्दों  का अशज़ार  पर चहचहाना ।

खुशी  रक्स करती गुलिस्ताॅ में आई, 

हँसे  फूल नन्ही   कली मुस्काई ।

वीना अचतानी, 

जोधपुर (राजस्थान)...

चार लाइन


कारे बदरा


कारे बदरा कब आओगे तुम

गर्मी ने मानो परेशान कर रखा है

कारे बदरा कब आओगे

ना जाने कितना इंतजार करवाएगा।

अभी बस भी करो और आ जाओ सबके सपने पूरे करने और अपने बादलों के साथ सबका दुख से ले जाने।


ऐश्वर्या जोशी कापरे

पुण


अग्निशिखा मंच

कारे बदरा 

 मन करता कारी बदरिया बन नाचूं

 भेदभाव से मुक्त वर्षा का जल बाटूं 

सूर्य की सुंदर किरणों से मै जन्म लूं 

वाष्प में बदल काली बदरिया बन घूमूं

ममतातिवारी इंदौर

उमड़-घुमड़ आए काले-काले बदरा,

प्यार भरे नयनों में मुस्काया कजरा।

डॉ मीना कुमारी परिहार'मान्या'

कारे कारे बदरा छाए

मोर पपीहा आस लगाए

बरसों घनघोर घटा में

धरती अंबर का मेल कराए।

पदमा तिवारी दमोह

कारे बदरा


ओ कारे कजरारे बादल ।

तड़पाते क्यों प्यारे बादल ।।

दर्प छोड़ तू आ धरती पर -

तुम हो सबसे न्यारे बादल ।

बरसो आज रसीले बादल।।

प्रतिभा परासर 

कारे बदरा


धूप की तपन से जब धरती तप जाती 

प्रकृति भी गर्मी से जब कुम्हलाती ।

तो आती है झूम झूम कर कारी बदरी 

रिमझिम-रिमझिम बरसकर सबको

ठंडक पहुंचाती ।

           रानी नारंग

ओ बदरा अब की ज़ब भी आना

              तुम खुशहाली ही लाना,


कही अति बरस मत जाना

    तो कही प्यासा ना रख जाना


हेमा जैन, इंदौर

ये बदरा करोना बरसा रहे हैं ।

   नित नई व्याधि बिखेर रहे है।

मगर ये फसल कब रहेगी,

   एक दिन तो उसे कटना पड़ेगा।

     एक दिन तो कारे बदरा जाना पड़ेगा।

🙏 श्रीवल्लभ अम्बर🙏

राह तकती खड़ी है धरती

आये न क्यूं  बदरा कारे

सूखे हैं धानी आँचल उसके

*सूखे हैं उसके परिधान सारे!

मीना गोपाल त्रिपाठी

कारे कारे बदरा आजा

मेरे दिल की अगन बुझा जा

काहे दिल में आग लगाये

दिल की धड़कन और बढ़ाये  ...


चंद्रिका व्यास

कारे कारे बदरा मन मे

प्रित जगाये।

दूर देश गये मेरे प्रितम

लौट के घर ना आये।

जा बरसो वही देश पिया

के जहाँ सौत संग इतराये

कारे कारे.।।।।।

बिृज किशोरी त्रिपाठी 

आसमान में घोर घटाएं, 

कारे    बदरा   छाये   है। 

कड़ी धूप में तपती धरती, 

नयी   उमंगें   जगाये  हैं। 

डा. साधना तोमर


आसमान  में घिर आये काले काले बदरा,

गर्मी को आँख दिखाते,जल से भर जाते ये बदरा।

उमड़ घुमड कर शोर मचाते ये बदरा।

बहा ठंडी हवा,प्रीतम की याद दिलाते ये बदरा।

नीरजा ठाकुर नीर

मंच को नमन

विषय:--कविता शीर्षक कारे बदरा

चार पंक्ति

कारे बदरा कब आओगे,

कब बरसो गए मेरी नगरिया।

गर्मी से बेहाल है मेरी नगरिया,

तुम घन घन शोर मचाना

सूरज की गर्मी से हमें बचा लेना


विजयेन्द्र मोहन।

कारे-कारे बदरा अम्बर पर छाए रहे

घनघोर घटाएं उमड़ घुमड़ बरसत जायेँ

सुन री सखि बदरी कजरी गीत गायेँ

आओ हिलमिल हिंडोला झूलत जायें।

डा अँजुल कँसल"कनुप्रिया"🌹


इसी तरह मंच गुलजार रहा 


प्रति भागी कवि ,कवियत्री 

यहाँ नाम जोडते जाये 

रजनी अग्रवाल जोधपुर

शोभा रानी तिवारी इन्दौर

रानी नारंग इन्दौर

ममता तिवारी इन्दौर

दिनेश शर्मा

शेखर रामकृष्ण तिवारी

ओम प्रकाश पांडे

वीना आडवानी"तन्वी"

रेखा शर्मा "स्नेहा" मुजफ्फरपुर 

पूनम Sharma स्नेहिल राँची झारखंड

डा अँजुल  कंसल"कनुप्रिया"स्मिता धिरासरिया  बारपेटा रोड 

ज्ञानेश कुमार मिश्र अजमेर 

विजयेन्द्र मोहन ,गुलाबचंद पटेल अहमदाबाद

डॉ सरोजा मेटी लोढया कर्नाटक , रविशंकर कोलते नागपुर ,चन्दा डांगी चित्तौड़गढ़ , बृजकिशोरी त्रिपाठी गोरखपुर डॉ  गायत्री खंडाटे, हुबली कर्नाटक

नीलम पाण्डेय 

वैष्णो खत्री वेदिका

जबलपुर मध्यप्रदेशअनिता शरद झा मुंबई , डां मीना कुमारी परिहार, बिहार

वीना अचतानी , कल्पना भदौरिया "स्वप्निल "उत्तरप्रदेश , हेमा जैन इन्दौर 

उपेंद्र अजनबी गाजीपुर उ.प्र.

कुमकुम वेद सेन , रानी अग्रवाल मुम्बई, अंशु तिवारी पटना , मीरा भार्गव

रागिनी मित्तल कटनी

सुषमा शुक्ला ,निहारिका झा हीरा सिंह कौशल हि.प्र., सुनिता अग्रवाल इंदौर ,द्रोपती साहू "सरसिज, नीरजा ठाकुर नीर, श्रीवल्लभ अम्बर, चंद्रिका व्यास , पद्मा तिवारी दमो , अंजली तिवारी मिश्रा जगदलपु र , आशा लता नायडूस , कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड,  कोलकाता

ऐश्वर्या कापरे , डॉ ब्रिजेन्द्रनारायण तिवारी 

उमेश कंक्कड प्रयागराज 

देविप्रसाद पांडेय प्रयागराज 

राम राय , सुनिलदत्त मिश्रा , पी एल शर्मा , डॉ कुँवर वीर सिंह मार्तण्ड , जनार्दनसिंह सुरेंद्र हरड़े मंचसचालक

डॉक्टर रश्मि शुक्ला प्रयागराज , दविंदर कौर होरा

मीना गोपाल त्रिपाठी

जनार्दन शर्मा इंदौर

डॉ साधना तोमर


संयोजक - अ.भा.अग्निशिखा मंच 

डॉ अलका पाण्डेय 

चंदेल साहब 

नीरजा ठाकुर 


शोभा तिवारी , चन्दा डांगी, सुरेन्द्र हरड़ें , रानी अग्रवाल 


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1 comment:

  1. बहुत ही बढ़िया 🎊 🎊 🎊 🌹 🌹 🌹 🌹 🌹 बधाई एवं शुभकामनाएं जी

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