Friday, 17 September 2021

अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच के ब्लॉक पर आज आप सब लोग भक्ति गीत पढ़िए और आनंद ले डॉ अलका पांडे मुंबई

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17/09, 7:08 pm] Alka: ब्रह्मा विष्णु ओ और सदा शिव सब मैं तेरी शक्ति माँ 
कभी तू तब गौरी माँ  कभी तू कमला मां कभी काली का रुप माँ !!
माँ तू ही बता कैसे तुझ को रिझाऊँ । 
कदम कदम पर खाई बड़ी भारी खाई ।.
दुखों ने घेरा है संताप का डेरा है 
किस विधी चल कर आऊँ । 
तेरी मर्ज़ी से ही सब काज बने 
तेरी मर्ज़ी से ही सबके भाग्य बने 
ना ना प्रकार के खेल खिलाती माँ ।
तेरी महिमा कोई न जाने , चुटकी में काम बनाती माँ ।।
तू ही शक्ती तू ही भक्ती तू ही विघा तू बसी हर नारी में 
माँ राम भी तू रावण भी तू ही युद्ध का चक्रव्युह रचाती ।।
कभी ज्वाला बन सागर उदर समाती ,कभी पूजा की पावन ज्योत बन प्रकाश फैलाती ।।
कालचक्र का पहिया तेरे हाथों में 
जब जिधर देखे उधर नाच नचाती ।।
चली आती हो शक्ती बन नवरात्री में ,अंखड ज्योत जहां जलती , वहीं के सब पाप मिटाती । 
मनोकामना सबकी पूर्ण करती ।।तुम मस्तक का चंदन हो फूलों की बगिया हो । 
माँ तुम सब कुछ हो सारी दुनियाँ हो । 
माँ चांद जैसी शीतल मख़मल सी नर्म । 
माँ दुर्गा अवतर्णी माँ सबकी वैतरणी , माँ धर्म माँ कर्म ।।
सुख दुख के भंवर में फँसी जीवन नैया । 
कभी डूबती कभी उबरती कोई नहीं खैवेया ।।
भय समाया ह्दय में सुध बुध खोई 
याद कर मैया तुम्हें बार बार फूट फूट कर रोई ।।
पाप पूण्य का चक्कर समझा दे मैया । 
धर्म कर्म का ज्ञान बताते मैया ।।
जीवन सफल बना दे मैया 
कुछ शक्ती मुझ में भर दे मैया 
डॉ अलका पाण्डेय मुम्बई
[17/09, 7:10 pm] सुरेन्द्र हरडे: अग्नि शिखा मंच  मुंबई
    भक्ती गीत

        *राम भजन*

छोड़ दे बुराई त्याग दें अविचार 
   कर भजन प्रभु का,
             करले बेड़ा पार ।।धृ

प्रभु भजन से कभी होती नहीं हानी ।।
अहंकार ना कर तू मत कर मनमानी ।।
     मन में ईश्वर को  तू निहार ।।‌१

रामके मर्जी बिन  एक पत्ता भी न
हिले ।
भक्ति कर प्रभुकी सुखशांति मनको मिले ।।
     वो दुखकी नाव लगाएं पार।।२

कवि -- सुरेन्द्र हरडे 
                नागपुर
दिनांक 17/09/2021
[17/09, 7:25 pm] हेमा जैन 👩: *गणेश भक्ति गीत*


करती हूँ वंदना तेरी गणपति
करती हूँ वंदना तेरी गणपति 
रह ना जाए मेरी ये भक्ति आधी
ये भक्ति आधी,

चतुर्थी को तुम पधारे
चतुर्थी को तुम पधारे 
घर -घर आकर तुम विराजे
तुम विराजे,

दस दिवस तक सब करते अर्चना
दस दिवस तक सब करते अर्चना
भक्ति भाव की सी लहर उठती
जैसे लहर उठती,

आकर सभी तुम विघ्न हरते
आकर सभी तुम विघ्न हरते
और हमको भवपार कराते
भवपार कराते,

करती हूँ वंदना तेरी गणपति
करती हूँ वंदना तेरी गणपति
रह ना जाए मेरी ये भक्ति आधी
ये भक्ति आधी

करती हूँ वंदना तेरी गणपति


*हेमा जैन **(स्वरचित )
[17/09, 10:48 pm] आशा 🏆🏆जाकड इन्दौर: गजानन आना बारम्बार
  खुशियाँ लाना अपार ।।
विघ्नों की हर्ता, कष्टों के हर्ता हो मंगल दायक ,
प्रथम पूज्य हो शंकर नंदन हो सिद्धि विनायक,
तुमसे ही समृद्धि आवे हो सुख- शांति का भंडार।
खुशियाँ लाना अपार ।

अज्ञान का छाया अंधेरा कर सकते हो उजेरा
विपदाओं का लगा है डेरा करोना रूप  घनेरा 
करोना से सब त्रस्त हुए संकट कर दो निवार।
खुशियाँ  लाना अपार ।

काम शुरू करते हम पहले नाम तुम्हारा लेते,
वंदन करते, अर्चन करते और आरती  करते,
मोदक भोग लगाएं गजानन आशीष की बौछार।
खुशियाँ लाना अपार ।


आशा जाकड़
9754969496
[17/09, 10:54 pm] डा. अंजूल कंसल इन्दौर: गणपति आयो रे 

नाचत गावत गणपति आयो रे 
संग साथ रिद्धि सिद्धि लायो रे 

आरती थाल सजाओ रे 
स्वर्ण कलश भरावो रे 
बार-बार चँवर डुलावो रे 
नाचत गावत गणपति आयो रे-----

ढोल नगाड़े बजावो रे 
द्वारे बंदनवार लगाओ रे
 हिलमिल गीत गाओ रे 
नाचत गावत गणपति आयो रे-----

गणपति आरती गावो रे 
शुभ लाभ सथिया बनावो रे 
जगमग ज्योत जलावो रे 
नाचत गावत गणपति आयो रे------

लड्डुअन का भोग लगाओ रे 
मेवा माखन मिश्री खिलाओ रे 
पार्वती नंदन को मनावो रे 
नाचत गावत गणपति आयो रे ----
संग साथ रिद्धि सिद्धि लायो रे------ 

डा अँजुल कंसल "कनुप्रिया"
17-9-21इंदौर मध्यप्रदेश






[17/09, 11:09 am] सरोज दुगड गोहाटी: * अग्नि शिखा काव्य मंच * 
* शुक्रवार १७/ ९/ १०२१ 
* विधा - भक्ति गीत *

सदगुरू शरण में जाइए मेटे मन अंधियार,
भव के संचित कर्म मल पल में ही झड़ जाए !

 ज्ञान ,दर्शन, चारित्र, तप ले लो शरणां चार ,
 आत्मा का कल्याण मोक्ष मार्ग विख्यात !

  सुख- दुख होता सदा कृत कर्मों का खेल ,
  ईश्वर कुछ करता नहीं आत्म कृतत्व होए !

 अजर अमर है आत्मा इसका नाश नां होए ,
 मरण शील काया तेरी कब तक रखनां मोह ?

इन्द्रियों का संयम् कर चित का निग्रह होए ,
आत्मा से आत्मा का स्पर्श तूंँ परमात्मा होए !

मुक्त जीव परमात्मा आवागमन मिटाए 
सिद्ध शीला जा बैठिये आठों कर्म खपाए !

जो हम पाना चाहते वह सब है हमारे पास ,
आत्मा उद्बावरोहणं चेतना का साक्षात्कार

सुख क्या है और दुख क्या मन में होता प्रश्न ?
भोगोपभोग में सुख नहीं त्याग से मिलजाए !

महाश्रमण से गुरू मिले नंदनवन सा संघ ,
मैं हूं शरण तिहारी भव - भव के मेटो बंध !

सरोज दुगड़
खारूपेटिया 
असम 
🙏🙏🙏
[17/09, 11:16 am] Anita 👅झा: विषय -भक्ति -गीत 
*माँ सरस्वती की वंदना करता इतिहास है *
अवतरण दिवस उजालों के दीप है 
जीवन नैया भवसागर पार लागते है 
उजालों का दीप जला हिंदुस्तान है
गाँधी बापू मोदी रचित हिंदुस्तान है 

प्रेम उजालों का दीप जलाये 
आओ मिलकर दीप जलाये 
आशाओं का संचार जगाये 
मानवता का संचार जगायें 

विश्वास ,श्रद्धा ,भक्ति ,त्याग से 
रिश्तों की डोर को मज़बूत बनाए
वसुद्धेव कुटुम्बक अस्तित्व जगायें 
उजालों का दीप हिंदुस्तान जगायें 

रामचरित सत्कर्मो का इतिहास है 
नवजागरण हिन्दुस्तान मान बढ़ा है 
उजालों का दीप जला हिंदुस्तान है 
महिमा मण्डित से हिंदुस्तान है
अनिता शरद झा रायपुर
[17/09, 11:17 am] 💃वंदना: विषय भक्ति गीत
गणेश वंदना

आओ गजानन गौरी के लाला
शिव शंकर के लाल गणराज
सब देवन में देव कहाए 
महिमा तुमरी बरणी ना जाए...

आओ गजानंद गोरी के लाला
शिव शंकर के लाल गणराज।

खजराना दरबार लग्यो है
खाली हाथ भगत नहीं जाएं
जो जो मांगे सो सो दे वे
महिमा तुमरी बरणी ना जाए...

आओ गजानंद गोरी के लाला
शिव शंकर के लाल गणराज।

रिद्धि सिद्धि भरतार कहांए है
मोदक लडु़वा के भोग लगाए
भगत की नैया पार लगाएं
महिमा तुमरी बरणी ना जाए...

आओ गजानंद गोरी के लाला
शिव शंकर के लाल गणराज।

कर जोड़ू मैं करूं वंदना
गणपति लागू तुमरे पांय
दर्शन की मोरी अखियां प्यासी
तुमरी महिमा बरणी ना जाए...

आओ गजानंद गोरी के लाला
शिव शंकर के लाल गणराज।

वंदना शर्मा बिंदु 
देवास मध्य प्रदेश
[17/09, 11:17 am] रवि शंकर कोलते क: #***श्री गणेश वंदना***#
          ^^^^^^^^^^

हे लंबोदर गजमुखा ।
             हे देवा गणपति ।।
हम बालक हैं तेरे ।
             दीजे ज्ञान सुमति ।।धृ

विष्णु शिवशंकर तेराही ध्यान करते ।।
इंद्र चंद्र भी तेराही गुणगान करते ।।
हे भोलचंद्र मोरया ,
                  हरो विघ्न दुर्गति ।।१

सब देवों में तुम्ही प्रथम पूजे जाते ।।
तेरे पूजनसे सब काम सफल होते ।।
हम आये शरण तेरे ,
                  हो हमारी प्रगति ।।२

प्रा रविशंकर कोलते
      नागपुर ,३०
           महाराष्ट्र ।
[17/09, 11:23 am] रागनि मित्तल: जय मां शारदे
************
 अग्नि शिखा मंच 
दिन -शुक्रवार 
दिनांक -17/9/ 2021 प्रदत्त विषय- *भक्ति गीत* 

कैसे बताएं श्याम ने क्या- क्या नहीं दिया।
अपने गले लगा कर मुझे हंसना सिखा दिया।

खाता रहा हूं ठोकरें दर-दर की उम्र भर, 
मंजिल का मेरे श्याम ने रास्ता दिखा दिया 
अपने गले लगा कर मुझे हंसना सिखा दिया ।

गिरता रहा हूं उम्र भर उड़ने की चाह में,
बाहें पकड़ के श्याम ने चलना सिखा दिया।
अपने गले लगा कर मुझे हंसना सिखा दिया।

तड़पा हूं जिनकी चाह में रातों को जाग कर ,
सपना वो मेरे श्याम ने दिन में दिखा दिया ।
अपने गले लगा कर मुझे हंसना सिखा दिया ।
कैसे बताएं श्याम ने क्या क्या नहीं दिया ।

रागिनी मित्तल 
कटनी, मध्य प्रदेश
[17/09, 11:51 am] डा. महताब अहमद आज़ाद /उत्तर प्रदेश: "यह देश हमारे लिए परिवार हमारा"

देश हमारा है, यह देश हमारा!
उर्दू का, हिंदी का है साझा यह गहवारा!! 
देश हमारा है, यह देश हमारा! 
सारी दुनिया में सुंदर है और है न्यारा!
देश हमारा है, यह देश हमारा!! 

शांति का प्यार का है न्यारा यह वतन! 
सूफियों का साधुयों का प्यारा यह चमन!! 
शृषियों का मनीवियों का संतों का वतन!!
गानियों, विघानियों और भोगियों का यह वतन!! 
नदियोंं में बहती है यहाँ दूध का धारा! 
देश हमारा है, यह देश हमारा!! 

प्यार के सदभाव के यहाँ गीत ग़ज़ल है! 
मुहब्बत की निशानी एक ताज महल है!! 
ईद के दीवाली के है, होली के मेले! 
मिलजुल मनाते है सभी नही रहते अकेले!! 
सब एक ही ईश्वर के बंदे, गूंजता नारा! 
देश हमारा है, यह देश हमारा!! 

मंदिरों के कलश ऊँचे, ऊँची मीनारें!
सबकी भलाई चाहतें गुरूओं के गुरूदारें!! 
भाई सेभाई के यहॉ रिश्तें है पुरानें!
ताऊ,चाचा,,भाई, भाभी प्रेम के गाने!! 
यह देश हमारें लिए परिवार हमारा!
देश हमारा है, यह देश हमारा!! 

डा. महताब अहमद आज़ाद 
उत्तर प्रदेश
[17/09, 11:51 am] वैष्णवी Khatri वेदिका: रक्षा कवच

आकर्षक काया तेरी 
सुख व शांति लाए।
किरणों जैसी आभा तेरी 
उजाला लाए।
सबसे पहले पूजा तेरी 
करते हम सब।
तेरा आशीर्वाद मन-माँगी 
मुरादें लाए।

मन्दिर में धूप व दीपों की
 ज्योति जलाएँ।
अपने हृदय के मंदिर में
 झांकी सजाएँ।
रक्षाकवच वरदान पाकर 
हम न अघाते।
भोले भंडारी के सुत को 
मन में बिठाएँ।

वैष्णो खत्री वेदिका 
 जबलपुर
[17/09, 12:00 pm] आशा 🌺नायडू बोरीबली: 🌹 भक्ति गीत🌹
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जय जय गण देवा 
***************
🌷🌷🌷🌷🌷
शक्ति दायक बुद्धि विनायक गणपति देवा जय जय गण देवा ।

 एकता के प्रतीक गजानना सूप कर्ण ,सूक्ष्म नेत्र, लंबोदर विनायका जय जय गण देवा ।

एकदंत  
वक्रतुंडाय मूषक वाहक विवेकशील, सुख समृद्धि प्रदायका जय जय गण देवा ।

 बाधाओं को हरने वाले सब के तारणहार विवेकशीलता के परिचायका निर्मलता प्रदायका
हे प्राणाधार
जय जय गण देवा ।

हे जगवंदन ‌ संकर सुवन भवानी नंदन
हे , ओमकारेश्वरा
जय जय गण देवा

हे , अनंत कोटि ब्रह्मांड नायक
 शास्त्रों के ज्ञाता प्रथम पूज्य गणपति देवा जय जय गण देवा 
जय जय गणेश देवा
जय जय गणपति देवा

********************
डाॅ . आशा लता नायडू .
भिलाई . छत्तीसगढ़ .
********************
[17/09, 12:17 pm] 👑मीना त्रिपाठी: *प्रार्थना गजानन से*

हे!गजानन पधारो..पधारो घर हमारे!
बेकल हैं नयना.. बेकल हैं उर हमारे!

देखो कैसी ये हवा चली है
कैसे मन में सबके मैल जमी है
कर दो पावन हर हृदय प्रभुजी!
दो निश्छल संसार प्रभुजी!

हे!गजानन पधारो..पधारो घर हमारे!
बेकल हैं नयना.. बेकल हैं उर हमारे!

धरम - अधर्म जाति- पाती का
मन से सबके बैर हरो जी!हे!प्रभुजी!
बसे अनेकता में फिर एकता
ऐसा ही आशीष दो प्रभुजी!

हे!गजानन पधारो..पधारो घर हमारे!
बेकल हैं नयना.. बेकल हैं उर हमारे!

    *मीना गोपाल त्रिपाठी*
   *17 सितम्बर 2021*
[17/09, 12:19 pm] वीना अचतानी 🧑🏿‍🦽: वीना अचतानी 
मंच को नमन
विषय ****भक्ति गीत *****
बृज के नन्दलाल, राधा के साँवरिया 
सब दुख दूर हुए, जब तेरा नाम लिया 
मीरा ने पुकारा तुम्हें, गिरधर गोपाला
भर गया अमृत से ,विष का भरा प्याल
कौन मिटाये उसे, जिसे तुने राख लिया
जब तेरी गोकुल पर,आई विपदा भारी
एक इशारे से , सारी विपदा टाली
नैनो में श्याम बसे, मन में बनवारी
सुध बिसराय दई,मुरली की धुन प्यारी
देख रहे हो तुम, मेरे दुखड़े सारे
कब दर्शन दोगे ,नयनों के तारे।।।
वीना अचतानी 
जोधपुर ।।।।
[17/09, 12:23 pm] Anita 👅झा: भक्ति -गीत
  विषय -विसर्जन 
शीर्षक *-सिद्ध हस्त गणपति* 
आया रे आया रे गणपति आया 
सुखकर्ता विघ्नहर्ता गणपतिआया
मनोभाव संचित कर श्रद्धा भक्ति 
विश्वासों के दीप जलाने आया 

अंतरमन स्नेह प्रेम अविरल लाया 
राह दिखाते महिमा मण्डित लाया
ज्ञान तपस्या त्याग सत्कर्म आस 
लिए तिलक एकता संचार जगाया 

सूरत से सीरत भले ,उदर पुष्ट भेद 
करे , विसर्जन दुर्गुणो का 
सूक्ष्म नयन विशाल कर्ण लक्ष्य भेद 
जग में रह अस्तित्व समझाया 

प्रथमपूज्य गणपति गौरी कहलाये हो !
विदाई रंग गुलाल नित्य गीत संग !
फिर ज्ञान दीप जलाने आते हों !
हे गणपति हे सिद्धिविनायक हों
अनिता शरद झा रायपुर
[17/09, 12:51 pm] Nirja 🌺🌺Takur: अग्निशिखा मंच
तिथि-१७-९-२०२१      
विषय- भक्ति गीत
   गणपति वंदना

गणपति हो तुम शंकर के प्यारे 
मां गौरा के राज दुलारे 
कार्तिक के तुम हो भाई
ऋध्दि-सिध्दि के हो पति प्यारे

मोदक लड्डू तुमको भाये
मूषक राज तुम्हें सवारी करायें
संकट सबके हर लेते हो
भक्त जन तुम्हरे गुण गायें

गई मां स्नान को,व्दार पर तुम्हें बिठायें। 
रोका व्दार पर,शंकर जी जो अंदर जायें
काटा सिर जो शंकर जी को आये क्रोध 
गज शिशु का फिर शीश लगायें

प्रथम पूज्य कौन हो,हुआ इस पर विवाद
किसकी पूजा पहले हो,किसको हो बाद
शिव ने कहा ब्रह्मांड के लगाओ चक्कर
पहले आये मेरे पास सबकी पूजा उसके बाद

माता पिता ही ब्रह्मांड हैं मेरे
मातापिता के लगाये सात फेरे
पहले पहुंचे गौरा शंकर के पास
आशीष पाये,पहली पूजा होय तुम्हारे

नीरजा ठाकुर नीर
पलावा डोंबिवली
महाराष्ट्र
[17/09, 1:24 pm] 👑सुषमा शुक्ला: ओम गण गणपतए नमो नमः 🙏 ओम सरस्वती नमो नमःl
पावन मंच को प्रणाम🙏


*मां का भक्ति गीत*

🌹हे मां जगत जननी तेरा दर प्यारा लगे तुझसे जो प्रीत लगाई, वही हर पल नियारा लगे।🌹

असुरों का संहार किया, जग को तुमने तार दिया, भक्तों पर उपकार किया, हमने तुझको प्यार किया।🌹

तेरे दर पर जो भी आता, मांगी मुराद पूरी पाता, तेरे दर्शन के अभिलाषी, हर पल में शिश नवाती।🌹

हे जगदंबे मात भवानी ,तू ही जग की महारानी, जग की तारणहार है तू, संसार का उद्धार करें तू।🌹

तेरे द्वारे शीश झुकाऊ, कोरोना से मुक्ति पाऊ,
हर पल तेरी चौखट पर आऊं, तुझसे ही मैं प्रीत लगाऊ।🙏



सुषमा शुक्ला इंदौर
स्वरचित
[17/09, 1:41 pm] कुंवर वीर सिंह मार्तंड कोलकाता: शुक्रवार -17/ 9/ 2021
विषय -भक्ती गीत /
आज बंगाल में विश्वकर्मा पूजा हो रही है। जितने तकनीकी प्रतिष्ठान हैं सब धूम धाम से पूजा में जुटे हैं। अतः आज मैने भी विश्वकर्मा की वंदना ही लिख डाली। सबको विश्वकर्मा पूजा की शुभ कामनाएं। आज हमारे प्रधान मंत्री मोदी जी का जन्मदिन भी धूमधाम से मनाया जा रहा है। वो भी विश्वकर्मा के काम को और आगे बढ़ा रहे हैं। उन्हें भी जन्मदिन की हार्दिक शुभ कामनाएं।

विश्वकर्मा की वंदना

जय विश्वकर्मा देवा, जय विश्वकर्मा देवा।
अग जग के अभियंता, नित्य करें सेवा।
जय विश्वकर्मा देवा ,.....

वास्तु तुम्हारे पिता, धर्म के सुत जो कहलाते।
धर्म, ब्रह्म के पुत्र, ईश से हैं सीधे नाते।
जय विश्वकर्मा देवा ….

मनु, मय, त्वष्टा, शिल्पी सुत हैं और देवज्ञ कहें।
भिन्न भिन्न शिल्पों में सब पारंगत है।
जय विश्वकर्मा देवा ….

लोहा लकड़ी तांबा कांसा, ईंट और सोना।
शिल्प कला के विविध क्षेत्र में अभी बहुत होना।
जय विश्वकर्मा देवा ….

सतयुग में था स्वर्ग बनाया, त्रेता में लंका।
द्वापर में द्वारिका बनाकर बजा दिया डंका।
जय विश्वकर्मा देवा ….

रचा हस्तिनापुर तुमने ही, पुरी सुदामा की।
चक्र सुदर्शन, इंद्र बज्र, कुछ छोड़ा ना बाकी।
जय विश्वकर्मा देवा ….

शिव त्रिशूल हथियार देवताओं के हैं जितने।
आभूषण रच दिए देवियों परियों ने पहने।
जय विश्वकर्मा देवा …

पृथ्वी पर जितनी रचनाएं सब विश्वकर्मा की।
तकनीकी दुनिया में उनसे कुछ न रहा बाकी।
जय विश्वकर्मा देवा ….

विश्वकर्मा का वंदन जो नर, प्रेम सहित करते।
निशि दिन उन्नति करते, जग में नए रंग भरते। 
जय विश्वकर्मा देवा ….

© कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड, कोलकाता
[17/09, 1:41 pm] शुभा 👅शुक्ला - रायपुर: जय श्री गणेशा
🌹🌷🌹🌷🌹
हे गणराज गजानन वंदन मुसक पर बैठे सुखनंदन
पार्वती तुम्हें गणु पुकारे महादेव सुत हे अभिनन्दन

अद्भुत रूप शौर्य के स्वामी एकदंत लंबोदर ज्ञानी
महिमा क्या और कैसे सुनाए इनका जग में नहीं कोई सानी
 
क्रतिकेय सम ज्येष्ठ भ्राता ऊषा के तुम लाडले भ्राता 
 रिद्धि सिद्धि के पति परमेश्वर कहलाओ तुम बुद्धि विधाता 

मात पिता की कर परिक्रमा प्रथम पूज्य का आशीष पाय
सबकी इच्छा पूरण करते विघ्न विनाशक तुम कहलाए

लड्डू और मोदक तुम खाते सबसे ज्यादा तुम्हे ये भाते
 माता पार्वती पूजा जो करती छुपकर लड्डू चट कर जाते 

सबकी विनती सुनते दाता मेरी तरफ क्यों ध्यान ना जाता 
क्या मै इतना दुराचारी हूं मेरा संकट टाला नहीं जाता 

 गणराजा इतनी बस विनती माफ कर दो अपनी सब गलती 
 हम सब आए शरण तुम्हारी अब तो बहा दो करुणा तृप्ति

वक्रतुंड तुम महाकाय हो सूर्य के जैसे तेजोमय हो
कृपा करो प्रभु गजवदना तुम दया से भरे सागर हो।।

शुभा शुक्ला निशा
रायपुर छत्तीसगढ़
[17/09, 1:54 pm] ♦️तारा प्रजापति - जोधपुर: अग्निशिखा मंच
17/9/2021शुक्रवार
विषय-भक्ति गीत

अंदर के पट खोल......

मन्दिर के पट
बन्द तो क्या?
अंदर के पट खोल रे,बन्दे---
हरिओम हरिओम बोल।

अंदर तेरे राम रमईया
अंदर बहती गंगा मैया,
अंदर भोले नाथ विराजे
बंसी बजाये मधुर कन्हैया,
बन्द आँखे खोल, रे बन्दे....
 हरिओम हरिओम बोल।

झूठी माया,झूठी काया
मनुज इसमें क्यों भरमाया,
छोड़ के सब कुछ यही है जाना
जीवन भर जो तूने कमाया,
ग़फ़लत में मत डोल रे,बन्दे......
 हरिओम हरिओम बोल।

लाख चौरासी काट योनियां
आख़िर जन्म मानुष को पाया,
पशुओं वाले कर्म तू करता
खाया सोया और बस जाया,
मनुष्य जन्म अनमोल रे बन्दे....
 हरिओम हरिओम बोल।

लेख ललाट का मिटे न भाई
है पत्थर पे लकीर,
जो आया सो जायेगा
राजा, रंक फ़क़ीर,
 बदल जाए कब खोल रे,बन्दे......
हरिओम हरिओम बोल।।
                          तारा। "प्रीत"
                        जोधपुर (राज०)
[17/09, 1:55 pm] 💃💃sunitaअग्रवाल: गणेशजी की प्रार्थना 

रास्ते पर पड़े पत्थरो को भी ,
सरताज बनते देखा है,

गली के फकीर को भी , महाराज बनते देखा है,

गूंगे को भी जयकारा लगाते हुए देखा है,

बहरे को मंगलपाठ सुनते हुए देखा है,
झुकाकर शीश, रगड़ते नाक, 
खजराना के गनु बाबा धाम में
हर असंभव को संभव होते देखा है,

है गणेश जी , मेरे संग मेरा पूरा परिवार इस ग्रुप के सभी भाई बहन को उत्तम स्वास्थ्य, सुन्दर मन, धर्म धन दौलत से भरा पूरा रखना। 🙏
जय गनु बाबा की , खजराना गणेश धाम की।🙏
🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
सुनीता अग्रवाल इंदौर मध्यप्रदेश स्वरचित 🙏🙏🌹
🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹🌹
[17/09, 1:56 pm] निहारिका 🍇झा: नमन अग्निशिखा मंच 
विषय-भक्ति आराधना
दिनाँक-17/9/2021
जय माँ शारदे।
माँ शारदे माँ भगवती 
तू कौशिकी ,वागीश्वरी 
मुझे ज्ञान दे मुझे तार दे।
तू श्वेत कमलों में बसी ,
वीणा तेरे है कर सजे।
मुझे ज्ञान का वरदान दे।।माँ शारदे....।।1।।
घट घट में तेरी है छवि 
करुणा मयी ममता मयी
तेरे प्रेम से दुनिया बनी
मुझे प्रेम दे मुझे ज्ञान दे।    

माँशारदे...।।2।।
तेरे दिव्य ज्ञान प्रकाश से
तम दूर हो मिले रौशनी।
अपनी शरण में मुझको ले
माँ भारती माँ भगवती!
मुझे ज्ञान का अधिकार दे।माँ शारदे..।। 3।। 🙏🌹
निहारिका झा
[17/09, 2:37 pm] ओम 👅प्रकाश पाण्डेय -: भज मन जय सियाराम ---- ओमप्रकाश पाण्डेय
कण कण में है सीताराम
जिधर भी देखो सीताराम
सबके प्यारे सीताराम
सबके तारक सीताराम
भज मन जय सियाराम...... 1
दशरथ के प्यारे सीताराम
कौशल्या के प्यारे सीताराम
लक्षमण के प्यारे सीताराम
भरत शत्रुघ्न के प्यारे सीताराम
भज मन जय सियाराम......... 2
केवट के तारक सीताराम
शबरी के तारक सीताराम
जटायु के तारक सीताराम
सब भक्तों के तारक सीताराम
भज मन जय सियाराम....... .. 3
भजो नाम बस सीताराम
ध्यान में रखो बस सीताराम
सपने में भी बस सीताराम
सबके भगवन बस सीताराम
भज मन जय सियाराम........... 4
निशदिन ध्यान करे बजरंगी
निशदिन ध्यान करे महादेव
ब्रह्मा नारद आरती गावें
देवों के देवाधिदेव बस सीताराम
भज मन जय सियाराम......... 5
( यह मेरी मौलिक रचना है ----- ओमप्रकाश पाण्डेय)
[17/09, 2:42 pm] कुम कुम वेद सेन: भक्ति गीत
जय राम श्री राम जय राम श्री राम
कौशल्या के लाला अयोध्या के राजा
जय राम श्री राम जय राम श्री राम
कष्ट मिटाए दुख हटाए
जय राम श्री राम जय राम श्री राम
जग को बसाए जग को बनावे
जय राम श्री राम जय राम श्री राम
नाम तुम्हारे लेने से सबका हो कल्याण
जय राम श्री राम जय राम श्री राम
नाम जपे सो पाये नैया पार
जय राम श्री राम जय राम श्री राम
दीन दयाला पूर्ण करें सकल मनोरथ
जय राम श्री राम जय राम श्री राम
केवट का तारणहारा सुग्रीव का मदद हारा
जय राम श्री राम जय राम श्री राम
लंका विनाशक विभीषण सहायक
जय राम श्री राम जय राम श्री राम

कुमकुम वेद सेन
[17/09, 2:57 pm] 👑पदमाकाक्षी शुक्ला: 🙏🌹अग्नि शिखा मंच🌹🙏
🙏🌹जय अम्बे🌹१७/९/२१🌹🙏
🙏🌹भजनः *मां तेरा कहां ठिकाना* 🌹🙏


ओ अँबे माता तेरा कहाँ,
 ठिकाना बतलाओ ना, 
ओ महालक्ष्मी माते तेरा,
अता पता भी बतलाओ ना, 

किसी ने बताया रहती हो कोल्हापुर, 
किसी ने बताया रहती हो गब्बर गढ़
 जन्मांतर से ढूँढ रही हुं, 
फिर भी दर्शन पाए ना, 
ओ अँबे माता तेरा,
 कहाँ ठिकाना बतलाओ ना, 
ओ महालक्ष्मी माते तेरा, 
अता पता भी बतलाओ ना, 

अणु अणु में बसती माता,
मेरे ह्ररदय में रहती माता, 
आँखें खोलके देखुँ तुझ को ,
फिर क्यूँ नजर दिख पाए ना,? 
ओ अँबे माता तेरा,
 कहाँ ठिकाना बतलाओ ना, 
ओ महालक्ष्मी माता तेरा, 
अता पता भी बतलाओ ना, 

तुम दर्शन बिना जीवन सुना ,
तेरे प्यार को तरसते मनवा,
अँखियाँ की ये प्यास बुझाने , 
दर्शन तुम तो दे जाना, 
ओ अँबे माते तेरा कहाँ, 
ठिकाना बतलाओ ना, 
ओ महालक्ष्मी माते तेरा, 
कहाँ ठिकाना बतलाओ ना,

 🙏🌹स्वरचित भजन, 🌹🙏
🙏🌹पद्माक्षी शुक्ल, 🌹🙏
[17/09, 3:43 pm] रामेश्वर गुप्ता के के:           ।भक्ति गीत। 
  ।आओ गणपति।
आओ गणपति जी को मनायें,
अपने घर गणपति जी ले आये।
सुबह शाम आरती उनकी उतारें,
जीवन में सुख शांति ले आयें।।
आओ............................ 1 
गणपति जी प्रथम पूज्य वे रहते,
दुख दर्द सब भक्तों के वह हरते।
मधुर मुस्कान चेहरे पर वे रखते,
सभी भक्तजन पूजा कर रिझाते।।
आओ.......................... 2 
गणपति हमारे सबके कष्ट हरते,
भक्त उनके द्वारे हाजरी लगाते।
भजन उनके सबको प्रिय लगते,
भजन गाकर सुख शांति में रहते।। 
आओ............................3
गणपति के द्वारे एक लंगड़ा पुकारे,
मागे गणपति से वे सारे कष्ट निवारे।
घर में पधारे है मेरे प्यारे गणपति जी,
वह जग को सुख सम्पत्ति देने वाले।।
आओ...............................4
स्वरचित,
रामेश्वर प्रसाद गुप्ता ।
[17/09, 3:53 pm] Dr Rashmi👑👑 Shig ( Allbad): विश्वकर्मा पूजा

हे विश्वकर्मा महाराज कारवाँ रोको नहीं निर्माण जगत संसार का।

है सृजन की कामना हम सब को आपके आशीर्वाद का।

चल पड़े हैं जो चरण विकास के,अब उन्हें हम मोड़ने की चाह छोड़े।

तप पराजित कब हुआ इनसान का,हो विजय की चाहना तो साथ दो।

धन्य है आप का सुन्दर सृजन आपकी कला,जो रचा संसार को सुन्दर बना।

तेरी कला कितनी गजब,यों गढ़ा पाषाण जो ईश्वर बना।

तप पराजित कब हुआ आपका ही विजय की चाहना तो साथ दो।

डॉक्टर रश्मि शुक्ला 
प्रयागराज 
उत्तर प्रदेश 
भारत
[17/09, 4:05 pm] डा. बैजेन्द्र नारायण द्िवेदी शैलेश🌲🌲 - वाराणसी - साझा: आदरणीय मंच को नमन विश्वकर्मा देवताओं के कला शिल्पी हैं उनके सम्मान में कविता
ओ सृजन के देवता 

विश्व के क्रम को सजाए
देवता श्रम को बनाएं 
पत्थरों में प्राण डालें
 बना निर्मिती रास्ता ।
ओ सृजन के देवता।।

मूक स्वर की प्रकृति को जीवंतता से भर दिए
भटकते मनु वंशजों को
जिंदगी का स्वर्गीय
कला को तुमने संवारा
जैसा प्रभु था चाहता।।
हो सृजन के देवता।।

मंत्र है हर हाथ में
यंत्र तेरे साथ में
युक्ति है साकार होती
मूल खड़बड़ प्रकृति भी
आकार पा साकार होती
पवन भी सहयोग में आ
तूलिका को थाम ता।
सृजन के देवता।।
+++++
डॉ ब्रजेन्द्र नारायण द्विवेद्वी शैलेश वाराणसी
[17/09, 4:40 pm] अंजली👏 तिवारी - जगदलपुर: विषय-भक्ति गीत आस्था
जय गणेश जय गणेश देवा
माता आपकी पार्वती पिता महादेवा
 हर विध्न को हरन करो हे विध्न हरता
शरन में आये प्रिय दुर्वा चढ़ाये तुम्हारी
पुजन हमारी स्वीकार करो हे गणपती देवा 
मनोकामना पूर्ण करो मोदक का भोग लगाएं तुम्हारी
देवताओं में प्रथम पुजा होये तुम्हारी
सबके प्रिय हो तुम हे गणेश देवा
बारम्बार प्रणाम करें तुम्हारी
शरण आये अब पूर्ण करो हर काम हमारी 
यही विनती और प्रार्थना है तुमसे हमारी
हर विध्न हरन करो हे बलिहारी
हे गणेश देवा हे गणेश देवा।
जय गणेश जय गणेश
अंजली तिवारी मिश्रा जगदलपुर छत्तीसगढ़।
[17/09, 4:57 pm] विजेन्द्र मोहन बोकारो: मंच को नमन
विधा:-- भक्ति गीत
विषय:-- गणेश उत्सव

 गणपति है प्रथम देवता 
 सारे जग के रखवाला।
विनती सुनो मेरी गण राजा
मेरे घर में जरूर आ जाना,
मेरे घर में जरूर आ जाना।।
सारे जग के तुम हो रखवाला,
विनती सुनो गण राजा
रिद्धि सिद्धि के तुम हो दाता
भक्तों के भाग्य विधाता
शंकर के लाल गण राजा
आज मेरे घर जरूर आ जाना।।
माथे मुकुट गले मोतियन माला
कानन कुंडल हाथ में भाला
मस्तक सिंदूरी शोभे गण राजा
सूर्य चंद्रमा मस्तक धारे।
आज मेरे घर जरूर आ जाना
आने से सारा दुख मिट जाए दे दो 
 वरदान, तुम ही हो देवता में बड़ा न कोई दूजा सर्वप्रथम होती है तुम्हारी पूजा
बुद्धि के दाता गण राजा।
आज मेरे घर जरूर आना
आज मेरे घर जरूर आना।।

विजयेन्द्र मोहन।
 बोकारो ( झारखंड)
[17/09, 5:30 pm] Chandrika Vyash Kavi: सरस्वती वंदना
************
 (भक्ति गीत) 
दिनांक-: 17/9/2021

हे माँ शारदा,कर तु इतना वादा
दे शीतल पवन और मन तेरा
 करेगी तू दुःख दूर मेरा 
हे माँ शारदा, हे माँ शारदा !

जिह्या  को मिठास दी
 उत्कृष्ट वाणी दे के 
संगीत से भरा मन
 दिल को तार देके 
अहसान इतना करना
दिल में सदा ही रहना !

हे माँ शारदा ,हे माँ शारदा !

मेरे मन के उपवन में तू 
संगीत बन के आना 
दे तार  वीणा  का तू 
मेरे सुर से सुर मिलाना 
इस मन के उपवन में 
सदा वास  हो तुम्हारा !

हे माँ शारदा , हे माँ शारदा !

माँ ,विद्या की विधाता तू
   वर्णो की है ज्ञाता 
वेदो की परिभाषा तू
 ऋषियो की है  अभिलाषा
दे ज्ञान का पिटारा 
उद्धार कर हमारा !

हे माँ शारदा , हे माँ शारदा !

कर जोड़ करती हूँ 
वंदन सदा तुम्हे मैं 
है ज्ञान की पिपासा मेरी
तू  पूरी करना आशा 
सदा लेखनी में  मेरे
वरदान बन के रहना !

हे माँ शारदा , हे माँ शारदा !

जीवन के सफर में गर 
भटके है मेरा मन 
लिख न पाऊ मैं अगर 
संग रहना बनके  दुख भंजन 
गुरु बनके मेरी तू 
सदा  लेखनी में रहना !

हे माँ शारदा , हे माँ शारदा

           चंद्रिका व्यास
         खारघर नवी मुंबई
[17/09, 5:30 pm] रजनी अग्रवाल जोधपुर: शीर्षक-"भक्ति गीत"

कान्हा कान्हा याद करूं दिन रैन , 
 दरस दिखा दो,
 नैन मिला लो , 
तभी मिलेगा मुझे चैन ,,,,,,
1. मैं जन्मों की प्यासी हूं मोहन , 
 भटक रही हूं जग में सोहन , 
अब तो सुना दो मीठे
 बैन , 
कान्हा कन्हा,,,,,,,,
 2.औड़ चुनरिया तोरे रंग में ,
जाऊं कहां किस ओर , 
 नहीं सूझे , 
किससे पूछूं? तेरी नगरी , 
जानू किससे तेरा मारग ,
 कान्हा कान्हा ,,,,,,,,
3.तेरे बिन सूनी मेरी अटरिया , 
 बांधे बैठी मैं अपनी गठरिया , 
आरती गाऊं भजन सुनाऊं ,
कान्हा कान्हा,,,,,,,,,

 स्वरचित भजन गीत रजनी अग्रवाल
  जोधपुर
[17/09, 5:32 pm] वीना अडवानी 👩: गजानना
*******

गजानना गजानना 
तू ही मेरा गजानना
भक्ति मे तेरी डूबा ये जहां।।

मोदक, लड्डू, बूंदी, मेवा
आओ खिलाऐं तुझे मना
तू हर दे पूरे विश्व के विघ्न
पुकारे तुझको हर एक जना।।


गजानना गजानना 
तू ही मेरा गजानना
भक्ति मे तेरी डूबा ये जहां।।


सर्वप्रथम तुझे ही पूजे भक्त
यही आशिष दिये पिता महा
शिव पार्वती का प्यारा तू कहत
समस्त ब्रम्हांड मात पिता मे ही समा।।


गजानना गजानना 
तू ही मेरा गजानना
भक्ति मे तेरी डूबा ये जहां।।


प्रिय अपने वाहन मुशक संग भी 
नटखट अटखेली कर बांधे समां
ढ़ोलक बजा अपने पिता का गणु
नाचे तू कभी कदम उठा कभी जमा।।

गजानना गजानना 
तू ही मेरा गजानना
भक्ति मे तेरी डूबा ये जहां।।


वीना आडवानी तन्वी
नागपुर, महाराष्ट्र
*******************
[17/09, 5:37 pm] पुष्पा गुप्ता / मुजफ्फरपुर: 🌹🙏अग्नि शिखा मंच 🙏🌹
🌹🌹शबरी सोच रही है मन में 🌹🌹
             ☘️भक्ति गीत ☘️
        🦚दिनांक:17/9/21
*******************************

🍂शबरी सोच रही है मन में 
     वन में आएंगे भगवान ।
    अपने अंचल से मैं तो डगर बुहारंगी
    वन-उपवन से मैं फूल- चुन लाऊंगी
    इसी राह से आएंगे भगवान----
    वन में आएंगे भगवान ।
    -*शबरी ............
    पंपा सरोवर से जल, भर लाऊंगी
    अपनें श्री राम जी के चरण धुलाऊंगी
    आसन बिराजेन्गे भगवान -----
     वन में आएंगे भगवान ।
    -*शबरी ..............
     वन-में से चख-चखके बेर तोड़ लाऊंगी
    अपने श्री राम को मीठेफल खिलाऊंगी 
    मन ही मन में हुलसेंगे भगवान----
     वन में आएंगे भगवान ।*
     -* शबरी ..सोंच रहीं हैं मन में 
         वन में आएंगे भगवान ,,×3
************************************
 स्वरचित एवं मौलिक रचना 
 रचनाकार-- डॉ. पुष्पा गुप्ता,
 मुजफ्फरपुर
 बिहार
🌹🙏
[17/09, 5:43 pm] +91 70708 00416: मंगलमूर्ति गजानना
*******************
घर में पधारो गजानन जी
मेरे घर में पधारो
 हे मंगलमूर्ति गजानना
तुम सुखकर्ता मूषकवाहना
शिवगौरा के तुम हो लाल
एकदंत लंबोदर कहलाते
मोदक प्रिय से गणपति नंदन
तेरा भक्त करें सब वंदन
प्रथम पूजा आपका होवे
ले नाम काज पूर्ण होवे
विहनहर्ता, मंगलकर्ता नाम सुहावे
गणेश जी के रूप निराले
आज्ञा पालन हेतु दिया शीश कटाया
वचन दिया माता को दिया उसे निभाया
गणपति बप्पा मोरया गूंजे घर -घर आज
देते खूब आशीष करते पूरी सबकी आस

डॉ मीना कुमारी परिहार
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Wednesday, 15 September 2021

अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच ब्लॉक पर आज आप पढ़े हिंदी हमारी पहचान विषय पर कविताएं विवेक आदि अलका पांडे




*हिंदी हमारी पहचान है
15/9/2021
    हिंदी हमारी पहचान है             
राष्ट्र की आन बान शान हिंदी 
   हिंदी है मेरी पहचान
भारत का अभिमान है हिंदी 
हिंदी की बिंदी भारत माँ की शान

हिंदी सिधी सादी भोली सी प्यारी भाषा है ।
जन जन के ह्दय में समाई न्यारी भाषा है !!
राँष्ट्र की आन बान शान है हिंदी 
हिंदी है मेरी पहचान
हिंदी हिंदुस्तान है 
देश का अभिमान है ।।

हिंदी की पीड़ा को हम समझे
उसका अनादर न करे 
मान और सम्मान दिलाये ।।
हिंदी हमारी माता और पिता है, 
हम सब उसके ह्दय में बसते है । 
हिंदी है मातृ भाषा हमारी 
उसका हम गुण गान करे ।
हिंदी पर अभिमान करें ।।

राष्ट्र की भाषा हिंदी 
राष्ट्र की पहचान  हिंदी 
राष्ट्र का अभिमान हिंदी 
राष्ट्र की संस्कृति हिंदी
राष्ट्र की आन बान शान हिंदी 
   मेरी पहचान है हिंदी 
हिंदी की बिंदी भारत माँ की शान
भारत का अभिमान है ।। 
हिंदी ने दिये पंत , निराला, प्रसाद , महादेवी वर्मा , 
स्वर , व्याकरण अंलकार की अनुपम कृति 
कश्मीर से कन्याकुमारी तक गूंजती है इसकी स्वर लहरी 
१४ सितम्बर एक उत्सव मनाना काफ़ी नही , रोज़ उत्सव मनाए धरती के कण कण हिंदी समाए 
हिंदी हम सब की जान है 
देश का अभिमान है 
राष्ट्र की आन बान शान हिंदी 
   हिंदी है मेरी पहचान
भारत का अभिमान है हिंदी 
हिंदी की बिंदी भारत माँ की शान
डॉ अलका पाण्डेय मुम्बई


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[15/09, 10:15 am] सरोज दुगड गोहाटी: * अग्नि शिखा काव्य मंच *
 * हिन्दी हमारी पहचान *
 * विधा - लेख *

 हिन्दी हमारी मांँ है ! अपनी माँ से सौतेलापन आज की खोखली व विकृत मानसिकता की परिचायक है !
हमनें जन्म से जिस भाषा को सुना , जिसमें में पहली बार बात की उसकी उपेक्षा ? हम जितनी सहजता से हिंदी भाषा में अभिव्यक्ति दे सकते हैं हैं उतनी किसी ओर भाषा में नहीं दे सकते ! इस भाषा की मिठास और लालित्य अदभूत है ! 
विश्व की प्राचीनतम भाषा संस्कृत से निकली है ! अपनी सहोदरी उर्दू के साथ इसका खूब बहनापा है ! यही भारत वर्ष की गंगा जमुनी संस्कृति है!
अगर हम अपनी भाषा नहीं बचा पाए तो देश क्या बचाएगें ! मुझे तरस आता है उन लोगों पर जो अंग्रेजी मिश्रित हिंदी बोल खुद पर इतराते हैं! जो अधकचरी अंग्रेजी बोल कंधे उचकाते हैं फिर अपना वाक्य हिन्दी में पूरा करते हैं! 
हमारे देश में अंग्रेजी माध्यम के स्कूल ,इसाई धर्म का प्रचार - प्रसार हमारी संस्कृति पर सीधा हमला है !
हमारी गौरव शाली परंपरा पर कुठाराघात है ! अगर हम अपनी पहचान नहीं बचा पाए तो हमारे पास बचेगा क्या ?अगर अभी भी नहीं सचेत हुए तो आनें वाली पीढ़ियां अपनी क्षेत्रिय भाषा और माँ हिन्दी से अपरिचित रह जायेंगी ????

सरोज दुगड़
खारुपेटिया 
असम 
🙏🙏🙏
[15/09, 10:21 am] कुम कुम वेद सेन: विषय हिंदी और हम

हिंदी तू सिर्फ नहीं एक भाषा
हिंदुस्तान की है तू परिभाषा

भारत की पहचान हिंदी
भारतीय की जननी हिंदी

विदेशियों ने बहुत सताया तुझे
तुझे गिराने आया अंग्रेजी

पर वह भूल गया तेरी विशालता
तू तो है हिंदुस्तान की ताज

सहज सरल तेरा स्वभाव
जन-जन को भाया तेरा राग 

सागर से भी गहरी तेरी गहराई
पल पल मंथन में रहते भारतीय भाई

संस्कृत है हर भाषा की जननी
हिंदी तेरी तो है वह संगिनी

तेरी वर्णमाला में है अ से अनपढ़
और ज्ञ से है ज्ञानी

तेरे छंद अलंकार के रस में
हर भारतीय हो गए मदमस्त

हिंदी की बिंदी लगती मस्तक पर
राम लिखने में 108 मिलती गिनती

धन्य धन्य हो गई जिंदगी
पाकर तुझे हे प्रिय हिंदी

तुझे नमन तुझे वंदन है
तू ही कृष्ण तू ही शिव है

तू ही अर्जुन तू ही सारथी
पाकर तुझे बन गए सभी महारथी

कुमकुम वेद सेन
[15/09, 10:25 am] वीना अचतानी 🧑🏿‍🦽: वीना अचतानी 
मंच को नमन
विषय *****हिन्दी दिवस पर लेख **
14 सितम्बर 1949 को गाँधीजी ने हिन्दी साहित्य सम्मेलन में हिन्दी भाषा को राष्ट्र भाषा बनाने को कहा था,।इस दिन संविधान सभा ने एक मत से निर्णय लिया कि हिन्दी भारत की राजभाषा होगी । 14 सितम्बर को हर वर्ष हिन्दी दिवस के रूप में मनाया जाता है । हिन्दी क्षेत्र में बेहतर काम करने वालों को भारत के राष्ट्रपति द्वारा इस दिन नई दिल्ली के विज्ञान भवन में पुरस्कार वितरित करके सम्मानित किया जाता है ।
        हिन्दी हमारी राष्ट्रभाषा है, इसका सम्मान करना चाहिए ।हिन्दी एक एसी भाषा है जिसमें 500 वर्षों 
मे अनेक भाषाओं को अपने अन्दर समाहित किया है, लेकिन इतना होने पर आज भी उसका अस्तित्व कायम है।हिन्दी से बना हिन्दूस्तान, तभी तो भारत है महान् ।साहित्य की फुलवारी 
सरल सुबोध अंग्रेजी पर भारी है हिन्दी ।पढ़ने व पढ़ाने मे सहज है हिन्दी, साहित्य का असीम सागर है हिन्दी ।तुलसी, कबीर, मीरा ने इसमें ही लिखा है, कवि सूर के सागर की गागर है हिन्दी । जन जन की भाषा, भारत की आशा, जीवन की परिभाषा है हिन्दी ।यूँ तो कई भाषाएं है, पर भारत के माथे की है बिन्दी। एक डोर में सबको बान्धती हर भाषा की सगी बहन है हिन्दी  
देश का गौरव , भविष्य की आशा, हर दिल की धड़कन, जनता की भाषा है हिन्दी ।।।।
 स्वरचित मौलिक 
वीना अचतानी 
जोधपुर, ।।।।
[15/09, 10:44 am] विजेन्द्र मोहन बोकारो: मंच को नमन
विषय:-- *हिंदी और हम*

हिंदी भाषा नहीं भावों की अभिव्यक्ति है।
मातृभूमि पर हमें मर मिटने की भक्ति है।।

परंपराओं संस्कृति और सभ्यता का ज्ञान
हमको भाति, हिंदी, मीठा मधुर सी लगती है।।

हिंदी भाषा प्यारी, अंतर्मन को छू जाती है।
हिंदी लगती इतनी न्यारी, विदेशों में भी इसे पहचानी जाती।।

हिंदी का *ॐ* शब्द ब्रम्हांड तक जाती
हम और हिंदी की पहचान बनाती।।

भारत मां के भाल पर स्वर्णिम बिंदी हूं, भारत की बेटी आपकी अपनी हिंदी हूं।।

हिंदी से हमारी हृदय धड़कन चलती, इसकी जननी संस्कृत हमें है अभिमान
संस्कृत रूपी देवी के गर्भ में अथाह ज्ञान
देवनागरी इसका वर्णमाला लचीले रूप से हिंदी आज बनी महान।।

अपनी मातृभाषा को अतिथि बनाकर सम्मान क्यों?
हिंदी भाषा को हृदय से बसा कर रखें हम
अपनी भाषा को उसके घर में अतिथि बनायें क्यों ?
इसकी हैसियत मकान मालिक की होना चाहिए उसे हम किराएदार बनाये क्यों?

विजयेन्द्र मोहन।
[15/09, 10:53 am] कुंवर वीर सिंह मार्तंड कोलकाता: 🌺बुधवार -15/ 9/2021
🌺विषय _
🌺 विधा - लेख 
हिन्दी क्यों नहीं बन पाई राष्ट्रभाषा
हि्दी को राष्ट्रभाषा बनाना चाहते थे गांधी जी
वर्ष 1918 में महात्मा गांधी ने हिन्दी को जनमानस की भाषा कहा था और इसे देश की राष्ट्रभाषा भी बनाने को कहा था। लेकिन आजादी के बाद ऐसा कुछ नहीं हो सका। सत्ता में आसीन लोगों और जाति-भाषा के नाम पर राजनीति करने वालों ने कभी हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनने नहीं दिया।
व्यौहार राजेन्द्र सिन्हा ने बहुत संघर्ष किया हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए
अंग्रेजी भाषा के बढ़ते चलन और हिंदी की अनदेखी को रोकने के लिए हर साल 14 सितंबर को देशभर में हिंदी दिवस मनाया जाता है। आजादी मिलने के दो साल बाद 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा में एक मत से हिंदी को राजभाषा घोषित किया गया था और इसके बाद से हर साल 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाने लगा। किन्तु 14 सितम्बर को ही हिन्दी दिवस मनाने का एक कारण और भी है। वह यह कि 14 सितम्बर 1949 को हिन्दी के पुरोधा व्यौहार राजेन्द्र सिंहा का 50-वां जन्मदिन था, जिन्होंने हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने के लिए बहुत लंबा संघर्ष किया । स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद हिन्दी को राष्ट्रभाषा के रूप में स्थापित करवाने के लिए काका कालेलकर, मैथिलीशरण गुप्त, हजारीप्रसाद द्विवेदी, महादेवी वर्मा, सेठ गोविन्ददास आदि साहित्यकारों को साथ लेकर व्यौहार राजेन्द्र सिंहा ने अथक प्रयास किए। इसके चलते उन्होंने दक्षिण भारत की कई यात्राएं भी कीं और लोगों को मनाया । इसी कारण व्यौहार राजेन्द्र सिन्हा के जनम दिन को ही हिन्दी दिवस नाम दिया गया। 
हिन्दी क्यों नही बन पाई राष्ट्रभाषा -
26 जनवरी 1950 को भारतीय संविधान लागू होने के साथ साथ राजभाषा नीति भी लागू हुई। संविधान के अनुच्छेद 343 (1) के तहत यह स्पष्ट किया गया है कि भारत की राजभाषा हिंदी और लिपि देवनागरी है। संघ के शासकीय प्रयोजनों के लिए प्रयोग होने वाले अंकों का रूप भारतीय अंकों का अंतर्राष्ट्रीय रूप है। हिंदी के अतिरिक्त अंग्रेजी भाषा का प्रयोग भी सरकारी कामकाज में किया जा सकता है। अनुच्छेद 343 (2) के अंतर्गत यह भी व्यवस्था की गई है कि संविधान के लागू होने के समय से 15 वर्ष की अवधि तक, अर्थात वर्ष 1965 तक संघ के सभी सरकारी कार्यों के लिए पहले की भांति अंग्रेज़ी भाषा का प्रयोग होता रहेगा। यह व्यवस्था इसलिए की गई थी कि इस बीच हिन्दी न जानने वाले हिन्दी सीख जायेंगे और हिन्दी भाषा को प्रशासनिक कार्यों के लिए सभी प्रकार से सक्षम बनाया जा सकेगा।
अनुच्छेद 344 में यह कहा गया कि संविधान प्रारंभ होने के 5 वर्षों के बाद और फिर उसके 10 वर्ष बाद राष्ट्रपति एक आयोग बनाएँगे, जो अन्य बातों के साथ साथ संघ के सरकारी कामकाज में हिन्दी भाषा के उत्तरोत्तर प्रयोग के बारे में और संघ के राजकीय प्रयोजनों में से सब या किसी के लिए अंग्रेज़ी भाषा के प्रयोग पर रोक लगाए जाने के बारे में राष्ट्रपति को सिफारिश करेगा। आयोग की सिफारिशों पर विचार करने के लिए इस अनुच्छेद के खंड 4 के अनुसार 30 संसद सदस्यों की एक समिति के गठन की भी व्यवस्था की गई। संविधान के अनुच्छेद 120 में कहा गया है कि संसद का कार्य हिंदी में या अंग्रेजी में किया जा सकता है।
वर्ष 1965 तक 15 वर्ष हो चुका था, लेकिन उसके बाद भी अंग्रेजी को हटाया नहीं गया और अनुच्छेद 343 (3) में संसद को यह अधिकार दिया गया कि वह 1965 के बाद भी सरकारी कामकाज में अंग्रेज़ी का प्रयोग जारी रखने के बारे में व्यवस्था कर सकती है। अंग्रेजी और हिन्दी दोनों भारत की राजभाषा है।
26 जनवरी 1965 को संसद में यह प्रस्ताव पारित हुआ कि "हिन्दी का सभी सरकारी कार्यों में उपयोग किया जाएगा, लेकिन उसके साथ साथ अंग्रेज़ी का भी सह राजभाषा के रूप में उपयोग किया जाएगा।" वर्ष 1967 में संसद में "भाषा संशोधन विधेयक" लाया गया। इसके बाद अंग्रेज़ी को अनिवार्य कर दिया गया। इस विधेयक में धारा 3(1) में हिन्दी की चर्चा तक नहीं की गई। इसके बाद अंग्रेज़ी का विरोध शुरू हुआ। 5 दिसंबर 1967 को तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने राज्यसभा में कहा कि हम इस विधेयक में विचार विमर्श करेंगे। 000
© कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड, कोलकाता
[15/09, 10:59 am] शेभारानी✔️ तिवारी इंदौर: हिन्दी हमारी पहचान है

हमारी मातृभाषा हिंदी है ।हर राष्ट्र
 की एक भाषा होती है उसी भाषा में कार्य ,व्यापार आदि किया जाता है। भारत की राजभाषा हिन्दी है। हिन्दी देवनागरी लिपि में लिखा जाता है। हिन्दी की जननी संस्कृत है। दुनिया के कई देशों में हिंदी बोली जाती है ।भारत में 77% लोग हिंदी बोलते हैं ।इसकी सबसे बड़ी विशेषता यह है कि हिन्दी जैसी बोली जाती है, वैसे ही लिखी जाती है ।हिन्दी शब्द खुद फारसी से लिया गया है ।हिन्दी शब्द का आशय सिंधु नदी के जमीन से है ।महात्मा गांधी ने कहा था कि हृदय की कोई भाषा नहीं होती ,यह सीधे हृदय से बातचीत करता है ,और हिन्दी राजभाषा है ,अगर हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाना है तो ,हमें प्रयास करना होगा ।इसकी शुरुआत घर से करनी होगी ।हम अपने बच्चों 
से हिन्दी में ही बात करें। हमारा बच्चा अंग्रेजी में बात करता है तो हम गर्व महसूस करते हैं। हम अंग्रेजी भाषा का उपयोग करें पर महत्व अपनी भाषा को ही दें ।जब हम आपस में बात करते हैं तो हिन्दी में ही करें ,यदि सभा में उपस्थित सभी लोग हिन्दी बोल सकते हैं ,और हिन्दी समझ सकते हैं ,तो हमें हिंदी भाषा में ही बात करना चाहिए ।ऑफिस में बैंक में हिंदी में ही कार्य करें ।पहले -पहले कठिनाई होगी ,परंतु बाद में धीरे-धीरे सीख जाएंगे। जिन्हें हिन्दी नहीं आती ,उनके लिए समय-समय पर प्रशिक्षण दें कम से कम हस्ताक्षर तो हिंदी में ही करें। 19 सन 1950 में 14 सितंबर के दिन भारतीय संविधान में हिन्दी भाषा को राजभाषा का दर्जा दिया था तब से 14 सितंबर को हिन्दी दिवस के रुप में मनाते हैं ,लेकिन केवल 1 दिन या हिंदी सप्ताह मना लेने से या हिंदी पखवाड़ा मना लेने से कुछ नहीं होगा ।हमें इसके लिए मिलकर प्रयास करना होगा ।आइए मिलकर संकल्प करें कि हम अपने दैनिक जीवन में हिंदी का अधिक से अधिक उपयोग करें, और हिन्दी को राष्ट्रभाषा बनाने में अपनी भूमिका निभाएं। एक कविता भी है हिंदुस्तान तिरंगे की शान हैं,
अरमान है दिलों की राष्ट्र की पहचान है,
वर्ग भेद ,वर्ण , जाति धर्म से परे,
दिलों को जोड़ने वाली गीता कुरान है।

श्रीमती शोभा रानी तिवारी
619 अक्षत अपार्टमेंट खातीवाला टैंक इन्दौर म.प्र.
[15/09, 11:18 am] 👑सुषमा शुक्ला: मंच को प्रणाम🌷 मां शारदे को नमन 
🙏
विषय है ,, 

*हिंदी हमारी पहचान है*

*हिंदी भाषा को उसकी श्रेष्ठता का दर्जा मिले और राष्ट्रीयभाषा बने* 

हिंदी दिवस किसी एक दिन का नहीं हर पल का होना चाहिए। इसके आगाज में सौ करोड़ जनता को आगे आना चाहिए हमारी हिंदी में मेड्रिन के बाद दूसरी बड़ी भाषा है पर विडंबना देखिए शक्तिशाली भाषा नहीं है।

सरकार को हिंदी शब्दों की वर्तनी से जुड़ी विसंगतियों को दूर करने का प्रयास करना चाहिए। सरकार को सुप्रीम कोर्ट से परामर्श करके देश की अदालतों से हिंदी जीरह करने का प्रयास करना चाहिए। 12 से 15 फ़ीसदी लोग हैं जो अंग्रेजी समझ पाते हैं इसके बावजूद भी हिंदी समेत तमाम भाषाओं पर हावी है भाषा सीखना गुनाह नहीं है,, पर अपनी भाषा को आगे बढ़ाते हुए मान दिलाना ही हमारा कर्तव्य है।।

ऐसे में हिंदी के तमाम समर्थकों को उम्मीद है कि जो पिछले 70 साल में नहीं हुआ ऐसा क्या करें कि हिंदी का प्रचार प्रसार तेजी से फैल सके।

गैर हिंदी राज्यों पर कामकाज हिंदी में ही करने का दबाव होना चाहिए। शब्दों के मामले में किसी भी भाषा के प्रचलित शब्दों को स्वीकार किया जाना चाहिए। ऑक्सवर्ल्ड को उठा कर देखिए तो पता चलता है कि यह अपने भंडार में आम प्रचलित के कई शब्दों को जोड़ता है सरकार पत्रकारिता जगत से भी सीख सकते हैं, जहां प्रचलित और कठिन शब्द शायद ही प्रयोग किए जाते हैं।

केंद्र सरकार राज्य सरकार को 12वीं हिंदी भाषा अनिवार्य बनाना चाहिए,, लचर व्यवस्था के चलते बच्चे अपनी मातृभाषा के बजाय विदेशी भाषा को तवज्जो देते हैं।

आज का युग आप कंप्यूटर लैपटॉप और स्मार्टफोन का है। कागज पर लिखने की बजाय की बोर्ड पर लिखते हैं। इसलिए सरकार को चाहिए कि बच्चों को कागज पर हिंदी लिखने के साथ-साथ हिंदी टाइपिंग में भी दक्ष करें।।

सबसे बड़ी बात💐💐💐💐💐 हिंदी को हेय दृष्टि से ना देखकर बल्कि पूरा आदर के साथ अपना कर इस को विकसित किया जाए। फिर वह दिन दूर नहीं जब हिंदी माथे की बिंदी शब्दों में ही नहीं वरन सच्चाई के साथ माननीय होकर गौरव का कारण बनेगी जय हिंद जय भारत🙏🙏🙏💐💐💐

सुषमा शुक्ला इंदौर
[15/09, 11:19 am] 👑पदमाकाक्षी शुक्ला: 🙏🌹अग्नि शिखा मंच🙏🌹
🙏🌹जय अम्बे🌹१५/९/२१🌹🙏
🙏🌹 *हिंदी हमारी पहचान* 🌹🙏
               हमारा देश अनेक राज्यो में विभाजित है, ओर हरेक राज्य की अलग भाषा है, जैसे तामिल नाडु में तेलुगु, गुजरात में गुजराती, महाराष्ट्र में मराठी, उ, प्रदेश में हिंन्दी, कर्णाटक में कन्नड़, 
          हरेक की अपनी मातृभाषा है, सबसे प्रथम, हरेक राज्य में सभी को समजाना होगा, की अपनी मातृभाषा को प्रथम प्राधान्य, ओर अपनी राष्टभाषा हिंदी बनाने जा रहे उनको प्यार करना, दिल की भाषा बनाना, हिंन्दी आत्मा में उर्जा प्रदान करने वाली, ह्रिदय में समाने वाली, प्यारी, मधूर, ओर मां की तरह ममता देने वाली, संस्कृत ती बेटी है, सबसे बड़ी बात हिंदी सरल है, जैसे हम बोले वैसे ही लिखते है, और आज हिंदी राजभाषा है, 
      महान ग्रंथ की रचना, वेद- उपनिसद संस्कृत में होने के बाद हिंदी में ही प्रस्तुत हुई है, रामायण में दोहा, छंद, चौपाई से, हिंदी में अनमोल ग्रंथ है, वेदव्यास जी ने लिखने के लिए बुद्धि के देव, देवों के देव महादेव के पुत्र गणेश जी को चूना था, साहित्य में गूढ रहस्य छीपा है, अनमोल रत्न समाए है,। 
     अंग्रेज़ी विश्व भाषा है, पर हिंन्दुस्तानी होने के नाते से हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाकर सम्मान करना, हमारा कर्तव्य है, 
       सरकारी कार्यालयों में हिंदी का चलन लाना जरूरी है, जो अभी अंग्रेजी में हो रहा है, 
      हमने स्वतंत्रता पाई, पर अंग्रेजी भाषा की गुलामी से बहार निकलने में सक्षम नहीं बने, क्योंकि डिग्री दिलाने वाली सभी पढ़ाई अंग्रेजी में ही है, यहां से शुरूआत हो जाए तो हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाने में हमे सफलता जरूर मिलेगी। 
       १४.९. को हिंन्दी दिन मनाया जाता है, अंग्रेजी के चलन से हिंन्दी की बात छोडो, मातृभाषा तक भूलने लगे हैं, 
       हिंन्दी के प्रचार हेतु, गांधीजी, राजेन्द्र प्रसाद, मदन मोहन मालवीयाजी, बाल गंगाधर तिलक, ओर अनेक विभूति ने योगदान दिया है, राजेन्द्र प्रसाद ने हिंन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा बनाने हेतु हिंन्दी का प्रचार किया था, 
      सबसे पहेले हिंन्दुस्तान के हर घर में अपनी मातृभाषा के अलावा, हिंन्दी को अपनानेका प्रयास हो जाये,               
        हमारी ,राष्ट्रभाषा का गौरव समजाया जाय, ओर हिंन्दुस्तान में हिंन्दी भाषा पढाई में फरजियाज विषय बना दिया जाये, तो घर घर में हिंन्दी के प्रती जागरुक्ता आने लगेगी, 
    सबसे महत्व की बात तो तब बनेगी हमारे घर में ही,
 अंग्रेजी छोडकर, हिंन्दी में वार्तालाप करना शिखाया जाये, 
      समाज कल्याण के माध्यम से, प्रतियोगिता से विद्यार्थी को हिंन्दी भाषा से आकर्षित किया जा शकता है, 
          ईतर भाषा की उत्कृष्ट पुस्तकका हिंन्दी में अनुवाद करके, लायब्रेरी के माध्यम से घर घर हिंन्दी का वांचन शुरु करके ग्यान के माध्यम से हिंन्दी का प्रचार हो शक्ता है, 
        हर हिंन्दुस्तानी को हिंन्दी भाषा का ग्यान हो जाये, तो हिंन्दुस्तान में दूर दूर अनेक प्रदेश में हम यात्रा पे निकलते हैं, तो हरेक समय वार्तालाप के दौरान जो दिक्कत होती है, वो दूर हो जायेगी, 
            पत्रिका के माध्यम से, दूरदर्शन के माध्यम से, हिंन्दी में नाटक शिखाने की संस्था का निर्माण करनेसे, ओर प्रतियोगिता रखने से, छोटे बडे, अपनी कला प्रस्तुति हेतु, हिंन्दी से जुडते जायेंगे, ओर हमारी राष्ट्रभाषा बनाकर गौरवान्वित करने में खुद को गौरव शाली बननेका आनंद उठा शकेंगे, 
         जगत की उत्पति ॐकार के ध्वनी से हुई थी, अउम्, हमारी हिन्दी भाषा के, ओर અઉમ્ ये गुजराती भाषा के ही शब्द है, 
    जो उच्चारण से आंतरमन की प्रसन्नता प्राप्त होती है, 
   🌹 पद्माक्षी शुक्ल,पुणे 🌹
[15/09, 11:20 am] विजेन्द्र मोहन बोकारो: मंच को नमन
विधा:-- लेख
विषय:--- *हिंदी दिवस*

हिंदी दिवस 14 सितंबर को क्यों मनाया जाता है। क्योंकि 14 सितंबर 1949 को हिंदी साहित्य सम्मेलन का आयोजन किया गया था जिसमें हमारे राष्ट्रपिता गांधी जी ने विचार दिए हिंदी को राष्ट्रभाषा बनाया जाए संविधान में तत्काल ही सम्मिलित किया गया। 14 सितंबर को हम देशवासियों हिंदी दिवस के समारोह करके समाज को जागरूक करते हैं। आज के दिन हमारे राष्ट्रपति महोदय नई दिल्ली विज्ञान भवन में पुरस्कार वितरित करते हैं जो इस क्षेत्र में बेहतर काम किए हैं उन्हें पुरस्कार एवं सम्मान पत्र देकर हौसला बुलंद करते हैं। 
हिंदी 500 वर्षों पुराना है वो अनेक भाषाओं की जननी है इसके बावजूद अस्तित्व में है। हिंदी के बिना हिंदुस्तान, तभी तो भारत है महान। विदेशों में भी पहचान बना चुकी है। क्योंकि यह भाषा का प्यार असीम सागर है। हिंदी हमारे देश के बिंदी है, गौरव है, इसकी भविष्य उज्जवल है। पूरे संसार में इसकी पहचान है। क्योंकि जनता की भाषा है। अनेक देशों में हिंदी को अब दूसरी भाषा के मान्यता मिली है। इसलिए, मैं कहूंगा हिंदी के उज्जवल भविष्य की पूरी संभावनाएं हैं।

स्वरचित लेख
विजयेन्द्र मोहन
बोकारो ( झारखंड)
[15/09, 12:43 pm] वैष्णवी Khatri वेदिका: सितंबर 15/ 2021
हिन्दी हमारी पहचान 

14 सितम्बर 1949 को भारत की संविधान सभा द्वारा हिन्दी को केन्द्र सरकार की आधिकारिक भाषा घोषित किया गया था। इस महत्वपूर्ण घटना के उपलक्ष्य में प्रत्येक वर्ष 14 सितम्बर को देश भर में हिन्दी भाषा के प्रयोग को बढ़ाने और इसकी महत्ता पर प्रकाश डालने के लिए हिन्दी दिवस मनाया जाता है।

हिन्दी दिवस मनाने की शुरुआत राष्ट्रभाषा प्रचार समिति के अनुरोध पर वर्ष 1953 से हुई थी। हिन्दी दिवस के दौरान सरकारी कार्यालयों और निजी कार्यालयों में कई प्रकार के कार्यक्रम होते हैं। इस दिन विद्यार्थियों को हिन्दी भाषा के प्रति सम्मान और दैनिक व्यवहार में हिन्दी के उपयोग करने पर बल देने हेतु निबंध लेखन, कविता पाठ, वाद-विवाद प्रतियोगिता और हिन्दी टंकण आदि प्रतियोगिताएँ होती हैं।

पूरब से पश्चिम और उत्तर से दक्षिण के बीच कई भाषाओं ने संपर्क बनाए रखने का काम हिन्दी ने किया है। हिन्दी के योगदान को समय-समय पर सराहना मिली है क्योंकि इसने भारत को एक-सूत्र में पिरोने का काम किया है। हिन्दी स्वतंत्रता संग्राम के समय से ही राष्ट्रीय एकता और अस्मिता का प्रभावी व शक्तिशाली माध्यम रही है। इसकी सबसे बड़ी शक्ति वैज्ञानिकता, मौलिकता, सरलता, सुबोधता और स्‍वीकार्यता है इसीलिए इसे जन-जन की भाषा कहा गया है।

हिन्दी में कवियों की परम्परा बहुत लम्बी है। हिंदी के महान कवि अटल बिहारी वाजपेयी, कबीर, काका हाथरसी, गोपालदास नीरज, जयशंकर प्रसाद, तुलसीदास, महादेवी वर्मा, मैथिलीशरण गुप्त, माखनलाल चतुर्वेदी, मीरा बाई, रामधारी सिंह 'दिनकर', सुभद्रा कुमारी चौहान, सुमित्रानंदन पंत, सूरदास, हरिवंशराय बच्चन आदि ने कालजयी रचनाएँ लिखकर हिन्दी भाषा को एक नए मुकाम तक पहुँचाया है।

हिन्दी दिवस हमारे सांस्कृतिक जड़ों को फिर से देखने और अपनी समृद्धता का जश्न मनाने का दिन है। हिन्दी हमारी मातृभाषा है और हमें इसका आदर और उसका मूल्य समझना चाहिए।

वैष्णो खत्री वेदिका
जबलपुर
[15/09, 1:05 pm] रामेश्वर गुप्ता के के: हिन्दी हमारी पहचान है-लेख
हिन्दी भारत की सर्वमान्य भाषा है। काश्मीर से कन्याकुमारी तक
हिन्दी भाषा बोली, समझी और पढ़ने वाली सरल भाषा है। सर्वमान्य के साथ साथ हिंदी कार्यालयों में भी काम काज की भाषा बन गई है। हिंदी भाषी प्रदेशों में हिंदी में 100 प्रतिशत काम हिन्दी में हो रहा है। गैर हिन्दी राज्यों में हिंदी के प्रचार प्रसार के लिए पूरे जोर शोर काम हो रहा है। अब हम आज की हिन्दी की स्थिति और पहचान के बारे में विचार करेंगे :
घरों में स्तेमाल :
हिन्दी भाषी प्रदेशों में शत प्रतिशत हिन्दी मातृभाषा के तौर स्तेमाल की जाती है। इसका प्रभाव दूरगामी होता़ है। अब चूँकि यह भाषा सरल एवं सर्वमान्य है, इसलिए यह भाषा खूब फलफूल रही है। 
सरकारी संस्थाओं एव कार्यालयों में स्तेमाल :
अब हिंदी को राजभाषा के पद पर सुशोभित किया गया है। सरकारी कामकाज में सभी कार्य हिंदी में हो रहें है। पत्र ब्यौहार, टंकड एवं संगणक में हिंदी सुविधाजनक भाषाओं में इसका सम्मान है। 
जनता के रोज के कामकाज की भाषा :
आजकल स्कूल सरकारी हो या निजी, सब जगह लोंगों का रुझान हिन्दी की तरफ ज्यादा हो रहा है। पत्र ब्यौहार, टेलीफोन, रेश्टोरेन्ट एवं थियेटर में हिंदी भाषा का खूब स्तेमाल किया जाता है। खेलकूद के मैदान में खेलते समय खिलाडी एवं इससे जुड़े सभी कार्य हिन्दी में किये जाते है। 
त्रिभाषा फार्मूला :
सभी कार्यालयों में तीन भाषा में काम काज किया जाता है। 
हिन्दी भाषी क्षेत्रों में हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत भाषा का इस्तेमाल नियमित हो गया है। अहिंदीभाषी क्षेत्रों में हिंदी, अंग्रेजी और क्षेत्रीय भाषा फार्मूले पर पूरे देश में काम काज हो रहा है। 
हिन्दी भाषा ने अपनी पहचान निम्नलिखित उपायों से बनाई है :
1-कठिन शब्दों का सरलीकरण। 
2-संगणक (कम्प्यूटर) में स्तेमाल से बढावा देना। 
3-अंग्रेजी भाषा का हिन्दी में अनुवाद। 
4-कामकाज की भाषा में तीन भाषा में प्रपत्र लेखन आदि। 
उक्त कार्यक्रम अपनाकर हिंदी में जनमन के लिए सुलभ भाषा बनने में कारगर सिद्ध हुई है। इसके स्तेमाल में निखार आया है। कुछ समय में हम देखेंगे के हिन्दी राष्ट्रभाषा में सुशोभित है और अपनी पूरे देश में इस भाषा ने पहचान बनाई है।। 
स्वरचित, 
रामेश्वर प्रसाद गुप्ता ।
[15/09, 1:16 pm] डा. बैजेन्द्र नारायण द्िवेदी शैलेश🌲🌲 - वाराणसी - साझा: सम्मानित मंच को सादर प्रणाम
हिंदी और हमारी पहचान
----------विश्व में कोई भी ऐसा देश नहीं है जिसकी अपनी भाषा न हो। भारत में जिसे हम हिंदुस्तान कहते हैं हिंदी उसकी भाषा है शेष अन्य बोलियां हैं। हिंदी का विरोध करने वाले लोग ,अंग्रेजों के प्रभाव में आकर आज भी अंग्रेजी को महत्व दे रहे हैं और हिंदी की उपेक्षा करते हैं। उन बंधुओं को ऐसा लगता है कि आज भी अंग्रेजी ही वैश्विक भाषा है जो संपूर्ण विश्व के देशों को एक साथ जोड़ने का काम कर सकती है।, सत्य तो यह है दुनिया के अधिकांश देशों में उनकी पहचान उनकी भाषा है। जापान की जापानी, फ्रांस की फ्रेंच, आईना की चीनी भाष इसी प्रकार अन्य राष्ट्र भी अपनी अपनी भाषा को अपने पहचान का आधार बनाए हुए हैं। हम सभी जानते हैं की महाद्वीपीय शासकीय परंपरा के अंतर्गत
संपूर्ण विश्व भर इंग्लैंड ने राज्य किया। उन्होंने अपने राज्य कार्य का माध्यम अंग्रेजी को बनाया। उनके जाने के बाद प्रत्येक राष्ट्र ने अपनी ही भाषा को शासकीय और जन भाषा दोनों ही रूप में स्वीकार किया और अपने नागरिकों से अनुरोध किया कि वे अपनी भाषा को ही बोलें लिखें पढ़ें और परस्पर संचार का माध्यम बनावें।
हम भारतीय इसमें पीछे क्यों हैं हमारी मानसिकता इतनी गिरी हुई क्यों है कि हम मात्री भाषा के रूप में अपनी क्षेत्रीय भोली को और राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी को अपनाने से विरत हो रहे हैं यह उचित नहीं है प्रत्येक भारतीय नागरिक को यह समझ लेना चाहिए कि भारत की राजभाषा और क्षेत्रीय बोलियां यही हिंदुस्तान के लिए मुख्य है अंग्रेजी को उपभाषा के रूप में लिखना पढ़ना बुरा नहीं है लेकिन उसे हिंदुस्तान में इतना अधिक महत्व दे दिया जाए कि वह यहां की राष्ट्रीयता को ही समाप्त कर दें यह भी उचित नहीं।
अपने देशवासियों से हमारा अनुरोध है वह अपने अपने क्षेत्र में अपनी बोली बोलें। राष्ट्रीय स्तर पर हिंदी की प्रतिष्ठापना में अपना योगदान प्रदान करें।
++++++
डॉ ब्रजेन्द्र नारायण द्विवेद्वी शैलेश वाराणसी
[15/09, 1:43 pm] Anita 👅झा: अग्नि शिखामंच नमन 
विषय-लेख 
***हिंदी और हम लेखन* 
*पठन पाठन और हम** *
आज हिंदी साहित्य में लेखन पठन पाठक बढ़ गये है । युवाओं को अपनी सभ्यता संस्कृति पहचान हो गई ,जो उनकी अमूल्य धरोहर है । इतिहास ने उन्हें जीवंत बनाया है 
पठन पाठन लेखन कार्य प्रमुखता से किया जा रहा है । जिसमें हमें नाम प्रसिद्धि और जीवन यापन का विश्वास भी है . तब लोगों में साहित्य में रुचि जगाने उस बढ़ाने के लिये पठन पाठन पर अधिक प्रयास पड़ता है ।पहले भी साहित्य कार अच्छे साहित्य का सृजन करते तथा सुधिजन पाठक न केवल पढ़ते थे ।बल्कि उसकी समीक्षा भी खुल कर करते थे । फलस्वरूप साहित्य जगत स्वयंमेव सजग रहकर समाज को राह दिखता था , 
फिर युग बदला ना केवल साहित्य कार अपितु अधिकांश कला और कलाकार को अतिरिक्त मान लिया गया । क्यूँकि माध्यम , संचार की सुविधा और अभिव्यक्ति की व्यापकता का शिकार साहित्य भी हो गया . इधर जीवन यापन भी कठिन होता गया ।और साहित्य की ओर पाठकों की रुचि घटती गई ,दूसरे दौर में। नाम प्रसिद्धि और पुरस्कृत होने की प्रवृत्ति भी साहित्य में हावी होते गई ।जिससे जिसे मूल साहित्य धीरे धीरे कहा जाय ग़ायब होते गया ।उसका स्थान व्यवसायिकता ने ले लिया ।. शायद पाठक गण भी इसी ऊहापोह के मध्य अपना ध्यान किसी और तरफ़ किनारा कर लिए थे ! जो बचे वे सिर्फ़ अपनों को ही प्रोत्साहित करते नज़र आये थे।और समग्र रूप से देखा जाए तो साहित्य की पहुँच सब तक नहीं रही ।
अब हिंदी साहित्य के पाठकों की बढ़ोत्तरी हो रही है मीडिया के माध्यम से लाक डाउन ने पठन पाठन लेखन के महत्व को बढ़ा दिया है -
हमारे देश की सभ्यता संस्कृति विदेशों में प्रफुल्लित वेद ,ज्ञान,गीता ,रामायण वसुद्धेव कुटुम्ब की धारणा को ले आगे बढ़ रहे है । हमारा भारतफादर्सडे मदर्सडे फ़्रेंडशीप डे वेलंटाइनडे मनाते ,खान पान पहिरवा पाश्चात्य सभ्यता के आधीन हो ,अंग्रेज़ीयत भाषा बोली को शान समझ हिन्दी भाषा की अवहेलना ।करते जा रहे थे । 
पर अब ऐसा नही युवाओं में परिवर्तन अपने देश राष्ट्र के प्रति जागरूक हो हिन्दी भाषा का महत्व समझ हाथ जोड़ अभिवादन कर आगे बढ़ अपने को गौरवान्वित महसूस करेंगे ,
शब्दों को हम ब्रह्म कहते है ।नाद -अन्न ब्रह्मा है ।जिसे ले हम आगे बढ़ कहते है जो हमारे लक्ष्य निर्धारित करते है यही शिक्षा हम आने वाली पीढ़ी को देते हमारा तकिया कलाम वाक्य हो जाता है ये तो मेरा ब्रह्म वाक्य है अब मै अडिग हूँ ।चाहे ब्रह्मा भी आ जाये मै हटूँगा नही मैंने ये लकीर लक्ष्य प्राप्त के लिये खीच रखी है । 
और लक्ष्य साध कर ही दम लेता है 
युग बदलेगा ,हम बदलेंगे सोच आत्मनिर्भर बन देश का गौरवकर हिन्दी साहित्यिक परंपराओं को आगे बढ़ा वर्चस्व क़ायम करेंगे ।
हिंदी देश के वासी है 
मान है अभिमान है 
हिन्दी हमारी अज़र अमर भाषा है । 
जो सब के लिये कल्याणकारी है 
अनिता शरद झा रायपुर
[15/09, 1:46 pm] 👑मीना त्रिपाठी: *विषय ---हिन्दी हमारी पहचान है*
भारत मे अंग्रेजों के आगमन के बाद ही हमें अपनी ही मातृभाषा एवं राष्ट्रीय भाषा के पहचान के लिए विवाद एवं बहस करना पड़ता है। इससे बड़ा दुर्भाग्य भला हिंदी के लिए क्या हो सकता है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में हिंदी देश विदेश में अपनी एक अलग पहचान बनाने में सफल हुई है। इसमें हमारे आ0 प्रधानमंत्री जी का बहुत योगदान रहा है जिन्होंने हर संभव यह प्रयास किया कि वे हिंदी भाषा मे ही अपनी बातें रखें । 
हर देश अपनी एक बोली एवं भाषा के लिए पहचाना जाता है तो फिर हिंदी को यह संघर्ष क्यों करना पड़ रहा है जबकि पूरे भारत मे सबसे ज्यादा इस भाषा को समझने वाले रहते हैं। 
      मेरे विचार से हिंदी की गरिमा दिलाने और बढ़ाने में दृश्य मीडिया का बहुत अहम योगदान हो सकता है। देश के कई वरिष्ठ साहित्यकार इस छेत्र में अपना महत्वपूर्ण योगदान निभा रहे हैं। और हिन्दी के अनेक खण्ड एवं महाखण्ड , महाकाव्य आदि विदेशों में प्रचारित कर अपनी अहम भूमिका निभा रहे हैं। अतः अगर लोगों के बीच पहुंचने के लिए दृश्य मीडिया का रथ मिल जाये तो हिन्दी देश के कोने कोने में बहुत ही सहजता के साथ बोली व सुनी जा सकेगी।
     किसी भी कार्य छेत्र में हिंदी ही अनिवार्य हो। आदि बहुत सारे छोटे छोटे प्रयास करके हम हिंदी की गरिमा को देश विदेश तक फैला सकते हैं। और गर्व से यह कह सकते हैं कि हम हिंदी हैं हम वतन हैं हिंदुस्तान हमारा।

*जय हिंद जय भारत*🙏🙏
*मीना गोपाल त्रिपाठी*
[15/09, 3:13 pm] हेमा जैन 👩: विषय :-हिंदी भाषा हमारी पहचान (लेख )


हिंदी भाषा हमारी पहचान है इसी में हम अपने विचारों की अभिव्यक्ति करते है वर्तमान काल के तकनीकी विकास के युग में हर क्षेत्र में हर जगह आये दिन नई- नई चीजों का विकास बड़ी तीव्रता से हो रहा है। और इन्हीं के चलते भाषाओं में भी बदलाव हो रहे है आजकल हिंदी भाषा के बजाय अंग्रेजी बोलने में लोग शान समझते है उसके लिए क्लास लेते है और ना जाने क्या-क्या जतन करतें है इन सबके कारण हिंदी भाषा का प्रयोग कम होता जा रहा है जबकि ये हमारी मातृभाषा है हम सब का ये फर्ज बनता है कि अपनी मातृभाषा का यूँ अपमान नहीं होने देंगे उसके प्रचार- प्रसार के लिए इसकी शान बनाये रखने के लिए हर भरसक प्रयत्न करेंगे जैसे कि कुछ निम्न उपाय के माध्यम से हम अपनी हिंदी भाषा का प्रचार -प्रसार कर सकते है :-

1)अंग्रेजी भाषा के अलावा बाकी विषय की शिक्षा हिंदी भाषा में दी जाए।

2)माता -पिता तथा आजकल के युवा हिंदी भाषा बोलने में शर्म ना महसूस करे इसका सम्मान करे और गर्व से अपनी भाषा हर जगह बोले।

3)सारे शासकीय व अशासकीय जगहों पर कार्य के लिए हिंदी भाषा का प्रयोग अनिवार्य किया जी।

ऐसे कई तरीको से हम हिंदी भाषा का प्रचार -प्रसार कर सकते है।

*हेमा जैन **
[15/09, 3:23 pm] 💃वंदना: हिंदी हमारी पहचान

हमारी मातृभाषा हिंदी ही सबसे अच्छी है 
भोली भाली भली मन भवानी सरल सुंदर सौम्य  सुविधा जनक वही अंग्रेजी माथापच्ची जानिए कैसे
दो अर्थ शब्दों से भरी अंग्रेजी वही मन मोहिनी हिंदी
अधिकतर हिंदी को इंग्लिश से कम माना जाता ह कभी भी कहीं भी नौकरी के लिए जाओ तो अंग्रेजी का बखान पहले होता है बल्कि हमारी मातृभाषा हिंदी को पीछे धकेला जाता है दुख जब होता है तब हमारे देश के बच्चे हैं हिंदी बोलने से कतराते हैं
कहीं जगह सुनने में आया अरे यार हिंदी में था तो थोड़ी दिक्कत आ रही थी तो भैया हिंदुस्तान में रहकर जो हिंदी ना बोले जिसे हिंदी से दिक्कत हो
तो कितने शर्म की बात हिंदी में ही कितने काव्य महाकाव्य रचे गए हिंदी हिंद का सिरमौर भारत की राष्ट्रीय भाषा कहे जाने वाली हिंदी ही हिंदुस्तान की पहचान यहां तो गीत के बोल भी दिए गए हैं हिंदी हैं हम वतन हैं हिंदुस्ता हमारा तो हिंदी से कैसी शर्म कहो एक बार मैंने ले लिया जाए की कोई भी वाद-विवाद साक्षात्कार आगे से सब हिंदी में ही होंगे वरना नहीं हिंदी को मान मिले सम्मान मिले यही हमारा प्राण हो चाहे कुछ भी हो फिर देखें अंग्रेजी कैसे चलती है जब हम खुद आगे रहकर अंग्रेजी से हाथ नहीं खींचेगे  तो वह तो हाथ बढ़ाएगी ही बारी हमारे सहयोग की है हिंदी से हमारी पहचान है हमसे हिंदी कि नहीं तो आओ हम सब मिलकर हिंदी का आवाहन अभिवादन करें जय हिंद जय हिंद जय हिंद

वंदना शर्मा बिंदु देवास मध्य प्रदेश
[15/09, 3:24 pm] रजनी अग्रवाल जोधपुर: शीर्षक"हिंदीहमारी पहचान है"

हम हिंदी हिंदुस्तानी हमारी पहचान सभी ने जानी ।संक्षिप्त स्वर व्यंजन में हम इसे एक पोस्टकार्ड पर सिखा सकते हैं यह एक अंग्रेज विद्वान ने कहा। मीठी मधुर सारगर्भित। जो कहते हैं वह समझा पाते हैं। सार सार सब बात, शब्द शक्तियों की बड़ी बात। निराली है ,गीत ग़ज़ल दोहा छंद मुक्त सभी छंद बध्द सभी से हिलमिल करती भाव भंगिमा की अभिव्यक्ति। मुझे अभिमान हिंदी पर। हिंदी हमारी प्यारी मां! हमारी राष्ट्रीय भाषा हिंदी! सबसे न्यारी तेरी बिंदी। हिंदी हम सब हिंदी से सारे विश्व में जाने जाते। वह हमारी शान मान जान और अभिमान।

स्वरचित रचना
  रजनी अग्रवाल
   जोधपुर
[15/09, 3:38 pm] ओम 👅प्रकाश पाण्डेय -: हिन्दी भाषा हमारी पहचान है और उसको उसका गौरवशाली स्थान मिलना चाहिए ---- ओमप्रकाश पाण्डेय
------ ओमप्रकाश पाण्डेय
आजादी के विगत चौहत्तर सालों में हिन्दी का काफी विकास एवं सरकारी क्षेत्रों में उपयोग बढ़ा हैं, लेकिन और भी अधिक करने की आवश्यकता है. लेकिन मेरे विचार से अगर सरकार और हिन्दी भाषा के प्रेमी लोग निम्न प्रयास और करें, तो बहुत सम्भव है कि हिन्दी को उसका अतीत का गौरव फिर से प्राप्त हो सके. यह बात स्वीकार करने की आवश्यकता है कि किसी भाषा की श्रेष्ठता स्थापित करने के लिए केवल सरकार ही नहीं अपितु जन जन की भागीदारी भी नितांत आवश्यक है.
1. सरकारी नौकरियों की प्रतियोगी परिक्षाओं में जिस प्रकार अंग्रेजी की परिक्षाऐं होती हैं, उसी तरह एक परिक्षा हिन्दी की भी होनी चाहिए.
2. हिन्दी में पुस्तक प्रकाशित करने पर सरकार के ओर से कुछ अनुदान मिलना चाहिए, जिससे लेखकों को प्रोत्साहन मिले.
3. हिन्दी लेखकों को जगह जगह अपने पुस्तकों का सार्वजनिक पुस्तक पाठ ( Book Reading) का कार्यक्रम आयोजित करना चाहिए. जिससे कि लोगों में हिन्दी साहित्य के प्रति फिर से लगाव शुरू हो सके.
4. आज कल आयोजित होने वाले कवि सम्मेलनों ने साहित्यिक हिन्दी को बड़ी क्षति पहुंचाई है. यह केवल लोगों, विशेष कर राजनैतिक नेताओं, क्षेत्र विशेष व व्यक्ति विशेष के उपहास उड़ाने का एक मंच हो कर रह गया है. हमें इस प्रवृत्ति को बदलना होगा. आखिर पहले लोग निराला, पंत , महादेवी, दिनकर आदि कवियों को सुनने आतें ही थे. हमें इसे पुनः शुरू करना पड़ेगा. इसके लिए हिन्दी के कवि एवं लेखकों को प्रयास करना होगा और उन्हें पैसे का मोह त्यागना होगा.
5. गीता प्रेस ने हिन्दू धर्म के धार्मिक पुस्तकों के प्रचार में बहुत बड़ा योगदान दिया. क्या हम इसी प्रकार का कोई प्रयोग हिन्दी के पुस्तकों के प्रकाशन व विपरण (Marketing) में कर सकते हैं. यह एक विचार है, जिस पर हमें चिन्तन करने की आवश्यकता है.
यह मेरे कुछ विचार हैं, परन्तु इसके अतिरिक्त बहुत से अन्य प्रयासों से भी हिन्दी की गरिमा को पुनः स्थापित किया जा सकता है.
( यह मेरी मौलिक रचना है ----- ओमप्रकाश पाण्डेय)
[15/09, 4:05 pm] Nirja 🌺🌺Takur: अग्निशिखा मंच
तिथि- १५-९-२०२१
विषय- लेख -हिंदी हमारी पहचान 

            जब हम हिंदुस्तान में पैदा हुए हैं तो हिंदी हमारी मातृ भाषा हुई और हमारी पहचान भी। 
         अब लाख टके की बात यह है कि हम उस पर गर्व करते हैं या शर्म से सिर झुकाते हैं। आज भी हम अंग्रेज़ो की गुलामी से उबर नहीं पाये हैं इसलिए अंग्रेजी हिंदी पर हावी हो जाती है। हिंदी फ़िज़ी की आफिशियल भाषा है और नेपाल ,त्रिनीदाद, बांग्लादेश मारिशस में हिंदी अच्छे से बोली और समझी जाती है। हिंदी बोलने और सुनने में बहुत मीठी है। यह बहुत समृध्द भाषा है। 
        नयी टेक्नोलाजी के कारण यह और निखर रही है। हिंदी की अच्छी बात है कि यह दूसरी भाषा के शब्दों को आत्मसात कर लेती है इसी लिए यह और समृध्द हो रही है।  
         अफसोस की बात है कि हिंदी को अपने ही देश दोयम दर्जा दिया जाता है। 
हमें इसे इसका स्थान दिलाना है। 
इसे राष्ट्रभाषा का सम्मान दिलाना है। 

नीरजा ठाकुर नीर
पलावा डोंबिवली
महाराष्ट्र
[15/09, 4:10 pm] जनार्दन शर्मा: *मेरी हिन्दी महान*
गांव की नई नवेली दुल्हन अपने पति से अंग्रेजी भाषा सीख रही थी, 
लेकिन अभी तक वो 'C' अक्षर पर ही अटकी हुई है।
 
क्योंकि, उसकी समझ में नहीं आ रहा था कि 
'C' को कभी 'च' तो 
 
कभी 'क' तो 
 
कभी 'स' क्यूं बोला जाता है? 
 
एक दिन वो अपने पति से बोली, आपको पता है,

*चलचत्ता के चुली भी च्रिचेट खेलते हैं...*
पति ने यह सुनकर उसे प्यार से समझाया

 
, यहां 'C' को "च" नहीं "क" बोलेंगे।
इसे ऐसे कहेंगे, *"कलकत्ता के कुली भी क्रिकेट खेलते हैं।*
 
"पत्नी पुनः बोली *"वह कुन्नीलाल कोपड़ा तो केयरमैन है न?*
 
"पति उसे फिर से समझाते हुए बोला, "यहां "C" को "क" नहीं "च" बोलेंगे।
 
जैसे, *चुन्नीलाल चोपड़ा तो चेयरमैन है न...*
 
थोड़ी देर मौन रहने के बाद पत्नी फिर बोली, *"आपका चोट, चैप दोनों चॉटन का है न ?*
 
"पति अब थोड़ा झुंझलाते हुए तेज आवाज में बोला, अरे तुम समझती क्यूं नहीं, यहां 'C' को "च" नहीं "क" बोलेंगे...
 
ऐसे, *आपका कोट, कैप दोनों कॉटन का है न. ..*
 
पत्नी फिर बोली - अच्छा बताओ, *"कंडीगढ़ में कंबल किनारे कर्क है?*
 
"अब पति को गुस्सा आ गया और वो बोला, "बेवकुफ, यहां "C" को "क" नहीं "च" बोलेंगे।
 
जैसे - *चंडीगढ़ में चंबल किनारे चर्च है न*
 
पत्नी सहमते हुए धीमे स्वर में बोली," 
 
*और वो चरंट लगने से चंडक्टर और च्लर्क मर गए क्या?*
 
पति अपना बाल नोचते हुए बोला, " *अरी मूरख,* यहां
 'C' को "च" नहीं "क" कहेंगे*
 
*करंट लगने से कंडक्टर और क्लर्क मर गए क्या?*
 
इस पर पत्नी धीमे से बोली," अजी आप गुस्सा क्यों हो रहे हो... इधर टीवी पर देखो-देखो...
 
*"केंटीमिटर का केल और किमेंट कितना मजबूत है...*
 
"पति अपना पेशेंस खोते हुए जोर से बोला, *"अब तुम आगे कुछ और बोलना बंद करो वरना मैं पगला जाऊंगा।"*
 
ये अभी जो तुम बोली यहां 'C' को "क" नहीं "स" कहेंगे - 
 
*सेंटीमीटर, सेल और सीमेंट*
 
हां जी पत्नी बड़बड़ाते बोली, 
 
"इस "C" से मेरा भी सिर दर्द करने लगा है।
 
*और अब मैं जाकर चेक खाऊंगी,*
 
*उसके बाद चोक पियूंगी फिर*
 
*चॉफी के साथ*
 
*चैप्सूल खाकर सोऊंगी*
 
*तब जाकर चैन आएगा।*
 
उधर जाते-जाते पति भी बड़बड़ाता हुआ बाहर निकला..
 
*तुम केक खाओ, पर मेरा सिर न खाओ..*
 
*तुम कोक पियो या कॉफी, पर मेरा खून न पिओ..*
 
*तुम कैप्सूल निगलो, पर मेरा चैन न निगलो..*
 
*सिर के बाल पकड़ पति ने स्वीकार किया कि हमारी मातृभाषा हिन्दी ही सबसे अच्छी है।*

हिंदी दिवस की हार्दिक शुभकामनाए।😊😊😊

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[15/09, 4:33 pm] अंजली👏 तिवारी - जगदलपुर: हिन्दी हमारी पहचान
हिन्दी हमारी मातृभाषा है
हमारे देश की पहचान है
हर क्षेत्र में बोली जाती है
सरल मीठी प्यारी होती है
हिन्दी से ही हमारी पहचान है
कि हम‌ हिन्दूस्तान के वासी है
कहीं भी जाते हिन्दी उपयोग करते
सभी जान जाते ये हिन्दू है हिन्दुस्तान ‌के
बताने की जरूरत नहीं लोगो को सभी समझ जाते जब हम हिन्दी ‌बोलते
गरीब अमीर नहीं देखती हिन्दी सभी के पसंद आती
बिन पैसे के भी‌ सभी के पास ‌चली आती
सबको देती‌ है‌ बराबर सम्मान 
जब हिन्दी में होते है‌ सब काम
अंग्रेजी की गटपट गटपट मुझे नहीं बोली जाती
हिन्दी ‌ही भाती है गर्व और सम्मान से 
मातृभाषा मेरी हिन्दी मातृभूमि की पहचान ‌है
रचनाकार
अंजली तिवारी मिश्रा जगदलपुर छत्तीसगढ़।
[15/09, 4:58 pm] आशा 🌺नायडू बोरीबली: हिंदी हमारी पहचान है ।
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            (लेख)

      ‌‌ हमारी राष्ट्रभाषा हिंदी है ।यह हमारे सम्मान, स्वाभिमान व गर्व की भाषा है ।यह जानकर हम सबको खुशी होगी, कि हमारी हिंदी भाषा विश्व में सबसे ज्यादा बोली जाने वाली तीसरे नंबर की भाषा है। हर देश की अपनी भाषा होती है। उनकी भाषा ही उनकेे देश की पहचान होती है। अतः हिंदी हमारे देश की हिन्दूस्थानी भाषा है ,जो देश की हमारी पहचान है। यह हमारा गौरव है। अपनी हिंदी के प्रति अपना प्रेम और सम्मान प्रकट करना ,हम सबका परम राष्ट्रीय कर्तव्य है।
           हमारे देश में कश्मीर से कन्याकुमारी तक, साक्षर से निरक्षर तक ,बच्चे से बूढ़े तक, अमीर से गरीब तक ,सभी हिंदी आसानी से बोल व समझ सकते हैं ।अंग्रेजी शासन के कारण हमारे देश में इंग्लिश में अपने पैर अवश्य ही जमा लिए हैं ।भारत में रहकर हिंदी को महत्व न देना, यह हमारी बहुत बड़ी भूल है। आजकल के बच्चों को स्कूल में हिंदी विषय कठिन लगता है, क्योंकि वे हिंदी के संपर्क से छूटते जा रहे हैं ।यह हमारा परम कर्तव्य है, कि अपने भावी नागरिकों के मन में अपनी राष्ट्रभाषा हिंदी के लिए अनुराग व गर्व उत्पन्न करें।
         ‌ आज हिंदी दिवस मनाने का अर्थ है ,गुम हो रही हिंदी भाषा को बचाने का प्रयास करना ,क्योंकि हिंदी विश्व में बोली बोली जाने वाली भाषाओं में एक है। यह विश्व की प्राचीन समृद्ध और सरल व सर्वसाधारण के समझने वाली हमारी राष्ट्रभाषा है। अब हमारी राष्ट्रभाषा अंतरराष्ट्रीय स्तर पर भी पसंद की जा रही है ,क्योंकि यह हमारे देश की संस्कृति एवं संस्कारों का प्रतिबिंब है ।आज विश्व के कोने-कोने से विद्यार्थी हमारी भाषा, हमारी संस्कृति ,हमारे संस्कारों, को जानने के लिए, सीखने के लिए, हमारे देश का रुख कर रहे हैं यह हमारे लिए गर्व की बात है।
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स्वरचित ----
डाॅ . आशालता नायडू .
भिलाई . छत्तीसगढ़ 
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[15/09, 4:58 pm] डा. अंजूल कंसल इन्दौर: हिंदी भाषा के सामने आज की चुनौतियां!

 हिंदी भारतीय सभ्यता, संस्कृति और समाज की भाषा है। 21वीं सदी में सभी भाषाओं को चुनौतियों का सामना करना पड़ रहा है। यह अवश्य है कि किसी भाषा को कम, किसी भाषा को अधिक। जहां तक हिंदी का सवाल है उसे अपनी पहचान बनाए रखने में संघर्ष- मुश्किलें एवं चुनौतियों का अधिक सामना करना पड़ रहा है। 
              इक्कीसवीँ सदी कँप्यूटर, इंटरनेट की सदी है। बच्चे जैसे ही आंख खोलते हैं उन्हें लैपटॉप, टैबलेट, कंप्यूटर, मोबाइल दिखाई देता है। लेकिन जब थोड़ा बड़े होते हैं तो उन्हें भिन्न प्रकार की शिक्षा- प्रणाली, शिक्षण का ढंग मिलता है, जिसमें उनकी ज्यादा रुचि नहीं होती है।
           हिंदी के सामने सबसे बड़ी चुनौती अंग्रेजी माध्यम, हिंदी माध्यम की है। माता-पिता को लगता है कि हिंदी माध्यम में बच्चे को पढ़ाने से रोजगार नहीं मिलेगा। यह भी किसी हद तक सही भी है, पर हिंदी हमारी विरासत- पहचान, मान- सम्मान है। अतः रूस और चीन की तरह अपनी भाषा का ज्ञान बच्चे को अवश्य कराएं। हिन्दी बच्चे की तरक्की में बाधक नहीं बनेगी।
 हिंदी और उर्दू दोनों भाषाएं सगी बहनों जैसी हैं। मुहावरे लोकोक्तियां का प्रयोग दोनों भाषाओं में होता है। 
हमें सबसे पहले शुरुआत अपने घर से करना चाहिये। हिंदी का वातावरण बनाना चाहिए, हिंदी भाषा सिखाएं बच्चों को।
(1) सर्वप्रथम अपने घर में एक अखबार हिंदी का मंगाएं, ताकि बच्चा हिंदी से ही आचमन करे। सुबह उठ कर और दिन की शुरुआत हिंदी माथे की बिंदी लगाकर करे।
(2) एक पत्रिका हिंदी की, बाल- भास्कर, तरंग चंपक, पराग, अवश्य मंगाए और बच्चे को पढ़कर सुनाएं। स्वयं भी हिंदी में रुचि लें।
(3) हिंदी की किताबों को उपहार में दें, जिससे हिंदी का प्रचार- प्रसार संभव हो सके।
4) स्वयं बच्चों के माता-पिता अपने हस्ताक्षर हिंदी में करें, और बच्चों को भी सिखाएं।
5) अपने घर पर नाम-पट्टिका हिंदी में लगवाएं। 6)दुकानों के फ्लेक्स बोर्ड, शादी- विवाह एवं शुभ मुहूर्त पर कार्ड हिंदी में छपवाएँ। 
7) सरकारी गैर सरकारी कार्यालयों में हिंदी को प्रोत्साहित करें।
8) सबसे पहले हिंदी की गिनती, संख्या स्वयं जानें और बच्चों को भी सिखाएं। 29,39,76, स्वयं माँओं को नहीं आता, और बच्चों को भी नहीं सिखातीँ।
9) बच्चों को अंग्रेजी की कविता - बाबा ब्लैक शीप के साथ -"सूरज निकला, चिड़ियां बोलीं, आसमान में छाई लाली" भी अवश्य सिखाएं।
10)प्रार्थना- पत्र, अपना पता, हिंदी में लिखें।
11) बैंक में लेनदेन के समय हिंदी में कार्य करने से बहुत से लोग सीख जाते हैं।
12) बस स्टैंड व रेलवे स्टेशन पर हिंदी का प्रयोग अधिक से अधिक करें। 
13)अस्पतालों व स्वास्थ्य केंद्रों पर हिंदी में लिखा होने से महिलाएं भी जल्दी समझ जाती हैं। 14)व्हाट्सएप फेसबुक पर हिंदी में लिखना सीखें।
15) भाषा- केंद्र लैंग्वेज, भी बनाई जा सकती है जिसमें शब्दकोश रखे हों।
16) प्रिंट मीडिया विज्ञापनदाता समूह हिंदी से जुड़ें।
17)वर्ष में एक बार, एक मंच पर सरकारी और गैर सरकारी संस्थाओं को हिंदी की मुश्किलें और चुनौतियों पर सलाह मशवरा करना चाहिए।

 अधरों पर छा जाए मुस्कान, बोलकर हिंदी 
संस्कार संस्कृति से कराए परिचय, मधुर वाणी हिंदी

 डॉक्टर अंजुल कंसल "कनुप्रिया"
15-9-21
[15/09, 5:10 pm] ♦️तारा प्रजापति - जोधपुर: अग्निशिखा मंच
15/9/2021 बुधवार
विषय - हिंदी हमारी पहचान है

विविधता से भरे देश में राष्ट्रीय एकता का प्रतीक हिंदी भाषा हमारी पहचान और सँस्कृति का अभिन्न अंग है। 14 सितंबर 1949 को संविधान सभा ने हिंदी को भारत की आधिकारिक भाषा के रूप में स्वीकार किया था।इसके बाद देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित जवाहरलाल नेहरू ने इस दिन को विशेष महत्व देते हुए 14 सितंबर को हिंदी दिवस के रूप में मनाने की घोषणा कर दी। आज के दिन विभन्न साहित्य संस्थाएँ विभिन प्रकार के कार्यक्रम जैसे हिंदी भाषा से सम्बंधित लेख,नाटक व कवि गोष्ठियां आयोजित करती है। आज के दिन इस तरह के कार्यक्रम व प्रतियोग्यताएं आयोजित का उद्देश्य है अपनी भाषा को प्राथमिकता देना और उसके विकास में महत्वपूर्ण सहयोग प्रदान करना।आज के दिन विभिन्न संस्थाओं द्वारा,हिंदी भाषा विकास के लिए कार्यरत्त व्यक्तियों को सम्मानित किया जाता है।आज के भौतिकयुग में भी हिंदी भाषा का कार्य क्षेत्र निरन्तर बढ़ता जा रहा है।ये हमारे लिए अत्यंत प्रसन्नता की बात है।संस्कृत के साथ हिंदी भाषा भी हमारे लिए वंदनीय है।डा. पंकज शर्मा ने कहा कि हिंदी भाषा महान साहित्यक कृतियों में प्रयोग की जाने वाली प्रमुख भाषा है।रामचरित मानस एक साहित्यक कृति है।जो हिंदी में भगवान राम की जीवन कथा का सजीव चित्रण करती है।गोस्वामी तुलसीदास जी की सबसे महत्वपूर्ण कृतियों में से एक है।जिसे 16 वीं शताब्दी में लिखा गया था।अतीत से हिंदी एक भाषा के रूप में विकसित होकर हमारी मातृ भाषा बन गयी। पर वर्तमान में हिंदी भाषा की स्थिति सोचनीय है।आधुनिकता की नाम में आजकल विभिन्न विद्यालयों में हिंदी के स्थान पर अंग्रेज़ी को महत्व दिया जा रहा है। आज अंग्रेजी बोलना सभ्यता की पहचान बनती जा रही है।हमारे अपने ही देश में हम लोग ही हिंदी से परहेज़ कर रहें हैं।अधिकतर आजकल हमारे बच्चे अंग्रेजी माध्यम से शिक्षा प्राप्त कर रहें हैं।मैं ये नहीं कहती कि अंग्रेजी पढ़नी नहीं चाहिये,परन्तु हिंदी भाषा को भी महत्वपूर्ण स्थान देना चाहिये।बच्चे आजकल अंग्रेजी के चक्कर में अपनी मातृभाषा हिंदी से विलग होते जा रहे हैं। आज के दिन हम सब मिलकर ये संकल्प ले कि हिंदी को अपने दैनिक जीवन में स्थान दे।सरकारी कार्यलयों में भी हिंदी में ही कार्य हो।सबसे पहले हमें अपने हस्ताक्षर हिंदी में करने चाहिये।केवल औपचारिक रूप से नहीं हमें यथार्थ में भी हिंदी भाषा के प्रचार-प्रसार अभियान में अपना महत्वपूर्ण योगदान देना होगा।तभी हमारी मातृभाषा हिंदी को विश्व में राष्ट्र भाषा के रूप में मान्यता प्राप्त होगी।और विश्व के विस्तृत मानचित्र पर हिंदी भाषा हमारी हिन्द की अपनी पहचान बनेगी।
                     जय हिंद
                           तारा "प्रीत"
                      जोधपुर (राज०)
[15/09, 5:30 pm] +91 70708 00416: हिन्दी भाषा को राष्ट्रभाषा घोषित किया जाए
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हिन्दी हिन्दुस्तान है
जन-जन की वाणी है हिन्दी
धड़कन में घोली है हिन्दी
मेरे देश का स्वाभिमान है"
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भाषा हमारे सोचने की दिशा निर्धारित करती है। हम बोलें चाहे कोई भी भाषा मगर सोचते हैं अपनी मातृभाषा में ही है।
        महात्मा गांधी ने कहा था,"राष्ट्रभाषा वहीं हो सकती है, जो सरकारी कर्मचारियों के लिए सहज और सुगम हो। जो धार्मिक और आर्थिक, सांस्कृतिक तथा राजनीतिक क्षेत्र में एकता स्थापित करने की शक्ति रखती हो।जिस भाषा को बोलने वालों की संख्या अधिक हो।.....
"यही राष्ट्रभाषा के पद पर प्रतिष्ठित हुई है!"
         किसी भी देश की राष्ट्रभाषा उसे ही बनाया जाता है जो उस देश में व्यापक रूप में फैली होती है। संपूर्ण देश में यह संपर्क भाषा व्यवहार में लाई जाती है। राष्ट्रभाषा संपूर्ण देश में भावात्मक तथा सांस्कृतिक एकता स्थापित करने का प्रधान साधन होती है। इसे बोलने वालों की संख्या सबसे अधिक होती है।
        हमारी राष्ट्रभाषा हिन्दी भारत के प्रमुख राज्य जैसे मध्यप्रदेश, उत्तर प्रदेश, बिहार, राजस्थान, हरियाणा तथा हिमाचल प्रदेश में प्रमुख रूप से बोली जाती है।हमारी हिन्दी भाषा में प्रचुर साहित्य उपलब्ध है। सभी विधाओं में साहित्य लिखा हुआ है। जैसे कहानी, कविता, नाटक, उपन्यास आदि। इन विधाओं के लेखकों को महत्त्वपूर्ण साहित्यिक पुरस्कार भी प्रापत हुए हैं।
    हिन्दी भारत की स्वयं सिद्ध राष्ट्रभाषा है।इसे बोलने वालों का प्रतिशत 70से भी अधिक है।
     किसी कार्य में सफलता प्राप्त करने के लिए परिश्रम तथा संघर्ष करना पड़ता है। हमारी हिन्दी भाषा भी क‌ई संघर्षों के बाद वर्तमान स्थिति तक पहुंची है। हिन्दी भाषा के विकास में संतों, महात्माओं तथा उपदेशकों का योगदान भी कम नहीं आंका जा सकता है।इनका जनता पर बहुत बड़ा प्रभाव होता है। उत्तर भारत के भक्तिकाल के प्रमुख भक्त कवि सूरदास, तुलसीदास तथा मीराबाई के भजन सामान्य जनता द्वारा बड़े शौक से गाए जाते हैं। इसकी सरलता के कारण ही क‌ई लोगों में कंठस्थ है।इसका प्रमुख कारण हिन्दी भाषा की सरलता,सुगमता तथा स्पष्टता है।संतों महात्माओं द्वारा प्रवचन भी हिन्दी में ही दिए जाते हैं। क्योंकि अधिक-से अधिक लोग इसे समझ पाते हैं।
       उसी प्रकार महाराष्ट्र के संत नामदेव,संत ज्ञानेश्वर आदि गुजरात प्रांत के नरसी मेहता, राजस्थान के दादू दयाल तथा पंजाब के गुरुनानक आदि संतों ने अपने धर्म तथा संस्कृति के प्रचार-प्रसार के लिए एकमात्र सशक्त माध्यम हिन्दी को बनाया।हमारा फिल्म उद्योग तथा संगीत हिन्दी भाषा के आधार पर ही टिका हुआ है।
मेरा मानना है कि सर्वाधिक बोलेजाने वाली हिन्दी भाषा को राष्ट्रीय भाषा घोषित करनी चाहिए।

डॉ मीना कुमारी'परिहार'
मंच को नमन 🙏
विधा- आलेख
15/9/21
[15/09, 5:38 pm] निहारिका 🍇झा: नमन अग्निशिखा मंच
विषय;-हिंदी हमारी पहचान है।
दिनाँक;-15/9/2021

हिंदी हमारी मातृ भाषा है।हमारे भावों की अभिव्यक्ति का आधार है।इसके पास वृहदशब्द भंडार है जो इसे विश्व की अन्य भाषाओं से अलग एक अनूठा स्थान प्रदान करता है। यह सहज सरल व माधुर्य गुण से भरी हुई एक अनूठी भाषा है जो।किसी अनजाने को भी अपना बनाने की शक्ति रखती है।इसका उद्गम संस्कृत से हुआ है।इसके ह्रदय की विशालता इतनी अधिक है कि इसमें अनेक भाषाएं घुल मिल गयीं हैं।यह सदा हम सभी को अपनी स्नेहिल छाँव में पल्लवन देती आयी है।।
इसके सम्मान में चन्द पंक्तियां निवेदित

🌹🌹🌹🌹🌹🌹
भावों की अभिव्यक्ति का साधन है हिंदी।
सदा लगी यह माँ के जैसी
गोद जो देती हिंदी।
लगती यह हमजोली तो
लगी कभी है सँगी।।
गर्व है हमको खुद पर जो 
हम बोल रहे हैं हिंदी।
वृहद रहा अक्षर भंडार
निकले जिससे शब्द अपार।
खरी कसौटी पर है इतनी 
विज्ञान लगे है हिंदी।
शुद्ध सटीक है सदा प्रामाणिक 
इतनी मानक हिंदी।
धन्य हमारा जीवन जो
हमको अपनाती हिंदी।।
🙏🏼🙏🏼🌹🌹
निहारिका झा
[15/09, 6:15 pm] Chandrika Vyash Kavi: दिनांक-: 15/9/2021

हिंदी भाषा हमारी पहचान है संस्कृत से इसकी उत्पत्ति हुई है! प्रत्येक देश की अपनी राष्ट्र भाषा होती है! सभी देशों में उनका व्यापार व्यवसाय भी अपनी भाषा में होता है! हमारे यहां हर प्रांत की अपनी अलग भाषा है! बहुभाषी होकर भी हमने एकता है यह अच्छी बात है किंतु यही अलग भाषा हमारी हिंदी के राष्ट्र भाषा बनने में बाधक भी है! स्वतंत्रता मिलने के बाद 14सितंबर 1949 को भारत की संविधान सभा में हिंदी केंद्र सरकार की आधिकारिक भाषा तो घोषित हो गई किंतु राष्ट्र भाषा न बन सकी! हिंदी को राष्ट्र भाषा का दर्जा देने के लिए 14 सितंबर को हिंदी दिवस मनाया जाता है! 
साहित्यकार कविता पाठ, लेख, निबंध से हिंदी की महत्ता बताते हैं स्कुलों में भी बच्चों को हिंदी का महत्व बताया जाता है! हिंदी भाषा सरल, सहज एवं मधुर होने की वजह से सरलता से बोली और समझ में आती है! आज जन जन में हिंदी भाषा का प्रचार प्रसार टीवी, सिनेमा, नाटक ,संगीत, साहित्य आदि से बहुत ही सुगमता से होने की वजह से आज सभी जगह हिंदी बोली और पढ़ी जाती है! 
आज विदेशों में भी हिंदी बोली जाती है और कई जगह तो जैसे फ्रांस जर्मनी में तो हिंदी पढाई भी जाती है! अपनी राष्ट्र भाषा तो होनी ही चाहिए! इससे व्यापार व्यवसाय में व्यापकता आती है! देश की आर्थिक स्थिति सुदृढ होती है! 
हमारी भाषा हिंदी हमारा मान है अभिमान है! हिंदी को राष्ट्र भाषा का दर्जा मिलना ही चाहिए! इसी में हमारी शान है! 
हिंदी हमारी मातृभाषा है हमें इसके मूल्य को समझते हुए राष्ट्र भाषा बना सम्मानित करना चाहिए!
[15/09, 6:24 pm] 😇ब्रीज किशोर: अग्नि शिखा मंच
     विधा लेख
   . मातृ भाषा हिन्दी
     १५/०९/२०२१
   हिन्दीहमारी राष्ट भाषा है।
हिन्दी हमारी मातृ भाषा है।
हिन्दी जन जन की भाषा है।
हिन्दी हिन्दूस्तान की भाषाह।
हिन्दी १९ ५० मे २६जनवरी को भारतीय संविधान मे राष्ट्र भाषा घोसीत किया गया।
अब सोचने की बात है कि ३साल कैसे लगा जब देश स्वतंत्र हो गया था।स्वतंत्रता मिलने के बाद हिन्दी को राष्ट्र भाषा के रुप मान्यता दिलाने मे बडे़ बडे़ साहित्यकार जै मैथिली शरण गुप्त,हजारी प्रसाद द्विवेदी ,महा देवी बर्मा,.गोविंद दास आदी ने अथक प्रयास किये।
लेकिन मेरे समझ से स्मपूर्ण
राष्ट्र भाषा.का दर्जा नही मिला।कारण साथ मे अग्रेजी को काम काज का भाष बना दिया गया।और कुछ अग्रेजी के चाहने वाले थोडे़ बचे हुए जन्मजात अफसर। बस मेरा कहना हम हर दिन माता मातृभूमि मातृभाषा दिवस मनाये।अपने हिन्दू, हिन्दी, हिन्दूस्तान को चमकाये।
*बृजकिशोरी त्रिपाठी*
    *गोरखपुर यू.पी*
मै शाम को हास्पिटल से घर पहुंची गई और हिन्दी पर लेख लिखी।हो सकता है सही लेख न लिख पाई हूं।
[15/09, 6:29 pm] 💃💃sunitaअग्रवाल: लेख _हिन्दी हमारी पहचान

     हम सब भारत वासी आज़ स्वतंत्र हुए सत्तर साल हो गए हैं , लेकीन मानसिक रूप से अंग्रेजो की भाषा, पहनावा, पश्चिमी सभ्यता के गुलाम है, शिकायत सबसे है , मैं भी उसमें शामिल हूं।
घर बाहर सरकारी काम में हिन्दी पखवाड़ा मनाया जाता है, यह हमारी मातृभाषा है, क्या हम पिछड़ रहे हैं, क्या हमारी प्रजातांत्रिक व्यवस्था जान बूझकर हिन्दी के साथ सौतेला व्यवहार कर रही है। दुनिया का पांचवा हिस्सा हिन्दी बोलने वाला है नक्शे के अनुसार सौ करोड़ से ज्यादा आबादी हिन्दी बोलती हैं।
मेंडारिन भाषा के बाद , दूसरी सबसे ज्यादा बोलने वाली भाषा हिन्दी है, हिन्दी को आगे क्यों नहीं बडा सकते , जरूरत है देश की अखंडता, संप्रभुता बनाए रखने के लिए देश भर की एक भाषा हो, ताकि विदेशी भाषा अपनी जगह नही बना सके , एक भारतीय भाषा होना नितान्त जरूरी है, कोई भी देश धर्म, संस्कृति,भाषा, से पहचाना जाता है आज हमारे देश में बारह से अधिक राज्यों में हिन्दी बोली व पढ़ी जाती हैं।सबसे मुख्य कारण
राजनीतिक कु चक्र , दक्षिण भारतीय लोगों द्वारा जमकर विरोध, कुछ पुरुषों के आत्मदाह कर लेने से भी सरकार को पुनः सोचने के लिए विवश होना पड़ा
      एक ताजा सर्वेक्षण रिपोर्ट के अनुसार हिन्दी सर्वाधिक बोली जानें वाली भाषा बन जायेगी। विदेशों में रहने वाले भारतीय अपने बच्चों को अपनी धर्म संस्कृति, प्रांतीय त्यौहार, बोली पहनावा आदि सभी का ज्ञान दे रहें हैं, छोटे छोटे बच्चें हनुमान चालीसा का पाठ मीठी वाणी में
गाकर करते हैं ।
हिन्दी अपने ही देश में पराई हो गई हैं। हिन्दी के साथ साथ अन्य भाषा का ज्ञान भी आवश्यक है।
आप और हम, सरकारी तंत्र, नेतागण अवश्य राजनीति करें लेकीन देश धर्म पहले माने, सभी राज्य अपने अपने राजभाषा को अपनाए, पूरे देश की एक भाषा , राष्ट्रभाषा होनी चाहिए। सबसे ज्यादा बोली जानें वाली भाषा हिन्दी।👍👍

हम सब भारतीय है, हम सब एक हैं। 
जय भारत 🙏
जयहिंद 🙏
वंदे मातरम् 🙏🙏
सुनीता अग्रवाल इंदौर मध्यप्रदेश स्वरचित 🙏🙏🌹
[15/09, 6:48 pm] रानी अग्रवाल: १५_९_२०२१, बुधवार।
विषय_हमारी राष्ट्र_भाषा हिंदी
विधा_ निबंध।
हिंदी मेरी प्रिय भाषा है,मेरी मातृ_भाषा है ,यह केवल मातृ भाषा ही नहीं बल्कि मेरे देश भारत की राष्ट्र _भाषा है।मुझे इससे बहुत प्यार है।यह हमारे देश में सबसे अधिक बोली और समझे जाने वाली भाषा है।विश्व के अन्य देशों में भी ये बोली जाती है।आजकल दुनिया के अमीर विकसित देश भी इसे सीख रहे हैं।
     १४सितंबर,१९४९को हमारे संविधान में हिंदी को राजभाषा घोषित किया गया,मुझे आपत्ति है की राष्ट्र_भाषा शब्द का प्रयोग क्यों नहीं किया गया? खैर इस पर तो अपना कोई अधिकार नहीं था।तब से अब तक ये बस संविधान में कानून ही रह गया।
     हिंदी के माथे पर जो बिंदी है उसका वो ही महत्व है जो एक सुहागन के लिए उसकी माथे की बिंदी का होता है।
     भारत की सारी भाषाओं की मूल भाषा संस्कृत है।उससे सर्वप्रथम हिंदी भाषा का उद्गम हुआ है।हमारे देश की अन्य भाषाएं इसकी सहचारी हैं। इसमें अंग्रेजी से लगभग दो गुना स्वर_व्यंजन हैं।और जो संयुक्त अक्षर हैं उनका तो अंग्रेजी में अता_पता ही नहीं।इसका शब्द भंडार सागर से भी गहरा और बृहद है।
     हम अपनी भाषा का सम्मान अपने देश में ही नहीं कर पाते।अंग्रेजी पढ़_पढ़कर विदेश भाग जाना चाहते हैं।संविधान के किसी भी कानून को असली जमा पहनने के लिए "राजनैतिक इच्छा"(political Will) की आवश्यकता होती है।जिस देश का हर राजनैतिज्ञ आकंठ स्वार्थ में डूबा हो,वहां हिंदी राजभाषा के प्रचार,प्रसार,विकास,उन्नति की चिंता कौन करेगा?ये हमारा दुर्भाग्य ही है।
     हम तो ये उम्मीद कर सकते हैं कि किसी दिन कोई माई का लाल "हिंदी सेवक"आएगा जैसे आज देश को प्रधान मंत्री "प्रधान सेवक" के रूप में मिला है।
    दूसरों की ओर न देखते हुए हमसे जो बन पड़ेगा हम अपना सहयोग हिंदी की उन्नति में दे रहे हैं, देते रहेगें
जयहिंद।जय हिंदी।
स्वरचित मौलिक निबंध लेखन_
रानी अग्रवाल,मुंबई१५_९_२१.
(केवल बड़ी_बड़ी बातें कहकर,इधर_उधर से क्लिष्ठ शब्दों का करने से बेहतर मैने अपने मंतव्य को सीधे_सरल शब्दों लिखना ही उचित समझा,आशा है आप सहमत होंगे।)
[15/09, 7:12 pm] स्मिता धारसारीया Mosi: हिंदी हमारी पहचान 
विद्या ..काव्य 

भारत के कण कण में ,
हिंदी को बसाना है 
.इसके जयकारों से 
हिंदुस्तान गुंजाना है |

हिंदी की देखो आज ,
शोभा न्यारी है ,
सीधी सरल भाषा ,
लगती सबको प्यारी है |

 हिंदी है हम 
हिंदी ,भाषा हमारी पहचान है ,
26 जनवरी 1950 में  
जब बना भारत का संविधान ,
हिंदी को मिला राष्ट्र भाषा का सम्मान 

मैथली ,जायसी महान कवियों की ,
बैश्विक पटल पर है यह अभिमान 

हिंद के है हम सच्चे सेवक ,
जन जन को करें हम प्रेरक ,
हिंदी सेवा ही हमारा लक्ष्य है ,
 यही हमारी कार्य अध्यक्ष है |

हिंदी परिवार तैयार करें हम ,
हिंदी का गुणगान करें हम ,|

स्मिता धिरासरिया ,बरपेटा रोड
[15/09, 8:39 pm] सुरेन्द्र हरडे: *हिंदी भाषा*जन जन की भाषा*
     सबसे बड़ा प्रश्न उठता है कि राजकाज की भाषा के रूप में हिंदी का स्थान बड़ा महत्वपूर्ण में अतः सबसे पहले और सबसे अधिक प्रयत्न इस दिशा में होना चाहिए स्वराज्य प्राप्त होने के बाद सबसे पहले बिहार उत्तर प्रदेश और मध्य प्रदेश की सरकारों ने हिंदी भाषा को राजभाषा का रूप में स्वीकार किया बिहार सरकार ने तो 1950 में एक विधायक द्वारा निर्णय लिया कि 7 वर्षो के अंदर वह अपने सारे कामकाज हिंदी में करने लगेंगे परंतु दुर्भाग्य से ऐसा नहीं हो सका और उसे फिर 3 वर्ष का समय इसके लिए लेना पड़ा अन्य राज्यों में भी इससे अच्छी स्थिति नहीं है कि 1960 तक भी हम हिंदी राज्यों में इस काम को पूरा कर लेते तो फिर हम आज विरोध सहना पड़ता।
    अंग्रेजों का शासन काल तक हिंदी का बोलबाला नहीं था फिर भी महात्मा गांधी ने स्वराज्य प्राप्ति के लिए हिंदी का ही उपयोग किया जनमानस की भाषा हिंदी है संपर्क की भाषा हिंदी है आज भी बहुत सारे राज्यों में हिंदी बोली जाती है और संपूर्ण भारत में हिंदी समझ लेती है भली हो कैसे हो सिनेमा सिटी में सिनेमा तो देखने जाते हैं वह भी हिंदी का है हिंदी का कितना बोलबाला है या आपको पता चल गया होगा 14 सितंबर 1949 को
संविधान सभा में राष्ट्रभाषा का दर्जा मिलना चाहिए ऐसा घोषित हुआ फिर भी दक्षिण के राज्यों में इसका विरोध किया गया यह गलत बात थी मातृभाषा में जो स्वाद है वह किसी में नहीं है जापान में जापानी भाषा जर्मनी में जर्मनी की भाषा भाषा का बड़ा विवाद है लेकिन किंतु अंग्रेजी की लिखावट में हिंदी को भूल सके भूल गए हैं इसी वजह हिंदी दिवस के रूप में मनाया जाता है।
     लोकमान्य तिलक हिंदी महत्वपूर्ण भाषा है और इसके बगैर अपन भारत स्वतंत्र नहीं हो सकता यह पता था उन्होंने हिंदी सीखा और वह हिंदी में ही फिर भाषण देने लगे पुरुषोत्तम दास टंडन हिंदी के लिए बहुत कार्य किया हर साल 14 सितंबर को हिंदी को याद किया जाता है और बाकी दिन भूल जाती है ऐसा नहीं होना चाहिए 365 दिनों में हिंदी का प्रचार प्रसार करने से ही हिंदी का विकास होगा विदेश में हिंदी दिवस के रूप में जिस देश की भाषा नहीं वह कैसा देश होगा बड़ा दुर्भाग्य है इस भारत देश का हिंदी भाषा जानने वाले सभी लोग हैं सिनेमा जगत में हिंदी के खाते है जब बोलने का समय आया तो अंग्रेजी में बात करते आजकल छोटे बच्चों को ब्रिंजल मालूम है लेकिन बैगन नहीं मालूम कितना अपनी भाषा का ताला लगाने लिऐ तुले हुए हैं सबसे ज्यादा भारत में अनेक भाषा बोली जाती है बंगाली हो अंग्रेजी हो मराठी हिंदी हो गुजराती हो अपनी मातृभाषा तो बोलना ही चाहिए उसके साथ हिंदी को बोले तो अपन जगत में अच्छा नाम कमाएंगे आज व्यापारी वर्ग भी हिंदी में बातें करने लगे हैं बड़े-बड़े कंपनियां हिंदी में अपना विचार शुरू करें और दोनों भाषाओं का उपयोग करें भाषा का उपयोग कर रहे हैं।
    *जनम जनम की है हिंदी भारत मां के माथे की बिंदी।
मेरे भारत की शान है हिंदी*!

सुरेंद्र हरड़े
नागपुर
दिनांक 15/09/2021
[15/09, 9:28 pm] सरोज लोडाया कवि: अग्निशिखा मंच 
निबंध - संपर्क भाषा के रूप में हिंदी  

भारत एक ऐसा देश है *विविधता में एकता सूत्र* अपनाया हुआ देश है । यहाँ अनेक भाषा और बोलियाँ बोली जातीं हैं। अंग्रेजों के शासन काल में भारत की एकता टूटने लगी ।आपस में ताल -मेल नहीं था। आजादी लडाई सफल होने के लिए नेताओं ने एक भाषा सूत्र जारी किया। भारत की एकता के लिए एक भासा की जरूरी भी थी। पहले स्वातंत्र संग्राम में अंग्रेजों के विरुद्ध हम लोग हार गये। हार के ठोस कारण भाषा भी एक थी । क्योंकि उत्तर और दक्षिण भारत के बीच की दूरी दूर करने की आशव्यकता थी। उदा:के लिए यदि उत्तर भारत में झांसी राणी लक्ष्मिबाई आजाद जी लडाई शुरु कर दी तो दक्षिण में कित्तूर राणी चेन्नम्मा ने लडा़ई   
जारी रखी थी। तब दोनों आपस में विचार सांझा करने में भाषा दीवार सी खडी़ थी ।कौनसी भाषा में बात करे जो सब को हमझ में आए? इसलिए हिंदी भाषा को राष्ट्रभाषा या संपर्क भाषा के रुप में स्वीकार कर ली। महात्मा गांधी जी ने दक्षिण भारत याने चैनै और धारवाड़ -कर्नाटक में हिंदी प्रचार सभा की स्थापना की ताकी हिंदी को सब लोग सिख जाए। चोदह सितंबर को हिंदी दिवस के नाम से हर साल मनाया जाता है। 
   अंग्रेजी के साथ हिंदी की होड़ लग गयी थी। धीरे -धीरे यह प्रांतीय भाषाओं के साथ होड़ लग गयी। हर राजाय के लोग अपनी मातृ भाषा को पहला स्थान देने लगे और दक्षिण के लोग हिंदी ठुकारने लगे। 
  हिंदी को हमें आज एक संपर्क भाषा के रूप में स्वीकारना उचित है क्योंकि भारत में यह जरूरी भी है। भाषा के लिए राजनीति करने के कोई जरुरी नहीं। भाषा मानव के विचारों के व्यक्त करने की एक साधना है। कोई भी भाषा हो उसे मान्यता देना जरुरी है। भारत जैसे देश में हिंदी भाषा की आवश्यकता अधिक है चाहे ओ राज भाषा या राष्ट्र भाषा हो या संपर्क भाषा के स्थान में क्यों न हो। 
हिंदी जन -जन।की भाषा है। 

जय हिंद। जय भारत।

डाॅ. सरोजा मेटी लोडाय।






[14/09, 6:54 am] रेखा शर्मा 🧑🏿‍🦽: जय माँ शारदे /मंच को नमन

दिनाँक - 14/9/2021

*🙋‍♀️हिन्दी दिवस की सभी देशवासियों को हार्दिक बधाई शुभकामना।🌹*

हिन्दी मेरी मैया, हिन्दी मेरी मैया।

तेरी मान की खातिर मैया,
 अपनी जान लुटा देंगे।
हँसते-ह़ँसते तेरे लिए माँ, 
 अपना शीश कटा लेंगे।

हिन्दी मेरी मैया, हिन्दी मेरी मैया।

सभी भाषाओं से बढ़कर,
 ज्ञान दे जाती हो माँ।
शब्द दर शब्द रचनाकर,
 सम्मान दे जाती हो माँ।

हिन्दी मेरी मैया, हिन्दी मेरी मैया।

तेरे आँचल में जन्म लिया,
तुझसे सीखा माँ कहना। 
तुम बिन कोई नहीं है मेरा।
तू ही सरस्वती तू ही वीणा।

हिन्दी मेरी मैया, हिन्दी मेरी मैया।

तेरी गाथा में नित दिन गाती।
शब्द लेखनी चलाती माँ।
तेरे बिना एक पल भी मैं,
थोड़ा नहीं चल पाती माँ। 

हिन्दी मेरी मैया, हिन्दी मेरी मैया।

तुझे विश्व की भाषा बना कर,
 अब हमको चैन आएगा।
तू ही सबकी जुबा पर होगी,
माता, तुझे ही पूजा जाएगा।

हिन्दी मेरी मैया, हिन्दी मेरी मैया।

 हिन्दी वसुंधरा की बिंदी हो,
 हर दिन प्रयास करना होगा।
हम सभी प्रण कर ले तो।
हर दिन हिन्दी दिवस होगा।।
 
हिन्दी मेरी मैया, हिन्दी मेरी मैया।

रेखा शर्मा" मुजफ्फरपुर बिहार
[14/09, 7:32 am] bhavna sawaliya: 🙏सुप्रभातम🙏

🇮🇳'हिन्दी दिवस' की हार्दिक शुभकामनाएँ🇮🇳

✍️प्रदीप छन्द✍️

जन-जन की भाषा है हिन्दी,
हिन्दी हिन्दुस्तान है ।
लेकर रूप राष्ट्रभाषा का,
भारत की पहचान है ।

संप्रेषण का साधन बन कर,
फैलाती वह प्यार है।
मधुरिम-सहज-सरल वाणी में,
वह करती व्यवहार है ।।

डॉ भावना सावलिया
[14/09, 8:17 am] *ज्योति भाष्कर "ज्योतिर्गमय"*: हिन्दी दिवस की हार्दिक बधाई एवं अनंत शुभकामनाएँ;
शीर्षक - *राष्ट्रभाषा हिन्दी*
देव-वाणी संस्कृत की है यह अमर सुपुत्री,
सुकंठ्य-सुभाषिनी हिन्दी है इसका नाम,
युगों-युगों के अपार परंपराओं की सुकृति,
आज भी रखी है जीवंत निज विरासत तमाम|
देववाणी -----

कल्कियुग,द्वापरयुग,सत्ययुग हो या फिर त्रेता,
जिनके सहयोग से भारत बना विश्वगुरू-विजेता,
संभाल रखी है जो आँचल में सभ्यता-संस्कृति,
कोटि-कोटि जुबान करते जिनको वंदन प्रणाम!
देववाणी -----

नवजातों के प्रथम बोल में मिलता जिसका मान,
हिन्दी ही है वो भाषा,वतन है हमारा हिन्दुस्तान,
जिनके कोख से जन्मी है कई भाषाएँ नवकृति,
जनहित को समर्पित हिन्दी की निष्ठा-निष्काम|
देववाणी -----

अनेकता को एकता के सूत्र में ये बाँधने वाली,
वेदों,पुराणों,उपनिषदों,ग्रंथों को थामने वाली,
सर्वत्र यह उपयुक्त सर्वगुण-संपन्न भाषावृत्ति,
शोभित है साहित्य-संगीत कला के सारे आयाम|
देववाणी -----

हिन्दी बनाए अखंड भारत संपूर्ण माँ भारती को,
पहचानो भारतीय विश्व-धरोहर हिन्दी सारथी को,
जुबाँ-जुबाँ बोले, रग-रग में बहे हिन्दी प्रकृति,
दिलों में बिठा इसे,एकता है हिन्दी का परिणाम|
देववाणी ----

हिन्दी है राष्ट्रभाषा,बने एकदिन विश्व की भाषा,
गढ़े नव कीर्तिमान यह जग में,यही है अभिलाषा,
हिन्दी की हो दिन-दुनी रात चौगुनी विकास प्रवृत्ति,
विकास के पथ पे चलती रहे अनंत तक अविराम|
देववाणी -----
-------✍️✍️✍️✍️✍️
        *ज्योति भाष्कर "ज्योतिर्गमय"*
            पतरघट,सहरसा(बिहार)
प्रमाणित करता हूँ कि ये मेरी स्वरचित रचना है!
[14/09, 8:45 am] चंद्र मणि ✖️मणिका: मेरे वर्णों में हिंदी है ।
मेरे शब्दों में हिंदी है ।
लिखूं गर शब्द कागज़ पर,
मेरे भावों में हिंदी है ।

कहूं मैं बात हिंदी में ।
लिखूं जज़्बात हिंदी में ।
मेरी रसना से रस बरसे ,
करूं जब बात हिंदी में ।

मेरी हर सुबह हिंदी है ।
मेरी हर शाम हिंदी है ।
रहूं गर नींद में भी मैं ,
मेरा हर ख़्वाब हिंदी है ।

करूं व्यवहार हिंदी में ।
करूं आभार हिंदी में ।
मिलो जो आप आकार तो ,
करूं सत्कार हिंदी में ।

चंद्रमणि मणिका
🙏🏻दिल्ली🙏🏻
[14/09, 9:28 am] 💃इंद्राणी साहू: *साँची-सुरभि*
             *हिंदी*
*दोहा*

भारत के माथे सजी , सबको भाती आज ।
सहज सुगम हिंदी बनी ,करती जग पर राज ।।

कहते फिरते क्यों सदा , हिंदी को लाचार ।
अंग्रेजी की धार से , करो न उस पर वार ।।

सरल सुगम मीठी बड़ी ,विवश न इसको जान ।
हिंदी भाषा पर सदा ,करो सभी अभिमान ।।

सर्व सुलभ भाषा यही , सब करते सम्मान ।
जन जन की भाषा बनी ,इसकी ऊँची शान ।।

पढ़ना लिखना बोलना ,इसमें हो सब काज ।
सब भाषा पूरक रहे , हिंदी हो सरताज ।।

है समृद्ध व्यापक बहुत , हिंदी का साहित्य ।
यह साहित्याकाश में , चमके ज्यों आदित्य ।।

हिंदी भारत देश की , आन बान है शान ।
विश्व पटल पर भिन्न ही , है इसकी पहचान ।।

सहज ग्राह्य भाषा सरल , आदरणीय विधान ।
कोमल शुचि शब्दावली , हिंदी की पहचान ।।

नहीं विरोधी यह बनी , भाषाओं की अन्य ।
साथ लिए सबको चली , प्यारी हिंदी धन्य ।।

यह समर्थ हर कार्य में , है व्याकरण समृद्ध ।
साँची हिंदी देश में , पावन रूप प्रसिद्ध ।।


     *इन्द्राणी साहू "साँची"*
     भाटापारा (छ. ग.)
[14/09, 11:06 am] डा. महताब अहमद आज़ाद /उत्तर प्रदेश: "हिंदी है अभिमान हमारा

सुंदर जिससे हिमालय का ताज! 
मीठे जिसके सुर और साज है!! 
वह प्यारी भाषा है हिंदी. !
यह जन जन की जो आवाज है!! 

हिंदी उर्दू बहना -बहना! 
दोनों का संग संग रहना!! 
भारत की पहचान है दोनों!
दोनों है साहित्य का गहना!! 

हिंदी लगे यारों बेगानी! 
अंग्रेजी अब लगे महारानी!! 
हिंद के लोगों की नादानी! 
देख के आया ऑखों में पानी!! 

देश का अभिमान है हिंदी! 
भारत की यह शान है हिंदी!!
"आजाद"की बातें लगती सच्ची!
भारत की पहचान है हिंदी!! 

डा. महताब अहमद आजाद
(उत्तर प्रदेश)
[14/09, 11:28 am] Dr Rashmi👑👑 Shig ( Allbad): हिन्दी हमारी मातृ-गुरूदेव 

हिन्दी भाषा आप मातु हैं ऐसी कृपा हमपे कर दो,छूट पाए न आँचल तुम्हारा।

हर निमिष जिंदगी की राह पर, मिल सके मातु संबल तुम्हारा ।

हम सभी मातु संतान तुम्हारे, आपकी हैं,कृपा के सहारे। 

भूल हमसे अगर हो अजाने,भूल उसको नहीं आप माने। 

शक्ति का यूँ हुआ अवतरण है,हर मनुज आपकी ही शरण है।

आपसे पाएँगे जीवन मे यश, स्नेह, सद्विचार संचार लेखन शक्ति। 

हे जगन्मातु आशीष का हो,शीश पर हाथ हर क्षण तुम्हारा। 

विश्व की शक्तिरूपा हमें तो, हिन्दी लेखन मिले बल तुम्हारा। 

हर तरफ जब घिरे आपदाएँ, हो डराती भयंकर कलम लेखनी। 

जब ह्रदय में हताशा भरी हो,कलम सहमी हुई हो डरी हो।

तब चले साथ में हिन्दी माँ हमारे,हर क्षण मेघ शीतल तुम्हारा। 

जब न ज्ञान मिले जिंदगी में, जब न अपनत्व हो समाज में।

जिंदगी खोखले सीप-सी हो,बुझते हुए दीपक-सी हो।

उस समय स्वातिकण-सा ह्रदय में, भर सकें स्नेह निर्मल तुम्हारा। 


डॉक्टर रश्मि शुक्ला 
प्रयागराज उत्तर प्रदेश
 भारत
[14/09, 12:11 pm] शुभा 👅शुक्ला - रायपुर: हिन्दी भाषा पावनी 
****************
हिन्दी कितनी पावनी हिन्दी एक अभियान 
हिन्दी पे बिंदी सजती ये भारत की शान 

हिन्दी सर्वश्रेष्ठ है हिन्दी इतनी उत्कृष्ट 
हिन्दी की जयकार करें होकर सब आकृष्ट

सरोवर सी लबालब है हिन्दी कला साहित्य  
हिन्दी में है संपूर्णता निशा सबको समझाए

हिन्दी का उत्थान ही है इसका सम्मान 
इस पर सबको नाज हो करे हिन्दी का गुणगान

हिन्दी समृद्धशाली एक भा हाषा हिन्दी सबसे संपन्न 
हिन्दी को कमजोर कहे वो जन है खुद विपन्न 

हिन्दी की क्षमता का जग में और न कोई सानी है
हिन्दी ने कर दी छुट्टी सबकी सबने इससे हार मानी है 

कितनी सरस और कितनी निर्मल दिव्य रूप की ओढ़े चादर 
बच्चे बूढ़े और जवान ने पहनी इसकी ममता की झालर  

हिन्दी है सुसंस्कृत भाषा करती सदा संस्कार प्रवाहित 
हिन्दी भाषा राष्ट्रहित में करती शुभ विचार समाहित

हिन्दी हमारी राजकीय भाषा इसे और ऊंचा उठाना होगा 
हिन्दी है जन जन की भाषा इसे राष्ट्रभाषा बनाना होगा 

शुभा शुक्ला निशा
रायपुर छत्तीसगढ़
[14/09, 12:42 pm] 👑सुषमा शुक्ला: हिंदी भाषा

हिंदी भाषा हमारी मातृभाषा,,,
 इस पर दारोमदार है। जीवन का आधार है।

हिंदी की सुंदरता इसका सहज होना।
अपने उद्गारओ को,,
 व्यक्त करने में महज होना।
हिंदी जन-जन की प्रिय है,,
 इसी से हम सब सक्रिय हैं।

हमारा गौरव आत्मसम्मान, इसी पर टिका है।
इसकी भव्यता इसकी सादगी, अनुपम छटा निराली,,,
, यही जीवन में माधुरी रस् लेकर आ ली।
🌹🌹🌹🌹

स्वरचित सुषमा शुक्ला
[14/09, 1:02 pm] निहारिका 🍇झा: 🌹 हिंदी🌹

विश्व पटल पर बिंदी सी दमक रही हमारी हिंदी।
देवनागरी की यह बेटी अद्भुत गुण समेटे है।
अर्थ तर्क और भाव व्यंजना इसके ही परिधान हैं। 
मीठी इतनी शहद के जैसी
भाषाओं की जान है।।
दूर सुदूर जगह पर भी
बोली जाती अपनी हिंदी।
गीत गजल व कथा कहानी
हर रूपों में दिखती हिंदी।
विविध विधा का धर भंडार
नवल ज्ञान सिखाती हिंदी।
सरल सहज लगती है इतनी
बच्चा बच्चा बोले हिंदी।
प्रेम भरा है इसमें इतना
जैसे माँ की लोरी हिंदी।।
दुनिया मे परचम लहराती 
देश का मान बढ़ाती हिंदी।।

🌹हार्दिक शुभकामनाएंआप सभी को🌹
निहारिका झा।🙏
[14/09, 1:51 pm] डा. अंजूल कंसल इन्दौर: हिंदी बने राष्ट्रभाषा
हिन्दी मेरी पहचान

जब जब कवि की कलम से
हिन्दी मुखरित हो उठती है,
देशप्रेम की और राष्ट्रभक्ति की
मधुर वीणा झंकृत हो जाती है।

हिन्दी में भारत माता की
रज की खुशबू महकती है,
हिन्दी के शब्द- शब्द में
स्नेह की सुगंध मिलती है।

अ आ इ ई उ ऊ स्वर
क ख ग घ व्यन्जन
हिन्दी की वर्णमाला
अद्भुत और अनुपम।

खेल खेल में क से कमल
ख से खरगोश सीख गए
स से सरौता श से शंख
त से तोते के हरे हरे पँख।

हम हिँद देश के नागरिक  
सदा हिंदी को अपनाते हैं
बचपन के खेलों में माँ गुरू
हिन्दी वर्णमाला सिखाते हैं।

हिन्दी माथे की बिंदी
माँ के ललाट सजती,
हिन्दी मेरा स्वाभिमान
पिता की देती अनुभूति।

हिंदी हमारी सँस्कृति
हिंदी से मिले सँस्कार
हिन्दी सहज सरल
हिन्दी मेरी पहचान।

हिन्दी बने राष्ट्र्भाषा  
हिन्दी में संविधान बने
हिन्दी बने न्यायालय की भाषा
हिन्दी को मिले राष्ट्र्भाषा दर्जा।

डा अंजुल कंसल"कनुप्रिया"
इंदौर मध्यप्रदेश 14-9-21
[14/09, 4:17 pm] चंद्रा नेमा दमोह: महाकवियों के शब्द कोष की अनुपम निधि हमारी हिन्दी।। 
पंचतत्व की तरह समाई। 

हममें सदा हमारी हिन्दी।। 
शब्द कोष की व्यापकता का 
ज्ञान अधूरा दिखता उनमें। 
बोलचाल में अंग्रेज़ी का तड़कासहे हमारी हिन्दी।। संस्कृति मय संस्कार की हिंदी।। 
सबकी बोली में निभतीहै
सहज सुरम्य कलेवर इनका
हिंदुस्तानी चिर निवासनी। 
माथे तिलक हमारी हिंदी 
संस्कृति मय संस्कार की हिंदी।। 
मातृभाषा से कोष भरदिये
   सार्थक लेखन कृतियां कर दीं। 
हमसे यही अपेक्षा करती 
अब भी आज हमारी हिन्दी 
संस्कृति मय संस्कार की हिंदी।। 
मुझे सदा पावन रहने दो 
बोलचाल लेखन हो जब भी। 
गरिमा सदा बढ़ाऊंगी मैं 
हमसे कहे हमारी हिंदी।। 
संस्कृति मय संस्कार की हिंदी 
पंचतत्व की तरह समाई 
हममें सदा हमारी हिन्दी। 
अपने मन के शब्दकोष की  
अनुपम निधि हमारी हिन्दी। 
संस्कृति मय संस्कार की हिंदी 

चंद्रा नेमा दमोह म प्र
राष्ट्रभाषा हिंदी दिवस पर विशेष आभार सहित। नमन।  
🙏
[14/09, 4:28 pm] आशा 🏆🏆जाकड इन्दौर: हमारी भाषा हिंदी ःदोहे

 हिंदी भाषा है सरल जिसमें खूब मिठास 
 प्यार से गर बोलिए , दूर होगी खटास।

 अवधि, निमाड़ी ,मालवी हिन्दी के ही रूप
  राजस्थानी बुंदेली , हिन्दी सुन्दर रूप।

 हिन्दी में ही वेद है हिन्दी में पूराण,
हिन्दी में उपनिषद है हिन्दी में रामाण।

 हिन्दी हमरी आन है हिन्दी से है शान
हिन्दी हिन्दुस्तान की हिन्दी पर अभिमान।

 हिन्दी हमारी जननी करें मात सम्मान 
जैसे करते जननि का बढ़ता हिन्दी मान ।

हिन्दी बोलो नेह से कान में शहद घोल
पीड़ा दूर भगात है जिसका तोल न मोल।

 हिनदी में ही राम है हिन्दी में घनशाम ,
सुबह उठते राम भजो सांझ को सियाराम।



आशा जाकड़ 
9754969496
[14/09, 4:33 pm] रजनी अग्रवाल जोधपुर: शीर्षक "हिंदी है अभिमान हमारा"

1. हिंदी शब्दों का देखो नजारा,
सब भाषाओं में सरल प्यारा , 
हिंदी है अभिमान हमारा ,,,,,,,,,,

2. कितना सुंदर कितना प्यारा , 
 शब्द शब्द लगे आंखों का तारा ,,,,,,,,
हिंदी है अभिमान हमारा

3. व्यंजन 21 स्वर है ग्यारहा , 
 बहती रहे भाव भरी धारा , 
 हिंदी है अभिमान हमारा ,,,,,,,,

4. एक पोस्ट कार्ड पर सिखा दें , 
 यही है हमारा सच्चा नारा , 
 हिंदी है अभिमान हमारा ,,,,,,,

5. नहीं इसका अपमान गंवारा , 
रंग रंगीले शब्दों का बहारां ,
हिंदी है अभिमान हमारा ,,,,,,,,,

स्वरचित कविता रजनी अग्रवाल
  जोधपुर
[14/09, 5:16 pm] अंजली👏 तिवारी - जगदलपुर: हिन्दी
हिन्दी है सीधी सादी
मीठी एवं प्यारी प्यारी
मां समान निश्चल लगती
सबको बहुत प्यारी लगती
सब करते इससे प्रेम
अंग्रेजी आने पर भी
नहीं रहते इससे दूर
हिन्द की हिन्दी
भारत की है प्यारी बेटी
सहज सुन्दर सरल
समझने सिखने में आसानी
नहीं कोई कठिनाई है
मेरी हिंदी सबसे प्यारी
सभी देशों में पहचान बनाई
मेरी हिंदी मुझे प्यारी
बना दो इसे राष्ट्र की भाषा
नहीं रहोगे तुम पीछे देश के ये वासी 
क्योंकि सभी समझते हैं गांव और शहरवासी।
अंजली तिवारी मिश्रा जगदलपुर छत्तीसगढ़।
[14/09, 6:45 pm] Nilam 👏Pandey👏 Gorkhpur: हिन्दी दिवस की हार्दिक शुभकामना
हिन्दी

भारत का सम्मान है हिंदी 
हम सब की पहचान है हिंदी 

देवों की वाणी से निकली 
अमृत की रसधार है हिंदी 

पूरब पश्चिम उत्तर दक्षिण 
सबका ही व्यवहार है हिंदी

 कभी विद्यापति के गीतों में
 छम छम करती है हिंदी 

कभी बिहारी की राधा बन 
आंखों से हंसती है हिंदी 

कभी जायसी की पद्मावत 
कभी मीरा की गिरधारी हिन्दी

भारतेंदु का भारत वंदन 
कभी सूर की कुंज बिहारी हिन्दी

 रामचरितमानस बन कर
जन जन में छाई है हिंदी

 दीपशिखा यामा नीरजा
निराला की जूही बन आई हिन्दी

प्रेमचंद महावीर शुक्ल की
निबंध ,कथा, कहानी हिन्दी

जय शंकर की कामायनी है
कल्हण की रजत तरंगिणी हिन्दी

रानी केतकी की अमर कहानी हिंदी
 कभी झांसी वाली रानी हिंदी

झरने से झरते गीत - ग़ज़ल
कही दोहे ,छंद चौपाई हिन्दी

कहीं गिरधर की कुण्डलियाॅ है
 रसखान का मधुर सवैया हिन्दी

ग्यारह रस से भरी हुई
अलंकार से अलंकृत है हिन्दी

अमृता ,मन्नू की सहज,सरल
धर्मवीर, नागार्जुन की पैनी हिन्दी

 हिंदीभारत का वैभव है 
जन जन के मन भाई हिन्दी
नीलम पाण्डेय
गोरखपुर उत्तर प्रदेश
[14/09, 7:27 pm] गोवर्धन लाल बघेल "गुँजन" टेढी़नारा जिला महासमुंद छत्तीसगढ़ Bagera♠️♠️: 🙏🙏🌹🌹हिन्दी साहित्य प्रेमीयों को हिन्दी दिवस की शुभकामनाए

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हिन्दी भाषा स्वाभिमान
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पावन और मन भावन भाषा
         मृदुल बोल है हिन्दी।
सोलह श्रृगार सुशोभित जैसे
            माँ की माथे की बिन्दी।।
सहज सरल और सालिनता
            आत्मियता संस्कार।
हम सब भारतवासी करते
              हिन्दी में व्यहार।।
हमें विरासत में मिली है
             प्यारी हिन्दी भाषा। 
साहित्यों की अतुल खजाना
          जाने कर जिज्ञासा।।
विश्व पटल में जाने जाए
              मिले एक पहचान।
दूनिया के सब लोग करें
            हिन्दी का सम्मान।।
 जो भी है हम क्षेत्रीय भाषी
            सब रहते हिन्दुस्तान।
विविध प्रांत के है सहोदर
        हिन्दी भाषा स्वाभिमान।।
             
स्वरचित

गोवर्धन लाल बघेल
टेढी़नारा( गाँजर )वि.खं. बागबाहरा जिला महासमुंद छत्तीसगढ़
            
             ।।
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