Friday, 30 July 2021

अखिल भारती अग्निशिखा मंच के ब्लॉक पर आज आप पढ़िए साइली छादऔर आनंद लीजिए डॉ अलका पांडे मुंबई







सायली छंद १/२/३/२/१/

बंजर 
वसुंधरा हुई
बरखा रानी बरसों 
भर दो 
नमी

उपजाऊ 
बहुत हूँ 
बीज रोपों तो 
अनाज हो 
पैदा 

किताब 
पुरानी सी 
कह रही नई 
कहानी सी 
कुछ

ख़ुशियाँ 
घर  आई 
ठहरी नही वो 
सब थे 
बुलाते

सावन 
हरियाली लाया 
उपवन बाग़ बग़ीचे 
फूलो से 
महकतें 

मिट्टी 
जीवन देती 
अनमोल बड़ी है 
करना इसकी 
इफाजत 
अलका पाण्डेय -अग्निशिखाा💐💐💐💐
चूड़ियां
 सज रही
 दोनों हाथों में
साजन  के
लिए

सावन 
बरसे बदरिया 
ओढ़े धानी चुनरिया
धरती बनी 
दुल्हनिया



 ठंडी
पवन चले
मंद मंद समीर
सावन की
याद

साजन 
गया ससुराल
सावन मास में
सजनी करी
स्वागत।

नवरंगी 
फूल खिले
बरसात से मोहित 
महके सुमन
यहाँ।

विश्वास 
तुम राखो 
प्रिय रघुराम पर 
होगा सब
 अच्छा।

डाॅ. सरोजा मेटी लोडाय


सायली 

सखी 
सावन आया
चलो झूला झूलें
मन हर्षाया
आज

सावन
लाया खुशियाँ
बाबुल की गलियाँ
 झूला पटरी
 राखी

आशा जाकड़




💐💐💐💐
चूड़ियां
 सज रही
 दोनों हाथों में
साजन  के
लिए

सावन 
बरसे बदरिया 
ओढ़े धानी चुनरिया
धरती बनी 
दुल्हनिया



 ठंडी
पवन चले
मंद मंद समीर
सावन की
याद
चंद्रिका स्वर्णकार


शीर्षक" सायली छंद"

1. तरसे ,
   अखियां मेरी ,
   मैं ना जानी , 
  कृष्णा की , 
  दीवानी.

2.आ,
     अब तू,
       दर्शन की प्यासी ,
        मेरी अखियां ,
        सांवरे.

3. तेरी , 
  सूरत पे , 
  जग है दीवाना , 
   आ रे , 
    मोहना .

4. याद ,
    तेरी आई , 
    आंख भर आई ,  
      दिल बेचैन ,   
     कन्हाई

   5. प्यारे, 
    मेरे दिलदार
    तेरा ही इंतजार ,
   दरस दिखा ,
 . कृष्णा

     स्वरचित रचना
      रजनी अग्रवाल 
     जोधपुर



३०_७_२०२१
अ. भा. अग्निशिखा मंच
 विधा_सायली छंद विषय_कृष्णा 
बांकेबिहारी,
प्रीत हमारी,
सरे आम हुई,
क्या करूं?
मैं।१।💓
मैं ,
समझती हूं,
मेरे साथ हो,
ठीक है,
न?।२।💓
अब,
तेरी चाहत,
बनी मेरी आफत,
कैसे निजात,
पाऊं?।३।💓
हे, 
प्रिय प्रियतम,
देना ना दगा,
मर जायेंगे,
हम।४।💓
तेरे,
दरबार में,
तेरे प्यार में,
हाजिर हूं,
मैं।५।💓
कृष्णा,
मेरे प्रभू,
विश्वास बनाए रखना,
आस तोड़ना,
ना।६।💓
हे,
मुरलीधर,बंसीधर,
सुनाओ मीठी तान ,
हर लो,
प्रान।७।💓
मैं, 
जैसी हूं,
स्वीकार कर लो,
चाकर बना,
राखो।८।💓
सम्मुख,
हमेशा तुम,
गुम हम तुम,
प्रीत में,
झूम।९।💓
तुम,
मिल गए,
कछु न चाहूं,
तुम्हारी रहूं,
हरदम।१०।💓
कृष्णा,
आरंभ मेरा,
यही हो जाए,
अंत मेरा,
कृष्णा।११।💓
स्वरचित मौलिक सायली छंद
रानी अग्रवाल मुंबई द्वारा ३०.७.२१.



अग्निशिखा मंच को नमन🙏
विषय:- सायली छंद

ओम्
गणपते नमः 
आशीष दो मुझे !!१!!
है तुमसे
बिनती

हे
विठू माऊली
सुनो अरज करुंगा। !! २!!
तेरी पैदल
वारी

कैसा
खेल रचाया
कोरोना तुने मानवके !!३!!
जीवनका सपना
बिघाड़ा

हे
प्रभु रामचंद्र
रावणसे किया युध्द !! ४!!
सीताको छुड़ाया
लंकादहन

सचिन
क्रिकेटका बादशाह
लगाया रनोका अबांर !!५!!
करूं बखान
आपका

धोनी
क्रिकेटका कर्णधार
छक्को का बादशाह।।६।।
तारीफ करु
आपकी।

हे
राम
प्रजा के राजा
सत्यवचनी प्रजापालक।।७।।
न्यायप्रिय




दिलीपकुमार
सिनेजगत महानायक
राज किया छेदशक !! ८!!
सायराबानु का
साथ

सोच
साथ निभाना
जिंदगी भर का। !!९!!
पतीपत्नी बनकर
रहना

*सुरेंद्र हरड़े*
नागपुर महाराष्ट्र
दिनांक:-३०/०७/२०२१


अग्निशिखा मंच को नमन
विषय :- स्वतंत्र
विधा *सायली*

१) मानव
     कितना भाग्यवान
     पाया नर जनम
     रख जिंदा
     इंसानियत

२) मनुष्य
     अपने लिए
     जिया मत कर
      दुसरेके लिऐ
      जी

३) सावन
     जब आये
     याद मेरी पियाकी
     मेरे मनको
     सताऐ।

प्राध्यापक :*रविशंकर कोलते*
                   नागपुर


🌹🙏अग्नि शिखा मंच 🙏🌹
विषय: *बेटी *
विधा:* सायली * 
दिनांक: 30-7-21
**************************
🌹
समाज 
को बढ़ाना
है , तो बेटी
को पढाओ 
खूब ।
🌹
बेटी
को बचाना 
समाज को बचाना 
है, जानो
इसे ।
🌹
कन्या 
भ्रूण- हत्या
करना न कभी 
बहुत बड़ा 
पाप ।
🌹 
दहेज़ 
लोलुप- लोग
समाज के अभिशाप 
हैं - पूरी 
तरह ।
🌹
समय
बड़ा- नादान
कर लो इसका
ससमय- पूरा 
ध्यान ।
🌹
**************************************
स्वरचित एवं मौलिक रचना 
रचनाकार-डॉ पुष्पा गुप्ता 
मुजफ्फरपुर 
बिहार 
🙏


मंच को नमन, 🙏
विधा- सायली छंद
30/7/21

1- नारी
      शक्ति की
     चहुंओर प्रकाश
     फैला रही
     बेटियां
2- छोड़
      के बाबुल
      का आंगन साजन
      घर हम
      चलें
3- अपने
      थे लोग
      आज के दिन
       पराए हो
        चले
4- एक 
      नया गीत
      गुनगुनाने मैं चली
       एक राग 
        सिखाने
5- बेटे
      चिराग हैं
       बेटी वो रोशनी
        भेदभाव मिटाने
         चली
 
डॉ मीना कुमारी परिहार


अग्निशिखा मंच
विषय---सायली छंद
दिनांक---30-7-2021

1)

मन 
उदास हुआ
इस भीगे मौसम
 साजन नहीं 
करीब ।

2)

बरखा
जब आती 
हरियाली छा जाती
प्रकृति भी
मुसकाती ।

3)

मौसम
सावन का
आया हर बगिया 
महके फूल
रंगीन ।

4)

पेड़ों 
झूला डाले
झूलती हैं सखियाँ
मिल करती
अठखेलियाँ।

5)

साजन 
दरस कराओ
देखो बरसते नैन 
बादल संग
मेरे ।

                      रानी नारंग


सायली

कोला
को पीकर
पेट की बदहजमी
दूर करें
तुरंत

बरसा
का पानी
खेतों में फसल
अच्छी तरह
उगाए

मौन
एक भाषा
होती है महत्वपूर्ण
अपनाकर बनो
श्रेष्ठ

वाणी
की मधुरता
मन मोह लेता
अपना बनाता
सबको

प्राणायाम
रोज करो
तन मन सब
हो जाए
ऊर्जावान

कुमकुम वेद सेन




🌺शुक्रवार -30/ 7/ 2021
🌺विषय - सायली 

शीर्षक: पावस में

बादल
बरस गए
भीग गई धरती
तरस गए
एकाकी

अंधियारी
छा गई
पावस में मावस
लगती है
सचमुच।

झूले
डाल दिए
झूल रही सखियां
गा गाकर
कजरी।

बोल
मल्हारों के
मीठे हैं लगते
मिसरी से
घुलते।

दादुर
उछल उछल
रात भर टर्राते
पढ़ते कोई
कथा।

नाचते
मयूर भी
लगते अति सुंदर
फैलाए पंख
गोलाकार।

तैराते
पानी पर
बना बना नौकाएं
चपल चंचल
बच्चे।

© कुंवर वीर सिंह मार्तण्ड, कोलकाता


नमन मंच 
सायली छंद 
हर्फ़ 
निकले दिल 
मचाई हलचल कानो 
उतरे कागज 
पर 

चली 
कोरे कागज 
पर कलम धार 
मचाया शोर 
संसार 

दिया 
बदल परिवेश 
साहित्य की ताकत  
है बड़ी 
जोर 

स्मिता धिरासरिया ,बरपेटा रोड


सायली छंद
--------------
सावन 
की बूंदे
 धरती पर गिरी 
 नाच उठा 
मन ।
हाथों 
 की मेहंदी
 मेरी लाल चुनर
 पुकारे तुझे
 पिया।
 
 सावन 
के झूले 
तुझ संग झूलूं
 मेरे प्यारे
 पिया।
 शिवजी
 संग गौरा
 पूजन करूं मैं 
नवाऊं नित 
शीश।
 धन्यवाद 
अंशु तिवारी पटना


$$ सायली $$


पाॅलीथीन 
क्यों नही
छोड़ पाते हम
समझ नही
आता


पर्यावरण 
बचाना चाहते
पेड़ नहीं लगाते
कैसे बचेगा
पर्यावरण 


हरियाली 
भाती हमे
मेहनत थोड़ी करले
आओ पेड़
लगाए

जंगल
कर दिए 
सारे के सारे
खतम हमने
देखो

चन्दा डांगी रेकी ग्रैंडमास्टर 
रामटेकरी मंदसौर मध्यप्रदेश


नमन मंच
दिनांक -: 30 /7/ 2021
 विषय -: सायली

जब
साथ तेरा
होता है तो 
संभल जाता 
 हूं !

वरना 
यादों को 
सीने से लगाए
फिरता हूं 
 मैं !

तेरे 
आने की 
खुशबू पाकर ही 
चले आये
 हम ! 

अधूरी 
तमन्ना थी
चाहत को लिए
 चले आए
 हम !

बेवफा
 इस कदर
 तड़पा के न
 जाया करो
 हमें !

 फुर्सत 
 में कभी
अपने जलवे दिखा
 जाया करो
 हमें !

अपने 
कूचे में 
पनाह लेने की
 इजाजत दो
 हमें !

कसम
खुदा की
 जिंदगी भर न
 छोडे़ंगे हम
 तुम्हें !

            चंद्रिका व्यास 
          खारघर नवी मुंबई



नमस्कार मन्च् 🙏🌹
सायली

चूडियांँ
हरी हरी
मेरे हाथ में
सावन की
सौगात

सुन्दर
लाल सुनहरी
हथेली पर रची
शुभ सुहाग
मेहंदी

घूमर
करते पाँव
थम गए अचानक
देख सामने 
साजन

सावन
है मनभावन्
हरितिमा से हरित
श्रंगारित हर्षित
पावन

👍👍💦🌹🌈👍👍💦🌹🌈
शुभा शुक्ला निशा रायपुर छत्तीसगढ़



नमन अग्निशिखा मंच 
दिनाँक ;-30/7/2021
विधा;-सायली   
    माँ
मेरी सदा
देती रही सीख 
बनना सबके 
मनमीत।।1।।
 🌹🌹🌹🌹
पिता 
होते हैं 
जीवनके आधार 
संतान के
  रक्षक।।2।।
निहारिका झा


संस्कार(सायली छंद)
*********************

नया
जमाना नई
पीढियों की क्या 
मैं बात
बताऊँ।।

अब
कहां पहले
जैसे मैं इनमें
कोई संस्कार
पाऊं।।

अब 
कहां वो
हया पर्दा प्रथा
इनमें हैं
समाया।।

हर
ओर तड़क
भड़क छोटे छोटे
कपडों की 
माया।।

फटे
कपड़ो को
ये फैशन है
हमको ये
बताते।।

क्या
जिस्म प्रदर्शन
कर ये नया
जमाना हमें
दिखलाते।।

अब
कहां मर्यादा
पुरषोत्तम राम बच्चों
मे हैं
समाते।।

अब 
कहां बच्चे 
राम की तरह
अपना कर्तव्य 
निभाते।।

बस 
देखा देखी
कर हमको सिखलाते
नया जमाना
बतलाते।।

अफसोस
हम अब
बच्चों को नहीं
समझा कुछ
पाते।।

क्यों
की आज
की पीढी जवाब
दे दिल
दुखाते।।2।।

वीना आडवानी
नागपुर, महाराष्ट्र
**************


सावन ---- ओमप्रकाश पाण्डेय
विधा --- सायली
सावन
आयो रे
चलो सखी सब
झूला झूले
आज

पानिया
के बूंदवा
लागे जैसे अमृत
जियरा होवे
निहाल

अबकी
सवनवा में
मोरे पिया अईहें
घरवा होई
उजियार

सावन
के बूंदवा
जीवन दे सबको
हर्षे मनवा
 सबके

धरती
ओढ़े आज
धानी रे चुनरियां
लहरें फसलिया
हमार

( यह मेरी मौलिक रचना है ----- ओमप्रकाश पाण्डेय)



[30/07, 1:29 pm] स्नेह लता पाण्डेय - स्नेह: नमन पटल
आज की विधा -सायली छन्द
शीर्षक-बाघ संरक्षण

बाघ 
राष्ट्रीय पशु
हमारे देश का
होता बहुत 
ताकतवर।

मत 
पंगा लेना 
तुम इससे कभी
जीव बहुत
खतरनाक।

होता
 इसका वजन
तीन सौ किलो
पर बाघिन
दुर्बल।


लोग
लालच में
कुछ रुपयों के
मार देते 
इसे।

बनाता
पारिस्थितिकी संतुलन
बाघों का अस्तित्व
मत मारो 
इसे।

दहाड़
की संज्ञा 
वीरता से विभूषित 
होती है
सदा।

संरक्षण 
करें हम
दुर्लभ बाघ का
है मानव 
धर्म।

सर्वे
भवन्तु सुखिन
सर्वे संतु निरामया
 अति उत्तम
भावना।

स्नेहलता पाण्डेय 'स्नेह'
[30/07, 1:44 pm] वीना अचतानी 🧑🏿‍🦽: सायली में पहली लाईन में एक शब्द आता है। दूसरी लाईन में दो शब्द आते हैं । तीसरी लाईन में तीन शब्द आते हैं ।चौथी लाईन मे फिर दो शब्द आते हैं ।पाँचवीं लाईन में एक शब्द आता है ।इस तरह पूरी सायली में पाँच लाईन और नौ शब्द होते हैं ।आदरणीया बृजकिशोरी त्रिपाठी जी । 🙏🙏🙏🙏🙏वीना अचतानी 💐🌷🌸🌹


साइली,

राधे
कृष्ण मुरारी
राधा मोहन प्यारे
दिल के
मतवाले

राम,
कृपा करो
राक्षस संहार करो
दीनदुखियों को
उबारो

सुषमा शुक्ला


अग्निशिखा मंच
तिथि- ३०-७-२०२१
विषय-सायली


सायली(१,२,३,२,१)

१, सावन
  आया है
भोलेनाथ हैं आये
  संग गौरा
     के
बेलपत्र
जल दूध
अभिषेक पूजन करें
हुए शिव
प्रसन्न

  झूले
पड़ गये
झूले सखियाँ संग
आया है
सावन

४  
रिमझिम
पड़ी फुहार
भीगती है गोरी
साजन है 
मुस्काय


झूला
राधा कृष्ण
झूल रहे हैं
झूलाय रहीं 
सखियाँ
नीरजा
ठाकुर नीर
पलावा डोम्बिवली महाराष्ट्
लिख रही
सायली


अग्निशिखा मंच
30/7/2021 शुक्रवार
विषय-सायली विद्या में लेखन

सावन
आया सखी
साजन भये परदेश
लागे ना
जिया

काली
घटा छायी
मोर-पपीहा बोले
याद आये
पिया

झूले
पड़ गए
अम्बुवा की डाली
मतवाला आया
सावन

मोरे
अंगना पड़ती
 सावन की रिमझीम
नन्ही-नन्ही
बुन्दे

 तेज
चली हवा
उड़ गई छतरी
भीगी चुनर
गोरी

बादल 
जब गरजते
बिजली जब चमकती
आती याद
तुम्हारी

बच्चे
बनाते घरौंदे
गीली मिट्टी के
घर-घर
खेलते

कागज़
की नाव
बारिश का पानी
झूमता-गाता
बचपन

बरसती 
मूसलाधर बरसात
आ गयी बाढ़
बह गया
गाँव

सुहाना
 मौसम आया
नाचे मन मयूर
आ गयी
बहार
         तारा "प्रीत"
      जोधपुर (राज०)


*#अग्निशिखा मंच*🌹🌹🙏🙏🌹🌹
दिन शुक्रवार
दिनांक 30 जुलाई 2021
विषय सायली
विधा गद्य


1 ) मनमोहन!
     तेरी बांसुरी
     मन बस जाती
     मधुर तान
     बनकर!

2 ) सावन!
      बैठा गुमसुम
      न हो सकेगा
      बरखा रानी
      इंतजार!

3 ) कजरी!
      तुझ बिन
      है सावन उदास
       कब छेडोगी
       तान!

4 ) शब्द
       देते घाव
       और शब्द ही
       करते हैं
       दवा!

5 ) कौंन
      किसी को
      अब देता समय
      कौन बांधे
      रिश्ते!
 *मीना गोपाल त्रिपाठी*




फूल
देता खुशबू
शव पर चढ़ता
या मंदिर
में

सावन
मन भावन
बरखा फुहार से
नाचे मन
मयूरा

सावन
तृप्त करते
व्याकुल प्राणी को
मिलकर आनंद
मनाते।

ज़िन्दगी
अनमोल है
व्यर्थ न गवाएं
बने हम
परोपकारी।

शोभा रानी तिवारी



जय मां शारदे
***********
अग्नि शिखा मंच
दिन-शुक्रवार
दिनांक-30/7/2021

*सायली छंद*

1.राष्टपिता
   महात्मा गाँधी
   हिंसा के पुजारी
   तोड़ी बेड़ियां
    हमारी।

2.पंडित
   नेहरु ने 
   सबको जीना सिखाया
   बच्चों को
   अपनाया।

3.साहसी
   रानी लक्ष्मीबाई
   ने शौर्य दिखाया
   झांसी को
   बचाया।

4.चंद्रशेखर
   वीर सिपाही
   अपनी जान गंवाई
    गर्दन नहीं
    झुकाई।

5. भगतसिंह
     सीना ताने 
     फांसी पर झूले
     वंदेमातरम् नहीं
    भूले।

रागिनी मित्तल
कटनी, मध्य प्रदेश


* अग्नि शिखा काव्य मंच *
*शुक्रवार ३०/२/२०२१ 
  *विधा - सयाली छंद *
      🌹 गुरू 🌹
    🌹करो कृपा 🌹
    🌹 ज्ञान का दा 🌹
    🌹 मुझे देकर 🌹
    🌹 आर्शीवाद 🌹
     
       🌹 सावन 🌹
      🌹 मन भाव🌹
  🌹घिरी आई घटाए 🌹
     🌹 बरसा पानी 🌹
       🌹 सुहाना 🌹
  
        🌹आजादी 🌹
       🌹 रहै अखंड 🌹
 🌹शहिदों की शहादत🌹
       🌹नहीं व्यर्थ🌹
       🌹सावधान 🌹

       🌹 तिरंगा 🌹
       🌹 तीन रंग 🌹
 🌹हमारी आजादी प्रतीक 🌹
    🌹 अक्षुण्ण रहै 🌹
      🌹 वतन 🌹
         
     🌹 राष्ट्र 🌹
   🌹गान गाते 🌹
 🌹 जन गन मन 🌹
  🌹जोश भरते 🌹
      🌹स्वदेश 🌹
🇮🇪🇮🇪🇮🇪🇮🇪🇮🇪🇮🇪

सरोज दुगड़
खारुपेटिया
असम 
,🌿🌹🌿🙏



🌷🙏🌷
अग्निशिखा मंच
30.7.21
⏳⏳⏳
सपने
रहते आते
जागते हुए भी
बंद होंठ 
मुस्काते।
****
उनका
सुंदर चेहरा
सब पसंद करते
 लगा हुआ
पहरा।
****
तिल
करता वार
पलकों में दिखते
जैसे काजल
तलवार।
****
कली
जबसे खिली
आने लगे भंवरे
इसीलिए लगे
पहरे।
****
उन्हें
बुरा लगता
देखे न कोई
चोरी से
रूप।

@श्रीराम राय( palolife.com )


अग्नि शिखा मंच
३०/०७/२०२१
सायली** राधा।
**********
राधा
राधा कृष्ण
की दिवानी थी
कृष्ण की
चाहत
*****
राधा थी
राधा पनघट गई
कृष्ण से 
मिलने
*****
कृष्ण 
कदम्ब पर
जाके छुप गये
राधा उदास
हो
*****
गई कृष्ण 
ने मुरली बजाई
राधा का
श्वास
*****
आई
राधा कृष्ण
एक ही तत्व
के बने
है
****
कृष्ण
पुरुष राधा
प्रकृति दोनो ने
मिल कर
श्रीष्टी
*****
श्रीष्टी 
का निर्माण
किया पूरे ब्राम्हडं
में राधाकृष्ण
ब्याप्तम
******
है
जय श्री
राधे कृष्णा राधे
कृष्ण राधे
कृष्ण
मुझे सायली लिखना नही आता है गल्ती को जरूर
बतावे।
बृजकिशोरी त्रिपाठी



🙏🌹अग्नि शिखा मंच🌹🙏
🙏🌹जय अम्बे🌹30/7/21🌹🙏
🙏🌹सायलीः *झूलना झूले*🌹🙏


झूलन, 
झूले गिरिधारी, 
झूलावत है व्रजनारी,
हिंडोला झूलावे, 
वृषभानलली, 

सावनमें, 
मेघ बरसते, 
बिजुरी चमकत नीलगगनसे, 
शृंगार करके 
गोपीयां,

श्यामसुंदरको, 
झूले झूलाए, 
मंद मंद मुस्काए, 
मन हर्षाए, 
राधारानी, 

छबीलो, 
गोपाल झूले, 
राधे श्याम झूले, 
बंसी बजाए,
नंदकिशोर, 

🙏🌹पद्माक्षि शुक्ल🌹🙏



30 जुलाई 2021 आज की कविता सायली

संघटक🎈
सजीव, निर्जीव🎈
से होती है🎈
यह प्रकृति🎈
निर्मित।🎈

सजीव🎈
जन्तु पादप🎈
वायु, जल भूमि🎈
निर्जीव भाग🎈
प्रकृति।🎈

 सबका🎈 
महत्वपूर्ण रिश्ता🎈
जीवन-निर्वाह हेतु🎈
आपस में🎈
निर्भर।🎈

सबसे🎈
संवेदनशील प्राणी🎈
जीव जगत में🎈
है सचेतन🎈
मानव।🎈

तथापि🎈
सजीव-निर्जीव🎈
पर रहता आधारित🎈
पूर्ति करता🎈
मानव।🎈

परिवेश🎈
जीव, पादप🎈 
वायु, जल, भूमि🎈 
करते पर्यावरण🎈
संरचना।🎈

खड्डों🎈
का सीना🎈
छलनी करते🎈
दरकती सारी🎈
पहाड़ियाँ।🎈

खनन🎈
करके आज🎈
महल बना रहे🎈
हैं यहाँ🎈
इंसान।🎈

पर्यावरण🎈
न करे🎈
चिंता स्वार्थी हो🎈
गया है🎈
इंसान।🎈

पर्यावरण🎈 
बचाने हेतु🎈
सभी को देना🎈 
होगा यहाँ🎈
योगदान।🎈


वैष्णो खत्री वेदिका
जबलपुर



विजयेन्द्र मोहन
मंच को नमन
विधा:-- *सायली*

१) बड़ा
   समर्पण है
   इन बारिश की
   वूदो में
   टपकना।

२) आसमान
   तक पहुंच
  कौन गिरना चाहता
  है धरा
   पर।

३) शव
   सुख लहे
   तुमरी संरचना तुम
    रक्षक काहू
     डरना।

४) बुद्धि
    दिन प्रति
     बढेगी धर्म में
     होगी लगन
      तुममें।

५) कहते
    हैं कि
    फरिश्ते तो आसमान
    मे रहते
     हैं।

विजयेन्द्र मोहन
बोकारो (झारखंड)




सयाली -छंद

इंसान
मय दानव
को दूर भग़ाओ 
साथ अपने 
है 

आओ 
साथ साथ 
मिलकर उत्साह जगाये 
नव निर्माण 
करे ।

राह
भली सत्संग 
प्रेम श्रद्धा भक्ति 
विश्वास संचार 
जगाये 

इंसान 
कर्म निभाओ 
चेतना जागृत कर 
सत्कर्म करना
है ।
अनिता शरद झा


वीना अचतानी 
अग्नि शिखा मंच को नमन, 
विषय *****सायली******

1) आता
     नहीँ डाकिया 
     अब हमारे द्वार
     सन्देश नहीं 
      आते ।।।

2) खूशबू
      हमने छोड़ 
      पूजे कियों बबूल
       रूठी बहार 
        अब ।।।।।

3) देहरी
        दीप बोला
        इस अमावस पीछे
        होगा तिमिर
         दरबदर ।।।।

4) दिल
         करता उड़ 
         कर पंछी तरहा
        बैठ जाऊँ 
         टहनी ।।।।।

5) मदमाती
      चाल तुम्हारी
      चल रही मन्थर
      गति निर्भिक 
       गजगामिनी ।।।।।

       
स्वरचित मौलिक, 
वीना अचतानी 
जोधपुर ।। ।


कुछ सायली छंद👇🏻
कभी
पास बैठो
तुमको बताऊं जरा
दर्द होता 
क्या।।1।।
सुख
कांच जैसा
चूभ गया सबको
और रही
बेखबर।।2।।
आईना
पकड़ा गया
 हंसता दिखाया मुझे
दर्द दिल
बसा।।3।।
समय
विश्वास इज्ज्त
तीन परिंदे ऐसे
उड़ गए
आयेना।।4।।
दुनिया
सबकी एक
पर रंग जुदा
लूट रंगीली
दुनिया।।5।।
मौलिक छंट
   ...लीला कृपलानी




जीना - सायली 
अग्निशिखा मंच 
तेरे
बिन जीना
नहीं कोई जीना
सच मेरे
सजना।। 1
प्यार 
अपना कभी
कम नहीं होगा
कहता हूं 
सुनयना।। 2
तुम
मेरे लिए 
मै तेरे लिए 
सुनो न
जाना।। 3
मेरे
घर आई
एक नन्ही परी
भोली भाली
कली।। 4
स्वरचित, 
रामेश्वर प्रसाद गुप्ता ।



WhatsApp

Thursday, 29 July 2021

अखिल भारतीय agnishikha manch per padhiye chitra per Kavita डॉ अलका पांडे मुंबई


चित्र पर कविता 
-

जाग जा जाग जा हे मानव । 
ऋषि मुनियों की पावन धरा 
मत कलुषित कर मत कलुषित कर ....
हरे भरे जंगलों को मत काटना 
पर्यावरण बचाना , प्राण वायु देना ....
कल कल बहती गंगा को पावन रखना धर्म हमारा 
ओज़ोन परत का रखो ख़्याल 
मत करो तुम उसको नष्ट 
धरा बिलबिलायेंगी, खून के आंसू बहायेंगी ।।
पर्यावरण तार तार होगा 
आसमान भी रुठ जायेगा 
सोच तू मानव कहाँ जा रहा हैं 
क्या क्या कर  रहा हैं । 

तेरी ही नादानी से कोरोना ने पंख फैलाये .,,,
लाकडाऊन की त्रासदी सब पर है भारी .,,
तूफ़ानों से लड़ने की कर लो तैयारी ।
अभी भी वक्त है 
जाग जा जाग जा हे मानव 
पर्यावरण का दोहन बंद कर 
संरक्षण दो ....
पैँधों से हरित क्रांति लाओ ..
वसुंधरा को धानी चुन्नर पहनाएँ....
आओ आज हम प्रण कर ले
पेड़ों को लगाये धरा का सम्मान करें । 
प्राण वायु देने वालों का हम करे संरक्षण । ।
महामारी से जग को बचायें । 
जाग जा जाग जा हे मानव ।।

डॉ अलका पाण्डेय मुम्बई




आज के चित्र पर एक हल्की तुकबंदी 
----------------------------------------
ले हाथ मे कुल्हाड़ी
हरियाली उजाड़ दिया।
पेड़ों पर वार किया
आसमान को फाड़ दिया।।

अपनी आबादी पर कभी
नियंत्रण नही कर पाये
वन पहाड़ नदियों तक
शहरों के जाल बिछाये
थोड़े से स्वार्थ खातिर
अपनो को न प्यार किया।
ले हाथ मे कुल्हाड़ी
हरियाली उजाड़ दिया।
पेड़ों पर जो वार किया
आसमान को फाड़ दिया।।

अपने होते कौन हैं
नहीं कभी सोचा तुमने
जो देता जल जीवन वायु
उसे नहीं समझा तुमने।
प्रकृति के सीने पर तूने
निर्दयता से प्रहार किया।
ले हाथ मे कुल्हाड़ी
हरियाली उजाड़ दिया।
पेड़ों पर जो वार किया
आसमान को फाड़ दिया।।

आज आफत में दुनिया है
मौत के बादल छाये हैं
जिसे समझते तुम अपने
ये अपने नहीं पराये हैं।
जीवन रक्षक पालनहार
को नही स्वीकार किया।
ले हाथ मे कुल्हाड़ी
हरियाली उजाड़ दिया।
पेड़ों पर जो वार किया
आसमान को फाड़ दिया।।

मौत के बेरहम तांडव से
अब जग को बचाना होगा
पेड़ काटना छोड़कर
केवल पेड़ लगाना होगा।
दुनिया हो जायेगी सुंदर
अगर फुलवारी तैयार किया।
ले हाथ मे कुल्हाड़ी
हरियाली उजाड़ दिया।
पेड़ों पर जो वार किया
आसमान को फाड़ दिया।।
----श्रीराम रॉय palolife.com ----





☘️☘️☘️☘️☘️☘️पर्यावरण दिवस पर सबको शुभकामनाएं,

पर्यावरण,,, कविता का शीर्षक

☘️पर्यावरण बचाओ मित्रों पर्यावरण बचाओ एक पेड़यदि कट जाए तो ग्यारह पेड़ लगाओ। पर्यावरण बचाओ मित्र पर्यावरण बचाओ🌷

हर पल रखें ध्यान हम,, 
पेड़ लगाना है हरदम।
 मातृभूमि की हरित चुनरिया
 ना होगी यह कभी भी कम है☘️

धरती के आभूषण हैं इनको हमें बचाना है💐
 नित पेड़ों को काट काट कर प्राणवायु नहीं गंवाना है👍👍

मातृभूमि की हरित क्रांति को हमें सदैव बचाना है
🌷 पल पल इनकी रक्षा करके देश को आगे बढ़ाना है।💐

सुषमा शुक्ला इंदौर


मंच को नमन
विषय:--- *चित्र पर आधारित कविता*

मैं हूं कुदरत का अनमोल उपहार,
प्राणवायु को जो करते हैं संचार,
वन उपवन से चहु ओर हरियाली,
बुलाकर बादलों को लाते हैं, शीतलता,
देते हैं फल ,फुल ,औषधियों, उपहार,
मुझे नहीं काटो , सोचो हजार बार,
सुनो.! पक्षियों की नींड़ से आती आवाज
देखो..! गिलहरियों के बसा संसार,
न भूलें किसान भाई मेरा परोपकार,
मुझे काटने पर तेरे घर में आएगा विकार,
याद करो उन आपदाओं को,
सागर की विशाल लहर, भूकंप का कहर,
तूफान हो या प्रदूषण का जहर,
हर वार मचाया इसने हाहाकार,
करो विनाश लीला पर विचार,
मैं कहता हूं.! फेंक दो हम पर उठाए औजार,
रोक दो उन पर स्वार्थवश किया वार ,
क्योंकि.! मैं हूं प्रकृति का अनमोल उपहार।

विजयेन्द्र मोहन।



प्रकृति और मानव का संबंध

****************
पंचतत्व से बनी है धरती, प्रकृति ने सुंदर संसार दिया,
 सूरज चंदा नदियां पर्वत,जीने का आधार दिया,
  रंग बिरंगे फूल खिला कर, हरियाली उपहार दिया,
 प्रकृति ने सब किया समर्पण ,जीवन को साकार किया।
 कल कल स्वर में नदियां बहती, मधुर संगीत सुनाती है,
 फल फूलों से लदी डालियां झुकना हमें सिखाती हैं ,
यह धरती भारत मां बनकर, सब को आश्रय देती है,
 अन्नपूर्णा बनकर हम सब का, लालन पालन करती है ।
सावन की रिमझिम बूंदे, घुंघरू की तान सुनाती है,
 पुरवइईया के मस्त झकोरे, कानों में बंशी बजाती है ।
वसंत आगमन पर ,रोम-रोम पुलकित हो जाता है,
 हरित वर्णों में लिपटी वसुंधरा, दुल्हन सी शर्माती है। 
प्रकृति को चुनौती देंगेतो, कुप्रभाव से ना बच पाएंगे,
बाढ़, तूफान, धरती हिलेगी, बादल भी फट जाएंगे अपने हाथों इंसान ने , जंगल , बाग़ उजाड़ा है,
 कृषि भूमि को रौंद दिया, पर्वत में सुरंग बनाया है वायु नभ मंडल दूषित है, दूषित नदियों का पानी निमंत्रण दे रहा मृत्यु को, मानव तू अभिमानी है। दीया और बाती का रिश्ता जैसे फूलों का खुशबू से ,
प्रकृति मानव का रिश्ता जैसे सांसों का धड़कन से जीवन जीना है तो प्रकृति को बचाना होगा ,
इस धरती को स्वर्ग से भी सुंदर हमें बनाना होगा संकल्प ले हम हरियाली से धरती का श्रृंगार करेंगे हरे-भरे वृक्ष लगाकर प्रकृति का सम्मान करेंगे।

 श्रीमती शोभा रानी तिवारी 619 अक्षत अपार्टमेंट खातीवाला टैंक इंदौर मध्य प्रदेश
 मोबाइल 8989409210



* पर्यावरण *
हरे भरे वनों की रक्षा अनुपम प्रकृति की संरचना ,
प्राणवायु हम इनसे पाते तभी स्वस्थ हम रह पाते !

हवा हो प्रदुषण मुक्त जीवन हो पंछियों सा उन्मुक्त,
प्राणवायु और गहरे श्वास रह सकते हम सब स्वस्थ !

जीव जन्तु ओर पंख पखेरू जल ,थल,नभ में रहते ,
पर्यावरण का संतुलन हम सब मिलकर के ही करते!

आधुनिकता के नाम पर जब से जीवन-शैली बदली ,
भोगवाद की लिप्सा ने पावन बसुधा मैली करदी !

गर ?जीव जगत सुरक्षित रखना है वृक्षारोपण हो ,
कंकरीट के जंगल में भी खड़े नीम ओर बबुल हो !

एक वृक्ष दस बेटों जितना पुरखे यूं ही नहीं कहते ,
जो प्रकृति का संरक्षण अपना फर्ज समझते !

धरती माता कल्पबृक्ष सम हम सबको सब कुछ देती ,
प्राणवायु,फल, फूल ,शुद्ध जल कोई कमी न रखती !

हम उसकी बिगड़ी संतानें नादानी कर बैठे ?
नंदन वन सी बसुधा से हम छेड़छाड़ कर बैठै ,

हर गलती सजा सुनिश्चित हमको भी मिल …...रही ,
कहीं भूकंप ,कहीं सुनामीं, कहीं सुखा कहीं पे आंधी!

अब पाप का घड़ा भर गया करोना का विकराल साया ?
आक्सीजन बिन जीवन में संकट घोर घिर - घिर आया !

ओजोन की परत में अब आ गई दरारें है !
पराबैंगनी किरणों से अब खुद को कैसे
 बचायेंगे ?

अब भी बाजी हाथ हमारे अभी भी कुछ नहीं है बिगड़ा ,
पेड़ और जल संरक्षण से मिट जायेगा सारा झगड़ा टंटा!

फिर हवा शुद्ध होगी ओर प्राणवायु भरपूर मिलेगी ,
आने वाली नस्लें हमारी पूर्ण स्वस्थ सुरक्षित होगी !

आओ मिल कर संकल्प करें सादा जीवन अपनायेगे ,
अपने बच्चों के समान ही वृक्षों की रक्षा कर पायेंगे !    

सरोज दुगड़ 
गुवाहाटी असम
🙏🙏🙏



हाथ मे ले कुल्हाड़ी कहा निकल पडे़।
क्या लकडी़ काटने नहीं नही अपनी श्वासो की डोर काटने।
अरे मूर्ख तुने ये कभी सोचा
तुने कितना पौद्धो को रोपा।

ऐसे तो धरती पर कंकरीट का ही जंगल होगा ।
कहा से हरियाली आयेगी
फिर कैसे तेरा मंगल होगा।
तुने फलदार पेड़़ लगया नही
कैसे फल खाँ कर स्वस्थ होगा।

तुने बाप दादा के लगाये पौद्धो को दोनो हाथो से लुटा।
कुल्हाड़ी ले कर काटा पेड़़ कर दिया बुटा बुटा।
कभी सोचा तेरे बच्चे कहा से आक्सीजन पायेगें।
बिना श्वास लिए तेरे बच्चे कैसे जी पायेगें।
क्या इतना भी तेरी समझ मे नही आता ओजोन फट परत फट जायेंगे।

सुन मानव पहले अपना कर्तव्य निभा पेड़ लगा।
कुल्हाड़ी नही कुदाल उठा कर हर जन्म दिन पर पौद्धा लगा।
धरती पर हरियाली लाकर अपना कर्तव्य निभा।


जब हरी भरी धरती हो धानी चुनर लहरयेगी।
तब आसमान से बादल भी अमृत बरषायेगा।
तब दुनिया होगी खुशहाल कोरोना भी नही आयेगा।
तेरे बच्चो को भी शुद्ध प्राण वायू मिल जायेगा।
स्वरचित
       बृजकिशोरी त्रिपाठी
  .....गोरपूर, यू.पी।



चित्रआधारित रचना 

दिल की दीवारों पर दरारें है 
कटते वृक्ष कहते है 
अब तो समझ जाओं 
जीवन प्राणवायु है 

इंसान हों इंसानियत है 
 क्यों करते आये पीछे से वार 
कुल्हाड़ी इंद्रदेव का वरदान है 
इंसानियत की कथा यही है

सत्य कर्म सीख कहती है 
नित नई कहानी है 
आसमाँ की लकीरें मिटा दो 
चमकाते सितारे अपना भाग्य है 
अनिता शरद झा रायपुर c .g







चित्र आधारित अभिव्यक्ति
💐💐💐💐💐💐💐

हे मानव! अब भी तू संभल जा, 
मत कर तू प्रकृति पर अत्याचार, 
बादल के भी दिल में हो गया है छेद, 
महामारी, मुसीबतों को अब तो न दे न्यौता,,,, 

पेड़ जो काटे, प्राण वायु को तरस जायेगा.
बादल भी बरसाये ऐसी हालत में प्रलय|


स्वतंत्र विधा
 ✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻✍🏻
 कुमारी चन्दा देवी स्वर्णकार जबलपुर मध्यप्रदेश



नमन मंच 
छवि विचार 

मुर्ख मानव , 
करके प्रहार ,
ढाया कहर प्रकृति पर ,
बनके भक्षक , 
अपनी ही सांसों को डराया ,
खाया जिस थाली में , 
उसी में छेद किया ,
जिसने दी सांसें 
उसी में जहर फैलाया ,
खेल रहा प्रकृति से ,
सांप ,सीढ़ी का खेल 
डस कर उसी सांप ने , 
ला दिया धरती पर ,
काटे पेड़ ,सुखायी नदियाँ 
फैलाया जहर हवाओँ में 
बन रहा अनजान ,
कल तक हमने 
 बाधां मुठ्ठी में , 
आज उसी ने हमें बांध दिया ,
हे मनुज 
अब तू संभल ,
अस्तित्व मेरा खो रहा ,
मैं बिन तुम नहीं , 
तुम बिन मैं नहीं ,
मुझमे ही अपने आप को पाओगे ,
वरना इस महाप्रलय में डुब जाओगे |

स्मिता धिरासरिया ,बरपेटा रोड


चित्र पर आधारित कविता

वृक्ष चीख कर रहा पुकार 
अरे मत करो हम पर प्रहार 
मनुष्य तू कितना है बेरहम
सीखो कुछ तो धर्म- कर्म। 

 कुल्हाड़ी से तूने वार किया 
आसमान को फाड़ दिया 
हरी भरी हरियाली देकर
जीवन में लाते सदाबहार।

औषधियों का हम भंडार 
बीमारी का करते उपचार
देते हम शुद्ध ऑक्सीजन
मिलता प्राणी को जीवन।

हरियाली से ही वर्षा लाते 
वर्षा से ही नवजीवन पाते 
नदिया नाले लबालब भरते 
जीवन को खुशहाल करते।

हम करते हैं सदा परमारथ 
नहीं रखते मन में स्वार्थ 
पर मनुष्य बड़ा स्वार्थी है 
 तूने हमको ही नष्ट किया।


 कुछ तो हम पर करो रहम 
 नहीं चाहते कुछ तुमसे हम
 फल फूल गए खुश होते हम  
 हम तो देते सब को उपहार।

आशा जाकड़


नमन मंच 
दिनांक -: 29/ 7 /2021
 विषय -: चित्र पर आधारित

   काट कुल्हाड़ी से मुझको
अब बादल फटने से क्यों डरते हो
    रोयेगी तो धरती माता
 अपनी ममता को मरते देख! 

पृथ्वी की ममता हर जीव में है 
प्रकृति का सौंदर्य हरित 
वृक्षों से भरे ये उपवन हैं 
गर उपवन से ही वृक्ष हट जाये
तो प्रकृति में सौंदर्य कहां सेआये !

   आज हर उपवन से 
  करूंण आवाजें आती हैं
 समय से पहले मत मारो
    मत काटो मुझको 
  काम तुम्हारे मैं आऊंगा 
   सांसो की हर डोर में मैं
   प्राणवायु बन पड़ा रहूंगा
  जल की आपूर्ति में भी मैं
  सदा मेघ बन खड़ा रहूंगा 
  सुखी लकड़ी बन कर भी 
   सदा काम तेरे मैं आऊंगा 
बस इतना ही कहना है मुझको 
इस बच्चे को उपवन में रहने दो 
प्रकृति की सुंदरता बन 
माँ की कोख में रहने दो 
मांँ की कोख में रहने दो !

चंद्रिका व्यास 
खारघर नवी मुंबई


चित्र देखकर रचना (कविता)

हरा भरा वन-उपवन देखने को मन तरसाया है
प्राणवायु हर पल मिले,बने स्वस्थ तन काया है। 

आकाश जल थल अग्नि वायु पंचतत्व हैं 
पर्यावरण संतुलन बनाना हमारा कर्तव्य है।

रे मानव तूने वृक्षों को काटा आरी-कटारी से
ओजोन परत में छेद हुए मानव के कर्मों से।

एक वृक्ष दस पुत्र समान पुरखे यही कहते हैं
पेड़ है कल्पवृक्ष फूल फल प्राणवायु देते हैं।

पेड़ों को कटने मत दो इक हूक सी उठती है
पेड़ रोते सिसकते हैं,नैनो अश्रु धारा बहती है।

अब हरियाले सावन, अवश्य करो वृक्षारोपण 
नन्हें नन्हें पौधों को रोपो, संवारो, करो संरक्षण।

रक्षाबंधन भाई-भाभी को,पौधों की सौगात दो 
पौधों की सुरक्षा का भाई को संकल्प दिला दो।

वृक्षारोपण प्रकृति को दे रहा अमूल्य उपहार
हरी चूनर ओढ़ कर,प्रकृति स्वागत को बेकरार।
 
डॉक्टर अंजुल कंसल" कनुप्रिया"
29-7-21


प्रकृति का कहर 
🍀☘️🌳🌲🌹🍀☘️🌳🌲
 आधुनिक परिवेश में प्रदूषण हमारी प्रमुख समस्या 
पर्यावरण सूरक्षित नहीं , नहीं सुरक्षित देश की प्राकृतिकता 

एक ओर तो चीखते रहते ,हम सब पर एहसान जता कर 
प्लास्टिक का विरोध दिखाते जहां तहां जुलूस निकाल कर

हर सरकार आती जाती अपने जलवे बिखेर के जाती
पर जो आवश्यक तत्व हैं उनपर उनकी नजर ना जाती 

जनता भी ना अपनाये पर्यावरण के स्वस्थ उपाय
स्वयं तो कुछ कर नहीं पाते एक दूजे पे उंगली उठाए

सरकार के साथ हमें भी स्वच्छता का मूलमंत्र याद रखना होगा 
गीला कचरा सूखा कचरा अलग रखने का पालन करना होगा 

पर्यावरण को बढ़ाने दोस्तो एक एक पेड़ लगाना है 
रास्ते गलियां घर चौबारो में शीतल बयार बहाना हैं

प्लास्टिक की मोहमाया को आज भी हम सब तज नहीं पाते 
यदा कदा डिस्पोज़ल कैरीबैग हम अपने काम ले ही आते

जो हम ध्यान ना रख पाए तो भुगतान हमे ही करना होगा
आपातकालीन परिस्थितियों से जूझने हेतु सबको तत्पर रहना होगा

बार बार चेतावनी देते धरती वायु अग्नि अम्बर
समझा रहे हमको बाढ़, भूकंप ,आग, सुनामी ला कर 

प्राकृतिक आपदाओं में जाने कितनी जाने चली जा रही 
फिर भी हम अक्ल के मारों को सद्बुद्धि नहीं ही आ रही

जानवरों को मार के खा रहे कोई पक्का तो कोई कच्चा ही खा रहे
गाय सुअर , साप ,कुत्ता कोई भी इनसे बच ना पा रहे 

चीन की गलती का खामियाजा आज हम सब भुगत ही रहे  
 कोरोनावायरस जैसी महामारी में अपनों को खो के सुलग ही रहे

अब भी सुनो और समझो प्रकृति हमसे क्या कहना चाह रही
धरती को स्वच्छ और स्वस्थ रखो बस इतना ही वह हमसे मांग रही

जो ना समझेंगे ना सुधरेंगे तो प्रकृति हमको सबक सिखायेगी  
तूफान,भूकंप ,महामारी से फिर अपना कहर बरसायेगी


शुभा शुक्ला निशा
रायपुर छत्तीसगढ़


जय मां शारदे
***********
 अग्निशिखा मंच 
दिन -गुरुवार 
दिनांक -29/7/2021 चित्र आधारित रचना

इंसान की अक्ल में पड़ गए पत्थर ।
प्रकृति से वो ले रहा टक्कर ।
कुल्हाड़ी मार पेड़ गिरावे। जबकि पेड़ ही से जीवन पावे ।
बिन पेड़ों के चले न जीवन ।
इनसे ही मिलती है ऑक्सीजन।
जब तुम पेड़ों को काटोगे।
फिर कैसे जीवन बाटोगे। ये प्रकृति से खेल रहा है ।
भारी विपदा झेल रहा है। 
अभी भी बात समझ ना आई। 
फिर पेड़ पर कुल्हाड़ी चलाई। 
गिरते वृक्ष का दुख है भारी।
नभ के भी सीने चली कटारी। 
वृक्ष थाम उसने दुख बांटा।
मानव के फिर पड़ा तमाचा।

 रागिनी मित्तल
 कटनी ,मध्य प्रदेश



रे मानव सुन
अ. भा. अग्निशिखा मंच
विषय_चित्र पर कविता
"रे मानव सुन"
क्यों रहे इन पेड़ों को चीर?
क्यों फोड़ रहे अपनी तकदीर?
इतनी आपदाएं देखीं,
ना सीखा सबक,
कोरोना मुंह बाए खड़ा,
तीसरी लहर की लिए खनक।१।
हम मूक हैं,नहीं बेजान,
बता रहा है तुम्हें विज्ञान,
फिर भी बन करके अनजान,
आफत में डालते अपनी जान,
हम पर करते रहते प्रहार,
चाहे मच जाए हाहाकार।२।
प्रकृति हमारी साथी,देती रहती 
भंडार अक्षुण्ण हैं, न कमी होती,
जो देती ये,उसका सदुपयोग करो,
बंद शोषण,और दुरुपयोग करो।३
ये दाता है देती रहेगी,
मानव याचक है लेता रहेगा,
इसको दिल से प्यार करो,
बस इतना उपकार करो,
एक काटो चार उगाओ,
इस महामंत्र को अपनाओ।४।
इन वृक्षों से बनाओ फर्नीचर,
पर मत बिगाड़ो अपना फ्यूचर,
ले लो पर्याप्त सुविधा ले लो,
साथ खूब बीजारोपण कर लो,
संभालो ओज़ोन आवरण को,
बचा लो अपने पर्यावरण को।५।
मत होने दो उसमें छेद,
वर्ण खत्म जीने का भेद,
मत करना अति,
मारी जाए न मति,
प्रकृति है साथी हमारी 
याद रखना यही बारी _बारी।६।
बस फिर न कुछ कमी रहेगी,
कभी ना सूखा पड़ेगा,नमी रहेगी
चारों ओर छाएगी हरियाली,
पृथ्वी पर होगी सदा खुशहाली,
हम भी रहेंगे,पेड़ भी रहेंगे,
पखेरुओं के बसेरे भी रहेंगे।७।
प्रकृति_मानव साथ_साथ,
जिएंगे डाल हाथों में हाथ,
"जीओ और जीने दो"की पुकार,
सीखो हमसे तुम करना परोपकार
हम कहते"सब भली करेंगे राम",
तुम बोलो"जय जय श्री राम"।
स्वरचित मौलिक रचना_
रानी अग्रवाल,मुंबई,२९_७_२०२१.



चित्र पर आधारित

मैं एक कटा हुआ वृक्ष हूं
मेरी दर्द को तुम समझ नहीं पाए
कभी तुम करते थे मेरी पूजा
इतिहास को देखो पढ़ो
मेरा अस्तित्व सम्राट अशोक
का दिया हुआ अशोक नामक वृक्ष हूं
हाथों में कुल्हाड़ी लेकर तुमने
निर्ममता से मुझे दो भागों में काट डाला

सड़की हो गई सुनसान
कट रही है सारी वृक्षे
उदास होकर रो रहे राहगीर
पर्यावरण हो रहा विषैला
लेकिन सड़के हो जाएंगी चौड़ी

पक्षियों का टूट गया बसेरा
मुरझाई है वृक्ष की टहनियां
कर रही है सभी से एक ही सवाल
मुझे नष्ट कर क्या हो जाओगे आबाद

मुझसे ही मिलती है तुझको
शुद्ध वायु, औषधि और छाया
मैंने तेरा कभी कुछ नहीं बिगाड़ा
फिर भी तूने मुझ को काट डाला

वर्षा कैसे होगी इसे तू नहीं जाना
महामारी संसार में है फैला
सतर्क होकर संभल जाओ
नहीं तो हर दिन खरीदना
प्राकृतिक वायु हवा पानी


कुमकुम वेद सेन


मुझे न मानव अब मारो 
बहुत पछताओगे जानो
जन्म से मृत्यु तक नाता
हर पल तेरे काम आता
मेरी हत्या तुम न करना
सत्य वचन तुम मानना 
पर्यावरण महत्व जानो
काटना नही तुम मानो

डॉक्टर रश्मि शुक्ला 
प्रयागराज 
उत्तर प्रदेश



अग्निशिखा मंच को नमन
आज का विषय *चित्रपर आधारित रचना*

हे मानव अपने स्वार्थ के लिए
मत करो पेडो का कर्तन
प्रकृति मांग रही प्रतिदान
जन्मदात्री ने कोख में पाला।।१।।

धरती मां ने दिया है अनुपम उपहार, मीठे फल और मेवे खाकर, प्राणवायु इसी मिलता है
मत कर प्रकृति को दोहन।। 2।।

पेडो में ही होती है जिंदगी
खुद गर्मि, ठंड बारिश सहता है
मानव को देता है जीवन रक्षक।
क्यो काट रहा है तुम पेड़ों को।3।

कोरोना काल में प्राणवायु की हुयी
किल्लत, कुछ लोगों नहीं मिला प्राणवायु समय पर तो छोड गये
रोते, बिलखते परिवार को।।4।।

पेड़ों को तोडो मत, लगाओ घर घर मे,करो रक्षा पर्यावरण की धरती को हरी भरी करो यही संदेश देता सुरेन,नहीं तो पस्तायेंगा कल।।5।।

सुरेंद्र हरड़े कवि
नागपुर
दिनांक :-२९/०७/२०२१


।प्रकृत्ति। 
प्रकृति से यह अत्याचार, 
बहुत खतरनाक होता है। 
इंसान पेड़ को काटकर, 
अपना घर उजाडता है।। 
प्रकृति..................... 1 
बडे-बडे जंगल काटकर, 
कंक्रीट जंगल बना देता है। 
बारिश का कहीं पता नहीं, 
पानी बिना सब सूना होता है।।
प्रकृति...................... 2 
प्रकृति अपना रंग दिखाती, 
ग्लोबल ताप बढ जाता है। 
प्रकृति से यह खिलवाड़, 
इन्सान को भारी पडता है।। 
प्रकृति....................... 3 
प्रकृति प्रेम जब नहीं रहेगा, 
पेड़ बिना इंसान कैसे रहेगा।  
कहीं नहीं वारिश का जोर होगा, 
जमीन फिर बंजर होगा।। 
प्रकृति.........................4
स्वरचित, 
रामेश्वर प्रसाद गुप्ता ।


मेरी रचना का शीर्षक है***
अत्याचार पेड़ों पर
^^^^^^^^^^^^^^^
प्रस्तुत है एक गीत***
हम कहाँ जा रहे हैं किधर जायेंगे
यह तो सच है जो देंगे वही पायेंगे
पेड़ काटने से भला क्या मिलेगा हमें
इस बड़ी भूल पर हम तो पछतायेंगे।
धरती माता का कर्जा अदा नाकिया
भूल बैठे उसे जिसने जीवन दिया
हम अपने लिए ही जियें क्यों भला
स्वार्थ करके इक दिन तो पछतायेंगे।
हम कहां जा-------
यह सच है इक-----
मां बहिनें हैं पूजें सदा वृक्ष को
मांगती हैं दुआ विश्व कल्याण की
उनकी श्रद्धा रही पेड़ो पर सदा
श्रद्धा उनकी भुना कर कहां जायेंगे।
हम कहाँ जा-------
यह तो सच है-------
मान रखा नहीं कुदरत का कभी
पंच तत्वों को हमने न पूजा कभी
अपनी नादानियों से उबर ना सके
कहर से उसके बच कर कहां जायेंगे।
हम कहां जा रहे हैं किधर जायेंगे
यह तो सच है जो देंगे वही पायेंगे।
मौलिक रचना---सादर समीक्षार्थ
   .... लीला कृपलानी


नमन अग्निशिखा मंच 
विषय ;--चित्राभिव्यक्ति
दिनाँक;--29/7/2021
है ये प्रकृति माँ के जैसी
देती रही नेह दुलार।
निज स्वार्थ भाव मे रत रहकर 
क्यूँ करता मानव कटु प्रहार।।
पेड़ काट कर सड़क बनाता 
और बना देता है मॉल।।
कभी मोड़ता रुख नदियों के
और बनाता उन पर बांध।।
अपनी मनमानी से वो करता रहा सदा अन्याय।।
नहीं सोचता इक़ पल को भी
पेड़ नहीं तो हवा नहीं 
नहीं रहेगी शीतल छांव 
रुक जायेगी फिर ये वृष्टि
सूरज की किरणें फ़िर घातक 
धरती को कर देंगी तप्त
कवच सुरक्षा चोटिल होगी
प्रदूषण बढ़ जाएगा।।
अपनी करनी से मानव तू
सृष्टि को डस जाएगा।।
खतरे में ग़र होगी दुनिया
तू भी कहाँ बच पायेगा।।
अब भी वक्त है तौबा कर ले
ना काट हरित इन नीड़ों को
वरना दिन वो दूर नहीं 
जब सब कुछ खत्म हो जाएगा।।।
निहारिका झा।।🙏🏼🙏🏼🌴🌴



सम्भाल कर रखो इसे (पर्यावरण) --- ओमप्रकाश पाण्डेय
(चित्र पर आधारित कविता) 
ये हरे भरे झूमते वृक्ष
ये हर भरे घने जंगल
कितने शेर भालू बन्दर
हाथी व अनगिनत जीव जन्तु
रहते हैं इनमें शान्ति से
सम्भाल कर रखो इसे..... 1
पक्षियों के प्यारे प्यारे घोंसले
लटकती हैं इनकी डालियों से
एक पूरा संसार इनका मौज से
रहता है इन घोसलों में शांति से
अगर जंगल न रहे सोंचों फिर
सम्भाल कर रखो इसे........ 2
ये इठलाती नदियाँ हमारी
ये तैरती नाचती मछलियाँ
दिल खुशी से मचल जाता है 
साक्षात ये जीवन हैं प्राणियों का
अगर नदियाँ न रहीं सोंचों फिर
सम्भाल कर रखो इसे....... 3
ये पेड़ पौधे व लहलहाते खेत
ये नदियाँ तालाब व ये झरने
ये पर्वत पहाड़ियां व खाईयाँ
ये दौड़ते हुए पशु उड़ती हुई पक्षियां
अगर ये सब न रहे तो सोंचों फिर
सम्भाल कर रखो इसे.......... 4
ईश्वर ने जो भी दिया है हमें
बहुत सोंच समझकर दिया
उसकी बनायी ये श्रृष्टि सुन्दर
है सभी प्राणियों के लिए
क्यों नष्ट कर रहे हो तुम इसे
सम्भाल कर रखो इसे........ 5
( यह मेरी मौलिक रचना है ---- ओमप्रकाश पाण्डेय)



वीना अचतानी, 
विषय *चित्र पर आधारित कविता *
काँप रही हर दिशा 
प्रकृति का तन मन मुरझाया
हे मानव तुमने कैसा
आंतक मचाया 
हरे भरे वृक्षों को काट गिराया 
आज झरे जो कल थे हरे
पेड़ों को तुमने कैसे ज़ख्म दिये
नाभि में इनके अमृत था
आँधी आऐ तूफाँ आए
पेड़ वहीँ डटे रहे
तपती धूप में ठन्डी छाँव देते 
रखते हमें स्वस्थ और दीर्घायु 
कुदरत से मिली है सौगात हमें 
यह ईश्वर का वरदान हमें 
बड़ा अनमोल उपहार है
औषधि देते आक्सीजन देते
हे मानव तुमने कैसा ज़ख्म दिया 
धरती को ऊसर करने को 
क्यो मचल रहा
पहले जैसे नहीं रहे
हरे भरे जंगल
पक्षियों के रैन बसेरा
वृक्ष है धरती का गहना 
कटते हैं जब जंगल 
होता है अमंगल ।।।।।
स्वरचित मौलिक, 
वीना अचतानी 
जोधपुर, ।। ।।



$$ चित्र आधारित कविता $$

काट काटकर वृक्ष 
कर दिया धरा को सुखा 
बादल है चहुं ओर पर 
दिखे न नीर की बूंद 
सिर्फ लेना ही सिखा मानव ने
पेड़ पानी ,कर दिये सारे खत्म 
प्रदुषण फैलाने की हद हो गई 
कर दिया आसमान मे छेद 
पाटना है इसको मुश्किल पर
लगना होंगे कई गुना पेड़
जब होगी धरती हरी भरी 
तब भरेगा आसमान का छेद 
छोड़ कुल्हाड़ी, पकड़ फावड़ा 
कर दे बीजों की बौछार 
सावन का महीना आया है 
धरती देगी वृक्ष अपार 
सेवा नित प्रति करके उनकी
गोद हरी करना धरा की 
तब छेद भरेगा आसमान का

चन्दा डांगी रेकी ग्रैंडमास्टर 
रामटेकरी मंदसौर मध्यप्रदेश



।गुरुवार दिनांक***२९/७/२१
विधा*****कविता
विषय******
  #***चित्र आधारित रचना***#
               ^^^^^^^^^^^

जीवनदाई पेड़ों को काटने की ।
            अगर तू गलती करेगा ।।
तो तू ही नहीं समस्त संसार का ।
            हर जीव जंतु मरेगा ।।१

ये पेड़ पौधे वृक्ष वल्लरी हमारे ।
                जीवन के आधार हैं ।।
इनसे मिले फलफूल पवन बिना ।
                 हम सब लाचार हैं ।।२

इन्हें काटकर तू खुद अपनों पे ।                   
                   वार कर रहा है ।।
इसकी गरजको न मान खुदका ।
                   संहार कर रहा है ।।३

पेड़ काटके तड़पेगा जिसके लिए ।
                   मिलेगी न वो पवन ।। 
ना होंगे पर्वत झरने फिजा बहारें ।
                  ना बहेंंगे गंगो जमन ।।४

मत काट है गुजारिश तुझसे इंसा ।
               पेड़ स्रिष्टी का दान है ।।
 ये समस्त मानव जीवन के लिए ।
               रब से मिला वरदान है ।। ५


प्रा रविशंकर कोलते
      नागपुर


अग्निशिखा मंच
29/7/2021 गुरुवार
विषय-चित्र आधारित रचना

हद हो गयी
इंसान की
हैवानियत की
जिन वृक्षों से
हमें जीवनदायनी
आक्सीजन मिलती है
जलाने को
ईंधन मिलता है
आज जो
हमारे घरों में
जो पलंग,सोफे
और ऐशो-आराम के
जो भी साधन है
हमें इन्हीं
वृक्षों से प्राप्त होता है
इन्हीं वृक्षों से
पर्यावरण का
शुद्धिकरण होता है
उन्हीं जीवनदायक
वृक्षो को
हम अपनी 
स्वार्थसिद्धि की
पूर्ति के लिए
निर्ममता से
काट रहे है 
जो करेंगे हम
प्रकति से
 छेड़छाड़ तो
हर्जाना तो
भुगतना ही पड़ेगा
वृक्षविहीन 
धरती पर
मुश्क़िल है जीना
देख कर
कटते वृक्ष
फट गया है
आसमान का भी सीना।
                  
                         तारा "प्रीत"
                     जोधपुर (राज०)






ना करो मेरे रूह को आहत
***********************
  हे मानव! मत काटो ‌ मुझे
मेरे नाजुक अंग
 हे अधम ! क्यों बने अभिमानी
 दो वक़्त की रोटी के खातिर
काहे को करे मनमानी..?
मैंने कितना तेरा साथ निभाया
जन्म -मरण सा जितना
जब छोटा बच्चा था मैं इतना
 तेरे पिता और मैं संग-संग
दोनों हुए जवान
हमने मिलकर बांटे
सुख-दुख एक समान
घर पर दु:ख की जब-जब 
छाई बदरिया..? सुख -चैन की छाया मैंने ही दी
अपने सारे हाथ फैलाकर
 मीठे-मीठे फल देकर
 अपने पुत्र धर्म का निर्वाह किया
 तेरे पिता का जब विवाह हुआ
पतझड़ में खूब झूमा नाचा
तेरे जन्म पे मैंने अपनी बाहों में झूला बांधा
तुझ अबोध बालक का मां जैसा
पल-पल रखा मैंने ध्यान
 मैं निर्जीव तुझ सा खिलौना पाकर हुआ निहाल
मुझे मत काटो !मुझे बहुत दर्द होता है!

डॉ मीना कुमारी परिहार
 मंच को नमन 🙏
चित्र आधारित रचना
29/7/21



चीर वृक्षों का सीना
क्या तुम खुश रह पाओगे
मिलेगा वही करोगे जो
आज नहीं तो कल पछताओगे।।

आसमान से गिरेगी बिजली
पहाड़ो को भी ढ़हा पाओगे
टूट जाऐंगे सब ग्लेशियर
क्या तब तुभी तुम मुस्कुराओगे।।

जैसी करनी वैसी भरनी
मुहावरा सकारात्मक ही पाओगे
प्रकृति हूं तो क्या हुआ मैं
तुम मुझे यूंही बिन कारण सताओगे।।

अरे चीर हर एक वृक्ष तुम
कितने बंगले बनाओगे
बंगले तो बन जाऐंगे
पर प्राकृतिक भोज कहा पाओगे।।

वक्त हे अभी भी संभल जाओ
वरना मेरा नाश करने वाले मानव
अपना वज़ूद इंसा तुम भी सुनो
मेरे प्रकोप से मिटा हुआ पाओगे

वीना आडवानी"तन्वी"
नागपुर, महाराष्ट्र
******************


*काट के मुझे क्या मिला* 
जिंदगी लेने वाले,काट के मुझे तुझे क्या मिला।
मेरी छाया में पला,बड़ा,एसा दिया मुझे सिला।

चढ़कर मेरे दामन पर,कितने खेल थे खिलाये।
साथियों के साथ मिलकर,सालो तक फल खाये,

बैठ के मेरी छाया में, अपना बचपन है बिताया ।
जब थक जाता खेत जोत मेरीं छांव मे सुस्ताया।

कैसा मतलबी है तू मतलब निकल गया मुझसे हे मानव,
चलाके अपनी कुल्हाड़ी,मुझ पर आज तू बन गया दानव । 
अपनी करनी पर एक दिन, जरूर पछतायेगा ।
जिस हवा मे जिंदा है,उसे पानेको तरस जायेगा,
*उसे ही पाने को तू तरस जायेगा*
*जनार्दन शर्मा* (आशुकवि लेख़क व्यंग्य)
अध्यक्ष मनपसंद कला साहित्य मंच इंदौर



पर्यावरण
----------
 हरे भरे वृक्षों को 
यूं ना काटो ऐ इंसान।
क्या तू जानता नहीं
  वृक्ष जीवन रक्षक हैं तेरे
   प्राणदायिनी वायु प्रदान
     करते हैं यह तुझे।
 अभी अभी महामारी में
 क्या कुछ सीखा नहीं
 प्राण वायु के बगैर इन
लाखों ने जाने गवांई अपनी।
  प्रकृति नेयह सब मुफ्त दिया
 समझ ना आया तुझे
 पर तू अब तो समझ रहे ,मानव।
 रक्षा करो इनकी,
  ना काटो इन्हें,।
 पर्यावरण की रक्षा करें
 हाहाकार मचा था चारों ओर
बिना ऑक्सीजन के लिए
 जो कि प्रकृति मुफ्त देती है हमें।
 अब तो मूल्य पहचाने 
रक्षा करें पेड़ लगाएं
 ताकि चहुँ ओर खुशहाली छाये
 ना कोई बिछड़े अपनों से 
बिना प्राणवायु के।
 स्वस्थ रहे हम हमेशा
 ना रहे कहीं प्रदूषण
 धरती मां को नमन कर
 रक्षा करें हम इनकी
 शुद्ध वायु शुद्ध जल  
 शुद्ध से स्वास्थ्य 
हमारा फले फूले।
 धन्यवाद
 अंशु तिवारी पटना


चित्र पर
पेड़ काटकर मानव 
प्रकृति को विरान बनाते हो
हरि भरी वादियों को उजाड़
पर्यावरण को दूषित बनाते हो
पेड़ों को उजाड़ धरती को बंजर बनाते हो
हरियाली देख आसमान भी ख़ुश होता है
पेड़ों के हरे हरे पत्ते देख बरसात करता है
पेड़ों को काटने से धरती सुखी होती है
खुले जगह में फिर बरसात भी नहीं होती है
बादल फटकर पृथ्वी पर हाहाकार मचा देता है
जो तुमने पेड़ काटकर वीरान बनाई थी जमी 
पानी उस पर बेहिसाब दौड़ता है
उसके क्रोध का कारण निर्दोष भी बनते हैं
सभी को अपने साथ बना लें जाता है
पेड़ नहीं है बाढ़ के पानी को रोकने के लिए 
क्योंकि तुमने तो पेड़ काट खायें है 
हे मानव सुंदर जा जो हमारी धरोहर ‌है 
उसे नुकसान ना पहुंचा ।
रचनाकार
अंजली तिवारी मिश्रा लाल बाग जगदलपुर छत्तीसगढ़



. विटप की कसक
इक टीस सी उठती है, जब कोई पेड़ कटता है।
प्रकृति भी दुःखती है, जब कोई पेड़ कटता है।

विटप हमारी धरा की, अमूल्य धरोहर होते हैं। 
हमारे जीवन में यह, संपूर्णता प्रदान करते हैं।
प्राकृतिक रूप से जीवन को, पूर्ण कर देते हैं।
रुख़ भी ज़िंदा मानव से, कम नहीं तड़फता है।
इक टीस सी उठती है जब, कोई पेड़ कटता है।

कितने दरख़्तों को मार, बाईपास बना डाले।
ज़िंदा हरे पेड़ न जाने, कितने लाश बना डाले।
चिल्लाकर उसने दर्द, इंसा से बयाँ कर डाले।
उनके तन का हर अवशेष, रोता-सिसकता है।
प्रकृति भी दुःखती है, जब कोई पेड़ कटता है।
इक टीस सी उठती है, जब कोई पेड़ कटता है।

वैष्णो खत्री वेदिका
जबलपुर



नमन पटल
आज की विधा-चित्र आधारित रचना
विषय-पर्यावरण


चारो तरफ व्याप्त पर्यावरण,
है असली संरक्षक हमारा।
इसके हरे-भरे परिधि में रहकर,
मिलता हमें जीवन सुख सारा।

प्रकृति माँ की ममतामयी गोद में
 हम पले ,खेले और बड़े हुए।
इसकी सुरभित शीतल वायु,जल,
पीकर तन मन से हृष्ट पुष्ट हुए।

इसके अद्भुत मेवा और फलों से
रसना को मिलती कितनी तृप्ति।
गोमाता का अमृत तुल्य दुग्ध,
पीकर मिलती परम संतुष्टि।

पर स्वार्थलोलुपता के वशीभूत हो,
इनका नैसर्गिक सौंदर्य क्षीण किया।
जंगल,पेड़ों को काट काट कर,
उसे व्यथित, अंगविहीन किया।

घरा का दोहन कर अति निष्ठुरता से
खनिज पदार्थ ,धरत्न,निकालते हो।
सरिता ,सागर में गोताखोर बिठाकर,
सारे मोती माणिक्य उगाहते हो।

पर्यावरण को प्रदूषित कर अब
खामियाज़ा भुगत रहे उसका ।
ऑक्सीजन को तरस रहे,
हुई विषैली गैसों की अधिका।

जन जन है आज पीड़ित, लाचार,
करता प्रायश्चित अपने कर्मों का,
संभवतः ले रही प्रकृति प्रतिशोध,
अपनी उस मर्मान्तक पीड़ा का।

आइये एक प्रण ले आज हम मिलकर,
सुधारेंगे त्रुटियां यही वक्त की पुकार।
करेंगे संरक्षित पर्यावरण को सप्रयास,
वृक्षों को रोपेंगे हर घर के उपवन द्वार।

प्रकृति को न व्यथित और करेंगे,
स्वार्थलिप्सा में अब न कभी फसेंगे।
प्रकृति माँ की अकूत संपदा का ,
अब और न दोहन, हरण करेंगे।

स्नेहलता पाण्डेय 'स्नेह'
नई दिल्ली



* अग्नि शिखा काव्य मंच*
    * चित्र देख कविता लिखो *
    * गुरूवार २८/ ७/ २०२१ 
    * बिषय - पर्यावरण *

हरे भरे वनों की रक्षा अनुपम प्रकृति की संरचना ,
प्राणवायु हम इनसे पाते तभी स्वस्थ हम रह पाते !

हवा हो प्रदुषण मुक्त जीवन हो पंछियों सा उन्मुक्त,
प्राणवायु और गहरे श्वास रह सकते हम सब स्वस्थ !

जीव जन्तु ओर पंख पखेरू जल ,थल,नभ में रहते ,
पर्यावरण का संतुलन हम सब मिलकर के ही करते!

आधुनिकता के नाम पर जब से जीवन-शैली बदली ,
भोगवाद की लिप्सा ने पावन बसुधा मैली करदी !

गर ?जीव जगत सुरक्षित रखना है वृक्षारोपण हो ,
कंकरीट के जंगल में भी खड़े नीम ओर बबुल हो !

एक वृक्ष दस बेटों जितना पुरखे यूं ही नहीं कहते ,
जो प्रकृति का संरक्षण अपना फर्ज समझते !

धरती माता कल्पबृक्ष सम हम सबको सब कुछ देती ,
प्राणवायु,फल, फूल ,शुद्ध जल कोई कमी न रखती !

हम उसकी बिगड़ी संतानें नादानी कर बैठे ?
नंदन वन सी बसुधा से हम छेड़छाड़ कर बैठै ,

हर गलती सजा सुनिश्चित हमको भी मिल …...रही ,
कहीं भूकंप ,कहीं सुनामीं, कहीं सुखा कहीं पे आंधी!

अब पाप का घड़ा भर गया करोना का विकराल साया ?
आक्सीजन बिन जीवन में संकट घोर घिर - घिर आया !

ओजोन की परत में अब आ गई दरारें है !
पराबैंगनी किरणों से अब खुद को कैसे
 बचायेंगे ?

अब भी बाजी हाथ हमारे अभी भी कुछ नहीं है बिगड़ा ,
पेड़ और जल संरक्षण से मिट जायेगा सारा झगड़ा टंटा!

फिर हवा शुद्ध होगी ओर प्राणवायु भरपूर मिलेगी ,
आने वाली नस्लें हमारी पूर्ण स्वस्थ सुरक्षित होगी !

आओ मिल कर संकल्प करें सादा जीवन अपनायेगे ,
अपने बच्चों के समान ही वृक्षों की रक्षा कर पायेंगे !    

सरोज दुगड़ 
गुवाहाटी असम
🙏🙏🙏


#अग्निशिखा मंच 🌹🌹🙏🙏
🌹🌹
*दिन गुरुवार*
*दिनांक 29 जुलाई 2021*
*विषय चित्र आधारित* *(पर्यावरण )*
*विधा कविता*

बेमोल दिया करती थीं जो सांसें
देने से वह भी अब कतराने लगीं
हमनें उजाड़ा स्वयं अपना घर , तो
वह भी सांसों की क़ीमत मांगने लगीं

क्या ग़लत किया प्रकृति ने..बोलो
हमनें ही तो यह दिन दिया..
सिर्फ़ कागज़ों में ही रखा वृक्षों को
धरा तो हमनें वृक्ष - विहीन किया

न चलाओ कुल्हाड़ी हम पर तुम!
बारम्बार देती रही प्रकृति चेतावनी!
मगर मनुज आकांक्षाओं का मारा
करता रहा सदा अपनी मनमानी!

देख लिया वृक्षों को काटकर
सबक कैसे सिखलाती है धरा
वृक्ष लगाओ, जंगल बनाओ...

महज़ नारों से नही सजती धरा!!

आइए हम सब अब प्रण लें
फिर, धरती हरी भरी बनाएंगे
जो छीना है प्रकृति से हमने
सादर उसे लौटाएंगे!!

*मीना गोपाल त्रिपाठी*
*अनुपपुर ( मध्यप्रदेश )*


*विषय -चित्र आधारित*

🌹मन के विचारों की लड़ी है
जिंदगी पर्यावरण पर खड़ी है,

क्या सोचे अब मानुष क्या देखे 
सब तेरी ही देन है सब ये देखे,

काट पेड़ों को नई दुनियां सवारे है 
फिर बाद में काहे तू पछताए है,

कैसा ये द्वन्द है विचारों में
सब उजाड़ क्यों दुख है मन में,

पर्यावरण संतुलन से जीवन हैं
यही मनन से सही जीवन है,

अब सुधर जा मानव क्या देखे है 
क्योंकि पर्यावरण से जीवन डोर है

हेमा जैन (स्वरचित )


🙏🌹अग्नि शिखा मंच🌹🙏
🙏🌹जय अम्बे🌹29/7/21🌹🙏
🙏🌹चित्र पर आधारित 🌹🙏
🙏🌹 *क्यों कांटे वृक्ष* 🌹🙏


कुल्हाड़ी लेकर खड़ा, मानवी तुम अज्ञात ।
औक्सीजन ढूँढें रहो , फिर करों अश्रुपात ।।

क्यों काटो तुम वृक्षको, मूरख मानव आज। 
एक लगाकर वृक्षको, रखने अपनी लाज।। 

सेवा करते झाड़ जो, संत खड़े है द्वार। 
तुम जब पत्थर मारके,फल फूल दे अपार ।।

प्राण वान यह वृक्ष है, बचे हमारी जान। 
हो जाते निस्तेज हम, रखलो उनका मान।। 

🙏🌹स्वरचित 🌹🙏
🙏🌹पद्माक्षि शुक्ल🌹🙏


अग्निशिखा मंच
तिथि-२९-७-२०२१
विषय -चित्र पर कविता

हे! मूर्ख मानव ना कर यह मूर्खता, 
जिस डाल पर बैठा है ,उसे ही काटने चला।
ऐसा ही एक बार कालीदास ने किया था.
पर पत्नी के धिक्कारने पर मेघदूत लिखा था.
मोटी चमड़ी के मानव क्या कहें तुम्हें,
काटते जा रहे हो पेड़,कोई डर नहीं है तुम्हें
धिक्कार का भी असर पड़ता नहीं है तुम्हें.
आकाश में छेद किया,असर दिख रहा है 
ना काटो पेड़ ,पर्यावरण को नष्ट ना करो.
कहीं अतिवृष्टि कहीं अनावृष्टि को रोक लो.
नहीं तो प्यारी सी धरा खत्म हो जायेगी,
पेड़ लगाते चलो,धरा हरीभरी हो जायेगी.

नीरजा ठाकुर नीर
पलावा डोम्बिवली
महाराष्ट्र


WhatsApp

अखिल भारतीय अग्निशिखा मंच के ब्लॉक पर चंद्रशेखर आजाद जी को पढ़िए और एक क्रांतिकारी को याद करें सभी रचनाकारों की रचनाएं आप यहां पर पढ़कर आनंदित हो डॉ अलका पांडे मुंबई




चंद्रशेखर आज़ाद 
मैं आज़ाद हूँ आजाद ही रहूँगा और आज़ाद ही मरुगा । 
यह नारा दिया और नारे का मान रखा वह आज़ाद ही रहे ।।
सत् सत् नमन करती हूँ ऐसे वीर स्वतंत्रता चितेरे को ।
असहयोग आंदोलन के महान प्रणेता को ।।
निर्भीकता और निडरता से आज़ाद के अगंरेज काँपते थे । 
आपका देश प्रेम युगों युगों तक सुनाई जाती रहेगी ।।

भारत के दिल पर सदा तेरा नाम चमकता रहेगा ।
जवानों के दिलों में आज़ाद नाम सदा धड़कता रहेगा ।।
चंद्रशेखर आज़ाद को देश  कभी भूला न पायेगा । 
साहस और देश प्रेम की मिसाल बन कर सदा ज़िंदा रहेगा ।।

आज़ाद मौत से तुम कभी नहीं डरे , किसी से तुम्हे ख़ौफ़ होता नहीं था । 
तुम्हारे व्यक्तित्व पर सारा ज़माना नाज करता रहेगा ।।
असहयोग आंदोलन के तुम पथप्रदर्शक रहे । 
भारत की स्वतंत्रता का स्वप्न आज़ाद तुम ने दिखाया था ।। 

महात्मा गांधी के कार्यों से हुये प्रभावित और साथ काम किया था 
पर हमेशा अपनी अलग राह बनाई थी 
अंग्रेजों मूंह तोड़ जवाब दिया था ।।
बचपन के खाये कौड़े कभी न भूला पाया था । 
लहू में उनकी टीस उभरती और आज़ाद वीरता की निशानी बना था ।।

तन पर वह मार खाता मूंह से जय भारत के नारे बोलता ।
जख्म उसे विचलित न कर पायें स्वाधीनता का सपना आँखों में सजा था ।।

गांधी का अंहिसा का सिद्धांत आज़ाद को पंसद न आया । 
अंग्रेजों की तरह जवाब देना आज़ाद को सुकुन देता थ। 
आज़ाद हूँ आज़ाद रहूँगा और आज़ाद ही मरुगा ।।
यह नारा सच्च कर गया था , अंग्रेजों का बंदी नहीं बना । 
अपनी जान स्वंयम ले ली बलिदानी ने 

अल्फ्रेड पार्क में कर रहे थे मिटींग 
किसी ग़द्दार ने कर दी थी ग़द्दारी 
नांट बाबर ने घेरा आकर सवाल जवाब किये ।
बोला आज़ाद मैं तुम्हारा बाप आज़ाद हूँ 
सब को भगाकर अकेले ही भीड गया आजाद ।
गोलियों का जवाब गोलियों से देता रहा आजाद ।।


जब बची, सिर्फ़ एक गोली रख कनपटी पर दाग दी पिस्तौल । 
आज़ाद हो गया खेल गया खून की होली , ।।
आजादी की ज्वाला सुलगा गया ।
हर भारत वासी की नसों में खून बन बह गया ।।

आज देश को चंद्रशेखर जैसों की जरुरत है।

डॉ अलका पाण्डेय मुम्बई






चन्द्रशेखर आजाद। 
चन्द्रशेखर 'आजाद (२३ जुलाई १९०६ - २७ फ़रवरी १९३१) 
17 दिसम्बर, 1928 को चन्द्रशेखर आज़ाद, भगत सिंह और राजगुरु ने संध्या के समय लाहौर में पुलिस अधीक्षक के दफ़्तर को जा घेरा। ज्यों ही जे. पी. सांडर्स अपने अंगरक्षक के साथ मोटर साइकिल पर बैठकर निकला, पहली गोली राजगुरु ने दाग़ दी, जो साडंर्स के मस्तक पर लगी और वह मोटर साइकिल से नीचे गिर पड़ा।भगतसिंह ने आगे बढ़कर चार–छह गोलियाँ और दागकर उसे बिल्कुल ठंडा कर दिया। जब सांडर्स के अंगरक्षक ने पीछा किया तो चन्द्रशेखर आज़ाद ने अपनी गोली से उसे भी समाप्त कर दिया। लाहौर नगर में जगह–जगह परचे चिपका दिए गए कि लाला लाजपतराय की मृत्यु का बदला ले लिया गया। समस्त भारत में क्रान्तिकारियों के इस क़दम को सराहा गया। 
चन्द्रशेखर आज़ाद के ही सफल नेतृत्व में भगतसिंह और बटुकेश्वर दत्त ने 8 अप्रैल, 1929 को दिल्ली की केन्द्रीय असेंबली में बम विस्फोट किया। यह विस्फोट किसी को भी नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से नहीं किया गया था। 
चंद्र शेखर आजाद देशप्रेमी है, 
एक सफल क्रांतिकारी मेरे है। 
क्रांतिकारियों का साथ दिया, 
ब्रिटिश फौज से लोहा लेते है।।
चंद्र शेखर...................... 1 
ब्रिटिश संसद में बम फेका है
ब्रिटिश सरकार को हिलाया है। 
देश की आजादी के लिए, 
गर्म खून का साथ दिया है।। 
चंद्र शेखर.................... 2 
देश में जन जागरण किया है, 
अपना घर बार छोड़ दिया है। 
ब्रिटिश आफीसर को घेरकर, 
गोली से उसे उडा दिया है।। 
चंद्र शेखर.................... 3 
आजादी की क्रांति ज्वाला है, 
देश भर में खूब फैला दिया है। 
ब्रिटिश फोज के पैर फूल गये, 
उसकी जडों को हिला दिया है।। 
चंद्र शेखर...................... 4
आजादी हमें लेकर रहना है, 
चाहे बम से ब्रिटिश भगाना है। 
ब्रिटिश देश में नहीं रहना है, 
चाहे जान हमें कभी देना है।। 
स्वरचित, 
रामेश्वर प्रसाद गुप्ता ।



वीना अचतानी, 
अग्नि शिखा मंच को नमन 
विषय ***चन्द्र शेखर आज़ाद ***
चन्द्र शेखर आज़ाद एक महान् क्रांति कारी थे।काकोरी ट्रेन डकैती (1926) वाइसराय की ट्रेन को उड़ाने का पर्यास (1926) लाला लाजपत राय की मौत का बदला उनकी उग्र देश भक्ति और साहस ने उनकी पीढ़ी के लोगों को स्वतन्त्रता संग्राम में भाग लेने के लिये प्रेरित किया ।चन्द्रशेखर आज़ाद भगत सिंह के सलाहकार और एक महान् स्वतन्त्रत सेनानी थे ।भगतसिंह के साथ उन्हे भारत के सबसे महान् क्रान्तिकारीयों मे से एक माना जाता है । वे कट्टर सनातनी ब्राह्मण थे ।बचपन से ही उनमें भारत माता को स्वतन्त्र कराने की भावना भरी हुई थी , इसलिए उन्होंने स्वयं अपना नाम आज़ाद रखा ।
           सन् 1922 में जब गाँधीजी ने चन्द्र शेखर को असहकार आन्दोलन से निकाला दिया था तब आज़ाद और क्रोधित हो गए थे ।तब उनकी मुलाकात युवा क्रांति कारी प्रन्वेश चटर्जी से हुई , जिन्होने उनकी मुलाकात रामप्रसाद बिस्मिल से करविई, जिन्होने हिन्दूस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन (H R A )की स्थापना की थी, यह एक क्रान्तिकारी संस्था थी।
            चन्द्र शेखर आज़ाद ने बड़ी बहादुरी से ब्रिटिश सेना का सामना किया, लम्बे समय तक।चलने वाली गोलाबारी के बाद अंतत : आज़ाद चाहते थे कि वे बिर्टिशो के हाथ न लगे और जब पिस्तौल में आखिरी गोली बची थी तब उन्होंने वह आखिरी गोली खुद को ही मार दी थी 
           एसे वीर क्रान्ति कारी शहीद को शत् शत् नमन ।।।
वीना अचतानी 
जोधपुर ।।



..... "क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद"
^^^^^^^^
भारत का सदियों पुराना इतिहास इस बात का साक्षी है कि जब जब आक्रांताओं ने इस देश पर अपनी कुदृष्टि डाली है तब तब मुंह की खाई है।यद्यपि अंग्रेजों ने कुछ समय के लिए अपने कारनामों से भारत को गुलामी का दंश दिया परंतु भगतसिंह, सुखदेव और राजगुरु जैसे क्रांतिकारियों ने उन्हें छठी का दूध याद दिला दिया।उन्हीं क्रांतिकारियों में से एक थे देश के चहेते कांतिकारी चंद्रशेखर आज़ाद।
आइए जानते हैं उनके व्यक्तित्व और कृतित्व के बारे में---
सरदार बल्लभ भाई पटेल ने एक बार कहा था--
"निज के विचारों तथा देश के हित में किसे चुना जाये यह जानना कभी कभी कठिन हो जाता है।कभी ऐसा अवसर आता है जब बहुजन हिताय अपने मौलिक विचारों को भी तिलांजलि देनी पड़ती है।"
   परंतु आजाद जैसे व्यक्तित्व ने तो देश हित में न केवल अपने मौलिक विचारों को तिलांजलि दी अपितु स्वयं को ही न्यौछावर कर दिया।
 .मध्यप्रदेश के आलीराजपुरा जिले के भाबरा गाँव में माता जगरानी और पिता पंडित सीताराम तिवारी के इस लाडले ने23जुलाई1906में इस भारत धरा पर जन्म लिया।उनका बचपन भाबरा गाँव के भील सखाओं के साथ व्यतीत हुआ और वहीं उन से धनुर्विद्या का अचूक निशाना साधने की कला सीखी।आगे चलकर वे गांधी जी के विचारों से प्रभावित हुए।उनमें राष्ट्र भक्ति की भावना का बीज बोने वालों में थे उनके साथी विश्व नाथ वैशवपायन तथा उनके प्रमुख संगठन"हिंदुस्तान रिपब्लिकन एसोसिएशन"के बैनर तले देश को आजाद कराने के कार्यों में उनके साथ शचीन्द्र नाथ सान्याल, बटुकेश्वर दत्त, भगतसिंह, राजगुरु, सुखदेव जयदेव और अशफाक उल्ला आदि अन्य क्रांतिकारी थे।
  ..निर्भीकता और हाजिर जवाबी में तो उनका कोई मुकाबला नहीं था।अंग्रेजों के विरुद्ध गतिविधियों के कारण एक बार जब उनको मजिस्ट्रेट के सामने लाया गया तो जब उनसे उनका नाम पता पूछा गया तो निडर होकर उन्होंने जो जवाब दिया वह था--
मेरा नाम आजाद मेरी माँ का नाम धरती मेरे पिता का नाम स्वतंत्रता और मेरा घर जेल खाना साथ ही अपना संकल्प भी दोहरा दिया,"मैं आजाद हूँ आजाद रहूंगा और आजाद ही मरूंगा, अंग्रेजी सरकार मुझे जीवित नहीं पकड़ सकेगी।वहीं हुआ।24वर्ष5मा ह की अल्पायु में अंग्रेजों द्वारा पकड़े जाने पर उनसे वीरता से लड़ते हुए अपनी ही बंदूक की गोली से अपनी इहलीला समाप्त कर मां भारती को समर्पित हो गए और जाते जाते कह गये----
"सांस का हर सुमन है वतन के लिए
जिंदगी ही हवन है वतन के लिए
हम जिये तो जिये सदा वतन के लिए
अब करके जाते हैं नमन वतन के लिए।"
और इस क्रांतिकारी युवा का नाम भारतके इतिहास में सदा के लिए स्वर्णाक्षरों में अंकित हो गया।
     जय हिंद-जय भारत
मौलिक लेख
           लीला कृपलानी



🙏🌹अग्नि शिखा मंच🌹🙏
🙏🌹जय अम्बे,🌹 28/7/21🌹🙏
🙏🌹 *क्रांति कारी चंद्रशेखर आजाद* 🌹🙏

*परिचय* : भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के महानायक एवं लोकप्रिय स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई, 1906 को मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के भाबरा नामक स्थान पर हुआ। उनके पिता का नाम पंडित सीताराम तिवारी एवं माता का नाम जगदानी देवी था। उनके पिता ईमानदार, स्वाभिमानी, साहसी और वचन के पक्के थे। यही गुण चंद्रशेखर को अपने पिता से विरासत में मिले थे। 
 
*विवरण* : चंद्रशेखर आजाद 14 वर्ष की आयु में बनारस गए और वहां एक संस्कृत पाठशाला में पढ़ाई की। वहां उन्होंने कानून भंग आंदोलन में योगदान दिया था। 1920-21 के वर्षों में वे गांधीजी के असहयोग आंदोलन से जुड़े। वे गिरफ्तार हुए और जज के समक्ष प्रस्तुत किए गए। जहां उन्होंने अपना नाम 'आजाद', पिता का नाम 'स्वतंत्रता' और 'जेल' को उनका निवास बताया।

       जज ने उनको, 15 कोड़े लगाने की सजा सुनाई. ये वो पल था जब उनकी पीठ पर 15 कोड़े बरस रहे थे और वो वंदे मातरम् का उदघोष कर रहे थे. ये ही वो दिन था जब देशवासी उन्हें आजाद के नाम से पुकारने लगे थे. धीरे धीरे उनकी 
चंद्रशेखर आजाद की निशानेबाजी बचपन से बहुत अच्छी थी. दरअसल इसकी ट्रेनिंग उन्होंने बचपन में ही ले थी. सन् 1922 में चौरी चौरा की घटना के बाद गांधीजी ने आंदोलन वापस ले लिया तो देश के कई नवयुवकों की तरह आज़ाद का भी कांग्रेस से मोहभंग हो गया. जिसके बाद पण्डित राम प्रसाद बिस्मिल, शचीन्द्रनाथ सान्याल योगेशचन्द्र चटर्जी ने 1924 में उत्तर भारत के क्रान्तिकारियों को लेकर एक दल हिन्दुस्तानी प्रजातान्त्रिक संघ का गठन किया. चन्द्रशेखर आज़ाद भी इस दल में शामिल हो गए.

चंद्रशेखर आजाद ने 1928 में लाहौर में ब्रिटिश पुलिस ऑफिसर एसपी सॉन्डर्स को गोली मारकर लाला लाजपत राय की मौत का बदला लिया था. आजाद रामप्रसाद बिस्मिल के क्रांतिकारी संगठन हिंदुस्तान रिपब्लिक एसोसिएशन (एचआरए) से जुड़ने के बाद उनकी जिंदगी बदल गई. उन्होंने सरकारी खजाने को लूट कर संगठन की क्रांतिकारी गतिविधियों के लिए धन जुटाना शुरू कर दिया. उनका मानना था कि यह धन भारतीयों का ही है जिसे अंग्रेजों ने लूटा है. रामप्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में आजाद ने काकोरी कांड (1925) में सक्रिय भाग लिया था
                  चंद्रशेखर आजाद, इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में सुखदेव और अपने एक अन्य और मित्र के साथ योजना बना रहे थे. अचानक अंग्रेज पुलिस ने उनपर हमला कर दिया. आजाद ने पुलिस पर गोलियां चलाईं ताकि उनके साथी सुखदेव बचकर निकल सकें. पुलिस की गोलियों से आजाद बुरी तरह घायल हो गए थे. वे सैकड़ों पुलिस वालों के सामने 20 मिनट तक दिलेरी से लड़ते रहे.

आखिर में उन्हेांने अपना नारा आजाद है आजाद रहेंगे अर्थात न कभी पकड़े जाएंगे और न ब्रिटिश सरकार उन्हें फांसी दे सकेगी को याद किया. इस तरह उन्होंने पिस्तौल की आखिरी गोली खुद को मार ली और मातृभूमि के लिए प्राणों की आहुति दे दी.हमने ऐसे कई वीर रत्न की बहादुरी से आजादी पाई है, 
*चंद्रशेखर आजाद को*
*शत शत नमन*

🙏🌹पद्माक्षि शुक्ल पुणे🌹🙏



अग्नि शिखा मंच
२८/०७/२०२१
विधा लेख
**बिषय** **चन्द्र शेखर**
              **आजाद*
    
भाँवरा गाँव मे माँ जगरानी देवी ने २३/७/१९०६ को पुत्र
रत्न को जन्म दिया।भाँवरा गाँव डालला १३वर्ष के उम्र मे
देश का डालला बन गया।
स्वतंत्रता के लिये जूलुस निकला था।उसको तीतर वितर करने के लिए अग्रेजो ने लाठी चार्ज करवा दिया उसी मे किसी के हाथ झन्डा गिर रहा था जीसको चन्द्र शेखर ने गिरने पहले ही पकड़ लिया।सिपाहियों ने चन्द्र शेखर को पकड़ कर मजिस्ट्रेट के सामने हाजिर किया।
मजिस्ट्रेट ने पूछा तुम्हारा नाम क्या है।
चन्द्रशेखर ने बोला। आजाद
घर कहा है। जेलखाना
मजिस्ट्रेट ने पूछा उम्र
  आजाद बोले। १३वर्ष
मजिस्ट्रेट ने १३ बेत की सजा सुनाया।
आजाद ने हर बेत पर भारत माँ के नारे लगाये।और उस दिन से भाँवरा का लाल क्रांतिकारी **चन्द्र शेखर आजाद** बन गया।
आजाद ने राज गुरू भगत सिंह के साथ मिलकर संध्या के समय लाहौर मे पुलिस अधीक्षक के दफ्तर को घेर लिया और जे.पी.सांडर्स अपने अंगरक्षक के साथ मोटर सायकिल से निकला तिनो क्रांतिकारी गोली मार कर वही ठंडा कर दिये उस के अंगरक्षक को भी मार दिये।इस प्रकार आजाद अग्रेजो को खटकने लगे उन को पकड़ने के अग्रेजो ने मुखबिरों लगया था लेकिन आजाद कभी भी उनके हाथ नहीं आये।
तीनो क्रांतिकारी भेष बदल कर लाहौर से निल लिए।आजाद जी भेष बदलने मे माहिर थे।वे छुपने के लिए कानपूर आये थे।मुखबिर से अग्रेजो को पता चल गया।जीस घर मे छुपे उसको सादे पोसाक मे सिपाही घेर लिए थे।मगर आजाद तो आजाद साड़ी पहनकर घर से निकल लिए।आजाद का शरीर बलिष्ठ और लम्बा था साड़ी छोटी पड़ रही थी पर सिपाहियों ने ध्यान नहीं दिया और आजाद कानपूर से निकल लिए। ऐसे जाबांज थे देश भक्त क्रांतिकारी चन्दशेखर आजाद।
देश मे तब दो चार गद्दार थे जिनके मुखबिरी से आजाद अग्रेज सिपाहियों के द्वारा अल्फ्रेड पार्क इलाहाबाद मे घेर लिए गये तब आजाद ने उनका मुकबला पेड़ का आड़ लेकर अपने पिस्तौल से करते रहे जब एक गोली बची थी वह अपने को मार लिया।
जब पेड़ के पिछे से आवाज आनी बन्द हो गई तब सिपाही आगे बढ़ कर आजाद के पास गये।आजाद चिरनिद्रा मे सोये थे पिस्तौल अब भी उनके हाथ मे थी।
     इस तरह अपने देश की ही गद्दारी से एक देश भक्त सहीद होगया वह मनहूस दिन २७/२/१९३१/था भाँवरा का लाल माँ जगरानी के कलेजे का टुकड़ा देश पर कुर्बान हो गया।
जैहिन्द जय भारत ।
बन्दे मातरम्।
**स्वरचित** 
 **बृजकिशोरी त्रिपाठी**
   .. **गोरखपुर ,यू.पी**
मैने अपनी सिमीत जानकारी केअनुसार आजाद जी के बारे लिखी हूं त्रुटि हुंई हो तो क्षमा करे सही जानकारी से अवगत कराये।बृजकिशोरी।



चंद्रशेखर आजाद के जयंती पर एक प्रस्तुतीकरण

देश प्रेम वीरता और साहस के विशाल श्री चंद्रशेखर आजाद जिन्होंने 25 वर्ष की उम्र में भारत माता के प्रति शहीद होने वाले महापुरुष थे जिन के विषय में लिखने के लिए लेखनी भी छोटी पड़ जाती है।

यह एक चमत्कारी सत्य है भारत भूभाग पर ऐसे योद्धाओं का अवतरण हुआ था
उन्नाव जिले का एक गांव जिसका नाम बदरका संसार में मशहूर हो गया क्योंकि चंद्रशेखर आजाद का उस गांव से संबंध था।
असहयोग आंदोलन से इनके मन में जागरण का जोश आया और सत्याग्रह यों के साथ निकल पड़े।
क्रांति की जितनी योजनाएं बनी सभी के सूत्रधार आजाद थे

27 फरवरी 1931 को चंद्रशेखर अंग्रेज घिर गए। अंग्रेजों के हाथों मरने की वजाय खुद अपनी गोलियां से आत्महत्या कर ली

चंद्रशेखर आजाद के विषय में यह कहावत चरितार्थ है कि चिंगारी बनी शोला आजाद जिंदाबाद।

आज से 100 वर्ष पहले वे गांधीजी के असहयोग आंदोलन से जुड़े थे गिरफ्तार भी हुए थे और जज के सामने अपना परिचय देते हुए यह बताया था उनका नाम आजाद है पिता का नाम स्वतंत्रता और निवास जेल

अपनी सजा में हर बार वह वंदे मातरम और महात्मा की जय का नारा बुलंद किया था
ऐसे क्रांतिकारी नेता श्री चंद्रशेखर आजाद को शत-शत नमन करते हुए हर भारतवासी उनकी जयकारा कर रहा है

कुमकुम वेद सेन



*#अग्निशिखा मंच* 🙏🙏🌹🙏🙏दिन बुधवार
दिनांक 28 जुलाई 2021
विषय चंद्रशेखर आजाद ( गद्य )

*जनमानस में अंकित चंद्रशेखर आजाद की तस्वीर का सच*

भारत देश के गौरव रहे चंद्रशेखर आजाद का जन्म मध्यप्रदेश के पवित्र गांव भाबरा में 23 जुलाई 1906 में हुआ था। "आजाद" उपनाम उन्होंने स्वयं रखा था। इस शपथ के साथ कि वे आजाद हैं आजाद ही रहेंगे और कभी अंग्रेजों के गोली के शिकार नही होंगे।
          काकोरी कांड के बाद आजाद काफी दिनों तक अंडरग्राउंड थे।वह झांसी में अपने एक क्रांतिकारी मित्र रुद्रनारायण के घर मे छिपकर रहे।वहीं उनके मित्र ने उनसे तस्वीर खिंचवाने को कहा। आजाद नही चाहते थे परन्तु उन्होंने अपने मित्र का आग्रह मान लिया। आजाद की मूछों पर ताव देती, जनेऊ धारण वाली वही तस्वीर आज जन - जन के मन में बसी है। इस तस्वीर के लिए उनके मित्र ने उन्हें काफी लंबे समय तक एक ही पॉस्चर में खड़ा रखा था।परन्तु कुछ समय बाद ही आजाद को यह भान हो गया कि उनसे बहुत बड़ी गलती हो गई है। क्योंकि उनके सर पर हमेशा खतरे की तलवार लटकती रहती थी और इस तस्वीर की वजह से वह लोगों को पहचाने जा सकेंगे।
          अपनी इस आशंका की वजह से उन्होंने अपने क्रांतिकारी मित्र विश्वनाथ वेशवपायन को रुद्रनारायण के पास यह कहकर भेजा कि वे उनकी उस तस्वीर को नष्ट कर दें। रुद्रनारायण ने विश्वनाथ जी से कहा कि वे आजाद की आशंका को समझते हैं। मैंने यह तस्वीर इसलिए ली है कि जब भारत आजाद होगा तब इस देश की पीढ़ी आजाद के बारे में पढ़े।उनके इतिहास को जाने और लोग यह जाने की आजाद ने देश के लिए किस तरह से आजादी की लड़ाई लड़ी। जब लोग उनके बारे में पढ़ें तब वह यह महसूस करें कि आजाद भी उन्हीं की तरह एक आम इंसान थे और अपने अदम्य साहस की वजह से उन्होंने अंग्रेज़ो को नाके चने चबवाये थे। आप जाएं और आजाद से कह दें कि मैंने सारे नेगेटिव और तस्वीरे जला दी हैं। और मैं इन तस्वीरों और उनके नेगेटिव को दीवार में चुनवा दूंगा। और यह वादा करता हूं आपसे कि आजाद के जीते जी कभी यह तस्वीर अंग्रेजों के हाथ नही लगेगी। 
        27 फरवरी 1931 में चंद्रशेखर आजाद के शहीद होने के बाद ही यह तसवीर जारी की गई थी जो भारत के जन - जन के मानस पटल पर अंकित है।
            *मूंछों पर ताव, कांधे पर जनेऊ*
            *कमर में पिस्टल, शेर सी शख्शियत*
            *वो याद थे, वो याद हैं, वो याद रहेंगे*
            *आजाद थे, आजाद हैं, आजाद रहेंगे!!*
*अमर शहीद श्री चंद्रशेखर आजाद को इस मंच का शत- शत प्रणाम* 🌹🌹🙏🙏🌹🌹

  *मीना गोपाल त्रिपाठी*
   *अनुपपुर ( मध्यप्रदेश )*
     *28 / 7 /2021*



कविता का शीर्षक- 
चंद्रशेखर आज़ाद 
दिनांक-23/07/2021
विधा का नाम-काव्य   
---------------------------------------
शत शत नमन उन 
वीरों को। जो शहीद 
होकर भी आज़ाद 
होते हैं। 
असहयोग आंदोलन
का वो प्रणेता था।
भारत की स्वतंत्रता 
का वो चितेरा था।

जोशो जवानी 
उसकी शिराओं में दमकती थी। 
उसने कहानी 
युद्ध के भीषण 
कहर से लिखी थी। 
उसको कभी ना 
अहिंसा का पाठ 
भाया। 
उसने सुकून 
खून के पथ पर 
ही पाया।

मौत से आंखें 
मिलाकर वह बात
करता था।
अंगदी व्यक्तित्व 
पर जमाना नाज 
करता था।
इतिहास कुछ भी
कहे लेकिन जानता
है। हर हिन्दुस्तानी,
बिना आजाद के
आजादी हरगिज़ 
नहीं आई होगी।
 
माँ भारती की लाज 
का वो पहरेदार था। 
इस धरा पर, अब 
दिलों की बोलियां 
जलने न दूंगा।
चंद्रशेखर आज़ाद 
आज़ाद थे, आज़ाद हैं, और आज़ाद रहेंगे।


वीना आडवानी
नागपुर, महाराष्ट्र
*************



मंच को नमन
विधा:--- लेख
विषय:--- *क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद*।

*परिचय*:--- भारतीय स्वतंत्रता सेनानी चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को मध्य प्रदेश के झाबुआ जिले के भाबरा नामक स्थान पर हुआ। उनके पिता पंडित सीताराम तिवारी एवं माता के नाम जगदानी देवी था। उनके पिता ईमानदार , स्वाभिमानी,साहसी और बच्चन के पक्के थे। यही गुण चंद्रशेखर को विरासत में मिला।
*विवरण*:--- चंद्रशेखर आजाद 14 वर्ष की आयु में बनारस गए और वहां संस्कृत पाठशाला में पढ़ाई शुरू की। 1920 - 21
वर्षों में गांधीजी के असहयोग आंदोलन से जुड़े। वे गिरफ्तार भी हुए और जज के सामने प्रस्तुत हुए। जहां अपना नाम *आजाद*, पिता का नाम *स्वतंत्रता*
माता का नाम *धरती* *निवास स्थान जेल* बताएं। 15 कोड़े की सजा दी गई।
हर कोड़े के बाद *वंदे मातरम और महात्मा गांधी की जय* का बुलंद स्वर किया। इसके बाद सार्वजनिक रूप से *आजाद* कहलाए। क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद जन्म स्थान भावारा *आजाद नगर* के रूप से जाना जाता है।

जब क्रांतिकारी आंदोलन उग्र हुआ तब
*आजाद* उस तरफ मुड़ कर हिंदुस्तान सोशलिस्ट आर्मी से जुड़ गए। राम प्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में आजाद कोकरी
 षड़यंत्र 1925 मैं सक्रिय भाग लिया और पुलिस की आंखों में धूल झोंक कर फरार हो गए।
17 दिसंबर 1928 को चंद्रशेखर आजाद भगत सिंह और राजगुरु ने शाम के समय लाहौर में पुलिस अधीक्षक के कार्यालय को घेर लिया। ज्यों ही जेपी सांडर्स अपने अंगरक्षक के साथ मोटरसाइकिल पर बैठकर निकले तो राजगुरु ने पहली गोली दाग दी जिसके कारण सांडर्स के हाथ में लगा मोटरसाइकिल से गिर पड़ा फिर भगत सिंह आगे आकर 5 गोलियां दागकर उसे पूरा ठंडा कर दिया। जब सांडर्स के अंगरक्षक ने पीछा किया तो चंद्रशेखर आजाद ने अपनी गोली से उसे भी समाप्त कर दिया। इतना ही नहीं लाहौर में जगह जगह पर चिपका दिए गए जिस पर लिखा था लाला लाजपत राय की मृत्यु के बदला ले लिया गया है।

*उपसंहार*:-- आलफ्रेंड पार्क इलाहाबाद में 1931 में रूस की बोल्शेविक क्रांति के तर्ज पर समाजवादी क्रांति का आवाहन किया उन्होंने संकल्प लिया कि वे कभी पकडे नहीं जाएंगे और ने ब्रिटिश सरकार उन्हें फांसी दे सकेगी।
पूरा करने के लिए 27 फरवरी 1931 इसी पार्क में अपने को गोली मारकर मातृभूमि के लिए प्राण की आहुति दे दी।
जाते जाते कह गए:--
*मेरा हर सुमन है वतन के लिए*,
  *हम जिए सदा वतन के लिए* ,
    *अब हम करके जाते हैं* ,
* *नमन वतन के लिए*।

विजयेन्द्र मोहन।


बुधवार****** २८/७/२१
विधा*******लेख
विषय******
     #**चंद्रशेखर आजाद**#
                ^^^^^^^^^
     अगर चंद्रशेखर आझाद नहीं होते तो हम आज़ाद नहीं होते ।
स्वतंत्र संग्राम के इस महायज्ञ में अपने प्राणों की आहुति देने वाले चंद्रशेखर आजाद भाबरा गांव झाबुआ , (म प्र) पैदा हुए । 23 जुलाई १९०६ में जन्मे और 27 फरवरी 1931 तक, (आ आखरी सांस तक )देश की सेवा करते रहें ।
       मित्रों केवल 14 वर्ष की आयु में आजाद सहकार आंदोलन में सक्रिय हुए । गांधी जी ने इस आंदोलन का नेतृत्व किया था । और बड़े निर्भीकता, निडरता से आंदोलन में आजाद कूद पड़े और आखरी सांस तक वे अपनी देश भक्ति करते रहे । गांधी जी के कार्यों से, अहिंसात्मक विचारों से वे बहुत प्रभावित हुए थे । गांधी जी के साथ रहे । बचपन में ही उन्होंने कोड़े खाए थे । फिर भी उनका जज्बा कम नहीं हुआ । दिल में देशभक्ति की मशाल और धधकती गई । अंग्रेजों को मुंहतोड़ जवाब दिया ।
     8 अप्रैल 1929 को दिल्ली के केंद्रीय असेंबली में बम विस्फोट किया ।
17 दिसंबर 1928 को भगत सिंह राजगुरु ने संध्या समय लाहौर में पुलिस अधीक्षक के दफ्तर को घेरा, जे पी सैंड्रेस को राजगुरु ने पहली गोली मारी वह मोटरसाइकिल से नीचे गिरे और आजाद ने फिर उन पर गोलियां बरसा कर मार डाला ।
            आंदोलन में गिरफ्तारी के बाद ,बड़ी बहादुरी से ,निडरता से, अपनी जान की परवाह ना करते हुए जिस बेबाकी से न्यायाधीश को जो जवाब दिया वह उनके हौसले का परिचय था , काबिले तारीफ था ।
          अझाद ने कहा था, मेरा नाम आझाद है , पिता है स्वतंत्रता , मेरा पता है जेल ,
    और तभी से वे प्रसिद्ध हुए आझाद नाम से । भगत सिंह राजगुरु सुखदेव को जब फांसी हुई तो उन्होंने उनकी जान बचाने अपनी जान की बाजी लगा दी ।
        आजाद, अल्फ्रेड पार्क में अपनी सभा कर रहे थे, किसी ने जाकर उनकी गद्दारी की तो अंग्रेजों ने उसे घेरा और उसके बाद आजाद ने खुद अपनी पिस्तौल कनपटी में लगाकर अपनी जान देदी ।
          तो ऐसे थे हमारे बहादुर, निडर ,देशभक्त चंद्रशेखर आजाद जिनको आज भी इस मिट्टी का कण कण याद करता है और जब तक चांद सूरज है तब तक याद करते रहेगा । 
ऐसे जांबाज़ शहीद देशभक्तो चंद्रशेखर आजाद को
 मेरा कोटि कोटि वंदन ।

प्रा रविशंकर कोलते
     नागपुर



💐💐💐💐 विधा लेख💐💐💐💐

 विषय चंद्रशेखर आजाद

भारत भूमि अमर सैलानियों के उत्सर्ग से भरी पड़ी है यदि यूं कहा जाए कि देश को आजाद कराने सैलानियों का पदार्पण ना हुआ होता तो आज भी हम विदेशी शासन सत्ता में पड़े होते अगर चंद्रशेखर आजाद नहीं होते आजाद हूं आजाद थे आजाद रहूंगा का नारा देकर यह ज्योति ना जलाते तो शायद आजादी का परचम इस तेजी से इस धरा पर नहीं फैलता जिस तेजी से उस दौरान फैला ता स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों में अनेकों महान हस्तियां हुई हैं जिसमें से एक महान हस्ती इस महायज्ञ में जो हमारे बीच में अपना कृतित्व और व्यक्तित्व समर्पित करके गए हैं उनका नाम है आजाद चंद्रशेखर इस महायज्ञ में उन्होंने अपने प्राणों की आहुति दी चंद्रशेखर आजाद मध्य प्रदेश के होनहार व्यक्तित्व का जन्म भाबरा गांव झाबुआ में हुआ 23 जुलाई सन 1980 को जन्मे और 27 फरवरी 1931 तक अपने अंतिम क्षण कर देश की सेवा करते रहे और उन्होंने किसी भी तरह से देश की आजादी पर आंच ना आने दिया और सदा आजाद रहने का परिचय दिया उनकी आयु 14 वर्ष का बालक विद्यार्थी जीवन को ही सब कुछ जानता है वह उस दौरान अपने गुरुजनों से अपने प्रेरणादायक ओं से प्रेरणा लेकर आजाद सेना में आंदोलन में शामिल हो गए और गांधी जी ने जो आंदोलन का नेतृत्व किया था उसे बड़ी निर्भीकता से आंदोलन मैं कूद गए और देशभक्ति का अपना जो जज्बा था उसे समाज में लाकर दिखाया गांधी जी के जो कार्यशैली थी वह हिंसात्मक विचारधाराओं से परिपूर्ण थी क्योंकि गांधी जी के साथ रहकर उन्होंने देश की आजादी के लिए जो अपना पदार्पण किया बचपन में तो उन्होंने कई कूड़े भी खाएं और फिर जब उनका जज्बा कम नहीं हुआ तो देश में उन्होंने देश भक्ति की मशाल जलाने के लिए आगे बढ़ते चले गए दिल्ली के फैमिली में बम फेंका 8 अप्रैल 1929 का दिन था हमारी दादी स्वतंत्रता संग्राम सेनानी प्रभादेवी और स्वतंत्रता संग्राम सेनानी गोकुल प्रसाद सराफ सदा बतलाया करते रहते थे कि किस तरह से उन्होंने देश के लिए बिल्कुल सीना तान के अपना दायित्व निभाया दादी बतलाया करती थी कि जब 17 दिसंबर 1928 को भगत सिंह राजगुरु ने समझा कि समय लाहौर में पुलिस अधीक्षक को दफ्तर में गिरा था तो उसी समय राजगुरु पहली गोली मारी पर मोटरसाइकिल से नीचे गिरे आजाद ने फिर उन पर गोलियां बरसा कर उन्हें मार डाला कहते हैं इससे ब्रिटिश शासन बौखला गई थी और हर स्वतंत्रता संग्राम सेनानियों को पकड़ पकड़ कर आने को यातनाएं दी थी आंदोलन मैं जिसकी भी उस दौरान गिरफ्तारियां हो रही थी उन्हें कड़ी से कड़ी सजा दी जा रही थी ऐसे में आजाद ने बहुत निडरता के साथ अपना परिचय दिया और वह सदा यह कहते थे मेरा नाम आजाद है मेरा पिता का नाम स्वतंत्रता है और मेरा पता यदि कोई पूछे तो उससे बता देना जेल है उन्होंने माता-पिता को यह कह दिया था कि अब मेरा जीवन देश के लिए हैं और मैं अपने देश के लिए ही करना चाहता हूं चाहे तो मेरे प्राणों की बलि क्यों न जाए जब भगत सिंह राजगुरु और सुखदेव को फांसी हुई तो उन्होंने उन्होंने अपनी जान की बाजी देश को आजाद कराने में लगा दी आजाद इलाहाबाद के अल्फ्रेड पार्क में सभा कर रहे थे तो उस समय भी अनेकों गद्दारों के कारण देश की आजादी को सफलता मिल नहीं मिल रही थी ऐसे ही किसी गद्दार ने जाकर अंग्रेजों को इसकी सूचना दे दी और अंग्रेजों ने उन्हें चारों तरफ से घेर लिया ऑल फ्रेंड पार्क मैं जहां आजाद थे वहां से उन्होंने अनेकों जगह पेड़ों के पीछे छिपकर अंग्रेजों का मुकाबला किया किंतु जब उन्होंने देखा कि किसी भी तरह से यहां से नहीं निकल पा रहे हैं तो उन्होंने अपनी ही पिस्तौल से एक बहादुर निडर देशभक्त का परिचय देते हुए मिट्टी को याद किया भारत माता को सलाम किया और मिट्टी को उठाकर अपने माथे से लगाया और भारत माता को सलाम किया और अपने ही पिस्तौल से अपनी कनपटी पर लगाकर अपना बलिदान देश को दे दिया और यही अंतिम क्षण उनका संदेश था कि मैं आजाद हूं आजाद रहूंगा और आजाद था भारत माता को अब हमारे आने वाले साथी आजाद करा कर रहेंगे उनका उद्घोष था जो भारत की जनता को कार्य करने के लिए प्रेरणा दिया और आज हम अपने देश में आजादी में सांसे ले रहे हैं 
जय हिंद

 जय भारत 


भारत माता की जय

🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻🙏🏻
 कुमारी चंदा देवी स्वर्णकार जबलपुर मध्य प्रदेश



नमन पटल
विधा -आलेख
विषय-चंद्रशेखर आजाद

चंद्र शेखर आजाद माँ भारती के सच्चे सपूत थे।भारत की आजादी के लिए अपने सुख की परवाह न करते हुए,देशभक्ति का अमृत दिल मे समाए अंग्रेजी हुकूमत के ख़िलाफ़ देश में क्रांति की मशाल जलाई।
 उनका बचपन मध्यप्रदेश के एक आदिवासी इलाके झाबरा में बीता था। 
रामप्रसाद बिस्मिल, राजगुरु और भगतसिंह के साथ मिलकर इन्होंने अंग्रेजों को नाको चने चबवा दिए थे।
उन्होंने गांधी जी के साथ असहयोग आंदोलन में भाग लिया था किंतु उन्हें अंग्रेजों ने गिरफ्तार कर लिया औऱ जज के सामने पेश किया जहाँ उन्होंने अपना परिचय आज़ाद के रूप में दिया तथा मां का नाम धरती और पिता का जेल तथा जेल को अपने निवास की जगह बताया।
कोड़ों की सजा खाते रहे और भारत माता की जय, महात्मा गांघी की जय के नारे लगाते रहे।अंग्रेज उनके अंदर देशभक्ति की प्रज्ज्वलित आग को देखकर दंग थे।
अल्फ्रेफ पार्क इलाहाबाद में ,किसी मुखबिर ने मुखीबीरी कर दी और आज़ाद अंग्रेज सिपाहियों द्वारा घेर लिए गए। आज़ाद ने बहुत देर तक उनसेमुकाबला किया लेकिन अब उनके पास एक ही गोली बची उसे उन्होंने अपने सीने में उतार लिया और कभी अंग्रेजों के हाथ न आने के अपने सौगन्ध को पूरा किया। यह मनहूस दिन 27/231 था जिस दिन माँ वसुधा ने अपना प्यारा लाल खो दिया था।

भारत माँ के इस सच्चे सपूत को शत शत नमन

स्नेहलता पाण्डेय 'स्नेह'



अ. भा. अग्निशिखा मंच
बुधवार -28/7//2021
विषय - क्रांति कारी - चंद्रशेखर आज़ाद 
विधा - लेख 

स्वतंत्रता संग्राम के महानायक चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई, 1906 को मध्यप्रदेश के झाबुआ जिले के भाबरा नामक स्थान पर हुआ। उनके पिता पंडित सीताराम तिवारी एवं माता जगदानी देवी थीं।

चंद्रशेखर जी को ईमानदार, स्वाभिमानी, साहसी और वचन के पक्के होने के गुण पिता जी से विरासत में मिले थे। 
 
चंद्रशेखर आजाद 14 वर्ष की आयु मे संस्कृत पाठशाला बनारस में पढ़ाई की। वहीं उन्होंने कानून भंग आंदोलन में योगदान दिया और वे गांधीजी के असहयोग आंदोलन से भी जुड़े। वहीं पर वे गिरफ्तार हुए और उन्होंने अपना नाम 'आजाद', पिता का नाम 'स्वतंत्रता' और 'जेल' को उनका निवास बताया। उन्हें 15 कोड़ों की सजा दी गई। हर कोड़े के वार के साथ उन्होंने, 'वन्दे मातरम्‌' और 'महात्मा गांधी की जय' का स्वर बुलंद किया। इसके बाद वे सार्वजनिक रूप से आजाद कहलाए। 

बाद में वे 'हिन्दुस्तान सोशलिस्ट आर्मी' से जुड़े। रामप्रसाद बिस्मिल के नेतृत्व में आजाद ने काकोरी षड्यंत्र (1925) में सक्रिय भाग लिया और फरार हो गए।

 17 दिसंबर, 1928 को चंद्रशेखर आजाद, भगत सिंह और राजगुरु ने जे.पी. साण्डर्स पर गोलियाँ दाग कर उसे बिल्कुल ठंडा कर दिया। 

 फिर इन्होंने लाहौर में जगह-जगह परचे चिपका दिए गए, जिन पर लिखा था- लाला लाजपतराय की मृत्यु का बदला ले लिया गया है। उनके इस कदम को समस्त भारत के क्रांतिकारियों द्वारा खूब सराहा गया।
 
अलफ्रेड पार्क, इलाहाबाद में 1931 में उन्होंने समाजवादी क्रांति का आह्वान किया। उन्होंने संकल्प किया था कि वे न कभी पकड़े जाएंगे और न ब्रिटिश सरकार उन्हें फांसी दे सकेगी। इसी लिए उन्होंने 27 फरवरी, 1931 को इसी पार्क में स्वयं को गोली मारकर मातृभूमि के लिए प्राणों की आहुति दे दी।

वैष्णो खत्री वेदिका
जबलपुर



चंद्रशेखर आजाद

चन्द्र शेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई 1906 को मध्य प्रदेश के अलीराजपुर जिले का भाबरा में हुआ था ।उन्होंने 14 वर्ष की उम्र में क्रांति का रास्ता चुना ।आजादी को लेकर चंद्रशेखर आजाद में ऐसा जज्बा था, कि वे पीठ पर कोड़े खाते रहे और वंदे मातरम का उद्घोष करते रहे ।चंद्रशेखर आजाद ने वीरता की नई परिभाषा लिखी थी। उनके बलिदान के बाद प्रारंभ किया गया, उनसे प्रेरणा लेकर हजारों युवक स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े ।आजाद की शहादत से 16 वर्षों बाद 15 अगस्त 1947 को हिंदुस्तान की आजादी का सपना पूरा हुआ ,किंतु वे उसे जीवित ना देख सके। उन्होंने संकल्प किया था कि वह कभी पकडे नहीं जाएंगे, और न ही ब्रिटिश सरकार उन्हें फांसी दे सकेगी। इसी संकल्प को पूरा करने के लिए उन्होंने 27 फरवरी 1931 को अल्फ्रेड पार्क में स्वयं को गोली मारकर मातृभूमि के लिए प्राणों की आहुति दे दी ।

शोभा रानी तिवारी इंदौर मध्य प्रदेश



क्रांतिकारी चंद्रशेखर आजाद ---- ओमप्रकाश पाण्डेय
मध्यप्रदेश के एक छोटे से गाँव में जन्मे चन्द्रशेखर आजाद जब संस्कृत शिक्षा के लिए बनारस आये तो उस समय किसी ने सोंचा भी नहीं होगा कि यह छोटा लड़का आगे चलकर भारतीय स्वतंत्रता संग्राम का महान व अमर सेनानी होगा और ब्रिटिश साम्राज्य की जड़ें हिला देने में सक्षम होगा.
लेकिन यही हुआ. बनारस उस समय क्रांतिकारीयों का गढ़ था और पण्डित राम प्रसाद बिस्मिल, शचीन्द्रनाथ सन्यास व योगेशचन्द्र चटर्जी जैसे महान क्रांतिकारी बनारस में अपना केन्द्र बनाये थे. चन्द्रशेखर आजाद उन लोगों के सम्पर्क में आये और आजादी के आन्दोलन में सक्रिय हो गये. गांधी जी के असहयोग आन्दोलन में बढ़ चढ़ कर भाग लिया. पकड़े जाने पर इन्होंने अपना नाम आजाद बताया और तभी से देश इनको आजाद के नाम से ही पुकारने लगा.
गांधी जी के अहिंसक आन्दोलन से मोहभंग होने पर आप ने अन्य क्रांतिकारीयों के साथ मिलकर क्रांतिकारी संगठन हिन्दुस्थानी प्रजातांत्रिक संघ स्थापना सन् 1924 में की. महान स्वतंत्रता सेनानी लाला लाजपत राय को एक जलूस का नेतृत्व करते समय पुलिसवालों ने वहाँ के पुलिस अधीक्षक सेन्डर्स के कहने पर लाठियों से पीटते पीटते मार डाला. इस घटना की पूरे देश में तीव्र प्रतिक्रिया हुई और क्रांतिकारीयों ने इसका बदला लेने का निश्चय किया. 1928 में चन्द्रशेखर आजाद ने लाहौर में उसकी हत्या करके लाला लाजपत राय के हत्या का बदला ले लिया. क्रांतिकारी गतिविधियों में पैसे की जरूरत को पूरा करने के लिए आपने सुखदेव और रामप्रसाद बिस्मिल के साथ मिलकर 1925 में काकोरी में रेलवे के खजाने को लूट लिया.
27 फरवरी, 1931 को ये जब सुखदेव के साथ अल्फ्रेड पार्क, इलाहाबाद में अपनी भावी योजना के बारे में गुप्त वार्ता कर रहे थे तो उसी समय एक देशद्रोही की सूचना पर अंग्रेज़ी पुलिस ने इन्हें चारों ओर से घेर लिया. सुखदेव तो बच कर निकल गए, लेकिन इस महान क्रांतिकारी को चारों ओर से घेर कर पुलिस ने गोली चलाना शुरू कर दिया. इस महान क्रांतिकारी ने अंग्रेजों का काफी देर तक अकेले ही मुकाबला किया, लेकिन अन्त में यह लड़ते लड़ते वीरगति को प्राप्त हुआ.
यह देश चन्द्रशेखर आजाद और उनके जैसे लाखों क्रांतिकारीयों का हमेशा ऋणी रहेगा.
( यह मेरी मौलिक रचना है ----- ओमप्रकाश पाण्डेय)


🕊️🕊️🕊️🕊️🕊️🕊️🕊️
🌺बुधवार -28/7//2021
🌺विषय - क्रांति कारी - चंद्रशेखर आज़ाद 
🌺 विधा - लेख 
चंद्रशेखर आजाद
🕊️🕊️🕊️🕊️🕊️🕊️🕊️
चंद्रशेखर आजाद का जन्म 23 जुलाई सन 1986 को भाबरा गांव में एक ब्राह्मण परिवार में हुआ। इनके पिता जी सीताराम तिवारी उन दिनों मध्य प्रदेश रियासत में नौकरी करते थे। यहीं बालक चंद्रशेखर का बचपन बीता आदिवासी क्षेत्र में उन्होंने भील बालकों के साथ धनुष बाण चलाना एवं निशानेबाजी सीखी जो आगे चलकर उनके बहुत काम आए।
बड़े होने पर इनका मन देश प्रेम की ओर मुड़ गया। वह देश को आजाद कराने के लिए सशस्त्र क्रांति का सहारा लेने लगे। आगे चलकर वे हिंदुस्तान प्रजातंत्र संघ नाम के दल में सम्मिलित हो गए।
उन्हें जब पहली बार गिरफ्तार किया गया तो 15 कोड़ों की सजा मिली उन्हें नंगा करके कोड़े लगाए गए। एक एक कोड़े पर वे तब तक भारत माता की जय बोलते रहे जब तक कि बेहोश नहीं हो गये। 

कुछ दिनों तक वे झांसी के पास ओरछा के जंगलों में रहे और वहां निशानेबाजी सीखते रहे और सिखाते भी रहे। 
वहां वे पंडित हरिशंकर ब्रह्मचारी के नाम से जाने जाते थे। 
राम प्रसाद बिस्मिल सचिंद्र नाथ सान्याल योगेश चंद्र चटर्जी आदि के साथ मिलकर इन्होंने हिंदुस्तानी प्रजातांत्रिक संघ का गठन किया।धन जुटाने के उद्देश्य से यह पैसे वाले लोगों के यहां डकैती डालते थे किंतु किसी औरत पर हाथ नहीं उठाते थे। एक बार किसी औरत ने इनके हाथ से पिस्तौल छीन ली। तब से इन्होंने गांव में डाका डालना बंद कर दिया और वह सरकारी प्रतिष्ठानों को लूटने लगे। ९ अगस्त १९२५ को काकोरी काण्ड को अंजाम दिया गया। इस कांड में पण्डित राम प्रसाद 'बिस्मिल', अशफाक उल्ला खाँ एवं ठाकुररोशन सिंह को १९ दिसम्बर १९२७ तथा उससे २ दिन पूर्व राजेन्द्रनाथ लाहिड़ी को १७ दिसम्बर १९२७ को फाँसी पर लटकाकर मार दिया गया। 

४ क्रान्तिकारियों को फाँसी और १६ को कड़ी कैद की सजा के बाद चन्द्रशेखर आज़ाद ने उत्तर भारत के सभी कान्तिकारियों को एकत्र कर ८ सितम्बर १९२८ को दिल्ली के फीरोज शाह कोटला मैदान में एक गुप्त सभा का आयोजन किया। इसी सभा में भगत सिंह को दल का प्रचार-प्रमुख बनाया गया। इसी सभा में यह भी तय किया गया कि सभी क्रान्तिकारी दलों को अपने-अपने उद्देश्य इस नयी पार्टी में विलय कर लेने चाहिये। पर्याप्त विचार-विमर्श के पश्चात् एकमत से समाजवाद को दल के प्रमुख उद्देश्यों में शामिल घोषित करते हुए "हिन्दुस्तान रिपब्लिकन ऐसोसियेशन" का नाम बदलकर "हिन्दुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिकन एसोसियेशन" रखा गया। चन्द्रशेखर आज़ाद ने सेना-प्रमुख का दायित्व सम्हाला। इस दल के गठन के पश्चात् एक नया लक्ष्य निर्धारित किया गया - "हमारी लड़ाई आखरी फैसला होने तक जारी रहेगी और वह फैसला है जीत या मौत।"

17 दिसम्बर, 1928 को चन्द्रशेखर आज़ाद, भगत सिंह और राजगुरु ने संध्या के समय लाहौर में पुलिस अधीक्षक के दफ़्तर को जा घेरा। ज्यों ही जे. पी. सांडर्स अपने अंगरक्षक के साथ मोटर साइकिल पर बैठकर निकला, पहली गोली राजगुरु ने दाग़ दी, जो साडंर्स के मस्तक पर लगी और वह मोटर साइकिल से नीचे गिर पड़ा।भगतसिंह ने आगे बढ़कर चार–छह गोलियाँ और दागकर उसे बिल्कुल ठंडा कर दिया। जब सांडर्स के अंगरक्षक ने पीछा किया तो चन्द्रशेखर आज़ाद ने अपनी गोली से उसे भी समाप्त कर दिया। लाहौर नगर में जगह–जगह परचे चिपका दिए गए कि लाला लाजपतराय की मृत्यु का बदला ले लिया गया। समस्त भारत में क्रान्तिकारियों के इस क़दम को सराहा गया।

चन्द्रशेखर आज़ाद के ही सफल नेतृत्व में भगतसिंह और बटुकेश्वर दत्त ने 8 अप्रैल, 1929 को दिल्ली की केन्द्रीय असेंबली में बम विस्फोट किया। यह विस्फोट किसी को भी नुकसान पहुँचाने के उद्देश्य से नहीं किया गया था। विस्फोट अंग्रेज़ सरकार द्वारा बनाए गए काले क़ानूनों के विरोध में किया गया था। इस काण्ड के फलस्वरूप क्रान्तिकारी बहुत जनप्रिय हो गए। केन्द्रीय असेंबली में बम विस्फोट करने के पश्चात भगत सिंह और बटुकेश्वर दत्त ने स्वयं को गिरफ्तार करा लिया। वे न्यायालय को अपना प्रचार–मंच बनाना चाहते थे।

चन्द्रशेखर आज़ाद की इच्छा के विरुद्ध जब भगत सिंह एसेम्बली में बम फेंकने गये तो आज़ाद पर दल की पूरी जिम्मेवारी आ गयी। साण्डर्स वध में भी उन्होंने भगत सिंह का साथ दिया और बाद में उन्हें छुड़ाने की पूरी कोशिश भी की। आज़ाद की सलाह के खिलाफ जाकर यशपाल ने २३ दिसम्बर १९२९ को दिल्ली के नज़दीक वायसराय की गाड़ी पर बम फेंका तो इससे आज़ाद क्षुब्ध थे क्योंकि इसमें वायसराय तो बच गया था पर कुछ और कर्मचारी मारे गए थे। आज़ाद को २८ मई १९३० को भगवती चरण वोहरा की बम-परीक्षण में हुई शहादत से भी गहरा आघात लगा था। इसके कारण भगत सिंह को जेल से छुड़ाने की योजना भी खटाई में पड़ गयी थी। 

अल्फ्रेड पार्क में अपने एक मित्र सुखदेव राज से मन्त्रणा कर ही रहे थे तभी सी०आई०डी० का एस०एस०पी० नॉट बाबर जीप से वहाँ आ पहुँचा। उसके पीछे-पीछे भारी संख्या में कर्नलगंज थाने से पुलिस भी आ गयी। दोनों ओर से हुई भयंकर गोलीबारी में आजाद को वीरगति प्राप्त हुई। यह दुखद घटना २७ फ़रवरी १९३१ के दिन घटित हुई और हमेशा के लिये इतिहास में दर्ज हो गयी।

पुलिस ने बिना किसी को इसकी सूचना दिये चन्द्रशेखर आज़ाद का अन्तिम संस्कार कर दिया था। जैसे ही आजाद की बलिदान की खबर जनता को लगी सारा इलाहाबाद अलफ्रेड पार्क में उमड पडा। जिस वृक्ष के नीचे आजाद शहीद हुए थे लोग उस वृक्ष की पूजा करने लगे। वृक्ष के तने के इर्द-गिर्द झण्डियाँ बाँध दी गयीं। लोग उस स्थान की माटी को कपडों में शीशियों में भरकर ले जाने लगे। समूचे शहर में आजाद के बलिदान की खबर से जब‍रदस्त तनाव हो गया। शाम होते-होते सरकारी प्रतिष्ठानों प‍र हमले होने लगे। लोग सडकों पर आ गये।

चन्द्रशेखर आज़ाद ने वीरता की नई परिभाषा लिखी थी। उनके बलिदान के बाद उनके द्वारा प्रारम्भ किया गया आन्दोलन और तेज हो गया, उनसे प्रेरणा लेकर हजारों युवक स्‍वतन्त्रता आन्दोलन में कूद पड़े। आजाद की शहादत के सोलह वर्षों बाद १५ अगस्त सन् १९४७ को हिन्दुस्तान की आजादी का उनका सपना पूरा तो हुआ किन्तु वे उसे जीते जी देख न सके। 
🕊️🕊️🕊️🕊️🕊️🕊️🕊️
कुँवर वीर सिंह मार्तण्ड, कोलकाता
✍️✍️✍️✍️✍️✍️✍️



नमन मंच ब
दिनांक 28 /7/ 2021 
विषय -: चंद्रशेखर आजाद 
       विधा-: लेख

23 जुलाई 1906 को चंद्रशेखर आजाद का अवतरण हुआ था! भाबरा गांव की धरा भी इस दिन मुस्कुराई थी! पिता सीताराम तिवारी एवं माता जगदानी थी! 

नाम के अनुरूप सदा आजाद ही रहे ! 14 वर्ष की अल्पायु में ही असहयोग आंदोलन से जुड़े ! आजाद नाम अपना दिया और पिता को स्वतंत्रता नाम दिया ! सजा के 14 कोड़े जो पडे़ वे शौर्य बनकर ही खड़े थे ! तन पर कोडे़ बरस रहे थे पर उनके मुंह से वंदे मातरम का उद्घोष हो रहा था ! गांधी के अनुयायी जरूर थे किंतु अहिंसा का पाठ वे नहीं पढ़ पाये उनकी शिराओं में तो गर्म लहू दौड़ रहा था अतः वे तीव्र क्रांतिकारी के रुप में उभर कर आये ! उनमें जोश बहुत था और वे किसी के द्वारा दी गई यातनायें नहीं सहन कर सकते थे यही कारण था कि उन्होंने गांधी को अपनाया किंतु अहिंसा के अनुयायी नहीं बन पाये! 
उन्होंने बलिदान का रास्ता अपनाया! गुलामी को नेस्तनाबूद कर आजादी दिलाने का फौलादी संकल्प था उनका! वे असहयोग आंदोलन के प्रणेता भी थे! देश की आजादी के वे सशक्त हथियार थे! अपने प्राणों की आहुति देकर भी देश की आजादी के फौलादी संकल्प को लेकर अंत तक अडे़
 रहे! 
उन्होंने अपने नाम को सार्थक किया....! नाम से आजाद थे और आजाद ही रहे....! 

                चंद्रिका व्यास
             खारघर नवी मुंबई



🙏माँ शारदा को नमन 🙏

🙏महान क्रान्तिकारी भारत के सपूत चन्द्र शेखर आजाद को नमन करते हुए आज सुअवसर मिला है कि मैं आप द्वारा चन्द्र शेखर आजाद जी पर लिखे लेख की समीक्षा करूँ। 🙏
1) @⁨रामेश्वर गुप्ता के के⁩ जी
लाहौर मे पुलिस अधीक्षक को और उनके अंगरक्षक को घेरा और मारकर उन्होंने ये साबित कर दिया था कि अंग्रेजो को वो ज्यादा दिन भारत पर राज नही करने देंगे ।🙏
2) @⁨वीना अचतानी 🧑🏿‍🦽⁩ जी आपने कहा कि आजाद जी भगत सिंह जी के सलाहकार के रूप मे उस पीढ़ी को देश को आजाद कराने के लिए प्रेरित किया ।और अंत समय तक वो अंग्रेजों के हाथ नही आये । और अंतिम गोली स्वयं को ही मार दी । 🙏
3) @⁨लीला कृपलानी🍑जोधपुर⁩ जी आपने उनके देश प्रेम के सिद्धांत को रखा कि मैं आजाद हूँ,आजाद रहूंगा और आजाद ही मरूंगा और अन्ततः यही हुआ। उनके लिए धरती माँ ही सबकुछ थी ।और उसी के लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए 🙏
4)@⁨👑पदमाकाक्षी शुक्ला⁩ जी चन्द्र शेखर आजाद जी गांधी जी के साथ असहयोग आन्दोलन से जुड़े थे पर जब गाँधी जी ने आन्दोलन वापस लिया तो नाराज होकर हिन्दुस्तानी प्रजातांत्रिक संघ मे शामिल होकर देश को आजाद कराने मे महान भुमिका निभाई । 🙏
5) @⁨😇ब्रीज किशोर⁩ जी बिल्कुल सही भाँवरा का लाल माँ जगरानी जी के कलेजे का टुकड़ा थे चन्द्र शेखर आजाद जी ।
6)@⁨कुम कुम वेद सेन⁩ जी
25 वर्ष की कम उम्र मे भी चन्द्र शेखर आजाद जी ने देश के लिए अपने को न्यौछावर कर दिया ।ऐसे महान देश भक्त क्रान्तिकारी थे वे ।🙏
7)@⁨👑मीना त्रिपाठी⁩ जी
मूंछो पर ताव,कांधे पर जनेऊ 
कमर मे पिस्टल, शेर सी शख्सियत 
वो याद थे,वो याद है,वो याद रहेंगे 
आजाद थे,आजाद है,आजाद रहेंगे 
खूबसूरत पंक्तियाँ 🙏
8)@⁨वीना अडवानी 👩⁩ जी आपने सुंदर कविता के माध्यम से अपने भाव रखे पर आज लेख होता तो अच्छा रहता ।🙏
9)@⁨विजेन्द्र मोहन बोकारो⁩ जी
गांधी जी से अलग होकर चन्द्र शेखर आजाद जी राम प्रसाद बिस्मिल जी के साथ हिन्दुस्तान सोशलिस्ट आर्मी मे जुड़कर देश को आजाद कराने मे महत्वपूर्ण भुमिका निभाई। 🙏
10)@⁨रवि शंकर कोलते क⁩ जी
सही कहा आपने आदरणीय चन्द्र शेखर आजाद नही होते तो हम आजाद नही होते ।🙏
11)@⁨+91 93990 45214 कुमारी चंद्रा सुवर्णकार 🧑🏿‍🦽⁩ जी
अपने गुरूजी की प्रेरणा से कम उम्र मे ही चन्द्र शेखर आजाद जी ने सदा के लिए अपने को अमर कर दिया ।🙏
12)@⁨स्नेह लता पाण्डेय - स्नेह⁩ जी
माँ भारती के सच्चे सपूत चन्द्र शेखर आजाद ने जो क्रान्ति की मशाल जलाई कि अंग्रेजो को देश को आजाद करना ही पड़ा 🙏
13)@⁨वैष्णवी Khatri वेदिका⁩ जी
ईमानदारी,स्वाभिमानी,साहसी और वचन के पक्के होने के गुण चन्द्र शेखर आजाद जी को अपने पिताजी पंडित सीताराम तिवारी जी से विरासत मे मिले इसी की बदोलत वो महान क्रान्तिकारी बने ।🙏
14)@⁨शेभारानी✔️ तिवारी इंदौर⁩ जी चन्द्र शेखर आजाद जी जैसा महान क्रान्तिकारी जिन्होंने कोड़े खाकर भी देश की स्वतन्त्रता की आस लिए अपने प्राण न्यौछावर कर दिए ।

आप सभी ने महान क्रान्तिकारी देश भक्त चन्द्र शेखर आजाद जी के बारे मे बहुत सुंदर चित्रण किया है पर आप सभी से अनुरोध करती हूँ कि अपनी आलेख को एक बार पढ़कर पोस्ट किया करे,कभी कभी टंकण की अशुद्धि से भावार्थ तक बदल जाते है जो कि उचित नहीं है ।🙏

चन्दा डांगी रेकी ग्रैंडमास्टर 
रामटेकरी मंदसौर मध्यप्रदेश



आजाद एक युवा क्रांतिकारी
************************
    भारतीय क्रांतिकारियों में चन्द्रशेखर आजाद एक बहुत प्रसिद्ध नाम है, जिन्होंने अपनी मातृभूमि की आजादी के लिए अपना सब कुछ बलिदान कर दिया।
चन्द्रशेखर आज़ाद भारत में जन्मे एक बहादुर और क्रांतिकारी व्यक्ति थे, जिन्हें उनकी क्रांतिकारी गतिविधियों के लिए हमेशा याद किया जाता है। अपने साहसिक गतिविधियों के कारण वो भारतीय युवाओं में एक हीरो के रूप में जाने जाते हैं।अपने नाम के अनुरूप ही वो अंग्रेजी साम्राज्य के खिलाफ की गई क्रांतिकारी गतिविधियों के बाद भी ब्रिटिश कभी उन्हें पकड़ नहीं सके। बहुत कम उम्र में भाग लेने के लिए प्रेरित हुए। केवल 15 वर्ष की उम्र में आजादी के आंदोलन में हिस्सा लेने के लिए एक युवा के लिए बहुत कम उम्र है लेकिन आजाद ने भारत को स्वतंत्र कराने के लिए यह लड़ाई लड़ी। सन् 1922में गांधीजी के द्वारा असहयोग आंदोलन को खत्म करने के बाद, आजाद राम प्रसाद बिस्मिल के संपर्क में आए। चन्द्रशेखर आजाद को मोतीलाल नेहरू जैसे बहुत सारे दिग्गज नेताओं का समरथ प्राप्त था।
          27फरवरी 1931 को आजाद जब इलाहाबाद के आजाद पार्क में छिपे थे। वीरभद्र तिवारी नाम का एक पुराना साथी पुलिस का मुखबिर बन गया और आजाद के वहां होने की सूचना पुलिस को दे दिया। पुलिस के साथ भिड़ते हुए आजाद ने अपने कोल्ट पिस्टल से गोलियां चलातीं, लेकिन जब उसमें केवल एक गोली बची थी, तो उन्होंने खुद को गोली मारी ली। वे अपने नाम के अनुसार 'आजाद'ही मर गये। आजाद अपने साथियों से कहा करते थे कि वो कभी पकड़े नहीं जाएंगे और हमेशा आजाद ही रहेंगे, वास्तव में वे गिरफ्तार होने कु स्थिति में एक अतिरिक्त गोली अपने साथ रखते थे,ताकि वे खुद को मार सकें।
"वर्षों पहले गुलामी में जकड़ा था,
ये मेरा तिरंगा प्यारा
कायरों के झुण्ड ने रचा था ये खेल सारा
पर ज्योंहि सिंह ने दहाड़ लगाई
गूंजा था ये विश्व सारा
अंग्रेज थर-थर कांपे थे
क्रांतिकारियों ने जो थि एक कदम उठाया
भगत सिंह फांसी पर झूल ग्रे
किन्तु एक क्षण भी पलकों को न झुकाया
आओ मिलकर इनको नमन करें


डॉ मीना कुमारी परिहार




क्रांतिकारी चन्द्र शेखर आजा़द

क्रांतिकारी चंद्रशेखर थे महान 
आज हम करें उनका गुणगान 
देश प्रेम था उनकी रग रग में 
प्रभु का चन्द्रशेखर को वरदान।

 23 जुलाई को भावरा में जन्मे
 जगरानी कोख को धन्य किया 
 पिता ईमानदार व स्वाभिमानी 
 पितृ गुणों को आत्मसात किया।

14 वर्ष मेंअध्ययन हेतु बनारस 
गांधी के आंदोलन में लिया भाग
अंग्रेजों ने किया उन्हें गिरफ्तार 
चंद्रशेखर ने बताया नाम आजाद।

तब 15 कोड़ों की मिली सजा 
हर वार पर बोला वंदे मातरम 
और बोला गांधी जी की जय 
आजाद नाम से हुआ विख्यात।

काकोरी कांड में लिया थाभाग
आँख में धूल झोंक फरार हुआ 
लाजपत राय का लेनाहै बदला 
आजाद ने जोश से प्रचार किया।


27फरवरी अंग्रेज सिपाहियों ने 
घेर लिया उन्हेंअल्फ्रेड पार्क में 
पेड़ पीछे पिस्तौल से वार किया 
शत्रु द्वारा न मरने का वादा किया।
 
अंग्रेजों ने पेड़ को छलनी किया 
पर हाथ ना आए उनके आजाद
अन्तिम गोली बची जब पिस्टल
आजाद ने स्वयं पर वार किया।

दुश्मन उनके शौर्य से अचंभित
समीप जाने में हुए थे भयभीत
क्रान्तिकारी मरकर अमर हुआ
देशभक्त ने शत्रु पर पाई जीत।।


आशा जाकड़


आजाद चन्द्र शेखर बोस
****************
आजाद चन्द्र शेखर बोस
ने आजादी की‌ लडाई लगी थी
देश को अंग्रेजों के चंगुल से बचाया था
निडर होकर दुश्मनों का सामना किया
यातनाये सही पर हार नहीं मानी
देश से प्यार था
मातृभूमि की रक्षा करनी की ठानी थी 
देश की जनता पर हो रहे अत्याचार उन्हें मंजूर नहीं थी ।
देश को अंग्रेजों की गुलामी से छुड़ाने चाहते थे
देश को स्वतंत्रता दिलाकर माने
अपने जीवन की परवाह नहीं किते
ऐसे देशभक्तों से ही हमें आजादी मिली है
जो एक इंसान नहीं पूरे देश की जनता की प्राणों की रक्षा की 
अब तो व्यक्ति स्वार्थी हो गया है देश की जनता क्या एक व्यक्ति की भी‌ प्राणों की रक्षा के लिए आगे नहीं आते 
जो आजादी दिलाकर अपना नाम ही आजाद चन्द्र शेखर बोस हो गया ।
ऐसे वीर पुरुष के आजादी को याद रखना है
उन्हें संत संत नमन करना है
रचनाकार
अंजली तिवारी मिश्रा जगदलपुर छत्तीसगढ़।


अग्निशिखा मंच
28/7/2021 बुधवार
विषय-चंद्रशेखर आजाद (लेख)

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में अपना महत्वपूर्ण योगदान देने वाले महान क्रांतिकारी चंद्रशेखर आज़ाद का जन्म 27जुलाई1906 में उत्तरप्रदेश के भाभरा गांव में हुआ।इनके पिता का नाम पंडित सीताराम तिवारी व माता का नाम जगरानी था।उनका बाल्यकाल आदिवासियों के मध्य भाभरा गांव में बिता आदिवासियों की संगत में उन्होंने धनुष-बाण चलाना सिख लिया।उच्च शिक्षा के लिए उन्हें वाराणसी के सँस्कृत पाठशाला में भेजा गया।बचपन से ही उनके अंदर देशभक्ति की भावना कूट-कूट कर भरी थी।महज़ चौदह वर्ष की आयु से ही चंद्रशेखर स्वतंत्रता संग्राम में कूद पड़े।
वे अंग्रेज अफसरों के दिल को दहलाने वाले क्रांतिकारी थे। काकोरी ट्रेन डकैती,विधान सभा में बम फटने की घटना व लाला लाजपत रॉय की हत्या का बदला लेने के लिए वो लाहौर में अंग्रेज महानायक पुलिस अधीक्षक जॉन पॉइंट्स सांडर्स की हत्या जैसी घटनाओं में शामिल हो गए।वह क्रांतिकारी स्वतंत्र भारत का दर्पण था। महात्मा गांधी द्वारा चलाये गए "असहयोग आंदोलन" में वह शामिल हो गये ।बहुत ही कम आयु में वे क्रांतिकारी गतिविधियों में शामिल हो गए। समाजवाद में विश्वास करते थे।उन्होंने 'हिंदुस्तान सोशलिस्ट रिपब्लिक एसोशिएसन'पार्टी का गठन किया।
'चौरा-चौरी' की घटना के कारण महात्मा गांधी द्वारा चलाया गया 'असहयोग आन्दोन' के निलंबन के कारण वह गरम दल में बदल गया।
पहली सजा के रूप में पन्द्रह कोड़ो की सजा सुनाई गयी।उस समय उनकी उम्र सिर्फ़ चौदह वर्ष की थी।इस घटना के बाद उन्होंने 'आज़ाद' की उपाधि धारण कर ली।वे अंग्रेज सरकार के लिए आतंक का पर्याय बन गए।
27 जनवरी 1931 को अल्फ्रेड पार्क इलाहबाद में ब्रिटिश पुलिस ने उन्हें घेर लिया था।उन्होनें बहादुरी से उनका मुकाबला किया।दूसरा कोई रास्ता न मिलने के कारण उन्होंने अपने आप को गोली मार दी।
चन्द्र शेखर आज़ाद की कही कुछ स्मरणीय बाते-

1. दुश्मन की गोलियों का हम सामना करेंगे,आज़ाद ही रहे हैं,आज़ाद ही रहेंगे।

2. मेरा नाम आज़ाद है मेरे पिता का नाम स्वतंत्रता है और मेरा घर जेल है।

3. अगर आप के लहू में रोष नहीं है,तो वो पानी है जो आपकी रगों में बह रहा है।ऐसी जवानी का क्या मतलब अगर वो मातृ भूमि के काम न आये।

4. मैं ऐसे डेम को मानता हूं जो स्वतंत्रता,समानता और भाईचारा सिखाता है।

5.दूसरों को खुद से आगे बढ़ते हुए मत देखो,प्रतिदिन अपने खुद के किर्तिमान तोड़ो,क्योंकि सफ़लता आपकी अपने आप में एक लड़ाई है।

6.चिंगारी आज़ादी की सुलगती मेरे जिस्म में हैं,इंकलाब की ज्वालाएँ लिपटी मेरे बदन में हैं। मौत जहाँ ज़न्नत हो यह बात मेरे वतन में हैं,क़ुर्बानी का जज़्बा जिंदा मेरे क़फ़न में है।
 ऐसे क्रांतिकारी देश भक्त को मेरा शत-शत नमन🙏🏻
                  🇮🇳 जय-हिंद🇮🇳
         
                        तारा "प्रीत"
                     जोधपुर (राज०)


चंद्रशेखर आजाद - लेख 

भारतीय स्वतंत्रता संग्राम के इतिहास में चंद्रशेखर आजाद का नाम स्वर्ण अक्षरों में अंकित है। उनका मूल नाम चंद्रशेखर तिवारी था।वे स्वतंत्रता संग्राम के अग्रणी क्रांतिकारियों में से एक थे और उनके नाम से बड़े बड़े अंग्रेज पुलिस अधिकारी तक कांपते थे।
 बाल्यावस्था में ही उन्होंने पुलिस की बर्बरता का विरोध प्रकट करते हुए एक अंग्रेज अफसर के सिर पर पत्थर दे मारा था। अपने क्रांतिकारी जीवन में आजाद ने कदम- कदम पर अंग्रेजों को कड़ी टक्कर दी थी।उन्होंने सुखी जीवन का त्याग करके कंटीला रास्ता चुना और अपना जीवन देश पर बलिदान कर दिया।
 भले ही वे अपने जीवन में आजादी का सूर्योदय ना देख पाए, लेकिन गुलामी की काली घटा को अपने क्रांति तीरों से इतना छलनी कर दिया कि आखिरकार उस काली घटा को भारत की भूमि से दुम दबाकर भागना पड़ा।चंद्र शेखर आजा़द वास्तव में "आजा़द"थे।

 डॉक्टर अंजुल कंसल "कनुप्रिया"
28-7-21


अग्निशिखा मंच को नमन🙏

आज विषय लेख *चंद्रशेखर आजाद* 

 *शहीदों की चिताओं पर लगेंगे हर बरस मेले वतन पर मरने वालों का यही बाकी निशा होगा*

   भारतीय स्वतंत्रता संग्राम में उनका नाम स्वर्ण अक्षरों में लिखा जाएगा ऐसे महान सपूत का जन्म 27 जुलाई 1906 में उत्तर प्रदेश में भाबरा गांव में हुआ उनके पिता पंडित थे सीताराम तिवारी जी और माता का नाम जगरानी था उनका बाल्य काल भाभरा गांव में बिता। उनकी पढ़ाई बनारस संस्कृत पाठशाला में भेजा गया बच्चन फैंसी विनायक दामोदर सावरकर मदन लाल धींगरा इनकी कहानी सुनते थे अंग्रेजों के अत्याचार 1919 में जलियांवाला हत्याकांड से उनके मन में देशभक्ति की ज्वाला प्रबल हुई। स्वतंत्रता आंदोलन में भगत सिंह सुखदेव राजगुरु के साथ कूद पड़े काकोरी लूटपाट में उनका बड़ा हाथ था। इतना ही नहीं असेंबली में बम फेंकने वालों में उन्होंने बहुत सहयोग किया ऐसे महान स्वतंत्र संग्राम सेनानी जब अंग्रेजों ने पकड़ा तब उनका नाम पूछा गया उन्होंने कहा चंद्रशेखर आजाद आजाद उसका नाम नहीं था। उनका असली नाम पंडित तिवारी। चंद्रशेखर आजाद पूजा पाठ नहीं करते जब लाला लाजपत राय की अंग्रेजों ने लाठी मारकर लहूलुहान किया और उसमें मौत होगी तो उनकी स्वतंत्रा की ज्वाला तीव्र गति से प्रकट हुई। उनका जीवन जंगलों में आदिवासियों के साथ बिता इसी वजह से धनुष्यबाण चलाना पिस्तौल चलाना सीखा दिखने में बड़े सुंदर थे। स्वतंत्रता कारण उम्र के 14 साल में स्वतंत्रता आंदोलन में कूद पड़े। अंग्रेज महानायक सांडर्स की हत्या जैसी हत्याओं में उनका नाम आ गया है। गांधी द्वारा चलाया गया असहयोग आंदोलन में वह शामिल हो गए चौरा चौरी की घटना के कारण महात्मा गांधी द्वारा चलाया गया असहयोग आंदोलन निलंबित गरम दल में बदल गया। सजा के रूप में क्योंकि अंग्रेजों ने सुनाई थी 15 कोडो की सजा उस समय उनकी उम्र केवल 15 वर्ष की थी इस घटना से उन्होंने अपने नाम के आगे आजाद उपाधि धारण कर ली थी और अंग्रेज सरकार के लिए उनको ढूंढना बड़े मुश्किल हो गया था।
      घूमते घूमते वह इलाहाबाद में अल्फ्रेड रसल पार्क में गए उस समय किसी जयचंद की जैसे अपनी आदमी ने खबर कर दी आजाद यहां पर छुपी हुई है और उनको अंग्रेजी में घेर लिया क्या कर ली है उनको अंग्रेजों के हाथों से कुत्ते के समान नहीं मरना था इसी वजह से जो आखरी गोली बची थी अपने माथे में डालकर शहीद हुए वह दिन था अपनी 27 फरवरी 1931 को इस महान सपूत को शत शत नमन करता हूं।
     अब आल्फ्रेड पार्क चंद्रशेखर आज़ाद के नाम जे जाना जाता है वहां जाने का सौभाग्य मुझे प्राप्त हुआ।  
      जय हिन्द - जय भारत

सुरेंद्र हरडे
नागपुर
दिनांक :- 28/07/2021



नमन मंच 
चंद्रशेखर आजाद 

चंद्रशेखर आजाद एक निडर और महान स्वत्रंता सेनानी थे उनका जन्म जुलाई 190 १९०६ को मध्यप्रदेश के भाभरा गांव में हुआ था |उन्होंने अपनी पढाई वाराणसी में पूरी की | वे एक क्रांतिकारी नेता थे ,15 साल की उम्र में असहयोग आंदोलन में वे गरिफ्तार हुए |1925 में काकोरी ट्रेन की डैकती में शामिल थे | कोड़े खाते भी उनकी जुबान पर बन्दे मातरम ही निकलता था किसी भी माध्यम से वे स्वतंत्र भारत चाहते थे | 
वे समाजवाद में बिश्वास रखते थे |उ २७ फ़रवरी 1931 में इलाहबाद के अल्फ्रेड पार्क में खुद को गोली मरकर उन्होंने मातृभूमि के लिए प्राणों की आहुति दी |

स्मिता धिरासरिया ,बरपेटा रोड

$$ लेख $$
   $$ चन्द्र शेखर आजाद $$

आजादी के दीवानों के बारे मे कुछ लिखुं उतना मेरी लेखनी मे दम नही । हमारे देश को अंग्रेजो की 200 साल की गुलामी से मुक्त कराने मे करोड़ों लोगो ने तन,मन, धन सब कुछ लगा दिया ।जिसका ही परिणाम है कि आज हम आजादी की सांस ले पा रहे है । अब हमारी भी जिम्मेदारी है कि हम उनके बलिदान को व्यर्थ न जाने दे ।क्योकि कई मामलो मे हम पाश्चात्य संस्कृति का अनुसरण कर हमारे देश को गुलाम बनाने मे लगे है ।
अब आती हूँ आज के विषय पर ।
चन्द्र शेखर आजाद जिन्होंने पहले गांधी जी के साथ अहिंसात्मक आन्दोलन मे साथ दिया जब उन्हें महसूस हुआ कि देश को आजाद कराने के लिए खून का खोलना जरूरी है तब गरम दल का साथ देकर अंग्रेजो से दो दो हाथ किया । पेड़ के पीछे छुपकर लाहौर मे पुलिस अधीक्षक और उनके अंगरक्षक को मार गिराया ।तथा जो वादा उन्होंने देश से किया कि कुछ भी हो जाए पर वो अंग्रेजो के हाथ नही आएंगे तब खुद को गोली मारकर अपनी देह से आजाद हो गए। 
मध्य प्रदेश के भांवरा का लाल माँ जगरानी और पिता पंडित सीताराम तिवारी जी की आंखो के तारे चन्द्र शेखर आजाद 25 वर्ष की अल्पायु मे देश को आजाद कराने की बीड़ा उठाकर नवयुवकों मे देश भक्ति का जज्बा जगाकर अन्तिम समय तक आजाद ही रहे ।उन्हे शत शत नमन 🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏🙏
चन्दा डांगी रेकी ग्रैंडमास्टर 
रामटेकरी मंदसौर मध्यप्रदेश


🙏🌹अग्नि शिखा मंच 🌹🙏
विषय: ** चन्द्र शेखर आजाद **
विधा:* लेख *
दिनांक:28-7-2021
**********************
आज हम सभी आजाद देश में साँस ले पा रहे,,,,ये सब इन वीरो की कुर्बानी की
कहानी है। देश को अंग्रेजों की दासता से से मुक्त कराने में कितने वीरों ने अपने प्राण गँवाए ।
   चन्द्र शेखर आजाद भी इन वीरो मे से एक हैं,,,इनके साहस और वीरता की कहानी बड़ी ही अद्भुत है।माता जगरानी
देवी और पिता सीता राम तिवारी के घर इस वीर बालक ने जन्म लिया ,,,,छोटी उम्र 
से ही देश भक्ति का जज्बा इनके अंदर भरा था ,,,अपने नाम के आगे इन्होंने जानबूझ कर आजाद लगा रखा था ।
महात्मा गाँधी के असहयोग आन्दोलन - मे शामिल हुए लेकिन इनका मार्ग अहिंसा का न था।ये सुभाष चन्द्र बोस की धारा गरम दल से प्रभावित हुए । 
      अंग्रेजों के छक्के छुड़ाने में इनका जोड़ न था। अंग्रेजों द्वारा पकड़े जाने से पूर्व अपने को गोली मार ली, और आजाद नाम को सार्थक किया ।
ऐसे वीर- जवानो को हमारा शत- शत नमन !!!!!!
            ******************
रचनाकार-डॉ पुष्पा गुप्ता मुजफ्फरपुर बिहार~


नमन मंच
विषय;-चंद्रशेखर आजाद
(क्षमा कीजियेगा आज गद्य लेखन था किंतु मैं नहीं दिन में लिख पायी अतः मै अभी उनकी आदरांजलि स्वरूप चन्द पंक्तियां निवेदित कर रही हूं।।क्षमा याचना के संग।।🙏
जन्म हुआ जिनका था 
कुलीन विप्र कुल में 
पिता थे सीता राम।
माता जगरानी थीं।
बचपन सेमिली सीख
देश पर कुर्बानी की।
चल पड़े थे बांध कफ़न
आजाद हो भारत मेरा
दूर हों फ़िरंगी ये 
खुशहाल हो देश मेरा।
नाम था आजाद जिनका
जज्बा कूट कूट भरा
दिल मे देशभक्ति का 
आजाद थे आजाद हैं 
आजाद ही रहेंगे सदा
थे निडर नहीं डरे 
दमन नीति से सदा
हंसते हंसते खाई सजा 
बेंत शतक की उनने 
फिर भी दिल से भक्ति 
जज्बा न कम हुआ।।
मशाल आजादी की।ले
घूमते थे देश भर 
जाने कैसे उन फ़िरंगी को।
लग गयी खबर 
घेर लिया अल्फ़्रेड पार्क को
चहुँ ओर से।
आजाद ने जब जान लिया
मै जिया आजाद हूँ 
मरूंगा आजाद ही 
देश हो सलामत 
जान की फिक्र नहीं 
जय हिंद नारे के संग 
खुद को गोली मार ली।।
सारे राज सीने में दफन कर 
वो चल दिये।।
उनकी जांबाजी से 
मात अंग्रेजों को मिली।
छोड़ के ये देश 
अंग्रेज फिर चले गए।।
उनकी वीरता का  
ऋणी सारा हिंदुस्तान है।
उस पार्क का नाम 
'"आजाद ही विख्यात है। 
निहारिका झा।।🙏🏼🙏🏼


*चंद्रशेखर आजा़द*

भारतीय स्वातंत्र्य सेना के सेनानी का पूरा चंद्रशेखर तीवारी। उनका व्यक्तित्व सदा आजादी के मंत्र जाप करता था। अपने उपनाम को भी *आजा़द* रखा था। तन -मन में भारत माता को बंध मुक्त करना चाहते थे। चंद्रशेखर आजा़द। रामप्रसाद बिस्मिला और वीर युवावों को पलायन करने में मदद किए थे। पर सफल नहीं हो पाय ।काकोरी काण्ड में बिस्मिला बंधी बन जाता है। आंदोलन पूरे देश भर फैल गया था। गाँधीजी के असहयोग आंदोलन पीछे लेने हेतु आजा़द जी नाराज़ होकर *हिंदुस्थान सोशियल रिपब्लिक एसोशियन* एक नया पार्टी की स्थापना कर भारत को आजाद करने लगातर लडा़ई जारी रखे। अंग्रेजों ने चंद्रशेखर जी को ढूंढने 700 पूलीस को तैनात किया था। आजाद जी किसी के हाथ में नहीं लगे। आजाद रहे अंत तक ।स्वाभिमान के शेर सदा राजा ही रहे। जय हिंद ,जय भारत।

डाॅ.सरोजा मेटी लोडाय



WhatsApp